उद्योग जगत के सभी वरिष्‍ठ महानुभाव

मैं जेट्रो का आभारी हूं, निक्‍केइ का आभारी हूं, कि मुझे आज आप सबके साथ बातचीत करने का सौभाग्‍य मिला है। मैं जब यहां आ रहा था तो, ये सभी वरिष्‍ठ महानुभाव मुझे बता रहे थे और बड़े आश्‍चर्य के साथ बता रहे थे कि हमारे इतने सालों में इतना बड़ा गैदरिंग पहली बार हुआ है। मुझे कह रहे थे कि 4000 लोगों ने अप्‍लाई किया था, लेकिन हमारे पास एकोमोडेशन पूरी नहीं होने के कारण आधे लोगों को निराश करना पड़ा है। ये इस बात का संकेत है कि अब जैसे भारत ‘लुक ईस्‍ट’ पालिसी लेकर चल रहा है, वैसे जापान ‘लुक एट इंडिया’ इस मूड में आगे बढ़ रहा है।

जब वाजपेयी जी भारत के प्रधानमंत्री थे और एक्‍सीलेंसी मोरी जी यहां प्रधानमंत्री थे, तब से यह रिश्‍ता बड़ा सघन बना। मेरा भी सौभाग्‍य रहा, मैं पहले भी आया। मैंने हर बार देखा कि जापान जिस प्रकार की कार्य संस्‍कृति का आदी है, जापान जिस प्रकार के गवर्नेंस का आदी है, जापान ने जिस प्रकार से इफीशिएंसी और डिसीप्लिन को आत्‍मसात किया है, अगर उस इन्‍वायरमेंट को प्रोवाइड करते हैं तो जापान को भारत में भी अपनापन महसूस होगा।

तब मैं गुजरात का मुख्‍यमंत्री था, 2007 में, मैं यहां आया। जो बातें आप से सीखीं ,समझी, देखी, उसको मैंने भली-भांति वहां लागू किया था। 2012 में आया, मैंने दुबारा उसको और बारीकी से देखा फिर उसको लागू किया। आज परिणाम यह हुआ कि जब मैं भारत के प्रधानमंत्री के रूप में आपके बीच आया हूं, तब मैं आपको विश्‍वास दिलाने आया हूं, कि आपको जापान के बाहर कहीं नजर डालनी है तो, मुझे नहीं लगता है कि अब आपको इधर-उधर देखने की जरूरत है।

अब एक ऐसी जगह है, जो आपकी चिर-परिचत है। सांस्‍कृतिक रूप से तो चिर-परिचित है, लेकिन अब अपने आप के विस्‍तार के लिए, अपने आप को ग्रो करने के लिए, आप जिस जगह की तलाश में हैं, मैं आपको विश्‍वास दिलाता हूं, मैं आपको निमंत्रण देता हूं, शायद भारत से बढ़कर के आप के अनुकूल कोई जगह नहीं है। ये मैं विश्‍वास दिलाने आया हूं।

मुझे अभी सरकार में सिर्फ 100 दिन हुए हैं। एक्‍सीलेंसी मोरी जी के साथ भी मेरा संबंध बहुत पुराना है और प्रधानमंत्री आबे जी के साथ भी बहुत पुराना संबंध है। पिछले तीन दिनों में मैंने देखा है कि जापान का भारत के साथ जुड़कर के अनेक क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए बहुत सारी संभावनाएं हैं। उसमें हमारा विश्‍वास पक्‍का हो गया है। कल का हमारा ज्‍वाइंट स्‍टेटमेंट आपने देखा है। मैं समझता हूं, किसी भी जापान के उद्योगकार के लिए भारत में आकर के कार्य प्रारंभ करना, इससे बड़ा स्‍ट्रांग मैसेज कोई नहीं हो सकता है। मेरी सरकार बनने के बाद मैने एक विजन के रूप में लोगों के सामने रखा है, ‘मेक इन इंडिया’।

मैं छोटा था, तो कोई कहता था ‘मेड इन जापान’, तो हम लागों का मन करता था कि कुछ देखने की जरूरत नहीं है कि किस शहर में बना है, किस कंपनी में बना है। ले लो, ये प्रतिष्‍ठा थी। हम ‘मेक इन इंडिया’ कह रहे हैं, इसका मतलब यह है कि हम ऐसा इन्‍वायरमेंट आपको देना चाहते हैं, कि आपकी वैश्विक मांग है, जो आपके प्रोडक्‍ट की, उस वैश्विक मांग को अगर पूरा करना है तो आज जापान, जो कि हाई कॉंस्‍ट मैन्‍यूफैक्‍चरिंग की ओर चल पड़ा है, आपकी पूरी इकोनोमी हाई कॉस्‍ट एंड वाली बनती जा रही है। इसलिए आपके लिए बहुत अनिवार्य है कि लो कॉम्‍स्‍ट मैन्‍यूफैचरिंग की संभावनाएं हों। ‘ईज़ आफ बिजनेस’ का वातावरण हो। स्किल्‍ड क्‍वालिटी मैनपावर अवेलेबल हो।

तो मैं विश्‍वास से कहता, जो दस साल में मिरेकल आप जापान में रह कर के आपकी कंपनी का करते हैं, आप वो मिरेकल दो साल के भीतर-भीतर हिन्‍दुस्‍तान में कर सकते हैं। इतनी संभावनाओं का वो देश है आप विश्‍व में अपने प्रोडक्‍ट को अगर पहुंचाना चाहते हैं, और कंपीटिटिव भी मार्केट है। अगर विश्‍व में अगर प्रोडक्‍ट पहुंचाना चाहते हो तो, इट इज ए गॉड गिफ्टेड लोकेशन है, इंडिया का। हमारा बहुत ही वाइब्रेंट सी कोस्‍ट है, वहीं से आप वेस्‍टर्न पार्ट आफ दि वर्ल्‍ड, मिडिल ईस्‍ट से लेकर, आगे कहीं भी जाना है, मैं समझता हूं, इससे बढ़कर कोई सुविधा नहीं होती है।

जब सुजूकि, मारूति उद्योग के संबंध में लोग, मुझसे मिलने आते थे, तो मैंने उन्हे एक हिसाब समझाया था। मैंने कहा- आप गुड़गांवां में कार बनाते हैं और एक्‍सपोर्ट करते हैं, तो समुद्र तट पर जाने में आपकी कार को जाने में 9000 रुपए का खर्च लगता है। लेकिन समुद्र तट पर यदि आप गाड़ी बनाओगे तो हर कार पर आपका 9000 रुपए बच जाएगा। तो उन्‍होनें कहा कि मुझे तो यह व्‍यापारिक गुर किसी ने सिखाया ही नहीं और वह एक बात ऐसी थी कि उनको निर्णय करने में क्लिक कर गई।

पिछले दिनों में मैंने इतने वहां पर इतने महत्‍वपूर्ण निर्णय किये, जैसे – डिफेंस के सेक्‍टर में। एक समय था, मेरे यहां इतने सारे रिस्‍ट्रीक्‍शंस थे, डिफेंस इक्विपमेंट मैन्यूफैक्‍चरिंग में, यदि डिफेंस के लिए एक मुझे ट्रक चाहिए तो वो भी डिफेंस के रूल्‍स एवं रेगुलेशन के रिस्ट्रिक्‍शंस में पड़े हुए थे। हमने इन 100 दिन के अंदर-अंदर करीब-करीब 55 प्रतिशत ऐसी चीजों को उस सारी कानूनी व्‍यवस्‍था से बाहर निकाल दिया। हमने कहा कि आइए, ये सब आप जैसे सामान्यत: कोई भी चीज आप प्रोड्यूस करते हैं, आप कर सकते हैं और डिफेंस उसका परचेज करेगा। हमारा बहुत बड़ा मार्केट विदिन इंडिया है। डिफेंस मैन्‍यूफैक्‍चरिग सेक्‍टर में अगर आप आते हैं, तो मुझे विश्‍वास है कि आप न सिर्फ भारत की आवश्‍यकताएं, बल्कि विश्‍व के अनेक छोटे-छोटे देश हैं, जिनकी रिक्‍वायरमेंट को पूरा करने का, ऐसी मैन्‍यूफैक्‍चरिंग का काम आप हिंदुस्‍तान की धरती पर कर सकते हैं।

आपको जानकर के हैरानी होगी, भारत की पहचान साफ्टवेयर में है। हमारे टैलेंट, हमारे नौजवान साफ्टवेयर के क्षेत्र में बहुत बड़ी पहचान बनायी है। आपने हार्डवेयर में अपनी ताकत बनायी है। लेकिन साफ्टवेयर हार्डवेयर के बिना अधूरा है। हार्डवेयर साफ्टवेयर के बिना अधूरा है। भारत जापान के बिना अधूरा है, जापान भारत के बिना अधूरा है।

अगर हार्डवेयर इंडस्‍ट्री, भारत आपको निमंत्रण देता है। भारत के टैलेंट का साफ्टवेयर, आपकी बुद्धिमानी और मेहनत और बिजनेस एक्‍सीलेंस के कारण तैयार हुआ हार्डवेयर। अगर ये मेलजोल हो जाए, आप विश्‍व के अंदर बहुत बड़ा मिरेकल कर सकते हैं। मैंने देखा है कि स्‍मॉल स्‍केल इंडस्‍ट्रीज का एक बड़ा नेटवर्क ऐसा है, कि जो हार्डवेयर की दिशा में काम कर रहा है।

आज भारत का अपना इंपोर्ट इतना है। हमारा आज सबसे बड़ा इंपोर्ट पेट्रोलियम और आयल सेक्‍टर का है। हमारा एक अनुमान है कि 2020 में हमारा सबसे ज्‍यादा इंपोर्ट इलेक्‍ट्रानिक्‍स गुड्स का होने वाला है। आप कल्‍पना कर सकते हैं, कितना बड़ा मार्केट है। जापान का व्‍यापारी इंतजार करेगा क्‍य ? इतना बड़ा मार्केट आपका इंतजार कर रहा है। अगर आपका वहां लो कॉस्‍ट मैन्‍यूफैक्‍चरिंग होता है, आपको इफिशिएंट गवर्नेंस की अनुभूति होती है। मैं विश्‍वास से कहता हूं कि आपकी स्थिति बदल जाएगी।

आमतौर पर भारत की पहचान यह बन जाती है कि छोड़ो यार, वहां रेड टैप है। पता नहीं सरकारी कारोबार में कब गाड़ी चलेगी। मैं आपको विश्‍वास दिलाने आया हूं, आज भारत में रेड टैप नहीं, रेड कार्पेट है और रेड कार्पेट आपका इंतजार कर रही है।

हमने ईज़ आफ बिजनेस के लिए इतने सारे नए रेगुलेशन्‍स को लिबरल कर दिया है। शायद विश्‍व में इतनी तेज गति से लिबरलाइज मूड में, सारे हमारे पुराने रूल्‍स और रेगुलेशन्‍स में परिवर्तन लाने का किसी एक सरकार ने काम किया हो तो आज हिंदुस्‍तान की सरकार है। आखिरकार व्‍यापारी को, उद्योगकार को, इंवेस्‍टर को एक सिक्‍युरिटी चाहिए। उसको प्रोपरली ग्रो करने के लिए एक इन्‍वायरामेंट चाहिए।

आज भारत, किसी को भी आकर के ग्रो करने के लिए प्रोपर इन्‍वायरामेंट के लिए, बहुत तेज गति से आगे चल रहा है। जहां तक इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर का सवाल है, अब कभी, जो भी आज भारत में हमारे साथ काम करते हैं, और जिन्‍होंने गुजरात में मेरे साथ काम किया है, कई उद्योगकार हैं, जिन्‍होंने मेरे साथ काम किया है। जिस गति से हम इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर को प्रोवाइड करने के लिए व्‍यवस्‍थाएं करते हैं, जिस गति से हम निर्णय करते हैं। मैं नहीं मानता हूं कि आज किसी भी उद्योगकार को उसके लिए कठिनाई हो सकती है।

आप कल्‍पना कर सकते हैं, हिंदुस्‍तान के आज 50 से अधिक छोटे शहर ऐसे हैं, जो मेट्रो रेल के लिए कतार में खड़े हैं। 50 शहरों में मेट्रो ट्रेन लगना, यानी इस फील्‍ड में काम करने वाले लोगों के लिए किसी एक देश में इतना बड़ा बिजनेस कभी सोचा है आपने ? इतना बड़ा बिजनेस अ‍बेलेबल है। आप कितना सारा काम वहां पर कर सकते हैं। कोई ऐसा क्षेत्र नहीं है, और खास करके हम एस एम ईज को पोत्‍साहन देना चाहते हैं। स्‍मॉल स्‍केल इंडस्‍ट्रीज को हम इंवाइट करना चाहते हैं। ताकि जॉब क्रिएशन भी हो, मास स्‍केल पर प्रोडक्‍शन भी हो और एक ऐसी हेल्‍दी कंपीटिशन हो, जिसके कारण क्‍वालिटी प्रोडक्‍शन पर बल मिले। इसलिए मैं आप सबसे आग्रह करने आया हूं कि आप आइए। और कल भी मैंने एक जगह कहा था, 21वीं सदी एशिया की सदी है। मतलब क्‍या है ? इसका मतलब ये है कि विश्‍व की आर्थिक गतिविधि का केंद्र ये बनने वाला है।

विश्‍व की आर्थिक गतिविधि का केंद्र बनने वाला है तो कहां बनेगा ? मैं देख रहा हूं, आज विश्‍व के लोगों को तीन बातों के लिए शायद कोई एक जगह पर ऑपरच्‍युनिटी हो, वैसी विश्‍व में कोई जगह नहीं है। एक स्‍थान पर तीन ऑपरच्‍युनिटी, एक – डेमोक्रेसी, दूसरा – डेमोग्राफी, तीसरा – डिमांड। ये एक ही जगह ऐसी है, जहां डेमोक्रेसी है, जहां पर डिमांड है और जहां पर 65 प्रतिशत पोपुलेशन बिलो 35 एज ग्रुप की है, डेमोग्राफिक डिवीजन। तीनों जगह एक स्‍थान पर हो, वैसी विश्‍व में एक भी जगह नहीं नहीं है और डेमोक्रेसी सेफ्टी, सिक्‍योरिटी एंड जस्टिस की गारंटी देती है।

आखिरकर बाहर के व्‍यक्ति को ये चीजें चाहिए, जो हम प्रोवाइड करते हैं। उसी प्रकार से, किसी भी उद्योगकार को, मैन्‍यूफैचरर को यंग ब्रेन चाहिए, यंग माइंड चाहिए, यंग पोपुलेशन चाहिए। उत्‍साह-उमंग से भरी हुई जवानी, अगर उसके हाथ में स्किल हो तो मिरेकल कर देती है। भारत आज विश्‍व का सबसे युवा देश है। और डिमांड, आप कल्‍पना कर सकते हैं, सवा सौ करोड़ देशवासी कितना बड़ा मार्केट है। अकेले हिंदुस्‍तान के मार्केट को आप सर्व करें तो भी आज जहां है, वहां से अनेक गुना आपकी कंपनी ग्रो कर जाएगी। एक ऐसी सरकार आई है जो विकास के मुद्दे पर काम कर रही है। मैन्‍यूफैक्‍चरिंग सैक्‍टर को हम बढ़ावा देना चाहते हैं।

हमारे 100 दिन का रिकॉर्ड देखिए आप। सिर्फ 100 दिन में हमारा जो जीडीपी था, 4.4 - 4.5 - 4.6 पर लुढ़क रहा था। पिछले ढ़ाई-तीन साल में जो हमने अचीव नहीं किया था, वह 100 दिन में कर दिया और 5.7 प्रतिशत का जीडीपी अचीव कर लिया। यह बताता है कि हमारी जो निर्णय हैं, हमारी जो पालिसीज हैं, ‘ईज़ आफ बिजनेस’ की हमारी जो सोच है, उसके कारण ये परिणाम मिल रहे हैं। इसलिए मैं आपको निमंत्रण देता हूं कि आप आइए, हम सब मिल करके एशिया की पीस और प्रोग्रेस की गारंटी के लिए, जापान और भारत को कंधे से कंधा मिला कर के जितना आगे बढ़ने की जरूरत है। उसी प्रकार से हमने एशिया की समृधि के लिए, भारत जैसे देश की समृधि की दिशा में मिलकर के प्रयास करने की आवश्‍यकता है।

मैं आप सबको निमंत्रण देता हूं। आप भारत आइए। अपना नसीब आजमाइए। अपना कौशल्‍य आजमाइए। भारत पूरी तरह आपका स्‍वागत करने के लिए तैयार है। मुझे दुबारा एक बार यहां आने का मौका मिला। बार-बार मैं जेट्रो में आता हूं। मैं जब गुजरात में था तो एक जेट्रो का आफिस भी मेरे यहां मैंने खोल दिया था और हमारे कुछ मित्र हैं जो अब गुजराती बोलना भी सीख गए हैं।

मैं बारीक-बारीक चीजों का केयर करने वाला इंसान हूं। मैं जानता हूं कि ‘ईज़ आफ बिजनेस’ के लिए जितनी छोटी-छोटी चीजें, अगर दो चीजें आप भी ध्‍यान में लाएंगे तो हम तुरंत उसको करने के पक्ष में रहते है। इसलिए मैं आपको निमंत्रण देने आया हूं। फिर से आपने मुझे बुलाया, इतनी बड़ी संख्‍या में आपका यहां आना, ये बताता है कि आपका हिंदुस्‍तान के प्रति कितना विश्‍वास बढ़ा है। आपकी हिंदुस्‍तान के प्रति कितनी रूचि बढ़ी है और हिंदुस्‍तान और जापान मिलकर के एक नया इतिहास आर्थिक विकास के क्षेत्र में निर्माण कर सकते हैं। इस पूरे विश्‍वास के साथ आप सबका बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

थैंक यू,थैंक यू वैरीमच।

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May 23, 2026
India’s youth are playing a vital role in accelerating the journey towards a Viksit Bharat: PM
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Today, Rapid transformation is clearly visible even in rural areas; Enhanced connectivity has opened new avenues for farmers, small traders, and students: PM
Viksit Bharat will be built by the efforts of such youth who view their work as a means of national service: PM Modi

বন্ধুগণ,

 

আজ সারা দেশের হাজার হাজার তরুণ-তরুণীর জন্য একটি অত্যন্ত গুরুত্বপূর্ণ দিন। ৫১,০০০-এরও বেশি জন সরকারি চাকরির জন্য নিয়োগপত্র পেয়েছেন। আজ আপনারা সবাই দেশের উন্নয়ন যাত্রার গুরুত্বপূর্ণ অংশীদার, দায়িত্বশীল অংশীদার হয়ে উঠছেন। আপনারা রেল, ব্যাংকিং, প্রতিরক্ষা, স্বাস্থ্য, শিক্ষা এবং আরও অনেক ক্ষেত্রে নতুন দায়িত্ব গ্রহণ করতে চলেছেন। আগামী বছরগুলিতে একটি উন্নত ভারত গড়ার সংকল্প পূরণে আপনারা সকলেই এক গুরুত্বপূর্ণ ভূমিকা পালন করবেন।

 

বন্ধুগণ,

 

এই পর্যায়ে পৌঁছানোর জন্য আপনারা নিশ্চয়ই ব্যাপক প্রস্তুতি এবং কঠোর পরিশ্রম করেছেন। এই সাফল্যের জন্য আমি আপনাদের এবং আপনাদের পরিবারকে অভিনন্দন জানাই। আপনাদের এখানে নিয়ে আসার ক্ষেত্রে আপনাদের বাবা-মা এবং পরিবারের অবদান অমূল্য। কিন্তু শুধু তাই নয়, পরিবার যেমন অবদান রাখে, তেমনি আমাদের এখানে নিয়ে আসার ক্ষেত্রে সমাজও একটি বিশাল ভূমিকা পালন করে। আমরা শুধুমাত্র নিজেদের কারণে বা শুধুমাত্র আমাদের পরিবারের কারণে এই অবস্থানে পৌঁছাই না। এই বিশাল দেশের ১.৪ বিলিয়ন নাগরিকের অবদানও অপরিসীম। আর তাই, আমাদের নিজেদের প্রতি, আমাদের পরিবারের প্রতি এবং সমগ্র সমাজের প্রতি একটি দায়িত্ব রয়েছে। এবং আমি নিশ্চিত যে আপনারা এই সমস্ত কাজের জন্য নিজেদেরকে আরও বেশি সক্ষম করে তুলবেন। আপনাদের সকলের জন্য শুভকামনা রইল।

 

বন্ধুগণ,

 

আপনারা সবাই জানেন যে, মাত্র দুদিন আগে আমি পাঁচটি দেশ সফর করে ফিরেছি। যদিও এটি মাত্র পাঁচটি দেশের সফর ছিল, আমি কয়েক ডজন দেশের প্রধান সংস্থাগুলির নেতাদের সাথে কথা বলেছি, আলোচনা করেছি এবং দেখা করেছি, এবং আমি পুরোটা সময় ধরে একটি জিনিস ক্রমাগত অনুভব করেছি। বিশ্ব ভারতের যুবসমাজ এবং এর প্রযুক্তিগত অগ্রগতি নিয়ে অত্যন্ত উচ্ছ্বসিত। আজ, বিশ্ব ভারতের উন্নয়ন যাত্রার অংশ হতে চায়। ভারতও বিশ্বজুড়ে বিভিন্ন দেশের সঙ্গে অংশীদারিত্ব করছে। এর উদ্দেশ্য হল ভারতের যুবকদের সুযোগ ও কর্মসংস্থান প্রদান করা এবং তাদের সম্ভাবনাকে উন্মোচন করা। আমি সত্যিই চাই আমার দেশের যুবকদের বৈশ্বিক অভিজ্ঞতা হোক। এই সফরের সময়, যদি আমি নেদারল্যান্ডসের কথা বলি, সেমিকন্ডাক্টর, জল, কৃষি এবং উন্নত উৎপাদন নিয়ে আলোচনা হয়েছে - সুইডেনের সঙ্গে কৃত্রিম বুদ্ধিমত্তা (এ আই) এবং ডিজিটাল উদ্ভাবনে সহযোগিতা নিয়ে অনেক আলোচনা হয়েছে, - নরওয়ের সঙ্গে সবুজ প্রযুক্তি এবং সামুদ্রিক সহযোগিতা নিয়ে আলোচনা এগিয়েছে, সংযুক্ত আরব আমিরাতের সঙ্গে কৌশলগত শক্তি এবং প্রযুক্তি অংশীদারিত্বের বিষয়ে গুরুত্বপূর্ণ চুক্তি স্বাক্ষরিত হয়েছে, ইতালির সঙ্গে প্রতিরক্ষা, গুরুত্বপূর্ণ খনিজ, বিজ্ঞান ও প্রযুক্তির মতো অত্যন্ত গুরুত্বপূর্ণ ক্ষেত্রে অংশীদারিত্বের চুক্তি স্বাক্ষরিত হয়েছে।

 

বন্ধুগণ,

 

এই সমস্ত চুক্তি থেকে ভারতের যুবসমাজ সরাসরি উপকৃত হবে। এবং আপনারা হয়তো লক্ষ্য করেছেন, এই সমস্ত বিষয় ভারতের জন্য একটি উজ্জ্বল ও সক্ষম ভবিষ্যৎ নিশ্চিত করে। কারণ প্রতিটি নতুন বিনিয়োগ, প্রতিটি প্রযুক্তিগত অংশীদারিত্ব, প্রতিটি শিল্প সহযোগিতা শুধু ভারতের যুবকদের জন্য নতুন সুযোগই নিয়ে আসে না, বরং অগণিত নতুন সুযোগও তৈরি করে।

 

আমার তরুণ বন্ধুরা,

 

আমাদের মনে রাখতে হবে যে, এই ক্ষেত্রগুলিতেই বিনিয়োগ এবং অংশীদারিত্বের মাধ্যমে এমন শিল্প তৈরি হবে যা আগামী তিন থেকে চার দশকে বিশ্বব্যাপী প্রবৃদ্ধিকে রূপ দেবে। এবং এতে ভারতের যুবসমাজ নিঃসন্দেহে একটি প্রধান ভূমিকা পালন করবে।

 

বন্ধুগণ,

 

আমি আপনাদের একটি উদাহরণ দিই যে কীভাবে ভারত বিশ্বের জন্য একটি বিশ্বস্ত সাপ্লাই চেইন পার্টনার হয়ে উঠছে। উদাহরণস্বরূপ, ডাচ সেমিকন্ডাক্টর কোম্পানি এএসএমএল, যে নামটি আপনাদের অনেকের কাছেই পরিচিত, তাদের একটি ভারতীয় কোম্পানি টাটা স্টিলের সঙ্গে একটি চুক্তি রয়েছে। ভারত বিশ্বের সেই কয়েকটি দেশের মধ্যে একটি যার সঙ্গে এই কোম্পানিটি চুক্তি স্বাক্ষর করেছে। এএসএমএল এবং টাটা ইলেকট্রনিক্সের মধ্যে এই একটি চুক্তিই ভারতে অগণিত নতুন কর্মসংস্থানের সুযোগ তৈরি করবে এবং পরবর্তী প্রজন্মের প্রযুক্তিতে ভারতের প্রবেশদ্বার খুলে দেবে। একইভাবে, সুইডেনের সঙ্গে প্রযুক্তি ও এআই অংশীদারিত্ব এবং সংযুক্ত আরব আমিরশাহীর সঙ্গে সুপারকম্পিউটিং সহযোগিতা ভারতের প্রযুক্তিগত সক্ষমতাকে উল্লেখযোগ্যভাবে শক্তিশালী করবে। এই চুক্তিগুলো নিঃসন্দেহে আমাদের যুবকদের জন্য নতুন সুযোগ তৈরি করবে।

 

বন্ধুগণ,

 

আজ, পরিচ্ছন্ন শক্তি, গুরুত্বপূর্ণ খনিজ, সবুজ হাইড্রোজেন এবং টেকসই উৎপাদন সম্পর্কিত ক্ষেত্রগুলিও দ্রুত বৃদ্ধি পাচ্ছে এবং এগিয়ে যাচ্ছে। এই সম্পর্কিত অংশীদারিত্বগুলি একটি নতুন অর্থনীতির জন্য নতুন সুযোগের দ্বার উন্মোচন করছে। সুইডেন, নরওয়ে এবং ইতালির মতো দেশগুলির সঙ্গে সবুজ রূপান্তর এবং টেকসই প্রযুক্তিতে সহযোগিতাও বাড়ছে। এটি পরিচ্ছন্ন উৎপাদন সম্পর্কিত ভবিষ্যৎ শিল্পগুলিতে ভারতের অবস্থানকে শক্তিশালী করবে। এছাড়াও, ভারত বন্দর, জাহাজ চলাচল এবং সামুদ্রিক পরিকাঠামো সম্পর্কিত চুক্তিগুলির উপর দ্রুত কাজ করেছে। সংযুক্ত আরব আমিরশাহী এবং নরওয়ের সঙ্গে অংশীদারিত্ব ভারতের জাহাজ নির্মাণ ইকোসিস্টেমকে শক্তিশালী করবে। এবং আপনারা জানেন, জাহাজ নির্মাণের জন্য প্রচুর পরিমাণে দক্ষ জনবলের প্রয়োজন হয়। এর মানে হল যে ভারতীয় প্রকৌশলী, প্রযুক্তিবিদ এবং দক্ষ কর্মীদের চাহিদা কল্পনাতীতভাবে বাড়তে চলেছে এবং অনেক সুযোগ তৈরি হবে।

 

বন্ধুগণ,

 

প্রতিটি নতুন অংশীদারিত্বের মাধ্যমে, আমরা ভারতীয় স্টার্টআপ, গবেষক এবং তরুণ পেশাদারদের বিশ্বের সঙ্গে সংযোগ স্থাপনের জন্য নতুন পথ তৈরি করছি। এটি ভারতীয় যুবকদের উন্নত দক্ষতা, বিশ্ব বাজার এবং বিকাশের নতুন নতুন সুযোগও প্রদান করবে। আজ, বিশ্ব সেই দেশগুলিকে সম্মান করে যারা উদ্ভাবন করে, নির্মাণ করে এবং বৃহৎ পরিসরে সরবরাহ করতে পারে। ভারত তিন দিকেই দ্রুতগতিতে এগিয়ে চলেছে, এবং এই পরিবর্তনের পেছনের সবচেয়ে বড় শক্তি হলো তোমরা সবাই, আমার তরুণ বন্ধুরা, ভারতের যুবসমাজ। আমি বিশ্বের যেখানেই যাই, ভারতের যুবশক্তি নিয়ে আলোচনা করে অনেক সময় কাটাই।

 

বন্ধুগণ,

 

আজ প্রত্যেক ভারতীয় এক দৃঢ় সংকল্প নিয়ে এগিয়ে চলেছে। এই সংকল্প হলো ২০৪৭ সালের মধ্যে একটি উন্নত ভারত গড়ে তোলা। এই লক্ষ্য অর্জনের জন্য দেশ বিভিন্ন খাতে বিনিয়োগ করছে। এবং এই বিনিয়োগ দেশের যুবকদের জন্য লক্ষ লক্ষ নতুন কর্মসংস্থানের সুযোগ তৈরি করছে। উদাহরণস্বরূপ, আজ ভারতে সেমিকন্ডাক্টর উৎপাদনের জন্য একটি সম্পূর্ণ সাপ্লাই চেইন তৈরি করা হচ্ছে। ভবিষ্যতে, ১০টি প্রধান ভারতীয় সেমিকন্ডাক্টর ইউনিট বিশ্বব্যাপী নিজেদের ছাপ ফেলবে। এগুলি বিপুল সংখ্যক ভারতীয় যুবকের সম্ভাবনা, তাদের মেধা, তাদের প্রতিশ্রুতি এবং স্বাভাবিকভাবেই, কর্মসংস্থানের সুযোগকে কাজে লাগাবে। ভারত জাহাজ নির্মাণ থেকে শুরু করে জাহাজ মেরামত ও ওভারহোলিং পর্যন্ত একটি ইকোসিস্টেমও তৈরি করছে। এর জন্য প্রায় ৭৫,০০০ কোটি টাকা বিনিয়োগ করা হচ্ছে। একইভাবে, আমরা ভারতের অভ্যন্তরে একটি সম্পূর্ণ এমআরও ইকোসিস্টেম, অর্থাৎ রক্ষণাবেক্ষণ, ওভারহোল এবং মেরামত সুবিধা তৈরি করছি। এটি দেশের বিমান যাতায়াত ক্ষেত্রকে ব্যাপকভাবে উপকৃত করবে এবং এটি অবশ্যই ভারতের যুবকদের জন্য নতুন কর্মসংস্থানের সুযোগ তৈরি করবে।

 

বন্ধুগণ,

 

ভারত আজ একটি প্রধান ইলেকট্রনিক্স উৎপাদনকারী দেশ। এবং আমরা ভারতের মধ্যেই সম্পূর্ণ ইলেকট্রনিক্স ভ্যালু চেইন গড়ে তুলছি। চলমান পিএলআই প্রকল্পের ফলে দেশে রেকর্ড পরিমাণ ইলেকট্রনিক্স উৎপাদন হচ্ছে এবং লক্ষ লক্ষ যুবক-যুবতীও কর্মসংস্থান পাচ্ছে।

 

বন্ধুগণ,

 

ভারতের সরকারি ও বেসরকারি ক্ষেত্র যৌথভাবে এই ধরনের অসংখ্য উদ্যোগে বিপুল পরিমাণে বিনিয়োগ করছে। এই বিনিয়োগ দেশের যুবকদের কর্মসংস্থান দিচ্ছে এবং তাদের স্বপ্ন পূরণ করছে। একজন সরকারি কর্মচারী হিসেবে, যা আজ আপনার নিয়োগপত্র পূরণ করার পর আপনার পরিচয় হয়ে উঠবে, আপনাকে সর্বদা মনে রাখতে হবে যে দেশের জন্য ব্যবসা-বাণিজ্যের সরলীকরণ কতটা গুরুত্বপূর্ণ।

 

বন্ধুগণ,

 

ভারতের উন্নয়ন ও কর্মসংস্থান সৃষ্টির ইতিহাসে এটি একটি সুপরিচিত সত্য, এবং আপনারা জানেন যে পরিকাঠামো এক্ষেত্রে একটি বিশাল ভূমিকা পালন করে। গ্রাম, ছোট শহর এবং প্রত্যন্ত অঞ্চলগুলো যখন উন্নয়নের সঙ্গে সংযুক্ত থাকে, তখনই একটি দেশের অগ্রগতির সুফল আরও বেশি মানুষের কাছে পৌঁছাতে পারে। গত ১২ বছরে রেলপথ, মহাসড়ক, বিমানবন্দর, লজিস্টিকস, বন্দর এবং ডিজিটাল পরিকাঠামো অভাবনীয় গতিতে প্রসারিত হয়েছে এবং প্রতিটি স্তরে উন্নয়ন চলছে। আজ, আপনি আপনার এলাকার যেকোনো দিকে ১০০ কিলোমিটার ভ্রমণ করলেই দেখতে পাবেন যে ভারত সরকারের কিছু না কিছু উন্নয়ণকর্ম চলছে। এমনকি গ্রামেও দ্রুত পরিবর্তন দৃশ্যমান হচ্ছে। বর্ধিত সংযোগ ব্যবস্থা কৃষক, ছোট ব্যবসায়ী এবং শিক্ষার্থীদের জন্য নতুন সম্ভাবনার দ্বার উন্মুক্ত করেছে। আজ লক্ষ লক্ষ পরিবারের স্থায়ী বাড়ি রয়েছে। এর অর্থ হলো, বিশ্বের অনেক দেশে ইতোমধ্যে যতগুলো নতুন বাড়ি রয়েছে, আমরা গত এক দশকে তার থেকে বহুগুণ বেশি বাড়ি তৈরি করেছি। শুধু তাই নয়, আমরা আমাদের পরিচ্ছন্নতা অভিযানের কথা কাউকে ভুলতে দিই না, এবং আমরাও ভুলি না। এতে শৌচাগার একটি অত্যন্ত গুরুত্বপূর্ণ ভূমিকা পালন করে, এবং আমরা সেদিকেও জোর দিচ্ছি। আজ কোটি কোটি বাড়িতে বিদ্যুৎ পৌঁছেছে। ছাদে উৎপাদিত সৌরশক্তির ক্ষেত্রে অনেক নতুন বিক্রেতা এসেছেন। এখন জল জীবন মিশনের দিকে তাকান, যা ট্যাপের জল সরবরাহ করছে। আমি লক্ষ্য করছিলাম যে আমি শহরগুলিতে পিএনজি সংযোগ বাড়াতে চেয়েছিলাম, কিন্তু আমরা যথেষ্ট প্লাম্বার খুঁজে পাচ্ছিলাম না; একটি ঘাটতি ছিল, কারণ বিপুল সংখ্যক প্লাম্বার জল জীবন মিশনে নিযুক্ত ছিলেন। এখন, এখানে আমাদের বিদ্যুতের জন্য বড় শহরগুলিতে দ্রুত পিএনজি সংযোগ বাড়াতে হয়েছিল, তাই আপনি কল্পনা করতে পারেন যে কখনও কখনও যখন লোকের প্রয়োজন হয়, তখন লোকের অভাব দেখা যায়।

 

বন্ধুগণ,

 

এই পরিবর্তনগুলোর প্রভাব শুধু সাধারণ নাগরিকদের সুবিধার মধ্যেই সীমাবদ্ধ নয়। গ্রামে গ্রামে রাস্তাঘাট পৌঁছেছে, ফলে বাজারে যাতায়াত সহজ হয়েছে। উন্নত বিদ্যুৎ সংযোগের ফলে ক্ষুদ্র শিল্পের বিকাশ ঘটেছে। গ্রামে গ্রামে কৃষিপণ্যের মূল্য সংযোজন শুরু হয়েছে। আগে মানুষ লাল লঙ্কা বিক্রি করত, কিন্তু এখন বিদ্যুৎ থাকায় তাঁরা লঙ্কার গুঁড়ো তৈরি করে, তা প্যাকেট করে বিক্রি করছেন। ফলস্বরূপ, গ্রামের ক্ষুদ্র শিল্পগুলো সমৃদ্ধ হচ্ছে। ডিজিটাল সংযোগ বৃদ্ধির ফলে গ্রামবাসীরা বিশ্বের সঙ্গে যুক্ত হচ্ছেন, আধুনিকতার সঙ্গে একীভূত হচ্ছেন। শহর ও গ্রামের মধ্যেকার পার্থক্য কমে আসছে, এবং এটি অর্থনীতির গতিকে ত্বরান্বিত করেছে। এই সবকিছুর ইতিবাচক প্রভাব দেশের যুবকদের জন্য একটি উজ্জ্বল ভবিষ্যৎ নিশ্চিত করে। শুধু কর্মসংস্থানই তৈরি হচ্ছে না, বরং জাতিও নতুন করে আত্মমর্যাদা ফিরে পেয়ে এগিয়ে যাচ্ছে এবং লক্ষ লক্ষ মানুষ নতুন সুযোগ পাচ্ছে।

 

বন্ধুগণ,

 

আজ ভারতের যুবকদের সামনে এগিয়ে যাওয়ার এবং তাঁদের স্বপ্ন পূরণ করার এমন সুযোগ রয়েছে যা আগে কখনও দেখা যায়নি। আমি কাউকে দোষ দিচ্ছি না, কিন্তু বাস্তবতা হলো সবকিছুই খুব দ্রুত গতিতে, বিশাল পরিসরে এবং বৈচিত্র্যে পরিপূর্ণ হয়ে ঘটছে। উৎপাদন, প্রযুক্তি, স্টার্টআপ, ডিজিটাল পরিষেবা, রেল, প্রতিরক্ষা, এমনকি মহাকাশসহ বিভিন্ন ক্ষেত্রে আমাদের জন্য অগণিত সুযোগ অপেক্ষা করছে। আমাদের প্রচেষ্টা হলো, যত বেশি সম্ভব তরুণ-তরুণী যেন এই নতুন সুযোগগুলো কাজে লাগাতে পারে এবং দেশের যুবসমাজ তাদের প্রতিভা প্রদর্শনের জন্য পর্যাপ্ত সুযোগ পায়। এজন্য, দক্ষতা উন্নয়ন, শিল্প-সংযুক্ত শিক্ষা এবং ভবিষ্যৎ প্রযুক্তির উপর ক্রমাগত জোর দেওয়া হচ্ছে। আইটিআইগুলোকে আধুনিকীকরণ করা হচ্ছে। জাতীয় দক্ষতা প্রশিক্ষণ প্রতিষ্ঠানগুলোকে শক্তিশালী করা হচ্ছে। পিএম সেতুর মতো উদ্যোগগুলো এই দিকেই কাজ করছে।

 

বন্ধুগণ,

 

গত কয়েক বছরে দেশে স্ব-কর্মসংস্থান এবং উদ্যোক্তা হওয়ার একটি নতুন সংস্কৃতি গড়ে উঠেছে। ভারত বিশ্বের তৃতীয় বৃহত্তম স্টার্টআপ ইকোসিস্টেম। এই পরিসংখ্যানটি মনে রাখবেন, দেশে ২ লক্ষ ৩০ হাজারেরও বেশি স্বীকৃত স্টার্টআপ রয়েছে। এবং তাদের মধ্যে তরুণরাও জড়িত। গুরুত্বপূর্ণ বিষয় হলো, এই পরিবর্তন শুধু বড় শহরগুলিতেই সীমাবদ্ধ নয়, এবং এতে আমি সবচেয়ে বেশি আনন্দিত। আজকাল টিয়ার-২ এবং টিয়ার-৩ শহরগুলির বহু তরুণ-তরুণীও স্টার্টআপ এবং উদ্ভাবনের জগতে তাদের শক্তি প্রদর্শন করছে; তাদের সম্ভাবনা উল্লেখযোগ্য। এই পরিবর্তন এখন দেশের অর্থনীতির একটি গুরুত্বপূর্ণ অংশ। এই পরিবর্তনে আমাদের নারীদের ভূমিকাও ক্রমাগত বাড়ছে। আজ বিপুল সংখ্যক নারী-নেতৃত্বাধীন স্টার্টআপের কথা শুনে আমি গর্বে ভরে যাই। আমি বিশ্বকে বলি যে আমাদের দেশে স্টার্টআপে নারীদের ভূমিকা উল্লেখযোগ্যভাবে বাড়ছে এবং বহু নারী এগিয়ে আসছেন। মুদ্রা প্রকল্পের অধীনে লক্ষ লক্ষ নারী আর্থিক সহায়তা পেয়েছেন। পিএম স্বনিধির মতো প্রকল্পগুলিও লক্ষ লক্ষ নারীকে স্বাবলম্বী হওয়ার সুযোগ দিয়েছে। আজকাল গ্রামে ও ছোট শহরগুলোতে আগের চেয়ে অনেক বেশি নারী নিজেরাই নতুন উদ্যোগ শুরু করছেন।

 

বন্ধুগণ,

 

এই নীতি ও সিদ্ধান্তের কথা সম্প্রচারের মাঝে, আপনাদের আরও একটি কথা অবশ্যই মনে রাখতে হবে। যেকোনো ব্যবস্থার প্রকৃত শক্তি তার জনগণের মধ্যেই নিহিত থাকে। জনগণই জনগণের শক্তি, জনগণের ক্ষমতা, এবং এই জনগণের ক্ষমতাই জাতীয় শক্তি সৃষ্টি করে। আপনারা যে ব্যবস্থার অংশ হতে চলেছেন, তা লক্ষ লক্ষ দেশবাসীর জীবন, তাদের আশা-আকাঙ্ক্ষার সঙ্গে সরাসরি সংযুক্ত। সরকারি চাকরি হলো মানুষের জীবনকে সহজ করার একটি মাধ্যম। আপনারা যে বিভাগেই কাজ করুন না কেন, আপনাদের আচরণ, সংবেদনশীলতা এবং দৃষ্টিভঙ্গি অত্যন্ত গুরুত্বপূর্ণ হবে। দেশ আপনাদের উপর আস্থা রেখেছে। এখন আপনাদের কাজ, চালচলন, কথা এবং আচরণের মাধ্যমে সেই আস্থাকে আরও শক্তিশালী করা আপনাদের দায়িত্ব। দেশবাসীর হৃদয়ে এক নতুন বিশ্বাস পূর্ণ হবে এবং আপনাদের সান্নিধ্যে এসে তারা নতুন আশা নিয়ে এগিয়ে যাবে। অতএব, প্রত্যেক তরুণ কর্মযোগীর উচিত তাদের কাজকে একটি দায়িত্ব হিসেবে দেখা। আর আমার কাছে, আপনারা অনেক মূল্যবান। অতীতে আমরা শুনতাম, "সহস্রবাহু সম্পন্ন অমুক, সহস্রবাহু সম্পন্ন তমুক ।" আজ আপনারাই সরকারের বাহু, আপনারাই সরকারের শক্তি। যাঁরা ইতিমধ্যেই সরকারে আছেন, তাঁরা যেমন আছেন, তেমনি যাঁরা নতুন এসেছেন, তাঁরাও আছেন। আজ ভারতের জনগণের আকাঙ্ক্ষা দ্রুতগতিতে বাড়ছে, এবং আমি এটিকে উন্নয়নের একটি ইতিবাচক লক্ষণ বলে মনে করি। আমাদের জনগণের আকাঙ্ক্ষা বুঝতে হবে এবং সেই অনুযায়ী সমান দ্রুত গতিতে কাজ করতে হবে। এমন পরিস্থিতিতে, সরকারি চাকরিতে প্রবেশকারী তরুণদের ভূমিকা অত্যন্ত গুরুত্বপূর্ণ হয়ে উঠেছে। আপনাদের অবশ্যই ক্রমাগত শিখতে হবে এবং নতুন প্রযুক্তি, নতুন ব্যবস্থা ও নতুন চাহিদার জন্য নিজেদের প্রস্তুত করতে হবে। এক্ষেত্রে আইগট কর্মযোগী প্ল্যাটফর্মটি খুব সহায়ক হবে। কর্মযোগী প্রারম্ভ-এর মতো মডিউলগুলি আপনাদের দায়িত্বগুলি বুঝতে অনেক সাহায্য করবে। আমি আপনাদের এর সর্বোচ্চ সুবিধা নিতে অনুরোধ করছি।

 

বন্ধুগণ,

 

আজ ভারতের যুবসমাজ বিশ্বের প্রতিটি ক্ষেত্রে নিজেদের ছাপ রাখছে। এই একই চেতনা, এই শক্তি জনসেবার ক্ষেত্রেও প্রতিফলিত হওয়া উচিত। এমন যুবকদের প্রচেষ্টাতেই একটি উন্নত ভারত গড়ে উঠবে, যারা তাদের কাজকে দেশ ও জনগণের সেবার মাধ্যম হিসেবে বিবেচনা করে। আমাদের দেশে বলা হয় যে, জনগণের সেবা করাই ঈশ্বরের সেবা। আমার পূর্ণ বিশ্বাস আছে যে, আজ নিয়োগপত্র প্রাপ্ত আমাদের তরুণ সহকর্মীরা ভারতের উন্নয়ন যাত্রায় নতুন গতি আনবে। আপনাদের কাজ এবং আপনাদের সিদ্ধান্ত একটি উন্নত ভারত গড়ার সংকল্পকে পূর্ণতা দেবে। এবং আপনারা সেই মন্ত্রটি কখনও ভুলবেন না। আমাদের মন্ত্র হলো: নাগরিকরাই ঈশ্বর। নাগরিকরাই ঈশ্বর। নাগরিকদের কল্যাণ আমাদের কর্তব্য। আবারও, আজ নিয়োগপত্র প্রাপ্ত সকল তরুণ-তরুণীকে তাদের ভবিষ্যৎ জীবনের জন্য এবং দেশসেবার এই সুযোগটি কাজে লাগানোর জন্য আমার আন্তরিক শুভেচ্ছা জানাই। আপনাদের সকলকে অনেক ধন্যবাদ।