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PM Modi inaugurates Faridabad metro line, takes metro ride, addresses rally
NDA Govt fulfills promise of delivering One-Rank, One-Pension for the armed forces
Centre & states must work together; infrastructure is essential for progress: PM
India would progress not through politics, but through nationalist policies: PM Modi
It has become a fashion to politicize every decision taken by Government for progress of the country: PM
People are being misled about the government position on OROP and VRS: PM
PM Modi reiterates Government's resolve for Housing for All by 2022

विशाल संख्या में पधारे भाईयो और बहनों,

अभी हमारे मुख्यमंत्री बता रहे थे कि मोदी जी इतनी बार हरियाणा में आए और 11 तारीख को भी आने वाले हैं, 18 तारीख को भी आने वाले हैं। आप सबको मालूम है हरियाणा मेरा दूसरा घर है। गुजरात छोड़ने के बाद मैंने वर्षों तक हरियाणा में ही अपना जीवन बिताया। यहां के हर गांव, गली, मौहल्ले से परिचित हूं, तो मुझे हरियाणा आने का मन करेगा कि नहीं करेगा? आपके प्यार को मैं कभी भुला सकता हूं क्या? तो आपका प्यार है जो मुझे बार-बार खींचकर ले आता है और मैंने हरियाणा को कहा था, पहले दिन से कह रहा हूं कि आपने मुझे जो प्यार दिया है, मैं विकास करके ब्याज समेत लौटाऊंगा, ये मैं कह रहा हूं।

भाईयों-बहनों चुनाव आते हैं, जाते हैं। राजनीति अपनी जगह पर चलती रहती है। वो लोकतंत्र का स्वाभाविक हिस्सा है लेकिन देश सिर्फ राजनीति से नहीं चलता है, देश राष्ट्रनीति से चलता है, देश विवादों से नहीं बढ़ता है, देश संवाद से बढ़ता है। हमारी समस्याओं का समाधान अगर उसका कोई एक उपाय है, अगर उसकी कोई एक जड़ी-बूटी है, तो उस जड़ी-बूटी का नाम विकास है, विकास। विकास होगा तो नौजवान को रोजगार मिलेगा, विकास होगा तो किसान को अपनी फसल का पूरा दाम मिलेगा, विकास होगा तो गरीब से गरीब बच्चे को अच्छी से अच्छी शिक्षा मिलेगी, विकास होगा तो गांव के गरीब हो, वयोवृद्ध-तपोवृद्ध लोग हो उनको आरोग्य की सुविधा उपलब्ध होगी, गरीब को रहने के लिए घर मिलेगा और इसलिए मेरे भाईयों-बहनों हम एक ही बिंदू पर काम कर रहे हैं। जब से आपने हमें जिम्मेवारी दी है, हमारा एक ही मंत्र है, एक ही मकसद है, एक ही मार्ग है, एक ही मंजिल है और उसका नाम है विकास।

आप मुझे बताइए, आपक विकास चाहिए कि नहीं चाहिए? अच्छे रास्ते चाहिए कि नहीं चाहिए? अच्छे स्कूल चाहिए कि नहीं चाहिए? अच्छे अस्पताल चाहिए कि नहीं चाहिए? इस देश को यही चाहिए और इसलिए ये सरकार इन्हीं बिंदुओं पर अपनी ताकत लगा रही है। अच्छा होता ये काम पिछले 60 साल में पूरे हो गये होते। देश ऊंचाइयों को पार कर लिया होता। लेकिन बहुत सारे काम अधूरे हैं और अधूरे हैं इसलिये पुरानी सरकारों को आलोचना करके उनकी टीपा टीका टिप्पणी करके मैं रुक जाऊं ये उचित नहीं है। इस सरकार का जिम्मेदारी है कि हम समस्याओं के समाधान खोजें विकास के नये - नये उपाये खोजें और देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाएं।

पिछले दिनों आपने देखा होगा पूरी दुनिया में एक आर्थिक संकट पैदा हुआ मजबूत से मजबूत आर्थिक नींव पर खड़े हुए देश हिल गए। और तुफान इतना भयंकर था कि उसके सामने टिकना बड़ा मुश्किल था, इतनी बड़ी आंधी तेज आई थी। लेकिन सारी दुनिया के आर्थिक पंडितों का कहना है कि इतनी भंयकर आर्थिक मंदी के बीच, इतने भयंकर आर्थिक तुफानों के बीच कोई एक देश बराबर अगर खड़ा रहा, टिका रहा, उस देश का नाम हिंदुस्तान है।

मेरे भाईयों-बहनों और यही बताता है कि पिछले 15 महीनों में, सरकार ने जो रास्ता अपनाया है, जिन नीतियों को लागू किया है, आज उसका परिणाम नजर आ रहा है कि इतनी बड़ी आंधी के बावजूद भी हिंदुस्तान आर्थिक धरातल पर टिका रहा है। लेकिन भाईयों-बहनों सिर्फ टिके रहे हैं, इससे संतोष मानना, ये हमें मंजूर नहीं है। इतनी बड़ी आंधी में तूफान में टिक गये ये अच्छी बात है, लेकिन हमें जहां टिके हैं, वहां रुकना नहीं है हमें आगे बढ़ना है। आगे बढ़ने का रास्ता सवा सौ करोड़ देश वासियों को साथ और सहयोग है, आगे बढ़ने का रास्ता सभी राज्य सरकारें और केंद्र सरकार को कंधे से कंधा मिलाकर चलना है। आगे बढ़ने का रास्ता लोकतांत्रिक मार्ग है और अगर हमें विकास करना है, तो हमें Infrastructure पर सबसे पहले प्राथमिकता देनी पड़ेगी। रेल हो, रोड हो, रेल हो, सामान्य नागरिक की सुविधा की व्यवस्थाएं हो, ये जब तब तक हम निर्माण नहीं करेंगे, विकास के फल नीचे तक नहीं पहुंचेंगे।..और इसलिये ये सरकार का मकसद है कि 2022 जब हिन्दुस्तान आजादी के 75 साल मनाएगा, वो आजादी का 75 साल कैसे हों, क्या हम सपना लेकर के नहीं चल सकते कि आजादी के 75 साल जब मनाएंगे, आजादी के दीवानों को जब अंजली देंगे, आजादी के लिये शहीद हुए महापुरुषों का पुण्य स्मरण करेंगे, उस समय कम से कम एक काम तो पूरा कर लें, इस देश में कोई गरीब ऐसा न हो जिसको अपना घर न हो। हर गरीब को भी अपना घर मिले, काम बहुत बड़ा है, दुनिया के कुछ देशों की आबादी से ज्यादा भी मकान बनाने पड़ेंगे, लेकिन भाइयों बहनों कठिन काम भी हमें हाथ में लेने हैं और उसको पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

हमारे वेंकैया जी नायडू शहरी विकास मंत्री के नाते एक ऐसी योजना उन्होंने देश के सामने रखी है, जिसके कारण शहरी गरीबों के लिये मकानों की सुविधा उपलब्ध हो, नये मकान बनें, गरीब के लिये बने, सस्ते बने, अच्छे बने और घर भी वो हो, जिसके नल में जल हो, बिजली हो, नजदीक में स्कूल हो, एक परिवार सुख शांति से रह सके ऐसा घर हो। हमारे चौधरी वीरेन्द्र सिंह जी लगे हैं, एक ग्रामीण विकास मंत्रालय को लेकर के गांव में जो गरीब है, उन गरीबों को रहने के लिये अपना घर मिले, योजनाओं को आगे बढ़ा रहे हैं। एक तरफ शहरी विकास एक तरफ ग्रामीण विकास, गरीब शहर का हो या गरीब गांव का हो हर किसी को रहने के लिये घर मिले इसके लिये बहुत बड़ा काम हमने सर पर उठाया है।

भाइयो बहनों आज यहां मेट्रो रेल का लोकापर्ण हो रहा है। अब हरियाणा भी गर्व के साथ दुनिया में कहेगा कि हमारे पास मेट्रो रेलवे है। हरियाणा ने दिल्ली के टूरिस्टों को आकर्षित करने की सबसे बड़ी ताकत अगर किसी में है, तो हरियाणा में है। weekend टूरिस्टों को आकर्षित करने की ताकत है, तो हरियाणा में है औऱ मेट्रो की सुविधा हो जाए तो बहुत बड़ी मात्रा में दिल्ली से लोग weekend मनाने के लिए हरियाणा की ओर चले जाएंगे और हरियाणा के नौजवानों को रोजी-रोटी का प्रबंध हो जाएगा। ये मेट्रो सिर्फ आने-जाने का कारोबार है, ऐसा नहीं है, अब मेट्रो सिर्फ, पहले बस में जाना पड़ता था, कार लेकर जाना पड़ता था, ट्रैफिक जाम हो जाता था, अब जल्दी पहुंचा जाता है, इतना ही नहीं है इनसे पूरी economy drive होती है, पूरे आर्थिक जीवन को एक गति मिलती है और इसलिए ये रैली का नाम भी गति-प्रगति रैली रखा गया है। गति भी हो, प्रगति भी हो और तेज गति से प्रगति हो, उन सपनों को पूरा करने का प्रयास हो रहा है। करीब-करीब ढाई हजार करोड़ रुपया की लागत से, ये प्रोजेक्ट यहां पूरा हुआ है।

लेकिन मैं आज मेरे हरियाणा के भाईयों-बहनों को एक और नजराना भी देना चाहता हूं, ये मेट्रो यहीं से लौट नहीं जाएगी, हम बल्लभगढ़ तक जाएंगे। आने वाले दिनों में बल्लभगढ़ के लिए एक काम शुरू हो जाएगा। 600-700 करोड़ रुपए की और लागत लगेगी लेकिन हरियाणा के एक महत्वपूर्ण हिस्सों को जोड़ने का काम होगा।

फरीदाबाद मेरे लिए नया नहीं है। मैं कभी यहां स्कूटर पर आया करता था। मैंने फरीदाबाद को पनपते हुए देखा है। एशिया में नौंवे नंबर पर सबसे बड़ा industrial estate वाला ये फरीदाबाद शहर है। अब फरीदाबाद एक लघु हिंदुस्तान बन गया है। हिंदुस्तान का कोई राज्य ऐसा नहीं होगा, जिसके लोग फरीदाबाद में रहते न हो, एक प्रकार का लघु भारत बन गया है। इस फरीदाबाद का विकास भी, वैसा ही होना चाहिए। ये मेट्रो ट्रेन के आरंभ से वो एक नया विकास का मार्ग भी खुल जाता है और मैं श्रीमान वेंकैया जी को एक बात के लिए बधाई देना चाहता हूं, उनका विभाग इस काम को देखता है, सारी दुनिया को एक संदेश दे रहे हैं कि ये मेट्रो का जो लाईन है environment friendly है। यहां के स्टेशनों पर solar panel लगे हुए हैं और करीब-करीब दो मेगावॉट बिजली सूर्य शक्ति से पैदा करते हैं और सारी व्यवस्था में उसी बिजली का उपयोग किया जाता है। मेट्रो का एक ट्रैक solar panel से भरों हुआ हो, ये दुनिया के लिए भी एक आकर्षण का कारण है। आने वाले दिनों में Green Railway Station कैसे बने, Environment Friendly Railway Station कैसे बने उस दिशा में भी मैट्रो की तरफ से एक सफलतापूर्वक अभियान चलाया जा रहा है और आज जब पूरी विश्व Global Warming के लिये चिंतित है, Climate Change के कारण चिंतित है, हमारी एक छोटी सी इकाई मैट्रो वे भी दुनिया की मदद करने के लिये Green movement में अपना सहयोग दे रही है और इसलिये वेंकैया जी को और उनकी पूरी टीम को मैं हृदय से बहुत बहुत अभिनन्दन करता हूं और उनके साधुवाद करता हूं।

भाइयो बहनों ये हरियाणा की धरती ऐसी है, कल हमनें श्री कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया और जब श्री कृष्ण को याद करते हैं तो सिर्फ द्वारका की नगरी याद नहीं आती है, कुरुक्षेत्र भी तुरंत याद आता है। पूरा हरियाणा एक प्रकार से इन महापुरुषों की छाया में पला बड़ा हुआ है। सांस्कृतिक विरासत का धनी है। यहीं से पास में गांव सिही सूरदास जी की जन्म भूमि है, यही तो हमारी विशेषता यही हमारी ताकत है और उन्हीं से महापुरुषों के आशिर्वाद लेकर के हम हरियाणा को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिये प्रयास कर रहे हैं।

मैं हरियाणा सरकार को अभिनन्दन करता हूं। श्रीमान मनोहर लाल जी का विशेष रूप से और उनकी पूरी टीम का अभिनन्दन करता हूं। कि जिस हरियाणा को बेटियों के भ्रूण हत्या के लिये पहचाना जाता था वो हरियाणा आज बेटी बचाने के लिये पहचाने जाने लगा है। ये छोटा सा निर्णय परिवर्तन नहीं है, ये छोटा सा movement नहीं है, कितना कठिन काम होता है मुझे अंदाजा है लेकिन हरियाणा के राज्य सरकार ने यहां के राजनीतिक नेताओं ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है और बेटी बचाने का जो अभियान चलाया है और पूरे हिन्दुस्तान का बेटी बचाने का अभियान का प्रारंभ भी इसी हरियाणा की धरती से हुआ है।

मैं जानता हूं, मनोहर लाल जी हमारे बड़े परिश्रमी नेता हैं, मेहनत करने में शायद कोई उनका मुकाबला नहीं कर सकता है, मैंने सालों तक उनके साथ काम किया है और वे हरियाणा को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में सफल होंगे, हरियाणा की आशाओं-आकाक्षाओं को वे पूरा करेंगे, ये मुझे विश्वास है।

आने वाले दिनों में हमारे देश में, हम-हमारे शहरों का रंग-रूप बदलना चाहते हैं, चेहरा बदलना चाहते हैं, उसके फेफड़ों को नई ताकत देना चाहते हैं। आज हमारे शहरों के फेफड़े भी बीमार हो गए हैं, greenery नहीं बची है, अपनी मर्जी से वो बढ़ता गया है। वेंकैया जी के नेतृत्व में, जो smart city का अभियान चला है, उस smart city में फरीदाबाद का भी नाम है। लेकिन कुछ लोगों को लगता होगा कि अब सरकार ने smart city कह दिया तो smart city बन गया। भाईयों-बहनों आपको पता होना चाहिए और मैं चाहता हूं कि इस बात की घर-घर चर्चा होनी चाहिए, हर बार चर्चा होनी चाहिए कि ये अभी तो फरीदाबाद की entry हुई है competition के अंदर पहली मैच उसने जीत लिया है, पहली मैच जीतकर के उसने entry पा ली है, लेकिन आगे बढ़ने के लिये यहां के सभी नागरिकों ने तय करना पड़ेगा की हमें फरीदाबाद स्मार्ट सिटी बनाना है। कानून में ये परिवर्तन करना पड़ेगा, तो करना है। हमें ये discipline लानी है तो लानी है। हमें स्वच्छता रखनी है तो रखनी है। ये जब तक हम नहीं करेंगे, ये स्मार्ट सिटी की स्पर्धा आप जीत नहीं पाओगे। उसके कुछ norms हैं कुछ parameter हैं, मैं चाहता हूं एक जागृति का माहौल बने पूरे देश में ये 100 शहर पूरे हिन्दुस्तान में जो पहली मैच जीत कर के आए हैं। क्योंकि स्पर्धा से तय हुआ है, पहली स्पर्धा में वो जीत गए हैं, लेकिन आगे जैसे-जैसे जाओगे स्पर्धा कठिन होती जाने वाली है। लेकिन मुझे विश्वास है कि हरियाणा के दोनों शहर ये स्पर्धा जीतेंगे और देश में स्मार्ट सिटी बनाने का यश हरियाणा प्राप्त करेगा।

मैं आपको निमंत्रित करता हूं। मैं आपको challenge भी करता हूं इस challenge को स्वीकार कीजिये। सरकार ने जितने parameter तय किये हैं उन parameter को गले लगाइये। पूरे फरीदाबाद का एक – एक घर एक-एक नागरिक स्मार्ट सिटी बनाने का संकल्प लेना चाहिये तब जाकर के स्मार्ट सिटी बना पाएंगे और इसलिये मैं आपको आह्वान कर रहा हूं।

भाइयो बहनों ये हरियाणा की धरती वीरों की धरती है। ये हरियाणा की धरती जवानों की धरती है। ये हरियाणा की धरती देश के लिये मर मिटने वालों की धरती है। प्रधानमंत्री बनने से पहले मेरा पहला कार्यक्रम जब मेरी पार्टी ने मुझे प्रधानमंत्री के उम्मीदवार के लिये घोषित किया तो 13 सितम्बर को रिवाड़ी में मैं आया था। और पहला मेरा कार्यक्रम था पूर्व सैनिकों का बहुत बड़ा जमावड़ा में मैं आया था और उस समय में मैंने वन रैंक वन पैंशन की बात कही थी, याद है कही थी OROP की बात कही थी याद है। भाइयो बहनों ये मामला 42 साल से लटका हुआ था 42 साल से चार दशक इतनी सरकारें आ कर गई लेकिन इस समस्या का समाधान किसी को हाथ नहीं लगता था। lip sympathy सब दूर सब सरकारों ने व्यक्त की थी। हर कोई कहता था हां देश के लिये जवान मरते हैं सरकार का दायित्व है हर कोई कहते थे। लेकिन करने के लिये हर किसी को कठिनाई महसूस होती थी और आज मुझे भी महसूस हो रही है। ये सरल काम नहीं है। मेरे देश के जवानों आपने देश के लिये अपनी जिन्दगी खपाई है, अपका मान सम्मान इससे बड़ा हमारी जिन्दगी में कुछ नहीं हो सकता। लेकिन ये मामला अति कठिन है। उसका प्रभाव पता नहीं कहां-कहां पड़ सकता है। आने वाले दिनों में क्या-क्या संकट आ सकते हैं लेकिन मेरे देश के जवानों, हमने वादा किया था और हम वादा निभा रहे हैं। आपको मालूम है, पहले वाली सरकार के लिए OROP क्या था? 500 करोड़ रुपए का कार्यक्रम था, 500 करोड़ रुपए का, तो हमें भी लगा कि अभी 500 है तो 700 हो जाएगा, 800 हो जाएगा, कर लो, क्या है? लेकिन जब हम गिनती करने के लिए बैठे तो हर रोज नई चीज आने लगी, हर रोज नई चीज आने लगी। Koshyari Committee, जिसका हमारे जवान बार-बार उल्लेख करते हैं, उसको हमने देखा, उसने क्या कहा है, उसने तो 300 करोड़ से भी कम कहा है। उसने कहा है कि 300 करोड़ रुपए से कम रुपया भी लग जाएगा, तो हो जाएगा। सारी सरकार भ्रमित, बैठे हुए अफसर भ्रमित, सेना के जवानों की बातें भी ऐसी, हर कोई उलझा हुआ था, पिछले कई दिनों से मैं लगातार एक-एक तार को खोलता गया, चीजों को ठीक करता रहा और हिसाब लगाता गया भाईयों-बहनों ये OROP 500 करोड़ में होने वाला खेल नहीं है। ये OROP 300 करोड़ रुपए में पूरा होने वाला काम नहीं है, जब हिसाब लगाया तो हिसाब बनता है 8 से 10 हजार करोड़ रुपए का 8 से 10 हजार करोड़ रुपये का।

मेरी सरकार बनी 26 मई, 2014 को और मेरा दायित्व बनता है 26 मई 2014 से। ये जो प्रचार करने वाले लोग हैं वो देश की जनता को और खासकर के हमारे जवानों को भ्रमित करने का पाप करते रहे हैं। 26 मई को इस सरकार का जन्म हुआ उसी दिन से हमनें काम चालू किया और कल हमनें घोषणा की तो भी सरकार बनने के तुरंत बाद एक जुलाई गिनने के लिये उचित रहती है, तो हमनें एक जुलाई से लागू करने का निर्णय कर दिया भाइयो बहनों।

मैं जानता हूं देश के फौज में 80-90% लोग कौन होते हैं हमारी फौज में 80-90% वो जवान होते हैं, जो छोटे-छोटे पद पर होते हैं, कंधे पर बंदूक उठाकर के जो दुश्मनों से मुकाबला करते हैं। सबसे पहले जान की बाजी वो लगा देते हैं, लेकिन सेना की आयु कम हो इसलिये उनको 15 साल के बाद नौकरी छोड़नी पड़ती है, 17 साल के बाद छोड़नी पड़ती है, 20 साल के बाद छोड़नी पड़ती है, इसके लिए अलग-अलग शब्द प्रयोग सेना वाले करते होंगे। कुछ लोगों को लगता है कि जो 15 साल 17 साल नौकरी छोड़कर गए उनको OROP नहीं मिलेगा। मेरे जवान भाइयो बहनों चाहे वो हवल्दार हो, सिपाही हो नायक हो अरे आप ही तो देश की रक्षा करते हो अगर ये OROP सबसे पहले मिलेगा, तो आप को मिलेगा। ये VRS के नाम से आपको भ्रमित करने का जो प्रयास कर रहे हैं वो गलत कर रहे हैं ये सरकार जिन लोगों ने युद्ध में सेना में काम करते करते अपना शरीर गंवाया है, कोई अंग गंवाया है ऐसे भी सेना के जवान जिनको मजबूरन सेना छोड़नी पड़ती है। शरीर की देश के लिये शरीर का एक-एक अंग बली चढ़ा दिया है उसको सेना छोड़नी पड़ती है। क्या OROP से वंचित हो जाएंगे? सेना को प्यार करने वाला प्रधानमंत्री ऐसा कभी सोच भी नहीं सकता है। मेरे भाइयो बहनों ऐसे सबको OROP मिलेगा और इसलिये 80-90% ये जो 8 हजार 10 हजार करोड़ का खर्च है ना उसका सबसे ज्यादा धन ये 15-17 साल की उम्र में जो सेना छोड़ कर घर आते हैं उन जवानों में जाने वाला है। और इसलिये ये भ्रम फैलाने की कोशिश करने की आवश्यकता नहीं है। ये सरकार बहुत ही स्पष्ट है। कि देश के लिये जीने मरने वाले जवानों को लिये OROP लागू करने का हमनें वादा किया है और कल हमनें घोषणा कर दी है।

कुछ लोग कहते हैं Commission बनाया, ये कोई Pay-Commission नहीं बनाया। ये सिर्फ ये जो हमनें निर्णय किये हैं, क्योंकि पहले 500 करोड़ वालों की भी समझ में कुछ कुछ न गड़बड़ रही बाद में Koshyari Committee ने जो रिपोर्ट किया, उसमें भी गड़बड़ रही, हमें लगा कि 10 हजार करोड़ रुपया देने के बाद भी हो सकता है कहीं कोई कमी रह गई हो, कहीं कोई समझदारी में अंतर रहा हो, कोई हिस्सा सेना का छूट गया हो तो ऐसे समय एक व्यवस्था होनी चाहिए ताकि सेना के जवान उनके साथ मिलकरके, अगर कोई कमी रह गई हो, कोई छोटा-मोटा बदलाव जरूरी हो तो उसके साथ कर सके OROP के संबंध में इसलिए ये कमेटी बनाई गई है, ये कोई Pay-Commission नहीं है और इसलिए इसमें भी जो भ्रम फैलाए जा रहे हैं वो भ्रमों का भी निराकरण होना चाहिए।

आज देश के सेना में 10 में से 1 जवान हरियाणा का होता है, 10 जवान हैं तो उसमें से एक हरियाणा का होगा ही होगा और इसलिए ये जब 8-10 हजार करोड़ का पैकेज आएगा तो बहुत बड़ी मात्रा में धन हरियाणा के निवृत्त जवानों के पास आने वाला है, मतलब कि हरियाणा के अंदर हजारों-करोड़ रुपए आने वाले हैं। जब हरियाणा में हजारों-करोड़ रुपए आते हैं तो हरियाणा की economy अचानक drive करने लग जाती है। हरियाणा की आर्थिक गतिविधि को एक बहुत बड़ी ताकत, सेना के निवृत्त जवानों को पैसे मिलने के कारण मिलने वाली है। बहुत बड़ा निर्णय इस सरकार ने किया है, देशभक्ति से प्रेरित होकर के किया है। देश की आर्थिक व्यवस्था में बहुत सारे काम है, कुछ कामों में कटौती करके भी करना पड़ेगा तो करने का फैसला कर करके किया है और इसलिए मैं, मेरे सेना के जावनों को कहता हूं कि ये सरकार आपकी है, ये सरकार आपका हौंसला बुलंद देखना चाहती है, ये सरकार आपके सुखों की चिंता करने वाली सरकार है और आने वाले दिनों में भी जहां जो जरूरत पड़ेगी, ये सरकार आपके साथ खड़ो होगी, ये मैं देश के जवानों को विश्वास दिलाना चाहता हूं।

भाईयों-बहनों जो लोग बयानबाजी करके, राजनीतिक उल्लू सीधा करने की कोशिश कर रहे हैं, देशवासियों जिन्होंने 40-42 साल तक जो काम नहीं किया, उनको एक भी सवाल पूछने का अधिकार है क्या? जरा पूरी ताकत से जवाब दो मुझे, जिन्होंने खुद नहीं किया उनको सवाल पूछने का हक है क्या? देश को गुमराह करने का हक है क्या? जवानों के नाम पर बोलने का हक है क्या? अरे आप लोगों का पाप था कि आप लोगों ने 40-42 साल तक काम नहीं किया, आज हमारा हिसाब मांग रहे हो। भाईयों-बहनों एक fashion चल पड़ी है, एक fashion चल पड़ी है कि जब सरकार कोई भी अच्छे निर्णय करे, देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए हिम्मत के साथ आगे बढ़े तो जो लोग, जिनकों देश की जनता ने reject कर दिया है वो इस देश को आगे बढ़ना नहीं देना चाहते हैं, इससे बड़ा लोकतंत्र का अपमान नहीं हो सकता है और इसलिए मेरे भाइयों-बहनों, मैं देशवासियों को हरियाणा की वो धरती से बोल रहा हूं, जहां कृष्ण ने गीता का संदेश दिया था और युद्ध का विजय प्राप्त करने का संकेत दिया था, ये वो भूमि है जहां हर परिवार से कोई न कोई जवान सीमा पर देश की सेवा कर रहा है, ऐसी धरती से मैं कह रहा हूं कि हमारे लिए, हमारे सेना के जवान किसी के कम प्यारे नहीं हैं और इसलिए ये One-upmanship जो चल रही है, इसके खेल देश का भला नहीं करेंगे।

भाईयों-बहनों हम विकास के मार्ग पर चलना चाहते हैं, सवा सौ करोड़ देशवासियों को लेकर चलना चाहते हैं और उसको लेकर के हम आगे बढ़ रहे हैं और आज मेट्रो का एक नजराना हरियाणा के जीवन को नई ताकत देगा। आधुनिक हरियाणा बनाने में ये सौगात काम आएगी। इसी एक विश्वास के साथ मैं फिर एक बार यहां के मुख्यमंत्री को, सरकार की पूरी टीम को हरियाणा को लगातार आगे बढ़ाने के लिए, नई ऊंचाईयों पर ले जाने के प्रयासों के लिए अभिनंदन करता हूं, बधाई देता हूं और श्रीमान वेंकैया जी नायडू के नेतृत्व में हमारा शहरी विकास तेज गति से हो, हरियाणा में बहुत बड़ी मात्रा में शहरी विकास हो रहा है, वो भी नई ऊंचाइयों को प्राप्त करे यही शुभकामना के साथ आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद।

मेरे साथ दोनों मुठी बंद करके बोलिए

“जय जवान, जय किसान”

“जय जवान, जय किसान”

“जय जवान, जय किसान”

"भारत माता की जय"

"भारत माता की जय"



बहुत-बहुत धन्यवाद।

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Our government dedicates the project for which we lay the foundation stone: PM Modi in Himachal Pradesh
October 05, 2022
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PM dedicates AIIMS Bilaspur to the nation
PM inaugurates Government Hydro Engineering College at Bandla
PM lays foundation stone of Medical Device Park at Nalagarh
PM lays foundation stone of project for four laning of National Highway worth over Rs 1690 crores
“Fortunate to have been a part of Himachal Pradesh's development journey”
“Our government definitely dedicates the project for which we lay the foundation stone”
“Himachal plays a crucial role in 'Rashtra Raksha', and now with the newly inaugurated AIIMS at Bilaspur, it will also play pivotal role in 'Jeevan Raksha'”
“Ensuring dignity of life for all is our government's priority”
“Happiness, convenience, respect and safety of women are the foremost priorities of the double engine government”
“Made in India 5G services have started, and the benefits will be available in Himachal very soon”

जै माता नैणा देविया री, जै बजिए बाबे री।

बिलासपुरा आल्यो...अऊं धन्य ओइ गया, आज्ज...मिंजो.....दशैरे रे, इस पावन मौके पर, माता नैणा देविया रे, आशीर्वादा ने, तुहाँ सारयां रे दर्शना रा सौभाग्य मिल्या! तुहाँ सारयां जो, मेरी राम-राम। कने एम्स री बड़ी-बड़ी बदाई।

हिमाचल के राज्यपाल श्री राजेंद्र आर्लेकर जी, हिमाचल के लोकप्रिय मुख्यमंत्री श्रीमान जयराम ठाकुर जी, भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, हम सबके मार्गदर्शक और इसी धरती की संतान, श्रीमान जेपी नड्डा जी, केंद्रीय मंत्रिमंडल में मेरे सहयोगी और हमारे सांसद श्री अनुराग ठाकुर जी, हिमाचल भाजपा के अध्यक्ष और संसद में मेरे साथी सुरेश कश्यप जी, संसद में मेरे साथी किशन कपूर जी, बहन इंदु गोस्वामी जी, डॉ सिकंदर कुमार जी, अन्य मंत्रिगण, सांसद और विधायकगण, और भारी संख्या में हम सबको आशीर्वाद देने के लिए पधारे हुए मेरे प्‍यारे भाइयों और बहनों ! आप सभी को, संपूर्ण देशवासियों को विजयादशमी के अवसर पर अनंत-अनंत शुभकामनाएं।

ये पावन पर्व, हर बुराई से पार पाते हुए, अमृतकाल के लिए जिन पंच प्राणों का संकल्प देश ने लिया है, उन पर चलने के लिए नई ऊर्जा देगा। मेरा सौभाग्य है कि विजयादशमी पर हिमाचल प्रदेश के लोगों को स्वास्थ्य, शिक्षा, रोज़गार और इंफ्रास्ट्रक्चर के हज़ारों करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट्स, इसका उपहार देने का अवसर मिला है। और ये भी देखिए संयोग, विजयादशमी हो और विजय का रणसिंहा फूंकने का अवसर मिले, ये भविष्‍य के हर विजय का आगाज ले करके आया है। बिलासपुर को तो शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा का डबल गिफ्ट मिला है। कहलूरा री... बंदले धारा ऊप्पर, हाइड्रो कालेज ... कने थल्ले एम्स... हुण एथी री पहचान हूणी !

भाइयों और बहनों,

यहां विकास योजनाओं को आपको सौंपने के बाद, जैसा जयराम जी ने बताया, एक और सांस्कृतिक विरासत का साक्षी बनने जा रहा हूं और बहुत वर्षों बाद मुझे एक बार फिर कुल्लू दशहरे का हिस्सा बनने का सौभाग्य मिलेगा। सैकड़ों देवी-देवताओं के साथ भगवान रघुनाथ जी की यात्रा में शामिल होकर मैं देश के लिए भी आशीर्वाद भी मांगूंगा। और आज जब यहां बिलासपुर आया हूं तो पुरानी यादें ताजा होना बहुत स्‍वाभाविक है। वो भी एक वक्‍त था, यहां पैदल टहलते थे। कभी मैं, धूमल जी, नड्डा जी, पैदल यहां बाजार से निकल पड़ते थे। हम एक बहुत बड़ा रथयात्रा का कार्यक्रम लेकर भी यहां बिलासपुर की गलियों से गुजरे थे। और तब स्वर्ण जयंती रथयात्रा यहां से होकर और वो भी मेन मार्केट से निकली थी और वहां जनसभा हुई थी। और अनेक बार मेरा यहां आना हुआ, आप लोगों के बीच रहना हुआ है।

हिमाचल की इस भूमि पर काम करते हुए मुझे निरंतर हिमाचल की विकास यात्रा का सहयात्री बनने का अवसर मिला है। और मैं अभी सुन रहा था, अनुराग जी बड़े जोर-जोर से बोल रहे थे, ये मोदी जी ने किया, ये मोदी जी ने किया, ये मोदी जी ने कहा। हमारे नड्डा जी भी कह रहे थे, ये मोदी जी ने किया, ये मोदी जी ने किया और हमारे मुख्‍यमंत्री जयराम जी भी कह रहे थे, मोदी जी ने किया, मोदी जी ने किया। लेकिन मैं सच्‍चाई बता दूं, सच्‍चाई बता दूं किसने किया, बता दूं? ये जो कुछ भी हो रहा है ना, वो आपने किया है। आपके कारण हुआ है। अगर आप दिल्‍ली में सिर्फ मोदी जी को आशीर्वाद देते और हिमाचल में मोदी जी के साथियों को आशीर्वाद न देते तो ये सारे कामों में वो अड़ंगे डाल देते। ये तो जयराम जी और उनकी टीम है कि जो काम दिल्‍ली से मैं लेकर आता हूं, उसको तेजी गति से ये लोग दौड़ाते हैं, इसलिए हो रहा है। और ये अगर एम्‍स बना है तो आपके एक वोट की ताकत है, अगर टनल बना है तो आपके एक वोट की ताकत है, हाइड्रो इंजीनियरिंग कॉलेज बना है तो ये आपके वोट की ताकत है, अगर मेडिकल डिवाइस पार्क बन रहा है तो ये भी आपके एक वोट की ताकत है। और इसलिए आज मैं हिमाचल की अपेक्षाओं को ध्‍यान में रखते हुए एक के बाद एक विकास के काम कर रहा हूं।

विकास को लेकर हमने देश में लंबे समय तक एक विकृत सोच को हावी होते देखा है। ये सोच क्या थी? अच्छी सड़कें होंगी तो कुछ राज्यों और कुछ बड़े शहरों में होंगी, दिल्‍ली के आसपास होंगी। अच्छे शिक्षण संस्थान होंगे, तो बहुत बड़े-बड़े शहरों में होंगे। अच्छे अस्पताल होंगे वो तो दिल्‍ली में ही हो सकता है, बाहर हो ही नहीं सकता है। उद्योग-धंधे लगेंगे तो भी बड़ी-बड़ी जगह पर लगेंगे, और विशेषकर देश के पहाड़ी प्रदेशों में मूल सुविधाएं तक सबसे अंत में, कई-कई बरसों के इंतज़ार के बाद पहुंचती थीं। उस पुरानी सोच का नतीजा ये हुआ कि इससे देश में विकास का एक बड़ा असंतुलन पैदा हो गया। इस वजह से देश का एक बड़ा हिस्‍सा, वहां के लोग असुविधा में, अभाव में रहे।

पिछले 8 वर्षों में देश अब उस पुरानी सोच को पीछे छोड़कर, नई सोच, आधुनिक सोच के साथ आगे बढ़ रहा है। अब देखिए, लंबे समय तक, और मैं तो जब यहां आता था, मैं लगातार देखता था, यहां एक यूनिवर्सिटी से ही गुज़ारा होता था। और इलाज हो या फिर मेडिकल की पढ़ाई, IGMC शिमला और टाटा मेडिकल कॉलेज पर ही निर्भरता थी। गंभीर बीमारियों का इलाज हो या फिर शिक्षा या रोज़गार, चंडीगढ़ और दिल्ली जाना तब हिमाचल के लिए मजबूरी बन गया था। लेकिन बीते आठ वर्षों में हमारी डबल इंजन की सरकार ने हिमाचल की विकास गाथा को नए आयाम पर पहुंचा दिया है। आज हिमाचल में सेंट्रल यूनिवर्सिटी भी है, आईआईटी भी है, ट्रिपल आईटी भी है, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (IIM) जैसे प्रतिष्ठित संस्थान भी हैं। देश में मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य का सबसे बड़ा संस्थान, एम्स भी अब बिलासपुर और हिमाचल की जनता की आन-बान-शान बढ़ा रहा है।

बिलासपुर एम्स एक और बदलाव का भी प्रतीक है और एम्‍स के अंदर भी ये ग्रीन एम्‍स के नाम से जाना जाएगा, पूरी तरह पर्यावरण प्रेमी एम्‍स, प्रकृति प्रेमी एम्‍स। अभी हमारे सभी साथियों ने बताया पहले सरकारें शिलान्यास का पत्थर लगाती थीं और चुनाव निकलने के बाद भूल जाती थीं। आज भी हिमाचल में जाओगे, हमारे धूमल जी ने एक बार कार्यक्रम किया था, कहां-कहां पत्‍थर पड़े हैं ढूंढने का, और ढेर सारे ऐसे कार्यक्रम जहां पत्‍थर पड़े थे, काम नहीं हुआ था।

मुझे याद है मैं एक बार रेलवे का रिव्‍यू कर रहा था, आपके ऊना के पास एक रेलवे लाइन बिछानी थी। 35 साल पहले निर्णय हुआ था, 35 साल पहले। पार्लियामेंट में घोषणा हुई थी, लेकिन फिर फाइल बंद। हिमाचल को कौन पूछेगा भाई। लेकिन ये तो हिमाचल का बेटा है और हिमाचल को भूल नहीं सकता। लेकिन हमारी सरकार की पहचान है कि जिस प्रोजेक्ट का शिलान्यास करती है, उसका लोकार्पण भी करती है। अटकना, लटकना, भटकना, वो जमाना चला गया दोस्‍तों !

साथियों,

राष्ट्ररक्षा में हमेशा से हिमाचल का बहुत बड़ा योगदान रहा है, जो हिमाचल पूरे देश में राष्‍ट्र रक्षा के वीरों के लिए जाना जाता है वो हिमाचल अब इस एम्‍स के बाद जीवन रक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला है। साल 2014 तक हिमाचल में सिर्फ 3 मेडिकल कॉलेज थे, जिसमें 2 सरकारी थे। पिछले 8 सालों में 5 नए सरकारी मेडिकल कॉलेज हिमाचल में बने हैं। 2014 तक अंडर और पोस्टग्रेजुएट मिलाकर सिर्फ 500 विद्यार्थी पढ़ सकते थे, आज ये संख्या 1200 से अधिक, यानि दोगुने से भी ज्यादा हो चुकी है। एम्स में हर साल अनेक नए डॉक्टर बनेंगे, नर्सिंग से जुड़े युवा यहां ट्रेनिंग पाएंगे। और मुझे जयराम जी की टीम को, जयराम जी को, भारत सरकार के आरोग्‍य मंत्री और आरोग्‍य मंत्रालय को विशेष रूप से बधाई देनी है। जब नड्डा जी आरोग्‍य मंत्री थे, उस समय हमने निर्णय किया तो नड्डा जी के जिम्‍मे बहुत बड़ा दायित्‍व आ गया, मैं शिलान्‍यास भी कर गया। इसी कालखंड में कोरोना की भयंकर महामारी आई और हम जानते हैं हिमाचल के लोग तो हिमाचल में कोई भी कंस्‍ट्रक्‍शन का काम करता है तो कितना मुश्किल होता है, एक-एक चीज पहाड़ पर लाना, कितना दिक्‍कत भरा होता है। जो काम नीचे एक घंटे में होता है, उसको यहां पहाड़ों में करने के लिए एक दिन लग जाता है। उसके बावजूद भी, कोरोना की कठिनाई के बावजूद भी भारत सरकार का आरोग्‍य मंत्रालय और जयराम जी के राज्‍य सरकार की टीम ने मिल करके जो काम किया, आज एम्‍स मौजूद है, एम्‍स काम करने लग गया है।

मेडिकल कॉलेज ही नहीं, हम एक और दिशा में आगे बढ़े, दवाओं और जीवन रक्षक टीकों के निर्माता के रूप में भी हिमाचल की भूमिका का बहुत अधिक विस्तार किया जा रहा है। बल्क ड्रग्स पार्क के लिए देश के सिर्फ तीन राज्‍यों को चुना गया है, और उसमें से एक कौन सा राज्‍य है भाई, कौन सा राज्‍य है? हिमाचल है, आपको गर्व हो रहा है‍ कि नहीं हो रहा है? ये आपके बच्‍चों के उज्‍ज्‍वल भविष्‍य का शिलान्‍यास है कि नहीं है? ये आपके बच्‍चों के उज्‍ज्‍वल भविष्‍य की गारंटी है कि नहीं है? हम काम बड़ी मजबूती से करते हैं और आज की पीढ़ी के लिए भी करते हैं, आने वाली पीढ़ी के लिए भी करते हैं।

उसी प्रकार से मेडिकल डिवाइस पार्क के लिए 4 राज्यों को चुना गया है, जहां आज मेडिकल में टेक्‍नोलॉजी का भरपूर उपयोग हो रहा है। विशिष्‍ट प्रकार के औजारों की जरूरत पड़ती है, उसको बनाने के लिए देश में चार राज्‍य चुने गए हैं। इतना बड़ा हिन्‍दुस्‍तान, इतनी बड़ी जनसंख्‍या, हिमाचल तो मेरा छोटा सा राज्‍य है, लेकिन ये वीरों की धरती है और मैंने यहां की रोटी खाई है, मुझे कर्ज भी चुकाना है। और इसलिए चौथा मेडिकल डिवाइस पार्क कहां बन रहा है, ये चौथा मेडिकल डिवाइस पार्क कहां बन रहा है- आपके हिमाचल में बन रहा है दोस्तों। दुनिया भर के बड़े-बड़े लोग यहां आएंगे। नालागढ़ में ये मेडिकल डिवाइस पार्क का शिलान्यास इसी का हिस्सा है। इस डिवाइस पार्क के निर्माण के लिए हज़ारों करोड़ रुपए का निवेश यहां होगा। इससे जुड़े अनेक छोटे और लघु उद्योग आस-पास विकसित होंगे। इससे यहां के हज़ारों युवाओं को रोज़गार के अवसर मिलेंगे।

साथियों,

हिमाचल का एक पक्ष और है, जिसमें यहां विकास की अनंत संभावनाएं छिपी हुई हैं। ये पक्ष है मेडिकल टूरिज्म का। यहां की आबो-हवा, यहां का मौसम, यहां का वातावरण, यहां की जड़ी-बूटियां, यहां का अच्छे स्वास्थ्य के लिए बहुत उपयुक्त वातावरण। आज भारत मेडिकल टूरिज्म को लेकर दुनिया का एक बहुत बड़ा आकर्षण केंद्र बन रहा है। जब देश और दुनिया के लोग हिन्‍दुस्‍तान में मेडिकल ट्रीटमेंट के लिए आना चाहेंगे तो यहां का प्राकृतिक सौंदर्य इतना बढ़िया है कि वे यहां आएंगे, एक प्रकार से उनके लिए आरोग्‍य का लाभ भी होगा और पर्यटन का भी लाभ होने वाला है। हिमाचल के तो दोनों हाथ में लड्डू हैं।

साथियों,

केंद्र सरकार का प्रयास है कि गरीब और मध्यम वर्ग का इलाज, उस पर खर्च कम से कम हो, ये इलाज भी बेहतर मिले और इसके लिए उसको दूर तक जाना भी न पड़े। इसलिए आज एम्स मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पतालों में क्रिटिकल केयर सुविधाओं और गांवों में हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर बनाने पर एक seamless connectivity पर हम काम कर रहे हैं। उस पर बल दिया जा रहा है। आयुष्मान भारत योजना के तहत हिमाचल के अधिकतर परिवारों को 5 लाख रुपए तक के मुफ्त इलाज की सुविधा मिल रही है।

इस योजना के तहत अभी तक देशभर में 3 करोड़ 60 लाख गरीब मरीज़ों का मुफ्त इलाज हो चुका है, और इसमें से डेढ़ लाख तो लाभार्थी ये मेरे हिमाचल के मेरे परिवारजन हैं। देश में इन सभी साथियों के इलाज पर सरकार अब तक 45 हज़ार करोड़ रुपए से अधिक खर्च कर चुकी है। अगर आयुष्मान भारत योजना ना होती तो इसका करीब दोगुना यानि लगभग 90 हज़ार करोड़ रुपए ये जो मरीज लोग थे, उन परिवारों को अपनी जेब से देना पड़ता। यानि इतनी बड़ी बचत भी गरीब और मध्‍यम वर्ग के परिवार को बेहतरीन इलाज के साथ मिली है।

साथियों,

मेरे लिए एक और संतोष की बात है। सरकार की इस प्रकार की योजनाओँ का सबसे अधिक लाभ हमारी माताओं को, बहनों को, बेटियों को मिला है। और हम तो जानते हैं, हमारी मां-बहनों का स्‍वभाव होता है, कितनी ही तकलीफ हो, शरीर में कितनी ही पीड़ा होती हो, लेकिन वो परिवार में किसी को बताती नहीं हैं। वो सहन करती भी हैं, काम भी करती हैं, पूरे परिवार को संभालती भी हैं, क्‍योंकि उसके मन में रहता है कि अगर बीमारी का पता परिवार के लोगों को लगेगा, बच्‍चों को लगेगा तो वो कर्ज कर-करके भी मेरा उपचार कराएंगे, और मां सोचती है, अरे बीमारी में ही थोड़ा समय निकाल दूंगी, लेकिेन बच्‍चों पर कर्ज नहीं होने दूंगी, मैं अस्‍पताल जाकर खर्च नहीं करूंगी। इन माताओं की चिंता कौन करेगा? क्‍या मेरी माताएं इस प्रकार की यातनाएं चुपचाप सहती रहें। ये बेटा किस काम का है, और उसी भावना से आयुष्‍मान भारत योजना का जन्‍म हुआ है। ताकि मेरी माताओं-बहनों को बीमारी से गुजारा न करना पड़े। जीवन में इस मजबूरी से जीना न पड़े। आयुष्मान भारत योजना के तहत लाभ लेने वाली माताएं-बहनें 50 प्रतिशत से ज्‍यादा हैं। हमारी माताएं-बहनें और बेटियां हैं।

साथियों,

चाहे शौचालय बनाने के लिए स्वच्छ भारत अभियान हो, मुफ्त गैस कनेक्शन देने के लिए उज्ज्वला योजना हो, मुफ्त सैनेटेरी नैपकिन देने का अभियान हो, मातृवंदना योजना के तहत हर गर्भवती महिला को पोषक आहार के लिए हज़ारों रुपए की मदद हो, या फिर अब हर घर जल पहुंचाने का हमारा अभियान हो, ये सारा मेरी माताओं-बहनों को सशक्‍त करने वाले काम हम एक के बाद एक करते चले जा रहे हैं। माताओं-बहनों-बेटियों का सुख, सुविधा, सम्मान, सुरक्षा और स्वास्थ्य डबल इंजन की सरकार की बहुत बड़ी प्राथमिकता है।

केंद्र सरकार ने जो भी योजनाएं बनाई हैं, उनको जयराम जी और उनकी पूरी टीम ने, उनकी सरकार ने बहुत तेज गति से और बड़ी स्पिरिट के सा‍थ उसको ज़मीन पर उतारा है और उनका दायरा भी बढ़ाया है। हर घर नल से जल पहुंचाने का काम यहां कितना तेज़ी से हुआ है, ये हम सभी के सामने है। पिछले 7 दशकों में जितने नल कनेक्शन हिमाचल में दिए गए हैं, उससे दोगुने से भी अधिक सिर्फ बीते 3 साल में दे चुके हैं हम, मिल चुके हैं लोगों को। इन तीन वर्षों में साढ़े 8 लाख से अधिक नए परिवारों को पाइप के पानी की सुविधा मिली है।

भाइयों और बहनों,

जयराम जी और उनकी टीम की एक और मामले में देश बहुत अधिक प्रशंसा कर रहा है। ये प्रशंसा सामाजिक सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार के प्रयासों को विस्तार देने के लिए हो रही है। आज हिमाचल का शायद ही कोई परिवार ऐसा हो, जहां किसी ना किसी सदस्य को पेंशन की सुविधा न मिलती हो। विशेष रूप से जो साथी बेसहारा हैं, जिनको गंभीर बीमारी ने जकड़ लिया है, ऐसे परिवारों को पेंशन और इलाज के खर्च से जुड़ी सहायता के प्रयास सराहनीय है। हिमाचल प्रदेश के हजारों परिवारों को वन-रैंक वन-पेंशन लागू होने से भी बड़ा लाभ हुआ है।

साथियों,

हिमाचल अवसरों का प्रदेश है। और मैं जयराम जी को और एक बधाई देता हूं। वैक्‍सीनेशन का काम तो पूरे देश में चल रहा है, लेकिन आपकी जिंदगी की सुरक्षा के लिए हिमाचल देश का वो पहला प्रदेश है, जिसने शत-प्रतिशत वैक्‍सीनेशन का काम पूरा कर लिया है। होती है, चलती है, वाला मामला नहीं, ठान लिया है तो करके रहना है।

यहां बिजली पैदा होती है हाइड्रो से, फल-सब्ज़ी के लिए उपजाऊ ज़मीन है और रोज़गार के अनंत अवसर देने वाला पर्यटन यहां पर है। इन अवसरों के सामने बेहतर कनेक्टिविटी का अभाव सबसे बड़ी रुकावट थी। 2014 के बाद से हिमाचल प्रदेश में बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर गांव-गांव तक पहुंचाने का प्रयास हो रहा है। आज हिमाचल की सड़कों को चौड़ा करने का काम भी चारों तरफ चल रहा है। हिमाचल में इस समय कनेक्टिविटी के कामों पर लगभग 50 हज़ार करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। पिंजौर से नालागढ़ हाईवे के फोरलेन का काम जब पूरा हो जाएगा, तब औद्योगिक क्षेत्र नालागढ़ और बद्दी को तो लाभ होगा ही, चंडीगढ़ और अम्बाला से बिलासपुर, मण्डी और मनाली की तरफ जाने वाले यात्रियों को भी सुविधा बढ़ने वाली है। यही नहीं, हिमाचल के लोगों को घुमावदार रास्तों से मुक्ति दिलाने के लिए सुरंगों का जाल भी बिछाया जा रहा है।

साथियों,

डिजिटल कनेक्टिविटी को लेकर भी हिमाचल में अभूतपूर्व काम हुआ है। पिछले 8 वर्षों में मेड इन इंडिया मोबाइल फोन सस्ते भी हुए और गांव-गांव में नेटवर्क भी पहुंचा है। बेहतर 4G कनेक्टिविटी के कारण हिमाचल प्रदेश डिजिटल लेनदेन में भी बहुत तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। डिजिटल इंडिया का सबसे अधिक लाभ सबसे अधिक किसी को हो रहा है तो मेरे हिमाचल के भाइयों-बहनों को हो रहा है, मेरे हिमाचल के नागरिकों को हो रहा है। वरना बिल भरने से लेकर बैंक से जुड़े काम हों, एडमिशन हो, एप्लीकेशन हो, ऐसे हर छोटे-छोटे काम के लिए पहाड़ से नीचे उतर करके दफ्तरों में जाना, एक-एक दिन लगता था, कभी रात को रुकना पड़ता था। अब तो देश में पहली बार मेड इन इंडिया 5G सेवाएं भी शुरू हो चुकी हैं, जिसका लाभ हिमाचल को भी बहुत जल्दी मिलने वाला है।

भारत ने ड्रोन को लेकर जो नियम बनाये, बदले हैं, उसके बाद और मैं हिमाचल को इसके लिए भी बधाई देता हूं, देश में सबसे पहला राज्‍य हिमाचल है, जिसने राज्‍य की ड्रोन पॉलिसी बनाई है। अब ड्रोन से ट्रांसपोर्टेशन के लिए ड्रोन का इस्तेमाल बहुत ज्यादा बढ़ने वाला है। और इसमें किन्‍नौर तक के हमारे अगर आलू भी हैं, तो हम वहां से ड्रोन से उठा करके बड़ी मंडी में तुरंत ला सकते हैं। हमारे फल खराब हो जाते थे, ड्रोन से उठा करके ला सकते हैं। अनेक प्रकार के लाभ आने वाले दिनों में होने वाले हैं। इसी प्रकार का विकास, जिससे हर नागरिक की सुविधा बढ़े, हर नागरिक समृद्धि से जुड़े, इसके लिए हम प्रयासरत हैं। यही विकसित भारत, विकसित हिमाचल प्रदेश के संकल्प को सिद्ध करेगा।

मुझे खुशी है विजयादशमी के पावन पर्व पर विजय नाद करने का अवसर मिला और मुझे रणसिंहा फूंक करके विजय का आगाज करने का अवसर‍ मिला और यह सब आप सबके इतने आशीर्वाद के बीच करने का अवसर मिला। मैं फिर एक बार एम्‍स सहित सभी विकास परियोजनाओं के लिए आप लोगों को बहुत-बहुत बधाई देता हूं। दोनों मुट्ठी बंद करके मेरे साथ बोलिए-

भारत माता की–जय। पूरी ताकत से आवाज चाहिए-

भारत माता की–जय

भारत माता की–जय

भारत माता की–जय

बहुत-बहुत धन्यवाद!