حکومت 2022 تک بے گھر افراد کو مکانات فراہم کرانے کے لئے پابند عہد ہے: وزیر اعظم مودی
پلوامہ حملے کے قصورواروں کو اس کی بہت بھاری قیمت چکانی ہوگی: وزیر اعظم مودی
یوتمال میں آغاز کیے گئے پروجیکٹ روزگار کے نئے مواقع پیدا کرنے میں مدد فراہم کریں گے اور ناداروں کو بااختیار بنائیں گے: وزیر اعظم

भारत माता की जय, भारत माता की जय!

महाराष्‍ट्र के राज्‍यपाल श्रीमान विद्यासागर राव, राज्‍य के लोकप्रिय एवं यशस्‍वी युवा मुख्‍यमंत्री श्रीमान देवेंद्र फडणवीस, केंद्र में मंत्रिपरिषद के मेरे साथी श्री नीतिन जी, श्रीमान हंसराज अहिर जी, राज्‍य सरकार के मंत्री श्रीमान मदन येरवारजी, मंच पर उपस्थित अन्‍य महानुभाव और विशाल संख्‍या में हमें आशीर्वाद देने के लिए आए हुए भाईयों और बहनों, और विशेष रूप से बहनों।

पांडरकोडा की इस भूमि से मैं संत सर्वलाल महाराज, मुख्‍सा जी महाराज जैसे अनेक संतों और पुरूषों को नमन करता हूं। कुछ महीने पहले इस क्षेत्र के आदिवासी युवाओं ने एवरेस्‍ट पर विजय प्राप्‍त की थी। दिल्‍ली में मुझे इन युवा साथियों से मिलने का अवसर भी मिला था। उनके परिश्रम, उनके सपनों के बारे में जानकार मुझे यवतमाल चंद्रपुर की ऊर्जा का सुखद अनुभव हुआ था। यहां की कोलाम जनजाति का स्‍वच्‍छता के प्रति जो आग्रह है उसका जिक्र मैंने अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में भी किया था। चंद्रपुर के युवाओं ने जिस तरह वहां के किले को साफ किया था, उससे देश के अनेक युवाओं को ऐसे ही स्‍वच्‍छता अभियान की प्रेरणा मिली है।

तब मैंने चाय पर चर्चा की थी और देश की समस्‍याओं को दूर करने पर निरंतर काम करने का वादा किया था। बीते साढ़े चार वर्ष से पूरी ईमानदारी के साथ आपसे किया यह वादा निभाने का मैं प्रयास कर रहा हूं। आप लोगों को संतोष है? मैं जो काम कर रहा हूं उससे संतोष है? मैं जो मेहनत कर रहा हूं उससे संतोष है? मैंने जो वादा किया उसके लिए जी-जान से जुटा हूं, उसके लिए खुश हैं? आपका आशीर्वाद है, आपका आशीर्वाद बना रहेगा?

आज भी पांडरकोडा के यवतमाल के विकास से जुड़ी सैकड़ों करोड़ की परियोजनाओं का शिलान्‍यास और लोकार्पण किया गया है। इनमें गरीबों के घर से जुड़े, सड़कों से जुड़े, रेलवे से जुड़े, रोजगार और स्‍वरोजगार से जुड़े, शिक्षा से जुड़े अनेक प्रोजेक्‍ट्स हैं।

भाईयों और बहनों, विकास की इन सभी परियोजनाओं के बीच मैं यह भी जानता हूं कि हम सभी किस गहरी वेदना से गुजर रहे हैं। पुलवामा में जो कुछ भी हुआ, उसको लेकर आतंकवादियों के उस कृतय को लेकर आपके आक्रोश को मैं समझ रहा हूं। यहां महाराष्‍ट्र के भी दो वीर सपूतों ने देश की सेवा करते हुए पुलवामा में अपने प्राणों की आहूति दी है। जिन परिवारों ने अपने लाल को खोया है, उनकी पीढ़ा मैं भलिभांति अनुभव कर सकता हूं। हम सभी की संवेदनाएं उनके साथ हैं।

भाईयों और बहनों, मैंने कल भी कहा है और आज भी दोहरा रहा हूं इन शहीदों का बलिदान व्‍यर्थ नहीं जाएगा। आतंकी संगठनों ने आतंक के सरपरस्‍तों ने जो गुनाह किया है वो चाहे जितना छिपने की कोशिश करे, उन्‍हें सजा जरूर दी जाएगी। हम अपने सैनिकों, अपने सुरक्षाबलों के पराक्रम पर गर्व भी करते हैं, भरोसा भी करते हैं। सैनिकों में और विशेषकर सीआरपीएफ में जो गुस्‍सा है वो भी देश समझ रहा है और इसलिए सुरक्षाबलों को खुली छूट दे दी गई है।

सा‍थियों, एक ऐसा देश जो भारत के बंटवारे के बाद अस्तित्‍व में आया, जिसके यहां आतंकवाद को पनाह दी जाती है। जो आज दीवालिया होने की कगार पर खड़ा है, वो आतंक का दूसरा नाम बन चुका है। मैं देश को फिर भरोसा दिलाता हूं, धैर्य रखिए, अपने जवानों पर भरोसा रखिए, पुलवामा के गुनाहगारों को सजा कैसे दी जाएगी, कहां दी जाएगी, कब दी जाएगी, कौन देगा, किस प्रकार की सजा देगा, यह सब हमारे जवान तय करेंगे।

साथियों, आज अगर हम पूरी सुरक्षा के साथ अपने सपनों को पूरा कर पा रहे हैं, देश का विकास कर पा रहे हैं तो उसके पीछे अनगिनत बलिदान है। मैं पुलवामा के शहीदों को एक बार फिर नमन करता हूं।

साथियों, देश की सुरक्षा के साथ ही देश की समृद्धि के लिए भी हमारी सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इसलिए विकास की पंचधारा यानी बच्‍चों की पढ़ाई, युवा को कमाई, बुजुर्गों को दवाई, किसानों को सिंचाई और जन-जन की सुनवाई पर बल दिया जा रहा है। आज के लोकार्पण और शिलान्‍यास इसी सोच का विस्‍तार है।

भाईयों और बहनों, किसी भी क्षेत्र के विकास में connectivity का बहुत बड़ा रोल होता है। यवतमाल की प्रगति भी यहां की सड़कों और रेलवे से सुनिश्चित होनी है। इसी भावना के साथ थोड़ी देर पहले सड़क से जुड़े करीब 500 करोड़ रुपये के प्रोजेक्‍ट का शिलान्‍यास किया गया है। इसके अलावा पुणे अजनी पुणे हमसफर एक्‍सप्रेस को भी हरी झंडी दिखाई गई है। यह ट्रेन द्रोणी, मनमाड, भुसावल और बड़नेरा होते हुए जाएगी। इससे इन सभी जगह के लोगों को बहुत सुविधा होने वाली है।

साथियों, सड़क और रेल सुविधा के अलावा यवतमाल के साढ़े 14 हजार से अधिक गरीब परिवारों ने आज अपने नये घर में प्रवेश भी किया है। जिनकों भी यह पक्‍के घर मिले हैं उनको मैं बहुत-बहुत शुभकमानाएं देता हूं। अब पक्‍के घर हैं तो सपने भी पक्‍के होंगे।

साथियों, केंद्र सरकार ने 2022 तक हर बेघर को पक्‍का घर देने का लक्ष्‍य है और यह सरकार तेजी से अपने लक्ष्‍य की तरफ बढ़ रही है। जिन परिवारों को अब तक घर नहीं मिला है वे भी इस बात पर भरोसा करे यह मेरा वचन है 2022 के पहले हर परिवार को पक्‍का घर होगा, होगा, होगा। अब तक देश के गांव और शहरों में डेढ़ करोड़ गरीबों के घर बनाए जा चुके हैं। पिछले चार वर्षों में महाराष्‍ट्र में भी लगभग ढाई लाख घर बने हैं। फडणवीस जी की सरकार ने भी 50 हजार से ज्‍यादा घर बनावाए हैं। यहां यवतमाल में भी लगभग 12 हजार घरों पर काम चल रहा है।

साथियों, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत जो घर बन रहे हैं, यह गरीबों को आत्‍मविश्‍वास तो दे ही रहे हैं साथ में हमारी बहनें के सशक्‍तीकरण का भी साधन है। जिस प्रकार यहां की हमारी परंपराओं में बहनों को प्राथमिकता दी जाती है। माताएं परिवार और समाज को दिशा दिखाती है, उसी प्रकार प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मिलने वाले घरों की रजिस्‍ट्री घर की महिला के नाम पर हो इसे प्राथमिकता दी जा रही है।

भाईयों और बहनों, महिला सशक्‍तीकरण को लेकर यवतमाल देश के अग्रणी जिलों में है। यवतमाल सहित पूरे महाराष्‍ट्र में महिला बचतगठ का एक बहुत बड़ा नेटवर्क है। हमारी सरकार ने महिला बचतगठ को विस्‍तार भी दिया है और उनको शक्ति भी दी है। इन समूहों को ग्रामीण अर्थव्‍यवस्‍था का आधार बनाने के लिए पहले की अपेक्षा ढाई गुना ज्‍यादा पैसा उपलब्‍ध कराया गया है।

भाईयों और बहनों, मुझे याद है कि पिछली बार में जब मैं यहां आया था तो शेतकारी समाज से लम्‍बा संवाद किया। आज जब दोबारा आपके बीच आया हूं तो यह जानकारी भी देना चाहता हूं कि हाल के बजट में क्षेत्रीय समाज के साथ-साथ जो हमारे घुमंतु समाज के लोग हैं, बंजारा-वगैरह जो समाज है, हमारा श्रमिक समाज है, हमारा खेत-मजदूर है इन सभी के लिए भी बहुत बड़ी योजनाओं का ऐलान किया गया है।

साथियों, पीएम किसान सम्‍मान निधि के नाम से केंद्र सरकार ने किसानों की सीधी-आर्थिक मदद करने की योजना बनाई है। इस योजना के तहत ऐसे किसान जिनके पास पांच एकड़ से कम जमीन है, उन सभी किसानों के बैंक खातों में हर वर्ष छह हजार रुपये दिल्‍ली में से भारत सरकार की तरफ से जमा किए जाएंगे। महाराष्‍ट्र के लगभग एक करोड़ 25 लाख किसान परिवारों को इससे सीधा लाभ मिलेगा। यह पैसा दो-दो हजार रुपयों की तीन किस्‍त में सीधा आपके खाते में जमा हो जाएगा और एक बार नहीं यह हर वर्ष दिया जाएगा।

साथियों, इस बजट में सरकार ने घुमंतु समुदायों के लिए भी एक बहुत बड़ा फैसला किया है। यवतमाल जिले में बहुत बड़ी संख्‍या में ऐसे परिवार है जो अपनी जीवन शैली और अन्‍य वजहों से एक जगह पर नहीं रहते। इतिहास में पहली बार इस समुदाय का ख्‍याल सरकार ने किया है। अब इन लोगों के लिए सरकार ने Welfare Development Board बनाने का फैसला किया है ताकि सरकार के विकास के कार्यों का लाभ इन तक तेजी से पहुंचे।

साथियों, सड़कों और घरों के निर्माण से जुड़े घरों में काम करने वाले रेह्डी-ठेले वाले असंगठित क्षेत्र के ऐसे असंगठित क्षेत्र के ऐसे करोड़ों लोगों के बीच पहली बार एक बहुत बड़ी योजना हमने बनाई है। प्रधानमंत्री श्रमयोगी मानदेय योजना से 15 हजार रुपये महीना तक कमाने वाले कामगार साथियों को 60 वर्ष के बाद तीन हजार रुपये की नियमित पेंशन सुनिश्चित हो पाएगी। इसके लिए औसतन 100 रुपये का अंशदान हर महीने देना होगा। इतना ही पैसा केंद्र सरकार इन सा‍थियों के पेंशन खाते में हर महीने जमा करने वाली है।

भाईयों और बहनों, सामाजिक सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध हमारी सरकार ने आदिवासी समाज के कल्‍याण से जुड़े बजट में भी लगभग 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। इससे यवतमाल सहित महाराष्‍ट्र के अनेक जिलों को लाभ होने वाला है। यह फैसला आदिवासी भाई-बहनों के लिए भाजपा सरकार की निष्‍ठा और उसकी प्रतिबद्धता का सबूत है।

साथियों, जमीन हो, जंगल की पैदावर हो, पढ़ाई-लिखाई हो, खेल से जुड़ी प्रतिभा हो, हर स्‍तर पर आदिवासी के कल्‍याण के लिए व्‍यापक प्रयास हो रहे हैं। जन-जन से लकर वन-धन योजना तक जन समुदाय, जनजातीय समुदाय के बहन-भाईयों के लिए काम किया जा रहा है। जनधन योजना के तहत बैंकों में लगभग हर परिवार के खाते खुलवाये गए हैं, जिससे सरकार की हर मदद आपके खाते में सीधी मिलनी सुनिश्चित हुई है। अब कोई भी बिचौलिया आपके पैसे पर डाका नहीं डाल सकता है। इसी तरह वन-धन योजना के माध्‍यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि जंगल से जो आप उपज लेते हैं, उसकी बेहतर कीमत आपको मिल पाएं। इसके लिए वन-धन केंद्र बनाए जा रहे हैं। सरकार का जोर वन उपज के value addition पर है, मूल्‍य वृद्धि पर है। जब value addition होता है, मूल्‍य वृद्धि होता है तो ऊपज की ज्‍यादा कीमत मिलती है, जैसे कच्‍ची ईमली की कीमत कम होती है। लेकिन अगर उसको पैकेज में बेचा जाए या फिर चटनी बनाकर बेचा जाए तो ज्‍यादा कीमत मिलती है।

साथियों, आप यह भी जानते हैं कि वन ऊपज पर जो समर्थन मूल्‍य सरकार देती है उसमें बीते साढ़े चार वर्ष में तीन बार बढ़ोतरी की गई है। दिसंबर में ही 23 ऊपजों का समर्थन मूल्‍य बढ़ाया गया है। इतना ही नहीं, इस दौरान सरकार द्वारा एमएसपी के दायरे में आने वाली फसलों को बढ़ाया गया है। जहां साढ़े चार वर्ष पहले जंगल से मिलने वाली 10 ऊपजों पर एमएसपी मिलता था, अब वो संख्‍या बढ़ाकर करीब-करीब 50 हो चुकी है।

साथियों, भाजपा की सरकार ने आदिवासियों की कमाई को ही ध्‍यान में रखते हुए बांस से जुड़े एक कानून में बहुत बड़ा बदलाव भी किया है। अब आप अपने खेत में भी बांस उगा सकते हैं और उसको बेचकर अपनी आय बढ़ा सकते है। पहले ऐसा संभव नहीं था, क्‍योंकि बांस को पेड़ की श्रेणी में रखा गया था। सिर्फ बांस की खेती कर पाए इतना ही काम नहीं किया है, इसको व्‍यापक बाजार मिले इसके लिए भी काम किया जा रहा है।

साथियों, आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा से लेकर कौशल और रोजगार तक के अनेक प्रयास किए जा रहे हैं। हमने जनजातीय क्षेत्रों में एकलव्‍य मॉडल स्‍कूल खोलने का व्‍यापक अभियान चलाया है। इसके तहत 20 हजार से अधिक की आदिवासी आबादी वाले क्षेत्रों में स्‍कूल खोले जा रहे हैं। आज ही यहां पर एकलव्‍य मॉडल स्‍कूल के नये कैंपस का लोकार्पण भी किया गया है। इस नये कैंपस में चार सौ से अधिक युवा साथी अपने भविष्‍य को संवार पाएंगे।

साथियों, आदिवासी समाज के स्‍वास्‍थ्‍य को लेकर भी व्‍यापक प्रयास देश में चल रहे हैं। आज यवतमाल के लिए तीन संस्‍थानों का लोकार्पण और शिलान्‍यास किया गया है। हमारे जनजातीय इलाकों में sickle cell की एक बीमारी बहुत सामान्‍य है। विशेषतौर पर विदर्भ में इस बीमारी की बहुत अधिक समस्‍या है। हम बीमारी के इलाज के लिए बेहतर चिकित्‍सा सुविधा हो, रिसर्च की सुविधा हो, इसके लिए चंद्रपुर में रिसर्च से जुड़ा सेंटर स्‍थापित किया जा रहा है।

साथियों, आदिवासी भाई-बहनों को केंद्र सरकार की आयुष्‍मान भारत योजना का भी बड़ा लाभ मिल रहा है। इस योजना के तहत गंभीर बीमारी की स्थिति में गरीबों का पांच लाख रुपये तक का इलाज सुनिश्चित हुआ है। अभी कुछ देर पहले ही मेरी आयुष्‍मान भारत के अनेक लाभार्थियो से मुलाकात भी हुई है। उनके चेहरे पर जो संतोष था, वही आपके इस प्रधान सेवक का मेहनताना है। साथियों, भारत को खेल की महाशक्ति बनाने में आदिवासी नौजवानों का सामर्थ्‍य बहुत बड़ी भूमिका निभाता जा रहा है। इसे समझते हुए भी आदिवासी क्षेत्रों में खेलों की सेवाओं और सुविधाओं को और विस्‍तार दिया जा रहा है। सरकार का विशेष ध्‍यान डेढ़ सौ से अधिक आदिवासी बाहुल्‍य जिलों में खेल सुविधाओं के विकास पर है। सरकार द्वारा ऐसे हर जिले को 2022 तक पांच हजार करोड़ रुपये की सहायता का प्रावधान किया गया है।

साथियों, इतिहास साक्षी रहा है कि देश की आजादी से लेकर देश के विकास में आदिवासी नायकों का बहुत बड़ा योगदान रहा है। भाजपा सरकार इस योगदान को सम्‍मान देने का काम भी कर रही है। आजादी की लड़ाई में जिन आदिवासी बेटे-बेटियों ने बलिदान दिया है, उनकी याद में देशभर में स्‍मारकों का निर्माण हो रहा है।

भाईयों और बहनों, देश की सुरक्षा महिला सशक्‍तीकरण, आदिवासी कल्‍याण और विकास के दूसरे काम अगर आज इतनी तेजी से हो पा रहे हैं, क्‍योंकि आपने साढ़े चार वर्ष पहले एक मजबूत सरकार के लिए वोट दिया था। आज सरकार साफ नीयत के साथ स्‍पष्‍ट नीति बना रही है तो आपके एक वोट के कारण संभव हुआ है। तब अगर आप चूक जाते तो शायद हम वहीं के वहीं रह जाते। विकास के इस विश्‍वास को आप और अधिक मजबूत करेंगे। अपने इस प्रधान सेवक पर अपना आशीर्वाद बनाए रखेंगे, इसी आग्रह के साथ एक बार फिर विकास की सभी परियोजनाओं के लिए मैं आपको बहुत-बहुत बधाई देता हूं। मेरे साथ जोर से बोलिये –

भारत माता की जय!

भारत माता की जय!

भारत माता की जय!

बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

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August 10, 2026

प्रधानमंत्री – मेरे यहां, मुझे यहां लगभग 12-13 साल हो गए इसी मकान में, अगर मैंने regularly और हर बार किसी को रिसिव किया है, किसी को मैं मिला हूं, तो खिलाड़ी हैं। पिछले 10-12 साल हो गए, आप लोगों के पुरुषार्थ के कारण, भारत को लगातार विजय दिलाने के आपके प्रयासों के कारण और उत्तरोत्तर सफलता में नई ऊंचाईयां पार करने की परंपरा के कारण, जो काम शायद हम स्कूलों में जाकर कहें कि नहीं नहीं भई खेलना चाहिए, ये करना चाहिए, वो काम स्कूलों में जाकर के हम कर सकते थे, उससे ज्यादा आपका मेडल उनको inspire करता है।

प्रधानमंत्री – तुमने मुझे वादा किया था पिछली बार कि तुम्हारी दोनों बेटियां खिलाड़ी बन जाएंगी?

खिलाड़ी - हाँ जी अभी वे उमर की छोटी हैं, अगले कॉमनवेल्थ में एक घर में तीन मेडल लाकर दिखाएंगी।

प्रधानमंत्री – पक्का।

खिलाड़ी – हाँ जी।

खिलाड़ी – जब मैं दौड़ रहा था, जब मेरा इवेंट था 29 को, तो उस दिन गुरुपूर्णिमा थी, तो उस दिन मेरे गुरू को मैंने एक गिफ्ट दे दिया।

प्रधानमंत्री – बड़ी शान बढ़ाई आपने। इतनी आंसू टपक रहे थे, मुझे लगता है कि आंसू के हर बूंद से जैसे गोल्ड मेडल टपक रहा है।

खिलाड़ी – मैं बहुत ज्यादा खुशी थी, इमोशनल भी थे उसी दिन, खुशी ज्यादा था और मैं इसलिए रोई थी कि मेरा पेरिस आलंपिक में मेरा 1 Kg में मेडल रह गई थी और एक प्लेयर्स की लाइफ में क्या क्या हमको फेस करना पड़ता है। तो ये 4 साल के अंदर में कितना क्या क्या कुछ मैंने फेस किया था, हर टाइम injury ही चल रहे थे और family problem, वो सब हो रहा था। तो बहुत मुश्किल से मैं ये 4 साल फेस किया था। तो वो सब जब पोडियम में जब मैं खड़ी थी सर और हमारी जो फ्लैग ऊपर जाते हैं और हमारे नेशनल एंथम जब बजते हैं तो सर हम रुक नहीं सकते सर, अपना आप आंसू निकलते हैं।

प्रधानमंत्री – बहुत बहुत बढ़िया

प्रधानमंत्री – आपके इस अचीवमेंट को सिर्फ आपका अचीवमेंट मानता हूं, ऐसा नहीं है, ये आपका विजय आने वाली पीढ़ियों के लिए बहुत बड़ी प्रेरणा बन जाता है।

खिलाड़ी – सब डर रहे थे हमसे कि इंडिया के साथ फाइट आ गई, अब तो हम पहली फाइट ही हार जायेंगे, हमारा मेडल भी नहीं आयेगा।

प्रधानमंत्री – यानी मान के चलते हैं।

खिलाड़ी – हाँ सर।

प्रधानमंत्री – क्या हुआ, वो restaurant वालों से झगड़ा कर रही थी?

खिलाड़ी – हम लोगों का जो इतना अच्छा परफॉर्मेंस था, लास्ट डे था और सब जीत के गए थे और पूरा इंडिया के लोग थे। तो थोड़ा सा मुझे बुरा लग रहा। तो मैंने उनको अच्छे से बोला रिक्वेस्ट किया था सर, फिर उन्होंने मान भी लिया, अभी चेंज भी हो गया सर।

प्रधानमंत्री – इस विजय की परिस्थिति खुशी, आनंद, अपने साथियों के साथ और गेम पूरे हो चुके हैं। तो हसी मजाक मस्ती का मूड ऐसे समय उस मैप पर नजर जाना और उसको रजिस्टर करना और तुरंत सिर्फ मेडल लेते समय देश खड़ा हो जाता है ऐसा नहीं, भीतर से देश का भाव मैं सच बताता हूँ ये वीडियो सामान्य नहीं है आपका, लंबे समय तक लोगों को याद रहेगा। ये बॉक्सिंग वालों से भी दुनिया के खिलाड़ी अब डरने लगे हैं।

खिलाड़ी – जरूर सर, पुरे सभी डरे हुए थे। एक के बाद एक गोल्ड मेडल गोल्ड मेडल आ रहे थे और मतलब पूरा लास्ट में ऐसे धमाका जैसा हो गया बिल्कुल। जिस तरीके से हम लोगों को सपोर्ट मिल रहा है, हमें बैक टू बैक कंपटीशन मिल रहा है वो एक बहुत बड़ी बात है और हमारे जितने भी यंग एथलीट है वो लोग सभी जैसे खेलो इंडिया स्कीम से आए हुए हैं और ये एक बहुत बड़ा changes ला रहा है पूरे स्पोर्ट्स में ही।

प्रधानमंत्री – अगर आप लोग खेलो इंडिया की प्रतिष्ठा बढ़ाते हैं और प्रतिष्ठा सिर्फ वहां जाकर के रिबिन काटने से नहीं होगी। आप वैसे ही खेलेंगे जैसे एक छोटा विद्यार्थी, एक छोटा नौजवान, छोटा खिलाड़ी खेलता है। यह बहुत बड़ा कंट्रीब्यूशन करेगा। क्योंकि अभी तो हमें बहुत आगे जाना है, बहुत मेडल लाना है। कारगिल विजय दिवस पर किसकी विजय हुई थी?

खिलाड़ी – उस दिन कारगिल डे था वैसे और जिस दिन मैंने पाकिस्तान के साथ फाइट किया था सर, वो उसी दिन का था। तो मैं एक इंडियन आर्मी से हूं, तो मैंने उस दिन मैं पहले से बहुत वो था कि सर पाकिस्तान को हराना है। तो मैंने वो पाकिस्तान एक तरफ मैंने 5-0 से हराया, तो मैंने हमारा इंडियन आर्मी का कारगिल हीरोज़ को मैंने डेडिकेट किया किया था सर।

प्रधानमंत्री – आपको यह याद रहना और आप स्वयं फौज से हैं तो, मैं जरूर मानता हूं कि देश के वीर जवानों को आपने जो भाव प्रकट किया ना कि, मैं कारगिल के विजेताओं को मेरा मेडल समर्पित करता हूं। उसने उस विजय पर चार चांद लगा दिए और जिसको पराजित करना था उसी को किया आपने।

खिलाड़ी – वो पाकिस्तान की बात चल रही है, मुझे किस्सा याद आ गया सर। 2015 वर्ल्ड मिलिट्री गेम थे और मेरी पाकिस्तान के साथ पहली फाइट आ गई थी और वर्ल्ड मिलिट्री गेम थे तो मिलिट्री वाले के फोन आए कि भई पाकिस्तान से नहीं हारना है। तो फिर मैं फर्स्ट राउंड 4-1 से जीत गया। सेकंड राउंड 3-2 से जीत गया, पर दोनों के सर लग गए आपस में, तो दोनों के लग गए कट और फाइट तो मैं जीत गया।

प्रधानमंत्री – हाँ

खिलाड़ी – उसके बाद फिर दोनों चले गए हॉस्पिटल में टांके लगवाने के लिए। फिर 2014 में आप फर्स्ट टाइम प्रधानमंत्री जी बने थे और जो हमारे साथ आर्मी का कोच गया हुआ था उसका नाम नरेंद्र राणा था और फिर वो कई देर तक सोच के मेरे को बोला कि भाईजान एक बात बोलूं, मैं हां बोलो, बोला भाईजान आपका नाम नरेंद्र है। आपके कोच का नाम नरेंद्र है, आपके प्रधानमंत्री का नाम नरेंद्र है, तो मुझे नरेंद्र नाम से नफरत हो गई है।

प्रधानमंत्री – सिर्फ आपने मेडल की संख्या बढ़ाई ऐसा नहीं है। आपने एक पीढ़ी को तैयार किया।

खिलाड़ी – मेरे मन में भी धक-धक धक-धक हो रहा है सर।

प्रधानमंत्री – आप चिंता मत कीजिए।

खिलाड़ी – पर..

प्रधानमंत्री – आप चाहें तो आपको बोलने में भी मेडल मिलने वाला है।

खिलाड़ी – मेरे फ्रेंड सर्कल में किसी ने बोला था कि मैं उनको कुछ बोलती थी भई तुम्हारे अच्छे के लिए तुम करो। तो अक्सर मुझे वो बोलते थे कि तू के मोदी ते मिल रही है?

प्रधानमंत्री – हाँ

खिलाड़ी – हरियाणवी में बोल देते हैं सर कि क्या तू मोदी से मिली हुई है, कि तेरी बात माने। तो आज मैं आपसे मिली हूं सर। मैं उनको बोल पाऊंगी कि हां मैं मोदी जी से मिली हूं।

खिलाड़ी – कॉमनवेंल्थ गेम्स में मैंने सिल्वर मेडल जीता, फिर मैंने क्रेडिट साहब को दिया, सपना तो था एक बार मेडल जीत के लेके आने के लिए, बट ट्रेनिंग का सेंटर नहीं था, मैंने SAI आने के बाद मैं बहुत ट्रेनिंग करके मेडल जीत पा रहा, इसलिए बहुत खुशी से मैंने सर को क्रेडिट दिया था क्योंकि बहुत इंप्रूव हुआ।

प्रधानमंत्री – मेरे लिए बहुत बड़ा सम्मान का विषय है, मेहनत आपने की और मुझे याद किया, मैं आपका बहुत आभारी हूं दोस्त।

प्रधानमंत्री – वाराणसी में खेल तुम प्रैक्टिस कर रही थी ना?

खिलाड़ी – जी सर।

प्रधानमंत्री – कैसा बना है स्टेडियम?

खिलाड़ी – सर अच्छा बना है, वहां पर मैं 10-12 दिन के लिए ट्रेनिंग करने गई थी, क्योंकि मैं मंदिर गई थी तो वहां पर ही ट्रेनिंग करके आई थी। और मैं वहां पे मतलब सेटल भी होना चाहती हूं क्योंकि मुझे काशी विश्वनाथ बहुत अच्छा लगता है सर।

प्रधानमंत्री – भोपाल में ट्रेनिंग कर रही थी ना?

खिलाड़ी – जी सर।

प्रधानमंत्री – तो उज्जैन जाते थे कि नहीं?

खिलाड़ी – जी सर उज्जैन भी गई थी सर।

प्रधानमंत्री – अच्छा महाकाल के पास भी गई।

खिलाड़ी – जी सर।

प्रधानमंत्री – काशी विश्वनाथ के पास हो आई एक बार।

खिलाड़ी – जी सर।

प्रधानमंत्री – सावन महीना तो अभी है।

खिलाड़ी – वहां घर जाके फिर उसके बाद जाऊंगी सर।

प्रधानमंत्री – ठीक है।

खिलाड़ी – साई ने भी सर बहुत सपोर्ट किया है मुझे। इसके कारण ही मैं यहां तक पहुंची हूं सर। और मैं खेलो इंडिया स्कीम में भी थी 2018 में जो फर्स्ट खेलो इंडिया हुआ था, उसमें मेरा सिल्वर मेडल था, वहां पे भी मैंने आपको देखा था ओपनिंग सेरेमनी में, तो उसमें मेरा मेडल था, तो मेरे को स्कीम भी मिल गया और मैं यहां तक पहुंची हूं सर।

प्रधानमंत्री – स्पोर्ट्स व्यवस्था एक बात है, लेकिन देश मेडल तब प्राप्त करता है जब देश में स्पोर्ट्स कल्चर बनता है। दोस्तों आपने बहुत बड़ा काम किया है। देश का नाम रोशन किया है। आपको मैं बहुत बधाई देता हूं और आप विश्वास कीजिए आगे भी आप विजयी होंगे और फिर से एक बार यहीं पर हम मिलेंगे। बहुत-बहुत धन्यवाद। बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

प्रधानमंत्री – ये लगातार तीसरी बार देश को मेडल दिलवाया है।

खिलाड़ी – थैंक यू सर।

प्रधानमंत्री – बहुत आशीर्वाद बेटा।

खिलाड़ी – और थैंक यू सो मच मैं सर के हाथ से लड्डू खा रही मेरा कल बर्थडे था तो आज सर के हाथ से…

प्रधानमंत्री – बहुत बधाई वाह।

प्रधानमंत्री – मुस्कुराओ यार ।

प्रधानमंत्री – जो खेलेगा वो खिलेगा।