Govt willing to walk the extra mile with the scientific community: PM Modi

Published By : Admin | January 2, 2020 | 18:25 IST
QuotePM Modi applauds DRDO scientists, says India’s missile programme is one of the outstanding programmes in the world
QuoteGovt willing to walk the extra mile with the scientific community so that it can invest time in emerging technologies and innovations for national security: PM
QuoteDRDO's innovations will play a huge role in strengthening Make in India and in promoting a vibrant defence sector in the country: PM

कर्नाटका के मुख्‍यमंत्री श्रीमान येदियुरप्पा जी, DRDO के चेयरमैन डॉ जी. सतीश रेड्डी जी, DRDO के अन्‍य शीर्ष अधिकारीगण, Apex Committees के Members! Young scientists के labs directors

साथियो, आप सभी को सबसे पहले नववर्ष की बहुत-बहुत शुभकामनाएं। Happy New Year… ये संयोग ही है कि अब से कुछ समय पहले मैं किसानों के कार्यक्रम में था तुमकुर और अब यहां देश के जवान और अनुसंधान की चिंता करने वाले आप सभी साथियों के बीच में हूं। और कल मुझे साइंस कांग्रेस में जाना है। एक प्रकार से कर्नाटका का मेरा ये प्रवास और 2020 का ये मेरा पहला प्रवास, जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान और जय अनुसंधान इसकी न्यू इंडिया की भावना को एक प्रकार से समर्पित है। और ये भी हम सबके लिए बहुत गौरव का विषय है कि ये आयोजन Aeronautical Development Establishment में हो रहा है, जहां हम सभी के श्रद्धेय डॉ. ए पी जे अब्दुल कलाम DRDO से जुड़े थे।

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साथियो, ये दशक न्यू इंडिया के रूप में तो महत्‍वपूर्ण है ही है। क्‍योंकि जब 2020 है तो वो एक नया साल नहीं पूरा दशक हमारे सामने आया है। और आने वाले वर्षों में भारत की ताकत क्‍या होगी, विश्‍व में हमारा स्‍थान कहां होगा। ये decade ये भी तय करने वाला है। ये वो दशक है जो पूरी तरह से युवा सपनों का है, हमारे युवा Innovators का है। विशेष तौर पर वो Innovators जो 21वीं सदी में या तो पैदा हुए हैं या फिर 21वीं सदी में युवा हुए हैं। जब मैंने आपसे आग्रह किया था कि DRDO को rethink और खुद को reshape करना चाहिए। 21वीं सदी की चुनौतियों से निपटने के लिए नई ऊर्जा के साथ काम करना चाहिए। तो इसके पीछे यही मेरी एक सोच थी कि इसका मतलब ये नहीं कि जो 36 का हो गया वो बेकार हो गया... इसके पीछे मेरी भूमिका यही है कि जो 60 साल, 50 साल, 55 साल इतनी तपस्‍या करके वहां पहुंचे हैं अगर उनके कंधे पर वो 35 से कम आयु वाले को बिठा देते हैं तो दुनिया को एक नए भारत के दर्शन होते हैं। ये जो पुराने लोग हैं उनकी मजबूती के बिना नए का ऊपर जाना संभव नहीं है। और इसलिए ये एक Combination बहुत आवश्‍यक है। और इस विचार के पीछे मेरा अपना भी एक अनुभव है। मैं राजनीतिक जीवन में बहुत देर से आया हूं और शुरू में मैं मेरा पार्टी का organization का काम देखता था। election or moment उन चीजों को करता था। तो मैं जब गुजरात में मैंने शुरुआत की और मेरे सामने पहला एक बड़ा चुनाव की जिम्‍मेवारी आई। मैं बिल्‍कुल नया था, और उस समय अखबारों ने इस चीज को बड़े विस्‍तार से लिखा था। क्योंकि उस समय करीब 90 लोग मेरे ऑफिस में, मेरी मैनेजमैंट में काम करते थे। पूरा चुनाव पूरे राज्‍य भर में लड़ा जाता था लेकिन ऑफिस मैनेजमैंट करीब 90 लोग थे। और Volunteer के रूप में आए थे वो 2-3 महीने के लिए काम करने वाले थे। लेकिन अखबार वालों ने ढूंढ कर निकाला था। ये जो 90 लोग हैं इस पूरी टीम की average age 23 है यानी 23 की average age ग्रुप से मैं चुनाव लड़ा था, और लड़वाया था और हम पहली बार विजयी हुए थे।युवा में restricting capacity बहुत होती है। आप कितने ही अच्‍छे कबड्डी के खिलाड़ी हो, कितने ही बढि़या लेकिन और जीवन में मानो 20 साल तक कबड्डी खेले हैं। National, International खेले हैं लेकिन 60-70 साल की आयु के बाद एक कबड्डी का खेल चल रहा है और आप वहां सिर्फ देखने के लिए गए हैं। क्‍योंकि पूरी जिंदगी कबड्डी खेलें हैं और कोई 18-20 साल का नौजवान जिस तेजी से मूवमेंट करता है, उठता है, पटकता है, तो आप बाहर बैठे मन में अरे-अरे गिर जाएगा, अरे-अरे चोट न लग जाए.... आप खुद भी तो कभी ये करके आए हैं। लेकिन अब वो देख नहीं पाते लगता है अरे-अरे कहीं गिर न जाए। ये साइको‍लॉजी काम करती होगी। ये युवा मन और अनुभवी मन के बीच में एक अंतर होता है। और इसलिए एक मनो‍वै‍ज्ञानिक परिवर्तन विश्‍व की चुनौतियों को स्‍वीकार करने के लिए DRDO में इन दोनों का combination कैसे हो। कभी-कभार एक बहुत बड़े वृक्ष के नीचे छोटा पौधा पनप नहीं पाता है। दोष बड़े वृक्ष का नहीं है। पौधे को भी रहता है कि इनके सामने मुझे ऐसा ही रहना चाहिए। किसी का दोष नहीं है। लेकिन अगर उसी पौधे को कहीं खुले में छोड़ दिया जाए तो देखते ही देखते वट वृक्ष भी गर्व करेगा वाह ये भी मेरे साथ पनप रहा है। इसी एक भूमिका को लेकर के इन पांच Labs से शुरू किया है। और मैं चाहता हूं कि वो गलतियां करे ये पांच Labs पूरा बजट उड़ा दे तो उडा दे एक बार। एक scientist पूरी अपनी जिंदगी तबाह कर देता है जी, तब देश को कुछ मिलता है। तो फिर खजाना क्‍या चीज होती है, आप तो अपनी जिंदगी लगा रहे हो तो सरकार को खजाना लगाने में क्‍या जाता है।

और मुझे संतोष है कि Advanced Technologies के क्षेत्र में 5 Labs स्थापित करने के सुझाव पर गंभीरता से काम हुआ और आज बेंगलुरु, कोलकाता, चेन्नई, हैदराबाद और मुंबई में 5 ऐसे संस्थान शुरु हो रहे हैं। और मुझे ये विश्‍वास है कि ये Young Scientist Labs युवा और वैज्ञानिकों के विचार और व्‍यवहार को नई उड़ान देगी। इसका मतलब ये हुआ कि अब ये पहचाना जाएगा कि DRDO-Y लेकिन बोलते समय लगेगा DRDO Why और मैं समझता हूं कि ये पांच लैब DRDO-Y को जवाब देने की ताकत रखते है ये मेरा विश्‍वास है। और हमने सबने मिल करके इसे बल देना है। इन Labs से मिलने वाले results Advanced Technologies के लिए हमारे राष्‍ट्रीय प्रयास का स्‍वरूप intensity का तय करेंगे। ये Labs, देश में उभरती हुई Technologies के क्षेत्र में, Research और Development के स्वरूप को तैयार करने में मदद करेंगी।

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और हां, अपने युवा वैज्ञानिक और मैं इन साथियों से जरूर कहना चाहूंगा कि ये Labs, सिर्फ टेक्नोलॉजी को टेस्ट नहीं करेंगी, वर्ना कभी-कभी तो लगता है ये टेक्नोलॉजी में 2 कदम गए 5 कदम गए मेरे हिसाब से ये सिर्फ टेक्नॉलॉजी को टेस्ट नहीं करेंगी। ये मेरे young scientist के टेंपरामेंट और पेशेंस को भी टेस्ट करने वाली हैं और यही सबसे बड़ा उसका पैरामीटर है।

आपको हमेशा ये ध्यान रखना होगा कि आपके प्रयास और निरंतर अभ्यास से ही भारत सफलता के रास्ते पर आगे ले जाएगा। सिर्फ Positivity or Purpose यही आपकी प्रेरणा के स्‍त्रोत होने चाहिए। आपको हमेशा ये ध्‍यान रखना है। कि 130 करोड़ की आबादी का जीवन सुरक्षित और आसान बनाने का जिम्‍मा आपके कंधे पर है।

साथियो आज का ये कार्यक्रम तो एक शुरुआत भर है। आपके सामने सिर्फ अगला एक साल नहीं, अगला एक दशक है। इस एक दशक में DRDO का मीडियम और लॉन्ग टर्म रोडमैप क्या हो, इस पर बहुत गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। और मैं एक और सुझाव देता हूं। ये पांच लैबस 35 और उसके नीचे की टीम है और जब इस टीम में 36 हो जाएंगे तो क्‍या होगा तो मैं उन लोगो को insurance देता हूं कि अब इस 5 लैब को 45 होने की भी छूट है और 55 होने की भी छूट है। आपको नई पांच 35 वाली बनानी होगी इसको 35 maintain नहीं करना है ये 35 वाला 40 होने दीजिए, ये 35 वाले को 45 होने दीजिए। अब नए पांच 35 वाले करिए। वे जब 35 cross करेगे तो फिर नए 35 वाले पांच कीजिए ये चेन चलती रहनी चाहिए। अगर ये चेन नहीं चलेगी तो यहां 32 वाला बैठा है वो सेाचेगा कि मेरे लिए यहां 3 साल है मैं क्‍या करूं फिर तो मेरा सारा सपना टूट जाएगा। इसलिए जिनको ये दिया है लैब तो जब तक वो न थक जाए तब तक उसके जिम्‍मे छोड़ दिजिए। वे पचास का हो जाए,पचपन का हो जाए साठ का हो जाए करने दीजिए। 5 नई लैब 35 वाली बना दीजिए। और ये पांच का क्रम चलता रहे। तब देखिए आप नयापन का एक क्षेत्र लगातार बनता चला जाएगा। और यही हमें ultimately फायदा करेगा। और सिर्फ हम विचार करने पर न रूके। तय समय के भीतर actionable point पर भी कार्यक्रम भी शुरू होना चाहिए।

मैं DRDO को उस ऊँचाई पर देखना चाहता हूं जहां वो न सिर्फ भारत के वैज्ञानिक संस्थानों की दिशा और दशा तय करे, बल्कि दुनिया के.... और मैं बहुत जिम्‍मेवारी के साथ कह रहा हूं। दुनिया के.... और अन्य बड़े संस्थानों के लिए भी DRDO और हमारी young lab प्रेरणास्रोत बन सकती है। मैं ऐसा क्‍यों कह रहा हूं इसकी ठोस वजह है..... वजह है DRDO का इतिहास, DRDO का प्रर्दशन, DRDO देश का भरोसा।

साथियो आज देश का बेहतरीन Scientific Mind DRDO में है। DRDO की उपलब्धिया अनंत है। अभी मैंने जो exhibition देखी है। जिसमे मौजूदा उपलब्धियों के साथ-साथ भविष्‍य के आपके प्‍लान और प्रोजेक्‍ट की भी जानकारी है। और मुझे इतनी सरल भाषा में आपके नौजवानों ने समझाया कि मुझे भी समझ आ गया कि हां ये तो मैं भी कर सकता हूं। वर्ना स्‍कूल तो नहीं समझ में आता था कुछ। आज आपने समझा दिया। आपने भारत के मिसाइल कार्यक्रम को दुनिया के सबसे उत्कृष्ट कार्यक्रमों में शामिल किया है। और बीता वर्ष तो स्पेस और एयर डिफेंस के क्षेत्र में भारत के सामर्थ्य को नई दिशा देने वाला रहा है। A set... A set के रूप में अत्‍याधुनिक स्‍पेज टेकनोलॉजी का सफल परीक्षण ये निश्चित रूप से 21वी सदी के भारत के capability को define करेगा।

आप सभी के प्रयासों से आज भारत उन बहुत कम देशों में से एक है जिनके पास aircrafts से लेकर के aircraft carrier तक सब कुछ बनाने की क्षमता है। लेकिन क्‍या सिर्फ इतना किया जाना काफी है। जी नहीं... साथियो और...... घर में भी देखा होगा जो बच्‍चा अच्‍छा काम करता है मां-बाप उसको ज्‍यादा परेशान करते हैं वो पांच करता है तो बोलते है सात करो। सात करता है तो बोलते हैं दस करो...... और जो नहीं करता है अरे छोड़ो..... वो करेगा नहीं वो..... उसे छोड़ देते हैं। तो आपकी मुसीबत है कि आपको लोग काम बताते ही रहेंगे।

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देखिए रामचरित्र मानस में एक बहुत बढि़या बात कही है। रामचरित्र मानस में कहा गया है

कवन जो काम कठिन जग माहीं।

जो नहिं होइ तात तुम्‍ह पाहीं।।

यानी इस धरती पर ऐसा कौन सा कार्य है आपसे हो नहीं सकता। तो सब कुछ हो सकता है आपके लिए कोई भी कार्य कठिन नहीं है। जैसे जब रामचरित्र मानस जब बना तब उसे मालूम था कभी DRDO होगा। मैं DRDO के लिए भी यही दोहराना चाहता हूं। आपकी क्षमताएं असीम हैं आप बहुत कुछ कर सकते हैं। आपने दायरे का विस्‍तार करिए अपने Performance के Parameters को बदलिए, अपने पंख को पूरी क्षमता से खोलकर आसमान पर एकछत्र राज करने का हौसला तो दिखाइए। अवसर है और मैं आपके साथ हूं।

देश के प्रधानमंत्री के नाते मैं आपके सामने खड़ा होकर कह रहा हूं कि सरकार पूरी तरह आपके साथ, देश के वैज्ञानिकों के साथ, innovators के साथ कंधे से कंधे मिलाकर चलने के लिए आज हिंदुस्‍तान तैयार है। आप सभी इस बात से परिचित है कि आने वाले समय में Air और Sea के साथ-साथ Cyber और Space भी दुनिया के Strategic Dynamics को तय करने वाला है। इसके साथ-साथ Intelligent Machines भविष्‍य की रक्षा सुरक्षा के तंत्र में अहम भूमिका निभाने लायक है। ऐसे में भारत किसी से भी पीछे नहीं रह सकता। अपने नागरिकों, अपनी सीमाओं और अपने हितों की रक्षा के लिए भविष्य की तकनीक पर Investment भी ज़रूरी है और Innovation भी आवश्यक है।

मुझे विश्‍वास है कि न्‍यू इंडिया की आवश्यकताओं और आंकाक्षाओं को पूरा करने में आप कोई कसर बाकी नहीं छोड़ेंगे, और बल्कि मैं तो ये भी कहूंगा कि आपका विस्‍तार सिर्फ भारत के भीतर तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए। DRDO जैसा संस्‍थान दुनिया में मानवता को बहुत कुछ दे सकता है। विश्‍व सुरक्षा में आप बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। आज दुनिया के बहुत से देश हैं जिन्‍हें सीमाओं पर हमले का खतरा नहीं है। अड़ोस-पड़ोस में सारे मित्र देश हैं। लेकिन ये देश भी जिन्‍होंने कभी नहीं सोचा था कि उनको बंदूक तो उठानी पड़ेगी। क्‍योंकि अड़ोस-पड़ोस कभी युद्ध का खतरा ही नहीं था। सीमाएं सुरक्षित थी, शांत थी, खुली थी, प्‍यार भरा माहौल था लेकिन वे देश भी आतंकवाद की चपेट में आ चुके हैं। उनको भी बंदूक उठानी पड़ी।

DRDO ऐसे देशों में भी आंतरिक सुरक्षा बढ़ाने में अपना योगदान दे सकता है। जिन छोटे-छोटे देश के लोगों से मैं मिलता हूं उनकी इतनी आवश्‍यकताएं बढ़ गई है। सीमित संसाधनों के बाद भी इन खतरों के लिए उनको कुछ-कुछ नया सोचना पड़ेगा। हम ऐसे छोटे-छोटे लोगों का हाथ पकड़ करके उनको सुरक्षा की गांरटी दे सकते हैं। ये मानवता का काम होगा। और आपके द्वारा किया गया ऐसा हर कार्य मानवता की बहुत बड़ी सेवा होगा और विश्‍व मंच पर भारत की भूमिका को भी और मजबूत करेगा।

साथियो, Defence Manufacturing के क्षेत्र में, भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए DRDO को नए Innovations के साथ सामने आना होगा। देश में एक Vibrant Defense Sector को बढ़ावा देने में, मेक इन इंडिया को मजबूत करने में DRDO के Innovations की बहुत बड़ी भूमिका है। और इसलिए हमारा ये निरंतर प्रयास होना चाहिए कि design से लेकर development तक हम पूरी तरह से आत्‍मनिर्भर बनें। हमें ऐसा Ecosystem विकसित करना होगा जहां integration और innovation पर संपूर्ण ध्‍यान हो।

साथियो, आज भारत डिफेंस के क्षेत्र में नए-नए रिफॉर्म्‍स की तरफ तेजी से आगे बढ़ रहा है। दुनिया में जितनी तेजी से स्थितियां बदल रही हैं। टेक्‍नोलॉजी निरंतर हावी हो रही है। भारत सिर्फ पुरानी व्‍यवस्‍थाओं के भरोसे नहीं रह सकता। मैं 19वीं सदी की व्‍यवस्‍थाओं से 21वीं सदी पार नहीं कर सकता अभी इसी हफ्ते अभी इसी हफ्ते, सरकार द्वारा चीफ ऑफ डिफेंस स्‍टाफ की भी नियुक्ति की गई है। ये सीडीएस अपने आप में बहुत बड़ा बदलाव लाने वाला है। उसका सीधा संबंध DRDO से जाने वाला है। बरसों पहले इस बात की जरूरत महसूस की गई थी कि भारत में तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल के लिए, ज्‍वाइंटनेस और सिनर्जी के लिए इस तरह का पद होना चाहिए, व्‍यवस्‍था होनी चाहिए। ये पद, हमारी सरकार का देश के प्रति कमिटमेंट था, जिसे हमने पूरा किया है।

साथियों, हमें परिवर्तन के इस दौर के साथ खुद को निरंतर मजबूत करते रहना है। यही देश की हमसे अपेक्षा है और Young Scientists Labs की स्‍थापना के पीछे भी यही विजन है। आज भविष्‍य के Technological Challenges से तो निपटेंगे ही, DRDO के वर्किंग कल्‍चर में भी नई ऊर्जा का संचार करेंगे, इसी कामना के साथ, आप सभी को एक बार फिर मेरी तरफ से बहुत-बहुत बधाई।

आपको और आपके परिवार को फिर एक बार नए वर्ष की मंगलकामना।

बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

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India is the springboard for Japanese businesses to the Global South: PM Modi in Tokyo
August 29, 2025

Your Excellency Prime Minister Ishiba,
Business leaders from India and Japan,
Ladies and Gentlemen,
Namaskar

Konnichiwa!

I just arrived in Tokyo this morning. I am very happy that my trip is starting with the giants of the business world.

I personally know many of you. Whether it was during my time in Gujarat, or after moving to Delhi. I’ve had close connections with many of you. I’m really glad to have this opportunity to meet you all today.

I especially thank Prime Minister Ishiba for joining this forum. I congratulate him for his valuable remarks.

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Friends,

Japan has always been a key partner in India’s growth journey. Whether it’s metros, manufacturing, semiconductors, or start-ups, our partnership in every area reflects mutual trust.

Japanese companies have invested more than $40 billion in India. In the last two years alone, there has been private investment of $13 billion. JBIC says India is the most 'promising' destination. JETRO says 80 percent of companies want to expand in India, and 75 percent are already profitable.

Which means, in India, capital does not just grow, it multiplies!

Friends,

You are all familiar with the remarkable changes India has experienced in the last eleven years. Today, we have political and economic stability, and clear and predictable policies. India is now the fastest-growing major economy in the world, and very soon, it will become the world’s third-largest economy.

India is contributing to 18% of global growth. The country’s capital markets are giving good returns, and we have a strong banking sector. Inflation and interest rates are low, and foreign exchange reserves stand at around $700 billion.

Friends,

Behind this change is our approach of ‘Reform, Perform, and Transform.’ In 2017, we introduced "One Nation–One Tax”, and now we are working on bringing in new and bigger reforms in it. A few weeks ago, our Parliament has also approved the new and simplified Income Tax code.

Our reforms are not limited to the tax system alone. We have emphasized on ease of doing business. We have established a single digital window approval for businesses. We have rationalized 45,000 compliances. A high-level committee on de-regulation has been formed to speed up this process.

Sensitive sectors like Defence and Space have been opened up to the private sector. Now, we are also opening up the nuclear energy sector.

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Friends,

These reforms reflect our determination to build a developed India. We have the commitment, the conviction, and the strategy, and the world has not just recognized it but also appreciated it. S&P Global has upgraded India's credit rating after two decades.

The world is not just watching India, it is counting on India.

Friends,

The India-Japan Business Forum report has just been presented, detailing the business deals between our companies. I congratulate all of you for on this remarkable progress. I would also like to humbly offer a few suggestions for our partnership.

The first is manufacturing. Our partnership in the auto sector has been extremely successful. And the Prime Minister described it in great detail. Together, we can replicate the same magic in batteries, robotics, semi-conductors, ship-building and nuclear energy. Together, we can make a significant contribution to the development of the Global South, especially Africa.

I urge all of you: Come, Make in India, Make for the World. The success stories of Suzuki and Daikin can become your success stories too.

Second, is technology and innovation. Japan is a "Tech Powerhouse". And, India is a "Talent Powerhouse". India has taken bold and ambitious initiatives in AI, Semiconductors, Quantum computing, Biotech, and Space. Japan's technology and India's talent together can lead the tech revolution of this century.

The third area is the Green Energy Transition. India is quickly moving towards 500 GW of renewable energy by 2030. We also aim for 100 GW of nuclear power by 2047. From solar cells to green hydrogen, there are huge opportunities for partnership.

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An agreement has been reached between India and Japan on Joint Credit Mechanism. This can be used to cooperate in building a clean and green future.

Fourth, is Next-Gen Infrastructure. In the last decade, India has made unprecedented progress in next generation mobility, and logistics infrastructure. The capacity of our ports has doubled. There are more than 160 airports. Metro lines of a 1000 km have been built. Work is also underway on the Mumbai-Ahmedabad high-speed rail in cooperation with Japan.

But our journey does not stop here. Japan's excellence and India's scale can create a perfect partnership.

Fifth is Skill Development and People-to-People Ties. The talent of India's skilled youth has the potential to meet global needs. Japan can also benefit from this. You could train Indian talent in Japanese language and soft skills, and together create a "Japan-ready" workforce. A shared workforce will lead to shared prosperity.

Friends,

In the end I would like to say this - India and Japan’s partnership is strategic and smart. Powered by economic logic, we have turned shared interests into shared prosperity.

India is the springboard for Japanese businesses to the Global South. Together, we will shape the Asian Century for stability, growth, and prosperity.

With these words, I express my gratitude to Prime Minister Ishiba and all of you.

Arigatou Gozaimasu!
Thank you very much.