Govt willing to walk the extra mile with the scientific community: PM Modi

Published By : Admin | January 2, 2020 | 18:25 IST
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PM Modi applauds DRDO scientists, says India’s missile programme is one of the outstanding programmes in the world
Govt willing to walk the extra mile with the scientific community so that it can invest time in emerging technologies and innovations for national security: PM
DRDO's innovations will play a huge role in strengthening Make in India and in promoting a vibrant defence sector in the country: PM

कर्नाटका के मुख्‍यमंत्री श्रीमान येदियुरप्पा जी, DRDO के चेयरमैन डॉ जी. सतीश रेड्डी जी, DRDO के अन्‍य शीर्ष अधिकारीगण, Apex Committees के Members! Young scientists के labs directors

साथियो, आप सभी को सबसे पहले नववर्ष की बहुत-बहुत शुभकामनाएं। Happy New Year… ये संयोग ही है कि अब से कुछ समय पहले मैं किसानों के कार्यक्रम में था तुमकुर और अब यहां देश के जवान और अनुसंधान की चिंता करने वाले आप सभी साथियों के बीच में हूं। और कल मुझे साइंस कांग्रेस में जाना है। एक प्रकार से कर्नाटका का मेरा ये प्रवास और 2020 का ये मेरा पहला प्रवास, जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान और जय अनुसंधान इसकी न्यू इंडिया की भावना को एक प्रकार से समर्पित है। और ये भी हम सबके लिए बहुत गौरव का विषय है कि ये आयोजन Aeronautical Development Establishment में हो रहा है, जहां हम सभी के श्रद्धेय डॉ. ए पी जे अब्दुल कलाम DRDO से जुड़े थे।

 

साथियो, ये दशक न्यू इंडिया के रूप में तो महत्‍वपूर्ण है ही है। क्‍योंकि जब 2020 है तो वो एक नया साल नहीं पूरा दशक हमारे सामने आया है। और आने वाले वर्षों में भारत की ताकत क्‍या होगी, विश्‍व में हमारा स्‍थान कहां होगा। ये decade ये भी तय करने वाला है। ये वो दशक है जो पूरी तरह से युवा सपनों का है, हमारे युवा Innovators का है। विशेष तौर पर वो Innovators जो 21वीं सदी में या तो पैदा हुए हैं या फिर 21वीं सदी में युवा हुए हैं। जब मैंने आपसे आग्रह किया था कि DRDO को rethink और खुद को reshape करना चाहिए। 21वीं सदी की चुनौतियों से निपटने के लिए नई ऊर्जा के साथ काम करना चाहिए। तो इसके पीछे यही मेरी एक सोच थी कि इसका मतलब ये नहीं कि जो 36 का हो गया वो बेकार हो गया... इसके पीछे मेरी भूमिका यही है कि जो 60 साल, 50 साल, 55 साल इतनी तपस्‍या करके वहां पहुंचे हैं अगर उनके कंधे पर वो 35 से कम आयु वाले को बिठा देते हैं तो दुनिया को एक नए भारत के दर्शन होते हैं। ये जो पुराने लोग हैं उनकी मजबूती के बिना नए का ऊपर जाना संभव नहीं है। और इसलिए ये एक Combination बहुत आवश्‍यक है। और इस विचार के पीछे मेरा अपना भी एक अनुभव है। मैं राजनीतिक जीवन में बहुत देर से आया हूं और शुरू में मैं मेरा पार्टी का organization का काम देखता था। election or moment उन चीजों को करता था। तो मैं जब गुजरात में मैंने शुरुआत की और मेरे सामने पहला एक बड़ा चुनाव की जिम्‍मेवारी आई। मैं बिल्‍कुल नया था, और उस समय अखबारों ने इस चीज को बड़े विस्‍तार से लिखा था। क्योंकि उस समय करीब 90 लोग मेरे ऑफिस में, मेरी मैनेजमैंट में काम करते थे। पूरा चुनाव पूरे राज्‍य भर में लड़ा जाता था लेकिन ऑफिस मैनेजमैंट करीब 90 लोग थे। और Volunteer के रूप में आए थे वो 2-3 महीने के लिए काम करने वाले थे। लेकिन अखबार वालों ने ढूंढ कर निकाला था। ये जो 90 लोग हैं इस पूरी टीम की average age 23 है यानी 23 की average age ग्रुप से मैं चुनाव लड़ा था, और लड़वाया था और हम पहली बार विजयी हुए थे।युवा में restricting capacity बहुत होती है। आप कितने ही अच्‍छे कबड्डी के खिलाड़ी हो, कितने ही बढि़या लेकिन और जीवन में मानो 20 साल तक कबड्डी खेले हैं। National, International खेले हैं लेकिन 60-70 साल की आयु के बाद एक कबड्डी का खेल चल रहा है और आप वहां सिर्फ देखने के लिए गए हैं। क्‍योंकि पूरी जिंदगी कबड्डी खेलें हैं और कोई 18-20 साल का नौजवान जिस तेजी से मूवमेंट करता है, उठता है, पटकता है, तो आप बाहर बैठे मन में अरे-अरे गिर जाएगा, अरे-अरे चोट न लग जाए.... आप खुद भी तो कभी ये करके आए हैं। लेकिन अब वो देख नहीं पाते लगता है अरे-अरे कहीं गिर न जाए। ये साइको‍लॉजी काम करती होगी। ये युवा मन और अनुभवी मन के बीच में एक अंतर होता है। और इसलिए एक मनो‍वै‍ज्ञानिक परिवर्तन विश्‍व की चुनौतियों को स्‍वीकार करने के लिए DRDO में इन दोनों का combination कैसे हो। कभी-कभार एक बहुत बड़े वृक्ष के नीचे छोटा पौधा पनप नहीं पाता है। दोष बड़े वृक्ष का नहीं है। पौधे को भी रहता है कि इनके सामने मुझे ऐसा ही रहना चाहिए। किसी का दोष नहीं है। लेकिन अगर उसी पौधे को कहीं खुले में छोड़ दिया जाए तो देखते ही देखते वट वृक्ष भी गर्व करेगा वाह ये भी मेरे साथ पनप रहा है। इसी एक भूमिका को लेकर के इन पांच Labs से शुरू किया है। और मैं चाहता हूं कि वो गलतियां करे ये पांच Labs पूरा बजट उड़ा दे तो उडा दे एक बार। एक scientist पूरी अपनी जिंदगी तबाह कर देता है जी, तब देश को कुछ मिलता है। तो फिर खजाना क्‍या चीज होती है, आप तो अपनी जिंदगी लगा रहे हो तो सरकार को खजाना लगाने में क्‍या जाता है।

और मुझे संतोष है कि Advanced Technologies के क्षेत्र में 5 Labs स्थापित करने के सुझाव पर गंभीरता से काम हुआ और आज बेंगलुरु, कोलकाता, चेन्नई, हैदराबाद और मुंबई में 5 ऐसे संस्थान शुरु हो रहे हैं। और मुझे ये विश्‍वास है कि ये Young Scientist Labs युवा और वैज्ञानिकों के विचार और व्‍यवहार को नई उड़ान देगी। इसका मतलब ये हुआ कि अब ये पहचाना जाएगा कि DRDO-Y लेकिन बोलते समय लगेगा DRDO Why और मैं समझता हूं कि ये पांच लैब DRDO-Y को जवाब देने की ताकत रखते है ये मेरा विश्‍वास है। और हमने सबने मिल करके इसे बल देना है। इन Labs से मिलने वाले results Advanced Technologies के लिए हमारे राष्‍ट्रीय प्रयास का स्‍वरूप intensity का तय करेंगे। ये Labs, देश में उभरती हुई Technologies के क्षेत्र में, Research और Development के स्वरूप को तैयार करने में मदद करेंगी।

और हां, अपने युवा वैज्ञानिक और मैं इन साथियों से जरूर कहना चाहूंगा कि ये Labs, सिर्फ टेक्नोलॉजी को टेस्ट नहीं करेंगी, वर्ना कभी-कभी तो लगता है ये टेक्नोलॉजी में 2 कदम गए 5 कदम गए मेरे हिसाब से ये सिर्फ टेक्नॉलॉजी को टेस्ट नहीं करेंगी। ये मेरे young scientist के टेंपरामेंट और पेशेंस को भी टेस्ट करने वाली हैं और यही सबसे बड़ा उसका पैरामीटर है।

आपको हमेशा ये ध्यान रखना होगा कि आपके प्रयास और निरंतर अभ्यास से ही भारत सफलता के रास्ते पर आगे ले जाएगा। सिर्फ Positivity or Purpose यही आपकी प्रेरणा के स्‍त्रोत होने चाहिए। आपको हमेशा ये ध्‍यान रखना है। कि 130 करोड़ की आबादी का जीवन सुरक्षित और आसान बनाने का जिम्‍मा आपके कंधे पर है।

साथियो आज का ये कार्यक्रम तो एक शुरुआत भर है। आपके सामने सिर्फ अगला एक साल नहीं, अगला एक दशक है। इस एक दशक में DRDO का मीडियम और लॉन्ग टर्म रोडमैप क्या हो, इस पर बहुत गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। और मैं एक और सुझाव देता हूं। ये पांच लैबस 35 और उसके नीचे की टीम है और जब इस टीम में 36 हो जाएंगे तो क्‍या होगा तो मैं उन लोगो को insurance देता हूं कि अब इस 5 लैब को 45 होने की भी छूट है और 55 होने की भी छूट है। आपको नई पांच 35 वाली बनानी होगी इसको 35 maintain नहीं करना है ये 35 वाला 40 होने दीजिए, ये 35 वाले को 45 होने दीजिए। अब नए पांच 35 वाले करिए। वे जब 35 cross करेगे तो फिर नए 35 वाले पांच कीजिए ये चेन चलती रहनी चाहिए। अगर ये चेन नहीं चलेगी तो यहां 32 वाला बैठा है वो सेाचेगा कि मेरे लिए यहां 3 साल है मैं क्‍या करूं फिर तो मेरा सारा सपना टूट जाएगा। इसलिए जिनको ये दिया है लैब तो जब तक वो न थक जाए तब तक उसके जिम्‍मे छोड़ दिजिए। वे पचास का हो जाए,पचपन का हो जाए साठ का हो जाए करने दीजिए। 5 नई लैब 35 वाली बना दीजिए। और ये पांच का क्रम चलता रहे। तब देखिए आप नयापन का एक क्षेत्र लगातार बनता चला जाएगा। और यही हमें ultimately फायदा करेगा। और सिर्फ हम विचार करने पर न रूके। तय समय के भीतर actionable point पर भी कार्यक्रम भी शुरू होना चाहिए।

मैं DRDO को उस ऊँचाई पर देखना चाहता हूं जहां वो न सिर्फ भारत के वैज्ञानिक संस्थानों की दिशा और दशा तय करे, बल्कि दुनिया के.... और मैं बहुत जिम्‍मेवारी के साथ कह रहा हूं। दुनिया के.... और अन्य बड़े संस्थानों के लिए भी DRDO और हमारी young lab प्रेरणास्रोत बन सकती है। मैं ऐसा क्‍यों कह रहा हूं इसकी ठोस वजह है..... वजह है DRDO का इतिहास, DRDO का प्रर्दशन, DRDO देश का भरोसा।

साथियो आज देश का बेहतरीन Scientific Mind DRDO में है। DRDO की उपलब्धिया अनंत है। अभी मैंने जो exhibition देखी है। जिसमे मौजूदा उपलब्धियों के साथ-साथ भविष्‍य के आपके प्‍लान और प्रोजेक्‍ट की भी जानकारी है। और मुझे इतनी सरल भाषा में आपके नौजवानों ने समझाया कि मुझे भी समझ आ गया कि हां ये तो मैं भी कर सकता हूं। वर्ना स्‍कूल तो नहीं समझ में आता था कुछ। आज आपने समझा दिया। आपने भारत के मिसाइल कार्यक्रम को दुनिया के सबसे उत्कृष्ट कार्यक्रमों में शामिल किया है। और बीता वर्ष तो स्पेस और एयर डिफेंस के क्षेत्र में भारत के सामर्थ्य को नई दिशा देने वाला रहा है। A set... A set के रूप में अत्‍याधुनिक स्‍पेज टेकनोलॉजी का सफल परीक्षण ये निश्चित रूप से 21वी सदी के भारत के capability को define करेगा।

आप सभी के प्रयासों से आज भारत उन बहुत कम देशों में से एक है जिनके पास aircrafts से लेकर के aircraft carrier तक सब कुछ बनाने की क्षमता है। लेकिन क्‍या सिर्फ इतना किया जाना काफी है। जी नहीं... साथियो और...... घर में भी देखा होगा जो बच्‍चा अच्‍छा काम करता है मां-बाप उसको ज्‍यादा परेशान करते हैं वो पांच करता है तो बोलते है सात करो। सात करता है तो बोलते हैं दस करो...... और जो नहीं करता है अरे छोड़ो..... वो करेगा नहीं वो..... उसे छोड़ देते हैं। तो आपकी मुसीबत है कि आपको लोग काम बताते ही रहेंगे।

देखिए रामचरित्र मानस में एक बहुत बढि़या बात कही है। रामचरित्र मानस में कहा गया है

कवन जो काम कठिन जग माहीं।

जो नहिं होइ तात तुम्‍ह पाहीं।।

यानी इस धरती पर ऐसा कौन सा कार्य है आपसे हो नहीं सकता। तो सब कुछ हो सकता है आपके लिए कोई भी कार्य कठिन नहीं है। जैसे जब रामचरित्र मानस जब बना तब उसे मालूम था कभी DRDO होगा। मैं DRDO के लिए भी यही दोहराना चाहता हूं। आपकी क्षमताएं असीम हैं आप बहुत कुछ कर सकते हैं। आपने दायरे का विस्‍तार करिए अपने Performance के Parameters को बदलिए, अपने पंख को पूरी क्षमता से खोलकर आसमान पर एकछत्र राज करने का हौसला तो दिखाइए। अवसर है और मैं आपके साथ हूं।

देश के प्रधानमंत्री के नाते मैं आपके सामने खड़ा होकर कह रहा हूं कि सरकार पूरी तरह आपके साथ, देश के वैज्ञानिकों के साथ, innovators के साथ कंधे से कंधे मिलाकर चलने के लिए आज हिंदुस्‍तान तैयार है। आप सभी इस बात से परिचित है कि आने वाले समय में Air और Sea के साथ-साथ Cyber और Space भी दुनिया के Strategic Dynamics को तय करने वाला है। इसके साथ-साथ Intelligent Machines भविष्‍य की रक्षा सुरक्षा के तंत्र में अहम भूमिका निभाने लायक है। ऐसे में भारत किसी से भी पीछे नहीं रह सकता। अपने नागरिकों, अपनी सीमाओं और अपने हितों की रक्षा के लिए भविष्य की तकनीक पर Investment भी ज़रूरी है और Innovation भी आवश्यक है।

मुझे विश्‍वास है कि न्‍यू इंडिया की आवश्यकताओं और आंकाक्षाओं को पूरा करने में आप कोई कसर बाकी नहीं छोड़ेंगे, और बल्कि मैं तो ये भी कहूंगा कि आपका विस्‍तार सिर्फ भारत के भीतर तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए। DRDO जैसा संस्‍थान दुनिया में मानवता को बहुत कुछ दे सकता है। विश्‍व सुरक्षा में आप बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। आज दुनिया के बहुत से देश हैं जिन्‍हें सीमाओं पर हमले का खतरा नहीं है। अड़ोस-पड़ोस में सारे मित्र देश हैं। लेकिन ये देश भी जिन्‍होंने कभी नहीं सोचा था कि उनको बंदूक तो उठानी पड़ेगी। क्‍योंकि अड़ोस-पड़ोस कभी युद्ध का खतरा ही नहीं था। सीमाएं सुरक्षित थी, शांत थी, खुली थी, प्‍यार भरा माहौल था लेकिन वे देश भी आतंकवाद की चपेट में आ चुके हैं। उनको भी बंदूक उठानी पड़ी।

DRDO ऐसे देशों में भी आंतरिक सुरक्षा बढ़ाने में अपना योगदान दे सकता है। जिन छोटे-छोटे देश के लोगों से मैं मिलता हूं उनकी इतनी आवश्‍यकताएं बढ़ गई है। सीमित संसाधनों के बाद भी इन खतरों के लिए उनको कुछ-कुछ नया सोचना पड़ेगा। हम ऐसे छोटे-छोटे लोगों का हाथ पकड़ करके उनको सुरक्षा की गांरटी दे सकते हैं। ये मानवता का काम होगा। और आपके द्वारा किया गया ऐसा हर कार्य मानवता की बहुत बड़ी सेवा होगा और विश्‍व मंच पर भारत की भूमिका को भी और मजबूत करेगा।

साथियो, Defence Manufacturing के क्षेत्र में, भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए DRDO को नए Innovations के साथ सामने आना होगा। देश में एक Vibrant Defense Sector को बढ़ावा देने में, मेक इन इंडिया को मजबूत करने में DRDO के Innovations की बहुत बड़ी भूमिका है। और इसलिए हमारा ये निरंतर प्रयास होना चाहिए कि design से लेकर development तक हम पूरी तरह से आत्‍मनिर्भर बनें। हमें ऐसा Ecosystem विकसित करना होगा जहां integration और innovation पर संपूर्ण ध्‍यान हो।

साथियो, आज भारत डिफेंस के क्षेत्र में नए-नए रिफॉर्म्‍स की तरफ तेजी से आगे बढ़ रहा है। दुनिया में जितनी तेजी से स्थितियां बदल रही हैं। टेक्‍नोलॉजी निरंतर हावी हो रही है। भारत सिर्फ पुरानी व्‍यवस्‍थाओं के भरोसे नहीं रह सकता। मैं 19वीं सदी की व्‍यवस्‍थाओं से 21वीं सदी पार नहीं कर सकता अभी इसी हफ्ते अभी इसी हफ्ते, सरकार द्वारा चीफ ऑफ डिफेंस स्‍टाफ की भी नियुक्ति की गई है। ये सीडीएस अपने आप में बहुत बड़ा बदलाव लाने वाला है। उसका सीधा संबंध DRDO से जाने वाला है। बरसों पहले इस बात की जरूरत महसूस की गई थी कि भारत में तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल के लिए, ज्‍वाइंटनेस और सिनर्जी के लिए इस तरह का पद होना चाहिए, व्‍यवस्‍था होनी चाहिए। ये पद, हमारी सरकार का देश के प्रति कमिटमेंट था, जिसे हमने पूरा किया है।

साथियों, हमें परिवर्तन के इस दौर के साथ खुद को निरंतर मजबूत करते रहना है। यही देश की हमसे अपेक्षा है और Young Scientists Labs की स्‍थापना के पीछे भी यही विजन है। आज भविष्‍य के Technological Challenges से तो निपटेंगे ही, DRDO के वर्किंग कल्‍चर में भी नई ऊर्जा का संचार करेंगे, इसी कामना के साथ, आप सभी को एक बार फिर मेरी तरफ से बहुत-बहुत बधाई।

आपको और आपके परिवार को फिर एक बार नए वर्ष की मंगलकामना।

बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

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Text of PM’s unveils the hologram statue of Netaji at India Gate
January 23, 2022
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Also confers Subhas Chandra Bose Aapda Prabandhan Puraskars
Gujarat was the first state to enact disaster related law in 2003
“In disaster management, emphasis is on Reform along with stress on Relief, Rescue and Rehabilitation”
“Disaster management is no longer just a government job but it has become a model of 'Sabka Prayas'”
“We have a goal to fulfil the dreams of independent India. We have the goal of building a new India before the hundredth year of independence”
“It is unfortunate that after Independence, along with the culture and traditions of the country, the contribution of many great personalities was also tried to be erased”
“The freedom struggle involved ‘tapasya’ of lakhs of countrymen, but attempts were made to confine their history as well. But today the country is boldly correcting those mistakes”
“We have to move ahead taking inspiration from Netaji Subhash's 'Can Do, Will Do' spirit”

इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में उपस्थित मंत्रीपरिषद के मेरे साथी श्री अमित शाह, श्री हरदीप पूरी जी, मंत्रिमंडल के अन्य सदस्य, INA के सभी ट्रस्टी, NDMA के सभी सदस्यगण, jury मेम्बर्स, NDRF, कोस्ट गॉर्ड्स और IMD के डाइरेक्टर जनरल्स, आपदा प्रबंधन पुरस्कारों के सभी विजेता साथी, अन्य सभी महानुभाव, भाइयों एवं बहनों!

भारत मां के वीर सपूत, नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जन्मजयंती पर पूरे देश की तरफ से मैं आज कोटि-कोटि नमन करता हूं। ये दिन ऐतिहासिक है, ये कालखंड भी ऐतिहासिक है और ये स्थान, जहां हम सभी एकत्रित हैं, वो भी ऐतिहासिक है। भारत के लोकतंत्र की प्रतीक हमारी संसद पास में है, हमारी क्रियाशीलता और लोकनिष्ठा के प्रतीक अनेक भवन भी हमारे साथ पास में नजर आ रहे हैं, हमारे वीर शहीदों को समर्पित नेशनल वॉर मेमोरियल भी पास है। इन सबके आलोक में आज हम इंडिया गेट पर अमृत महोत्सव मना रहे हैं और नेताजी सुभाषचंद्र बोस को आदरपूर्वक श्रद्धांजलि दे रहे हैं। नेताजी सुभाष, जिन्होंने हमें स्वाधीन और संप्रभु भारत का विश्वास दिलाया था, जिन्होंने बड़े गर्व के साथ, बड़े आत्मविश्वास के साथ, बड़े साहस के साथ अंग्रेजी सत्ता के सामने कहा था- “मैं स्वतंत्रता की भीख नहीं लूंगा, मैं इसे हासिल करूंगा"। जिन्होंने भारत की धरती पर पहली आज़ाद सरकार को स्थापित किया था, हमारे उन नेताजी की भव्य प्रतिमा आज डिजिटल स्वरूप में इंडिया गेट के समीप स्थापित हो रही है। जल्द ही इस होलोग्राम प्रतिमा के स्थान पर ग्रेनाइट की विशाल प्रतिमा भी लगेगी। ये प्रतिमा आज़ादी के महानायक को कृतज्ञ राष्ट्र की श्रद्धांजलि है। नेताजी सुभाष की ये प्रतिमा हमारी लोकतान्त्रिक संस्थाओं को, हमारी पीढ़ियों को राष्ट्रीय कर्तव्य का बोध कराएगी, आने वाली पीढ़ियों को, वर्तमान पीढ़ी को निरंतर प्रेरणा देती रहेगी।

साथियों,

पिछले साल से देश ने नेताजी की जयंती को पराक्रम दिवस के रूप में मनाना शुरू किया है। आज पराक्रम दिवस के अवसर पर सुभाषचंद्र बोस आपदा प्रबंधन पुरस्कार भी दिए गए हैं। नेताजी के जीवन से प्रेरणा लेकर ही इन पुरस्कारों को देने की घोषणा की गई थी। साल 2019 से 2022 तक, उस समय के सभी विजेताओं, सभी व्यक्तियों, सभी संस्थाओं को जिने आज सम्मान का अवसर मिला है। उन सबको भी मैं बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

हमारे देश में आपदा प्रबंधन को लेकर जिस तरह का रवैया रहा था, उस पर एक कहावत बहुत सटीक बैठती है- जब प्यास लगी तो कुआं खोदना। और जिस मैं काशी क्षेत्र से आता हूं वहां तो एक और भी कहावत है। वो कहते हैं - भोज घड़ी कोहड़ा रोपे। यानि जब भोज का समय आ गया तो कोहड़े की सब्जी उगाने लगना। यानि जब आपदा सिर पर आ जाती थी तो उससे बचने के उपाय खोजे जाते थे। इतना ही नहीं, एक और हैरान करने वाली व्यवस्था थी जिसके बारे में कम ही लोगों को पता है। हमारे देश में वर्षों तक आपदा का विषय एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट के पास रहा था। इसका मूल कारण ये था कि बाढ़, अतिवृष्टि, ओले गिरना, ऐसी जो स्थितियों पैदा होती थी। उससे निपटने का जिम्मा, उसका संबंध कृषि मंत्रालय से आता था। देश में आपदा प्रबंधन ऐसे ही चलता रहता था। लेकिन 2001 में गुजरात में भूकंप आने के बाद जो कुछ हुआ, देश को नए सिरे से सोचने के लिए मजबूर किया। अब उसने आपदा प्रबंधन के मायने बदल दिए। हमने तमाम विभागों और मंत्रालयों को राहत और बचाव के काम में झोंक दिया। उस समय के जो अनुभव थे, उनसे सीखते हुए ही 2003 में Gujarat State Disaster Management Act बनाया गया। आपदा से निपटने के लिए गुजरात इस तरह का कानून बनाने वाला देश का पहला राज्य बना। बाद में केंद्र सरकार ने, गुजरात के कानून से सबक लेते हुए, 2005 में पूरे देश के लिए ऐसा ही Disaster Management Act बनाया। इस कानून के बाद ही National Disaster Management Authority उसके गठन का रास्ता साफ हुआ। इसी कानून ने कोरोना के खिलाफ लड़ाई में भी देश की बहुत मदद की।

साथियों,

डिजास्टर मैनैजमेंट को प्रभावी बनाने के लिए 2014 के बाद से हमारी सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर चौतरफा काम किया है। हमने Relief, Rescue, Rehabilitation उस पर जोर देने के साथ-साथ ही Reform पर भी बल दिया है। हमने NDRF को मजबूत किया, उसका आधुनिकीकरण किया, देश भर में उसका विस्तार किया। स्पेस टेक्नालजी से लेकर प्लानिंग और मैनेजमेंट तक, best possible practices को अपनाया। हमारे NDRF के साथी, सभी राज्यों के SDRFs, और सुरक्षा बलों के जवान अपनी जान की बाजी लगाकर, एक-एक जीवन को बचाते हैं। इसलिए, आज ये पल इस प्रकार से जान की बाजी लगाने वाले, औरों की जिंदगी बचाने के लिए खुद की जिंदगी का दांव लगाने वाले चाहे वो NDRF के लोग हों, चाहे SDRF के लोग हों, हमारे सुरक्षाबलों के साथी हों, ये सब के सब उनके प्रति आज आभार व्यक्त करने का, उनको salute करने का ये वक्त है।

साथियों,

अगर हम अपनी व्यवस्थाओं को मजबूत करते चलें, तो आपदा से निपटने की क्षमता दिनों-दिन बढ़ती चली जाती है। मैं इसी कोरोना काल के एक-दो वर्षों की बात करूं तो इस महामारी के बीच भी देश के सामने नई आपदाएँ आकर खड़ी हो गईं। एक तरफ कोरोना से तो लड़ाई लड़ ही रहे थे। अनेक जगहों पर भूकंप आए, कितने ही क्षेत्रों में बाढ़ आई। ओड़िशा, पश्चिम बंगाल समेत पूर्वी तटों पर cyclones आए, गोवा, महाराष्ट्र, गुजरात, पश्चिमी तटों पर cyclones आए, पहले, एक-एक साइक्लोन में सैकड़ों लोगों की मृत्यु हो जाती थी, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। देश ने हर चुनौती का जवाब एक नई ताकत से दिया। इसी वजह से इन आपदाओं में हम ज्यादा से ज्यादा जीवन बचाने में सफल रहे। आज बड़ी-बड़ी अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां, भारत के इस सामर्थ्य, भारत में आए इस बदलाव की सराहना कर रही हैं। आज देश में एक ऐसा end-to-end cyclone response system है जिसमें केंद्र, राज्य, स्थानीय प्रशासन और सभी एजेंसियां एक साथ मिलकर के काम करती हैं। बाढ़, सूखा, cyclone, इन सभी आपदाओं के लिए वार्निंग सिस्टम में सुधार किया गया है। Disaster risk analysis के लिए एडवांस्ड टूल्स बनाए गए हैं, राज्यों की मदद से अलग अलग क्षेत्रों के लिए Disaster risk maps बनाए गए हैं। इसका लाभ सभी राज्यों को, सभी स्टेक होल्डर्स को मिल रहा है। और सबसे महत्वपूर्ण, डिजास्टर मैनेजमेंट - आपदा प्रबंधन, आज देश में जनभागीदारी और जन-विश्वास का विषय बन गया है। मुझे बताया गया है कि NDMA की ‘आपदा मित्र’ जैसी स्कीम्स से युवा आगे आ रहे हैं। आपदा मित्र के रूप में जिम्मेवारियां उठा रहे हैं। यानी जन भागीदारी बढ़ रही है। कहीं कोई आपदा आती है तो लोग विक्टिम्स नहीं रहते, वो वॉलंटियर्स बनकर आपदा का मुकाबला करते हैं। यानी, आपदा प्रबंधन अब एक सरकारी काम भर नहीं है, बल्कि ये ‘सबका प्रयास’ का एक मॉडल बन गया है।

और साथियों,

जब मैं सबका प्रयास की बात करता हूँ, तो इसमें हर क्षेत्र में हो रहा प्रयास, एक holistic approach भी शामिल है। आपदा प्रबंधन को प्राथमिकता देते हुए, हमने अपने एजुकेशन सिस्टम में भी कई सारे बदलाव किए हैं। जो सिविल इंजीनियरिंग के कोर्सेस होते हैं, आर्किटेक्चर से जुड़े कोर्सेस होते हैं, उसके पाठ्यक्रम में डिजास्टर मैनेजमेंट से जोड़ा, इन्फ्रासट्रक्चर की रचना कैसी हो उसपर विषयों को जोड़ना, ये सारे काम प्रयासरत हैं। सरकार ने Dam Failure की स्थिति से निपटने के लिए, डैम सेफ्टी कानून भी बनाया है।

साथियों,

दुनिया में जब भी कोई आपदा आती है तो उसमें लोगों की दुखद मृत्यु की चर्चा होती है, कि इतने लोगों की मृत्यु हो गई, इतना ये हो गया, इतने लोगों को हटाया गया, आर्थिक नुकसान भी बहुत होता है। उसकी भी चर्चा की जाती है। लेकिन आपदा में जो इंफ्रास्ट्रक्चर का नुकसान होता है, वो कल्पना से परे होता है। इसलिए ये बहुत आवश्यक है कि आज के समय में इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण ऐसा हो जो आपदा में भी टिक सके, उसका सामना कर सके। भारत आज इस दिशा में भी तेजी से काम कर रहा है। जिन क्षेत्रों में भूकंप, बाढ़ या साइक्लोन का खतरा ज्यादा रहता है, वहां पर पीएम आवास योजना के तहत बन रहे घरों में भी इसका ध्यान रखा जाता है। उत्तराखंड में जो चार धाम महा-परियोजना का काम चल रहा है, उसमें भी आपदा प्रबंधन का ध्यान रखा गया है। उत्तर प्रदेश में जो नए एक्सप्रेसवे बन रहे हैं, उनमें भी आपदा प्रबंधन से जुड़ी बारीकियों को प्राथमिकता दी गई है। आपात स्थिति में ये एक्सप्रेसवे, विमान उतारने के काम आ सकें, इसका भी प्रावधान किया गया है। यही नए भारत का विज़न है, नए भारत के सोचने का तरीका है।

साथियों,

Disaster Resilient Infrastructure की इसी सोच के साथ भारत ने दुनिया को भी एक बहुत बड़ी संस्था का विचार दिया है, उपहार दिया है। ये संस्था है- CDRI - Coalition for Disaster Resilient Infrastructure. भारत की इस पहल में ब्रिटेन हमारा प्रमुख साथी बना है और आज दुनिया के 35 देश इससे जुड़ चुके हैं। दुनिया के अलग-अलग देशों के बीच में, सेनाओं के बीच में हमने Joint Military Exercise बहुत देखी है। पुरानी परंपरा है उसकी चर्चा भी होती है। लेकिन भारत ने पहली बार डिजास्टर मैनेजमेंट के लिए Joint ड्रिल की परंपरा शुरू की है। कई देशों में मुश्किल समय में हमारी डिजास्टर मैनेजमेंट से जुड़ी एजेंसियों ने अपनी सेवाएँ दी हैं, मानवता के प्रति अपने कर्तव्य का निर्वाह किया है। जब नेपाल में भूकंप आया, इतनी बड़ी तबाही मची, तो भारत एक मित्र देश के रूप में उस दुख को बाटने के लिए जरा भी देरी नहीं की थी। हमारे NDRF के जवान वहां तुरंत पहुंच गए थे। डिजास्टर मैनेजमेंट का भारत का अनुभव सिर्फ हमारे लिए नहीं बल्कि पुरी मानवता के लिए आप सभी को याद होगा 2017 में भारत ने साउथ एशिया जियो-स्टेशनरी communication satellite को लान्च किया। weather और communication के क्षेत्र में उसका लाभ हमारे दक्षिण एशिया के मित्र देश को मिल रहा है।

साथियों,

परिस्थितियां कैसी भी हों, अगर हममे हौंसला है तो हम आपदा को भी अवसर में बदल सकते हैं। यही संदेश नेताजी ने हमे आजादी की लड़ाई के दौरान दिया था। नेताजी कहते थे कभी भी स्वतंत्र भारत के सपने का विश्वास मत खोना। दुनिया की कोई ताकत नहीं है जो भारत को झकझोर सके"। आज हमारे सामने आज़ाद भारत के सपनों को पूरा करने का लक्ष्य है। हमारे सामने आज़ादी के सौंवे साल से पहले, 2047 के पहले नए भारत के निर्माण का लक्ष्य है। और नेताजी को देश पर जो विश्वास था, जो भाव नेताजी के दिल में उभरते थे। और उनके ही इन भावों के कारण मैं कह सकता हूँ कि, दुनिया की कोई ताकत नहीं है जो भारत को इस लक्ष्य तक पहुंचने से रोक सके। हमारी सफलताएँ हमारी संकल्पशक्ति का सबूत हैं। लेकिन, ये यात्रा अभी लंबी है। हमें अभी कई शिखर और पार करने हैं। इसके लिए जरूरी है, हमें देश के इतिहास का, हजारों सालों की यात्रा में इसे आकार देने वाले तप, त्याग और बलिदानों का बोध रहे।

भाइयों और बहनों,

आज़ादी के अमृत महोत्सव का संकल्प है कि भारत अपनी पहचान और प्रेरणाओं को पुनर्जीवित करेगा। ये दुर्भाग्य रहा कि आजादी के बाद देश की संस्कृति और संस्कारों के साथ ही अनेक महान व्यक्तित्वों के योगदान को मिटाने का काम किया गया। स्वाधीनता संग्राम में लाखों-लाख देशवासियों की तपस्या शामिल थी लेकिन उनके इतिहास को भी सीमित करने की कोशिशें हुईं। लेकिन आज आजादी के दशकों बाद देश उन गलतियों को डंके की चोट पर सुधार रहा है, ठीक कर रहा है। आप देखिए, बाबा साहब आंबेडकर से जुड़े पंचतीर्थों को देश उनकी गरिमा के अनुरूप विकसित कर रहा है। स्टेचू ऑफ यूनिटी आज पूरी दुनिया में सरदार वल्लभ भाई पटेल के यशगान की तीर्थ बन गई है। भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत भी हम सबने कर दी है। आदिवासी समाज के योगदान और इतिहास को सामने लाने के लिए अलग-अलग राज्यों में आदिवासी म्यूज़ियम्स बनाए जा रहे हैं। और नेताजी सुभाषचंद्र बोस के जीवन से जुड़ी हर विरासत को भी देश पूरे गौरव से संजो रहा है। नेताजी द्वारा अंडमान में तिरंगा लहराने की 75वीं वर्षगांठ पर अंडमान के एक द्वीप का नाम उनके नाम पर रखा गया है। अभी दिसम्बर में ही, अंडमान में एक विशेष ‘संकल्प स्मारक’ नेताजी सुभाष चंद्र बोस के लिए समर्पित की गई है। ये स्मारक नेताजी के साथ साथ इंडियन नेशनल आर्मी के उन जवानों के लिए भी एक श्रद्धांजलि है, जिन्होंने आज़ादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया था। ये मेरा सौभाग्य है कि पिछले वर्ष, आज के ही दिन मुझे कोलकाता में नेताजी के पैतृक आवास भी जाने का अवसर मिला था। जिस प्रकार से वो कोलकाता से निकले थे, जिस कमरे में बैठकर वो पढ़ते थे, उनके घर की सीढ़ियां, उनके घर की दीवारें, उनके दर्शन करना, वो अनुभव, शब्दों से परे है।

साथियों,

मैं 21 अक्टूबर 2018 का वो दिन भी नहीं भूल सकता जब आजाद हिंद सरकार के 75 वर्ष हुए थे। लाल किले में हुए विशेष समारोह में मैंने आजाद हिंद फौज की कैप पहनकर तिरंगा फहराया था। वो पल अद्भुत है, वो पल अविस्मरणीय है। मुझे खुशी है कि लाल किले में ही आजाद हिंद फौज से जुड़े एक स्मारक पर भी काम किया जा रहा है। 2019 में, 26 जनवरी की परेड में आजाद हिंद फौज के पूर्व सैनिकों को देखकर मन जितना प्रफुल्लित हुआ, वो भी मेरी अनमोल स्मृति है। और इसे भी मैं अपना सौभाग्य मानता हूं कि हमारी सरकार को नेताजी से जुड़ी फाइलों को सार्वजनिक करने का अवसर मिला।

साथियों,

नेताजी सुभाष कुछ ठान लेते थे तो फिर उन्हें कोई ताकत रोक नहीं सकती थी। हमें नेताजी सुभाष की ‘Can Do, Will Do’ स्पिरिट से प्रेरणा लेते हुए आगे बढ़ना है। वो ये जानते थे तभी ये बात हमेशा कहते थे भारत में राष्ट्रवाद ने ऐसी सृजनात्मक शक्ति का संचार किया है जो सदियों से लोगों के अंदर सोई पड़ी थी। हमें राष्ट्रवाद भी जिंदा रखना है। हमें सृजन भी करना है। और राष्ट्र चेतना को जागृत भी रखना है। मुझे विश्वास है कि, हम मिलकर, भारत को नेताजी सुभाष के सपनों का भारत बनाने में सफल होंगे। आप सभी को एक बार फिर पराक्रम दिवस की बहुत बहुत शुभकामनायें देता हूं और मैं आज एनडीआरएफ, एसडीआरएफ के लोगों को भी विशेष रूप से बधाई देता हूं। क्योंकि बहुत छोटे कालखंड में उन्होंने अपनी पहचान बना दी है। आज कहीं पर भी आपदा हो या आपदा के संबंधित संभावनाओं की खबरें हों, साईक्लोन जैसी। और जब एनडीआरएफ के जवान यूनिफार्म में दिखते हैं। सामान्य मानवीय को एक भरोसा हो जाता है। कि अब मदद पहुंच गई। इतने कम समय में किसी संस्था और इसकी यूनिफार्म की पहचान बनना, यानि जैसे हमारे देश में कोई तकलीफ हो और सेना के जवान आ जाएं तो सामान्य मानवीय को संतोष हो जाता है, भई बस अब ये लोग आ गये। वैसा ही आज एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के जवानों ने अपने पराक्रम से ये करके दिखाया है। मै पराक्रम दिवस पर नेताजी का स्मरण करते हुए, मैं एनडीआरएफ के जवानों को, एसडीआरएफ के जवानों को, उन्होंने जिस काम को जिस करुणा और संवेदनशीलता के साथ उठाया है। बहुत – बहुत बधाई देता हूं। उनका अभिनंदन करता हूं। मैं जानता हूं इस आपदा प्रबंधन के काम में, इस क्षेत्र में काम करने वाले कईयों ने अपने जीवन भी बलिदान दिए हैं। मैं आज ऐसे जवानों को भी श्रद्धांजलि देता हूं जिन्होंने किसी की जिंदगी बचाने के लिए अपनी जिंदगी दांव पर लगा दी थी। ऐसे सबको में आदरपूवर्क नमन करते हुए मैं आप सबको भी आज पराक्रम दिवस की अनेक – अनेक शुभकामनाएं देते हुए मेरी वाणी को विराम देता हूं। बहुत बहुत धन्यवाद !