Text of PM's remarks at launch of Social Security Schemes

Published By : Admin | May 9, 2015 | 22:12 IST
Share
 
Comments

उपस्थित सभी महानुभाव,

यह कार्यक्रम कलकत्ता के एक सभागृह में हो रहा है, लेकिन देश के 115 स्था नों पर simultaneous यह कार्यक्रम चल रहा है। उस कार्यक्रम में उपस्थित भी सभी महानुभाव को मैं अपना प्रणाम करता हूं।

आज पूज्य। गुरूदेव रविंद्रनाथ टैगोर की जन्म जयंती का पावन पर्व है। बंगाल का स्म>रण करते हुए हर एक हिंदुस्ताटनी का सिर ऊंचा हो जाता है, आंखों में चमक आ जाती है, सीना चौड़ा हो जाता है। भारत के ऐतिहासिक जीवन की अनेक घटनाएं हैं, जिसकी प्रेरणा इस धरती से मिली। अगर परिवर्तन का कहीं प्रारंभ हुआ तो इसी धरती से हुआ। और गोखले जी कहा करते थे कि बंगाल जो आज सोचता है, हिंदुस्ताीन बाद में वही सोचता है।

और यह धरती एक समय था जब हिंदुस्ता्न की आर्थिक विकास की पूरी बागडोर उसके हाथ में थी। भारत की आर्थिक गतिविधि बंगाल से केंद्रित होती थी। इस धरती की विशेषता रही है कि मां दुर्गा की पूजा में तो लीन रहते हैं। लेकिन इसे सरस्वषती का भी आर्शीवाद है और साथ-साथ लक्ष्मी का भी आशीर्वाद है। और जहां सरस्वाती और लक्ष्मीm दोनों को आशीर्वाद मिले हो ऐसी यह धरती रही है। औद्योगिक जगत में भी manufacturing sector की बात करें, यही धरती है जिसने बहुत बड़ा योगदान किया है।

और अभी आदरणीय मुख्यजमंत्री जी अपने भाषण में उल्ले ख कर रहीं थी कि गांवों में बैंक भी नहीं है। 60 साल का हिसाब है यह। उनकी पीड़ा बहुत स्वालभाविक है, मैं भी उसमें अपना स्वनर जोड़ता हूं। लेकिन उन्हों ने यह बात मेरे सामने रखी, क्योंतकि उनको भरोसा है, अगर करेगा तो यही करेगा। आप कल्पूना कर सकते हैं कि देश में गरीबों के लिए बैंकों का राष्ट्री यकरण किया गया था। लेकिन इस देश के गरीब को कभी हमें बैंकों में देखने का अवसर नहीं मिला था।

आज भी यह जो स्कीाम लेकर के हम आए हैं, 80 से 90 Percent इस देश के लोग हैं, जिनको कोई insurance नहीं है, जिनको कोई पेंशन की संभावना नहीं है। सवा सौ करोड़ का देश, 80-90 प्रतिशत जनसंख्या, इन सामान्य आवश्यकताओं की पूर्ति उसके भाग्य में न लिखी हो तो कितनी पीड़ा होती है। और ये सारी योजनाएं जन्म ले रही हैं, आ रही हैं, वो गरीबों के प्रति हमारे दायित्व में से एक है, गरीबों के प्रति संवेदना में से एक है। और हम विकास कितना ही करें, नई ऊंचाइयों को कितना ही पाएं, प्राप्त करें। लेकिन अगर इसके सुफल गरीबों की झोंपड़ी तक नहीं पहुंचते हैं तो विकास अधूरा है। और इसलिए एक तरफ हम विकास की नई ऊंचाइयों को छूने के लिए सारी दुनिया को झकझोर रहे हैं, Make in India के लिए प्रेरित कर रहे हैं तो दूसरी तरफ गरीब से गरीब का बैंक का खाता खुले इसके लिए दिन-रात कोशिश करते हैं। और मुझे खुशी है कि जब प्रधानमंत्री जन-धन योजना हम लेकर के हम आए, 15 अगस्त को मैंने घोषित किया, 26 जनवरी तक पूरा करने की कल्पना थी, लेकिन देश के बैंकों में काम करने वाले सभी मित्रों ने इतनी मदद की, एक ऐसा जनांदोलन बन गया। 15 करोड़ नए खाते खोल दिए और आज देश में करीब-करीब 95 percent से ज्यादा लोग अर्थव्यवस्था की जो मुख्यधारा होती है Banking Sector उससे जुड़ गए हैं। जो कभी आधे भी नहीं थे।

ये काम सौ-सवा सौ दिन में पूरा कर दिया गया। और मैंने गरीबों को कहा था कि ये देश आपके लिए हैं, सरकार आपके लिए हैं, बैंक आपके लिए हैं। आपको एक पैसा देना नहीं है, बैंक का खाता खोलना है, Zero balance से। लेकिन गरीबों में अमीरी बहुत होती है। अमीरों की गरीबी की चर्चा करने की तो हिम्मत लोगों में कम होती है, लेकिन गरीबों की अमीरी की चर्चा मैं आज करना चाहता हूं। हमने तो कहा था Zero balance से खाते खोल देंगे। लेकिन मैं आज उन गरीबों को सलाम करता हूं कि उन्होंने मन में सोचा कि ये तो अच्छा नहीं है, ये तो हमें शोभा नहीं देता है। और मैं आज गर्व से कहता हूं कि ये जो 15 करोड़ बैंक खाते खुले उसमें 15 हजार 800 करोड़ रुपए राशि गरीबों ने जमा कर दी।

इस देश के गरीबों की अमीरी की ताकत देखिए। और तब जाकर के मन करता है, इन गरीबों के लिए कुछ करते रहना चाहिए। और मेरा ये विश्वास है, गरीबों को सहारा नहीं चाहिए। हमें हमारी सोच बदलनी होगी, हमारे कार्यकलाप बदलने होंगे, हमारे तौर-तरीके बदलने होंगे। गरीबों को सहारा नहीं चाहिए, गरीबों को शक्ति चाहिए। अगर उसको शक्ति मिलेगी तो गरीब गरीबी के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए तैयार है और गरीबी से मुक्ति का आनंद लेने के लिए वो पूरी शक्ति लगाने के लिए तैयार है, उसे शक्ति देने की आवश्यकता है।

और आज जब गुरुदेव रविंद्र नाथ जी की जन्म जयंती की अवसर पर मैं बोल रहा हूं तब गुरुदेव ने 1906 में आत्मत्राण इस कविता में जो लिखा था, मैं समझता हूं 1906 की वो बात आज 2015 में भी हमें लागू हो रही है। गुरुदेव ने कहा था “It is not my prayer that you will save me from difficulties, give me the strength to overcome the difficulty. do not take away my burden or console me, give me the capacity to bear my burden” - यह बात गुरूदेव जी ने कही थी। और आज हमारा संकल्पe है उस आदेश का पालन करना जो गुरूदेव ने दिया है। और उसी में से यह योजना और कलकत्तेi की धरती पर हो रहा है। क्योंिकि मुझे विश्वांस है, जो चीज इस धरती से प्रारंभ होती है वो फिर आगे बढ़ती ही बढ़ती जाती है, परिणाम मिलता ही मिलता है। और रविंद्रनाथ जी के गुरूदेव की जन्मढ जंयती पर कोई चीज प्रारंभ होती हो और उन्होंंने जो भावना व्यिक्त की थी उसी की अभिव्य क्ति होती हो तो मुझे विश्वारस है गुरूदेव के आशीर्वाद इस योजना को सफल बनाएंगे और देश के गरीबों एक नई शक्ति प्राप्ति करने का अवसर प्रतिपादित होगा। यह मेरा पूरा विश्वारस है।

हमने जब प्रधानमंत्री जनधन योजना शुरू की तब कई लोगों को लग रहा था कि क्या् होगा, कैसे होगा लेकिन आज अनुभव यह आ रहा है कि गरीबों के लिए एक के बाद एक योजनाएं - एक बार बैंक खाता खुल गया, तो हम बात वहां रोकना नहीं चाहते। वो तो हमारा foundation था हम एक के बाद एक हमारी बातें unfold करते चले जा रहे हैं। हमने कहा आपको हैरानी होगी, इस देश में कुछ लोगों को सरकारी पेंशन मिलता है करीब 35 लाख लोग, करीब-करीब 35 लाख लोग और कितना पेंशन मिलता था? किसी को सात रुपया, किसी को 20 रुपया, किसी को सवा सौ, किसी को ढ़ाई सौ। बेचारे को पेंशन लेने के लिए जाना है इस उम्र में ऑटो रिक्शास में जाए या बस में जाए तो पेंशन से ज्याकदा खर्चा उसका बस में जाने से होता था। लेकिन यह चल रहा था। हमने आकर तय किया कि जिसको भी पेंशन मिलता है एक हजार से कम किसी को नहीं होगा। और हमने देना प्रारंभ कर दिया है। क्यों ? गरीब सम्माान से जीए, उसे शक्ति चाहिए। वो शक्ति देना का प्रयास उसको हमने आगे बढ़ाया।

हमारे देश में कभी-कभी लोगों को लगता है कि ये जो बहुत बड़े-बड़े औद्योगिक घराने हैं न वो देश में बहुत बड़ी आर्थिक क्रांति करते हैं। यह बहुत बड़ा भ्रम है। उनका योगदान है लेकिन बहुत सीमित है। देश के अर्थतंत्र को कौन चलाता है? जो छोटा-सा कारोबार करने वाला व्योक्ति है, चौराहे पर खड़े रहकर के सब्जीह बेचता है, धोबी की दुकान चलाता है, biscuit बेचता है, चाय-पान का गल्लाह चलाता है, कपड़े बेचता है, readymade garment बेचता है। छोटे-छोटे लोग! हिंदुस्ताान में करीब साढ़े पांच करोड़ से ज्याेदा ये लोग देश को अर्थतंत्र को गति देते हैं। और बड़े-बड़े औद्योगिक घराने बहुत कम लोगों को रोजगार देते हैं, यह पांच-साढ़े पांच करोड़ जो छोटे काम करने वाले लोग हैं, वे करीब 14 करोड़ लोगों को रोजगार देते हैं, आप कल्पोना कर सकते हैं यानि 14 करोड़ परिवारों का पेट भरने का काम इनके द्वारा होता है। और उनकी Total संपदा जो है इतने सारे लोगों की बहुत ज्या दा नहीं है। कोई 11-12 लाख करोड़ रुपया है। और वो जो पैसा उनको चाहिए interest से, बाजार से - कोई बैंक वाला उनको पैसा नहीं देता है, व्याोपारी बड़े छोटे हैं। इन सबका average जो कर्ज है वो seventeen thousand rupees है, average अगर निकाली जाए तो seventeen thousand. उनको साहूकारों से पैसा लेना पड़ता है। उस प्रकार की कंपनियों के वहां जाना पड़ता है पैसा लेने के लिए कि जिसमें उनका खून चूस लिया जाता है। हम गरीबों की भलाई के लिए काम करने वाली सरकार होने के कारण हम एक मुद्रा बैंक का Concept इस बजट में लाए हैं और बजट में लाए इतना ही नहीं अभी तो बजट सत्र चल रहा है, वो मुद्रा बैंक का काम आरंभ हो गया। और उसके अंतर्गत ये जो साढ़े पांच करोड़ सामान्य लोग हैं, जिनको 5 हजार, 10 हजार रुपया भी मिल जाए तो बहुत तेजी से अपने काम को बढ़ा सकते हैं। उनको बैंक loan देने के लिए एक बहुत बड़ा अभियान हमने चलाया है। उनको पैसे मिलने चाहिए, सरकार सामने से जाकर के पूछ रही है कि बताओ भाई तुम्हारे आगे बढ़ने की कोई योजना है क्या? गरीबों के लिए काम करना है, एक के बाद एक कैसे काम होते हैं।

उसी प्रकार से हमारे यहां, हम Corruption के खिलाफ भी बड़ी लड़ाई लड़ रहे हैं, एक ऐसी क्रांति ला रहे हैं जो इस प्रकार के Leakages को अपने आप ताले लग जाएंगे। हमारे यहां गैस सिलिंडर लेने वाले को सब्सिडी मिलती है। अमीर हो, गरीब हो सबको सब्सिडी मिलती है। हमने तय किया कि सब्सिडी Direct बैंक के खाते में जाएगी। जन-धन account खोल दिए, और उस बैंक के खाते में जिसके पास गैस सिलिंडर, Direct सब्सिडी जाएगी, ये दुनिया का सबसे बड़ा विक्रम है कि करीब 12 करोड़ से ज्यादा लोगों के खाते में भारत सरकार सीधी-सीधी गैस सिलिंडर की सब्सिडी देती है। और उसके कारण पहले किसी न किसी नाम से सब्सिडी जाती थी वो सारा बंद हो गया, पहले की तुलना में बहुत बड़ा फर्क आया है। आकंड़ा में बोलना नहीं चाहता हूं इसलिए क्योंकि मैं चाहता हूं कुछ खोज करने वाले लोग इसको खोजें, आप कल्पना नहीं कर सकते हैं अरबों-खरबों रुपयों का leakage था, अरबों-खरबों रुपयों का, जो हमने रोक दिया।

जन-धन account खुलते ही उसको follow-up में किस प्रकार से काम होता है, इसके ये उदाहरण है। और आज तीन नई योजनाएं हैं। हमारे देश, हम जब मुद्रा बैंक लाए तो हमने कहा था “Funding the Unfunded” जिनको Fund नहीं मिलता है, जिनके पैसे नहीं मिलते हैं, उनको Fund देंगे। जब हम जन-धन योजना लेकर के आए तो हमने कहा था, जिसको Banking की व्यवस्था नहीं है, उसको Banking की व्यवस्था, जिसका खाता नहीं, उसका खाता खोलेंगे और आज हम आए हैं कि जिसको सुरक्षा का कवच नहीं है, उसको हम सुरक्षा का कवच देंगे।

एक योजना है प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना - अभी फिल्म में हमने देखा, बड़ा चोट पहुंचाने वाला dialogue था कि 12 रुपए में कफन भी नहीं मिलता है। 12 रुपए में दो लाख रुपए की Insurance scheme हम लेकर के आए हैं, क्योंकि हम चाहते हैं कि देश के सामान्य व्यक्ति के जीवन में - क्योंकि संकट अमीर को नहीं आता है, संकट गरीब को आता है, फुटपाथ पर सोता है, बेचारे को मरना पड़ता है, साईकिल लेकर जाता है, मर जाता है, बच्चा स्कूल जाता है, बस के नीचे आता है, मरता है - उनकी सुरक्षा कौन करेगा? और इसलिए एक जागरुकता आए, भागीदारी बने और जैसे रविंद्रनाथ जी टेगौर ने हमें आदेश दिया है, गुरुदेव का आदेश है, उसको शक्ति दो - ये शक्ति देने का प्रयास है।

2 लाख रुपए का Insurance, अगर Injury हो गई, तो दो लाख रुपया भी मिल सकता है, एक लाख रुपया भी मिल सकता है। आप भी सोचिए, आपके यहां ड्राइवर होगा, आपके यहां झाड़ू-पोंछा करने वाले, कोई बाई काम करती होगी, खाना पकाने वाला कोई काम करता होगा। क्या आपको नहीं लगता है कि 12 रुपया खुद आपकी जेब से देकर के, उसको सुरक्षा का बीमा नहीं निकाल सकते आप? मैं इस देश के उन करोड़ों लोगों से आज प्रार्थना करना चाहता हूं कि आप अपनी जेब से, अपने यहां जो काम करने वाले लोग हैं, आपका ड्राइवर है, वो आपकी Society का lift man हो, गरीब लोग जिसके साथ आपका नेता, आपके मोहल्ले में झाडू लगाने आता है। आप उसे कहिए मेरे लिए 12 रुपये कुछ नहीं है। शाम को कभी कॉफी पीने जाता हूं तो 12 रुपये से ज्या दा खर्च करके आ जाता हूं। मैं तेरे लिए खर्च करूंगा। और अगर एक किस्तै बैंक में जमा कर दी और बैंक वालों को कह दिया कि ब्या ज उसका काटते रहिए, मुझे बताइये कि उसके जीवन को कितनी बड़ी सुरक्षा मिलेगी। और वो कभी आपको छोड़कर के जाएगा क्याउ? कभी नहीं जाएगा।

उसी प्रकार से प्रधानमंत्री जीवन ज्योोति बीमा योजना - पहले वाला जो 12 रुपये वाली स्की म में है Natural Calamity में भी अगर किसी के मृत्युन होती है तब भी उसको benefit मिलेगा। अगर आज ऐसी स्की म नेपाल में हुई होती, तो नेपाल में जो हादसा हुआ उसने परिवारजनों को सबको मदद मिल जाती। और Natural Calamity हमारे हाथ में नहीं होती है। उसी प्रकार से प्रधानमंत्री जीवन ज्योीति बीमा योजना 18 से 50 साल के उम्र के लोगों की है। आमतौर पर आपको मालूम है आप insurance निकालने जाए तो पता नहीं कितने डॉक्टेर आपको check करते हैं, कितना Medical checkup होता है - और वो तय करते हैं कि इनको दें या न दें। पता नहीं यह लुढ़क जाएगा तो। यह स्की म ऐसी है आपको सिर्फ form भरना है। अगर आप बीमार भी होंगे तो भी इसको बीमा मिल सकता है। पहली बार इस प्रकार की सोच के साथ हम आए हैं। गरीब से गरीब व्यीक्ति भी और per day एक रुपये से ज्यासदा नहीं है। 330 रुपये एक दिन का एक रुपया। अगर आप अपने ही employee को, even house wife भी अपना insurance निकाल सकती है। आप अपने छोटे-मोटे काम करने वाले अपने घर के साथ दुकान में काम करने वाले लोग, उनसे भी यह करवा सकते हैं। आप विचार कीजिए 330 रुपया एक व्यमक्ति के लिए साल में खर्च करना, न उनके लिए कोई कठिन है, न उनके लिए कोई करे तो भी कठिन नहीं है। लेकिन एक समाज को सुरक्षा देने का एक बहुत बड़ा काम हो सकता है।

तीसरी हमारी योजना आज जिसका हम प्रांरभ कर रहे हैं - अटल पेंशन योजना। आप देखिए कि हिंदुस्तापन में 10-15% लोगों को ही यह नसीब होता है पेंशन। बाकी सबके लिए बुढ़ापा कहां बिताएंगे चिंता का विषय है, कैसे बिताएंगे चिंता का विषय है। हमारे 60 साल से ऊपर के लोगों की जिंदगी कैसी हो? यह योजना ऐसी है जिसको वोट से लेना-देना नहीं है, क्योंीकि यह योजना का लाभ जब वो 60 साल का होगा, तब शुरू होगा। और अभी तो लगेगा हां यार योजना में जोड़ गया, लेकिन जब लाभ मिलना शुरू होगा न तब उसको रविंद्रनाथ टैगोर की याद आएगी, तब यह कोलकाता के कार्यक्रम की याद आएगी - और तब यह प्रसंग याद आएगा कि हां यार उस दिन यह हुआ था। अब बुढ़ापे में बच्चेद तो नहीं देख रहे, लेकिन यह मोदी जी कुछ करके गए थे यार, कुछ काम आ गया। सामान्यच रहते राजनेता उन योजनाओं को लाते हैं जिसके कारण अगले चुनाव में फायदा हो जाए। लेकिन मैं राजनेता नहीं हूं। मैं एक प्रधान सेवक के रूप में आया हूं। और इसलिए आज जो योजना लाया हूं उन नौजवानों के लिए हैं ताकि आप जब 60 साल के होंगे आपको कभी किसी के सहारे की जरूरत न पड़े। आपके भीतर की शक्ति हो, आपकी अपनी शक्ति हो। आप अपना गौरव के साथ बुढ़ापा भी बिता सको।

अगर आपकी आवश्य कता एक हजार रुपये की पेंशन की है तो उसकी स्की म है, दो हजार पेंशन चाहते हो तो उसकी स्कीयम है, तीन हजार पेंशन चाहते है तो उसकी स्की,म है, चार हजार चाहो तो उसकी स्की म है, पांच हजार चाहो तो उसकी स्कीचम है। और जून महीने से मई महीने तक उसका tenure है, उसमें जुड़ने का। बचत आपको करनी है, लेकिन यह पहली बार ऐसी पेंशन स्कीसम है कि सरकार उसमें गांरटी देती है और आपके पैसे कम पड़ गए तो पैसे भरने का जिम्मास सरकार लेती है। अगर आपको उसका रिटर्न कम मिलेगा तो उसकी जिम्मेावारी सरकार लेती है। और उसके कारण, सामान्य गृहणी भी ये अटल पेंशुं योजना के साथ जुड़ सकती है। किसान - कभी किसान ने सोचा है कि मेरे लिए पेंशन हो सकता है? इस योजना के साथ अगर आज 18 से 40 की उम्र का किसान का बेटा जुड़ा जाता है तो वो जब 60 साल का होगा, अपने आप उसका पेंशन आना शुरू हो जाएगी। एक सुरक्षा का माहौल बनेगा और उसी माहौल को बनाने के लिए सामान्य मानव के जीवन में... और खासकर के गरीब और निम्न, मध्यम वर्ग के लोग जो जीवन को एक संतोष के साथ जीना चाहते हैं, उनके लिए सरकार की योजनाएं होनी चाहिए।

और इसलिए वोट की राजनीति से हटकर के भी, समाज में अगर शक्ति पैदा करेंगे तो शक्तिशाली समाज स्वंय गरीबी के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए एक बहुत बड़ी सेना बनकर के खड़ा हो सकता है। और हमारी कोशिश ये है, हमें गरीबी के खिलाफ लड़ाई लड़ना है लेकिन उस लड़ाई लड़ने के लिए हमारे सिपाही, हम गरीबों को वो ताकत देना चाहते हैं, वो स्वंय इस गरीबी के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए हमारे सिपाही बनेंगे।

और इसलिए गरीबों के कल्याण के लिए आज इन तीन योजनाओं का आरंभ हो रहा है। मुझे विश्वास है कि देश के गरीब 115 स्थान पर इस कार्यक्रम को जो सुन रहे हैं। आज कार्यक्रम का आरंभ हो रहा है विधिवत रूप से, लेकिन हमने जब प्रधानमंत्री जन-धन योजना शुरू की थी तो एक हफ्ते पहले ट्रायल शुरू किया था कि भई देखो कैसे मामला गाड़ी चलती है। और तब हमारा अनुभव था प्रथम सप्ताह में जब हमने काम किया शुरू, नया था, लोगों को समझाना था। लेकिन एक सप्ताह के अंदर हम करीब 1 करोड़ लोगों के बैंक खाते खोलने में सफल हुए थे। वो भी अपने आप में एक बहुत बड़ा record था। इस बार भी हमने 1 मई से Trail basis पर काम शुरू किया था। बहुत बड़ा announcement नहीं किया था, ऐसे ही शुरू किया था। और आज मुझे गर्व के साथ कहना है कि इस 1 मई से शुरू किया हमने, इस 7 दिन के भीतर-भीतर 5 करोड़, 5 लाख लोगों ने enrolment करा दिया है।

ये अपने आप में सरकार की बातों पर भरोसा कितना है, स्वंय की सुरक्षा के लिए सामान्य मानव जुड़ने के लिए कितना आतुर है और हमारे banking sector के लोग भी सरकार के इस काम को करने के लिए कितने उमंग और उत्साह के साथ जुड़ रहे हैं, इसका ये जीता-जागता उदाहरण है। और मैं पश्चिम बंगाल को भी बधाई देता हूं, ये 5 करोड़, 5 लाख में, 42 लाख पश्चिम बंगाल में भी है, 42 lakhs. आने वाले दिनों में... क्योंकि 1 जून से योजना विधिवत रूप से प्रारंभ होने वाली है। अधिकतम लोगों से मेरा आग्रह है कि 1 जून के पहले इस योजना का लाभ लेने के लिए अपने निकट बैंकों का संपर्क करके, वो जुड़ें। और अटल पेंशन योजना में सरकार की तरफ से जो special incentive दिया जा रहा है, जिसमें सरकार आपको गारंटी दे रही है, सरकार कुछ न कुछ धन दे रही है, ये 31 December तक है। मैं चाहता हूं कि 31 December तक अटल पेंशन योजना में जो भारत सरकार का आपको योगदान मिल रहा है उसका फायदा उठाइए, जून महीने से कार्यक्रम प्रारंभ हो रहा है लेकिन इस बार हमने 30 अगस्त तक उसको लंबा किया है। तो मैं चाहूंगा कि 30 अगस्त के पहले इन तीन योजनाओं में सर्वाधिक लोग जुड़ें।

मुझे विश्वास है कि एक ऐसी सुरक्षा की व्यवस्था हम लेकर के आए हैं जो मूलतः गरीबों के लिए है, सामान्य मानव के लिए है और जो संपन्न लोग हैं, वे भी अपने यहां काम करने वाले लोगों के लिए इस काम में जुड़कर के अपने यहां काम करने वाले और कुछ तो परिवार ऐसे होते हैं दो-दो पीढ़ी तक एक परिवार उनके यहां काम करता है। ड्राइवर होंगे तो तीन पीढ़ी से ड्राइवर उनके यहीं काम करने वाले होंगे, एक प्रकार से वो परिवार के अंग बन जाते हैं। सरकार की ये योजना आपके माध्यम से गरीब की सेवा का एक कारण बन सकता है, आपके जीवन में भी संतोष का कारण बन सकता है। और आखिरकर ये धरती ऐसी है स्वामी विवेकानंद ने हमें दरिद्र नारायण की सेवा करने की प्रेरणा दी थी। ये धरती ऐसी है जहां से रामकिशन मिशन के द्वारा आज भी गरीबों के कितने सेवा के काम हो रहे हैं। हम भी उस संकल्प को लेकर के आगे बढ़ें, इस व्यवस्था का फायदा उठाएं, जन-धन की योजना को जन-कल्याण में परिवर्तित करें। इसी एक अपेक्षा के साथ मैं आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

धन्यवाद।

Share your ideas and suggestions for 'Mann Ki Baat' now!
Explore More
لال قلعہ کی فصیل سے، 76ویں یوم آزادی کے موقع پر، وزیراعظم کے خطاب کا متن

Popular Speeches

لال قلعہ کی فصیل سے، 76ویں یوم آزادی کے موقع پر، وزیراعظم کے خطاب کا متن
How Direct Benefit Transfer Became India’s Booster During Pandemic, and Why World Bank is in Awe

Media Coverage

How Direct Benefit Transfer Became India’s Booster During Pandemic, and Why World Bank is in Awe
...

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
ہماچل پردیش کے بلاس پور میں مختلف ترقیاتی کاموں کے آغاز کے موقع پر وزیر اعظم کی تقریر کا متن
October 05, 2022
Share
 
Comments
PM dedicates AIIMS Bilaspur to the nation
PM inaugurates Government Hydro Engineering College at Bandla
PM lays foundation stone of Medical Device Park at Nalagarh
PM lays foundation stone of project for four laning of National Highway worth over Rs 1690 crores
“Fortunate to have been a part of Himachal Pradesh's development journey”
“Our government definitely dedicates the project for which we lay the foundation stone”
“Himachal plays a crucial role in 'Rashtra Raksha', and now with the newly inaugurated AIIMS at Bilaspur, it will also play pivotal role in 'Jeevan Raksha'”
“Ensuring dignity of life for all is our government's priority”
“Happiness, convenience, respect and safety of women are the foremost priorities of the double engine government”
“Made in India 5G services have started, and the benefits will be available in Himachal very soon”

ہماچل کے گورنر جناب راجیندر ارلیکر جی، ہماچل کے مقبول وزیر اعلیٰ جناب جے رام ٹھاکر جی، بھارتیہ جنتا پارٹی کے قومی صدر، ہم سب اور اس دھرتی کے بچوں کے لیے رہنما، جناب جے پی نڈا جی، مرکزی کابینہ میں میرے ساتھی اور ہمارے رکن پارلیمنٹ جناب انوراگ ٹھاکر جی، ہماچل بی جے پی کے صدر اور پارلیمنٹ میں میرے ساتھی سریش کشیپ جی، پارلیمنٹ میں میرے ساتھی کشن کپور جی، بہن اندو گوسوامی جی، ڈاکٹر سکندر کمار جی، دیگر وزرا، ایم پی اور ایم ایل اے، اور ہم سب کا حوصلہ بڑھانے کے لیے بڑی تعداد میں آئے ہوئے میرے پیارے بھائیو اور بہنوں! وجے دشمی کے موقع پر آپ سب کو اور تمام ہم وطنوں کو ڈھیر ساری نیک خواہشات۔

یہ مقدس تہوار ہر برائی پر قابو پاتے ہوئے جس راستے پر چلنے کا ملک نے عزم کیا ہے، ان پر چلنے کی نئی توانائی دے گا۔ میں خوش قسمت ہوں کہ وجے دشمی کے موقع پر ہماچل پردیش کے لوگوں کو صحت، تعلیم، روزگار اور بنیادی ڈھانچے کے ہزاروں کروڑ کے پروجیکٹ تحفے میں دینے کا موقع ملا ہے۔ اور یہ اتفاق بھی دیکھیں، وجے دشمی ہو اور فتح کی شمع جلانے کا موقع ملے، یہ مستقبل کی ہر جیت کا آغاز لے کر آیا ہے۔ بلاسپور کو تعلیم اور صحت کا دوہرا تحفہ ملا ہے۔

بھائیو اور بہنوں،

یہاں ترقیاتی منصوبوں کو آپ کو سونپنے کے بعد، جیسا کہ جے رام جی نے بتایا، میں ایک اور ثقافتی ورثے کا مشاہدہ کرنے جا رہا ہوں اور کئی سالوں کے بعد مجھے ایک بار پھر کلو دسہرہ کا حصہ بننے کا شرف حاصل ہوگا۔ میں بھی سینکڑوں دیوتاؤں کے ساتھ بھگوان رگھوناتھ جی کے سفر میں شامل ہو کر ملک کے لیے آشیرواد حاصل کروں گا۔ اور آج جب میں یہاں بلاس پور آیا ہوں تو پرانی یادوں کا تازہ ہونا فطری ہے۔ ایک وقت تھا جب یہاں پیدل ٹہلتے تھے۔ کبھی میں، دھومل جی، نڈا جی، پیدل یہاں سے بازار نکل جاتے تھے۔ ہم یہاں بلاس پور کی گلیوں سے بھی گزرے تھے جس میں ایک بہت بڑا رتھ یاترا پروگرام تھا۔ اور پھر سورنا جینتی رتھ یاترا یہاں سے گزری اور یہاں ایک جلسہ عام ہوا تھا۔ اور کئی بار یہاں آنا ہوا، آپ لوگوں کے درمیان رہنا ہوا ہے۔

ہماچل کی اس سرزمین پر کام کرتے ہوئے، مجھے ہماچل کی ترقی کے سفر میں مسلسل شریک مسافر بننے کا موقع ملا ہے۔ اور میں ابھی سن رہا تھا، انوراگ جی زور زور سے بول رہے تھے، یہ مودی جی نے کیا، یہ مودی جی نے کیا، یہ مودی جی نے کہا۔ ہمارے نڈا جی بھی کہہ رہے تھے، مودی جی نے یہ کیا، مودی جی نے یہ کیا اور ہمارے وزیر اعلیٰ جے رام جی بھی کہہ رہے تھے، مودی جی نے یہ کیا، مودی جی نے وہ کیا۔ لیکن مجھے سچ بتانے دو، سچائی بتاؤں یہ کس نے کیا، میں بتاؤں؟ جو کچھ بھی ہو رہا ہے، یہ آپ نے کیا ہے۔ یہ آپ کی وجہ سے ہوا۔ یہ جے رام جی اور ان کی ٹیم ہے کہ جو کام میں دہلی سے لاتا ہوں، یہ لوگ اسے تیز رفتاری سے چلاتے ہیں، اسی لیے ایسا ہو رہا ہے۔ اور اگر یہ ایمس بنتا ہے تو یہ آپ کے ایک ووٹ کی طاقت ہے، اگر سرنگ بنتی ہے تو آپ کے ایک ووٹ کی طاقت ہے، اگر ہائیڈرو انجینئرنگ کالج بنتا ہے تو یہ آپ کے ووٹ کی طاقت ہے، اگر میڈیکل ڈیوائس پارک بن رہا ہے تو یہ بھی آپ کی طاقت ہے ایک ووٹ کی طاقت ہے اور اس لیے آج میں ہماچل کی توقعات کو مد نظر رکھتے ہوئے ایک کے بعد ایک ترقیاتی کام کر رہا ہوں۔

ایک طویل عرصے سے ہم نے دیکھا ہے کہ ملک میں ترقی کے حوالے سے ایک مسخ شدہ ذہنیت رائج ہے۔ یہ سوچ کیا تھی؟ اگر اچھی سڑکیں ہوں گی تو کچھ ریاستوں میں ہوں گی اور کچھ بڑے شہروں میں، دہلی کے آس پاس ہوں گی۔ اچھے تعلیمی ادارے ہوں گے تو بڑے شہروں میں ہوں گے۔ اچھے اسپتال ہوں گے، دہلی میں ہی ہو سکتے ہیں، باہر نہیں ہو سکتے۔ اگر صنعتیں اور کاروبار بھی قائم ہوں گے تو وہ بڑی جگہوں پر لگیں گے اور خاص طور پر ملک کے پہاڑی علاقوں میں بنیادی سہولتیں برسوں کے انتظار کے بعد آخری حد تک پہنچتی تھیں۔ اسی پرانی سوچ کا نتیجہ تھا کہ اس نے ملک میں ترقی کا بہت بڑا عدم توازن پیدا کر دیا۔ اس کی وجہ سے ملک کا ایک بڑا حصہ، وہاں کے لوگ تکلیف، تنگدستی میں رہتے تھے۔

گزشتہ 8 سالوں میں ملک اب اس پرانی سوچ کو چھوڑ کر نئی سوچ، جدید سوچ کے ساتھ آگے بڑھ رہا ہے۔ اب دیکھو بہت دنوں سے اور جب میں یہاں آتا تھا تو لگاتار دیکھتا تھا، یہاں ایک یونیورسٹی سے ہی گزارا ہوتا تھا۔ اور چاہے علاج ہو یا طبی تعلیم، آئی جی ایم سی شملہ اور ٹاٹا میڈیکل کالج پر انحصار تھا۔ سنگین بیماریوں کا علاج ہو یا تعلیم یا روزگار، چنڈی گڑھ اور دہلی جانا اس وقت ہماچل کی مجبوری بن چکی تھی۔ لیکن پچھلے آٹھ سالوں میں ہماری ڈبل انجن والی حکومت نے ہماچل کی ترقی کی کہانی کو ایک نئی جہت تک پہنچایا ہے۔ آج ہماچل میں ایک سنٹرل یونیورسٹی، آئی آئی ٹی، ٹرپل آئی ٹی، انڈین انسٹی ٹیوٹ آف مینجمنٹ (IIM) بھی ہے۔ ملک میں طبی تعلیم اور صحت کا سب سے بڑا ادارہ ایمس بھی اب بلاس پور اور ہماچل کے لوگوں کا فخر بڑھا رہا ہے۔

بلاس پور ایمس بھی ایک اور تبدیلی کی علامت ہے اور اسے ایمس کے اندر گرین ایمس کے نام سے جانا جائے گا، مکمل طور پر ماحول سے محبت کرنے والا ایمس، فطرت سے محبت کرنے والا ایمس۔ ابھی ہمارے تمام ساتھیوں نے بتایا کہ پہلے حکومتیں سنگ بنیاد رکھتی تھیں اور الیکشن ختم ہونے کے بعد بھول جاتی تھیں۔ آج بھی آپ ہماچل جائیں گے، ہمارے دھومل جی نے ایک بار ایک پروگرام کیا تھا کہ پتھر کہاں کہاں پڑے ہیں، اور اس طرح کے کئی پروگرام جہاں پتھر پڑے تھے، کام نہیں ہوا تھا۔

مجھے یاد ہے کہ میں ایک بار ریلوے کا جائزہ لے رہا تھا، آپ کے اونا کے قریب ریلوے لائن بچھائی جانی تھی۔ یہ فیصلہ آج سے 35 سال پہلے لیا گیا تھا۔ پارلیمنٹ میں اعلان ہوا لیکن پھر فائل بند کر دی گئی۔ ہماچل کو کون پوچھے گا بھائی؟ لیکن یہ تو ہماچل کا بیٹا ہے اور ہماچل کو نہیں بھول سکتا۔ لیکن ہماری حکومت کی پہچان یہ ہے کہ وہ جس پروجیکٹ کو ہاتھ لگاتی ہے، اسے مکمل بھی کرتی ہے۔ اٹکنا، لٹکنا، بھٹکنا، وہ زمانہ چلا گیا، دوستو!

ساتھیوں،

ملک کے دفاع میں ہماچل کا ہمیشہ سے ہی بہت بڑا حصہ رہا ہے، ہماچل جسے ملک کے دفاع کے ہیرو کے طور پر ملک بھر میں جانا جاتا ہے، اس ہماچل کو اب اس ایمس کے بعد جان بچانے میں اہم کردار ادا کرنے کے لیے جانا جائے گا۔ سال 2014 تک ہماچل میں صرف 3 میڈیکل کالج تھے جن میں سے 2 سرکاری تھے۔ گزشتہ 8 سالوں میں ہماچل میں 5 نئے سرکاری میڈیکل کالج بنائے گئے ہیں۔ 2014 تک صرف 500 طلبا زیر تعلیم اور پوسٹ گریجویٹ تعلیم حاصل کر سکتے تھے، آج یہ تعداد بڑھ کر 1200 سے زیادہ ہو گئی ہے، یعنی دگنی سے بھی زیادہ۔ ہر سال ایمس میں کئی نئے ڈاکٹر بنیں گے، نرسنگ سے وابستہ نوجوان یہاں تربیت حاصل کریں گے۔ کورونا کی مشکل کے باوجود، حکومت ہند کی وزارت صحت اور جے رام جی کی ریاستی حکومت کی ٹیم نے جو کام کیا ہے، اس کے نتیجے میں آج ایمس یہاں موجود ہے، ایمس نے کام کرنا شروع کر دیا ہے۔

صرف میڈیکل کالج ہی نہیں، ہم ایک اور سمت بڑھ چکے ہیں، ادویات اور زندگی بچانے والی ویکسین بنانے والے کے طور پر بھی ہماچل کے کردار کو بہت وسیع کیا جا رہا ہے۔ بلک ڈرگس پارک کے لیے ملک کی صرف تین ریاستوں کا انتخاب کیا گیا ہے اور ان میں سے ایک کون سی ریاست ہے بھائی، یہ کون سی ریاست ہے؟ یہ ہماچل ہے، آپ کو فخر ہے یا نہیں؟ کیا یہ آپ کے بچوں کے روشن مستقبل کا سنگ بنیاد ہے یا نہیں؟ کیا یہ آپ کے بچوں کے روشن مستقبل کی ضمانت ہے یا نہیں؟ ہم بڑی طاقت کے ساتھ کام کرتے ہیں اور آج کی نسل کے ساتھ ساتھ آنے والی نسل کے لیے بھی کرتے ہیں۔

اسی طرح میڈیکل ڈیوائس پارک کے لیے چار ریاستوں کا انتخاب کیا گیا ہے جہاں آج طب میں ٹیکنالوجی کا بڑے پیمانے پر استعمال کیا جا رہا ہے۔ خاص قسم کے اوزار بنانے کے لیے ملک میں چار ریاستوں کا انتخاب کیا گیا ہے۔ اتنا بڑا ہندوستان، اتنی بڑی آبادی، ہماچل تو چھوٹی ریاست ہے، لیکن یہ ہیروز کی سرزمین ہے اور میں نے یہاں کی روٹی کھائی ہے، قرض بھی چکانا ہے۔ اور اس طرح چوتھا میڈیکل ڈیوائس پارک کہاں بنایا جا رہا ہے، یہ چوتھا میڈیکل ڈیوائس پارک کہاں بنایا جا رہا ہے - آپ کے ہماچل میں بن رہا ہے دوستو۔ دنیا بھر سے بڑے لوگ یہاں آئیں گے۔ نالہ گڑھ میں اس میڈیکل ڈیوائس پارک کا سنگ بنیاد اسی کا حصہ ہے۔ اس ڈیوائس پارک کی تعمیر کے لیے یہاں ہزاروں کروڑ روپے کی سرمایہ کاری کی جائے گی۔ اس سے متعلق بہت سی چھوٹی صنعتیں آس پاس ترقی کریں گی۔ اس سے یہاں کے ہزاروں نوجوانوں کو روزگار کے مواقع میسر آئیں گے۔

ساتھیوں،

ہماچل کا ایک اور رخ بھی ہے، جس میں یہاں ترقی کے لا محدود امکانات پوشیدہ ہیں۔ یہ میڈیکل ٹورزم کا پہلو ہے۔ یہاں کی آب و ہوا، یہاں کا موسم، یہاں کا ماحول، یہاں کی جڑی بوٹیاں، یہاں کا ماحول اچھی صحت کے لیے بہت موزوں ہے۔ آج ہندوستان میڈیکل ٹورزم کے حوالے سے دنیا کا ایک بڑا پرکشش مرکز بن رہا ہے۔ جب ملک اور دنیا کے لوگ علاج کے لیے ہندوستان آنا چاہتے ہیں تو یہاں کی قدرتی خوبصورتی اس قدر لا جواب ہے کہ وہ یہاں آئیں گے تو ایک طرح سے انھیں صحت کا بھی فائدہ ہوگا اور سیاحت کو بھی فائدہ ہوگا۔ ہماچل کے دونوں ہاتھوں میں لڈو ہیں۔

ساتھیوں،

مرکزی حکومت کی کوشش ہے کہ غریب اور متوسط ​​طبقے کا علاج، اس پر خرچ کم سے کم ہو، یہ علاج بھی بہتر ملے اور اس کے لیے انھیں دور تک نہ جانا پڑے۔ اس لیے آج ہم ایمس میڈیکل کالج، ضلع اسپتالوں میں اہم نگہداشت کی سہولیات اور دیہاتوں میں صحت اور فلاح و بہبود کے مراکز بنا کر ہموار رابطے پر کام کر رہے ہیں۔ اس پر زور دیا جا رہا ہے۔ آیوشمان بھارت اسکیم کے تحت ہماچل کے زیادہ تر خاندانوں کو 5 لاکھ روپے تک کا مفت علاج مل رہا ہے۔

اس اسکیم کے تحت ملک بھر میں اب تک 3 کروڑ 60 لاکھ غریب مریضوں کا مفت علاج کیا جا چکا ہے اور اس میں سے 1.5 لاکھ مستفیدین ہماچل سے تعلق رکھنے والے میرے گھر کے افراد ہیں۔ اب تک حکومت ملک میں ان تمام ساتھیوں کے علاج پر 45 ہزار کروڑ روپے سے زیادہ خرچ کر چکی ہے۔ اگر آیوشمان بھارت اسکیم نہ ہوتی تو اس کا تقریباً دوگنا یعنی تقریباً 90 ہزار کروڑ روپے ان مریضوں کے اہل خانہ کو ان کی جیبوں سے دینے پڑتے۔ یعنی اتنی بڑی بچت بھی غریب اور متوسط ​​طبقے کے خاندان کو بہترین علاج کے ساتھ مل گئی ہے۔

ساتھیوں،

میرے لیے ایک اور بات اطمینان بخش ہے۔ حکومت کی اس طرح کی اسکیموں کا سب سے زیادہ فائدہ ہماری ماؤں، بہنوں، بیٹیوں کو ملا ہے۔ اور ہم جانتے ہیں، ہماری ماں بہنوں کی ایک فطرت ہے، خواہ کتنا ہی درد ہو، جسم میں کتنا ہی درد کیوں نہ ہو، لیکن وہ خاندان میں کسی کو نہیں بتاتیں۔ وہ برداشت کرتی ہیں، کام بھی کرتی ہیں، پورے خاندان کا خیال رکھتی ہیں، کیونکہ ان کے ذہن میں یہ بات رہتی ہے کہ اگر گھر والوں کو بیماری کا علم ہو جائے، بچوں کو پتہ چل جائے تو وہ قرض ادا کر کے بھی میرا علاج کرائیں گے، اور ماں سوچتی ہے، ارے میں بیماری میں ہی کچھ وقت نکال لوں گی، لیکن بچوں کو قرض میں نہیں رہنے دوں گی، ہسپتال جا کر پیسے خرچ نہیں کروں گی۔ ان ماؤں کی پرواہ کون کرے گا؟ میری مائیں ایسی اذیتیں خاموشی سے سہتی رہیں۔ اس بیٹے کا کیا فائدہ، اور اسی جذبے سے آیوشمان بھارت اسکیم نے جنم لیا۔ تاکہ میری ماؤں بہنوں کو بیماری کے ساتھ نہ گزارنا پڑے۔ زندگی میں اس مجبوری کے ساتھ نہ جینا پڑے۔ آیوشمان بھارت اسکیم کے تحت 50 فیصد سے زیادہ مستفید ہماری مائیں، بہنیں اور بیٹیاں ہیں۔

ساتھیوں،

چاہے ٹوائلٹ بنانے کا سوچھ بھارت ابھیان ہو، مفت گیس کنکشن دینے کی اجولا اسکیم ہو، مفت سینیٹری نیپکن فراہم کرنے کی مہم ہو، ماترو وندنا یوجنا کے تحت ہر حاملہ خاتون کو غذائیت سے بھر پور خوراک کے لیے ہزاروں روپے کی مدد ہو، یا اب ہر گھر پانی پہنچانے کی ہماری مہم ہو، ہم اپنی ماؤں اور بہنوں کو با اختیار بنانے کے لیے ایک کے بعد ایک یہ سارے کام کر رہے ہیں۔ ماؤں بہنوں بیٹیوں کی خوشی، سہولت، عزت، تحفظ اور صحت ڈبل انجن والی حکومت کی سب سے بڑی ترجیح ہے۔

مرکزی حکومت، جے رام جی اور ان کی پوری ٹیم نے جو بھی اسکیمیں بنائی ہیں، ان کی حکومت نے انہیں بہت تیز رفتاری اور بڑے جذبے کے ساتھ زمین پر لایا ہے اور ان کا دائرہ بھی بڑھایا ہے۔ یہ ہم سب کے سامنے ہے کہ یہاں ہر گھر میں نل سے پانی پہنچانے کا کام کتنی تیزی سے ہوا ہے۔ ہم نے پچھلی 7 دہائیوں میں ہماچل میں نل کے کنکشن دگنے سے زیادہ دیے ہیں، صرف پچھلے 3 سالوں میں ہم لوگوں سے ملے ہیں۔ ان تین سالوں میں ساڑھے 8 لاکھ سے زیادہ نئے خاندانوں کو پائپ کے پانی کی سہولت ملی ہے۔

بھائیو اور بہنوں،

جے رام جی اور ان کی ٹیم کی ایک اور معاملے میں ملک بہت تعریف کر رہا ہے۔ سماجی تحفظ کے حوالے سے مرکزی حکومت کی کوششوں کو وسعت دینے کے لیے یہ تعریف کی جا رہی ہے۔ آج ہماچل میں شاید ہی کوئی ایسا خاندان ہو جہاں کسی ایک فرد کو پنشن کی سہولت نہ ملتی ہو۔ ایسے خاندانوں کو پنشن اور طبی اخراجات سے متعلق امداد فراہم کرنے کی کوششیں قابل تعریف ہیں، خاص طور پر بے سہارا افراد، جو سنگین بیماری کا شکار ہو چکے ہیں۔ ون رینک ون پنشن کے نفاذ سے بھی ہماچل پردیش کے ہزاروں خاندانوں کو کافی فائدہ ہوا ہے۔

ساتھیوں،

ہماچل مواقع کی سرزمین ہے۔ اور میں جے رام جی کو ایک بار پھر مبارکباد دینا چاہوں گا۔ پورے ملک میں ویکسینیشن کا کام جاری ہے، لیکن آپ کی جان کی حفاظت کے لیے، ہماچل ملک کی پہلی ریاست ہے جس نے 100 فیصد ٹیکہ کاری مکمل کی ہے۔

یہاں ہائیڈرو سے بجلی پیدا ہوتی ہے، یہاں پھلوں اور سبزیوں کے لیے زر خیز زمین ہے اور یہاں روزگار کے لامتناہی مواقع فراہم کرنے والی سیاحت ہے۔ بہتر رابطے کی کمی ان مواقع کے سامنے سب سے بڑی رکاوٹ تھی۔ 2014 سے ہماچل پردیش میں گاؤں گاؤں تک بہترین انفراسٹرکچر تک پہنچنے کی کوششیں کی جا رہی ہیں۔ آج ہماچل کی سڑکوں کو چوڑا کرنے کا کام بھی چاروں طرف جاری ہے۔ اس وقت ہماچل میں کنیکٹیویٹی کے کاموں پر تقریباً 50 ہزار کروڑ روپے خرچ ہو رہے ہیں۔ جب پنجور تا نالہ گڑھ ہائی وے کو فور لین کرنے کا کام مکمل ہو جائے گا تو نالہ گڑھ اور بڈھی کے صنعتی علاقوں کو نہ صرف فائدہ پہنچے گا بلکہ چندی گڑھ اور امبالہ سے بلاس پور، منڈی اور منالی کی طرف جانے والے مسافروں کو بھی زیادہ سہولت ملے گی۔ یہی نہیں، ہماچل کے لوگوں کو گھماؤ دار سڑکوں سے نجات دلانے کے لیے سرنگوں کا جال بھی بچھایا جا رہا ہے۔

ساتھیوں،

ہماچل میں ڈیجیٹل کنیکٹیویٹی کے حوالے سے بھی بے مثال کام کیا گیا ہے۔ پچھلے 8 سالوں میں میڈ ان انڈیا موبائل فون بھی سستے ہوئے ہیں اور نیٹ ورک بھی گاؤں گاؤں پہنچ گیا ہے۔ ڈیجیٹل انڈیا کا سب سے زیادہ فائدہ اگر کسی کو مل رہا ہے تو میرے ہماچل بھائیوں اور بہنوں کو مل رہا ہے، میرے ہماچل کے شہریوں کو مل رہا ہے۔ ورنہ بلوں کی ادائیگی سے لے کر بینک سے متعلقہ کام، داخلے، درخواستیں، ایسے ہر چھوٹے موٹے کام کے لیے پہاڑ سے اتر کر دفتروں کو جانے میں پورا دن لگ جاتا تھا، کبھی رات کو ٹھہرنا پڑتا تھا۔ اب ملک میں پہلی بار میڈ ان انڈیا 5 جی سروس بھی شروع ہو گئی ہے، جس کا فائدہ ہماچل کو بہت جلد ملنے والا ہے۔

ہماچل ملک کی پہلی ریاست ہے، جس نے ریاست کی ڈرون پالیسی بنائی ہے۔ اب ڈرون سے نقل و حمل کے لیے ڈرون کا استعمال بہت بڑھنے والا ہے۔ اور اگر ہمارے پاس اس میں کنور تک کے آلو موجود ہیں تو ہم انہیں وہاں سے ڈرون کے ذریعے اٹھا کر فوراً بڑی مارکیٹ میں لا سکتے ہیں۔ ہمارے پھل خراب ہو جاتے تھے، اب ڈرون کے ذریعے اٹھائے جا سکتے ہیں۔ آنے والے دنوں میں کئی قسم کے فائدے ہونے والے ہیں۔ ہم اس قسم کی ترقی کے لیے کوشاں ہیں، جس سے ہر شہری کی سہولت میں اضافہ ہو، ہر شہری خوشحالی سے جڑا ہو۔ یہ ترقی یافتہ ہندوستان، ترقی یافتہ ہماچل پردیش کے عزم کو ثابت کرے گا۔

مجھے خوشی ہے کہ وجے دشمی کے پر مسرت تہوار پر مجھے رنسمہا پھونک کر فتح کی شروعات کرنے کا موقع ملا اور آپ سب کے بہت سارے آشیرواد کے درمیان یہ سب کرنے کا موقع ملا۔ میں ایک بار پھر آپ لوگوں کو ایمس سمیت تمام ترقیاتی منصوبوں کے لیے بہت بہت مبارکباد دیتا ہوں۔ دونوں مٹھی بند کر کے میرے ساتھ بولیے-

بھارت ماتا کی- جے۔ پوری طاقت سے آواز چاہیے۔

بھارت ماتا کی- جے

بھارت ماتا کی- جے

بھارت ماتا کی- جے

 

بہت بہت شکریہ۔