प्रधानमंत्री मोदी ने फरीदाबाद मेट्रो लाइन का उद्घाटन किया, मेट्रो की सवारी की एवं एक जनसभा को संबोधित किया
एनडीए सरकार ने सशस्त्र बलों के लिए ‘वन रैंक, वन पेंशन’ लागू करने के वादे को पूरा किया
केंद्र और राज्यों को एकसाथ मिलकर काम करना चाहिए; विकास के लिए बुनियादी ढांचा आवश्यक: प्रधानमंत्री
भारत का विकास राजनीति के माध्यम से नहीं बल्कि राष्ट्रवादी नीतियों के माध्यम से होगा: प्रधानमंत्री मोदी
देश की प्रगति के लिए सरकार द्वारा किये गए हर फैसले का राजनीतिकरण करना एक फैशन-सा बन गया है: प्रधानमंत्री
लोगों को ओआरओपी और वीआरएस पर सरकार के निर्णयों के बारे में गुमराह किया जा रहा है: प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री मोदी ने 2022 तक सभी के लिए आवास उपलब्ध कराने के सरकार के संकल्प को दोहराया

विशाल संख्या में पधारे भाईयो और बहनों,

अभी हमारे मुख्यमंत्री बता रहे थे कि मोदी जी इतनी बार हरियाणा में आए और 11 तारीख को भी आने वाले हैं, 18 तारीख को भी आने वाले हैं। आप सबको मालूम है हरियाणा मेरा दूसरा घर है। गुजरात छोड़ने के बाद मैंने वर्षों तक हरियाणा में ही अपना जीवन बिताया। यहां के हर गांव, गली, मौहल्ले से परिचित हूं, तो मुझे हरियाणा आने का मन करेगा कि नहीं करेगा? आपके प्यार को मैं कभी भुला सकता हूं क्या? तो आपका प्यार है जो मुझे बार-बार खींचकर ले आता है और मैंने हरियाणा को कहा था, पहले दिन से कह रहा हूं कि आपने मुझे जो प्यार दिया है, मैं विकास करके ब्याज समेत लौटाऊंगा, ये मैं कह रहा हूं।

भाईयों-बहनों चुनाव आते हैं, जाते हैं। राजनीति अपनी जगह पर चलती रहती है। वो लोकतंत्र का स्वाभाविक हिस्सा है लेकिन देश सिर्फ राजनीति से नहीं चलता है, देश राष्ट्रनीति से चलता है, देश विवादों से नहीं बढ़ता है, देश संवाद से बढ़ता है। हमारी समस्याओं का समाधान अगर उसका कोई एक उपाय है, अगर उसकी कोई एक जड़ी-बूटी है, तो उस जड़ी-बूटी का नाम विकास है, विकास। विकास होगा तो नौजवान को रोजगार मिलेगा, विकास होगा तो किसान को अपनी फसल का पूरा दाम मिलेगा, विकास होगा तो गरीब से गरीब बच्चे को अच्छी से अच्छी शिक्षा मिलेगी, विकास होगा तो गांव के गरीब हो, वयोवृद्ध-तपोवृद्ध लोग हो उनको आरोग्य की सुविधा उपलब्ध होगी, गरीब को रहने के लिए घर मिलेगा और इसलिए मेरे भाईयों-बहनों हम एक ही बिंदू पर काम कर रहे हैं। जब से आपने हमें जिम्मेवारी दी है, हमारा एक ही मंत्र है, एक ही मकसद है, एक ही मार्ग है, एक ही मंजिल है और उसका नाम है विकास।

आप मुझे बताइए, आपक विकास चाहिए कि नहीं चाहिए? अच्छे रास्ते चाहिए कि नहीं चाहिए? अच्छे स्कूल चाहिए कि नहीं चाहिए? अच्छे अस्पताल चाहिए कि नहीं चाहिए? इस देश को यही चाहिए और इसलिए ये सरकार इन्हीं बिंदुओं पर अपनी ताकत लगा रही है। अच्छा होता ये काम पिछले 60 साल में पूरे हो गये होते। देश ऊंचाइयों को पार कर लिया होता। लेकिन बहुत सारे काम अधूरे हैं और अधूरे हैं इसलिये पुरानी सरकारों को आलोचना करके उनकी टीपा टीका टिप्पणी करके मैं रुक जाऊं ये उचित नहीं है। इस सरकार का जिम्मेदारी है कि हम समस्याओं के समाधान खोजें विकास के नये - नये उपाये खोजें और देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाएं।

पिछले दिनों आपने देखा होगा पूरी दुनिया में एक आर्थिक संकट पैदा हुआ मजबूत से मजबूत आर्थिक नींव पर खड़े हुए देश हिल गए। और तुफान इतना भयंकर था कि उसके सामने टिकना बड़ा मुश्किल था, इतनी बड़ी आंधी तेज आई थी। लेकिन सारी दुनिया के आर्थिक पंडितों का कहना है कि इतनी भंयकर आर्थिक मंदी के बीच, इतने भयंकर आर्थिक तुफानों के बीच कोई एक देश बराबर अगर खड़ा रहा, टिका रहा, उस देश का नाम हिंदुस्तान है।

मेरे भाईयों-बहनों और यही बताता है कि पिछले 15 महीनों में, सरकार ने जो रास्ता अपनाया है, जिन नीतियों को लागू किया है, आज उसका परिणाम नजर आ रहा है कि इतनी बड़ी आंधी के बावजूद भी हिंदुस्तान आर्थिक धरातल पर टिका रहा है। लेकिन भाईयों-बहनों सिर्फ टिके रहे हैं, इससे संतोष मानना, ये हमें मंजूर नहीं है। इतनी बड़ी आंधी में तूफान में टिक गये ये अच्छी बात है, लेकिन हमें जहां टिके हैं, वहां रुकना नहीं है हमें आगे बढ़ना है। आगे बढ़ने का रास्ता सवा सौ करोड़ देश वासियों को साथ और सहयोग है, आगे बढ़ने का रास्ता सभी राज्य सरकारें और केंद्र सरकार को कंधे से कंधा मिलाकर चलना है। आगे बढ़ने का रास्ता लोकतांत्रिक मार्ग है और अगर हमें विकास करना है, तो हमें Infrastructure पर सबसे पहले प्राथमिकता देनी पड़ेगी। रेल हो, रोड हो, रेल हो, सामान्य नागरिक की सुविधा की व्यवस्थाएं हो, ये जब तब तक हम निर्माण नहीं करेंगे, विकास के फल नीचे तक नहीं पहुंचेंगे।..और इसलिये ये सरकार का मकसद है कि 2022 जब हिन्दुस्तान आजादी के 75 साल मनाएगा, वो आजादी का 75 साल कैसे हों, क्या हम सपना लेकर के नहीं चल सकते कि आजादी के 75 साल जब मनाएंगे, आजादी के दीवानों को जब अंजली देंगे, आजादी के लिये शहीद हुए महापुरुषों का पुण्य स्मरण करेंगे, उस समय कम से कम एक काम तो पूरा कर लें, इस देश में कोई गरीब ऐसा न हो जिसको अपना घर न हो। हर गरीब को भी अपना घर मिले, काम बहुत बड़ा है, दुनिया के कुछ देशों की आबादी से ज्यादा भी मकान बनाने पड़ेंगे, लेकिन भाइयों बहनों कठिन काम भी हमें हाथ में लेने हैं और उसको पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

हमारे वेंकैया जी नायडू शहरी विकास मंत्री के नाते एक ऐसी योजना उन्होंने देश के सामने रखी है, जिसके कारण शहरी गरीबों के लिये मकानों की सुविधा उपलब्ध हो, नये मकान बनें, गरीब के लिये बने, सस्ते बने, अच्छे बने और घर भी वो हो, जिसके नल में जल हो, बिजली हो, नजदीक में स्कूल हो, एक परिवार सुख शांति से रह सके ऐसा घर हो। हमारे चौधरी वीरेन्द्र सिंह जी लगे हैं, एक ग्रामीण विकास मंत्रालय को लेकर के गांव में जो गरीब है, उन गरीबों को रहने के लिये अपना घर मिले, योजनाओं को आगे बढ़ा रहे हैं। एक तरफ शहरी विकास एक तरफ ग्रामीण विकास, गरीब शहर का हो या गरीब गांव का हो हर किसी को रहने के लिये घर मिले इसके लिये बहुत बड़ा काम हमने सर पर उठाया है।

भाइयो बहनों आज यहां मेट्रो रेल का लोकापर्ण हो रहा है। अब हरियाणा भी गर्व के साथ दुनिया में कहेगा कि हमारे पास मेट्रो रेलवे है। हरियाणा ने दिल्ली के टूरिस्टों को आकर्षित करने की सबसे बड़ी ताकत अगर किसी में है, तो हरियाणा में है। weekend टूरिस्टों को आकर्षित करने की ताकत है, तो हरियाणा में है औऱ मेट्रो की सुविधा हो जाए तो बहुत बड़ी मात्रा में दिल्ली से लोग weekend मनाने के लिए हरियाणा की ओर चले जाएंगे और हरियाणा के नौजवानों को रोजी-रोटी का प्रबंध हो जाएगा। ये मेट्रो सिर्फ आने-जाने का कारोबार है, ऐसा नहीं है, अब मेट्रो सिर्फ, पहले बस में जाना पड़ता था, कार लेकर जाना पड़ता था, ट्रैफिक जाम हो जाता था, अब जल्दी पहुंचा जाता है, इतना ही नहीं है इनसे पूरी economy drive होती है, पूरे आर्थिक जीवन को एक गति मिलती है और इसलिए ये रैली का नाम भी गति-प्रगति रैली रखा गया है। गति भी हो, प्रगति भी हो और तेज गति से प्रगति हो, उन सपनों को पूरा करने का प्रयास हो रहा है। करीब-करीब ढाई हजार करोड़ रुपया की लागत से, ये प्रोजेक्ट यहां पूरा हुआ है।

लेकिन मैं आज मेरे हरियाणा के भाईयों-बहनों को एक और नजराना भी देना चाहता हूं, ये मेट्रो यहीं से लौट नहीं जाएगी, हम बल्लभगढ़ तक जाएंगे। आने वाले दिनों में बल्लभगढ़ के लिए एक काम शुरू हो जाएगा। 600-700 करोड़ रुपए की और लागत लगेगी लेकिन हरियाणा के एक महत्वपूर्ण हिस्सों को जोड़ने का काम होगा।

फरीदाबाद मेरे लिए नया नहीं है। मैं कभी यहां स्कूटर पर आया करता था। मैंने फरीदाबाद को पनपते हुए देखा है। एशिया में नौंवे नंबर पर सबसे बड़ा industrial estate वाला ये फरीदाबाद शहर है। अब फरीदाबाद एक लघु हिंदुस्तान बन गया है। हिंदुस्तान का कोई राज्य ऐसा नहीं होगा, जिसके लोग फरीदाबाद में रहते न हो, एक प्रकार का लघु भारत बन गया है। इस फरीदाबाद का विकास भी, वैसा ही होना चाहिए। ये मेट्रो ट्रेन के आरंभ से वो एक नया विकास का मार्ग भी खुल जाता है और मैं श्रीमान वेंकैया जी को एक बात के लिए बधाई देना चाहता हूं, उनका विभाग इस काम को देखता है, सारी दुनिया को एक संदेश दे रहे हैं कि ये मेट्रो का जो लाईन है environment friendly है। यहां के स्टेशनों पर solar panel लगे हुए हैं और करीब-करीब दो मेगावॉट बिजली सूर्य शक्ति से पैदा करते हैं और सारी व्यवस्था में उसी बिजली का उपयोग किया जाता है। मेट्रो का एक ट्रैक solar panel से भरों हुआ हो, ये दुनिया के लिए भी एक आकर्षण का कारण है। आने वाले दिनों में Green Railway Station कैसे बने, Environment Friendly Railway Station कैसे बने उस दिशा में भी मैट्रो की तरफ से एक सफलतापूर्वक अभियान चलाया जा रहा है और आज जब पूरी विश्व Global Warming के लिये चिंतित है, Climate Change के कारण चिंतित है, हमारी एक छोटी सी इकाई मैट्रो वे भी दुनिया की मदद करने के लिये Green movement में अपना सहयोग दे रही है और इसलिये वेंकैया जी को और उनकी पूरी टीम को मैं हृदय से बहुत बहुत अभिनन्दन करता हूं और उनके साधुवाद करता हूं।

भाइयो बहनों ये हरियाणा की धरती ऐसी है, कल हमनें श्री कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया और जब श्री कृष्ण को याद करते हैं तो सिर्फ द्वारका की नगरी याद नहीं आती है, कुरुक्षेत्र भी तुरंत याद आता है। पूरा हरियाणा एक प्रकार से इन महापुरुषों की छाया में पला बड़ा हुआ है। सांस्कृतिक विरासत का धनी है। यहीं से पास में गांव सिही सूरदास जी की जन्म भूमि है, यही तो हमारी विशेषता यही हमारी ताकत है और उन्हीं से महापुरुषों के आशिर्वाद लेकर के हम हरियाणा को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिये प्रयास कर रहे हैं।

मैं हरियाणा सरकार को अभिनन्दन करता हूं। श्रीमान मनोहर लाल जी का विशेष रूप से और उनकी पूरी टीम का अभिनन्दन करता हूं। कि जिस हरियाणा को बेटियों के भ्रूण हत्या के लिये पहचाना जाता था वो हरियाणा आज बेटी बचाने के लिये पहचाने जाने लगा है। ये छोटा सा निर्णय परिवर्तन नहीं है, ये छोटा सा movement नहीं है, कितना कठिन काम होता है मुझे अंदाजा है लेकिन हरियाणा के राज्य सरकार ने यहां के राजनीतिक नेताओं ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है और बेटी बचाने का जो अभियान चलाया है और पूरे हिन्दुस्तान का बेटी बचाने का अभियान का प्रारंभ भी इसी हरियाणा की धरती से हुआ है।

मैं जानता हूं, मनोहर लाल जी हमारे बड़े परिश्रमी नेता हैं, मेहनत करने में शायद कोई उनका मुकाबला नहीं कर सकता है, मैंने सालों तक उनके साथ काम किया है और वे हरियाणा को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में सफल होंगे, हरियाणा की आशाओं-आकाक्षाओं को वे पूरा करेंगे, ये मुझे विश्वास है।

आने वाले दिनों में हमारे देश में, हम-हमारे शहरों का रंग-रूप बदलना चाहते हैं, चेहरा बदलना चाहते हैं, उसके फेफड़ों को नई ताकत देना चाहते हैं। आज हमारे शहरों के फेफड़े भी बीमार हो गए हैं, greenery नहीं बची है, अपनी मर्जी से वो बढ़ता गया है। वेंकैया जी के नेतृत्व में, जो smart city का अभियान चला है, उस smart city में फरीदाबाद का भी नाम है। लेकिन कुछ लोगों को लगता होगा कि अब सरकार ने smart city कह दिया तो smart city बन गया। भाईयों-बहनों आपको पता होना चाहिए और मैं चाहता हूं कि इस बात की घर-घर चर्चा होनी चाहिए, हर बार चर्चा होनी चाहिए कि ये अभी तो फरीदाबाद की entry हुई है competition के अंदर पहली मैच उसने जीत लिया है, पहली मैच जीतकर के उसने entry पा ली है, लेकिन आगे बढ़ने के लिये यहां के सभी नागरिकों ने तय करना पड़ेगा की हमें फरीदाबाद स्मार्ट सिटी बनाना है। कानून में ये परिवर्तन करना पड़ेगा, तो करना है। हमें ये discipline लानी है तो लानी है। हमें स्वच्छता रखनी है तो रखनी है। ये जब तक हम नहीं करेंगे, ये स्मार्ट सिटी की स्पर्धा आप जीत नहीं पाओगे। उसके कुछ norms हैं कुछ parameter हैं, मैं चाहता हूं एक जागृति का माहौल बने पूरे देश में ये 100 शहर पूरे हिन्दुस्तान में जो पहली मैच जीत कर के आए हैं। क्योंकि स्पर्धा से तय हुआ है, पहली स्पर्धा में वो जीत गए हैं, लेकिन आगे जैसे-जैसे जाओगे स्पर्धा कठिन होती जाने वाली है। लेकिन मुझे विश्वास है कि हरियाणा के दोनों शहर ये स्पर्धा जीतेंगे और देश में स्मार्ट सिटी बनाने का यश हरियाणा प्राप्त करेगा।

मैं आपको निमंत्रित करता हूं। मैं आपको challenge भी करता हूं इस challenge को स्वीकार कीजिये। सरकार ने जितने parameter तय किये हैं उन parameter को गले लगाइये। पूरे फरीदाबाद का एक – एक घर एक-एक नागरिक स्मार्ट सिटी बनाने का संकल्प लेना चाहिये तब जाकर के स्मार्ट सिटी बना पाएंगे और इसलिये मैं आपको आह्वान कर रहा हूं।

भाइयो बहनों ये हरियाणा की धरती वीरों की धरती है। ये हरियाणा की धरती जवानों की धरती है। ये हरियाणा की धरती देश के लिये मर मिटने वालों की धरती है। प्रधानमंत्री बनने से पहले मेरा पहला कार्यक्रम जब मेरी पार्टी ने मुझे प्रधानमंत्री के उम्मीदवार के लिये घोषित किया तो 13 सितम्बर को रिवाड़ी में मैं आया था। और पहला मेरा कार्यक्रम था पूर्व सैनिकों का बहुत बड़ा जमावड़ा में मैं आया था और उस समय में मैंने वन रैंक वन पैंशन की बात कही थी, याद है कही थी OROP की बात कही थी याद है। भाइयो बहनों ये मामला 42 साल से लटका हुआ था 42 साल से चार दशक इतनी सरकारें आ कर गई लेकिन इस समस्या का समाधान किसी को हाथ नहीं लगता था। lip sympathy सब दूर सब सरकारों ने व्यक्त की थी। हर कोई कहता था हां देश के लिये जवान मरते हैं सरकार का दायित्व है हर कोई कहते थे। लेकिन करने के लिये हर किसी को कठिनाई महसूस होती थी और आज मुझे भी महसूस हो रही है। ये सरल काम नहीं है। मेरे देश के जवानों आपने देश के लिये अपनी जिन्दगी खपाई है, अपका मान सम्मान इससे बड़ा हमारी जिन्दगी में कुछ नहीं हो सकता। लेकिन ये मामला अति कठिन है। उसका प्रभाव पता नहीं कहां-कहां पड़ सकता है। आने वाले दिनों में क्या-क्या संकट आ सकते हैं लेकिन मेरे देश के जवानों, हमने वादा किया था और हम वादा निभा रहे हैं। आपको मालूम है, पहले वाली सरकार के लिए OROP क्या था? 500 करोड़ रुपए का कार्यक्रम था, 500 करोड़ रुपए का, तो हमें भी लगा कि अभी 500 है तो 700 हो जाएगा, 800 हो जाएगा, कर लो, क्या है? लेकिन जब हम गिनती करने के लिए बैठे तो हर रोज नई चीज आने लगी, हर रोज नई चीज आने लगी। Koshyari Committee, जिसका हमारे जवान बार-बार उल्लेख करते हैं, उसको हमने देखा, उसने क्या कहा है, उसने तो 300 करोड़ से भी कम कहा है। उसने कहा है कि 300 करोड़ रुपए से कम रुपया भी लग जाएगा, तो हो जाएगा। सारी सरकार भ्रमित, बैठे हुए अफसर भ्रमित, सेना के जवानों की बातें भी ऐसी, हर कोई उलझा हुआ था, पिछले कई दिनों से मैं लगातार एक-एक तार को खोलता गया, चीजों को ठीक करता रहा और हिसाब लगाता गया भाईयों-बहनों ये OROP 500 करोड़ में होने वाला खेल नहीं है। ये OROP 300 करोड़ रुपए में पूरा होने वाला काम नहीं है, जब हिसाब लगाया तो हिसाब बनता है 8 से 10 हजार करोड़ रुपए का 8 से 10 हजार करोड़ रुपये का।

मेरी सरकार बनी 26 मई, 2014 को और मेरा दायित्व बनता है 26 मई 2014 से। ये जो प्रचार करने वाले लोग हैं वो देश की जनता को और खासकर के हमारे जवानों को भ्रमित करने का पाप करते रहे हैं। 26 मई को इस सरकार का जन्म हुआ उसी दिन से हमनें काम चालू किया और कल हमनें घोषणा की तो भी सरकार बनने के तुरंत बाद एक जुलाई गिनने के लिये उचित रहती है, तो हमनें एक जुलाई से लागू करने का निर्णय कर दिया भाइयो बहनों।

मैं जानता हूं देश के फौज में 80-90% लोग कौन होते हैं हमारी फौज में 80-90% वो जवान होते हैं, जो छोटे-छोटे पद पर होते हैं, कंधे पर बंदूक उठाकर के जो दुश्मनों से मुकाबला करते हैं। सबसे पहले जान की बाजी वो लगा देते हैं, लेकिन सेना की आयु कम हो इसलिये उनको 15 साल के बाद नौकरी छोड़नी पड़ती है, 17 साल के बाद छोड़नी पड़ती है, 20 साल के बाद छोड़नी पड़ती है, इसके लिए अलग-अलग शब्द प्रयोग सेना वाले करते होंगे। कुछ लोगों को लगता है कि जो 15 साल 17 साल नौकरी छोड़कर गए उनको OROP नहीं मिलेगा। मेरे जवान भाइयो बहनों चाहे वो हवल्दार हो, सिपाही हो नायक हो अरे आप ही तो देश की रक्षा करते हो अगर ये OROP सबसे पहले मिलेगा, तो आप को मिलेगा। ये VRS के नाम से आपको भ्रमित करने का जो प्रयास कर रहे हैं वो गलत कर रहे हैं ये सरकार जिन लोगों ने युद्ध में सेना में काम करते करते अपना शरीर गंवाया है, कोई अंग गंवाया है ऐसे भी सेना के जवान जिनको मजबूरन सेना छोड़नी पड़ती है। शरीर की देश के लिये शरीर का एक-एक अंग बली चढ़ा दिया है उसको सेना छोड़नी पड़ती है। क्या OROP से वंचित हो जाएंगे? सेना को प्यार करने वाला प्रधानमंत्री ऐसा कभी सोच भी नहीं सकता है। मेरे भाइयो बहनों ऐसे सबको OROP मिलेगा और इसलिये 80-90% ये जो 8 हजार 10 हजार करोड़ का खर्च है ना उसका सबसे ज्यादा धन ये 15-17 साल की उम्र में जो सेना छोड़ कर घर आते हैं उन जवानों में जाने वाला है। और इसलिये ये भ्रम फैलाने की कोशिश करने की आवश्यकता नहीं है। ये सरकार बहुत ही स्पष्ट है। कि देश के लिये जीने मरने वाले जवानों को लिये OROP लागू करने का हमनें वादा किया है और कल हमनें घोषणा कर दी है।

कुछ लोग कहते हैं Commission बनाया, ये कोई Pay-Commission नहीं बनाया। ये सिर्फ ये जो हमनें निर्णय किये हैं, क्योंकि पहले 500 करोड़ वालों की भी समझ में कुछ कुछ न गड़बड़ रही बाद में Koshyari Committee ने जो रिपोर्ट किया, उसमें भी गड़बड़ रही, हमें लगा कि 10 हजार करोड़ रुपया देने के बाद भी हो सकता है कहीं कोई कमी रह गई हो, कहीं कोई समझदारी में अंतर रहा हो, कोई हिस्सा सेना का छूट गया हो तो ऐसे समय एक व्यवस्था होनी चाहिए ताकि सेना के जवान उनके साथ मिलकरके, अगर कोई कमी रह गई हो, कोई छोटा-मोटा बदलाव जरूरी हो तो उसके साथ कर सके OROP के संबंध में इसलिए ये कमेटी बनाई गई है, ये कोई Pay-Commission नहीं है और इसलिए इसमें भी जो भ्रम फैलाए जा रहे हैं वो भ्रमों का भी निराकरण होना चाहिए।

आज देश के सेना में 10 में से 1 जवान हरियाणा का होता है, 10 जवान हैं तो उसमें से एक हरियाणा का होगा ही होगा और इसलिए ये जब 8-10 हजार करोड़ का पैकेज आएगा तो बहुत बड़ी मात्रा में धन हरियाणा के निवृत्त जवानों के पास आने वाला है, मतलब कि हरियाणा के अंदर हजारों-करोड़ रुपए आने वाले हैं। जब हरियाणा में हजारों-करोड़ रुपए आते हैं तो हरियाणा की economy अचानक drive करने लग जाती है। हरियाणा की आर्थिक गतिविधि को एक बहुत बड़ी ताकत, सेना के निवृत्त जवानों को पैसे मिलने के कारण मिलने वाली है। बहुत बड़ा निर्णय इस सरकार ने किया है, देशभक्ति से प्रेरित होकर के किया है। देश की आर्थिक व्यवस्था में बहुत सारे काम है, कुछ कामों में कटौती करके भी करना पड़ेगा तो करने का फैसला कर करके किया है और इसलिए मैं, मेरे सेना के जावनों को कहता हूं कि ये सरकार आपकी है, ये सरकार आपका हौंसला बुलंद देखना चाहती है, ये सरकार आपके सुखों की चिंता करने वाली सरकार है और आने वाले दिनों में भी जहां जो जरूरत पड़ेगी, ये सरकार आपके साथ खड़ो होगी, ये मैं देश के जवानों को विश्वास दिलाना चाहता हूं।

भाईयों-बहनों जो लोग बयानबाजी करके, राजनीतिक उल्लू सीधा करने की कोशिश कर रहे हैं, देशवासियों जिन्होंने 40-42 साल तक जो काम नहीं किया, उनको एक भी सवाल पूछने का अधिकार है क्या? जरा पूरी ताकत से जवाब दो मुझे, जिन्होंने खुद नहीं किया उनको सवाल पूछने का हक है क्या? देश को गुमराह करने का हक है क्या? जवानों के नाम पर बोलने का हक है क्या? अरे आप लोगों का पाप था कि आप लोगों ने 40-42 साल तक काम नहीं किया, आज हमारा हिसाब मांग रहे हो। भाईयों-बहनों एक fashion चल पड़ी है, एक fashion चल पड़ी है कि जब सरकार कोई भी अच्छे निर्णय करे, देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए हिम्मत के साथ आगे बढ़े तो जो लोग, जिनकों देश की जनता ने reject कर दिया है वो इस देश को आगे बढ़ना नहीं देना चाहते हैं, इससे बड़ा लोकतंत्र का अपमान नहीं हो सकता है और इसलिए मेरे भाइयों-बहनों, मैं देशवासियों को हरियाणा की वो धरती से बोल रहा हूं, जहां कृष्ण ने गीता का संदेश दिया था और युद्ध का विजय प्राप्त करने का संकेत दिया था, ये वो भूमि है जहां हर परिवार से कोई न कोई जवान सीमा पर देश की सेवा कर रहा है, ऐसी धरती से मैं कह रहा हूं कि हमारे लिए, हमारे सेना के जवान किसी के कम प्यारे नहीं हैं और इसलिए ये One-upmanship जो चल रही है, इसके खेल देश का भला नहीं करेंगे।

भाईयों-बहनों हम विकास के मार्ग पर चलना चाहते हैं, सवा सौ करोड़ देशवासियों को लेकर चलना चाहते हैं और उसको लेकर के हम आगे बढ़ रहे हैं और आज मेट्रो का एक नजराना हरियाणा के जीवन को नई ताकत देगा। आधुनिक हरियाणा बनाने में ये सौगात काम आएगी। इसी एक विश्वास के साथ मैं फिर एक बार यहां के मुख्यमंत्री को, सरकार की पूरी टीम को हरियाणा को लगातार आगे बढ़ाने के लिए, नई ऊंचाईयों पर ले जाने के प्रयासों के लिए अभिनंदन करता हूं, बधाई देता हूं और श्रीमान वेंकैया जी नायडू के नेतृत्व में हमारा शहरी विकास तेज गति से हो, हरियाणा में बहुत बड़ी मात्रा में शहरी विकास हो रहा है, वो भी नई ऊंचाइयों को प्राप्त करे यही शुभकामना के साथ आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद।

मेरे साथ दोनों मुठी बंद करके बोलिए

“जय जवान, जय किसान”

“जय जवान, जय किसान”

“जय जवान, जय किसान”

"भारत माता की जय"

"भारत माता की जय"



बहुत-बहुत धन्यवाद।

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आज समय की मांग है कि हम “वोकल फॉर लोकल” को एक जन आंदोलन बनाएं: वडोदरा में पीएम मोदी
May 11, 2026
बदलाव व्यापक हो, और परिणाम स्थायी हों, इसके लिए समाज और सरकार को मिलकर काम करना आवश्यक होता है: प्रधानमंत्री
आज शिक्षा के क्षेत्र में जमीनी हकीकतों के आधार पर काम हो रहा है, राष्ट्रीय शिक्षा नीति इसका बहुत बड़ा उदाहरण है: प्रधानमंत्री
छोटे शहरों से बड़े-बड़े स्टार्टअप्स सामने आ रहे हैं, स्टार्टअप्स में महिलाओं की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है, पहले जिन सेक्टर्स को रिस्की माना जाता था, वो अब युवाओं की पहली पसंद बन रहे हैं: प्रधानमंत्री
अगर कोरोना महामारी इस सदी का सबसे बड़ा संकट थी, तो पश्चिम एशिया में युद्ध से बनी परिस्थितियां इस दशक के बड़े संकटों में से एक है: प्रधानमंत्री
जिस तरह हमने मिलकर महामारी का सामना किया था, उसी तरह हम पश्चिम एशिया संकट पर भी निश्चित रूप से विजय प्राप्त करेंगे: पीएम मोदी
सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है कि पश्चिम एशिया युद्ध संकट का हमारे नागरिकों पर प्रभाव न्यूनतम रहे: प्रधानमंत्री
पहले, जब भी देश किसी बड़े संकट का सामना करता था, प्रत्येक नागरिक सरकार के आह्वान पर अपनी जिम्मेदारियों को निभाने के लिए आगे आता था: प्रधानमंत्री
आज एक बार फिर जरूरत है कि हम सब मिलकर अपना दायित्व निभाएं, देश के संसाधनों पर पड़ने वाले बोझ को कम करें: प्रधानमंत्री
हमें आयातित उत्पादों का उपयोग कम करना चाहिए और विदेशी मुद्रा खर्च को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों से बचना चाहिए: प्रधानमंत्री
आज समय की मांग है कि हम “वोकल फॉर लोकल” को एक जन आंदोलन बनाएं: प्रधानमंत्री
हमें स्थानीय उत्पादों को अपनाना चाहिए और अपने गांवों, शहरों और राष्ट्र के उद्यमियों को सशक्त बनाना चाहिए: प्रधानमंत्री

भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

गुजरात के लोकप्रिय मुख्यमंत्री श्रीमान भूपेंद्र भाई पटेल, उप मुख्यमंत्री हर्ष सांघवी जी, केंद्रीय मंत्री और संस्थापक ट्रस्टी मनसुख भाई मांडविया, सरदार धाम के अध्यक्ष गागजी भाई सुतारिया जी, दुष्यंत भाई पटेल, पंकज भाई पटेल, राज्य भाजपा अध्यक्ष भाई जगदीश विश्वकर्मा, मंच पर उपस्थित गजुरात सरकार के सभी मंत्री, सभी दाता श्री, ट्रस्टी श्री, अन्य महानुभाव और गुजरात के कोने-कोने से आए हुए मेरे प्यारे भाईयों और बहनों।

आज का ये दिन किसी पुण्य पर्व से कम नहीं है। यहां आने से पहले मैं सोमनाथ मंदिर में था। सोमनाथ मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के 75 वर्ष पूर्ण हुए हैं। सोमनाथ मंदिर की पुनर्स्थापना, ये सपना सरदार पटेल के संकल्प से ही पूरा हुआ था। इस अवसर पर, प्रभास पाटन में सोमनाथ अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है। और उसी दिन, यहाँ वडोदरा में सरदार धाम से जुड़े एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स का लोकार्पण और शिलान्यास भी हो रहा है। डॉ. दुष्यंत और दक्षा पटेल कॉम्पलेक्स का लोकार्पण, शिक्षण सहाय योजना का शुभारंभ, नई परियोजनाओं का भूमिपूजन, ये सभी कार्य, भविष्य में राष्ट्र निर्माण के प्रभावी प्रकल्प साबित होंगे। एक तरह से, ये संस्थान युवाओं के लिए भविष्य के करियर के launching pad का काम करेंगे। मैं आप सभी को, समाज के सभी लोगों को इस पुण्य कार्य के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूँ।

साथियों,

आज आपके बीच आया हूं, तो एक औऱ बात की खुशी है। बंगाल, असम और पुडुचेरी के नतीजों ने पूरे देश में ही उत्साह का माहौल बना दिया है। और उसके साथ-साथ आप सबने भी मिलकर एक इतिहास बनाया है, गुजरात निकाय और पंचायत चुनावों के परिणाम भी बहुत शानदार रहे, और इसकी भी चर्चा पूरे देश में हो रही है।

साथियों,

गुजरात के लोगों ने हमेशा राजनीतिक स्थिरता को महत्व दिया है। ये यहां के लोगों की राजनीतिक दूरदर्शिता है, वो जानते हैं कि राजनीतिक स्थिरता का माहात्म्य क्या होता है, और जहां राजनीतिक स्थिरता होती है, वहाँ अर्थव्यवस्था की गति और तेज हो जाती है। गुजरात ने ये बात बहुत पहले समझ ली थी। उसके परिणाम आज हमें गुजरात की ग्रोथ में भी दिख रहे हैं, और, एक के बाद एक चुनावी नतीजों में भी दिख रहे हैं।

साथियों,

आप सभी के बीच आना, आपके कार्यक्रमों का हिस्सा बनना, मेरे लिए हमेशा ही बहुत सुखद होता है और लगता है घर में आया हूं। क्योंकि आपके बीच आकर समाज की शक्ति का ऐहसास होता है। हम सभी जानते हैं कि जब भी कहीं पर वास्तविक बदलाव होता है, वो समाज की सामूहिक ताकत से ही होता है। खासकर, जिन-जिन समाजों ने शिक्षा को प्राथमिकता दी है, शिक्षा में समान भागीदारी को अपना लक्ष्य बनाया है, वो समाज हमेशा आगे बढ़े हैं, उन्होंने नई ऊंचाइयों को छुआ है।

इसीलिए भाइयों बहनों,

सरदारधाम के हर प्रयास में, जब भी मुझे मौका मिलता है, मैं हमेशा आपके साथ खड़े होने का प्रयास करता हूँ। अभी गगजी भाई बड़े विस्तार से बता रहे थे, साल 2021 में, मैं सरदारधाम अहमदाबाद के कार्यक्रम में आया था। तब गर्ल्स हॉस्टल का भूमिपूजन हुआ था। पिछले वर्ष उसका लोकार्पण भी हो गया। आज वहां हजारों बेटियां शिक्षा प्राप्त कर रही हैं, अपने सपनों को नई दिशा दे रही हैं। सूरत, राजकोट, भुज, मेहसाणा और दिल्ली, सरदारधाम के ऐसे कई संस्थान युवाओं का भविष्य गढ़ने में जुटे हैं। आज भी अमदाबाद के निकोल में 1 हजार बेटियों के लिए नए छात्रावास का भूमिपूजन हुआ है।

साथियों,

बदलाव व्यापक हो, और परिणाम स्थायी हों, इसके लिए समाज और सरकार को मिलकर काम करना आवश्यक होता है। इसीलिए, आज शिक्षा के क्षेत्र में जमीनी हकीकतों के आधार पर काम हो रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति इसका बहुत बड़ा उदाहरण है। आज युवाओं की राह से रोड़े हटाए जा रहे हैं। भाषा के आधार पर होने वाला भेदभाव खत्म हो रहा है। आज ज़ोर केवल किताबों और डिग्रीयों पर ही नहीं है। स्किल डवलपमेंट और इनोवेशन को पढ़ाई का हिस्सा बनाया गया है। रिसर्च में रुचि रखने वाले युवाओं को उसके लिए माहौल मिल रहा है। हमारे युवा डिग्री पूरी करके अनुभव न होने के कारण भटकें ना, इसके लिए अप्रेंटिसशिप के मौके उन्हें दिये जा रहे हैं। आप सोच सकते हैं, आने वाले समय में देश को इतना बड़ा skilled वर्कफोर्स मिलेगा। इसका सबसे बड़ा लाभ देश के manufacturing सेक्टर को होगा।

साथियों,

हमारे गुजरात के युवाओं में उद्यम की स्वाभाविक शक्ति होती है। आज Startup India मिशन इन युवाओं के सपने साकार कर रहा है। छोटे शहरों के युवा भी उद्यमी बन रहे हैं। छोटे शहरों से बड़े-बड़े स्टार्टअप्स सामने आ रहे हैं। स्टार्टअप्स में महिलाओं की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है। पहले जिन सेक्टर्स को रिस्की माना जाता था, वो अब युवाओं की पहली पसंद बन रहे हैं। पिछले 10-12 वर्षों में स्पोर्ट्स से लेकर स्पेस टेक्नालजी तक देश की कामयाबी इसका सबसे बड़ा सबूत है। और इसका बहुत बड़ा लाभ गुजरात के हमारे बेटे-बेटियों को भी हो रहा है।

साथियों,

समाज में प्रगति का सबसे बड़ा आधार होता है- उसकी आधी आबादी की भागीदारी! गुजरात ने इसे 2 दशक पहले ही समझ भी लिया था, और, इस दिशा में मजबूती से कदम भी उठाए थे।

साथियों,

आज गुजरात मॉडल की वही सफलता देश में दोहराई जा रही है। देश में करोड़ों महिलाओं के बैंक खाते खोले गए। शौचालय, नल से जल, गैस कनेक्शन की सुविधाएं दी गईं। आज मुद्रा योजना के जरिए महिलाएं आत्मनिर्भर भी बन रही हैं। परिवार में महिलाएं स्वस्थ रहें, इसके लिए आयुष्मान भारत और मातृ वंदना जैसी योजनाएं कवच बनकर काम कर रहीं हैं।

साथियों,

पहले कितने ही क्षेत्रों में बेटियों के लिए दरवाजे ही बंद होते थे। आज उन्हीं सेक्टर्स में बेटियां लीडरशिप रोल में सामने आ रही हैं। आज National Defence Academy में महिला कैडेट्स, training ले रही हैं। हमारी बेटियां फाइटर पायलट बन रही हैं। राजनीति में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास हो रहा है। नारीशक्ति वंदन संशोधन के जरिए हमने इसके लिए एक और प्रयास किया था। राजनीतिक कारणों से वो पास नहीं हो पाया, लेकिन मैं आपको आश्वस्त करूंगा, देशभर की महिलाओं को आश्वस्त करूंगा, हम इस दिशा में लगातार प्रयास करते रहेंगे।

साथियों,

महिलाओं के लिए सभी क्षेत्रों में संभावनाओं के द्वार खुलें, ये केवल सरकार ही नहीं, बल्कि समाज की भी ज़िम्मेदारी है। और मुझे खुशी है, सरदारधाम ये दायित्व पूरी निष्ठा से उठा रहा है। मैं इन प्रयासों के लिए विशेष रूप से आप सबका बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं, आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूँ।

साथियों,

गुजरात की एक बहुत बड़ी विशेषता रही है। यहां समाज हमेशा समय की दिशा को जल्दी पहचानता है। परिवर्तन को अवसर में बदलना, नई संभावनाओं को अपनाना, और भविष्य की तैयारी समय रहते शुरू करना, ये गुजरात की कार्य संस्कृति का हिस्सा रहा है। आज जब दुनिया future technologies की ओर बढ़ रही है, तब गुजरात भी नई गति के साथ आगे बढ़ रहा है। सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग, एयरोस्पेस, एडवांस्ड इंजीनियरिंग, ग्रीन एनर्जी, फाइनेंशियल सर्विसेज, हर क्षेत्र में गुजरात अपनी नई पहचान बना रहा है। साणंद में made-in-India सेमीकंडक्टर्स बन रहे हैं। केन्स सेमीकंडक्टर प्लांट में भी प्रोडक्शन शुरू हो चुका है। धोलेरा और सूरत में भी नए सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट आगे बढ़ रहे हैं।

साथियों,

हमारा भारत, हमारा गुजरात ग्लोबल सप्लाइ चेन का बड़ा केंद्र बने, हम इस दिशा में लगातार काम कर रहे हैं। आने वाले समय में वडोदरा की भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका होगी। आज यहां बने metro coaches दूसरे देशों तक एक्सपोर्ट हो रहे हैं। सावली में आधुनिक रेल सिस्टम का, कोचेस का निर्माण हो रहा है। Engineering, heavy machinery, Chemicals और Pharma, Power equipment और MSMEs, ऐसे कई सेक्टर्स में आज वडोदरा manufacturing का मजबूत केंद्र बन चुका है। यहां की गतिशक्ति यूनिवर्सिटी ट्रांसपोर्ट और logistics की फील्ड में professionals तैयार कर रही है। अब एयरोस्पेस सेक्टर में भी वडोदरा नई पहचान बनाने जा रहा है। यहां एयरक्राफ्ट manufacturing project तेजी से आगे बढ़ रहा है।

साथियों,

गुजरात और देश में विकास के प्रयासों के बीच, एक और विषय संवेदनशील होता जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में दुनिया लगातार अस्थिर परिस्थितियों से गुजर रही है। पहले कोरोना का संकट, फिर वैश्विक आर्थिक चुनौतियां, और अब पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव, इन सारी परिस्थितियों का असर लगातार पूरी दुनिया पर पड़ रहा है, और भारत भी इससे अछूता नहीं है। अगर कोरोना महामारी इस सदी का सबसे बड़ा संकट थी, तो पश्चिम एशिया में युद्ध से बनी परिस्थितियां, इस दशक के बड़े संकटों में से एक है। जब हमने मिलकर कोरोना का मुकाबला कर लिया तो इस संकट से भी अवश्य पार पा जाएंगे।

सरकार भी लगातार ये प्रयास कर रही है, कि देश के लोगों, देश के सामान्य नागरिक पर इन सारी विपरीत परिस्थितियों का कम से कम असर हो। लेकिन ऐसे समय में, देश को जनभागीदारी की शक्ति की बहुत बड़ी आवश्यकता है। हमें भारत के नागरिक के तौर पर अपने कर्तव्य को प्राथमिकता देनी होगी। इससे पहले के दशकों में भी जब-जब देश युद्ध या किसी और अन्य बड़े संकट से गुजरा है, सरकार की अपील और उस अपील पर हर नागरिक ने ऐसे ही अपना दायित्व निभाया है। आज भी जरूरत है कि, हम सब मिलकर अपना दायित्व निभाएं, देश के संसाधनों पर पड़ने वाले बोझ को कम करें। आप भी जानते हैं कि भारत कितने ही उत्पादों को मंगाने के लिए लाखों करोड़ रुपए की विदेशी मुद्रा खर्च करता है। इसी समय विदेश से आने वाले उत्पादों की कीमतें भी आसमान छू रही हैं और सप्लाई चेन भी पूरी तरह तहस नहस हो चुकी है। और इसलिए देश पर ये दोहरा संकट है। जैसे बूंद-बूंद से घड़ा भरता है, वैसे ही हमें हर छोटे-बड़े प्रयास से ऐसे उत्पादों का उपयोग कम करना है जो विदेश से आते हैं, और ऐसे व्यक्तिगत कामों से भी बचना है जिसमें विदेशी मुद्रा खर्च होती हो।

साथियों,

भारत के इंपोर्ट का बहुत बड़ा हिस्सा, क्रूड ऑयल है। और दुर्भाग्य से, जिस क्षेत्र से दुनिया के बड़े हिस्से को तेल मिलता है, आज वही क्षेत्र संघर्ष और युद्ध की स्थिति में उलझा हुआ है। और इसलिए, जब तक हालात सामान्य नहीं होते, हम सबको मिलकर छोटे-छोटे संकल्प लेने होंगे। मैंने कल कर्नाटका और तेलंगाना में भी इस बारे में चर्चा की है, मैं आज गुजरात में भी अपने आग्रहों पर फिर जोर दे रहा हूं। और आप पर तो मेरा ज्यादा हक है, इसलिए जरा हक से कहने वाला हूं, मेरी देश के हर नागरिक से अपील है, जहां संभव हो, पेट्रोल-डीजल का उपयोग कम करें। मेट्रो का उपयोग करें, इलेक्ट्रिक बस और पब्लिक ट्रांसपोर्ट का अधिक इस्तेमाल करें। कार-पूलिंग को बढ़ावा दें। जिनके पास कार है, वे एक गाड़ी में ज्यादा लोगों को साथ लेकर चलें। जिनके पास ईवी है, वे भी दूसरों की मदद के लिए आगे आएं।

साथियों,

डिजिटल टेक्नोलॉजी ने अब इतना कुछ आसान बना दिया है। टेक्नोलॉजी की मदद भी हमारे लिए बहुत फायदेमंद होगी। ये जरूरी है कि सरकारी और प्राइवेट, दोनों ही दफतरों में, वर्चुअल मीटिंग्स और वर्क फ्रॉम होम को प्राथमिकता दी जाए। मैं कुछ स्कूलों से भी आग्रह करूंगा, कि कुछ समय के लिए ऑनलाइन क्लासेज की व्यवस्था पर काम करें।

साथियों,

सिर्फ ईंधन ही नहीं, खाने के तेल पर भी देश की बड़ी विदेशी मुद्रा खर्च होती है। अगर हम थोड़ा संयम बरतें, तेल की खपत कम करें, खाने के तेल की, तो इससे देश और हमारी सेहत, दोनों को लाभ होगा। और सूरत वालों को मैं खास कहता हूं। इसी तरह मैं आज समाज के सभी भाई बहनों से, मैं आपके परिवार का सदस्य हूं, इसलिए आग्रह से कहता हूं, और इसमें तो आगे आकर आपको मेरी मदद करनी पड़ेगी। सोने के आयात पर भी देश का बहुत बड़ा पैसा विदेश जाता है। मैं आप सबसे, देशवासियों से आग्रह करूंगा, कि जब तक हालात सामान्य न हों, हम सोने की खरीद को टालें, गोल्ड की जरूरत नहीं है।

साथियों,

आज समय की मांग है, कि हम “वोकल फॉर लोकल” को एक जन आंदोलन बनाएं। विदेशी सामान की जगह, लोकल उत्पादों को अपनाएं। अपने गांव, अपने शहर, अपने देश के उद्यमियों को हम ताकत दें। यहां लोग बैठे हैं, बहुत अच्छी चीजें बनाते हैं, श्रेष्ठ चीजों का उत्पादन करते हैं।

साथियों,

हमारे में से ज्यादातर, खेती के कारोबार की दुनिया से पैदा होकर के यहां आए हैं। खेती में, स्वदेशी खाद को बढ़ावा मिले, नैचुरल फार्मिंग को बढ़ावा मिले। डीजल पंप की जगह सोलर पंप्स का उपयोग बढ़े, और हम तो किसान के बेठे हैं, किसान की बेटियां हैं, हमें अपना खेत सबसे पहले बचाना है, हमें अपनी धरती मां को बचाना है, हमें केमिकल फर्टिलाइजरों से अपनी धरती मां को मारना नहीं चाहिए। हमारे खेत को बचाना है, हमारी धरती मां को बचाना है। और इसलिए मैं आप सबसे आग्रह करूंगा, कि आप अपने गांव में हर किसान भाई-बहन को केमिकल फर्टिलाइजर से मुक्ति का रास्ता बताइये, नैचुरल फार्मिंग की तरफ ले जाइये।

साथियों,

एक और भी अहम विषय, और वो भी आप में से बहुतों को लागू होता है, बुरा मत मानना। फैशन हो गई है, जैसे ही वेकेशन हुआ, बच्चों के हाथ में विदेश की टिकट पकड़ा देते हैं। विदेश में जाकर वेकेशन करते है। गर्मी की छुट्टियां आ रही हैं, आजकल विदेश घूमने, वहां पर डेस्टिनेशन वेडिंग, ये मैं यहां से बहुत सारे लोग हैं, मुझे निमंत्रण नहीं भेजते हैं, पहले भेजते थे, क्योंकि विदेश में ही शादी करते थे, अब बंद कर रहे हैं। ये विदेश में वेडिंग इनका फैशन खूब बढ़ रहा है। लेकिन इस पर भी बहुत विदेशी मुद्रा खर्च होती है।

साथियों,

आप सोचिये, क्या भारत में ऐसी जगह नहीं है? जो हम अपनी वेकेशन वहां मनाए, हमारे बच्चों को हमारा इतिहास पढ़ाएं। हम अपने स्थानों पर गर्व करें। और जरूरी है कि भारत में ही अपनी वेकेशन मनाएं, और वेडिंग के लिए भी, मैं नहीं मानता हूं कि भारत से अधिक कोई अच्छी पवित्र जगह हो सकती है। जब यहां वेडिंग करते हैं ना, तो हमारे पूर्वजों की मिट्टी भी हमें आशीर्वाद देती है। और वेडिेंग के लिए भी, भारत के ही अनेक स्थान हैं, उसको हम चुनें। हमारे गुजरात में तो वैसे भी एक से बढ़कर एक स्थान हैं। और मैं तो आप सब पाटीदार भाईयों को तो कहूंगा, आपको तो अब शादी स्टैच्यू ऑफ यूनिटी वहीं पर जाकर करनी चाहिए। आपकी हर शादी में सरदार साहब खुद आाशीर्वाद देने के लिए मौजूद रहेंगे। और वहीं पर आपने जैसे हरिद्वार, ऋषिकेश में आप शांति के लिए जगह बना रहे हैं ना, वैसे ही आप स्टैच्यू ऑफ यूनिटी में शादी के लिए जगह बना दीजिए। मैं पंकज भाई को कहूंगा, उसके लिए भी कुछ करें। जैसे हाल के वर्षो में सरदार साहब की स्टैच्यू ऑफ यूनिटी, हमारा एकता नगर पर्यटन का इतना बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। क्या हम ये तय कर सकते हैं, हम ज्यादा से ज्यादा लोगों को स्टेचू ऑफ पर यूनिटी लेकर के जाएं। विदेशें में हमारे बहुत लोग रहते हैं, मैं उनको कहता हूं, कि आपका दायित्व है कम से कम विदेशी परिवारों को, भारत देखने के लिए लेकर के आइये आप। देश विदेश में हमारे संपर्क का कोई भी परिवार, जो स्टैच्यू ऑफ यूनिटी नहीं गया है ना, उसको वहां ले जाने के लिए प्रेरित करें। हम उसे कम से कम एक ट्रिप के लिए मोटिवेट करें। डेस्टिनेशन वेडिंग्स के लिए भी एकता नगर एक बहुत शानदार विकल्प हो सकता है। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी में इतनी शानदार व्यवस्थाएं हैं, और गर्व है, दुनिया का सबसे ऊंचा स्टैच्यू, वो भी सरदार वल्लभ भाई पटेल का। इस देश का कोई नागरिक ऐसा नहीं हो सकता है, कि जिसको इसके लिए गर्व न हो दोस्तों। और मैं आपसे आग्रह करता हूं, आप सभी इसका फायदा उठाइये, इसका लाभ उठाइए।

साथियों,

ये मैंने छोटे-छोटे प्रयास आपको, कोई मुश्किल काम नहीं बताए आपको। लेकिन आप मानकर चलिए, ये प्रयास छोटे भले लग सकते हों, लेकिन छोटे प्रयास भी, जब 140 करोड़ लोग, एक साथ संकल्प लेते हैं, 140 करोड़ लोग एक कदम आगे बढ़ते हैं इस दिशा में, 140 करोड़ कदम देश आगे बढ़ता है। तो वही छोटे प्रयास, राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत बन जाते हैं। और इसलिए फिर एक बार, हमें एकजुट होना होगा, ताकि ये संकट, किसी भी तरह हमारी प्रगति को, हमारे विकास को प्रभावित ना करे। मुझे विश्वास है, हम सब साथ मिलकर इन संकल्पों को पूरा करेंगे, और देश को मजबूती देंगे।

और दूसरी बात मुझे गजजी भाई से करनी है, आपने मुझे सरदार गौरव रत्न से सन्मानित किया। जिस पुरस्कार के साथ सरदार साहब का नाम जुड़ा हो न, तब जिम्मेदारी बहुत बढ़ जाती है। यानी एक प्रकार से गगजी भाई ने बहुत चतुराई से मुझे बाँध लिया है, कि आगे पीछे मत होना। और शायद मेरे नसीब में लिखा हुआ है, कि सरदार साहब के जो भी सपने थे, उन्होंने जो भी काम शुरु किए थे, वे सब पूरे करने का काम मेरे ही नसीब में आया है। और आज जब आपने यह सम्मान, यह पुरस्कार एवॉर्ड दिया है तो, मैं आपको विश्वास दिलाता हूं, कि सरदार साहब के सपने पूरे करने में आप सभी के आशीर्वाद से मुझे जो भी शक्ति मिली है, संस्कार मिले हैं, गुजरात की मिट्टी ने मुझे जो सिखाया है, उसके भरोसे पर मैं कहता हूं, कि वो सपने पूरे करने के लिए परिश्रम में मैं पीछे नहीं हटूंगा। और मेरे स्वभाव को गुजरात भलीभांति जानता है, कि पीछे हटना मुझे आता नहीं है। लेकिन आपने यह सम्मान किया है, यह मेरे लिए बहुत ही बड़ी बात है। एक बार मैंने एक किस्सा पढा था, कि जनरल करिअप्पा, उनके गाँव में उनके सम्मान का कार्यक्रम होने वाला था। वह अत्यंत आनंदित थे, तो लोगो ने पूछा तो उन्होंने कहाँ, कि मैं दुनियाभर में जाता हूं, पूरी दुनिया के सारे सैन्य के रीत-रिवाज के साथ मुझे सब सैल्यूट करते हैं, बहुत मान-सम्मान मिलता है। दुनिया में जो मिलता है वो मिले, पर जब घर में मिलता है न, तब उसका आनंद अलग होता है।

भारत के प्रधानमंत्री का दुनिया में सम्मान होता है, कारण भारत सामर्थ्यवान हो रहा है, और आज जब घर में, घर के बेटे को, घर के लोग जब आशीर्वाद देते हैं, तो काम करने की शक्ति बहुत बढ़ जाती है। मेरे लिए, मेरे परिवारजनो ने, आप सभी ने इस सरदार रत्न के रूप में जो आशीर्वाद दिये हैं, उसके बदले मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूं। और इस ऋण का स्वीकार करता हूं। फिर एक बार आप सभी को जो संकल्प लेकर आप चले हैं, जो सपने लेकर आप चले हैं, उसके लिए ईश्वर आपको बहुत शक्ति दे। सरदार साहब के आशीर्वाद निरंतर आपके उपर बने रहें, और पंकज भाई जैसे साथी आपको मिलते रहें। यहाँ हम तीन ऐसे लोग बैठे हैं कि जिनका विशेष नाता है, एक पंकज भाई, दूसरे नरहरि अमीन। हम सभी नवनिर्माण की औलादें है, तो मुझे खुशी हुई, कि आज पंकज भाई ने भी बडी जिम्मेदारी ली है। आप सभी का बहुत बहुत आभार।जय सरदार, जय सरदार, धन्यवाद। धन्यवाद।