Text of PM’s speech at the Foundation Stone laying of Jaffna Cultural Centre

Published By : Admin | March 14, 2015 | 15:54 IST

उपस्थित सभी वरिष्ठ महानुभाव, 

वणकम! 

भारत के प्रधानमंत्री के रूप में जाफना में पहली बार आना, मैं आज यहां कोई भी कार्यक्रम न करता सिर्फ इस धरती को नमन कर देता, तो भी पूरे श्रीलंका में और पूरे विश्व में एक बहुत बड़ी घटना के रूप में माना जाता।

PM Modi laying the foundation stone for Jaffna Cultural Centre (1)

जाफना अपनी एक नई पहचान बना रहा है। पूरे विश्व को जाफना से प्रेम के संदेश की एक नई खुशबू, पूरे विश्व को अनुभव हो रही है। और ये मेरा सौभाग्य है कि शांति, भाईचारा, सद्भभावना की इस खुशबू भरी हवा में मुझे भी सांस लेने का अवसर मिला है। 

मुख्यमंत्री श्रीमान विगनेश्वर जी ने गुजरात को लेकर के काफी तारीफ की। भारत में इन दिनों जो Co-operative Federalism पर बल देकर के आगे बढ़ रहे हैं, उसकी सराहना की और भारत से उनकी क्या-क्या अपेक्षाएं हैं? उसका भी जिक्र किया।

CROP-684-PM Modi laying the foundation stone for Jaffna Cultural Centre (6)

श्रीलंका और भारत के संबंध विशिष्ट प्रकार के हैं। हम सिर्फ पड़ोसी हैं, ऐसा नहीं है। हम सांस्क़ृतिक रूप से एक-दूसरे से जुड़े हुए लोग हैं। जाफना के जीवन में बहुत उतार-चढ़ाव आए हैं। बहुत कठिनाइयों का सामना यहां के लोगों ने किया है। यहां कि विश्व प्रसिद्ध Library, जिसके पास करीब-करीब एक लाख उत्तम प्रकार के ग्रंथ, Manuscripts यानि एक प्रकार से मानव जाति का अमूल्य खजाना जाफना के पास था। लेकिन वो सारा जल गया, खाक में मिल गया। आज फिर से एक बार काफी ग्रंथों को फिर से इकट्ठा कर लिया गया है, Library को फिर से एक बार जीवंत किया गया है। Road बने, रेल बने, Port बने, Airport बने - ये सारी चीजें इंसान को जोड़ने के काम आती हैं। लेकिन library जब बनती हैं, किताब जहां होती हैं, वहां सदियों को जोड़ने का काम होता है। ये सदियों को जोड़ने का काम फिर से एक बार हुआ है और इसके लिए मैं जाफना के सभी महानुभाव को हृदय से अभिनंदन करता हूं।

PM Modi laying the foundation stone for Jaffna Cultural Centre (2)

आज मुझे खुशी है कि एक Cultural centre के शिलान्यास के लिए मुझे यहां आने का सौभाग्य मिला है। इस Cultural centre को बनाने में एक स्पर्धा की गई, Architecture के संबंध में। और स्पर्धा कर-करके तय हुआ, कौन-सा design हो? और ये भी देखा गया कि जाफना की परंपराओं का उसमें अभिव्यक्ति हो। और ये जो, अभी उसका विडियो दिखाया गया, walkthrough दिखाया गया। उससे साफ नजर आता है कि पुराने और नए का कितना अद्भभुत संगम किया गया है। भारत के लिए गर्व की बात है कि जाफना में एक Unique प्रकार का और World Level का Cultural centre बनाने का हमें अवसर मिला है। 

मैं जाफनावासियों को, श्रीलंकावासियों को विश्वास दिलाता हूं कि भारत सरकार ने ये जो काम हाथ में लिया है, हम समय पर पूरा करेंगे और कल्पना से भी अच्छा करेंगे और मेरे लिए खुशी की बात है कि पहले Cultural Programme के लिए मुझे निमंत्रण भी मिल गया और इसका मतलब ये है कि Commitment कितना स्पष्ट है। Commitment में कितना Commitment है, ये नजर आता है। 

आज एक प्रकार से मेरी ये यात्रा त्रिवेणी संगम है। आज यहां आने से पहले तलाइमनार में रेलवे का उद्घाटन करके मैं आया। मन को इतना आनंद होता था उस दृश्य को देखकर के कि समुद्र के छोर तक रेल की पटरी है और उधर रामेश्वरम है। ये Project अपने आप में किसी भी भारत के नागरिक को, जिसने इस काम को किया है, गर्व दिलाता है, आनंद देता है। तलाइमनार में आज जो Railway project का लोकार्पण हुआ है, मुझे विश्वास है इस पूरे क्षेत्र के विकास को एक नई गति देगा। 
PM Modi laying the foundation stone for Jaffna Cultural Centre (3)

मेरे लिए आज दूसरी खुशी की बात है कि जाफना के Housing Project का भी आज हम लोकार्पण कर रहे हैं। और उन संकटों के काल में जिन परिवारों ने सहन किया है। आज उनको जब अपना घर मिले, अपना एक बसेरा मिले तो उसके आशीर्वाद की ताकत बहुत बड़ी होती है और एक प्रकार से हमारे यहां तो कहा गया है, सेवा परमोधर्मः ये Housing Project एक प्रकार से एक उत्तम से उत्तम धर्म कार्य है जो कि सेवा के रूप में हमें करने को मिला है। और ये तीसरा प्रकल्प में आज जो कर रहा हूं - वो एक Central Cultural Centre का शिलान्यास करने का अवसर मुझे मिला है। और इस प्रकार से आज ये मेरी यात्रा त्रिवेणी बन गई है। 

मैंने कल संसद में, मुझे वहां निमंत्रित किया गया। संसद में मुझे संबोधित करने का अवसर मिला और वहां मैंने अपने मन की बातें बताई हैं, जो आज अखबारों में काफी मात्रा में छपी हैं। श्रीलंका को भी प्रगति करनी है। एकता और अखंडता से प्रगति होगी। एकता से साथ समरसता भी चाहिए और कोई भी भू-भाग हो, कोई भी नागरिक हो हर एक को समान अवसर मिलेगा और सबको आगे बढ़ने की संभावनाएं पैदा होंगी। ये शुभकामनाएं भारत की तरफ से हर श्रीलंकावासी को, हर नागरिक को रहेंगी। 

मैं अपने राजनीतिक जीवन के अनुभव से कहता हूं। शांति, एकता, सद्भभावना - ये प्रगति के मूल मंत्र हैं, विकास के मूल मंत्र हैं। और मैं भी आपको विकास की नई ऊंचाइयों पर देखना चाहता हूं, इसी धरातल पर देखना चाहता हूं।

PM Modi laying the foundation stone for Jaffna Cultural Centre (5)
आपने मेरा स्वागत किया, सम्मान किया। मैं आपका बहुत आभारी हूं और मैं आपको विश्वास दिलाता हूं - श्रीलंका की प्रगति और विकास के लिए भारत से जो भी बन सकेगा। कभी भारत पीछे नहीं रहेगा। ये दोस्ती सदियों पुरानी है और सदियों तक चलने वाली दोस्ती है। इसको हम निभाते रहेंगे। 

मैं फिर एक बार आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं। 

वणकम।

Explore More
Today, the entire country and entire world is filled with the spirit of Bhagwan Shri Ram: PM Modi at Dhwajarohan Utsav in Ayodhya

Popular Speeches

Today, the entire country and entire world is filled with the spirit of Bhagwan Shri Ram: PM Modi at Dhwajarohan Utsav in Ayodhya
Proud Moment For Every Indian: PM Modi On Sarnath Being Inscribed On UNESCO World Heritage List

Media Coverage

Proud Moment For Every Indian: PM Modi On Sarnath Being Inscribed On UNESCO World Heritage List
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
The Vibrant Village Programme is giving further momentum to the development of border villages: PM Modi
July 26, 2026
Great to see that the initiative is instilling a deeper sense of nation-building among the youth: PM
Viksit villages are also the foundation of a Viksit Bharat: PM
Our government has considered the border villages, as the first villages of the country: PM
This journey of a Viksit Vibrant Village is simply a medium to connect everyone and to connect with everyone: PM

साथियों,

आप सबसे बात करके बहुत अच्छा लगा। आज हमारे साथ केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे सहयोगी मनसुख मांडविया जी, मंत्री रक्षा खड़से जी और देश भर से जुड़े सभी मेरे युवा साथियों!

आज का यह कार्यक्रम बहुत विशेष है। देश भर के करीब 250 जिलों के युवा साथी इस प्रोग्राम से जुड़े हैं। मैं आप सभी का अभिनंदन करता हूं।

साथियों,

कुछ साल पहले हमने मेरा युवा भारत माय भारत मंच बनाया था। आज इससे देश भर के करोड़ों युवा जुड़े हैं और आज पूरे देश में माय भारत के युवा साथी बहुत प्रशंसनीय काम कर रहे हैं। विकसित भारत डायलॉग से लेकर विकसित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम तक आप सभी ने अपना सामर्थ्य बखूबी दिखाया है।

साथियों

विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग के दौरान मैंने एक विचार युवाओं के सामने रखा था। विचार यह था कि क्यों नहीं युवा साथी वर्चुअल माध्यम के बजाय जमीन पर उतर कर भारत को जाने भारत से जुड़े भारत को जीने की कोशिश करें भारत को समझें। भारत के गांवों में विकसित होने के लिए कितनी आकांक्षाएं हैं यह गांवों में जाकर पता चलती है और हमारे सीमावर्ती गांवों में विकास की आकांक्षा और देशभक्ति की भावना यह हम बराबर - बराबर और कभी तो लगता है कि उनके लिए खुद से ज्यादा देश होता है। देश पहले बाकी सारी सुविधाएं बाद में, यह हमको सीमावर्ती गांवों में खास अनुभव आती है। और इसलिए उद्देश्य यह था कि देश के अलग-अलग जिलों के युवा हिमाचल, उत्तराखंड और लद्दाख के गांवों की यात्रा करें। वहां लोग कैसे रहते हैं? खानपान कैसा है? कामकाज, संस्कृति, जीवन व्यवहार यह सारी बातें क्या है? चुनौतियां क्या है? देश के प्रथम गांव में बैठे हुए लोग देश की सुरक्षा के लिए कितने जागरूक है? देश के अन्य भागों से उनका लगाव निकटता कितनी है? इन सभी चीजों का अनुभव मेरे देश के नौजवानों को मिले। यह हमारा उद्देश्य था। और जो उत्साह पूरे देश के युवाओं में दिखा, वह अद्भुत है। लगभग 3 लाख युवाओं ने इस प्रतियोगिता में भाग लिया और उनमें से 400 से अधिक युवाओं का चयन हुआ। आप सभी एक सप्ताह तक इन दूर-सुदूर के गांवों में रहे। अननोन जगह थी आपके लिए। आपने वहां के जीवन को जीने की कोशिश की। आप उसके अंदर घुलमिल गए। अपनी संस्कृति को वहां की संस्कृति के साथ जोड़ा, कनेक्ट किया। एक भारत श्रेष्ठ भारत का इसमें और इससे उत्तम उदाहरण शायद ही कोई और हो सकता है।

साथियों,

आज का यह कार्यक्रम मेरे लिए बहुत खास इसलिए भी है क्योंकि जब मैं सरकार और राजनीति के जीवन से दूर था, तब मैंने ऐसे सीमावर्ती गांवों में कई बार जाने का मुझे अवसर मिला है। वहां के लोगों से मेरी जान पहचान भी रहती थी। कई गांवों के साथ तो मेरा संपर्क बहुत लंबे समय तक बना रहा था। जब सरकार में आया तो भी मैं सीमावर्ती गांवों में मौका मिलते ही जरूर उस मौके को छोड़ता नहीं हूं। आप सबको पता है दिवाली का त्यौहार तो मैं, सीमा पर जाकर के, बॉर्डर पर जाकर के, अपने देश के सुरक्षा करने वाले हमारे वीर सैनिकों के साथ ही मनाता हूं और यह क्रम तो मेरा 25 साल से चल रहा है। अभी इस यात्रा का हिस्सा रहे जिन साथियों से मेरी बात हुई, उनमें से भी कई गांव ऐसे हैं जहां मैं पहले जा चुका हूं और आप जब वहां का वर्णन कर रहे थे तो मुझे वह पुरानी सारी चीजें नजर आ रही थी। मेरी तरह आप सबका भी अनुभव बहुत शानदार रहा। किसी ने ऊंची पर्वत श्रंखलाओं का रोमांच बताया। कोई सीमांत गांवों के लोगों के स्नेह और अपनत्व से प्रभावित था। किसी ने वहां के बच्चों के सपनों को करीबी से देखा। तो कोई हमारी सेना के अद्भुत साहस और अनुशासन का साक्षी बना। यानी विकसित वाइब्रेंट विलेज का यह पूरा एक्सपीरियंस बहुत शानदार रहा। संयोग से आज कारगिल विजय दिवस भी है। आप में से अनेक साथियों ने कारगिल के आसपास के क्षेत्र को भी देखा। वहां कितनी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में हमारे शूरवीरों ने विजय का परचम लहराया था। यह भी आपने देखा है। मैं आप सभी को इस कार्यक्रम में हिस्सा बनने के लिए शानदार अनुभव के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

विकसित गांव विकसित भारत की आधारशिला है। विकसित भारत के निर्माण की यात्रा लगातार चल रही है। और इसमें आप सभी युवा साथियों की बड़ी भूमिका है। इसलिए जब देश का युवा जमीन से जुड़ता है तो वो विकसित भारत के विजन को और व्यापक बनाता है। यह युवा मन में देश के लिए जीने, देश के लिए कुछ करने के संकल्प को और मजबूती देता है।

साथियों,

इस अभियान में आपने अनुभव किया होगा कि बॉर्डर के गांवों का जीवन कितना कठिन होता है। लेकिन हर कठिनाई के बावजूद सीमावर्ती गांवों के लोग देशभक्ति को पल प्रतिपल जीते हैं। कुछ वर्ष पहले तक तो बॉर्डर के गांवों को अंतिम गांव कहकर अपने हाल पर छोड़ दिया गया था। इन गांवों में सड़क, बिजली, पानी, स्कूल, अस्पताल ऐसी हर बेसिक सुविधाओं का अभाव था। संभव है कि आपने भी ऐसी अनेक कहानियां वहां के लोगों से सुनी होगी। पहले के हाल उन्होंने बताए होंगे और हमें इस पर गर्व होना चाहिए कि ऐसी परिस्थितियों में भी सीमावर्ती गांवों के लोगों की देशभक्ति कभी भी रत्ती भर भी कमजोर नहीं पड़ी।

इसलिए साथियों,

हमारी सरकार ने इन सीमावर्ती गांवों को देश का प्रथम गांव माना। वो प्रथम गांव जहां सुबह की पहली किरण भारत का अभिवादन करती है और जहां आखिरी किरण गुड नाइट कहकर के विदा लेती है। जहां सबसे पहले तिरंगा हवा से संवाद करता है। जहां से दुनिया भारत को पहली बार देखती है। यह सोच बदलने का ही परिणाम है कि आज हमारा सीमांत क्षेत्र बदल रहा है। कई गांवों में आजादी के बाद पहली बार बिजली पहुंची, पहली बार सड़क पहुंची, पहली बार घर में नल से जल पहुंचा, पहली बार घर में गैस कनेक्शन पहुंचा। शहरों में यह सामान्य सुविधाएं लगती है। लेकिन वहां के लोगों के लिए यह जीवन बदलने वाली सुविधाएं हैं। इसके कारण वहां किसान बागवान का जीवन बदल रहा है। फल सब्जी बड़ी-बड़ी मंडियों तक पहुंचाने आसान हुए हैं। बेहतर कनेक्टिविटी के कारण अब जीवन रुकता नहीं है। नॉनस्टॉप चलता है। और आपने यह भी देखा होगा कि आज दूर सुदूर के इन गांवों में भी बेहतरीन इंटरनेट कनेक्टिविटी है। आप जो साथियों ने बताया कितनी खुशी से बता रहे थे।

साथियों,

ऐसी ही हर सुविधा का एक और फायदा हुआ है। आज इन क्षेत्रों में पर्यटन भी फल-फूल रहा है। जो गांव वीरान पड़ गए थे, आज वहां फिर से चहल-पहल होने लगी है। बेटियां स्कूल कॉलेज जाती हैं। अच्छी पढ़ाई और अच्छी कमाई का माहौल भी बन रहा है। और वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम सीमावर्ती गांवों के इस विकास को और गति दे रहा है।

साथियों,

विकसित वाइब्रेंट विलेज की यह यात्रा सबको जोड़ने और सबसे जुड़ने का ही एक सशक्त माध्यम है। और अब आप सभी की जिम्मेदारी और भी अधिक बढ़ गई है। आपकी यह यात्रा यूनिटी थ्रू पार्टिसिपेशन की यात्रा है। भारत का युवा जितना ज्यादा भारत के सीमावर्ती गांवों को जानेगा, उतना ही वो भारत को सरलता से जानेगा, वो भारत के कोने-कोने के साथ सरलता से जुड़ेगा और यह प्रयास नई मजबूती का कारण बनेंगे। आप भी जरा याद कीजिए, इन गांवों के घर आपके लिए देखा होगा आपने कोई अलग गेस्ट हाउस नहीं था, कोई होटल नहीं थी। यह सिर्फ गांव, पूरा गांव एक प्रकार से मेहमान नवाजी कर रहा था। लेकिन आपने देखा होगा कि आपका सिर्फ गांव में रहना हुआ इतना नहीं। आपके लिए यह मुलाकात गांव के जीवन से जुड़ने की यात्रा एक प्रकार से संस्कृति की पाठशाला भी बन गई। वहां आपको सुविधाओं से भी ज्यादा संतोष और सम्मान मिला। आप जो कुछ भी अनुभव करके आए हैं, वो किसी क्लास रूम में सीखने को नहीं मिलेगा। इसलिए आप सब ने जो अनुभव किया है उसे आप अन्य युवाओं को शेयर कीजिए। उन्हें भी प्रेरित कीजिए कि ज्यादा से ज्यादा संख्या में हमारे युवा बॉर्डर के गांवों को विजिट करें। जितने ज्यादा युवा वहां जाएंगे, वहां रहेंगे, तो वे देश को देखेंगे, देश को समझेंगे और जब लोग गांवों में जाना शुरू करेंगे, तो फिर उन गांवों में सुविधाएं भी और तेजी से पहुंचेगी।

साथियों,

हमारी सरकार इन सीमावर्ती गांवों में टूरिज्म को बहुत प्रोत्साहित कर रही है। आप सरकार के इन प्रयासों को विस्तार दे सकते हैं। मेरा आग्रह है कि आपमें से हर युवा साथी कम से कम 100 युवाओं को अपने अनुभव जरूर शेयर करें। जिस क्षेत्र में आप रह रहे हैं, वहां के लोगों से संपर्क में रहें। आपने अगर कोई तस्वीरें वहां ली है, वहां की वीडियो बनाई है, तो उन्हें अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर खूब शेयर करें। उन गांवों के जो कंटेंट क्रिएटर्स भी हैं, उनके साथ कोलैब करके आप नेचर और कल्चर को प्रमोट कर सकते हैं। वहां आपने कोई लोकल प्रोडक्ट देखा हो, उसको आप अपने इलाके में कैसे प्रमोट कर सकते हैं, इस बारे में विचार करें। इंटरनेट पर जानकारियां तो बहुत होती है। लेकिन आप इन गांवों की ऑथेंटिक जानकारियां साझा कर सकते हैं। आप अब खुद भी अपने दोस्तों के साथ, अपने परिवार के साथ इन गांवों में घूमने फिरने जाएं और मैं तो स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी से भी कहूंगा कि आप बॉर्डर विलेज के एजुकेशन टूर भी आयोजित कर सकते हैं।

साथियों,

मेरा हमेशा से ही यह दृढ़ विश्वास रहा है कि भारत के आप जैसे नौजवान 21वीं सदी की दुनिया को शेप करने वाले रहे हैं। भारत के युवा की यही असली नियति है। आज का युवा विकसित भारत की ऊर्जा भी है और विकसित भारत का सबसे बड़ा लाभार्थी भी है। इसलिए युवा शक्ति जब देश की चुनौतियों और समाधानों से सीधी जुड़ेगी, तो भविष्य निश्चित ही उज्ज्वल होगा। इसी भावना के साथ आप सभी को फिर से बहुत-बहुत शुभकामनाएं। बहुत-बहुत धन्यवाद।