"तामिळनाडूतील प्रत्येक घरातून जसा पोंगलचा प्रवाह वाहतो, तसाच प्रत्येकाच्या आयुष्यात आनंद आणि समृद्धीचा प्रवाह वाहो याच शुभेच्छा आपण देत आहोत"
"कुटुंब आणि मित्रांसोबत सण साजरा करण्यासारखीच आजची भावना आहे"
"पिके, शेतकरी आणि गावे बहुतांश सणांच्या केंद्रस्थानी आहेत"
“भरड धान्याला मिळालेल्या प्रोत्साहनामुळे लहान शेतकरी आणि तरुण उद्योजकांना फायदा होत आहे”
"पोंगल सण एक भारत श्रेष्ठ भारत ही राष्ट्रीय भावना प्रतिबिंबित करतो"
“2047 पर्यंत विकसित भारत निर्माण करण्यासाठी ही एकतेची भावना सर्वात मोठे सामर्थ्य आहे”

वणक्कम, (नमस्कार) आपल्या सर्वांना पोंगल सणाच्या अनेक अनेक शुभेच्छा ! इनिय पोङ्गल् नल्वाळ्तुक्कल् !

 

पोंगलच्या पवित्र दिनी, तामिळनाडूच्या प्रत्येक घरात पोंगलच्या धारेचा प्रवाह असतो. माझी अशी इच्छा आहे, की आपल्या आयुष्यात देखील सुख समृद्धी आणि समाधानाच्या धारेचा हा प्रवाह असाच निरंतर वाहत राहो. कालच देशभरात लोहडीचा सण मोठ्या उत्साहात साजरा केला गेला. काही ठिकाणी आज मकर संक्रांती उत्तरायण साजरे केले जात आहे, तर काही ठिकाणी, ते कदाचित उद्या साजरे केले जाईल. माघ बिहू देखील, आता येणारच आहे. मी या सर्व सण-उत्सवांसाठी सर्व देशबांधवांना खूप खूप शुभेच्छा देतो, माझ्या शुभकामना त्यांच्या सोबत आहेत.

 

मित्रांनो,

मला इथे काही ओळखीचे चेहरे दिसत आहेत. गेल्या वर्षी देखील आपण सराव तामिळ पुथांडु च्या निमित्त इथे भेटलो होतो. मी मुरूगन जी यांना धन्यवाद देतो, की त्यांनी मला या अद्भुत कार्यक्रमात सहभागी होण्याची संधी दिली. मला असे वाटते आहे, की जसे मी माझे कुटुंबिय आणि मित्रांसोबत काही उत्सव साजरा करतो आहे.

मित्रांनो,

संत तिरुवल्लूवर यांनी म्हटले होते-  तळ्ळा विळैयुळुम् तक्कारुम् ताळ्विला चेव्वरुम् सेर्वदु नाडु. म्हणजे, उत्तम पीक, शिकल्या सवरलेल्या व्यक्ती आणि प्रामाणिक व्यापारी हे तिन्ही घटक मिळून राष्ट्र उभारणी करत असतात. तिरुवल्लूवर जी यांनी त्यात राजकारण्यांचा उल्लेख नाही केला, हा आपल्या सर्वांसाठी एक संदेश आहे. पोंगलच्या सणात नवे पीक देवाच्या चरणी वाहण्याची परंपरा आहे. या संपूर्ण परंपरेचे केंद्र आपले अन्नदाता, आपले शेतकरी आहेत. आणि तसेही, भारतातील प्रत्येक सण कोणत्या ना कोणत्या स्वरूपात, गावाशी, शेतीशी, पिकांशी जोडलेला असतो. 

 

मला आठवते, गेल्या वर्षी, आम्ही याविषयी देखील चर्चा केली, की कशी आपले भरड धान्य किंवा श्रीअन्न हे  तामिळ संस्कृतीचा भाग आहेत. मला अत्यंत आनंद आहे, की या सूपरफूडबद्दल देशात आणि जगातही एक नवी जागृती आली आहे. आमचे अनेक युवक,भरड धान्य, श्री अन्न याच्याशी संबंधित स्टार्टअप्स सुरू करत आहेत आणि ह्या स्टार्ट अप्स आज अत्यंत लोकप्रिय झाल्या आहेत.

श्री अन्नाच्या  उत्पादनांशी  आपल्या देशातील, तीन कोटींपेक्षा अधिक छोटे शेतकरी संबधित आहेत. आम्ही श्री अन्नाला प्रोत्साहन दिले तर त्याचा थेट लाभ या तीन कोटी शेतकऱ्यांना मिळतो.

 

मित्रांनो,

पोंगलच्या निमित्ताने, तामिळ स्त्रिया आपल्या घराच्या बाहेर कोलम तयार करतात. सर्वात आधी, त्या तांदळाच्या पीठाचा वापर करून, जमिनीवर अनेक ठिपक्यांच्या रचना तयार करतात. आणि जेव्हा या  ठिपक्यांच्या विविध रचना तयार होतात, तेव्हा त्या प्रत्येकाचे एक वेगळे महत्त्व असते. हे चित्र देखील मन मोहवणारे असते. मात्र कोलमचे खरे रूप तेव्हा अधिक समृद्ध आणि सुंदर असते, जेव्हा हे सगळे ठिपके  एकत्र जोडले जातात आणि त्यातून एक नवीन कलाकृती तयार होऊन, त्यात रंग भरले जातात.

आपला देश आणि त्यातील विविधता सुद्धा या कोलम सारखी आहे. जेव्हा देशाचा काना कोपरा एकमेकांशी भावनिक दृष्ट्या जोडला जातो, तेव्हा आपली शक्ती एका वेगळ्या स्वरूपात दिसते. पोंगलचा सण देखील एक असा असाच एक सण आहे, जो एक भारत-श्रेष्ठ भारताची राष्ट्रीय भावना प्रतिबिंबित करतो. पूर्वी काशी-तमिळ संगमम आणि सौराष्ट्र तमिळ संगमम यांनी एक अतिशय महत्त्वाची परंपरा सुरू केली आहे आणि ही भावना त्यांच्यातही दिसून येते. या सर्व कार्यक्रमांमध्ये आपले तामिळ बंधू-भगिनी मोठ्या संख्येने उत्साहाने सहभागी होतात.

 

मित्रांनो,

एकतेची ही भावना 2047 पर्यंत विकसित भारताच्या उभारणीसाठी सर्वात मोठी ताकद आणि सर्वात मोठी ठेव आहे. तुम्हाला आठवत असेल, मी लाल किल्ल्यावरून पुकारलेल्या पंचप्रणाचा मुख्य घटक म्हणजे देशाच्या एकतेला ऊर्जा देणे, देशाच्या एकतेला बळकटी देणे. पोंगलच्या या शुभ सणानिमित्त आपल्याला देशाची एकता बळकट करण्याच्या आपल्या संकल्पाचा पुनरुच्चार करावा लागेल.

मित्रांनो, आज अनेक कलाकार, नामवंत कलाकार आणि मान्यवर इथे आपल्या कलेच्या सादरीकरणासाठी तयार आहेत, तुम्ही सर्वजण वाट पाहत असाल, मी देखील वाट पाहत आहे. हे सर्व कलाकार राजधानी दिल्लीत प्रत्यक्ष तामिळनाडूचे दर्शन आपल्याला घडवणार आहेत.  त्यायोगे, आपल्याला काही काळ तामिळनाडू मध्ये राहण्याची संधी मिळेल, हे देखील एक सदभाग्य आहे. या सर्व कलाकारांना माझ्या शुभेच्छा. मी पुन्हा एकदा मुरुगनजी यांचे आभार मानतो.

मुणक्कम !

 

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August 10, 2026

प्रधानमंत्री – मेरे यहां, मुझे यहां लगभग 12-13 साल हो गए इसी मकान में, अगर मैंने regularly और हर बार किसी को रिसिव किया है, किसी को मैं मिला हूं, तो खिलाड़ी हैं। पिछले 10-12 साल हो गए, आप लोगों के पुरुषार्थ के कारण, भारत को लगातार विजय दिलाने के आपके प्रयासों के कारण और उत्तरोत्तर सफलता में नई ऊंचाईयां पार करने की परंपरा के कारण, जो काम शायद हम स्कूलों में जाकर कहें कि नहीं नहीं भई खेलना चाहिए, ये करना चाहिए, वो काम स्कूलों में जाकर के हम कर सकते थे, उससे ज्यादा आपका मेडल उनको inspire करता है।

प्रधानमंत्री – तुमने मुझे वादा किया था पिछली बार कि तुम्हारी दोनों बेटियां खिलाड़ी बन जाएंगी?

खिलाड़ी - हाँ जी अभी वे उमर की छोटी हैं, अगले कॉमनवेल्थ में एक घर में तीन मेडल लाकर दिखाएंगी।

प्रधानमंत्री – पक्का।

खिलाड़ी – हाँ जी।

खिलाड़ी – जब मैं दौड़ रहा था, जब मेरा इवेंट था 29 को, तो उस दिन गुरुपूर्णिमा थी, तो उस दिन मेरे गुरू को मैंने एक गिफ्ट दे दिया।

प्रधानमंत्री – बड़ी शान बढ़ाई आपने। इतनी आंसू टपक रहे थे, मुझे लगता है कि आंसू के हर बूंद से जैसे गोल्ड मेडल टपक रहा है।

खिलाड़ी – मैं बहुत ज्यादा खुशी थी, इमोशनल भी थे उसी दिन, खुशी ज्यादा था और मैं इसलिए रोई थी कि मेरा पेरिस आलंपिक में मेरा 1 Kg में मेडल रह गई थी और एक प्लेयर्स की लाइफ में क्या क्या हमको फेस करना पड़ता है। तो ये 4 साल के अंदर में कितना क्या क्या कुछ मैंने फेस किया था, हर टाइम injury ही चल रहे थे और family problem, वो सब हो रहा था। तो बहुत मुश्किल से मैं ये 4 साल फेस किया था। तो वो सब जब पोडियम में जब मैं खड़ी थी सर और हमारी जो फ्लैग ऊपर जाते हैं और हमारे नेशनल एंथम जब बजते हैं तो सर हम रुक नहीं सकते सर, अपना आप आंसू निकलते हैं।

प्रधानमंत्री – बहुत बहुत बढ़िया

प्रधानमंत्री – आपके इस अचीवमेंट को सिर्फ आपका अचीवमेंट मानता हूं, ऐसा नहीं है, ये आपका विजय आने वाली पीढ़ियों के लिए बहुत बड़ी प्रेरणा बन जाता है।

खिलाड़ी – सब डर रहे थे हमसे कि इंडिया के साथ फाइट आ गई, अब तो हम पहली फाइट ही हार जायेंगे, हमारा मेडल भी नहीं आयेगा।

प्रधानमंत्री – यानी मान के चलते हैं।

खिलाड़ी – हाँ सर।

प्रधानमंत्री – क्या हुआ, वो restaurant वालों से झगड़ा कर रही थी?

खिलाड़ी – हम लोगों का जो इतना अच्छा परफॉर्मेंस था, लास्ट डे था और सब जीत के गए थे और पूरा इंडिया के लोग थे। तो थोड़ा सा मुझे बुरा लग रहा। तो मैंने उनको अच्छे से बोला रिक्वेस्ट किया था सर, फिर उन्होंने मान भी लिया, अभी चेंज भी हो गया सर।

प्रधानमंत्री – इस विजय की परिस्थिति खुशी, आनंद, अपने साथियों के साथ और गेम पूरे हो चुके हैं। तो हसी मजाक मस्ती का मूड ऐसे समय उस मैप पर नजर जाना और उसको रजिस्टर करना और तुरंत सिर्फ मेडल लेते समय देश खड़ा हो जाता है ऐसा नहीं, भीतर से देश का भाव मैं सच बताता हूँ ये वीडियो सामान्य नहीं है आपका, लंबे समय तक लोगों को याद रहेगा। ये बॉक्सिंग वालों से भी दुनिया के खिलाड़ी अब डरने लगे हैं।

खिलाड़ी – जरूर सर, पुरे सभी डरे हुए थे। एक के बाद एक गोल्ड मेडल गोल्ड मेडल आ रहे थे और मतलब पूरा लास्ट में ऐसे धमाका जैसा हो गया बिल्कुल। जिस तरीके से हम लोगों को सपोर्ट मिल रहा है, हमें बैक टू बैक कंपटीशन मिल रहा है वो एक बहुत बड़ी बात है और हमारे जितने भी यंग एथलीट है वो लोग सभी जैसे खेलो इंडिया स्कीम से आए हुए हैं और ये एक बहुत बड़ा changes ला रहा है पूरे स्पोर्ट्स में ही।

प्रधानमंत्री – अगर आप लोग खेलो इंडिया की प्रतिष्ठा बढ़ाते हैं और प्रतिष्ठा सिर्फ वहां जाकर के रिबिन काटने से नहीं होगी। आप वैसे ही खेलेंगे जैसे एक छोटा विद्यार्थी, एक छोटा नौजवान, छोटा खिलाड़ी खेलता है। यह बहुत बड़ा कंट्रीब्यूशन करेगा। क्योंकि अभी तो हमें बहुत आगे जाना है, बहुत मेडल लाना है। कारगिल विजय दिवस पर किसकी विजय हुई थी?

खिलाड़ी – उस दिन कारगिल डे था वैसे और जिस दिन मैंने पाकिस्तान के साथ फाइट किया था सर, वो उसी दिन का था। तो मैं एक इंडियन आर्मी से हूं, तो मैंने उस दिन मैं पहले से बहुत वो था कि सर पाकिस्तान को हराना है। तो मैंने वो पाकिस्तान एक तरफ मैंने 5-0 से हराया, तो मैंने हमारा इंडियन आर्मी का कारगिल हीरोज़ को मैंने डेडिकेट किया किया था सर।

प्रधानमंत्री – आपको यह याद रहना और आप स्वयं फौज से हैं तो, मैं जरूर मानता हूं कि देश के वीर जवानों को आपने जो भाव प्रकट किया ना कि, मैं कारगिल के विजेताओं को मेरा मेडल समर्पित करता हूं। उसने उस विजय पर चार चांद लगा दिए और जिसको पराजित करना था उसी को किया आपने।

खिलाड़ी – वो पाकिस्तान की बात चल रही है, मुझे किस्सा याद आ गया सर। 2015 वर्ल्ड मिलिट्री गेम थे और मेरी पाकिस्तान के साथ पहली फाइट आ गई थी और वर्ल्ड मिलिट्री गेम थे तो मिलिट्री वाले के फोन आए कि भई पाकिस्तान से नहीं हारना है। तो फिर मैं फर्स्ट राउंड 4-1 से जीत गया। सेकंड राउंड 3-2 से जीत गया, पर दोनों के सर लग गए आपस में, तो दोनों के लग गए कट और फाइट तो मैं जीत गया।

प्रधानमंत्री – हाँ

खिलाड़ी – उसके बाद फिर दोनों चले गए हॉस्पिटल में टांके लगवाने के लिए। फिर 2014 में आप फर्स्ट टाइम प्रधानमंत्री जी बने थे और जो हमारे साथ आर्मी का कोच गया हुआ था उसका नाम नरेंद्र राणा था और फिर वो कई देर तक सोच के मेरे को बोला कि भाईजान एक बात बोलूं, मैं हां बोलो, बोला भाईजान आपका नाम नरेंद्र है। आपके कोच का नाम नरेंद्र है, आपके प्रधानमंत्री का नाम नरेंद्र है, तो मुझे नरेंद्र नाम से नफरत हो गई है।

प्रधानमंत्री – सिर्फ आपने मेडल की संख्या बढ़ाई ऐसा नहीं है। आपने एक पीढ़ी को तैयार किया।

खिलाड़ी – मेरे मन में भी धक-धक धक-धक हो रहा है सर।

प्रधानमंत्री – आप चिंता मत कीजिए।

खिलाड़ी – पर..

प्रधानमंत्री – आप चाहें तो आपको बोलने में भी मेडल मिलने वाला है।

खिलाड़ी – मेरे फ्रेंड सर्कल में किसी ने बोला था कि मैं उनको कुछ बोलती थी भई तुम्हारे अच्छे के लिए तुम करो। तो अक्सर मुझे वो बोलते थे कि तू के मोदी ते मिल रही है?

प्रधानमंत्री – हाँ

खिलाड़ी – हरियाणवी में बोल देते हैं सर कि क्या तू मोदी से मिली हुई है, कि तेरी बात माने। तो आज मैं आपसे मिली हूं सर। मैं उनको बोल पाऊंगी कि हां मैं मोदी जी से मिली हूं।

खिलाड़ी – कॉमनवेंल्थ गेम्स में मैंने सिल्वर मेडल जीता, फिर मैंने क्रेडिट साहब को दिया, सपना तो था एक बार मेडल जीत के लेके आने के लिए, बट ट्रेनिंग का सेंटर नहीं था, मैंने SAI आने के बाद मैं बहुत ट्रेनिंग करके मेडल जीत पा रहा, इसलिए बहुत खुशी से मैंने सर को क्रेडिट दिया था क्योंकि बहुत इंप्रूव हुआ।

प्रधानमंत्री – मेरे लिए बहुत बड़ा सम्मान का विषय है, मेहनत आपने की और मुझे याद किया, मैं आपका बहुत आभारी हूं दोस्त।

प्रधानमंत्री – वाराणसी में खेल तुम प्रैक्टिस कर रही थी ना?

खिलाड़ी – जी सर।

प्रधानमंत्री – कैसा बना है स्टेडियम?

खिलाड़ी – सर अच्छा बना है, वहां पर मैं 10-12 दिन के लिए ट्रेनिंग करने गई थी, क्योंकि मैं मंदिर गई थी तो वहां पर ही ट्रेनिंग करके आई थी। और मैं वहां पे मतलब सेटल भी होना चाहती हूं क्योंकि मुझे काशी विश्वनाथ बहुत अच्छा लगता है सर।

प्रधानमंत्री – भोपाल में ट्रेनिंग कर रही थी ना?

खिलाड़ी – जी सर।

प्रधानमंत्री – तो उज्जैन जाते थे कि नहीं?

खिलाड़ी – जी सर उज्जैन भी गई थी सर।

प्रधानमंत्री – अच्छा महाकाल के पास भी गई।

खिलाड़ी – जी सर।

प्रधानमंत्री – काशी विश्वनाथ के पास हो आई एक बार।

खिलाड़ी – जी सर।

प्रधानमंत्री – सावन महीना तो अभी है।

खिलाड़ी – वहां घर जाके फिर उसके बाद जाऊंगी सर।

प्रधानमंत्री – ठीक है।

खिलाड़ी – साई ने भी सर बहुत सपोर्ट किया है मुझे। इसके कारण ही मैं यहां तक पहुंची हूं सर। और मैं खेलो इंडिया स्कीम में भी थी 2018 में जो फर्स्ट खेलो इंडिया हुआ था, उसमें मेरा सिल्वर मेडल था, वहां पे भी मैंने आपको देखा था ओपनिंग सेरेमनी में, तो उसमें मेरा मेडल था, तो मेरे को स्कीम भी मिल गया और मैं यहां तक पहुंची हूं सर।

प्रधानमंत्री – स्पोर्ट्स व्यवस्था एक बात है, लेकिन देश मेडल तब प्राप्त करता है जब देश में स्पोर्ट्स कल्चर बनता है। दोस्तों आपने बहुत बड़ा काम किया है। देश का नाम रोशन किया है। आपको मैं बहुत बधाई देता हूं और आप विश्वास कीजिए आगे भी आप विजयी होंगे और फिर से एक बार यहीं पर हम मिलेंगे। बहुत-बहुत धन्यवाद। बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

प्रधानमंत्री – ये लगातार तीसरी बार देश को मेडल दिलवाया है।

खिलाड़ी – थैंक यू सर।

प्रधानमंत्री – बहुत आशीर्वाद बेटा।

खिलाड़ी – और थैंक यू सो मच मैं सर के हाथ से लड्डू खा रही मेरा कल बर्थडे था तो आज सर के हाथ से…

प्रधानमंत्री – बहुत बधाई वाह।

प्रधानमंत्री – मुस्कुराओ यार ।

प्रधानमंत्री – जो खेलेगा वो खिलेगा।