CM addresses at E-library of laws project of Bar Council of Gujarat

Published By : Admin | September 16, 2012 | 18:40 IST

बार में आया हूँ, 12/12 में मुझे जरूरत है और 12/12 में बार जरूर काम आएगा। अक्लमंद को इशारा काफी है..!

मित्रों, गुजरात की विकास यात्रा से देश और दुनिया अब पूरी तरह से परिचित है। 21वीं सदी की जब शुरूआत हुई, तब इतनी ज्यादा आशा थी, समग्र विश्व भारत की तरफ देख रहा था और दुनिया को ऐसा लगता था कि भारत 21वीं सदी का नेतृत्व करेगा और यह आशा स्वाभाविक थी। एक बार मुझे वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में बुलाया गया था। दुनिया भर के सभी वरिष्ठ लोग उपस्थित थे। और वहाँ जो प्रश्र आते थे, क्वेश्चन-आन्सर का भी एक कार्यक्रम था और हम एशियन कंट्री के पांच-सात लोग वहाँ बैठे थे। इसमें चाइना भी था, जापान भी था और प्रतिनिधियों में विश्व भर के सभी धुरंधर थे। पर ज्यादातर सभी प्रश्र मेरी ही तरफ आ रहे थे। नरेन्द्र मोदी के कारण नहीं, इंडिया का मैं वहाँ था इस कारण। और भारत की ओर से कैसी अपेक्षाएं, आशाएं थी ये प्रश्रों से पता चलता था। लेकिन इस दशक में जो कुछ भी हमने देखा और पिछले एक साल में जो हमने पूरे विश्व को निराश कर दिया है, जिस तरह से पूरी दुनिया में अपने देश की बदनामी हो रही है और खासकर अभी जब 19 राज्यों में अंधकार, देश की 60 करोड़ जनता 48 घंटे तक पूरी तरह से बिजली से वंचित... 21वीं सदी का नेतृत्व करने वाले देश की एक छ्वी होती है और दूसरी ओर घोर अंधेरा, आप कल्पना कर सकते हो कि दुनिया को कितना बड़ा धक्का लगा होगा। मित्रों, एक भारतवासी होने के नाते पीड़ा होती है। अपार्ट फ्रोम पॉलिटिक्स, मैं यहाँ आपके पास राजनीतिक चर्चा करने नहीं आया हूँ। देश को निराशा होती है, किसी भी देशभक्त नागरिक को बहुत पीड़ा होती है। और उस समय चाहे वाशिंगटन पोस्ट हो या वॉल स्ट्रीट जर्नल हो, ये हिन्दुस्तान की इस कर्म कथा को लिखा और इसमें तीन पैराग्राफ गुजरात के लिखें कि पूरा देश अंधकार में डूबा हुआ था तब एक मात्र गुजरात था जहाँ बिजली जगमगा रही थी। हंसू कि रोऊँ ये समझ में नहीं आता है, मित्रों। एक तरफ मेरे देश की बदनामी हो रही हो और मेरे गुजरात का जय-जय कार हो रहा हो, कैसी दुविधा..! एक ऐसी विशिष्ट परिस्थिति से देश गुजर रहा है। फ़िलहाल तो रोज ऐसी घटनाएँ हो रही हैं कि जिसके कारण 21वीं सदी का सपना जैसे चूर-चूर हो रहा है, जैसे हम हमारी नजरों के सामने अपने सपनों को नष्ट कर रहे हों ऐसे दृश्य देखने को मिल रहे हैं। और ऐसे समय में इस फील्ड में बैठे लोगों के मन की कोई भूमिका हो सकती है, मित्रों..? ये बात इस कारण से उठा रहा हूँ कि हिन्दुस्तान के आजादी के इतिहास में, इस देश में परिवर्तन करने वाली घटनाओं के मोड़ को देखें तो दो बातें ध्यान आती हैं। दो समूह ऐसे हैं जिनकी सक्रियता ने देश के भाग्य को बदला है। एक शिक्षक वर्ग और दूसरा वकीलों की दुनिया। आजादी के पूरे आंदोलन के नेतृत्व को देखें तो 80% लोगों का बैकग्राउंड लॉ फिल्ड का रहा है। मूल्यों के लिए, सिद्घांतों के लिए लडऩे वाली ये फौज रही है। और जब देश ऐसे संकट में हो तब इस वर्ग द्वारा पूरे देश में एक जागृति का वातावरण क्यों ना बने? फिर एक बार देश में ऐसा विश्वास क्यों पैदा नहीं हो सकता कि भाई, अगर 21वीं सदी एशिया की है, तो 21वीं सदी हिन्दुस्तान की बनाने के लिए हम कृतसंकल्प हैं। और यह सब संभव हो सकता है, मित्रों। जहाँ तक गुजरात के विकास की बात है, अब आप कहीं भी जाओ, गुजरात बोलो तो वो विकास बोलता है और आप विकास बोलो तो वो गुजरात बोलता है। एक ही सिक्के के दो पहलू हो गए हैं।

मित्रों, आज ई-लाईब्रेरी योजना का लोकापर्ण हो रहा है। जो लोग इन्टरनेट की दुनिया से अपरिचित होंगे उन्हें शायद अंदाजा नहीं होगा, लेकिन जो लोग परिचित हैं उन्हें पूरी तरह से अंदाजा होगा कि कितनी बड़ी शक्ति का स्रोत आज आपके हाथ में आ रहा है। और जिनकों इसकी आदत पड़ जाती है वो इसके बिना जी नहीं सकते ऐसी स्थिति हो गई है। आपने कई गुरु बनाए होंगे, पर एक बार गूगल को गुरू बनाया तो, ‘सब दु:खों की एक दवा’, आपको जो चाहिए वह एक कल्पवृक्ष की तरह गूगल हाजिर कर देता है..! टेक्नोलॉजी ने कमाल किया है, मित्रों। मैं चाहूँगा कि मेरे बार के मित्र इस व्यवस्था का खूब उपयोग करें, नहीं तो कई बार क्या है कि जैसे हमारी सरकार में भी हम खूब सारा खर्चा हार्डवेयर में करते हैं, कम्प्यूटर लाते हैं और प्रिंटर लाते हैं और तरह तरह का सब लेते ही रहते हैं, और ज्यादातर वह सब टेबल पर फ्लावरपॉट की तरह शोभा देता है। मैं सरकार में आया तब मैंने कम्पलसरी एक नियम बनाया था, कि अब मैं आपको ई-मेल करूंगा, सुबह में आप मुझे ई-मेल का जवाब देना। तभी तो ई-मेल खोलना सभी ने शुरू किया। एक बार इसकी आदत पड़ने के बाद इसकी ताकत का अंदाजा होता है। बार के मित्रों से मेरी विनती है, आप कल्पना नहीं कर सकते इतना बड़ा औजार आपके हाथ में आया है। इसके कारण आपकी मेहनत तो बिल्कुल कम हो जाएगी, बहुत कम। एक बारहवीं कक्षा का विद्यार्थी भी आपके यहाँ यदि इस काम से जुड़ा हुआ होगा तो भी आपकी मेहनत बिल्कुल नहीं के बराबर हो जाएगी। और क्वालिटेटिव सुधार जो आएगा, आपकी बात का, आपके रेफरेंस का, ये सुधार शायद सैंकड़ों गुना बढ़ सकता है। आप तालुका की कोर्ट में काम करते होंगे, और कभी किसी जिल्ला कोर्ट के आदमी को पता चलता है कि फलाना तालुका की कोर्ट में फलाना मुद्दे पर फलाना वकील ने ऐसी दलील की थी, तो उसको आश्चर्य होगा कि इतनी सारी जानकारी इसके पास आई कहाँ से? इसका आधार यह ई-लाइब्रेरी है। ये बात ठीक है कि खाली जमानत और ऐसे सारे छोटे-मोटे काम करते हों उनको... ऐसे मुझे आपकी दुनिया की ज्यादा जानकारी नहीं है, क्योंकि मेरी जिंदगी में किसी दिन जरूरत नहीं पड़ी। कभी रॉंग साईड पार्किंग का केस भी मेरे उपर नहीं लगा। इस 2008 के बाद मुझे पहली बार पता चला कि इतनी बड़ी दुनिया है आपकी, वरना 2008 तक तो मुख्यमंत्री था फिर भी किसी दिन मुझे इतनी घनिष्ठता हुई नहीं थी। 2008 के बाद दिशा बदली, दशा नहीं बदली है..!

मित्रों, गुजरात ने ई-गर्वनेंस के क्षेत्र में बहुत सारे इनिश्यिेटिव लिए हैं। मित्रों, आपको जानकर खुशी होगी कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 29 अवार्ड गुजरात सरकार को ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में मिले हैं। और हम टेक्नोलॉजी का कितना उपयोग करना चाहते हैं, मैंने एक बार प्रधानमंत्री को पत्र लिखा। वैसे तो उनको अक्सर लिखता रहता हूँ, और किसको लिखूं..? मैंने प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखा। सामान्य तौर पर मुख्यमंत्री पत्र लिखते ही हैं, कोई लिखता है किे भाई, हमारा जरा गेंहूँ का कोटा बढ़ा दो तो अच्छा होगा, केरासीन का कोटा बढ़ा दो तो अच्छा होगा, रोड के कंस्ट्रक्शन का थोड़ा बजट बढ़ा दो तो अच्छा... ये सारा रूटीन होता है स्टेट गवर्मेंट और सेन्ट्रल गवर्मेंट के बीच। ऐसा कुछ मैं लिखता नहीं, क्योंकि हमें ये सब मिलेगा नहीं। फिर मुझे लगा कि इनके काम का ना हो ऐसा कुछ तो मांगे हम..! इसलिए मैंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा कि एक सैटेलाइट मुझे दो, सैटेलाइट मांगा..! अब आप मुझे बताओ कि वहाँ कैसा बम्ब का गोला गीरा होगा..! दो साल तक मेरा पत्र यहाँ से वहाँ भटकता रहा, कि इसका किया क्या जाए? मुझे था कि शायद ग्रूप ऑफ मिनीस्टर्स की कोई कमेटी बनेगी, क्योंकि वहाँ ज्यादातर ऐसा है कि कोई भी प्रश्र आए तो ग्रूप ऑफ मिनीस्टर्स... एक रास्ता निकाल रखा है वहाँ। लगभग दो साल बाद मुझे जवाब आया, दो वर्ष लगे, क्योंकि कोई रोड मांगे तो क्या करना है वह पता है उन्हें, चावल मांगे तो क्या करना है वह उन्हें पता है, भाजपा की सरकार हो तो क्या जवाब होगा, यू.पी.ए. की सरकार हो तो क्या... सब उन्हें पता है, इसमें क्या करना होगा ये उन्हें पता नहीं था..! लगभग दो साल में मुझे जवाब मिला, और शायद इनकी खूब कसरत हो गई होगी, किसी दिन वह फाइल मैं देखूंगा, कभी भी हासिल करुंगा मैं, क्या क्या हुआ है..! दो साल में जवाब आया कि पूरा का पूरा सैटेलाइट तो नहीं दे सकते, कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, पर आपको 36 मैगाहर्टस उपयोग करने का अधिकार देते हैं। यानि लगभग 90-95% दे दिया ऐसा कह सकते हैं..! मित्रों, इस देश में कोई स्टेट ऐसा नहीं है कि जिसके मन में ऐसी कल्पना आयी हो और इस प्रकार की कभी मांग की हो। और आपको कभी समय मिले, बार वाले मित्रों को रुचि हो तो जब आप गांधीनगर जाओ तो बहुत बड़ी बड़ी डिश लगा हुआ एक भवन है, ‘बायसेग’, भास्कराचार्य इंस्टिट्यूट। मैं चाहता हूँ कि हाईकोर्ट बार, डिस्ट्रिक्ट बार के लोग देखने जाएं कि टेक्नोलॉजी द्वारा हम किस तरह से काम कर रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, हमारे मछुआरे मछली पकडऩे जाते हैं तो बेचारे फिरते-फिरते जाल बिछाते जाते हैं और कुछ मेल खाता है तो उसे वह शाम तक इकट्ठा करके वापस आते हैं, वरना तो तीन-तीन दिन तक समुद्र में घूमते रहते हैं। हम सैटेलाइट का उपयोग करके इन्हें मोबाइल फोन पर एक्जेक्ट ऐड्रेस देते हैं कि अभी मछलियों का यहाँ पर समूह है, तो वे उस तरफ जाते हैं और उनकी मेहनत 10% हो जाती है। क्योंकि मछलियां लगभग जहाँ पर एकत्र होती हैं, वहाँ लगभग 18 से 20 घंटे उस जगह पर रुकती हैं, फिर स्थानांतरण करती हैं। इतने में वे पहुंच जाते हैं, 5-10 नोटिकल माइल के अंतर में हो तो पहुंच जाते हैं और लगभग रोज के रोज कमाई करके वापस आ सकते हैं।

इसलिए टेक्नोलॉजी का कितना उपयोग हो सकता है उसका एक उदाहरण आपको दे रहा हूँ। आप मित्रों, रोड से मुंबई जाओ तो भिलाड के पास गुजरात की एक चैकपोस्ट है और दूसरी तरफ महाराष्ट्र की चेकपोस्ट है, अछाड में। जिस रोड पर गुजरात की चेकपोस्ट है, उसी रोड पर महाराष्ट्र की चेकपोस्ट है। जो वेहीकल गुजरात चेकपोस्ट पर से जाता है, वही वेहीकल महाराष्ट्र चेकपोस्ट पर से भी गुजरता है, जाते या आते समय। जितना टैक्स गुजरात चैकपोस्ट पर है, उतना ही टैक्स महाराष्ट्र चैकपोस्ट पर भी है। लेकिन गुजरात के चैकपोस्ट पर ई-गर्वेनेंस की व्यवस्था है, कैमरों की व्यवस्था है, कम्प्यूटराइज्ड सिस्टम है, मेरे ऑफिस में से देखा जा सकता है कि भिलाड चैकपोस्ट पर क्या चल रहा है... दूसरी तरफ महाराष्ट्र का चैकपोस्ट है, वहाँ पर सारे भाई मेहनत करते हैं... और इसका परिणाम यह है कि महाराष्ट्र के चैकपोस्ट पर टैक्स वसूली की आय से गुजरात के चैकपोस्ट पर पिछले पांच वर्ष में 700 करोड़ रुपया ज्यादा आय हुई है। ई-गवर्नेंस मिन्स ईज़ी गवर्नेंस, इफेक्टिव गवर्नेंस एंड इकोनॉमिक गवर्नेंस। ट्रांसपेरेंसी लाने में टेक्नोलॉजी बहुत बड़ी भूमिका निभा सकती है मित्रों, और इसका जीता-जागता उदाहरण है यह भिलाड चैकपोस्ट।

मित्रों, डेमोक्रेसी का कई बातों का महत्व है, पर मेरे लिए डेमोक्रेसी की सबसे बड़ी शक्ति इसकी ग्रीवन्स रिड्रेसल सिस्टम कैसी है इसके ऊपर निर्भर है। गरीब से गरीब इंसान की शिकायत सुनने की व्यवस्था हो उसे उत्तम डेमोक्रेसी की व्यवस्था मैं मानता हूँ। इसकी आवाज को कहीं पर वजन मिलना चाहिए। मैंने टेक्नोलॉजी के आधार पर एक कार्यक्रम शुरू किया है, जिसका नाम है ‘स्वागत ऑनलाइन’, ‘स्वागत’ कार्यक्रम। हर महीने के चौथे गुरूवार को मैं ये कार्यक्रम करता हूँ। आम तौर पर हिन्दुस्तान में लगभग सभी पॉलिटिशियन लोक-दरबार करते हैं, सभी मुख्यमंत्री लोक दरबार करते हैं, हमारे यहाँ भी करते थे। और लोक दरबार होता है तो सारी पब्लिक वहाँ आ जाती है और आठ बजे का टाइम हो तो दस-साढ़े दस बजे साहब आते हैं, इससे पहले इन लोगों के प्यून वगैरह सब चलता है... भाई चलो, चलो जल्दी, लाओ कागज दे दो, कागज दे दो... लोक दरबार वहाँ पूरा हो जाता है..! यह मैं सत्य घटना का वर्णन कर रहा हूँ। मैंने ऐसा नहीं किया, कोई लोक दरबार नहीं किया। यदि आपको याद हो तो शुरूआत में मुझ पर जो गालियाँ पडती थीं, उसमें यह मुद्दा भी शामिल था। मुझे तो हर साल दि गयी गालियों की आईटम बदलती रहती है, गालियाँ देने वालों को अब नई-नई रिसर्च करनी पड़ती है। मैंने टेक्नोलॉजी के माध्यम से ‘स्वागत ऑनलाइन’ कार्यक्रम, इट्स वन टाइप ऑफ दरबार..! तालुका स्तर पर, जिल्ला स्तर पर और राज्य स्तर पर मैं एक दिन में 1400 लोगों को ऑनलाइन सुनता हूँ और उसमें 98% हल हो जाता है। सरकार में दो प्रकार की चीज होती है, एक तो निपटाए और उसे संतोष मिलता है कि फाइल निपट गई। मेरी कोशिश निपटाना नहीं होता, मेरा आग्रह रहता है हल करने का। आइदर पॉजिटिव ऑर नेगेटिव, हिम्मत चाहिए सरकार में कि टेक द पोजीशन, स्टैंड लो, भाई..! अनुभव ऐसा रहा है कि इसमें 98% एचीवमेंट है और इस ‘स्वागत ऑनलाइन’ के कार्यक्रम की प्रतिष्ठा इतनी ज्यादा है कि गाँव का कोई बिल्कुल अनपढ़ व्यक्ति भी कलेक्टर कचहरी में जा कर के यदि कोई उन्हें सुनता नहीं है तो कहता है कि कोई बात नहीं साहब, यदि आपको ठीक से नहीं सुनना है तो मैं ऑनलाइन जाऊँगा..! वो जैसे ही ’ऑनलाइन’ कहता है, उसके साथ ही कलेक्टर बाहर आकर “अरे, आओ-आओ, बैठो, क्या काम था..?” साहब, गाँव का आदमी भी अब समझता है कि ये ‘ऑनलाइन’ मतलब क्या..! इसलिए टेक्नोलॉजी से कितनी बड़ी ताकत खड़ी की जा सकती है, इसका ये उत्तम उदाहरण है। ये सभी चीजों का उपयोग आने वाले दिनों में बढऩे वाला है। आज हममें से भी जो लोग बेहतर किस्म के मोबाइल का उपयोग करते हैं, उन लोगों को पता है कि अगर थोड़ी सी रुचि लें तो पूरी दुनिया उनकी हथेली में होती है मित्रों, पूरी दुनिया अपनी हथेली में होती है। मोबाइल गवर्नेंस की ओर विश्व जा रहा है। अब वो दिन नहीं होंगे कि आपको तारीख के लिए कोर्ट में जाना पड़े, अब तो घर पर एस.एम.एस. के जरिए पता चल जाएगा कि मुद्दत पड़ी कि नहीं। इसका भी चार्ज ले लेना, कोई बात नहीं..! पर टेक्नोलॉजी का उपयोग तो करो, भाई।

खैर मित्रों, अनेक क्षेत्र ऐसे हैं कि जहाँ टेक्नोलॉजी का उपयोग पूरे विश्व को बदल रहा है। बदल रहे युग में ये सभी टेक्नोलॉजी के साथ नाता जितना जोड़ोगे, उतना ही उपकारी रहेगा। ई-लाईब्रेरी एक उत्तम शुरूआत है। देश के दूसरे भागों में तो आप इसकी अपेक्षा भी मत करना, भाईयों..! हमारी एक बार मीटिंग थी। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस, प्रधानमंत्री, राज्य के मुख्यमंत्री और राज्य के हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस, इन लोगों की एक मीटिंग पहले चलती थी। मेरे लिए पहली बार ऐसे समाचार थे, वहाँ एक चर्चा हुई पेन्डेन्सी की, कि भाई इतने सारे केसों का जमाव क्यों है। तो एक प्रदेश वालों का ऐसा कहना था कि हफ्ते में मुश्किल से दो-तीन घंटे कोर्ट चलती है। उसका कारण क्या है? कारण यह है कि लगभग सभी कोर्ट का निर्माण ऐसा है कि प्राकृतिक रोशनी नहीं है और लाइट चलती नहीं है, इसलिए केस चलाना मुश्किल होता है। आप विचार करो, इतनी सारी पगार चुकाई जाती हैं, इतने सारे रूपए खर्च किए जाते हों, और हफ्ते में दो या तीन घंटे जब बिजली आए उस समय कोर्ट चले, ऐसी दुर्दशा पूर्ण स्थिति में देश चलता हो, इसके सामने गुजरात कहाँ जा रहा है इसका आप अंदाजा कर सकते हो। कोई भी कसौटी पर गुजरात नई-नई ऊंचाइयाँ पार कर रहा है। सही मायनों में एक समृद्घ गुजरात के लिए कितने पैरामीटर में समृद्घि हो सकती है, इन सभी बातों को केंद्रित करते हुए हम आगे बढ़ रहे हैं।

मुझे आप लोगों के बीच आने का अवसर मिला, मैं आपका बहुत बहुत आभारी हूँ और यह ई-लाइब्रेरी गुजरात के न्याय जगत के लिए एक नई शक्ति देने वाली बने। यह ई-लाइब्रेरी न्यायिक दुनिया के साथ जुड़े हुए मेरे वकील मित्रों को इन्फोर्मेशन से सक्षम बनाए, खूब शक्तिशाली बनाए। वास्तव में वकीलों को सशक्त करने का यह हथियार है और अगर वकील सशक्त हों तो पूरी न्यायपालिका सशक्त होती है, उस उद्देश्य के लिए यह योगदान है। आप इसका भरपूर उपयोग करें, इसी अपेक्षा के साथ बहुत बहुत शुभकामनाएं..!

धन्यवाद...!

Explore More
Today, the entire country and entire world is filled with the spirit of Bhagwan Shri Ram: PM Modi at Dhwajarohan Utsav in Ayodhya

Popular Speeches

Today, the entire country and entire world is filled with the spirit of Bhagwan Shri Ram: PM Modi at Dhwajarohan Utsav in Ayodhya
‘Highly Focused’: Canada PM Mark Carney Calls PM Modi A ‘Unique Leader’ After India Visit

Media Coverage

‘Highly Focused’: Canada PM Mark Carney Calls PM Modi A ‘Unique Leader’ After India Visit
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
Finland is an important partner for India in the Nordic region: PM Modi at the India-Finland Joint Press Meet
March 05, 2026

Your Excellency, President Stubb,
Distinguished delegates of both countries,
Friends from the media,

Greetings!

Terve!

I extend a warm welcome to President Stubb on his first visit to India as the President of Finland. President Stubb is not only a distinguished global leader, but also a respected thinker and author.

Excellency, it is a matter of great honour and pleasure for us that an experienced and dynamic leader like you is the Chief Guest at this year’s Raisina Dialogue.

Friends,

Today, the world is passing through a phase of instability and uncertainty. From Ukraine to West Asia, several parts of the world continue to face situations of conflict. In such a global environment, India and Europe, two major diplomatic powers of the world, are entering a golden phase in their relationship. Our growing cooperation is imparting new strength to global stability, development, and shared prosperity.

Friends,

At the beginning of 2026, the historic India-European Union Free Trade Agreement was concluded. This agreement will further strengthen trade, investment, and technology cooperation between India and Finland. In areas such as digital technology, infrastructure, and sustainability, India and Finland are important partners.

Nokia mobile phones and telecom networks have connected millions of people across India. With the cooperation of Finnish architects, we have built the world’s highest railway bridge over the Chenab River. With Finland’s partnership, we have also established the world’s largest bamboo-to-bioethanol refinery in Numaligarh.

Friends,

Inspired by such important examples, during President Stubb’s visit we are elevating India-Finland relations to a Strategic Partnership in Digitalisation and Sustainability. This partnership will provide momentum and new energy to our cooperation across several high-technology sectors, from Artificial Intelligence to 6G telecommunications, and from clean energy to quantum computing.

At the same time, our partnership will deepen further in key sectors such as defence, space, semiconductors, and critical minerals. This Strategic Partnership between democratic and responsible nations like India and Finland will contribute to ensuring trustworthy technologies and resilient supply chains for the entire world.

Friends,

Finland is increasingly becoming a preferred destination for Indian students and talent. To connect the innovation ecosystems of our two countries, today we have concluded a comprehensive Migration and Mobility Agreement with Finland.

Along with this, we will further strengthen joint research and start-up collaboration. Finland is a role model in the field of education. Today, we have also agreed to enhance cooperation in teacher training, school-to-school partnerships, and research on the future of education.

In other words, from schools to industry, we are set to deepen our cooperation across every level of human development.

Friends,

Finland is an important partner for India in the Nordic region. Together with Finland, we are also enhancing our cooperation in Arctic and Polar research.

A healthy planet is our shared priority. We are pleased that this year, together with Finland, we will host the World Circular Economy Forum in India. This will impart new momentum and fresh ideas to our efforts towards sustainability.

Friends,

India and Finland both believe in the rule of law, dialogue, and diplomacy. We are in agreement that no issue can be resolved solely through military conflict. Whether in Ukraine or in West Asia, we will continue to support every effort aimed at the early end of conflict and the restoration of peace.

We also share the view that reform of global institutions is not only necessary, but urgent in order to address the growing global challenges. Furthermore, eliminating terrorism in all its forms remains our shared commitment.

Your Excellency,

You have completed the Ironman Triathlon. We are confident that together with an energetic leader like you, we will also achieve a new triathlon of innovation, digitalisation, and sustainability between India and Finland.

Let us begin a new golden chapter in this futuristic partnership between India and Finland.

Thank you very much.