With our mantra of ‘Sabka Saath, Sabka Vikas’ we continuously worked towards enhancing the quality of life of our citizens: PM Modi
While I have my performance record of having served the people of this country tirelessly, the ‘Mahamilawati’ leaders have nothing but their falsehood campaigns to rely on: PM Modi in M.P.
The Congress government here has given a free pass to hooligans and anti-social elements and hence crime is rapidly rising in M.P. : Prime Minister Modi

 

भारत माता की...जय

भारत माता की...जय

भारत माता की...जय

खंडवा के लोग बहुत ही समझदार हैं, बहुत ही सुलझे हुए हैंमेरी एक प्रार्थना स्वीकार करोगे? ये जो पंडाल पे चढ़ गए हैं उनसे मेरी हाथ जोड़ के विनती है आप नीचे आइए। उधर भी सब ऊपर जो हैं आप नीचे आ जाइए। देखिए आपको अगर कुछ हुआ तो मुझे इस विजय का आनंद नहीं आएगा। बहुत धन्यवाद, बहुत समझदार लोग हैं आप।  

बोलो ओंकार महाराज की जय, नर्मदा मैया की जय, सिंगाजी महाराज की जय, ब्रह्मगीर महाराज की जय, धूनीवाले दादा जी की जय। निमाड़ का, खंडवा का, हमेशा से मुझ पर भरपूर प्यार रहा है। आपका यही आशीर्वाद मेरी ताकत बना है और इसीलिए आज पूरा देश कह रहा है, फिर एक बार...मोदी सरकार, पूरा देश कह रहा है, फिर एक बार...मोदी सरकार।  

 

साथियो, इस प्यार और विश्वास के दो स्पष्ट कारण हैं। एक मोदी का ट्रैक रिकॉर्ड और दूसरा कांग्रेस और उसके महामिलावटियों का टेप रिकॉर्डर। मैं 5 वर्ष की अपनी ईमानदारी और निष्ठा को लेकर मैदान में हूं और महामिलावटी झूठ, प्रपंच इसके आधार पर चुनाव लड़ रहे हैं। मेरे साथ मेरे काम हैं और उनके साथ उनके कारनामे हैं।

साथियो, देखिए दोस्तों अब ये जगह कहीं बची नहीं है, अब कहां जाओगे, आप दूर भी हैं फिर भी मैं आपका प्यार अनुभव कर सकता हूं। आपको आगे आने की कोई कोशिश नहीं करनी चाहिए। आपका इतना प्यार ही तो मुझे यहां तक खींच के लाया है। जब मैं आपके पास आया हूं तो आप पीछे से आगे आने की कोशिश मत कीजिए। शांति से खड़े रहेंगे? खड़े रहेंगे? देखिए, आपका ये प्यार, ये उत्साह, ये जोश, ये अपनापन सब कुछ मेरी सिर-आंखों पर लेकिन, अब मैं बोलना शुरू करूं? आपका प्यार इतना है अब करें तो क्या करें? रोक भी नहीं सकते आपको। ये आपका प्यार, ये आपका उत्साह उन लोगों की नींद खराब कर रहा है। तीसरे चरण के बाद, उनका चेहरा देखा है की नहीं देखा है? तीसरे चरण में ही पता चल गया उनका खेल। भाइयो बहनो, यहां कांग्रेस ने किसानों से उनका कर्जमाफ करने को कहा था ना, क्यों ठंडे पड़ गए आप लोग, कांग्रेस ने कर्ज माफ करने के लिए कहा था की नहीं कहा था? 10 दिन में कर्ज माफ करने को कहा था, कि नहीं कहा था? एक से दस की गिनती मध्य प्रदेश को सिखाई थी कि नहीं सिखाई थी और कर्ज माफ नहीं तो सीएम को माफ नहीं करेंगे कहा कि नहीं कहा? दस दिन पूरे हो गए क्या। 20 दिन हो गए, 40 दिन हो गए, 80 दिन हो गए, 120 दिन हो गए। हुआ क्या? किसानों का कर्ज माफ हुआ क्या? कांग्रेस के झूठ और वादाखिलाफी की यह जीती जागती सच्चाई है और इस बार सिर्फ मध्य प्रदेश कांग्रेस को साफ करेगा ऐसा नहीं, लेकिन कांग्रेस के इस कारनामों के कारण मध्य प्रदेश की खबर पूरे हिंदुस्तान में पहुंच गई है इसलिए पूरे हिंदुस्तान में मध्य प्रदेश उनको हरा रहा है, पूरे हिंदुस्तान में क्योंकि हमारा देश गलती माफ करता है, झूठ और विश्वासघात को कभी माफ नहीं करता है। यही इनके 70 साल से काम करने का तरीका है। पहले वोट के लिए झूठ बोलो, जैसे-तैसे सरकार बनाओ और जब जनता सवाल करे तो कह दो झूठ बोला तो बोला, हुआ तो हुआ। आपने देखा ना कांग्रेस के एक नेता ने क्या कहा, हुआ तो हुआ यानी कुछ लेना देना ही नहीं, हुआ तो हुआ, झूठ बोला तो बोला, किसान को मूर्ख बनाया तो बनाया।

साथियो, यह चुनाव गरीबों के लिए दिन रात मेहनत करने वाले हम लोग और हमारे सामने अहंकार में डूबकर हर बात पर हाथ ऊपर कर देना और यही कहना, हुआ तो हुआ। हमारे सामने ये लोग हैं जो हुआ तो हुआ की सोच रखते हैं। हमने गांव-गांव तक सड़क पहुंचाने का काम किया। दूर-सुदूर को नेशनल हाईवे और रेलवे से जोड़ने का काम किया। हर गरीब परिवार को अपना पक्का घर मिले, हर बहन, बेटी को शौचालय की सुविधा मिले। गांव-गांव, घर-घर तक बिजली पहुंचे। हर गरीब बहन के घर पर रसोई का चूल्हा, रसोई का गैस चूल्हे में पहुंचे। हर गरीब परिवार को हर वर्ष 5 लाख रुपए तक का मुफ्त में इलाज मिले। इसके लिए हमने पांच साल पूरी ईमानदारी से दिन-रत काम किया है और यही सबका साथ-सबका विकास है, जिस पर हमारा विश्वास है।

भाइयो और बहनो, लेकिन कांग्रेस वालों की क्या सच्चाई है, ये भी जान लीजिए 1984 में सिखों के साथ अत्याचार हुआ, कत्लेआम हुआ और ये कहते हैं हुआ तो हुआ, हुआ...तो हुआ। और जो 84 के दंगों में जनता की नजरों में गुनहगार है। जिसको पंजाब कांग्रेस का प्रभारी बनाया तो पंजाब कांग्रेस ने हाथ जोड़ करके कहा इसको ले जाओ वरना पंजाब में हम खत्म हो जाएंगे। तो वहां से ले गए आपके ऊपर थोप दिया, मुख्यमंत्री बना दिया, ये है कांग्रेस। भोपाल में हजारों लोगों को जहरीली गैस के हवाले कर दिया गया, कई पीढ़ियों को बर्बाद कर दिया गयाइस कांड के गुनहगार को भगा दिया गया, सरकारी विमान में ले जाया गया। अगर आज उनको पूछोगे की हजारों लोगों को मरवा दिया तो ये तो यही कहेंगे हुआ...तो हुआ, हुआ...तो हुआ। लोग मरे तो मरे इनको कोई लेना देना ही नहीं है।

साथियो, 2014 से पहले इनकी कमजोरी के कारण, तुष्टिकरण की नीति के कारण आतंकवाद ने हजारों जाने लीं। आज ये कह रहे हैं, हुआ...तो हुआ, हुआ...तो हुआ, हुआ...तो हुआ।

भाइयो और बहनो, देश के मशहूर गायक किशोर कुमार जी तो इसी धरती के सपूत थे। और जब भी किशोर कुमार का नाम आता था तो लोग खंडवा का जिक्र जरूर करते थे और बड़े गर्व से करते थे। इमरजेंसी के दौरान वे कांग्रेस के दबाव में नहीं आए वो अपने उसूलों पर अड़े रहे। कांग्रेस ने आपातकाल में देश को जेल खाना बना दिया था। वो उनको मंजूर नहीं था, बदले में ये कांग्रेस ने खंडवा के सपूत किशोर दा के गानों पर रेडियो पर बजाने पर रोक लगा दी थी, तब तो टीवी नहीं था रेडियो था, बंद कर दिया था। अगर आज खंडवा का कोई व्यक्ति कांग्रेस को पूछेगा की भाई तुम वोट लेने तो आए हो, तुम्हें हमारा वोट तो चाहिए लेकिन क्या किशोर कुमार खंडवा के थे? तुमने किशोर कुमार के साथ ये किया था? तो जवाब में क्या कहेंगे, अरे छोड़ो यार हुआ तो हुआयही कहेंगे ना, हुआ तो हुआ, हुआ तो...हुआ, हुआ तो...हुआ।   

भाइयो बहनो, इनके काम करने का तरीका क्या है? ये भी समझिए। पाकिस्तान के पाले पोसे आतंकी, जब यहां हमला करते थे तो ये निर्दोषों को जेलों में ठूंस देते थे। भाइयो और बहनो, हिन्दू आतंकवाद का कुतर्क गढ़ने के लिए, हमारी महान परंपरा को बदनाम करने का जो गंभीर षडयंत्र और वो भी सिर्फ और सिर्फ वोटबैंक की राजनीति करने के लिए इन्होंने किया है, उसी का जवाब आज इनको मिल रहा है। ये कितने भी हवन करा दें, ये कितने भी जनेऊ दिखा दें, ये पुलिस को भगवा ड्रेस भी सिलवा दे, लेकिन भगवा में जो आतंक के दाग लगाने की इन्होंने कोशिश की है,साजिश की है। उस पाप से ये कांग्रेस या महामिलावटी कभी नहीं बच पाएंगे, भाइयो।

भाइयो और बहनो, इन खोटी नीयत वालों से सावधान रहना जरूरी हैइनको अगर जरा भी मौका मिला तो ये भारत की रक्षा-सुरक्षा को खतरे में डाल देंगे। भाइयो और बहनो, देश सुरक्षित नहीं होगा तो विकसित भी नहीं होगा। विकास के लिए पहली शर्त सुरक्षा होती है। मिलावटी सरकार, खिचड़ी सरकार तो सुरक्षा बिल्कुल नहीं दे सकती। आप यहां मध्य प्रदेश में ही देख लीजिए। यहां एक ही पार्टी के ढाई सीएम हैं, ढाई, 2.5। प्रशासन को पता ही नहीं चलता कि किसका आदेश मानना है। गुंडों, हत्यारों और डकैतों को खुला लाइसेंस दिया गया है। अपने-अपने गुटों के हित में यहां प्रशासन का इस्तेमाल किया जा रहा है। उद्योगों के नाम पर एक ही उद्योग चल पड़ा है, तबादला उद्योग, ट्रांसफर उद्योग। जब एक ही दल की खिचड़ी में ये हाल हो सकता है तो दिल्ली में 2 दर्जन लोगों की खिचड़ी का ये क्या गुल खिलाएंगे, देश का क्या हाल करेंगे ये मध्य प्रदेश वाले आसानी से समझ सकते हैं।

साथियो, इनकी नीयत में खोट है इसलिए बहाने बनाते हैं, आपसे झूठ बोलते हैं। असल में आपका पैसा इन्होंने चुनाव प्रचार में उड़ा दिया है। केंद्र से आदिवासी बहनों और बच्चों के पोषक आहार के लिए जो पैसा भेजा गया था, वो भी इन्होंने नामदारों को चुनाव प्रचार के लिए दे दिया। पूरे देश ने तुगलक रोड चुनाव घोटाले का सच देखा है। कांग्रेसियों के घर से कैसे नोटों से भरे बोरे मिले हैं ये तो टीवी वालों ने दिखाया है। झूठ और भ्रष्टाचार के इसी खेल को कांग्रेस ने कई दशकों से शिष्टाचार बनाया हुआ है।

साथियो, नेक नीयत क्या होती है? ये मैं आज आपको बताता हूं। हमने इसी साल एक फरवरी को देश के 12 करोड़ छोटे किसानों के खाते में हर वर्ष 75 हजार रुपए सीधे जमा करने की योजना का ऐलान किया। सिर्फ तीन हफ्ते बाद, हमने इस योजना की शुरुआत भी कर दी और आज देश के करोड़ों किसान परिवारों के खाते में पैसे जमा हो रहे हैं। लेकिन मध्य प्रदेश के किसानों को इसका उतना लाभ नहीं मिल पाया। क्यों? क्योंकि यहां की कांग्रेस सरकार ने उन किसानों की लिस्ट ही नहीं भेजी, जिनके खाते में पैसे जमा कराने हैं।

भाइयो और बहनो, जो धोखा, जो फरेब कांग्रेस ने किसानों और नौजवानों के साथ किया है, वही झूठ और अफवाह फैलाने का काम जनजातीय परिवारों में भी किया जा रहा है। बीते पांच वर्ष से दिल्ली में भाजपा की सरकार है। 15 वर्ष तक यहां भारतीय जनता पार्टी की सरकार रही है लेकिन हमने आदिवासियों की जमीन पर आंच नहीं आने दी। जब तक और मेरे ये शब्द लिखते रहिए जब तक मोदी है, जब तक भारतीय जनता पार्टी है तब तक आदिवासी अधिकारों को खरोंच तक नहीं आने दी जाएगी।

साथियो, ये फिर इसी फिराक में हैं की आज झूठ बोलकर आपसे वोट कैसे मार लेना। याद रखिए, इन्होंने छत्तीसगढ़ में आदिवासियों के लिए चने और नमक की योजना को बंद कर दिया। इन्होंने छत्तीसगढ़ में पांच लाख के मुफ्त इलाज की योजना को बंद किया। ये अब यहां भी आदिवासियों को पिछड़ो को मिलने वाली मदद को रोकने की योजना बना रहे हैं। आदिवासियों को मदद बंद होने के बाद ये कहेंगे क्या कहेंगे, क्या कहेंगे, क्या कहेंगे, क्या कहेंगे? देखिए खंडवा के लोगों को समझाना ही नहीं पड़ रहा हैं, सब समझ जाते हैं।

भाइयो और बहनो, इन महामिलावटी लोगों द्वारा की जा रही साजिशों के बीच, बीते 5 वर्ष देश के हर वर्ग, हर क्षेत्र के लिए जी-जान से हमने काम किया हैं। आदिवासी क्षेत्रों में एकलव्य मॉडल स्कूल का नेटवर्क खड़ा किया जा रहा हैं। आदिवासी युवाओं के खेल कौशल को विकसित करने के लिए हम विशेष ध्यान दे रहे हैं। भाइयो और बहनो, रोजगार निर्माण के लिए हम पर्यटन पर विशेष बल दे रहे हैं। विशेष तौर पर जो हमारी धरोहर है जो खंडवा में भी अनेक हैं उनको सजाया-संवारा जा रहा है। वहां सुविधाओं का विकास किया जा रहा है, इसके अलावा मुद्रा योजना के माध्यम से जो बिना गारंटी के ऋण दिया जा रहा है, वो पर्यटन से जुड़े व्यवसाय को और मजबूत कर रहा है। वहीं रेल और रोड की कनेक्टिविटी सुधरने से पर्यटन को भी मदद मिलनी तय है।

साथियो, एक और काम जो हम पूरी क्षमता से हम कर रहे हैं ये काम है बिजली उत्पादन का। यहां तो मैं 2015 में पावर प्लांट आपको सौंपने के लिए आया था। तब भी मैंने विस्तार से अपनी योजना का जिक्र किया था। अब हम सौर और पवन ऊर्जा को बल दे रहे हैं। इसमें हम दुनिया की अगुवाई कर रहे हैं।

साथियो, ऐसे अनेक संकल्पों को हम सभी मिल कर मजबूत करेंगे, इसके लिए खंडवा सहित पूरे निमाड़ क्षेत्र और पूरे मध्य प्रदेश को फिर से मजबूती से कमल खिलाना है। कमल पर पड़ा हर वोट, भाइयो बहनो, आप मुझे बताइए, आज देश मजबूत है की नहीं है? और ज्यादा मजबूत होना चाहिए की नहीं होना चाहिए? घर में घुसकर के मारने की ताकत होनी चाहिए की नहीं होनी चाहिए? घर में घुसकर के मरना चाहिए की नहीं मारना चाहिए? इसके लिए देश को और मजबूत बनाना चाहिए कि नहीं बनाना चाहिए? देश मजबूत बनाने के लिए इस चुनाव में बूथ मजबूत बनाना है कि नहीं बनाना है, बूथ मजबूत बनाना है कि नहीं बनाना है? बूथ मजबूत बनाओगे ?घर-घर जाओगे? मतदाताओं से मिलोगे? कमल के निशान पर वोट दबाने के लिए समझाओगे, देश की रक्षा की बात करोगे, देश की विकास की बात करोगे? आदिवासीयों के कल्याण की बात करोगे, दलित पीड़ित शोषित वंचित का भला करने की बात करोगे? उनको प्रेम से मतदान बूथ तक लेजोगे, उनका मतदान करवाओगे, जल पान से पहले मतदान करवाओगे, मतदान के बाद जलपान होगा?  भारतीय जनता पार्टी जीतेगी, आपका बूथ जीतेगा, आपका वोट कमल पे पड़ेगा? इतना आपका उत्साह है तो विजय निश्चित है और मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कमल पर पड़ा हर वोट मोदी के खाते में जाएगा। आप इतनी बड़ी संख्या में हमें आशीर्वाद देने के लिए आए, मैं आपका बहुत बहुत आभारी हूं। दोनों मुट्ठी बंद कर के पूरी ताकत से बोलिए…भारत माता की...जय।

आवाज आज भोपाल में खास सुनाई देनी चाहिए।

भारत माता की...जय

भारत माता की...जय

भारत माता की...जय

बहुत बहुत धन्यवाद।  

 

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Text of PM's remarks during ‘Karmayogi Sadhana Saptah’
April 02, 2026
The core principle of governance we are following today is ‘Nagrik Devo Bhava” with focus on making public services more capable, more sensitive to citizens: PM
Today's India is aspirational, every citizen has dreams and goals, and upon all of us lies the responsibility to provide maximum support to fulfil them: PM
Before every decision, when we think what our duty demands, the impact of our decisions will multiply many times over by itself : PM
We must view our current efforts against the larger canvas of the future, how one decision can change lives of many citizens, how our individual transformation can lead to institutional transformation: PM
A better administrator, a better public servant, will be one who possesses a strong understanding of technology and data, this will form the very basis of decision-making: PM
We have to break silos and move forward with better coordination, shared understanding and a whole-of-government approach, only then will every mission succeed: PM

प्रिंसिपल सेक्रेटरी श्री पी. के. मिश्रा जी, कर्मयोगी भारत के चेयरमैन श्री एस. रामादोरई जी, कपैसिटी बिल्डिंग कमीशन की चैयरपर्सन एस. राधा चौहान जी, अन्य महानुभाव, देवियों और सज्जनों !

कर्मयोगी साधना सप्ताह के इस आयोजन के लिए आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं। 21वीं सदी के इस कालखंड में तेजी से बदलती व्यवस्थाएं, तेजी से बदलती दुनिया और उनके बीच उसी रफ्तार से आगे बढ़ता हमारा भारत, इसके लिए पब्लिक सर्विस को समय के अनुरूप निरंतर अपडेट करना जरूरी है। कर्मयोगी साधना सप्ताह, उसी प्रयास की एक अहम कड़ी है। आप सभी परिचित हैं, आज गवर्नेंस के जिस सिद्धांत को लेकर हम आगे बढ़ रहे हैं, उसका मूल मंत्र है- नागरिक देवो भव:। इस मंत्र में समाहित भावना के साथ आज पब्लिक सर्विस को ज्यादा capable, नागरिकों के लिए ज्यादा sensitive बनाने पर फोकस किया जा रहा है। अब शासन को citizen-centric बनाकर एक नई पहचान दी जा रही है।

साथियों,

सफलता का एक बड़ा सिद्धांत ये भी है कि दूसरों की लकीर छोटी करने के बजाय, अपनी लकीर बड़ी करो। हमारे देश में आजादी के बाद से कई तरह संस्थाएं अलग-अलग फोकस के साथ काम कर रही थीं, लेकिन आवश्यकता थी एक ऐसी संस्था की, जिसका फोकस Capacity Building हो, जो सरकार में काम करने वाले हर कर्मचारी, हर कर्मयोगी का सामर्थ्य बढ़ाए। इसी सोच ने Capacity Building Commission-CBC को जन्म दिया। आज CBC के स्थापना दिवस पर ये नई शुरुआत, और iGOT मिशन कर्मयोगी की सफल भूमिका हमारे प्रयासों को कई गुना ऊर्जा दे रहे हैं। मुझे विश्वास है, इन प्रयासों से हम आधुनिक, सक्षम, समर्पित और संवेदनशील कर्मयोगियों की टीम बनाने में सफल होंगे।

साथियों,

कुछ सप्ताह पहले जब सेवा तीर्थ का लोकार्पण हो रहा था, तब भी मैंने आपके समक्ष विस्तार से विकसित भारत के संकल्प की चर्चा की थी। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए हमें फास्ट इकोनॉमिक ग्रोथ चाहिए, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी चाहिए, हमें देश में बड़ी संख्या में skilled workforce तैयार करने होंगे, और इन लक्ष्यों की सफलता में हमारे पब्लिक इंस्टीट्यूशंस और पब्लिक सर्वेंट्स की भूमिका बहुत अहम है। हम सभी देख रहे हैं, महसूस भी कर रहे हैं कि आज का भारत कितना आकांक्षी है, Aspirational है। हर देशवासी के पास उसके अपने सपने हैं, अपने लक्ष्य हैं, और हम सभी पर उन सपनों को पूरा करने के लिए ज्यादा से ज्यादा सपोर्ट का दायित्व है। हमारी गवर्नेंस ऐसी हो कि देश के नागरिकों की Ease of Living, Quality of Life दिनों-दिन बेहतर होनी चाहिए, यही हमारी कसौटी है। और इसके लिए आपको हर दिन नया सीखने की जरूरत है, आपको कर्मयोगी की भावना में खुद को ढालने की जरूरत है।

साथियों,

जब हम प्रशासनिक सेवाओं में सुधार और बदलाव की बात करते हैं, तो उसका एक आशय है- Public Servants के व्यवहार में बदलाव। ये बात हम सब जानते हैं कि पुरानी व्यवस्था में ज़ोर अधिकारी होने पर ज्यादा होता था। लेकिन आज देश का ज़ोर कर्तव्य भावना पर ज्यादा है, पद नहीं, कार्य का महत्व बढ़े। संविधान भी हमारे कर्तव्यों से ही हमें अधिकार प्रदान करता है। हर फैसले से पहले, जब आप ये सोचेंगे कि आपकी duty क्या कहती है, तो आपके फैसलों का impact अपने आप कई गुना बढ़ जाएगा, और मैं आपसे एक बात फिर दोहराउंगा, हमें हमारे वर्तमान प्रयासों को भविष्य के एक बड़े canvas पर देखना चाहिए। 2047, विकसित भारत, यही canvas है हमारा, यही लक्ष्य है। हम आज जो काम कर रहे हैं, इसका असर देश की विकास यात्रा पर क्या होगा, हमारे एक निर्णय से कितने नागरिकों का जीवन बदल सकता है। हमारा एक individual transformation कैसे institutional transformation बन सकता है। ये प्रश्न हमारे हर प्रयास का हिस्सा होना चाहिए। अपने अनुभव से मैं ये कह सकता हूँ, इसके लिए आपको बहुत ऊर्जा चाहिए होती है, ये ऊर्जा हमें केवल और केवल सेवाभाव से मिल सकती है।

साथियों,

जब हम लर्निंग की बात करते हैं, तो आज के परिप्रेक्ष्य में टेक्नोलॉजी का महत्व बहुत बढ़ जाता है। आप सब देख रहे हैं, बीते 11 वर्षों में शासकीय और प्रशासकीय कामों में किस तरह टेक्नोलॉजी का इंटिग्रेशन हुआ है। हमने गवर्नेंस और डिलीवरी से लेकर इकोनॉमी तक, tech-revolution की ताकत देखी है। अब AI की दस्तक के बाद ये बदलाव और तेज होने वाला है। इसलिए, टेक्नोलॉजी को समझना और उसका सही उपयोग करना, ये पब्लिक सर्विस का एक जरूरी हिस्सा बन चुका है। अब बेहतर एड्मिनिस्ट्रेटर, बेहतर पब्लिक सर्वेंट वही होगा, जिसे टेक्नोलॉजी और डेटा की समझ होगी। यही आपके डिसीजन मेकिंग का आधार बनेगा। इसलिए, AI के क्षेत्र में capacity building और निरंतर learning को facilitate करने के लिए काम हो रहा है। इसमें आप सभी की भागीदारी और सहभागिता, दोनों बहुत महत्वपूर्ण हैं। मुझे उम्मीद है, कर्मयोगी साधना सप्ताह में इस विषय पर भी उतना ही फोकस किया जाएगा।

साथियों,

हमारे फेडरल स्ट्रक्चर में देश की सक्सेस का मतलब है- राज्यों की भी कलेक्टिव सक्सेस। हमने दशकों तक देश में राज्यों का categorization देखा है, क्या-क्या सुनते थे, अगड़े राज्य, पिछड़े राज्य, बीमारू राज्य, आज हम ऐसी सभी परिभाषाओं को खत्म कर रहे हैं। हमें राज्यों के बीच हर तरह के गैप्स को भरना है, और ये तभी होगा, जब हर राज्य एक जैसी intensity से काम करेगा। हमें silos को तोड़ना है, हमें बेहतर coordination और shared understanding के साथ आगे बढ़ना होगा। इसके लिए हमें whole of government approach की जरूरत है। सरकार और ब्यूरोक्रेसी दोनों इस अप्रोच को अपनाएंगे, तो हर मिशन में सफलता मिलेगी। साधना सप्ताह के द्वारा यही सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है।

साथियों,

हमें हमेशा ये याद रखना चाहिए, सामान्य मानवी के लिए स्थानीय ऑफिस ही सरकार का चेहरा होता है। आपकी कार्यशैली, आपका व्यवहार, इससे ही लोकतंत्र और संवैधानिक व्यवस्थाओं में नागरिकों का भरोसा तय होता है। इसलिए, हम जो भी करें, जिस भी स्तर पर करें, हमें उस भरोसे को संभालकर रखना है। मैं एक बार फिर Capacity Building Commission की पूरी टीम को बधाई देता हूं। मुझे विश्वास है कि कर्मयोगी साधना सप्ताह, विकसित भारत की हमारी यात्रा में एक अहम अध्याय बनेगा।

बहुत-बहुत धन्यवाद।

नमस्कार।