ਨਮਸਕਾਰ ਸਾਥੀਓ ,

ਸੰਸਦ ਦਾ ਇਹ ਸੈਸ਼ਨ ਅਤਿਅੰਤ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਹੈ।  ਦੇਸ਼ ਆਜ਼ਾਦੀ ਕਾ ਅੰਮ੍ਰਿਤ ਮਹੋਤਸਵ ਮਨਾ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਹਿੰਦੁਸਤਾਨ ਵਿੱਚ ਚਾਰ ਦਿਸ਼ਾਵਾਂ ਵਿੱਚੋਂ ਇਸ ਆਜ਼ਾਦੀ ਕੇ ਅੰਮ੍ਰਿਤ ਮਹੋਤਸਵ ਦੇ ਨਮਿਤ ਰਚਨਾਤਮਕ ,  ਸਕਾਰਾਤਮਕ ,  ਜਨਹਿਤ  ਦੇ ਲਈ ,  ਰਾਸ਼ਟਰਹਿਤ  ਦੇ ਲਈ ,  ਸਾਧਾਰਣ ਨਾਗਰਿਕ ਅਨੇਕ ਪ੍ਰੋਗਰਾਮ ਕਰ ਰਹੇ ਹਨ,  ਕਦਮ  ਉਠਾ ਰਹੇ ਹਨ ,  ਅਤੇ ਆਜ਼ਾਦੀ  ਦੇ ਦਿਵਾਨਿਆਂ ਨੇ ਜੋ ਸੁਪਨੇ ਦੇਖੇ ਸਨ ਉਨ੍ਹਾਂ ਸੁਪਨਿਆਂ ਨੂੰ ਪੂਰਾ ਕਰਨ ਲਈ ਸਾਧਾਰਣ ਨਾਗਰਿਕ ਵੀ ਇਸ ਦੇਸ਼ ਦਾ ਆਪਣਾ ਕੋਈ ਨਾ ਕੋਈ ਜ਼ਿੰਮੇਵਾਰੀ ਨਿਭਾਉਣ ਦਾ ਪ੍ਰਯਤਨ ਕਰ ਰਿਹਾ ਹੈ ।  ਇਹ ਖ਼ਬਰ ਆਪਣੇ ਆਪ ਵਿੱਚ ਭਾਰਤ ਦੇ ਉੱਜਵਲ ਭਵਿੱਖ ਲਈ ਸ਼ੁਭ ਸੰਕੇਤ ਹੈ।

ਕੱਲ੍ਹ ਅਸੀਂ ਦੇਖਿਆ ਹੈ।  ਪਿਛਲੇ ਦਿਨੀਂ ਸੰਵਿਧਾਨ ਦਿਨ ਵੀ,  ਨਵੇਂ ਸੰਕਲਪ  ਦੇ ਨਾਲ ਸੰਵਿਧਾਨ  ਦੀ spirit ਨੂੰ ਚਰਿਤ੍ਰਾਰਥ (ਸਾਕਾਰ) ਕਰਨ ਦੇ ਲਈ ਹਰ ਕਿਸੇ ਦੀ ਜ਼ਿੰਮੇਵਾਰੀ ਦੇ ਸਬੰਧ ਵਿੱਚ ਪੂਰੇ ਦੇਸ਼ ਨੇ ਇੱਕ ਸੰਕਲਪ ਕੀਤਾ ਹੈ ਇਨ੍ਹਾਂ ਸਭ  ਦੇ ਪਰਿਪੇਖ ਵਿੱਚ ਅਸੀਂ ਚਾਹਾਂਗੇ ,  ਦੇਸ਼ ਵੀ ਚਾਹੇਗਾ ,  ਦੇਸ਼ ਦਾ ਹਰ ਸਾਧਾਰਣ ਨਾਗਰਿਕ ਚਾਹੇਗਾ ਕਿ ਭਾਰਤ ਦਾ ਇਹ ਸੰਸਦ ਦਾ ਇਹ ਸੈਸ਼ਨ ਅਤੇ ਅੱਗੇ ਆਉਣ ਵਾਲਾ ਵੀ ਸੈਸ਼ਨ ਆਜ਼ਾਦੀ ਦੇ ਦੀਵਾਨਿਆਂ ਦੀਆਂ ਜੋ ਭਾਵਨਾਵਾਂ ਸਨ ,  ਜੋ spirit ਸੀ ,  ਆਜ਼ਾਦੀ  ਕੇ ਅੰਮ੍ਰਿਤ ਮਹੋਸਤਵ ਦੀ ਜੋ spirit ਹੈ ,  ਉਸ spirit  ਦੇ ਅਨੁਕੂਲ ਸੰਸਦ ਵੀ ਦੇਸ਼ ਹਿਤ ਵਿੱਚ ਚਰਚਾ ਕਰੇ,  ਦੇਸ਼ ਦੀ ਪ੍ਰਗਤੀ ਦੇ ਲਈ ਨਵੇਂ ਉਪਾਅ ਖੋਜੇ ,  ਦੇਸ਼ ਦੀ ਪ੍ਰਗਤੀ ਲਈ ਨਵੇਂ ਉਪਾਅ ਖੋਜੇ ਅਤੇ ਇਸ ਦੇ ਲਈ ਇਹ ਸੈਸ਼ਨ ਬਹੁਤ ਹੀ ਵਿਚਾਰਾਂ ਦੀ ਸਮ੍ਰਿੱਧੀ ਵਾਲਾ,  ਦੂਰਗਾਮੀ ਪ੍ਰਭਾਵ ਪੈਦਾ ਕਰਨ ਵਾਲੇ ਸਕਾਰਾਤਮਕ ਨਿਰਣੇ ਕਰਨ ਵਾਲਾ ਬਣੇ । 

ਮੈਂ ਆਸ਼ਾ ਕਰਦਾ ਹਾਂ ਕਿ ਭਵਿੱਖ ਵਿੱਚ ਸੰਸਦ ਨੂੰ ਕਿਵੇਂ ਚਲਾਇਆ,  ਕਿਤਨਾ ਅੱਛਾ contribution ਕੀਤਾ ਉਸ ਨੂੰ ਤਰਾਜੂ ‘ਤੇ ਤੋਲਿਆ ਜਾਵੇ ,  ਨਾ ਕਿ ਕਿਸ ਨੇ ਕਿਤਨਾ ਜ਼ੋਰ ਲਗਾ ਕੇ ਸੰਸਦ  ਦੇ ਸੈਸ਼ਨ ਨੂੰ ਰੋਕ ਦਿੱਤਾ ਇਹ ਮਾਨਦੰਡ ਨਹੀਂ ਹੋ ਸਕਦਾ। ਮਾਨਦੰਡ ਇਹ ਹੋਵੇਗਾ ਕਿ ਸੰਸਦ ਵਿੱਚ ਕਿਤਨੇ ਘੰਟੇ ਕੰਮ ਹੋਇਆ ,  ਕਿਤਨਾ ਸਕਾਰਾਤਮਕ ਕੰਮ ਹੋਇਆ ।  ਅਸੀਂ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹਾਂ,  ਸਰਕਾਰ ਹਰ ਵਿਸ਼ੇ ‘ਤੇ ਚਰਚਾ ਕਰਨ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੈ ,  ਖੁੱਲ੍ਹੀ ਚਰਚਾ ਕਰਨ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੈ ।  ਸਰਕਾਰ ਹਰ ਸਵਾਲ ਦਾ ਜਵਾਬ ਦੇਣ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੈ ਅਤੇ ਆਜ਼ਾਦੀ ਕੇ ਅੰਮ੍ਰਿਤ ਮਹੋਸਤਵ ਵਿੱਚ ਅਸੀਂ ਇਹ ਵੀ ਚਾਹਾਂਗੇ ਕਿ ਸੰਸਦ ਵਿੱਚ ਸਵਾਲ ਵੀ ਹੋਣ ,  ਸੰਸਦ ਵਿੱਚ ਸ਼ਾਂਤੀ ਵੀ ਹੋਵੇ ।

ਅਸੀਂ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹਾਂ,  ਸੰਸਦ ਵਿੱਚ ਸਰਕਾਰ  ਦੇ ਖ਼ਿਲਾਫ਼ ,  ਸਰਕਾਰ ਦੀਆਂ ਨੀਤੀਆਂ  ਦੇ ਖ਼ਿਲਾਫ਼ ਜਿਤਨੀ ਅਵਾਜ਼ ਤੇਜ਼ ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ,  ਲੇਕਿਨ ਸੰਸਦ ਦੀ ਗਰਿਮਾ ,  ਸਪੀਕਰ ਦੀ ਗਰਿਮਾ,  ਚੇਅਰ ਦੀ ਗਰਿਮਾ ਇਨ੍ਹਾਂ ਸਭ ਦੇ ਵਿਸ਼ੇ ਵਿੱਚ ਅਸੀਂ ਉਹ ਆਚਰਣ ਕਰੀਏ ਜੋ ਆਉਣ ਵਾਲੇ ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਦੇਸ਼ ਦੀ ਯੁਵਾ ਪੀੜ੍ਹੀ  ਦੇ ਕੰਮ ਆਵੇ ।  ਪਿਛਲੇ ਸੈਸ਼ਨ ਦੇ ਬਾਅਦ ਕੋਰੋਨਾ ਦੀ ਇੱਕ ਭਿਅੰਕਰ ਪਰਿਸਥਿਤੀ ਵਿੱਚ ਵੀ ਦੇਸ਼ ਨੇ 100 ਕਰੋੜ ਤੋਂ ਅਧਿਕ ਡੋਜ਼ ,  ਕੋਰੋਨਾ ਵੈਕਸੀਨ ਅਤੇ ਹੁਣ ਅਸੀਂ 150 ਕਰੋੜ ਦੀ ਤਰਫ ਤੇ ਨਾਲ ਅੱਗੇ ਵਧ ਰਹੇ ਹਾਂ ।  ਨਵੇਂ ਵੈਰੀਐਂਟ ਦੀਆਂ ਖਬਰਾਂ ਵੀ ਸਾਨੂੰ ਹੋਰ ਵੀ ਚੇਤੰਨ ਕਰਦੀਆਂ ਹਨ ,  ਅਤੇ ਸਜਗ ਕਰਦੀਆਂ ਹਨ ।  ਮੈਂ ਸੰਸਦ  ਦੇ ਸਾਰੇ ਸਾਥੀਆਂ ਨੂੰ ਵੀ ਚੇਤੰਨ ਰਹਿਣ ਦੀ ਪ੍ਰਾਰਥਨਾ ਕਰਦਾ ਹਾਂ ।  ਤੁਹਾਨੂੰ ਸਾਰੇ ਸਾਥੀਆਂ ਨੂੰ ਵੀ ਸਤਰਕ ਰਹਿਣ ਦੇ ਲਈ ਪ੍ਰਾਰਥਨਾ ਕਰਦਾ ਹਾਂ ।  ਕਿਉਂਕਿ ਤੁਹਾਡੀ ਸਭ ਦੀ ਉੱਤਮ ਸਿਹਤ ,  ਦੇਸ਼ਵਾਸੀਆਂ ਦੀ ਉੱਤਮ ਸਿਹਤ ਅਜਿਹੀ ਸੰਕਟ ਦੀ ਘੜੀ ਵਿੱਚ ਸਾਡੀ ਪ੍ਰਾਥਮਿਕਤਾ ਹੈ ।

ਦੇਸ਼ ਦੀ 80 ਕਰੋੜ ਤੋਂ ਅਧਿਕ ਨਾਗਰਿਕਾਂ ਨੂੰ ਇਸ ਕੋਰੋਨਾ ਕਾਲ ਦੇ ਸੰਕਟ ਵਿੱਚ ਹੋਰ ਅਧਿਕ ਤਕਲੀਫ ਨਾ ਹੋਵੇ ਇਸ ਲਈ ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ  ਗ਼ਰੀਬ ਕਲਿਆਣ ਯੋਜਨਾ ਨਾਲ ਅਨਾਜ ਮੁਫ਼ਤ ਦੇਣ ਦੀ ਯੋਜਨਾ ਚਲ ਰਹੀ ਹੈ ।  ਹੁਣ ਇਸ ਨੂੰ ਮਾਰਚ 2022 ਤੱਕ ਸਮਾਂ ਅੱਗੇ ਕਰ ਦਿੱਤਾ ਗਿਆ ਹੈ ।  ਕਰੀਬ ਦੋ ਲੱਖ ਸੱਠ ਹਜ਼ਾਰ ਕਰੋੜ ਰੁਪਏ ਦੀ ਲਾਗਤ ਨਾਲ ,  ਅੱਸੀ ਕਰੋੜ ਤੋਂ ਅਧਿਕ ਦੇਸ਼ਵਾਸੀਆਂ ਨੂੰ ਗ਼ਰੀਬ  ਦੇ ਘਰ ਦਾ ਚੁੱਲ੍ਹਾ ਜਲਦਾ ਰਹੇ ਇਸ ਦੀ ਚਿੰਤਾ ਕੀਤੀ ਗਈ ਹੈ ।  ਮੈਂ ਆਸ਼ਾ ਕਰਦਾ ਹਾਂ ਕਿ ਇਸ ਸੈਸ਼ਨ ਵਿੱਚ ਦੇਸ਼ ਹਿਤ ਦੇ ਨਿਰਣੇ ਅਸੀਂ ਤੇਜ਼ੀ ਨਾਲ ਕਰੀਏ ,  ਮਿਲਜੁਲ ਕੇ ਕਰੀਏ । ਸਾਧਾਰਣ ਮਾਨਵ ਦੀਆਂ ਆਸਾਂ – ਉਮੀਦਾਂ ਨੂੰ ਪੂਰਾ ਕਰਨ ਵਾਲੇ ਕਰੀਏ ।  ਅਜਿਹੀ ਮੇਰੀ ਉਮੀਦ ਹੈ ।......  ਬਹੁਤ -  ਬਹੁਤ ਧੰਨਵਾਦ ।

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August 10, 2026

प्रधानमंत्री – मेरे यहां, मुझे यहां लगभग 12-13 साल हो गए इसी मकान में, अगर मैंने regularly और हर बार किसी को रिसिव किया है, किसी को मैं मिला हूं, तो खिलाड़ी हैं। पिछले 10-12 साल हो गए, आप लोगों के पुरुषार्थ के कारण, भारत को लगातार विजय दिलाने के आपके प्रयासों के कारण और उत्तरोत्तर सफलता में नई ऊंचाईयां पार करने की परंपरा के कारण, जो काम शायद हम स्कूलों में जाकर कहें कि नहीं नहीं भई खेलना चाहिए, ये करना चाहिए, वो काम स्कूलों में जाकर के हम कर सकते थे, उससे ज्यादा आपका मेडल उनको inspire करता है।

प्रधानमंत्री – तुमने मुझे वादा किया था पिछली बार कि तुम्हारी दोनों बेटियां खिलाड़ी बन जाएंगी?

खिलाड़ी - हाँ जी अभी वे उमर की छोटी हैं, अगले कॉमनवेल्थ में एक घर में तीन मेडल लाकर दिखाएंगी।

प्रधानमंत्री – पक्का।

खिलाड़ी – हाँ जी।

खिलाड़ी – जब मैं दौड़ रहा था, जब मेरा इवेंट था 29 को, तो उस दिन गुरुपूर्णिमा थी, तो उस दिन मेरे गुरू को मैंने एक गिफ्ट दे दिया।

प्रधानमंत्री – बड़ी शान बढ़ाई आपने। इतनी आंसू टपक रहे थे, मुझे लगता है कि आंसू के हर बूंद से जैसे गोल्ड मेडल टपक रहा है।

खिलाड़ी – मैं बहुत ज्यादा खुशी थी, इमोशनल भी थे उसी दिन, खुशी ज्यादा था और मैं इसलिए रोई थी कि मेरा पेरिस आलंपिक में मेरा 1 Kg में मेडल रह गई थी और एक प्लेयर्स की लाइफ में क्या क्या हमको फेस करना पड़ता है। तो ये 4 साल के अंदर में कितना क्या क्या कुछ मैंने फेस किया था, हर टाइम injury ही चल रहे थे और family problem, वो सब हो रहा था। तो बहुत मुश्किल से मैं ये 4 साल फेस किया था। तो वो सब जब पोडियम में जब मैं खड़ी थी सर और हमारी जो फ्लैग ऊपर जाते हैं और हमारे नेशनल एंथम जब बजते हैं तो सर हम रुक नहीं सकते सर, अपना आप आंसू निकलते हैं।

प्रधानमंत्री – बहुत बहुत बढ़िया

प्रधानमंत्री – आपके इस अचीवमेंट को सिर्फ आपका अचीवमेंट मानता हूं, ऐसा नहीं है, ये आपका विजय आने वाली पीढ़ियों के लिए बहुत बड़ी प्रेरणा बन जाता है।

खिलाड़ी – सब डर रहे थे हमसे कि इंडिया के साथ फाइट आ गई, अब तो हम पहली फाइट ही हार जायेंगे, हमारा मेडल भी नहीं आयेगा।

प्रधानमंत्री – यानी मान के चलते हैं।

खिलाड़ी – हाँ सर।

प्रधानमंत्री – क्या हुआ, वो restaurant वालों से झगड़ा कर रही थी?

खिलाड़ी – हम लोगों का जो इतना अच्छा परफॉर्मेंस था, लास्ट डे था और सब जीत के गए थे और पूरा इंडिया के लोग थे। तो थोड़ा सा मुझे बुरा लग रहा। तो मैंने उनको अच्छे से बोला रिक्वेस्ट किया था सर, फिर उन्होंने मान भी लिया, अभी चेंज भी हो गया सर।

प्रधानमंत्री – इस विजय की परिस्थिति खुशी, आनंद, अपने साथियों के साथ और गेम पूरे हो चुके हैं। तो हसी मजाक मस्ती का मूड ऐसे समय उस मैप पर नजर जाना और उसको रजिस्टर करना और तुरंत सिर्फ मेडल लेते समय देश खड़ा हो जाता है ऐसा नहीं, भीतर से देश का भाव मैं सच बताता हूँ ये वीडियो सामान्य नहीं है आपका, लंबे समय तक लोगों को याद रहेगा। ये बॉक्सिंग वालों से भी दुनिया के खिलाड़ी अब डरने लगे हैं।

खिलाड़ी – जरूर सर, पुरे सभी डरे हुए थे। एक के बाद एक गोल्ड मेडल गोल्ड मेडल आ रहे थे और मतलब पूरा लास्ट में ऐसे धमाका जैसा हो गया बिल्कुल। जिस तरीके से हम लोगों को सपोर्ट मिल रहा है, हमें बैक टू बैक कंपटीशन मिल रहा है वो एक बहुत बड़ी बात है और हमारे जितने भी यंग एथलीट है वो लोग सभी जैसे खेलो इंडिया स्कीम से आए हुए हैं और ये एक बहुत बड़ा changes ला रहा है पूरे स्पोर्ट्स में ही।

प्रधानमंत्री – अगर आप लोग खेलो इंडिया की प्रतिष्ठा बढ़ाते हैं और प्रतिष्ठा सिर्फ वहां जाकर के रिबिन काटने से नहीं होगी। आप वैसे ही खेलेंगे जैसे एक छोटा विद्यार्थी, एक छोटा नौजवान, छोटा खिलाड़ी खेलता है। यह बहुत बड़ा कंट्रीब्यूशन करेगा। क्योंकि अभी तो हमें बहुत आगे जाना है, बहुत मेडल लाना है। कारगिल विजय दिवस पर किसकी विजय हुई थी?

खिलाड़ी – उस दिन कारगिल डे था वैसे और जिस दिन मैंने पाकिस्तान के साथ फाइट किया था सर, वो उसी दिन का था। तो मैं एक इंडियन आर्मी से हूं, तो मैंने उस दिन मैं पहले से बहुत वो था कि सर पाकिस्तान को हराना है। तो मैंने वो पाकिस्तान एक तरफ मैंने 5-0 से हराया, तो मैंने हमारा इंडियन आर्मी का कारगिल हीरोज़ को मैंने डेडिकेट किया किया था सर।

प्रधानमंत्री – आपको यह याद रहना और आप स्वयं फौज से हैं तो, मैं जरूर मानता हूं कि देश के वीर जवानों को आपने जो भाव प्रकट किया ना कि, मैं कारगिल के विजेताओं को मेरा मेडल समर्पित करता हूं। उसने उस विजय पर चार चांद लगा दिए और जिसको पराजित करना था उसी को किया आपने।

खिलाड़ी – वो पाकिस्तान की बात चल रही है, मुझे किस्सा याद आ गया सर। 2015 वर्ल्ड मिलिट्री गेम थे और मेरी पाकिस्तान के साथ पहली फाइट आ गई थी और वर्ल्ड मिलिट्री गेम थे तो मिलिट्री वाले के फोन आए कि भई पाकिस्तान से नहीं हारना है। तो फिर मैं फर्स्ट राउंड 4-1 से जीत गया। सेकंड राउंड 3-2 से जीत गया, पर दोनों के सर लग गए आपस में, तो दोनों के लग गए कट और फाइट तो मैं जीत गया।

प्रधानमंत्री – हाँ

खिलाड़ी – उसके बाद फिर दोनों चले गए हॉस्पिटल में टांके लगवाने के लिए। फिर 2014 में आप फर्स्ट टाइम प्रधानमंत्री जी बने थे और जो हमारे साथ आर्मी का कोच गया हुआ था उसका नाम नरेंद्र राणा था और फिर वो कई देर तक सोच के मेरे को बोला कि भाईजान एक बात बोलूं, मैं हां बोलो, बोला भाईजान आपका नाम नरेंद्र है। आपके कोच का नाम नरेंद्र है, आपके प्रधानमंत्री का नाम नरेंद्र है, तो मुझे नरेंद्र नाम से नफरत हो गई है।

प्रधानमंत्री – सिर्फ आपने मेडल की संख्या बढ़ाई ऐसा नहीं है। आपने एक पीढ़ी को तैयार किया।

खिलाड़ी – मेरे मन में भी धक-धक धक-धक हो रहा है सर।

प्रधानमंत्री – आप चिंता मत कीजिए।

खिलाड़ी – पर..

प्रधानमंत्री – आप चाहें तो आपको बोलने में भी मेडल मिलने वाला है।

खिलाड़ी – मेरे फ्रेंड सर्कल में किसी ने बोला था कि मैं उनको कुछ बोलती थी भई तुम्हारे अच्छे के लिए तुम करो। तो अक्सर मुझे वो बोलते थे कि तू के मोदी ते मिल रही है?

प्रधानमंत्री – हाँ

खिलाड़ी – हरियाणवी में बोल देते हैं सर कि क्या तू मोदी से मिली हुई है, कि तेरी बात माने। तो आज मैं आपसे मिली हूं सर। मैं उनको बोल पाऊंगी कि हां मैं मोदी जी से मिली हूं।

खिलाड़ी – कॉमनवेंल्थ गेम्स में मैंने सिल्वर मेडल जीता, फिर मैंने क्रेडिट साहब को दिया, सपना तो था एक बार मेडल जीत के लेके आने के लिए, बट ट्रेनिंग का सेंटर नहीं था, मैंने SAI आने के बाद मैं बहुत ट्रेनिंग करके मेडल जीत पा रहा, इसलिए बहुत खुशी से मैंने सर को क्रेडिट दिया था क्योंकि बहुत इंप्रूव हुआ।

प्रधानमंत्री – मेरे लिए बहुत बड़ा सम्मान का विषय है, मेहनत आपने की और मुझे याद किया, मैं आपका बहुत आभारी हूं दोस्त।

प्रधानमंत्री – वाराणसी में खेल तुम प्रैक्टिस कर रही थी ना?

खिलाड़ी – जी सर।

प्रधानमंत्री – कैसा बना है स्टेडियम?

खिलाड़ी – सर अच्छा बना है, वहां पर मैं 10-12 दिन के लिए ट्रेनिंग करने गई थी, क्योंकि मैं मंदिर गई थी तो वहां पर ही ट्रेनिंग करके आई थी। और मैं वहां पे मतलब सेटल भी होना चाहती हूं क्योंकि मुझे काशी विश्वनाथ बहुत अच्छा लगता है सर।

प्रधानमंत्री – भोपाल में ट्रेनिंग कर रही थी ना?

खिलाड़ी – जी सर।

प्रधानमंत्री – तो उज्जैन जाते थे कि नहीं?

खिलाड़ी – जी सर उज्जैन भी गई थी सर।

प्रधानमंत्री – अच्छा महाकाल के पास भी गई।

खिलाड़ी – जी सर।

प्रधानमंत्री – काशी विश्वनाथ के पास हो आई एक बार।

खिलाड़ी – जी सर।

प्रधानमंत्री – सावन महीना तो अभी है।

खिलाड़ी – वहां घर जाके फिर उसके बाद जाऊंगी सर।

प्रधानमंत्री – ठीक है।

खिलाड़ी – साई ने भी सर बहुत सपोर्ट किया है मुझे। इसके कारण ही मैं यहां तक पहुंची हूं सर। और मैं खेलो इंडिया स्कीम में भी थी 2018 में जो फर्स्ट खेलो इंडिया हुआ था, उसमें मेरा सिल्वर मेडल था, वहां पे भी मैंने आपको देखा था ओपनिंग सेरेमनी में, तो उसमें मेरा मेडल था, तो मेरे को स्कीम भी मिल गया और मैं यहां तक पहुंची हूं सर।

प्रधानमंत्री – स्पोर्ट्स व्यवस्था एक बात है, लेकिन देश मेडल तब प्राप्त करता है जब देश में स्पोर्ट्स कल्चर बनता है। दोस्तों आपने बहुत बड़ा काम किया है। देश का नाम रोशन किया है। आपको मैं बहुत बधाई देता हूं और आप विश्वास कीजिए आगे भी आप विजयी होंगे और फिर से एक बार यहीं पर हम मिलेंगे। बहुत-बहुत धन्यवाद। बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

प्रधानमंत्री – ये लगातार तीसरी बार देश को मेडल दिलवाया है।

खिलाड़ी – थैंक यू सर।

प्रधानमंत्री – बहुत आशीर्वाद बेटा।

खिलाड़ी – और थैंक यू सो मच मैं सर के हाथ से लड्डू खा रही मेरा कल बर्थडे था तो आज सर के हाथ से…

प्रधानमंत्री – बहुत बधाई वाह।

प्रधानमंत्री – मुस्कुराओ यार ।

प्रधानमंत्री – जो खेलेगा वो खिलेगा।