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प्रधानमंत्री मोदी ने हरियाणा में बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम की शुरूआत की
हमें बेटों और बेटियों के बीच भेदभाव को समाप्त करने की जरूरत है: प्रधानमंत्री मोदी
मेडिकल शिक्षा जीवन को बचाने के लिए है न कि बेटियों की हत्या के लिए: प्रधानमंत्री
लड़कियां आज खेल, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में अच्छा काम कर रही हैं, कृषि के क्षेत्र में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान है: पीएम मोदी
हमें पौधे लगाकर बालिकाओं के जन्म का जश्न मनाना चाहिए: प्रधानमंत्री मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने बालिकाओं के लाभ के लिए सुकन्या समृद्धि खाता का शुभारंभ किया 

विशाल संख्‍या में आए हुए माताओं, बहनों और भाईयों,

आज पानीपत की धरती पर हम एक बहुत बड़ी जिम्‍मेवारी की और कदम रख रहे हैं। यह अवसर किस सरकार ने क्‍या किया और क्‍या नहीं किया? इसका लेखा-जोखा करने के लिए नहीं है। गलती किसकी थी, गुनाह किसका था? यह आरोप-प्रत्यारोप का वक्‍त नहीं है। पानीपत की धरती पर यह अवसर हमारी जिम्‍मेवारियों का एहसास कराने के लिए है। सरकार हो, समाज हो, गांव हो, परिवार हो, मां-बाप हो हर किसी की एक सामूहिक जिम्‍मेवारी है और जब तक एक समाज के रूप में हम इस समस्‍या के प्रति संवेदनशील नहीं होंगे, जागरूक नहीं होंगे, तो हम अपना ही नुकसान करेंगे ऐसा नहीं है बल्कि हम आने वाली सदियों तक पीढ़ी दर पीढ़ी एक भंयकर संकट को निमंत्रण दे रहे हैं और इसलिए मेरे भाईयों और बहनों और मैं इस बात के लिए मेनका जी और उनके विभाग का आभारी हूं कि उन्‍होंने इस काम के लिए हरियाणा को पसंद किया। मैं मुख्‍यमंत्री जी का भी अभिनंदन करता हूं कि इस संकट को इन्‍होंने चुनौती को स्‍वीकार किया। लेकिन यह कार्यक्रम भले पानीपत की धरती पर होता हो, यह कार्यक्रम भले हरियाणा में होता हो, लेकिन यह संदेश हिंदुस्‍तान के हर परिवार के लिए है, हर गांव के लिए है, हर राज्‍य के लिए है।

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क्‍या कभी हमने कल्‍पना की है जिस प्रकार की समाज के अवस्‍था हम बना रहे हैं अगर यही चलता रहा तो आने वाले दिनों में हाल क्‍या होगा? आज भी हमारे देश में एक हजार बालक पैदा हो, तो उसके सामने एक हजार बालिकाएं भी पैदा होनी चाहिए। वरना संसार चक्र नहीं चल सकता। आज पूरे देश में यह चिंता का विषय है। यही आपके हरियाणा में झज्जर जिला देख लीजिए, महेंद्रगढ़ जिला देख लीजिए। एक हजार बालक के सामने पौने आठ सौ बच्चियां हैं। हजार में करीब-करीब सवा दौ सौ बच्‍चे कुंवारे रहने वाले हैं। मैं जरा माताओं से पूछ रहा हूं अगर बेटी पैदा नहीं होगी, तो बहू कहां से लाओगे? और इसलिए जो हम चाहते हैं वो समाज भी तो चाहता है। हम यह तो चाहते है कि बहू तो हमें पढ़ी-लिखी मिले, लेकिन बेटी को पढ़ाना है तो पास बार सोचने के लिए मजबूर हो जाते हैं। यह अन्‍याय कब तक चलेगा, यह हमारी सोच में यह दोगलापन कब तक चलेगा? अगर बहू पढ़ी-लिखी चाहते हैं तो बेटी को भी पढ़ाना यह हमारी जिम्‍मेवारी बनता है। अगर हम बेटी को नहीं पढ़ाऐंगे, तो बहू भी पढ़ी-लिखी मिले। यह अपेक्षा करना अपने साथ बहुत बड़ा अन्याय है। और इसलिए भाईयों और बहनों, मैं आज आपके बीच एक बहुत बड़ी पीड़ा लेकर आया हूँ। एक दर्द लेकर आया हूँ। क्‍या कभी कल्‍पना की हमने जिस धरती पर मानवता का संदेश होता है, उसी धरती पर मां के गर्भ में बच्‍ची को मौत के घाट उतार दिया जाए।

यह पानीपत की धरती, यह उर्दू साहित्‍य के scholar अलताफ हुसैन हाली की धरती है। यह अलताफ हुसैन हाली इसी पानीपत की धरती से इस शायर ने कहा था। मैं समझता हूं जिस हरियाणा में अलताफ हुसैन जैसे शायर के शब्‍द हो, उस हरियाणा में आज बेटियों का यह हाल देखकर के मन में पीड़ा होती है। हाली ने कहा था....उन्‍होंने कहा था ए मांओ, बहनों बेटियां दुनिया की जन्नत तुमसे हैं, मुल्‍कों की बस्‍ती हो तुम, गांवों की इज्‍जत तुम से हो। आप कल्‍पना कर सकते हैं बेटियों के लिए कितनी ऊंची कल्‍पना यह पानीपत का शायर करता है और हम बेटियों को जन्‍म देने के लिए भी तैयार नही हैं।

भाईयों और बहनों हमारे यहां सदियों से जब बेटी का जन्‍म होता था तो शास्‍त्रों में आर्शीवाद देने की परंपरा थी और हमारे शास्‍त्रों में बेटी को जो आर्शीवाद दिये जाते थे वो आर्शीवाद आज भी हमें, बेटियों की तरफ किस तरह देखना, उसके लिए हमें संस्‍कार देते हैं, दिशा देते हैं। हमारे शास्‍त्रों ने कहा था जब हमारे पूर्वज आर्शीवाद देते थे तो कहते थे – यावद गंगा कुरूक्षेत्रे, यावद तिस्‍तदी मेदनी, यावद गंगा कुरूक्षेत्रे, यावद तिस्‍तदी मेदनी, यावद सीताकथा लोके, तावद जीवेतु बालिका। हमारे शास्‍त्र कहते थे जब तक गंगा का नाम है, जब तक कुरूक्षेत्र की याद है, जब तक हिमालय है, जब तक कथाओं में सीता का नाम है, तब तक हे बालिका तुम्‍हारा जीवन अमर रहे। यह आर्शीवाद इस धरती पर दिये जाते थे। और उसी धरती पर बेटी को बेमौत मार दिया जाए और इसलिए मेरे भाईयों और बहनों उसके मूल में हमारा मानसिक दारिद्रय जिम्‍मेवार है, हमारे मन की बीमारी जिम्‍मेवार है और यह मन की बीमार क्‍या है? हम बेटे को अधिक महत्‍वपूर्ण मानते हैं और यह मानते हैं बेटी तो पराये घर जाने वाली है। यहां जितनी माताएं-बहनें बैठी हैं। सबने यह अनुभव किया होगा यह मानसिक दारिद्रय की अनुभूति परिवार में होती है। मां खुद जब बच्‍चों को खाना परोसती है। खिचड़ी परोसी गई हो और घी डाल रही हो। तो बेटे को तो दो चम्‍मच घी डालती है और बेटी को एक चम्‍मच घी डालती है और जब, मुझे माफ करना भाईयों और बहनों यह बीमारी सिर्फ हरियाणा की नहीं है यह हमारी देश की मानसिक बीमारी का परिणाम है और बेटी को, अगर बेटी कहे न न मम्‍मी मुझे भी दो चम्‍मच दे दो, तो मां कहते से डरती नहीं है बोल देती है, अरे तुझे तो पराये घर जाना है, तुझे घी खाकर के क्‍या करना है। यह कब तक हम यह अपने-पराये की बात करते रहेंगे और इसलिए हम सबका दायित्‍व है, हम समाज को जगाए।

कभी-कभी जिस बहन के पेट में बच्‍ची होती है वो कतई नहीं चाहती है कि उसकी बेटी को मार दिया जाए। लेकिन परिवार का दबाव, माहौल, घर का वातावरण उसे यह पाप करने के लिए भागीदार बना देता है, और वो मजबूर होती है। उस पर दबाव डाला जाता है और उसी का नतीजा होता है कि बेटियों को मां के गर्भ में ही मार दिया जाता है। हम किसी भी तरह से अपने आप को 21वीं सदी के नागरिक कहने के अधिकारी नही हैं। हम मानसिकता से 18वीं शताब्दी के नागरिक हैं। जिस 18वीं शताब्‍दी में बेटी को “दूध-पीती” करने की परंपरा थी। बेटी का जन्‍म होते ही दूध के भरे बर्तन के अंदर उसे डूबो दिया जाता था, उसे मार दिया जाता था। हम तो उनसे भी गए-बीते हैं, वो तो पाप करते थे गुनाह करते थे। बेटी जन्‍मती थी आंखे खोलकर के पल-दो-पल के लिए अपनी मां का चेहरा देख सकती थी। बेटी जन्‍मती थी, दो चार सांस ले पाती थी। बेटी जन्मती थी, दुनिया का एहसास कर सकती थी। बाद में उस मानसिक बीमारी के लोग उसको दूध के बर्तन में डालकर के मार डालते थे। हम तो उनसे भी गए-बीते हैं। हम तो बेटी को मां का चेहरा भी नहीं देखने देते, दो पल सांस भी नहीं लेने देते। इस दुनिया का एहसास भी नहीं होने देते। मां के गर्भ में ही उसे मार देते हैं। इससे बड़ा पाप क्‍या हो सकता है और हम संवेदनशील नहीं है ऐसा नहीं है।

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कुछ साल पहले इसी हरियाणा में कुरूक्षेत्र जिले में हल्दा हेड़ी गांव में एक टयूबवेल में एक बच्‍चा गिर गया, प्रिंस.. प्रिंस कश्‍यप । और सारे देश के टीवी वहां मौजूद थे। सेना आई थी एक बच्‍चे को बचाने के लिए और पूरा हिंदुस्‍तान टीवी के सामने बैठ गया था। परिवारों में माताएं खाना नहीं पका रही थी। हर पल एक-दूसरे को पूछते थे क्‍या प्रिंस बच गया, क्‍या प्रिंस सलामत निकला टयूबवेल में से? करीब 24 घंटे से भी ज्‍यादा समय हिंदुस्‍तान की सांसे रूक गई थी। एक प्रिंस.. केरल, तमिलनाडु का कोई रिश्‍तेदार नहीं था। लेकिन देश की संवेदना जग रही है। उस बच्‍चे को जिंदा निकले, इसके लिए देशभर की माताएं-बहने दुआएं कर रही थी। मैं जरा पूछना चाहता हूं कि एक प्रिंस जिसकी जिंदगी पर संकट आए, हम बेचैन बन जाते हैं। लेकिन हमारे अड़ोस-पड़ोस में आएं दिन बच्चियों को मां के पेट में मार दिया जाए, लेकिन हमें पीड़ा तक नहीं होती है, तब सवाल उठता है। हमारी संवेदनाओं को क्‍या हुआ है? और इसलिए आज मैं आपके पास आया हूं। हमें बेटियों को मारने का हक नहीं है।

यह सोच है बुढ़ापे में बेटा काम आता है। इससे बड़ी गलतफहमी किसी को नहीं होनी चाहिए। अगर बुढ़ापे में बेटे काम आए होते तो पिछले 50 साल में जितने वृद्धाश्राम खुले हैं, शायद उतने नहीं खुले होते। बेटो के घर में गाड़ियां हो, बंगले हो, लेकिन बांप को वृद्धाश्राम में रहना पड़ता है ऐसी सैकड़ों घटनाएं है और ऐसी बेटियों की भी घटनाएं है। अगर मां-बाप की इकलौती बेटी है तो मेहनत करे, मजदूरी करे, नौकरी करे, बच्‍चों को tuition करे लेकिन बूढ़े मां-बाप को कभी भूखा नहीं रहने देती। ऐसी सैकड़ों बेटियां बाप से भी सेवा करने के लिए, मां-बाप की सेवा करने के लिए अपने खुद के सपनों को चूर-चूर कर देने वाली बेटियों की संख्‍या अनगिनत है और सुखी बेटों के रहते हुए दुःखी मां-बाप की संख्‍या भी अनगिनत है। और इसलिए मेरे भाईयों और बहनों यह सोच कि बेटा आपका बुढ़ापा संभालेगा, भूल जाइये। अगर आप अपनी संतानों को सामान रूप से संस्‍कारित करके बड़े करोगे, तो आपकी समस्‍याओं का समाधान अपने आप हो जाएगा।

कभी-कभी लगता है कि बेटी तो पराये घर की है। मैं जरा पूछना चाहता हूं सचमुच में यह सही सोच है क्‍या? अरे बेटी के लिए तो आपका घर पराया होता है जिस घर आप भेजते हो वो पल-दो-पल में उसको अपना बना लेती है। कभी पूछती नहीं है कि मुझे उस गांव में क्‍यों डाला मुझे उस कुटुम्‍ब में क्‍यों डाल दिया? जो भी मिले उसको सर-आंखों पर चढ़ाकर के अपना जीवन वहां खपा देती है और अपने मां-बाप के संस्‍कारों को उजागर करती है। अच्‍छा होता है तो कहती है कि मेरी मां ने सिखाया है, अच्‍छा होता है तो कहती है कि मां-बाप के कारण, मेरे मायके के संस्‍कार के कारण मैं अच्‍छा कर रही हूं। बेटी कहीं पर भी जाएं वहां हमेशा आपको गौरव बढ़े, उसी प्रकार का काम करती है।

मैंने कल्‍पना की, आपने कभी सोचा है यहीं तो हरियाणा की धरती, जहां की बेटी कल्‍पना चावला पूरा विश्‍व जिसके नाम पर गर्व करता है। जिस धरती पर कल्‍पना चावला का जन्‍म हुआ हो, जिसको को लेकर के पूरा विश्‍व गर्व करता हो, उसी हरियाणा में मां के पेट में पल रही कल्‍पना चावलाओं को मार करके हम दुनिया को क्‍या मुंह दिखाएंगे और इसलिए मेरे भाईयों और बहनों मैं आप आपसे आग्रह करने आया हूं और यह बात देख लीजिए अगर अवसर मिलता है तो बेटे से बेटियां ज्‍यादा कमाल करके दिखाती हैं।

आज भी आपके हरियाणा के और हिंदुस्‍तान के किसी भी राज्‍य के 10th या 12th के result देख लीजिए। first stand में से छह या सात तो बच्चियां होती है जीतने वाली, बेटों से ज्‍यादा नंबर लाती है। आप हिंदुस्‍तान का पूरा education sector देख लीजिए। teachers में 70-75 प्रतिशत महिलाएं शिक्षक के रूप में काम कर रही है। आप health sector देख लीजिए health sector में 60 प्रतिशत से ज्‍यादा, सूश्रूषा के क्षेत्र में बहनें दिखाई देती है। अरे हमारा agriculture sector, पुरूष सीना तान कर न घूमें कि पुरूषों से ही agriculture sector चलता है। अरे आज भी भारत में agriculture और पशुपालन में महिलाओं की बराबरी की हिस्‍सेदारी है। वो खेतों में जाकर के मेहनत करती है,वो भी खेती में पूरा contribution करती हैं और खेत में काम करने वाले मर्दों को संभालने का काम भी वही करती है।

पश्चिम के लोग भले ही कहते हों, लेकिन हमारे देश में महिलाओं का सक्रिय contribution आर्थिक वृद्धि में रहता है। खेलकूद में देखिए पिछले दिनों जितने game हुए, उसमें ईनाम पाने वाले अगर लड़के हैं तो 50 प्रतिशत ईनाम पाने वाली लड़कियां है। gold medal लाने वाली लड़कियां है। खेलकूद हो, विज्ञान हो, व्‍यवसाय हो, सेवा का क्षेत्र हो, शिक्षा का क्षेत्र हो, आज महिलाएं रत्‍तीभर भी पीछे नहीं है और यह सामर्थ्‍य हमारी शक्ति में है। और इसलिए मैं आपसे आग्रह करने आया हूं कि हमें बेटे और बेटी में भेद करने वाली बीमारी से निकल जाना चाहिए। “बेटा-बेटी एक समान” यही हमारा मंत्र होना चाहिए और एक बार हमारे मन में बेटा और बेटी के प्रति एक समानता का भाव होगा तो यह पाप करने की जो प्रवृति है वह अपने आप ही रूक जाएगी। और यह बात, इसके लिए commitment चाहिए, संवेदना चाहिए, जिम्‍मेवारी चाहिए।

मैं आज आपके सामने एक बात बताना चाहता हूं। यह बात मेरे मन को छू गई। किसी काम के लिए जब commitment होता है, एक दर्द होता है तो इंसान कैसे कदम उठाता है। हमारे बीच माधुरी दीक्षित जी बैठी है। माधुरी नैने। उनकी माताजी ICU में हैं, वो जिंदगी की जंग लड़ रही है और बेटी पानीपत पहुंची है। और मां कहती है कि बेटी यह काम अच्‍छा है तुम जरूर जाओ। Weather इतना खराब होने के बावजूद भी माधुरी जी अपनी बीमार मां को छोड़कर के आपकी बेटी बचाने के लिए आपके बीच आकर के बैठी है और इसलिए मैं कहता हूं एक commitment चाहिए, एक जिम्‍मेवारी का एहसास चाहिए और यह एक सामूहिक जिम्‍मेवारी में साथ है। गांव, पंचायत, परिवार, समाज के लोग इन सबको दायित्‍व निभाना पड़ेगा और तभी जाकर के हम इस असंतुलन को मिटा सकेंगे। यह रातों-रात मिटने वाला नहीं है। करीब-करीब 50 साल से यह पाप चला है। आने वाले 100 साल तक हमें जागरूक रूप से प्रयास करना पड़ेगा, तब जाकर के शायद स्थिति को हम सुधार पाएंगे। और इसलिए मैंने कहा आज का जो यह पानीपत की धरती पर हम संकल्‍प कर रहे हैं, यह संकल्‍प आने वाली सदियों तक पीढि़यों की भलाई करने के लिए है।

भाईयों बहनों आज यहां भारत सरकार की और योजना का भी प्रांरभ हुआ है – सुकुन्‍या समृद्धि योजना। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओं। इसको निरंतर बल देना है और इसलिए उसके लिए सामाजिक सुरक्षा भी चाहिए। यह सुकुन्‍या समृद्धि योजना के तहत 10 साल से कम उम्र की बेटी एक हजार रुपये से लेकर के डेढ़ रुपये लाख तक उसके मां-बाप पैसे बैंक में जमा कर सकते है और सरकार की तरफ से हिंदुस्‍तान में किसी भी प्रकार की परंपरा में ब्‍याज दिया जाता है उससे ज्‍यादा ब्‍याज इस बेटी को दिया जाएगा। उसका कभी Income Tax नहीं लगाया जाएगा और बेटी जब 21 साल की होगी, पढ़ाई पूरी होगी या शादी करने जाती होगी तो यह पैसा पूरा का पूरा उसके हाथ में आएगा और वो कभी मां-बाप के लिए बोझ महसूस नहीं होगी।

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काशी के लोगों ने मुझे अपना MP बनाया है। वहां एक जयापुर पर गांव है। जयापुर गांव ने मुझे गोद लिया है और वो जयापुर गांव मेरी रखवाली करता है, मेरी चिंता करता है। जयपुर में गया था मैंने उनको कहा था कि हमारे गावं में जब बेटी पैदा हो तो पूरे गांव का एक बड़ा महोत्‍सव होना चाहिए। आनंद उत्‍सव होना चाहिए और मैंने प्रार्थना की थी कि बेटी पैदा हो तो पाँच पेड़ बोने चाहिए। मुझे बाद में चिट्ठी आई। मेरे आने के एक-आध महीने बाद कोई एक बेटी जन्‍म का समाचार आया तो पूरे गांव ने उत्‍सव मनाया और उतना ही नहीं सब लोगों ने जाकर के पाँच पेड़ लगाए। मैं आपको भी कहता हूं। आपकी बेटी पैदा हो तो पाँच पेड़ लगाएंगे बेटी भी बड़ी होगी, पेड़ भी बड़ा होगा और जब शादी का समय आएगा वो पाँच पेड़ बेच दोगे न तो भी उसकी शादी का खर्चा यूं ही निकल जाएगा।

भाईयों बहनों बड़ी सरलता से समझदारी के साथ इस काम को हमने आगे बढ़ाना है और इसलिए आज मैं हरियाणा की धरती, जहां यह सबसे बड़ी चुनौती है लेकिन हिंदुस्‍तान का कोई राज्‍य बाकी नहीं है कि जहां चुनौती नहीं है। और मैं जानता हूं यह दयानंद सरस्‍वती के संस्‍कारों से पली धरती है। एक बार हरियाणा के लोग ठान लें तो वे दुनिया को खड़ी करने की ताकत रखते हैं। मुझको बड़ा बनाने में हरियाणा का भी बहुत बड़ा role है। मैं सालों तक आपके बीच रहा हूं। आपके प्‍यार को भली-भांति में अनुभव करता हूं। आपने मुझे पाला-पोसा, बड़ा किया। मैं आज आपसे कुछ मांगने के लिए आया हूं। देश का प्रधानमंत्री एक भिक्षुक बनकर आपसे बेटियों की जिंदगी की भीख मांग रहा है। बेटियों को अपने परिवार का गर्व मानें, राष्‍ट्र का सम्‍मान मानें। आप देखिए यह असंतुलन में से हम बहुत तेजी से बाहर आ सकते हैं। बेटा और बेटी दोनों वो पंख है जीवन की ऊंचाईयों को पाने का उसके बिना कोई संभावना नहीं और इसलिए ऊंची उड़ान भी भरनी है तो सपनों को बेटे और बेटी दोनों पंख चाहिए तभी तो सपने पूरे होंगे और इसलिए मेरे भाईयों और बहनों हम एक जिम्‍मेवारी के साथ इस काम को निभाएं।

मुझे बताया गया है कि हम सबको शपथ लेना है। आप जहां बैठे है वहीं बैठे रहिये, दोनों हाथ ऊपर कर दीजिए और मैं एक शपथ बोलता हूं मेरे साथ आप शपथ बोलेंगे – “मैं शपथ लेता हूं कि मैं लिंग चयन एवं कन्‍या भ्रूण हत्‍या का ‍विरोध करूगा; मैं बेटी के जन्‍म पर खुश होकर सुरक्षित वातारवण प्रदान करते हुए बेटी को सुशिक्षित करूंगा। मैं समाज में बेटी के प्रति भेदभाव खत्‍म करूंगा, मैं “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओं” का संदेश पूरे समाज में प्रसारित करूंगा।“

भाई बहनों मैं डॉक्‍टरों से भी एक बात करना चाहता हूं। मैं डॉक्‍टरों से पूछना चाहता हूं कि पैसे कमाने के लिए यही जगह बची है क्‍या? और यह पाप के पैसे आपको सुखी करेंगे क्‍या? अगर डॉक्‍टर का बेटा कुंवारा रह गया तो आगे चलकर के शैतान बन गया तो वो डॉक्‍टर के पैसे किस काम आएंगे? मैं डॉक्‍टरों को पूछना चाहता हूं कि यह आपको दायित्‍व नहीं है कि आप इस पाप में भागीदार नहीं बनेंगे। डॉक्‍टरों को अच्‍छा लगे, बुरा लगे, लेकिन मैं कहना चाहता हूं कि आपकी यह जिम्‍मेवारी है। आपको डॉक्‍टर बनाया है समाज ने, आपको पढ़-लिखकर के तैयार किया है। गरीब के पैसों से पलकर के बड़े हुए हो। आपको पढ़ाया गया है किसी की जिंदगी बचाने के लिए, आपको पढ़ाया गया है किसी की पीड़ा को मुक्‍त करने के लिए। आपको बच्चियों को मारने के लिए शिक्षा नहीं दी गई है। अपने आप को झकझोरिये, 50 बार सोचिए, आपके हाथ निर्दोष बेटियों के खून से रंगने नहीं चाहिए। जब शाम को खाना खाते हो तो उस थाली के सामने देखो। जिस मां ने, जिस पत्‍नी ने, जिस बहन ने वो खाना बनाया है वो भी तो किसी की बेटी है। अगर वो भी किसी डॉक्‍टर के हाथ चढ़ गई होती, तो आज आपकी थाली में खाना नहीं होता। आप भी सोचिए कहीं उस मां, बेटी, बहन ने आपके लिए जो खाना बनाया है, कहीं आपके के खून से रंगे हुए हाथ उस खाने की चपाती पर तो हाथ नहीं लगा रहे। जरा अपने आप को पूछिये मेरे डॉक्‍टर भाईयों और बहनों। यह पाप समाज द्रोह है। यह पाप सदियों की गुनाहगारी है और इसलिए एक सामाजिक दायित्‍व के तहत है, एक कर्तव्‍य के तहत और सरकारें किसकी-किसकी नहीं, यह दोषारोपण करने का वक्‍त नहीं है। हमारा काम है जहां से जग गए हैं, जाग करके सही दिशा में चलना।

मुझे विश्‍वास है पूरा देश इस संदेश को समझेगा। हम सब मिलकर के देश को भविष्‍य के संकट से बचाएंगे और फिर एक बार मैं हरियाणा को इतने बड़े विशाल कार्यक्रम के लिए और हरियाणा इस संदेश को उठा लेगा तो हिंदुस्‍तान तो हरियाणा के पीछे चल पड़ेगा। मैं फिर एक बार आप सबको बहुत-बहुत बधाई देता हूं। आपका बहुत-बहुत धन्‍यवाद करता हूं।

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ इस संकल्‍प को लेकर हम जाएंगे। इसी अपेक्षा के साथ मेरे साथ पूरी ताकत से बोलिए – भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय।

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Brahma Kumaris family has spread the message of India's rich culture throughout the world: PM
March 26, 2017
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Dadi Janki is a true Karma Yogi, who continues to serve society even at the age of 100 years: PM
PM Modi appreciates the work done by the Brahma Kumaris institution in many fields, including in solar energy
Brahma Kumar and Kumaris have spread the message of India's rich culture throughout the world: PM
By 2030, India aims to generate 40% energy from non-fossil fuels. By 2022, our aim is to ensure 175 GW of clean energy: PM
Let us further the use of digital transactions and make the system more transparent: PM Modi
We have amended the Maternity Bill. This will benefit working women as leaves have been enhanced from 12 to 26 weeks: PM

ब्रह्मकुमारी संस्था के सभी सदस्यगण, अन्तराष्ट्रीय सम्मलेन और सांस्कृतिक महोत्सव हिस्सा लेने के लिए देश-विदेश से आये हुए सभी लोगों का हृदय से अभिनन्दन करता हूँ। और आप सब को भी मेरी तरफ से ॐ शांति कह करके अभिवादित करता हूँ। प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्‍वरीय विश्‍वविद्यालय के संस्‍थापक दादा लेखराज जी, आज जरूर उनकी आत्‍मा को शांति होती होगी कि जिस विचार को उन्‍होंने संस्‍थागत रूप दिया, और स्‍त्री शक्ति के माध्‍यम से उसे आगे बढ़ाया; उस आंदोलन को आज 80 वर्ष हो रहे हैं। हमारे देश में 80 वर्ष का एक विशेष महत्‍व माना जाता है। दुनिया में 25 साल, 50 साल, 75 साल, 100 साल; ये तो मनाए जाते हैं, लेकिन भारत में 80 साल का एक विशेष महत्‍व है। और जब किसी व्‍यक्ति के जीवन में या संस्‍था के जीवन में 80 साल होते हैं, मतलब कि वो सहस्र चंद्र-दर्शन का पर्व होता है। 80 साल की यात्रा में व्‍यक्ति या संस्‍था ने एक हजार बार पूर्ण चंद्र के दर्श किए होते हैं।

आज ब्रह्मा कुमारी विश्‍वविद्यालय, दादा लेखराज जी के प्रयत्‍नों से आरंभ हुआ ब्रह्मा कुमारी आंदोलन उस सहस्र चंद्रदर्शन की बेला पर है तब, विश्‍व की पूरी मानव जाति को शीतलता प्रदान करने का उसका प्रयास इस अवसर से नई ऊर्जा पा करके आगे बढ़ेगा।

गत वर्ष दादी जानकी जी ने शताब्‍दी पूरी की, एक सौ वर्ष की हैं; और आज भी एक कर्मयोगी की तरह समय दे करके हम सबको आशीर्वाद दे रही हैं। मैं दादीजी को यहां से प्रणाम करता हूं। दो दिन के बाद 'चेटी चन्न' का पर्व मनाया जाएगा। पूरे हिन्‍दुस्‍तान में संवत्‍सर का अवसर होता है। मैं आप सबको नव-संवत्‍सर की, चेटी चांद की भी बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

आप लोगों के बीच मुझे कई बार आने का अवसर मिला है। आप सबका मुझ पर अपार स्‍नेह रहा है। एक उच्‍च विचार के साथ संस्‍था के जीवन में 80 साल कम समय नहीं होता। आज विश्‍व की जो स्थिति है, मानव का जो स्‍वभाव बनता जा रहा है, उसमें कोई भी संगठन या व्‍यवस्‍था; 10 साल, 15 साल, 20 साल के बाद बिखराव शुरू हो जाता है। गुट बन जाते हैं, ग्रुप बन जाते हैं, एक में से दस संस्‍थाएं पैदा हो जाती हैं। दादा लेखराज जी की कमाल रही कि 80 साल के बाद भी, जिन आदर्शों, मूल्‍यों को ले करके ब्रह्माकुमारी विश्‍वविद्यालय, ब्रह्मा कुमारी आंदोलन को चलाया, नारी शक्त्ति को प्राधान्‍य देते हुए चलाया; और वो और वो आज भी उतने ही मनोयोग से, उतनी ही कर्मठता से, उतनी ही एकजुटता के साथ विश्‍व भर में अपना संदेश दे रहे हैं; लाखों कार्यकर्ताओं की श्रृंखला तैयार की है। ब्रह्माकुमार एवं ब्रह्माकुमारी, भारत के आध्‍यात्‍म के संदेश को विश्‍व में पहुंचा रहे हैं। आप सब बधाई के पात्र हैं, आप सबका मैं अभिनंदन करता हूं।

मेरा ये सौभाग्‍य रहा है कि आप लोगों के बीच आने का कई बार मौका मिला है। आप सबकी प्रबुद्धि को मैंने निकट से देखा भी है। आपके चिंतन को मैंने समझने का प्रयास भी किया है, और एक अच्‍छा सान्निधय भी मुझे आप लोगों का मिला है।

इन दिनों जरा व्‍यस्‍तता ज्‍यादा होती है, समय की कठिनाई रहती है, इसलिए मैं रूबरू तो आप सबके बीच नहीं आ पाया हूं, लेकिन मुझे video conference के माध्‍यम से आप सबके दर्शन करने का सौभाग्‍य मिला। और ब्रह्माकुमारी कार्य-योजना की विशेषताएं रहती हैं, आज एक नई विशेषता आपने दिखाई। प्रकाश के माध्‍यम से आपने सबने अभिवादन किया, और मुझे यहां, मेरे सामने आप सबको टीवी पर मैं देख रहा हूं। जिस प्रकार से आपने टॉर्च जला करके प्रकाश फैलाने का प्रयास किया, सचमुच में तो दादा लेखराज जी ने और आज दादीजी के नेतृत्‍व में ज्ञान के प्रकाश को पूरे विश्‍वभर में फैलाने के प्रयास कर रहे हैं।

हम एक ऐसे देश के प्रतिनिधि हैं, एक ऐसे देश की संतान हैं, जो कभी भी अपने विचारों को थोपने में विश्‍वास नहीं करता है। हम वो लोग हैं, जिस बात को मानते हैं कि ज्ञान को न कोई सीमाएं होती हैं, ज्ञान को न कोई समय के बंधन होते हैं, ज्ञान को न पासपोर्ट की जरूरत होती है, ज्ञान को न visa की आवश्‍यकता होती है, ज्ञान ये युगों-युगों तक मानव-संपदा होती है; वो कालातीत होती है; वो कालबाह्य होती है; वो नित्‍य नूतन होती है, और उस ज्ञान के मार्ग पर ही हम जीवन के सत्‍य को जान पाते हैं।

‍ब्रह्माकुमारी के माध्‍यम से ये जो निरंतर प्रयास चला है और भारत की विशेषता रही है। यही देश हैं जिसने विश्‍व को डंके की चोट पर कहा है ईश्‍वर एक है। विविध रूप से लोग उसको जानते हैं, हिन्‍दू का भगवान अलग; मुसलमान का भगवान अलग; ईसाई का भगवान अलग; पारसी का भगवान अलग; ये हमारा चिंतन नहीं है। और इसलिए ज्ञान के समय में भी हमारे महापुरुषों ने हमें, हमारे शास्‍त्रों ने वेदकाल से हमें यही सिखाया-

एकमसत, विप्रा: बहुधा वदन्ति

Truth is one, sages call it in different ways.



अलग-अलग लोग उसको अलग-अलग रूप से व्याख्‍या करते हैं। लेकिन हमारा जो सत्‍य के संबंध में दृष्टिकोण है वो दृष्टिकोण उसी भावनाओं से भरा हुआ है।

मैंने सुना कि आज शांतिवन में आपने एक solar project का प्रारंभ किया है। मैंने आपकी शांतिवन से जुड़ी अस्‍पताल का भी भूतकाल में मुझे आने का अवसर मिला था। गरीबों की कैसी सेवा हो रही है मैंने अपनी आंखों से देखा था। आप जब solar energy के लिए इतना कर रहे हो, और मुझे याद है वहां आबू रोड पर आपको जो एक प्रकार से गतिविधि का केंद्र है, उसको तो कई वर्षों पहले आपने solar energy से चलाने का उस समय निर्णय किया था; जब दुनिया में Global Warming की इतनी चर्चा नहीं होती थी, तब आपने किया था। तो इसलिए आप लोग कितने दीर्घदृष्टि से काम करते हैं इसका ये उदाहरण है। और मुझे विश्‍वास है कि आपके मार्गदर्शन में देश में एक ऐसी ऊर्जा क्रांति आ रही है, मानव जीवन में एक ऐसी ऊर्जा क्रांति आ रही है; हम साफ देख रहे हैं कि प्रकृति में सौर-ऊर्जा का जितना महत्‍व है, उतना ही व्‍यक्त्वि में शौर्य ऊर्जा का महत्‍व है। और जब औज़ हो, तेज़ हो, सामर्थ्‍य हो, संकल्‍प हो, तो व्‍यक्तित्‍व नई ऊंचाइयों को पार करता है। आज आप 3 Mega Watt Solar Energy आबू जैसे स्‍थान पर ये प्रयास बहुत ही प्ररेक बनेगा, ऐसा मेरा विश्‍वास है।

पड़ोस में गुजरात में Solar Energy में एक बहुत बड़ा initiative लिया था। भारत के अंदर Solar Energy के संबंध में अलग तरीके से सोचने के लिए देश की सभी सरकारों को प्रेरित किया था। गुजरात सरकार का उपयोग बड़ा सफल रहा। और आज शांतिवन भी इस सौर-ऊर्जा के साथ जुड़ रहा है, ये प्रकृति की रक्षा का काम है। और आपने ने तो शांतिवन में Solar Plant से एक दिन में 38 हजार से ज्‍यादा लोगों का भोजन बनना संभव होगा, ये अपने-आप में प्रकृति की रक्षा के लिए कितना बड़ा काम कर रहे हैं। आपके द्वारा Solar Lantern, Home lighting systems, Solar Cooking Boxes, ये भी घर-घर पहुंचाने का एक बड़ा आंदोलन चल रहा है। तो एक बहुत बड़ा बदलाव समाज में लाने का प्रयास आपके द्वारा हो रहा है। सिर्फ अध्‍यात्मिक बातें नहीं, लेकिन प्रकृति के साथ जी करके गरीब से गरीब व्‍यक्ति के जीवन में कैसे बदलाव लाया जा सकता है, उसकी दिशा में प्रयास किया है।

भारत भी दुनिया जिस संकट से जुझ रही है, Global Warming से, उसमें दुनिया के लिए भारत किस प्रकार से काम आ सकता है; भारत से संकल्‍प किया है- Twenty-Thirty- 2030 तक यानी आज से 13 साल के भीतर-भीतर भारत की जो Total ऊर्जा है, requirement है, उसमें 40 प्रतिशत 40 percent, उसकी पूर्ति non fossil fuel base, renewable energy से ही करने का हमारा लक्ष्‍य है।

2022, भारत की आजादी के 75 साल हो रहे हैं, और जब भारत की आजादी के 75 साल हो रहे हैं तब 2022 में हम Solar के क्षेत्र में क्‍या initiative ले सकते हैं, renewable energy में क्‍या initiative ले सकते हैं, भारत से संकल्‍प किया है 175 Giga Watt renewable energy का। बहुत बड़ा लक्ष्‍य है। सरकार, समाज, संस्‍थाएं जिस प्रकार से आज आप 3 mega watt ले करके आए हैं, जितना ज्‍यादा हम उपयोग करेंगे, मानव जाति की, प्रकृति की, परमात्‍मा की बहुत बड़ी सेवा होने वाली है। इस काम में आप भी जुडे हैं, मैं आपका बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं, और वैसे आप प्रकृति की रक्षा के लिए अनेक काम भी कर रहे हैं; उससे भी बहुत लाभ मिलेगा। उससे भी फायदा मिलेगा।

उसी प्रकार से वृक्षों की दिशा में आपका काम, हमारे यहां तो पौधे को ही परमात्‍मा माना गया है। हरित क्रांति, दुग्ध क्रांति, ऊर्जा क्रांति; कई ऐसे काम हैं जो प्रकृति की रक्षा करेंगे, मानव को भी एक नई दिशा देंगे, उस पर आप काम कर रहे हैं। मैं आपको बहुत-बहुत बधाई देता हूं। आपके द्वारा, ये पता होगा कि भारत सरकार ने एक initiative लिया है ऊर्जा की बचत के लिए LED Bulb का। ये LED Bulb करोड़ों की तादाद में आज करीब-करीब 22 करोड़ LED Bulb, नगर पालिकाओं ने, महानगर पालिकाओं ने, लोगों ने अपने घरों में लगाए हैं और इससे करीब-करीब 11 हजार करोड़ रुपये की बचत सामान्‍य मानवी को होती है।

आपका ब्रह्माकुमारी का 8500 केंद्र हैं, लाखों कार्यकर्ता हैं। जैसे आपने Solar Energy के द्वारा एक दिशा दी है, घर-घर LED Bulb के लिए भी आपके सभी ब्रह्माकुमार और ब्रह्माकुमारी देश में एक जागृति ला सकते हैं। उसके कारण ऊर्जा की बचत होगी, गरीब आदमी की जेब में पैसा बचेगा, सामान्‍य मानवी की जेब में पैसा बचेगा, Municipality, Corporation के पैसे बचेंगे; उसे और काम में ला सकते हैं। और जो एक जमाने में 400-500 में LED Bulb बल्‍ब बिकता था, आज 50-60-70 रुपये में LED Bulb मिल रहा है। तो एक बड़ा काम ब्रह्माकुमारी के द्वारा समाज में जो चल रहा है उसमें इस काम को भी जोड़ा जा सकता है।

आज हम Imported Diesel Petrol पर निर्भर करते हैं, अगर हम पवन ऊर्जा, पानी से ऊर्जा, सूर्य शक्ति से ऊर्जा, इस पर अगर हम बल देंगे तो भारत को ये बाहर से Petroleum के लिए इतने रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं; अरबों-खरबों रुपये जा रहे हैं, वो बचेंगे जो हिन्‍दुस्‍तान के गरीब के काम आएंगे। उस दिशा में आपका ये योगदान अपने-आप में एक सही दिशा का काम है। और इसलिए आप अभिनंदन के अधिकारी हैं।

हमारे शास्‍त्रों ने हमें प्रकृति का शोषण करने का हक नहीं दिया है। Exploitation of the Nature ये हमारे यहां Crime माना गया है। हमें Milking of the Nature, प्रकृति का दोहन करने का ही हक है और उस काम को करने में आपका प्रयास जरूर काम आयेगा।

ब्रह्माकुमारी संस्‍था का मंत्र -'एक ईश्‍वर, एक विश्‍व परिवार' ये मूलत: हमारे देश का चिंतन है। 'वसुधैव कुटुम्‍बकम' शायद दुनिया में इतना विशाल, व्‍यापक और चिरंतन विचार इसी धरती से पैदा हुआ है। समय-समय पर उसकी वाक्‍य रचना अलग होगी, अभिव्‍यक्ति अलग रही होगी, और इसलिए भारत विश्‍व में न्‍याय, गरिमा, अवसर और समृद्धि के लिए प्रयत्‍नशील रहता है। भारत के ही प्रयास से आज विश्‍व में International Solar Alliance के माध्‍यम से प्रकृति की रक्षा के लिए एक आंदोलन चल रहा है और दुनिया के देश हमसे जुड़ रहे हैं। आज जब सभी लोग वहां मिले हैं तब, आप 80 साल मना रहे हैं तब, मैं आपसे एक आग्रह करूंगा, और आज यहां से जाने से पहले, इतना बड़़ा समारोह हो रहा है, देश भर के लोग वहां आए हैं, तब आप भी कुछ सोचिए कि 2022, भारत की आजादी के 75 साल हो रहे हैं। देश की आजादी के लिए मरने-मिटने वालों ने जो सपने देखे थे, क्‍या हम सबका जिम्‍मा नहीं है उन सपनों को पूरा करने के लिए कुछ करें? सामूहिक रूप से करें? संकल्‍प ले करके करें? सही दिशा में प्रयास करें? और दुनिया की इतनी बड़ी आबादी में अगर उसके जीवन में बदलाव लाते हैं तो विश्‍व का कल्‍याण करने का भी एक बहुत बड़ा आधार बन सकता है। आज जब आप इतनी बड़ी तादाद में वहां इकट्ठे हुए हैं, 2022 तक ब्रह्माकुमारी विश्‍वविद्यालय के माध्‍यम से, ब्रह्माकुमार और ब्रह्माकुमारियों के माध्‍यम से, विश्‍व में फैले हुए ब्रह्माकुमारी संगठन के माध्‍यम से, भारत में आठ हजार से ज्‍यादा आपकी इकाइयों के माध्‍यम से; दो, तीन, पांच, सात; जो भी आपको ठीक लगे, आप संकल्‍प लीजिए। 2022 तक इसको पूरा करके रहेंगे, इसका आप निर्णय कीजिए। देखिए आपका कितना बड़ा योगदान होगा। जो भारत इस प्रकार से ....... हो रहा है उसमें आप भी ऊर्जा भर देंगे, ऐसा मुझे विश्‍वास है।

अब पिछले दिनों आप लोगों ने देखा है नोटबंदी के बाद भ्रष्‍टाचार और कालेधन के खिलाफ एक निर्णायक लड़ाई की ओर हम आगे बढ़े हैं। देश को फिर से एक बार कालेधन की ओर जाने से बचाने में Digital Technique बहुत बड़ा काम कर सकती है। नकद की लेनदेन जितनी कम हो, जितना ज्‍यादा Digital Currency का उपयोग हो, हम देश में एक शुचिता वाली व्‍यवस्‍था को विकसित कर सकते हैं। क्‍या सभी ब्रह्माकुमार, ब्रह्माकुमारी, जहां-जहां उनका प्रभाव है; अपने Mobile Phone पर BHIM App download करके छोटे-छोटे व्‍यापारियों को Digital लेनदेन के लिए, नकद से मुक्ति की दिशा में जाने के लिए प्रयास कर सकते हैं क्‍या? मैं आज जब आपके बीच आया हूं, भले technology के माध्‍यम से आया हूं, लेकिन मेरा आपके साथ इतना नाता रहा है कि मैं आपसे हक से भी कह सकता हूं कि ब्रह्माकुमारी के द्वारा इस काम को बल दिया जाये और देश में परिवर्तन के सूत्रधार के रूप में आपकी इतनी बड़ी संस्‍कारित जो मानव शक्ति है वो काम आए।

ब्रह्माकुमारी आंदोलन में ब्रह्माकुमार तो हैं ही हैं, लेकिन ब्रह्माकुमारी बहुत सक्रिय हैं। हमारे देश में आज भी लाखों की तादाद में ऐसे बच्‍चे हैं जो टीकाकरण से वंचित हैं। और टीकाकरण से वंचित होने के कारण वो किसी न किसी गंभीर बीमारी के शिकार हो जाते हैं। माता मृत्‍युदर, शिशु मृत्‍युदर, ये चिंता का विषय होता है। कुपोषण चिंता का विषय होता है। एक इंद्रधनुष योजना के तहत भारत सरकार टीकाकरण को एक बहुत बड़ा, घर-घर को एक commitment के साथ जिम्‍मेवारी तय करना चाहती है। जब भी टीकाकरण का कार्यक्रम हो हमारे ब्रह्माकुमार और ब्रह्माकुमारीज़ एक Volunteer के रूप में उससे जुड़ जाएं, छोटे-छोटे बच्‍चों की जिंदगी बचाने के लिए काम आ जाएं, कितनी बड़ी सेवा होगी! और आप तो इसी सेवाधर्म से जुड़े हुए हैं। अगर इसको आप ले लें, बहुत बड़ा काम कर सकते हैं।

मैं एक और काम के लिए आज आपसे आग्रह करता हूं। ब्रह्माकुमारी विश्‍वविद्यालय, अगर ये विश्‍वविद्यालय है; आप एक ऐसा Online Course शुरू कर सकते हैं क्‍या? और जिसमें हिन्‍दुस्‍तान के लोगों को Online Exam के लिए प्रेरित करें, Certificate Course करें, Educate करें, Exam लें, और वो विषय हैं मेरे मन में Nutrition. पोषण के विषय में हमारे यहां अज्ञानता का भी एक बहुत बड़ा दुर्भाव है। इस उम्र में क्‍या खाना चाहिए, शरीर के लिए किन चीजों की जरूरत है, उसका ज्ञान का भी अभाव है। दो टाइम पेट भर लिया तो काम हो गया, बहुत-एक सोच है। जिसकी आर्थिक स्थिति ठीक है, दोनों टाइम अच्‍छा खाना खा सकता है उसको भी इसका पता नहीं है कि क्‍या खाना, क्‍या नहीं खाना और कब खाना, कैसे खाना। अगर ब्रह्माकुमार विश्‍वविद्यालय, शरीर के पोषण के लिए किन-किन चीजों की आवश्‍यकता है, शरीर में किसी चीज की कमी हो तो कैसे नुकसान होता है। अगर एक Certificate Course, Online Training, Online Examination, ये पूरा आंदोलन आप खड़ा कर सकते हैं क्‍या? हिन्‍दुस्‍तान की सभी यूनिवर्सिटियों को आपके साथ जोड़ सकते हैं क्‍या? आप एक ऐसा संगठन हैं जिसमें महिलाओं की संख्‍या ज्‍यादा है। सक्रिय भूमिका भी महिलाओं की है। और Nutrition की समस्‍या का समाधान अगर करना है, हमारे बालकों को कुपोषण से बाहर निकालना है, तो आप बहुत बड़़ा योगदान दे सकते हैं। मैं आपसे आग्रह करता हूं कि आप इसमें सोचिए। मैं भारत सरकार से भी कहूंगा, राज्‍य सरकार से भी आग्रह करूंगा कि अगर आप इस काम को लेकर आगे आते हैं तो जरूर वे भी आपको उचित मार्गदर्शन करेंगे; जो भी मदद करनी चाहिए, वो करेंगे। लेकिन एक आंदोलन हम खड़ा कर सकते हैं।

हमारी IXth, Xth, XIth, XIIth - इस कक्षा में पढ़ने वाली बच्चियां, अगर Nutrition के संबंध में शिक्षित होंगी; तो जब भी परिवार का कारोबार संभालती होंगी, Kitchen पर उनका प्रभाव रहने ही वाला है। वो Profession में जाएगी तो भी Kitchen पर उसकी बात चलने वाली है। आप सोच सकते हैं कि कितना बड़ा बदलाव ला सकते हैं। और ये काम आपके माध्‍यम से बहुत ही अच्‍छी तरह हो सकता है। और मैं इसके लिए 2022 एक संकल्‍प लेने के लिए आपको निमंत्रित करता हूं।

भारत सरकार ने महिला सशक्तिकरण के लिए कई कदम उठाए हैं। अभी आपने देखा होगा कुछ दिन पहले जो हमारी Working Women Class जो है पूरा, डिलीवरी के बाद, प्रसूति के बाद पहले उनको सिर्फ 12 सप्‍ताह की छुट्टी मिलती थी, हमने उसको 12 सप्‍ताह से 26 सप्‍ताह कर दिया है ताकि वो अपने बालक की देखभाल करने की जब सबसे ज्‍यादा आवश्‍यकता होती है, तो मां अपने बच्‍चे के साथ रह सके, पूरा समय दे सके, और वो समय प्रारंभ के जो कुछ महीने होते हैं; जो बालक की जिंदगी में बड़े महत्‍व होते हैं, संतान की जिंदगी में बड़े महत्‍व होते हैं। मां की मौजूदगी बहुत बड़ा role कर सकती है। और दुनिया में शायद दो या तीन ही देश हैं जो 26 हफ्ते से ज्‍यादा छुट्टी देते होंगे। दुनिया के समृद्ध और प्रगतिशील देश भी 26 हफ्ते की छुट्टी नहीं दे रहे, भारत ने इतना बड़ा फैसला कर लिया है! क्‍योंकि हमारी माताओं-बहनों का सशक्तिकरण देश के सशक्तिकरण में एक नई ऊर्जा भर सकता है, नई गति भर सकता है और परिणाम की दृष्टि से काफी सफल यात्रा की ओर हमें ले जा सकता है।

सुकन्‍या समृद्धि योजना हो, गर्भवती महिलाओं के लिए बैंक खाते से तीन किश्‍तों में 6000 रुपये देने की योजना हो, प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्‍व अभियान हो। अभी उज्‍ज्‍वला योजना के तहत एक बड़ा अभियान चलाया है। हमारी गरीब मां-बहनें लकड़ी का चूल्‍हा जला करके खाना पकाती थीं और Medical से जुड़े हुए लोगों का कहना है कि जब एक मां, गरीब मां लकड़ी से चूल्‍हा जला करके खाना पकाती है तो एक दिन में उसके शरीर में 400 सिगरेट का धुंआ जाता है। बच्‍चे खेलते होते हैं उनके शरीर में भी वो धुंआ जाता है। हमारी मां-बहनो की तबियत का क्‍या हाल होगा? भारत सरकार ने एक बहुत बड़ा Initiative लिया है कि हमें इन गरीब माताओं को खाना पकाने के लिए लकड़ी के चूल्‍हे से मुक्ति दिलानी है। और लकड़ी के चूल्‍हे से मुक्ति दिलाने के लिए LPG Gas Cylinder का Connection देना एक बहुत बड़ा आंदोलन चला। पिछले दस महीने से ये आंदोलन चलाया है, अब तक करीब-करीब दो करोड़ गरीब परिवारों में गैस के Cylinder पहुंच चुके हैं, गैस का चूल्‍हा जल रहा है; लकड़ी के चूल्‍हे से, धुंए से उनको मुक्ति मिल चुकी है। और ये तीन साल में 5 करोड़ परिवारों में पहुंचने का संकल्‍प है।

हमारी मातृ शक्ति, हमारी महिला शक्ति, उनको कैसे मदद मिले, उस पर हमारा बल चल रहा है। ब्रह्माकुमारी के द्वारा इसमें बहुत बड़ा योगदान हो सकता है। मैं आपसे आग्रह करता हूं कि आप भी सक्रियता से ऐसे काम; क्‍योंकि आप करते ही हैं, अनेक प्रकार के काम आप करते ही हैं। सक्रियता से इन कामों को अगर आप बल देंगे, एक बहुत बड़ा परिणाम लाने में आपका योगदान बनेगा।

आज मुझे फिर से आपके बीच में आने का अवसर मिला है। प्रकृति की रक्षा, मातृ शक्ति की रक्षा, बालकों की जिंदगी में बदलाव लाने का प्रयास, ये सारी बातें अपने-आप में एक बहुत बड़ी अमानत के रूप में हैं। और मैं आपसे, आपके बीच आया, आपका ये समागम दुनिया के जब सभी देशों से जब लोग आए हैं तब, भारत के इस महान चिंतन का विचार ले करके जाएंगे, ज्ञान का प्रकाश सब दूर पहुंचेगा, मानव कल्‍याण के लिए काम आएगा; और दादा लेखराज जी ने जो काम को आरंभ किया था, आपके प्रयत्‍नों से उसको एक नई ऊर्जा मिलेगी। 100 वर्ष के बावजूद भी इतना कठोर परिश्रम, दादी का जीवन नई पीढ़ी को प्ररेणा देता रहेगा, एक नई ऊर्जा के साथ लोगों को काम करने की ताकत मिलती रहेगी।

और जब स्‍वच्‍छ भारत अभियान मैं चला रहा था तो दादीजी हमारी Ambassador रहीं हैं। दादीजी ने ब्रह्माकुमारियों के द्वारा स्‍वच्‍छता अभियान को बल दिया है। और मुझे विश्‍वास है कि सफेद वस्‍त्रों में हमारे जो ब्रह्माकुमार, ब्रह्माकुमारी हैं, वे स्‍वच्‍छता के आंदोलन को बहुत ताकत दे सकते हैं।

2022 तक ऐसे कुछ संकल्‍प ले करके चलें। 2019, महात्‍मा गांधी को 150 वर्ष हो रहे हैं। जब गांधी को 150 वर्ष हो रहे हैं तो भारत में स्‍वच्‍छता के विषय में जन-जन की आदत कैसे उसको बने, ये आंदोलन आदत में कैसे परिवर्तित हो, उसको हमें परिणाम पर ले जाना है।

मैं आज आप सबके बीच आया हूं तो मैं आपसे कुछ बातों के लिए आग्रह कर रहा हूं। और मुझे विश्‍वास है कि आप इसको करके दिखाएंगे। आप के पास सामर्थ्‍य है, संगठन है, संकल्‍प है। पवित्र कार्य से प्रेरित आप लोग हैं। आपसे परिणाम मिलने की संभावना है। मैं फिर एक बार विश्‍वभर से आए हुए सभी महानुभावों का हृदय से स्‍वागत करता हूं और ये ज्ञान का प्रकाश सब दूर फैलाने में आपका भी योगदान मिलता रहे।

आप सबके बीच आने का मुझे मौका मिला, मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूं, आप सबको मेरी तरफ से ओम शांति, ओम शांति, ओम शांति।