India Rising on Every Front: PM Modi Fuels GDP Surge, Submarine Prowess, Aviation Boom & Social Transformation
What we're watching over last 12yrs in Bharat’s sports is nothing short of miracle. Instant appreciation from Hon #PM@narendramodi Ji have become the most important incentive for sports persons.#PMModi Ji led Bharat,as a sporting nation is acing the greatest of victories! pic.twitter.com/MAJtJ884DT
— 🇮🇳 Sangitha Varier 🚩 (@VarierSangitha) June 8, 2026
Salute to Hon’ble PM @narendramodi ji! Your visit to L&T facility highlights progress on ambitious Project 76 submarine programme. A major boost to indigenous underwater defence and Atmanirbhar Bharat in naval capabilities. pic.twitter.com/euEWfreXEX
PM Modi views All India Radio (Akashvani) as 🇮🇳's most powerful,accessible&trusted tool 4mass connection. He considers d 90-yr milestone a testament 2its enduring legacy as d "voice of the nation". For 9 decades, AIR has brought news,culture,music,education, 2millions across 🇮🇳 pic.twitter.com/7imTg97bNi
Thank you PM @narendramodi ji! IATA highlights India’s strong role in Asia Pacific air passenger growth. Your focus on airport modernisation, regional connectivity and aviation reforms is powering India’s skies.https://t.co/2VLvOWzFpC
Thank you PM @narendramodi ji for 12 years of transformative governance focused on Garib Kalyan and human empowerment. From Jan Dhan and PM Awas to Ayushman Bharat and Jal Jeevan Mission, your vision has strengthened the foundation of a developed India. 🇮🇳 pic.twitter.com/juEj75BV43
Thank you Hon’ble PM @narendramodi ji for your visionary leadership in transforming India into a global economic powerhouse. 🇮🇳 It is inspiring to see neighboring nations looking to India for growth and prosperity. #ViksitBharathttps://t.co/BsK73pKBI5
India’s crude steel production continues to rise, reflecting the strength of the manufacturing and infrastructure sectors. PM Modi ji’s focus on industrial growth is helping India emerge as a global steel powerhouse. 🏭🇮🇳📈https://t.co/4Szmq8uOil
The Dedicated Freight Corridor is the lifeline of a rapidly developing India: PM Modi in Vadodara, Gujarat
September 08, 2026
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We are strengthening India's infrastructure to move people and goods faster, create new opportunities and power economic growth: PM
The Dedicated Freight Corridor is the lifeline of a rapidly developing India: PM
From chips to ships, India is now building a new manufacturing future: PM
भारत माता की जय।
भारत माता की जय।
गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत जी, यहां के लोकप्रिय मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र भाई पटेल, इस कार्यक्रम में ऑनलाइन हमारे साथ अनेक राज्यों के महानुभाव जुड़े हैं। महाराष्ट्र के गवर्नर जिष्णु देव वर्मा जी, मुख्यमंत्री देवेंद्र फ़डणवीस जी, डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे जी, डिप्टी सीएम श्रीमती सुनेत्र पवार जी, अन्य मंत्रीगण, सांसदगण, विधायकगण और वहां पर भी इकट्ठे हुए लाखों नागरिक भाई-बहन। यहां मंच पर उपस्थित केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे साथी अश्विनी वैष्णव, उपमुख्यमंत्री, युवा नेता हर्ष संघवी, गुजरात सरकार के मंत्रीगण, उपस्थित अन्य जनप्रतिनिधिगण, गुजरात के मेरे प्यारे भाइयों और बहनों।
और खास इसलिए के मेरे ब़डौदा के महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी का ये मैदान अलग-अलग फील्ड में काम करने वाले सभी साथियों का साथ और विकास का ये उत्सव, यहां सबकुछ एक साथ हो रहा है।
साथियों,
आज मैं विकसित भारत की यात्रा को और गति देने के लिए आपके बीच आया हूं। थोड़ी देर पहले यहां देश के विकास से जुड़े हज़ारों करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास और लोकार्पण हुआ है। मैं देश की जनता को बहुत-बहुत बधाई देता हूं। इस विकास पर्व पर आप सभी ने जिस सेवा भाव से और सेवा भाव के साथ पूरे वडोदरा शहर में स्वच्छता से स्वागत अभियान चलाया है, इसके लिए मैं वड़ोदरा के हर एक नागरिक को ह्दय से बहुत-बहुत बधाई देता हूं, उनकी सराहना करता हूं। और ये जो आपने रंग दिखाया ना, मैं कल एक वीडियो देख रहा था, सीना चौड़ा हो गया, वाह! क्या ये मेरा वडोदरा है? और अब तो गणेशोत्सव की तैयारी, बाद में नवरात्रि। और गणेशोत्सव और नवरात्रि पूरा गुजरात का ध्यान वडोदरा पर होता है। और आज आपने, मैं देख रहा था पिछले एक सप्ताह से हर परिवार में वातावरण बन गया है स्वच्छता का। मुझे लगता है कि इस बार जब गणेश जी पधारेंगे ना, सारे आशीर्वाद वड़ोदरा पर बरसने वाले हैं।
साथियों,
इस वर्ष लाल किले से मैंने विकसित भारत के लिए संकल्प की सप्तधारा का आह्वान किया है। इस सप्तधारा में एक धारा गतिशक्ति की भी है। विकसित भारत के लिए हमें ऐसी कनेक्टिविटी चाहिए, जो सुगम भी हो और जमाने के हिसाब से जरा तेज भी हो। वड़ोदरा तो गतिशक्ति यूनिवर्सिटी का शहर है। आज यहां से डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की आखिरी कड़ियां भी जुड़ गई हैं। आज 2800 किलोमीटर से अधिक का डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर प्रोजेक्ट पूरा हो गया। ये 21वीं सदी के भारत के लिए बहुत ऐतिहासिक कार्य संपन्न हुआ है।
साथियों,
ये डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, इस बात का साक्षी है कि बीते 12 साल में देश की काम करने की संस्कृति कैसे बदली है। इस डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर 2004 में विचार शुरू हुआ था। यानी, यहां मैं सारे नौजवान देख रहा हूं, जब इसका विचार शुरू हुआ, आप में से बहुत लोग होंगे जिनका जन्म भी नहीं हुआ होगा, उस समय शुरू हुआ था। 2006 में एक विशेष कंपनी बनाई गई इस काम को करने के लिए और फिर 2014 तक फाइलें ही यहां से वहां होती रहीं। फाइलें टेबल पर यात्रा कर रही थी और दुर्भाग्य देखिए, इन फाइलों को भी कोई डेडिकेटेड कॉरिडोर नसीब नहीं हुआ, फाइल को भी नहीं नसीब हुआ। फाइलें अटकती थीं, लटकती थीं, भटकती थीं। और 2014 में वड़ोदरा के और गुजरात के और देश के लोगों ने मुझे गुजरात से निकाल करके दिल्ली भेज दिया। पहले वाली सरकार 2000 तक रही। आपने मुझे भेजा और उनकी विदाई हुई, और सच्चाई ये थी कि सात-आठ वर्ष में, जरा मेरे नौजवान सुन लीजिए, ये याद रखिए, सात-आठ वर्ष में एक किलोमीटर फ्रेट कॉरिडोर पर भी काम पूरा नहीं हो पाया था। अगर उनके हिसाब से देश चलाते, तो पता नहीं आपके बाद तीन-चार पीढ़ियां आती, तो भी नहीं होता। भारत के लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम को ट्रांसफॉर्म करने वाले प्रोजेक्ट की ये हालत करके रखी थी।
साथियों,
2014 के बाद आपने जो मुझे शिक्षा-दीक्षा दी थी, इस धरती ने मुझे जो सिखाया था, आपके पास से जो लेसन लेके मैं दिल्ली पहुंचा था, हमने वहां पहुंचते ही इसको गति देने का काम प्रारंभ कर दिया। 2800 किलोमीटर के कॉरिडोर का काम आज पूरा करके दिखाया। और आज ईस्टर्न और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, देश के व्यापार-कारोबार का मुख्य आधार बन रहा है।
साथियों,
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, तेजी से विकसित होते भारत की जीवन रेखा है। इसने भारत के ट्रांसपोर्टेशन सेक्टर का कायाकल्प कर दिया है। पहले पैसेंजर ट्रेन जिस ट्रैक पर चलती थी, उसी ट्रैक पर मालगाड़ी भी चलती थी। यानि ट्रैवल और ट्रांसपोर्ट, दोनों धीमा था। लेकिन, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर ने इस स्थिति को बदल दिया है। आज पूर्वी और पश्चिमी फ्रेट कॉरिडोर्स पर हर रोज़ 430 से ज्यादा मालगाड़ियां चलती हैं, प्रतिदिन 430 मालगाड़ी। और पहले जो मालगाड़ी, साढ़े 6 घंटे में 100 किलोमीटर का सफऱ तय करती थी और अब वही मालगाड़ी आधे से भी कम समय में 100 किलोमीटर का सफर तय कर लेगी। जिस जगह पर ट्रक से सामान भेजने में सामान्य तौर पर 30 घंटे लगते हैं, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर यही दूरी 10-12 घंटे में पूरी हो जाती है। यानि, इस कॉरिडोर पर मालगाड़ी के चलने से ट्रक और ट्रेन में लगने वाला फ्यूल बचता है, किराया-भाड़ा का खर्च कम हुआ है, समय बचा है, पर्यावरण को फायदा हुआ है। यानि, इन्वेस्टमेंट एक ट्रैक पर किया और फायदे अनेक सारे हुए हैं।
साथियों,
इस फ्रेट कॉरिडोर से पूर्वी और पश्चिमी भारत के किसानों की उपज अब तेज़ी से बड़े बाज़ार तक पहुंच पा रही है। कई तरह के फूल, कई तरह की सब्जियां, कई तरह के फल, यानि जो चीजें मौसम के हिसाब से जल्दी खराब होती हैं, उनके लिए भी सही समय पर मंडियों और लोगों के बीच पहुंचने का रास्ता बना है। इससे किसान का बहुत बड़ा फायदा हुआ है।
साथियों,
ये फ्रेट कॉरिडोर एक और वजह से कमाल का है। हाल ही में JNPT मुंबई, JNPT पोर्ट से वड़ोदरा तक Double स्टैक Container मालगाड़ी का संचालन किया गया है। यानि डिब्बे के ऊपर एक और डिब्बा लगाकर मालगाड़ी को चलाया गया। इस मालगाड़ी के चलने से एक बार में ही 250 से अधिक ट्रकों के बराबर का सामान मुंबई से वड़ोदरा चला आया, 250 ट्रक। अब ये जो नाराज फूफा जी है, वो चिल्लाएंगे कि ट्रक वालों का क्या होगा? ट्रक कहां जाएंगे? जिन्होंने ट्रक खरीदा है, उनका क्या होगा? अब फूफा जी को काम मिल गया। यानि अब बड़ी मात्रा में सामान तेजी से देश के एक कोने से दूसरे कोने तक पहुंच पाएगा।
साथियों,
फ्रेट कॉरिडोर के साथ-साथ अब भारत में रेल वहां भी पहुंच रही है, जहां इतने दशकों तक नहीं पहुंची थी। गुजरात हो, मध्य प्रदेश हो, महाराष्ट्र हो, यहां जो आदिवासी क्षेत्र हैं, वो भी इस प्रोजेक्ट के द्वारा रेल से जुड़ रहे हैं। पहले की सरकार में बजट में एक-दो ट्रेनों की घोषणा होती थी और उसके भी साल भर ढोल पीटे जाते थे। जबकि आज देश में साल भर एक के बाद एक नई ट्रेनें चलाई जा रही हैं। आज भी इस कार्यक्रम में कई नई ट्रेन शुरु हुई हैं। नई ट्रेन से वड़ोदरा, छोटा उदयपुर और अलीराजपुर के लोगों को बहुत सुविधा होगी।
साथियों,
रोड, रेल, मेट्रो, एयरपोर्ट, गैस पाइपलाइन, गरीबों का घर, जब देश में करोड़ों लोगों के लिए ये चीजें बनती हैं, तो इससे लोगों का जीवन आसान होता है और साथ ही छोटे से बड़े कामगार को रोजगार के लाखों-लाख अवसर मिलते हैं। आप रेलवे का ही देखिए, इस वर्ष का रेल बजट पौने तीन लाख करोड़ रुपए से अधिक रहा है। जो 12 वर्ष पहले की तुलना में कई गुणा अधिक है। यानि रेलवे के आधुनिकीकरण पर हो रहा खर्च, हज़ारों हज़ार नए रोजगार बना रहा है। और ये रोजगार कंस्ट्रक्शन के दौरान तो बनता ही है। एक बार रोड, रेल, पाइपलाइन, पोर्ट, एयरपोर्ट बन गया, तो फिर उसके आसपास नए उद्योग लगना शुरू हो जाते हैं, नए बिजनेस आते हैं, ये फिर नए रोजगार बनाते हैं। वहां कुछ लोग, वो बेटी चित्र लेकर कब से खड़ी है, वो सज्जन भी कुछ कला लेकर के आए हैं। जरा हमारे साथी उसको कलेक्ट कर लें। ये आगे पहुंचा दीजिए, हां। एक और भी है कोई, हां, ले लीजिए। आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।
साथियों,
मैंने देश के सामने विकसित भारत की जिन सप्तधाराओं का विजन रखा है, उनमें एक धारा मैन्युफैक्चरिंग की भी है। और वड़ोदरा शहर, इसकी ताकत अच्छे से जानता भी है, समझता भी है। एजुकेशन, स्किल और इंडस्ट्री का कोलैब कैसे होता है, ये वड़ोदरा करीब डेढ़ सौ साल से इसका प्रतिबिंब है। दशकों पहले, यहां टेक्स्टाइल और टाइल्स के निर्माण से एक यात्रा शुरु हुई थी, जो बाद में ऑयल और पेट्रोकेमिकल्स के साथ आगे बढ़ी। पिछले दो-ढाई दशक में वड़ोदरा MSMEs का एक बड़ा हब बन गया है। और मुझे याद है, जब मैं नया-नया मुख्यमंत्री बना था, तो वड़ोदरा का मेरे पर स्पेशल अधिकार रहा है हमेशा, तो हर हफ्ते कोई ना कोई डेलीगेशन आता था। बस हमारे वड़ोदरा में कुछ मैन्युफैक्चरिंग का हो, मैन्युफैक्चरिंग का हो, क्योंकि यहां पर आते थे, तो या तो ज्योति या एलएमबी या तो जीएसएफसी, यही सब दिखता था और कुछ सुनता नहीं देता। आज कहां से कहां बदल गया है। अब तो ये शहर देश के पहले मेड इन इंडिया मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट के लिए भी जाना जा रहा है। C-295 एयरक्राफ्ट की पहली फ्लाइट यहां आसमान देख चुकी है। मैं वड़ोदरा के लोगों को ये गौरव पाने के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं।
साथियों,
जब देश की मैन्युफैक्चरिंग की बात हो रही है, तो मैं एक और आंकड़ा बताना चाहता हूं। बीते एक दशक में भारत रेल कोच-मेट्रो कोच बनाने का, रेल इंजन बनाने का भी एक बड़ा निर्माता बना है। 2014 के बाद से अब तक, भारत ने करीब 50 हज़ार, ये आंकड़ा सुनिए, 2014 के बाद भारत ने अब तक 50 हज़ार आधुनिक रेलवे कोच बनाए हैं। पुरानी सरकार 10 साल में 50 हजार टॉयलेट नहीं बना सकती थी। 50 हजार आधुनिक कोच तो किए ही हैं, करीब ढाई लाख वेगन, मालगाड़ी के लिए जो वेगन होते हैं, भारतीय रेल में जोड़े गए हैं, ढाई लाख।
साथियों,
अब भारत चिप से लेकर शिप तक, निर्माण की एक नई गाथा लिख रहा है। यानि पुर्जे भी हमारे और प्रोडक्ट भी हमारा, आत्मनिर्भरता की एक पूरी चेन भारत में ही बनेगी। और ये हम सोलर पावर के मामले में देख रहे हैं। जैसे कडाणा डैम पर जो फ्लोटिंग सोलर प्लांट का प्रोजेक्ट है, कुछ साल पहले तक देश में सोलर प्रोजेक्ट्स लगाने बहुत महंगे पड़ते थे। क्योंकि पीवी मॉड्यूल से लेकर, हर प्रकार का हार्डवेयर इंपोर्ट करना पड़ता था। लेकिन बीते वर्षों में हमने भारत में ही पीवी मॉड्यूल बनाने शुरु किए। और आज हम इसमें 200 गीगावॉट से ज्यादा की कैपेसिटी विकसित कर चुके हैं। और ऐसी ही आत्मनिर्भरता के कारण आज पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का विस्तार हो रहा है। अब तक देश में 55 लाख परिवार अपने छत पर, टेरेस पर सोलर प्लांट लगा चुके हैं। और इसमें 11 लाख परिवार हमारे गुजरात के हैं। यहां इतने सारे परिवार, बिजली उत्पादक बन चुके हैं और इसके कारण, प्रोडक्शन से लेकर इंस्टॉलेशन और सर्विस तक, कितने ही युवाओं को रोजगार मिला है, कितने नए वेंडर्स आए हैं।
साथियों,
‘झूठ की गूंज’ से भरमाने वाले तो हर चौराहे पर मिल जाएंगे, लेकिन भारत का नौजवान सच की हुंकार से चलता है, सच की हुंकार के साथ चलता है, सच की हुंकार के लिए चलता है। हमारे युवा साथी ये देख रहे हैं कि आज देश में सोलर हो, विंड हो, हाइड्रो हो, न्यूक्लियर हो, सारे सेक्टर्स पर सरकार कितना फोकस से काम कर रही है।
साथियों,
आने वाले दौर में हर आधुनिक सेक्टर बिजली से ही चलेगा, इलेक्ट्रिक इकोसिस्टम पर निर्भर होगा। जैसे चिप इंडस्ट्री है, डेटा सेंटर और AI से जुड़ी इंडस्ट्री है, इनका खाद पानी बिजली ही है। इसलिए अगर हमें AI में दुनिया के सामने सुपर पावर बनना है, तो देश को उसकी तैयारी, उसका इकोसिस्टम भी बनाना होगा। यही काम भारत ग्राउंड पर कर रहा है। तभी किसी देश से यूरेनियम के लिए समझौते हो रहे हैं, किसी से क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ मिनरल्स को लेकर समझौते किए जा रहे हैं। ये सारी मेहनत देश के युवाओं का फ्यूचर सुरक्षित करने के लिए दिन-रात मेहनत करके की जा रही है, आपके भविष्य के लिए किया जा रहा है।
साथियों,
दुनिया तेज़ी से बदल रही है, तो दुनिया की ज़रूरतें भी बदल रही हैं और इसी प्रकार हमारी पढ़ाई-लिखाई के तौर-तरीके भी बदल रहे हैं। पहले फोकस सिर्फ डिग्री पर होता था, लेकिन अब डिग्री के साथ-साथ स्किल पर भी फोकस है, स्किल का महत्मय बढ़ रहा है। नौजवानों के पास स्किल हो और वो स्किल समय-समय पर अपग्रेड हो, एक बड़ी जरूरत बन गई है। और इसीलिए, आज हम अपनी शिक्षा नीति को, शिक्षण और ट्रेनिंग के संस्थानों को नए रूप में ढाल रहे हैं। और इसी भाव के साथ ही मैंने लाल किले से भी युवाशक्ति के लिए दो बड़ी घोषणाएं की हैं। पहली घोषणा, देश की पारंपरिक ज़रूरत से जुड़ी है। आप सब जानते हैं कि हमारे यहां लाखों नौजवान ऐसे हैं, जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। हर साल, हमारे मिडिल क्लास परिवारों की कमाई का एक बड़ा हिस्सा इन बच्चों की कोचिंग पर खर्च हो जाता है। हमारी कोशिश है कि गरीब और मिडिल क्लास के ऐसे बच्चों की, परिवारों के पैसे की बचत हो। और इसीलिए अब सरकार स्टूडेंट्स को ऑनलाइन फ्री-कोचिंग व्यवस्था देने की दिशा में आगे बढ़ रही है। और हिंदुस्तान के बेस्ट टीचर के द्वारा उनके कोचिंग हो। हमारे जो नौजवान, अपनी तैयारी कर रहे हैं, उनकी कोचिंग का ध्यान सरकार खुद रखेगी।
साथियों,
भारत के नौजवानों को AI में पारंगत होना उतना ही जरूरी है। हम चाहते हैं कि हमारे नौजवानों की पीढ़ी AI के लिए तैयार हो। ऐसा नहीं है, AI सीखने वालों की जरूरत सिर्फ आईटी सेक्टर में है, अगर कोई इस स्किल को जानता है, तो वो खेती के लिए नया AI solution बना सकता है। आरोग्य के क्षेत्र में technology विकसित कर सकता है। Manufacturing की productivity बढ़ा सकता है। Robotics में अपना startup शुरू कर सकता है। इसलिए जरूरी है कि हमारे पास देश और दुनिया की इंडस्ट्री के लिए AI को समझने वाले और AI का इस्तेमाल करने वाले युवा हों। सरकार इसके लिए एक बड़ा अभियान शुरू करने जा रही है।
साथियों,
भारत का ये कालखंड अभूतपूर्व है। ये भारत की युवाशक्ति का उत्कर्ष काल है, ये समय फिर भारत के जीवन में लौटकर नहीं आएगा। और इसलिए, हमें 2047 में विकसित भारत के लक्ष्य को सर्वोपरि रखना है। हमें भारत को विकसित बनाकर ही रहना है। इसी आह्वान के साथ, एक बार फिर आप सभी को विकास कार्यों की बहुत शुभकामनाएं।
अब मेरा एक काम करना पड़ेगा वडोदरा वालों को, करेंगे? पक्के तौर पर? आप सबने वड़ोदरा को इतना स्वच्छ बना दिया, कितनी मेहनत करनी पड़ी। मैं देख रहा था, हमारे नौजवान दिन-रात सफाई में लगे हुए थे। लेकिन एक बार हम तय करें कि अब हम वडोदरा को गंदा होने ही नहीं देंगे। मैं खुद गंदगी नहीं करूँगा, ये संकल्प लें, तो वडोदरा गंदा होगा? वडोदरा गंदा होगा? तो दिवाली ऐसी चकाचक जाएगी या नहीं, नवरात्रि शानदार जाएगी या नहीं, गणेशोत्सव में चार चाँद लगेंगे या नहीं, तो इतना काम तो हो जाएगा।