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Only development can rid Bihar of all it's problems: PM Modi #ParivartanRally
How can a Prime Minister who has the mandate of people of this state be a 'Bahri': PM Modi #ParivartanRally
I promise to eliminate corruption and nepotism if NDA wins in Bihar: PM Modi
NDA's 6 sutras for Bihar -for people education, employment, medical facilities & for state electrification, safe water, proper roads
It is shameful that a minister of ‘Mahaswarthbandhan’ has been caught taking bribes in front of TV camera: PM Modi
Nitish ji used to say that he will put end to corruption, seize property of corrupt and open schools. What happened to his promise?, asks PM Modi
'Mahaswarthbandhan' is misleading the people of Bihar. People of Bihar won't spare them: PM Modi
By asking for old days, does Nitish Kumar want days of kidnappings, crimes against dalits & women back? - PM Modi
Nitish Kumar wants old days back just for his seat but Bihar doesn’t need those old days of ‘Jungle Raj’: PM Modi
'Mahaswarthbandhan' has not been able to find a single instance of corruption against us: PM Modi

मंच पर विराजमान सभी वरिष्ठ महानुभाव, हम पार्टी के उम्मीदवार श्रीमान महाचंद्र प्रसाद सिंह जी, बरौली से भाजपा के उम्मीदवार श्रीमान राम प्रवेश राय, बैकुंठपुर से भाजपा के उम्मीदवार श्रीमान मिथिलेश तिवारी जी, भाजपा के उम्मीदवार श्रीमान इन्द्रदेव मांझी जी, भाजपा के उम्मीदवार श्रीमान काली प्रसाद पांडेय जी, और विशाल संख्या में पधारे हुए मेरे भाईयों और बहनों

मैं गोपालगंज पिछले लोकसभा के चुनाव में भी आया था और आज दुबारा मैं आपके बीच आया हूँ। भाईयों-बहनों, आजकल आप महास्वार्थबंधन के नेताओं की बयानबाजी सुनते हैं, अनाप-शनाप भाषाएं बोली जा रही हैं। डिक्शनरी खाली हो गई है लेकिन रोज नई-नई गालियां बोली जा रही हैं। मैं सोचता था कि आख़िरकार 25 साल से जो लोग यहाँ सरकार चला रहे हैं, 35 साल तक जिस कांग्रेस ने यहाँ सरकार चलाई है, 60 साल तक सरकार चलाई; सरकार में जितने मुलाज़िम हैं, इनको इन्हीं के कालखंड में कभी-न-कभी नौकरी मिली है, एक प्रकार से ऊपर से नीचे तक सारा उन्हीं का खेल है इसके बावजूद वे चुनाव में इस प्रकार का व्यवहार करने को मजबूर क्यों हुए हैं, सारी मर्यादा तोड़कर निम्न स्तर की भाषा पर क्यों उतर आए हैं। इसका कारण यह नहीं है कि मोदी ने कोई गलती की है, कारण है कि आपके इस प्रेम को वे पचा नहीं पा रहे हैं। जैसे-जैसे आपका प्यार बढ़ता जाता है, उनकी गलियों की संख्या बढ़ती जाती है। एनडीए, भाजपा का चुनाव प्रचार कितना सफ़ल चल रहा है, रैलियां कितनी बड़ी हो रही हैं, ये रैलियों से नहीं पता चलता है बल्कि रैली समाप्त होने के बाद जिस तरह वे गाली-गलौज पर उतर आते हैं, उससे पता चलता है कि रैली कितनी जबर्दस्त हुई है।

भाईयों-बहनों, आप बताईये कि गरीब से गरीब व्यक्ति को भी कोई अगर यह कहे कि तुम बिकाऊ हो तो कोई सहन करेगा क्या? फुटपाथ पर भीख मांगने वाले व्यक्ति को भी अगर कोई बिकाऊ कहे हो तो वो इसे मानेगा क्या? नीतीश जी, चुनाव में हार-जीत तो होती रहती है, ऐसा भी क्या गुस्सा। अब मोदी को गालियां देते-देते थक गए तो बिहारियों को गालियां देना शुरू कर दिया; मोदी पर आरोप लगाते-लगाते थक गए तो बिहारियों पर आरोप लगाना शुरू कर दिया। नीतीश बाबू, बिहारियों का अपमान आपको महंगा पड़ जाएगा, लेने के देने पड़ जाएंगे।

उन्होंने आरोप लगाया है कि मोदी की रैली में जो लोग आते हैं, वो पैसों से लाये जाते हैं। आप बताईये कि ये झूठ है कि नहीं; ये आपका और समस्त बिहारियों का अपमान है कि नहीं? बिहारियों को बिकाऊ कहने का पाप उन्हें महंगा पड़ेगा। नीतीश बाबू, मोदी पर जितना जुल्म करना है कर लो लेकिन बिहारियों के स्वाभिमान को चोट मत पहुँचाओ, ये आपको शोभा नहीं देता। कोई कल्पना नहीं कर सकता कि बिहार का क्या मिज़ाज बदला है। बिहार गुस्से में है क्योंकि बिहार आपसे 25 साल का हिसाब मांग रहा है और आप हिसाब देने को तैयार नहीं हैं।

ये गोपालगंज लालू जी का गृह जिला है न, यहाँ के लोगों को क्या मिला। इन्होंने जंगलराज के समय इसे ‘मिनी-चम्बल’ बना दिया था जहाँ रेलवे स्टेशन पर खुले आम गोलियां चलती थीं। यहाँ अपहरण उद्योग बना था कि नहीं? यहाँ एक ही कारोबार हुआ था – अपहरण का कारोबार। गोपालगंज नौजवान जो सम्मान से जीना चाहता था, पसीना बहा करके पैसा कमाना चाहता था, उसे गोपालगंज छोड़कर जाने के लिए मजबूर होना पड़ा। पूरे बिहार में सबसे ज्यादा नौजवानों का पलायन कहीं हुआ है तो या तो सीवान से हुआ है या गोपालगंज से हुआ है।

मैं पिछले दिनों आबुधाबी, दुबई गया था, वहां जो लेबर कॉलोनी बनी है, वहां के शासकों से मैंने प्रार्थना की कि लेबर कॉलोनी में मेरे भारत के लोग काम कर रहे हैं, मैं उनका हाल जानना चाहता हूँ, अपने गरीब भाईयों से मिलना चाहता हूँ। मैं वहां के शासकों का आभारी हूँ कि उन्होंने मुझे जाने दिया। वहां मैं सभी मजदूरों से मिला था। मुझे वहां सबसे ज्यादा लोग बिहार के मिले। ये मजदूरी करने के लिए क्यों मजबूर हुए। हमारी सीधी बात है कि हमें बिहार को ऐसा विकास देना है ताकि बिहार के लोगों को यहीं रोजी-रोटी मिले, यही हमारा मकसद है। इनलोगों को अपने परिवार के बाहर किसी की चिंता नहीं है। उनको अपने किसी नेता पर भरोसा नहीं है। जेल गये तो पत्नी को दे के गए अब जब ज़िन्दगी जेल में गुजारनी है तो कहते हैं कि बेटे तैयार हो जाओ और ये सब पकड़ लो ताकि मैं आराम से जेल में गुजारा कर लूँ; ऐसा खेल चल रहा है।

आज इन सारी समस्याओं का अगर हमें समाधान करना है तो एक ही रास्ता है – बिहार का विकास। बिहार का विकास ही बिहार को बर्बादी से बचा सकता है। इसलिए मैं बिहार के मतदाताओं से एक ही बात कहने आया हूँ कि मुझ पर भरोसा कीजिये। लोकसभा में अपने भरोसा किया है, अब विधानसभा में भी मुझ पर भरोसा कीजिये, मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद को मैं ख़त्म करके दिखा दूंगा। दिल्ली दिन-रात भ्रष्टाचार के कारण बदनाम था। रोज लाखों-करोड़ों रुपये के घोटाले सामने आते थे कोयले, 2जी में से रुपये खाए, चारों तरफ लूट मची थी आप बताएं कि हम पर एक भी आरोप लगा है क्या? ये इतनी गालियां मुझे देते हैं लेकिन अभी तक मुझ पर भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगा है। ये बचा पैसा जनता के ही काम आएगा। ये देश की सेवा है अगर बिहार की भी लूट बच जाए तो ये बिहार के लिए भला होगा।

भाईयों-बहनों, इसलिए मुझे बिहार की सेवा करने का मौका दीजिए; ये लूटपाट मुझे बंद करानी है, ये घर भरने और तिजोरी लूटने का खेल मुझे बंद कराना है। हमारे देश में इनकी हालत तो देखिये नीतीश बाबू के भागीदार और उनके मंत्रिपरिषद के मंत्री अभी टीवी पर कैमरा के सामने रुपये लेते पकड़े गए, ये क्या कम अपराध है लेकिन उनको कोई शर्म नहीं है। नीतीश बाबू ने कहा था कि अगर किसी का भ्रष्टाचार पकड़ा गया तो उसकी मिल्कियत जब्त कर ली जाएगी और उसके घर में स्कूल खोला जाएगा। लालू जी को भ्रष्टाचार में जेल हुई और ये मैंने नहीं किया बल्कि अदालत ने किया। अब नीतीश बाबू बताएं कि उनका घर कब्ज़े में किया क्या, उनके घर में स्कूल खोला? लोगों को क्यों मूर्ख बना रहे हैं? जेडीयू के मंत्री कैमरा के सामने घूस लेते पकड़े गए। ये अभी से ऐसा काम कर रहे हैं तो चुनाव के बाद क्या करेंगे। बिहार बेचने का एडवांस लिया जा रहा है। भाईयों-बहनों, क्या हम बिहार को बेचने देंगे, उनका घर भरने देंगे क्या?

मैं नीतीश बाबू से पूछना चाहता हूँ कि जेडीयू के मंत्री कैमरा के सामने घूस लेते पकड़े गए, उन्होंने उनका घर जब्त किया क्या? अभी आपकी सरकार चल रही है, आपको अपने साथियों को भ्रष्टाचार के लिए सजा करने से कौन रोक रहा है। 25 साल में इन्होंने क्या किया, इसकी सूची देखकर मैं हैरान हो गया अपने आपको ईमानदारी से काम करने वाले बताने वाले महाशय ने क्या खेल किया है, मैं आपको बताना चाहता हूँ याद कीजिये, अलकतरा घोटाला, दवाई खरीद घोटाला, ट्रांसफर्मर खरीद घोटाला, एस्टीमेट घोटाला, इंजीनियरिंग कॉलेज नॉमिनेशन घोटाला, फ़र्टिलाइज़र सब्सिडी घोटाला, राशन-किरासन घोटाला, शराब घोटाला, व्याख्याता नियुक्ति घोटाला, सिपाही नियुक्ति घोटाला, नलकूप घोटाला, इंदिरा आवास घोटाला, मनरेगा घोटाला, शौचालय घोटाला, कोसी चैनल निर्माण घोटाला, मिड-डे मिल घोटाला, आंगनवाड़ी घोटाला, मेघा घोटाला, कुलपति नियुक्ति घोटाला, पथ निर्माण घोटाला, पुल निर्माण घोटाला, शिक्षा अभियान घोटाला, टैक्स बुक छपाई घोटाला, कंबल खरीद घोटाला, परिवहन घोटाला, वायरलेस घोटाला, दियारा जमीन घोटाला, बुद्ध स्मृति पार्क निर्माण घोटाला, चावल घोटाला, रोल एंड डबल पे घोटाला, रेलवे में घोटाला और जिस घोटाले में आपके महाशय को सजा हुई है, उस चारे की तो बात करता ही नहीं हूँ

भाईयों-बहनों, ऐसे घोटाले करने वालों को सजा मिलनी चाहिए कि नहीं? इस प्रकार से बिहार को लूटने वालों को बिहार से बर्खास्त करना चाहिए कि नहीं? ये चुनाव सिर्फ़ सरकार बनाने के लिए नहीं बल्कि बिहार को लूटने वालों को बिहार से बर्खास्त करने का चुनाव है। नीतीश जी हिम्मत से कह रहे हैं कि हमें पुराने दिन लौटा दो। आए दिन अपहरण होते थे, दलितों पर जुल्म होता था, हत्याएं होती थीं, विनाश की परिस्थिति बनी हुई थी, वो पुराने दिन वापस चाहिए क्या? नीतीश जी, आपको कुर्सी के लिए पुराने दिन मंजूर है लेकिन बिहार को ये मंजूर नहीं है। जीत-हार तो होती है लेकिन बिहार के लोगों के साथ खिलवाड़ करना बंद कीजिये।

बिहार में सिवाय अपराधीकरण क्या हुआ? ये अपराध की ज़िन्दगी बिहार के जीवन को नहीं बदल सकती और रोजी-रोटी नहीं दे सकती। बिहार के परिवारों के लिए मेरा तीन सूत्र है - पढ़ाई, कमाई और बुजुर्गों को दवाई। बिहार के गरीब बच्चों को सस्ती एवं अच्छी शिक्षा मिलनी जरुरी है क्योंकि तब गरीब माँ-बाप को अपनी जमीन गिरवी रखने और अपनी बहू-बेटियों की अमानत गिरवी रखने की नौबत नहीं आएगी। दूसरी बात है, कमाई; बिहार का नौजवान अपनी कमाई कर अपने पैरों पर खड़ा होना चाहता है। 20-25 साल का नौजवान अपने माँ-बाप से 5 रूपया मांगे, उसे दुःख होता होगा कि नहीं। स्वाभिमान से जीने के लिए बिहार का नौजवान को अवसर मिलना चाहिए। नौजवान अपनी कमाई के लिए अवसर तलाश रहा है लेकिन सरकार उसे वो अवसर नहीं दे रही है। उद्योग नहीं लगेंगे तो रोजगार कैसे मिलेगा और उद्योग लगाने के लिए बिजली की आवश्यकता होती है। पिछली बार इन्होंने कहा था कि मेरी सरकार बनाईए, मैं घर-घर बिजली पहुंचाऊंगा और अगर मैं बिजली न पहुंचाऊं तो मैं वोट मांगने नहीं आऊंगा। बिजली तो नहीं आई लेकिन वो वोट मांगने जरुर आये। उन्होंने आपसे धोखा किया तो अब आप उनसे नाता तोड़ोगे?

बिहार को 24 घंटे बिजली चाहिए ताकि यहाँ उद्योग लगे और यहाँ के नौजवानों को रोजगार मिले इसलिए मैं आपसे पढ़ाई, कमाई और बुजुर्गों को दवाई के लिए वोट मांग रहा हूँ। बुजुर्गों के लिए सस्ती दवाई, डॉक्टर और दवाखाना होना चाहिए। बिहार राज्य की भलाई के लिए तीन सूत्र है, बिजली, पानी एवं सड़क। किसान को पानी मिले, वो मिट्टी में से सोना पैदा कर देगा; बिहार को बिजली मिले, कारखाने लग जाएंगे; और बिहार को सड़कें मिलें, बिहार प्रगति की दिशा में आगे बढ़ जाएगा। मेरे भाईयों-बहनों, बिहार के विकास के लिए एक ऐसी सरकार चुनिये जिसका एकमात्र एजेंडा है- विकास।

पिछले दिनों विकास के नाम पर उनके पास कहने के लिए कुछ था नहीं, 25 साल के शासन में कोई विकास नहीं था तो जब हम सिर्फ़ विकास पर जोर देकर बातें कर रहे थे तो वो आरक्षण की माला जप रहे थे और जब मैंने थोड़े दिन पहले उनके पापों का चिट्ठा खोल दिया तो तिलमिला गए हैं। अब तो मैं खुलेआम कहता हूँ कि 24 अगस्त 2005 को पार्लियामेंट के अन्दर श्रीमान नीतीश बाबू ने अपने इरादे साफ़ कर दिए थे। मैंने आरोप लगाया था कि ये दलितों, आदिवासियों, अति पिछड़ों का 5% आरक्षण चोरी करना चाहते हैं। भारत के संविधान-निर्माता ने मना किया था कि संप्रदाय के आधार पर आरक्षण मत कीजिये लेकिन ये लोग पिछड़ों का आरक्षण चोरी कर संप्रदाय के आधार पर आरक्षण बाँटना चाहते हैं। मैंने कहा तो तिलमिला गए लेकिन 24 अगस्त 2005 को पार्लियामेंट में उन्होंने जो भाषण दिया था, उसका दस्तावेज़ मेरे पास मौजूद है। उनका यही कहना था कि दलितों, आदिवासियों, अति पिछड़ों, पिछड़ों का आरक्षण निकाल कर संप्रदाय के आधार पर आरक्षण दिया जाए। उनको मैं चुनौती देता हूँ कि उनमें हिम्मत है तो इसका जवाब दें। इतना झूठ बोलते हैं और हल्की-फुल्की बात कर के निकल लेते हैं; ये खेल लंबा नहीं चलने वाला है।

भाईयों-बहनों, मैंने गरीबी देखी है इन दिनों ये कह रहे हैं कि मोदी जी ने अपना प्रोफाइल बदल लिया। पहले मोदी विकास की बात करते थे और अब कह रहे हैं कि मैं तो चाय बेचता हूँ, मैं गरीब माँ का बेटा हूँ, मैं पिछड़ा हूँ। मैं नीतीश बाबू से पूछना चाहता हूँ कि क्या इस देश के पिछड़े को विकास की बात करने का हक़ भी नहीं है क्या? अगर मैं पिछड़ा हूँ तो क्या मैं विकास पर बोल नहीं सकता, उस पर चर्चा नहीं कर सकता? क्या विकास की बात करने का ठेका आप लोगों के ही पास है क्या? ये उनका अहंकार ही उनसे ये सब बोलवाता है और वो इतने निराश हैं कि अब उन्हें आपके पास आने की हिम्मत नहीं है और अब वे तांत्रिक के पास जाते हैं। आपको गाली देते हैं कि आप यहाँ पैसों से आते हैं और ख़ुद तांत्रिक के चरणों में जाकर रूपये का ढेर करते हैं। अब वे 100 तांत्रिक ले आएं लेकिन अब वे बचने वाले नहीं हैं।

हमारा भरोसा जनता-जनार्दन में हैं, आप पर है। हमें बदलाव चाहिए विकास के लिए; हमें सरकार चाहिए विकास के लिए। इसलिए मैं आपसे आग्रह करता हूँ कि ज्यादा-से-ज्यादा और भारी संख्या में मतदान कीजिये। अपना आशीर्वाद हमें देते रहिए और दो-तिहाई बहुमत के साथ भाजपा, एनडीए की सरकार बनाईए। सब लोग पूरी ताक़त के साथ बोलिये -    

भारत माता की जय! भारत माता की जय! भारत माता की जय!                     

बहुत-बहुत धन्यवाद!

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Text of PM's speech at inauguration of Defence Offices Complexes in New Delhi
September 16, 2021
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India has taken another step in developing the nation’s capital according to needs and aspirations of a new India in the 75th year of India’s independence: PM
A big step towards the construction of a modern defense enclave in the capital: PM
The capital of any country is a symbol of the thinking, determination, strength and culture of that country: PM
India is the mother of democracy, the capital of India should be such, in which there are citizens, people at the center: PM
Modern infrastructure has a big role in the government’s focus on ease of living and ease of doing business:PM
When policies and intentions are clear, will power is strong and efforts honest, everything is possible: PM
Before-time Completion of the projects is a manifestation of changed approach and thinking: PM

कार्यक्रम में उपस्थित केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे वरिष्ठ सहयोगी श्रीमान राजनाथ सिंह जी, हरदीप सिंह पुरी जी, अजय भट्ट जी, कौशल किशोर जी, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत जी, तीनों सेनाओं के प्रमुख, वरिष्ठ अधिकारीगण, अन्य महानुभाव, देवियों और सज्जनों।

आज़ादी के 75वें वर्ष में आज हम देश की राजधानी को नए भारत की आवश्यकताओं और आकांक्षाओं के अनुसार विकसित करने की तरफ एक महत्‍वपूर्ण कदम बढ़ा रहे हैं। ये नया डिफेंस ऑफिस कॉम्लेक्स हमारी सेनाओं के कामकाज को अधिक सुविधाजनक, अधिक प्रभावी बनाने के प्रयासों को और सशक्त करने वाला है। इन नई सुविधाओं के लिए डिफेंस से जुड़े सभी साथियों को मैं बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

आप सभी परिचित हैं कि अभी तक डिफेंस से जुड़ा हमारा कामकाज दूसरे विश्व युद्ध के दौरान बनाए गए हटमेंट्स से ही चल रहा था। ऐसे हटमेंट्स जिनको उस समय घोड़ों के अस्तबल और बैरकों से संबंधित ज़रूरतों के अनुसार बनाया गया था। आज़ादी के बाद के दशकों में इनको रक्षा मंत्रालय, थलसेना, नौसेना और वायुसेना के दफ्तरों के रूप में विकसित करने के लिए समय-समय पर हल्‍की-फुल्‍की मरम्म्त हो जाती थी, कोई ऊपर के अधिकारी आने वाले हैं तो थोड़ा और पेंटिंग हो जाता था और ऐसे ही चलता रहा। इसकी बारीकियों को जब मैंने देखा तो मेरे मन में पहला विचार ये आया कि ऐसी बुरी अवस्‍था में हमारे इतने प्रमुख सेना के लोग देश की रक्षा के लिए काम करते हैं। इसकी इस हालत के संबंध में हमारे दिल्‍ली की मीडिया ने कभी लिखा क्‍यों नहीं। ये मेरे मन में होता था, वरना ये ऐसी जगह थी कि जरूर कोई न कोई आलोचना करता कि भारत सरकार क्‍या कर रही है। लेकिन पता नहीं किसी ने इस पर ध्‍यान नहीं दिया। इन हटमेन्ट्स में आने वाली परेशानियों को भी आप लोग भली-भांति जानते हैं।

आज जब 21वीं सदी के भारत की सैन्य ताकत को हम हर लिहाज़ से आधुनिक बनाने में जुटे हैं, एक से एक आधुनिक हथियारों से लैस करने में जुटे हैं, बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाया जा रहा है, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के माध्यम से सेनाओं का को-ऑर्डिनेशन बेहतर हो रहा है, सेना की ज़रूरत की प्रोक्योरमेंट जो सालों-साल चलती थी वो तेज़ हुई है, तब देश की रक्षा-सुरक्षा से जुड़ा कामकाज दशकों पुराने हटमेंट्स से हो, ये कैसे संभव हो सकता है और इसलिए इन स्थितियों को बदलना भी बहुत ज़रूरी था और मैं ये भी बताना चाहूंगा कि जो लोग सेंट्रल विस्‍टा के प्रोजेक्‍ट के पीछे डंडा लेकर पड़े थे वे बड़ी चतुराई से बड़ी चालाकी से सेंट्रल विस्‍टा प्रोजेक्‍ट का यह भी एक हिस्‍सा है। सात हजार से अधिक सेना के अफसर जहां काम करते हैं वो व्‍यवस्‍था विकसित हो रही है, इस पर बिल्‍कुल चुप रहते थे क्‍योंकि उनको मालूम था जो भ्रम फैलाने का इरादा, झूठ फैलाने का इरादा है, जैसे ही यह बात सामने आएगा तो फिर उनकी सारी गपबाजी चल नहीं पाएगी लेकिन आज देश देख रहा है कि सेंट्रल विस्‍टा के पीछे हम कर क्‍या रहे हैं। अब केजी मार्ग और अफ्रीका एवेन्यु में बने ये आधुनिक ऑफिस, राष्ट्र की सुरक्षा से जुड़े हर काम को प्रभावी रूप से चलाने में बहुत मदद करेंगे। राजधानी में आधुनिक डिफेंस एऩ्क्लेव के निर्माण की तरफ ये बड़ा और महत्‍वपूर्ण स्टेप है। दोनों परिसरों में हमारे जवानों और कर्मचारियों के लिए हर ज़रूरी सुविधा दी गई है। और मैं आज देशवासियों के सामने मेरे मन में जो मंथन चल रहा था उसका भी जिक्र करना चाहता हूं।

2014 में आपने मुझे सेवा करने का सौभाग्‍य दिया और तब भी मुझे लगता था कि ये सरकारी दफ्तरों के हाल ठीक नहीं है। संसद भवन के हाल ठीक नहीं है और 2014 में ही आकर मैं पहला ये काम कर सकता था लेकिन मैंने वो रास्‍ता नहीं चुना। मैंने सबसे पहले भारत की आन-बाण-शान, भारत के लिए जीने वाले भारत के लिए जूझने वाले हमारे देश के वीर जवान, जो मातृभूमि के लिए शहीद हो गए, उनका स्‍मारक बनाना सबसे पहले तय किया और आज जो काम आजादी के तुरंत बाद होना चाहिए था वो काम 2014 के बाद प्रारंभ हुआ और उस काम को पूर्ण करने के बाद हमने हमारे दफ्तरों को ठीक करने के लिए सेंट्रल विस्‍टा का काम उठाया। सबसे पहले हमने याद किया मेरे देश के वीर शहीदों को, वीर जवानों को।

साथियों,

ये जो निर्माण कार्य हुआ है कामकाज के साथ-साथ यहां आवासीय परिसर भी बनाए गए हैं। जो जवान 24x7 महत्वपूर्ण सुरक्षा कार्यों में लगे रहते हैं, उनके लिए ज़रूरी आवास, किचन, मेस, इलाज से जुड़ी आधुनिक सुविधाएं इन सबका भी निर्माण किया गया है। देशभर से जो हजारों रिटायर्ड सैनिक अपने पुराने सरकारी कामकाज के लिए यहां आते हैं, उनका भी विशेष ख्‍याल रखना, उनको ज़्यादा परेशानी ना हो इसके लिए उचित कनेक्टिविटी का यहां ध्यान रखा गया है। एक अच्छी बात ये भी है कि जो बिल्डिगें बनी हैं, वो इको-फ्रेंडली हैं और राजधानी के भवनों का जो पुरातन रंग-रूप है, जो उसकी एक पहचान है, बरकरार रखा गया है। भारत के कलाकारों की आकर्षक कलाकृतियों को, आत्मनिर्भर भारत के प्रतीकों को यहां के परिसरों में स्थान दिया गया है। यानि दिल्ली की जीवंतता और यहां के पर्यावरण को सुरक्षित रखते हुए, हमारी सांस्कृतिक विविधता का आधुनिक स्वरूप यहां हर कोई अनुभव करेगा।

साथियों,

दिल्ली को भारत की राजधानी बने 100 वर्ष से अधिक का समय हो गया है। 100 वर्ष से अधिक के इस कालखंड में यहां की आबादी और अन्य परिस्थितियों में बहुत बड़ा अंतर आ चुका है। जब हम राजधानी की बात करते हैं तो वो सिर्फ एक शहर नहीं होता है। किसी भी देश की राजधानी उस देश की सोच, उस देश के संकल्‍प, उस देश का सामर्थ्य और उस देश की संस्कृति का प्रतीक होती है। भारत तो लोकतंत्र की जननी है। इसलिए भारत की राजधानी ऐसी होनी चाहिए, जिसके केंद्र में लोक हो, जनता जनार्दन हो। आज जब हम Ease of living और Ease of doing business पर फोकस कर रहे हैं, तो इसमें आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की भी उतनी ही बड़ी भूमिका है। सेंट्रल विस्टा से जुड़ा जो काम आज हो रहा है, उसके मूल में यही भावना है। इसका विस्तार हमें आज शुरू हुई सेंट्रल विस्टा से जुड़ी वेबसाइट में भी दिखता है।

साथियों,

राजधानी की आकांक्षाओं के अनुरूप दिल्ली में नए निर्माण पर बीते वर्षों में बहुत जोर दिया गया है। देशभर से चुनकर आए जनप्रतिनिधियों के लिए नए आवास हों, आंबेडकर जी की स्मृतियों को संजोने के प्रयास हों, अनेक नए भवन हों, जिन पर लगातार काम किया गया है। हमारी सेना, हमारे शहीदों, हमारे बलिदानियों के सम्मान और सुविधा से जुड़े राष्ट्रीय स्मारक भी इसमें शामिल हैं। इतने दशकों बाद सेना, अर्धसैनिक बलों और पुलिस बल के शहीदों के लिए राष्ट्रीय स्मारक आज दिल्ली का गौरव बढ़ा रहे हैं। और इनकी एक बहुत बड़ी विशेषता ये रही है कि इनमें से अधिकतर तय समय से पहले पूरे किए गए हैं वरना सरकारों की पहचान यही है – होती है, चलती है, कोई बात नहीं, 4-6 महीने देर है तो स्‍वाभाविक है। हमने नया वर्क कल्‍चर सरकार में लाने का ईमानदारी से प्रयास किया ताकि देश की संपत्ति बर्बाद न हो, समय-सीमा में काम हो, निर्धारित खर्च से भी कुछ कम खर्च में क्‍यों न हो और professionalism हो, efficiency हो, इन सारी बातों पर हम बल दे रहे हैं ये सोच और अप्रोच में आई efficiency का एक बहुत बड़ा उदाहरण आज यहां प्रस्तुत है।

डिफेंस ऑफिस कॉम्प्लेक्स का भी जो काम 24 महीने में पूरा होना था, वो सिर्फ 12 महीने के रिकॉर्ड समय में कम्प्लीट किया गया है यानि 50 प्रतिशत समय बचा लिया गया। वो भी उस समय जब कोरोना से बनी परिस्थितियों में लेबर से लेकर तमाम प्रकार की चुनौतियां सामने थीं। कोरोना काल में सैकड़ों श्रमिकों को इस प्रोजेक्ट में रोजगार मिला है। इस निर्माण कार्य से जुड़े सभी श्रमिक साथी, सभी इंजीनियर, सभी कर्मचारी, अधिकारी, ये सब के सब इस समय सीमा में निर्माण के लिए तो अभिनंदन के अधिकारी हैं लेकिन साथ-साथ कोरोना का इतना भयानक जब खौफ था, जीवन और मृत्‍यु के बीच में सवालिया निशान थे, उस समय भी राष्‍ट्र निर्माण के इस पवित्र कार्य में जिन-जिन लोगों ने योगदान किया है, पूरा देश उनको बधाई देता है। पूरा देश उनका अभिनन्‍दन करता है। ये दिखाता है कि जब नीति और नीयत साफ हो, इच्छाशक्ति प्रबल हो, प्रयास ईमानदार हों, तो कुछ भी असंभव नहीं होता है, सब कुछ संभव होता है। मुझे विश्वास है, देश की नई पार्लियामेंट बिल्डिंग का निर्माण भी, जैसे हरदीप जी बड़े विश्‍वास के साथ बता रहे थे, तय समय सीमा के भीतर ही पूरा होगा।

साथियों,

आज कंस्ट्रक्शन में जो तेज़ी दिख रही है, उसमें नई कंस्ट्रक्शन टेक्नॉलॉजी की भी बड़ी भूमिका है। डिफेंस ऑफिस कॉम्प्लेक्स में भी पारंपरिक आरसीसी निर्माण के बजाय लाइट गेज स्टील फ्रेम तकनीक का उपयोग किया गया है। नई तकनीक के चलते ये भवन आग और दूसरी प्राकृतिक आपदाओं से अधिक सुरक्षित हैं। इन नए परिसरों के बनने से दर्जनों एकड़ में फैले पुराने हटमेंट्स के रखरखाव में जो खर्च हर वर्ष करना पड़ता था, उसकी भी बचत होगी। मुझे खुशी है कि आज दिल्ली ही नहीं, बल्कि देश के अन्य शहरों में भी स्मार्ट सुविधाएं विकसित करने, गरीबों को पक्के घर देने के लिए आधुनिक कंस्ट्रक्शन टेक्नॉलॉजी पर फोकस किया जा रहा है। देश के 6 शहरों में चल रहा लाइट हाउस प्रोजेक्ट इस दिशा में एक बहुत बड़ा प्रयोग है। इस सेक्टर में नए स्टार्ट अप्स को प्रोत्साहित किया जा रहा है। जिस स्पीड और जिस स्केल पर हमें अपने अर्बन सेंटर्स को ट्रांसफॉर्म करना है, वो नई टेक्नॉलॉजी के व्यापक उपयोग से ही संभव है।

साथियों,

ये जो डिफेंस ऑफिस कॉम्प्लेक्स बनाए गए हैं, ये वर्क-कल्चर में आए एक और बदलाव और सरकार की प्राथमिकता का प्रतिबिंब हैं। ये प्राथमिकता है, उपलब्ध लैंड का सदुपयोग। और सिर्फ लैंड ही नहीं, हमारा ये विश्‍वास है और हमारा प्रयास है कि हमारे जो भी रिसोर्सेज हैं, हमारी जो भी प्राकृतिक संपदाएं हैं उसका optimum Utilization होना चाहिए। अनाप-शनाप ऐसी संपदा की बर्बादी अब देश के लिए उचित नहीं है और इस सोच के परिणामस्‍वरूप सरकार के अलग-अलग डिपार्टमेंट के पास जो जमीनें है उनके Proper और optimum Utilization पर परफेक्‍ट प्‍लानिंग के साथ आगे बढ़ने पर बल दिया जा रहा है। ये जो नए परिसर बनाए गए हैं वो लगभग 13 एकड़ भूमि में बने हैं। देशवासी आज जब ये सुनेंगे, जो लोग दिन-रात हमारे हर काम की आलोचना करते हैं, उनका चेहरा सामने रखकर इन चीजों को सुनें देशवासी। दिल्‍ली जैसे इतने महत्‍वपूर्ण जगह पर 62 एकड़ भूमि में राजधानी के अंदर 62 एकड़ भूमि में, इतनी विशाल जगह पर ये जो हटमेंस बने हुए थे, उसको वहां से शिफ्ट किया और उत्‍तम प्रकार की आधुनिक व्‍यवस्‍था सिर्फ 13 एकड़ भूमि में निर्माण हो गया। देश की संपत्ति का कितना बड़ा सदुपयोग होरहा है यानि इतनी बड़ी और आधुनिक सुविधाओं के लिए पहले के मुकाबले लगभग 5 गुना कम भूमि का उपयोग हुआ है।

 

साथियों,

आज़ादी के अमृतकाल यानि आने वाले 25 सालों में नए आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का ये मिशन सबके प्रयास से ही संभव है। सरकारी व्यवस्था की Productivity और Efficiency बढ़ाने का जो बीड़ा आज देश ने उठाया है, यहां बन रहे नए भवन उस सपनों को सपोर्ट कर रहे हैं, उस संकल्‍प को साकार करने का विश्‍वास जगा रहे हैं। कॉमन केंद्रीय सचिवालय हो, कनेक्टेड कॉन्फ्रेंस हॉल हों, मेट्रो जैसे पब्लिक ट्रांसपोर्ट से सुलभ कनेक्टिविटी हो, ये सबकुछ राजधानी को People Friendly बनाने में भी बहुत मदद करेंगे। हम सभी अपने लक्ष्यों को तेजी से प्राप्त करें, इसी कामना के साथ मैं फिर एक बार आप सबको बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं!

बहुत-बहुत धन्यवाद !