CM addresses at E-library of laws project of Bar Council of Gujarat

Published By : Admin | September 16, 2012 | 18:40 IST

बार में आया हूँ, 12/12 में मुझे जरूरत है और 12/12 में बार जरूर काम आएगा। अक्लमंद को इशारा काफी है..!

मित्रों, गुजरात की विकास यात्रा से देश और दुनिया अब पूरी तरह से परिचित है। 21वीं सदी की जब शुरूआत हुई, तब इतनी ज्यादा आशा थी, समग्र विश्व भारत की तरफ देख रहा था और दुनिया को ऐसा लगता था कि भारत 21वीं सदी का नेतृत्व करेगा और यह आशा स्वाभाविक थी। एक बार मुझे वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में बुलाया गया था। दुनिया भर के सभी वरिष्ठ लोग उपस्थित थे। और वहाँ जो प्रश्र आते थे, क्वेश्चन-आन्सर का भी एक कार्यक्रम था और हम एशियन कंट्री के पांच-सात लोग वहाँ बैठे थे। इसमें चाइना भी था, जापान भी था और प्रतिनिधियों में विश्व भर के सभी धुरंधर थे। पर ज्यादातर सभी प्रश्र मेरी ही तरफ आ रहे थे। नरेन्द्र मोदी के कारण नहीं, इंडिया का मैं वहाँ था इस कारण। और भारत की ओर से कैसी अपेक्षाएं, आशाएं थी ये प्रश्रों से पता चलता था। लेकिन इस दशक में जो कुछ भी हमने देखा और पिछले एक साल में जो हमने पूरे विश्व को निराश कर दिया है, जिस तरह से पूरी दुनिया में अपने देश की बदनामी हो रही है और खासकर अभी जब 19 राज्यों में अंधकार, देश की 60 करोड़ जनता 48 घंटे तक पूरी तरह से बिजली से वंचित... 21वीं सदी का नेतृत्व करने वाले देश की एक छ्वी होती है और दूसरी ओर घोर अंधेरा, आप कल्पना कर सकते हो कि दुनिया को कितना बड़ा धक्का लगा होगा। मित्रों, एक भारतवासी होने के नाते पीड़ा होती है। अपार्ट फ्रोम पॉलिटिक्स, मैं यहाँ आपके पास राजनीतिक चर्चा करने नहीं आया हूँ। देश को निराशा होती है, किसी भी देशभक्त नागरिक को बहुत पीड़ा होती है। और उस समय चाहे वाशिंगटन पोस्ट हो या वॉल स्ट्रीट जर्नल हो, ये हिन्दुस्तान की इस कर्म कथा को लिखा और इसमें तीन पैराग्राफ गुजरात के लिखें कि पूरा देश अंधकार में डूबा हुआ था तब एक मात्र गुजरात था जहाँ बिजली जगमगा रही थी। हंसू कि रोऊँ ये समझ में नहीं आता है, मित्रों। एक तरफ मेरे देश की बदनामी हो रही हो और मेरे गुजरात का जय-जय कार हो रहा हो, कैसी दुविधा..! एक ऐसी विशिष्ट परिस्थिति से देश गुजर रहा है। फ़िलहाल तो रोज ऐसी घटनाएँ हो रही हैं कि जिसके कारण 21वीं सदी का सपना जैसे चूर-चूर हो रहा है, जैसे हम हमारी नजरों के सामने अपने सपनों को नष्ट कर रहे हों ऐसे दृश्य देखने को मिल रहे हैं। और ऐसे समय में इस फील्ड में बैठे लोगों के मन की कोई भूमिका हो सकती है, मित्रों..? ये बात इस कारण से उठा रहा हूँ कि हिन्दुस्तान के आजादी के इतिहास में, इस देश में परिवर्तन करने वाली घटनाओं के मोड़ को देखें तो दो बातें ध्यान आती हैं। दो समूह ऐसे हैं जिनकी सक्रियता ने देश के भाग्य को बदला है। एक शिक्षक वर्ग और दूसरा वकीलों की दुनिया। आजादी के पूरे आंदोलन के नेतृत्व को देखें तो 80% लोगों का बैकग्राउंड लॉ फिल्ड का रहा है। मूल्यों के लिए, सिद्घांतों के लिए लडऩे वाली ये फौज रही है। और जब देश ऐसे संकट में हो तब इस वर्ग द्वारा पूरे देश में एक जागृति का वातावरण क्यों ना बने? फिर एक बार देश में ऐसा विश्वास क्यों पैदा नहीं हो सकता कि भाई, अगर 21वीं सदी एशिया की है, तो 21वीं सदी हिन्दुस्तान की बनाने के लिए हम कृतसंकल्प हैं। और यह सब संभव हो सकता है, मित्रों। जहाँ तक गुजरात के विकास की बात है, अब आप कहीं भी जाओ, गुजरात बोलो तो वो विकास बोलता है और आप विकास बोलो तो वो गुजरात बोलता है। एक ही सिक्के के दो पहलू हो गए हैं।

मित्रों, आज ई-लाईब्रेरी योजना का लोकापर्ण हो रहा है। जो लोग इन्टरनेट की दुनिया से अपरिचित होंगे उन्हें शायद अंदाजा नहीं होगा, लेकिन जो लोग परिचित हैं उन्हें पूरी तरह से अंदाजा होगा कि कितनी बड़ी शक्ति का स्रोत आज आपके हाथ में आ रहा है। और जिनकों इसकी आदत पड़ जाती है वो इसके बिना जी नहीं सकते ऐसी स्थिति हो गई है। आपने कई गुरु बनाए होंगे, पर एक बार गूगल को गुरू बनाया तो, ‘सब दु:खों की एक दवा’, आपको जो चाहिए वह एक कल्पवृक्ष की तरह गूगल हाजिर कर देता है..! टेक्नोलॉजी ने कमाल किया है, मित्रों। मैं चाहूँगा कि मेरे बार के मित्र इस व्यवस्था का खूब उपयोग करें, नहीं तो कई बार क्या है कि जैसे हमारी सरकार में भी हम खूब सारा खर्चा हार्डवेयर में करते हैं, कम्प्यूटर लाते हैं और प्रिंटर लाते हैं और तरह तरह का सब लेते ही रहते हैं, और ज्यादातर वह सब टेबल पर फ्लावरपॉट की तरह शोभा देता है। मैं सरकार में आया तब मैंने कम्पलसरी एक नियम बनाया था, कि अब मैं आपको ई-मेल करूंगा, सुबह में आप मुझे ई-मेल का जवाब देना। तभी तो ई-मेल खोलना सभी ने शुरू किया। एक बार इसकी आदत पड़ने के बाद इसकी ताकत का अंदाजा होता है। बार के मित्रों से मेरी विनती है, आप कल्पना नहीं कर सकते इतना बड़ा औजार आपके हाथ में आया है। इसके कारण आपकी मेहनत तो बिल्कुल कम हो जाएगी, बहुत कम। एक बारहवीं कक्षा का विद्यार्थी भी आपके यहाँ यदि इस काम से जुड़ा हुआ होगा तो भी आपकी मेहनत बिल्कुल नहीं के बराबर हो जाएगी। और क्वालिटेटिव सुधार जो आएगा, आपकी बात का, आपके रेफरेंस का, ये सुधार शायद सैंकड़ों गुना बढ़ सकता है। आप तालुका की कोर्ट में काम करते होंगे, और कभी किसी जिल्ला कोर्ट के आदमी को पता चलता है कि फलाना तालुका की कोर्ट में फलाना मुद्दे पर फलाना वकील ने ऐसी दलील की थी, तो उसको आश्चर्य होगा कि इतनी सारी जानकारी इसके पास आई कहाँ से? इसका आधार यह ई-लाइब्रेरी है। ये बात ठीक है कि खाली जमानत और ऐसे सारे छोटे-मोटे काम करते हों उनको... ऐसे मुझे आपकी दुनिया की ज्यादा जानकारी नहीं है, क्योंकि मेरी जिंदगी में किसी दिन जरूरत नहीं पड़ी। कभी रॉंग साईड पार्किंग का केस भी मेरे उपर नहीं लगा। इस 2008 के बाद मुझे पहली बार पता चला कि इतनी बड़ी दुनिया है आपकी, वरना 2008 तक तो मुख्यमंत्री था फिर भी किसी दिन मुझे इतनी घनिष्ठता हुई नहीं थी। 2008 के बाद दिशा बदली, दशा नहीं बदली है..!

मित्रों, गुजरात ने ई-गर्वनेंस के क्षेत्र में बहुत सारे इनिश्यिेटिव लिए हैं। मित्रों, आपको जानकर खुशी होगी कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 29 अवार्ड गुजरात सरकार को ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में मिले हैं। और हम टेक्नोलॉजी का कितना उपयोग करना चाहते हैं, मैंने एक बार प्रधानमंत्री को पत्र लिखा। वैसे तो उनको अक्सर लिखता रहता हूँ, और किसको लिखूं..? मैंने प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखा। सामान्य तौर पर मुख्यमंत्री पत्र लिखते ही हैं, कोई लिखता है किे भाई, हमारा जरा गेंहूँ का कोटा बढ़ा दो तो अच्छा होगा, केरासीन का कोटा बढ़ा दो तो अच्छा होगा, रोड के कंस्ट्रक्शन का थोड़ा बजट बढ़ा दो तो अच्छा... ये सारा रूटीन होता है स्टेट गवर्मेंट और सेन्ट्रल गवर्मेंट के बीच। ऐसा कुछ मैं लिखता नहीं, क्योंकि हमें ये सब मिलेगा नहीं। फिर मुझे लगा कि इनके काम का ना हो ऐसा कुछ तो मांगे हम..! इसलिए मैंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा कि एक सैटेलाइट मुझे दो, सैटेलाइट मांगा..! अब आप मुझे बताओ कि वहाँ कैसा बम्ब का गोला गीरा होगा..! दो साल तक मेरा पत्र यहाँ से वहाँ भटकता रहा, कि इसका किया क्या जाए? मुझे था कि शायद ग्रूप ऑफ मिनीस्टर्स की कोई कमेटी बनेगी, क्योंकि वहाँ ज्यादातर ऐसा है कि कोई भी प्रश्र आए तो ग्रूप ऑफ मिनीस्टर्स... एक रास्ता निकाल रखा है वहाँ। लगभग दो साल बाद मुझे जवाब आया, दो वर्ष लगे, क्योंकि कोई रोड मांगे तो क्या करना है वह पता है उन्हें, चावल मांगे तो क्या करना है वह उन्हें पता है, भाजपा की सरकार हो तो क्या जवाब होगा, यू.पी.ए. की सरकार हो तो क्या... सब उन्हें पता है, इसमें क्या करना होगा ये उन्हें पता नहीं था..! लगभग दो साल में मुझे जवाब मिला, और शायद इनकी खूब कसरत हो गई होगी, किसी दिन वह फाइल मैं देखूंगा, कभी भी हासिल करुंगा मैं, क्या क्या हुआ है..! दो साल में जवाब आया कि पूरा का पूरा सैटेलाइट तो नहीं दे सकते, कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, पर आपको 36 मैगाहर्टस उपयोग करने का अधिकार देते हैं। यानि लगभग 90-95% दे दिया ऐसा कह सकते हैं..! मित्रों, इस देश में कोई स्टेट ऐसा नहीं है कि जिसके मन में ऐसी कल्पना आयी हो और इस प्रकार की कभी मांग की हो। और आपको कभी समय मिले, बार वाले मित्रों को रुचि हो तो जब आप गांधीनगर जाओ तो बहुत बड़ी बड़ी डिश लगा हुआ एक भवन है, ‘बायसेग’, भास्कराचार्य इंस्टिट्यूट। मैं चाहता हूँ कि हाईकोर्ट बार, डिस्ट्रिक्ट बार के लोग देखने जाएं कि टेक्नोलॉजी द्वारा हम किस तरह से काम कर रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, हमारे मछुआरे मछली पकडऩे जाते हैं तो बेचारे फिरते-फिरते जाल बिछाते जाते हैं और कुछ मेल खाता है तो उसे वह शाम तक इकट्ठा करके वापस आते हैं, वरना तो तीन-तीन दिन तक समुद्र में घूमते रहते हैं। हम सैटेलाइट का उपयोग करके इन्हें मोबाइल फोन पर एक्जेक्ट ऐड्रेस देते हैं कि अभी मछलियों का यहाँ पर समूह है, तो वे उस तरफ जाते हैं और उनकी मेहनत 10% हो जाती है। क्योंकि मछलियां लगभग जहाँ पर एकत्र होती हैं, वहाँ लगभग 18 से 20 घंटे उस जगह पर रुकती हैं, फिर स्थानांतरण करती हैं। इतने में वे पहुंच जाते हैं, 5-10 नोटिकल माइल के अंतर में हो तो पहुंच जाते हैं और लगभग रोज के रोज कमाई करके वापस आ सकते हैं।

इसलिए टेक्नोलॉजी का कितना उपयोग हो सकता है उसका एक उदाहरण आपको दे रहा हूँ। आप मित्रों, रोड से मुंबई जाओ तो भिलाड के पास गुजरात की एक चैकपोस्ट है और दूसरी तरफ महाराष्ट्र की चेकपोस्ट है, अछाड में। जिस रोड पर गुजरात की चेकपोस्ट है, उसी रोड पर महाराष्ट्र की चेकपोस्ट है। जो वेहीकल गुजरात चेकपोस्ट पर से जाता है, वही वेहीकल महाराष्ट्र चेकपोस्ट पर से भी गुजरता है, जाते या आते समय। जितना टैक्स गुजरात चैकपोस्ट पर है, उतना ही टैक्स महाराष्ट्र चैकपोस्ट पर भी है। लेकिन गुजरात के चैकपोस्ट पर ई-गर्वेनेंस की व्यवस्था है, कैमरों की व्यवस्था है, कम्प्यूटराइज्ड सिस्टम है, मेरे ऑफिस में से देखा जा सकता है कि भिलाड चैकपोस्ट पर क्या चल रहा है... दूसरी तरफ महाराष्ट्र का चैकपोस्ट है, वहाँ पर सारे भाई मेहनत करते हैं... और इसका परिणाम यह है कि महाराष्ट्र के चैकपोस्ट पर टैक्स वसूली की आय से गुजरात के चैकपोस्ट पर पिछले पांच वर्ष में 700 करोड़ रुपया ज्यादा आय हुई है। ई-गवर्नेंस मिन्स ईज़ी गवर्नेंस, इफेक्टिव गवर्नेंस एंड इकोनॉमिक गवर्नेंस। ट्रांसपेरेंसी लाने में टेक्नोलॉजी बहुत बड़ी भूमिका निभा सकती है मित्रों, और इसका जीता-जागता उदाहरण है यह भिलाड चैकपोस्ट।

मित्रों, डेमोक्रेसी का कई बातों का महत्व है, पर मेरे लिए डेमोक्रेसी की सबसे बड़ी शक्ति इसकी ग्रीवन्स रिड्रेसल सिस्टम कैसी है इसके ऊपर निर्भर है। गरीब से गरीब इंसान की शिकायत सुनने की व्यवस्था हो उसे उत्तम डेमोक्रेसी की व्यवस्था मैं मानता हूँ। इसकी आवाज को कहीं पर वजन मिलना चाहिए। मैंने टेक्नोलॉजी के आधार पर एक कार्यक्रम शुरू किया है, जिसका नाम है ‘स्वागत ऑनलाइन’, ‘स्वागत’ कार्यक्रम। हर महीने के चौथे गुरूवार को मैं ये कार्यक्रम करता हूँ। आम तौर पर हिन्दुस्तान में लगभग सभी पॉलिटिशियन लोक-दरबार करते हैं, सभी मुख्यमंत्री लोक दरबार करते हैं, हमारे यहाँ भी करते थे। और लोक दरबार होता है तो सारी पब्लिक वहाँ आ जाती है और आठ बजे का टाइम हो तो दस-साढ़े दस बजे साहब आते हैं, इससे पहले इन लोगों के प्यून वगैरह सब चलता है... भाई चलो, चलो जल्दी, लाओ कागज दे दो, कागज दे दो... लोक दरबार वहाँ पूरा हो जाता है..! यह मैं सत्य घटना का वर्णन कर रहा हूँ। मैंने ऐसा नहीं किया, कोई लोक दरबार नहीं किया। यदि आपको याद हो तो शुरूआत में मुझ पर जो गालियाँ पडती थीं, उसमें यह मुद्दा भी शामिल था। मुझे तो हर साल दि गयी गालियों की आईटम बदलती रहती है, गालियाँ देने वालों को अब नई-नई रिसर्च करनी पड़ती है। मैंने टेक्नोलॉजी के माध्यम से ‘स्वागत ऑनलाइन’ कार्यक्रम, इट्स वन टाइप ऑफ दरबार..! तालुका स्तर पर, जिल्ला स्तर पर और राज्य स्तर पर मैं एक दिन में 1400 लोगों को ऑनलाइन सुनता हूँ और उसमें 98% हल हो जाता है। सरकार में दो प्रकार की चीज होती है, एक तो निपटाए और उसे संतोष मिलता है कि फाइल निपट गई। मेरी कोशिश निपटाना नहीं होता, मेरा आग्रह रहता है हल करने का। आइदर पॉजिटिव ऑर नेगेटिव, हिम्मत चाहिए सरकार में कि टेक द पोजीशन, स्टैंड लो, भाई..! अनुभव ऐसा रहा है कि इसमें 98% एचीवमेंट है और इस ‘स्वागत ऑनलाइन’ के कार्यक्रम की प्रतिष्ठा इतनी ज्यादा है कि गाँव का कोई बिल्कुल अनपढ़ व्यक्ति भी कलेक्टर कचहरी में जा कर के यदि कोई उन्हें सुनता नहीं है तो कहता है कि कोई बात नहीं साहब, यदि आपको ठीक से नहीं सुनना है तो मैं ऑनलाइन जाऊँगा..! वो जैसे ही ’ऑनलाइन’ कहता है, उसके साथ ही कलेक्टर बाहर आकर “अरे, आओ-आओ, बैठो, क्या काम था..?” साहब, गाँव का आदमी भी अब समझता है कि ये ‘ऑनलाइन’ मतलब क्या..! इसलिए टेक्नोलॉजी से कितनी बड़ी ताकत खड़ी की जा सकती है, इसका ये उत्तम उदाहरण है। ये सभी चीजों का उपयोग आने वाले दिनों में बढऩे वाला है। आज हममें से भी जो लोग बेहतर किस्म के मोबाइल का उपयोग करते हैं, उन लोगों को पता है कि अगर थोड़ी सी रुचि लें तो पूरी दुनिया उनकी हथेली में होती है मित्रों, पूरी दुनिया अपनी हथेली में होती है। मोबाइल गवर्नेंस की ओर विश्व जा रहा है। अब वो दिन नहीं होंगे कि आपको तारीख के लिए कोर्ट में जाना पड़े, अब तो घर पर एस.एम.एस. के जरिए पता चल जाएगा कि मुद्दत पड़ी कि नहीं। इसका भी चार्ज ले लेना, कोई बात नहीं..! पर टेक्नोलॉजी का उपयोग तो करो, भाई।

खैर मित्रों, अनेक क्षेत्र ऐसे हैं कि जहाँ टेक्नोलॉजी का उपयोग पूरे विश्व को बदल रहा है। बदल रहे युग में ये सभी टेक्नोलॉजी के साथ नाता जितना जोड़ोगे, उतना ही उपकारी रहेगा। ई-लाईब्रेरी एक उत्तम शुरूआत है। देश के दूसरे भागों में तो आप इसकी अपेक्षा भी मत करना, भाईयों..! हमारी एक बार मीटिंग थी। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस, प्रधानमंत्री, राज्य के मुख्यमंत्री और राज्य के हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस, इन लोगों की एक मीटिंग पहले चलती थी। मेरे लिए पहली बार ऐसे समाचार थे, वहाँ एक चर्चा हुई पेन्डेन्सी की, कि भाई इतने सारे केसों का जमाव क्यों है। तो एक प्रदेश वालों का ऐसा कहना था कि हफ्ते में मुश्किल से दो-तीन घंटे कोर्ट चलती है। उसका कारण क्या है? कारण यह है कि लगभग सभी कोर्ट का निर्माण ऐसा है कि प्राकृतिक रोशनी नहीं है और लाइट चलती नहीं है, इसलिए केस चलाना मुश्किल होता है। आप विचार करो, इतनी सारी पगार चुकाई जाती हैं, इतने सारे रूपए खर्च किए जाते हों, और हफ्ते में दो या तीन घंटे जब बिजली आए उस समय कोर्ट चले, ऐसी दुर्दशा पूर्ण स्थिति में देश चलता हो, इसके सामने गुजरात कहाँ जा रहा है इसका आप अंदाजा कर सकते हो। कोई भी कसौटी पर गुजरात नई-नई ऊंचाइयाँ पार कर रहा है। सही मायनों में एक समृद्घ गुजरात के लिए कितने पैरामीटर में समृद्घि हो सकती है, इन सभी बातों को केंद्रित करते हुए हम आगे बढ़ रहे हैं।

मुझे आप लोगों के बीच आने का अवसर मिला, मैं आपका बहुत बहुत आभारी हूँ और यह ई-लाइब्रेरी गुजरात के न्याय जगत के लिए एक नई शक्ति देने वाली बने। यह ई-लाइब्रेरी न्यायिक दुनिया के साथ जुड़े हुए मेरे वकील मित्रों को इन्फोर्मेशन से सक्षम बनाए, खूब शक्तिशाली बनाए। वास्तव में वकीलों को सशक्त करने का यह हथियार है और अगर वकील सशक्त हों तो पूरी न्यायपालिका सशक्त होती है, उस उद्देश्य के लिए यह योगदान है। आप इसका भरपूर उपयोग करें, इसी अपेक्षा के साथ बहुत बहुत शुभकामनाएं..!

धन्यवाद...!

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ভারত মাতা কি জয়!

ভারত মাতা কি জয়!

দাদরা ও নগর হাভেলি, দমন ও দিউ-এর প্রশাসক প্রফুল ভাই প্যাটেল, সংসদে আমার সহকর্মী কালাবেন দেলকর, দমন পৌর পরিষদের সভাপতি দীপিকা তান্ডেল জি, দমন জেলা পঞ্চায়েতের চেয়ারম্যান ধর্ম বাবু প্যাটেল, সিলভাসা পৌর পরিষদের চেয়ারম্যান সোমনাথ দেবরে জি, দাদরা নগর হাভেলি জেলা পঞ্চায়েতের চেয়ারপার্সন নিশা ভাবসার জি, দিউ পৌর পরিষদের চেয়ারম্যান হরিশ কাপাদিয়া জি, দিউ জেলা পঞ্চায়েতের চেয়ারপার্সন কোটিয়া রঞ্জিতাবেন, এবং এখানে এত বিপুল সংখ্যায় সমবেত আমার প্রিয় ভাই ও বোনেরা,
আপনারা যেমন এখানে সমবেত হয়েছেন, তেমনি লাক্ষাদ্বীপেরও বহু মানুষ ভিডিওর মাধ্যমে আমাদের সঙ্গে যুক্ত আছেন। আজ লাক্ষাদ্বীপে উন্নয়নের এক নতুন সূচনা হয়েছে। লাক্ষাদ্বীপের মানুষের জীবনে বৈপ্লবিক পরিবর্তন আনবে এমন একটি নতুন প্রকল্পেরও উদ্বোধন করা হয়েছে এবং কয়েকটি প্রকল্পের ভিত্তিপ্রস্তর স্থাপন করা হয়েছে।

বন্ধুগণ,

কয়েক বছর আগে, যখন আমি আপনাদের মধ্যে এসেছিলাম, তখন বলেছিলাম যে আমাদের দমন দ্রুত মিনি ইন্ডিয়া হয়ে উঠছে, আর আজ আমি দেখছি, বা-দিকে সমগ্র বাংলা এবং ডান দিকে সমগ্র আসাম। দমন মিনি ইন্ডিয়ার এক জীবন্ত উদাহরণ হয়ে উঠেছে। এখানকার বৈচিত্র্য, বিভিন্ন অঞ্চলের মানুষের বসবাস, আপনাদের মধ্যে সমগ্র ভারতের এক সুন্দর ঝলক তুলে ধরে। আপনারা সকলে এত বিপুল সংখ্যায় আমাদের আশীর্বাদ করতে এসেছেন, এর জন্য আমি আপনাদের সকলকে অনেক ধন্যবাদ জানাই।

ভাই ও বোনেরা,

আমার দমন ও দিউতে বহুবার আসার সুযোগ হয়েছে। আমি দাদরা ও নগর হাভেলিতেও নিয়মিত যাই। আমি যখন মুখ্যমন্ত্রী বা প্রধানমন্ত্রী ছিলাম না, তখনও এখানে বহুবার এসেছি। কিন্তু এখন যখন আমি এখানে এসে সুশাসনের মডেল দেখি, তখন খুব ভালো লাগে। প্রতিবারই আমার মনে হয় যে আগের বারের তুলনায় এই অঞ্চলটি উন্নয়নের পথে বহু মাইল এগিয়ে গেছে।

 

বন্ধুগণ,

দাদরা ও নগর হাভেলি, দমন ও দিউ কয়েক দশক ধরে উন্নয়নের স্বপ্ন দেখেছিল। আগের প্রজন্ম যারা স্বপ্ন দেখেছিলেন, তারা চলে গেছেন। কিন্তু বর্তমান প্রজন্ম নিজেদের চোখে দেখছে যে, তাদের বাবা-মা ও দাদু-ঠাকুমারা যে স্বপ্নগুলো দেখতেন, তা এখন তাদের চোখের সামনেই পূরণ হচ্ছে। আজও এখানে যোগাযোগ, স্বাস্থ্য, শিক্ষা, পর্যটন এবং নগর পরিকাঠামো সম্পর্কিত অনেক প্রকল্পের উদ্বোধন ও ভিত্তিপ্রস্তর স্থাপন করা হয়েছে। এই উন্নয়নমূলক কাজগুলো দমন এবং সমগ্র কেন্দ্রশাসিত অঞ্চলের মানুষের জীবনকে আরও সহজ করে তুলবে। এগুলো যুবকদের জন্য নতুন সুযোগ তৈরি করবে। এই কাজগুলোর পেছনে প্রফুল ভাই প্যাটেলের দূরদৃষ্টি এবং তাঁর ও তাঁর দলের কঠোর পরিশ্রম স্পষ্টভাবে দৃশ্যমান। এর জন্য আমিও প্রফুল ভাই এবং তাঁর পুরো দলকে সাধুবাদ জানাই। আমি লাক্ষাদ্বীপ এবং দাদরা-নগর হাভেলির জনগণকে অনেক অভিনন্দন ও শুভেচ্ছা জানাই।

বন্ধুগণ,

আজ আপনাদের মধ্যে আসার সময় একটি সুখবর পেলাম। আজ সকালেই আমি দিল্লি থেকে রওনা হয়েছিলা। এইমাত্র যে পরিসংখ্যান ও খবরটি এসেছে তা সত্যিই আনন্দদায়ক; আর আমি আপনাদের সঙ্গে এই আনন্দ ভাগ করে নিতে চাই। আজকের এই পরিসংখ্যান স্পষ্টভাবে প্রমাণ করে যে ভারতের অর্থনীতির ভিত্তি কতটা মজবুত। ২০২৫-২৬ সালে - অর্থাৎ যে অর্থবছরটি সদ্য শেষ হলো তাতে—ভারত ৭.৭ শতাংশ প্রবৃদ্ধির হার অর্জন করেছে। এমনকি ৩১শে মার্চ শেষ হওয়া সর্বশেষ ত্রৈমাসিকেও ভারতের প্রবৃদ্ধির হার ছিল ৭.৮ শতাংশ। এর ফলে ভারত বিশ্বের দ্রুততম উন্নয়নশীল বৃহৎ অর্থনীতিতে পরিণত হয়েছে। প্রত্যেক ভারতীয়রই এতে গর্ববোধ করা উচিত। এটাই আমাদের অগ্রগতির গতি। দেশ আজ 'রিফর্ম এক্সপ্রেস'-এর গতিতে এগিয়ে চলেছে। দেশ আজ বিশাল পরিকাঠামোগত উন্নয়ন এবং দরিদ্রদের কল্যাণে ব্যাপক কর্মযজ্ঞ প্রত্যক্ষ করছে। আর এসব প্রচেষ্টারই ফলস্বরূপ, দেশ আজ দ্রুততম  উন্নয়নশীল বৃহৎ অর্থনীতি হিসেবে এগিয়ে যাচ্ছে। আমরা সবাই জানি যে বিশ্ব আজ নানা সংকটে জর্জরিত এবং বিশ্বের বিভিন্ন দেশের অর্থনীতি অনিশ্চয়তার মুখে পড়েছে। কিন্তু বিশ্বব্যাপী এই চরম সংকটের সময়েও ১৪০ কোটি দেশবাসীর সম্মিলিত প্রচেষ্টায় ভারত কেবল নিজের অবস্থানই ধরে রাখেনি, বরং অন্যদের চেয়ে এগিয়েও রয়েছে। অর্থনৈতিক ক্ষেত্রে এই নতুন উচ্চতা অর্জনের জন্য আমি দেশবাসীকে অনেক অনেক অভিনন্দন জানাই। আমি আবারও দেশবাসীকে আশ্বস্ত করছি যে, বিশ্বজুড়ে বিদ্যমান নানা সংকট সত্ত্বেও দেশ দৃঢ় সংকল্প নিয়ে 'রিফর্ম, পারফর্ম এবং ট্রান্সফর্ম'-এর পথে দ্রুত গতিতে এগিয়ে যাবে। দেশবাসীর কাছে এটাই আমার নিশ্চয়তা।

বন্ধুগণ,

আমাদের কাছে এখন উন্নয়নের পাশাপাশি আমাদের উন্নয়ন মডেলটি যাতে টেকসই হয়, তা নিশ্চিত করাও সমান গুরুত্বপূর্ণ। বিশ্ব পরিবেশ দিবসে আজ আমাদের এই কেন্দ্রশাসিত অঞ্চলটি সেই সংকল্পই বাস্তবায়িত করছে। একদিকে যেমন এখানে হাজার হাজার কোটি টাকার উন্নয়ন প্রকল্পের উদ্বোধন ও ভিত্তিপ্রস্তর স্থাপন করা হয়েছে, তেমনই একই সঙ্গে 'মায়ের নামে একটি গাছ' কর্মসূচির আওতায় প্রায় এক লক্ষ চারাগাছও রোপণ করা হচ্ছে। আমি গর্বিত যে, এটি এমন একটি কেন্দ্রশাসিত অঞ্চল যা সরকারি ভবনগুলোতে সৌরশক্তির শতভাগ ব্যবহারের কৃতিত্ব অর্জন করেছে। আজ দিউ-তে দিনের বেলার বিদ্যুতের সম্পূর্ণ চাহিদা কেবল সৌরশক্তি দিয়েই মেটানো হচ্ছে এবং আমাদের এই উদ্যোগকে আরও এগিয়ে নিয়ে যেতে হবে। সৌরশক্তির মাধ্যমে বাড়িঘরেও বিদ্যুৎ পৌঁছানো উচিত। শুধু তাই নয়, উদ্বৃত্ত বিদ্যুৎ থেকে পরিবারগুলোর আয় করার ব্যবস্থাও থাকা প্রয়োজন। এ লক্ষ্যে বাড়ির ছাদে সৌরবিদ্যুৎ কেন্দ্র স্থাপনের উদ্যোগ শুরু হয়েছে। এসব সাফল্য অর্জনের জন্য আমি আপনাদের সবাইকে সাধুবাদ জানাই।

 

বন্ধুগণ,

আমি এটাও জেনেছি যে, আজকাল দমন-এর মানুষজন একটি পরিচ্ছন্নতা অভিযান চালাচ্ছেন। এটি প্রমাণ করে যে পরিচ্ছন্নতা কীভাবে দমন-এর জনজীবনের সংস্কৃতির একটি অবিচ্ছেদ্য অংশ হয়ে উঠেছে এবং সেই সংস্কৃতির প্রতিফলন তাদের পরিচ্ছন্নতা বিষয়ক প্রচেষ্টায় স্পষ্ট। এই ধরনের গণ-অংশীদারিত্বমূলক প্রচেষ্টার জন্য আমি দমন-এর জনগণকে অভিনন্দন জানাই।

বন্ধুগণ,

দাদরা ও নগর হাভেলি এবং দমন ও দিউ - কেন্দ্রশাসিত অঞ্চল হিসেবে ভারতীয় ঐতিহ্যের অংশ। তাই এদের উন্নয়নের জন্য আমাদের লক্ষ্য কোনো সাধারণ বিষয় নয়। আমার মনে আছে, গত বছর যখন আমি সিলভাসায় এসেছিলাম, তখন আপনাদের সিঙ্গাপুরের উদাহরণ দিয়েছিলাম। আমি বলেছিলাম যে, একসময় সিঙ্গাপুর ছিল একটি ছোট মৎস্যজীবী গ্রাম। কিন্তু সিঙ্গাপুরের মানুষ স্বপ্ন দেখেছিলেন, বড় লক্ষ্য স্থির করেছিলেন এবং আজ সেই সিঙ্গাপুরই বিশ্বের বৃহত্তম বাণিজ্যিক কেন্দ্রে পরিণত হয়েছে। আজ দাদরা ও নগর হাভেলি এবং দমন ও দিউ-ও ঠিক তেমনই স্বপ্ন দেখছে। ‘নমো বিমানবন্দর’, দমনগঙ্গা নদীর ওপর আইকনিক সেতু এবং ‘বিচ ফ্রন্ট’-এ কনভেনশন সেন্টারের মতো প্রকল্পের মাধ্যমে আমরা ভবিষ্যতের বড় বড় সংকল্প বাস্তবায়নের ভিত্তি স্থাপন করছি। এই প্রকল্পগুলোর ফলে আপনাদের যাতায়াত সহজ হবে। এখানে ব্যবসার নতুন নতুন সুযোগ সৃষ্টি হবে। দমন-এর উভয় প্রান্তেই উন্নয়নের গতি ত্বরান্বিত হবে।

বন্ধুগণ,

এখানে হসপিটালিটি বা আতিথেয়তা-কেন্দ্রিক অর্থনীতির সুযোগ বাড়বে এবং সেই সঙ্গে ‘ট্রান্সপোর্ট নগর’-এর মতো সুবিধাগুলো বাণিজ্য ও লজিস্টিকস ব্যবস্থায় নতুন গতি সঞ্চার করবে।

 

বন্ধুগণ,

এই অঞ্চলে ‘ব্লু ইকোনমি’বা সমুদ্র-অর্থনীতি নিয়ে আমরা যে রূপরেখা তৈরি করেছি, তা-ও অত্যাধুনিক পরিকাঠামোর শক্তির মাধ্যমেই বাস্তবায়িত হবে। আর তাই, আজই লাক্ষাদ্বীপের কালপেনি ও কাদমাত দ্বীপে আধুনিক বন্দরের ভিত্তিপ্রস্তর স্থাপন করা হচ্ছে। এই সমস্ত প্রচেষ্টা ‘ব্লু ইকোনমি’-র ক্ষেত্রে দেশের শক্তি বৃদ্ধি করবে এবং আমি আগেই বলেছি, এই উদ্যোগগুলি লাক্ষাদ্বীপের ভাগ্য বদলে দেবে।

বন্ধুগণ,

বিজেপি সরকার তথা আমাদের এনডিএ সরকারের কাছে উন্নয়নের প্রধান মাপকাঠি হলো - দরিদ্র, বঞ্চিত, আদিবাসী এবং মধ্যবিত্ত মানুষের জীবনে পরিবর্তন আনা! আর এ কারণেই স্বাস্থ্য  ক্ষেত্র আমাদের কাছে অত্যন্ত অগ্রাধিকারের বিষয়। বিগত বছরগুলোতে স্বাস্থ্যসেবার ক্ষেত্রে দেশ একটি সামগ্রিক দৃষ্টিভঙ্গি নিয়ে এগিয়ে চলেছে। চিকিৎসা সংক্রান্ত প্রতিটি সমস্যার সমাধান আমরা করেছি। আজ  দরিদ্রতম মানুষেরাও 'আয়ুষ্মান কার্ড'-এর সুবিধা পাচ্ছেন। ৫ লক্ষ টাকা পর্যন্ত বিনামূল্যে চিকিৎসার নিশ্চয়তা তাঁদের রয়েছে।  সময়মতো রোগনির্ণয় নিশ্চিত করতে 'প্রধানমন্ত্রী আয়ুষ্মান আরোগ্য মন্দির'-এর ব্যবস্থা করা হয়েছে। 'জন ঔষধি কেন্দ্র'-এর মাধ্যমে সাশ্রয়ী মূল্যে ওষুধও পাওয়া যাচ্ছে। এই পরিষেবাগুলিকে আরও উন্নত ও আধুনিক করে তুলতে, আজ 'আয়ুষ্মান ভারত ডিজিটাল মিশন'-এর মাধ্যমে স্বাস্থ্যসেবাকে প্রযুক্তির  সঙ্গে যুক্ত করা হচ্ছে।

বন্ধুগণ,

শুধুমাত্র আয়ুষ্মান কার্ড এবং জন-ঔষধি কেন্দ্রের সুবাদেই দরিদ্র ও মধ্যবিত্ত শ্রেণীর প্রায় ২.২৫ লক্ষ কোটি টাকা সাশ্রয় হয়েছে।

ভাই ও বোনেরা,

কেন্দ্রীয় সরকারের নীতির ফলে এই অঞ্চলের মানুষও ব্যাপকভাবে উপকৃত হয়েছেন। এক সময় এখানে উন্নত চিকিৎসার সুযোগ-সুবিধার অভাব ছিল। এমনকি এখানে কোনো মেডিকেল কলেজও ছিল না। কিন্তু এখন এখানে একটি মেডিকেল কলেজ রয়েছে এবং সেখানে স্নাতকোত্তর পড়াশোনাও শুরু হয়েছে। সিলভাসার ‘নমো হাসপাতাল’গত এক বছর ধরে হাজার হাজার মানুষের সেবা করে আসছে। আজ দমন-এও ‘নমো হাসপাতাল-এর উদ্বোধন করা হলো। এই অঞ্চলের মানুষ এখন আরও উন্নত স্বাস্থ্যসেবার সুবিধা পাবেন।

 

বন্ধুগণ,

স্বাস্থ্যক্ষেত্রকে আমাদের সরকার কতটা অগ্রাধিকার দিচ্ছে, তা ‘জাতীয় পরিবার স্বাস্থ্য সমীক্ষা’-র ফলাফলেও স্পষ্ট। এক সময় ভারতে অধিকাংশ সন্তান প্রসব হাসপাতালে হতো না। আজ দেশে ৯০ শতাংশেরও বেশি প্রসব হাসপাতালে হচ্ছে। এর ফলে মাতৃমৃত্যু ও শিশুমৃত্যুর হার উল্লেখযোগ্যভাবে কমেছে। ‘মিশন ইন্দ্রধনুষ’-এর কারণে শিশু টিকাকরণের ক্ষেত্রেও ভারত ভালো সাফল্য অর্জন করেছে। ২০১৪ সালের আগে মাত্র ৬০ শতাংশ শিশু সম্পূর্ণ টিকা পেয়েছিল। আজ এই সংখ্যা বেড়ে প্রায় ৯০ শতাংশে পৌঁছেছে। স্বাস্থ্য সুরক্ষার ক্ষেত্রেও বড় পরিবর্তন এসেছে। ২০১৪ সালের আগে ৩০ শতাংশেরও কম পরিবার স্বাস্থ্য বিমা প্রকল্পের আওতাভুক্ত ছিল। আজ ‘আয়ুষ্মান ভারত’সেই পরিসংখ্যানও বদলে দিয়েছে। এখন ৬০ শতাংশেরও বেশি পরিবার এই সুরক্ষার সুবিধা পাচ্ছে।

বন্ধুগণ,

স্বাস্থ্যক্ষেত্রে সরকারের এসব প্রচেষ্টার ফলে যদি কেউ সবচেয়ে বেশি উপকৃত হয়েছেন আমার দেশের মহিলারা।

বন্ধুগণ,

আগে এই অঞ্চলের তরুণ-তরুণীদের উচ্চশিক্ষার জন্য বাইরে যেতে হতো। কিন্তু আজ এখানে একটি নয়, বরং জাতীয় পর্যায়ের অনেক প্রতিষ্ঠান গড়ে উঠেছে। সাম্প্রতিক বছরগুলোতে এখানে নতুন স্কুল ভবন নির্মিত হয়েছে এবং স্কুলগুলোতে ‘স্মার্ট ক্লাসরুম’ও তৈরি করা হয়েছে। ৪০ হাজারেরও বেশি শিক্ষার্থী এর সুফল পাচ্ছে। আমি আনন্দিত যে, এই কেন্দ্রশাসিত অঞ্চলটি শিক্ষার ক্ষেত্রে ক্রমশ এগিয়ে চলেছে। এখানে ‘স্বামী বিবেকানন্দ এডুকেশন হাব’-এর মতো অনেক নির্মাণকাজ হচ্ছে। 

 

ভাই ও বোনেরা,

শিক্ষার এই বিপ্লবে যেন আমাদের মেয়েরা পিছিয়ে না থাকে আমরা সেজন্য দৃঢ় সংকল্প । এ লক্ষ্যে বড় ধরনের অনেক প্রচেষ্টা চালানো হচ্ছে। ‘সরস্বতী সাইকেল যোজনা’ এবং ‘সরস্বতী বিদ্যা যোজনা’-র মতো কর্মসূচিগুলো এখানকার মেয়েদের ব্যাপকভাবে সহায়তা করছে।

বন্ধুগণ,

ভারত আজ এমন এক প্রচেষ্টা চালাচ্ছে যাতে দেশের যুবসমাজ কেবল ডিগ্রির পাশাপাশি সঠিক দিকনির্দেশনাও পায়। তাদের এমন অভিজ্ঞতা ও সুযোগের  সঙ্গে পরিচিত করা প্রয়োজন, যা স্থানীয় প্রতিভাকে বিশ্বমানের সুযোগ-সুবিধার সঙ্গে যুক্ত করতে পারে। ডিজাইন, আইন, প্রকৌশল, চিকিৎসা শিক্ষা, তথ্যপ্রযুক্তি ,ড্রোন এবং নবীকরনযোগ্য শক্তির মতো ক্ষেত্রগুলোতে আমাদের বর্তমান প্রস্তুতি ভারতের কর্মীবাহিনীকে আরও শক্তিশালী করে তুলবে। তাই পেশাগত শিক্ষা প্রতিষ্ঠানের সম্প্রসারণ অত্যন্ত গুরুত্বপূর্ণ।

বন্ধুগণ,

আজ এনআইএফটি-এর অষ্টাদশ ক্যাম্পাসের ভিত্তিপ্রস্তর স্থাপন করা হলো। এই প্রতিষ্ঠানটি এখানকার যুবসমাজকে বিশ্বমানের অভিজ্ঞতার সাথে যুক্ত করবে। আইটিআই দমন-এ ড্রোন টেকনিশিয়ানের মতো নতুন কোর্সও চালু হয়েছে। ‘পিএম বিশ্বকর্মা এবং ‘পিএম সূর্য ঘর বিনামূল্যে বিদ্যুৎ যোজনা’-র মতো প্রশিক্ষণ কর্মসূচিগুলোও যুবসমাজকে উপকৃত করছে।

বন্ধুগণ,

নতুন চিন্তাধারার মাধ্যমে দেশের ক্রীড়াক্ষেত্রকেও এগিয়ে নেওয়া হয়েছে। আমাদের খেলাধুলা এখন আর কেবল বড় শহর বা বড় স্টেডিয়ামের মধ্যে সীমাবদ্ধ নেই। ‘খেলো ইন্ডিয়া’-র মতো উদ্যোগ যুবসমাজকে তাদের প্রতিভা প্রদর্শনের এক নতুন মঞ্চ দিয়েছে। এর ফলে ছোট অঞ্চলের ছেলেমেয়েরাও খেলাধুলার ক্ষেত্রে জাতীয় পর্যায়ে উঠে আসছে এবং এই অঞ্চলটিও এর সুফল পেয়েছে। দিউ আজ বিচ স্পোর্টস বা সমুদ্রতট-কেন্দ্রিক খেলাধুলার একটি বড় কেন্দ্র হিসেবে গড়ে উঠেছে। ঘোগলা বিচে আয়োজিত ‘বিচ গেমস’ও দেশের দৃষ্টি এই অঞ্চলের দিকে আকর্ষণ করেছে। আজ এখানে ক্রমাগত আধুনিক ক্রীড়া পরিকাঠামো গড়ে তোলা হচ্ছে। খানভেল-এর ফুটবল সেন্টার এবং দমন-এর ভলিবল প্রশিক্ষণ কেন্দ্র এখানকার ক্রীড়া সংস্কৃতিকে আরও শক্তিশালী করে তুলছে।

 

বন্ধুগণ,

আজ দেশের বিশেষ মনোযোগ রয়েছে পর্যটন ক্ষেত্রের ওপরও। আমাদের লক্ষ্য হলো পর্যটনের মাধ্যমে স্থানীয় শিল্প ও সংস্কৃতির প্রসার ঘটানো। ছোট ছোট জায়গাকেও বড় বড় সুযোগ-সুবিধার সঙ্গে যুক্ত করা। ‘দেখো আপনা দেশ’-এর মতো উদ্যোগ মানুষকে দেশের বৈচিত্র্য সম্পর্কে জানতে অনুপ্রাণিত করেছে। আজ ভারতে হেরিটেজ ট্যুরিজম, বিচ ট্যুরিজম, ইকো-ট্যুরিজম এবং অ্যাডভেঞ্চার ট্যুরিজম নতুন প্রাণশক্তি পাচ্ছে।

বন্ধুগণ,

দাদরা ও নগর হাভেলি এবং দমন ও দিউ-তেও পর্যটন এক বিপুল সম্ভাবনাময় ক্ষেত্র। এই অঞ্চলটি প্রাকৃতিক সৌন্দর্যে সমৃদ্ধ। তাই পর্যটন নিয়ে দেশ যে নীতিগুলো গ্রহণ করেছে, তার ফলে দাদরা ও নগর হাভেলি এবং দমন ও দিউ ব্যাপকভাবে উপকৃত হয়েছে। ২০২১ সালে এখানে প্রায় ৬ লক্ষ পর্যটক এসেছিলেন। ২০২৫ সালে এই সংখ্যা বেড়ে প্রায় ৫০ লক্ষে পৌঁছেছে। অর্থাৎ, মাত্র কয়েক বছরের মধ্যেই পর্যটকদের সংখ্যা প্রায় দশগুণ বেড়েছে। উন্নত পরিকাঠামো, ভালো সুযোগ-সুবিধা এবং পরিচ্ছন্ন সমুদ্রতটের কারণেই এটি সম্ভব হয়েছে। দমন নাইট মার্কেট, রামসেতু সি-ফ্রন্ট, নামোপথ সি-ফ্রন্ট, নানি দমন দুর্গ, গঙ্গেশ্বর মন্দির চত্বর - এমন অসংখ্য স্থান আজ এই পুরো অঞ্চলের নতুন পরিচয় হয়ে উঠছে।

বন্ধুগণ,

দাদরা ও নগর হাভেলি এবং দমন ও দিউ-এর স্বপ্ন পূরণের জন্য আমাদের এখানকার শিল্প-সামর্থ্যও বৃদ্ধি করতে হবে। এটি অত্যন্ত গর্বের বিষয় যে, এই কেন্দ্রশাসিত অঞ্চলটি কৃত্রিম তন্তু বা 'ম্যান-মেড ফাইবার'-এর ক্ষেত্রে নিজের এক স্বতন্ত্র পরিচিতি গড়ে তুলেছে। দাদরা ও নগর হাভেলি আজ 'জাতীয় ম্যান-মেড ফাইবার রাজধানী' হিসেবে স্বীকৃতি পেয়েছে। প্লাস্টিক পণ্য রপ্তানির ক্ষেত্রেও এই অঞ্চলটি ক্রমাগত এগিয়ে চলেছে। এখানকার শিল্প ও এমএসএমই-গুলোকে সহায়তা করার জন্য সরকার নিরন্তর প্রচেষ্টা চালিয়ে যাচ্ছে। এখানকার এমএসএমই এবং অন্যান্য শিল্পকে কোটি কোটি টাকার আর্থিক সহায়তা প্রদান করা হয়েছে। এই কেন্দ্রশাসিত অঞ্চলের ক্ষুদ্র ও কুটির শিল্পের জন্য নতুন নতুন সুযোগ সৃষ্টি হচ্ছে। আমি নিশ্চিত যে, আগামী দিনে এই অঞ্চলটি উৎপাদন শিল্পের এক বিশাল কেন্দ্রে পরিণত হবে।

বন্ধুগণ,

যখন সংবেদনশীল শাসনব্যবস্থার সঙ্গে উন্নয়নের দূরদর্শী চিন্তাধারার মেলবন্ধন ঘটে, তখন বাস্তবে দ্রুত রূপান্তর হয়। দাদরা ও নগর হাভেলি এবং দমন ও দিউ-তে আমাদের প্রচেষ্টার সুফল দেখে আমি অত্যন্ত সন্তোষ বোধ করছি। এ অঞ্চলের মানুষের ওপর আমার পূর্ণ আস্থা রয়েছে। এখানকার যুবসমাজ, মা ও বোনেরা, কৃষক, কারিগর, শ্রমিক এবং উদ্যোক্তারা আগামী বছরগুলোতে উন্নয়নের এই যাত্রাকে আরও এগিয়ে নিয়ে যাবেন। আমি আপনাদের নিশ্চিত করছি যে, আপনাদের স্বপ্ন পূরণে কেন্দ্রীয় সরকার সর্বদা আপনাদের পাশে থাকবে। এই বিশ্বাস নিয়ে, উন্নয়নমূলক প্রকল্পগুলোর জন্য আমি আপনাদের আবারও অনেক অনেক অভিনন্দন জানাচ্ছি। আমার সঙ্গে বলুন - ভারত মাতা কি জয়! ভারত মাতা কি জয়! ভারত মাতা কি জয়!
আপনাদের অনেক ধন্যবাদ।