பகிர்ந்து
 
Comments
Why were Congress-JD(S) leaders shedding tears for Pakistan when we attacked its terrorist camps while the entire world was standing besides us: PM Modi in Karnataka
The upcoming elections are about electing a strong government that puts the welfare of its people first: PM Modi
Nobody knows who is running the government in Karnataka because both Congress and JD(S) are busy in out-maneuvering each other: Prime Minister Modi
While the Opposition parties are busy pitting communities against each other, we are striving towards building a ‘New India’: PM Modi

 भारत माता की जय... भारत माता की जय...

इस धरती पर आने का अपना ही एक सौभाग्य होता है। इस धरती की सभी महान विभूतियों को मैं आदर पूर्वक नमन करता हूं। सिद्धगंगा मठ के डॉक्टर शिव कुमार स्वामी जी को भी मैं सर झुका कर के प्रणाम करता हूं। बंधु भगिनी, कर्नाटक देश के उन राज्यों में है जो हमेशा बीजेपी के साथ पूरी मजबूती के साथ खड़ा रहा है। यहीं मजबूती आपने बीते पांच वर्षों में इस चौकीदार को दी है। आपके ही भरोसे और विश्वास के कारण हर चुनौतियों को चुनौतियां देने की हिम्मत ये चौकीदार कर पाया है। दुनिया भर में भारत की जय- जयकार हो रही है, तो उसका कारण, दुनिया में भारत की जय-जयकार क्यों हो रही है? किसके कराण? किसके कारण? किसके कारण? मोदी के कारण नहीं उसका कारण आप है। 2014 में आपके एक-एक वोट ने हिंदुस्तान के सभी नागरिकों के एक-एक वोट ने जो ताकत दी। उसके कारण आज दुनिया में हिंदुस्तान का डंका बज रहा है। साथियो, आज भारत का हर व्यक्ति आत्मविश्वास से भरा है। क्योंकि देश एक महाशक्ति बनने के रास्ते पर निकल पड़ा है।

पांच वर्ष पहले का एक दौर वो था जब पाकिस्तान के आतंकी हम पर हमला करते थे और फिर पाकिस्तान से ही धमकियां भी मिलती थी। हमारे जांबाज एक्शन के लिए इजाजत मांगते थे लेकिन तब की सरकार डर कर के बैठ जाती थी। इस चौकीदार ने उस स्थिति को बदल दिया है। अब अगर डर है तो डर सीमा के उस पार है। वहां सत्ता में बैठे लोगों को तरह-तरह के डरावने सपने आते हैं। आज धमकी देने वाले दुबक गए हैं, और बालाकोट के प्रहार से आतंकी खौफ में हैं। भाइयो और बहनो, आपने देखा कि जब हमने पाकिस्तान के आतंकियों पर प्रहार किया। आपको अच्छा लगा कि नहीं लगा, आप खुश है क्या? मैंने सही किया? जब हमने आतंकियों पर प्रहार किया तो दर्द पाकिस्तान को हुआ लेकिन आंसू हमारे यहां कांग्रेस और जेडीएस उनके साथियों के निकले। पूरी दुनिया भारत के पक्ष में खड़ी हो गई। लेकिन हमारे यहां के महामिलावटी दल पाकिस्तान के बजाए मोदी के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित कर रहे थे। यहां के मुख्यमंत्री तो एक कदम और आगे बढ़ गए। कहते हैं कि भारत के वीरों के पराक्रम की बात नहीं करनी चाहिए। क्योंकि उनके वोट बैंक को नुकसान होता है। मैं जरा यहां के मुख्यमंत्री को पूछना चाहता हूं कि आपका वोट बैंक भारत में हैं कि पाकिस्तान में। जरा मुख्यमंत्री जी, इस बात को जरा साफ कीजिए स्पष्ट कीजिए। साथियो, एयर स्ट्राइक की तरह ही इन्होंने अंतरिक्ष में स्ट्राइक का भी मजाक उड़ाया। पूरी दुनिया ने माना की स्पेस में भारत ने बहुत बड़ी उपलब्धि हासिल की है। लेकिन मोदी विरोध के चक्कर में ये लोग फिर भारत का विरोध करने पर उतारू हैं।

भारत का विरोध कर रहे हैं। भाइयो और बहनो ये लोग जब खुद सरकार में थे तब वैज्ञानिकों को मिसाइल टेस्ट करने की मंजूरी देने की हिम्मत भी इनके अंदर नहीं थी। लेकिन अब जब भारत ने स्पेस में स्ट्राइक की तो सवाल उठाने वाले सबसे पहले यहीं लोग चले आए। चित्रदुर्ग के मेरे भाइयो-बहनो, ये न तो जवान का सम्मान करते हैं और न ही विज्ञान का...। जिनको भारत के मान-सम्मान की परवाह नहीं उनको सबक सिखाना जरूरी है। भाइयो-बहनो, इस चुनाव में आपको सिर्फ सांसद नहीं चुनना है, सिर्फ प्रधानमंत्री नहीं चुनना है। बल्कि एक मजबूत भारत के लिए मजबूत सरकार चुननी है। मजबूत सरकार ही देश हित में बड़े फैसले ले सकती है। साथियो, मजबूत सरकार कैसी होती है ये आप यहां पर देख रहे हैं। कर्नाटक की सरकार कौन चला रहा हैं? ये किसी को अंदाजा नहीं है। क्योंकि दोनों हारे हुए दल सिर्फ सत्ता के लिए, स्वार्थ के लिए उन्होंने जोड़ी बनाई है। इसलिए वो दिन–रात इधर वाला भाग जाएगा कि उधर वाला भाग जाएगा। ये कुछ मांगेगा कि वो कुछ मांगेगा। इसको टुकड़ा फेंकू कि उसको टुकड़ा फेंकू...बस इसी में लगे हैं। जनता को क्या चाहिए ये इनको इसकी परवाह नहीं है। इनकी पूरी कोशिश है कि ऐसी ही महामिलावटी सरकार दिल्ली में बैठे और जिसका रिमोर्ट कंट्रोल एक दर्जन लोगों के हाथ में हो। क्या आप ऐसी सरकार चाहते हैं? मजबूत सरकार चाहते हैं कि नहीं चाहते हैं? देश में ऐसा प्रधानमंत्री होना चाहिए जिसका हाई कमान, जिसका हाई कमान सिर्फ और सिर्फ एक सौ तीस करोड़ हिंदुस्तानी होने चाहिए।

साथियो, वोट के लिए कांग्रेस जाति और संप्रदाय को बांटने का काम करती रही है। यहीं कोशिश विधानसभा चुनाव के दौरान उसने की थी। कभी ये लिंगायत समाज को बांटने की कोशिश करते हैं। कभी वोका लिंगा के खिलाफ लोगों को भड़काते हैं। कांग्रेस के अपने नेताओं ने ये स्वीकार किया है कि बैंगलुरू से लेकर दिल्ली तक विभाजन का कैसा खेल खेला जाए। भाइयो-बहनो, कांग्रेस की ये स्पष्ट सोच रही है कि जहां मौका मिले वहां समाज को बांट दो। आजादी के समय से ही इनकी रणनीति, इनकी रणनीति तुष्टिकरण की रही है, और आज भी साफ साफ दिख रही है। इनको न तो देश की चिंता है और न ही हमारे संविधान की। बंधु भगिनी, जिस तरह वीर मदाकारी नायका, और वीर ओनके ओपवा ने आक्रमणकारियों और अत्याचारियों से चित्रदुर्ग की रक्षा की थी। वैसा काम आज पूरे हिंदुस्तान के लिए हम सब चौकीदारों को मिलकर के करना है। करेंगे..? मिलकर के करेंगे? पूरी ताकत से करेंगे? जी जान से करेंगे.? आप इस चौकीदार के साथ खड़े रहेंगे।

साथियो, एक तरफ कांग्रेस जेडीएस का तुष्टिकरण है। दूसरी तरफ जाति, वर्ग, पंथ से ऊपर बीजेपी का सबका साथ सबका विकास ये हमारा मंत्र है। आपका प्यार मेरी सर आंखों पर...इतना प्यार अगर मुझे मिलता है तो जीवन में इससे बड़ा सौभाग्य क्या हो सकता है। मैं इस प्यार के लिए इस जोश इस उत्साह के लिए आप सबको नमन करता हूं। सबका साथ सबका विकास इसी मंत्र पर चलते हुए हम नए भारत के निर्माण के लिए पूरी ईमानदारी से काम कर रहे हैं। हमारा संकल्प हर गरीब को पक्का घर देने का है। हमारा संकल्प हर घर को बिजली और हर घर तक एलपीजी गैस कनेक्शन पहुंचाने का है। हमारा संकल्प देश की हर बड़ी पंचायत में टेलीमेडिसिन और बेसिक लेबोरेटरी सुविधा से युक्त हेल्थ एंड वेलनेंस सेंटर खोलने का है। हमारा संकल्प किसानों की आय डबल करने का है। साथियो, किसानों की आय बढ़ाने के लिए हम बीज से लेकर बाजार तक नई व्यवस्थाएं बना रहे हैं। एक तरफ मेघा फूड पार्क, फर्टिलाइजर, और इथेनॉल के प्लांट लगाने का काम किया जा रहा है, तो दूसरी तरफ किसानों को सीधी मदद दी जा रही है। साथियो, पीएम किसान योजना के तहत कर्नाटक में करीब-करीब 75 लाख छोटे किसान परिवारों को सीधी मदद मिलनी तय हुई है। अब हमने संकल्प लिया है। कल हमने हमारे संकल्प पत्र में घोषित किया है कि दोबारा जब हमारी सरकार बनेगी 23 मई के रिजल्ट के बाद जब हम फिर से शपथ लेंगे तो उसके बाद अभी जो हमने नियम बनाया है, उसमें बदलकर के अभी नियम बना है छोटे किसानों का उसमें बदलकर के सभी किसान परिवारों का इसका लाभ देने का हमने निर्णय किया है। भाइयो बहनो, चौकीदार जो कहता है वो पूरा भी करता है। पीएम किसान सम्मान योजना को शुरू हुए अभी मुश्किल से सवा महीना हुआ है। लेकिन अब तक तीन करोड़ किसानों के खाते में पहली किस्त के पैसे जमा हो चुके हैं। डेढ़ करोड़ किसानों को दूसरी किस्त भी मिल चुकी है।

साथियो, एक तरफ किसानों के लिए हमारी सरकार के ये प्रयास है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस और जेडीएस के खोखले वादे हैं। इन लोगों ने कर्ज माफी का वादा किया था। एक साल हो गया लेकिन वो वादा अब तक अधूरा है। क्या इन्होंने किसानों का वादा पूरा किया। कर्ज माफी हुई। किसानों के खाते में पैसा आया। अरे वारंट निकलता है। वारंट, भाइयो—बहनो, किसान हो या उद्यमी हो कांग्रेस जेडीएस किसी का भी भला नहीं करना चाहती। उनकी नीयत में ही खोट है। कांग्रेस जेडीएस की नीयत किसान हित की होती तो कर्नाटक का मैनचेस्टर दावणगेरे कभी बेहाल हीं होता। इनकी नीयत काम करने की होती तो अपर बदरा प्रोजेक्ट सहित अनेक सिंचाई परियोजनाएं समय पर पूरी हो जाती। साथियो, चित्रदुर्ग हो, दावणगेरे हो, इस पूरे क्षेत्र में कनेक्टिविटी और सौलर पावर के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने का ईमानदार प्रयास भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने किया है। दावणगेरे को स्मार्ट बनाने के लिए यहां पर्यटन के अवसर पैदा करने के लिए और युवा साथियों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए हम पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। साथियो, कांग्रेस के राज में दशको तक इस देश के साथ जो अन्याय हुआ। वो हर भारतीय को हर पल याद रखना चाहिए। देश के सामार्थ्य के साथ अन्याय, देश के संसाधनों के साथ अन्याय, और देश के सपनों के साथ भी अन्याय।

 साथियो, हम भारत के लोग क्या हम ऐसी ही सरकारें ही डिजर्व करते थे। जैसा कांग्रेस ने हमें दिया। नहीं बिल्कुल नहीं। कांग्रेस ने इस देश की चार-चार पीढ़ियों के साथ अन्याय किया है। एक के बाद एक भ्रष्ट सरकारें देकर, समाज को तोड़कर, लोगों को आपस में लड़ाकर, हमारी शिक्षा व्यवस्था को भारतीयता से दूर करके, हमारी विदेश नीति को कमजोर करके। हमारी सेनाओं को कमजोर करके। कांग्रेस ने दशकों तक देश के साथ अन्याय किया है। साथियो, बीते पांच वर्षों में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए सरकार ने कांग्रेस के इस अन्याय को कम करने का भरपूर प्रयास किया। तमाम छिपाई हुई फाइलें निकालने के बाद तमाम भगाए गए लोगों को देश में वापस लाने के बाद, तमाम राजदारों के सामने आने के बाद अब समय आ रहा है, जब कांग्रेस से पीड़ित देश को न्याय दिलाया जाए। देश को न्याय मिलना चाहिए कि नहीं मिलना चाहिए? न्याय मिलना चाहिए कि नहीं मिलना चाहिए? ये अन्याय की परंपरा का जवाब मांगना चाहिए कि नहीं मांगना चाहिए? 60 साल तक अन्याय करने वालों को सजा देनी चाहिए कि नहीं चाहिए? भाइयो- बहनो अब बोफोर्स घोटाला करने वालों के साथ न्याय होना पक्का है। नेशनल हेराल्ड हाउस घोटाला करने वालों के साथ अब न्याय पक्का है। दिल्ली में सिख दंगा कराने वालों के साथ अब न्याय पक्का है।

कॉमनवेल्थ घोटाले कर के देश की साख दांव पर लगाने वालों के साथ न्याय पक्का है। 2जी घोटाला, पनडुब्बी घोटाला, कोयला घोटाला, कर्जमाफी घोटाला। इन घोटालों से अपने परिवार के लिए अरबों रुपये का भ्रष्टाचार करने वालों के साथ अब न्याय पक्का है और हां अब हेलीकॉप्टर घोटाला करने वालों के साथ भी न्याय पक्का है। जेल के दरवाजे इतंजार कर रहे हैं। साथियो, इस चुनाव में आपका आशीर्वाद मुझे कांग्रेस के अन्याय को सामप्त करने में भी मदद करने वाला है। भाइयो-बहनो, 20वीं सदी में जिस कांगेस ने अपना भ्रष्ट कल्चर, भाइयो और बहनो 20वीं सदी में जिस कांग्रेस ने अपना भ्रष्ट कल्चर देश पर थोपा। अब उसी कांग्रेस को 21वीं सदी के नौजवान सजा देने वाले हैं। 20वीं सदी के पापों की सजा 21वीं सदी का नौजवान देने वाला है। जिन नौजवानों ने 21वीं शताब्दी में जन्म लिया है। जो इस साल के चुनाव में लोकसभा के चुनाव में पहली बार वोट डालने जा रहे हैं। सबसे पहले तो ऐसे 21वीं सदी में जन्मे हुए लोकसभा में पहली बार वोट देने वाले ये सभी युवा मतदाताओं को हृदय पूर्वक अभिनंदन करता हूं उनका अभिवादन करता हूं। लेकिन मेरे युवा साथियो, मेरे फर्स्ट टाइमर वोटर और सिर्फ चित्रदुर्ग और दावणगेरे की नहीं पूरे देश के फर्स्ट टाइमर से मै प्राथना कता हूं। आप पहली बार वोट देने जा रहे हैं। उन्हें बहुत सोच समझकर वोट देना है। आपका ये वोट देश को मजबूत बनाने के लिए, देश में मजबूत सरकार बनाने के लिए होना चाहिए। होना चाहिए कि नहीं होना चाहिए? होना चाहे कि नहीं होना चाहिए? आप अपना वोट देश के लिए शहीद होने वाले वीर जाबांजों को समर्पित कर सकते हैं। आप ये अपना पहला वोट किसी गरीब को उसका घर मिले इसके लिए आपका वोट समर्पित हो सकता है।

आपका ये पहला वोट किसी गरीब को मुफ्त में अस्पताल में इलाज मिले, इसके लिए समर्पित होना चाहिए। आपका पहला वोट किसी किसान के खेत को पानी मिल जाए इसके लिए आपका वोट समर्पित हो सकता है। आपके ही दोस्त कोई, आपका कोई साथी हो उसको मुद्रा योजना से लोन मिल जाए किसी बैंक गारंटी के बिना लोन मिल जाए इस काम के लिए आपका पहला वोट जाना चहिए। साथियो, जो 18 साल के हो गए हैं। जो इस बार वोट डालने जा रहे हैं। अपने जीवन में पहली बार ईवीएम देखने जा रहे हैं। उन्हें बहुत सोच समझकर बिना किसी गलती के वोट डालना है। आपका एक एक वोट बहुत अनमोल है। इसे संभल कर इस्तेमाल करिएगा। हां आपको मैं विश्वास दिलाता हूं कि आप जब वोट देने जाएंगे कमल के बटन को दबाएंगे तो आपका वोट सीधे सीधा मोदी के खाते में जमा होगा। आप मुझे बताइए ये सभी नौजवानों का वोट मिले तो मेरी ताकत बढ़ेगी की नहीं बढेगी। मेरी ऊर्जा बढ़ेगी की नहीं बढ़ेगी? काम करने का मेरा हौसला बढ़ेगा कि नहीं बढ़ेगा? आज जितना दौड़ता हूं उससे ज्यादा दौडूंगा कि नहीं दौडूंगा? आज जितने काम करता हूं उससे ज्यादा काम करूंगा कि नहीं करूंगा? तो आपका वोट सीधे सीधा मोदी को जाने वाला है। बंधु भगिनी देश में मजबूत सरकार किस तरह काम करती है। देश में पूर्ण बहुमत वाली सरकार किस तरह काम करती है। देश में कांगेस कल्चर से मुक्त सरकार कैसे काम करती है। ये आपने पिछले पांच साल में देखा है। देश को कर्नाटक को सुरक्षित रखने विकसित बनाने के लिए हम सभी चौकीदारों को एक साथ आगे बढ़ना है और हर पोलिंग बूथ को कमल से खिलाना है। कमल खिलाएंगे, कमल खिलाएंगे, चौकीदार का साथ देंगे। मैं बोलूंगा मेरे सा बोलिए... मैं भी.. आप बोलेंगे चौकीदार... मैं भी... चौकीदार.... बहुत बहुत धन्यवाद...

'மன் கி பாத்' -ற்கான உங்கள் யோசனைகளையும் பரிந்துரைகளையும் உடன் பகிர்ந்து கொள்ளுங்கள்!
‘பரிக்ஷா பே சர்ச்சா 2022’ (தேர்வுகள் பற்றிய விவாதம்)-ல் பங்கேற்க பிரதமர் அழைப்பு விடுத்தார்.
Explore More
Kashi Vishwanath Dham is a symbol of the Sanatan culture of India: PM Modi

பிரபலமான பேச்சுகள்

Kashi Vishwanath Dham is a symbol of the Sanatan culture of India: PM Modi
 Grant up to Rs 10 lakh to ICAR institutes, KVKs, state agri universities for purchase of drones, says Agriculture ministry

Media Coverage

Grant up to Rs 10 lakh to ICAR institutes, KVKs, state agri universities for purchase of drones, says Agriculture ministry
...

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
Text of PM’s unveils the hologram statue of Netaji at India Gate
January 23, 2022
பகிர்ந்து
 
Comments
Also confers Subhas Chandra Bose Aapda Prabandhan Puraskars
Gujarat was the first state to enact disaster related law in 2003
“In disaster management, emphasis is on Reform along with stress on Relief, Rescue and Rehabilitation”
“Disaster management is no longer just a government job but it has become a model of 'Sabka Prayas'”
“We have a goal to fulfil the dreams of independent India. We have the goal of building a new India before the hundredth year of independence”
“It is unfortunate that after Independence, along with the culture and traditions of the country, the contribution of many great personalities was also tried to be erased”
“The freedom struggle involved ‘tapasya’ of lakhs of countrymen, but attempts were made to confine their history as well. But today the country is boldly correcting those mistakes”
“We have to move ahead taking inspiration from Netaji Subhash's 'Can Do, Will Do' spirit”

इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में उपस्थित मंत्रीपरिषद के मेरे साथी श्री अमित शाह, श्री हरदीप पूरी जी, मंत्रिमंडल के अन्य सदस्य, INA के सभी ट्रस्टी, NDMA के सभी सदस्यगण, jury मेम्बर्स, NDRF, कोस्ट गॉर्ड्स और IMD के डाइरेक्टर जनरल्स, आपदा प्रबंधन पुरस्कारों के सभी विजेता साथी, अन्य सभी महानुभाव, भाइयों एवं बहनों!

भारत मां के वीर सपूत, नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जन्मजयंती पर पूरे देश की तरफ से मैं आज कोटि-कोटि नमन करता हूं। ये दिन ऐतिहासिक है, ये कालखंड भी ऐतिहासिक है और ये स्थान, जहां हम सभी एकत्रित हैं, वो भी ऐतिहासिक है। भारत के लोकतंत्र की प्रतीक हमारी संसद पास में है, हमारी क्रियाशीलता और लोकनिष्ठा के प्रतीक अनेक भवन भी हमारे साथ पास में नजर आ रहे हैं, हमारे वीर शहीदों को समर्पित नेशनल वॉर मेमोरियल भी पास है। इन सबके आलोक में आज हम इंडिया गेट पर अमृत महोत्सव मना रहे हैं और नेताजी सुभाषचंद्र बोस को आदरपूर्वक श्रद्धांजलि दे रहे हैं। नेताजी सुभाष, जिन्होंने हमें स्वाधीन और संप्रभु भारत का विश्वास दिलाया था, जिन्होंने बड़े गर्व के साथ, बड़े आत्मविश्वास के साथ, बड़े साहस के साथ अंग्रेजी सत्ता के सामने कहा था- “मैं स्वतंत्रता की भीख नहीं लूंगा, मैं इसे हासिल करूंगा"। जिन्होंने भारत की धरती पर पहली आज़ाद सरकार को स्थापित किया था, हमारे उन नेताजी की भव्य प्रतिमा आज डिजिटल स्वरूप में इंडिया गेट के समीप स्थापित हो रही है। जल्द ही इस होलोग्राम प्रतिमा के स्थान पर ग्रेनाइट की विशाल प्रतिमा भी लगेगी। ये प्रतिमा आज़ादी के महानायक को कृतज्ञ राष्ट्र की श्रद्धांजलि है। नेताजी सुभाष की ये प्रतिमा हमारी लोकतान्त्रिक संस्थाओं को, हमारी पीढ़ियों को राष्ट्रीय कर्तव्य का बोध कराएगी, आने वाली पीढ़ियों को, वर्तमान पीढ़ी को निरंतर प्रेरणा देती रहेगी।

साथियों,

पिछले साल से देश ने नेताजी की जयंती को पराक्रम दिवस के रूप में मनाना शुरू किया है। आज पराक्रम दिवस के अवसर पर सुभाषचंद्र बोस आपदा प्रबंधन पुरस्कार भी दिए गए हैं। नेताजी के जीवन से प्रेरणा लेकर ही इन पुरस्कारों को देने की घोषणा की गई थी। साल 2019 से 2022 तक, उस समय के सभी विजेताओं, सभी व्यक्तियों, सभी संस्थाओं को जिने आज सम्मान का अवसर मिला है। उन सबको भी मैं बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

हमारे देश में आपदा प्रबंधन को लेकर जिस तरह का रवैया रहा था, उस पर एक कहावत बहुत सटीक बैठती है- जब प्यास लगी तो कुआं खोदना। और जिस मैं काशी क्षेत्र से आता हूं वहां तो एक और भी कहावत है। वो कहते हैं - भोज घड़ी कोहड़ा रोपे। यानि जब भोज का समय आ गया तो कोहड़े की सब्जी उगाने लगना। यानि जब आपदा सिर पर आ जाती थी तो उससे बचने के उपाय खोजे जाते थे। इतना ही नहीं, एक और हैरान करने वाली व्यवस्था थी जिसके बारे में कम ही लोगों को पता है। हमारे देश में वर्षों तक आपदा का विषय एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट के पास रहा था। इसका मूल कारण ये था कि बाढ़, अतिवृष्टि, ओले गिरना, ऐसी जो स्थितियों पैदा होती थी। उससे निपटने का जिम्मा, उसका संबंध कृषि मंत्रालय से आता था। देश में आपदा प्रबंधन ऐसे ही चलता रहता था। लेकिन 2001 में गुजरात में भूकंप आने के बाद जो कुछ हुआ, देश को नए सिरे से सोचने के लिए मजबूर किया। अब उसने आपदा प्रबंधन के मायने बदल दिए। हमने तमाम विभागों और मंत्रालयों को राहत और बचाव के काम में झोंक दिया। उस समय के जो अनुभव थे, उनसे सीखते हुए ही 2003 में Gujarat State Disaster Management Act बनाया गया। आपदा से निपटने के लिए गुजरात इस तरह का कानून बनाने वाला देश का पहला राज्य बना। बाद में केंद्र सरकार ने, गुजरात के कानून से सबक लेते हुए, 2005 में पूरे देश के लिए ऐसा ही Disaster Management Act बनाया। इस कानून के बाद ही National Disaster Management Authority उसके गठन का रास्ता साफ हुआ। इसी कानून ने कोरोना के खिलाफ लड़ाई में भी देश की बहुत मदद की।

साथियों,

डिजास्टर मैनैजमेंट को प्रभावी बनाने के लिए 2014 के बाद से हमारी सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर चौतरफा काम किया है। हमने Relief, Rescue, Rehabilitation उस पर जोर देने के साथ-साथ ही Reform पर भी बल दिया है। हमने NDRF को मजबूत किया, उसका आधुनिकीकरण किया, देश भर में उसका विस्तार किया। स्पेस टेक्नालजी से लेकर प्लानिंग और मैनेजमेंट तक, best possible practices को अपनाया। हमारे NDRF के साथी, सभी राज्यों के SDRFs, और सुरक्षा बलों के जवान अपनी जान की बाजी लगाकर, एक-एक जीवन को बचाते हैं। इसलिए, आज ये पल इस प्रकार से जान की बाजी लगाने वाले, औरों की जिंदगी बचाने के लिए खुद की जिंदगी का दांव लगाने वाले चाहे वो NDRF के लोग हों, चाहे SDRF के लोग हों, हमारे सुरक्षाबलों के साथी हों, ये सब के सब उनके प्रति आज आभार व्यक्त करने का, उनको salute करने का ये वक्त है।

साथियों,

अगर हम अपनी व्यवस्थाओं को मजबूत करते चलें, तो आपदा से निपटने की क्षमता दिनों-दिन बढ़ती चली जाती है। मैं इसी कोरोना काल के एक-दो वर्षों की बात करूं तो इस महामारी के बीच भी देश के सामने नई आपदाएँ आकर खड़ी हो गईं। एक तरफ कोरोना से तो लड़ाई लड़ ही रहे थे। अनेक जगहों पर भूकंप आए, कितने ही क्षेत्रों में बाढ़ आई। ओड़िशा, पश्चिम बंगाल समेत पूर्वी तटों पर cyclones आए, गोवा, महाराष्ट्र, गुजरात, पश्चिमी तटों पर cyclones आए, पहले, एक-एक साइक्लोन में सैकड़ों लोगों की मृत्यु हो जाती थी, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। देश ने हर चुनौती का जवाब एक नई ताकत से दिया। इसी वजह से इन आपदाओं में हम ज्यादा से ज्यादा जीवन बचाने में सफल रहे। आज बड़ी-बड़ी अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां, भारत के इस सामर्थ्य, भारत में आए इस बदलाव की सराहना कर रही हैं। आज देश में एक ऐसा end-to-end cyclone response system है जिसमें केंद्र, राज्य, स्थानीय प्रशासन और सभी एजेंसियां एक साथ मिलकर के काम करती हैं। बाढ़, सूखा, cyclone, इन सभी आपदाओं के लिए वार्निंग सिस्टम में सुधार किया गया है। Disaster risk analysis के लिए एडवांस्ड टूल्स बनाए गए हैं, राज्यों की मदद से अलग अलग क्षेत्रों के लिए Disaster risk maps बनाए गए हैं। इसका लाभ सभी राज्यों को, सभी स्टेक होल्डर्स को मिल रहा है। और सबसे महत्वपूर्ण, डिजास्टर मैनेजमेंट - आपदा प्रबंधन, आज देश में जनभागीदारी और जन-विश्वास का विषय बन गया है। मुझे बताया गया है कि NDMA की ‘आपदा मित्र’ जैसी स्कीम्स से युवा आगे आ रहे हैं। आपदा मित्र के रूप में जिम्मेवारियां उठा रहे हैं। यानी जन भागीदारी बढ़ रही है। कहीं कोई आपदा आती है तो लोग विक्टिम्स नहीं रहते, वो वॉलंटियर्स बनकर आपदा का मुकाबला करते हैं। यानी, आपदा प्रबंधन अब एक सरकारी काम भर नहीं है, बल्कि ये ‘सबका प्रयास’ का एक मॉडल बन गया है।

और साथियों,

जब मैं सबका प्रयास की बात करता हूँ, तो इसमें हर क्षेत्र में हो रहा प्रयास, एक holistic approach भी शामिल है। आपदा प्रबंधन को प्राथमिकता देते हुए, हमने अपने एजुकेशन सिस्टम में भी कई सारे बदलाव किए हैं। जो सिविल इंजीनियरिंग के कोर्सेस होते हैं, आर्किटेक्चर से जुड़े कोर्सेस होते हैं, उसके पाठ्यक्रम में डिजास्टर मैनेजमेंट से जोड़ा, इन्फ्रासट्रक्चर की रचना कैसी हो उसपर विषयों को जोड़ना, ये सारे काम प्रयासरत हैं। सरकार ने Dam Failure की स्थिति से निपटने के लिए, डैम सेफ्टी कानून भी बनाया है।

साथियों,

दुनिया में जब भी कोई आपदा आती है तो उसमें लोगों की दुखद मृत्यु की चर्चा होती है, कि इतने लोगों की मृत्यु हो गई, इतना ये हो गया, इतने लोगों को हटाया गया, आर्थिक नुकसान भी बहुत होता है। उसकी भी चर्चा की जाती है। लेकिन आपदा में जो इंफ्रास्ट्रक्चर का नुकसान होता है, वो कल्पना से परे होता है। इसलिए ये बहुत आवश्यक है कि आज के समय में इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण ऐसा हो जो आपदा में भी टिक सके, उसका सामना कर सके। भारत आज इस दिशा में भी तेजी से काम कर रहा है। जिन क्षेत्रों में भूकंप, बाढ़ या साइक्लोन का खतरा ज्यादा रहता है, वहां पर पीएम आवास योजना के तहत बन रहे घरों में भी इसका ध्यान रखा जाता है। उत्तराखंड में जो चार धाम महा-परियोजना का काम चल रहा है, उसमें भी आपदा प्रबंधन का ध्यान रखा गया है। उत्तर प्रदेश में जो नए एक्सप्रेसवे बन रहे हैं, उनमें भी आपदा प्रबंधन से जुड़ी बारीकियों को प्राथमिकता दी गई है। आपात स्थिति में ये एक्सप्रेसवे, विमान उतारने के काम आ सकें, इसका भी प्रावधान किया गया है। यही नए भारत का विज़न है, नए भारत के सोचने का तरीका है।

साथियों,

Disaster Resilient Infrastructure की इसी सोच के साथ भारत ने दुनिया को भी एक बहुत बड़ी संस्था का विचार दिया है, उपहार दिया है। ये संस्था है- CDRI - Coalition for Disaster Resilient Infrastructure. भारत की इस पहल में ब्रिटेन हमारा प्रमुख साथी बना है और आज दुनिया के 35 देश इससे जुड़ चुके हैं। दुनिया के अलग-अलग देशों के बीच में, सेनाओं के बीच में हमने Joint Military Exercise बहुत देखी है। पुरानी परंपरा है उसकी चर्चा भी होती है। लेकिन भारत ने पहली बार डिजास्टर मैनेजमेंट के लिए Joint ड्रिल की परंपरा शुरू की है। कई देशों में मुश्किल समय में हमारी डिजास्टर मैनेजमेंट से जुड़ी एजेंसियों ने अपनी सेवाएँ दी हैं, मानवता के प्रति अपने कर्तव्य का निर्वाह किया है। जब नेपाल में भूकंप आया, इतनी बड़ी तबाही मची, तो भारत एक मित्र देश के रूप में उस दुख को बाटने के लिए जरा भी देरी नहीं की थी। हमारे NDRF के जवान वहां तुरंत पहुंच गए थे। डिजास्टर मैनेजमेंट का भारत का अनुभव सिर्फ हमारे लिए नहीं बल्कि पुरी मानवता के लिए आप सभी को याद होगा 2017 में भारत ने साउथ एशिया जियो-स्टेशनरी communication satellite को लान्च किया। weather और communication के क्षेत्र में उसका लाभ हमारे दक्षिण एशिया के मित्र देश को मिल रहा है।

साथियों,

परिस्थितियां कैसी भी हों, अगर हममे हौंसला है तो हम आपदा को भी अवसर में बदल सकते हैं। यही संदेश नेताजी ने हमे आजादी की लड़ाई के दौरान दिया था। नेताजी कहते थे कभी भी स्वतंत्र भारत के सपने का विश्वास मत खोना। दुनिया की कोई ताकत नहीं है जो भारत को झकझोर सके"। आज हमारे सामने आज़ाद भारत के सपनों को पूरा करने का लक्ष्य है। हमारे सामने आज़ादी के सौंवे साल से पहले, 2047 के पहले नए भारत के निर्माण का लक्ष्य है। और नेताजी को देश पर जो विश्वास था, जो भाव नेताजी के दिल में उभरते थे। और उनके ही इन भावों के कारण मैं कह सकता हूँ कि, दुनिया की कोई ताकत नहीं है जो भारत को इस लक्ष्य तक पहुंचने से रोक सके। हमारी सफलताएँ हमारी संकल्पशक्ति का सबूत हैं। लेकिन, ये यात्रा अभी लंबी है। हमें अभी कई शिखर और पार करने हैं। इसके लिए जरूरी है, हमें देश के इतिहास का, हजारों सालों की यात्रा में इसे आकार देने वाले तप, त्याग और बलिदानों का बोध रहे।

भाइयों और बहनों,

आज़ादी के अमृत महोत्सव का संकल्प है कि भारत अपनी पहचान और प्रेरणाओं को पुनर्जीवित करेगा। ये दुर्भाग्य रहा कि आजादी के बाद देश की संस्कृति और संस्कारों के साथ ही अनेक महान व्यक्तित्वों के योगदान को मिटाने का काम किया गया। स्वाधीनता संग्राम में लाखों-लाख देशवासियों की तपस्या शामिल थी लेकिन उनके इतिहास को भी सीमित करने की कोशिशें हुईं। लेकिन आज आजादी के दशकों बाद देश उन गलतियों को डंके की चोट पर सुधार रहा है, ठीक कर रहा है। आप देखिए, बाबा साहब आंबेडकर से जुड़े पंचतीर्थों को देश उनकी गरिमा के अनुरूप विकसित कर रहा है। स्टेचू ऑफ यूनिटी आज पूरी दुनिया में सरदार वल्लभ भाई पटेल के यशगान की तीर्थ बन गई है। भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत भी हम सबने कर दी है। आदिवासी समाज के योगदान और इतिहास को सामने लाने के लिए अलग-अलग राज्यों में आदिवासी म्यूज़ियम्स बनाए जा रहे हैं। और नेताजी सुभाषचंद्र बोस के जीवन से जुड़ी हर विरासत को भी देश पूरे गौरव से संजो रहा है। नेताजी द्वारा अंडमान में तिरंगा लहराने की 75वीं वर्षगांठ पर अंडमान के एक द्वीप का नाम उनके नाम पर रखा गया है। अभी दिसम्बर में ही, अंडमान में एक विशेष ‘संकल्प स्मारक’ नेताजी सुभाष चंद्र बोस के लिए समर्पित की गई है। ये स्मारक नेताजी के साथ साथ इंडियन नेशनल आर्मी के उन जवानों के लिए भी एक श्रद्धांजलि है, जिन्होंने आज़ादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया था। ये मेरा सौभाग्य है कि पिछले वर्ष, आज के ही दिन मुझे कोलकाता में नेताजी के पैतृक आवास भी जाने का अवसर मिला था। जिस प्रकार से वो कोलकाता से निकले थे, जिस कमरे में बैठकर वो पढ़ते थे, उनके घर की सीढ़ियां, उनके घर की दीवारें, उनके दर्शन करना, वो अनुभव, शब्दों से परे है।

साथियों,

मैं 21 अक्टूबर 2018 का वो दिन भी नहीं भूल सकता जब आजाद हिंद सरकार के 75 वर्ष हुए थे। लाल किले में हुए विशेष समारोह में मैंने आजाद हिंद फौज की कैप पहनकर तिरंगा फहराया था। वो पल अद्भुत है, वो पल अविस्मरणीय है। मुझे खुशी है कि लाल किले में ही आजाद हिंद फौज से जुड़े एक स्मारक पर भी काम किया जा रहा है। 2019 में, 26 जनवरी की परेड में आजाद हिंद फौज के पूर्व सैनिकों को देखकर मन जितना प्रफुल्लित हुआ, वो भी मेरी अनमोल स्मृति है। और इसे भी मैं अपना सौभाग्य मानता हूं कि हमारी सरकार को नेताजी से जुड़ी फाइलों को सार्वजनिक करने का अवसर मिला।

साथियों,

नेताजी सुभाष कुछ ठान लेते थे तो फिर उन्हें कोई ताकत रोक नहीं सकती थी। हमें नेताजी सुभाष की ‘Can Do, Will Do’ स्पिरिट से प्रेरणा लेते हुए आगे बढ़ना है। वो ये जानते थे तभी ये बात हमेशा कहते थे भारत में राष्ट्रवाद ने ऐसी सृजनात्मक शक्ति का संचार किया है जो सदियों से लोगों के अंदर सोई पड़ी थी। हमें राष्ट्रवाद भी जिंदा रखना है। हमें सृजन भी करना है। और राष्ट्र चेतना को जागृत भी रखना है। मुझे विश्वास है कि, हम मिलकर, भारत को नेताजी सुभाष के सपनों का भारत बनाने में सफल होंगे। आप सभी को एक बार फिर पराक्रम दिवस की बहुत बहुत शुभकामनायें देता हूं और मैं आज एनडीआरएफ, एसडीआरएफ के लोगों को भी विशेष रूप से बधाई देता हूं। क्योंकि बहुत छोटे कालखंड में उन्होंने अपनी पहचान बना दी है। आज कहीं पर भी आपदा हो या आपदा के संबंधित संभावनाओं की खबरें हों, साईक्लोन जैसी। और जब एनडीआरएफ के जवान यूनिफार्म में दिखते हैं। सामान्य मानवीय को एक भरोसा हो जाता है। कि अब मदद पहुंच गई। इतने कम समय में किसी संस्था और इसकी यूनिफार्म की पहचान बनना, यानि जैसे हमारे देश में कोई तकलीफ हो और सेना के जवान आ जाएं तो सामान्य मानवीय को संतोष हो जाता है, भई बस अब ये लोग आ गये। वैसा ही आज एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के जवानों ने अपने पराक्रम से ये करके दिखाया है। मै पराक्रम दिवस पर नेताजी का स्मरण करते हुए, मैं एनडीआरएफ के जवानों को, एसडीआरएफ के जवानों को, उन्होंने जिस काम को जिस करुणा और संवेदनशीलता के साथ उठाया है। बहुत – बहुत बधाई देता हूं। उनका अभिनंदन करता हूं। मैं जानता हूं इस आपदा प्रबंधन के काम में, इस क्षेत्र में काम करने वाले कईयों ने अपने जीवन भी बलिदान दिए हैं। मैं आज ऐसे जवानों को भी श्रद्धांजलि देता हूं जिन्होंने किसी की जिंदगी बचाने के लिए अपनी जिंदगी दांव पर लगा दी थी। ऐसे सबको में आदरपूवर्क नमन करते हुए मैं आप सबको भी आज पराक्रम दिवस की अनेक – अनेक शुभकामनाएं देते हुए मेरी वाणी को विराम देता हूं। बहुत बहुत धन्यवाद !