Only development can rid Bihar of all it's problems: PM Modi in Gopalganj

Published By : Admin | October 30, 2015 | 14:00 IST
Only development can rid Bihar of all it's problems: PM Modi #ParivartanRally
How can a Prime Minister who has the mandate of people of this state be a 'Bahri': PM Modi #ParivartanRally
I promise to eliminate corruption and nepotism if NDA wins in Bihar: PM Modi
NDA's 6 sutras for Bihar -for people education, employment, medical facilities & for state electrification, safe water, proper roads
It is shameful that a minister of ‘Mahaswarthbandhan’ has been caught taking bribes in front of TV camera: PM Modi
Nitish ji used to say that he will put end to corruption, seize property of corrupt and open schools. What happened to his promise?, asks PM Modi
'Mahaswarthbandhan' is misleading the people of Bihar. People of Bihar won't spare them: PM Modi
By asking for old days, does Nitish Kumar want days of kidnappings, crimes against dalits & women back? - PM Modi
Nitish Kumar wants old days back just for his seat but Bihar doesn’t need those old days of ‘Jungle Raj’: PM Modi
'Mahaswarthbandhan' has not been able to find a single instance of corruption against us: PM Modi

मंच पर विराजमान सभी वरिष्ठ महानुभाव, हम पार्टी के उम्मीदवार श्रीमान महाचंद्र प्रसाद सिंह जी, बरौली से भाजपा के उम्मीदवार श्रीमान राम प्रवेश राय, बैकुंठपुर से भाजपा के उम्मीदवार श्रीमान मिथिलेश तिवारी जी, भाजपा के उम्मीदवार श्रीमान इन्द्रदेव मांझी जी, भाजपा के उम्मीदवार श्रीमान काली प्रसाद पांडेय जी, और विशाल संख्या में पधारे हुए मेरे भाईयों और बहनों

मैं गोपालगंज पिछले लोकसभा के चुनाव में भी आया था और आज दुबारा मैं आपके बीच आया हूँ। भाईयों-बहनों, आजकल आप महास्वार्थबंधन के नेताओं की बयानबाजी सुनते हैं, अनाप-शनाप भाषाएं बोली जा रही हैं। डिक्शनरी खाली हो गई है लेकिन रोज नई-नई गालियां बोली जा रही हैं। मैं सोचता था कि आख़िरकार 25 साल से जो लोग यहाँ सरकार चला रहे हैं, 35 साल तक जिस कांग्रेस ने यहाँ सरकार चलाई है, 60 साल तक सरकार चलाई; सरकार में जितने मुलाज़िम हैं, इनको इन्हीं के कालखंड में कभी-न-कभी नौकरी मिली है, एक प्रकार से ऊपर से नीचे तक सारा उन्हीं का खेल है इसके बावजूद वे चुनाव में इस प्रकार का व्यवहार करने को मजबूर क्यों हुए हैं, सारी मर्यादा तोड़कर निम्न स्तर की भाषा पर क्यों उतर आए हैं। इसका कारण यह नहीं है कि मोदी ने कोई गलती की है, कारण है कि आपके इस प्रेम को वे पचा नहीं पा रहे हैं। जैसे-जैसे आपका प्यार बढ़ता जाता है, उनकी गलियों की संख्या बढ़ती जाती है। एनडीए, भाजपा का चुनाव प्रचार कितना सफ़ल चल रहा है, रैलियां कितनी बड़ी हो रही हैं, ये रैलियों से नहीं पता चलता है बल्कि रैली समाप्त होने के बाद जिस तरह वे गाली-गलौज पर उतर आते हैं, उससे पता चलता है कि रैली कितनी जबर्दस्त हुई है।

भाईयों-बहनों, आप बताईये कि गरीब से गरीब व्यक्ति को भी कोई अगर यह कहे कि तुम बिकाऊ हो तो कोई सहन करेगा क्या? फुटपाथ पर भीख मांगने वाले व्यक्ति को भी अगर कोई बिकाऊ कहे हो तो वो इसे मानेगा क्या? नीतीश जी, चुनाव में हार-जीत तो होती रहती है, ऐसा भी क्या गुस्सा। अब मोदी को गालियां देते-देते थक गए तो बिहारियों को गालियां देना शुरू कर दिया; मोदी पर आरोप लगाते-लगाते थक गए तो बिहारियों पर आरोप लगाना शुरू कर दिया। नीतीश बाबू, बिहारियों का अपमान आपको महंगा पड़ जाएगा, लेने के देने पड़ जाएंगे।

उन्होंने आरोप लगाया है कि मोदी की रैली में जो लोग आते हैं, वो पैसों से लाये जाते हैं। आप बताईये कि ये झूठ है कि नहीं; ये आपका और समस्त बिहारियों का अपमान है कि नहीं? बिहारियों को बिकाऊ कहने का पाप उन्हें महंगा पड़ेगा। नीतीश बाबू, मोदी पर जितना जुल्म करना है कर लो लेकिन बिहारियों के स्वाभिमान को चोट मत पहुँचाओ, ये आपको शोभा नहीं देता। कोई कल्पना नहीं कर सकता कि बिहार का क्या मिज़ाज बदला है। बिहार गुस्से में है क्योंकि बिहार आपसे 25 साल का हिसाब मांग रहा है और आप हिसाब देने को तैयार नहीं हैं।

ये गोपालगंज लालू जी का गृह जिला है न, यहाँ के लोगों को क्या मिला। इन्होंने जंगलराज के समय इसे ‘मिनी-चम्बल’ बना दिया था जहाँ रेलवे स्टेशन पर खुले आम गोलियां चलती थीं। यहाँ अपहरण उद्योग बना था कि नहीं? यहाँ एक ही कारोबार हुआ था – अपहरण का कारोबार। गोपालगंज नौजवान जो सम्मान से जीना चाहता था, पसीना बहा करके पैसा कमाना चाहता था, उसे गोपालगंज छोड़कर जाने के लिए मजबूर होना पड़ा। पूरे बिहार में सबसे ज्यादा नौजवानों का पलायन कहीं हुआ है तो या तो सीवान से हुआ है या गोपालगंज से हुआ है।

मैं पिछले दिनों आबुधाबी, दुबई गया था, वहां जो लेबर कॉलोनी बनी है, वहां के शासकों से मैंने प्रार्थना की कि लेबर कॉलोनी में मेरे भारत के लोग काम कर रहे हैं, मैं उनका हाल जानना चाहता हूँ, अपने गरीब भाईयों से मिलना चाहता हूँ। मैं वहां के शासकों का आभारी हूँ कि उन्होंने मुझे जाने दिया। वहां मैं सभी मजदूरों से मिला था। मुझे वहां सबसे ज्यादा लोग बिहार के मिले। ये मजदूरी करने के लिए क्यों मजबूर हुए। हमारी सीधी बात है कि हमें बिहार को ऐसा विकास देना है ताकि बिहार के लोगों को यहीं रोजी-रोटी मिले, यही हमारा मकसद है। इनलोगों को अपने परिवार के बाहर किसी की चिंता नहीं है। उनको अपने किसी नेता पर भरोसा नहीं है। जेल गये तो पत्नी को दे के गए अब जब ज़िन्दगी जेल में गुजारनी है तो कहते हैं कि बेटे तैयार हो जाओ और ये सब पकड़ लो ताकि मैं आराम से जेल में गुजारा कर लूँ; ऐसा खेल चल रहा है।

आज इन सारी समस्याओं का अगर हमें समाधान करना है तो एक ही रास्ता है – बिहार का विकास। बिहार का विकास ही बिहार को बर्बादी से बचा सकता है। इसलिए मैं बिहार के मतदाताओं से एक ही बात कहने आया हूँ कि मुझ पर भरोसा कीजिये। लोकसभा में अपने भरोसा किया है, अब विधानसभा में भी मुझ पर भरोसा कीजिये, मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद को मैं ख़त्म करके दिखा दूंगा। दिल्ली दिन-रात भ्रष्टाचार के कारण बदनाम था। रोज लाखों-करोड़ों रुपये के घोटाले सामने आते थे कोयले, 2जी में से रुपये खाए, चारों तरफ लूट मची थी आप बताएं कि हम पर एक भी आरोप लगा है क्या? ये इतनी गालियां मुझे देते हैं लेकिन अभी तक मुझ पर भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगा है। ये बचा पैसा जनता के ही काम आएगा। ये देश की सेवा है अगर बिहार की भी लूट बच जाए तो ये बिहार के लिए भला होगा।

भाईयों-बहनों, इसलिए मुझे बिहार की सेवा करने का मौका दीजिए; ये लूटपाट मुझे बंद करानी है, ये घर भरने और तिजोरी लूटने का खेल मुझे बंद कराना है। हमारे देश में इनकी हालत तो देखिये नीतीश बाबू के भागीदार और उनके मंत्रिपरिषद के मंत्री अभी टीवी पर कैमरा के सामने रुपये लेते पकड़े गए, ये क्या कम अपराध है लेकिन उनको कोई शर्म नहीं है। नीतीश बाबू ने कहा था कि अगर किसी का भ्रष्टाचार पकड़ा गया तो उसकी मिल्कियत जब्त कर ली जाएगी और उसके घर में स्कूल खोला जाएगा। लालू जी को भ्रष्टाचार में जेल हुई और ये मैंने नहीं किया बल्कि अदालत ने किया। अब नीतीश बाबू बताएं कि उनका घर कब्ज़े में किया क्या, उनके घर में स्कूल खोला? लोगों को क्यों मूर्ख बना रहे हैं? जेडीयू के मंत्री कैमरा के सामने घूस लेते पकड़े गए। ये अभी से ऐसा काम कर रहे हैं तो चुनाव के बाद क्या करेंगे। बिहार बेचने का एडवांस लिया जा रहा है। भाईयों-बहनों, क्या हम बिहार को बेचने देंगे, उनका घर भरने देंगे क्या?

मैं नीतीश बाबू से पूछना चाहता हूँ कि जेडीयू के मंत्री कैमरा के सामने घूस लेते पकड़े गए, उन्होंने उनका घर जब्त किया क्या? अभी आपकी सरकार चल रही है, आपको अपने साथियों को भ्रष्टाचार के लिए सजा करने से कौन रोक रहा है। 25 साल में इन्होंने क्या किया, इसकी सूची देखकर मैं हैरान हो गया अपने आपको ईमानदारी से काम करने वाले बताने वाले महाशय ने क्या खेल किया है, मैं आपको बताना चाहता हूँ याद कीजिये, अलकतरा घोटाला, दवाई खरीद घोटाला, ट्रांसफर्मर खरीद घोटाला, एस्टीमेट घोटाला, इंजीनियरिंग कॉलेज नॉमिनेशन घोटाला, फ़र्टिलाइज़र सब्सिडी घोटाला, राशन-किरासन घोटाला, शराब घोटाला, व्याख्याता नियुक्ति घोटाला, सिपाही नियुक्ति घोटाला, नलकूप घोटाला, इंदिरा आवास घोटाला, मनरेगा घोटाला, शौचालय घोटाला, कोसी चैनल निर्माण घोटाला, मिड-डे मिल घोटाला, आंगनवाड़ी घोटाला, मेघा घोटाला, कुलपति नियुक्ति घोटाला, पथ निर्माण घोटाला, पुल निर्माण घोटाला, शिक्षा अभियान घोटाला, टैक्स बुक छपाई घोटाला, कंबल खरीद घोटाला, परिवहन घोटाला, वायरलेस घोटाला, दियारा जमीन घोटाला, बुद्ध स्मृति पार्क निर्माण घोटाला, चावल घोटाला, रोल एंड डबल पे घोटाला, रेलवे में घोटाला और जिस घोटाले में आपके महाशय को सजा हुई है, उस चारे की तो बात करता ही नहीं हूँ

भाईयों-बहनों, ऐसे घोटाले करने वालों को सजा मिलनी चाहिए कि नहीं? इस प्रकार से बिहार को लूटने वालों को बिहार से बर्खास्त करना चाहिए कि नहीं? ये चुनाव सिर्फ़ सरकार बनाने के लिए नहीं बल्कि बिहार को लूटने वालों को बिहार से बर्खास्त करने का चुनाव है। नीतीश जी हिम्मत से कह रहे हैं कि हमें पुराने दिन लौटा दो। आए दिन अपहरण होते थे, दलितों पर जुल्म होता था, हत्याएं होती थीं, विनाश की परिस्थिति बनी हुई थी, वो पुराने दिन वापस चाहिए क्या? नीतीश जी, आपको कुर्सी के लिए पुराने दिन मंजूर है लेकिन बिहार को ये मंजूर नहीं है। जीत-हार तो होती है लेकिन बिहार के लोगों के साथ खिलवाड़ करना बंद कीजिये।

बिहार में सिवाय अपराधीकरण क्या हुआ? ये अपराध की ज़िन्दगी बिहार के जीवन को नहीं बदल सकती और रोजी-रोटी नहीं दे सकती। बिहार के परिवारों के लिए मेरा तीन सूत्र है - पढ़ाई, कमाई और बुजुर्गों को दवाई। बिहार के गरीब बच्चों को सस्ती एवं अच्छी शिक्षा मिलनी जरुरी है क्योंकि तब गरीब माँ-बाप को अपनी जमीन गिरवी रखने और अपनी बहू-बेटियों की अमानत गिरवी रखने की नौबत नहीं आएगी। दूसरी बात है, कमाई; बिहार का नौजवान अपनी कमाई कर अपने पैरों पर खड़ा होना चाहता है। 20-25 साल का नौजवान अपने माँ-बाप से 5 रूपया मांगे, उसे दुःख होता होगा कि नहीं। स्वाभिमान से जीने के लिए बिहार का नौजवान को अवसर मिलना चाहिए। नौजवान अपनी कमाई के लिए अवसर तलाश रहा है लेकिन सरकार उसे वो अवसर नहीं दे रही है। उद्योग नहीं लगेंगे तो रोजगार कैसे मिलेगा और उद्योग लगाने के लिए बिजली की आवश्यकता होती है। पिछली बार इन्होंने कहा था कि मेरी सरकार बनाईए, मैं घर-घर बिजली पहुंचाऊंगा और अगर मैं बिजली न पहुंचाऊं तो मैं वोट मांगने नहीं आऊंगा। बिजली तो नहीं आई लेकिन वो वोट मांगने जरुर आये। उन्होंने आपसे धोखा किया तो अब आप उनसे नाता तोड़ोगे?

बिहार को 24 घंटे बिजली चाहिए ताकि यहाँ उद्योग लगे और यहाँ के नौजवानों को रोजगार मिले इसलिए मैं आपसे पढ़ाई, कमाई और बुजुर्गों को दवाई के लिए वोट मांग रहा हूँ। बुजुर्गों के लिए सस्ती दवाई, डॉक्टर और दवाखाना होना चाहिए। बिहार राज्य की भलाई के लिए तीन सूत्र है, बिजली, पानी एवं सड़क। किसान को पानी मिले, वो मिट्टी में से सोना पैदा कर देगा; बिहार को बिजली मिले, कारखाने लग जाएंगे; और बिहार को सड़कें मिलें, बिहार प्रगति की दिशा में आगे बढ़ जाएगा। मेरे भाईयों-बहनों, बिहार के विकास के लिए एक ऐसी सरकार चुनिये जिसका एकमात्र एजेंडा है- विकास।

पिछले दिनों विकास के नाम पर उनके पास कहने के लिए कुछ था नहीं, 25 साल के शासन में कोई विकास नहीं था तो जब हम सिर्फ़ विकास पर जोर देकर बातें कर रहे थे तो वो आरक्षण की माला जप रहे थे और जब मैंने थोड़े दिन पहले उनके पापों का चिट्ठा खोल दिया तो तिलमिला गए हैं। अब तो मैं खुलेआम कहता हूँ कि 24 अगस्त 2005 को पार्लियामेंट के अन्दर श्रीमान नीतीश बाबू ने अपने इरादे साफ़ कर दिए थे। मैंने आरोप लगाया था कि ये दलितों, आदिवासियों, अति पिछड़ों का 5% आरक्षण चोरी करना चाहते हैं। भारत के संविधान-निर्माता ने मना किया था कि संप्रदाय के आधार पर आरक्षण मत कीजिये लेकिन ये लोग पिछड़ों का आरक्षण चोरी कर संप्रदाय के आधार पर आरक्षण बाँटना चाहते हैं। मैंने कहा तो तिलमिला गए लेकिन 24 अगस्त 2005 को पार्लियामेंट में उन्होंने जो भाषण दिया था, उसका दस्तावेज़ मेरे पास मौजूद है। उनका यही कहना था कि दलितों, आदिवासियों, अति पिछड़ों, पिछड़ों का आरक्षण निकाल कर संप्रदाय के आधार पर आरक्षण दिया जाए। उनको मैं चुनौती देता हूँ कि उनमें हिम्मत है तो इसका जवाब दें। इतना झूठ बोलते हैं और हल्की-फुल्की बात कर के निकल लेते हैं; ये खेल लंबा नहीं चलने वाला है।

भाईयों-बहनों, मैंने गरीबी देखी है इन दिनों ये कह रहे हैं कि मोदी जी ने अपना प्रोफाइल बदल लिया। पहले मोदी विकास की बात करते थे और अब कह रहे हैं कि मैं तो चाय बेचता हूँ, मैं गरीब माँ का बेटा हूँ, मैं पिछड़ा हूँ। मैं नीतीश बाबू से पूछना चाहता हूँ कि क्या इस देश के पिछड़े को विकास की बात करने का हक़ भी नहीं है क्या? अगर मैं पिछड़ा हूँ तो क्या मैं विकास पर बोल नहीं सकता, उस पर चर्चा नहीं कर सकता? क्या विकास की बात करने का ठेका आप लोगों के ही पास है क्या? ये उनका अहंकार ही उनसे ये सब बोलवाता है और वो इतने निराश हैं कि अब उन्हें आपके पास आने की हिम्मत नहीं है और अब वे तांत्रिक के पास जाते हैं। आपको गाली देते हैं कि आप यहाँ पैसों से आते हैं और ख़ुद तांत्रिक के चरणों में जाकर रूपये का ढेर करते हैं। अब वे 100 तांत्रिक ले आएं लेकिन अब वे बचने वाले नहीं हैं।

हमारा भरोसा जनता-जनार्दन में हैं, आप पर है। हमें बदलाव चाहिए विकास के लिए; हमें सरकार चाहिए विकास के लिए। इसलिए मैं आपसे आग्रह करता हूँ कि ज्यादा-से-ज्यादा और भारी संख्या में मतदान कीजिये। अपना आशीर्वाद हमें देते रहिए और दो-तिहाई बहुमत के साथ भाजपा, एनडीए की सरकार बनाईए। सब लोग पूरी ताक़त के साथ बोलिये -    

भारत माता की जय! भारत माता की जय! भारत माता की जय!                     

बहुत-बहुत धन्यवाद!

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भारत माता की जय!

भारत माता की जय!

भारत माता की जय!

तो मैं शुरू करूं? His Excellency Minister of Economy & Labour of Austria, Indian Diaspora के मेरे सभी साथियों, भारत के सभी दोस्त, शुभचिंतक आप सब को नमस्कार।

गुटिन्टाग !

साथियों,

ऑस्‍ट्रिया का ये मेरा पहला दौरा है। जो उत्साह, जो उमंग मैं यहां देख रहा हूं वो वाकई अद्भुत है। 41 वर्षों के बाद भारत के किसी प्रधानमंत्री का यहां आना हुआ है। आप में से बहुत लोग ऐसे होंगे, जिनके जन्म के पहले कोई प्रधानमंत्री यहां आए थे। आपको क्या लगता है ये इंतजार कुछ ज्यादा ही लंबा हो गया है ना? चलिए अब ये इंतजार खत्म हो गया है। अब तो आप खुश हैं ना? मुझे बताने के लिए कह रहे हैं कि real में खुश हैं? सच्चा?

और साथियों,

ये इंतजार खत्म भी एक ऐतिहासिक अवसर पर हुआ है। आप में से बहुत लोगों को शायद पता नहीं होगा भारत और ऑस्‍ट्रिया अपनी दोस्ती के 75 वर्ष celebrate कर रहा है। मैं Chancellor कार्ल नेहमर को इस शानदार स्वागत के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूं। मैं Economy & Labour मंत्री मार्टिन कोकर का भी आभार व्यक्त करता हूं। आपका यहां आना ये दिखाता है कि ऑस्ट्रिया के लिए यहां बसे भारतीय कितने खास हैं, कितने विशेष हैं।

Friends,

भौगोलिक दृष्टि से तो भारत और ऑस्‍ट्रिया दो अलग-अलग छोर पर हैं, लेकिन हम दोनों के बीच अनेक समानताएं हैं। Democracy हम दोनों देशों को कनेक्ट करती है। Liberty, Equality, Pluralism और rule of law का respect ये हमारी shared values हैं। हम दोनों समाज multi cultural और multilingual है। दोनों देश, हमारे समाज में हम दोनों देशों की आदत है Diversity को celebrate करना। और हमारी इन values को reflect करने वाला एक बड़ा माध्यम चुनाव है। ऑस्ट्रिया में कुछ महीनों के बाद चुनाव होने वाला है। जबकि भारत में हमने अभी-अभी लोकतंत्र का पर्व आन-बान-शान के साथ मनाया है। भारत में दुनिया का सबसे बड़ा चुनाव संपन्न हुआ है।

साथियों,

आज दुनिया के लोग भारत के election के बारे में सुनकर हैरान रह जाते हैं। जो चुनाव कुछ सप्ताह पहले ही खत्म हुआ है, उसमें 650 मिलियन से ज्यादा लोगों ने वोट डाले हैं। मतलब हुआ शायद 65 ऑस्‍ट्रिया, और सोचिए इतना बड़ा चुनाव होता है, लेकिन कुछ ही घंटों में चुनाव के नतीजे clear हो जाते हैं। ये भारत की electoral machinery और हमारे democracy की ताकत है।

साथियों,

भारत के इन चुनावों में सैंकड़ों Political Parties के आठ हजार से ज्यादा उम्मीदवारों ने हिस्सा लिया। इस लेवल का contest, इतना diverse contest तब जाकर के देश में जनता ने अपना mandate दिया है। और देश ने mandate क्या दिया? साठ साल के बाद एक सरकार को लगातार तीसरी बार सेवा करने का अवसर भारत में मिला है। हमने तो दुनिया में Post Covid Era में चारों तरफ Political instability देखी है। ज्यादातर देशों में सरकारों के लिए survive करना आसान नहीं रहा। दोबारा चुनकर आना तो एक प्रकार से बहुत बड़ा चैलेंज रहा है। ऐसी स्थिति में भारत की जनता ने मुझ पर, मेरी पार्टी पर, एनडीए पर भरोसा किया। ये mandate इस बात का भी प्रमाण है कि भारत stability चाहता है, भारत continuity चाहता है। ये continuity बीते 10 साल की पॉलिसी और प्रोग्राम्स की है। ये continuity good governance की है। ये continuity बड़े संकल्पों के लिए समर्पित होकर के काम करने की है।

Friends,

मेरा हमेशा ये मत रहा है कि दो देशों के बीच के रिश्ते सिर्फ सरकारों से नहीं बनते। रिश्तों को मजबूती देने में जन भागीदारी बहुत जरूरी है। इसलिए मैं आप सभी के रोल को इन रिश्तों के लिए बहुत अहम मानता हूं। आपने दशकों पहले मोसार्ट और श्त्रूदल्स की धरती को अपना बना लिया। लेकिन मातृभूमि का संगीत और स्वाद आज भी आपके दिल में बसा है। आपने Vienna की सड़कों में ग्राथ्स, लिंत्स, इंसब्रुक, साल्सबुग और दूसरे शहरों में भारत के रंग भर दिए हैं। आप दीवाली हो या क्रिसमस, एक जैसे उत्‍साह से मनाते हैं। आप तोर्ते और लड्डू, दोनों बड़े चाव से बनाते भी हैं और खाते भी हैं और खिलाते भी हैं। आप Austria की Football Team और भारत की Cricket Team को एक ही जूनून से cheer करते हैं। आप यहां की Coffee को enjoy करते हैं, साथ ही भारत के अपने शहर वाली चाय की दुकान को भी याद करते हैं।

Friends,

भारत की तरह ही Austria का इतिहास और कल्चर भी काफी पुराना है, शानदार रहा है। एक दूसरे के साथ हमारे संपर्क भी ऐतिहासिक रहे हैं और इसका फायदा दोनों देशों को हुआ है। ये फायदा कल्चर में भी हुआ है और कॉमर्स में भी हुआ है। करीब 200 साल पहले ही Vienna की University में संस्कृत की पढ़ाई शुरू हो गई थी। 1880 में Indology के लिए एक Independent Chair की स्थापना से इसे और ऊंचाई मिली। आज मुझे यहां कुछ जाने माने Indologist से मिलने का अवसर भी मिला। उनकी बातों से साफ झलक रहा था कि भारत को लेकर उनकी रूचि बहुत ज्यादा है। भारत के अनेक महान लोगों ने भी Austria से बहुत प्यार पाया है। Vienna ने रबीन्द्रनाथ टैगोर और नेताजी सुभाष जैसे हमारे अनेक महान व्यक्तित्वों की मेजबानी की है और गांधी जी की शिष्या मीराबेन का अंतिम समय Vienna में ही बीता है।

साथियों,

हमारा सिर्फ कल्चर और कॉमर्स का ही रिश्ता नहीं है, बल्कि साइंस भी हमें जोड़ती है। बहुत साल पहले Vienna University में हमारे नोबेल पुरस्कार विजेता सर सी.वी. रमन का लेक्चर हुआ था। आज मुझे नोबेल पुरस्कार विजेता Anton Zeilinger से मुलाकात करने का अवसर मिला है। इस दोनों महान वैज्ञानिकों को Quantum ने कनेक्‍ट किया है। Quantum Computing पर Anton Zeilinger, उनका काम दुनिया को प्रेरित और प्रोत्साहित करता है।

Friends,

आज भारत के बारे में पूरी दुनिया में बहुत चर्चा हो रही है। हो रही है कि नहीं हो रही है? हर कोई भारत के बारे में जानना-समझना चाहता है। आपका भी यही अनुभव है ना? लोग बहुत कुछ पूछते हैं ना आपको? ऐसे में भारत आज क्या सोच रहा है? भारत क्या कर रहा है? इसको लेकर एक Better Informed World बनाना जरूरी है। भारत 1/6th Humanity को represent करता है और ग्लोबल ग्रोथ में भी करीब-करीब इतना ही contribute कर रहा है। हजारों वर्षों से हम दुनिया के साथ Knowledge और Expertise share करते रहे हैं। हमने युद्ध नहीं दिए, हम सीना तान करके दुनिया को कह सकते हैं, हिन्‍दुस्‍तान ने युद्ध नहीं बुद्ध दिए हैं। जब मैं बुद्ध की बात करता हूं तो इसका मतलब है कि भारत ने हमेशा Peace और Prosperity ही दी है। इसलिए 21वीं सदी की दुनिया में भी भारत अपनी इस भूमिका को सशक्त करने वाला है। आज जब दुनिया भारत को विश्व बंधू के रूप में देखती है तो ये हमारे लिए गर्व की बात है। आपको भी डगर-डगर पर गर्व महसूस होता है कि नहीं होता है?

Friends,

जब आप भारत में हो रहे तेज बदलावों के बारे में पढ़ते हैं, सुनते हैं तो क्या होता है? क्या होता है? क्या होता है? मुझे पक्का विश्वास है साथियों, आपका सीना भी 56 इंच का हो जाता है। भारत आज 5th Largest Economy है। 2014 में जब मैं आया इस सेवा के कार्य में तब हम 10 नंबर पर थे, 10 नंबरी नहीं कह रहा हूं। आज हम 5 नंबर पर पहुंच गए हैं। ये सब सुनते हैं तो आपको क्या लगता है? गर्व होता है कि नहीं होता है दोस्तों? आज भारत एक परसेंट के रेट से ग्रो कर रहा है। इस स्पीड के साथ क्या होगा मैं बताऊं? बताऊं? आज हम 5 नंबर पर हैं, हम टॉप 3 में पहुंचेंगे और साथियों मैंने देशवासियों को कहा था कि मेरे तीसरे टर्म में मैं देश को दुनिया की टॉप 3 इकोनॉमी में लेकर के जाऊंगा और ये बात मैं आपको बता दूं कि हम सिर्फ टॉप पर पहुंचने के लिए ही ये मेहनत नहीं कर रहे हैं, हमारा मिशन 2047 है। 1947 में देश आजाद हुआ, 2047 में देश शताब्‍दी मनाएगा। लेकिन वो शताब्‍दी विकसित भारत की शताब्दी होगी। भारत हर प्रकार से विकसित होगा। हम आने वाले 1000 वर्षों के भारत की मजबूत नींव आज डाल रहे हैं।

Friends,

भारत आज एजुकेशन, स्किल, रिसर्च और इनोवेशन में अभूतपूर्व स्‍केल पर काम कर रहा है। 10 सालों में, ये आंकड़ा याद रखना जरा… 10 सालों में हर दिन everyday दो नए कॉलेज भारत में खुले हैं। आगे बताऊं? हर हफ्ते एक नई University खुली है। पिछले साल हर दिन 250 से ज्यादा Patents Grant किए गए हैं। भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है। आज दुनिया का हर 10वां यूनिकॉर्न भारत में है। बाकी पूरी दुनिया में जितना real time digital transaction आज होता है, उतना अकेला भारत में होता है। हमारे payments digital हैं, हमारे process भी digital हैं। भारत less paper, less cash लेकिन seamless economy की तरफ बढ़ रहा है।

Friends,

आज भारत Best, Brightest, Biggest और Highest milestone के लिए काम कर रहा है। हम आज भारत को Industry 4.O और green future के लिए तैयार कर रहे हैं। Green Hydrogen Mission का लक्ष्य 2070 तक net Zero गोल्स हासिल करने का है। हम Green Mobility पर बल दे रहे हैं। और भारत की जो ये unprecedented growth story है, उसका फायदा ऑस्ट्रिया को भी हो रहा है। आज भारत के अलग-अलग सेक्टर्स में 150 से अधिक ऑस्ट्रियन कंपनियां काम कर रही हैं। ये भारत के Infrastructure से जुड़ी aspirations को पूरा करने में मदद कर रही है। मेट्रो, डैम ऐसे अनेक projects, टनल जैसे अनेकों Infra projects में ऑस्ट्रिया की कंपनियां भारत में काम कर रही हैं, और मुझे उम्मीद है कि आने वाले समय में यहां की कंपनियां, यहां के इन्वेस्टर ज्यादा से ज्यादा भारत में अपना विस्तार करेंगे।

Friends,

ऑस्‍ट्रिया में रह रहे भारतीयों की संख्या बहुत बड़ी नहीं है। लेकिन ऑस्‍ट्रिया के समाज में आपका योगदान प्रशंसनीय है। खासतौर पर यहां के हेल्थकेयर सेक्टर में आपके रोल की बहुत प्रशंसा होती है। हम भारतीयों की पहचान ही care और compassion के लिए होती है। मुझे खुशी है कि ये संस्कार आप अपने profession में यहां भी साथ लेकर चलते हैं। आप सभी इसी तरह ऑस्‍ट्रिया के विकास में सहभागी बने रहिये। मैं एक बार फिर आप सबका इतनी बड़ी तादाद में यहां आने के लिए आभार जताता हूं, आप सबके इस उत्साह और ऊर्जा के लिए मेरी तरफ से बहुत-बहुत धन्यवाद।

साथियों,

ऑस्ट्रिया का ये पहला दौरा बहुत ही सार्थक रहा है। एक बार फिर यहां की सरकार और यहां की जनता का भी मैं आभार व्यक्त करता हूं। आप सबको मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएं हैं। मुझे विश्वास है इस बार 15 अगस्त पुराने सारे रिकॉर्ड तोड़ने वाली होनी चाहिए। होगा ना? पक्का होगा? मेरे साथ बोलिए–

भारत माता की– जय!

भारत माता की– जय!

भारत माता की– जय!

वंदे मातरम!

वंदे मातरम!

वंदे मातरम!

वंदे मातरम!

वंदे मातरम!

वंदे मातरम!

वंदे मातरम!

वंदे मातरम!

वंदे मातरम!

वंदे मातरम!

बहुत-बहुत धन्यवाद!