Text of PM's remarks at launch of Social Security Schemes

Published By : Admin | May 9, 2015 | 22:12 IST

उपस्थित सभी महानुभाव,

यह कार्यक्रम कलकत्ता के एक सभागृह में हो रहा है, लेकिन देश के 115 स्था नों पर simultaneous यह कार्यक्रम चल रहा है। उस कार्यक्रम में उपस्थित भी सभी महानुभाव को मैं अपना प्रणाम करता हूं।

आज पूज्य। गुरूदेव रविंद्रनाथ टैगोर की जन्म जयंती का पावन पर्व है। बंगाल का स्म>रण करते हुए हर एक हिंदुस्ताटनी का सिर ऊंचा हो जाता है, आंखों में चमक आ जाती है, सीना चौड़ा हो जाता है। भारत के ऐतिहासिक जीवन की अनेक घटनाएं हैं, जिसकी प्रेरणा इस धरती से मिली। अगर परिवर्तन का कहीं प्रारंभ हुआ तो इसी धरती से हुआ। और गोखले जी कहा करते थे कि बंगाल जो आज सोचता है, हिंदुस्ताीन बाद में वही सोचता है।

और यह धरती एक समय था जब हिंदुस्ता्न की आर्थिक विकास की पूरी बागडोर उसके हाथ में थी। भारत की आर्थिक गतिविधि बंगाल से केंद्रित होती थी। इस धरती की विशेषता रही है कि मां दुर्गा की पूजा में तो लीन रहते हैं। लेकिन इसे सरस्वषती का भी आर्शीवाद है और साथ-साथ लक्ष्मी का भी आशीर्वाद है। और जहां सरस्वाती और लक्ष्मीm दोनों को आशीर्वाद मिले हो ऐसी यह धरती रही है। औद्योगिक जगत में भी manufacturing sector की बात करें, यही धरती है जिसने बहुत बड़ा योगदान किया है।

और अभी आदरणीय मुख्यजमंत्री जी अपने भाषण में उल्ले ख कर रहीं थी कि गांवों में बैंक भी नहीं है। 60 साल का हिसाब है यह। उनकी पीड़ा बहुत स्वालभाविक है, मैं भी उसमें अपना स्वनर जोड़ता हूं। लेकिन उन्हों ने यह बात मेरे सामने रखी, क्योंतकि उनको भरोसा है, अगर करेगा तो यही करेगा। आप कल्पूना कर सकते हैं कि देश में गरीबों के लिए बैंकों का राष्ट्री यकरण किया गया था। लेकिन इस देश के गरीब को कभी हमें बैंकों में देखने का अवसर नहीं मिला था।

आज भी यह जो स्कीाम लेकर के हम आए हैं, 80 से 90 Percent इस देश के लोग हैं, जिनको कोई insurance नहीं है, जिनको कोई पेंशन की संभावना नहीं है। सवा सौ करोड़ का देश, 80-90 प्रतिशत जनसंख्या, इन सामान्य आवश्यकताओं की पूर्ति उसके भाग्य में न लिखी हो तो कितनी पीड़ा होती है। और ये सारी योजनाएं जन्म ले रही हैं, आ रही हैं, वो गरीबों के प्रति हमारे दायित्व में से एक है, गरीबों के प्रति संवेदना में से एक है। और हम विकास कितना ही करें, नई ऊंचाइयों को कितना ही पाएं, प्राप्त करें। लेकिन अगर इसके सुफल गरीबों की झोंपड़ी तक नहीं पहुंचते हैं तो विकास अधूरा है। और इसलिए एक तरफ हम विकास की नई ऊंचाइयों को छूने के लिए सारी दुनिया को झकझोर रहे हैं, Make in India के लिए प्रेरित कर रहे हैं तो दूसरी तरफ गरीब से गरीब का बैंक का खाता खुले इसके लिए दिन-रात कोशिश करते हैं। और मुझे खुशी है कि जब प्रधानमंत्री जन-धन योजना हम लेकर के हम आए, 15 अगस्त को मैंने घोषित किया, 26 जनवरी तक पूरा करने की कल्पना थी, लेकिन देश के बैंकों में काम करने वाले सभी मित्रों ने इतनी मदद की, एक ऐसा जनांदोलन बन गया। 15 करोड़ नए खाते खोल दिए और आज देश में करीब-करीब 95 percent से ज्यादा लोग अर्थव्यवस्था की जो मुख्यधारा होती है Banking Sector उससे जुड़ गए हैं। जो कभी आधे भी नहीं थे।

ये काम सौ-सवा सौ दिन में पूरा कर दिया गया। और मैंने गरीबों को कहा था कि ये देश आपके लिए हैं, सरकार आपके लिए हैं, बैंक आपके लिए हैं। आपको एक पैसा देना नहीं है, बैंक का खाता खोलना है, Zero balance से। लेकिन गरीबों में अमीरी बहुत होती है। अमीरों की गरीबी की चर्चा करने की तो हिम्मत लोगों में कम होती है, लेकिन गरीबों की अमीरी की चर्चा मैं आज करना चाहता हूं। हमने तो कहा था Zero balance से खाते खोल देंगे। लेकिन मैं आज उन गरीबों को सलाम करता हूं कि उन्होंने मन में सोचा कि ये तो अच्छा नहीं है, ये तो हमें शोभा नहीं देता है। और मैं आज गर्व से कहता हूं कि ये जो 15 करोड़ बैंक खाते खुले उसमें 15 हजार 800 करोड़ रुपए राशि गरीबों ने जमा कर दी।

इस देश के गरीबों की अमीरी की ताकत देखिए। और तब जाकर के मन करता है, इन गरीबों के लिए कुछ करते रहना चाहिए। और मेरा ये विश्वास है, गरीबों को सहारा नहीं चाहिए। हमें हमारी सोच बदलनी होगी, हमारे कार्यकलाप बदलने होंगे, हमारे तौर-तरीके बदलने होंगे। गरीबों को सहारा नहीं चाहिए, गरीबों को शक्ति चाहिए। अगर उसको शक्ति मिलेगी तो गरीब गरीबी के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए तैयार है और गरीबी से मुक्ति का आनंद लेने के लिए वो पूरी शक्ति लगाने के लिए तैयार है, उसे शक्ति देने की आवश्यकता है।

और आज जब गुरुदेव रविंद्र नाथ जी की जन्म जयंती की अवसर पर मैं बोल रहा हूं तब गुरुदेव ने 1906 में आत्मत्राण इस कविता में जो लिखा था, मैं समझता हूं 1906 की वो बात आज 2015 में भी हमें लागू हो रही है। गुरुदेव ने कहा था “It is not my prayer that you will save me from difficulties, give me the strength to overcome the difficulty. do not take away my burden or console me, give me the capacity to bear my burden” - यह बात गुरूदेव जी ने कही थी। और आज हमारा संकल्पe है उस आदेश का पालन करना जो गुरूदेव ने दिया है। और उसी में से यह योजना और कलकत्तेi की धरती पर हो रहा है। क्योंिकि मुझे विश्वांस है, जो चीज इस धरती से प्रारंभ होती है वो फिर आगे बढ़ती ही बढ़ती जाती है, परिणाम मिलता ही मिलता है। और रविंद्रनाथ जी के गुरूदेव की जन्मढ जंयती पर कोई चीज प्रारंभ होती हो और उन्होंंने जो भावना व्यिक्त की थी उसी की अभिव्य क्ति होती हो तो मुझे विश्वारस है गुरूदेव के आशीर्वाद इस योजना को सफल बनाएंगे और देश के गरीबों एक नई शक्ति प्राप्ति करने का अवसर प्रतिपादित होगा। यह मेरा पूरा विश्वारस है।

हमने जब प्रधानमंत्री जनधन योजना शुरू की तब कई लोगों को लग रहा था कि क्या् होगा, कैसे होगा लेकिन आज अनुभव यह आ रहा है कि गरीबों के लिए एक के बाद एक योजनाएं - एक बार बैंक खाता खुल गया, तो हम बात वहां रोकना नहीं चाहते। वो तो हमारा foundation था हम एक के बाद एक हमारी बातें unfold करते चले जा रहे हैं। हमने कहा आपको हैरानी होगी, इस देश में कुछ लोगों को सरकारी पेंशन मिलता है करीब 35 लाख लोग, करीब-करीब 35 लाख लोग और कितना पेंशन मिलता था? किसी को सात रुपया, किसी को 20 रुपया, किसी को सवा सौ, किसी को ढ़ाई सौ। बेचारे को पेंशन लेने के लिए जाना है इस उम्र में ऑटो रिक्शास में जाए या बस में जाए तो पेंशन से ज्याकदा खर्चा उसका बस में जाने से होता था। लेकिन यह चल रहा था। हमने आकर तय किया कि जिसको भी पेंशन मिलता है एक हजार से कम किसी को नहीं होगा। और हमने देना प्रारंभ कर दिया है। क्यों ? गरीब सम्माान से जीए, उसे शक्ति चाहिए। वो शक्ति देना का प्रयास उसको हमने आगे बढ़ाया।

हमारे देश में कभी-कभी लोगों को लगता है कि ये जो बहुत बड़े-बड़े औद्योगिक घराने हैं न वो देश में बहुत बड़ी आर्थिक क्रांति करते हैं। यह बहुत बड़ा भ्रम है। उनका योगदान है लेकिन बहुत सीमित है। देश के अर्थतंत्र को कौन चलाता है? जो छोटा-सा कारोबार करने वाला व्योक्ति है, चौराहे पर खड़े रहकर के सब्जीह बेचता है, धोबी की दुकान चलाता है, biscuit बेचता है, चाय-पान का गल्लाह चलाता है, कपड़े बेचता है, readymade garment बेचता है। छोटे-छोटे लोग! हिंदुस्ताान में करीब साढ़े पांच करोड़ से ज्याेदा ये लोग देश को अर्थतंत्र को गति देते हैं। और बड़े-बड़े औद्योगिक घराने बहुत कम लोगों को रोजगार देते हैं, यह पांच-साढ़े पांच करोड़ जो छोटे काम करने वाले लोग हैं, वे करीब 14 करोड़ लोगों को रोजगार देते हैं, आप कल्पोना कर सकते हैं यानि 14 करोड़ परिवारों का पेट भरने का काम इनके द्वारा होता है। और उनकी Total संपदा जो है इतने सारे लोगों की बहुत ज्या दा नहीं है। कोई 11-12 लाख करोड़ रुपया है। और वो जो पैसा उनको चाहिए interest से, बाजार से - कोई बैंक वाला उनको पैसा नहीं देता है, व्याोपारी बड़े छोटे हैं। इन सबका average जो कर्ज है वो seventeen thousand rupees है, average अगर निकाली जाए तो seventeen thousand. उनको साहूकारों से पैसा लेना पड़ता है। उस प्रकार की कंपनियों के वहां जाना पड़ता है पैसा लेने के लिए कि जिसमें उनका खून चूस लिया जाता है। हम गरीबों की भलाई के लिए काम करने वाली सरकार होने के कारण हम एक मुद्रा बैंक का Concept इस बजट में लाए हैं और बजट में लाए इतना ही नहीं अभी तो बजट सत्र चल रहा है, वो मुद्रा बैंक का काम आरंभ हो गया। और उसके अंतर्गत ये जो साढ़े पांच करोड़ सामान्य लोग हैं, जिनको 5 हजार, 10 हजार रुपया भी मिल जाए तो बहुत तेजी से अपने काम को बढ़ा सकते हैं। उनको बैंक loan देने के लिए एक बहुत बड़ा अभियान हमने चलाया है। उनको पैसे मिलने चाहिए, सरकार सामने से जाकर के पूछ रही है कि बताओ भाई तुम्हारे आगे बढ़ने की कोई योजना है क्या? गरीबों के लिए काम करना है, एक के बाद एक कैसे काम होते हैं।

उसी प्रकार से हमारे यहां, हम Corruption के खिलाफ भी बड़ी लड़ाई लड़ रहे हैं, एक ऐसी क्रांति ला रहे हैं जो इस प्रकार के Leakages को अपने आप ताले लग जाएंगे। हमारे यहां गैस सिलिंडर लेने वाले को सब्सिडी मिलती है। अमीर हो, गरीब हो सबको सब्सिडी मिलती है। हमने तय किया कि सब्सिडी Direct बैंक के खाते में जाएगी। जन-धन account खोल दिए, और उस बैंक के खाते में जिसके पास गैस सिलिंडर, Direct सब्सिडी जाएगी, ये दुनिया का सबसे बड़ा विक्रम है कि करीब 12 करोड़ से ज्यादा लोगों के खाते में भारत सरकार सीधी-सीधी गैस सिलिंडर की सब्सिडी देती है। और उसके कारण पहले किसी न किसी नाम से सब्सिडी जाती थी वो सारा बंद हो गया, पहले की तुलना में बहुत बड़ा फर्क आया है। आकंड़ा में बोलना नहीं चाहता हूं इसलिए क्योंकि मैं चाहता हूं कुछ खोज करने वाले लोग इसको खोजें, आप कल्पना नहीं कर सकते हैं अरबों-खरबों रुपयों का leakage था, अरबों-खरबों रुपयों का, जो हमने रोक दिया।

जन-धन account खुलते ही उसको follow-up में किस प्रकार से काम होता है, इसके ये उदाहरण है। और आज तीन नई योजनाएं हैं। हमारे देश, हम जब मुद्रा बैंक लाए तो हमने कहा था “Funding the Unfunded” जिनको Fund नहीं मिलता है, जिनके पैसे नहीं मिलते हैं, उनको Fund देंगे। जब हम जन-धन योजना लेकर के आए तो हमने कहा था, जिसको Banking की व्यवस्था नहीं है, उसको Banking की व्यवस्था, जिसका खाता नहीं, उसका खाता खोलेंगे और आज हम आए हैं कि जिसको सुरक्षा का कवच नहीं है, उसको हम सुरक्षा का कवच देंगे।

एक योजना है प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना - अभी फिल्म में हमने देखा, बड़ा चोट पहुंचाने वाला dialogue था कि 12 रुपए में कफन भी नहीं मिलता है। 12 रुपए में दो लाख रुपए की Insurance scheme हम लेकर के आए हैं, क्योंकि हम चाहते हैं कि देश के सामान्य व्यक्ति के जीवन में - क्योंकि संकट अमीर को नहीं आता है, संकट गरीब को आता है, फुटपाथ पर सोता है, बेचारे को मरना पड़ता है, साईकिल लेकर जाता है, मर जाता है, बच्चा स्कूल जाता है, बस के नीचे आता है, मरता है - उनकी सुरक्षा कौन करेगा? और इसलिए एक जागरुकता आए, भागीदारी बने और जैसे रविंद्रनाथ जी टेगौर ने हमें आदेश दिया है, गुरुदेव का आदेश है, उसको शक्ति दो - ये शक्ति देने का प्रयास है।

2 लाख रुपए का Insurance, अगर Injury हो गई, तो दो लाख रुपया भी मिल सकता है, एक लाख रुपया भी मिल सकता है। आप भी सोचिए, आपके यहां ड्राइवर होगा, आपके यहां झाड़ू-पोंछा करने वाले, कोई बाई काम करती होगी, खाना पकाने वाला कोई काम करता होगा। क्या आपको नहीं लगता है कि 12 रुपया खुद आपकी जेब से देकर के, उसको सुरक्षा का बीमा नहीं निकाल सकते आप? मैं इस देश के उन करोड़ों लोगों से आज प्रार्थना करना चाहता हूं कि आप अपनी जेब से, अपने यहां जो काम करने वाले लोग हैं, आपका ड्राइवर है, वो आपकी Society का lift man हो, गरीब लोग जिसके साथ आपका नेता, आपके मोहल्ले में झाडू लगाने आता है। आप उसे कहिए मेरे लिए 12 रुपये कुछ नहीं है। शाम को कभी कॉफी पीने जाता हूं तो 12 रुपये से ज्या दा खर्च करके आ जाता हूं। मैं तेरे लिए खर्च करूंगा। और अगर एक किस्तै बैंक में जमा कर दी और बैंक वालों को कह दिया कि ब्या ज उसका काटते रहिए, मुझे बताइये कि उसके जीवन को कितनी बड़ी सुरक्षा मिलेगी। और वो कभी आपको छोड़कर के जाएगा क्याउ? कभी नहीं जाएगा।

उसी प्रकार से प्रधानमंत्री जीवन ज्योोति बीमा योजना - पहले वाला जो 12 रुपये वाली स्की म में है Natural Calamity में भी अगर किसी के मृत्युन होती है तब भी उसको benefit मिलेगा। अगर आज ऐसी स्की म नेपाल में हुई होती, तो नेपाल में जो हादसा हुआ उसने परिवारजनों को सबको मदद मिल जाती। और Natural Calamity हमारे हाथ में नहीं होती है। उसी प्रकार से प्रधानमंत्री जीवन ज्योीति बीमा योजना 18 से 50 साल के उम्र के लोगों की है। आमतौर पर आपको मालूम है आप insurance निकालने जाए तो पता नहीं कितने डॉक्टेर आपको check करते हैं, कितना Medical checkup होता है - और वो तय करते हैं कि इनको दें या न दें। पता नहीं यह लुढ़क जाएगा तो। यह स्की म ऐसी है आपको सिर्फ form भरना है। अगर आप बीमार भी होंगे तो भी इसको बीमा मिल सकता है। पहली बार इस प्रकार की सोच के साथ हम आए हैं। गरीब से गरीब व्यीक्ति भी और per day एक रुपये से ज्यासदा नहीं है। 330 रुपये एक दिन का एक रुपया। अगर आप अपने ही employee को, even house wife भी अपना insurance निकाल सकती है। आप अपने छोटे-मोटे काम करने वाले अपने घर के साथ दुकान में काम करने वाले लोग, उनसे भी यह करवा सकते हैं। आप विचार कीजिए 330 रुपया एक व्यमक्ति के लिए साल में खर्च करना, न उनके लिए कोई कठिन है, न उनके लिए कोई करे तो भी कठिन नहीं है। लेकिन एक समाज को सुरक्षा देने का एक बहुत बड़ा काम हो सकता है।

तीसरी हमारी योजना आज जिसका हम प्रांरभ कर रहे हैं - अटल पेंशन योजना। आप देखिए कि हिंदुस्तापन में 10-15% लोगों को ही यह नसीब होता है पेंशन। बाकी सबके लिए बुढ़ापा कहां बिताएंगे चिंता का विषय है, कैसे बिताएंगे चिंता का विषय है। हमारे 60 साल से ऊपर के लोगों की जिंदगी कैसी हो? यह योजना ऐसी है जिसको वोट से लेना-देना नहीं है, क्योंीकि यह योजना का लाभ जब वो 60 साल का होगा, तब शुरू होगा। और अभी तो लगेगा हां यार योजना में जोड़ गया, लेकिन जब लाभ मिलना शुरू होगा न तब उसको रविंद्रनाथ टैगोर की याद आएगी, तब यह कोलकाता के कार्यक्रम की याद आएगी - और तब यह प्रसंग याद आएगा कि हां यार उस दिन यह हुआ था। अब बुढ़ापे में बच्चेद तो नहीं देख रहे, लेकिन यह मोदी जी कुछ करके गए थे यार, कुछ काम आ गया। सामान्यच रहते राजनेता उन योजनाओं को लाते हैं जिसके कारण अगले चुनाव में फायदा हो जाए। लेकिन मैं राजनेता नहीं हूं। मैं एक प्रधान सेवक के रूप में आया हूं। और इसलिए आज जो योजना लाया हूं उन नौजवानों के लिए हैं ताकि आप जब 60 साल के होंगे आपको कभी किसी के सहारे की जरूरत न पड़े। आपके भीतर की शक्ति हो, आपकी अपनी शक्ति हो। आप अपना गौरव के साथ बुढ़ापा भी बिता सको।

अगर आपकी आवश्य कता एक हजार रुपये की पेंशन की है तो उसकी स्की म है, दो हजार पेंशन चाहते हो तो उसकी स्कीयम है, तीन हजार पेंशन चाहते है तो उसकी स्की,म है, चार हजार चाहो तो उसकी स्की म है, पांच हजार चाहो तो उसकी स्कीचम है। और जून महीने से मई महीने तक उसका tenure है, उसमें जुड़ने का। बचत आपको करनी है, लेकिन यह पहली बार ऐसी पेंशन स्कीसम है कि सरकार उसमें गांरटी देती है और आपके पैसे कम पड़ गए तो पैसे भरने का जिम्मास सरकार लेती है। अगर आपको उसका रिटर्न कम मिलेगा तो उसकी जिम्मेावारी सरकार लेती है। और उसके कारण, सामान्य गृहणी भी ये अटल पेंशुं योजना के साथ जुड़ सकती है। किसान - कभी किसान ने सोचा है कि मेरे लिए पेंशन हो सकता है? इस योजना के साथ अगर आज 18 से 40 की उम्र का किसान का बेटा जुड़ा जाता है तो वो जब 60 साल का होगा, अपने आप उसका पेंशन आना शुरू हो जाएगी। एक सुरक्षा का माहौल बनेगा और उसी माहौल को बनाने के लिए सामान्य मानव के जीवन में... और खासकर के गरीब और निम्न, मध्यम वर्ग के लोग जो जीवन को एक संतोष के साथ जीना चाहते हैं, उनके लिए सरकार की योजनाएं होनी चाहिए।

और इसलिए वोट की राजनीति से हटकर के भी, समाज में अगर शक्ति पैदा करेंगे तो शक्तिशाली समाज स्वंय गरीबी के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए एक बहुत बड़ी सेना बनकर के खड़ा हो सकता है। और हमारी कोशिश ये है, हमें गरीबी के खिलाफ लड़ाई लड़ना है लेकिन उस लड़ाई लड़ने के लिए हमारे सिपाही, हम गरीबों को वो ताकत देना चाहते हैं, वो स्वंय इस गरीबी के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए हमारे सिपाही बनेंगे।

और इसलिए गरीबों के कल्याण के लिए आज इन तीन योजनाओं का आरंभ हो रहा है। मुझे विश्वास है कि देश के गरीब 115 स्थान पर इस कार्यक्रम को जो सुन रहे हैं। आज कार्यक्रम का आरंभ हो रहा है विधिवत रूप से, लेकिन हमने जब प्रधानमंत्री जन-धन योजना शुरू की थी तो एक हफ्ते पहले ट्रायल शुरू किया था कि भई देखो कैसे मामला गाड़ी चलती है। और तब हमारा अनुभव था प्रथम सप्ताह में जब हमने काम किया शुरू, नया था, लोगों को समझाना था। लेकिन एक सप्ताह के अंदर हम करीब 1 करोड़ लोगों के बैंक खाते खोलने में सफल हुए थे। वो भी अपने आप में एक बहुत बड़ा record था। इस बार भी हमने 1 मई से Trail basis पर काम शुरू किया था। बहुत बड़ा announcement नहीं किया था, ऐसे ही शुरू किया था। और आज मुझे गर्व के साथ कहना है कि इस 1 मई से शुरू किया हमने, इस 7 दिन के भीतर-भीतर 5 करोड़, 5 लाख लोगों ने enrolment करा दिया है।

ये अपने आप में सरकार की बातों पर भरोसा कितना है, स्वंय की सुरक्षा के लिए सामान्य मानव जुड़ने के लिए कितना आतुर है और हमारे banking sector के लोग भी सरकार के इस काम को करने के लिए कितने उमंग और उत्साह के साथ जुड़ रहे हैं, इसका ये जीता-जागता उदाहरण है। और मैं पश्चिम बंगाल को भी बधाई देता हूं, ये 5 करोड़, 5 लाख में, 42 लाख पश्चिम बंगाल में भी है, 42 lakhs. आने वाले दिनों में... क्योंकि 1 जून से योजना विधिवत रूप से प्रारंभ होने वाली है। अधिकतम लोगों से मेरा आग्रह है कि 1 जून के पहले इस योजना का लाभ लेने के लिए अपने निकट बैंकों का संपर्क करके, वो जुड़ें। और अटल पेंशन योजना में सरकार की तरफ से जो special incentive दिया जा रहा है, जिसमें सरकार आपको गारंटी दे रही है, सरकार कुछ न कुछ धन दे रही है, ये 31 December तक है। मैं चाहता हूं कि 31 December तक अटल पेंशन योजना में जो भारत सरकार का आपको योगदान मिल रहा है उसका फायदा उठाइए, जून महीने से कार्यक्रम प्रारंभ हो रहा है लेकिन इस बार हमने 30 अगस्त तक उसको लंबा किया है। तो मैं चाहूंगा कि 30 अगस्त के पहले इन तीन योजनाओं में सर्वाधिक लोग जुड़ें।

मुझे विश्वास है कि एक ऐसी सुरक्षा की व्यवस्था हम लेकर के आए हैं जो मूलतः गरीबों के लिए है, सामान्य मानव के लिए है और जो संपन्न लोग हैं, वे भी अपने यहां काम करने वाले लोगों के लिए इस काम में जुड़कर के अपने यहां काम करने वाले और कुछ तो परिवार ऐसे होते हैं दो-दो पीढ़ी तक एक परिवार उनके यहां काम करता है। ड्राइवर होंगे तो तीन पीढ़ी से ड्राइवर उनके यहीं काम करने वाले होंगे, एक प्रकार से वो परिवार के अंग बन जाते हैं। सरकार की ये योजना आपके माध्यम से गरीब की सेवा का एक कारण बन सकता है, आपके जीवन में भी संतोष का कारण बन सकता है। और आखिरकर ये धरती ऐसी है स्वामी विवेकानंद ने हमें दरिद्र नारायण की सेवा करने की प्रेरणा दी थी। ये धरती ऐसी है जहां से रामकिशन मिशन के द्वारा आज भी गरीबों के कितने सेवा के काम हो रहे हैं। हम भी उस संकल्प को लेकर के आगे बढ़ें, इस व्यवस्था का फायदा उठाएं, जन-धन की योजना को जन-कल्याण में परिवर्तित करें। इसी एक अपेक्षा के साथ मैं आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

धन्यवाद।

Explore More
শ্ৰী ৰাম জনমভূমি মন্দিৰৰ ধ্বজাৰোহণ উৎসৱত প্ৰধানমন্ত্ৰীৰ সম্বোধনৰ অসমীয়া অনুবাদ

Popular Speeches

শ্ৰী ৰাম জনমভূমি মন্দিৰৰ ধ্বজাৰোহণ উৎসৱত প্ৰধানমন্ত্ৰীৰ সম্বোধনৰ অসমীয়া অনুবাদ
Strengthening India’s path to power leadership: How India is energising a new growth story - By Shri Manohar Lal, Union Minister of Power

Media Coverage

Strengthening India’s path to power leadership: How India is energising a new growth story - By Shri Manohar Lal, Union Minister of Power
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
The legacy here is a continuous process that enriches our parliamentary system: PM Modi in Rajya Sabha
March 18, 2026
In politics, there are no full stops; your experience and contribution will forever remain a part of the nation’s life: PM
There is much to learn from these senior leaders about staying entirely committed to the responsibilities given by society: PM
The legacy here is a continuous process that enriches our parliamentary system: PM
Parliamentary system gains immense strength from the concept of a second opinion; This second opinion is a massive contribution to our democracy that we must cherish: PM
The six years spent here are invaluable for shaping one's contribution to the nation and for self-growth: PM
The invaluable contributions of the retiring members to nation-building would continue to be felt whether they serve within the formal system or through independent social work: PM

इस विशेष अवसर पर आपने मुझे अपनी भावनाएं प्रकट करने के लिए जो अवसर दिया, इसके लिए मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूं।

आदरणीय सभापति जी,

सदन के अंदर अनेक विषयों पर चर्चाएं होती हैं, हर किसी का बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान होता है, कुछ खट्टे-मीठे अनुभव भी रहते हैं। लेकिन आज जब ऐसा अवसर आता है, तो स्वाभाविक रूप से दलगत भावना से ऊपर उठकर के हम सबके भीतर एक समान भाव प्रकट होता है, क्या? ये हमारे साथी अब किसी और विशेष काम के लिए आगे बढ़ रहे हैं। यहां से जो साथी विदाई ले रहे हैं, कुछ फिर से आने के लिए विदाई ले रहे हैं, और कुछ विदाई के बाद यहां का अनुभव लेकर के समाज जीवन में कुछ ना कुछ विशेष योगदान के लिए जा रहे हैं। जो जा रहे हैं, लेकिन आने वाले नहीं है, उनको भी मैं कहना चाहूंगा कि राजनीति में कोई फुल स्टॉप नहीं होता है, भविष्य आपका भी इंतजार कर रहा है, और आपका अनुभव, आपका योगदान राष्ट्र जीवन में हमेशा-हमेशा बना रहेगा।

आदरणीय सभापति जी,

इस सदन में, जो भी सदस्य माननीय हमारे विदाई ले रहे हैं, कुछ सदन सदस्य ऐसे हैं, जिनको शायद उस समय जाने का समय कार्यकाल आएगा जब सदन नहीं चलता होगा, कुछ है जिनको ऑलरेडी सदन के दरमियान ही विदाई मिल रही है। लेकिन ये जाने वाले सभी माननीय सांसदों का बहुत ही उत्तम योगदान है, इसलिए, लेकिन मैं जरूर कहूंगा, आदरणीय देवगोड़ा जी, आदरणीय खड़गे जी, आदरणीय शरद पवार जी, ये ऐसे वरिष्ठ लोग हैं, जिनके जीवन का आधे से अधिक उम्र संसदीय कार्य प्रणाली में गई है, और इतने लंबे अनुभव के बाद भी सभी नए सांसदों ने सीखना चाहिए, वैसे समर्पित भाव से सदन में आना, जो भी हमसे-उनसे बन सकता है, उतना योगदान करना, यानी समाज में से जो जिम्मेवारी मिली है, उसके प्रति पूरी तरह समर्पित रहना। ये इन सब वरिष्ठ लोगों से हम जैसे सबको सीखने जैसा है। और मैं उनके योगदान की भूरी-भरी सराहना करूंगा, क्योंकि इतना लंबा कार्यकाल छोटा नहीं होता जी, बहुत महत्वपूर्ण है। उसी प्रकार से हमारे उपसभापति जी, हरिवंश जी विदाई ले रहे हैं। हरिवंश जी को लंबे समय तक इस सदन में अपनी जिम्मेवारी निभाने का अवसर मिला है। बहुत ही मृदुभाषी, सदन को चलाने में सबका विश्वास जितने का निरंतर जिन्होंने प्रयास किया और मैंने देखा है कि संकट के समय ज्यादातर उपसभापति के ही जिम्मे आ जाता है कि भाई आप संभाल लेना जरा, तो उनको एक लंबा एक्सपीरियंस होता है, सबको जान भी लेते हैं, भली-भांति जान लेते हैं। लेकिन उनका भी योगदान है। और जब भी, और मैंने देखा कि जब सदन का समय नहीं होता है, तो देश के कोने में, कोने में, कहीं ना कहीं वो यूथ के साथ मिलना- जुलना, देश की परिस्थितियों के संबंध में उनको अवगत कराना, उनमें एक देश के प्रति संवेदनाएं पैदा करना, वो भी निरंतर काम है। वो कलम के धनी तो है ही है, लेकिन कर्म कठोर के नाते भी मैं कहूंगा कि उन्होंने भारत के हर कोने में जाकर के अपना काम किया है।

आदरणीय सभापति जी,

कभी-कभी किसी समय हम सुनते थे कि सदन में बहुत ही हास्य विनोद व्यंग का अवसर मिलता रहता है। इन दिनों शायद धीरे-धीरे कम होता जा रहा है, क्योंकि 24x7 मीडिया की दुनिया ऐसी है कि हर कोई कॉनशियस रहता है, लेकिन हमारे अठावले जी, है जी, सदा बहार है, अठावले जी जा रहे हैं, लेकिन यहां पर किसी को खोट महसूस नहीं होगी, वो व्यंग विनोद भरपूर परोसते रहेंगे, ऐसा मुझे पूरा भरोसा है।

आदरणीय सभापति जी,

सदन में से हर दो साल के अंतराल के बाद एक बड़ा समूह हमारे बीच से जाता है, लेकिन ये ऐसी व्यवस्था है कि जो नया समूह आता है, उनको बाकी जो लंबे समय से, चार साल से बैठे हुए साथी हैं, अनुभव है, नए लोगों को तुरंत उनसे कुछ ना कुछ सीखने का अवसर मिलता है, और इसलिए एक प्रकार से यहां की जो विरासत है, वो कंटिन्यू प्रोसेस हमेशा रहती है, यह बहुत बड़ा लाभ होता है। मुझे पक्का विश्वास है कि जिनको इस बार जाना नहीं है, वो भी जो नए माननीय सांसद आएंगे, उनको, उनके अनुभव का लाभ मिलेगा और उनका योगदान भी सदन को और समृद्ध करेगा, ऐसा मेरा पूरा विश्वास है।

आदरणीय सभापति जी,

हम लोग जानते हैं कि जीवन में या सार्वजनिक जीवन में, जब भी कोई महत्वपूर्ण निर्णय करना होता है, तो परिवार के लोग बैठकर के मन बना लेते हैं कि ऐसा करना है, लेकिन फिर भी कहते हैं, अरे ऐसा करो, उनसे जरा पूछ लीजिए, एक सेकेंड ओपिनियन ले लीजिए, किसी वरिष्ठ से और घर में वरिष्ठ कहेंगे, मोहल्ले में देखो भाई, वो काफी अनुभवी है, जरा उनसे पूछ लो, एक बार उनका मन क्या करता है। अगर कोई बीमार है, तो भी कहते हैं यार ऐसा करो भाई, एक और डॉक्टर से जरा ओपिनियन ले लो, सेकेंड ओपिनियन का बहुत महत्व होता है। मैं समझता हूं, हमारे संसदीय प्रणाली में इस सेकेंड ओपिनियन की बहुत बड़ी ताकत रही है। एक सदन में कुछ निर्णय होता है, दूसरे सदन में फिर आता है, सेकेंड ओपिनियन के लिए। अगर इस सदन में होता है, तो उस सदन में जाता है सेकेंड ओपिनियन के लिए, और ये सेकेंड ओपिनियन उस सारी बहस को, उस सारे निर्णय प्रक्रिया को एक बहुत बड़ा नया आयाम दे देती है, और वो मैं समझता हूं कि हमारी निर्णय प्रक्रिया को समृद्ध करती है। तो इसलिए, सदन में जो माननीय सांसद बैठते हैं, उनके लिए एक खुलापन रहता है कि भाई चलो इस सदन में नहीं तो, उस सदन में एक अच्छा ओपिनियन नया आएगा, उस सदन में नहीं तो, इस सदन में एक नया ओपिनियन आएगा। तो ये सेकेंड ओपिनियन, ये हमारे लोकतंत्र में एक बहुत बड़ा कंट्रीब्यूशन है, जो जिस विरासत को हमें संभालना, हमारे जो माननीय सांसद विदाई ले रहे हैं, उनका तो योगदान रहा ही है, और इसके लिए भी मैं उनका साधुवाद करता हूं।

आदरणीय सभापति जी,

जो हमारे माननीय सांसद विदाई ले रहे हैं, बहुत आने वाले दिनों में तो शायद ये अवसर रहने वाला ही नहीं है, लेकिन ये माननीय सांसद ऐसे हैं कि जिनको पुराने संसद के भवन में भी बैठने का मौका मिला और नए संसद भवन में भी बैठने का मौका मिला। उनको दोनों इमारतों में, उनको राष्ट्र के कल्याण के लिए अपना योगदान देने का अवसर मिला है, और उनके कार्यकाल में ही, उनको इस नए सदन के निर्माण प्रक्रिया में और नए सदन की निर्णय प्रक्रिया में भी हिस्सा बनने का अवसर मिला है, ये एक विशेष उनके जीवन में याद रहेगी, नई स्मृति रहेगी।

आदरणीय सभापति जी,

मैं सभी माननीय सांसदों के और मैं मानता हूं कि ये सदन अपने आप में एक बहुत बड़ी ओपन यूनिवर्सिटी है, राष्ट्र जीवन की कई बारीकियों से परिचित होने का अवसर सदन में प्राप्त होता है। एक प्रकार से हमारे यहां शिक्षा भी होती है, हमारी दीक्षा भी होती है। ये 6 साल यहां जो रहने का अवसर मिलता है, वो जीवन को गढ़ने का, राष्ट्र जीवन के गढ़तम्य योगदान का तो महत्व है ही है, क्योंकि निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन स्वयं के जीवन को गढ़ने का भी एक अमूल्य अवसर होता है। और इसलिए जब माननीय सांसद यहां आते हैं, उस समय की उनकी जो भी सोच-समझ और क्षमता है, जब जाते हैं, तो अनेक गुना वो बढ़ती है, उसका विस्तार होता है, और अनुभव की एक बहुत बड़ी ताकत होती है। अब तब जाकर के जाने के बाद राष्ट्र जीवन का उनका निरंतर योगदान बना रहे हैं। वो अपने तरीके से व्यवस्था के तहत हो सकते हैं, व्यवस्था के तहत ना भी हो सके, लेकिन उनका अमूल्य योगदान मिलता ही रहे, राष्ट्र जीवन के निर्माण में उनका अनुभव हमेशा-हमेशा उपयोगी हो, ये मेरी उन सभी माननीय सांसदों को मेरी शुभकामनाएं हैं। और मैं फिर से एक बार सभी माननीय सांसदों के योगदान का गौरव गान करता हूं, साधुवाद करता हूं।

बहुत-बहुत धन्यवाद।