وزیراعظم جناب نریندر مودی نے آج کانپور اتر پردیش میں نیشنل گنگا کونسل کی پہلی میٹنگ کی صدارت کی۔ اس کونسل کو آلودگی روکنے اور گنگا اور اس کی معاون ندیوں سمیت دریائے گنگا کی صفائی کی نگرانی کی مجموعی ذمہ داری سونپی گئی ہے۔ کونسل کی پہلی میٹنگ کا مقصد متعلقہ ریاستوں کے ساتھ ساتھ متعلقہ مرکزی وزارتوں کے تمام محکموں میں ‘گنگا پر مرکوز نظریے کی اہمیت’ کو تقویت پہنچانا ہے۔

 وزیراعظم جناب نریندر مودی نے آج کانپور اتر پردیش میں نیشنل گنگا کونسل کی پہلی میٹنگ کی صدارت کی۔ اس کونسل کو آلودگی روکنے اور گنگا اور اس کی معاون ندیوں سمیت دریائے گنگا کی صفائی کی نگرانی کی مجموعی ذمہ داری سونپی گئی ہے۔ کونسل کی پہلی میٹنگ کا مقصد متعلقہ ریاستوں کے ساتھ ساتھ متعلقہ مرکزی وزارتوں کے تمام محکموں میں ‘گنگا پر مرکوز نظریے کی اہمیت’ کو تقویت پہنچانا ہے۔

آج کی میٹنگ میں جل شکتی، ماحولیات، زراعت اور دیہی ترقی ،صحت، شہری امور ، بجلی ، سیاحت ، جہاز رانی کے مرکزی وزرا اور اترپردیش اور اتراکھنڈ کے وزرائے اعلیٰ ، بہار کے نائب وزیراعلیٰ، نیتی آیوگ کے وائس چیئرمین اور دیگر سینئر افسروں نے شرکت کی۔  مغربی بنگال  نے میٹنگ میں شرکت نہیں کی اور جھارکھنڈ نے میٹنگ میں اس وجہ سے شرکت نہیں کی کہ  وہاں الیکشن چل رہے ہیں اور ماڈل ضابطۂ اخلاق نافذ ہے۔

دریائے گنگا کی صفائی کے مختلف پہلوؤں پر غور  کرتے ہوئے اور اب تک کیے گئے کام کی ترقی کا جائزہ لیتے ہوئے وزیراعظم نے ‘سوچھتا’، ‘اورلتا’ اور ‘نرملتا’ پر زور دیا۔  انہوں نے کہا کہ ماں گنگا برصغیر کا سب سے  پاکیزہ  دریا ہے اور اُس کی صاف صفائی تعاون والی وفاقیت کی ایک درخشاں مثال ہونی چاہیے۔ وزیراعظم نے کہا کہ گنگا کی صفائی ایسا چیلنج ہے جو ملک میں طویل مدت سے التوا کا شکار ہے۔ انہوں نے کہا  کہ حکومت کے ذریعے  2014 میں ‘نمامی گنگے’ شروع کیے جانے کے بعد سے آلودگی کا سامنا کرنے ، گنگا کی حفاظت اور صاف صفائی کی مختلف  سرکاری کوششوں  اور سرگرمیوں کو یکجا کرنے کی جامع پہل کی گئی ہے۔ اِس کی قابل قدر حصولیابیوں میں پیپر ملوں کے ذریعے فضلے کی نکاسی پوری طرح بند کیا جانا اور ٹینریز سے ہونے والی آلودگی کو کم کرنا شامل ہے، لیکن ابھی بہت کچھ کیے جانے کی ضرورت ہے۔

پہلی بار مرکزی حکومت نے سال 2015 سے 2020 تک کی مدت کے لیے جن پانچ ریاستوں سے گنگا گزرتی ہےاُن کو 20 ہزار کروڑ روپے دینے کا عہد کیا تاکہ دریا میں پانی کے بلاروک ٹوک  اور کافی بہاؤ کو یقینی بنایا جا سکے۔ اس سلسلے میں اب تک خصوصی طور پر نئے سیویج ٹریٹمنٹ پلانٹوں کی تعمیر کے لیے سات ہزار سات سو کروڑ روپے خرچ کیے جا چکے ہیں۔

وزریاعظم نے اِس بات پر زور دیا کہ نرمل گنگا کےلیے فریم ورک کو بہتر بنانے کے واسطے قومی دریاؤں کے کناروں پر واقع شہروں سے بہترین طریقۂ کاروں کی معلومات کے ذریعے مزید بیداری پھیلانے اور بڑے پیمانے پر عوامی تعاون کی ضرورت ہوگی۔ اس سلسلے میں منصوبوں پر تیزی سے عمل درآمد کے لیے موثر فریم ورک مہیا کرانے کے مقصد سے تمام اضلاع میں ڈسٹرکٹ گنگا کمیٹیوں کی صلاحیت میں اضافہ کرنا ہوگا۔

حکومت نے گنگا کی صفائی کے پروجیکٹوں کے لیے شخصی طور پر چندا دینے والوں، این آر آئیز  اور کارپوریٹ اداروں کے لیے  کلین گنگا فنڈ  (سی جی ایف) قائم کیا ہے۔ وزیراعظم نے 2014 سے حاصل ہونے والے تحفوں کی نیلامی سے ملنے والی رقم اور سیول پیس پرائز کی انعامی رقم سے سی جی ایف کے لیے ذاتی طور پر 16.53 کروڑ روپے چندہ دیا ہے۔

وزیراعظم نے ایسے کلی نظریے پر زور دیا ہے جس میں ‘نمامی گنگے ’، ‘ارتھ گنگا’ یا پائیدار ترقی کے ماڈل کے طور پر  ابھرتا ہے، جس کا فوکس گنگا سے متعلق اقتصادی سرگرمیوں پر ہے۔ اس عمل کے ایک حصے کے طور پر کسانوں کی  پائیدار زرعی طریقے اختیار کرنے کے لیے حوصلہ افزائی کی جائے اس میں گنگا کے کناروں پر زیرو بجٹ زراعت ، پھلوں کے درخت لگانا اور  پودوں کی نرسری قائم کرنا شا مل ہے۔ ان پروگراموں کے لیے خواتین کے اپنی مدد آپ کرنے والے گروپوں اور سابق فوجیوں کی تنظیموں کو ترجیح  دی جا سکتی ہے۔ ایسے طریقہ ٔ کار کے ساتھ ساتھ مذہبی اور ایڈوینچر  ٹورزم کے مقصد سے دریا کے کنارے واٹر اسپورٹس کے لیے بنیادی ڈھانچے تیار کر کے اور کیمپ سائٹ بنا کر سائیکلنگ اور واکنگ ٹریکس وغیرہ تعمیر کر کے یہاں کے سیاحتی امکان کا فائدہ اٹھایا جا سکتا ہے۔ ایکو ٹورزم اور گنگا وائلڈ لائف تحفظ اور کروز ٹورزم وغیرہ کی حوصلہ افزائی سے حاصل ہونے والی آمدنی سے  گنگا کی صفائی کے لیے پائیدار آمدنی کےذرائع پیدا کرنے میں مدد ملے گی۔

نمامی گنگے اور ارتھ گنگا کے تحت مختلف اسکیموں اور پہل سے متعلق کام کی ترقی اور سرگرمیوں کی نگرانی کے لیے وزیراعظم نے ایک ڈیجیٹل ڈیش بورڈ قائم کرنے کی ہدایت بھی دی، جہاں پر گاوؤں اور شہری اداروں سے حاصل ہونے والے اعداد و شمار کی نتی آیوگ اور جل شکتی کی وزارت کے ذریعے روز مرہ نگرانی کی جائے۔  وزیراعظم نے کہا کہ خواہش مند اضلاع کی طرح گنگا کے کنارے والے تمام اضلاع کو نمامی گنگا کے تحت کوششوں کی نگرانی کے لیے ایک فوکس ایریا تیار کرنا چاہیے۔

اس میٹنگ سے قبل وزیراعظم نے مایہ ناز مجاہد آزادی چندر شیکھر آزاد کو خراج عقیدت پیش کیا اور نمامی گنگے سے متعلق کاموں کے بارے میں ایک نمائش اور چندشیکھر آزاد ایگری کلچر یونیورسٹی میں پروجیکٹس دیکھے۔ بعد میں وزیراعظم نے اٹل گھاٹ کا دورہ کیا اور سیسا مئو نالا میں کامیابی کے ساتھ پایۂ تکمیل تک پہنچے کام کا بھی جائزہ لیا۔

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भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

प्रानोप्रिय बोराक उपत्यकार, सम्मानित नागरिकवृंद, आपनादेर शोबाई के आमार प्रोणाम जानाई।

राज्य के लोकप्रिय मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा जी, केंद्रीय मंत्रिमंडल में मेरे साथी सर्बानंद सोनोवाल जी, उपस्थित राज्य सरकार के मंत्रीगण, जनप्रतिनिधिगण और मेरे प्यारे भाईयों और बहनों।

संस्कृति, साहस और जीवंतता से भरपूर बराक वैली के आप सभी परिवारजनों के बीच आना बहुत विशेष अनुभव रहता है। सिलचर को तो बराक घाटी का गेटवे कहा जाता है। ये वो जगह है जहां इतिहास, भाषा, संस्कृति और उद्यम ने मिलकर अपनी एक विशेष पहचान बनाई है। यहां बांग्ला बोली जाती है, असमिया की गूँज सुनाई देती है और अन्य जनजातीय परंपराएं भी फुलती-फलती हैं। यहां इतनी विविधता को अपनी ताकत बनाकर आप सभी भाईचारे के साथ, सद्भाव के साथ, इस पूरे क्षेत्र का विकास कर रहे हैं। ये बराक वैली का बहुत बड़ा सामर्थ्य है

साथियों,

बराक नदी के उपजाऊ मैंदानों ने, यहां के चाय बागानों ने, यहां के किसानों को, यहां के ट्रेड रूट्स को, एजुकेशन सेंटर्स को हमेशा प्रोत्साहित किया है। ये क्षेत्र असम ही नहीं, पूरे नॉर्थ ईस्ट और पश्चिम बंगाल को भी कनेक्ट करता है। बराक घाटी के इसी महत्व को 21वीं सदी में और अधिक सशक्त करने के लिए मैं आज आपके बीच आया हूं, आपके आशीर्वाद लेने आया हूं। थोड़ी देर पहले यहां बराक वैली की कनेक्टिविटी से जुड़े, नॉर्थ ईस्ट की कनेक्टिविटी से जुड़े, हजारों करोड़ रूपये के प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास और लोकार्पण हुआ है। रोड़ हो, रेल हो, एग्रीकल्चर कॉलेज हो, ऐसे हर प्रोजेक्ट्स से बराक वैली नॉर्थ ईस्ट का एक बड़ा लॉजिस्टिक और ट्रेड हब बनने जा रहा है। इससे यहां के नौजवानों के लिए रोजगार के, स्वरोजगार के अनगिनत, अनगिनत अवसर बनने जा रहे हैं। मैं आप सभी को इन सभी विकास परियोजाओं के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

आजादी के अनेक दशकों तक कांग्रेस की सरकारों ने नॉर्थ ईस्ट को दिल्ली से और दिल से, दोनों से ही दूर रखा। कांग्रेस ने नॉर्थ ईस्ट को एक प्रकार से भुला दिया था। लेकिन बीजेपी की डबल इंजन सरकार ने नॉर्थ ईस्ट को ऐसे कनेक्ट किया है कि आज हर तरफ इसकी चर्चा है। आज नॉर्थ ईस्ट भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी का केंद्र है, दक्षिण पूर्व एशिया के साथ भारत को जोड़ने वाला सेतु बन रहा है।

लेकिन साथियों,

जैसे कांग्रेस ने नॉर्थ ईस्ट को अपने हाल पर छोड़ दिया था, ठीक वैसे ही बराक वैली को भी बेहाल करने में कांग्रेस की बहुत बड़ी भूमिका रही है। जब देश आज़ाद हुआ, तो कांग्रेस ने ऐसी बाउंड्री खींचने दी, जिससे बराक घाटी का समंदर से संपर्क ही कट गया। जो बराक वैली कभी ट्रेड रूट के रूप में, एक औद्योगिक केंद्र के रूप में जानी जाती थी, उस बराक वैली से उसकी ताकत ही छीन ली गई। आज़ादी के बाद भी दशकों तक कांग्रेस की सरकारें रहीं, लेकिन बराक घाटी के विकास के लिए कुछ खास नहीं हुआ।

साथियों,

बीजेपी की डबल इंजन सरकार, इस स्थिति को बदल रही है। हम बराक घाटी को फिर से व्यापार कारोबार का बड़ा हब बनाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं। आज इस दिशा में एक बहुत बड़ा और अत्यंत महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। आज करीब 24 हजार करोड़ रुपए के शिलांग-सिलचर हाई-स्पीड कॉरिडोर का भूमि पूजन हुआ है, 24 हजार करोड़ रुपए, कितने? कितने? 24 हजार करोड़ रुपए। कितने? कितने? कितने? ये जरा कांग्रेस वालों को पूछना, जरा कागज पेन देना और उनको कहना कि जरा कागज पर 24 हजार करोड़ लिखो तो, कितने, कितने जीरो लगते हैं, आएगा नहीं उनको। ये कांग्रेस वालों के दिमाग का ताला जहां बंद हो जाता है ना, वहां हमारा काम शुरू हो जाता है। यह नॉर्थ-ईस्ट का पहला Access Controlled High-Speed Corridor होगा।

साथियों,

ये सिर्फ एक हाईवे प्रोजेक्ट नहीं है, ये नॉर्थ ईस्ट के लोगों के दशकों पुराने इंतजार का अंत हो रहा है। इस कॉरिडोर से सिलचर, मिजोरम, मणिपुर और त्रिपुरा, ये सब राज्य कनेक्ट होने वाले हैं। इन तीनों राज्यों से आगे बांग्लादेश और म्यांमार हैं और फिर आगे दक्षिण-पूर्व एशिया का विशाल बाजार है। यानी बराक घाटी, एक बहुत उज्जवल भविष्य की तरफ जुड़ने का आज शिलान्यास कर रही है। इसका फायदा असम सहित पूरे नॉर्थ ईस्ट के किसानों को होगा, यहां के नौजवानों को होगा। इतनी अच्छी कनेक्टिविटी वाले ये सारा क्षेत्र बनने से, इस पूरे क्षेत्र में इंडस्ट्री को बल मिलेगा, टूरिज्म को फायदा होगा और सबसे बड़ी बात, हिन्दुस्तान का कोना-कोना आसानी से आप लोगों से जुड़ जाने वाला है।

साथियों,

आप सभी यहां सिलचर में ट्रैफिक को लेकर भी काफी परेशान रहे हैं। अब सिलचर फ्लाईओवर से ये समस्या भी कम हो जाएगी। सिल्चर मेडिकल कॉलेज, NIT सिल्चर और असम यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे युवा साथियों के लिए, ये बहुत अच्छी सुविधा हो गई है। इससे आने-जाने में उनका बहुत ही कीमती समय बचने वाला है।

साथियों,

डबल इंजन की बीजेपी सरकार, असम की रेल कनेक्टिविटी पर भी बहुत अधिक काम कर रही है। खासतौर पर रेलवे का बिजलीकरण हमारी बहुत बड़ी प्राथमिकता रहा है। अब असम का ढाई हजार किलोमीटर से अधिक का रेल नेटवर्क, अब इलेक्ट्रिफाई हो चुका है। अब यहां भी तेज़ गति से ट्रेनें चल पाएंगी, इससे बराक वैली के स्वच्छ वातावरण को भी फायदा मिलेगा।

साथियों,

बराक वैली के किसानों और यहां के चाय-बागानों में काम करने वाले श्रमिकों का असम के विकास में बहुत बड़ा योगदान है। डबल इंजन सरकार किसानों के कल्याण के लिए निरंतर कदम उठा रही है। कल ही, गुवाहाटी से मैंने पीएम किसान सम्मान निधि की अगली किश्त जारी की है। अब तक पीएम किसान सम्मान निधि का देश के किसानों को लाखों करोड़ रूपया, और अकेले हमारे असम के किसानों को 20 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा पैसा असम के किसानों को मिल चुका है। अब आप सोचिये, हमने 10 साल में यहां के किसानों की जेब में, 20 हजार करोड़ रुपया उनकी जेब में दिया है। ये कांग्रेस वालों ने 10 साल राज किया, प्रधानमंत्री तो असम से चुनकर के गए थे, उसके बावजूद भी एक फूटी कौड़ी नहीं दी, एक फूटी कौड़ी किसानों को नहीं दी, हमने 20 हजार करोड़ रूपया दिया है। कल बराक वैली के हज़ारों किसानों के खाते में भी, ये आखिरी किस्त भी पहुंची है, ये वाली किस्त पहुंची है और फिर जब चुनाव के बाद आएगा समय, तब भी पहुंचेगी। ये पैसा खेती से जुड़ी छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करने में, मेरे गांव के छोटे-छोटे किसान भाई-बहनों को बहुत बड़ी मदद कर रहा है।

साथियों,

बराक वैली अब अपनी फसलों के लिए ही नहीं, बल्कि कृषि से जुड़ी पढ़ाई और रिसर्च के लिए भी जानी जाएगी। पत्थरकांडी में बराक घाटी के पहले एग्रीकल्चर कॉलेज का निर्माण कार्य आज से शुरु हो रहा है। इससे किसानों को तो फायदा होगा ही, यहां के नौजवानों को कृषि स्टार्टअप्स के लिए सहयोग, समर्थन और प्रोत्साहन मिलेगा।

साथियों,

भाजपा का मंत्र है- जो विकास की दौड़ में पीछे रह गया, उसे प्राथमिकता देना। कांग्रेस की सरकारें बॉर्डर एरिया को, देश के अंतिम गांव मानती थीं। हम बॉर्डर के गांवों को देश के पहले गांव मानते हैं। और इसलिए, बॉर्डर एरिया के विकास के लिए, कछार जिले से ही वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम का अगला चरण शुरु किया था। इससे बराक वैली के अनेक गांवों में भी सुधार होना तय हो गया है।

साथियों,

यहां बड़ी संख्या में चाय-बागानों में कार्य करने वाले साथी भी हैं। असम सरकार ने, चाय-बगानों से जुड़े हजारों परिवारों को, उनकी जमीन का अधिकार देने का ऐतिहासिक काम किया है, वो इन परिवारों के भविष्य को बदलने की एक बड़ी शुरुआत है। जमीन के पट्टे मिलने से, इन परिवारों को सुरक्षा मिली है, उन्हें सम्मान का जीवन मिलना सुनिश्चित हुआ है।

साथियों,

आप जरा वहां से दूर रहिए, अब जगह नहीं है, आगे नहीं आ सकते हैं। देखिए वहां से जरा दूर रखिये उनको, अब आगे नहीं आ सकते भईया, अरे हमारे असम के भाई-बहन तो बड़े समझदार हैं। आपका से प्यार, आपका आशीर्वाद, ये इतनी बड़ी ताकत है, कृपा करके आप।

साथियों,

मैं हेमंता जी की सरकार को बधाई देता हूं, चाय-बागानों में करीब 200 सालों से सेवा दे रही अनेक पीढ़ियों के संघर्ष को आपने आज सम्मान दिया है। देखिए मेरी इस बात पर बादल भी गरजने लग गए। मुझे खुशी है कि जिनको पहले की सरकारों ने अपने हाल पर छोड़ दिया था, उनकी सुध बीजेपी सरकार ने ली है।

साथियों,

ये सिर्फ भूमि पर कानूनी अधिकार का ही मामला नहीं है। इससे ये लाखों परिवार, केंद्र और राज्य सरकार की अनेक कल्याणकारी योजनाओं से भी तेज़ी से जुड़ेंगे। पक्के घर की योजना हो, बिजली, पानी और गैस की योजनाएं हों, इन सब स्कीम्स का पूरा फायदा अब इन परिवारों को मिलना संभव होगा।

साथियों,

बीते सालों में बीजेपी सरकार ने चाय-बागानों में अनेक स्कूल खोले हैं, बच्चों को स्कॉलरशिप्स दिए हैं। सरकारी नौकरियों के लिए भी रास्ते खोले गए हैं। ऐसे प्रयासों से चाय-बागानों के युवाओं के लिए सुनहरे भविष्य के द्वार खुल रहे हैं।

साथियों,

बीजेपी की डबल इंजन सरकार के लिए शिक्षा, कौशल विकास और स्वास्थ्य सुविधाएं बहुत बड़ी प्राथमिकताएं रही हैं। असम ने तो शिक्षा और स्वास्थ्य को लेकर कांग्रेस की उपेक्षा को बहुत लंबे समय तक भुगता है। आज असम शिक्षा और स्वास्थ्य का बहुत बड़ा हब बनकर सामने आ रहा है। इसका बहुत अधिक फायदा बराक वैली को मिला है। आज यहां शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े अनेक बड़े संस्थान बन चुके हैं।

साथियों,

कांग्रेस ने असम के युवाओं को सिर्फ हिंसा और आतंकवाद के कुचक्र में ही उलझाए रखा था। कांग्रेस ने असम को फूट डालो और राज करो की नीति की प्रयोगशाला बनाया। आज असम के युवाओं के सामने अवसरों का खुला आसमान है। आज असम भारत के सेमीकंडक्टर सेक्टर का अहम हिस्सा बन रहा है। यहां नेक्स्ट जेनरेशन टेक्नॉलॉजी से जुड़ा इकोसिस्टम और टैलेंट तैयार हो रहा है। यहां IIT और IIM जैसे संस्थान बन रहे हैं। मेडिकल कॉलेज, एम्स और कैंसर अस्पतालों का सशक्त नेटवर्क बन रहा है। शांति और प्रगति का ये नया दौर, अनेक बलिदानों और अनेक प्रयासों से आया है। अब ऐसी हर ताकत को मुंहतोड़ जवाब देना है, जो असम को पुराने दौर में धकेलने की कोशिश करती है।

साथियों,

आज मैं सिलचर से असम को सावधान-सतर्क भी करना चाहता हूं। आपने कांग्रेस को असम से बाहर किया। आज देश का हर राज्य कांग्रेस को सबक सिखा रहा है। कांग्रेस एक के बाद एक चुनाव हार रही है। अब निकट भविष्य में, कांग्रेस खुद के पराजय के इतिहास की सेंचूरी मारने वाला है। हार की हताशा से भरी कांग्रेस ने देश के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस के नेता देश को बदनाम करने में जुट गए हैं, आपने देखा है, दिल्ली में इतनी बड़ी AI समिट हुई। आज पूरी दुनिया जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, AI को लेकर बहुत ही उत्सुक है। दिल्ली में सफलतापूर्वक विश्व की एक नई आशा पैदा करने वाला AI समिट हुआ। दुनियाभर के नेता, दुनियाभर की टेक्नॉलॉजी कंपनियां, टेक्नॉलॉजी के बड़े-बड़े लीडर दिल्ली आए थे। कांग्रेस ने इस समिट को बदनाम करने के लिए कपड़ा फाड़ प्रदर्शन किया। अब कांग्रेस के पास खुद के कपड़े फाड़ने के सिवा कुछ नहीं बचा है। पूरे देश ने कांग्रेस के इस भौंडे और भद्दे प्रदर्शन की आलोचना की। लेकिन दिल्ली में जो कांग्रेस का शाही परिवार है, वो इस कांड को भी अपना मेडल बता रहा है, देश को बदनाम करने वालों की वाहवाही कर रहा है। ऐसी कांग्रेस, जो देश की विरोधी हो, वो किसी राज्य का भला नहीं कर सकती, वो असम के युवाओं का कभी भला नहीं सोच सकती।

साथियों,

आजकल दुनिया में चारों तरफ और हमारे तो अड़ोस पड़ोस में ही युद्ध के हालात और आप सब भलिभांति युद्ध कि क्या भयानकता है, वो रोजमर्रा देख रहे हो। युद्ध से जो स्थितियां बनी हैं, हमारी सरकार उनसे निपटने के लिए, हमारे देश के नागरिकों को कम से कम मुसीबत आए इसलिए हो सके उतने सारे प्रयास कर रही है। हमारा प्रयास है कि देश के नागरिकों पर युद्ध का कम से कम प्रभाव पड़े। इस समय कांग्रेस से उम्मीद थी कि वो एक जिम्मेदार राजनीतिक दल की भूमिका निभाए, लेकिन कांग्रेस देश हित के इस महत्वपूर्ण काम में भी फिर एक बार फेल हो गई। कांग्रेस पूरी कोशिश कर रही है कि देश में पैनिक क्रिएट हो, देश मुश्किल में फंस जाए। और उसके बाद कांग्रेस भर-भर कर मोदी को गाली दे।

साथियों,

कांग्रेस के लिए और कांग्रेस असम के लिए, देश के लिए कांग्रेस का कोई विजन ही नहीं है, इसलिए, इन्होंने अफवाहों को, झूठ-प्रपंच को ही, और जैसे झूठे रील बनाने की इंडस्ट्री खोलकर रखी है, उसी को हथियार बना दिया है। दुनिया में जो ताकतें भारत के तेज़ विकास को नहीं पचा पा रहीं हैं, जिन विदेशी ताकतों को देश की प्रगति रास नहीं आ रही, कांग्रेस देश का दुर्भाग्य देखिए, कांग्रेस उनके हाथ की कठपुतली बनती जा रही है। इसलिए, असम के हर नागरिक को, हर नौजवान को कांग्रेस से सावधान रहना है।

साथियों,

असम हो, बराक वैली हो, अब ये विकास के पथ पर बढ़ चुका है। बराक वैली, अपनी भाषा, अपने साहित्य, अपनी संस्कृति के लिए जानी जाती है। वो दिन दूर नहीं, जब बराक वैली को विकास के नए सेंटर के रूप में पहचान मिलेगी।

साथियों,

आप इतनी बड़ी तादाद में हमें आशीर्वाद देने आए हैं। जो राजनीति के भविष्य की रेखाएं अंकित करने वाले लोग हैं, वो भांति-भांति की जो संभावनाएं तलाशते रहते हैं, वे आज बराक वैली का ये दृश्य, कल बोड़ो समुदाय का वो दृश्य, टी गार्डन वालों के समूह का दृश्य, ये साफ-साफ बता रहा है कि, इस चुनाव का नतीजा भी क्या होने वाला है। और आप इतनी बड़ी तादाद में आशीर्वाद देने के लिए आए हैं, मैं आपका हृदय से आभारत व्यक्त करता हूं और आप सभी को फिर से विकास परियोजनाओं की बहुत-बहुत बधाई देता हूं। मेरे साथ बोलिये-

भारत माता की जय!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!