1971 తరువాత మొదటిసారిగా, దేశం ఒక ప్రభుత్వానికి అధికార అనుకూల ఉత్తర్వు ఇచ్చింది: ప్రధాని మోదీ
న్యూ ఇండియా కల, ఆకాంక్షలను తీర్చడానికి కృషి చేస్తాం: ప్రధాని మోదీ
కారు తయారు చేయడం నుండి, బుల్లెట్ రైళ్లు చేయడానికి భారతదేశం మరియు జపాన్ ఇప్పుడు సహకరిస్తున్నాయి: ప్రధాని మోదీ

जापान में रहने वाले भारत के दोस्‍तों और बड़ी संख्‍या में यहाँ पधारे भारतीय समुदाय के मेरे सभी साथियो, आप सबको नमस्‍कार।

मैं सोच रहा था कि मुझे कोबे क्‍यों ले जा रहे हैं। कितनी बार आया हूँ, इतने सारे चेहरे हैं। मैंने कहा आप मुझे क्‍यों ले जा रहे हो कौन आएगा? लेकिन मैं देख रहा हूँ कि पहले से आपका उत्‍साह बढ़ ही रहा है। इस प्‍यार के लिए मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूँ।

करीब 7 महीने बाद एक बार फिर मुझे जापान की धरती पर आने का सौभाग्‍य मिला है। पिछली बार भी यहाँ बसे आप सभी साथियों से और जापानी दोस्‍तों से संवाद का अवसर मिला था। ये संयोग ही है कि पिछले वर्ष जब मैं यहाँ आया था, तब मेरे प्रिय मित्र शिंजो आबे के चुनाव नतीजे आ चुके थे और आप सभी ने उन पर विश्‍वास जताया था। और आज जब मैं आपके बीच हूँ तो दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत ने इस प्रधान सेवक पर पहले से भी ज्‍यादा अधिक विश्‍वास, अधिक प्‍यार जताया है।

मुझे पता है कि आप में से भी अनेक साथियों का इस जनमत में योगदान रहा है। किसी ने भारत आ करके प्रत्‍यक्ष काम किया, मेहनत की, 40-45 डिग्री temperature में काम करते रहे, कुछ लोगों ने सोशल मीडिया के माध्‍यम से twitter, face book, नरेन्‍द्र मोदी एप, जो भी जगह से जो भी बात कह सकते हैं, पहुँचाने का प्रयास किया। कुछ लोगों ने अपने गाँव में अपने पुराने दोस्‍तों को चिट्ठियाँ लिखीं, ई-मेल भेजे, यानी आपने ने भी एक प्रकार से किसी न किसी रूप में भारत के इस लोकतंत्र के उत्‍सव को और अधिक ताकतवर बनाया, और अधिक प्राणवान बनाया। और इसके लिए भी आप सभी का मैं बहुत-बहुत आभार व्‍यक्‍त करता हूँ।

साथियो, 130 करोड़ भारतीयों ने पहले से भी मजबूत सरकार बनाई है और ये अपने-आप में एक बहुत बड़ी घटना है। और तीन दशक बाद पहली बार लगातार दूसरी बार पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई है। भारत जैसा विशाल देश, उसमें ये सिद्धि सामान्‍य नहीं है। और वैसे तो 1984 में भी लगातार दूसरी बार एक पार्टी की सरकार बनी थी, लेकिन उस समय के हालात आपको मालूम हैं। कारण क्‍या थे, वो भी पता हैं। लोग वोट क्‍यों करने गए थे, वो भी पता है और इसलिए मैं उसका वर्णन नहीं करता हूँ। लेकिन ये बात सही है कि 1971 के बाद देश ने पहली बार एक सरकार को pro incumbency जनादेश दिया।

सा‍थियो, ये जो प्रचंड जनादेश भारत ने दिया है, आपको खुशी हुई कि नहीं हुई? तो ये जीत किसकी है, किसकी जीत है? जब मैं आपसे ये जवाब सुनता हूँ, इतना आनंद आता है कि सच्‍चाई की जीत है। ये हिन्‍दुस्‍तान के लोकतंत्र की जीत है। भारत के मन को आप जापान में बैठ करके भी भलीभांति समझ पाते हैं, अनुभव कर पाते हैं, उनके aspirations और आपके aspirations के बीच में कोई फर्क महसूस नहीं होता है, तब जाकर ये जवाब आपके मुँह से सुनने का अवसर मिलता है और तब मन को बहुत संतोष होता है कि हम सही दिशा में हैं।

 

कभी-कभी स्‍टेडियम में हम क्रिकेट मैच देखते हैं तो बाद में पता चलता है कि आउट कैसे हुआ, बॉल कहाँ से कहाँ गया था, लेकिन जो घर में टीवी पर देखता है, दूर से देखता है; उसको तुरंत पता चलता है किwavelength में गड़बड़ है, इसीलिए आउट हुआ है। और इसलिए आप इतनी दूर बैठकर हिन्‍दुस्‍तान को देखते हैं तो सत्‍य पकड़ने की ताकत आपकी ज्‍यादा है। और इसलिए भी आपका ये जवाब- सच्‍चाई की जीत, लोकतंत्र की जीत, देशवासियों की जीत- मेरे लिए ये जवाब बहुत बड़ी अहमियत रखते हैं, मुझे एक नई ताकत देते हैं, नई प्रेरणा देते हैं। और इसके लिए मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूँ।

Democratic values के प्रति समर्पित रहते हुए आशाओं और आकांक्षाओं के प्रति विश्‍वास- इस जीत के पीछे भी एक कारण है। आप कल्‍पना कीजिए 61 करोड़ वोटर्स ने 40-45 डिग्री temperature में अपने घर से कहीं दूर जा करके वोट किया है, 61 करोड़! अगर चायना को छोड़ दें तो दुनिया के किसी भी देश की population से ज्‍यादा मतदाता हैं ये। और भारत में लोकतंत्र की विशालता, व्‍यापकता, उसका भी अंदाज- 10 लाख ten lakh polling stations, more than forty lakh EVM machine, more than six hundred political parties active थीं, चुनाव में भागीदार थीं, और more than eight thousand candidates; कितना बड़ा उत्‍सव होगा लोकतंत्र का! मानवता के इतिहास में इससे बड़ा लोकतांत्रिक चुनाव नहीं हुआ है और हर भारतीय को इस बात का गर्व होना चाहिए।

भविष्‍य में भी इस रिकॉर्ड को अगर कोई तोड़ेगा, इस रिकॉर्ड को अगर कोई बेहतर बनाएगा तो वो हक भी हिन्‍दुस्तान के हाथ में ही है। एक प्रकार से इसका copyright भारत के पास है। भारतीय होने के नाते हम सभी को, भारत के शुभचिंतकों को तो इस पर गर्व है ही, पूरे विश्‍व को भी ये प्रेरित करने वाला है। इससे फिर साबित हुआ है कि लोकतंत्र के प्रति भारत के सामान्‍य जन की निष्‍ठा अटूट है। हमारी लोकतांत्रिक संस्‍थाएँ और लोकतांत्रिक प्रणाली दुनिया में अग्रणी है।

साथियो, भारत की यही शक्ति 21वीं सदी के विश्‍व को नई उम्‍मीद देने वाली है। ये चुनाव, उसका प्रभाव, सिर्फ भारत तक सीमित रहने वाले नहीं हैं; विश्‍व के लोकतांत्रिक मन को ये प्रेरित करने वाली घटना है। न्‍यू इंडिया की आशाओं और आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए‍ ये जनादेश मिला है। और ये आदेश पूरे विश्‍व के साथ हमारे संबंधों को भी नई ऊर्जा देगा। अब दुनिया भारत के साथ जब बात करेगी तो उसको विश्‍वास है- हाँ भाई, ये जनता-जनार्दन, इन्‍होंने सरकार को चुना है, पूर्ण बहुमत के साथ चुना है और इनके साथ जो कुछ भी तय करेंगे, ये आगे ले जाएंगे- विश्‍वास अपने-आप पैदा होता है। 

 

अंतरराष्‍ट्रीय संबंधों में पूर्ण बहुमत वाली सरकार होना बहुत बड़ी बात होती है, लेकिन पूर्ण बहुमत वाली सरकार में भी पहले से अधिक जनमत जब जुड़ता है तो वो शक्ति तो बढ़ती है, लेकिन उससे ज्‍यादा विश्‍वास बढ़ता है।

सबका साथ-सबका विकास, और उसमें लोगों ने अमृत मिलाया, सबका विश्‍वास। इसी मंत्र पर हम चल रहे हैं- वो भारत पर दुनिया के विश्‍वास को भी और मजबूत करेगा और विश्‍व को आश्‍वस्‍त करेगा- यही मैं अनुभव कर रहा हूँ, ये विश्‍व को आश्‍वस्‍त करेगा।

साथियो, जब दुनिया के साथ भारत के रिश्‍तों की बात आती है तो जापान का उसमें एक अहम स्‍थान है। ये रिश्‍ते आज के नहीं हैं बल्कि सदियों के हैं। इनके मूल में आत्‍मीयता है, सद्भावना है, एक-दूसरे की संस्‍कृति और सभ्‍यता के लिए सम्‍मान है। इन रिश्‍तों की एक कड़ी महात्‍मा गांधी जी से भी जुड़ती है। संयोग से ये पूज्‍य बापू की 150वीं जन्‍म जयंती का भी वर्ष है। गांधी जी की एक सीख बचपन से हम लोग सुनते आए हैं, समझते आए हैं, और वो सीख थी- बुरा मत देखा, बुरा मत सुनो, बुरा मत कहो। भारत का बच्‍चा-बच्‍चा इसे भलीभांति जानता है। लेकिन बहुत कम लोगों को ये पता है कि जिन तीन बंदरों को इस संदश के लिए बापू ने चुना- उनका जन्‍मदाता 17वीं सदी का जापान है। मिजारू, किकाजारू और इवाजारू- जापान की धरोहर हैं, जिनको पूज्‍य बापू ने एक महान सामाजिक संदेश के लिए प्रतीकात्‍मक के रूप में चुना और उसको प्रचारित किया, प्रसारित किया।

सा‍थियो, हमारे आचार, व्‍यवहार और संस्‍कार की ये कड़ी जापान में बौद्ध धर्म के आने से भी पहले की बताई जाती है। अभी अगले महीने क्‍योटो में गियोन त्‍योहार आने वाला है। और इस गियोन त्‍योहार में जिस रथ का उपयोग होता है, उसकी सजावट भारतीय रेशम के धागों से होती है। और ये परम्‍परा आज की नहीं है, अनगिनत काल से चली आ रही है। 

इसी तरह शिचिफुकुजिन- Seven Gods of Fortune, उन Seven Gods में से चार का संबंध सीधा-सीधा भारत से है। माँ सरस्‍वती के बेंजाइटिन, माँ लक्ष्‍मी की किचिजोटेन, भगवान कुबेर की विशामोन, और महाकाल की दाइकोकुतेन के रूप में जापान में मान्‍यता है। 

साथियो, Fabric printing के जुशोबोरी आर्ट भारत और जापान के रिश्‍तों का एक बहुत पुराना एक प्रकार से ताना-बाना है, सूत्र है। गुजरात के कच्‍छ और जामनगर में सदियों से बाँधनी जिसको कहते हैं, बंधानी कोई बोलते हैं कोई बंदानी बोलता है, उसके कलाकार इस कला में उसी resist technique का उपयोग करते हैं जो यहाँ भी सदियों से इस्‍तेमाल होती है। या‍नी जापान में उस काम को करने वाले लोग और कच्‍छ में जामनगर में करने वाले आपको ऐसे ही लगेगा आप जापान में हैं और जापान वाले वहाँ जाएंगे तो लगेगा गुजरात में हैं, इतनी similarity है। इतना ही नहीं- हमारे बोलचाल के भी कुछ सूत्र हैं जो हमें जोड़ते हैं। जिसे भारत में ध्‍यान कहा जाता है उसे जापान में Zen कहा जाता है और जिसे भारत में सेवा कहा जाता है उसे जापान में भी सेवा ही कहा जाता है। सेवा परमो धर्म:, यानी नि:स्‍वार्थ सवा को भारतीय दर्शन में सबसे बड़ा धर्म माना गया है, वहीं जापान के समाज ने इसको जी करके दिखाया है।

साथियो, स्‍वामी विवेकानंद, गुरुदेव रवीन्‍द्रनाथ टैगोर, महात्‍मा गांधी, नेताजी सुभाषचंद्र बोस, जस्टिस राधा विनोदपाल सहित अनेक भारतीयों ने जापान के साथ हमारे रिश्‍तों को मजबूत किया है। जापान में भी भारत और भारतीयों के लिए प्‍यार और सम्‍मान का भाव रहा है।

इसी का परिणाम था कि दूसरे विश्‍वयुद्ध की समाप्ति के बाद से ही भारत-जापान के बीच के रिश्‍ते और मजबूत होने लगे हैं। लगभग दो दशक पहले प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी और प्रधानमंत्री योशिरो मोरी जी मिलकर हमारे रिश्‍तों को global partnership का रूप दिया था।

2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद मुझे मेरे मित्र प्रधानमंत्री शिंजो आबे के साथ मिलकर इस दोस्‍ती को मजबूत करने का मौका मिला। हम अपने diplomatic relationship को राजधानियों और राजनायिकों की औपचारिकताओं के दायरे से बाहर निकालकर सीधे जनता के बीच ले गए। प्रधानमंत्री आबे के साथ मैंने टोक्‍यो के अलावा क्‍योटो, ओसाका, कोबे, यमानासी, इसकी यात्राएँ भी कीं। यहाँ कोबे तो मैं, कभी-कभी गलती हो जाती है, कभी कहता हूँ चार बार, कभी कहता हूँ पाँच बार, कभी कहता हूँ तीन बार, यानी बार-बार आया हूँ। और पीएम नहीं था, तब भी आता था, आपके साथ बैठता था। प्रधानमंत्री आबे जी ने पिछले वर्ष यामानासी में अपने घर में उन्‍होंने मेरा स्‍वागत किया। उनका ये  स्‍पेशल gesture हर हिन्‍दुस्‍तानी के दिल को छूने वाली बात थी, वरना diplomatic relation में इस प्रकार का personal touch बहुत कम होता है।

दिल्‍ली के अलावा अहमदाबाद और वाराणसी प्रधानमंत्री आबे जी को मेरे मित्र को ले जाने का सौभाग्‍य मुझे मिला। प्रधानमंत्री आबे मेरे संसदीय क्षेत्र और दुनिया की सबसे पुरानी संस्‍कृति और आध्‍यात्मिक नगरी में से एक- काशी में गंगा आरती में भी शामिल हुए। और सिर्फ शामिल हुए नहीं, उनको जब भी जहाँ पर कुछ बोलने का मौका आया, उस आरती के समय उन्‍होंने जो अध्‍यात्‍म की अनुभूति की, उसका जिक्र किए बिना वो रहे नहीं, आज भी उसका उल्‍लेख करते हैं। उनकी ये तस्‍वीरें भी हर भारतीय के मन में बस गई हैं।

साथियो, बीते छह दशकों से अधिक समय में भारत की विकास यात्रा में जापान की एक महत्‍वपूर्ण भूमिका रही है। 21वीं सदी के न्‍यू इंडिया में ये रोल और मजबूत होने वाला है। 1958 में जापान ने अपना पहला  Yen loan भारत को ही स्‍वीकृत किया था, 1958 में। इसके बाद से ही जापानी कम्‍पनियाँ भारत में काम कर रही हैं और उन्‍होंने उत्‍तम गुणवत्‍ता के लिए अपनी एक अलग पहचान बनाई है।

एक समय था जब हम कार बनाने में सहयोग कर रहे थे और आज हम बुलेट ट्रेन बनाने में सहयोग कर रहे हैं। आज पूरब से पश्चिम तक, उत्‍तर से दक्षिण तक भारत का ऐसा कोई भाग नहीं है जहाँ जापान के projectsया investment ने अपनी छाप न छोड़ी हो। इसी प्रकार भारत का talent और manpower यहाँ जापान की अर्थव्‍यवस्‍था को मजबूत करने में अपना योगदान दे रहा है।

 

साथियो, न्‍यू इंडिया में हमारा ये सहयोग और व्‍यापक होने वाला है। हम आने वाले पाँच वर्षों में भारत को 5 trillion dollar की economy बनाने के लक्ष्‍य के साथ आगे बढ़ रहे हैं। Social sector हमारी प्राथमिकता है। इसके साथ-साथ infrastructure में व्‍यापक investment, उस पर भी हमारा बल है। विशेषतौर पर digital infrastructureभारत को आज पूरी दुनिया में निवेश के लिए एक आकर्षक अवसर के रूप में सामने रखता है। भारत मेंdigital literacy आज बहुत तेजी से बढ़ रही है। Digital transactions रिकॉर्ड स्‍तर पर हैं। Innovation औरincubation के लिए एक बहुत बड़ा  infrastructure तैयार हो रहा है, एक नया माहौल अनुभव हो रहा है। इसी के बल पर आने वाले पाँच वर्षों में 50 हजार startups का eco system भारत को बनाने का लक्ष्‍य हमने रखा है।

साथियो, अक्‍सर ये कहा जाता है कि Sky is the limit  किसी जमाने में ठीक था, लेकिन भारत इस लिमिट से आगे, आगे जाकर space को गंभीरता से explore कर रहा है। भारत की 130 करोड़ जनता के जीवन को आसान और सुरक्षित बनाने के लिए सस्‍ती और प्रभावी space technology हासिल करना हमारा लक्ष्‍य है। मुझे खुशी है कि हम इस सफलता के साथ आगे बढ़ पा रहे हैं।

हाल में फौनी cyclone सहित अनेक चुनौतियों को भारत कम से कम नुकसान के साथ manage कर पाया और दुनिया ने उसकी बड़ी सराहना की, कि किस प्रकार से government machinery, human resource, space technology, इन सबको मिला करके कैसे perform किया जा सकता है, वो भारत ने करके दिखाया और वो भी एक तरफ पूरा देश चुनाव की आपाधापी में व्‍यस्‍त था, तब भी इस काम को उत्तम तरीके से पूरा किया और विश्‍व ने इसको सराहा है। और इससे हमें हौसला मिल रहा है। यह कारण है कि कुछ महीनों में ही हम हमारे मून मिशन को आगे बढ़ाते हुए चन्‍द्रयान-2 लॉन्‍च करने वाले हैं। साल 2022 तक अपना पहला man mission, गगनयान भेजने की तैयारी में हम हैं। और कोई हिन्‍दुस्‍तानी तिरंगा झंडा वहाँ फहराए, ये सपना ले करके काम कर रहे हैं।

Space में हमारा अपना स्‍टेशन हो, इसके लिए संभावनाओं को तलाशा जा रहा है। ये जितने भी काम हम कर रहे हैं, आज हिंदुस्‍तान में aspirations से भरा हुआ एक न्‍यू मिडिल क्‍लास एक बहुत बड़ा बल्‍क सोसायटी में, जिसके सपने बहुत हैं, जिसकी आकाँक्षाएं बहुत हैं, जिसको तेज गति से परिणाम की प्रतीक्षा है, उसके अनुरूप हम विकास के नई-नई विधाओं को विकसित कर रहे हैं।

साथियो, ऐसे समय में जब पूरी दुनिया भारत को संभावनाओं के gateway के रूप में देख रही है, तब जापान के साथ हमारा तालमेल भी नई ऊँचाई तय करने वाला है। मैं तो ये मानता हूँ कि जापान की काइज़न फिलोसफी भारत-जापान संबंधों की प्रगति पर भी लागू होती है। मैं जब गुजरात में मुख्‍यमंत्री था तो मैं मेरे सीएम के स्‍टॉफ को एक काइज़न की ट्रेनिंग दिलाता था लगातार क्‍योंकि काइज़न की प्रक्रिया एक ऐसी प्रक्रिया है जो कभी रुकती नहीं है। हमारे संबंध लगातार बढ़ते रहेंगे, बुलंद होते रहेंगे।

साथियो, प्रधानमंत्री के रूप में ये मेरी जापान की चौथी यात्रा है, पीएम के रूप में। सभी यात्राओं में मैंने जापान में भारत के प्रति एक आत्‍मयीता, एक अपनापन अनुभव किया है। अपनी सभ्‍यता और अपने मूल्‍यों पर गर्व करना, talent और technology को राष्‍ट्र निर्माण कहा हिस्‍सा बनाना और tradition के दायरे में बनाना, ये मैंने जापान में प्रत्‍यक्ष अनुभव किया है। और ऐसा महसूस करने वाला मैं अकेला व्‍यक्ति नहीं हूँ।

स्‍वामी विवेकानंद जी ने भी एक सदी पहले जब जापान की यात्रा की थी तो वो भी यहाँ की सभ्‍यता, जनता के समर्पण और work ethic  से बहुत प्रभावित हुए थे। तब स्‍वामी विवेकानंद जी ने तो यहाँ तक कहा था कि हर भारतीय को जापान की यात्रा करनी चाहिए, लेकिन उस समय जरा जनसंख्‍या कम थी। अब ये तो संभव नहीं हो पाएगा, देश के 30 करोड़ लोग...खैर! हम भी मानते हैं, लेकिन 130 करोड़ भारतीयों के प्रतिनिधि, आप सब यहाँ पर हैं। आप जापान की बातों को यहां के work culture को, work ethic  को, यहाँ के talent को, यहाँ के tradition को, यहां की technology को भारत पहुँचाते रहें और भारत की बातें यहाँ के जन-सामान्‍य को सुनाते रहें। यही सेतु हमें नई शक्ति देता है, नित्‍य नूतन व्‍यवस्‍था में परिवर्तित करता है, संबंधों को प्राणवान बनाता है। ये rituals नहीं है एक जीवंत व्‍यवस्‍था है। और जीवंत व्‍यवस्‍था जन-सामान्‍य के जुड़ने से बनती है।

अंत में मैं मेरी बात समाप्‍त करने से पहले आप सभी का, जापानवासियों का, भारतवासियों का और अपने सभी जापानी बहनों-भाइयों के लिए मैं कामना करता हूँ नए रेवा ऐरा- रेवा-युग। मैं आप सबके जीवन, इस युग के नाम के अनुरूप सुंदर हारमनी हमेशा रहे। जापान में- विशेष रूप से कोबे में हर बार आपने जिस आत्‍मीयता से मेरा स्‍वागत, सत्‍कार और सम्‍मान किया, है उसके लिए मैं हृदय से आपका आभार प्रकट करता हूँ।

शायद आपको पता चला होगा 21 जून को अंतरराष्‍ट्रीय योगा दिवस था और भारत सरकार योगा के प्रचार, प्रसार और विकास-विस्‍तार के लिए काम करने वाली संस्‍थाओं को, व्‍यक्तियों को हिन्‍दुस्‍तान में भी और हिन्‍दुस्‍तान के बाहर भी उनको सम्‍मानित करती है, उनको ईनाम देती है। आपको पता चला होगा इस बार जापान में योग के लिए काम करने वाली संस्‍था को भारत सरकार ने सम्‍मानित करने का निर्णय लिया है। जो बहुत बड़े गर्व की बात है। यानी हम हर प्रकार से जुड़ चुके हैं।

इस गौरव के साथ फिर एक बार आप सबके बीच आने का मुझे मौका मिला। आपके आशीर्वाद प्राप्‍त करने का अवसर मिला। मैं आपका हृदय से बहुत-बहुत आभार व्‍यक्‍त करता हूँ।

 

धन्‍यवाद।

 

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Prime Minister urges citizens to take precautions amid soaring temperatures across India
May 27, 2026

The Prime Minister, Shri Narendra Modi has urged citizens across the country to take all possible precautions amid soaring temperatures being witnessed in different parts of India.

Shri Modi urged people to stay hydrated, carry water while stepping out and extend help to others by offering them water during the harsh weather conditions.

The Prime Minister also advised people to remain alert to signs of heat exhaustion such as dizziness, nausea and extreme fatigue. He urged citizens to immediately help anyone feeling unwell, weak or suffering from headaches by moving them to a cool and shaded place and ensuring availability of water and ORS.

Shri Modi noted that children, elderly people and those working outdoors are especially vulnerable during extreme heat and cautioned that ignoring warning signs may lead to heatstroke.

Shri Modi also called upon people to regularly check on elderly parents, grandparents and loved ones during the heatwave and remind them to stay hydrated, avoid stepping out during peak afternoon hours and take adequate rest.

Emphasising compassion during extreme weather conditions, the Prime Minister appealed to citizens to keep bowls of water outside homes, balconies, terraces, shops and offices for birds and animals.

In a series of X posts, Shri Modi said;

“Different parts of India are witnessing soaring temperatures and the challenges that come with it. This heat is harsh on all of us and I urge you all to take as many precautions as possible. Please stay hydrated, keep water with you when stepping out. Offer a glass of water to others. In weather like this, such kindness goes a long way.”

“Watch for signs of heat exhaustion like dizziness, nausea or extreme fatigue. If someone around you feels unusually unwell, weak or develops a headache, it is best to help move them to a cool and shaded place immediately. Ensure they get water, ORS etc. that helps them. Children, the elderly and those working outdoors are especially vulnerable during extreme heat. Ignoring these warning signs can quickly turn dangerous and may even lead to heatstroke. In such weather, timely care and attention go a long way.”

“Whenever possible, call and check on elderly parents, grandparents and loved ones during this heatwave. Remind them to stay hydrated, avoid stepping out in peak afternoon hours and take rest whenever possible.”

“In this extreme heat, let us also remember the birds and animals around us. A small bowl of water kept outside your home, balconies, terraces, shops or offices can become a lifeline for a thirsty bird. May compassion guide us in these difficult days.”

“देश के अलग-अलग हिस्सों में तापमान लगातार बढ़ रहा है और इसके साथ ही दैनिक जीवन में गर्मी से होने वाली कई कठिनाइयां भी बढ़ रही हैं। मैं सभी देशवासियों से आग्रह करता हूं कि जितनी अधिक सावधानी बरत सकें, अवश्य बरतें। कृपया स्वयं को हाइड्रेटेड रखें, घर से बाहर निकलते समय पानी साथ रखें। ऐसे मौसम में आपकी संवेदनशीलता भी बहुत बड़ा सहारा बन जाती है। यदि संभव हो, तो किसी प्यासे व्यक्ति को एक गिलास पानी अवश्य दें। मैं ऐसे लोगों की सराहना भी करूँगा जो अपने घरों के और दुकानों के बाहर मटके में जल रखते हैं ताकि कोई भी उनसे पानी पी सके।”

“अत्यधिक गर्मी से होने वाली परेशानी, जैसे चक्कर आना, मतली या ज्यादा थकान लगे तो उसे बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें। यदि आपके आसपास किसी व्यक्ति को अचानक बेहोशी जैसा लगे, कमजोरी महसूस करे या फिर अस्वस्थ दिखाई दे, तो उसे तुरंत किसी ठंडी और छायादार जगह पर ले जाएं। उसे पानी, ORS या अन्य तरल पदार्थ दें, जिससे शरीर को राहत मिल सके। बच्चे, बुज़ुर्ग और धूप में काम करने वाले लोग इस भीषण गर्मी में सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। समय रहते ध्यान न देने पर यह स्थिति हीटस्ट्रोक जैसी गंभीर समस्या का रूप ले सकती है। ऐसे समय में आपकी सतर्कता और देखभाल किसी का जीवन बचा सकती है।”

“जब भी संभव हो, अपने माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी और अन्य प्रियजनों को फोन कर उनका हालचाल अवश्य पूछें। उन्हें पर्याप्त पानी पीने, दोपहर की तेज धूप में बाहर न निकलने और जितना हो सके, आराम करने की सलाह दें।”

“इस प्रचंड गर्मी में हमें अपने आसपास के पशु-पक्षियों को भी नहीं भूलना चाहिए। अपने घर, बालकनी, छत, दुकान या ऑफिस के बाहर पानी से भरा एक छोटा-सा बर्तन रखना भी किसी प्यासे पक्षी के लिए जीवनदान बन सकता है। आइए, इन कठिन दिनों में पूरी संवेदनशीलता और करुणा के साथ एक-दूसरे का ध्यान रखें।”