Mahagathbandhan is a bundle of lies: PM Modi in Arrah, Bihar

Published By : Admin | November 2, 2025 | 14:00 IST
The manifesto of the NDA alliance is an honest declaration and on the other hand, the manifesto of Mahagathbandhan is a bundle of lies: PM
Viksit Bihar is the foundation of Viksit Bharat. When I talk about Viksit Bihar, I mean the industrial development of Bihar: PM Modi in Arrah
Bihar is on the path of progress and we must not let it pause. I urge Bhojpur to give full support to the NDA: PM Modi in Arrah

भारत माता की जय…

भारत माता की जय…

जय माँ काली...बखोरापुर वाली...हम मां आरण्य देवी के चरणों में प्रणाम कर अ तानी....वीर बांकुरा बाबु वीर कुंवर सिंह जी के इ धरती पर...रौवा सभन के अभिनन्दन करअ तानी !

साथियों,

भोजपुर के आप सभी लोगों ने तो आज कमाल कर दिया है..जहां जहां मेरी नजर पहुंचती है उमंग और उत्साह से भरे हुए लोग ही नजर आ रहे हैं। आप इतनी विशाल संख्या में...भाजपा के, NDA के...इन सभी साथियों को आशीर्वाद देने आए हैं। मैं जब आप सभी की ये ऊर्जा देखता हूं....तो विकसित बिहार का संकल्प और दृढ़ हो जाता है। साथियों विकसित बिहार ही...विकसित भारत का आधार है। और भाइयों और बहनों.. मैं जब विकसित बिहार की बात करता हूं... तो इसका मतलब है.. बिहार का औद्योगिक विकास..बिहार के युवाओं को बिहार में ही रोजगार...और हम आरा के इ मंच से कहत बानी..आपके सपना हमार संकल्प ह…आपके बच्चन के भविष्य, हमार जिम्मेदारी ह

साथियों,

इस संकल्प को पूरा करने के लिए मैं आज आपके पास कुछ मांगने आया हूं आपका साथ मांगने आया हूं। मैं देख रहा हूं....बिहार के लोग इस बार NDA को रिकॉर्ड सीटें देने जा रहे हैं। ये जंगलराज वाले इस बार सबसे करारी हार का रिकॉर्ड बनाने वाले हैं। क्योंकि बिहार की पुरानी पीढ़ी के साथ ही...अब नई पीढ़ी ने भी ठान लिया है...
फिर एक बार....एनडीए सरकार
फिर एक बार.. फिर एक बार....फिर एक बार....सुशासन की सरकार !

साथियों,

छह नवंबर को आपके यहां मतदान होना है। अब ज्यादा दिन नहीं बचे हैं। NDA ने विकसित बिहार के लिए एक ईमानदार और दूरदर्शी घोषणापत्र दिया है। हर वादा, हर योजना...बिहार के तेज़ विकास को समर्पित है। मैं इसके लिए बिहार भाजपा, जेडीयू, लोजपा, हम पार्टी और RLSP के साथियों का हृदय से अभिनंदन करता हूं।

साथियों,

एक तरफ NDA का ईमानदार घोषणापत्र है...तो और उधर जंगलराज वाले हैं...इन्होंने अपने घोषणापत्र को भी झूठ का, छल-कपट का, लोगों की आंखों में धूल झोंकने वाला दस्तावेज़ बना दिया है। और जंगलराज वालों…जनता जनार्दन को बूर्बक बूझे हो क्या..? मत भूलो...ये पब्लिक है...ये सब जानती है...।

साथियों,

NDA के संकल्प पत्र में...बच्चों की पढ़ाई...परिवार की दवाई... नौजवानों की कमाई...और किसानों को सिंचाई...इनपर बहुत ज्यादा बल दिया है। इसके अलावा...बहनों-बेटियों के सशक्तिकरण के लिए अनेक मजबूत प्रावधान किए गए हैं। बिहार की ज्यादा से ज्यादा बहनें लखपति दीदी बनें… इस पर सुविचारित योजना आपके सामने पेश की गई है।

साथियों,

मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना ने बिहार की हर बहन आज खुशियों से भर गई है। अभी तक बिहार की एक करोड़ 30 लाख बहनों के खाते में दस-दस हज़ार रुपया पहुंच चुका है। इसमें भोजपुर की भी, लगभग चार लाख बहनों के खाते में दस-दस हज़ार पहुंच चुके हैं। और भाइयों बहनों.. हम यहीं नहीं रुकने वाले... 14 तारीख को नतीजे आएंगे.. एनडीए की फिर से सरकार बनेगी और सरकार बनने के बाद..इन बहनों को मदद का एक और अभियान तेज गति से आगे बढ़ाया जाएगा।

साथियों,

बिहार देश के उन राज्यों में से है, जहां सबसे अधिक युवा आबादी है। इसलिए, NDA का बहुत ज़ोर, बिहार में शिक्षा और कौशल पर है...ये हमारे संकल्प पत्र से भी स्पष्ट होता है। हमारा संकल्प है कि बिहार का युवा...सुनिये दोस्तो, हमारा संकल्प है बिहार का युवा बिहार में ही काम करेगा...बिहार का नाम करेगा। इसके लिए आने वाले वर्षों में एक करोड़ रोजगार देने का ऐलान किया गया है। और सिर्फ ऐलान किया है ऐसा नहीं है और ये कैसे होगा...इसका प्लान भी जनता जनार्दन के सामने रख दिया गया है। आज दुनिया में मेक इन इंडिया के प्रति बहुत उत्साह है...हमारा लक्ष्य है...बिहार भी मेड इन इंडिया का केंद्र बने। इसके लिए हम हज़ारों लघु और कुटीर उद्योगों का नेटवर्क और मजबूत करेंगे...यहां अलग-अलग क्षेत्रों में औद्योगिक क्लस्टर बनाने का जो काम चल रहा है.. फिर से सरकार में आने के बाद उसका दायरा और बढ़ाया जाएगा…और साथियों वो दिन दूर नहीं...बिहार, पूर्वी भारत का टेक, टेक्सटाइल और टूरिज्म का बड़ा सेंटर बनेगा। मेरे नौजवानों आपने तो मुझे भी जोश से भर दिया आज, ये जो दिल्ली में बैठकर गुणा भागा करते हैं, बड़ी-बड़ी तस्वीरें निकालते हैं, अरे जरा यहां आकर देखिये कि हवा का रूख क्या है। यहां बड़ी कंपनियों के डेटा सेंटर बनेंगे...बिहार में यहीं रहते हुए लोग...दुनिया की कंपनियों के लिए काम करेंगे...

साथियों,

NDA के संकल्प पत्र में, गांव की समृद्धि के लिए भी एक सशक्त योजना बनाई गई है। बिहार के अलग-अलग क्षेत्रों में, अलग-अलग फसलें उगाई जाती हैं। बीते सालों में बिहार से कृषि निर्यात बहुत बढ़ा है। अब हम बिहार में मेगा फूड पार्क के नेटवर्क का विस्तार करने वाले हैं। आपको पता है कि...हमारी सरकार छोटे किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि के 6 हज़ार रुपए देती है। भारत सरकार पीएम किसान सम्मान निधि के 6 हज़ार रुपए देती है। बिहार की नई NDA सरकार इसमें, अपनी तरफ से तीन हज़ार रुपए और बढ़ाने वाली है। बिहार में पशु-पालकों की आय बढ़ाने के लिए, बिहार दुग्ध मिशन की घोषणा की गई है। मिल्क मिशन की घोषणा की गई है

साथियों,

एक समय था जब बिहार...अपने लिए दूसरे राज्यों से मछली मंगाता था। ये NDA सरकार की नीतियों का नतीजा है...कि अब बिहार दूसरे राज्यों को मछली भेजता है। मछली बेचता है। अब बिहार के मछली-पालकों के लिए एक और खुशखबरी है। NDA ने, ‘जुब्बा सहनी मत्स्य पालक सहायता योजना’ बनाने की घोषणा की है। इस स्कीम के तहत, मछुआरे परिवारों को भी ₹9,000 की मदद मिलेगी।

साथियों,

NDA का ट्रैक रिकॉर्ड है कि हम जो संकल्प लेते हैं...उसे पूरा करके दिखाते हैं। मैंने गारंटी दी थी कि किसी भी गरीब मां का बच्चा भूखा नहीं सोएगा...आज भोजपुर जिले के लाखों परिवारों को पिछले 5 साल से लगातार मुफ्त अनाज मिल रहा है। पहले यहां राशन में, अरवा चावल मिला करता था...आपको, उसना चावल पसंद था… आपकी बात मेरे कानों तक पहुंची और मोदी जब आपकी बात सुनता है तो सो नहीं जाता है तुरंत जग जाता है। और जब मैंने आपकी बात सुनी तो हमारी सरकार ने बिहार के लोगों की पसंद का ध्यान रखा...और उसना चावल देना शुरु किया।

साथियों,

ऐसे ही मोदी की गारंटी थी...कि हर गरीब परिवार को पक्का घर मिलेगा। आप देखिए...बिहार में साठ लाख गरीब परिवारों को पक्का घर मिला है। इसमें से भोजपुर के ही करीब एक लाख पंद्रह हज़ार लाभार्थी हैं। जिन्हे पक्का घर मिल गया है।

साथियों,

हमारे लिए देश की सुरक्षा और देश की सुरक्षा करने वाले... दोनों ही जरूरी हैं। इस क्षेत्र से तो बहुत सारे साथी...सेना में हैं, अर्ध-सैनिक बलों में हैं। हमारे सैनिक परिवार...कई-कई दशकों से वन रैंक वन पेंशन की मांग कर रहे थे। मोदी ने गारंटी दी और पूरी करके दिखाई। वन रैंक वन पेंशन के तहत...देशभर के पूर्व सैनिकों को, एक लाख करोड़ रुपए से ज्यादा, आंकड़ा देखिए एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा उनको मिल चुके हैं। बिहार के सैनिक परिवारों को भी सैकड़ों करोड़ रुपए की मदद मिली है।

साथियों,

मोदी ने...जम्मू कश्मीर से आर्टिकल-370 की दीवार गिराने की गारंटी दी थी। हमने आर्टिकल 370 हटाने की गारंटी दी थी ना, जरा जवाब दीजिए, हमने आर्टिकिल 370 गिराने की गारंटी दी थी कि नहीं दी थी। आजादी के बाद इतनी सरकारें आईं कोई गिरा पाया क्या? किसी ने गिराया क्या… आजादी के 70 साल के बाद ये काम पूरा हुआ कि नहीं हुआ पूरा हुआ कि नहीं हुआ। आज जम्मू कश्मीर में भी भारत का संविधान पूरी तरह से लागू हो रहा है।

साथियों,

मोदी ने ये भी कहा है कि अब भारत आतंकियों को घर में घुसकर मारेगा। हाल में ही ऑपरेशन सिंदूर हुआ...हमने फिर से अपनी गारंटी पूरी करके दिखाई कि नहीं दिखाई? हमारी सेना ने जो कमाल किया...उस पर आपको गर्व हुआ कि नहीं? ऑपरेशन सिंदूर से आपका माथा ऊंचा हुआ कि नहीं… ऑपरेशन सिंदूर से आपका सीना चौड़ा हुआ कि नहीं। साथियों, आपको इतना गर्व हुआ, इतना माथा ऊंचा हुआ, लेकिन सेना की इतनी बड़ी सफलता के बाद भी कांग्रेस-आरजेडी को ये बिल्कुल पसंद नहीं आया। अरे साथियों हालत तो देखो.. धमाके पाकिस्तान में हो रहे थे...और नींद, कांग्रेस के शाही परिवार की उड़ी हुई थी। आज तक...पाकिस्तान और कांग्रेस के नामदार...दोनों ही, ऑपरेशन सिंदूर के सदमे से बाहर नहीं निकल पाए।

साथियों,

आज विकसित बिहार के संकल्प के साथ...पूरा NDA एकजुट होकर आगे बढ़ रहा है। वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस और RJD में घमासान मचा हुआ है... मैं आपको एक अंदर की बात बता रहा हूं...नामांकन वापस लेने से एक दिन पहले, बिहार में बंद कमरे में गुंडागर्दी का खेल खेला गया था। कांग्रेस कभी नहीं चाहती थी कि सीएम पद पर आरजेडी के नेता का नाम तय हो.. लेकिन आरजेडी ने भी मौका छोड़ा नहीं। आरजेडी ने कांग्रेस की कनपट्टी पर कट्टा रखकर सीएम पद चोरी कर लिया। घोषणा करवाकर रहे। फिर जबरदस्ती कांग्रेस से सीएम उम्मीदवार को समर्थन की घोषणा कराई गई...कट्टा रख कर के।

साथियों,

आरजेडी-कांग्रेस में झगड़ा भयंकर बढ़ गया है। ना घोषणापत्र में कांग्रेस की सुनी गई...ना प्रचार में उनकी पूछ हो रही है। चुनाव से पहले ही इतनी घृणा बढ़ गई है कि चुनाव के बाद ये एक दूसरे का सिर फोड़ने लगेंगे। इसलिए हमेशा याद रखिए... ऐसे लोग...बिहार का भला कभी नहीं कर सकते।

साथियों,

एक तरफ NDA का सुशासन है...और दूसरी तरफ जंगलराज का कुशासन है। जंगलराज...वो अंधेरा था, जिसने बिहार को धीरे-धीरे खोखला कर दिया। RJD के जंगलराज की पहचान जिन चीजों से होती है वो हैं... कट्टा, क्रूरता, कटुता, कुसंस्कार, कुशासन और करप्शन। मैं सोशल मीडिया पर एक बिटिया का वीडियो देख रहा था। वो बेटी बोली कि यहां जब कुछ महीने के लिए RJD सरकार में शामिल हुई थी... तो उस बिटिया ने उतने में ही जंगलराज का ट्रेलर देख लिया था। बेटियों से छेड़खानी, व्यापारियों से लूटपाट.. रंगदारी.. सब कुछ.. मौका मिलते ही आरजेडी वाले मैंदान में उतर आते हैं।

साथियों,

भोजपुर, वीर कुंवर सिंह जी जैसे क्रांतिवीरों की धरती है... भोजपुर, सच्चिदानंद सिन्हा जी जैसे सेनानियों की धरती है... जिस भोजपुर ने 1857 की क्रांति का क्रांति-वीर दिया... जिसने संविधान सभा का पहला अध्यक्ष दिया... उस क्षेत्र को RJD ने कट्टा, क्रूरता, कटुता, कुसंस्कार, कुशासन और करप्शन का अड्डा बना दिया था। 2005 से पहले के 15 वर्षों में, इसी RJD ने यहां जातीय दंगे करवाए... दलितों-महादलितों..अतिपिछड़ों के बच्चों को माओवादी आतंक की आग में झोंक दिया। और आज ये लोग बिहार के विकास की बात करने की हिम्मत दिखाते हैं।

साथियों,

मैं आपको यहीं भोजपुर जिले की ही एक घटना याद दिलाता हूं... वो साल 2004 का, नवंबर का ही महीना था... यहां के तरारी ब्लॉक की एक डिस्पेंसरी में एक डॉक्टर साहब, बच्चों को पोलियो की ड्रॉप पिलाने में व्यस्त थे। ये काम करते-करते उनको देर हो गई... देर शाम घर के लिए निकले...तो रास्ते में जो नई उमर के नौजवान हैं जरा सुनिए.. 2004 की घटना है, यहां की घचना है जब डॉक्टर साहब घर जा रहे थे तो रास्ते में हथियारबंद लोगों ने उनका अपहरण कर लिया। सेवा करने वाले डॉक्टर बच्चों को पोलियो का ड्रॉप पिलाने वाले डॉक्टर वो डॉक्टर जब जा रहे थे। साथियों, जंगलराज के दौरान ऐसे ही करीब 37 हजार लोगों का अपहरण हुआ था। दूसरों का जीवन बचाने वाले डॉक्टरों को... अपना जीवन बचाने के लिए बॉडीगार्ड लेकर चलना पड़ता था। नीतीश जी और NDA सरकार बहुत मेहनत से बिहार को उस मुश्किल दौर से बाहर निकालकर लाए हैं।

साथियों,

RJD अगर बिहार में जंगलराज लाई...तुष्टिकरण की राजनीति लाई तो तो कांग्रेस की पहचान सिखों के कत्लेआम से जुड़ी है। ये 1984 में एक और दो नवंबर की ही तारीख थी...आज भी दो नवंबर है , 84 की एक और दो नवंबर जब दिल्ली में और देश के कई भागों में कांग्रेस के लोगों ने सिख-नरसंहार किया था। आज भी कांग्रेस सिख नरसंहार के गुनहगारों को पूरे सम्मान के साथ नए-नए ओहदे दे रही है उन्हे आगे बढ़ा रही है। कांग्रेस हो या आरजेडी...इन्हें अपने पाप का कोई पछतावा नहीं है।

साथियों,

तुष्टिकरण की इस जिद में आज RJD कांग्रेस...बिहार की पहचान खत्म करने में जुटी हैं। ये लोग बिहार में घुसपैठियों के समर्थन में यात्राएं कर रहे हैं। ये लोग घुसपैठियों को बचाने के लिए तन-मन-धन से जुटे हैं। पहले तो इन लोगों ने बिहार में ऐसे हालात बना दिए कि बिहार के लोगों का यहां रहना ही मुश्किल हो जाए... और फिर घुसपैठियों को ये लोग बिहार में बसा रहे हैं। मैं जरा मेरे बिहार के अपने भाई-बहनों को पूछना चाहता हूं। आप मुझे बताइए, ये बिहार के संसाधनों पर आपका हक है कि नहीं है। मुझे पूरी ताकत से बताइए कि आपका हक है कि नहीं है। क्या ये बिहार के संसाधन किसी को लूटने देंगे। क्या घुसपैठिए आकर कब्जा करे, करने देंगे। क्या घुसपैठियों को अपने भविष्य का निर्णय करने देंगे। ये घुसपैठियों को हटाना चाहिए की नहीं हटाना चाहिए। ये घुसपैठियों को बचाने वाले पापी हैं कि नहीं हैं. ये घुसपैठियों को बचाने वाले आपके गुनहगार हैं कि नहीं है। ये घुसपैठियों की रक्षा करने वाले आपके भक्षक हैं कि नहीं हैं। मेरे भाइयों-बहनों, इनके इरादे बहुत खतरनाक हैं... और इसलिए आपको RJD-कांग्रेस वालों से बहुत सावधान रहना है।

साथियों,

ये वो लोग है जो सिर्फ और सिर्फ जंगलराज की पाठशाला में पढ़ के निकले हैं, जिनकी ट्रेनिंग ही जंगलराज की रही है... वो बिहार के उद्योगों को बर्बाद करने के अलावा कुछ नहीं कर सकते। इनकी बातें सुनकर...एक ही बात मन में आती है.. अपने यहां कहा जाता है।
जे खेतवा उजड़लस...
उहे अब बोआई के बात करत बा!
मैं इनके पुराने कारनामों को फिर याद दिलाउंगा... यहां पड़ोस के रोहतास जिले में डालमिया नगर है। ये कस्बा अंग्रेज़ों के जमाने से ही एशिया का सबसे बड़ा इंडस्ट्रियल एरिया हुआ करता था। फिर कांग्रेस ने, लाल झंडा गैंग ने, आरजेडी के जंगलराज ने... डालमियानगर को तबाह कर दिया। यहां चीनी मिल थीं, सीमेंट फैक्ट्री थीं, कागज़ की फैक्ट्रियां थीं...सबकुछ था। लेकिन जंगलराज में मिलों में ताले लग गए... कारखाने बंद हो गए... हज़ारों लोग बेरोजगार हो गए। पलायन के लिए मजबूर हो गए। साथियों, आप मुझे बताइए... जिनका रिकॉर्ड फैक्ट्रियों में ताले लगाने का हो... वो क्या नए उद्योग लगा सकते हैं क्या ? लगा सकते हैं क्या? जब निवेशकों को लालटेन दिखेगा, लाल झंडा दिखेगा..तो क्या वो यहां अपने पैसा लगाएंगे? साथियों, निवेश और नौकरी..सिर्फ और सिर्फ .NDA ही ला सकती है। आप देखिए...बक्सर में इतना बड़ा बिजली का कारखाना बन गया है। रघुनाथपुर में सीमेंट कारखाना बन रहा है। दुनिया की बड़ी-बड़ी कंपनियों ने भी यहां निवेश करना शुरू कर दिया है। मेरे नौजवान सिथियों , मेरे माताओं- बहनों मेरे बड़े बुजुर्गों, भाइयों बहनों, बिहार के मेरे मालिकों मैं आपको भरोसा दिलाता हूं... आने वाले पांच सालों में यहां उद्योगों का तेज़ गति से विस्तार होगा।

साथियों,

NDA सरकार, विकास और विरासत, दोनों को महत्व देते हुए आगे बढ़ रही है। हमने भारत रत्न कर्पूरी ठाकुर जी की जन्मस्थली को विकसित किया। अब हमारी सरकार...बाबू वीर कुंवर सिंह जी की जन्मस्थली का कायाकल्प करने जा रही है। उनके जीवन से युवा पीढ़ी...प्रेरणा ले सके, इस दिशा में हम आगे बढ़ रहे हैं।

साथियों,

जिन व्यक्तित्वों ने अपना जीवन राष्ट्र की सेवा में लगा दिया... कांग्रेस-आरजेडी...कभी उन्हें सम्मान नहीं दे सकतीं। आप याद कीजिए... कांग्रेस ने हमेशा बाबा साहेब आंबेडकर का अपमान किया... क्योंकि उनकी लोकप्रियता कांग्रेस के शाही परिवार से बड़ी हो रही थी। फिर कांग्रेस ने, बाबू जगजीवन राम का अपमान किया... क्योंकि कांग्रेस के शाही परिवार की राजनीति को उनसे खतरा लगने लगा था। इतना ही नहीं कांग्रेस ने हमारे सीताराम केसरी जी को भी बेइज्जत किया। क्योंकि कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष पद पर उन्हें कोई और मंजूर नहीं था। साथियों, आपका उत्साह उमंग मेरे सिर आंखों पर लेकिन अभी मुझे अभी बहुत सभाएं करनी हैं , थोड़ी शांति रखो दोस्तों। आपका प्यार आपका उत्साह विजय की गारंटी है दोस्तों मुझे पता है। साथियो, RJD-कांग्रेस वाले हमारी आस्था का, हमारी धरोहर का अपमान करने में भी एक्सपर्ट हैं। आप याद करिए... RJD के लोगों ने प्रयागराज महाकुंभ को फालतू कहा था। अभी हमने देखा है कि कैसे कांग्रेस के नामदार ने हमारे छठ महापर्व को नौटंकी ड्रामा बताया..ड्रामा। हमारी आस्था को अपमानित करने वालों को बिहार कभी माफ नहीं करेगा। आप मुझे बताइए छठ महापर्व का अपमान आपको मंजूर है क्या। छठ महापर्व का अपमान करने वालों को सजा देंगे क्या कठोर से कठोर सजा देंगे क्या। ऐसी सजा दीजिए कि हिंदुस्तान में कभी कोई छठ महापर्व का अपमान ना कर पाए भाइयों।

साथियों,

बिहार की रफ्तार अब हमे रुकने नहीं देनी है। इस बार भोजपुर की हर सीट पर हर बूथ पर एनडीए के इन सभी उम्मीदवारों को विजयी बनाना है। इस बार छठ पूजा के लिए बड़ी संख्या में मेरे भाई-बहन अपने घर आए है उनसे आग्रह है कि अगर आपका मतदाता सूची में नाम है.. तो आप मतदान करने के बाद ही वापस लौटें और याद रखिएगा... पहले मतदान...फिर जलपान... पहले मतदान...फिर जलपान... पहले मतदान...फिर जलपान...मेरा जो सभी उम्मीदवार है मैदान में सभी से आग्रह है कि आगे आइये जरा... आप सब इतनी विशाल संख्या में हमारे इन साथियों को आशीर्वाद देने आए... मैं आपका बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूं।
भारत माता की... भारत माता की... भारत माता की...
मेरे सभी उम्मीदवार भाइयो.. दो चार कदम पीछे आइये मैं आपको मिलना चाहता हूं... मैं आपके पास मिलने के लिए आ रहा हूं... आप इनको विजयी बनाइये... भारत माता की... भारत माता की...

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Today, India is becoming the key growth engine of the global economy: PM Modi
December 06, 2025
India is brimming with confidence: PM
In a world of slowdown, mistrust and fragmentation, India brings growth, trust and acts as a bridge-builder: PM
Today, India is becoming the key growth engine of the global economy: PM
India's Nari Shakti is doing wonders, Our daughters are excelling in every field today: PM
Our pace is constant, Our direction is consistent, Our intent is always Nation First: PM
Every sector today is shedding the old colonial mindset and aiming for new achievements with pride: PM

आप सभी को नमस्कार।

यहां हिंदुस्तान टाइम्स समिट में देश-विदेश से अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित हैं। मैं आयोजकों और जितने साथियों ने अपने विचार रखें, आप सभी का अभिनंदन करता हूं। अभी शोभना जी ने दो बातें बताई, जिसको मैंने नोटिस किया, एक तो उन्होंने कहा कि मोदी जी पिछली बार आए थे, तो ये सुझाव दिया था। इस देश में मीडिया हाउस को काम बताने की हिम्मत कोई नहीं कर सकता। लेकिन मैंने की थी, और मेरे लिए खुशी की बात है कि शोभना जी और उनकी टीम ने बड़े चाव से इस काम को किया। और देश को, जब मैं अभी प्रदर्शनी देखके आया, मैं सबसे आग्रह करूंगा कि इसको जरूर देखिए। इन फोटोग्राफर साथियों ने इस, पल को ऐसे पकड़ा है कि पल को अमर बना दिया है। दूसरी बात उन्होंने कही और वो भी जरा मैं शब्दों को जैसे मैं समझ रहा हूं, उन्होंने कहा कि आप आगे भी, एक तो ये कह सकती थी, कि आप आगे भी देश की सेवा करते रहिए, लेकिन हिंदुस्तान टाइम्स ये कहे, आप आगे भी ऐसे ही सेवा करते रहिए, मैं इसके लिए भी विशेष रूप से आभार व्यक्त करता हूं।

साथियों,

इस बार समिट की थीम है- Transforming Tomorrow. मैं समझता हूं जिस हिंदुस्तान अखबार का 101 साल का इतिहास है, जिस अखबार पर महात्मा गांधी जी, मदन मोहन मालवीय जी, घनश्यामदास बिड़ला जी, ऐसे अनगिनत महापुरूषों का आशीर्वाद रहा, वो अखबार जब Transforming Tomorrow की चर्चा करता है, तो देश को ये भरोसा मिलता है कि भारत में हो रहा परिवर्तन केवल संभावनाओं की बात नहीं है, बल्कि ये बदलते हुए जीवन, बदलती हुई सोच और बदलती हुई दिशा की सच्ची गाथा है।

साथियों,

आज हमारे संविधान के मुख्य शिल्पी, डॉक्टर बाबा साहेब आंबेडकर जी का महापरिनिर्वाण दिवस भी है। मैं सभी भारतीयों की तरफ से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।

Friends,

आज हम उस मुकाम पर खड़े हैं, जब 21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुका है। इन 25 सालों में दुनिया ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। फाइनेंशियल क्राइसिस देखी हैं, ग्लोबल पेंडेमिक देखी हैं, टेक्नोलॉजी से जुड़े डिसरप्शन्स देखे हैं, हमने बिखरती हुई दुनिया भी देखी है, Wars भी देख रहे हैं। ये सारी स्थितियां किसी न किसी रूप में दुनिया को चैलेंज कर रही हैं। आज दुनिया अनिश्चितताओं से भरी हुई है। लेकिन अनिश्चितताओं से भरे इस दौर में हमारा भारत एक अलग ही लीग में दिख रहा है, भारत आत्मविश्वास से भरा हुआ है। जब दुनिया में slowdown की बात होती है, तब भारत growth की कहानी लिखता है। जब दुनिया में trust का crisis दिखता है, तब भारत trust का pillar बन रहा है। जब दुनिया fragmentation की तरफ जा रही है, तब भारत bridge-builder बन रहा है।

साथियों,

अभी कुछ दिन पहले भारत में Quarter-2 के जीडीपी फिगर्स आए हैं। Eight परसेंट से ज्यादा की ग्रोथ रेट हमारी प्रगति की नई गति का प्रतिबिंब है।

साथियों,

ये एक सिर्फ नंबर नहीं है, ये strong macro-economic signal है। ये संदेश है कि भारत आज ग्लोबल इकोनॉमी का ग्रोथ ड्राइवर बन रहा है। और हमारे ये आंकड़े तब हैं, जब ग्लोबल ग्रोथ 3 प्रतिशत के आसपास है। G-7 की इकोनमीज औसतन डेढ़ परसेंट के आसपास हैं, 1.5 परसेंट। इन परिस्थितियों में भारत high growth और low inflation का मॉडल बना हुआ है। एक समय था, जब हमारे देश में खास करके इकोनॉमिस्ट high Inflation को लेकर चिंता जताते थे। आज वही Inflation Low होने की बात करते हैं।

साथियों,

भारत की ये उपलब्धियां सामान्य बात नहीं है। ये सिर्फ आंकड़ों की बात नहीं है, ये एक फंडामेंटल चेंज है, जो बीते दशक में भारत लेकर आया है। ये फंडामेंटल चेंज रज़ीलियन्स का है, ये चेंज समस्याओं के समाधान की प्रवृत्ति का है, ये चेंज आशंकाओं के बादलों को हटाकर, आकांक्षाओं के विस्तार का है, और इसी वजह से आज का भारत खुद भी ट्रांसफॉर्म हो रहा है, और आने वाले कल को भी ट्रांसफॉर्म कर रहा है।

साथियों,

आज जब हम यहां transforming tomorrow की चर्चा कर रहे हैं, हमें ये भी समझना होगा कि ट्रांसफॉर्मेशन का जो विश्वास पैदा हुआ है, उसका आधार वर्तमान में हो रहे कार्यों की, आज हो रहे कार्यों की एक मजबूत नींव है। आज के Reform और आज की Performance, हमारे कल के Transformation का रास्ता बना रहे हैं। मैं आपको एक उदाहरण दूंगा कि हम किस सोच के साथ काम कर रहे हैं।

साथियों,

आप भी जानते हैं कि भारत के सामर्थ्य का एक बड़ा हिस्सा एक लंबे समय तक untapped रहा है। जब देश के इस untapped potential को ज्यादा से ज्यादा अवसर मिलेंगे, जब वो पूरी ऊर्जा के साथ, बिना किसी रुकावट के देश के विकास में भागीदार बनेंगे, तो देश का कायाकल्प होना तय है। आप सोचिए, हमारा पूर्वी भारत, हमारा नॉर्थ ईस्ट, हमारे गांव, हमारे टीयर टू और टीय़र थ्री सिटीज, हमारे देश की नारीशक्ति, भारत की इनोवेटिव यूथ पावर, भारत की सामुद्रिक शक्ति, ब्लू इकोनॉमी, भारत का स्पेस सेक्टर, कितना कुछ है, जिसके फुल पोटेंशियल का इस्तेमाल पहले के दशकों में हो ही नहीं पाया। अब आज भारत इन Untapped पोटेंशियल को Tap करने के विजन के साथ आगे बढ़ रहा है। आज पूर्वी भारत में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी और इंडस्ट्री पर अभूतपूर्व निवेश हो रहा है। आज हमारे गांव, हमारे छोटे शहर भी आधुनिक सुविधाओं से लैस हो रहे हैं। हमारे छोटे शहर, Startups और MSMEs के नए केंद्र बन रहे हैं। हमारे गाँवों में किसान FPO बनाकर सीधे market से जुड़ें, और कुछ तो FPO’s ग्लोबल मार्केट से जुड़ रहे हैं।

साथियों,

भारत की नारीशक्ति तो आज कमाल कर रही हैं। हमारी बेटियां आज हर फील्ड में छा रही हैं। ये ट्रांसफॉर्मेशन अब सिर्फ महिला सशक्तिकरण तक सीमित नहीं है, ये समाज की सोच और सामर्थ्य, दोनों को transform कर रहा है।

साथियों,

जब नए अवसर बनते हैं, जब रुकावटें हटती हैं, तो आसमान में उड़ने के लिए नए पंख भी लग जाते हैं। इसका एक उदाहरण भारत का स्पेस सेक्टर भी है। पहले स्पेस सेक्टर सरकारी नियंत्रण में ही था। लेकिन हमने स्पेस सेक्टर में रिफॉर्म किया, उसे प्राइवेट सेक्टर के लिए Open किया, और इसके नतीजे आज देश देख रहा है। अभी 10-11 दिन पहले मैंने हैदराबाद में Skyroot के Infinity Campus का उद्घाटन किया है। Skyroot भारत की प्राइवेट स्पेस कंपनी है। ये कंपनी हर महीने एक रॉकेट बनाने की क्षमता पर काम कर रही है। ये कंपनी, flight-ready विक्रम-वन बना रही है। सरकार ने प्लेटफॉर्म दिया, और भारत का नौजवान उस पर नया भविष्य बना रहा है, और यही तो असली ट्रांसफॉर्मेशन है।

साथियों,

भारत में आए एक और बदलाव की चर्चा मैं यहां करना ज़रूरी समझता हूं। एक समय था, जब भारत में रिफॉर्म्स, रिएक्शनरी होते थे। यानि बड़े निर्णयों के पीछे या तो कोई राजनीतिक स्वार्थ होता था या फिर किसी क्राइसिस को मैनेज करना होता था। लेकिन आज नेशनल गोल्स को देखते हुए रिफॉर्म्स होते हैं, टारगेट तय है। आप देखिए, देश के हर सेक्टर में कुछ ना कुछ बेहतर हो रहा है, हमारी गति Constant है, हमारी Direction Consistent है, और हमारा intent, Nation First का है। 2025 का तो ये पूरा साल ऐसे ही रिफॉर्म्स का साल रहा है। सबसे बड़ा रिफॉर्म नेक्स्ट जेनरेशन जीएसटी का था। और इन रिफॉर्म्स का असर क्या हुआ, वो सारे देश ने देखा है। इसी साल डायरेक्ट टैक्स सिस्टम में भी बहुत बड़ा रिफॉर्म हुआ है। 12 लाख रुपए तक की इनकम पर ज़ीरो टैक्स, ये एक ऐसा कदम रहा, जिसके बारे में एक दशक पहले तक सोचना भी असंभव था।

साथियों,

Reform के इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए, अभी तीन-चार दिन पहले ही Small Company की डेफिनीशन में बदलाव किया गया है। इससे हजारों कंपनियाँ अब आसान नियमों, तेज़ प्रक्रियाओं और बेहतर सुविधाओं के दायरे में आ गई हैं। हमने करीब 200 प्रोडक्ट कैटगरीज़ को mandatory क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर से बाहर भी कर दिया गया है।

साथियों,

आज के भारत की ये यात्रा, सिर्फ विकास की नहीं है। ये सोच में बदलाव की भी यात्रा है, ये मनोवैज्ञानिक पुनर्जागरण, साइकोलॉजिकल रेनसां की भी यात्रा है। आप भी जानते हैं, कोई भी देश बिना आत्मविश्वास के आगे नहीं बढ़ सकता। दुर्भाग्य से लंबी गुलामी ने भारत के इसी आत्मविश्वास को हिला दिया था। और इसकी वजह थी, गुलामी की मानसिकता। गुलामी की ये मानसिकता, विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति में एक बहुत बड़ी रुकावट है। और इसलिए, आज का भारत गुलामी की मानसिकता से मुक्ति पाने के लिए काम कर रहा है।

साथियों,

अंग्रेज़ों को अच्छी तरह से पता था कि भारत पर लंबे समय तक राज करना है, तो उन्हें भारतीयों से उनके आत्मविश्वास को छीनना होगा, भारतीयों में हीन भावना का संचार करना होगा। और उस दौर में अंग्रेजों ने यही किया भी। इसलिए, भारतीय पारिवारिक संरचना को दकियानूसी बताया गया, भारतीय पोशाक को Unprofessional करार दिया गया, भारतीय त्योहार-संस्कृति को Irrational कहा गया, योग-आयुर्वेद को Unscientific बता दिया गया, भारतीय अविष्कारों का उपहास उड़ाया गया और ये बातें कई-कई दशकों तक लगातार दोहराई गई, पीढ़ी दर पीढ़ी ये चलता गया, वही पढ़ा, वही पढ़ाया गया। और ऐसे ही भारतीयों का आत्मविश्वास चकनाचूर हो गया।

साथियों,

गुलामी की इस मानसिकता का कितना व्यापक असर हुआ है, मैं इसके कुछ उदाहरण आपको देना चाहता हूं। आज भारत, दुनिया की सबसे तेज़ी से ग्रो करने वाली मेजर इकॉनॉमी है, कोई भारत को ग्लोबल ग्रोथ इंजन बताता है, कोई, Global powerhouse कहता है, एक से बढ़कर एक बातें आज हो रही हैं।

लेकिन साथियों,

आज भारत की जो तेज़ ग्रोथ हो रही है, क्या कहीं पर आपने पढ़ा? क्या कहीं पर आपने सुना? इसको कोई, हिंदू रेट ऑफ ग्रोथ कहता है क्या? दुनिया की तेज इकॉनमी, तेज ग्रोथ, कोई कहता है क्या? हिंदू रेट ऑफ ग्रोथ कब कहा गया? जब भारत, दो-तीन परसेंट की ग्रोथ के लिए तरस गया था। आपको क्या लगता है, किसी देश की इकोनॉमिक ग्रोथ को उसमें रहने वाले लोगों की आस्था से जोड़ना, उनकी पहचान से जोड़ना, क्या ये अनायास ही हुआ होगा क्या? जी नहीं, ये गुलामी की मानसिकता का प्रतिबिंब था। एक पूरे समाज, एक पूरी परंपरा को, अन-प्रोडक्टिविटी का, गरीबी का पर्याय बना दिया गया। यानी ये सिद्ध करने का प्रयास किया गया कि, भारत की धीमी विकास दर का कारण, हमारी हिंदू सभ्यता और हिंदू संस्कृति है। और हद देखिए, आज जो तथाकथित बुद्धिजीवी हर चीज में, हर बात में सांप्रदायिकता खोजते रहते हैं, उनको हिंदू रेट ऑफ ग्रोथ में सांप्रदायिकता नज़र नहीं आई। ये टर्म, उनके दौर में किताबों का, रिसर्च पेपर्स का हिस्सा बना दिया गया।

साथियों,

गुलामी की मानसिकता ने भारत में मैन्युफेक्चरिंग इकोसिस्टम को कैसे तबाह कर दिया, और हम इसको कैसे रिवाइव कर रहे हैं, मैं इसके भी कुछ उदाहरण दूंगा। भारत गुलामी के कालखंड में भी अस्त्र-शस्त्र का एक बड़ा निर्माता था। हमारे यहां ऑर्डिनेंस फैक्ट्रीज़ का एक सशक्त नेटवर्क था। भारत से हथियार निर्यात होते थे। विश्व युद्धों में भी भारत में बने हथियारों का बोल-बाला था। लेकिन आज़ादी के बाद, हमारा डिफेंस मैन्युफेक्चरिंग इकोसिस्टम तबाह कर दिया गया। गुलामी की मानसिकता ऐसी हावी हुई कि सरकार में बैठे लोग भारत में बने हथियारों को कमजोर आंकने लगे, और इस मानसिकता ने भारत को दुनिया के सबसे बड़े डिफेंस importers के रूप में से एक बना दिया।

साथियों,

गुलामी की मानसिकता ने शिप बिल्डिंग इंडस्ट्री के साथ भी यही किया। भारत सदियों तक शिप बिल्डिंग का एक बड़ा सेंटर था। यहां तक कि 5-6 दशक पहले तक, यानी 50-60 साल पहले, भारत का फोर्टी परसेंट ट्रेड, भारतीय जहाजों पर होता था। लेकिन गुलामी की मानसिकता ने विदेशी जहाज़ों को प्राथमिकता देनी शुरु की। नतीजा सबके सामने है, जो देश कभी समुद्री ताकत था, वो अपने Ninety five परसेंट व्यापार के लिए विदेशी जहाज़ों पर निर्भर हो गया है। और इस वजह से आज भारत हर साल करीब 75 बिलियन डॉलर, यानी लगभग 6 लाख करोड़ रुपए विदेशी शिपिंग कंपनियों को दे रहा है।

साथियों,

शिप बिल्डिंग हो, डिफेंस मैन्यूफैक्चरिंग हो, आज हर सेक्टर में गुलामी की मानसिकता को पीछे छोड़कर नए गौरव को हासिल करने का प्रयास किया जा रहा है।

साथियों,

गुलामी की मानसिकता ने एक बहुत बड़ा नुकसान, भारत में गवर्नेंस की अप्रोच को भी किया है। लंबे समय तक सरकारी सिस्टम का अपने नागरिकों पर अविश्वास रहा। आपको याद होगा, पहले अपने ही डॉक्यूमेंट्स को किसी सरकारी अधिकारी से अटेस्ट कराना पड़ता था। जब तक वो ठप्पा नहीं मारता है, सब झूठ माना जाता था। आपका परिश्रम किया हुआ सर्टिफिकेट। हमने ये अविश्वास का भाव तोड़ा और सेल्फ एटेस्टेशन को ही पर्याप्त माना। मेरे देश का नागरिक कहता है कि भई ये मैं कह रहा हूं, मैं उस पर भरोसा करता हूं।

साथियों,

हमारे देश में ऐसे-ऐसे प्रावधान चल रहे थे, जहां ज़रा-जरा सी गलतियों को भी गंभीर अपराध माना जाता था। हम जन-विश्वास कानून लेकर आए, और ऐसे सैकड़ों प्रावधानों को डी-क्रिमिनलाइज किया है।

साथियों,

पहले बैंक से हजार रुपए का भी लोन लेना होता था, तो बैंक गारंटी मांगता था, क्योंकि अविश्वास बहुत अधिक था। हमने मुद्रा योजना से अविश्वास के इस कुचक्र को तोड़ा। इसके तहत अभी तक 37 lakh crore, 37 लाख करोड़ रुपए की गारंटी फ्री लोन हम दे चुके हैं देशवासियों को। इस पैसे से, उन परिवारों के नौजवानों को भी आंत्रप्रन्योर बनने का विश्वास मिला है। आज रेहड़ी-पटरी वालों को भी, ठेले वाले को भी बिना गारंटी बैंक से पैसा दिया जा रहा है।

साथियों,

हमारे देश में हमेशा से ये माना गया कि सरकार को अगर कुछ दे दिया, तो फिर वहां तो वन वे ट्रैफिक है, एक बार दिया तो दिया, फिर वापस नहीं आता है, गया, गया, यही सबका अनुभव है। लेकिन जब सरकार और जनता के बीच विश्वास मजबूत होता है, तो काम कैसे होता है? अगर कल अच्छी करनी है ना, तो मन आज अच्छा करना पड़ता है। अगर मन अच्छा है तो कल भी अच्छा होता है। और इसलिए हम एक और अभियान लेकर आए, आपको सुनकर के ताज्जुब होगा और अभी अखबारों में उसकी, अखबारों वालों की नजर नहीं गई है उस पर, मुझे पता नहीं जाएगी की नहीं जाएगी, आज के बाद हो सकता है चली जाए।

आपको ये जानकर हैरानी होगी कि आज देश के बैंकों में, हमारे ही देश के नागरिकों का 78 thousand crore रुपया, 78 हजार करोड़ रुपए Unclaimed पड़ा है बैंको में, पता नहीं कौन है, किसका है, कहां है। इस पैसे को कोई पूछने वाला नहीं है। इसी तरह इन्श्योरेंश कंपनियों के पास करीब 14 हजार करोड़ रुपए पड़े हैं। म्यूचुअल फंड कंपनियों के पास करीब 3 हजार करोड़ रुपए पड़े हैं। 9 हजार करोड़ रुपए डिविडेंड का पड़ा है। और ये सब Unclaimed पड़ा हुआ है, कोई मालिक नहीं उसका। ये पैसा, गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों का है, और इसलिए, जिसके हैं वो तो भूल चुका है। हमारी सरकार अब उनको ढूंढ रही है देशभर में, अरे भई बताओ, तुम्हारा तो पैसा नहीं था, तुम्हारे मां बाप का तो नहीं था, कोई छोड़कर तो नहीं चला गया, हम जा रहे हैं। हमारी सरकार उसके हकदार तक पहुंचने में जुटी है। और इसके लिए सरकार ने स्पेशल कैंप लगाना शुरू किया है, लोगों को समझा रहे हैं, कि भई देखिए कोई है तो अता पता। आपके पैसे कहीं हैं क्या, गए हैं क्या? अब तक करीब 500 districts में हम ऐसे कैंप लगाकर हजारों करोड़ रुपए असली हकदारों को दे चुके हैं जी। पैसे पड़े थे, कोई पूछने वाला नहीं था, लेकिन ये मोदी है, ढूंढ रहा है, अरे यार तेरा है ले जा।

साथियों,

ये सिर्फ asset की वापसी का मामला नहीं है, ये विश्वास का मामला है। ये जनता के विश्वास को निरंतर हासिल करने की प्रतिबद्धता है और जनता का विश्वास, यही हमारी सबसे बड़ी पूंजी है। अगर गुलामी की मानसिकता होती तो सरकारी मानसी साहबी होता और ऐसे अभियान कभी नहीं चलते हैं।

साथियों,

हमें अपने देश को पूरी तरह से, हर क्षेत्र में गुलामी की मानसिकता से पूर्ण रूप से मुक्त करना है। अभी कुछ दिन पहले मैंने देश से एक अपील की है। मैं आने वाले 10 साल का एक टाइम-फ्रेम लेकर, देशवासियों को मेरे साथ, मेरी बातों को ये कुछ करने के लिए प्यार से आग्रह कर रहा हूं, हाथ जोड़कर विनती कर रहा हूं। 140 करोड़ देशवसियों की मदद के बिना ये मैं कर नहीं पाऊंगा, और इसलिए मैं देशवासियों से बार-बार हाथ जोड़कर कह रहा हूं, और 10 साल के इस टाइम फ्रैम में मैं क्या मांग रहा हूं? मैकाले की जिस नीति ने भारत में मानसिक गुलामी के बीज बोए थे, उसको 2035 में 200 साल पूरे हो रहे हैं, Two hundred year हो रहे हैं। यानी 10 साल बाकी हैं। और इसलिए, इन्हीं दस वर्षों में हम सभी को मिलकर के, अपने देश को गुलामी की मानसिकता से मुक्त करके रहना चाहिए।

साथियों,

मैं अक्सर कहता हूं, हम लीक पकड़कर चलने वाले लोग नहीं हैं। बेहतर कल के लिए, हमें अपनी लकीर बड़ी करनी ही होगी। हमें देश की भविष्य की आवश्यकताओं को समझते हुए, वर्तमान में उसके हल तलाशने होंगे। आजकल आप देखते हैं कि मैं मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान पर लगातार चर्चा करता हूं। शोभना जी ने भी अपने भाषण में उसका उल्लेख किया। अगर ऐसे अभियान 4-5 दशक पहले शुरू हो गए होते, तो आज भारत की तस्वीर कुछ और होती। लेकिन तब जो सरकारें थीं उनकी प्राथमिकताएं कुछ और थीं। आपको वो सेमीकंडक्टर वाला किस्सा भी पता ही है, करीब 50-60 साल पहले, 5-6 दशक पहले एक कंपनी, भारत में सेमीकंडक्टर प्लांट लगाने के लिए आई थी, लेकिन यहां उसको तवज्जो नहीं दी गई, और देश सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग में इतना पिछड़ गया।

साथियों,

यही हाल एनर्जी सेक्टर की भी है। आज भारत हर साल करीब-करीब 125 लाख करोड़ रुपए के पेट्रोल-डीजल-गैस का इंपोर्ट करता है, 125 लाख करोड़ रुपया। हमारे देश में सूर्य भगवान की इतनी बड़ी कृपा है, लेकिन फिर भी 2014 तक भारत में सोलर एनर्जी जनरेशन कपैसिटी सिर्फ 3 गीगावॉट थी, 3 गीगावॉट थी। 2014 तक की मैं बात कर रहा हूं, जब तक की आपने मुझे यहां लाकर के बिठाया नहीं। 3 गीगावॉट, पिछले 10 वर्षों में अब ये बढ़कर 130 गीगावॉट के आसपास पहुंच चुकी है। और इसमें भी भारत ने twenty two गीगावॉट कैपेसिटी, सिर्फ और सिर्फ rooftop solar से ही जोड़ी है। 22 गीगावाट एनर्जी रूफटॉप सोलर से।

साथियों,

पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना ने, एनर्जी सिक्योरिटी के इस अभियान में देश के लोगों को सीधी भागीदारी करने का मौका दे दिया है। मैं काशी का सांसद हूं, प्रधानमंत्री के नाते जो काम है, लेकिन सांसद के नाते भी कुछ काम करने होते हैं। मैं जरा काशी के सांसद के नाते आपको कुछ बताना चाहता हूं। और आपके हिंदी अखबार की तो ताकत है, तो उसको तो जरूर काम आएगा। काशी में 26 हजार से ज्यादा घरों में पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के सोलर प्लांट लगे हैं। इससे हर रोज, डेली तीन लाख यूनिट से अधिक बिजली पैदा हो रही है, और लोगों के करीब पांच करोड़ रुपए हर महीने बच रहे हैं। यानी साल भर के साठ करोड़ रुपये।

साथियों,

इतनी सोलर पावर बनने से, हर साल करीब नब्बे हज़ार, ninety thousand मीट्रिक टन कार्बन एमिशन कम हो रहा है। इतने कार्बन एमिशन को खपाने के लिए, हमें चालीस लाख से ज्यादा पेड़ लगाने पड़ते। और मैं फिर कहूंगा, ये जो मैंने आंकडे दिए हैं ना, ये सिर्फ काशी के हैं, बनारस के हैं, मैं देश की बात नहीं बता रहा हूं आपको। आप कल्पना कर सकते हैं कि, पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, ये देश को कितना बड़ा फायदा हो रहा है। आज की एक योजना, भविष्य को Transform करने की कितनी ताकत रखती है, ये उसका Example है।

वैसे साथियों,

अभी आपने मोबाइल मैन्यूफैक्चरिंग के भी आंकड़े देखे होंगे। 2014 से पहले तक हम अपनी ज़रूरत के 75 परसेंट मोबाइल फोन इंपोर्ट करते थे, 75 परसेंट। और अब, भारत का मोबाइल फोन इंपोर्ट लगभग ज़ीरो हो गया है। अब हम बहुत बड़े मोबाइल फोन एक्सपोर्टर बन रहे हैं। 2014 के बाद हमने एक reform किया, देश ने Perform किया और उसके Transformative नतीजे आज दुनिया देख रही है।

साथियों,

Transforming tomorrow की ये यात्रा, ऐसी ही अनेक योजनाओं, अनेक नीतियों, अनेक निर्णयों, जनआकांक्षाओं और जनभागीदारी की यात्रा है। ये निरंतरता की यात्रा है। ये सिर्फ एक समिट की चर्चा तक सीमित नहीं है, भारत के लिए तो ये राष्ट्रीय संकल्प है। इस संकल्प में सबका साथ जरूरी है, सबका प्रयास जरूरी है। सामूहिक प्रयास हमें परिवर्तन की इस ऊंचाई को छूने के लिए अवसर देंगे ही देंगे।

साथियों,

एक बार फिर, मैं शोभना जी का, हिन्दुस्तान टाइम्स का बहुत आभारी हूं, कि आपने मुझे अवसर दिया आपके बीच आने का और जो बातें कभी-कभी बताई उसको आपने किया और मैं तो मानता हूं शायद देश के फोटोग्राफरों के लिए एक नई ताकत बनेगा ये। इसी प्रकार से अनेक नए कार्यक्रम भी आप आगे के लिए सोच सकते हैं। मेरी मदद लगे तो जरूर मुझे बताना, आईडिया देने का मैं कोई रॉयल्टी नहीं लेता हूं। मुफ्त का कारोबार है और मारवाड़ी परिवार है, तो मौका छोड़ेगा ही नहीं। बहुत-बहुत धन्यवाद आप सबका, नमस्कार।