The growing number of women entrepreneurs is a blessing for our society: PM Modi

Published By : Admin | September 7, 2019 | 15:31 IST
Our government is working tirelessly to ensure no family remains without a LPG connection: PM Modi
The growing number of women entrepreneurs is a blessing for our society: PM Modi in Aurangabad
Our government is committed to further encourage more women to become entrepreneurs and provide them all the support they need: PM Modi

भारत माता की – जय

भारत माता की – जय

मंच पर उपस्थित सभी महानुभाव और दूर-दूर से बड़ी संख्‍या में पधारे माताएं, बहने और साथियो। मैं वहाँ देख रहा हूँ, दूर-दूर तक बहनें खड़ी हैं, शायद उनको तो कुछ दिखता भी नहीं होगा। लेकिन उसके बावजूद भी इतनी बड़ी तादाद में आपका आना, हम सबको आशीर्वाद देना, मैं हृदय से आपका बहुत-बहुत आभारी हूँ।

आप सभी देश के विकास में हमारे गांव, देहात को, अपने परिवार को आर्थिक रूप से सशक्‍त करने में बहुत बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। स्‍वयं सहायता समूहों के माध्‍यम से देश को सशक्‍त करने वाली नए भारत के निर्माण में जुटी आप सभी बहनों को मैं नमन करता हूँ और बहन पंकजा को विशेष रूप से बधाई देता हूँ।

साथियो, आज औरंगाबाद के विकास से जुड़ी एक अहम इमारत का उद्घाटन थोड़ी देर पहले किया गया है। औरंगाबाद इं‍डस्ट्रियल सिटी की सिग्‍नेचर बिल्डिंग अब सेवा के लिए तैयार है। नए औरंगाबाद शहर की ये महत्‍वपूर्ण इमारत होगी। इस इमारत से पूरे औद्योगिक शहर की अनेक व्‍यवस्‍थाओं का संचालन होगा।

साथियो, औरंगाबाद नया smart city तो बन ही रहा है, देश की औद्योगिक गतिविधियों का भी बड़ा सेंटर होने वाला है। दिल्‍ली–मुम्‍बई इं‍डस्ट्रियल कॉरिडोर का भी ये एक अहम हिस्‍सा है। अनेक बड़ी कंपनियाँ यहाँ काम करना शुरू कर चुकी हैं। आने वाले समय में और कंपनियाँ भी यहाँ आएंगी। ये कंपनियाँ यहाँ के लाखों युवाओं को रोजगार के नए अवसर देने वाली हैं।

साथियो, औरंगाबाद आज एक और बहुत बड़ी सिद्धि का साक्षी बन रहा है। ये सिद्धि आपकी है, देश की करोड़ों बहनों की है।

उज्जवला योजना के तहत 8 करोड़ मुफ्त गैस कनेक्शन देने का जो संकल्प हमने लिया था, वो आज इस मंच पर इन लाखों बहनों की हाजिरी में सिद्ध हुआ है। सिर्फ सिद्ध ही नहीं हुआ बल्कि तय समय से 7 महीने पहले ही लक्ष्य को हमने पा लिया है।

इन 8 करोड़ कनेक्शन में से करीब 44 लाख, अकेले महाराष्ट्र में दिए गए हैं।इस उपलब्धि के लिए मैं आप सभी को, देश की हर उस बहन को, जिसको धुएं से मुक्ति मिली है, बहुत-बहुत बधाई देता हूं, शुभकामनाएं देता हूं। मैं देशभर के उन साथियों को भी नमन करता हूँ जिन्‍होंने इस योजना को सफल बनाने में बहुत मेहनत की है, मदद की है।

साथियो, धुएं में घुटती अपनी गरीब बहनों की सहायता करने के लिए पहले पाँच करोड़ गैस कनेक्‍शन मुफ्त देने का लक्ष्‍य रखा गया था। पिछले साल मार्च में इस लक्ष्‍य को विस्‍तार देते हुए आठ करोड़ कर दिया गया। चुनाव के दरम्‍यान जब भी मैं आपके बीच आया था, तो इस लक्ष्‍य को हासिल करने की बात कही थी। मुझे संतोष है कि सरकार बनने के 100 दिन के भीतर ही ये काम पूरा हो गया।

साथियो, ये काम सिर्फ कनेक्शन देनेभर तक सीमित नहीं था। इसके लिए और भी व्यापक प्रबंध किए गए, holistic तरीके से काम किया गया।एक बहुत बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर इसके लिए जरूरी था, जिसको बहुत ही कम समय में तैयार किया गया। इसके लिए जो 10 हज़ार नए LPG Distributers तैयार किए उनमें से अधिकतर को गांवों में नियुक्त किया गया।इतना ही नहीं, देशभर में नए LPG Bottling plant लगाए गए ताकि गैस सिलिंडरों का अभाव न हो। सरकार ने बंदरगाहों के आसपास terminal capacity बढ़ाने के साथ ही गैस पाइप लाइन के नेटवर्क का विस्‍तार भी किया।

सा‍थियो, हमारा प्रयास है कि अब देश में एक भी ऐसा परिवार ना रहे जिसके घर पर LPG कनेक्शन ना पहुंचा हो। इसके साथ-साथ इस योजना को और सुविधाजनक बनाने के लिए 5 किलो के सिलेंडर को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। देश के अनेक इलाकों में पाइप से गैस पहुंचाने का काम भी तेज़ी से चल रहा है।

भाइयो और बहनों, अब एक बहुत बड़ा मिशन लेकर हम चले हैं,जिसका सीधा सरोकार भी आप सभी से है, देश की करोड़ों-करोड़ों बहनों से है। आप सभी बहनों को पानी के लिए कितनी परेशानी उठानी पड़ती है, इसका मुझे भलीभांति एहसास है। देश की हर बहन को इस परेशानी से निजात दिलाने के लिए ही जल जीवन मिशन की शुरुआत की गई है।इस मिशन के तहत, पानी बचाने के लिए, घर-घर पानी पहुंचाने के लिए पूरा देश संकल्पबद्ध हुआ है। ये तय किया गया है कि आने वाले 5 वर्ष में लगभग साढ़े 3 लाख करोड़ रुपए इस पानी के अभियान पर खर्च किए जाएंगे।

आपने शायद सुना होगा समाजवादी नेता राम मनोहर लोहिया जी 60-70 के दशक में उन्‍होंने पार्लियामेंट में एक भाषण दिया था। उन्‍होंने कहा था कि हिन्‍दुस्‍तान की महिलाओं की दो प्रमुख समस्‍याएँ हैं। उसका तत्‍काल हमें समाधान करना चाहिए। ये 60-70 के कालखंड में कही गई बातें, लोहिया जी के द्वारा कही गई बातें हैं। कौन सी दो समस्‍याएँ बताईं- उन्‍होंने कहा हिन्‍दुस्‍तान की महिलाओं की दो प्रमुख समस्‍याएँ हैं, एक पैखाना और दूसरा पानी। यानी महिलाओं के लिए शौचालय नहीं है, और महिलाओं को घर चलाने के लिए पानी उपलब्‍ध नहीं है। अगर इन दो समस्‍याओं का समाधान करें तो इस देश की महिलाएं देश की समस्‍याओं का समाधान करने की ताकत बन जाएंगी। लोहिया जी तो चले गए, सरकारें भी आईं और चली गईं, नेता भी आए और चले गए, एक हमीं हैं जिसने ठान ली है कि हर घर में शौचालय भी होगा और हर घर में पानी भी होगा।

मराठवाड़ा का ये क्षेत्र तो, वैसे भी इसका बड़ा लाभार्थी भी होने वाला है और आप सभी देवेन्‍द्र जी की सरकार के साथ मिलकर सराहनयी प्रयास भी कर रहे हैं। अभी देवेन्‍द्र जी ने विस्‍तार से, उनके मन में क्‍या सपना है इस क्षेत्र में पानी पहुँचाने के लिए, इसका गहरा वर्णन किया है आपके सामने। मराठवाड़ा में जो पहला water grid बनाया जा रहा है, वो प्रशंसनीय कोशिश है। ये grid जब तैयार हो जाएगा तो इस क्षेत्र में पानी की उपलब्धता बढ़ जाएगी। हर गांव तक पीने का पानी पहुंचाने, हर खेत तक सिंचाई का पानी पहुंचाने में इससे मदद मिलेगी।

साथियो, किसानों को सिंचाई की सुविधा देने से लेकर अनेक कदम केंद्र और राज्य की सरकारें उठा रही हैं। हर किसान परिवार के बैंक अकाउंट में सीधी मदद, 60 वर्ष की आयु के बाद किसानों को पेंशन की सुविधा, पशुधन को स्वस्थ रखने के लिए टीकाकरण अभियान, ऐसे अनेक प्रयास किए जाए रहे हैं।

भाइयो और बहनों, गांव की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने में आप सभी का योगदान बहुत अहम है। Self Help Group, महिला बचत घटों के रूप में आप जो काम कर रहे हैं, उससे आपका सशक्तिकरण, आर्थिक सशक्तिकरण तो हो ही रहा है, परिवार की स्थिति भी सुधर रही है। जब परिवार आर्थिक रूप से सशक्‍त होता है तो देश की ताकत अपने-आप बढ़ती है।

सा‍थियो, देश के विकास में आपकी इसी भूमिका को देखते हुए बीते पाँच वर्षों में इस आंदोलन को विस्‍तार, और अधिक विस्‍तार देने के लिए विशेष प्रयास किए गए हैं। दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से महिलाओं के लिए उद्यमशीलता के नए अवसर बनाए जा रहे हैं। नए भारत में हम महिला कल्याण से आगे निकलकर महिलाओं की अगुवाई में राष्ट्र कल्याण की सोच लेकरके आगे बढ़ रहे हैं।

यही कारण है कि इस वर्ष के बजट में स्वयं-सहायता समूहों के लिए महत्वपूर्ण घोषणा की गई है। महिला स्व-सहायता समूहों के लिए ब्याज पर जो सब्सिडी मिलती थी, इसको अब पूरे देश में लागू किया जा रहा है।इसी तरह समूह की जिन सदस्यों के पास जन-धन बैंक खाता है, उनको 5 हज़ार रुपए तक के ओवर ड्राफ्ट की अतिरिक्त सुविधा मिलेगी। अब किसी साहूकार से ज्‍यादा ब्‍याज से पैसा नहीं लेना पड़ेगा। मतलब ये कि अगर आपके खाते में एक भी पैसा जमा नहीं है, तब भी आप 5 हजार रुपये अपनी जरूरत के लिए उससे निकाल सकेंगी। ये एक प्रकार से आसान ऋण है, जिसकी सुविधा जन-धन खाते पर आपको मिलेगी।

इसी तरह मुद्रा योजना के तहत भी हर स्व-सहायता समूह की एक महिला सदस्य को 1 लाख रुपये तक का कर्ज मिलेगा। इससे आपको अपना कारोबार शुरू करने या फिर उसे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

साथियो, मुद्रा योजना बहनों को उद्यमी बनाने में अहम भूमिका निभा रही है। योजना के तहत अभी तक देशभर में करीब 20 करोड़ ऋण बांटे गए हैं। इनमें से लगभग 14 करोड़ ऋण हमारी बहनों और बेटियों के हाथ में गए हैं। महाराष्ट्र में भी मुद्रा योजना के डेढ़ करोड़ लाभार्थियों में से सवा करोड़ लाभार्थी हमारी माताएं-बहने हैं। महिला उद्यमशीलता के क्षेत्र में आ रहे इस बदलाव को हमें और तेज करना है, और मजबूत करना है। इसके लिए सरकार के स्‍तर पर जो भी कदम उठाने होंगे वो जरूर उठाए जाएंगे।

साथियो, स्वयं सहायता समूह के रूप में आप आर्थिक सशक्तिकरण के मजबूत माध्यम तो हैं ही, आप सामाजिक परिवर्तन की भी अहम प्रहरी हैं। बेटियों का जीवन बचाने से लेकर, उनकी पढ़ाई और उनके लिए सुरक्षित माहौल बनाने के लिए सरकार ने अनेक कदम उठाए हैं। यहां देवेन्‍द्र जी की सरकार ने इस दिशा में सराहनीय काम किया है। लेकिन सिर्फ सरकारी योजना और कानून ही काफी नहीं है। हमें बेटियों के प्रति समाज की सोच में व्यापक परिवर्तन लाने की जरूरत है। इसमें आप बहनों-बेटियों की भूमिका भी अहम है।

हाल में आपने देखा है कि मुस्लिम बहनों को तीन तलाक की कुरीति से निजा दिलाने के लिए एक कड़ा कानून बनाया गया है। अब आपको समाज के भीतर इस कानून को लेकर जागरूकता फैलानी होगी।

साथियो, समय से पहले जब लक्ष्‍य हम हासिल करते हैं तो बड़े संकल्‍पों को सिद्ध करने का हौसला अपने-आप बढ़ जाता है।जब ईमानदारी से काम किया जाता है, जब साफ नीयत से काम किया जाता है, तो प्रयासों में भी कोई कमी नहीं रहती।आप सभी चंद्रयान को लेकर जो हुआ, उससे परिचित होंगे।

आप सभी चंद्रयान को लेकर जो हुआ, उससे भलीभांति परिचित होंगे। हमारे वैज्ञानिकों ने एक बड़ा लक्ष्य हासिल करने का प्रयास किया था, लेकिन उसमें एक बाधा आ गई। इस मिशन के लिए वैज्ञानिक काफी समय से मेहनत कर रहे थे।

भाइयो और बहनों, कल रात और आज सुबह मैं उनके बीच था। वो भावुक थे, लेकिन साथ-साथ ही बुलंद हौसले से भरे हुए थे कि अब और तेजी से काम करना है;जो हुआ उससे सबक लेकर, सीखकरके आगे बढ़ना है।इसरो जैसी प्रतिबद्धता के साथ ही देश को आगे बढ़ाया जा सकता है, लोगों के जीवन को आसान बनाया जा सकता है।

साथियो, अलग-अलग क्षेत्रों में ऐसे ही लगनशील लोगों की प्रतिबद्धता के चलते देश के हर गांव तक बिजली पहुंचाना, 8 करोड़ परिवारों को गैस कनेक्शन देना, ऐसे अनेक काम समय से पहले पूरे हो चुके हैं। अब बहुत जल्द पूरा देश खुद को खुले में शौच से मुक्त घोषित करने की तरफ बढ़ रहा है।

मुझे विश्वास है कि 2022 में, जब हम आजादी के 75 वर्ष का पर्व मनाएंगे, तब के लिए हमने जो संकल्प हमने लिए हैं, वो जरूर पूरे होंगे।

भाइयो और बहनों, 2022 तक हर गरीब को पक्की छत देने के लक्ष्य की तरफ हम तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं। अब तक देश के गांवों और शहरों में लगभग 1 करोड़ 80 लाख घर बन चुके हैं। लाभार्थी उसमें रहने के लिए चले गए हैं। कई लोग हमसे पूछते हैं कि गरीबों के घर की योजना तो पहले भी चलती थी, फंड पहले भी थे, लेकिन आपने इसमें अलग क्‍या किया?

सबसे पहले तो मैं ये बताना चाहता हूं कि हम इस बात को समझते थे कि हमें house नहीं, बल्कि homes का निर्माण करना है, चारदीवारी से घिरे मकान नहीं, आपके सपनों का घर बनाना है। हम ऐसे घर बनाना चाहते थे जहाँ सभी सुविधाएँ भी मौजूद हों। यानी घर के नाम पर चार दीवारें खड़ी करने के तौर-तरीकों से अलग हमें कुछ बेहतर करने की जरूरत थी। हमारी कोशिश कम से कम समय में, बगैर किसी ज्‍यादा लागत के अधिक से अधिक सुविधाएँ देना, ये हमारा इरादा था।

साथियो, हमारी सरकार ने जो घर बनवाए, उसके लिए कोई फिक्स्ड फॉर्मूला नहीं अपनाया कि जो कागज पर ढाल दिया, वैसे ही घर पूरे देश में बनने चाहिए। जी नहीं, बल्कि इसके विपरीत हमने घरों के निर्माण में स्थानीय लोगों की जरूरतों और वहां के लोगों की इच्छा को भी केन्‍द्र में रखा, उसी को ध्‍यान में रखते हुए मकान बनाने की योजना बनाई। घर में सभी प्रकार की बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हों, इसके लिए हमने विभिन्न सरकारी योजनाओं को एक साथ जोड़ दिया। ताकि उन घरों में बिजली, गैस कनेक्शन, शौचालय और ऐसी तमाम सुविधाएं भी साथ के साथ मिल सकें।

ये घर लोगों की अपेक्षाओं के अनुरूप बन सकें इसके लिए हमने आप लोगों की जरूरतों को सुना। इसके बाद ना सिर्फ घर का एरिया बढ़ाया गया बल्कि निर्माण राशि में भी बढ़ोत्‍तरी की गई। हमने इस प्रक्रिया में स्‍थानीय कारीगरों और श्रमिकों को भी शामिल किया, जैसे- अनेक महिलाएं भी आज अगर झारखंड जाएंगे तो रानी मिस्‍त्री शब्‍द सुनाई देगा आपको। बिना किसी अतिरिक्‍त लागत के, कम से कम समय में घरों की डिलीवरी हो, इस पर भी हमने फोकस किया। इसके लिए इसके लिए टैक्‍नोलॉजी को एक महत्‍वपूर्ण हिस्‍से के रूप में अपनाया गया।

भाइयो और बहनों, हमने उन लोगों के सपनों को भी बल देने की कोशिश की, जो अपना घर खुद खरीदने की इच्छा रखते हैं। सस्ते मकानों को और बढ़ावा देने के लिए सरकार ने होम लोन पर डेढ़ लाख रुपये के ब्याज पर आयकर में अतिरिक्त छूट का प्रावधान किया ताकि मध्‍यम वर्ग का परिवार अपना घर बसा सके।

साथियो, हमारा जोर पारदर्शिता पर भी रहा। घ्ररों के निर्माण के अलग-अलग चरण की तस्‍वीरों को ऑनलाइन अपलोड किया गया। पारदर्शी तरीके से प्रशासन को सही जानकारी उपलब्‍ध कराई गई। यही नहीं, रियल एस्टेट के क्षेत्र में पारदर्शिता की बहुत कमी थी। इससे घर खरीदने वाले लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। सरकार ने रेरा कानून लाकर घर खरीदने वालों के मन में विश्वास भरने का काम किया है। आज अधिकतर राज्‍यों में रेरा कानून notify किया जा चुका है। Tribunal भी काम कर रहा है। इस प्रोजेक्‍ट के तहत लाखों नए flats का निर्माण किया जा रहा है।

कुल मिलाकर देखें तो घर को लेकर हमनेholistic approach से काम किया है। अगर हम अलग-अलग] एक-एक योजना के साथ सामने आते, तो इतनी बड़ी सफलता मिलना मुश्किल था। बड़े पैमाने पर समाधान तभी संभव है जब सारे विभाग, सारे फैसले, एक बड़े लक्ष्य को सोचकर किए जाएं।सारे मंत्रालय और सारी योजनाएं मिलकर एक ट्रैक पर काम करें। यही हमारी सरकार के कामकाज की पहचान रही है- टुकड़ों में नहीं समग्रता में सोचो और सबको इकट्ठा करके काम करो।

साथियो, पिछले 5 वर्षों में स्वच्छता से लेकर बैंक से लेनदेन तक, समाज के व्यवहार में परिवर्तन के जितने भी जन-आंदोलन हुए हैं, उसमें आप सभी ने बढ़-चढ़करके योगदान दिया है।यही कारण है कि आने वाले 5 वर्षों के लिए भी जो संकल्प लिए गए हैं, उनकी सिद्धि के लिए आप पर मुझे बहुत भरोसा है।ये विश्वास निरंतर मजबूत होगा, इसी कामना के साथ आपका बहुत बहुत आभार।

धन्‍यवाद और इतनी बड़ी संख्‍या में त्‍योहार के दिन माताओं-बहनों का हमें आशीर्वाद देने के लिए आना, ये हमारे लिए अपने-आप में एक शक्ति की अनुभूति है। इस मातृ शक्ति को नमन करते हुए मैं मेरी वाणी को विराम देता हूँ। मेरे साथ दोनों हाथ ऊपर करके पूरी ताकत से बोलिए-

भारत माता की – जय

भारत माता की – जय

भारत माता की – जय

बहुत-बहुत धन्‍यवाद

 

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नमस्कार!

पिछले कुछ समय में मुझे एक-दो बार टीवी9 भारतवर्ष देखने का मौका मिला है। नॉर्मली भी युद्धों और मिसाइलों पर आपका बहुत फोकस होता है और आजकल तो आपको कंटेंट की ओवरफीडिंग हो रही है। बड़े-बड़े देश टीवी9 को इतना सारा कंटेंट देने पर तुले हुए हैं, लेकिन On a Serious Note, आज विश्व जिन गंभीर परिस्थितियों से गुजर रहा है, वो अभूतपूर्व है और बेहद गंभीर है। और इन स्थितियों के बीच, आज टीवी-9 नेटवर्क ने विचारों का एक बेहद महत्वपूर्ण मंच बनाया है। आज इस समिट में आप सभी India and the world, इस विषय पर चर्चा कर रहे हैं। मैं आप सबको बधाई देता हूं। इस समिट के लिए अपनी शुभकामनाएं देता हूं। सभी अतिथियों का अभिनंदन करता हूं।

साथियों,

आज जब दुनिया, conflicts के कारण उलझी हुई है, जब इन conflicts के दुष्प्रभाव पूरी दुनिया पर दिख रहे हैं, तब India and the world की बात करना बहुत ही प्रासंगिक है। भारत आज वो देश है, जिसकी अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है। 2014 के पहले की स्थितियों को पीछे छोड़कर के आज भारत एक नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। अब भारत चुनौतियों को टालता नहीं है बल्कि चुनौतियों से टकराता है। आप बीते 5-6 साल में देखिए, कोरोना की महामारी के बाद चुनौतियां एक के बाद एक बढ़ती ही गई हैं। ऐसा कोई साल नहीं है, जिसने भारत की, भारतीयों की परीक्षा न ली हो। लेकिन 140 करोड़ देशवासियों के एकजुट प्रयास से भारत हर आपदा का सामना करते हुए आगे बढ़ रहा है। इस समय युद्ध की परिस्थितियों में भी भारत की नीति और रणनीति देखकर, भारत का सामर्थ्य देखकर दुनिया के अनेकों देश हैरान हैं। हमारे यहां कहावत है, सांच को आंच नहीं। 28 फरवरी से दुनिया में जो उथल-पुथल मची है, इन कठोर विपरीत परिस्थितियों में भी भारत प्रगति के, विकास के, विश्वास के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। इन 23 दिनों में भारत ने अपनी Relationship Building Capacity दिखाई है, Decision Making Capacity दिखाई है और Crisis Management Capacity दिखाई है।

साथियों,

आज जब दुनिया इतने सारे खेमों में बंटी हुई है, भारत ने अभूतपूर्व और अकल्पनीय bridges बनाए हैं। Gulf से लेकर Global West तक, Global South से लेकर पड़ोसी देशों तक भारत सभी का trusted partner है। कुछ लोग पूछते हैं, हम किसके साथ हैं? तो उनको मेरा जवाब यही है कि हम भारत के साथ हैं, हम भारत के हितों के साथ हैं, शांति के साथ हैं, संवाद के साथ हैं।

साथियों,

संकट के इसी समय में जब global supply chains डगमगा रही हैं, भारत ने diversification और resilience का मॉडल पेश किया है। Energy हो, fertilizers हों या essential goods अपने नागरिकों को कम से कम परेशानी हो, इसके लिए भारत ने निरंतर प्रयास किया है और आज भी कर रहे है।

साथियों,

जब राष्ट्रनीति ही राजनीति का मुख्य आधार हो, तब देश का भविष्य सर्वोपरि होता है। लेकिन जब राजनीति में व्यक्तिगत स्वार्थ हावी हो जाता है, तब लोग देश के फ्यूचर के बजाय अपने फ्यूचर के बारे में सोचते हैं। आप ज़रा याद कीजिए 2004 से 2010 के बीच क्या हुआ था? तब कांग्रेस सरकार के समय पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतों का संकट आया था और तब कांग्रेस ने देश की नहीं बल्कि अपनी सत्ता की चिंता की। उस वक्त कांग्रेस ने एक लाख अड़तालीस हज़ार करोड़ रुपए के ऑयल बॉन्ड जारी किए थे और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी ने खुद कहा था कि वो आने वाली पीढ़ी पर कर्ज का बोझ डाल रहे हैं। यह जानते हुए भी कि ऑयल बॉन्ड का फैसला गलत है, जो रिमोट कंट्रोल से सरकार चला रहे थे, उन लोगों ने अपनी सत्ता बचाने के लिए यह गलत निर्णय किया क्योंकि जवाबदेही उस समय नहीं होनी थी, उस बॉन्ड पर री-पेमेंट 2020 के बाद होनी थी।

साथियों,

बीते 5-6 वर्षों में हमारी सरकार ने कांग्रेस सरकार के उस पाप को धोने का काम किया है, और इस धुलाई का खर्चा कम नहीं आया है, ऐसी लाँड्री आपने देखी नहीं होगी। 1 लाख 48 हज़ार करोड़ रुपए की जगह, देश को 3 लाख करोड़ रुपए से अधिक की पेमेंट करनी पड़ी क्योंकि इसमें ब्याज भी जुड़ गया था। यानी हमने करीब-करीब दोगुनी राशि चुकाने के लिए मजबूर हुए। आजकल कांग्रेस के जो नेता बयानों की मिसाइलें दाग रहे हैं, मिसाइल आई तो टीवी9 को मजा आएगा, उनकी इस विषय का जिक्र आते ही बोलती बंद हो जाती है।

साथियों,

पश्चिम एशिया में बनी परिस्थितियों पर मैंने आज लोकसभा में अपना वक्तव्य दिया है। दुनिया में जहां भी युद्ध हो रहे हैं, वो भारत की सीमा से दूर हैं। लेकिन आज की व्यवस्थाओं में कोई भी देश युद्धों से दुष्प्रभाव से दूर रहे, ऐसा संभव नहीं होता। अनेक देशों में तो स्थिति बहुत गंभीर हो चुकी है। और इन हालातों में हम देख रहे हैं कि राजनीतिक स्वार्थ से भरे कुछ लोग, कुछ दल, संकट के इस समय में भी अपने लिए राजनीतिक अवसर खोज रहे हैं। इसलिए मैं टीवी9 के मंच से फिर कहूंगा, यह समय संयम का है, संवेदनशीलता का है। हमने कोरोना महासंकट के दौरान भी देखा है, जब देशवासी एकजुट होकर संकट का सामना करते हैं, तो कितने सार्थक परिणाम आते हैं। इसी भाव के साथ हमें इस युद्ध से बनी परिस्थितियों का सामना करना है।

साथियों,

दुनिया की हर उथल-पुथल के बीच, भारत ने अपनी प्रगति की गति को भी बनाए रखा है। अगर मैं 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद, बीते 23 दिनों का ही ब्यौरा दूं, तो पूरब से पश्चिम तक, उत्तर से दक्षिण तक देश में हजारों करोड़ के डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स का काम हुआ है। दिल्ली मेट्रो रेल के महत्वपूर्ण कॉरिडोर्स का लोकार्पण, सिलचर का हाई स्पीड कॉरिडोर का शिलान्यास, कोटा में नए एयरपोर्ट का शिलान्यास, मदुरै एयरपोर्ट को इंटरनेशनल एयरपोर्ट का दर्जा देना, ऐसे अनेक काम बीते 23 दिनों में ही हुए हैं। बीते एक महीने के दौरान ही औद्योगिक विकास को गति देने के लिए भव्य स्कीम को मंजूरी दी गई है। इसके तहत देशभर में 100 plug-and-play industrial parks विकसित किए जाएंगे। देश में Small Hydro Power Development Scheme को भी हरी झंडी दी गई है। इससे आने वाले वर्षों में 1,500 मेगावाट नई hydro power capacity जोड़ी जाएगी। इसी दौरान जल जीवन मिशन को साल 2028 तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। किसानों के हित में भी अनेक बड़े निर्णय लिए गए हैं। बीते एक महीने में ही पीएम किसान सम्मान निधि के तहत 18 हजार करोड़ रुपए से अधिक सीधे किसानों के खातों में ट्रांसफर किए गए हैं। और जो हमारे MSMEs हैं, जो हमारे निर्यातक हैं, उनके लिए भी करीब 500 करोड़ रुपए के राहत पैकेज की भी घोषणा की गई है। यह सारे कदम इस बात का प्रमाण हैं कि विकसित भारत बनाने के लिए देश कितनी तेज गति से काम कर रहा है।

साथियों,

Management की दुनिया में एक सिद्धांत कहा जाता है - What gets measured, gets managed. लेकिन मैं इसमें एक बात और जोड़ना चाहता हूं, What gets measured, gets improved और ultimately, gets transformed. क्योंकि आकलन जागरूकता पैदा करता है। आकलन जवाबदेही तय करता है और सबसे महत्वपूर्ण आकलन संभावनाओं को जन्म देता है।

साथियों,

अगर आप 2014 से पहले के 10-11 साल और 2014 के बाद के 10-11 साल का आप आकलन करेंगे, तो यही पाएंगे कि कैसे इसी सिद्धांत पर चलते हुए, भारत ने हर सेक्टर को Transform किया है। जैसे पहले हाईवे बनते थे, करीब 11-12 किलोमीटर प्रति दिन की रफ्तार से, आज भारत करीब 30 किलोमीटर प्रतिदिन की स्पीड से हाईवे बना रहा है। पहले पोर्ट्स पर शिप का Turnaround Time, 5-6 दिन का होता था। आज वही काम, करीब-करीब 2 दिन से भी कम समय में पूरा हो रहा है। पहले Startup Culture के बारे में चर्चा ही नहीं होती थी। 2014 से पहले, हमारे देश में 400-500 स्टार्ट अप्स ही थे। आज भारत में 2 लाख से ज्यादा रजिस्ट्रर्ड स्टार्ट अप्स हैं। पहले मेडिकल education में सीटें भी सीमित थीं, करीब 50-55 हजार MBBS seats थीं, आज यह बढ़कर सवा लाख से ज्यादा हो चुकी हैं। पहले देश के Banking system से भी करोड़ों लोग बाहर थे। देश में सिर्फ 25 करोड़ के आसपास ही बैंक account थे। वहीं जनधन योजना के माध्यम से 55 करोड़ से ज्यादा बैंक अकाउंट खुले हैं। पहले हमारे देश में airports की संख्या भी 70 से कम थी। आज एयरपोर्ट्स की संख्या भी बढ़कर 160 से ज्यादा हो चुकी है।

साथियों,

पहले भी योजनाएं तो बनती थीं, लेकिन आज फर्क है, आज परिणाम दिखते हैं। पहले गति धीमी थी, आज भारत fastrack पर है। पहले संभावनाएं भी अंधकार में थीं, आज संकल्प सिद्धियों में बदल रहे हैं। इसलिए दुनिया को भी यह संदेश मिल रहा है कि यह नया भारत है। यह अपने विकास के लिए कोई कोर-कसर बाकी नहीं छोड़ रहा है।

साथियों,

आज हमारा प्रयास है कि अतीत में विकास का जो असंतुलन पैदा हो गया था, उसको अवसरों में बदला जाए। अब जैसे हमारा पूर्वी भारत है। हमारा पूर्वी भारत संसाधनों से समृद्ध है, दशकों तक वहां जिन्होंने सरकारें चलाई हैं, उनकी उपेक्षा ने पूर्वी भारत के विकास पर ब्रेक लगा दी थी। अब हालात बदल रहे हैं। जिस असम में कभी गोलियों की आवाज सुनाई देती थी, आज वहां सेमीकंडक्टर यूनिट बन रही है। ओडिशा में सेमीकंडक्टर से लेकर पेट्रोकेमिकल्स तक अनेक नए-नए सेक्टर का विकास हो रहा है। जिस बिहार में 6-7 दशक में गंगा जी पर एक बड़ा पुल बन पाया था एक, उस बिहार में पिछले एक दशक में 5 से ज्यादा नए पुल बनाए गए हैं। यूपी में कभी कट्टा मैन्युफैक्चरिंग की कहानियां कही जाती थीं, आज यूपी, मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग में दुनिया में अपनी पहचान बना रहा है।

साथियों,

पूर्वी भारत का एक और बड़ा राज्य पश्चिम बंगाल है। पश्चिम बंगाल, एक समय में भारत के कल्चर, एजुकेशन, इंडस्ट्री और ट्रेड का हब होता था। बीते 11 वर्षों में केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल के विकास के लिए बड़ी मात्रा में निवेश किया है। लेकिन दुर्भाग्य से, आज वहां एक ऐसी निर्मम सरकार है, जो विकास पर ब्रेक लगाकर बैठी है। TV9 बांग्ला के जो दर्शक हैं, वो जानते हैं कि बंगाल में आयुष्मान योजना पर निर्मम सरकार ने ब्रेक लगाया हुआ है। पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना पर ब्रेक लगाया हुआ है। पीएम आवास योजना पर ब्रेक लगाया हुआ है। चाय बागान श्रमिकों के लिए शुरू हुई योजना के लिए ब्रेक लगाया हुआ है। यानी विकास और जनकल्याण से ज्यादा प्राथमिकता निर्मम सरकार अपने राजनीतिक स्वार्थ को दे रही है।

साथियों,

देश में इस तरह की राजनीति की शुरुआत जिस दल ने की है, वो अपने गुनाहों से बच नहीं सकती और वो पार्टी है - कांग्रेस। कांग्रेस पार्टी की राजनीति का एक ही लक्ष्य रहा है, किसी भी तरह विकास का विरोध और कांग्रेस यह तब से कर रही है, जब मैं गुजरात में था। गुजरात में वर्षों तक जनता ने हमें आशीर्वाद दिया, तो कांग्रेस ने उस जनादेश को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने गुजरात की छवि पर सवाल उठाए, उसकी प्रगति को कटघरे में खड़ा किया और जब यही विश्वास पूरे देश में दिखाई दिया, तो कांग्रेस का विरोध भी रीजनल से नेशनल हो गया।

साथियों,

जब राजनीति में विरोध, विकास के विरोध में बदल जाए, जब आलोचना देश की उपलब्धियों पर सवाल उठाने लगे, तब यह सिर्फ सरकार का विरोध नहीं रह जाता, यह देश की प्रगति से असहज होने की मानसिकता बन जाती है। आज कांग्रेस इसी मानसिकता की गुलाम बन चुकी है। आज स्थिति यह है कि देश की हर सफलता पर प्रश्न उठाया जाता है, हर उपलब्धि में कमी खोजी जाती है और हर प्रयास के असफल होने की कामना की जाती है। कोविड के समय, देश ने अपनी वैक्सीन बनाई, तो कांग्रेस ने उस पर भी संदेह जताया। Make in India की बात हुई, तो कहा गया कि यह सफल नहीं होगा, बब्बर शेर कहकर इसका मजाक उड़ाया गया। जब देश में डिजिटल इंडिया अभियान शुरू हुआ, तो उसका मजाक उड़ाया गया। लेकिन हर बार यह कांग्रेस का दुर्भाग्य और देश का सौभाग्य रहा कि भारत ने हर चुनौती को सफलता में बदला। आज भारत दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीनेशन ड्राइव का उदाहरण है। भारत डिजिटल पेमेंट्स में दुनिया का अग्रणी देश है। भारत मैन्युफैक्चरिंग और स्टार्टअप्स में नई ऊंचाइयों को छू रहा है।

साथियों,

लोकतंत्र में विरोध जरूरी होता है। लेकिन विरोध और विद्वेष के बीच एक रेखा होती है। सरकार का विरोध करना लोकतांत्रिक अधिकार है। लेकिन देश को बदनाम करना, यह कांग्रेस की नीयत पर सवाल खड़ा करता है। जब विरोध इस स्तर तक पहुंच जाए कि देश की उपलब्धियां भी असहज करने लगें, तो यह राजनीति नहीं, यह दृष्टिकोण की समस्या है। अभी हमने ग्लोबल AI समिट में भी देखा है। जब पूरी दुनिया भारत में जुटी हुई थी, तो कांग्रेस के लोग कपड़े फाड़ने वहां पहुंच गए थे। इन लोगों को देश की इज्जत की कितनी परवाह है, यह इसी से पता चलता है। इसलिए आज आवश्यकता है कि देशहित को, दलहित से ऊपर रखा जाए क्योंकि अंत में राजनीति से ऊपर, राष्ट्र होता है, राष्ट्र का विकास होता है।

साथियों,

आज का यह दिन भी हमें यही प्रेरणा देता है। आज के ही दिन शहीद भगत सिंह, शहीद राजगुरु और शहीद सुखदेव ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया था। आज ही, समाजवादी आंदोलन के प्रखर आदर्श डॉ. राम मनोहर लोहिया जी की जयंती भी है। यह वो प्रेरणाएं हैं, जिन्होंने देश को हमेशा स्व से ऊपर रखा है। देशहित को सबसे ऊपर रखने की यही प्रेरणा, भारत को विकसित भारत बनाएगी। यही प्रेरणा भारत को आत्मनिर्भर बनाएगी। मुझे पूरा विश्वास है कि टीवी9 की यह समिट भी भारत के आत्मविश्वास और दुनिया के भरोसे पर, भारतीयों पर जो भरोसा है, उस भरोसे को और सशक्त करेगी। आप सभी को मेरी तरफ से बहुत-बहुत शुभकामनाएं हैं और आपके बीच आने का अवसर दिया, आप सबसे मिलने का मौका लिया, इसलिए बहुत-बहुत धन्यवाद!

नमस्‍कार!