शेअर करा
 
Comments
Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana can provide a solution for the farmers problems, in times of difficulty: PM
Shortcomings of previous crop insurance schemes have been eliminated: PM Modi
We want to create trust among farmers with regard to crop insurance: PM
Technology will be used extensively with Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana to ensure early settlement of claims: PM Modi
When we talk about technology and a #DigitalIndia, we see the welfare of the farmers at the core: PM
Welfare of the farmers is at the core of Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana, says Prime Minister Modi
Digital Platform for National Agriculture Market to be launched on Babasaheb Ambedkar's birth anniversary on April 14th: PM
Digital Platform for National Agriculture Market to enable farmers get a better price for their produce
#StartupIndia not restricted to IT. There is immense scope for agriculture sector also: PM Modi
Per drop, more crop is what we are giving importance to: PM Modi
We want to increase the reach of soil health card scheme: PM

विशाल संख्‍या में पधारे हुए मेरे प्‍यारे किसान भाइयो और बहनों,

मैं जब हेलीकॉप्‍टर से आ रहा था तो मैं देख रहा था कि मीलों तक बसों की कतार लगी थी, वो यहां पहुंचना चाहते थे। मैं नहीं मानता हूं वो पहुंच पाए होंगे। जो मेरे किसान भाई-बहन यहां पांच किलोमीटर-दस किलोमीटर दूरी पर अटक गए है, उनको भी मैं यहां से नमन करता हूं। मैं सामने की तरफ देखने की कोशिश कर रहा हूं, लोग ही लोग नज़र आ रहे हैं। इस तरफ भी वो ही हाल है, इस तरफ भी वो ही हाल है। और ये Sehore एक छोटा-सा कस्‍बा जहां इतना बड़ा कार्यक्रम आयोजित करना और राज्‍य भर से इतनी बड़ी मात्रा में किसानों का आना, हमें आशीर्वाद देना, मैं हृदय से इन मेरे किसान भाइयो-बहनों का वंदन करता हूं, अभिनंदन करता हूं। मैं आज विशेष रूप से मध्‍य प्रदेश के किसानों का दर्शन करने के लिए आया हूं। मध्‍य प्रदेश के किसानों को नमन करने के लिए आया हूं, उनका अभिनंदन करने के लिए आया हूं।

दस साल पहले हिन्‍दुस्‍तान के Agriculture के नक्‍शे पर मध्‍य प्रदेश का नामो-निशान नहीं था। कृषि क्षेत्र में योगदान करने वाले राज्‍यों में पंजाब, हरियाणा, गंगा-यमुना के तट या कृष्‍ण-गोदावरी के तट, यही इलाके हिन्‍दुस्‍तान में कृषि क्षेत्र के इलाके माने जाते थे। लेकिन मध्‍य प्रदेश के किसानों ने अपनी सूझबूझ से, अपने परिश्रम से, नए-नए प्रयोगों से और मध्‍य प्रदेश की शिवराज जी की सरकार ने अनेक वित्‍त किसान लक्ष्‍य योजनाओं के रहते, ग्रामीण विकास की योजनाओं के रहते और किसान की जो मूलभूत आवश्‍यकता है, उस पानी पर बल देने के कारण राज्‍य सरकार और किसानों ने मिलकर के एक नया इतिहास रचा है और आज हिन्‍दुस्‍तान के कृषि जगत में मध्‍य प्रदेश सिरमौर बन गया है और इसलिए मैं मध्‍य प्रदेश के किसानों को आज नमन करने आया हूं।

चार-चार-चार साल लगातार, कृषि क्षेत्र का अवॉर्ड एक राज्‍य जीतता चला जाए, यह छोटी बात नहीं है और उनका growth भी देखिए। कभी zero पर से दस पर पहुंचना सरल होता है, लेकिन 15-17-18 पर से 20-22 या 24 पर पहुंचना बहुत कठिन होता है। जो लोग कृषि अर्थशास्‍त्र को समझते हैं, वो भली-भांति जान सकते हैं कि मध्‍य प्रदेश ने भारत की आर्थिक विकास की यात्रा में मध्‍य प्रदेश के कृषि जगत का कितना बड़ा योगदान किया है। इसलिए मैं विशेष रूप से आज यहां आकर के लाखों किसानों की हाजिरी में ‘कृषि कर्मण अवॉर्ड’ दे रहा हूं। यह अवॉर्ड तो मैंने मुख्‍यमंत्री के हाथ में दिया, राज्‍य के कृषि मंत्री के हाथ में दिया, लेकिन हकीकत में तो यह जो ‘कृषि कर्मण अवॉर्ड’ है, वो मैं मध्‍य प्रदेश के कोटि-कोटि लाखों मेरे किसान भाइयो-बहनों को देते हुए कोटि-कोटि वंदन करता हूं।

आपने अद्भुत काम किया है, लेकिन भाइयो-बहनों इन सब के बावजूद भी पिछले दो साल वर्षा की स्‍थिति ठीक नहीं रही। कहीं सूखा रहा तो कहीं बाढ़ रही, इसके बावजूद भी देश के किसानों ने फसल की पैदावार मे कमी नहीं आने दी। ऊपर से कुछ मात्रा में बढ़ोत्‍तरी हुई। यह किसानों के पुरुषार्थ का परिणाम है कि आज देश में विपरीत मौसम के बावजूद भी हमारा किसान विपरीत परिस्‍थितियों से जूझते हुए भी देश के अन्‍न के भंडार भरने में कोई कमी नहीं रखता है।

आज मेरा यहां आने का एक और कारण है कि संपूर्ण देश के किसानों के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, उसकी guidelines आज मध्‍य प्रदेश के किसानों की हाजिरी में समग्र देश के किसानों को अर्पित की जा रही है। इसका हक मध्‍य प्रदेश के किसानों का बनता है जिन्‍होंने एक नया इतिहास रचा है और इसलिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का आरंभ भी मध्‍य प्रदेश से करना बहुत ही उचित मुझे लगता है और उसके कारण आज इस कार्यक्रम की रचना की गई।

हमारे देश में अटल जी की सरकार जब थी, तब सबसे पहले फसल बीमा योजना आई थी और किसानों का भला करने का एक प्रमाणित प्रयास भारतीय जनता पार्टी, NDA, अटल जी की सरकार ने किया था। बाद में सरकार बदल गई। उन्‍होंने उसमें कुछ परिवर्तन किए और परिवर्तन करने के कारण सरकार का तो भला हुआ, लेकिन किसान के मन में आशंकाएं पैदा हो गई। परिणाम यह आया कि किसान फसल बीमा योजनाओं से दूर भागने लगा। इस देश के इतने किसान प्राकृतिक संकटों को झेलते है, उसके बावजूद भी वो फसल बीमा लेने के लिए तैयार नहीं होते हैं। पूरे हिन्‍दुस्‍तान में 20 प्रतिशत से ज्‍यादा किसान बीमा लेने के लिए तैयार नहीं है। उनको पता है कि यह करने के बाद भी कुछ मिलने वाला नहीं है। हमारे सामने सबसे पहली चुनौती थी कि हिन्‍दुस्‍तान के किसान के अंदर विश्‍वास पैदा किया जाए। बीमा योजना की एक ऐसी product दी जाए कि जिसके कारण कि‍सान की सारी आशंकाओं का समाधान हो जाए और इस देश में पहली बार ऐसी फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना आई है। जो लोग सुबह-शाम मोदी को कि‍सान वि‍रोधी कहने के लि‍ए भांति‍-भांति‍ के प्रयोग करते हैं, ऐसे लोगों ने भी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की आलोचना करने की हि‍म्‍मत नहीं की क्‍योंकि‍ ऐसी योजना बनी है कि जि‍समें कि‍सान की सारी मुसीबतों का समाधान है।

एक समय था कि‍ कि‍सान फसल बीमा कुछ इलाकों में तो 14% तक जाना पडा। कुछ इलाकों में 6%-8% गया। बीमा कंपनि‍यां तय करती थी, मजबूरी का फायदा उठाती थी। इस सरकार ने नि‍र्णय कर लि‍या कि‍ हम जब बीमा योजना करेंगे, तो रबी फसल के लि‍ए डेढ percent से ज्‍यादा कि‍सान से प्रीमि‍यम नहीं लि‍या जाएगा और खरीफ में 2% से ज्‍यादा नहीं लि‍या जाएगा। कहां 12-14% तक लूटा जाता था और कहां 2% का cap लगा दि‍या। उन्‍होंने क्‍या कि‍या था? भुगतान के ऊपर cap लगा दी थी, एक दीवार लगा दी थी कि‍ इससे ज्‍यादा भुगतान नहीं होगा। हमने प्रीमि‍यम पर तो cap लगा दी, लेकि‍न कि‍सान को जब मि‍लने की नौबत आएगी, उस पर कोई cap नहीं रहेगी। जि‍तना बीमा वो कराएगा, उतना ही पैसा उसका हक बनेगा और उसको देने का काम होगा। यह बहुत बड़ा नि‍र्णय है।

और एक बात भी। आज स्‍थि‍ति‍ ऐसी है कि‍ एक गांव में अगर 100 कि‍सान है। 80 कि‍सान बीमा योजना से जुड़ते नहीं है, सिर्फ 20 कि‍सान जुड़ते हैं और फसल का नुकसान भी 12-15-25 गांव के बीच में क्‍या स्‍थि‍ति‍ है उसका हि‍साब लगाया जाता था। हमने इस बार निर्णय कि‍या - अकेला एक कि‍सान होगा गांव में और मान लीजि‍ए उसी के खेत में मुसीबत आ गई, ओले गि‍र गए, पानी का भराव हो गया, भूस्‍खलन हो गया तो अगल-बगल में क्‍या हुआ है वो नहीं देखा जाएगा, जि‍स कि‍सान का नुकसान हुआ है, बीमा योजना का लाभ वो अकेला होगा तो भी उसको मि‍लेगा। यह बड़ा ऐति‍हासि‍क नि‍र्णय कि‍या।

पहले की योजना में फसल बीमा में अगर बारि‍श नहीं, हुई तो कि‍सान मेहनत नहीं करता था, बीज खराब नहीं करता था, वो जाता ही नहीं था खेत में। क्‍योंकि‍ मालूम था कि‍ भई कुछ होना ही नहीं है तो क्‍यों जाऊं। ऐसी स्‍थि‍ति‍ में कि‍सान क्‍या करेगा? बीज बोने के बाद फसल खराब हो तब तो बीमा हो सकता था। यह ऐसी बीमा योजना है कि‍ अगर बारि‍श नहीं हुइ है और उसके कारण कि‍सान ने बोनी नहीं की है तो भी उसको कुछ मात्रा में मदद देने का प्रयास इस बीमा योजना से होगा।

इस बीमा योजना के तहत एक और महत्‍वपूर्ण नि‍र्णय कि‍या कि‍ एक बार फसल काट दी। तब तक मौसम अच्‍छा था, सब अच्‍छा था, खेत के अंदर फसल के ढेर लगे हुए है और अचानक बारि‍श आ गई, फसल काटने के बाद बारि‍श आ गई। हि‍न्‍दुस्‍तान की कोई बीमा कंपनी उसके लि‍ए कि‍सान की मुसीबत को देखने के लि‍ए तैयार नहीं है। पहली बार हि‍न्‍दुस्‍तान में ऐसा नि‍र्णय कि‍या गया है कि‍ फसल काटने के बाद अगर खेत में ढेर पड़ा है और 14 दि‍न के भीतर-भीतर अगर बारि‍श आ गई, ओले गि‍र गए और वो फसल बर्बाद हुई तो उसका भी बीमा दि‍या जाएगा, उसके लि‍ए भी कि‍सान को भुगतान कि‍या जाएगा।

भाइयो-बहनों, पहले बीमा लेते थे तो बीमा मंजूर होने में चार-चार season चले जाते थे, नि‍र्णय नहीं होता था, बीमा कंपनी, सरकार और कि‍सान के बीच कागज ही चलते रहते थे। हमने नि‍र्णय कि‍या है कि‍ technology का उपयोग कि‍या जाए, तत्‍काल survey करने में technology का उपयोग कि‍या जाएगा और 25 प्रति‍शत राशि‍ उसको तत्‍काल दी जाएगी और बाद की प्रक्रि‍या कम से कम समय में पूर्ण करके कि‍सान को दी जाएगी।

भाइयो-बहनों इससे बड़ी गारंटी, risk लेने की गारंटी कभी भी नहीं हो सकती है। यह जो कि‍सानों ने करके दि‍खाया है। भाइयो-बहनो मेरी एक अपेक्षा है। आजादी के इतने साल हो गए, कि‍सान का बीमा पर वि‍श्‍वास नहीं रहा है। मुझे आपकी मदद चाहि‍ए। आप बीमा योजना पर वि‍श्‍वास करे, एक बार प्रयोग करके देखे और आज 20 प्रति‍शत से ज्‍यादा लोग बीमा नहीं लेते। क्‍या हि‍न्‍दुस्‍तान के 50 प्रति‍शत कि‍सान बीमा योजना में जुड़ने को, आगे आने को तैयार है? जि‍तने ज्‍यादा कि‍सान जुड़ेंगे, इतना सरकार की ति‍जोरी पर बोझ बढ़ने वाला है। जि‍तने ज्‍यादा कि‍सान बीमा लेंगे, सरकार की ति‍जोरी से उतना पैसा ज्‍यादा जाने वाला है। उसके बावजूद भी मैं कि‍सानों से आग्रह करता हूं कि‍ आप इस बीमा योजना के साथ जुड़ि‍ए। हि‍न्‍दुस्‍तान में पहली बार कि‍सानों की भलाई के लि‍ए इतनी बड़ी योजना लाई गई है और एक बार कि‍सान इस योजना से जुड़ गया तो आने वाले दि‍नों में प्राकृति‍क संकट कि‍सान को कभी डुला नहीं पाएंगे, हि‍ला नहीं पाएंगे, डरा नहीं पाएंगे, सरकार उसके साथ कंधे से कंधा मि‍लाकर के खड़ी रहेगी।

भाइयो-बहनों, हमारे देश में कोई वर्ष ऐसा नहीं होता है कि‍ जब देश के कि‍सी न कि‍सी इलाके में प्राकृति‍क आपदा न आई हो और कि‍सानों को भयंकर नुकसान होता है। कि‍सी न कि‍सी इलाके में होता ही होता है, लेकि‍न पहले नि‍यम ऐसे थे कि‍ अगर उस इलाके में 50 प्रति‍शत से ज्‍यादा नुकसान हुआ होगा, तब जाकर के सरकार वहां पर हि‍साब-कि‍ताब शुरू करेगी। भाइयो-बहनों, हमने इस नि‍र्णय को बदल दि‍या और हमने कहा कि‍ 50 प्रति‍शत नहीं, एक-ति‍हाई भी अगर नुकसान हुआ है तो भी कि‍सान को इस नुकसान का मुआवजा दि‍या जाएगा। यह बहुत बड़ा ऐति‍हासि‍क नि‍र्णय कि‍या गया है। पहले कि‍सान को जो मुआवजा दि‍या जाता था, इसको करीब-करीब तीन गुना कर दि‍या गया है। भाइयो-बहनों, कि‍सान का कल्‍याण कैसे हो, कि‍सान के जीवन को कैसे बदला जाए, गांव की आर्थि‍क स्‍थि‍ति‍ में कैसे बदलाव लाया जाए, उन बातों को प्राथमि‍कता देते हुए इस सरकार ने इन कामों को आगे बढ़ाया है।

सरकार ने एक और नया काम लि‍या है। हमारे देश में आधुनि‍क कृषि‍ की तरफ हम जाना चाहते हैं। हम कृषि‍ जगत में technology लाना चाहते हैं। हम हमारे agriculture sector को mechanize करना चाहते है, लेकि‍न साथ-साथ हमारी सदि‍यों के जो अनुभव है, हमारे कि‍सान के पास जो बुद्धि‍ धन है, जो परंपरागत knowledge है इसको भुलाया नहीं जा सकता है। देश का सबसे बड़ा नुकसान हुआ है कि‍ हम नया तो ला नहीं पाए और पुराना छोड़ दि‍या और इसलि‍ए मैं वि‍शेष रूप से हमारे कृषि‍ मंत्री राधा मोहन सिंह जी को बधाई देना चाहता हूं। यह उनकी कल्‍पना थी कि‍ परंपरागत जो कृषि‍ है, जो progressive farmers है, उनके अनुभवों का भी लाभ लि‍या जाए और आधुनि‍क वि‍ज्ञान और पंरपरागत कृषि‍, इन दोनों का मेल कि‍या जाए और उस काम के लि‍ए हमारे कृषि‍ मंत्री बहुत बड़ा योगदान दे रहे हैं।

भाइयो-बहनों, हमारा कि‍सान मेहनत करता है, फसल पैदा करता है लेकि‍न उसको दाम नहीं मि‍लता है। इतना बड़ा देश है। एक ही फसल एक जगह पर भाव गि‍र जाते है तो दूसरी जगह पर भाव ज्‍यादा होते है, दाम ज्‍यादा होते है। लेकि‍न कि‍सान के पास choice नहीं रहता है। उसको तो, बेचारे को अपने गांव के बगल में जो मंडी है उसी में माल बेचना पड़ता है। हम जो technology की बात करते है, Digital India की बात करते हैं वो मेरे कि‍सान भाइयों-बहनों के लि‍ए करते हैं। आने वाले दि‍नों में हम एक National Agriculture Market, इसका पूरा virtual platform खड़ा कर रहे हैं, Digital platform खड़ा कर रहे हैं। हि‍न्‍दुस्‍तान के कि‍सी भी कोने में मेरा कि‍सान अपने मोबाइल फोन पर देख पाएगा कि‍ उसके यहां अगर गेहूं है तो आज हि‍न्‍दुस्‍तान के कि‍स कोने में गेहूं कि‍तने दाम से बि‍क रहे हैं और वो तय कर सकता है। वो यहां मध्‍य प्रदेश में बैठे-बैठे तय कर सकता है कि‍ मुझे मध्‍य प्रदेश में गेहूं नहीं बेचना है, मुझे तो तमि‍लनाडु में ज्‍यादा दाम मि‍लते हैं, तमि‍लनाडु में बेचना है। वो बेच सकता है। पहली बार सारे देश की करीब साढ़े पाँच सौ मंडि‍यों को technology से जोड़कर के Digital India का पहला फायदा मेरे कि‍सान भाइयो-बहनों को मि‍ले। इसके लि‍ए ऐसी मंडि‍यों को Online network बनाकर के एक National Agriculture Market खड़ा करना है।

भाइयो-बहनों, 14 अप्रैल डॉ. भीमराव बाबा साहेब अम्‍बेडकर की जन्‍म जयंती है। हमारे Mhow में, हमारे मुख्‍यमंत्री शि‍वराज जी ने बाबा साहेब अम्‍बेडकर का तीर्थ खड़ा कि‍या है। उस 14 अप्रैल, बाबा साहेब अम्‍बेडकर जी की जयंती के दि‍न हम हि‍न्‍दुस्‍तान में ये National Agriculture Market का Online प्रारंभ करेंगे। उसकी शुभ शुरूआत कर देंगे।

भाइयो-बहनों, हमारे देश में गन्ना कि‍सानों को लेकर के हमेशा चि‍न्‍ता बनी रही। जब हम सरकार में आए, बेहि‍साब पैसे कि‍सानों के भुगतान बाकी थे। जहां कि‍सान गन्‍ना पैदा करता था, बेहि‍साब भुगतान बाकी था। कोई कहता था 50 हजार करोड़ बाकी है, कोई कहता था 60 हजार करोड़ बाकी है, कोई कहता था 65 हजार करोड़ बाकी है। हर दि‍न नए-नए आंकड़ें आते थे। हमारे सामने चुनौती थी कि‍ इन गन्‍ना कि‍सानों को पैसे कैसे मि‍ले। एक के बाद एक योजना बनाई। दुनि‍या में में चीनी का दाम गि‍र गया था, भारत में चीनी भरपूर थी। दुनि‍या चीनी खरीदने को तैयार नहीं थी। कारखानों के पास पैसा नहीं था। कि‍सान के पैसे का कोई भुगतान नहीं करता था। हमने एक के बाद एक योजनाएं बनाई और आज 18 महीने के भीतर-भीतर मैं बड़े संतोष के साथ कहता हूं कि‍ जहां 50 हजार करोड़, 60 हजार करोड़ के भुगतान की बातें होती थी, आज, कल तक का मैंने हि‍साब लि‍या, एक हजार करोड़ से भी कम भुगतान अब बाकी रहा है। मेरे गन्‍ना कि‍सानों को यह भुगतान हो जाएगा।

इतना ही नहीं भाइयो-बहनों, हम कि‍सान को ताकतवर बनाने के नि‍र्णय करते हैं। गन्‍ना कि‍सान, चीनी के कारखानेदारों की इच्‍छा पर जि‍न्‍दा या मरा यह अवस्‍था ठीक नहीं है। हमने एक नि‍यम बनाया कि‍ गन्‍ने से इथनॉल बनाया जाए, वो इथनॉल पेट्रोल में मि‍क्‍स कि‍या जाए। 10 प्रति‍शत इथनॉल बनाकर के पेट्रोल में मि‍क्‍स करने का नि‍र्णय कि‍या। देश को जो खाड़ी से तेल लाना पड़ता है, मेरे हि‍न्‍दुस्‍तान का गन्‍ना कि‍सान झाड़ी से तेल पैदा करेगा। खाड़ी के तेल के सामने, मेरा झाड़ी का तेल काम आएगा और वो पर्यावरण की दृष्‍टि‍ से उत्‍तम होगा, आर्थि‍क दृष्‍टि‍ से देश का भला करने वाला होगा और कि‍सान को गन्‍ना ज्‍यादा पैदा हो गया तो जो मुसीबत में फंसना पड़ता था, उससे वो बाहर आ जाएगा।

चीनी के लि‍ए export के लि‍ए योजनाएं बनाई, import कम करने के लि‍ए योजना बनाई, brown चीनी जो होती है उसके लि‍ए योजना बनाई। भारतीय जनता पार्टी की सरकारें जब भी आती है, कि‍सानों का कल्‍याण यह उनकी प्राथमि‍कता रहती है और उसी का परि‍णाम है कि‍ मध्‍य प्रदेश ने एक नया वि‍क्रम कर दि‍या। गुजरात जो रेगि‍स्‍तान है, वहां के कि‍सानों ने कमाल करके दि‍खाया।

भाइयो-बहनों, आज कृषि‍ क्षेत्र में अनेक नए प्रयास, नए प्रयोगों की आवश्‍यकता है, नए innovation होने चाहि‍ए। हमने एक ‘Start-up India, Stand-up India’ का अभि‍यान चलाया है, लेकि‍न यह ‘Start-up India, Stand-up India’ सि‍र्फ Information Technology के लि‍ए नहीं है। यह कोई औजार बनाने के लि‍ए ‘स्‍टार्ट-अप इंडि‍या, स्‍टैंड-अप इंडि‍या’ नहीं है। कृषि‍ क्षेत्र में भी ‘Start-up India, Stand-up India’ का काम हो सकता है। मैं नौजवानों से आग्रह करता हूं, एक बहुत बड़ा अवसर हमारे सामने है। हम कृषि‍ क्षेत्र में नए-नए आवि‍ष्‍कार करे, नए-नए साधनों को बनाए, नई-नई technology का innovation करे, कि‍सानों के लि‍ए करे, फसल के लि‍ए करे, पशुपालन के लि‍ए करे, मत्‍स्‍य उद्योग के लि‍ए करे, dairy farming के लि‍ए करे, Poultry farming के लि‍ए करे और ‘Start-up’ योजना का लाभ उठाए, यह हमारे कि‍सानों की नए ताकत बनेगी।

आज अगर हमारा कि‍सान Organic Farming में जाता है तो दुनि‍या में उसको एक नया मार्कि‍ट मि‍लेगा। हि‍न्‍दुस्‍तान का सि‍क्‍कि‍म state देश का पहला Organic State बना है और पूरा नॉर्थ-ईस्‍ट, नागालैंड हो, मि‍जोरम हो, मेघालय हो, यह सारा इलाका वो दुनि‍या का Organic Capital बनने की ताकत रखता है। इस काम पर हमने बल दि‍या है।

हमारी एक इच्‍छा है – प्रधानमंत्री कृषि‍ सिंचाई योजना। हि‍न्‍दुस्‍तान के कि‍सान को अगर पानी मि‍ल जाए तो मेरे कि‍सान में वो दम है, वो मि‍ट्टी में से सोना पैदा कर सकता है। और इसलि‍ए दि‍ल्‍ली में हमारी सरकार ने सर्वाधि‍क बजट कृषि‍ सिंचाई योजना पर लगाया है और उसमें जल संचय पर बल है, जल सींचन पर बल है, Micro irrigation पर बल है, per drop more crop, एक-एक बूंद से अधि‍कतम फसल पैदा करने का इरादा लेकर के हम आगे बढ़ रहे हैं और उसके लि‍ए मैं शि‍वराज जी का वि‍शेष अभि‍नंदन करता हूं। यह जो कृषि‍ क्रान्‍ति‍ मध्‍य प्रदेश में आई है उसका मूल कारण है, उन्‍होंने सिंचाई योजना पर बल दि‍या है, Irrigation पर बल दि‍या और कहां 12 लाख से 32 लाख पहुंचा दि‍या। मैं मध्‍य प्रदेश मुख्‍यमंत्री शि‍वराज जी और उनके नेतृत्‍व की टीम को बहुत-बहुत बधाई देता हूं कि‍ उन्‍होंने कि‍सानों की जरूरत को समझा। उन्‍होंने प्राथमि‍कता दी और यह परि‍णाम आया है। पूरे देश में इसी काम को आगे बढ़ाना है।

मैं आपसे आग्रह करता हूं हम technology का भी उपयोग करते हैं। आज सेटेलाइट के द्वारा आपके गांव में पानी कहां से कहां जा सकता है, उसका Contour plan आसानी से बन सकता है। गांव का पानी गांव में, यह मंत्र लेकर के हमें चलना चाहि‍ए। बारि‍श में जि‍तना भी पानी गि‍रे उसको रोकने का प्रबंध होना चाहि‍ए। अगर आपको ज्‍यादा खर्चा नहीं करना है, तो मैं आपको एक सुझाव देता हूं। मेरे कि‍सान भाई-बहन उसको करे, फर्टि‍लाइजर के जो खाली बैग होते हैं, सीमेंट के जो खाली बैग होते हैं, बोरे होते हैं, उसमें पत्‍थर और मि‍ट्टी भर दो और जहां से पानी जाता है वहां पर पानी को रोक लो। 25-50 ठेले लगा दो, पानी रुक जाएगा। 10 दि‍न-15 दि‍न में वो पानी जमीन में उतर जाएगा। जमीन का पानी का स्‍तर ऊपर आ जाएगा, आपकी कृषि‍ को बहुत फायदा होगा। पूरे मध्‍य प्रदेश में, पूरे हि‍न्‍दुस्‍तान में, हमारे सामान्‍य प्रयोगों के द्वारा हम पानी को बचाने का काम अब उठाए।

उसी प्रकार से, यह हम जो Flood Irrigation करते हैं, मैं कि‍सान भाइयों से आग्रह करता हूं Flood Irrigation की जरूरत नहीं है। यह हमारे दि‍माग में भर गया है कि‍ खेत अगर पानी से लबालब भरा हुआ है, तभी फसल पैदा होती है, ऐसा नहीं है। मैं आपको एक उदाहरण से समझाना चाहता हूं। अगर कि‍सी परि‍वार में कोई बच्‍चा, 5 साल-6 साल की उम्र हुई हो, लेकि‍न शरीर उसका एक या दो साल की उम्र जैसा दि‍खता है, वज़न बढ़ता नहीं है, चेहरे पर चेतना नहीं है। एकदम ढीला-ढाला है और मां को बड़ी इच्छा है कि‍ बेटा जरा हंसते-खेलने लगे, वज़न बढ़ने लगे, खून बढ़ने लगे और मां अगर यह सोचे कि‍ बाल्‍टी भर पि‍स्‍ता-बादाम वाला दूध तैयार करूंगी और बच्‍चे को केसर, पि‍स्‍ता, बादाम के दूध से दि‍न में चार-चार बार नहलाऊंगी, दूध की बाल्‍टी में उसको आधा दि‍न बैठाकर के रखूंगी, क्‍या वो बच्‍चे के शरीर में वज़न बढ़ेगा, खून बढ़ेगा, शरीर में बदलाव आएगा? नहीं आएगा। दूध हो, बादाम हो, पि‍स्‍ता हो, केसर हो, उसको नहलाया जाए, लेकि‍न बच्‍चे के शरीर में फर्क नहीं आएगा। लेकि‍न समझदार मां बच्‍चे को दि‍न में चम्‍मच से 10 चम्‍मच-15 चम्‍मच दूध पि‍लाती जाएगी तो शाम तक भले 200 ग्राम दूध ले ले, लेकि‍न वज़न बढ़ने लगेगा, शरीर बढ़ने लगेगा, खून बढ़ने लगेगा। दूध से नहलाने से बदन नहीं बदलता है, लेकि‍न दूध अगर दो-दो चम्‍मच पि‍ला दि‍या तो बदलाव आता है। यह फसल का भी वैसा ही स्‍वभाव है जैसा बालक का होता है। फसल को पानी में डुबोकर के रखोगे तो फसल ताकतवर बनेगी, यह सोचना गलत है। अगर बूंद-बूंद फसल को पानी पि‍लाओगे तो फसल तेजी से बढ़ेगी और इसलि‍ए एक-एक बूंद पानी से फसल कैसे बनाई जाए, उस पर ध्‍यान देना और इसलि‍ए per drop more crop, यह Irrigation पर हम बल दे रहे हैं।

मेरे भाइयो-बहनों, मैं 2014 में प्रधानमंत्री बना, मुख्‍यमंत्रि‍यों की मुझे जो सबसे ज्‍यादा चि‍ट्ठि‍यां आई, सबसे ज्‍यादा चि‍ट्ठि‍यां क्‍या आई कि‍ प्रधानमंत्री जी हमारे राज्‍य में यूरि‍या की कमी है, तत्‍काल हमें यूरि‍या भेजि‍ए। हमें यूरि‍या की आवश्‍यकता है। भाइयों-बहनो, 2015 में हि‍न्‍दुस्‍तान के एक भी मुख्‍यमंत्री की तरफ से मुझे यूरि‍या की मांग को लेकर के चि‍ट्ठी नहीं आई, हि‍न्‍दुस्‍तान के कि‍सी कोने से नहीं आई। पहले के आप अख़बार नि‍कालकर के देख लीजि‍ए कि‍सी न राज्‍य में, कि‍सी न कि‍सी जि‍ले में, यूरि‍या लेने के लि‍ए कि‍सानों की कतार के फोटो आते थे। कि‍सान यूरि‍या को ब्‍लैक मार्कि‍ट में खरीदता था और कुछ स्‍थानों पर तो यूरि‍या लेने के लि‍ए आते थे, झगड़ा हो जाता था और पुलि‍स को लाठी चार्ज करना पड़ता था। यह बहुत दूर की बात नहीं बताता हूं, 2014 के पहले तक यह होता रहता था। पहली बार मेरे भाइयो-बहनों, हि‍न्‍दुस्‍तान के कि‍सान को यूरि‍या के लि‍ए इंतजार नहीं करना पडा, मुख्‍यमंत्री को चि‍ट्ठी नहीं लि‍खनी पड़ी। पुलि‍स को डंडा नहीं चलाना पडा, कि‍सान को कतार में खड़ा नहीं रहना पडा, यह काम इस सरकार ने करके दि‍खाया है भाइयो-बहनों। और इतना ही नहीं देश आजाद होने के बाद सबसे ज्‍यादा यूरिया की पैदावार, देश आजाद होने के बाद सबसे ज्‍यादा यरिया खाद की पैदावार अगर कभी हुई है तो 2015 में हुई है भाइयों और बहनों! कालाबाजारी बन्‍द हो गयी, बेईमानी का कारोबार बन्‍द हो गया, किसान के हक की चीज किसान को पहुँचे इसके लिए प्रबंध किया गया और उसके कारण यूरिया किसानों को पहुँच गया।

भाइयो-बहनों! हम यहीं पर अटके नहीं हैं हमने आते ही यूरिया का उत्‍पादन बढ़ाने के लिए यूरिया के जो कारखाने बंद पड़े थे उसको चालू करने को फैसला किया है जहॉं नए कारखाने लगाने की आवश्‍यकता है उसको लगाने के लिए तैयार है सरकार लेकिन साथ-साथ हमने एक और काम किया है जिस काम के तहत यूरिया का नीम कोटिंग कर रहे हैं, नीम का जो पेड़ होता है उसमें से जो फल में से तेल निकलता है वो यूरिया पर चढ़ाया जाता है नीम का तेल उसके कारण यूरिया की ताकत बढ़ जाती है। किसान अगर पहले दस किलो उपयोग यूरिया लेता था तो नीम कोटिंग वाला 6 किलो 7 किलो से भी काम चल जाता है किसान का 3 - 4 किलो यूरिया का पैसा बच जाता है। दूसरा नीम कोटिंग वाला यूरिया डालने से फसल को अतिरिक्‍त फायदा होता है, जमीन को अतिरिक्‍त फायदा होता है, जमीन को जो नुकसान हुआ है उसमें मदद करने में नीम कोटिंग यूरिया काम आता है और तीसरा सबसे बड़ा फायदा, पहले जो यूरिया आता था वो किसानों के खेत में तो कम जाता था केमिकल के कारखानों में चोरी होकर के चला जाता था subsidy वाला यूरिया केमिकल कंपनियों को काम आता था, अब नीम कोटिंग होने के बाद एक ग्राम भी यूरिया खेती के सिवाय कहीं पर भी काम नहीं हा सकता सिर्फ किसानों को काम आ सकता है, इतना बड़ा काम इस सरकार ने कर दिया।

भाइयों और बहनों! लेकिन मेरी किसानों से आग्रह है कि आप सिर्फ यूरिया के fertilizer से मत चलिए सरकार ने एक बहुत बड़ी योजना बनाइ है। ये जो शहरों का कूड़ा-कचरा है उसमें से fertilizer बनाना और वो भी किसानों को पहॅुंचाना और वो भी सस्‍ते में मिले इसके लिए कुछ concession देना ताकि मेरे किसान की जमीन बरबाद न हो जाए।

भाइयो-बहनों, हमने soil health card निकाला है सारे देश के किसानों के पास soil health card पहॅुचाने का सपना है। अगर आप अपना Blood test करवाएं और डॉक्‍टर कहे कि आप को diabetes है, report लाएं लेकिन मिठाई खाना बन्‍द न करें, तो उस report का कोई उपयोग है क्‍या, कोई उपयोग नहीं है अगर आप Blood test करवाते हैं Urine Test करवाते हैं और report आता है तो उस report के अनुसार शरीर में खान-पान की आदत डालते हैं तो बीमारी control रहती है। जमीन का भी वैसा ही है। soil health card हमारे जमीन की तबीयत कैसी है कहीं हमारी ये भारत माता ये बीमार तो नहीं है ये जमीन, इसमें कोई नई बीमारी तो घुस नहीं गयी है ये soil health card से पता चलता है। मेरे खेत की जमीन किस पैदावार के लायक नहीं है, मेरे पिता जी जब जिन्‍दा थे तब हो सकता है वो गेहूँ के लिए अच्‍छी रही हो,गी लेकिन इतने सालों में बरबाद होते होते अब वो गेहूँ के लायक नहीं रही है, वो दलहन के लायक हो गयी है, वो तिलहन के लायक हो गयी है तो मुझे गेहॅूं से वहॉं shift करना होगा ये सलाह soil health card से मिलती है और इसलिए soil health card इसका भरपूर उपयोग मेरे किसान भाई, बहन करें। मेरे किसान कौन-सी फसल के लिए मेरी जमीन उपयुक्‍त है, इसके आधार पर अगर पैदावार करेंगे तो कभी किसान को रोने की नौबत नहीं आएगी। ये फसल बीमा के साथ-साथ soil health card ये आप को बहुत बड़ी सुरक्षा देता है।

और इसलिए मेरे भाइयो-बहनों मैं आप से आग्रह करने आया हूँ कि आप इस बात को आगर कर करिए। मुझे खुशी हुई स्‍वच्‍छ भारत का जो अभियान चला है, उसमें यहीं नजदीक में जहॉं से हमारे मुख्‍यमंत्री चुनाव जीतते हैं वो Budhni Open-defecation free हो गया है और इसके लिए मैं बधाई देता हॅू और जिन्‍होंने इस काम को किया है उन सभी गॉंव वालों को सभी अधिकारियों को खुले में शौच नहीं जाने का जो निर्णय किया है इसके लिए मैं अभिनंन्‍दन देता हॅूं। इंदौर के इलाके में भी ये काम हुआ है ऐसा मुझे हमारे स्‍पीकर महोदया सुमित्रा जी बता रही थीं मैं उनको और इंदौर के इलाके के लोगों को भी अभिनंन्‍दन देता हॅूं कि खुले में शौच जाना बन्‍द हो रहा है। मैं मध्‍य प्रदेश के सभी मेरे गॉंव के लोग यहॉं आए हैं हम संकल्‍प करें कि हमारे गॉव में हमारी बहन, बेटियों को खुले में शौच नहीं जाना पड़ेगा। हम शौचालय बनाएंगे भी शौचालय का उपयोग भी करेंगे और ये Open-defecation free ये काम पूरा करने में मध्‍य प्रदेश के गॉंव उन्‍होंने बीड़ा उठाया है, जल्‍द से उसको पूरा करें ये मेरी अपेक्षा है।

भाइयो-बहनों क्‍या हम एक संकल्‍प कर सकते हैं क्‍या ये संकल्‍प प्रधानमंत्री भी करे, ये संकल्‍प मुख्‍यमंत्री भी करे, ये संकल्‍प कृषि मंत्री भी करे, ये संकल्‍प देश के किसान भी करें, ये संकल्‍प देश के सवा सौ करोड़ नागरिक भी करें। 2022 भारत की आजादी के 75 साल होंगे। हमारे देश की आजादी के 75 साल होंगे, क्‍या हम सब मिल करके एक संकल्‍प कर सकते हैं कि 2022 में जब भारत की आजादी के 75 साल होंगे, 2022 में जब हम पहुँचेंगे, हमारे किसानों की जो आय है, हमारे किसानों की जो Income है वो 2022 तक हम दो-गुना करके छोड़ेंगे, दो-गुना करके छोड़ेंगे ये संकल्‍प कर सकते हैं। मेरे किसान भाई संकल्‍प कीजिए, राज्‍य सरकारें संकल्‍प करें, सारे मुख्‍यमंत्री, कृषि मंत्री संकल्‍प करें एक बीड़ा उठाएं कि 2022 जब आजादी के 75 साल होंगे मेरे देश के किसान की आय हम दो-गुना करके रहेंगे उसके लिए जो भी करना पड़ेगा हम करेंगे, ये आज का संदेश हम ले करके जाएं। ये संकल्‍प ले करके जाएं।

मैं फिर एक बार आप सबका हृदय से बहुत-बहुत अभिनंन्‍दन करता हॅूं और मैं आशा करता हूँ कि आपने चार बार अवॉर्ड जीता है आने वाले वर्षों में भी ये अवॉर्ड किसी के हाथों जाने मत दीजिए। कुछ कमाल करके दिखाइए अभी थोड़े दिन पहले अबूधाबी से, UAE से जो हम यूएई अबूधाबी जानते हैं वहॉं के Crown Prince यहॉं आए थे। उनसे मैं बातें कर रहा था ये किसानों को समझने जैसी बात है Crown Prince यहॉं आए थे तो हम दोनों बैठे थे बातें कर रहे थे, उन्‍होंने मेरे सामने एक चिंता जताई उन्‍होंने कहा मोदी जी हमारे यूएई के पास बहुत बड़ी मात्रा में तेल के भंडार हैं, पैसे भी अपरंपार है लेकिन न हमारे नसीब में बारिश है और जमीन भी रेगीस्‍तान के सिवाय कुछ नहीं है। हमारी जनसंख्‍या बढ़ रही है दस पंद्रह साल के बाद हमें हमारे लोगों का पेट भरने के लिए अनाज भी बाहर से लाना पड़ेगा, सब्‍जी भी बाहर से लानी पड़ेगी, दलहन, तिलहन भी बाहर से लाने पड़ेंगे क्‍या भारत ने सोचा है कि Gulf Country की मांग को कैसे पूरा करने की तैयारी कर रहे हो, मैं हैरान था! UAE के Crown Prince दस साल पंद्रह साल के बाद वहॉं की जनता जनार्दन की जो आवश्‍यकताएं हैं उसकी पूर्ति के लिए भारत आज से तैयारी करे भारत अपना तो पेट भरे लेकिन भारत UAE का भी पेट भरे ये प्रस्‍ताव उन्‍होंने मेरे सामने रखा।

मेरे कि‍सान भाइयो-बहनों, दुनि‍या आज हमसे अपेक्षा कर रही है। सारी दुनि‍या को भारत काम आ सकता है। हम अगर कोशि‍श करे, हम हमारे उत्‍पादन को बढ़ाए, हम दुनि‍या के बाजार को कब्‍जा कर सकते हैं। उस सपने को लेकर के आगे चले, इसी एक अपेक्षा के साथ मैं आप सबका हृदय से अभि‍नंदन करता हूं और ‘जय जवान, जय कि‍सान’, जि‍स मंत्र ने हि‍न्‍दुस्‍तान के कि‍सानों के भारत के अन्‍न के भंडार भर दि‍ए थे, वो मेरा कि‍सान हि‍न्‍दुस्‍तान को आर्थि‍क ऊंचाइयों पर ले जाने का भी एक बहुत बड़ी ताकत बनकर उभरेगा। बहुत-बहुत धन्‍यवाद, बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

 

Explore More
चलता है' ही मनोवृत्ती सोडायची वेळ आता आली आहे. आता आपण 'बदल सकता है' असा विचार करायला हवा : पंतप्रधान मोदी

लोकप्रिय भाषण

चलता है' ही मनोवृत्ती सोडायची वेळ आता आली आहे. आता आपण 'बदल सकता है' असा विचार करायला हवा : पंतप्रधान मोदी
Forex kitty continues to swells, scales past $451-billion mark

Media Coverage

Forex kitty continues to swells, scales past $451-billion mark
...

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
Text of PM’S address at the Hindustan Times Leadership summit
December 06, 2019
शेअर करा
 
Comments
The decision to remove Article 370 may seem politically difficult, but it has given a new ray of hope for development in Jammu, Kashmir and Ladakh: PM Modi
For Better Tomorrow, our government is working on to solve the current challenges: PM Modi
112 districts are being developed as Aspirational Districts, with a focus on every parameter of development and governance: PM

शोभना भरतिया जी, हिंदुस्तान टाइम्स परिवार के सभी स्वजन देश और विदेश से यहां उपस्थित देवियों और सज्जनों, किसी भी देश को दिशा देने में, किसी समाज या व्यक्ति को नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ने में Conversations-संवाद का बहुत महत्व होता है।आज के ये Conversations ही Better Tomorrow की बुनियाद बनते हैं।आज ही हमारे संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉक्टर भीम राव आंबेडकर जी की पुण्यतिथि भी है।

मैं उन्हें देशवासियों की तरफ से श्रद्धांजलि देता हूं, नमन करता हूं और ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि बाबा साहेब ने जिस Better Tomorrow का सपना देखा था, उसे हमें पूरा करने की शक्ति दें, हमें समर्थ बनाए।

साथियों,

भविष्य में हम जिस दिशा में जाना चाहते हैं, उसमें सबसे बड़ी भूमिका आज की है, हमारे वर्तमान की है और अभी शोभना जी ने एक सवाल रखा कि आप सबको बताइये कि आप कैसे चुनाव जीते, देश की जनता ने जिताया इसलिए जीत गए और देश की जनता ने क्यों जिताया क्योंकि सबका साथ सबका विकास सबका विश्वास इस मंत्र से काम किया इसलिए जिताया और कई लोगों के ना चाहते हुए भी हुआ। खैर Better Tomorrow के लिए हमारी सरकार, वर्तमान की चुनौतियों पर, समस्याओं पर काम कर रही हैऔर ये चुनौतियां, आज पैदा हुई, ऐसा नहीं हैं। ये दशकों से चली आ रही हैं।

साथियों,

आर्टिकल 370 को हटाने का फैसला राजनीतिक तौर पर मुश्किल भले लगता हो, लेकिन इसने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोगों के विकास की और उनके भीतर एक नई उम्मीद जगाई है, मुस्लिम बहनों को तीन तलाक के दंश से मुक्ति मिलने से, देश के लाखों परिवारों को Better Future का एहसास मिला है।

पड़ोसी देशों से आए सैकड़ों परिवार, जिनके साथ उन देशों में अत्याचार हुआ, जिनकी मां भारती में आस्था थी, जब उनकी नागरिकता का रास्ता खुलेगा, तो इससे भी उनका Better Future ही सुनिश्चित होगा। दिल्ली की अनाधिकृत कॉलोनियों को लेकर जो फैसला हुआ है, उसने भी यहां के 40 लाख लोगों के बेहतर भविष्य का रास्ता पक्का किया है। ऐसे अनेक फैसले हैं, जो Past की legacy है, लेकिन New India के लिए, Better Tomorrow के लिए उनको टाला नहीं जा सकता।

इसी तरह राम जन्मभूमि विवाद का शांतिपूर्ण समाधान, सिर्फ एक विवाद का हल नहीं है, बल्कि भारत के Better Future का एक बड़ा कारक भी है।

और साथियों, हमें याद रखना होगा कि राम जन्मभूमि का फैसला आने से पहले न जाने क्या-क्या आशंकाएं जताई जा रहीं थी। सुबह फैसला आया और शाम होते-होते देश के लोगों ने सारी आशंकाओं को गलत साबित कर दिया। इसके पीछे का भाव क्या था- Better Tomorrow. समाज अब बीती बातों की उलझनों में नहीं रहना चाहता, देश भविष्य की ओर देख रहा है। देश के बेहतर भविष्य के लिए, जन-मन में आए इस बहुत बड़े परिवर्तन को हम कम नहीं आंक सकते।

भाइयों और बहनों,

समस्याओं को, चुनौतियों को पालते हुए-पोसते हुए Better Tomorrow की कल्पना नहीं की जा सकती और हमारी सरकार की Approach क्या है, अगर मैं सहज भाव से आपको एक उदाहरण देकर बताना चाहूं जैसे अगर मैं आप ही को दायरे में बात करूं ऐसा सिर्फ Hindustan times को ही पूछ रहा हूं ऐसा नही, लेकिन मैं आपकी दुनिया से पूछ रहा हूं, क्या कभी ऐसा होता है कि अगर editorial page के लिए कॉलम नहीं आ पाए तो आप लोग कहते हैं कि क्या हुआ, कल तो छपा था तो आज blank छोड़ देते हैं?

कभी ऐसा हुआ क्या? नही हुआ

या कभी ऐसा हुआ हो कि अख़बार के आखिरी पेज के लिए कोई खबर ही नहीं बची और उसे blank छोड़ दिया गया हो? ये सोच लिया गया हो कि पहले page से जब रीडर पढ़ना शुरू करता है तो आगे पहुंचते-पहुंचते थक जाएगा वो कहां देखने वाला है छोड़ तो आज last page खाली रखो। मुझे पूरा पता है कि आप लोगों ने Hindustan times के इतिहास में या किसी भी अखबार ने अपने इतिहास में ऐसा कभी नही किया होगा। अख़बार का हर page उत्तम से उत्तम बने, इसके लिए आपके रिपोर्टर्स, आपके न्यूजरूम के लोग जान लगा देते हैं।

लेकिन साथियों, आप जानकर हैरान हो जाएंगे कि हमारे यहां तो सरकारों ने देश के एक बहुत बड़े हिस्से को ही blank छोड़ दिया था। देश के ये वो जिले थे जो सबसे पिछड़े थे, लगभग हर पैरामीटर पर सबसे पिछड़े।

माता मृत्यु दर सबसे ज्यादा कहां? इन्हीं जिलों में।

नवजात शिशुओं की सबसे ज्यादा मृत्यु कहां पर ? इन्हीं जिलों में।

कुपोषण की सबसे ज्यादा समस्या कहां? इन्हीं जिलों में।

टीकाकरण से सबसे ज्यादा छूटे हुए बच्चे कहां? इन्हीं जिलों में।

पानी का, बिजली का, सड़कों का सबसे ज्यादा संकट कहां? इन्हीं जिलों में।

अब Contrast देखिए- विरोधाभास देखिए।

पहले की सरकारों का सबसे कम जोर किन जिलों में था?- इन्हीं जिलों में।

सरकार के मंत्रियों की सबसे कम बैठकें किन जिलों में हुई?- इन्हीं जिलों में हुई।

सरकार के सबसे कमजोर अफसरों की पोस्टिंग कहां हुई?- इन्हीं जिलों में हुई।

सरकार की मॉनीटरिंग से सबसे दूर कौन रहा?- यही जिले रहे। यानि विकास की दौड़ में आखिरी पेज पर रहने वाले इन जिलों को blank छोड़ दिया गया था, अपने नसीब पर, अपने हाल पर छोड़ दिया गया था।

साथियों

आज जब हम Better Tomorrow की बात कर रहे हैं तो मैं आपको ये भी बताना चाहूंगा कि इन जिलों में 5-10 लाख नहीं, देश के 15 करोड़ अत्यंत गरीब लोग रहते हैं। ये लोग मुख्यतया आदिवासी हैं, जनजातीय हैं, दलित हैं, पिछड़े हैं।

क्या Better Tomorrow के लिए इनके सपने कोई मायने नहीं रखते थे? क्या इन जिलों के गरीबों को, अपने उज्जवल भविष्य का सपना देखने का अधिकार नहीं था?

मैं इस सभाग्रह में बैठे लोगों से पूछना चाहता हूं- आपने मामित का नाम सुना है क्या? नामसाई का नाम सुना है क्या ?किफिरे का नाम सुना है क्या? आप में से किसी ने नहीं सुना होगा और शायद कभी एक आद बार किसी ने सुन लिया हो। ये क्या है ये हमारे ही देश के जिलों के नाम हैं।

लेकिन कालाहांडी का नाम तो आप जानते होंगे? गुमला तो आपको पता होगा सुना होगा, बेगूसराय तो आपने सुना होगा? गढ़चिरौली-बस्तर तो आपने सुना होगा?

भाइयों और बहनों,

ऐसे 112 जिलों यानि हिंदुस्तान के करीब 700 जिले देखें, 112 जिलों को अब हमारी सरकार Aspirational Districts की तरह विकसित कर रही है। डवलपमेंट के हर पैरामीटर पर, गवर्नेंस के हर पैरामीटर पर अब पूरा फोकस करके हम इन जिलों में काम कर रहे हैं।

चाहे वो कुपोषण हो, माता और शिशु मृत्यु दर हो, बैकिंग सुविधा हो, बीमा सुरक्षा हो, बिजली कनेक्शन हो, शिक्षा व्यवस्था हो, स्वास्थ्य से जुड़ी सुविधाएं हों, हम तमाम पैरामीटर्स पर लगातार real time monitoring कर रहे हैं।

सैकड़ों अफसरों को विशेष तौर पर इन Aspirational Districts के विकास के लिए लगाया गया है। आमतौर पर सरकारी मुलाज़िमों के प्रति नफरत का भाव उनके प्रति देखने का negative temperament एक लंबे काल से बना हुआ है। लेकिन आपको जानकर खुशी हुई कि दिल्ली में air condition कमरों में बैठने वाले सैंकड़ों अफसर इन दिनों लगातार महीने में दो बार-तीन बार उन दूर-दराज के districts में जाकर के बैठते है, दो-दो, तीन-तीन दिन वहां रहते हैं उस टीम के साथ बैठकर के, रणनीति बनाकर के implement कर-कर के चीजों को बदलने के लिए खुद कोशिश कर रहे हैं। भारत सरकार के केंद्रीय दफ्तर के सैंकड़ों मुलाज़िमों का हिंदुस्तान के दूर-दराज के इलाकों में दो-दो दिन travelling करना पड़ता है। जा रहे हैं एक better tomorrow की तो गारंटी है। और आज मैं हिंदुस्तान टाइम्स के मंच से कह रहा हूं।भारत के ओवरऑल डवलपमेंट पैरामीटर्स को सुधारने के लिए सबसे बड़ा Push इन्हीं 112 Aspiration Districts से मिलेगा। जब यहां के लोगों का भविष्य सुधरेगा तो भारत का भविष्य अपने आप सुधरेगा।

साथियों,

हम पेज छोड़ने वालों में से नहीं, हम नया अध्याय लिखने वालों में से हैं।

हम देश के सामर्थ्य, देश के संसाधन और देश के सपनों पर भरोसा करने वालों में से हैं। हम पूरी निष्ठा के साथ, पूरी ईमानदारी के साथ, देशवासियों के बेहतर भविष्य के लिए, देश में उपलब्ध हर संसाधन का उपयोग करने का प्रयास कर रहे हैं। हम देश को Politics of Promises के बजाय Politics of Performance की तरफ ले जा रहे हैं।

चुनाव है तो नई रेल लाइन का ऐलान कर दो, चुनाव है तो नए हाईवे का ऐलान कर दो, चुनाव है तो कर्जमाफी का सपना दिखा दो, चुनाव है तो गरीबी हटाओ का नारा उछाल दो।ये देश बहुत देख चुका है।

साथियों,

पहले की सरकारों के समय हमारे यहां सैकड़ों ऐसी नई ट्रेनों का ऐलान किया गया और parliament में बोली गई हर बात sanctity होती है। parliament में बोला गया और तालियां, टेबल थपथपाए गए और सब एमपी ने भी अपने इलाके में जाकर ये घोषणा कर दी कि हमारे इलाके में ट्रेन आने वाली है और आप हैरान होंगे बहुत सारा ऐलान किया गया बहुत ट्रेनों का ऐलान किया गया लेकिन एक भी ट्रेन शुरू नहीं हुईं। और मैं 30-40 साल का हिसाब दे रहा हूं मैंने आकर के कुछ तो ऐसी घोषणाएं देखी जो 30 साल 40 साल पहले हुई है लेकिन कागज़ पर वो रेल लाइन की पटरी कहां होगी ये कागज़ पर भी पेंट किया हुआ नही है। जमीन की बात छोड़ों, आप हैरान होंगे आज मुझे 30-30, 40-40 साल पुराने लाखों करोड़ के रेलवे और हाईवे प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है। उस समय जो किया गया, क्या वो Better Tomorrow के बारे में सोचकर किया गया? नहीं।

कोई सरकार हो, केंद्र की या राज्य की, उस पर ये दबाव होना चाहिए कि उसे Perform करना ही पड़ेगा।

मैं जानता हूं कि ये दबाव हमने खुद आगे बढ़कर अपने ऊपर लिया है, आज मीडिया में जितने विषयों पर हमारी आलोचना होती है वो सारे विषय हमने सेट किए हुए हैं हमने कहा है कि हम ये करना चाहते हैं तो कोई हमें पूछेगा कि बताओं ये क्यों नही हुआ और ये अच्छी बात ये दबाव जरूरी है एक नए culture को हमने promote किया है। लेकिन इसी ने और मैं मानता हूं result देने का रास्ता यही है। दबाव बढ़ेगा लोगों की अपेक्षाएं बढ़ेंगी और लोगों का Better Tomorrow सुनिश्चित करने में उनकी भागीदारी भी बढ़ेगी।

साथियों,

देश के Better Future की चिंता थी, इसलिए ही हमनें देश में स्वच्छ भारत अभियान शुरू किया और अब उतनी ही शक्ति से हम जल जीवन मिशन की शुरुआत कर रहे हैं । अब ये ऐसी चीजें है कि पिछले 50 सालों में नही हुआ तो किसी ने पूछा नही कि क्यो नहीं हुआ लेकिन अब मैने कहा है तो अब मुझ से हर दिन पूछा जाएगा कि कहां तक किया। लेकिन क्या ये करना जरूरी था या नहीं था। मैं भी टाल सकता था मैं भी बचके निकल सकता था वो रास्ता मुझे मंजूर नहीं है।

आने वाले वर्षों में करीब-करीब 15 करोड़ घरों को पानी की सप्लाई से जोड़ने के लिए हम काम कर रहे हैं।

इसी तरह आज भारत पूरे आत्मविश्वास के साथ अपनी अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी बनाने के लिए जुटा हुआ है।

ये लक्ष्य अर्थव्यवस्था के साथ-साथ 130 करोड़ भारतीयों की औसत आय, उनकी Ease of Living और उनके Better Tomorrow से जुड़ा हुआ है।

इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हमारी सरकार Enabler, Facilitator और Promoter की भूमिका पूरी ताकत से निभा रही है।हम Reform and Performके इरादे के साथ आगे बढ़ रहे हैं।

देश के Physical और Financial Infrastructure में सुधार करने से लेकरGlobal Platform पर Indian Industry को बढ़ावा देने तक, डेढ़ हजार से ज्यादा पुराने कानूनों की समाप्ति से लेकर, Rules और Procedures के Simplification तक,

हम हर दिशा में एक साथ काम कर रहे हैं।

साथियों,

विकास की गति बढ़ाने के लिए अक्सर चार चीजों की चर्चा होती है।

टैक्स रेट में कमी,

Ease of Doing Business में सुधार,

Labour Reforms और Disinvestment.

इन सभी पहलुओं पर सरकार ने जो कदम उठाए हैं, वो बेहतर भविष्य की उम्मीद जगाने वाले हैं।

इसी साल Personal Tax को लेकर हमने बड़ा फैसला लिया और 5 लाख रुपए तक की इनकम को टैक्स फ्री कर दिया।

इससे हर महीने 40 हज़ार रुपए से अधिक तक की आय वाले एक बहुत बड़े वर्ग को सीधा लाभ हुआ है, जबकि सेविंग्स के लिहाज़ से 70 हज़ार रुपए तक Monthly Income वाले को भी बहुत बड़ी राहत मिली है।

यहां से हो रही बचत निश्चित रूप से इन परिवारों के Better Tomorrow में मदद करने वाली है।

इसी तरह Corporate Tax में की गई ऐतिहासिक कटौती से भारत दुनिया की सबसे कम टैक्स दरों वाली अर्थव्यवस्था तो बना ही है, Investment और Manufacturing को प्रमोट करने के लिए भी हमारी स्थिति मजबूत हुई है।

टैक्स सिस्टम को सुधारने के लिए, Businessmen और Citizens के साथ Harassment की हर संभावना को समाप्त करने के लिए, हाल में E-Assessment Scheme लागू की गई है।

अब किस अधिकारी के पास आपकी फाइल जाएगी ये न आपको पता होगा और न अधिकारी को पता होगा कि ये फाइल किसकी है।

इतना ही नहीं, क्योंकि अफसर को ये पता ही नहीं होगा कि उसे किसका Assessment करना है, इसलिए ट्रांसफर पोस्टिंग को लेकर जो गुणा-गणित होता था, वो भी बंद हो जाएगा।

यानि कुल मिलाकर होगा ये कि Tax Assessment के बीच में जो खेल होते थे, इन खेलों के बहाने आम लोगों को जो दिक्कतें आती थीं, वो अब खत्म हो जाएगी।

Ease of Doing Business में हम इस वर्ष भी टॉप-10 Best Performers में से एक हैं। बीते 5 वर्षों में हमने 79 रैंक का सुधार किया है। मुझे बराबर याद है पिछली बार जब Ease of Doing Business के रैंक आए तो world bank के चेयरमैन ने मुझे specially फोन किया कि रैंकिंग तो आते है मेरे लिए खुशी की बात है कि इतना बड़ा देश वो भी developing country और वें इतना बड़ा सुधार करें और लगातार करता रहे world bank के पास ऐसी कोई history available नही है जो पहली बार इंडिया ने किया है उन्होने फोन करके बताया।

जहां तक लेबर रिफॉर्म की बात है तो दशकों पुराने दर्जनों कानूनों को 4 कानूनों में Codify किया जा रहा है, जिससे Employee और Employer दोनों को बहुत लाभ होने वाला है।

Disinvestment की बात करूं तो हाल में लिए गए फैसलों से स्पष्ट है कि उस दिशा में भी हम तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

भाइयों और बहनों,

तीन-चार दशक पहले जब देश में बैंकों का राष्ट्रीयकरण हुआ तो खूब ढोल-नगाड़े बजवाए गए थे कि बहुत बड़ा सुधार हुआ है।

फिर समय के साथ ये पाया गया कि इतने सारे बैंकों की व्यवस्था की भी अपनी खामियां हैं।

आप लोगों के यहां ही एडिटोरियल लिखे जाते थे, इकोनॉमी के जानकार मांग करते थे कि देश में बैंक कम होने चाहिए, तभी हमारी बैंकिंग प्रभावी होगी।

हमने बैंकों का मर्जर करने के साथ ही, उनके Recapitalisation के लिए ढाई लाख करोड़ रुपए की राशि भी दी है।

Insolvency and Bankruptcy Code- IBC ने करीब-करीब 3 लाख करोड़ रुपए की वापसी सुनिश्चित की है।

इस तरह के बहुत से Reforms के बाद, बहुत से बड़े फैसलों के बाद आज देश का बैंकिंग सेक्टर पहले से काफी मजबूत स्थिति में हैं।

मैं आज फिर आपके माध्यम से, देश के प्रत्येक बैंक कर्मचारी को ये भरोसा देना चाहता हूं कि पुरानी स्थितियों से हम बाहर निकल आए हैं। अब आपके Genuine Business Decisions पर सवाल नहीं उठाए जाएंगे।

किसी भी तरह की कार्रवाई से पहले किसी Serving Finance और Banking Expert से Scrutiny कराने से जुड़े दिशा-निर्देश भी जल्द ही जारी किए जा रहे हैं। आज जो बैंकिंग सेक्टर पर दबाव है, तनाव है, उससे मुक्ति दिलाना ये भी तो सरकार का काम है और हम करेंगे, अगर बैंक में बैठा हुआ व्यक्ति decisions लेने में डरता है तो उसको चिंता रहती है तो वो निर्णय नही कर पाएगा और सरकार उसको असहाय नहीं छोड़ सकती उसकी सुरक्षा करने के लिए सरकार पूरी जिम्मेदारी लेती है। और तभी तो देश आगे बढ़ता है। और मैं ऐसा हूं मैं जिम्मेदारियों से भागने वाला इंसान नहीं हूं। मैं जिम्मेदारियां खुद लेता हूं।

भाइयों और बहनों,

आज यहां इस हॉल में बहुत से लोग हैं जो दिल्ली-एनसीआर में रहते हैं। ब्लैकमनी के अंधाधुंध प्रवाह ने Real Estate Sector की क्या हालत की थी, आप सभी को पता है। आज भी सैकड़ों-हजारों लोग ऐसे हैं जो बरसों से EMI दे रहे हैं, किराए के घर में रह रहे हैं और अपने सपने के घर का इंतजार कर रहे हैं।

Real Estate Sector को इस स्थिति से निकालने के लिए, अधूरे और अटके हुए प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए सरकार ने हाल में एक Special Window भी बनाई है। इसके तहत 25 हजार करोड़ रुपए जुटाए जा रहे हैं। मुझे उम्मीद है कि मध्यम वर्ग के एक बड़े हिस्से का, अपने घर का सपना पूरा होगा।

इसके अलावा सरकार अपनी योजनाओं के तहत जो 2 करोड़ घर बनवाने जा रही है, GST में छूट, ब्याज में छूट जैसे फैसलों से भी इस सेक्टर को बहुत मदद मिलने वाली है।

भाइयों और बहनों,

Better Tomorrow का हमारे सपने में एक चीज और बहुत अहम रही है। ये है भारत में World Class Infrastructure. आने वाले कुछ वर्षों में इस सपने को पूरा करने के लिए सरकार 100 लाख करोड़ रुपए की परियोजनाएं शुरू करने जा रही है।

इसके साथ ही, हमारा प्रयास Infrastructure के क्षेत्र में Private Investment को भी बढ़ाने पर है। सरकार इस बात भी नजर रखे हुए है कि Infrastructure और Industry को Credit Flow में किसी तरह की दिक्कत न आए।

साथियों,

आज सरकार रेल कनेक्टिविटी पर, रोड कनेक्टिविटी पर, एयर कनेक्टिविटी पर जितना निवेश कर रही है, उतना पहले कभी नहीं किया।

इसके पर्यावरण पर, Ease Of Living पर प्रभावों से आप परिचित हैं।

लेकिन एक और सेक्टर पर कनेक्टिविटी सुधारने का बहुत बड़ा प्रभाव पड़ा है।

ये सेक्टर है- टूरिज्म।

साथियों,

सरकार के प्रयासों का ही नतीजा है कि आज भारत World Economic Forum के Travel and Tourism Competitiveness Index में 34वें स्थान पर है। जबकि साल 2009 से 2013 के बीच के वर्षों में हम 62 से 65वें स्थान के बीच थे।

और मैं आपको ये भी याद दिला दूं, टूरिज्म बढ़ने का सबसे ज्यादा गरीब को फायदा होता है, गरीब से गरीब को रोजगार मिलता है कम से कम पूंजी निवेश से ज्यादा से ज्यादा रोजगार मिलता है। जब टूरिज्म बढ़ता है, विदेशी पर्यटक आते हैं, तो यहां खर्च भी करते हैं। साल 2014 में भारत के लोगों को टूरिज्म सेक्टर से विदेशी मुद्रा में 1 लाख 20 हजार करोड़ रुपए की कमाई हुई थी। वहीं पिछले साल ये विदेशी मुद्रा बढ़कर करीब-करीब 2 लाख करोड़ रुपए पहुंच गई है।

आखिर ये कमाई किसकी हुई। भारत की होटल इंडस्ट्री से जुड़े लोगों की, टूरिस्ट गाइड्स की, टैक्सी वालों की, छोटे-छोटे ढाबे वालों की। हैंडीक्राफ्ट बेचने वालों की

भाइयों और बहनों,

देश के Better Future के लिए, आज समय की मांग है कि सरकार Core Areas of Governance पर काम करे।

लोगों के जीवन में सरकार का दखल जितना कम होगा, और सुशासन जितना ज्यादा होगा, उतना ही तेजी से देश आगे बढ़ेगा। ये मेरा conviction है कि गरीब के लिए सरकार का अभाव नही होना चाहिए और नागरिक के जीवन में सरकार का दबाव नही होना चाहिए। सरकार जितनी ज्यादा लोगों की ज़िंदगी से निकल जाए उतना ही अच्छा रहेगा।

इसके लिए बहुत आवश्यक है कि सरकार खुद अपने Human Resources पर भी ध्यान दे।

साथियों,

हमने 21वीं सदी में एक ऐसे Governance Model के साथ एंट्री ली जो 19वीं और 20वीं सदी की सोच और अप्रोच से चलता था।

इस System के अहम टूल यानि हमारे अधिकारी, हमारे कर्मचारी पुरानी धारणाओं, पुराने तौर-तरीकों के आदी हो चुके थे और वही Legacy वो आगे पास करते थे।

19वीं-20वीं सदी की मानसिकता वाले Governance Model के साथ 21वीं सदी के भारत की Aspirations को पूरा करना बहुत मुश्किल था।

इसलिए बीते 5 वर्षों में हमने इस सिस्टम को और सरकार के Human Resource को ट्रांसफॉर्म करने का एक गंभीर प्रयास किया।

मैंने कभी इस बारे में सार्वजनिक मंच से विस्तार से बात नहीं की है।

लेकिन Better Tomorrow का ये बहुत Important Aspect है, इसलिए आज इस बारे में भी कुछ बातें Share करना चाहता हूं।

साथियों,

हमने सरकार में Employment के नियम बदले हैं, Appointment के नियम बदले हैं। बड़े पदों पर नियुक्तियों के लिए सिफारिश, अब बीते दिनों की बात हो गई है। बैंकों के पारदर्शी नियुक्तियों के लिए हमने बैंकिंग बोर्ड की भी शुरुआत की है।

साथियों,

देश के जो Top Decision Makers हैं, Policy Makers हैं, उनके साथ Governance को लेकर हम लगातार Brain Storming Sessions कर रहे हैं औऱ इस व्यवस्था को सिस्टम का हिस्सा बना रहे हैं।

मैं खुद अलग-अलग सेक्टर्स के Brain Storming Sessions में जाता हूं, चाहे वो रेलवे हो, बैंकिंग हो या फिर नीति आयोग के तमाम लेक्चर्स।

हम पुरानी और औपचारिक व्यवस्थाओं को Outcome Based बना रहे हैं। जहां जरूरत है, वहां विदेशी औऱ इंडस्ट्री के एक्सपर्टस को बुलाकर हम ब्यूरोक्रेसी को ट्रेन करवा करे हैं।

अब जैसे कल-परसों पुणे जा रहा हूं वहां ही जो DGP कॉन्फ्रेंस होने जा रही है, इस DGP कॉन्फ्रेंस की परंपरा करीब-करीब 120 साल से चल रही है लेकिन उसमें 115 साल ये मीटिंग दिल्ली में ही हुई है और सुबह शुरू होती थी और लंच के बाद पूरी हो जाती थी यानि करीब 115 साल की legacy मैने उसको पूरा बदल दिया है अब दिल्ली के बाहर करता हूं तीन दिन सभी पुलिस विभाग के लोग इकट्ठा आते हैं बारिकी से चर्चा करते हैं नए-नए समस्याओं, नए-नए संकटों की चर्चा करते हैं अपनी best practices को share करते हैं, नए initiatives की चर्चा करते हैं और सब मिलकर ही एक एजेंडा तय करते है कि अब पुलिसिंग में कैसे आगे बढ़ना है। थोपा नही जा रहा है तीन दिन तक लगातार पुणे में बैठकर के ये काम अभी करेंगे। हर साल किसी ना किसी स्थान पर जाकर के इस काम को करते हैं।

यानि Result Oriented Approach लेकर वे वहां से निकलें। time bound काम की जिम्मेदारी लेकर चलें उस दिशा में काम हो रहा है। आज ये भी सही है कि law & order स्टेट का subject होने के बाद भी ये subject बहुत interconnected है। एक राज्य की इस प्रकार की टोली के विषय में दूसरा राज्य नहीं जानता है तो कभी ना कभी संकट आ सकता है। तो इस प्रकार से एक law & order state subject होने के बाद भी जानकारियों की दृष्टि से, संपर्क की दृष्टि से states की interconnected व्यवस्थाएं बहुत आवश्यक हो गई हैं। हम इसमें बदलाव ला रहे हैं।

साथियों,

एक और पहल हमने की है सिविल सर्वेंट्स को लेकर। नियुक्ति के शुरुआती दिनों में ही उन्हें इस बात का अनुभव दिया जा रहा है कि पॉलिसी लेवल पर कैसे काम किया जाता है, फ्लैगशिप स्कीम्स को कैसे फॉलो किया जाता है।

पहले उन्हें ऐसा अनुभव ही नहीं मिलता था। कई आईएएस-आईपीएस अफसर ऐसे हैं कि उनको job मिलने के बाद अपने स्टेट कैडर में चले गए उनको कभी दिल्ली आने का सौभाग्य नहीं मिला, इतना बड़ा देश कैसे काम करता है कभी सौभाग्य ही नहीं मिला वो रिटायर भी हो गए। हमने अब शुरू के कालखंड में ही मसूरी से निकलते है तो 3 महीनें भारत सरकार के भिन्न-भिन्न व्यवस्थाओं में जोड़ना शुरू किया है। ताकि वो यहां एक विजन लेकर के जाएं, के हां देश के सामने ये चुनौतियां होती हैं तो मैं जहां ग्रासरूट लेवल पर काम करूंगा तो भी मैं देश की इन बातों को ध्यान में रखकर के निर्णय प्रक्रियाओं को चलाउंगा। ताकि देश और लोकल की स्थितियों में contradiction पैदा ना हो और उस एक सफल प्रयोग हुआ है और एक दूसरा लाभ हुआ है कि यहां पर ज्यादातर वो लोग होते हैं जो retirement की date लिखकर के बैठें होते हैं। main team वही होती है वो सोचते है कि अब 11 महीनें बाकी रहे 9 महीनें बाकी रहे, 6 महीनें बाकी रहे ऐसे में ये जिसका 35 साल भविष्य बाकी है ऐसे नए ऊर्जावान नौजवान उनके साथ जुड़ जाते हैं तो automatic ऊर्जा मिलना उनकों भी शुरू हो जाता है। बदलाव शुरू हो जाता है। इतना ही नही इस वर्ष हमने एक और शुरूआत की है। इस बार देश में 20 से ज्यादा सिविल सेवाओं के Trainees का साझा Foundation programme हमने किया।

अभी तक बहुत बड़ी शिकायत ये रहती थी और मैने एक बार लाल किले पर से नया जब आया तो मैने पहले ही साइलॉस की चर्चा की थी। पहला मेरा जो लाल किले का भाषण था अब मैं वो बीमारी तो बता दी गई solve करना तो पड़ेगा और मुझे ही करना पड़ेगा और हमने उसी को समस्या का समाधान के लिए जो Services Isolation में काम करती हैं। उसमें बदलाव लाने के लिए एक प्रकार से joint foundation course की दिशा में हम आगे बढ़ रहे हैं। अलग-अलग सर्विसेस जैसे रेवेन्यू, फोरेस्ट, रेलवेज, अकाउंट एंड ऑडिट उनके अफसरों को इन दिनों हमने बहुत जिम्मेदारी पूर्वक काम दिये हैं महत्वपूर्ण ज्वाइंट सेकेट्री लेवल की पोस्ट भी दी है ताकि पॉलिसी मेकिंग में सभी सर्विसेस का Integration हो सके।

और हां,

इन सबके बीच हमने 220 से ज्यादा सरकारी अफसरों को भ्रष्टाचार के आरोप में, काम सही तरीके से न कर पाने के आरोप में Pre-Mature Retirement भी दिया है।

साथियों,

Privilege के बजाय हम Professionalism को Promote करने पर बल दे रहे हैं।

Lateral Entry, आपमें से बहुत लोग है जो इस बात को मानते है कि कोई आईएएस हो गया तो सारी दुनिया वही जानता है ये सोच ठीक नही है। समाज में बहुत प्रतिभावान लोग होते है। इतनाम बड़ा देश चलाने के लिए वो भी contribute करना चाहते हैं उनको अवसर मिलना चाहिए और उनको अवसर देने के लिए हमने एक mechanism विषय develop किया है वो भी organized way में सरकार के विम पर नही यूपीएससी की process से और देश से मैने देखा है एक-एक दो-दो करोड़ के पैकेज से काम करने वाले नौजवान सामान्य तनख्वा लेकर के दो साल तीन साल देश को देने के लिए सरकार व्यवस्था में आने के लिए तैयार हो रहे हैं कुछ हमने शुरूआत की है और उनके पास corporate world का अनुभव है governance और government के साथ जुड़ने के कारण वो ज्यादा evaluation कर पा रहे हैं। मैं समझता हूं कि आने वाले दिनों में एक अधिक अच्छे out-come के लिए ये जो हम कोशिश कर रहे हैं वो सुखद परिणाम लाएगी। और देश का बेहतरीन टैलेंट, भले ही वो सिविल सेवाओं की तय प्रक्रियाओं का हिस्सा नहीं है, वो देश के दूसरे बेस्ट संस्थानों की Values को Introduce कर सके, ये कोशिश की जा रही है।

अब Deadline को सरकारी सिस्टम में भी Sacrosanct माना जाने लगा है। मैं ये नहीं कहता कि पूरे देश में ये व्यवस्था बन चुकी है। लेकिन बहुत सारे विभागों में इस बदलाव को आप अनुभव कर सकते हैं।

Governance के Infrastructure में किया जा रहा ये सुधार सिर्फ 5 या 10 वर्ष के लिए नहीं है। ये सिर्फ हमारी सरकार तक सीमित नहीं है। बल्कि इसका लाभ आने वाले दशकों तक देश को मिलने वाला है।

यही सोच और अप्रोच हमारी रही है।

हम सिर्फ 5 या 10 वर्षों के कार्यकाल के लिए काम नहीं कर रहे हैं बल्कि Better Tomorrow के लिए New India के लिए Permanent और Performance Oriented व्यवस्था बनाने का प्रयास कर रहे हैं।

130 करोड़ भारतीयों के Better Future के लिए Right Intention, Better Technology और Effective Implementation, यही हमारा Roadmap है।

मुझे उम्मीद है कि इस समिट में जो संवाद होगा, उसमें भारत के हितों से जुड़ी जितनी बातें सामने उभरकर आएंगी, वो भी Better Tomorrow की गारंटी लेकर आएंगी।

आप सभी को सार्थक चर्चा के लिए बहुत-बहुत शुभकामनाओं के साथ, बहुत-बहुत धन्यवाद !