प्रधानमंत्री मोदी ने फरीदाबाद मेट्रो लाइन का उद्घाटन किया, मेट्रो की सवारी की एवं एक जनसभा को संबोधित किया
एनडीए सरकार ने सशस्त्र बलों के लिए ‘वन रैंक, वन पेंशन’ लागू करने के वादे को पूरा किया
केंद्र और राज्यों को एकसाथ मिलकर काम करना चाहिए; विकास के लिए बुनियादी ढांचा आवश्यक: प्रधानमंत्री
भारत का विकास राजनीति के माध्यम से नहीं बल्कि राष्ट्रवादी नीतियों के माध्यम से होगा: प्रधानमंत्री मोदी
देश की प्रगति के लिए सरकार द्वारा किये गए हर फैसले का राजनीतिकरण करना एक फैशन-सा बन गया है: प्रधानमंत्री
लोगों को ओआरओपी और वीआरएस पर सरकार के निर्णयों के बारे में गुमराह किया जा रहा है: प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री मोदी ने 2022 तक सभी के लिए आवास उपलब्ध कराने के सरकार के संकल्प को दोहराया

विशाल संख्या में पधारे भाईयो और बहनों,

अभी हमारे मुख्यमंत्री बता रहे थे कि मोदी जी इतनी बार हरियाणा में आए और 11 तारीख को भी आने वाले हैं, 18 तारीख को भी आने वाले हैं। आप सबको मालूम है हरियाणा मेरा दूसरा घर है। गुजरात छोड़ने के बाद मैंने वर्षों तक हरियाणा में ही अपना जीवन बिताया। यहां के हर गांव, गली, मौहल्ले से परिचित हूं, तो मुझे हरियाणा आने का मन करेगा कि नहीं करेगा? आपके प्यार को मैं कभी भुला सकता हूं क्या? तो आपका प्यार है जो मुझे बार-बार खींचकर ले आता है और मैंने हरियाणा को कहा था, पहले दिन से कह रहा हूं कि आपने मुझे जो प्यार दिया है, मैं विकास करके ब्याज समेत लौटाऊंगा, ये मैं कह रहा हूं।

भाईयों-बहनों चुनाव आते हैं, जाते हैं। राजनीति अपनी जगह पर चलती रहती है। वो लोकतंत्र का स्वाभाविक हिस्सा है लेकिन देश सिर्फ राजनीति से नहीं चलता है, देश राष्ट्रनीति से चलता है, देश विवादों से नहीं बढ़ता है, देश संवाद से बढ़ता है। हमारी समस्याओं का समाधान अगर उसका कोई एक उपाय है, अगर उसकी कोई एक जड़ी-बूटी है, तो उस जड़ी-बूटी का नाम विकास है, विकास। विकास होगा तो नौजवान को रोजगार मिलेगा, विकास होगा तो किसान को अपनी फसल का पूरा दाम मिलेगा, विकास होगा तो गरीब से गरीब बच्चे को अच्छी से अच्छी शिक्षा मिलेगी, विकास होगा तो गांव के गरीब हो, वयोवृद्ध-तपोवृद्ध लोग हो उनको आरोग्य की सुविधा उपलब्ध होगी, गरीब को रहने के लिए घर मिलेगा और इसलिए मेरे भाईयों-बहनों हम एक ही बिंदू पर काम कर रहे हैं। जब से आपने हमें जिम्मेवारी दी है, हमारा एक ही मंत्र है, एक ही मकसद है, एक ही मार्ग है, एक ही मंजिल है और उसका नाम है विकास।

आप मुझे बताइए, आपक विकास चाहिए कि नहीं चाहिए? अच्छे रास्ते चाहिए कि नहीं चाहिए? अच्छे स्कूल चाहिए कि नहीं चाहिए? अच्छे अस्पताल चाहिए कि नहीं चाहिए? इस देश को यही चाहिए और इसलिए ये सरकार इन्हीं बिंदुओं पर अपनी ताकत लगा रही है। अच्छा होता ये काम पिछले 60 साल में पूरे हो गये होते। देश ऊंचाइयों को पार कर लिया होता। लेकिन बहुत सारे काम अधूरे हैं और अधूरे हैं इसलिये पुरानी सरकारों को आलोचना करके उनकी टीपा टीका टिप्पणी करके मैं रुक जाऊं ये उचित नहीं है। इस सरकार का जिम्मेदारी है कि हम समस्याओं के समाधान खोजें विकास के नये - नये उपाये खोजें और देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाएं।

पिछले दिनों आपने देखा होगा पूरी दुनिया में एक आर्थिक संकट पैदा हुआ मजबूत से मजबूत आर्थिक नींव पर खड़े हुए देश हिल गए। और तुफान इतना भयंकर था कि उसके सामने टिकना बड़ा मुश्किल था, इतनी बड़ी आंधी तेज आई थी। लेकिन सारी दुनिया के आर्थिक पंडितों का कहना है कि इतनी भंयकर आर्थिक मंदी के बीच, इतने भयंकर आर्थिक तुफानों के बीच कोई एक देश बराबर अगर खड़ा रहा, टिका रहा, उस देश का नाम हिंदुस्तान है।

मेरे भाईयों-बहनों और यही बताता है कि पिछले 15 महीनों में, सरकार ने जो रास्ता अपनाया है, जिन नीतियों को लागू किया है, आज उसका परिणाम नजर आ रहा है कि इतनी बड़ी आंधी के बावजूद भी हिंदुस्तान आर्थिक धरातल पर टिका रहा है। लेकिन भाईयों-बहनों सिर्फ टिके रहे हैं, इससे संतोष मानना, ये हमें मंजूर नहीं है। इतनी बड़ी आंधी में तूफान में टिक गये ये अच्छी बात है, लेकिन हमें जहां टिके हैं, वहां रुकना नहीं है हमें आगे बढ़ना है। आगे बढ़ने का रास्ता सवा सौ करोड़ देश वासियों को साथ और सहयोग है, आगे बढ़ने का रास्ता सभी राज्य सरकारें और केंद्र सरकार को कंधे से कंधा मिलाकर चलना है। आगे बढ़ने का रास्ता लोकतांत्रिक मार्ग है और अगर हमें विकास करना है, तो हमें Infrastructure पर सबसे पहले प्राथमिकता देनी पड़ेगी। रेल हो, रोड हो, रेल हो, सामान्य नागरिक की सुविधा की व्यवस्थाएं हो, ये जब तब तक हम निर्माण नहीं करेंगे, विकास के फल नीचे तक नहीं पहुंचेंगे।..और इसलिये ये सरकार का मकसद है कि 2022 जब हिन्दुस्तान आजादी के 75 साल मनाएगा, वो आजादी का 75 साल कैसे हों, क्या हम सपना लेकर के नहीं चल सकते कि आजादी के 75 साल जब मनाएंगे, आजादी के दीवानों को जब अंजली देंगे, आजादी के लिये शहीद हुए महापुरुषों का पुण्य स्मरण करेंगे, उस समय कम से कम एक काम तो पूरा कर लें, इस देश में कोई गरीब ऐसा न हो जिसको अपना घर न हो। हर गरीब को भी अपना घर मिले, काम बहुत बड़ा है, दुनिया के कुछ देशों की आबादी से ज्यादा भी मकान बनाने पड़ेंगे, लेकिन भाइयों बहनों कठिन काम भी हमें हाथ में लेने हैं और उसको पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

हमारे वेंकैया जी नायडू शहरी विकास मंत्री के नाते एक ऐसी योजना उन्होंने देश के सामने रखी है, जिसके कारण शहरी गरीबों के लिये मकानों की सुविधा उपलब्ध हो, नये मकान बनें, गरीब के लिये बने, सस्ते बने, अच्छे बने और घर भी वो हो, जिसके नल में जल हो, बिजली हो, नजदीक में स्कूल हो, एक परिवार सुख शांति से रह सके ऐसा घर हो। हमारे चौधरी वीरेन्द्र सिंह जी लगे हैं, एक ग्रामीण विकास मंत्रालय को लेकर के गांव में जो गरीब है, उन गरीबों को रहने के लिये अपना घर मिले, योजनाओं को आगे बढ़ा रहे हैं। एक तरफ शहरी विकास एक तरफ ग्रामीण विकास, गरीब शहर का हो या गरीब गांव का हो हर किसी को रहने के लिये घर मिले इसके लिये बहुत बड़ा काम हमने सर पर उठाया है।

भाइयो बहनों आज यहां मेट्रो रेल का लोकापर्ण हो रहा है। अब हरियाणा भी गर्व के साथ दुनिया में कहेगा कि हमारे पास मेट्रो रेलवे है। हरियाणा ने दिल्ली के टूरिस्टों को आकर्षित करने की सबसे बड़ी ताकत अगर किसी में है, तो हरियाणा में है। weekend टूरिस्टों को आकर्षित करने की ताकत है, तो हरियाणा में है औऱ मेट्रो की सुविधा हो जाए तो बहुत बड़ी मात्रा में दिल्ली से लोग weekend मनाने के लिए हरियाणा की ओर चले जाएंगे और हरियाणा के नौजवानों को रोजी-रोटी का प्रबंध हो जाएगा। ये मेट्रो सिर्फ आने-जाने का कारोबार है, ऐसा नहीं है, अब मेट्रो सिर्फ, पहले बस में जाना पड़ता था, कार लेकर जाना पड़ता था, ट्रैफिक जाम हो जाता था, अब जल्दी पहुंचा जाता है, इतना ही नहीं है इनसे पूरी economy drive होती है, पूरे आर्थिक जीवन को एक गति मिलती है और इसलिए ये रैली का नाम भी गति-प्रगति रैली रखा गया है। गति भी हो, प्रगति भी हो और तेज गति से प्रगति हो, उन सपनों को पूरा करने का प्रयास हो रहा है। करीब-करीब ढाई हजार करोड़ रुपया की लागत से, ये प्रोजेक्ट यहां पूरा हुआ है।

लेकिन मैं आज मेरे हरियाणा के भाईयों-बहनों को एक और नजराना भी देना चाहता हूं, ये मेट्रो यहीं से लौट नहीं जाएगी, हम बल्लभगढ़ तक जाएंगे। आने वाले दिनों में बल्लभगढ़ के लिए एक काम शुरू हो जाएगा। 600-700 करोड़ रुपए की और लागत लगेगी लेकिन हरियाणा के एक महत्वपूर्ण हिस्सों को जोड़ने का काम होगा।

फरीदाबाद मेरे लिए नया नहीं है। मैं कभी यहां स्कूटर पर आया करता था। मैंने फरीदाबाद को पनपते हुए देखा है। एशिया में नौंवे नंबर पर सबसे बड़ा industrial estate वाला ये फरीदाबाद शहर है। अब फरीदाबाद एक लघु हिंदुस्तान बन गया है। हिंदुस्तान का कोई राज्य ऐसा नहीं होगा, जिसके लोग फरीदाबाद में रहते न हो, एक प्रकार का लघु भारत बन गया है। इस फरीदाबाद का विकास भी, वैसा ही होना चाहिए। ये मेट्रो ट्रेन के आरंभ से वो एक नया विकास का मार्ग भी खुल जाता है और मैं श्रीमान वेंकैया जी को एक बात के लिए बधाई देना चाहता हूं, उनका विभाग इस काम को देखता है, सारी दुनिया को एक संदेश दे रहे हैं कि ये मेट्रो का जो लाईन है environment friendly है। यहां के स्टेशनों पर solar panel लगे हुए हैं और करीब-करीब दो मेगावॉट बिजली सूर्य शक्ति से पैदा करते हैं और सारी व्यवस्था में उसी बिजली का उपयोग किया जाता है। मेट्रो का एक ट्रैक solar panel से भरों हुआ हो, ये दुनिया के लिए भी एक आकर्षण का कारण है। आने वाले दिनों में Green Railway Station कैसे बने, Environment Friendly Railway Station कैसे बने उस दिशा में भी मैट्रो की तरफ से एक सफलतापूर्वक अभियान चलाया जा रहा है और आज जब पूरी विश्व Global Warming के लिये चिंतित है, Climate Change के कारण चिंतित है, हमारी एक छोटी सी इकाई मैट्रो वे भी दुनिया की मदद करने के लिये Green movement में अपना सहयोग दे रही है और इसलिये वेंकैया जी को और उनकी पूरी टीम को मैं हृदय से बहुत बहुत अभिनन्दन करता हूं और उनके साधुवाद करता हूं।

भाइयो बहनों ये हरियाणा की धरती ऐसी है, कल हमनें श्री कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया और जब श्री कृष्ण को याद करते हैं तो सिर्फ द्वारका की नगरी याद नहीं आती है, कुरुक्षेत्र भी तुरंत याद आता है। पूरा हरियाणा एक प्रकार से इन महापुरुषों की छाया में पला बड़ा हुआ है। सांस्कृतिक विरासत का धनी है। यहीं से पास में गांव सिही सूरदास जी की जन्म भूमि है, यही तो हमारी विशेषता यही हमारी ताकत है और उन्हीं से महापुरुषों के आशिर्वाद लेकर के हम हरियाणा को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिये प्रयास कर रहे हैं।

मैं हरियाणा सरकार को अभिनन्दन करता हूं। श्रीमान मनोहर लाल जी का विशेष रूप से और उनकी पूरी टीम का अभिनन्दन करता हूं। कि जिस हरियाणा को बेटियों के भ्रूण हत्या के लिये पहचाना जाता था वो हरियाणा आज बेटी बचाने के लिये पहचाने जाने लगा है। ये छोटा सा निर्णय परिवर्तन नहीं है, ये छोटा सा movement नहीं है, कितना कठिन काम होता है मुझे अंदाजा है लेकिन हरियाणा के राज्य सरकार ने यहां के राजनीतिक नेताओं ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है और बेटी बचाने का जो अभियान चलाया है और पूरे हिन्दुस्तान का बेटी बचाने का अभियान का प्रारंभ भी इसी हरियाणा की धरती से हुआ है।

मैं जानता हूं, मनोहर लाल जी हमारे बड़े परिश्रमी नेता हैं, मेहनत करने में शायद कोई उनका मुकाबला नहीं कर सकता है, मैंने सालों तक उनके साथ काम किया है और वे हरियाणा को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में सफल होंगे, हरियाणा की आशाओं-आकाक्षाओं को वे पूरा करेंगे, ये मुझे विश्वास है।

आने वाले दिनों में हमारे देश में, हम-हमारे शहरों का रंग-रूप बदलना चाहते हैं, चेहरा बदलना चाहते हैं, उसके फेफड़ों को नई ताकत देना चाहते हैं। आज हमारे शहरों के फेफड़े भी बीमार हो गए हैं, greenery नहीं बची है, अपनी मर्जी से वो बढ़ता गया है। वेंकैया जी के नेतृत्व में, जो smart city का अभियान चला है, उस smart city में फरीदाबाद का भी नाम है। लेकिन कुछ लोगों को लगता होगा कि अब सरकार ने smart city कह दिया तो smart city बन गया। भाईयों-बहनों आपको पता होना चाहिए और मैं चाहता हूं कि इस बात की घर-घर चर्चा होनी चाहिए, हर बार चर्चा होनी चाहिए कि ये अभी तो फरीदाबाद की entry हुई है competition के अंदर पहली मैच उसने जीत लिया है, पहली मैच जीतकर के उसने entry पा ली है, लेकिन आगे बढ़ने के लिये यहां के सभी नागरिकों ने तय करना पड़ेगा की हमें फरीदाबाद स्मार्ट सिटी बनाना है। कानून में ये परिवर्तन करना पड़ेगा, तो करना है। हमें ये discipline लानी है तो लानी है। हमें स्वच्छता रखनी है तो रखनी है। ये जब तक हम नहीं करेंगे, ये स्मार्ट सिटी की स्पर्धा आप जीत नहीं पाओगे। उसके कुछ norms हैं कुछ parameter हैं, मैं चाहता हूं एक जागृति का माहौल बने पूरे देश में ये 100 शहर पूरे हिन्दुस्तान में जो पहली मैच जीत कर के आए हैं। क्योंकि स्पर्धा से तय हुआ है, पहली स्पर्धा में वो जीत गए हैं, लेकिन आगे जैसे-जैसे जाओगे स्पर्धा कठिन होती जाने वाली है। लेकिन मुझे विश्वास है कि हरियाणा के दोनों शहर ये स्पर्धा जीतेंगे और देश में स्मार्ट सिटी बनाने का यश हरियाणा प्राप्त करेगा।

मैं आपको निमंत्रित करता हूं। मैं आपको challenge भी करता हूं इस challenge को स्वीकार कीजिये। सरकार ने जितने parameter तय किये हैं उन parameter को गले लगाइये। पूरे फरीदाबाद का एक – एक घर एक-एक नागरिक स्मार्ट सिटी बनाने का संकल्प लेना चाहिये तब जाकर के स्मार्ट सिटी बना पाएंगे और इसलिये मैं आपको आह्वान कर रहा हूं।

भाइयो बहनों ये हरियाणा की धरती वीरों की धरती है। ये हरियाणा की धरती जवानों की धरती है। ये हरियाणा की धरती देश के लिये मर मिटने वालों की धरती है। प्रधानमंत्री बनने से पहले मेरा पहला कार्यक्रम जब मेरी पार्टी ने मुझे प्रधानमंत्री के उम्मीदवार के लिये घोषित किया तो 13 सितम्बर को रिवाड़ी में मैं आया था। और पहला मेरा कार्यक्रम था पूर्व सैनिकों का बहुत बड़ा जमावड़ा में मैं आया था और उस समय में मैंने वन रैंक वन पैंशन की बात कही थी, याद है कही थी OROP की बात कही थी याद है। भाइयो बहनों ये मामला 42 साल से लटका हुआ था 42 साल से चार दशक इतनी सरकारें आ कर गई लेकिन इस समस्या का समाधान किसी को हाथ नहीं लगता था। lip sympathy सब दूर सब सरकारों ने व्यक्त की थी। हर कोई कहता था हां देश के लिये जवान मरते हैं सरकार का दायित्व है हर कोई कहते थे। लेकिन करने के लिये हर किसी को कठिनाई महसूस होती थी और आज मुझे भी महसूस हो रही है। ये सरल काम नहीं है। मेरे देश के जवानों आपने देश के लिये अपनी जिन्दगी खपाई है, अपका मान सम्मान इससे बड़ा हमारी जिन्दगी में कुछ नहीं हो सकता। लेकिन ये मामला अति कठिन है। उसका प्रभाव पता नहीं कहां-कहां पड़ सकता है। आने वाले दिनों में क्या-क्या संकट आ सकते हैं लेकिन मेरे देश के जवानों, हमने वादा किया था और हम वादा निभा रहे हैं। आपको मालूम है, पहले वाली सरकार के लिए OROP क्या था? 500 करोड़ रुपए का कार्यक्रम था, 500 करोड़ रुपए का, तो हमें भी लगा कि अभी 500 है तो 700 हो जाएगा, 800 हो जाएगा, कर लो, क्या है? लेकिन जब हम गिनती करने के लिए बैठे तो हर रोज नई चीज आने लगी, हर रोज नई चीज आने लगी। Koshyari Committee, जिसका हमारे जवान बार-बार उल्लेख करते हैं, उसको हमने देखा, उसने क्या कहा है, उसने तो 300 करोड़ से भी कम कहा है। उसने कहा है कि 300 करोड़ रुपए से कम रुपया भी लग जाएगा, तो हो जाएगा। सारी सरकार भ्रमित, बैठे हुए अफसर भ्रमित, सेना के जवानों की बातें भी ऐसी, हर कोई उलझा हुआ था, पिछले कई दिनों से मैं लगातार एक-एक तार को खोलता गया, चीजों को ठीक करता रहा और हिसाब लगाता गया भाईयों-बहनों ये OROP 500 करोड़ में होने वाला खेल नहीं है। ये OROP 300 करोड़ रुपए में पूरा होने वाला काम नहीं है, जब हिसाब लगाया तो हिसाब बनता है 8 से 10 हजार करोड़ रुपए का 8 से 10 हजार करोड़ रुपये का।

मेरी सरकार बनी 26 मई, 2014 को और मेरा दायित्व बनता है 26 मई 2014 से। ये जो प्रचार करने वाले लोग हैं वो देश की जनता को और खासकर के हमारे जवानों को भ्रमित करने का पाप करते रहे हैं। 26 मई को इस सरकार का जन्म हुआ उसी दिन से हमनें काम चालू किया और कल हमनें घोषणा की तो भी सरकार बनने के तुरंत बाद एक जुलाई गिनने के लिये उचित रहती है, तो हमनें एक जुलाई से लागू करने का निर्णय कर दिया भाइयो बहनों।

मैं जानता हूं देश के फौज में 80-90% लोग कौन होते हैं हमारी फौज में 80-90% वो जवान होते हैं, जो छोटे-छोटे पद पर होते हैं, कंधे पर बंदूक उठाकर के जो दुश्मनों से मुकाबला करते हैं। सबसे पहले जान की बाजी वो लगा देते हैं, लेकिन सेना की आयु कम हो इसलिये उनको 15 साल के बाद नौकरी छोड़नी पड़ती है, 17 साल के बाद छोड़नी पड़ती है, 20 साल के बाद छोड़नी पड़ती है, इसके लिए अलग-अलग शब्द प्रयोग सेना वाले करते होंगे। कुछ लोगों को लगता है कि जो 15 साल 17 साल नौकरी छोड़कर गए उनको OROP नहीं मिलेगा। मेरे जवान भाइयो बहनों चाहे वो हवल्दार हो, सिपाही हो नायक हो अरे आप ही तो देश की रक्षा करते हो अगर ये OROP सबसे पहले मिलेगा, तो आप को मिलेगा। ये VRS के नाम से आपको भ्रमित करने का जो प्रयास कर रहे हैं वो गलत कर रहे हैं ये सरकार जिन लोगों ने युद्ध में सेना में काम करते करते अपना शरीर गंवाया है, कोई अंग गंवाया है ऐसे भी सेना के जवान जिनको मजबूरन सेना छोड़नी पड़ती है। शरीर की देश के लिये शरीर का एक-एक अंग बली चढ़ा दिया है उसको सेना छोड़नी पड़ती है। क्या OROP से वंचित हो जाएंगे? सेना को प्यार करने वाला प्रधानमंत्री ऐसा कभी सोच भी नहीं सकता है। मेरे भाइयो बहनों ऐसे सबको OROP मिलेगा और इसलिये 80-90% ये जो 8 हजार 10 हजार करोड़ का खर्च है ना उसका सबसे ज्यादा धन ये 15-17 साल की उम्र में जो सेना छोड़ कर घर आते हैं उन जवानों में जाने वाला है। और इसलिये ये भ्रम फैलाने की कोशिश करने की आवश्यकता नहीं है। ये सरकार बहुत ही स्पष्ट है। कि देश के लिये जीने मरने वाले जवानों को लिये OROP लागू करने का हमनें वादा किया है और कल हमनें घोषणा कर दी है।

कुछ लोग कहते हैं Commission बनाया, ये कोई Pay-Commission नहीं बनाया। ये सिर्फ ये जो हमनें निर्णय किये हैं, क्योंकि पहले 500 करोड़ वालों की भी समझ में कुछ कुछ न गड़बड़ रही बाद में Koshyari Committee ने जो रिपोर्ट किया, उसमें भी गड़बड़ रही, हमें लगा कि 10 हजार करोड़ रुपया देने के बाद भी हो सकता है कहीं कोई कमी रह गई हो, कहीं कोई समझदारी में अंतर रहा हो, कोई हिस्सा सेना का छूट गया हो तो ऐसे समय एक व्यवस्था होनी चाहिए ताकि सेना के जवान उनके साथ मिलकरके, अगर कोई कमी रह गई हो, कोई छोटा-मोटा बदलाव जरूरी हो तो उसके साथ कर सके OROP के संबंध में इसलिए ये कमेटी बनाई गई है, ये कोई Pay-Commission नहीं है और इसलिए इसमें भी जो भ्रम फैलाए जा रहे हैं वो भ्रमों का भी निराकरण होना चाहिए।

आज देश के सेना में 10 में से 1 जवान हरियाणा का होता है, 10 जवान हैं तो उसमें से एक हरियाणा का होगा ही होगा और इसलिए ये जब 8-10 हजार करोड़ का पैकेज आएगा तो बहुत बड़ी मात्रा में धन हरियाणा के निवृत्त जवानों के पास आने वाला है, मतलब कि हरियाणा के अंदर हजारों-करोड़ रुपए आने वाले हैं। जब हरियाणा में हजारों-करोड़ रुपए आते हैं तो हरियाणा की economy अचानक drive करने लग जाती है। हरियाणा की आर्थिक गतिविधि को एक बहुत बड़ी ताकत, सेना के निवृत्त जवानों को पैसे मिलने के कारण मिलने वाली है। बहुत बड़ा निर्णय इस सरकार ने किया है, देशभक्ति से प्रेरित होकर के किया है। देश की आर्थिक व्यवस्था में बहुत सारे काम है, कुछ कामों में कटौती करके भी करना पड़ेगा तो करने का फैसला कर करके किया है और इसलिए मैं, मेरे सेना के जावनों को कहता हूं कि ये सरकार आपकी है, ये सरकार आपका हौंसला बुलंद देखना चाहती है, ये सरकार आपके सुखों की चिंता करने वाली सरकार है और आने वाले दिनों में भी जहां जो जरूरत पड़ेगी, ये सरकार आपके साथ खड़ो होगी, ये मैं देश के जवानों को विश्वास दिलाना चाहता हूं।

भाईयों-बहनों जो लोग बयानबाजी करके, राजनीतिक उल्लू सीधा करने की कोशिश कर रहे हैं, देशवासियों जिन्होंने 40-42 साल तक जो काम नहीं किया, उनको एक भी सवाल पूछने का अधिकार है क्या? जरा पूरी ताकत से जवाब दो मुझे, जिन्होंने खुद नहीं किया उनको सवाल पूछने का हक है क्या? देश को गुमराह करने का हक है क्या? जवानों के नाम पर बोलने का हक है क्या? अरे आप लोगों का पाप था कि आप लोगों ने 40-42 साल तक काम नहीं किया, आज हमारा हिसाब मांग रहे हो। भाईयों-बहनों एक fashion चल पड़ी है, एक fashion चल पड़ी है कि जब सरकार कोई भी अच्छे निर्णय करे, देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए हिम्मत के साथ आगे बढ़े तो जो लोग, जिनकों देश की जनता ने reject कर दिया है वो इस देश को आगे बढ़ना नहीं देना चाहते हैं, इससे बड़ा लोकतंत्र का अपमान नहीं हो सकता है और इसलिए मेरे भाइयों-बहनों, मैं देशवासियों को हरियाणा की वो धरती से बोल रहा हूं, जहां कृष्ण ने गीता का संदेश दिया था और युद्ध का विजय प्राप्त करने का संकेत दिया था, ये वो भूमि है जहां हर परिवार से कोई न कोई जवान सीमा पर देश की सेवा कर रहा है, ऐसी धरती से मैं कह रहा हूं कि हमारे लिए, हमारे सेना के जवान किसी के कम प्यारे नहीं हैं और इसलिए ये One-upmanship जो चल रही है, इसके खेल देश का भला नहीं करेंगे।

भाईयों-बहनों हम विकास के मार्ग पर चलना चाहते हैं, सवा सौ करोड़ देशवासियों को लेकर चलना चाहते हैं और उसको लेकर के हम आगे बढ़ रहे हैं और आज मेट्रो का एक नजराना हरियाणा के जीवन को नई ताकत देगा। आधुनिक हरियाणा बनाने में ये सौगात काम आएगी। इसी एक विश्वास के साथ मैं फिर एक बार यहां के मुख्यमंत्री को, सरकार की पूरी टीम को हरियाणा को लगातार आगे बढ़ाने के लिए, नई ऊंचाईयों पर ले जाने के प्रयासों के लिए अभिनंदन करता हूं, बधाई देता हूं और श्रीमान वेंकैया जी नायडू के नेतृत्व में हमारा शहरी विकास तेज गति से हो, हरियाणा में बहुत बड़ी मात्रा में शहरी विकास हो रहा है, वो भी नई ऊंचाइयों को प्राप्त करे यही शुभकामना के साथ आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद।

मेरे साथ दोनों मुठी बंद करके बोलिए

“जय जवान, जय किसान”

“जय जवान, जय किसान”

“जय जवान, जय किसान”

"भारत माता की जय"

"भारत माता की जय"



बहुत-बहुत धन्यवाद।

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मेरे प्यारे देशवासियो,

नमस्कार | ‘मन की बात’ में एक बार फिर आप सबसे जुड़कर मुझे अत्यंत आनंद हो रहा है | 2026 का आधा साल बीतने को है | इन 6 महीनों में हमने ‘मन की बात’ में देशवासियों की अनेक उपलब्धियों पर चर्चा की है | जून में भी, देश ने कुछ ऐसी उपलब्धियाँ हासिल की हैं, जो हर देशवासी को गर्व से भर देती हैं | ये सफलताएँ देश की सुरक्षा और आत्मनिर्भरता से जुड़ी हैं | हाल ही में मुझे कोलकाता में नौ-सेना से जुड़े एक कार्यक्रम में शामिल होने का अवसर मिला | वहाँ INS दूनागिरी, INS संशोधक और INS अग्रय को भारतीय नौ-सेना के बेड़े में शामिल किया गया | इन ships की design और manufacturing तक, सब कुछ स्वदेशी है |

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जून में एक और आयोजन हुआ जिसमें पूरी दुनिया भारत के प्रयासों से जुड़ी, और ये कार्यक्रम था ‘अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस’ | इस बार दुनिया के 2500 से अधिक स्थानों पर योग के अनेक विविध कार्यक्रम हुए | हमारे देश में करोड़ों लोगों ने स्थान-स्थान पर योग कार्यक्रमों में हिस्सा लिया | इस महीने, अहमदाबाद में आयोजित ‘विश्व योगासन चैम्पियनशिप’ की भी बड़ी चर्चा हुई | इसमें भारत ने कुल 114 पदक जीते हैं, इनमें 102 गोल्ड मेडल भी शामिल हैं | भारत इस चैम्पियनशिप की पदक तालिका में पहले स्थान पर रहा | मैं सभी विजेता खिलाड़ियों को बहुत-बहुत बधाई देता हूँ |

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किसी भी राष्ट्र की आत्मा उसके लोग होते हैं | और जब उस देश के लोग कोई संकल्प लेते हैं तो कोई भी शक्ति उन्हें अपने लक्ष्य से डिगा नहीं पाती | राष्ट्र निर्माण में जन-भागीदारी की ये ताकत भारत की बहुत बड़ी पूंजी है और इस जन-भागीदारी का हम बार-बार अनुभव कर रहे हैं |

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पश्चिम एशिया में बनी युद्ध की स्थितियों को देखते हुए, मैंने देशवासियों से कुछ आग्रह किए थे | मैंने कहा था कि जहाँ तक संभव हो, कुछ समय के लिए गोल्ड, सोना खरीदने से बचें | लोगों से कहा था कि विदेश में छुट्टियाँ मनाने से बचें, मैंने लोगों से car pooling को भी बढ़ावा देने की अपील की थी, मैंने किसानों से chemical मुक्त खेती के लिए, खेत बचाने के लिए और प्राकृतिक खाद का ज्यादा- से-ज्यादा इस्तेमाल का आग्रह किया था | साथियो, मैं देश के हर नागरिक का आभारी हूँ कि मेरी अपील का उन्होंने ना सिर्फ समर्थन किया बल्कि हर तरफ से उसमें अपना सहयोग कर रहे हैं | मुझे कई परिवारों ने संदेश भेजकर अपने अनुभव साझा किए हैं | कितने ही परिवारों ने तय किया है कि घर के विवाह में इस बार सोना नहीं खरीदेंगे | जरूरत पड़ी तो पुराने सोने को recycle करके नए गहने बना लेंगे | कितने ही लोगों ने social media पर ये भी लिखा है कि कैसे उन्होंने इस बार विदेश यात्रा को टाल दिया है |

साथियो,

car pooling को लेकर भी लोगों ने अनेक अनुभव साझा किए हैं | जो लोग हर दिन एक ही दिशा में अपने-अपने वाहनों से जाते थे, वे अब साथ जाने लगे हैं | लोग हर संभव बस और मेट्रो का उपयोग कर रहे हैं | इससे पेट्रोल और डीजल की बचत हो रही है | इसी तरह देश के अलग-अलग हिस्सों में प्राकृतिक खाद की खपत बढ़ने की भी खबरें आ रही हैं | साथियो, मुझे इस बात की खुशी है, इस global crisis का हम भारतीय मिलकर मुकाबला कर रहे हैं | मुझे विश्वास है जनभागीदारी की यही शक्ति हमें मजबूती देगी, हमें सफल बनाएगी |

मेरे प्यारे देशवासियो,

हमारे देश में जन्मदिन, शादी-ब्याह पारिवारिक कार्यक्रम होने के ही साथ ही पूरे समाज का भी उत्सव होता है | हर परिवार चाहता है कि उसकी खुशियाँ दूसरों के साथ भी साझा हों | लोग मेहमानों को उपहार भी देते हैं | साथियो, महाराष्ट्र के नांदेड़ में एक परिवार ने अपनी खुशियाँ बाँटने के लिए ऐसा काम किया है जो चर्चा का विषय बन गया है | यहाँ नांदेड़ के बहादुरपुरा गाँव में पेठकर परिवार रहता है | इस परिवार ने सोचा कि अगर खुशी बाँटनी ही है, तो ऐसी चीज दी जाए, जो मुश्किल समय में किसी परिवार का सहारा बने | अपने घर में विवाह के अवसर पर इस परिवार ने गाँव के लगभग साढ़े तीन हजार लोगों के लिए दुर्घटना बीमा की व्यवस्था की | हर व्यक्ति को एक लाख रुपए का बीमा कवर दिया गया | इस पहल के पीछे की भावना बहुत स्पर्श करने वाली है | परिवार ने देखा था कि दुर्घटना के बाद परिवारों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है | ऐसे समय में एक छोटी-सी सहायता भी बहुत बड़ा संबल बन जाती है |

साथियो,

सरकार देश के करोड़ों परिवारों तक सुरक्षा का कवच पहुंचा रही है | ‘प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना’ के तहत केवल 20 रुपये के सालाना premium यानि केवल एक साल के 20 रुपये का premium, उस पर दो लाख रुपये तक का ‘दुर्घटना बीमा’ मिलता है | अब तक इस योजना से 58 करोड़ से अधिक लोग जुड़ चुके हैं | इनमें करीब 28 करोड़ हमारी माताएं, बहनें, बेटियाँ हैं, महिलाएं हैं | इस योजना से पीड़ित परिवारों को अब तक जो हिसाब मिला है 3,700 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता मिल चुकी है|

साथियो

उसी प्रकार से ‘प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना’ भी उतनी ही अहम है | ये योजना व्यक्ति की दुखद मृत्यु होने पर उसके परिवार को दो लाख रुपये का बीमा कवर देती है | इसका वार्षिक premium सिर्फ 436 रुपये है | मतलब एक दिन का मुश्किल से डेढ़ रुपया | इस योजना से अब तक 27 करोड़ से अधिक लोग जुड़े हैं | इसके तहत देश के करीब 11 लाख परिवारों को करीब 22 हजार करोड़ रुपये की सहायता मिल चुकी है | ये आकड़ें बहुत बड़े हैं | इन आकड़ों के पीछे लाखों परिवारों की अपनी-अपनी कहानी है | कहीं किसी माँ को बच्चों की पढ़ाई जारी रखने में सहायता मिल गई, कहीं किसी पत्नी को घर की जिम्मेदारियाँ संभालने का सहारा मिल गया | साथियो, कई बार बहुत बड़ी सुरक्षा की शुरुआत बहुत छोटी राशि और एक छोटे-से कदम से हो सकती है, छोटा-सा भी निर्णय बहुत बड़ा बदलाव करता है | मेरा आप सभी से आग्रह है कि अपने परिवार में इन योजनाओं की जानकारी जरूर साझा करें |

मेरे प्यारे देशवासियो

‘मन की बात’ में अब बात एक ऐसे विषय की जो हजारों साल पुराना है, हजारों साल से मानव समाज में घर कर करके बैठ गया है | ये विषय है – अंधविश्वास का | अंधविश्वास कई बार केवल एक गलत धारणा नहीं होता | वो डर पैदा करता है और जब डर मन पर हावी हो जाता है, तो इंसान सच को देखना ही बंद कर देता है | अंधविश्वास में डूबे लोग, फिर बिना तर्क के, बिना सत्य जाने, ऐसे फैसले लेने लगते हैं, जिनका बड़ा नुकसान होता है | वहीं समाज में ऐसे लोग भी होते हैं, जो विज्ञान, अनुभव और तर्क के आधार पर उन धारणाओं को चुनौती देते हैं | अंधविश्वास से विश्वास तक की ये यात्रा आसान नहीं होती और आज मैं ऐसी ही एक सफल यात्रा के बारे में आपको जरूर बताना चाहता हूँ |

साथियो,

असम में एक पक्षी पाया जाता है | उस पक्षी का नाम है ‘हरगिला’ | ‘हरगिला’ एक दुर्लभ पक्षी है | ये प्रकृति को स्वच्छ रखने में अहम भूमिका निभाता है | लेकिन असम के कुछ इलाकों में लंबे समय तक इसे अशुभ माना जाता था | लोग इसे अपने आसपास देखना पसंद नहीं करते थे | कई बार उन पेड़ों को भी काट दिया जाता था जिन पर हरगिला के घोसलें बने होते थे | सोचिए, एक ऐसा पक्षी जो पर्यावरण की सफाई में मदद करता है, वही ‘हरगिला’ लोगों के डर का शिकार बन गया था | इसी दौरान जीव-वैज्ञानिक पूर्णिमा देवी बर्मन ने ये सब देखा | उन्होंने लोगों के मन में बैठी गलत धारणा को बदलने का संकल्प लिया | उन्होंने महिलाओं से बात की, उन्होंने लोगों को विज्ञान के आधार पर समझाया, धीरे-धीरे महिलाएं इस अभियान से जुडने लगीं | फिर एक बड़ा बदलाव शुरू हुआ | जिस पक्षी को कभी अशुभ मानकर भगाया जाता था, वही गांवों की पहचान बनने लगा | हजारों ग्रामीण महिलाएं ‘हरगिला’ को बचाने के लिए आगे आईं - आज उन्हें ‘हरगिला आर्मी’ के नाम से जाना जाता है |

इन महिलाओं ने समाज के साथ संघर्ष भी किया | समाज को समझाने के लिए दिन-रात काम किया और अंधविश्वास को पीछे छोड़ करके रहे | उन्होंने दिखाया है जब सही जानकारी पहुंचाई जाती है, तो वर्षों पुरानी सोच भी बदल सकती है |

साथियो,

मैं अक्सर कहता हूँ, जो खेलता है, वो खिलता है | आज देश में ऐसे युवाओं की संख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है, जो खेल भी रहे हैं और खिल भी रहे हैं | पहले की तुलना में अब कहीं अधिक युवा खेलों को career के रूप में अपना रहे हैं | मुझे नागालैंड के दो ऐसे प्रयासों के बारे में जानकारी मिली है, जो बहुत दिलचस्प हैं | पहला प्रयास है ‘Nagaland Baby League’. नाम सुनकर आपको जरूर लगता होगा ये बहुत छोटे बच्चों की कोई साधारण लीग होगी, लेकिन ऐसा नहीं है | ये 5 से 10-12 साल की आयु के छोटे-छोटे बच्चे, फूल जैसे बच्चों की एक असाधारण league है और इन बच्चों के football खिलाड़ियों की एक ऐसी league है, जो उनकी रफ्तार को और प्रतिभा के लिए उनको प्रेरित भी करती है और उनकी पहचान भी बनाती है | इसकी शुरुआत नागालैंड के अधिक-से-अधिक बच्चों को football से जोड़ने के लिए हुई थी | पांच से बारह वर्ष तक के लड़के और लड़कियां इसमें हिस्सा ले सकते हैं | ये league अब अपने तीन वर्ष पूरे कर चुकी है | इस लीग का बच्चों के मन पर बहुत अच्छा प्रभाव पड़ा है |

साथियो,

नागालैंड में एक और अच्छा प्रयास हो रहा है | इसका नाम है, ‘Nagaland Women Futsal League’, हो सकता है आपके लिए ये ‘futsal’ एक नया नाम होगा, मैं आपको बताता हूँ Futsal को indoor football भी कहा जाता है | इसमें एक टीम में केवल पांच खिलाड़ी होते हैं | खेल का मैदान भी football के मैदान से बहुत छोटा होता है | इस कारण खिलाड़ियों को तेज फैसले लेने होते हैं | उन्हें अपनी technique और skill का बेहतर इस्तेमाल करना पड़ता है | नागालैंड की Women Futsal League हमारी बेटियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अच्छा अवसर दे रही है | मैं ऐसी पहलों के लिए नागालैंड के लोगों की सराहना करता हूं | ऐसे प्रयास देश के दूसरे हिस्सों को भी प्रेरणा देते हैं |

साथियो,

ये technology का युग है । हर दिन नई research हो रही है । नए-नए AI innovations सामने आ रहे हैं । इस दौर में एक सवाल बहुत महत्वपूर्ण है - लोगों की creativity को कैसे बचाए रखा जाए? नई technology के साथ आगे बढ़ते हुए हम अपनी जड़ों से कैसे जुड़े रहें? इन सवालों का समाधान खोजा है ‘नालंदा विश्वविद्यालय’ ने । हजारों साल पुरानी हमारी नालंदा विश्वविद्यालय अब नए अवतार के रूप में भारत का भाग्य गढ़ रही है | दो साल पहले मुझे नालंदा विश्वविद्यालय के नए परिसर के लोकार्पण का अवसर मिला था । नालंदा विश्वविद्यालय ने शास्त्रार्थ की हमारी प्राचीन परंपरा को फिर से जीवंत किया है । शास्त्रार्थ केवल अपनी बात रखने का माध्यम नहीं है । ये वाद–संवाद और मंथन की एक अनुशासित प्रक्रिया है । इसमें तर्क के साथ, तथ्य के साथ, अपनी बात कहना बहुत जरूरी होता है, और उसमें आपकी महारत होनी चाहिए | दूसरों के विचारों को धैर्य से सुनने और समझने की सीख भी इस शास्त्रार्थ की प्रक्रिया से मिलती है । मुझे खुशी है कि नालंदा विश्वविद्यालय ने इसे अपने दीक्षांत समारोह का हिस्सा बनाया । इसमें भाग लेने वाले करीब आधे students अन्य देशों से आए थे । एक प्राचीन परंपरा को आज के समय से जोड़ने का ये प्रयास बहुत सराहनीय है । मैं इसके लिए नालंदा विश्वविद्यालय को बहुत-बहुत बधाई देता हूँ । मैं देश के दूसरे विश्वविद्यालयों से भी आग्रह करूंगा कि वे ऐसी पहल पर विचार करें ।


साथियो,

जड़ों से जुड़े रहकर युवाओं को नई technology के लिए तैयार करने का एक और अच्छा प्रयास हो रहा है । दिल्ली में स्थित Central Sanskrit University, Artificial Intelligence और Data Science में B.tech Programme शुरू करने जा रही है । ये आधुनिक technology को भारत के पारंपरिक ज्ञान से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है । इससे भारतीय भाषाओं के लिए नए AI tools तैयार करने में मदद मिलेगी । हमारे प्राचीन ग्रंथों और पांडुलिपियों को digital रूप में संरक्षित करने के काम को भी नई गति मिलेगी । मैं Central Sanskrit University को इस प्रयास के लिए बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूँ ।

साथियो,

आज भारतीय संस्कृति दुनिया के अलग-अलग हिस्सों तक पहुँच रही है । हमारे गीत, संगीत और आध्यात्म को दुनिया-भर के लोग जान रहे हैं और अपना रहे हैं । भारत से हजारों kilometre दूर Caribbean सागर में Dominican Republic नाम का एक देश है । वहाँ भारतीयों की संख्या करीब 100 है शायद इससे भी कम होगी । इसके बावजूद भारतीय संस्कृति और आध्यात्म से जुड़ा एक बहुत अच्छा प्रयास वहाँ हो रहा है । वहाँ Spanish बोलने वाले कुछ लोगों ने एक team बनाई है । इस team का नाम है, ‘ब्रहमकमल डोमिनिकाना’ । team के सदस्य मिलकर वैदिक साहित्य का अध्ययन करते हैं । वे वैदिक मंत्रों का उच्चारण भी सीख रहे हैं । उन्हें इसकी कोई formal training नहीं मिली है । लेकिन उन्होंने audio recordings सुनकर वैदिक मंत्रों का सही उच्चारण सीखा है । आज वे कई मंत्रों का बहुत अच्छे से जाप कर लेते हैं । इनमें पुरुष सूक्तम, श्री सूक्तम, श्री रुद्रम, दुर्गा सूक्तम और देवी महात्मयम शामिल हैं । भारत से इतनी दूर रहकर हमारी परंपराओं को सीखने का उनका यह प्रयास बहुत प्रेरक है । मैं ‘ब्रहमकमल डोमिनिकाना’ वहाँ के सभी सदस्यों को उनके प्रयासों के लिए शुभकामनाएँ देता हूँ । मैं ऐसे सभी लोगों की हृदय से सराहना करता हूँ जो भारतीय संस्कृति को दुनिया भर में लोकप्रिय बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं ।

मेरे प्यारे देशवासियो,

मेघालय की पहचान बादलों से है, खूबसूरत नजारों से है | जो मेघालय जाता है, उसे वहां के लोगों का अपनापन भी लंबे समय तक याद रहता है | लेकिन, मेघालय की एक और विशेषता है, जिसकी मैं आज, ‘मन की बात’ में, आपसे चर्चा करना चाहता हूं | ये है - मेघालय के रूट ब्रिज | रास्ता वाला route नहीं, जड़ों वाला root | इन रूट ब्रिजों की कहानी बहुत रोचक है | ये ब्रिज कुछ दिनों या कुछ वर्षों में नहीं बनते | इन्हें तैयार होने में कई दशक लगते हैं | रबर के पेड़ों की जड़ों को धीरे-धीरे दिशा दी जाती है | इन जड़ों को जल-धाराओं के पार ले जाया जाता है | समय के साथ वही जड़ें एक मजबूत ब्रिज का रूप ले लेती हैं | इन ब्रिजों की एक और विशेषता है | ये जीवित ब्रिज हैं | समय बीतने के साथ ये और मजबूत हो जाते हैं | इनमें मेघालय के लोगों की सृजनशीलता दिखाई देती है | इनके पीछे वर्षों का धैर्य और प्रकृति के प्रति गहरा सम्मान है | ये ब्रिज बताते हैं कि मनुष्य प्रकृति के साथ मिलकर कितनी अद्भुत चीजें बना सकता है | ये हमारे देश की, इस धरती की, धरोहर है | अब भारत ने मेघालय के रूट ब्रिजों को UNESCO World Heritage Site Network में शामिल कराने के लिए आवेदन किया है |

साथियो,

climate change के कारण इन रूट ब्रिजों के सामने कई चुनौतियां भी आती हैं | ऐसे समय में मेघालय के लोगों ने इस प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई है | पहले ये पता लगाना भी आसान नहीं था कि ऐसे ब्रिजों की संख्या कितनी है? स्थानीय लोगों ने खुद इनकी गिनती शुरू की | इसके बाद समुदायों ने इन ब्रिजों की देख-भाल की जिम्मेदारी भी संभाली | आज स्थानीय लोग 120 से अधिक रूट ब्रिजों की देख-रेख कर रहे हैं | कुछ टीमें हर साल इन पुलों की स्थिति की जांच करती हैं | कुछ लोगों ने आस-पास के क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए नर्सरी भी तैयार की है | इस तरह के इनके संरक्षण के लिए एक पूरा ecosystem तैयार हो गया है | आपने देखा होगा, इस वर्ष हैली वार जी को Padma Award से सम्मानित किया गया है | उन्होंने अपने जीवन के 50 से अधिक वर्ष इन रूट ब्रिजों की देखभाल में लगाए हैं | उनका समर्पण हम सभी के लिए प्रेरणादायक है| साथियो, आपने कभी इन रूट ब्रिजों की यात्रा की हो, तो उनकी तस्वीरें social media पर जरूर साझा कीजिए | आपकी तस्वीरें दूसरे लोगों को भी मेघालय की इस अनोखी धरोहर के बारे में जानने के लिए प्रेरित करेगी |

मेरे प्यारे देशवासियो,

हम सभी चाहते हैं कि हमारा गांव साफ-सुथरा हो, हमारा शहर सुंदर दिखे | लेकिन शायद ही कभी रुककर ये सोचा जाता है कि हमारे आस-पास जो कचरा जमा होता है, कौन उसे साफ करता है? ज्यादातर लोग तो यही मानकर चलते हैं कि ये किसी और की जिम्मेदारी है, और, वो ही सफाई करेगा | लेकिन हमारे बीच कुछ ऐसे भी लोग होते हैं, जो अपनी सोच से हमें बहुत प्रेरित करते हैं | मुझे मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा की कुछ बहनों के बारे में जानने का अवसर मिला | उन्होंने अपने आस-पास फैले plastic कचरे को हटाने का संकल्प लिया | ये नहीं सोचा कि कोई आकर बदलाव लाएगा | उन्होंने खुद शहर-भर से plastic कचरा और खाली बोतलें इकट्ठा करना शुरू किया | धीरे-धीरे ये प्रयास आगे बढ़ता गया और फिर उस plastic को eco-bricks में बदला जाने लगा | आज इन्हीं eco-bricks का उपयोग सार्वजनिक स्थानों को सुंदर बनाने में किया जा रहा है | राजगढ़ में पिछले कुछ महीनों में सैकड़ों किलो plastic को recycle करके उनका बेहतर उपयोग किया गया है | यानी, जो plastic पहले शहर में प्रदूषण फैलाता था, आज वही इन बहनों के प्रयास से शहर की सुंदरता बढ़ाने में योगदान दे रहा है | मैं ब्यावरा की सभी बहनों और इस अभियान से जुड़े साथियो को बधाई देता हूं |

मेरे प्यारे देशवासियो,

मुझे कई लोगों ने पत्र लिखकर एक खास विषय पर बात करने का सुझाव भेजा है | ये विषय ‘गणेश उत्सव’ से जुड़ा है | वैसे तो ‘गणेश उत्सव’ में अभी काफी समय बाकी है, लेकिन लोगों ने ये आग्रह किया है कि इस विषय पर अभी ही बात होनी चाहिए | दरअसल, गणेश जी की मूर्तियां बनाने का काम बहुत पहले शुरू हो जाता है | मूर्ति बनाने वाले, मूर्तियों के व्यापार से जुड़े लोग अभी से सक्रिय हो जाते हैं | इसलिए मेरा आप सभी से एक आग्रह है | आप प्रयास करें कि आपके घर, सोसायटी या आसपास की जगहों पर गणपति बप्पा की जो मूर्ति स्थापित हो, वो हमारे देश की मिट्टी से बनी हो, वो हमारे अपने कुम्हारों और स्थानीय कलाकारों के हाथों तैयार हुई हो | जो लोग गणेश जी की मूर्तियां बनाते हैं, उनसे भी मेरा आग्रह है कि वे मिट्टी की मूर्तियों को प्राथमिकता दें, और जो लोग मूर्तियां खरीदते हैं, वे भी यह जरूर देखें, कि, गणपति बप्पा की मूर्ति किससे बनी है और किस देश में तैयार हुई है | Plaster of Paris से बनी मूर्तियां बिल्कुल ना खरीदें | साथियो, मिट्टी की मूर्तियां पूजा के बाद सहज रूप से पानी में विलीन हो जाती हैं | इससे हमारी नदियां, तालाबों और पर्यावरण की रक्षा होती है | हमारी आस्था भी बनी रहती है और प्रकृति के प्रति हमारा दायित्व भी पूरा होता है | जब हम स्थानीय कारीगरों से मूर्ति खरीदते हैं, हम ‘Vocal for Local’ के संकल्प को मजबूत करते हैं | मुझे विश्वास है कि इस बार ‘गणेश उत्सव’ में और ऐसे हर उत्सव में हम ऐसी सारी बातों पर जरूर गंभीरता से सोचेंगे और देश-हित में कदम भी उठाएंगें |

साथियो,

हमारे देश की सबसे बड़ी शक्ति, हमारे देश के लोग हैं | देश के अलग-अलग हिस्सों में हो रहे छोटे-बड़े प्रयास हमें बहुत कुछ सिखाते हैं | ये प्रयास बताते हैं कि जब मन में संकल्प हो और समाज का साथ मिले, तो कोई भी बड़ा बदलाव लाया जा सकता है | आप अपने आस-पास हो रहे ऐसे प्रयासों के बारे में मुझे जरूर लिखते रहिए | अपने विचार और अपने सुझाव भेजते रहिए, हो सकता है आपके आस-पास की कोई छोटी-सी पहल, पूरे देश के लिए प्रेरणा बन जाए | अगले महीने हम फिर मिलेंगे | देशवासियों के कुछ नए प्रयासों की चर्चा करेंगे | तब तक आप अपना और अपने परिवार का ध्यान रखिए, और हाँ! जलसंचय तो करना-ही-करना है | बारिश के पानी की एक-एक बूँद को हमें बचाना है | ‘Catch the Rain’ ये अभियान जरा भी ढ़ीला नहीं होने देना है | तो मेरा खास आग्रह है, वर्षा का बूँद-बूँद पानी, हम मिल करके बचायें | बहुत-बहुत धन्यवाद | नमस्कार |