Malayalis for a long time wanted the name of Kerala to be changed to Keralam. I can see the happiness on all your faces: PM Modi
Previous govts have for decades neglected the fishermen community. But now the NDA govt is progressing and boosting them to unlimited capabilities: PM
Under the Pradhan Mantri Matsya Sampada Yojana, a provision of around 1400 crore rupees has been made for Keralam: PM Modi
PM Modi expresses confidence that the growth of Kerala’s coastal economy would contribute to the broader vision of building a Viksit Bharat and a Viksit Keralam

भारत माता की...

भारत माता की...

भारत माता की...

अखिल केरला धीवरा सभा के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट श्री पुंदुरा श्रीकुमार जी, जनरल सेक्रेटरी श्री वी दिनाकरन जी, बीजेपी स्टेट प्रेसिडेंट, श्री राजीव चंद्रशेखर जी, धीवरा सभा के प्रेसिडेंट, श्री एमवी वारिजाक्षण जी, केंद्र सरकार में मेरे सहयोगी, श्री जॉर्ज कुरियन जी, सभी जनप्रतिनिधिगण, धीवरा सभा के अन्य सम्मानित सदस्यगण,
धीवरा महिला सभा की पदाधिकारीगण अन्य सभी संगठनों के साथी,
और भाइयों एवं बहनों, कडलिन्डे मकलक्क... नमस्कारम् । आज हम सभी एक ऐतिहासिक अवसर के साक्षी बन रहे हैं। अखिल केरला धीवरा सभा आज अपनी Fiftieth Anniversary मना रही है। पिछले Fifty Years से ये संगठन फिशरमेन समुदाय के अधिकारों की रक्षा के लिए निरंतर काम कर रहा है। Fifty Years की इस यात्रा में आपका परिश्रम जुड़ा है, आपका सेवा भाव जुड़ा है। मैं इस शुभ अवसर पर केरलम के सभी फिशरमेन साथियों को...धीवरा सभा के सदस्यों को शुभकामनाएं देता हूं। 

एंडे सुहुर्तगड़े,

अभी आप अपने भाषण में कह रहे थे कि प्रधानमंत्री ब्लेसिंग देने आए हैं। मेरे लिए तो जनता जनार्दन ही भगवान है मैं ब्लेसिंग लेने के लिए आया हूं। कुछ ही समय पहले जब मैं केरलम आया था... तो अखिल केरला धीवरा सभा के साथियों से मेरी मुलाक़ात हुई थी। कई विषयों पर आपसे चर्चा हुई थी। इतने कम समय में ही, इस महत्वपूर्ण आयोजन में मैं एक बार फिर आपके बीच उपस्थित हूं। और आज जब मैं आपके बीच आया हूँ...तो पूरे प्रदेश के लिए एक आनंद का भाव भी है। मेरे मलयाली भाई-बहनों का लंबा इंतज़ार पूरा हुआ है। आप सभी की बरसों से इच्छा थी कि केरला का नाम बदलकर केरलम किया जाए। केंद्र की हमारी बीजेपी-एनडीए सरकार ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। मैं आप सबके चेहरों पर इसकी खुशी देख सकता हूं। भारत के इस सुंदरतम राज्य को...अब मलयाली कल्चर के मुताबिक सही नाम मिला है, सही पहचान मिली है। मैं इस फैसले के लिए सभी केरलम-वासियों को बहुत-बहुत बधाई देता हूँ।

एंडे सुहुर्तगड़े,

अखिल केरला धीवरा सभा ने जीविका और जीवन के, प्रगति और प्रकृति के संतुलन का उदाहरण पेश किया है। आप सभी भारतीय दर्शन और विचारों को जीते हैं। आप सभी प्रकृति को एक ही दिव्य “चैतन्यम” का हिस्सा बताते हैं। दुनिया जब नदियों को, पानी को, समुद्र को केवल एक संसाधन मानती है...धीवरा समाज समुद्र को, “अम्मा” मानता है।

एंडे सुहुर्तगड़े,

समुद्र की रक्षा की कामना... उसके लिए श्री कुरुम्बा देवी की पूजा, श्री कुरुम्बा मंदिरों के संरक्षण के लिए आपके प्रयास... ये दिखाता है कि भारत सदियों से प्रकृति और पर्यावरण के लिए कितना संवेदनशील रहा है। आप अपनी परंपरा को भगवान व्यास से भी जोड़ते हैं। यानी, आपकी परंपरा भारत के इतिहास का अहम हिस्सा है। इस धरती के महान गौरव को संजोकर रखने के लिए मैं आप सबकी हृदय से बहुत-बहुत सराहना करता हूं।

एंडे सुहुर्तगड़े,

कोच्चि केरलम के इतिहास में सामाजिक परिवर्तनम की पवित्र भूमि रही है पंडित कर्रूपन के नेतृत्व में यहीं से सम्मान और समानता की आवाजें उठीं थी उस जज्बे को अखिल धीवरा सभा ने आज भी जीवंत बना रखा है। मैं इस अवसर पर माता अमृतानंदमयी जी को भी नमन करूंगा। उनका जीवन निस्वार्थ सेवा का एक अद्भुत उदाहरण है। उनका मुझ पर जो स्नेह रहा है वो मेरा बहुत बड़ा सौभाग्य है।

एंडे सुहुर्तगड़े,

आज अखिल केरला धीवरा सभा के 50 वर्ष का ये अवसर, हमें उसके महान कार्यों को याद करने का भी मौका देता है। राष्ट्रीय चेतना से जुड़े हर विषय पर आपने आगे आकर ज़िम्मेदारी संभाली है। भारत की समुद्री सीमा की रक्षा में आपकी कम्यूनिटी, पहली पंक्ति की प्रहरी बनकर खड़ी रही है। राम जन्मभूमि आंदोलन में इस समुदाय की सक्रिय भागीदारी रही है। सामाजिक समरसता को आगे बढ़ाने में अखिल केरला धीवरा सभा ने बहुत महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

एंडे सुहुर्तगड़े,

केरलम में आई विनाशकारी बाढ़ के समय भी पूरे देश ने आपकी सेवा भावना को बहुत करीब से देखा है। जब राज्य अभूतपूर्व संकट का सामना कर रहा था, तब हमारे इस समाज के लोगों ने मोर्चा संभाला था। वो तस्वीरें कोई नहीं भूल सकता... जब आपने अपनी नावों को जोखिम में डालकर फंसे हुए परिवारों को बचाया.. जरूरतमंदों तक सामान पहुंचाया। इसी भावना के कारण आज पूरा देश fishermen समुदाय के साहस, सेवा और समर्पण को सम्मान के साथ याद करता है।

एंडे सुहुर्तगड़े,

हमारी फिशरमेन कम्यूनिटी की मेहनत, उनकी क्षमता देश की अर्थव्यवस्था को नई गति देने की ताकत रखती है। लेकिन, दशकों तक इस बड़े वर्ग की उपेक्षा होती रही। आपके श्रम के साथ पिछली सरकारों ने कभी न्याय नहीं किया। लेकिन अब बीजेपी NDA सरकार, आपके असीम सामर्थ्य को मान देते हुए आगे बढ़ रही है। हमारी सरकार ने फिशरमेन कम्यूनिटी के सामर्थ्य को ब्लू इकॉनमी के असीम potential की दृष्टि से देखा है। ये बीजेपी-एनडीए सरकार ही है जिसने फिशरमेन के हितों के लिए अलग मंत्रालय का गठन किया। हमने फिशरमेन समुदाय को विकास की मुख्य धारा में लाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत केरलम के लिए around One Thousand Four Hundred Crore Rupees का प्रावधान किया गया है। इससे फिशरीज में केरलम तेजी से आगे बढ़ रहा है। यहां फिशरमेन समाज को मजबूत करने के लिए कई लेवल पर काम हो रहा है। फिशरमेन कोऑपरेटिव सोसाइटीज और फिशरीज फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन्स को लाखों रुपए का फंड भी दिया जा रहा है। हम ये भी चाहते हैं कि फिशरमेन समाज के युवा ब्लू इकॉनमी को लीड करें, एक्सपोर्ट जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ें। इसीलिए, क्रेडिट गारंटी सिस्टम के माध्यम से युवाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

एंडे सुहुर्तगड़े,

आज टेक्नोलॉजी भी फिशरमेन समुदाय की ताकत बन रही है। इसी सोच के साथ नेशनल फिशरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म शुरू किया गया है। इससे मछुआरे, नाव मालिक और एक्सपोर्टर्स एक ही प्लेटफॉर्म पर रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। उन्हें योजनाओं का लाभ मिलने में अब और आसानी हो गई है।

एंडे सुहुर्तगड़े,

समुद्र में जाने वाले मछुआरों की सुरक्षा भी हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है पहले हमारे मछुआरे भाई-बहन खुले समुद्र में जाते थे, तो घर वाले उनके वापस आने तक चिंता और डर में डूबे रहते थे। क्योंकि, समंदर में मौसम को लेकर आशंकाएं बनी रहती थीं! लेकिन, अब ऐसा नहीं है। हमने सैटिलाइट के जरिए समंदर में मछुआरे भाई-बहनों की सुरक्षा को बढ़ाया है। केरलम की बोट्स के लिए around seven thousand सैटेलाइट आधारित ट्रांसपोंडर्स भी दिये गए हैं। इनमें से four thousand five hundred से अधिक ट्रांसपोंडर स्थापित किए जा चुके हैं। इससे समुद्र में जाने वाले फिशरमेन की सुरक्षा को प्राथमिकता मिली है।

एंडे सुहुर्तगड़े,

हमें फिशरीज की नई संभावनाओं को साकार करना है... और फिशरमेन कम्युनिटी के जीवन को भी बेहतर बनाना है। इसके लिए, कोस्टल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत Nine इंटीग्रेटेड मॉडर्न कोस्टल फिशिंग विलेजेज विकसित किए जा रहे हैं। NDA सरकार में फिशिंग हार्बर्स को भी आधुनिक बनाया जा रहा है। मुथलपोजी हार्बर को One Hundred Seventy Seven Crore Rupees की लागत से अपग्रेड किया गया है। इसके अलावा Six Harbours को ड्रेजिंग के माध्यम से बेहतर बनाया जा रहा है। पिछले Five Years में Sixteen Ice Plants और कोल्ड स्टोरेज की स्थापना को भी मंजूरी दी गई है।

एंडे सुहुर्तगड़े,

समुद्र से जुड़ी अर्थव्यवस्था केवल पारंपरिक मछली पकड़ने तक सीमित नहीं है। सी-वीड प्रोडक्शन जैसे क्षेत्र में भी नई संभावनाएं बनी हैं। केरलम में NDA सरकार के सहयोग से सी-वीड प्रोडक्शन क्लस्टर्स विकसित किए जा रहे हैं। इससे फिशरमेन समुदाय की महिलाओं और युवाओं को आय के नए अवसर मिलेंगे।

एंडे सुहुर्तगड़े,

केरलम में हमारी सरकार द्वारा आधुनिक फिश फार्मिंग सिस्टम को प्रमोट किया जा रहा है। तटीय क्षेत्रों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए सागर मित्र और मत्स्य सेवा केंद्र का नेटवर्क भी बनाया गया है। इसके साथ ही केरलम के तटों पर Forty से ज्यादा Artificial Reefs लगाने की मंजूरी दी गई है। इनसे समुद्र में मछलियों की संख्या बढ़ेगी और समुद्री संसाधन सस्टेनेबल तरीके से विकसित होंगे।

एंडे सुहुर्तगड़े,

हमारा संकल्प है कि केरलम के हर परिवार के जीवन में समृद्धि आए... हमारे केरलम की अर्थव्यवस्था नई ऊंचाइयों तक पहुंचे। यही भावना विकसित भारत के निर्माण की भी आधारशिला है। और यही भावना हमें विकसित केरलम की दिशा में आगे ले जाएगी।

एंडे सुहुर्तगड़े,

मैं आज देख रहा हूं, इतना अनुशासन और इतनी बड़ी तादाद में माताओं, बहनों, महिलाओं की हाजिरी और मैं देख रहा हूं बाहर काफी लोग धूप में खड़े हैं। मुझे पता नहीं कि वो मुझे देख पाते होंगे कि नहीं देख पाते होंगे, सुन पाते होंगे कि नहीं पाते होंगे, लेकिन इतनी तादाद में आपका आना, मैं समझता हूं आप जिन सपनों को लेकर जी रहे हैं, किन संकल्पों को लेकर जी रहे हैं और अखिल केरला धीवरा सभा के प्रयास, आपकी सेवा भावना..और समाज को जोड़ने की परंपरा...आज मैं अपनी आंखों के सामने देख रहा हूं। आने वाले वर्षों में ये भावना समाज को प्रेरित करती रहेगी... केरलम के विकास में अपना योगदान निरंतर बढ़ाती रहेगी... इसी विश्वास के साथ आप सबको आदरपूर्वक नमन करते हुए मैं अपनी वाणी को विराम देता हूं और आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

बहुत-बहुत धन्यवाद।

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भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत जी, यहां के लोकप्रिय मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र भाई पटेल, इस कार्यक्रम में ऑनलाइन हमारे साथ अनेक राज्यों के महानुभाव जुड़े हैं। महाराष्ट्र के गवर्नर जिष्णु देव वर्मा जी, मुख्यमंत्री देवेंद्र फ़डणवीस जी, डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे जी, डिप्टी सीएम श्रीमती सुनेत्र पवार जी, अन्य मंत्रीगण, सांसदगण, विधायकगण और वहां पर भी इकट्ठे हुए लाखों नागरिक भाई-बहन। यहां मंच पर उपस्थित केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे साथी अश्विनी वैष्णव, उपमुख्यमंत्री, युवा नेता हर्ष संघवी, गुजरात सरकार के मंत्रीगण, उपस्थित अन्य जनप्रतिनिधिगण, गुजरात के मेरे प्यारे भाइयों और बहनों।

और खास इसलिए के मेरे ब़डौदा के महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी का ये मैदान अलग-अलग फील्ड में काम करने वाले सभी साथियों का साथ और विकास का ये उत्सव, यहां सबकुछ एक साथ हो रहा है।

साथियों,

आज मैं विकसित भारत की यात्रा को और गति देने के लिए आपके बीच आया हूं। थोड़ी देर पहले यहां देश के विकास से जुड़े हज़ारों करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास और लोकार्पण हुआ है। मैं देश की जनता को बहुत-बहुत बधाई देता हूं। इस विकास पर्व पर आप सभी ने जिस सेवा भाव से और सेवा भाव के साथ पूरे वडोदरा शहर में स्वच्छता से स्वागत अभियान चलाया है, इसके लिए मैं वड़ोदरा के हर एक नागरिक को ह्दय से बहुत-बहुत बधाई देता हूं, उनकी सराहना करता हूं। और ये जो आपने रंग दिखाया ना, मैं कल एक वीडियो देख रहा था, सीना चौड़ा हो गया, वाह! क्या ये मेरा वडोदरा है? और अब तो गणेशोत्सव की तैयारी, बाद में नवरात्रि। और गणेशोत्सव और नवरात्रि पूरा गुजरात का ध्यान वडोदरा पर होता है। और आज आपने, मैं देख रहा था पिछले एक सप्ताह से हर परिवार में वातावरण बन गया है स्वच्छता का। मुझे लगता है कि इस बार जब गणेश जी पधारेंगे ना, सारे आशीर्वाद वड़ोदरा पर बरसने वाले हैं।

साथियों,

इस वर्ष लाल किले से मैंने विकसित भारत के लिए संकल्प की सप्तधारा का आह्वान किया है। इस सप्तधारा में एक धारा गतिशक्ति की भी है। विकसित भारत के लिए हमें ऐसी कनेक्टिविटी चाहिए, जो सुगम भी हो और जमाने के हिसाब से जरा तेज भी हो। वड़ोदरा तो गतिशक्ति यूनिवर्सिटी का शहर है। आज यहां से डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की आखिरी कड़ियां भी जुड़ गई हैं। आज 2800 किलोमीटर से अधिक का डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर प्रोजेक्ट पूरा हो गया। ये 21वीं सदी के भारत के लिए बहुत ऐतिहासिक कार्य संपन्न हुआ है।

साथियों,

ये डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, इस बात का साक्षी है कि बीते 12 साल में देश की काम करने की संस्कृति कैसे बदली है। इस डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर 2004 में विचार शुरू हुआ था। यानी, यहां मैं सारे नौजवान देख रहा हूं, जब इसका विचार शुरू हुआ, आप में से बहुत लोग होंगे जिनका जन्म भी नहीं हुआ होगा, उस समय शुरू हुआ था। 2006 में एक विशेष कंपनी बनाई गई इस काम को करने के लिए और फिर 2014 तक फाइलें ही यहां से वहां होती रहीं। फाइलें टेबल पर यात्रा कर रही थी और दुर्भाग्य देखिए, इन फाइलों को भी कोई डेडिकेटेड कॉरिडोर नसीब नहीं हुआ, फाइल को भी नहीं नसीब हुआ। फाइलें अटकती थीं, लटकती थीं, भटकती थीं। और 2014 में वड़ोदरा के और गुजरात के और देश के लोगों ने मुझे गुजरात से निकाल करके दिल्ली भेज दिया। पहले वाली सरकार 2000 तक रही। आपने मुझे भेजा और उनकी विदाई हुई, और सच्चाई ये थी कि सात-आठ वर्ष में, जरा मेरे नौजवान सुन लीजिए, ये याद रखिए, सात-आठ वर्ष में एक किलोमीटर फ्रेट कॉरिडोर पर भी काम पूरा नहीं हो पाया था। अगर उनके हिसाब से देश चलाते, तो पता नहीं आपके बाद तीन-चार पीढ़ियां आती, तो भी नहीं होता। भारत के लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम को ट्रांसफॉर्म करने वाले प्रोजेक्ट की ये हालत करके रखी थी।

साथियों,

2014 के बाद आपने जो मुझे शिक्षा-दीक्षा दी थी, इस धरती ने मुझे जो सिखाया था, आपके पास से जो लेसन लेके मैं दिल्ली पहुंचा था, हमने वहां पहुंचते ही इसको गति देने का काम प्रारंभ कर दिया। 2800 किलोमीटर के कॉरिडोर का काम आज पूरा करके दिखाया। और आज ईस्टर्न और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, देश के व्यापार-कारोबार का मुख्य आधार बन रहा है।

साथियों,

डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, तेजी से विकसित होते भारत की जीवन रेखा है। इसने भारत के ट्रांसपोर्टेशन सेक्टर का कायाकल्प कर दिया है। पहले पैसेंजर ट्रेन जिस ट्रैक पर चलती थी, उसी ट्रैक पर मालगाड़ी भी चलती थी। यानि ट्रैवल और ट्रांसपोर्ट, दोनों धीमा था। लेकिन, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर ने इस स्थिति को बदल दिया है। आज पूर्वी और पश्चिमी फ्रेट कॉरिडोर्स पर हर रोज़ 430 से ज्यादा मालगाड़ियां चलती हैं, प्रतिदिन 430 मालगाड़ी। और पहले जो मालगाड़ी, साढ़े 6 घंटे में 100 किलोमीटर का सफऱ तय करती थी और अब वही मालगाड़ी आधे से भी कम समय में 100 किलोमीटर का सफर तय कर लेगी। जिस जगह पर ट्रक से सामान भेजने में सामान्य तौर पर 30 घंटे लगते हैं, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर यही दूरी 10-12 घंटे में पूरी हो जाती है। यानि, इस कॉरिडोर पर मालगाड़ी के चलने से ट्रक और ट्रेन में लगने वाला फ्यूल बचता है, किराया-भाड़ा का खर्च कम हुआ है, समय बचा है, पर्यावरण को फायदा हुआ है। यानि, इन्वेस्टमेंट एक ट्रैक पर किया और फायदे अनेक सारे हुए हैं।

साथियों,

इस फ्रेट कॉरिडोर से पूर्वी और पश्चिमी भारत के किसानों की उपज अब तेज़ी से बड़े बाज़ार तक पहुंच पा रही है। कई तरह के फूल, कई तरह की सब्जियां, कई तरह के फल, यानि जो चीजें मौसम के हिसाब से जल्दी खराब होती हैं, उनके लिए भी सही समय पर मंडियों और लोगों के बीच पहुंचने का रास्ता बना है। इससे किसान का बहुत बड़ा फायदा हुआ है।

साथियों,

ये फ्रेट कॉरिडोर एक और वजह से कमाल का है। हाल ही में JNPT मुंबई, JNPT पोर्ट से वड़ोदरा तक Double स्टैक Container मालगाड़ी का संचालन किया गया है। यानि डिब्बे के ऊपर एक और डिब्बा लगाकर मालगाड़ी को चलाया गया। इस मालगाड़ी के चलने से एक बार में ही 250 से अधिक ट्रकों के बराबर का सामान मुंबई से वड़ोदरा चला आया, 250 ट्रक। अब ये जो नाराज फूफा जी है, वो चिल्लाएंगे कि ट्रक वालों का क्या होगा? ट्रक कहां जाएंगे? जिन्होंने ट्रक खरीदा है, उनका क्या होगा? अब फूफा जी को काम मिल गया। यानि अब बड़ी मात्रा में सामान तेजी से देश के एक कोने से दूसरे कोने तक पहुंच पाएगा।

साथियों,

फ्रेट कॉरिडोर के साथ-साथ अब भारत में रेल वहां भी पहुंच रही है, जहां इतने दशकों तक नहीं पहुंची थी। गुजरात हो, मध्य प्रदेश हो, महाराष्ट्र हो, यहां जो आदिवासी क्षेत्र हैं, वो भी इस प्रोजेक्ट के द्वारा रेल से जुड़ रहे हैं। पहले की सरकार में बजट में एक-दो ट्रेनों की घोषणा होती थी और उसके भी साल भर ढोल पीटे जाते थे। जबकि आज देश में साल भर एक के बाद एक नई ट्रेनें चलाई जा रही हैं। आज भी इस कार्यक्रम में कई नई ट्रेन शुरु हुई हैं। नई ट्रेन से वड़ोदरा, छोटा उदयपुर और अलीराजपुर के लोगों को बहुत सुविधा होगी।

साथियों,

रोड, रेल, मेट्रो, एयरपोर्ट, गैस पाइपलाइन, गरीबों का घर, जब देश में करोड़ों लोगों के लिए ये चीजें बनती हैं, तो इससे लोगों का जीवन आसान होता है और साथ ही छोटे से बड़े कामगार को रोजगार के लाखों-लाख अवसर मिलते हैं। आप रेलवे का ही देखिए, इस वर्ष का रेल बजट पौने तीन लाख करोड़ रुपए से अधिक रहा है। जो 12 वर्ष पहले की तुलना में कई गुणा अधिक है। यानि रेलवे के आधुनिकीकरण पर हो रहा खर्च, हज़ारों हज़ार नए रोजगार बना रहा है। और ये रोजगार कंस्ट्रक्शन के दौरान तो बनता ही है। एक बार रोड, रेल, पाइपलाइन, पोर्ट, एयरपोर्ट बन गया, तो फिर उसके आसपास नए उद्योग लगना शुरू हो जाते हैं, नए बिजनेस आते हैं, ये फिर नए रोजगार बनाते हैं। वहां कुछ लोग, वो बेटी चित्र लेकर कब से खड़ी है, वो सज्जन भी कुछ कला लेकर के आए हैं। जरा हमारे साथी उसको कलेक्ट कर लें। ये आगे पहुंचा दीजिए, हां। एक और भी है कोई, हां, ले लीजिए। आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

साथियों,

मैंने देश के सामने विकसित भारत की जिन सप्तधाराओं का विजन रखा है, उनमें एक धारा मैन्युफैक्चरिंग की भी है। और वड़ोदरा शहर, इसकी ताकत अच्छे से जानता भी है, समझता भी है। एजुकेशन, स्किल और इंडस्ट्री का कोलैब कैसे होता है, ये वड़ोदरा करीब डेढ़ सौ साल से इसका प्रतिबिंब है। दशकों पहले, यहां टेक्स्टाइल और टाइल्स के निर्माण से एक यात्रा शुरु हुई थी, जो बाद में ऑयल और पेट्रोकेमिकल्स के साथ आगे बढ़ी। पिछले दो-ढाई दशक में वड़ोदरा MSMEs का एक बड़ा हब बन गया है। और मुझे याद है, जब मैं नया-नया मुख्यमंत्री बना था, तो वड़ोदरा का मेरे पर स्पेशल अधिकार रहा है हमेशा, तो हर हफ्ते कोई ना कोई डेलीगेशन आता था। बस हमारे वड़ोदरा में कुछ मैन्युफैक्चरिंग का हो, मैन्युफैक्चरिंग का हो, क्योंकि यहां पर आते थे, तो या तो ज्योति या एलएमबी या तो जीएसएफसी, यही सब दिखता था और कुछ सुनता नहीं देता। आज कहां से कहां बदल गया है। अब तो ये शहर देश के पहले मेड इन इंडिया मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट के लिए भी जाना जा रहा है। C-295 एयरक्राफ्ट की पहली फ्लाइट यहां आसमान देख चुकी है। मैं वड़ोदरा के लोगों को ये गौरव पाने के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

जब देश की मैन्युफैक्चरिंग की बात हो रही है, तो मैं एक और आंकड़ा बताना चाहता हूं। बीते एक दशक में भारत रेल कोच-मेट्रो कोच बनाने का, रेल इंजन बनाने का भी एक बड़ा निर्माता बना है। 2014 के बाद से अब तक, भारत ने करीब 50 हज़ार, ये आंकड़ा सुनिए, 2014 के बाद भारत ने अब तक 50 हज़ार आधुनिक रेलवे कोच बनाए हैं। पुरानी सरकार 10 साल में 50 हजार टॉयलेट नहीं बना सकती थी। 50 हजार आधुनिक कोच तो किए ही हैं, करीब ढाई लाख वेगन, मालगाड़ी के लिए जो वेगन होते हैं, भारतीय रेल में जोड़े गए हैं, ढाई लाख।

साथियों,

अब भारत चिप से लेकर शिप तक, निर्माण की एक नई गाथा लिख रहा है। यानि पुर्जे भी हमारे और प्रोडक्ट भी हमारा, आत्मनिर्भरता की एक पूरी चेन भारत में ही बनेगी। और ये हम सोलर पावर के मामले में देख रहे हैं। जैसे कडाणा डैम पर जो फ्लोटिंग सोलर प्लांट का प्रोजेक्ट है, कुछ साल पहले तक देश में सोलर प्रोजेक्ट्स लगाने बहुत महंगे पड़ते थे। क्योंकि पीवी मॉड्यूल से लेकर, हर प्रकार का हार्डवेयर इंपोर्ट करना पड़ता था। लेकिन बीते वर्षों में हमने भारत में ही पीवी मॉड्यूल बनाने शुरु किए। और आज हम इसमें 200 गीगावॉट से ज्यादा की कैपेसिटी विकसित कर चुके हैं। और ऐसी ही आत्मनिर्भरता के कारण आज पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का विस्तार हो रहा है। अब तक देश में 55 लाख परिवार अपने छत पर, टेरेस पर सोलर प्लांट लगा चुके हैं। और इसमें 11 लाख परिवार हमारे गुजरात के हैं। यहां इतने सारे परिवार, बिजली उत्पादक बन चुके हैं और इसके कारण, प्रोडक्शन से लेकर इंस्टॉलेशन और सर्विस तक, कितने ही युवाओं को रोजगार मिला है, कितने नए वेंडर्स आए हैं।

साथियों,

‘झूठ की गूंज’ से भरमाने वाले तो हर चौराहे पर मिल जाएंगे, लेकिन भारत का नौजवान सच की हुंकार से चलता है, सच की हुंकार के साथ चलता है, सच की हुंकार के लिए चलता है। हमारे युवा साथी ये देख रहे हैं कि आज देश में सोलर हो, विंड हो, हाइड्रो हो, न्यूक्लियर हो, सारे सेक्टर्स पर सरकार कितना फोकस से काम कर रही है।

साथियों,

आने वाले दौर में हर आधुनिक सेक्टर बिजली से ही चलेगा, इलेक्ट्रिक इकोसिस्टम पर निर्भर होगा। जैसे चिप इंडस्ट्री है, डेटा सेंटर और AI से जुड़ी इंडस्ट्री है, इनका खाद पानी बिजली ही है। इसलिए अगर हमें AI में दुनिया के सामने सुपर पावर बनना है, तो देश को उसकी तैयारी, उसका इकोसिस्टम भी बनाना होगा। यही काम भारत ग्राउंड पर कर रहा है। तभी किसी देश से यूरेनियम के लिए समझौते हो रहे हैं, किसी से क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ मिनरल्स को लेकर समझौते किए जा रहे हैं। ये सारी मेहनत देश के युवाओं का फ्यूचर सुरक्षित करने के लिए दिन-रात मेहनत करके की जा रही है, आपके भविष्य के लिए किया जा रहा है।

साथियों,

दुनिया तेज़ी से बदल रही है, तो दुनिया की ज़रूरतें भी बदल रही हैं और इसी प्रकार हमारी पढ़ाई-लिखाई के तौर-तरीके भी बदल रहे हैं। पहले फोकस सिर्फ डिग्री पर होता था, लेकिन अब डिग्री के साथ-साथ स्किल पर भी फोकस है, स्किल का महत्मय बढ़ रहा है। नौजवानों के पास स्किल हो और वो स्किल समय-समय पर अपग्रेड हो, एक बड़ी जरूरत बन गई है। और इसीलिए, आज हम अपनी शिक्षा नीति को, शिक्षण और ट्रेनिंग के संस्थानों को नए रूप में ढाल रहे हैं। और इसी भाव के साथ ही मैंने लाल किले से भी युवाशक्ति के लिए दो बड़ी घोषणाएं की हैं। पहली घोषणा, देश की पारंपरिक ज़रूरत से जुड़ी है। आप सब जानते हैं कि हमारे यहां लाखों नौजवान ऐसे हैं, जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। हर साल, हमारे मिडिल क्लास परिवारों की कमाई का एक बड़ा हिस्सा इन बच्चों की कोचिंग पर खर्च हो जाता है। हमारी कोशिश है कि गरीब और मिडिल क्लास के ऐसे बच्चों की, परिवारों के पैसे की बचत हो। और इसीलिए अब सरकार स्टूडेंट्स को ऑनलाइन फ्री-कोचिंग व्यवस्था देने की दिशा में आगे बढ़ रही है। और हिंदुस्तान के बेस्ट टीचर के द्वारा उनके कोचिंग हो। हमारे जो नौजवान, अपनी तैयारी कर रहे हैं, उनकी कोचिंग का ध्यान सरकार खुद रखेगी।

साथियों,

भारत के नौजवानों को AI में पारंगत होना उतना ही जरूरी है। हम चाहते हैं कि हमारे नौजवानों की पीढ़ी AI के लिए तैयार हो। ऐसा नहीं है, AI सीखने वालों की जरूरत सिर्फ आईटी सेक्टर में है, अगर कोई इस स्किल को जानता है, तो वो खेती के लिए नया AI solution बना सकता है। आरोग्य के क्षेत्र में technology विकसित कर सकता है। Manufacturing की productivity बढ़ा सकता है। Robotics में अपना startup शुरू कर सकता है। इसलिए जरूरी है कि हमारे पास देश और दुनिया की इंडस्ट्री के लिए AI को समझने वाले और AI का इस्तेमाल करने वाले युवा हों। सरकार इसके लिए एक बड़ा अभियान शुरू करने जा रही है।

साथियों,

भारत का ये कालखंड अभूतपूर्व है। ये भारत की युवाशक्ति का उत्कर्ष काल है, ये समय फिर भारत के जीवन में लौटकर नहीं आएगा। और इसलिए, हमें 2047 में विकसित भारत के लक्ष्य को सर्वोपरि रखना है। हमें भारत को विकसित बनाकर ही रहना है। इसी आह्वान के साथ, एक बार फिर आप सभी को विकास कार्यों की बहुत शुभकामनाएं।

अब मेरा एक काम करना पड़ेगा वडोदरा वालों को, करेंगे? पक्के तौर पर? आप सबने वड़ोदरा को इतना स्वच्छ बना दिया, कितनी मेहनत करनी पड़ी। मैं देख रहा था, हमारे नौजवान दिन-रात सफाई में लगे हुए थे। लेकिन एक बार हम तय करें कि अब हम वडोदरा को गंदा होने ही नहीं देंगे। मैं खुद गंदगी नहीं करूँगा, ये संकल्प लें, तो वडोदरा गंदा होगा? वडोदरा गंदा होगा? तो दिवाली ऐसी चकाचक जाएगी या नहीं, नवरात्रि शानदार जाएगी या नहीं, गणेशोत्सव में चार चाँद लगेंगे या नहीं, तो इतना काम तो हो जाएगा।

शाबाश।

धन्यवाद।

भारत माता की जय!

भारत माता की जय!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!