وزیراعظم نے نیشنل انسٹی ٹیوٹ آف بائیوٹک اسٹریس مینجمنٹ ، رائے پور کے نو تعمیر شدہ کیمپس کو قوم کے لیے وقف کیا
وزیراعظم نے زرعی یونیورسٹیوں میں گرین کیمپس ایوارڈ بھی تقسیم کیے
"جب بھی کسانوں اور زراعت کو حفاظتی ڈھال ملتا ہے ، ان کی نمو تیز ہو جاتی ہے"
''جب سائنس ، حکومت اور معاشرہ مل کر کام کرتے ہیں تو نتائج بہتر ہوتے ہیں۔ کسانوں اور سائنسدانوں کا ایسا اتحاد ملک کو نئے چیلنجز سے نمٹنے میں مضبوطی فراہم کرے گا''
''کاشتکاروں کو فصل پر مبنی آمدنی کے نظام سے نکالنے اور ان کو ویلیو ایڈیشن اور کاشتکاری کے دیگر آپشنز کی ترغیب دینے کی کوششیں کی جا رہی ہیں''
''ہماری قدیم کاشتکاری کی روایات کو اختیار کرنےکے ساتھ ہی مستقبل کی طرف پیش قدمی کرنا بھی اتنا ہی ضروری ہے''

وزیر اعظم جناب نریندر مودی نے ویڈیو کانفرنس کے ذریعےمخصوص خواص کی حامل فصلوں کی35اقسام کو قوم کے نام  وقف کیا۔ وزیراعظم نے نیشنل انسٹی ٹیوٹ آف بائیوٹک اسٹریس مینجمنٹ، رائے پور کے نو تعمیر شدہ کیمپس کو بھی قوم کے لیے وقف کیا۔ اس موقع پر وزیراعظم نے زرعی یونیورسٹیوں میں گرین کیمپس ایوارڈ زبھی تقسیم کیے۔ انہوں نے ان  کسانوں سے بھی  بات چیت کی جو زراعت میں  جدید طریقے استعمال کرتے ہیں اوربعد ازاں ، اجتماع سے بھی  خطاب کیا۔

جموں و کشمیر کے گاندربل ضلع سے تعلق رکھنے والی محترمہ زیتون بیگم سے بات چیت کرتے ہوئے وزیر اعظم نے ان کے جدید زرعی طریقوں کو سیکھنے کے سفر اور انہوں نے دوسرے کسانوں کو کس طرح تربیت دی اور وہ وادی میں لڑکیوں کی تعلیم کے لیے کس طرح سے کام کر رہی ہیں، کے تعلق سے بھی گفتگوکی۔ وزیر اعظم نے کہا کہ کھیلوں میں بھی جموں و کشمیر کی لڑکیاں اچھی کارکردگی کا مظاہرہ کر رہی ہیں۔ انہوں نے یہ بھی کہا کہ چھوٹے ہولڈنگ والے کسانوں (جن کسانوں کے پاس  کاشتکاری کے لیے بہت کم زمینیں ہیں )کی ضروریات کو پورا کرنا حکومت کی ترجیحات میں شامل  ہیں اور انہیں اس ضمن میں ہر طرح کے فوائد براہ راست ملتے رہیں گے۔

بلندشہر ، اتر پردیش کے ایک کسان اور بیج پیدا کرنے والے جناب کلونت سنگھ کے ساتھ بات چیت کرتے ہوئے وزیر اعظم نے دریافت کیا کہ وہ مختلف قسم کے بیج کیسے تیار کر تے ہیں۔ وزیر اعظم نے پوچھا کہ وہ پوسا کے زرعی انسٹی ٹیوٹ میں سائنس دانوں کے ساتھ اپنی بات چیت سے کس طرح فائدہ اٹھاتے ہیں اور کسانوں میں اس طرح کے اداروں کے ساتھ رابطے کے بارے میں کیا رجحان ہے۔ وزیر اعظم نے کسان کی ان کی فصلوں کی پروسیسنگ اور ویلیو ایڈیشن کرنے پر تعریف کی۔ وزیر اعظم نے کہا کہ حکومت کسانوں کو ان کے فصلوں کی اچھی قیمتیں فراہم کرنے کی کوششیں کر رہی ہے جیسے کہ مارکیٹ تک رسائی ، اچھے معیار کے بیج ، مٹی ہیلتھ کارڈ وغیرہ۔

وزیر اعظم نے باردیز ، گوا سے تعلق رکھنے والی محترمہ درشنا پیڈینکر سے دریافت کیا کہ وہ کس طرح مختلف فصلیں کاشت کر رہی ہیں اور مختلف مویشیوں کی پرورش کر رہی ہیں۔ انہوں نے کسانوں کی طرف سے کئے گئے ناریل کے ویلیو ایڈیشن کے بارے میں  بھی پوچھا۔ انہوں نے خوشی کا اظہار کیا کہ ایک خاتون کسان کس طرح ایک کاروباری شخصیت کے طور پر ترقی کر رہی ہیں۔

منی پور سے تعلق رکھنے والے جناب تھوئیبا سنگھ کے ساتھ بات چیت کرتے ہوئے ، وزیر اعظم نے مسلح افواج میں زندگی گزارنے کے بعد کاشتکاری کرنے پر ان کی تعریف کی۔ کسانوں کی متنوع سرگرمیاں جیسے زراعت ، ماہی گیری اور دیگر متعلقہ سرگرمیاں وزیر اعظم کی دلچسپی کا باعث بنیں۔ وزیر اعظم نے ان کی ستائش  جئے جوان-جئے کسان کی مثال  دیتے ہوئے کی۔

وزیر اعظم نے جناب سریش رانا ، ادھم سنگھ نگر ، اتراکھنڈ سے استفسار کیا کہ انہوں نے مکئی کی کاشت کیسے شروع کی۔ وزیر اعظم نے ایف پی او کو موثر طریقے سے استعمال کرنے پر اتراکھنڈ کے کسانوں کی تعریف کی اور کہا کہ جب کسان اجتماعی طور پر کام کرتے ہیں تو انہیں بہت زیادہ فائدہ ہوتا ہے۔ حکومت کسانوں کو ہر وسائل اور انفراسٹرکچر دستیاب کرانے کی کوشش کر رہی ہے۔

اس موقع پر خطاب کرتے ہوئے ، وزیر اعظم نے کہا کہ گزشتہ 6-7 برسوں میں ، زراعت سے متعلق چیلنجوں کو حل کرنے کے لیے سائنس اور ٹیکنالوجی کو ترجیحی بنیادوں پر استعمال کیا جا رہا ہے۔ وزیر اعظم نے کہا ، "ہماری توجہ زیادہ غذائیت والے بیجوں پر بہت زیادہ ہے ، جو نئے حالات کے مطابق ، خاص طور پر بدلتے ہوئے آب و ہوا میں کاشت کیے جاتے ہیں۔"

وزیر اعظم نے گذشتہ سال مختلف ریاستوں میں کورونا وباء کے درمیان ٹڈیوں کے بڑے حملے کو یاد کیا۔ انہوں نے کہا کہ بھارت نے بہت کوششوں سے اس حملے سے نمٹا ہے ، کسانوں کو بہت زیادہ نقصان اٹھانے سے بچایا ہے۔

وزیر اعظم نے اس بات پر زور دیا کہ جب بھی کسانوں اور زراعت کو حفاظتی ڈھال ملتا ہے ، ان کی ترقی تیز ہو جاتی ہے۔ انہوں نے بتایا کہ زمین کے تحفظ کے لیے 11 کروڑ سویل ہیلتھ کارڈ (مٹی کی جانچ کے لیے جاری ہیلتھ کارڈ)جاری کیے گئے۔ وزیر اعظم نے حکومت کے کسان دوست اقدامات کی تفصیلات بھی بتائیں جیسے کسانوں کو ملنے والے پانی کی حفاظت  کرنےکے لیے تقریباً100 زیر التوا آبپاشی منصوبوں کو مکمل کرنے کی مہم ، کسانوں کو فصلوں کو بیماریوں سے بچانے کے لیے نئی اقسام کے بیج فراہم کرنا تاکہ زیادہ پیداوار حاصل ہو۔ انہوں نے مزید کہا کہ ایم ایس پی بڑھانے کے ساتھ ساتھ خریداری کے عمل میں بھی بہتری لائی گئی ہےتاکہ زیادہ سے زیادہ کسان فائدہ اٹھا سکیں۔ ربیع سیزن میں 430 لاکھ میٹرک ٹن سے زائد گندم خریدی گئی ہے اور کسانوں کو 85 ہزار کروڑ روپے سے زائد کی ادائیگی کی گئی ہے۔ وبائی مرض کے دوران گندم خریداری مراکز میں تین گنا سے زیادہ اضافہ کیا گیا۔

وزیراعظم نے کہا کہ کسانوں کو ٹیکنالوجی سے جوڑ کر ہم نے ان کے لیے بینکوں سے مدد لینا آسان بنا دیا ہے۔ آج کسان بہتر طریقے سے موسم کی معلومات حاصل کر رہے ہیں۔ حال ہی میں ، 2 کروڑ سے زیادہ کسانوں کو کسان کریڈٹ کارڈ دیا گیا ہے۔

وزیر اعظم نے بتایا کہ موسمیاتی تبدیلی کی وجہ سے کیڑوں کی نئی اقسام ، نئی بیماریاں ، وبائی امراض جنم لے رہے ہیں ، اس کی وجہ سے انسانوں اور مویشیوں کی صحت کے لیے بڑا خطرہ ہے اور فصلیں بھی متاثر ہو رہی ہیں۔ ان پہلوؤں پر گہری تحقیق  جاری رہنی ضروری ہے۔ انہوں نے کہا کہ جب سائنس ، حکومت اور معاشرہ مل کر کام کریں گے تو نتائج بہتر ہوں گے۔ کسانوں اور سائنسدانوں کا ایسا اتحاد ملک کو نئے چیلنجز سے نمٹنے میں تقویت فراہم کرے گا۔

وزیر اعظم نے کہا کہ کسانوں کو فصل پر مبنی آمدنی کے نظام سے نکالنے کی کوشش کی جا رہی ہے اور انہیں ویلیو ایڈیشن اور کاشتکاری کے دیگر آپشنز کے لیے حوصلہ افزائی کی جا رہی ہے۔ انہوں نے سائنس اور تحقیق کے حل کے ساتھ باجرا اور دیگر اناج کو مزید تیار کرنے کی ضرورت پر زور دیا۔ انہوں نے کہا کہ اس کا مقصد یہ ہے کہ انہیں مقامی ضروریات کے مطابق ملک کے مختلف حصوں میں کاشت کیا جا سکے۔ انہوں نے لوگوں سے کہا کہ آنے والے سال کو جوار کا سال قرار دیتے ہوئے اقوام متحدہ کے فراہم کردہ مواقع کو استعمال کرنے کے لیے تیار رہیں۔

وزیر اعظم نے کہا کہ ہماری قدیم کاشتکاری  کی روایات کو ساتھ لے کر چلنے کے ساتھ ہی مستقبل کی طرف پیش قدمی کرنا بھی اتنا ہی اہم ہے۔ انہوں نے کہا کہ جدید ٹیکنالوجی اور کاشتکاری کے نئے اوزار مستقبل کی کاشتکاری کی بنیاد ہیں۔ انہوں نے مزید کہا کہ جدید زرعی مشینوں اور آلات کو فروغ دینے کی کوششیں آج  بہتر نتائج دکھا رہی ہیں۔

تقریر کا مکمل متن پڑھنے کے لیے یہاں کلک کریں

Explore More
لال قلعہ کی فصیل سے 77ویں یوم آزادی کے موقع پر وزیراعظم جناب نریندر مودی کے خطاب کا متن

Popular Speeches

لال قلعہ کی فصیل سے 77ویں یوم آزادی کے موقع پر وزیراعظم جناب نریندر مودی کے خطاب کا متن
The milestone march: India's market capitalisation hits $5 trillion

Media Coverage

The milestone march: India's market capitalisation hits $5 trillion
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
PM Modi's Interview to Sambad
May 22, 2024

ଲୋକସଭା ସହ ଓଡ଼ିଶାରେ ବିଧାନସଭା ନିର୍ବାଚନ। ନିର୍ବାଚନର ଏହି ଅବହାୱା ଭିତରେ ଘନ ଘନ ଓଡ଼ିଶା ଗସ୍ତରେ ଆସି ପ୍ରଚାରର ମଙ୍ଗ ଧରିଛନ୍ତି ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ନରେନ୍ଦ୍ର ମୋଦୀ। ବିଭିନ୍ନ ନିର୍ବାଚନୀ ସଭାରେ ଯୋଗଦେଇ ରାଜ୍ୟ ସରକାରଙ୍କ ବିରୋଧରେ ସ୍ବରକୁ ଶାଣିତ କରିବା ସହ ବିଜେପି ସରକାର ଗଠନ କରିବ ବୋଲି ଦୃଢ଼ୋକ୍ତି କରିଛନ୍ତି। ନିକଟରେ ଓଡ଼ିଶା ଗସ୍ତରେ ଥିବା ଅବସରରେ ‘ସମ୍ବାଦ’ ସହ ସ୍ବତନ୍ତ୍ର ସାକ୍ଷାତକାରରେ ବିଜେଡି ସରକାରର ବିଫଳତା ସହ ଓଡ଼ିଶା ପରିପ୍ରେକ୍ଷୀରେ ବିଜେପିର ସୁଚିନ୍ତିତ ଯୋଜନା ଏବଂ ଓଡ଼ିଶାର ବିକାଶ ପାଇଁ ଲକ୍ଷ୍ୟ ସମ୍ପର୍କରେ ସେ ଏକ ବିସ୍ତୃତ ଚିତ୍ର ଦେଇଛନ୍ତି। ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀଙ୍କୁ ଭେଟିଥିଲେ ‘ସମ୍ବାଦ’ର ସମ୍ପାଦକ ତନୟା ପଟ୍ଟନାୟକ ଓ ବାର୍ତ୍ତା ସମ୍ପାଦକ ଭବାନୀ ଶଙ୍କର ତ୍ରିପାଠୀ।

ସମ୍ବାଦ: କେନ୍ଦ୍ରରେ ‘ମୋଦୀ ବନାମ କିଏ?’ ବୋଲି ଚର୍ଚ୍ଚା ଚାଲିଥିବା ବେଳେ ଓଡ଼ିଶାରେ ମତଦାତାଙ୍କ ମନରେ ମୁଖ୍ୟ ପ୍ରଶ୍ନ ହେଉଛି ‘ନବୀନ ବନାମ କିଏ?’ ଆପଣ ଭାବୁଛନ୍ତି କି ଏଠି ବିଜେପି ପାଇଁ ଜଣେ ମୁଖ୍ୟମନ୍ତ୍ରୀ ଚେହେରା ଘୋଷଣା କରିବା ଅଧିକ ଲାଭଦାୟକ ହୋଇଥା’ନ୍ତା?

ମୋଦୀ: ଗତ ସପ୍ତାହରେ ମୁଁ ଓଡ଼ିଶାର ଅନେକ ସ୍ଥାନକୁ ଯାଇ ବିଶାଳ ସମାବେଶକୁ ସମ୍ବୋଧିତ କରିଥିଲି, ରୋଡ୍ ସୋ’ ମାଧ୍ୟମରେ ଲୋକଙ୍କ ଆଶୀର୍ବାଦ ଲୋଡ଼ିଥିଲି, ଲୋକଙ୍କ ସମସ୍ୟା ଓ ଚିନ୍ତାକୁ ଅନୁଭବ କରିଥିଲି। ସେଥିରୁ ସ୍ପଷ୍ଟ ହୋଇଥିଲି ଯେ ବର୍ତ୍ତମାନ ପରିପ୍ରେକ୍ଷୀରେ ଓଡ଼ିଶାର ପ୍ରମୁଖ ପ୍ରସଙ୍ଗ ହେଉଛି ଶାସନ ପରିବର୍ତ୍ତନ। ଜନସାଧାରଣ କ୍ରୋଧିତ ହେବାପଛରେ କାରଣ ହେଉଛି, ସେମାନେ ସମର୍ଥନ କରିବାକୁ ବାଧ୍ୟବୋଲି ନବୀନ ସରକାର ଧରିନେଇଛନ୍ତି। ସେମାନେ କ୍ଳାନ୍ତ ଏଇଥିପାଇଁ ଯେ ସ୍ଥିରତା, ଦୁର୍ନୀତି ଓ ପ୍ରଗତିର ଅଭାବ ସାଙ୍ଗକୁ ଉତ୍ତରଦାୟିତ୍ବର ଅଭାବ। ଯେଉଁଥିପାଇଁ ଜନସାଧାରଣ ଏକ ସ୍ପଷ୍ଟ ଓ ଦୃଢ଼ ଆଭିମୁଖ୍ୟ ଚାହାନ୍ତି, ଯାହାକି ଓଡ଼ିଶାର ଅଭିବୃଦ୍ଧିକୁ ଏକ ନୂତନ ଦିଗ ଓ ଗତି ଦେଇପାରିବ। ଗତ ୧୦ବ‌ର୍ଷ ଧରି କେନ୍ଦ୍ରରେ ଆମର ସରକାରର ଉତ୍ତମ ଶାସନ ଓ ବିକାଶକୁ ଓଡ଼ିଶାବାସୀ ହୃଦୟଙ୍ଗମ କରିସାରିଛନ୍ତି। ସେମାନେ ସ୍ଥିରନିଶ୍ଚିତ, ବିଜେପି ହେଉଛି ଏକମାତ୍ର ଦଳ ଯିଏକି ସେମାନଙ୍କ ଆକାଂକ୍ଷା ପୂରଣ କରିପାରିବ। ମୁଖ୍ୟମନ୍ତ୍ରୀ ଚେହେରା ବାବଦରେ ମୁଁ ସ୍ପଷ୍ଟଭାବେ କହିବାକୁ ଚାହେଁ ଯେ ବିଜେପିର ମୁଖ୍ୟମନ୍ତ୍ରୀ ନିଶ୍ଚିତ ଭାବେ ଓଡ଼ିଶା ମାଟିର ପୁଅ କିମ୍ବା ଝିଅ ।

ସମ୍ବାଦ: ବିଜେପି ଓଡ଼ିଆ ଅସ୍ମିତାକୁ ପ୍ରମୁଖ ନିର୍ବାଚନୀ ପ୍ରସଙ୍ଗ କରିବା ପଛରେ କ’ଣ କାରଣ ରହିଛି?

ମୋଦୀ: ଇତିହାସ, ସଂସ୍କୃତି, କଳା, ସ୍ଥାପତ୍ୟ ଓ ସାହିତ୍ୟ କଥା ଉଠିଲେ ଓଡ଼ିଶା ହେଉଛି ମହାପ୍ରଭୁ ଜଗନ୍ନାଥଙ୍କ ଆଶୀର୍ବାଦପ୍ରାପ୍ତ ଅନ୍ୟତମ ଜୀବନ୍ତ ରାଜ୍ୟ। ମୁଁ ସର୍ବଦା ଓଡ଼ିଆ ସଂସ୍କୃତିର ଜଣେ ପ୍ରଶଂସକ। ଯେତେବେଳେ ଜି-୨୦ ଶିଖର ସମ୍ମିଳନୀରେ ପ୍ରଦର୍ଶିତ କୋଣାର୍କ ଚକ୍ର ବିଶ୍ବସ୍ତରୀୟ ନେତାମ‌ାନେ ମେ‌ା‌େତ ପଚାରିଥିଲେ, ତାହା ମୋତେ ବେଶ୍‌ ଖୁସି ଦେଇଥିଲା। କିଛିବର୍ଷ ତଳେ ଲିଙ୍ଗରାଜ ମନ୍ଦିର ପରିଦର୍ଶନ କରିବାପରେ ମୁଁ ଏକ ଫଟୋ ପୋଷ୍ଟ୍‌ କରିଥିଲି, ଯାହାକି ସେହିବର୍ଷ କୌଣସି ରାଜନେତାଙ୍କର ସବୁଠାରୁ ଲୋକପ୍ରିୟ ଫଟୋ ଭାବେ ବିବେଚିତ ହୋଇଥିଲା। ପୁରୀର ଐଶ୍ବରୀୟତା ହେଉ କିମ୍ବା ପଟ୍ଟଚିତ୍ର ଭଳି ସୁନ୍ଦର କଳା କି ଓଡ଼ିଆ ପରି ମଧୁର ଭାଷା ହେଉ, ସବୁଗୁଡ଼ିକ ପାଇଁ ଓଡ଼ିଶାର ସ୍ବତନ୍ତ୍ରତା ରହିଛି। ଓଡ଼ିଆମାନେ ମଧ୍ୟ ଖୁବ୍ ଦୟାଳୁ ଓ ହୃଦୟବାନ। ସର୍ବୋପରି ପ୍ରତିବର୍ଷ ମହାପ୍ରଭୁ ଜଗନ୍ନାଥଙ୍କ ରଥଯାତ୍ରା ଦେଖିବାକୁ ଆସୁଥିବା ଲକ୍ଷଲକ୍ଷ ଭକ୍ତଙ୍କୁ ସେମାନେ ଆତିଥ୍ୟ ପ୍ରଦାନ କରିଥା’ନ୍ତି। ସେହି ଓଡ଼ିଶାବାସୀ ମଧ୍ୟ ଭଲଭାବେ ଜାଣନ୍ତି ବିଜେପି ହିଁ ଓଡ଼ିଆ ସଂସ୍କୃତି ଓ ଭାବନାକୁ ସମ୍ମାନ ଦିଏ ଏବଂ ସେମାନଙ୍କର ଯାହାକିଛି ଆକାଂକ୍ଷା ରହିଛି ଏହି ଦଳ ହିଁ ପୂରଣ କରିବ।

ସମ୍ବାଦ: ଆପଣ କାହିଁକି ଭାବୁଛନ୍ତି ଯେ ବିଜେଡି ଶାସନର ଗତ ଦୁଇ ଦଶନ୍ଧି ଭିତରେ ଓଡ଼ିଶାର ଅଗ୍ରଗତି ହୋଇନାହିଁ?

ମୋଦୀ: ଓଡ଼ିଶାର ପ୍ରତ୍ୟେକ ସ୍ତରରେ ଅବହେଳା ସ୍ପଷ୍ଟଭାବେ ଦିଶୁଛି। ରାଜ୍ୟର କୃଷକମାନଙ୍କ ଉଦାହରଣ ନିଆଯାଉ। ବିଭିନ୍ନ ଫସଲ ପାଇଁ କେନ୍ଦ୍ର ସରକାର ଏମ୍ଏସ୍‌ପି ସ୍ଥିର କରିଛନ୍ତି। ଅଥଚ ବିଜେଡି ସରକାର ତା’ଠାରୁ କମ୍ ମୂଲ୍ୟ ଦେଉଛନ୍ତି। ରାଜ୍ୟରେ ବିଜେପି ସରକାର ଚାଷୀଙ୍କୁ ଧାନ କ୍ବିଣ୍ଟାଲ ପିଛା ୩,୧୦୦ ଟଙ୍କା ଦେବା ନିଶ୍ଚିତ କରାଇବେ ଏବଂ ତୁରନ୍ତ ଏହି ଅର୍ଥ ସେମାନଙ୍କ ବ୍ୟାଙ୍କ ଜମାଖାତାକୁ ଚାଲିଯିବ। ଏଠାରେ ଦଶନ୍ଧି ଦଶନ୍ଧି ଧରି ଅନେକ ଜଳସେଚନ ପ୍ରକଳ୍ପ ବିଳମ୍ବିତ ହୋଇଚାଲିଛି। ଫଳରେ, ରାଜ୍ୟର ଚାଷୀମାନଙ୍କୁ ଫସଲ ଉତ୍ପାଦନରୁ ବଞ୍ଚିତ କରିଛି। ଆମେ ସେଗୁଡ଼ିକୁ ଅଗ୍ରାଧିକାର ଭିତ୍ତିରେ ସାରିବୁ।

ଓଡ଼ିଶାରେ ଗରିବ ଲୋକଙ୍କ ଦୁଃଖ ଅତ୍ୟନ୍ତ ମର୍ମସ୍ପର୍ଶୀ। ବିଶେଷକରି ଗ୍ରାମାଞ୍ଚଳ ଓ ଆଦିବାସୀ ଅଞ୍ଚଳର ସ୍ବାସ୍ଥ୍ୟସେବା ଭିତ୍ତିଭୂମି ଭୁଶୁଡ଼ି ପଡ଼ିଛି। ସେସବୁ ଅଞ୍ଚଳରେ ଲୋକେ ଏବେ ବି ମ୍ୟାଲେରିଆ, ଡାଇରିଆ ଓ ସାପକାମୁଡ଼ା ସହ ସଂଘର୍ଷ କରୁଛନ୍ତି। ଏପରି ସର୍ବନିମ୍ନ ସ୍ବାସ୍ଥ୍ୟସେବାର ଅଭାବ ଗରିବ ଓ ଆଦିବାସୀଙ୍କ ଜୀବନ ଉପରେ ନକାରାତ୍ମକ ପ୍ରଭାବ ପକାଉଛି। ଏହା ଏଭଳି ପରିସ୍ଥିତି ସୃଷ୍ଟିକରୁଛି ଯେକୌଣସି ଗୁରୁତର ସ୍ବାସ୍ଥ୍ୟଭିତ୍ତିକ ସମସ୍ୟା ସେମାନଙ୍କୁ ଆହୁରି ଗଭୀର ଦାରିଦ୍ର୍ୟ ଭିତରକୁ ଟାଣିନେଉଛି। ସେହିପରି, ଦୀର୍ଘ ଦଶନ୍ଧି ଦଶନ୍ଧି ଧରି କ୍ଷମତାରେ ରହିବାପରେ ବି ବିଜେଡି ସରକାର ପ୍ରତ୍ୟେକ ଓଡ଼ିଆଙ୍କ ମୁଣ୍ଡ ଉପରେ ଛାତଟିଏ ସୁନିଶ୍ଚିତ କରିପାରିନାହିଁ। ବରଂ, ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ଆବାସ ଯୋଜନାକୁ ମନ୍ଥର କରିବାସହ ସେଥିରୁ ଅର୍ଥ ଆତ୍ମସାତ୍ କରୁଥିବା ଅଭିଯୋଗ ହେଉଛି। ଓଡ଼ିଶାର ଯୁବକମାନଙ୍କ ଅବସ୍ଥା ଦେଖନ୍ତୁ। ସେମାନେ ଦେଶର ଅନ୍ୟତମ ଉଜ୍ବଳ ଓ ଦକ୍ଷ ଯୁବବର୍ଗ। ମାତ୍ର, କାମ ପାଇଁ ଅନ୍ୟ ରାଜ୍ୟକୁ ସେମାନେ ଯାଉଛନ୍ତି। ଏହାର କାରଣ ହେଲା; ପୁଞ୍ଜିନିବେଶ, ଶିଳ୍ପ ଓ ସୁଯୋଗକୁ ଆକର୍ଷିତ କରିବା ଲାଗି ବିଜେଡି ସରକାରର ଦୂରଦୃଷ୍ଟି ଅଭାବ ରହିଛି। ସେମାନେ ଶିକ୍ଷା କ୍ଷେତ୍ରକୁ ମଧ୍ୟ ଅଣଦେଖା କରିଛନ୍ତି। ବିଜେପି ନେତୃତ୍ବାଧୀନ ସରକାର ଅନେକ ସହରରେ ଆଇଟି ପାର୍କ ସ୍ଥାପନ କରିବ ଏବଂ ଉଚ୍ଚଶିକ୍ଷାର ଦକ୍ଷତା ବୃଦ୍ଧି କରାଇବ। ଶିଳ୍ପ ଆଣିବା ସହିତ ସେଥିରେ ଓଡ଼ିଆ ଯୁବକମାନଙ୍କ ଭବିଷ୍ୟତ ଉଜ୍ଜ୍ବଳ କରିବାର ସୁଯୋଗ ପହଞ୍ଚାଇବ।

ସମ୍ବାଦ: ବିଜେପି ଗତ କିଛିବର୍ଷ ମଧ୍ୟରେ ବିଜେଡିକୁ କଡ଼ା ସମାଲୋଚନା କରିନାହିଁ। ମାତ୍ର, ଏଇ କିଛିବର୍ଷ ମଧ୍ୟରେ ହଠାତ୍‌ ରାଜ୍ୟ ସରକାରଙ୍କୁ ତୀବ୍ର ସମାଲୋଚନା କରିବାକୁ ବୁଦ୍ଧିଜୀବୀମାନେ ଯଥେଷ୍ଟ ନୁହେଁ କିମ୍ବା ବିଳମ୍ବ ବୋଲି କହୁଛନ୍ତି। ଏ ସମ୍ପର୍କରେ ଆପଣ କ’ଣ କହିବେ?

ମୋଦୀ: ବିଗତ ବର୍ଷମାନଙ୍କରେ ଓଡ଼ିଶାର ବିଜେପି ଦୃଢ଼ଭାବେ ଯେଉଁସବୁ ପ୍ରସଙ୍ଗ ଉଠାଇଛି, ସେସବୁ ଓଡ଼ିଶାର ସ୍ବାର୍ଥ ସହିତ ଜଡ଼ିତ। ଆପଣ ନିଜ ମିଡିଆ ହାଉସ୍‌ର ରିପୋର୍ଟ ବା ଅନ୍ୟମାନଙ୍କ ରିପୋର୍ଟ ଦେଖିପାରିବେ। ଅନେକ ଦୁର୍ନୀତି ଘଟଣାରେ ଆମେ ଲଗାତାର ବିଜେଡି ସରକାରଙ୍କୁ ପ୍ରଶ୍ନ କରିଛୁ। ମଦ ମାଫିଆଙ୍କ ସହ ସେମାନଙ୍କ ସମ୍ପର୍କ ବାବଦରେ ପ୍ରଶ୍ନ କରିଛୁ। ବିଗିଡ଼ି ଯାଇଥିବା ଆଇନଶୃଙ୍ଖଳାକୁ ନେଇ ଆମେ ରାଜ୍ୟ ସରକାରଙ୍କୁ ସମାଲୋଚନା କରିଛୁ। କେନ୍ଦ୍ରୀୟ କଲ୍ୟାଣକାରୀ ଯୋଜନା କାର୍ଯ୍ୟକାରୀ କରିବାରେ ବିଫଳତା ଅଥବା ଦୁର୍ନୀତିକୁ ନେଇ ବି ପ୍ରଶ୍ନ କରିଛୁ। ତେଣୁ, ବିଜେଡି ସରକାରକୁ ବିଜେପି କଡ଼ା ସମ‌ାଲୋଚନା କରିନାହିଁ ବୋଲି କହିବା ଏକ ଭ୍ରାନ୍ତ ଧାରଣା। ଯେମିତି କେନ୍ଦ୍ରରେ କଂଗ୍ରେସ ଓ ତା’ର ସହଯୋଗୀମାନେ ସମାଲୋଚନାକୁ ବ୍ୟକ୍ତିଗତ ସ୍ତରକୁ ନେଇଯିବା ସହ ଏକ ତିକ୍ତତାପୂର୍ଣ୍ଣ ପରିବେଶ ସୃଷ୍ଟିକରିଛନ୍ତି, ଆମେ ସେମିତି କରିନାହୁଁ। ବରଂ, ଗଠନମୂଳକ ତଥା ପ୍ରସଙ୍ଗଭିତ୍ତିକ ସମାଲୋଚନାକୁ ଗୁରୁତ୍ବ ଦେଇଛୁ।

ସମ୍ବାଦ: ମୁଖ୍ୟମନ୍ତ୍ରୀ ନବୀନ ପଟ୍ଟନାୟକ କହିଛନ୍ତି ଯେ ଓଡ଼ିଶାରେ ସରକାର ଗଠନ ପାଇଁ ବିଜେପି ସ୍ବପ୍ନ ଦେଖୁଛି। ଏହା ଉପରେ ଆପଣଙ୍କର ପ୍ରତିକ୍ରିୟା କ’ଣ?

ମୋଦୀ: ବିଜେପି ଏକ ସମୃଦ୍ଧ ତଥା ଅନ୍ତର୍ଭୁକ୍ତ ଓଡ଼ିଶାର ସ୍ବପ୍ନ ଦେଖୁଛି। ଦାରିଦ୍ର୍ୟ ବିରୋଧୀ ଲଢ଼େଇରେ ଓଡ଼ିଶାର ଗରିବ ଲୋକଙ୍କୁ ସଶକ୍ତ କରିବାର ସ୍ବପ୍ନ ଦେଖୁଛି। ସ୍ବୟଂ ସହାୟିକା ଗୋଷ୍ଠୀ ମାଧ୍ୟମରେ ରାଜ୍ୟରେ ଲକ୍ଷ ଲକ୍ଷ ଲକ୍ଷପତି ଦିଦି ସୃଷ୍ଟି କରିବାକୁ ସ୍ବପ୍ନ ଦେଖୁଛି। ଯୁବପିଢ଼ିକୁ ରୋଜଗାରକ୍ଷମ କରିବା ପାଇଁ ଓଡ଼ିଶାକୁ ପର୍ଯ୍ୟଟନସ୍ଥଳୀରେ ରୂପାନ୍ତର କରିବାର ସ୍ବପ୍ନ ଦେଖୁଛି। ସୁଭଦ୍ରା ଯୋଜନା ମାଧ୍ୟମରେ ପ୍ରତ୍ୟେକ ମହିଳାଙ୍କୁ ଆର୍ଥିକ ସଶକ୍ତୀକରଣ କରିବାକୁ ସ୍ବପ୍ନ ଦେଖୁଛି। ଓଡ଼ିଶାର ଗରିବ, କୃଷକ, ମହିଳା ଓ ଯୁବକଙ୍କ ଜୀବନକୁ ଉନ୍ନତ କରିବା ହେଉଛି ବିଜେପିର ସ୍ବପ୍ନ। ବିଜେପିର ସ୍ବପ୍ନ କେବେ କ୍ଷମତା ହାସଲ ପାଇଁ ନୁହେଁ, ବରଂ ସର୍ବଦା ଲୋକଙ୍କ ସେବା କରିବା ପାଇଁ ଉଦ୍ଦିଷ୍ଟ।

ସମ୍ବାଦ: ଆପଣ କହିଛନ୍ତି ବିଜେପି ସରକାର ଅଧୀନରେ ଓଡ଼ିଶା ଏକ ନମ୍ବର ରାଜ୍ୟ ହେବ। ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀଙ୍କ ଦୃଷ୍ଟିରେ ବର୍ତ୍ତମାନ ଓଡ଼ିଶା ବିକାଶର କେଉଁ କ୍ଷେତ୍ର ପାଇଁ ପ୍ରାଥମିକତା ରହିଛି?

ମୋଦୀ: ଓଡ଼ିଶାର ଜନସାଧାରଣ ଦୁଇ ଦଶନ୍ଧିରୁ ଅଧିକ ସମୟ ଧରି ଅବହେଳାର ଶିକାର ହୋଇଛନ୍ତି। ପଛୁଆବର୍ଗ ଓ ଆଦିବାସୀମାନଙ୍କ ବିକାଶ ଓ ସଶକ୍ତୀକରଣ ପାଇଁ ପ୍ରତିଶ୍ରୁତି ଦିଆଯାଇଛି, ମାତ୍ର ସେମାନଙ୍କ ସଂଘର୍ଷର ଅନ୍ତ ଘଟିନାହିଁ। ରାଜ୍ୟରେ ନୂତନ ନିଯୁକ୍ତି ସୁଯୋଗକୁ ବି ବନ୍ଦ କରିଦିଆଯାଇଛି। ବିଜେପିର ବିକାଶ ମଡେଲ ଏହିସବୁ ସମସ୍ୟାର ଅବସାନ ଘଟାଇବ। ସମାଜର ପ୍ରତ୍ୟେକବର୍ଗ ଏଥିରୁ ଉପକୃତ ହୋଇପାରିବେ। ବିଜେପିର ଡବଲ ଇଞ୍ଜିନ ସରକାର ଅନେକ ରାଜ୍ୟରେ ଏହିଭଳି କାର୍ଯ୍ୟ କରିପାରିଛି। ଏହାର ବିକାଶ ମଡେଲ୍‌ ଦ୍ରୁତ ବିକାଶ ସହିତ ଦୁର୍ନୀତିମୁକ୍ତ ଶାସନ ପାଇଁ ଏକ ଗ୍ୟାରେଣ୍ଟି। ଓଡ଼ିଶାର ଲୋକେ ମଧ୍ୟ ରାଜ୍ୟରେ ସମାନ ମଡେଲ ଚାହୁଁଛନ୍ତି। ସେମାନେ ଜାଣିଛନ୍ତି ଯେ ‘ଇଜ୍‌ ଅଫ୍ ଡୁଇଂ’ ବା କାମକୁ ସହଜ କରିବା ପ୍ରକ୍ରିୟା କାର୍ଯ୍ୟକାରୀ କରିବାରେ ବିଜେଡି ସରକାର ବିଫଳ ହୋଇଛନ୍ତି। ମାତ୍ର, ଲୋକମାନଙ୍କ ସାମୂହିକ ସ୍ବାର୍ଥ ପ୍ରତି ବିଜେପି ଗୁରୁତ୍ବ ଦେବ। ଓଡ଼ିଶାର ପ୍ରତି ୫୦୦ ସ୍ବୟଂ ସହାୟିକା ଗୋଷ୍ଠୀ ପାଇଁ ଶିଳ୍ପ କ୍ଳଷ୍ଟର ନିର୍ମାଣ କରିବୁ। ଏହିଭଳି ଆମେ ଅନେକ ପଦକ୍ଷେପ ନେବୁ, ସେଥିରୁ ଲୋକମାନେ ଅନୁଭବ କରିବେ ଯେ କିପରି ବିକାଶଠାରୁ ସେମାନଙ୍କୁ ଦୂରେଇ ରଖାଯାଇଥିଲା।

ସମ୍ବାଦ: କେନ୍ଦ୍ରୀୟ ନେତାଙ୍କ ଓଡ଼ିଶାଗସ୍ତକୁ ସମାଲୋଚନା କରିବା ସହିତ ଏହା କେବଳ ପର୍ଯ୍ୟଟନ ବୋଲି ବିଜେଡି ମତ ଦେଇଛି। ଏହିଭଳି ମନ୍ତବ୍ୟକୁ ଆପଣ କିଭଳି ଖଣ୍ଡନ କରିବେ?

ମୋଦୀ: ସେମାନଙ୍କୁ ପ୍ରଶ୍ନ ପଚରାଯିବା ଉଚିତ ହେବ କି, ଗତ ୨୫ ବର୍ଷ ଭିତରେ ଓଡ଼ିଶାବାସୀଙ୍କ ପାଇଁ ବିଜେଡି କ’ଣ କରିଛି? ରାଜ୍ୟବାସୀଙ୍କ ପ୍ରତିଭା ଓ ପରିଶ୍ରମ କାହିଁକି ଉପଯୁକ୍ତ ଫଳାଫଳ ପାଇପାରୁନାହିଁ? ଓଡ଼ିଶାର ଯୁବକମାନଙ୍କୁ କାହିଁକି ସୁଯୋଗ ହାସଲ ପାଇଁ ଅନ୍ୟ ରାଜ୍ୟ ଆଡ଼େ ଦୃଷ୍ଟିଦେବାକୁ ପଡୁଛି? ଆମେ ଗଲା ୧୦ବର୍ଷ ମଧ୍ୟରେ ଦେଶର ପ୍ରତ୍ୟେକ କୋଣଅନୁକୋଣରେ ବିକାଶ ପହଞ୍ଚାଇବା ପାଇଁ ନିରନ୍ତର ପରିଶ୍ରମ କରିଛୁ। ଓଡ଼ିଶାର ଲୋକମାନେ ମଧ୍ୟ କେନ୍ଦ୍ର ସରକାରଙ୍କ ଯୋଜନାରୁ ଉପକୃତ ହୋଇପାରିଛନ୍ତି। ଉଦାହରଣ ସ୍ବରୂପ, ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ଆବାସ ଯୋଜନା ଅଧୀନରେ ୨୭ ଲକ୍ଷରୁ ଅଧିକ ଗୃହନିର୍ମାଣ କରାଯାଇଛି, ୫୫ ଲକ୍ଷରୁ ଅଧିକ ମହିଳା ହିତାଧିକାରୀ ମାଗଣା ଗ୍ୟାସ ସଂଯୋଗ ପାଇଛନ୍ତି, ୭୩ ପ୍ରତିଶତ ପରିବାରଙ୍କ ଘରେ ବିଶୁଦ୍ଧ ଜଳ ସଂଯୋଗ ଦିଆଯାଇଛି। ସେହିଭଳି କେନ୍ଦ୍ରୀୟ ପାଣ୍ଠିରୁ ୨୪ ହଜାର କୋଟିରୁ ଅଧିକ ଟଙ୍କା ଡିବିଟି(ପ୍ରତ୍ୟକ୍ଷ ଲାଭ ହସ୍ତାନ୍ତର) ମାଧ୍ୟମରେ ଲୋକଙ୍କ ବ୍ୟାଙ୍କ ଜମାଖାତାରେ ସିଧାସଳଖ ପହଞ୍ଚିଛି। ତେବେ, ଏସବୁ ସତ୍ତ୍ବେ ରାଜ୍ୟର ପ୍ରକୃତ ଦକ୍ଷତା ବା ସମ୍ଭାବନା ଅନାଲୋଚିତ ହୋଇ ରହିଛି। ଗତ ୨୫ ବର୍ଷ ଧରି କ୍ଷମତାରେ ଥିବା ବିଜେଡି ସରକାର ବିକାଶ ପାଇଁ ଏକ ଅର୍ଦ୍ଧ-ହୃଦୟ ତଥା ଦୂର ଆଭିମୁଖ୍ୟ ଦେଖାଇଛି।

ସମ୍ବାଦ: ମଧ୍ୟପ୍ରଦେଶର ‘ଲାଡଲି ବେହନା ଯୋଜନା’ ପରି ଓଡ଼ିଶାର ‘ସୁଭଦ୍ରା ଯୋଜନା’ ଖେଳ ପରିବର୍ତ୍ତନକାରୀ ହେବ କି?

ମୋଦୀ: ଗତ ୧୦ ବର୍ଷ ମଧ୍ୟରେ ମହିଳା ନେତୃତ୍ବାଧୀନ ବିକାଶକୁ ଆମେ ଗୁରୁତ୍ବ ଦେଇଆସିଛୁ। ଆମ ପାଇଁ ମହିଳାମାନଙ୍କୁ ସଶକ୍ତ କରିବା ଅର୍ଥ ସମଗ୍ର ଦେଶକୁ ସଶକ୍ତ କରିବା। କଥାରେ ଅଛି, ଜଣେ ମହିଳାଙ୍କୁ ସଶକ୍ତ କରିବା ମାନେ ସମଗ୍ର ପରିବାରକୁ ସଶକ୍ତ କରିବା। ଜାତୀୟ ସ୍ତରରେ ଆମର ନିଜସ୍ବ ପ୍ରମୁଖ ଯୋଜନାଗୁଡ଼ିକର ହିତାଧିକାରୀ ହେଉଛନ୍ତି ମହିଳା। ମୁଦ୍ରା ଋଣ ହେଉ କି, ସ୍ବନିଧି ଋଣ କି ଷ୍ଟାଣ୍ଡ୍ଅପ୍ ଋଣ, ବିଭିନ୍ନ ଯୋଜନା ଅନ୍ତର୍ଗତ ଅଧିକାଂଶ ସରକାରୀ ଋଣ ମହିଳାମାନଙ୍କୁ ପ୍ରଦାନ କରାଯାଇଛି। ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ଆବାସ ଯୋଜନା ଅଧୀନରେ ଅଧିକାଂଶ ଘର ମହିଳାଙ୍କ ନାମରେ ରହିଛି କିମ୍ବା ସେମାନଙ୍କର ଯୁଗ୍ମ-ମାଲିକାନା ରହିଛି। ଓଡ଼ିଶାରେ ଆମ ଦଳ ‘ମେଧାବୀ ଝିଅ’ ଯୋଜନାରେ ଦାରିଦ୍ର୍ୟ ସୀମାରେଖା ତଳେ ଥିବା ପ୍ରତ୍ୟେକ ଛାତ୍ରୀଙ୍କୁ ୨ ଲକ୍ଷ ଟଙ୍କାର ଆଶ୍ବାସନା ପ୍ରମାଣପତ୍ର ନିଶ୍ଚିତ କରିଛି। ମହିଳାମାନଙ୍କୁ ଅଧିକ ସଶକ୍ତ କରିବାକୁ ‘ସୁଭଦ୍ରା ଯୋଜନା’ ଲକ୍ଷ୍ୟ ରଖିଛି। ଏହି ଯୋଜନା ସେମାନଙ୍କୁ ଦୁଇ ବର୍ଷ ଭିତରେ ସେମାନଙ୍କ ଆବଶ୍ୟକତା ପୂରଣ ପାଇଁ ୫୦ ହଜାର ଟଙ୍କା ବିନିଯୋଗ କରିବାର ସୁବିଧା ଯୋଗାଇବ। ଭବିଷ୍ୟତ ପାଇଁ ଆମର ଦୃଷ୍ଟିକୋଣ ସ୍ପଷ୍ଟ। ଆମେ ଏହାକୁ ଓଡ଼ିଶାରେ ବାସ୍ତବତାରେ ପରିଣତ କରିବା ପାଇଁ ପ୍ରତିବଦ୍ଧ।

ସମ୍ବାଦ: ଭାରତ ଭଳି ଗାଣତନ୍ତ୍ରିକ ଦେଶରେ ବିରୋଧୀ ଦଳର ଭୂମିକା ପ୍ରତି ମୋଦୀଙ୍କ କିଭଳି କଳ୍ପନା ରହିଛି?

ମୋଦୀ: ଆମେ ୧୦ ବର୍ଷ ଧରି ସରକାର ଚଳାଉଛୁ। ଏହି ସମୟ ମଧ୍ୟରେ ବିରୋଧୀ ଏକ ସକ୍ରିୟ ଭୂମିକା ଗ୍ରହଣ କରିବା ଏବଂ ଲୋକଙ୍କ ସ୍ବର ହେବାର ସୁଯୋଗ ପାଇଛନ୍ତି। ଏକ ଗଠନମୂଳକ ଆଭିମୁଖ୍ୟ ସହିତ ସେମାନେ ଦେଶର ବିକାଶ ପରିପ୍ରେକ୍ଷୀରେ ସକାରାତ୍ମକ ପ୍ରଭାବ ପକାଇ ପାରିଥା’ନ୍ତେ। ମାତ୍ର ସେମାନେ ତାହା କରିବାରେ ବିଫଳ ହୋଇଛନ୍ତି। ବିରୋଧୀମାନେ ଏବେ ଏକ ଗୋଲକଧନ୍ଦାରେ ଛନ୍ଦି ହୋଇଛନ୍ତି। ମୁଁ ଯାହା କରୁଛି, ମୋ’ ସରକାର ଯାହା କରୁଛନ୍ତି, ସେମାନେ ସେସବୁକୁ ବିରୋଧ କରିବାକୁ ଚାହାନ୍ତି। ଏଭଳି ମାନସିକତାରେ ସେମାନେ ଦେଶ ବିରୋଧରେ ମଧ୍ୟ ଯିବାକୁ ପ୍ରସ୍ତୁତ। ତେଣୁ ବିରୋଧୀ ଦଳଗୁଡ଼ିକ ନିଜର ଭୂମିକା ନିର୍ବାହ କରିବାରେ ବିଫଳ ହୋଇଛନ୍ତି। ଯଦି ଭାରତୀୟ ଅଭିବୃଦ୍ଧି କାହାଣୀରେ ବିରୋଧୀଦଳ ନିଜକୁ କେବଳ ଏକ ‘ନାହିଁ କହୁଥିବା ଦଳ’ରେ ବିବେଚିତ ହେବାକୁ ଚାହାନ୍ତି, ତା’ହେଲେ ଭୋଟର୍‌ମାନେ ରାଜ୍ୟ ବା ଜାତୀୟ ନିର୍ବାଚନରେ ସେମାନଙ୍କୁ ଅଣଦେଖା କରିବା ସ୍ବାଭାବିକ।

ସମ୍ବାଦ: ବିରୋଧୀଙ୍କ ଅଭିଯୋଗ ଯେ ଗଣତନ୍ତ୍ରର ସ୍ବରକୁ ଦମନ କରିବା ଲାଗି ଇଡି ଓ ସିବିଆଇର ଅପବ୍ୟବହାର କରି ମୋଦୀ ଦେଶରେ ଏକଛତ୍ରବାଦୀ ଶାସନ ଲାଗୁ କରିବାକୁ ଚାହାନ୍ତି। ଏ ସମ୍ପର୍କରେ ଆପଣ କ’ଣ କହିବେ? ?

ମୋଦୀ: ଯଦି ଇଡି ଓ ସିବିଆଇ ବ୍ୟବହାର କରି ଗଣତନ୍ତ୍ରକୁ ସହଜରେ ଦମନ କରାଯାଇପାରିବ, ତେବେ ଏହି ସଂସ୍ଥାଗୁଡ଼ିକୁ ବର୍ଷ ବର୍ଷ ଧରି ବ୍ୟବହାର କରି ଆସୁଥିବା କଂଗ୍ରେସ ଦଳ ୨୦୧୪ ନିର୍ବାଚନକୁ ସହଜରେ ଜିତି ପାରିଥା’ନ୍ତା। ତା’ହେଲେ ସେମାନେ କାହିଁକି ହାରିଗଲେ? ବାସ୍ତବତା ହେଉଛି, ଭାରତ ପରି ବିସ୍ତୃତ ଓ ବିବିଧ ଦେଶରେ ଗଣତନ୍ତ୍ରକୁ ଏଭଳି ଉପାୟ ଦ୍ବାରା ଅଟକାଯାଇପାରିବ ନାହିଁ। ଭାରତୀୟମାନେ ସଜାଗ ଓ ସଚେତନ। ସେମାନଙ୍କର ସାମୂହିକ ଇଚ୍ଛା ଦ୍ବାରା ହିଁ ଦେଶର ଭାଗ୍ୟ ନିର୍ଣ୍ଣୟ ହୋଇଥାଏ। ଆଜି ସୁଦ୍ଧା ଇଡି ଦ୍ବାରା ତଦନ୍ତ କରାଯାଇଥିବା ସମସ୍ତ ଦୁର୍ନୀତି ମାମଲାରେ କେବଳ ୩ ପ୍ରତିଶତ ହିଁ ରାଜନେତା ଜଡ଼ିତ ଅଛନ୍ତି। ବାକି ୯୭ ପ୍ରତିଶତଙ୍କ ଭିତରେ ବିଭିନ୍ନ ସରକାରୀ ଅଧିକାରୀ ଓ ଅପରାଧୀ ଅଛନ୍ତି ଏବଂ ସେମାନଙ୍କ ବିରୋଧରେ କାର୍ଯ୍ୟାନୁଷ୍ଠାନ ମଧ୍ୟ ନିଆଯାଉଛି। ଏଥିରୁ ଏହା ପ୍ରମାଣିତ ଯେ ଆମର ଏହି ସଂସ୍ଥାଗୁଡ଼ିକ କେବଳ ରାଜନୈତିକ ପକ୍ଷପାତିତାରେ କାମ କରୁନାହାନ୍ତି। ଏଥିସହିତ ୨୦୧୪ ପୂର୍ବରୁ ଇଡି କେବଳ ୫ ହଜାର କୋଟି ଟଙ୍କାର ସମ୍ପତ୍ତି ଜବତ କରିଥିଲା ବେଳେ ଗତ ୧୦ ବର୍ଷ ଭିତରେ ସେହି ପରିମାଣ ଏକ ଲକ୍ଷ କୋଟି ଟଙ୍କାକୁ ଟପିଯାଇଛି। ଏହା ଦର୍ଶାଉଛି କି, ଆମ ସଂସ୍ଥାଗୁଡ଼ିକ ସେମାନଙ୍କ କର୍ତ୍ତବ୍ୟ ଠିକ୍‌ରେ ପାଳନ କରୁଛନ୍ତି। ତେଣୁ ସେହି ସଂସ୍ଥାଗୁଡ଼ିକୁ ବିନା ହସ୍ତକ୍ଷେପରେ କାମ କରିବାକୁ ଦିଆଯିବା ଜରୁରୀ। ଇନ୍‌ଡି ଗଠବନ୍ଧନ ପ୍ରଥମଦିନରୁ ଦୁର୍ନୀତିଗ୍ରସ୍ତଙ୍କ ଏକ ମିଳିତ ମଞ୍ଚ ଥିଲା। ନିର୍ବାଚନରେ ହାରିଯିବେ ବୋଲି ଜାଣି ଏହିଭଳି ମନ୍ଦ ବାହାନାର ଆଶ୍ରୟ ନେଇଛନ୍ତି।

ସମ୍ବାଦ: ଆପଣ ଭାବୁଛନ୍ତି କି, ‘୪୦୦ ପାର୍’ ସ୍ଳୋଗାନ ଆତ୍ମସନ୍ତୋଷ ଓ ଅତ୍ୟଧିକ ଆତ୍ମବିଶ୍ବାସ ସୃଷ୍ଟି କରି ବିଜେପିକୁ ପଛକୁ ନେଇଯିବ?

ମୋଦୀ: ଦେଶ ଏକ ନିର୍ଣ୍ଣାୟକ ଓ ସ୍ଥିର ସରକାର ଚାହେଁ ବୋଲି ନିଷ୍ପତ୍ତି ନେଇସାରିଛି। ଦେଶବାସୀ ହିଁ ଆମକୁ ‘ଏଇ ଥର, ୪୦୦ ପାର୍’ର ଲକ୍ଷ୍ୟ ଦେଇଛନ୍ତି। ଏହାର କାରଣ ହେଲା, ବିଜେପିର କାର୍ଯ୍ୟକର୍ତ୍ତାମାନେ ସର୍ବଦା ନିମ୍ନସ୍ତରରୁ କାମ କରୁଛନ୍ତି ଏବଂ ଲୋକଙ୍କ ସହ ରହିଛନ୍ତି। ନିର୍ବାଚନ ଥାଉ କି ନଥାଉ, ସେମାନେ ଲୋକଙ୍କ ଇଚ୍ଛା ସହିତ ତାଳମେଳ ରଖିଛନ୍ତି ଏବଂ ସେମାନଙ୍କ ଆକାଂକ୍ଷା ପୂରଣ ପାଇଁ କାର୍ଯ୍ୟ କରୁଛନ୍ତି। ମୁଁ ଏକଥା ମଧ୍ୟ କହିବାକୁ ଚାହେଁ ଯେ ଆମ ଦଳର ମାର୍ଗଦର୍ଶିକାରେ ‘ଦେଶ ପ୍ରଥମ’ ବୋଲି ରହିଛି। ଏକ ରାଜନୈତିକ ଆନ୍ଦୋଳନ ଭାବେ ଆମେ ଉଭା ହୋଇଛୁ। ଲୋକସଭାରେ ମାତ୍ର ୨ ଜଣ ସାଂସଦ ରହିବାଠାରୁ ଆରମ୍ଭ କରି ଦୁଇଥର ପୂୂର୍ଣ୍ଣ ସଂଖ୍ୟାଗରିଷ୍ଠ ସରକାର ଗଠନ କରିବା ଏବଂ ତୃତୀୟଥର ପାଇଁ ପୂର୍ଣ୍ଣ ସଂଖ୍ୟାଗରିଷ୍ଠତା ହାସଲ କରିବା ଯାଏ ଆମ କାର୍ଯ୍ୟକର୍ତ୍ତାମାନେ ଅହେତୁକ ଦୃଢ଼ତା, କଠିନ ପରିଶ୍ରମ ଓ ସାହସ ପ୍ରଦର୍ଶନ କରି ଆସିଛନ୍ତି। ସେମାନଙ୍କ ପାଇଁ ଏକ ନିର୍ବାଚନରେ ଜିତିବା ଏକମାତ୍ର ଉଦ୍ଦେଶ୍ୟ କି ଶେଷକଥା ନୁହେଁ। ତେଣୁ ଏଠି ଆତ୍ମସନ୍ତୋଷର ସ୍ଥାନ ନାହିଁ।

ସମ୍ବାଦ: ପୂର୍ବ ଭାରତରେ ବିଜେପିର ପ୍ରଦର୍ଶନ ଆଶାନୁରୂପ ନଥିଲା। ୨୦୨୪ ନିର୍ବାଚନ କ’ଣ ବିଜେପି ସପକ୍ଷରେ ଯିବ ବୋଲି ଆପଣ ଭାବୁଛନ୍ତି?

ମୋଦୀ: ୨୦୧୯ ଲୋକସଭା ନିର୍ବାଚନରେ ବିଜେପି ପୂର୍ବ ଭାରତର ଏକମାତ୍ର ବୃହତ୍ତମ ଦଳ ଭାବେ ଉଭା ହୋଇଥିଲା। ଝାଡ଼ଖଣ୍ଡରେ ଏନ୍‌ଡିଏ ୧୪ ଆସନରୁ୧୨ଟି ଜିତିବା ସହ ୫୬ ପ୍ରତିଶତରୁ ଅଧିକ ଭୋଟ ପାଇଥିଲା। ଓଡ଼ିଶାରେ ଆମେ ପୂର୍ବାପେକ୍ଷା ୭ଟି ଆସନ ଅଧିକ ପାଇ ୮ରେ ପହଞ୍ଚିଥିଲୁ। ପଶ୍ଚିମବଙ୍ଗରେ ଆମେ ୪୨ ଆସନରୁ ୧୮ଟି ଜିତିଥିଲୁ ଏବଂ ଏକ ନଗଣ୍ୟ ଉପସ୍ଥିତିରୁ ମୁଖ୍ୟ ବିରୋଧୀ ଦଳ ହୋଇପାରିଥିଲୁ। ବିହାରରେ ଏନ୍‌ଡିଏ ୪୦ଟି ଆସନରୁ ୩୯ଟି ଜିତିଥିଲା। ତେଣୁ, ପୂର୍ବଭାରତରେ ଆମେ ଐତିହାସିକ ସଫଳତା ହାସଲ କରିଥିଲୁ ବୋଲି କୁହାଯାଇପ‌ାରେ। ଏହି ସଫଳତା ହାସଲ ପଛରେ କାରଣ ହେଉଛି ଦୁର୍ନୀତିଗ୍ରସ୍ତ ଓ ବଂଶବାଦୀ ନେତାଙ୍କ ଶାସନରେ ଲୋକେ କ୍ଳାନ୍ତ ହୋଇପଡ଼ିଥିଲେ। ଯେମିତିକି ଟିଏମ୍‌ସି ନେତାମାନେ ବିଭିନ୍ନ ପ୍ରକାର ଦୁର୍ନୀତି କରିବାରେ ରେକର୍ଡ କରିଛନ୍ତି। ନିକଟ ଅତୀତରେ ଓଡ଼ିଶାର ଏକ ମଦ କାରଖାନାରୁ ଜଣେ ଝାଡ଼ଖଣ୍ଡ ସାଂସଦଙ୍କ ପାହାଡ଼ତୁଲ୍ୟ ଟଙ୍କାଗଦା ଉଦ୍ଧାର ହୋଇଥିଲା। ଜବତ ଟଙ୍କାଗୁଡ଼ିକୁ ଗଣିବା ଲାଗି ଆମ ସଂସ୍ଥାଗୁଡ଼ିକୁ ଦିନ ଦିନ ଲାଗିଗଲା। ଏହିସବୁ କାରଣ ପାଇଁ ପୂର୍ବଭାରତରେ ଆମେ ଦୃଢ଼ ଉପସ୍ଥିତି ରଖିପାରିଛୁ।

ସମ୍ବାଦ: ଭାରତୀୟ ଜନସଂଖ୍ୟାର ଏକ ଗୁରୁତ୍ବପୂର୍ଣ୍ଣ ଭାଗ ମଧ୍ୟବିତ୍ତ ଶ୍ରେଣୀର, ଯେଉଁମାନେ ଇନ୍ଧନ ଗ୍ୟାସ ଓ ଖାଦ୍ୟ ଭଳି ଅତ୍ୟାବଶ୍ୟକ ସାମଗ୍ରୀର ଦରବୃଦ୍ଧି ଦ୍ବାରା ଭୀଷଣ ଭାବରେ ପ୍ରଭାବିତ। ଏ ବାବଦରେ ଆପଣଙ୍କ ମତାମତ କ’ଣ?

ମୋଦୀ: ଭାରତରେ ମୁଦ୍ରାସ୍ଫୀତି ଏକ ପ୍ରମୁଖ ପ୍ରସଙ୍ଗ ହୋଇ ରହି ଆସିଛି। କିନ୍ତୁ ଅତୀତର ଅନ୍ୟ କୌଣସି ସରକାର ଗତ ୧୦ ବର୍ଷ ପରି ଏହି ପ୍ରସଙ୍ଗକୁ ଗମ୍ଭୀର ଓ ବିସ୍ତୃତ ଭାବରେ କ୍ବଚିତ୍ ସମାଧାନ କରିଛନ୍ତି। ୧୯୭୪ ମସିହାରେ ଭାରତରେ ମୁଦ୍ରାସ୍ଫୀତି ହାର ସର୍ବାଧିକ ୩୦ ପ୍ରତିଶତ ରହିଥିଲା। ସେତେବେଳେ ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ଇନ୍ଦିରା ଗାନ୍ଧୀ ଥିଲେ। ୧୯୮୦ ଦଶକର ଆରମ୍ଭରେ ଦେଶ ପୁଣି ଇନ୍ଦିରାଙ୍କ ଅଧୀନରେ ଥିଲା ବେଳେ ଏହା ୧୦ ପ୍ରତିଶତରୁ ଅଧିକ ରହିଥିଲା। ୧୯୯୦ ଦଶକରେ ଏହା ମଧ୍ୟ ସମାନ ସ୍ତରରେ ରହିଲା। ୨୦୧୦ରେ ଜଣେ ଅର୍ଥନୀତିଜ୍ଞ ସରକାରଙ୍କ ନେତୃତ୍ବ ନେଉଥିବା ସତ୍ତ୍ବେ ମୁଦ୍ରାସ୍ଫୀତି ପ୍ରାୟ ୧୨ ପ୍ରତିଶତ ରହିଥିଲା। ସେହି ତୁଳନାରେ ୨ବର୍ଷର ମହାମାରୀ, ବୈଶ୍ବିକ ଅନିଶ୍ଚିତତା ଏବଂ ଏହାର ପ୍ରଭାବ ଆମର ଇନ୍ଧନ, ସାର ଓ ଖାଦ୍ୟ ଉପରେ ପଡ଼ିବା ସତ୍ତ୍ବେ ଆମ ସରକାର ଉପଭୋକ୍ତା ଦର ସୂଚକାଙ୍କ(ସିପିଆଇ) ମୁଦ୍ରାସ୍ଫୀତିକୁ ୫ ପ୍ରତିଶତ ତଳେ ରଖିବାରେ ସଫଳ ହୋଇଛି। ସ୍ବାଧୀନତା ପରବର୍ତ୍ତୀ ସମସ୍ତ ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀଙ୍କ ମଧ୍ୟରେ ମୁଦ୍ରାସ୍ଫୀତି ନିୟନ୍ତ୍ରଣ ଉପରେ ଆମର ଦକ୍ଷତା ସର୍ବୋତ୍ତମ ରହିଛି। ଅନେକ ବିକଶିତ ରାଷ୍ଟ୍ର ତୁଳନାରେ ମୁଦ୍ରାସ୍ଫୀତି ହାର କମ୍ ଥିବା ଦେଶମାନଙ୍କ ଭିତରେ ଭାରତ ଅନ୍ୟତମ। ଏହାର କାରଣ ହେଉଛି, ଆମ କୃଷକମାନେ ବିଶ୍ବ ଖାଦ୍ୟ ଚାହିଦା ପୂରଣ କରିବାରେ ସଫଳ ହୋଇଛନ୍ତି। ଭାରତରେ ଆଜି ବିଶ୍ବର ସବୁଠୁ ଶସ୍ତା ୟୁରିଆ ସାର ରହିଛି। ତେଣୁ ୟୁକେ, ଫ୍ରାନ୍ସ ଓ ଜର୍ମାନୀ ପରି ବୃହତ୍ତର ଅର୍ଥନୈତିକ ରାଷ୍ଟ୍ର ତୁଳନାରେ ଆମେ ଖାଦ୍ୟ ଓ ସାର ମୁଦ୍ରାସ୍ଫୀତିକୁ କମ୍ ରଖିପାରିବୁ। ଆଜି ବିଶ୍ବରେ ଦେଖାଦେଇଥିବା ବିବାଦର ମୁକାବିଲା ଯୋଗୁଁ ବିଶ୍ବସ୍ତରରେ ତୈଳଦରରେ ବୃଦ୍ଧି ଘଟିଛି। କିନ୍ତୁ ବିଶ୍ବସ୍ତରୀୟ ଚାପ ସତ୍ତ୍ବେ ଲୋକଙ୍କୁ ମହଙ୍ଗା ପେଟ୍ରୋଲ ଓ ଡିଜେଲ ଭାର ବହନ କରିବାକୁ ପଡ଼ିବନି ବୋଲି ଆମ ସରକାର ନିଶ୍ଚିତ କରିଛନ୍ତି। ଏହା ବ୍ୟତୀତ, ଆମେ ଗରିବ ଓ ମଧ୍ୟବିତ୍ତ ଶ୍ରେଣୀର ଲୋକଙ୍କୁ ମୁଦ୍ରାସ୍ଫୀତିର ପ୍ରତିକୂଳ ପ୍ରଭାବରୁ ରକ୍ଷା କରିଛୁ। ମୁଦ୍ରାସ୍ଫୀତିର ମୁକାବିଲା ପାଇଁ ଆମେ ସେମାନଙ୍କୁ ସାମାଜିକ ଓ ଅର୍ଥନୈତିକ ଉପକରଣ ଯୋଗାଇ ସଶକ୍ତ କରିଛୁ। ସେହିପରି, ସ୍ବଳ୍ପମୂଲ୍ୟର ଏଲ୍ଇଡି ବଲ୍‌ବ ଯୋଗୁଁ ପ୍ରତ୍ୟେକ ପରିବାର ପାଇଁ ହାରାହାରି ବିଦ୍ୟୁତ୍ ବିଲ ହ୍ରାସ ପାଇଛି। ଆଜି ୭ ଲକ୍ଷ ଟଙ୍କା ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ କୌଣସି ଆୟକର ନାହିଁ। ଅର୍ଥାତ୍ ଲୋକେ ହଜାରେ ଟଙ୍କା ସଞ୍ଚୟ କରିପାରୁଛନ୍ତି ଯାହା ଅନ୍ୟଥା ଆୟକର ଆଡ଼କୁ ଯାଇଥା’ନ୍ତା। ଆୟୁଷ୍ମାନ୍ ଭାରତ ଯୋଜନା ଅଧୀନରେ ମାଗଣା ଚିକିତ୍ସା ଯୋଗୁଁ ପରିବାର ଉପରେ ୫ ଲକ୍ଷ ଟଙ୍କା ଯାଏ ସ୍ବାସ୍ଥ୍ୟ ବୋଝ ହ୍ରାସ ପାଇଛି। ଆଗରୁ ବଜାରରେ ମିଳୁଥିବା ୧୦୦ ଟଙ୍କାର ଔଷଧ ଏବେ ଜନ ଔଷଧି ଯୋଜନାରେ ମାତ୍ର ୧୦ ଟଙ୍କା କି ୨୦ ଟଙ୍କାରେ ଉପଲବ୍ଧ ହୋଇପାରୁଛି। କୋଭିଡ ବେଳରୁ ୮୦ କୋଟି ଲୋକ ମାଗଣା ଖାଦ୍ୟଶସ୍ୟ ଗ୍ରହଣ କରୁଛନ୍ତି ଯାହା ସେମାନଙ୍କ ଜୀବନକୁ ବହୁତ ସହଜ କରିଦେଇଛି। ନିକଟରେ ହୋଇଥିବା ଏକ ସର୍ବେକ୍ଷଣରୁ ଜଣାପଡ଼ିଛି କି, ଗ୍ରାମାଞ୍ଚଳର ପ୍ରଥମ ପରିବାରମାନେ ସେମାନଙ୍କ ମାସିକ ଖର୍ଚ୍ଚର ୫୦ ପ୍ରତିଶତରୁ କମ୍ ଅଣଖାଦ୍ୟ ବାବଦରେ ଖର୍ଚ୍ଚ କରୁଛନ୍ତି, ଯାହା ସେମାନଙ୍କ ସମୃଦ୍ଧିରେ ବୃଦ୍ଧିକୁ ଦର୍ଶାଉଛି। ଆଜି ଭାରତରେ ମାତ୍ର ୧୦ ଟଙ୍କାରେ ୧ ଜିବି ଡାଟା ପରି ବିଶ୍ବର ସବୁଠୁ ଶସ୍ତା ଇଣ୍ଟରନେଟ୍ ସେବା ଉପଲବ୍ଧ। ୨୦୧୪ରେ ଏହା ୩୦୦ ଟଙ୍କା ହୋଇଥିବ। ଏହି ସ୍ବଳ୍ପ ମୂଲ୍ୟ ଡିଜିଟାଲ ଓ ଆର୍ଥିକ ଅନ୍ତର୍ଭୁକ୍ତ ସଂସ୍କାରକୁ ବ୍ୟାପକ ପରିମାଣରେ ବଢ଼ାଇବାକୁ ସାହାଯ୍ୟ କରିଛି।

ସମ୍ବାଦ: ଓଡ଼ିଶାର ଲୋକମାନଙ୍କ ପାଇଁ ମୋଦୀଙ୍କ ଗ୍ୟାରେଣ୍ଟିରେ କ’ଣ ରହିଛି?

ମୋଦୀ: ମୋର ଗ୍ୟାରେଣ୍ଟି ଓଡ଼ିଶାର ଗୌରବକୁ ପୁନର୍ଜୀବିତ କରୁଛି। କେବଳ ଭାରତରେ ନୁହେଁ, ବିଶ୍ବରେ ମଧ୍ୟ ଓଡ଼ିଶାର ସଂସ୍କୃତି ଓ ଭାଷାର ଗୌରବକୁ ପୁନଃସ୍ଥାପିତ କରୁଛି। ମୋର ଗ୍ୟାରେଣ୍ଟି ହେଉଛି ମହିଳା ନେତୃତ୍ବ ବିକାଶ। ମୋର ଗ୍ୟାରେଣ୍ଟି ହେଉଛି ଓଡ଼ିଶାର ଯୁବକମାନଙ୍କ ପାଇଁ ଅଭିବୃଦ୍ଧି ଓ ସୁଯୋଗ ଆଣିବା। ମୋର ଗ୍ୟାରେଣ୍ଟି ଓଡ଼ିଶାରେ ଅଧିକ ଶିଳ୍ପ, ପୁଞ୍ଜିନିବେଶ ଓ ଭିତ୍ତିଭୂମିକୁ ସ୍ବାଗତ କରୁଛି। ମୋର ଗ୍ୟାରେଣ୍ଟି ହେଉଛି ଦୁର୍ନୀତିମୁକ୍ତ ଓଡ଼ିଶା ଏବଂ ଚିଟ୍ ଫଣ୍ଡ୍ ଯୋଜନାରେ ହଜିଯାଇଥିବା ଟଙ୍କା ଫେରାଇ ଆଣିବା। ମୋର ଗ୍ୟାରେଣ୍ଟି ‘ପିଏମ୍ ସୂର୍ଯ୍ୟଘର, ମାଗଣା ବିଜୁଳି’ ଯୋଜନାରେ ଓଡ଼ିଶାବାସୀଙ୍କ ବିଦ୍ୟୁତ୍ ବିଲ୍‌କୁ ଶୂନକୁ ଆଣିବା। ୨୦୨୭ ସୁଦ୍ଧା ଓଡ଼ିଶାରେ ୨୫ ଲକ୍ଷ ଲକ୍ଷପତି ଦିଦି ସୃଷ୍ଟି କରିବା ହେଉଛି ମୋ’ ଗ୍ୟାରେଣ୍ଟି। ବିକଶିତ ଭାରତ ପାଇଁ ଏକ ବିକଶିତ ଓଡ଼ିଶା ହେଉଛି ମୋ’ ଗ୍ୟାରେଣ୍ଟି। ଆମର ସଂକଳ୍ପପତ୍ର ଓଡ଼ିଶାର ଉଜ୍ବଳ ଭବିଷ୍ୟତ ପାଇଁ ଏକ ରୋଡ୍-ମ୍ୟାପ୍ ପ୍ରସ୍ତୁତ କରିଛି। ଉଦାହରଣ ସ୍ବରୂପ, ଆମେ ଓଡ଼ିଶାର ଦୀର୍ଘ ଉପକୂଳର ସମ୍ଭାବନାକୁ ଖୋଜି ବାହାର କରିବାକୁ ଚାହୁଛୁ। ଆମର ଇସ୍ତାହାର ମତ୍ସ୍ୟଜୀବୀମାନଙ୍କୁ ଅତ୍ୟାଧୁନିକ ଜ୍ଞାନକୌଶଳ, ଆଧୁନିକ ପଦ୍ଧତି ଏବଂ ଗୁରୁତ୍ବପୂର୍ଣ୍ଣ ସୂଚନା ପ୍ରଦାନ କରିବାର ପ୍ରତିଶ୍ରୁତି ଦେଉଛି। ଆମ ଦୃଷ୍ଟିକୋଣରେ ଉତ୍ପାଦନ କ୍ଳଷ୍ଟର ପ୍ରତିଷ୍ଠା, ବୈଷୟିକ ଜ୍ଞାନକୌଶଳ, ଶୈବାଳ ଓ ମୁକ୍ତା ଚାଷକୁ ପ୍ରୋତ୍ସାହିତ କରିବା ଆଦି ରହିଛି।

ଆମର ଅନ୍ନଦାତା ହେଉଛନ୍ତି ଆମର ମୁଖ୍ୟ ପ୍ରାଥମିକତା ଏବଂ ଓଡ଼ିଶାର କୃଷକମାନେ ଦେଶର ଅନ୍ୟ କୃଷକମାନଙ୍କ ସହିତ ସମାନ ଭାବରେ ଏମ୍ଏସ୍‌ପି ଗ୍ରହଣ କରିବା ଆମେ ନିିଶ୍ଚିତ କରିବୁ। ଓଡ଼ିଶାରେ ଶୀତଳ ଭଣ୍ଡାର ପ୍ରତିଷ୍ଠା ଓ କୃଷି ପ୍ରକ୍ରିୟାକରଣ ୟୁନିଟ୍ ସ୍ଥାପନ ପାଇଁ ଆମେ ୩,୦୦୦ କୋଟିର ‘କୃଷି ସଂରକ୍ଷଣ କୋଷ’ ସ୍ଥାପନ କରିବୁ। ଆମ ସଂକଳ୍ପ ହେଉଛି ଓଡ଼ିଶାର ଗରିବମାନଙ୍କ ପାଇଁ ୧୫ ଲକ୍ଷ ଗୃହ ନିର୍ମାଣ କରିବା ଏବଂ ଡବଲ ଇଞ୍ଜିନ୍ ସରକାରର ଶହେ ଦିନ ଭିତରେ ଆୟୁଷ୍ମାନ ଭାରତ ଯୋଜନାକୁ କାର୍ଯ୍ୟକାରୀ କରି ୫ ଲକ୍ଷ ଟଙ୍କା ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ମାଗଣା ଚିକିତ୍ସା ସୁବିଧା ଯୋଗାଇବା। ଓଡ଼ିଶାର ପ୍ରଗତିରେ ସିଧାସଳଖ ସହଯୋଗ କରୁଥିବା ଛୋଟ ବ୍ୟବସାୟ ଓ ଏମ୍ଏସ୍ଏମ୍ଇଗୁଡ଼ିକ ପାଇଁ ‘ଇଜ୍‌ ଅଫ୍ ଡୁଇଂ’ ନିଶ୍ଚିତ କରିବାକୁ ଆମେ ପ୍ରତିବଦ୍ଧ। ଆମ ଦୃଷ୍ଟିକୋଣରେ ଓଡ଼ିଶାକୁ ଏକ ଉଦ୍ୟୋଗ କେନ୍ଦ୍ରରେ ପରିଣତ ସହ ନିଜସ୍ବ ଜ୍ଞାନକୌଶଳରେ ୪ଟି ଆଇଟି ପାର୍କ ସ୍ଥାପନ କରିବା ମଧ୍ୟ ଅନ୍ତର୍ଭୁକ୍ତ।

Following is the clipping of the interview:

 Source: Sambad