If the leaders of Andhra Pradesh would have truly worked for the development of its people, they would not have to put the blame of their ill-governance on Modi: PM
Our government is working tirelessly to accelerate development and opportunities for all sections of society in Andhra Pradesh: PM
Vote for politics of development of the BJP in the upcoming Lok Sabha elections: PM at Visakhapatnam

सबसे पहले हम तीन बार भारत माता की जय बोलेंगे। पहला जयकारा पराक्रमी भारत के लिए, दूसरा जयकारा विजयी भारत के लिए और तीसरा जयकारा हमारे वीर-जवानों के लिए।

पराक्रमी भारत के लिए- भारत माता की...जय, विजयी भारत के लिए- भारत माता की...जय, वीर-जवानों के लिए- भारत माता की...जय।

मंच पर विराजमान प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष श्रीमान लक्ष्मी नारायण कन्ना जी, हमारे संसद के साथी डॉक्टर हरिबाबू, भारतीय जनता पार्टी विधानसभा दल के नेता और यहां के जुझारू नेता श्रीमान विष्णु कुमार राजू जी, पूर्व मंत्री बहन पुरंदेश्वरी जी, श्रीमान वीरराजू सोमू जी, सत्यकुमार वाई, श्रीमान नरसिम्हा राव जी, हमारे सबसे पुराने वरिष्ठ नेता श्रीमान चलापति राव जी, श्री गंगाराजू गोकाराजू जी, श्रीमान सतीश जी, मुरलीधरन जी, मंच पर विराजमान सभी वरिष्ठ महानुभाव और विशाल संख्या में मुझे आशीर्वाद देने आए मेरे प्यारे भाइयो और बहनो।

 

साथियो, विशाखापट्टनम देश और आंध्र प्रदेश के हजारों युवाओं के सपनों का शहर है। यहां के लोगों के लिए उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करना, उनकी आशाओं, आकांक्षाओं को पूरा करने का निरंतर प्रयास करना केन्द्र सरकार की प्राथमिकता में है।

आज जब मैं आप सभी के बीच आया हूं तो एक खुशखबरी लेकर के आया हूं। आपकी एक बहुत पुरानी मांग को लेकर सरकार ने सकारात्मक कदम उठाया है। सरकार ने साउथ कोस्ट रेलवे जोन बनाने का फैसला लिया है जिसका हेडक्वार्टर यहीं विशाखापट्टनम में होगा। आप सभी को बहुत-बहुत बधाई।

सरकार का यह फैसला आंध्र प्रदेश रीऑर्गेनाइजेशन एक्ट के तहत यहां के विकास को गति देने की तरफ एक और बड़ा कदम है। इससे विशाखापट्टनम समेत ईस्ट कोस्ट रेलवे पर स्थित कई अहम क्षेत्रों तथा बेहतर रेलवे कनेक्टिविटी का लाभ मिल पाएगा। इससे आप लोगों की सुविधा तो बढ़ेगी ही,  यहां की अर्थव्यवस्था को भी बल मिलेगा और रोजगार के नए अवसर भी बनेंगे। यह फैसला केंद्र की एनडीए सरकार के आंध्र प्रदेश के विकास के प्रति कमिटमेंट को साफ-साफ दिखाता है।

यह उन दावों की भी पोल खोलता है जो अपने राजनीतिक वजूद को बचाने के लिए, अपने भ्रष्ट आचरण को छुपाने के लिए दिन-रात आंध्र की जनता के सामने लगातार झूठ पे झूठ, झूठ पे झूठ बोल रहे हैं। ये वही हैं, ये वही हैं जो आंध्र के बेटे-बेटियों को आगे बढ़ाने के बजाय अपने बेटे-बेटियों को स्थापित करने में जुटे हुए हैं।

साथियो, विशाखापट्टनम के एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाना हो या फिर छह लेन का नेशनल हाइवे बनाना हो, आईआईएम की शुरुआत हो या फिर इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम एंड एनर्जी, सोसायटी फॉर अप्लाइड माइक्रोवेव इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग एंड रिसर्च यानि SAMEER की स्थापना हो या फिर ईएसआईसी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल हो, मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक हब हो या फिर स्टील प्लांट का विस्तारीकरण हो, रिफाइनरी का आधुनिकीकरण हो या फिर ऑयल रिजर्व फैसिलिटी का निर्माण हो, आपके शहर के विकास के लिए, आपके शहर को स्मार्ट बनाने के लिए सैकड़ों करोड़ के प्रोजेक्ट्स...इस पर तेज गति से काम चल रहा है। यह दिखाता है कि आपका यह प्रधान सेवक पूरे समर्पण से विशाखापट्टनम को स्मार्ट बनाने और आंध्र प्रदेश के विकास को गति देने में जुटा है।

साथियो, हम इसलिए बड़े काम कर पाते हैं और बड़े फैसले प्रामाणिकता के साथ तेजी से ले पाते हैं क्योंकि हम पूरी ईमानदारी से पूरी निष्ठा के साथ आप की सेवा करना चाहते हैं, आपके जीवन को आसान बनाना चाहते हैं। हमारे ऊपर कोई बैगेज नहीं है। यह डर नहीं है कि कोई फाइल खुल जाएगी तो क्या होगा। डरता वही है जिसने पाप किया हो, जिसने गलत मंशा से काम किया हो। यही डर हमारे विरोधियों को खाए जा रहा है, जिसमें बड़े-बड़े दिग्गज और अपना खुद का राजवंश स्थापित करने की कोशिश में लगे लोग भी पूरी तरह शामिल हैं।

हर समय यू-टर्न लेने में माहिर यहां के नेता ने पूरी ईमानदारी के साथ आपको दिया वचन निभाया होता तो आज उनको मोदी के ऊपर अपनी नाकामी का ठीकरा फोड़ने की आवश्यकता नहीं पड़ती। सोचिएआज वह ऐसे लोगों के सामने गुहार लगाते नजर आते हैं जिन्होंने तेलुगू अस्मिता को रौंदने में कोई कसर नहीं छोड़ी। भाइयो और बहनो, आंध्र प्रदेश के लिए वह क्या करेंगे, देश के लिए उनके पास क्या एजेंडा है, यह बताने के बजाय वह मोदी को हटाने का ही शोर मचा रहे हैं। मोदी को वो इसलिए हटाना चाहते हैं क्योंकि गरीब की, मध्यम वर्ग की, किसान की, दलित की, वंचित की, शोषित के जीवन में सकारात्मक बदलाव आ रहा है। मोदी को वो इसलिए हटाना चाहते हैं क्योंकि बिचौलियों, दलालों, भ्रष्टाचारियों के विरुद्ध शक्ति से मोदी कार्रवाई कर रहा है। मोदी को वो इसलिए हटाना चाहते हैं क्योंकि आज देश हित के और देश हित में कड़े और बड़े फैसले लिए जा रहे हैं। मोदी को वो इसलिए हटाना चाहते हैं क्योंकि नए हिन्दुस्तान की रीति और नीति दोनों बदल रही है।

साथियो, देश को, आप सभी को, इन लोगों का एजेंडा समझ आ गया। महामिलावट का यह खेल अब देश पूरी तरह समझ गया है। यह लोग मिलकर देश को एक मजबूर सरकार देने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन मजबूर सरकार का उनका यह प्रयास कभी कामयाब नहीं हो सकता क्योंकि देश आज मजबूत सरकार के काम को अनुभव कर रहा है। एक ऐसी मजबूत सरकार, एक ऐसी मजबूत सरकार जिसके लिए देश का हित सबसे ऊपर होता है। इसी मजबूत सरकार की वजह से हमारा विरोधी देश ऐसा बर्ताव कर रहा है जिसकी पहले कल्पना भी मुश्किल थी।

साथियो, लेकिन यह भी देश का दुर्भाग्य है कि ऐसे समय में जब पूरी दुनिया पाकिस्तान से जवाब मांग रही है तब हिंदुस्तान के कुछ लोग ऐसे बयान दे रहे हैं जो देश के सुरक्षाबलों का मनोबल कमजोर करते हैं। ऐसे लोगों को आत्मचिंतन करना चाहिए कि वह ऐसा क्या बोल रहे हैं जिसके कारण पाकिस्तान की पार्लियामेंट में उनकी तारीफ की जा रही है, उनका नाम लेकर भारत पर निशाना साधा जा रहा है। मैं ऐसे महामिलावटी नेताओं से पूछना चाहता हूं...कमजोर सरकार चाहते-चाहते वह भारत को ही कमजोर करने में क्यों जुट गए हैं। क्यों ऐसी सियासत कर रहे हैं जिसका फायदा पाकिस्तान उठा रहा है, देश के विरोधी उठा रहे हैं। आखिर ऐसा क्यों है कि मोदी विरोध में यह लोग देश का भी विरोध करने लगे हैं।

भाइयो और बहनो, जब देश में मजबूत सरकार होती है तो जय जवान भी होता है और जय किसान भी होता है। यह मजबूत सरकार का ही परिणाम है कि किसानों के लिए सीधी मदद की एक ऐतिहासिक योजना बनाई गई। पीएम किसान सम्मान निधि के माध्यम से हर 4 महीने बाद देश के 12 करोड़ किसानों को 2000 रुपये की सीधी मदद बैंक खाते में मिलनी शुरू हो चुकी है। इसमें आंध्र प्रदेश के भी लगभग 78 लाख ऐसे किसान परिवारों को लाभ मिलना तय हुआ है जिनके पास 5 एकड़ से कम जमीन है। इस पैसे से अब छोटा किसान हर फसल के लिए बीज, खाद, दवा, ऐसी चीजें खरीद पाएगा। हर वर्ष में प्रतिवर्ष 75 हजार करोड़ रुपए सीधे किसान के खाते में पहुंचने वाले हैं..और यह भी मैं बताऊं...अभी तो यह शुरुआत है।

साथियो, हमारे देश में साढ़े सात हजार किलोमीटर से ज्यादा समुद्र तट है। यह बहुत बड़ी क्षमता है जिसका बीते दशकों में पूरा इस्तेमाल नहीं हुआ। अपनी इस शक्ति का उपयोग करने के लिए भाजपा सरकार Ports for Prosperity के मंत्र के साथ आगे बढ़ रही है। हमारे बंदर समृद्धि के प्रवेश द्वार हैं। सागरमाला जैसा प्रोजेक्ट इसी विजन की एक झलक है। इस प्रोजेक्ट पर 2035 तक की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए काम किया जा रहा है। फिशरीज सेक्टर को ध्यान में रखते हुए ही हमने उससे जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को भी विकसित करने का काम किया है। इसी सोच के साथ नए हार्बर बनाए जा रहे हैं, फिश लैंडिंग सेंटर बनाए जा रहे हैं।

साथियोब्लू रिवॉल्यूशन योजना के तहत केंद्र सरकार मछुआरे भाई-बहनों के ट्रॉलर को डीप सी फिशिंग बोट में अपग्रेड करने का अभियान भी चला रही है इस काम के लिए सरकार द्वारा आर्थिक मदद भी मुहैया कराई जा रही है। इस अपग्रेडेशन की वजह से अब समुद्र के बीच में जाकर मछली पकड़ना संभव हुआ है और मछुआरों की आय भी बढ़ रही है। डीप सी फिशिंग को प्रोफेशनल ढंग से करने के लिए केंद्र सरकार मछुआरे भाइयों की ट्रेनिंग भी करा रही है। मछुआरे भाई-बहनों को सैटेलाइट के द्वारा इसरो की मदद से बना नाविक डिवाइस देने का काम भी तेजी से चल रहा है। नाविक डिवाइस ना सिर्फ मछुआरों को फिशिंग जोन के बारे में बताता है बल्कि उन्हें चक्रवात, सुनामी की वार्निंग भी देता है। नाविक की मदद से मछुआरों के रास्ता भटकने की आशंकाओं में बहुत कमी आ रही है।

केंद्र सरकार ने हाल ही में मछली के व्यवसाय से जुड़े साथियों के लिए कुछ और बड़े फैसले लिए हैं। इस बजट में ऐलान किया गया है कि मछली के व्यवसाय की जरूरतों के लिए अलग से एक डिपार्टमेंट बनाया जाएगा। सरकार ने साढ़े सात हजार करोड़ रुपए का एक फंड भी बनाया है जो मछली पालन से जुड़ी तमाम आवश्यकताओं पर ध्यान देगा। इसके अलावा मछली पालन से जुड़े लोगों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से कर्ज की सुविधा भी शुरू की गई है। अब अपने काम के लिए मछुआरे बहन-भाइयों को दूसरे लोगों से कर्ज लेने पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

साथियो, हमारे मध्यम वर्ग के लिए भी ऐतिहासिक ऐलान इस बार के बजट में किया गया है। देश के इतिहास में पहली बार 5 लाख तक की टैक्सेबल इनकम पर टैक्स को जीरो कर दिया गया है। ये उन ईमानदार टैक्सपेयर्स के प्रति आभार है जिनके कारण गरीबों को अपना घर मिल रहा है। आयुष्मान भारत के माध्यम से 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिल रहा है, मुफ्त एलपीजी कनेक्शन मिल रहा है। एक तरफ बेईमानी करने वालों को हम सजा दे रहे हैं वहीं दूसरी तरफ ईमानदारी का सम्मान कर रहे हैं।

भाइयो और बहनो, मध्यम वर्ग का एक बड़ा सपना होता है कि वो अपना एक घर खरीद सके। हमने इसमें भी उनकी मदद की है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मध्यम वर्ग को 5 से 6 लाख तक की बचत होम लोन में हो रही है।

हाल में एक और बहुत बड़ा फैसला हुआ है। अंडर कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी पर जीएसटी रेट घटाकर 12% से सिर्फ 5% पर ले आए हैं। वहीं जो अफॉर्डेबल हाउस मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए बनाए जाते हैं, उन पर जीएसटी 8% से घटाकर सिर्फ 1% कर दिया गया है। इससे आंध्र प्रदेश समेत पूरे देश के मध्यम वर्ग के साथियों को बहुत लाभ होने वाला है

भाइयो और बहनो, देश वही हैसाधन वही हैसंसाधन वही हैअफसर वही है, दफ्तर वही है, उसके बावजूद भी ऐसा क्या कारण है कि आज बड़े-बड़े फैसले लेना संभव क्यों हो पा रहा है। इसके पीछे किसकी ताकत है...इसके पीछे किसकी ताकत है...इसके पीछे किसकी ताकत है...इसके पीछे मोदी की ताकत नहीं है, इसके पीछे आपका एक वोट है...वही वोट जिसने 2014 में एक मजबूत केंद्र सरकार बनाई थी। 2014 के उस जनादेश को आपको और मजबूत करना है ताकि देश के विकास की गति इससे भी तेज हो सके।

आप इतनी भारी संख्या में हम सबको आशीर्वाद देने के लिए आए, इसके लिए मैं फिर एक बार आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं। लेकिन आप सबसे आग्रह करता हूं कि हमारे देश के वीर-जवानों के सम्मान मेंभारत के पराक्रमी जवानों के सम्मान में आप अपने मोबाइल फोन की फ्लैश लाइट ऑन करके, चारों तरफ लाइट जला कर के देश के वीरों का सम्मान कीजिए। देश के वीरों का गौरव कीजिए और मेरे साथ बोलिए भारत माता की...जय, भारत माता की...जय, भारत माता की...जय, वंदे-मातरम, वंदे-मातरम, वंदे-मातरम, वंदे-मातरम। बहुत-बहुत धन्यवाद।

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Text of PM’s address during inauguration of the Swami Vivekananda Cultural Youth Centre-Viveka Smaraka in Mysuru
August 01, 2026

एल्लरिगू नन्ना नमस्कारगलु।

रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशनबेलूर मठ के अध्यक्ष परम पूज्य स्वामी गौतमानंद जी महाराज, श्री रामकृष्ण आश्रम, मैसुरू के अध्यक्ष पूज्य स्वामी मुक्तिदानंद जी, रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन के ट्रस्टी पूज्य स्वामी यादवेंद्रानंद जी, राज्यपाल श्री थावरचंद गहलोत जी, मुख्यमंत्री श्री डी.के. शिवकुमार जी, सांसद यदुवीर कृष्णदत्त चामराज वाडियार जी, विधायक विजयेंद्र येदियुरप्पा जी, के. हरीश गौड़ा जी, अन्य महानुभाव, पूज्य संतगण और भाईयों और बहनों।

सर्वप्रथम मैं मैसूरू की अधिष्ठात्री देवी मां चामुंडेश्वरी को प्रणाम करता हूं। अभी दो दिन पहले ही हम सभी ने गुरू पूर्णिमा भी मनाई है। आप सब जानते हैं, मेरी यात्रा जहां से शुरू हुई और आज मैं जहां हूं, इसमें राम कृष्ण मिशन का बहुत अहम योगदान है। मैं तीन महीने पहले हावड़ा में बेलूर मठ गया था। सभी पूज्य संतों से सतसंग करने का अवसर मिला था। मेरा सौभाग्य है कि आज मुझे फिर मैसूरू में श्री रामकृष्ण आश्रम से जुड़े संतों से, मेरे गुरू बंधुओं से मिलने का, उनसे आशीर्वाद लेने का अवसर मिला है। आप सभी की उपस्थिति की वजह से, आज मैसूरू की इस पवित्र भूमि पर मुझे एक अलग ही ऊर्जा अनुभव हो रही है। मैं आप सभी संतों के चरणों में सादर प्रणाम करता हूं।

साथियों,

मैसूरू भारत की अनादि सांस्कृतिक चेतना का केंद्र रहा है। यहां के मंदिर, यहां की परंपराएं और उत्सव, मैसूरू का दशहरा, यहां के भव्य महल, इसका संगीत और साहित्य, भारत की विरासत इस शहर के कण-कण में रची बसी है। और यह देखकर बहुत संतोष मिलता है। इस शहर ने इस विरासत को उसी कुशलता से सहेजा भी है, संवारा भी है। श्री रामकृष्ण आश्रम और स्वामी विवेकानंद जी की स्मृतियां भी मैसुरू की विरासत का ही एक समृद्ध हिस्सा हैं। कुछ देर पहले मैं उस ऐतिहासिक भवन में भी गया था, जहां स्वामी विवेकानंद जी ने अपने प्रवास के दौरान कुछ समय बिताया था। कर्नाटका के कितने ही विद्वान और मनीषी इस स्थान से जुड़े रहे हैं। राष्ट्रकवि कुवेम्पु जैसे महापुरुष जब मैसुरू में थे, उनका भी श्रीरामकृष्ण आश्रम से गहरा जुड़ाव था। आज स्वामी विवेकानंद कल्चरल यूथ सेंटर, यानी विवेका स्मारका के उद्घाटन के जरिए, हम इस मिशन को नया विस्तार दे रहे हैं। इसके लिए मैं श्रीरामकृष्ण आश्रम और इससे जुड़े सभी विद्वानों को हार्दिक बधाई देता हूं।

साथियों,

व्यक्ति से विभूति का निर्माण एकाएक नहीं होता। इसके लिए हमें जीवन की अनगिनत परीक्षाएँ देनी होती हैं। साधना करनी होती है, तप करना होता है, खुद को तपाना पड़ता है, खपाना पड़ता है। ख्याति के बाद तो संसार पीछे खड़ा होता है। लेकिन, तप के समय महान विभूतियों को पहचानना आसान नहीं होता। जो साधक को तपस्या में पहचानता है, वो उसकी सिद्धि का सहभागी भी होता है।

इसलिए भाइयों बहनों,

स्वामी विवेकानंद के जीवन में मैसुरू का इतना अहम योगदान था। करीब 130 वर्ष पहले, स्वामी जी, एक युवा संन्यासी के रूप में भ्रमण करते हुए मैसुरू आए थे। तब उनकी प्रसिद्धि वैसी नहीं थी। लेकिन, विचार उतने ही ऊंचे थे। उस समय उन्हें जिन लोगों ने पहचाना, जो उनके साथ जुड़े, उनमें से एक प्रमुख नाम मैसुरू के तत्कालीन महाराजा का भी था। जब स्वामी विवेकानंद जी अमेरिका में थे, तो उन्होंने वहाँ से मैसुरू के तत्कालीन महाराजा को एक पत्र लिखा था। उसमें उन्होंने स्वयं महाराजा के सहयोग का उल्लेख किया था।

साथियों,

स्वामी विवेकानंद जी ने भारतीय चेतना को आत्मसात किया था। उन्होंने शास्त्रों को आत्मसात किया था जो कहते हैं- “परं परोपकारार्थं यो जीवति स जीवति”। अर्थात्, वास्तव में वही जीता है जो दूसरों के लिए जीता है। इसी मंत्र पर चलते हुए, मैसुरू के इस श्री रामकृष्ण आश्रम ने पिछले वर्ष अपने सौ साल पूरे किए हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी सेवाएँ हों, या प्राकृतिक आपदा में राहत कार्य, श्री रामकृष्ण आश्रम ने स्वामी विवेकानंद जी की विरासत को जीवंत रखा है। मुझे विश्वास है विवेका स्मारका साधकों और श्रद्धालुओं के लिए आत्मिक उत्थान का तीर्थ बनेगा। स्वामी विवेकानंद जी की प्रेरणा थी- ‘शिव ज्ञाने जीव सेवा’। यानी जीव की सेवा ही शिव की सेवा है। हमें इस विवेका स्मारक में इसलिए, ऐसे युवाओं को गढ़ना है, जिनके लिए समाज और राष्ट्र के हित, गरीब-वंचित के दुःख, अपने सुख-दुःख से ऊपर हों। जिन युवाओं के लिए राष्ट्र प्रथम ही सर्वोपरि मंत्र हो, मां भारती की सेवा ही जिनका जीवन लक्ष्य हो।

साथियों,

स्वामी विवेकानंद जी युवाओँ की शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का मजबूत आधार मानते थे। उन्होंने स्वयं ये देखा था कि कैसे दुनिया के देश अपने युवाओं को शिक्षित बना रहे हैं। लेकिन दुर्भाग्य से तब भारत गुलाम था। भारत के युवा भी गुलामी की जंजीरों में जक़ड़े हुए थे। उस दौर से लेकर अब तक, भारत के युवा ने एक लंबी यात्रा तय की है। भारत का जो युवा कभी जंजीरों में था, आज वो युवा दुनिया के विकास को गति दे रहा है।

· आज भारत की अर्थव्यवस्था, सबसे तेजी से आगे बढ़ रही है।

· किसकी वजह से? भारत के युवाओँके सामर्थ्य से।

· आज भारत में दुनिया की तीसरा सबसे बड़ा स्टार्ट-अप इकोसिस्टम है।

· किसकी वजह से? भारत के युवाओँ के सामर्थ्य से।

· आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता बन चुका है।

· किसकी वजह से?

· भारत के युवाओं के सामर्थ्य से।

· आज भारत से बने Digital Solutions, दुनिया के अनेक देशों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं।

· किसकी वजह से?

· भारत के युवाओं के सामर्थ्य से।

· आज भारत सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग की नई यात्रा पर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।

· किसकी वजह से?

· भारत के युवाओं के सामर्थ्य से।

· आज भारत AI, Deep Tech, Space Technology और Innovation के नए अध्याय लिख रहा है।

· किसकी वजह से?

· भारत के युवाओं के सामर्थ्य से।

अभी कुछ दिन पहले ही हमने देखा है, भारत के युवाओं ने अंतरिक्ष में कमाल कर दिया है। पहली बार युवाओं का बनाया हुआ एक प्राइवेट कंपनी का रॉकेट, अंतरिक्ष तक पहुंचा है। आज कोई भी सेक्टर हो, भारत युवा अपना दम-खम दिखा रहा है। हम सभी अपने आसपास देख रहे हैं, आज छोटे से छोटे व्यवसाय में लगा युवा, भारत की डिजिटल इकॉनमी को आगे बढ़ा रहा है। वो मुद्रा लोन के जरिए नई शुरुआत कर रहा है। वो देश की स्टार्टअप revolutionको लीड कर रहा है। आत्मनिर्भर भारत का अभियान हो, मेक इन इंडिया का अभियान हो, इसकी सफलता के पीछे भारत के युवाओं की ही ताकत है।

साथियों,

किसी भी देश में, युवाओं का सामर्थ्य तभी उस राष्ट्र की शक्ति बनता है, जब उसे सही अवसर मिले, जब उसे सही दिशा मिले, और जब उसे अपनी ही धरती पर बड़े सपने देखने, उन्हें पूरा करने का भरोसा मिले। और इसमें बहुत बड़ी भूमिका हमारे शिक्षा संस्थानों की होती है। मुझे खुशी है कि आज भारत में शिक्षण संस्थाओँ की संख्या लगातार बढ़ रही है। पिछले 12 वर्षों में, 650 से ज्यादा नई यूनिवर्सिटीज बनी हैं। पिछले 12 वर्षों में करीब 14 हजार नए कॉलेज बने हैं। 4 हजार से ज्यादा नई ITI बनाई गई हैं। 9 नए आई.आई.एम, 7 नई आई.आई.टी, और13 नए एम्स भी स्थापित किए गए हैं। आज देश में MBBS की सीटें करीब 1 लाख 40 हजार हो चुकी हैं। मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़कर 823 हो गई है।

साथियों,

एक ओर हम एजुकेशन इनफ्रास्ट्रक्चर को modernize कर रहे हैं। साथ ही, शिक्षा व्यवस्था को भी आधुनिक जरूरतों के हिसाब से ढाला जा रहा है। नेशनल एजुकेशन पॉलिसी, भारत के युवाओँ को 21वीं सदी के अनुरूप तैयार करने का माध्यम बन रही है।

साथियों,

स्कूली शिक्षा में भी बड़े स्तर पर काम हुआ है। देशभर में 14 हजार से ज्यादा पीएम श्री स्कूल विकसित किए गए हैं। शिक्षा केवल किताबी न रहे, बच्चों में इनोवेशन और साइंटिफिक टेंपरामेंट विकसित हो, इसके लिए,10 हजार से ज्यादा अटल टिंकरिंग लैब्स स्थापित हुई हैं।

साथियों,

स्वामी विवेकानंद जी, राष्ट्र उत्थान के लिए शिक्षा के साथ-साथ समानता को भी उतना ही अहम मानते थे। शिक्षा में भेदभाव न हो, अवसरों में भेदभाव न हो, आज ये देश का विज़न बन गया है। आज बेटियाँ भी सैनिक स्कूलों में एड्मिशन ले रहीं हैं। एनडीए में बेटियां राष्ट्र के लिए योगदान दे रही हैं। आज मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसी पढ़ाई मातृभाषा में करने की सुविधा हो गई है। इससे, भाषा के आधार पर अवसरों में होने वाले भेदभाव पर लगाम लग रही है।

साथियों,

युवा शक्ति का स्वस्थ, अनुशासित और आत्मविश्वास से भरे रहना उतना ही जरूरी है। जो देश खेलों को महत्व देते हैं, वहां के युवाओं में इन तीनों गुणों का तेजी से विकास होता है। इसलिए आज खेलों को राष्ट्र निर्माण की एक महत्वपूर्ण धारा के रूप में देखा जा रहा है। खेलो इंडिया यूथ गेम्स, यूनिवर्सिटी गेम्स, पैरा गेम्स और विंटर गेम्स जैसे आयोजनों ने देशभर के युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच दिया है। आज देशभर में आधुनिक स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार हो रहा है, खेलो इंडिया सेंटर के माध्यम से सुविधाएं बढ़ रही हैं, गांवों से लेकर छोटे शहरों तक नई प्रतिभाओं की पहचान की जा रही है।

और साथियों,

आज इस अभियान के परिणाम भी साफ - साफ दिखाई दे रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में भारत का प्रदर्शन बेहतर होता जा रहा है। हमारे खिलाड़ी नए-नए कीर्तिमान बना रहे हैं, हमारी बेटियां देश का गौरव बढ़ा रही हैं।

साथियों,

स्वामी विवेकानंद जी की तरह, हमें विवेका स्मारका, बड़े उद्देश्य के लिए कार्य करने की प्रेरणा देता है। ऐसे स्थान पर मैं हमारे युवाओं से कुछ आग्रह करना चाहता हूं।

साथियों,

मैसुरू को अक्सर भारत के सबसे स्वच्छ शहरों में स्थान मिला है। मैं इसके लिए यहां के लोगों को हृदय से बधाई देता हूं। क्या इस अवसर पर हम ये संकल्प ले सकते हैं, कि भविष्य में स्वच्छता के संकल्प को निरंतर मजबूत करते रहेंगे। हमें यहाँ की प्राकृतिक संपदाओं को संरक्षित करना चाहिए। हमें पर्यावरण से जुड़े संकल्प लेने चाहिए। हमें पानी की हर बूंद बचाने के लिए मिशन मोड में काम करना होगा।

साथियों,

आज ही यहां ‘वाल्मीकि रामायण’ के कन्नड़ा अनुवाद का विमोचन भी हुआ है। मैं कन्नड़ा भाषा से जुड़ी एक अपील भी करना चाहता हूं। कर्नाटका महान लेखकों और कवियों की धरती है। कन्नड़ा भाषी लोग हमेशा से पढ़ने की संस्कृति के लिए जाने जाते हैं। स्मार्टफोन के इस युग में इस स्वभाव को और बढ़ावा मिलना चाहिए। क्या हम युवा पीढ़ी को कन्नड़ा साहित्य से गहराई से जुड़ने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

साथियों,

मैसुरू अपने सिल्क, चंदन और हस्तशिल्प के लिए प्रसिद्ध है। जब भी हम किसी को उपहार दें, तो क्या हम ये सुनिश्चित कर सकते हैं कि वो किसी भारतीय के हाथों और पसीने से बनी चीज हो? इससे हमारी संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही, एक और परिवार को आर्थिक सहायता भी मिलेगी।

साथियों,

स्वामी विवेकानंद जी ने जिस तरह के भारत का सपना देखा था, उसे पूरा करने का दायित्व आज की पीढ़ी पर है। मुझे विश्वास है, विवेका स्मारका इसके लिए एक ऊर्जा स्रोत का काम करेगा। मैं एक बार फिर, यहां एकत्र पूज्य संतजनों गुरू बंधुओं और मैसुरू के लोगों को नमन करते हुए मेरी वाणी को विराम देता हूं। आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद।