उपस्थित सभी देवियों और सज्जनों,
समाज में कैसे-कैसे नर-रत्न पैदा हुए हैं, महापुरूष पैदा हुए हैं, जिसके कारण हम सबको उत्तम विरासत प्राप्त हुई है। अगर आज यह समारोह यहां नहीं हुआ होता तो शायद नार्थ में रहने वाले कई लोग होंगे, जिनको यह पता तक नहीं होता कि अयंकाली जी कौन थे और इस देश का दुर्भाग्य रहा है, इसने किसी कारणवश, समाज के लिए जीने-जूझने वाले लोगों को भुला दिया है। शायद हम सबका दायित्व बनता है कि हमारे सभी महान पूर्वजों और उनके जीवन से प्रेरणा ले के नई पीढ़ी को संस्कारित करने के लिए हमें प्रयास करना चाहिए।
पूरे केरल में ओणम का पर्व मनाया जा रहा है। मैं आज, सभी मेरे केरल के भाइयों-बहनों को ओणम की शुभकामनाएं देता हूं। आज 8 सितंबर है, इसका महात्मय मुझे बड़ा महत्वपूर्ण लगता है, क्योंकि 8 सितंबर को महात्मा अयंकाली का जन्म हुआ, लेकिन उसी केरल की धरती पर दूसरे महान समाज सुधारक नारायण गुरू जी का भी जन्म हुआ। आज केरल के जीवन में दो संगठनों, केपीएमस और एसएनडीपी, उनकी मर्जी के बिना न कोई समाज नीति चल सकती है, न कोई राजनीति चल सकती है। लेकिन, वो उसका एक अलग पहलू है। आज हम जब आज केरल के महान समाज सुधारक, महान संत अयंकाली जी की 152वीं जयंति पर मिले हैं। मेरा यह सौभाग्य रहा कि मैं पिछले बार केरल में केपीएमएस के निमंत्रण पर एक कार्यक्रम में गया था और शायद हम जिस विचारधारा में पले हुए लोग हैं, उसमें शायद मैं पहला था, जिसको आपके यहां आने का सौभाग्य मिला था।
उस समय “कायल सभा” की शताब्दी का समारोह प्रारंभ हो रहा था। एक प्रकार से अब वो कायल शताब्दी की पूर्णाहुति का ही कालखंड है। उसमें भी मुझे आने का सौभाग्य मिला है। आप कल्पना कर सकते हैं कि स्वामी विवेकानंद जी को केरल पर इतना गुस्सा क्यों आया था। क्या वो केरल को प्यार नहीं करते थे? क्या केरल की भूमि उनको अपनी नहीं लगती थी? लेकिन केरल की जो समाज व्यवस्था बन गयी थी और जिस प्रकार से वहां दलितों पर जुल्म होता था, दलितों के साथ अन्याय होता था, इसने स्वामी विवेकानंद जी को बेचैन कर दिया था। उन्हें लगा, ये क्या समाज है, ये क्या कर रहे हैं ये लोग। सर्वाधिक गुस्से में स्वामी विवेकानंद थे और उसी गुस्से में से उनके मन से ये उदगार निकले थे।
हमारे देश का, आजादी का ये आंदोलन देखें तो उस सारे आजादी के आंदोलन में 19वीं शताब्दी की घटनाओं का बहुत महत्व है। 19वीं शताब्दी में हमारे देश में, हिन्दुस्तान के हर कोने में कोई न कोई समाज सुधारक पैदा हुआ। कोई न कोई सांस्कृतिक आंदोलन चला। एक प्रकार से 20वीं शताब्दी का आजादी के आंदोलन की पीठिका, 19वीं शताब्दी के समाज सुधारक आंदलोनों से हुई, सांस्कृतिक चेतना से हुई। 1200 साल की गुलामी के अंदर अपना सब कुछ भुला चुके समाज को फिर से एक बार प्राणवान बनाने का प्रयास उस समय महापुरूषों ने किया।
उसी कालखंड में केरल में अयंकाली जी की समाज सुधार और संघर्ष की गतिविधि नारायण गुरू का शिक्षा आंदोलन और उसी समय डा. पलप्पु, मन्नायु पद्मनाभन, पंडित करप्पन, स्वामी वागपट्टानंदन, ऐसे एक से एक दिग्गज केरल की धरती पर सामाजिक चेतना को जगाने में लगे थे।
लेकिन, 1913 में महात्मा गांधी हिन्दुस्तान लौटे, उससे पहले संत अयंकाली जी ने एक कायल सभा के द्वारा एक अद्भुत सत्याग्रह किया गया था। हम नार्थ के लोगों को मालूम नहीं है, लेकिन केरल के दलित समाज को जागृत करने के लिए उनके अधिकारों के लिए, उस समय शासकों ने वहां के, अन्य लोगों ने, वहां के समाज के अगुवा लोगों ने, ये करने से मना कर दिया। ये कहा कि तुम्हें जमीन की इंच की जगह नही मिलेगी, सम्मेलन करने के लिए। उस जमाने में एक दलित मां का बेटा, सारा समाज सामने हो तो क्या करता, चुप हो जाता, बैठ जाता?
अयंकाली जी चुप नहीं हुए। उन्होंने ठान ली कि मैं इस जुल्म के खिलाफ संघर्ष करूंगा। उन्होंने रास्ता खोजा। उन्होंने सब नावें इकट्ठी की, नौकाएं इकट्ठी की और समुद्र के अंदर एक नौकाओं के द्वारा एक विशाल जगह बना दी और नाव में सभा की उन्होंने। वह कायल सभा जो कही जाती है, 1913 के हर प्रतिबंध के बीच, समुंदर के अंदर। जमीन नहीं देते हो तो आप जानें, दुनिया जाने। परमात्मा ने मुझे जगह दी है समुन्दर को चीर कर के मैं वहां जायूँगा, लेकिन मैं हक़ों की लड़ाई लडूंगा, ये मिजाज अयंकाली जी ने बताया। समुन्दर में नाव इक्कठी कर कर के, नौकायें इक्कठी करके, वहीं उन्ही नौकायों में मंच बनाया, नाव में ही श्रोता आये और उन्होने सत्याग्रह किया था।
महात्मा गाँधी 1915 में हिंदुस्तान आये थे और बाद में महात्मा गाँधी ने जब अयंकाली जी की इस शक्ति को देखा तो, महात्मा गाँधी जी ने स्वयं संत अयंकाली जी को मिलने गये थे। लेकिन, हम जब इतिहास के पन्नों को देखतें हैं तो ये चीजें हमे मिलती नहीं। पता नहीं, क्या कारण है? इसे क्यों ओझल कर दिया गया है! समाज सुधार के आंदोलन के रूप में, जो बातें हमने बाबा साहेब आम्बेडकर से सुनी हैं, जो हमे पढ़ने को मिलती है, अयंकाली जी की बातो में वो सारी बाते उस समय मिलती थी, 19वीं शताब्दी में। इतना ही नहीं, आज ह्यूमन राइट्स से सम्बंधित दुनिया में जितने भी डॉक्युमेंट्स हैं, यूएन से लेकर, कहीं पे भी, अगर उन डॉक्युमेंट्स को आप अयंकाली जी ने 19वीं शताबदी में जिन बातों को कहा था, उसको अगर हम जोड़ेंगे, तो बहुत सी बाते वो मिलेंगी, जो 19वीं शताबदी में अयंकाली जी ने कही थी जिन बातों को आज विश्व में ह्यूमन राइट्स की बातों के साथ जोड़ा गया।
इतना ही नहीं, केरल में तो हम जानते हैं, दक्षिण में तो स्थिति ये थी की अगर किसी दलित को जाना है तो पीछे झाडू लगाना पड़ता था, उसके पद-चिन्ह ना रह पायें, ये पागलपन उस जमाने में था। कोई दलित बैलगाड़ी नहीं रख सकता था। बैलगाड़ी मे बैठ नहीं सकता था, वो दिन थे। तब अयंकाली जी ने सत्याग्रह किया था। उन्होने तय किया, जिस रास्ते पर प्रतिबंध है उस रास्ते पर मैं जाउंगा, बैलगाड़ी ले कर के जाउंगा और अयंकाली जी गये, बहुत बड़ा संघर्ष हुआ, मारपीट हुई, कुछ लोगों को चोटे पहुंची, लेकिन वो झुके नहीं। समाज को जगाने के लिये वो निरंतर प्रयास करते रहे।
आज जितने भी मजदूर आंदोलन चल रहे हैं, उन सभी मजदूर आंदोलनो को भी अगर कोई सच्चाई सीखनी है तो, अयंकाली जी से सीखने को मिलेगी।
उन्होंने कृषि मजदूरों को आज़ादी दिलाने का आंदोलन चलाया था। जो कृषि मजदूर थे, उनके लिये काम का समय तय हो, उनके लिये वेतन तय हो, उनके बच्चों को सरकारी स्कूल मे एडमिशन का अधिकार मिले, महिलायों के लिये मजदूरी का प्रकार अलग हो, इन सारे विषयों की लड़ाई लड़ कर के विजय प्राप्त की थी, अयंकाली जी ने। वे एक प्रकार से समाज सुधारक भी थे, लेकिन साथ-साथ समाज के हकों के लिये संघर्ष करना और उन्हें हक दिलाना, ये उस समय अयंकाली जी ने किया था और कृषि जीवन के अंदर अनेक अधिकार पाने में सुविधा मिली थी। आज केरल में जो शिक्षा की जो स्थिति है, अगर इसका गर्व हम करतें हैं, तो हमे इस बात का भी गर्व करना होगा की दो महापुरुष विशेष रूप से, जिन्होंने केरल में शिक्षा की जोत जलाई थी, एक संत अयंकाली जी और दूसरे नारायण गुरु जी। उस समय दलित, शोषित, पीड़ित, वंचित, पिछड़े, इनके लिये शिक्षा, ये उनका प्राथमिक विषय रहा था और उसके कारण केरल के समाज जीवन में इतना बड़ा बदलाव आया, इतना परिवर्तन आया।
हम हिन्दुस्तान की आज़ादी के आंदोलन की जब चर्चा करतें हैं, तो 1930 की दांडी यात्रा को एक टर्निंग प्वाइंट के रूप में देखते हैं। मैं समझाता हूं, आज़ादी के आंदोलन में 1930 की दांडी यात्रा एक महत्वपूर्ण टर्निंग पॉइंट है, तो दलित उद्धार के आंदोलन में 1913 का कायल सम्मेलन, ये टर्निंग प्वाइंट है। बाबा साहब कहते थे- संगठित बनो, संघर्ष करो, शिक्षित बनो। संत अयंकाली जी ने भी इन्हीं तीन मंत्रों को ले कर के समाज को सशक्त बनाने का काम किया था। उस अर्थ में ऐसे महापुरूष, जिन्होंने समाज के हकों के लिए लड़ाई लड़ी, समाज के अंदर चेतना जगाई, लेकिन कभी समग्रतया समाज जीवन में दरार पैदा होने का प्रयास होने नहीं दिया। सामाजिक एकता को कभी आंच न आए, इसके लिए वह प्रयारत रहे। यह अपने आप में बहुत बड़ी बात है। बाबा साहब अंबेदकर का जीवन देखिए, दलित उद्धार के लिए लड़ाई लड़ी। लेकिन दलितों के अंदर नफरत की आग जलाने का प्रयास कभी बाबा साहब अंबेदकर ने नहीं किया। यही तो दिव्य दृष्टि होती है और वही अयंकाली जी का था कि उन्होंने अन्याय के खिलाफ लड़ना तय माना लेकिन, समाज के प्रति प्रेम, उसमें कभी कटुता को जन्म न आए, इसके लिए एक जागरूक प्रयास किया और उसका परिणाम है कि समाज के ताने-बाने बचे रहते हैं।
समाज जीवन में, यह विविधताओं भरा देश है। विविधता में एकता, यह हमारे भारत की विशेषता है। ये भारत के सौंदर्य को बढ़ाने वाले, हमारी विरासत हैं। उन विविधता में एकता को बनाये रखते हुए, सामाजिक एकता के मूल मंत्र को कोई आंच न आए। लेकिन उसके साथ कोई वंचित न रह जाए। किसी से अन्याय न हो, ये व्यवस्थाओं के ऊपर बल देना, यह हर समय की मांग होती है।
कभी-कभी मुझे लगता है, लोग चर्चा करते हैं, ये 5000 साल हो गए, इस संस्कृति को, परंपरा को। ये कैसे इतना चल रहा है। दुनिया में कई संस्कृतियां नष्ट हो गईं, क्या कारण है? अगर हम देखें तो इस समाज की एक विशेषता है। हर युग में हमारे देश में कोई न कोई समाज सुधारक पैदा हुए हैं। उन समाज सुधारकों ने अपने ही समाज की बुराइयों या कमियों के खिलाफ लड़ाई लड़ी है।
महात्मा गांधी ने आजादी का आंदोलन लड़ा, लेकिन साथ-साथ ही हिंदू समाज में जो अस्पृष्यता थी, उसके खिलाफ भी उन्होंने जंग छेड़ा, लड़ाई लड़ी। राजाराम मोहन राय समाज जीवन के लिए अनेक काम किए, लेकिन समाज में महिलाओं के खिलाफ जो अन्याय हो रहा था, उसके खिलाफ लड़ाई लड़ी। हम भाग्यशाली हैं एक प्रकार से, सदियों से हम देखें, कोई युग ऐसा नहीं गया है, कि हमारे भीतर कोई बुराइयां आई है तो हमारे भीतर ही कोई महापुरूष पैदा हुआ है। उसने हमें उन बुराइयों से मुक्ति के लिए कभी डांटा है तो कभी झकझोरा है, कभी शिक्षित किया है और हमें सुधार करने के लिए रास्ता दिखाया है और हम टिके हैं, उसका कारण यह है कि हमारे यहां एक ऑटो पायलट व्यवस्था है। हमारे भीतर से ही ऐसे महापुरूष पैदा होते हैं, जो हमारी कमियों को दूर करके, हमें सशक्त करने का निरंतर प्रयास करते हैं। हम इसलिए भाग्यवान हैं, कि जो काल बाह्य चीजें हैं, जो किसी समय उपयोगी रही होगी लेकिन, समय रहते निकम्मी रह गई होगी। अगर हमें ऐसे संत नहीं मिले होते, ऐसे समाज सुधारक नहीं मिले होते, तो वहीं चीजें हमारे लिए बोझ बन जाती। हमारे यहां ऐसे महापुरूष पैदा हुए, जिन्होंने हमें उस काल बाह्य चीजों से मुक्ति दिलाई। आधुनिक बनने की दिशा दी। नवचेतना जगाने का प्रयास किया।
एक समाज के रूप में हम स्थगितता को लेकर हम जीने वाले, पनपे हुए लोग नहीं हैं। हम नित्य नूतन प्रयास करने वाले लोग हैं और हर सदी में हुआ है। उस प्रयास करने वाले महापुरूषों में अनेक महापुरूषों का जैसे स्मरण होता है, संत अयंकाली जी का भी होता है। आजादी के आंदोलन में सारे हिन्दुस्तान की तरफ नजर करना, समाज सुधारक, भक्ति आंदोलन चेतना आंदोलन, हर कोने में महापुरूषों की भरमार थी। आजादी के लिए पहले समाज को साशक्त करने के लिए उन्होंने मेहनत की थी। उसी पीठिका का परिणाम था कि 20वीं शताब्दी में हम पूरी ताकत के साथ आजादी के लिए सफलता की ओर आगे बढे और उसकी पीठिका तैयार करने में अयंकाली जैसे अनेक महापुरूषों ने, नारायण गुरू स्वामी जैसे अनेक महापुरूषों ने प्रयास किया था जिस पर परिणाम लाभदायक रहा।
समाज में आजादी के बाद दलित, पीडि़त, शोषितों से मुक्ति के लिए हम बाबा साहब अंबेडकर के जितने आभारी हों, उतने कम हैं। भारत के संविधान में एक ऐसी व्यवस्था दी है, जिसके कारण हमें अपना हक पाने का अवसर मिला है। ये भारत के संविधान निर्माता सब मिल कर के दलितों का, पीडि़तों का, शोषितों का कल्याण हो, उसकी चिंता की है। लेकिन हमें कभी एक समाज के नाते, इतने में ही संतुष्ट हो कर के चलेगा क्या? एक समाज के अग्र वर्ग का बेटा, उसको बैंक में नौकरी मिल जाए, एक दलित मां का बेटा, उसको नौकरी मिल जाए। दोनों को समानता मिलेगी। लेकिन इससे समाज की एकता हो जाती है क्या। नहीं होती है। इसलिए सिर्फ समानता के स्टेशन पर हमारी गाड़ी अटक गई तो हमें जहां जाना है, वहां हम कभी पहुंच नहीं पाएंगे। इसलिए सिर्फ समता से काम नहीं चलता है।सब समाजों के लिये समता हो, इन से काम नहीं चलता है, समता के आगे भी एक यात्रा है, और उस यात्रा के अंतिम मंजिल है समरसता।
समता पर सब कुछ बन गए, दलित का बेटा भी डॉक्टर बन गया, ब्राह्मण का भी बेटा भी डॉक्टर बन गया, दोनों डॉक्टरी कर रहे हैं, लेकिन फिर भी अगर समरसता नहीं है तो कुछ न कुछ कमी महसूस होती है । ये समरसता कब आती है, संविधान की व्यवस्था से, कानून की व्यवस्था से, हकों की लड़ाई लड़ते-लड़ते समता तो मिल सकती, लेकिन समरसता पाने के लिये समाज मे एक सतत निरन्तर, जागरूक समाज का प्रयासकरना पड़ता है । और इसलिये दो मूल बातों को ले करके चलना पड़ता है, सम-भाव+मम-भाव=समरसता। समता प्लस ममता इज इक्वल टू समरसता। समता है, लेकिन अगर ममता नहीं है तो समाज एक रस नहीं बन सकता। सम-भाव है, लेकिन मम-भाव नहीं है, ये भी मेरा है, मेरा ही भाई है, उसकी और मेरी रगों में एक ही खून है, ये भाव जब तक पैदा नहीं होता, तब तक समरसता नहीं आती है ।
इसलिये, हमे सम-भाव की यात्रा को मम-भाव से जोडना है, हमें समता की यात्रा को ममता की यात्रा के साथ जोड़ना है। समता और ममता के भाव को जोड़ कर के ही हम समरसता की यात्रा को आगे बड़ा सकते हैं । तभी जा करके समाज में किसी के प्रति कटुता पैदा नहीं होगी, किसी के साथ अन्याय नहीं होगा, किसी को अपने हकों के लिये लड़ाई नहीं लड़नी पड़ेगी, सहज रूप से उसे प्राप्त होगा । मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि आने वाला युग समरसता की यात्रा का युग है ।
इसे परिपूर्ण करना, समाज का शासकों का, सुधारकों का, शिक्षकों का, संस्कृतिक नेतृत्व करने वालों का, सबका सामूहिक दायित्व है ।
भारत "बहुरत्न वसुंधरा" है । हर युग में ऐसे लोग मिले हैं जिन्होने साहित्यों को पैदा किया है, इन साहित्यों का लाभ हमें अवश्य मिलेगा।
मैं फिर एक बार परम पूज्य अयंकाली जी, उनके उन महान कामों के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करता हूँ, उनके चरणों में नमन करता हूँ, और केपीएमएस के द्वारा ये जो निरन्तर प्रयास चले हैं, मैं उन सब को बहुत हृदय से अभिनन्दन देता हूँ । राजनीतिक दृष्टि से कभी हमारा और उनका मेल नहीं रहा, लेकिन जो प्यार् मुझे केपीएमएस से मिला है, हमेशा मिला है और बाबू तो हमारे लिये, मैंने देखा है, हमेशा, प्यार लिये रहते हैं। ये प्यार बना रहेगा।
मुझे आज आप के बीच आने का अवसर मिला, दिल्ली के इस महत्वपूर्ण ओडिटोरियम में , कभी किसी ने सोचा होगा, 152 साल पहले पैदा हुये एक संत को, इस महत्वपूर्ण भवन में हम लोगों को श्रद्धांजलि देने का सौभाग्य प्राप्त होगा। यही तो बताता है कि ये समरसता की यात्रा का युग है, और इस समरसता की यात्रा को हम सब मिल कर आगे बढायेंगे।
फिर एक बार आप सब को मेरी शुभकामनाएं। फिर एक बार ओणम की बहुत-बहुत शुभकामनाएं, धन्यवाद ।
सबसे पहले तो ये जो बाल मित्र अलग-अलग पेंटिंग ले आए हैं। जरा एसपीजी के लोग कलेक्ट कर लें, वरना ये बच्चे एक-एक घंटे तक ऐसे ही हाथ ऊपर करके ख़ड़े रहते हैं। बहुत बढ़िया चित्र बनाए हैं आप लोगों ने, मैं आप सबका बहुत आभारी हूं। थैंक्यू, अगर आपने पीछे अपना अता-पता लिखा होगा, तो मै आपको धन्यवाद का पत्र जरूर भेजूंगा। देखिए उस तरफ भी कोई बेटी लेकर आई है, उसको भी कलेक्ट कर लीजिए। उस तरफ भी एक बेटी लेकर आई है, मैं आप सबका बहुत-बहुत आभारी हूं।
भारत माता की ... भारत माता की ... भारत माता की
जॉय श्री रामकृष्णो देब !
जॉय माँ शारोदा !
सिंगूर एर एइ पोबित्रो भुमीके
आमार प्रोणाम।
आज सुबह मैं मां कामाख्या की धरती पर था। और अब यहां बाबा तारकेश्वर की धरती पर आप जनता-जनार्दन के दर्शन करने के लिए आया हूं।
साथियों,
सिंगूर का ये जन-सैलाब...आप सभी का ये जोश, ये उत्साह...और अभी तो मैं देख रहा हूं काफी लोग देख भी नहीं पाते होगे। अभी मैंने कोने पर जाकर देखा, दूर-दूर तक लोग ही लोग हैं। ये उत्साह ये जोश पश्चिम बंगाल की नई कहानी बता रहा है। यहां बहुत बड़ी संख्या में माताएं-बहनें आई हैं, किसान आए हैं, श्रमिक आए हैं और नौजवानों का जोश तो हमसब देख रहे हैं, सभी एक ही भाव से एक ही आस लेकर आए हैं कि हमें असली पोरिबॉर्तन चाहिए, हर कोई 15 वर्ष के महाजंगलराज को बदलना चाहता है। और अभी तो बीजेपी-NDA ने बिहार में, जंगलराज को एक बार फिर से रोका है...अब पश्चिम बंगाल भी...TMC के महा-जंगलराज को विदा करने के लिए तैयार है। तैयार हैं ना..पक्का तो आप मेरे साथ संकल्प लेंगे...मैं कहूंगा...
पाल्टानो दोरकार... पाल्टानो दोरकार...
आप कहेंगे...
चाइ बीजेपी शोरकार
पाल्टानो दोरकार
चाइ बीजेपी शोरकार !
साथियों,
मैं आज ऐसे समय में सिंगूर आया हूं...जब देश ने वंदे मातरम् के डेढ़ सौ वर्ष पूरे होने का उत्सव मनाया है। संसद में भी विशेष चर्चा करके, वंदे मातरम् का गौरवगान किया है। पूरी संसद ने, पूरे देश ने ऋषि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय जी को श्रद्धाभाव से नमन किया। हुगली और वंदे मातरम् का रिश्ता तो और भी विशेष है। कहते हैं यहीं पर ऋषि बंकिम जी ने ‘वंदे मातरम्’ को उसका पूर्ण स्वरूप दिया।

साथियों,
जिस प्रकार, वंदे मातरम्, आज़ादी का उद्घोष बना था...हमें वंदे मातरम् को पश्चिम बंगाल को, भारत को विकसित बनाने का मंत्र भी बनाना है।
साथियों,
बंगाल की धरती ने देश की विरासत, देश की आज़ादी के लिए जो दिशा दी, जो नेतृत्व दिया...बीजेपी उस प्रेरणा को राष्ट्र के कोने-कोने तक ले जा रही है।
ये भाजपा सरकार ही है...जिसने दिल्ली में कर्तव्य पथ पर, इंडिया गेट के सामने नेताजी सुभाष की प्रतिमा लगाई। पहली बार, लाल किले से आज़ाद हिंद फौज के योगदान को नमन किया गया। अंडमान-निकोबार में...नेताजी के नाम पर द्वीप का नाम रखा गया। इतना ही नहीं पहले जो 26 जनवरी के कार्यक्रम थे न, वो 24-25 तारीख से शुरू होते थे और 30 तारीख को पूरे होते थे। हमने ये कार्यक्रम बदल दिया। हमने अब 23 जनवरी सुभाष बाबू की जन्म जयंती से शुरू किया और महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर पूरा करने का तय किया।
साथियों,
बांग्ला भाषा और साहित्य बहुत समृद्ध है। लेकिन बांग्ला भाषा को क्लासिकल लैंग्वेज का दर्जा भी तब मिला...जब आपने मुझे आशीर्वाद दिया, बीजेपी की दिल्ली में सरकार बनाई। इससे बांग्ला भाषा में रिसर्च को बल मिलेगा...
साथियों,
बीजेपी सरकार के प्रयासों से ही...दुर्गा पूजा को युनेस्को ने कल्चर हैरिटेज का दर्जा दिया है। ये टीएमसी वाले दिल्ली में सोनिया जी की सरकार में भागीदार थे, क्या तब ये सब काम नहीं करा सकते थे क्या। क्यों नहीं किया। ये मोदी है, जिसको बंगाल के लिए इतना प्यार है, समर्पण है। तब हो रहा है। हमारी सरकार के प्रयासों से ही, गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर के शांति-निकेतन को विश्व धरोहर का दर्जा मिला है। ईश्वर चंद्र विद्यासागर, राजा राममोहन राय, और स्वामी विवेकानंद...इन महापुरुषों की जन्म-जयंतियों से जुड़े अहम पड़ावों को, नेशनल लेवल पर मनाने का सौभाग्य भी हमारी सरकार को ही मिला है।
ये हम इसलिए कह रहे हैं. और इसलिए कर रहे हैं...क्योंकि बीजेपी विकास और विरासत, दोनों को महत्व देती है। विकास और विरासत के इसी मॉडल पर चलते हुए बीजेपी, पश्चिम बंगाल के विकास को भी गति देगी।

साथियों,
पश्चिम बंगाल का सामर्थ्य बहुत बड़ा है। यहां बड़ी नदियां हैं...बहुत बड़ी कोस्टलाइन है...यहां उपजाऊ जमीन है...पश्चिम बंगाल के हर जिले में, कुछ न कुछ खास है। और यहां के लोग तो बुद्धि प्रतिभा सामर्थ्य, समर्पण अद्भुत है। भाजपा हर जिले की इस ताकत को और ज्यादा बढ़ाएगी। और जब हर जिले के हिसाब से योजनाएं बनेंगी तो इसका सबसे ज्यादा लाभ उन जिलों में रहने वाले लोगों को होगा। जैसे, यहां की धनियाखाली साड़ी है...यहां का जूट है, हैंडलूम से जुड़े अन्य प्रोडक्ट हैं...पीढ़ियों से लोग इस काम से जुड़े हैं...बीजेपी, वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट स्कीम के तहत, हर जिले के ऐसे प्रोडक्ट को प्रोत्साहन देगी। भाजपा, यहां सरकार बनाते ही प्लास्टिक को लेकर ठोस नीति बनाएगी...और जूट की पैकेजिंग को और बढ़ावा देगी। इससे यहां के जूट उद्योग को और बल मिलेगा।
साथियों,
हुगली में बहुत बड़ी मात्रा में आलू और प्याज की खेती होती है...अन्य सब्जियां उगाई जाती हैं...दुनिया में फ्रेश सब्जियों की बहुत डिमांड है...साथ ही पैकेज्ड सब्जियों के लिए भी दुनिया में बहुत बड़ा मार्केट है। मेरा तो सपना है कि दुनिया भर के बाजारों में...भारत के किसानों, पशुपालकों और मछुआरों के उत्पाद दुनिया में धूम मचाए दोस्तों, दुनिया में धूम मचाए। इसलिए, देशभर में फूड प्रोसेसिंग फेसिलिटी और कोल्ड स्टोरेज चेन बनाने पर बहुत काम हो रहा है। यहां बनने वाली भाजपा सरकार...इस काम को भी तेज़ गति से आगे बढ़ाएगी। और ये मोदी की गारंटी है।
साथियों,
मेरा निरंतर प्रयास रहता है कि बंगाल के नौजवानों, किसानों, माताओं-बहनों की हर संभव सेवा करूं। लेकिन यहां की TMC सरकार...केंद्र सरकार की योजनाओं को आप तक ठीक से पहुंचने ही नहीं देती। अरे भाई, अगर इनको मोदी से परेशानी है...ये तो मैं समझ सकता हूं। इनको बीजेपी से दुश्मनी है...ये भी समझ में आता है। लेकिन TMC तो बंगाल के लोगों से अपनी दुश्मनी निकाल रही है। TMC… यहां के नौजवानों, यहां की माताओं-बहनों, यहां के किसानों से दुश्मनी ठाने हुए है...
साथियों,
बंगाल के मछुआरों से टीएमसी कैसे अपनी दुश्मनी निकाल रही है...इसका मैं आपको एक उदाहरण देता हूं। बंगाल में लाखों परिवार मछली के काम से जुड़े हुए हैं। यहां से अभी जितनी मछली एक्सपोर्ट होती है...उससे कहीं अधिक संभावनाएं बंगाल में हैं। बंगाल के फिशरमैन में वो ताकत है, इसके लिए ज़रूरी है कि मेरे मछुआरे भाई-बहनों को मदद मिले.. मेरे मछुआरे भाई-बहनों को बेहतर टेक्नॉलॉजी मिले। इसी सोच के साथ देशभर के मछुआरों की मदद के लिए, केंद्र सरकार ने एक डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाया है। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म पर देश भर की राज्य सरकारें अपने यहां के मछुवारों के नाम रजिस्टर करवा रही हैं। लेकिन बंगाल में इस काम पर ब्रेक लगा हुआ है। हम बंगाल की टीएमसी सरकार को बार-बार चिट्ठी लिखते हैं...मुख्यमंत्री जी चिट्ठी नहीं पढ़ती हैं, लेकिन अफसरों को तो पढ़ने दो, लेकिन टीएमसी सरकार यहां के मछुआरों के रजिस्ट्रेशन में बिल्कुल सहयोग नहीं कर रही है, इसलिए इससे बंगाल के मछुआरों को पीएम मत्स्य संपदा योजना जैसी, केंद्र की स्कीम्स का फायदा नहीं मिल पा रहा।

साथियों,
TMC, बंगाल के नौजवानों के भविष्य के साथ भी खेल खेल रही है। पूरे देश में हज़ारों आधुनिक पीएमश्री स्कूल खोले जा रहे हैं...लेकिन टीएमसी, बंगाल के बच्चों को पीएम श्री स्कूल की बेहतर शिक्षा से भी वंचित रख रही है। आप मुझे बताइए...बंगाल के बच्चों का भविष्य तबाह कर रही TMC सरकार को जाना चाहिए की नहीं जाना चाहिए? टीएमसी को भगाना चाहिए की नहीं भगाना चाहिए, टीएमसी को हटाना चाहिए ना नहीं हटाना चाहिए। बंगाल को बचाना चाहिए या नहीं बचाना चाहिए। नौजवानों को भविष्य बनाना चाहिए की नहीं बनाना चाहिए, माताओं-बहनों को सुरक्षा देनी चाहिए की नहीं देनी चाहिए। क्या ऐसी TMC सरकार की बंगाल को सजा देनी चाहिए या नहीं? ये टीएमसी को सजा मिलनी चाहिए की नहीं मिलनी चाहिए।
साथियों,
देश में जो भी सरकारें, विकास को रोकती हैं...गरीब कल्याण के काम में रुकावट डालती हैं...देश का मतदाता अब जान चुका है, देश का मतदाता अब जाग चुका है। ये रूकावट डालने वाले हर किसी को लगातार सजा मिलती रही है। दिल्ली प्रदेश में भी एक ऐसी ही सरकार थी, जो केंद्र की योजनाओं को लागू नहीं होने देती थी। हम उनको कहते रहे कि दिल्ली के गरीब परिवारों को मुफ्त इलाज देने वाली आयुष्मान स्कीम लागू करो। लेकिन वो सुनते ही नहीं थे। वे राजनीतिक हिसाब किताब में ही लगे रहते थे, इसलिए दिल्ली की जनता ने उनको सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा दिया। मुख्यमंत्री को भी घर भेज दिया और अब दिल्ली में आयुष्मान योजना से गरीबों का मुफ्त इलाज हो रहा है।
साथियों,
बंगाल की जनता भी ठान चुकी है। यहां के लोग टीएमसी की निर्मम सरकार को सबक सिखाने वाले हैं...ताकि यहां भी बीजेपी सरकार बने...और आयुष्मान भारत योजना बंगाल में भी लागू हो...गरीबों को मुफ्त इलाज मिले।
साथियों,
बंगाल में भाजपा की डबल इंजन सरकार बननी बहुत जरूरी है। जहां भी भाजपा की डबल इंजन सरकार है…वहां केंद्र सरकार की योजनाओं के तहत बहुत शानदार काम हो रहा है। मैं आपको हर घर नल से जल की बात बताता हूं...देश के गांव-गांव में, हर घर तक पाइप से जल पहुंचे....इसके लिए केंद्र की बीजेपी सरकार ये अभियान सरकार चला रही है। अब जैसे त्रिपुरा है...वहां पहले की सरकार के समय सौ में सिर्फ चार घरों में ही नल से जल आता था। जब लेफ्ट वालों की सरकार थी ने आपके पड़ोस में 100 घरों में से सिर्फ 4 घरों में लेकिन बीजेपी की डबल इंजन सरकार के कारण...आज वहां सौ में से पिचासी घरों में नल से जल आने लगा है। ये आंकड़ा आपको याद रहेगा। ये आंकड़ा आपको याद रहेगा। आप बताएं, न तो दोबारा बताऊं मैं। जब लेफ्ट वालों की सरकार थी तो 100 घरों में से सिर्फ 4 घरों में नल से जल आता था। आज 85 घरों में पानी पहुंचता है।
साथियों,
आज भी बंगाल में आधी आबादी ऐसी है जिनके यहां नल से जल नहीं आता। अगर त्रिपुरा में बीजेपी ना आती तो आज भी वहां यही हाल होता, बंगाल में बीजेपी आएगी को यहां भी हाल बदलेगा। हमारी माताओं-बहनों को...हमारी बेटियों को पानी लाने के लिए कितनी परेशानी होती है। भाजपा सरकार इस परेशानी से आपको मुक्ति दिलाकर रहेगी...और ये मोदी की गारंटी है।

साथियों,
बंगाल से टीएमसी के महा-जंगलराज का जाना...और बीजेपी के सुशासन का आना ये बहुत ज़रूरी है। इसके लिए, ईश्वरचंद्र विद्यासागर जी की के बताए रास्ते पर चलना होगा। उन्होंने नारी-शक्ति और युवा-शक्ति को परिवर्तन का माध्यम बनाया था। अब बंगाल की बहनों-बेटियों को, यहां के नौजवानों को अपनी आवाज़ बुलंद करनी होगी। टीएमसी के राज में, बेटियां भी सुरक्षित नहीं हैं...और यहां की शिक्षा व्यवस्था भी माफिया और भ्रष्टाचारियों के कब्जे में है। इसलिए...मैं पश्चिम बंगाल की माताओं-बहनों से भी एक आग्रह करना चाहता हूं...आपके बेटे-बेटियों को तब तक अच्छी शिक्षा और अच्छी नौकरी नहीं मिलेगी...जबतक यहां टीएमसी के पास सत्ता की ताकत रहेगी। इसलिए, आपको आने वाले विधानसभा चुनाव में...आपको भाजपा को वोट देना है। भाजपा को आपका एक वोट पक्का करेगा...कि यहां कॉलेजों में बलात्कार, रेप और हिंसा की घटनाओं पर लगाम लगे। भाजपा को आपका एक वोट पक्का करेगा...कि बंगाल में फिर से संदेशखाली जैसी घटना ना हो। भाजपा को आपका एक वोट इस बात को पक्का करेगा...कि फिर से बंगाल में हज़ारों शिक्षक अपनी नौकरी नहीं खोएं..
साथियों,
टीएमसी को सबक सिखाना बहुत ज़रूरी है। यहां छोटे से छोटा टीएमसी का नेता... खुद को बंगाल का माई-बाप समझने लगा है। हुगली को तो इन्होंने शिक्षक भर्ती घोटाले के लिए बदनाम किया है। बीजेपी युवाओं को लूटने वालों को ज़रूर सज़ा दिलाएगी।
साथियों,
आपको एक और बात याद रखनी है। बंगाल में उद्योग तभी लगेंगे, निवेश तभी आएगा..जब यहां कानून-व्यवस्था बेहतर होगी।लेकिन बंगाल में...दंगाइयों को, लूटने वालों को...माफियाओं को...खुली छूट मिली हुई है। आपको भी पता है कि यहां हर चीज़ पर सिंडिकेट टैक्स लगाया जाता है। इस सिंडिकेट टैक्स को...इस माफियावाद को भाजपा सरकार ही खत्म करेगी..और ये भी मोदी की गारंटी है।
साथियों,
टीएमसी सरकार, पश्चिम बंगाल की, देश की सुरक्षा से भी खिलवाड़ कर रही है। इसलिए, यहां के नौजवानों को खासतौर पर बहुत सावधान रहना है।
टीएमसी, यहां घुसपैठियों को भांति-भांति की सुविधाएं देती है...घुसपैठियों को बचाने के लिए धरने-प्रदर्शन करती है...आप याद रखिए...टीएमसी को घुसपैठिए इसलिए पसंद हैं...क्योंकि वो इनके पक्के वोटबैंक हैं।
घुसपैठियों को बचाने के लिए टीएमसी किसी भी हद तक जा सकती है।
बीते 11 वर्षों से, केंद्र सरकार टीएमसी सरकार को बार-बार चिट्ठी लिख रही है...कि बंगाल के बॉर्डर पर फेंसिंग लगानी है, इसके लिए ज़मीन चाहिए।
लेकिन टीएमसी को कोई फर्क नहीं पड़ता। टीएमसी ऐसे गिरोहों को संरक्षण देती है..जो घुसपैठियों को सुरक्षा देते हैं, उनके लिए फर्ज़ी डॉक्यूमेंट बनाते हैं।
साथियों,
समय आ गया है, जब घुसपैठ को भी पूरी तरह रोकना होगा...और जो लोग बीते दशकों में, फर्ज़ी कागज़ बनाकर यहां घुल-मिल गए हैं...उनकी पहचान करके, उन्हें उनके देश वापस भी भेजना होगा। ये काम कौन कर सकता है, ये काम कौन कर सकता है, ये काम कौन कर सकता है, ये काम कौन कर सकता है, ये काम आपका एक वोट कर सकता है। आपके वोट की एक ताकत है, आप का वोट ये सारे सपने पूरा करा सकता है। बीजेपी को दिया...आपका एक-एक वोट घुसपैठियों को भगा सकता है। इसलिए, इस बारी आपको एक ही लक्ष्य...एक ही धुन...एक ही सुर... एक ही संकल्प लेना है...
पाल्टानो दोरकार…
पाल्टानो दोरकार…
चाइ बीजेपी शोरकार !
पाल्टानो दोरकार…
पाल्टानो दोरकार…
पाल्टानो दोरकार…
पाल्टानो दोरकार…
इसी संकल्प के साथ...एक बार फिर आप सभी को यहां विशाल संख्या में हमें आशीर्वाद देने के लिए आने के लिए मैं आपका बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूं।
मेरे साथ बोलिए
भारत माता की जय !
भारत माता की जय !
भारत माता की जय !
वंदे...वंदे..वंदे... वंदे..वंदे...!


