प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से मुश्किल परिस्थितियों में किसानों को मदद मिलेगी: प्रधानमंत्री
एनडीए सरकार की फ़सल बीमा योजना में पिछली फसल बीमा योजना की कमियों दूर कर दिया गया है: प्रधानमंत्री मोदी
हम फसल बीमा को लेकर किसानों में विश्वास पैदा करना चाहते हैं: प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में टेक्नोलॉजी का उपयोग करते हुए व्यापक स्तर पर दावों का शीघ्र निपटान किया जाएगा: प्रधानमंत्री मोदी
जब हम टेक्नोलॉजी और डिजिटल इंडिया की बात करते हैं तो इसके माध्यम से हम किसानों का कल्याण देखते हैं: प्रधानमंत्री
किसानों का कल्याण ही प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का मूल उद्देश्य है: प्रधानमंत्री मोदी
14 अप्रैल को बाबा साहेब अम्बेडकर की जयंती पर राष्ट्रीय कृषि बाजार के लिए डिजिटल प्लेटफार्म शुरू किया जाएगा: प्रधानमंत्री
राष्ट्रीय कृषि बाजार के लिए डिजिटल प्लेटफार्म के माध्यम से किसानों को उनकी उपज की बेहतर कीमत मिल सकेगी
स्टार्ट-अप इंडिया सिर्फ़ आईटी तक ही सीमित नहीं है। इसमें कृषि क्षेत्र के लिए भी काफ़ी गुंजाइश है: प्रधानमंत्री मोदी
हम प्रति बूँद, अधिक फ़सल (पर ड्रॉप, मोर क्रॉप) को महत्व दे रहे है: प्रधानमंत्री मोदी
हम ज्यादा से ज्यादा किसानों तक मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना को पहुँचाना चाहते हैं: प्रधानमंत्री

विशाल संख्‍या में पधारे हुए मेरे प्‍यारे किसान भाइयो और बहनों,

मैं जब हेलीकॉप्‍टर से आ रहा था तो मैं देख रहा था कि मीलों तक बसों की कतार लगी थी, वो यहां पहुंचना चाहते थे। मैं नहीं मानता हूं वो पहुंच पाए होंगे। जो मेरे किसान भाई-बहन यहां पांच किलोमीटर-दस किलोमीटर दूरी पर अटक गए है, उनको भी मैं यहां से नमन करता हूं। मैं सामने की तरफ देखने की कोशिश कर रहा हूं, लोग ही लोग नज़र आ रहे हैं। इस तरफ भी वो ही हाल है, इस तरफ भी वो ही हाल है। और ये Sehore एक छोटा-सा कस्‍बा जहां इतना बड़ा कार्यक्रम आयोजित करना और राज्‍य भर से इतनी बड़ी मात्रा में किसानों का आना, हमें आशीर्वाद देना, मैं हृदय से इन मेरे किसान भाइयो-बहनों का वंदन करता हूं, अभिनंदन करता हूं। मैं आज विशेष रूप से मध्‍य प्रदेश के किसानों का दर्शन करने के लिए आया हूं। मध्‍य प्रदेश के किसानों को नमन करने के लिए आया हूं, उनका अभिनंदन करने के लिए आया हूं।

दस साल पहले हिन्‍दुस्‍तान के Agriculture के नक्‍शे पर मध्‍य प्रदेश का नामो-निशान नहीं था। कृषि क्षेत्र में योगदान करने वाले राज्‍यों में पंजाब, हरियाणा, गंगा-यमुना के तट या कृष्‍ण-गोदावरी के तट, यही इलाके हिन्‍दुस्‍तान में कृषि क्षेत्र के इलाके माने जाते थे। लेकिन मध्‍य प्रदेश के किसानों ने अपनी सूझबूझ से, अपने परिश्रम से, नए-नए प्रयोगों से और मध्‍य प्रदेश की शिवराज जी की सरकार ने अनेक वित्‍त किसान लक्ष्‍य योजनाओं के रहते, ग्रामीण विकास की योजनाओं के रहते और किसान की जो मूलभूत आवश्‍यकता है, उस पानी पर बल देने के कारण राज्‍य सरकार और किसानों ने मिलकर के एक नया इतिहास रचा है और आज हिन्‍दुस्‍तान के कृषि जगत में मध्‍य प्रदेश सिरमौर बन गया है और इसलिए मैं मध्‍य प्रदेश के किसानों को आज नमन करने आया हूं।

चार-चार-चार साल लगातार, कृषि क्षेत्र का अवॉर्ड एक राज्‍य जीतता चला जाए, यह छोटी बात नहीं है और उनका growth भी देखिए। कभी zero पर से दस पर पहुंचना सरल होता है, लेकिन 15-17-18 पर से 20-22 या 24 पर पहुंचना बहुत कठिन होता है। जो लोग कृषि अर्थशास्‍त्र को समझते हैं, वो भली-भांति जान सकते हैं कि मध्‍य प्रदेश ने भारत की आर्थिक विकास की यात्रा में मध्‍य प्रदेश के कृषि जगत का कितना बड़ा योगदान किया है। इसलिए मैं विशेष रूप से आज यहां आकर के लाखों किसानों की हाजिरी में ‘कृषि कर्मण अवॉर्ड’ दे रहा हूं। यह अवॉर्ड तो मैंने मुख्‍यमंत्री के हाथ में दिया, राज्‍य के कृषि मंत्री के हाथ में दिया, लेकिन हकीकत में तो यह जो ‘कृषि कर्मण अवॉर्ड’ है, वो मैं मध्‍य प्रदेश के कोटि-कोटि लाखों मेरे किसान भाइयो-बहनों को देते हुए कोटि-कोटि वंदन करता हूं।

आपने अद्भुत काम किया है, लेकिन भाइयो-बहनों इन सब के बावजूद भी पिछले दो साल वर्षा की स्‍थिति ठीक नहीं रही। कहीं सूखा रहा तो कहीं बाढ़ रही, इसके बावजूद भी देश के किसानों ने फसल की पैदावार मे कमी नहीं आने दी। ऊपर से कुछ मात्रा में बढ़ोत्‍तरी हुई। यह किसानों के पुरुषार्थ का परिणाम है कि आज देश में विपरीत मौसम के बावजूद भी हमारा किसान विपरीत परिस्‍थितियों से जूझते हुए भी देश के अन्‍न के भंडार भरने में कोई कमी नहीं रखता है।

आज मेरा यहां आने का एक और कारण है कि संपूर्ण देश के किसानों के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, उसकी guidelines आज मध्‍य प्रदेश के किसानों की हाजिरी में समग्र देश के किसानों को अर्पित की जा रही है। इसका हक मध्‍य प्रदेश के किसानों का बनता है जिन्‍होंने एक नया इतिहास रचा है और इसलिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का आरंभ भी मध्‍य प्रदेश से करना बहुत ही उचित मुझे लगता है और उसके कारण आज इस कार्यक्रम की रचना की गई।

हमारे देश में अटल जी की सरकार जब थी, तब सबसे पहले फसल बीमा योजना आई थी और किसानों का भला करने का एक प्रमाणित प्रयास भारतीय जनता पार्टी, NDA, अटल जी की सरकार ने किया था। बाद में सरकार बदल गई। उन्‍होंने उसमें कुछ परिवर्तन किए और परिवर्तन करने के कारण सरकार का तो भला हुआ, लेकिन किसान के मन में आशंकाएं पैदा हो गई। परिणाम यह आया कि किसान फसल बीमा योजनाओं से दूर भागने लगा। इस देश के इतने किसान प्राकृतिक संकटों को झेलते है, उसके बावजूद भी वो फसल बीमा लेने के लिए तैयार नहीं होते हैं। पूरे हिन्‍दुस्‍तान में 20 प्रतिशत से ज्‍यादा किसान बीमा लेने के लिए तैयार नहीं है। उनको पता है कि यह करने के बाद भी कुछ मिलने वाला नहीं है। हमारे सामने सबसे पहली चुनौती थी कि हिन्‍दुस्‍तान के किसान के अंदर विश्‍वास पैदा किया जाए। बीमा योजना की एक ऐसी product दी जाए कि जिसके कारण कि‍सान की सारी आशंकाओं का समाधान हो जाए और इस देश में पहली बार ऐसी फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना आई है। जो लोग सुबह-शाम मोदी को कि‍सान वि‍रोधी कहने के लि‍ए भांति‍-भांति‍ के प्रयोग करते हैं, ऐसे लोगों ने भी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की आलोचना करने की हि‍म्‍मत नहीं की क्‍योंकि‍ ऐसी योजना बनी है कि जि‍समें कि‍सान की सारी मुसीबतों का समाधान है।

एक समय था कि‍ कि‍सान फसल बीमा कुछ इलाकों में तो 14% तक जाना पडा। कुछ इलाकों में 6%-8% गया। बीमा कंपनि‍यां तय करती थी, मजबूरी का फायदा उठाती थी। इस सरकार ने नि‍र्णय कर लि‍या कि‍ हम जब बीमा योजना करेंगे, तो रबी फसल के लि‍ए डेढ percent से ज्‍यादा कि‍सान से प्रीमि‍यम नहीं लि‍या जाएगा और खरीफ में 2% से ज्‍यादा नहीं लि‍या जाएगा। कहां 12-14% तक लूटा जाता था और कहां 2% का cap लगा दि‍या। उन्‍होंने क्‍या कि‍या था? भुगतान के ऊपर cap लगा दी थी, एक दीवार लगा दी थी कि‍ इससे ज्‍यादा भुगतान नहीं होगा। हमने प्रीमि‍यम पर तो cap लगा दी, लेकि‍न कि‍सान को जब मि‍लने की नौबत आएगी, उस पर कोई cap नहीं रहेगी। जि‍तना बीमा वो कराएगा, उतना ही पैसा उसका हक बनेगा और उसको देने का काम होगा। यह बहुत बड़ा नि‍र्णय है।

और एक बात भी। आज स्‍थि‍ति‍ ऐसी है कि‍ एक गांव में अगर 100 कि‍सान है। 80 कि‍सान बीमा योजना से जुड़ते नहीं है, सिर्फ 20 कि‍सान जुड़ते हैं और फसल का नुकसान भी 12-15-25 गांव के बीच में क्‍या स्‍थि‍ति‍ है उसका हि‍साब लगाया जाता था। हमने इस बार निर्णय कि‍या - अकेला एक कि‍सान होगा गांव में और मान लीजि‍ए उसी के खेत में मुसीबत आ गई, ओले गि‍र गए, पानी का भराव हो गया, भूस्‍खलन हो गया तो अगल-बगल में क्‍या हुआ है वो नहीं देखा जाएगा, जि‍स कि‍सान का नुकसान हुआ है, बीमा योजना का लाभ वो अकेला होगा तो भी उसको मि‍लेगा। यह बड़ा ऐति‍हासि‍क नि‍र्णय कि‍या।

पहले की योजना में फसल बीमा में अगर बारि‍श नहीं, हुई तो कि‍सान मेहनत नहीं करता था, बीज खराब नहीं करता था, वो जाता ही नहीं था खेत में। क्‍योंकि‍ मालूम था कि‍ भई कुछ होना ही नहीं है तो क्‍यों जाऊं। ऐसी स्‍थि‍ति‍ में कि‍सान क्‍या करेगा? बीज बोने के बाद फसल खराब हो तब तो बीमा हो सकता था। यह ऐसी बीमा योजना है कि‍ अगर बारि‍श नहीं हुइ है और उसके कारण कि‍सान ने बोनी नहीं की है तो भी उसको कुछ मात्रा में मदद देने का प्रयास इस बीमा योजना से होगा।

इस बीमा योजना के तहत एक और महत्‍वपूर्ण नि‍र्णय कि‍या कि‍ एक बार फसल काट दी। तब तक मौसम अच्‍छा था, सब अच्‍छा था, खेत के अंदर फसल के ढेर लगे हुए है और अचानक बारि‍श आ गई, फसल काटने के बाद बारि‍श आ गई। हि‍न्‍दुस्‍तान की कोई बीमा कंपनी उसके लि‍ए कि‍सान की मुसीबत को देखने के लि‍ए तैयार नहीं है। पहली बार हि‍न्‍दुस्‍तान में ऐसा नि‍र्णय कि‍या गया है कि‍ फसल काटने के बाद अगर खेत में ढेर पड़ा है और 14 दि‍न के भीतर-भीतर अगर बारि‍श आ गई, ओले गि‍र गए और वो फसल बर्बाद हुई तो उसका भी बीमा दि‍या जाएगा, उसके लि‍ए भी कि‍सान को भुगतान कि‍या जाएगा।

भाइयो-बहनों, पहले बीमा लेते थे तो बीमा मंजूर होने में चार-चार season चले जाते थे, नि‍र्णय नहीं होता था, बीमा कंपनी, सरकार और कि‍सान के बीच कागज ही चलते रहते थे। हमने नि‍र्णय कि‍या है कि‍ technology का उपयोग कि‍या जाए, तत्‍काल survey करने में technology का उपयोग कि‍या जाएगा और 25 प्रति‍शत राशि‍ उसको तत्‍काल दी जाएगी और बाद की प्रक्रि‍या कम से कम समय में पूर्ण करके कि‍सान को दी जाएगी।

भाइयो-बहनों इससे बड़ी गारंटी, risk लेने की गारंटी कभी भी नहीं हो सकती है। यह जो कि‍सानों ने करके दि‍खाया है। भाइयो-बहनो मेरी एक अपेक्षा है। आजादी के इतने साल हो गए, कि‍सान का बीमा पर वि‍श्‍वास नहीं रहा है। मुझे आपकी मदद चाहि‍ए। आप बीमा योजना पर वि‍श्‍वास करे, एक बार प्रयोग करके देखे और आज 20 प्रति‍शत से ज्‍यादा लोग बीमा नहीं लेते। क्‍या हि‍न्‍दुस्‍तान के 50 प्रति‍शत कि‍सान बीमा योजना में जुड़ने को, आगे आने को तैयार है? जि‍तने ज्‍यादा कि‍सान जुड़ेंगे, इतना सरकार की ति‍जोरी पर बोझ बढ़ने वाला है। जि‍तने ज्‍यादा कि‍सान बीमा लेंगे, सरकार की ति‍जोरी से उतना पैसा ज्‍यादा जाने वाला है। उसके बावजूद भी मैं कि‍सानों से आग्रह करता हूं कि‍ आप इस बीमा योजना के साथ जुड़ि‍ए। हि‍न्‍दुस्‍तान में पहली बार कि‍सानों की भलाई के लि‍ए इतनी बड़ी योजना लाई गई है और एक बार कि‍सान इस योजना से जुड़ गया तो आने वाले दि‍नों में प्राकृति‍क संकट कि‍सान को कभी डुला नहीं पाएंगे, हि‍ला नहीं पाएंगे, डरा नहीं पाएंगे, सरकार उसके साथ कंधे से कंधा मि‍लाकर के खड़ी रहेगी।

भाइयो-बहनों, हमारे देश में कोई वर्ष ऐसा नहीं होता है कि‍ जब देश के कि‍सी न कि‍सी इलाके में प्राकृति‍क आपदा न आई हो और कि‍सानों को भयंकर नुकसान होता है। कि‍सी न कि‍सी इलाके में होता ही होता है, लेकि‍न पहले नि‍यम ऐसे थे कि‍ अगर उस इलाके में 50 प्रति‍शत से ज्‍यादा नुकसान हुआ होगा, तब जाकर के सरकार वहां पर हि‍साब-कि‍ताब शुरू करेगी। भाइयो-बहनों, हमने इस नि‍र्णय को बदल दि‍या और हमने कहा कि‍ 50 प्रति‍शत नहीं, एक-ति‍हाई भी अगर नुकसान हुआ है तो भी कि‍सान को इस नुकसान का मुआवजा दि‍या जाएगा। यह बहुत बड़ा ऐति‍हासि‍क नि‍र्णय कि‍या गया है। पहले कि‍सान को जो मुआवजा दि‍या जाता था, इसको करीब-करीब तीन गुना कर दि‍या गया है। भाइयो-बहनों, कि‍सान का कल्‍याण कैसे हो, कि‍सान के जीवन को कैसे बदला जाए, गांव की आर्थि‍क स्‍थि‍ति‍ में कैसे बदलाव लाया जाए, उन बातों को प्राथमि‍कता देते हुए इस सरकार ने इन कामों को आगे बढ़ाया है।

सरकार ने एक और नया काम लि‍या है। हमारे देश में आधुनि‍क कृषि‍ की तरफ हम जाना चाहते हैं। हम कृषि‍ जगत में technology लाना चाहते हैं। हम हमारे agriculture sector को mechanize करना चाहते है, लेकि‍न साथ-साथ हमारी सदि‍यों के जो अनुभव है, हमारे कि‍सान के पास जो बुद्धि‍ धन है, जो परंपरागत knowledge है इसको भुलाया नहीं जा सकता है। देश का सबसे बड़ा नुकसान हुआ है कि‍ हम नया तो ला नहीं पाए और पुराना छोड़ दि‍या और इसलि‍ए मैं वि‍शेष रूप से हमारे कृषि‍ मंत्री राधा मोहन सिंह जी को बधाई देना चाहता हूं। यह उनकी कल्‍पना थी कि‍ परंपरागत जो कृषि‍ है, जो progressive farmers है, उनके अनुभवों का भी लाभ लि‍या जाए और आधुनि‍क वि‍ज्ञान और पंरपरागत कृषि‍, इन दोनों का मेल कि‍या जाए और उस काम के लि‍ए हमारे कृषि‍ मंत्री बहुत बड़ा योगदान दे रहे हैं।

भाइयो-बहनों, हमारा कि‍सान मेहनत करता है, फसल पैदा करता है लेकि‍न उसको दाम नहीं मि‍लता है। इतना बड़ा देश है। एक ही फसल एक जगह पर भाव गि‍र जाते है तो दूसरी जगह पर भाव ज्‍यादा होते है, दाम ज्‍यादा होते है। लेकि‍न कि‍सान के पास choice नहीं रहता है। उसको तो, बेचारे को अपने गांव के बगल में जो मंडी है उसी में माल बेचना पड़ता है। हम जो technology की बात करते है, Digital India की बात करते हैं वो मेरे कि‍सान भाइयों-बहनों के लि‍ए करते हैं। आने वाले दि‍नों में हम एक National Agriculture Market, इसका पूरा virtual platform खड़ा कर रहे हैं, Digital platform खड़ा कर रहे हैं। हि‍न्‍दुस्‍तान के कि‍सी भी कोने में मेरा कि‍सान अपने मोबाइल फोन पर देख पाएगा कि‍ उसके यहां अगर गेहूं है तो आज हि‍न्‍दुस्‍तान के कि‍स कोने में गेहूं कि‍तने दाम से बि‍क रहे हैं और वो तय कर सकता है। वो यहां मध्‍य प्रदेश में बैठे-बैठे तय कर सकता है कि‍ मुझे मध्‍य प्रदेश में गेहूं नहीं बेचना है, मुझे तो तमि‍लनाडु में ज्‍यादा दाम मि‍लते हैं, तमि‍लनाडु में बेचना है। वो बेच सकता है। पहली बार सारे देश की करीब साढ़े पाँच सौ मंडि‍यों को technology से जोड़कर के Digital India का पहला फायदा मेरे कि‍सान भाइयो-बहनों को मि‍ले। इसके लि‍ए ऐसी मंडि‍यों को Online network बनाकर के एक National Agriculture Market खड़ा करना है।

भाइयो-बहनों, 14 अप्रैल डॉ. भीमराव बाबा साहेब अम्‍बेडकर की जन्‍म जयंती है। हमारे Mhow में, हमारे मुख्‍यमंत्री शि‍वराज जी ने बाबा साहेब अम्‍बेडकर का तीर्थ खड़ा कि‍या है। उस 14 अप्रैल, बाबा साहेब अम्‍बेडकर जी की जयंती के दि‍न हम हि‍न्‍दुस्‍तान में ये National Agriculture Market का Online प्रारंभ करेंगे। उसकी शुभ शुरूआत कर देंगे।

भाइयो-बहनों, हमारे देश में गन्ना कि‍सानों को लेकर के हमेशा चि‍न्‍ता बनी रही। जब हम सरकार में आए, बेहि‍साब पैसे कि‍सानों के भुगतान बाकी थे। जहां कि‍सान गन्‍ना पैदा करता था, बेहि‍साब भुगतान बाकी था। कोई कहता था 50 हजार करोड़ बाकी है, कोई कहता था 60 हजार करोड़ बाकी है, कोई कहता था 65 हजार करोड़ बाकी है। हर दि‍न नए-नए आंकड़ें आते थे। हमारे सामने चुनौती थी कि‍ इन गन्‍ना कि‍सानों को पैसे कैसे मि‍ले। एक के बाद एक योजना बनाई। दुनि‍या में में चीनी का दाम गि‍र गया था, भारत में चीनी भरपूर थी। दुनि‍या चीनी खरीदने को तैयार नहीं थी। कारखानों के पास पैसा नहीं था। कि‍सान के पैसे का कोई भुगतान नहीं करता था। हमने एक के बाद एक योजनाएं बनाई और आज 18 महीने के भीतर-भीतर मैं बड़े संतोष के साथ कहता हूं कि‍ जहां 50 हजार करोड़, 60 हजार करोड़ के भुगतान की बातें होती थी, आज, कल तक का मैंने हि‍साब लि‍या, एक हजार करोड़ से भी कम भुगतान अब बाकी रहा है। मेरे गन्‍ना कि‍सानों को यह भुगतान हो जाएगा।

इतना ही नहीं भाइयो-बहनों, हम कि‍सान को ताकतवर बनाने के नि‍र्णय करते हैं। गन्‍ना कि‍सान, चीनी के कारखानेदारों की इच्‍छा पर जि‍न्‍दा या मरा यह अवस्‍था ठीक नहीं है। हमने एक नि‍यम बनाया कि‍ गन्‍ने से इथनॉल बनाया जाए, वो इथनॉल पेट्रोल में मि‍क्‍स कि‍या जाए। 10 प्रति‍शत इथनॉल बनाकर के पेट्रोल में मि‍क्‍स करने का नि‍र्णय कि‍या। देश को जो खाड़ी से तेल लाना पड़ता है, मेरे हि‍न्‍दुस्‍तान का गन्‍ना कि‍सान झाड़ी से तेल पैदा करेगा। खाड़ी के तेल के सामने, मेरा झाड़ी का तेल काम आएगा और वो पर्यावरण की दृष्‍टि‍ से उत्‍तम होगा, आर्थि‍क दृष्‍टि‍ से देश का भला करने वाला होगा और कि‍सान को गन्‍ना ज्‍यादा पैदा हो गया तो जो मुसीबत में फंसना पड़ता था, उससे वो बाहर आ जाएगा।

चीनी के लि‍ए export के लि‍ए योजनाएं बनाई, import कम करने के लि‍ए योजना बनाई, brown चीनी जो होती है उसके लि‍ए योजना बनाई। भारतीय जनता पार्टी की सरकारें जब भी आती है, कि‍सानों का कल्‍याण यह उनकी प्राथमि‍कता रहती है और उसी का परि‍णाम है कि‍ मध्‍य प्रदेश ने एक नया वि‍क्रम कर दि‍या। गुजरात जो रेगि‍स्‍तान है, वहां के कि‍सानों ने कमाल करके दि‍खाया।

भाइयो-बहनों, आज कृषि‍ क्षेत्र में अनेक नए प्रयास, नए प्रयोगों की आवश्‍यकता है, नए innovation होने चाहि‍ए। हमने एक ‘Start-up India, Stand-up India’ का अभि‍यान चलाया है, लेकि‍न यह ‘Start-up India, Stand-up India’ सि‍र्फ Information Technology के लि‍ए नहीं है। यह कोई औजार बनाने के लि‍ए ‘स्‍टार्ट-अप इंडि‍या, स्‍टैंड-अप इंडि‍या’ नहीं है। कृषि‍ क्षेत्र में भी ‘Start-up India, Stand-up India’ का काम हो सकता है। मैं नौजवानों से आग्रह करता हूं, एक बहुत बड़ा अवसर हमारे सामने है। हम कृषि‍ क्षेत्र में नए-नए आवि‍ष्‍कार करे, नए-नए साधनों को बनाए, नई-नई technology का innovation करे, कि‍सानों के लि‍ए करे, फसल के लि‍ए करे, पशुपालन के लि‍ए करे, मत्‍स्‍य उद्योग के लि‍ए करे, dairy farming के लि‍ए करे, Poultry farming के लि‍ए करे और ‘Start-up’ योजना का लाभ उठाए, यह हमारे कि‍सानों की नए ताकत बनेगी।

आज अगर हमारा कि‍सान Organic Farming में जाता है तो दुनि‍या में उसको एक नया मार्कि‍ट मि‍लेगा। हि‍न्‍दुस्‍तान का सि‍क्‍कि‍म state देश का पहला Organic State बना है और पूरा नॉर्थ-ईस्‍ट, नागालैंड हो, मि‍जोरम हो, मेघालय हो, यह सारा इलाका वो दुनि‍या का Organic Capital बनने की ताकत रखता है। इस काम पर हमने बल दि‍या है।

हमारी एक इच्‍छा है – प्रधानमंत्री कृषि‍ सिंचाई योजना। हि‍न्‍दुस्‍तान के कि‍सान को अगर पानी मि‍ल जाए तो मेरे कि‍सान में वो दम है, वो मि‍ट्टी में से सोना पैदा कर सकता है। और इसलि‍ए दि‍ल्‍ली में हमारी सरकार ने सर्वाधि‍क बजट कृषि‍ सिंचाई योजना पर लगाया है और उसमें जल संचय पर बल है, जल सींचन पर बल है, Micro irrigation पर बल है, per drop more crop, एक-एक बूंद से अधि‍कतम फसल पैदा करने का इरादा लेकर के हम आगे बढ़ रहे हैं और उसके लि‍ए मैं शि‍वराज जी का वि‍शेष अभि‍नंदन करता हूं। यह जो कृषि‍ क्रान्‍ति‍ मध्‍य प्रदेश में आई है उसका मूल कारण है, उन्‍होंने सिंचाई योजना पर बल दि‍या है, Irrigation पर बल दि‍या और कहां 12 लाख से 32 लाख पहुंचा दि‍या। मैं मध्‍य प्रदेश मुख्‍यमंत्री शि‍वराज जी और उनके नेतृत्‍व की टीम को बहुत-बहुत बधाई देता हूं कि‍ उन्‍होंने कि‍सानों की जरूरत को समझा। उन्‍होंने प्राथमि‍कता दी और यह परि‍णाम आया है। पूरे देश में इसी काम को आगे बढ़ाना है।

मैं आपसे आग्रह करता हूं हम technology का भी उपयोग करते हैं। आज सेटेलाइट के द्वारा आपके गांव में पानी कहां से कहां जा सकता है, उसका Contour plan आसानी से बन सकता है। गांव का पानी गांव में, यह मंत्र लेकर के हमें चलना चाहि‍ए। बारि‍श में जि‍तना भी पानी गि‍रे उसको रोकने का प्रबंध होना चाहि‍ए। अगर आपको ज्‍यादा खर्चा नहीं करना है, तो मैं आपको एक सुझाव देता हूं। मेरे कि‍सान भाई-बहन उसको करे, फर्टि‍लाइजर के जो खाली बैग होते हैं, सीमेंट के जो खाली बैग होते हैं, बोरे होते हैं, उसमें पत्‍थर और मि‍ट्टी भर दो और जहां से पानी जाता है वहां पर पानी को रोक लो। 25-50 ठेले लगा दो, पानी रुक जाएगा। 10 दि‍न-15 दि‍न में वो पानी जमीन में उतर जाएगा। जमीन का पानी का स्‍तर ऊपर आ जाएगा, आपकी कृषि‍ को बहुत फायदा होगा। पूरे मध्‍य प्रदेश में, पूरे हि‍न्‍दुस्‍तान में, हमारे सामान्‍य प्रयोगों के द्वारा हम पानी को बचाने का काम अब उठाए।

उसी प्रकार से, यह हम जो Flood Irrigation करते हैं, मैं कि‍सान भाइयों से आग्रह करता हूं Flood Irrigation की जरूरत नहीं है। यह हमारे दि‍माग में भर गया है कि‍ खेत अगर पानी से लबालब भरा हुआ है, तभी फसल पैदा होती है, ऐसा नहीं है। मैं आपको एक उदाहरण से समझाना चाहता हूं। अगर कि‍सी परि‍वार में कोई बच्‍चा, 5 साल-6 साल की उम्र हुई हो, लेकि‍न शरीर उसका एक या दो साल की उम्र जैसा दि‍खता है, वज़न बढ़ता नहीं है, चेहरे पर चेतना नहीं है। एकदम ढीला-ढाला है और मां को बड़ी इच्छा है कि‍ बेटा जरा हंसते-खेलने लगे, वज़न बढ़ने लगे, खून बढ़ने लगे और मां अगर यह सोचे कि‍ बाल्‍टी भर पि‍स्‍ता-बादाम वाला दूध तैयार करूंगी और बच्‍चे को केसर, पि‍स्‍ता, बादाम के दूध से दि‍न में चार-चार बार नहलाऊंगी, दूध की बाल्‍टी में उसको आधा दि‍न बैठाकर के रखूंगी, क्‍या वो बच्‍चे के शरीर में वज़न बढ़ेगा, खून बढ़ेगा, शरीर में बदलाव आएगा? नहीं आएगा। दूध हो, बादाम हो, पि‍स्‍ता हो, केसर हो, उसको नहलाया जाए, लेकि‍न बच्‍चे के शरीर में फर्क नहीं आएगा। लेकि‍न समझदार मां बच्‍चे को दि‍न में चम्‍मच से 10 चम्‍मच-15 चम्‍मच दूध पि‍लाती जाएगी तो शाम तक भले 200 ग्राम दूध ले ले, लेकि‍न वज़न बढ़ने लगेगा, शरीर बढ़ने लगेगा, खून बढ़ने लगेगा। दूध से नहलाने से बदन नहीं बदलता है, लेकि‍न दूध अगर दो-दो चम्‍मच पि‍ला दि‍या तो बदलाव आता है। यह फसल का भी वैसा ही स्‍वभाव है जैसा बालक का होता है। फसल को पानी में डुबोकर के रखोगे तो फसल ताकतवर बनेगी, यह सोचना गलत है। अगर बूंद-बूंद फसल को पानी पि‍लाओगे तो फसल तेजी से बढ़ेगी और इसलि‍ए एक-एक बूंद पानी से फसल कैसे बनाई जाए, उस पर ध्‍यान देना और इसलि‍ए per drop more crop, यह Irrigation पर हम बल दे रहे हैं।

मेरे भाइयो-बहनों, मैं 2014 में प्रधानमंत्री बना, मुख्‍यमंत्रि‍यों की मुझे जो सबसे ज्‍यादा चि‍ट्ठि‍यां आई, सबसे ज्‍यादा चि‍ट्ठि‍यां क्‍या आई कि‍ प्रधानमंत्री जी हमारे राज्‍य में यूरि‍या की कमी है, तत्‍काल हमें यूरि‍या भेजि‍ए। हमें यूरि‍या की आवश्‍यकता है। भाइयों-बहनो, 2015 में हि‍न्‍दुस्‍तान के एक भी मुख्‍यमंत्री की तरफ से मुझे यूरि‍या की मांग को लेकर के चि‍ट्ठी नहीं आई, हि‍न्‍दुस्‍तान के कि‍सी कोने से नहीं आई। पहले के आप अख़बार नि‍कालकर के देख लीजि‍ए कि‍सी न राज्‍य में, कि‍सी न कि‍सी जि‍ले में, यूरि‍या लेने के लि‍ए कि‍सानों की कतार के फोटो आते थे। कि‍सान यूरि‍या को ब्‍लैक मार्कि‍ट में खरीदता था और कुछ स्‍थानों पर तो यूरि‍या लेने के लि‍ए आते थे, झगड़ा हो जाता था और पुलि‍स को लाठी चार्ज करना पड़ता था। यह बहुत दूर की बात नहीं बताता हूं, 2014 के पहले तक यह होता रहता था। पहली बार मेरे भाइयो-बहनों, हि‍न्‍दुस्‍तान के कि‍सान को यूरि‍या के लि‍ए इंतजार नहीं करना पडा, मुख्‍यमंत्री को चि‍ट्ठी नहीं लि‍खनी पड़ी। पुलि‍स को डंडा नहीं चलाना पडा, कि‍सान को कतार में खड़ा नहीं रहना पडा, यह काम इस सरकार ने करके दि‍खाया है भाइयो-बहनों। और इतना ही नहीं देश आजाद होने के बाद सबसे ज्‍यादा यूरिया की पैदावार, देश आजाद होने के बाद सबसे ज्‍यादा यरिया खाद की पैदावार अगर कभी हुई है तो 2015 में हुई है भाइयों और बहनों! कालाबाजारी बन्‍द हो गयी, बेईमानी का कारोबार बन्‍द हो गया, किसान के हक की चीज किसान को पहुँचे इसके लिए प्रबंध किया गया और उसके कारण यूरिया किसानों को पहुँच गया।

भाइयो-बहनों! हम यहीं पर अटके नहीं हैं हमने आते ही यूरिया का उत्‍पादन बढ़ाने के लिए यूरिया के जो कारखाने बंद पड़े थे उसको चालू करने को फैसला किया है जहॉं नए कारखाने लगाने की आवश्‍यकता है उसको लगाने के लिए तैयार है सरकार लेकिन साथ-साथ हमने एक और काम किया है जिस काम के तहत यूरिया का नीम कोटिंग कर रहे हैं, नीम का जो पेड़ होता है उसमें से जो फल में से तेल निकलता है वो यूरिया पर चढ़ाया जाता है नीम का तेल उसके कारण यूरिया की ताकत बढ़ जाती है। किसान अगर पहले दस किलो उपयोग यूरिया लेता था तो नीम कोटिंग वाला 6 किलो 7 किलो से भी काम चल जाता है किसान का 3 - 4 किलो यूरिया का पैसा बच जाता है। दूसरा नीम कोटिंग वाला यूरिया डालने से फसल को अतिरिक्‍त फायदा होता है, जमीन को अतिरिक्‍त फायदा होता है, जमीन को जो नुकसान हुआ है उसमें मदद करने में नीम कोटिंग यूरिया काम आता है और तीसरा सबसे बड़ा फायदा, पहले जो यूरिया आता था वो किसानों के खेत में तो कम जाता था केमिकल के कारखानों में चोरी होकर के चला जाता था subsidy वाला यूरिया केमिकल कंपनियों को काम आता था, अब नीम कोटिंग होने के बाद एक ग्राम भी यूरिया खेती के सिवाय कहीं पर भी काम नहीं हा सकता सिर्फ किसानों को काम आ सकता है, इतना बड़ा काम इस सरकार ने कर दिया।

भाइयों और बहनों! लेकिन मेरी किसानों से आग्रह है कि आप सिर्फ यूरिया के fertilizer से मत चलिए सरकार ने एक बहुत बड़ी योजना बनाइ है। ये जो शहरों का कूड़ा-कचरा है उसमें से fertilizer बनाना और वो भी किसानों को पहॅुंचाना और वो भी सस्‍ते में मिले इसके लिए कुछ concession देना ताकि मेरे किसान की जमीन बरबाद न हो जाए।

भाइयो-बहनों, हमने soil health card निकाला है सारे देश के किसानों के पास soil health card पहॅुचाने का सपना है। अगर आप अपना Blood test करवाएं और डॉक्‍टर कहे कि आप को diabetes है, report लाएं लेकिन मिठाई खाना बन्‍द न करें, तो उस report का कोई उपयोग है क्‍या, कोई उपयोग नहीं है अगर आप Blood test करवाते हैं Urine Test करवाते हैं और report आता है तो उस report के अनुसार शरीर में खान-पान की आदत डालते हैं तो बीमारी control रहती है। जमीन का भी वैसा ही है। soil health card हमारे जमीन की तबीयत कैसी है कहीं हमारी ये भारत माता ये बीमार तो नहीं है ये जमीन, इसमें कोई नई बीमारी तो घुस नहीं गयी है ये soil health card से पता चलता है। मेरे खेत की जमीन किस पैदावार के लायक नहीं है, मेरे पिता जी जब जिन्‍दा थे तब हो सकता है वो गेहूँ के लिए अच्‍छी रही हो,गी लेकिन इतने सालों में बरबाद होते होते अब वो गेहूँ के लायक नहीं रही है, वो दलहन के लायक हो गयी है, वो तिलहन के लायक हो गयी है तो मुझे गेहॅूं से वहॉं shift करना होगा ये सलाह soil health card से मिलती है और इसलिए soil health card इसका भरपूर उपयोग मेरे किसान भाई, बहन करें। मेरे किसान कौन-सी फसल के लिए मेरी जमीन उपयुक्‍त है, इसके आधार पर अगर पैदावार करेंगे तो कभी किसान को रोने की नौबत नहीं आएगी। ये फसल बीमा के साथ-साथ soil health card ये आप को बहुत बड़ी सुरक्षा देता है।

और इसलिए मेरे भाइयो-बहनों मैं आप से आग्रह करने आया हूँ कि आप इस बात को आगर कर करिए। मुझे खुशी हुई स्‍वच्‍छ भारत का जो अभियान चला है, उसमें यहीं नजदीक में जहॉं से हमारे मुख्‍यमंत्री चुनाव जीतते हैं वो Budhni Open-defecation free हो गया है और इसके लिए मैं बधाई देता हॅू और जिन्‍होंने इस काम को किया है उन सभी गॉंव वालों को सभी अधिकारियों को खुले में शौच नहीं जाने का जो निर्णय किया है इसके लिए मैं अभिनंन्‍दन देता हॅूं। इंदौर के इलाके में भी ये काम हुआ है ऐसा मुझे हमारे स्‍पीकर महोदया सुमित्रा जी बता रही थीं मैं उनको और इंदौर के इलाके के लोगों को भी अभिनंन्‍दन देता हॅूं कि खुले में शौच जाना बन्‍द हो रहा है। मैं मध्‍य प्रदेश के सभी मेरे गॉंव के लोग यहॉं आए हैं हम संकल्‍प करें कि हमारे गॉव में हमारी बहन, बेटियों को खुले में शौच नहीं जाना पड़ेगा। हम शौचालय बनाएंगे भी शौचालय का उपयोग भी करेंगे और ये Open-defecation free ये काम पूरा करने में मध्‍य प्रदेश के गॉंव उन्‍होंने बीड़ा उठाया है, जल्‍द से उसको पूरा करें ये मेरी अपेक्षा है।

भाइयो-बहनों क्‍या हम एक संकल्‍प कर सकते हैं क्‍या ये संकल्‍प प्रधानमंत्री भी करे, ये संकल्‍प मुख्‍यमंत्री भी करे, ये संकल्‍प कृषि मंत्री भी करे, ये संकल्‍प देश के किसान भी करें, ये संकल्‍प देश के सवा सौ करोड़ नागरिक भी करें। 2022 भारत की आजादी के 75 साल होंगे। हमारे देश की आजादी के 75 साल होंगे, क्‍या हम सब मिल करके एक संकल्‍प कर सकते हैं कि 2022 में जब भारत की आजादी के 75 साल होंगे, 2022 में जब हम पहुँचेंगे, हमारे किसानों की जो आय है, हमारे किसानों की जो Income है वो 2022 तक हम दो-गुना करके छोड़ेंगे, दो-गुना करके छोड़ेंगे ये संकल्‍प कर सकते हैं। मेरे किसान भाई संकल्‍प कीजिए, राज्‍य सरकारें संकल्‍प करें, सारे मुख्‍यमंत्री, कृषि मंत्री संकल्‍प करें एक बीड़ा उठाएं कि 2022 जब आजादी के 75 साल होंगे मेरे देश के किसान की आय हम दो-गुना करके रहेंगे उसके लिए जो भी करना पड़ेगा हम करेंगे, ये आज का संदेश हम ले करके जाएं। ये संकल्‍प ले करके जाएं।

मैं फिर एक बार आप सबका हृदय से बहुत-बहुत अभिनंन्‍दन करता हॅूं और मैं आशा करता हूँ कि आपने चार बार अवॉर्ड जीता है आने वाले वर्षों में भी ये अवॉर्ड किसी के हाथों जाने मत दीजिए। कुछ कमाल करके दिखाइए अभी थोड़े दिन पहले अबूधाबी से, UAE से जो हम यूएई अबूधाबी जानते हैं वहॉं के Crown Prince यहॉं आए थे। उनसे मैं बातें कर रहा था ये किसानों को समझने जैसी बात है Crown Prince यहॉं आए थे तो हम दोनों बैठे थे बातें कर रहे थे, उन्‍होंने मेरे सामने एक चिंता जताई उन्‍होंने कहा मोदी जी हमारे यूएई के पास बहुत बड़ी मात्रा में तेल के भंडार हैं, पैसे भी अपरंपार है लेकिन न हमारे नसीब में बारिश है और जमीन भी रेगीस्‍तान के सिवाय कुछ नहीं है। हमारी जनसंख्‍या बढ़ रही है दस पंद्रह साल के बाद हमें हमारे लोगों का पेट भरने के लिए अनाज भी बाहर से लाना पड़ेगा, सब्‍जी भी बाहर से लानी पड़ेगी, दलहन, तिलहन भी बाहर से लाने पड़ेंगे क्‍या भारत ने सोचा है कि Gulf Country की मांग को कैसे पूरा करने की तैयारी कर रहे हो, मैं हैरान था! UAE के Crown Prince दस साल पंद्रह साल के बाद वहॉं की जनता जनार्दन की जो आवश्‍यकताएं हैं उसकी पूर्ति के लिए भारत आज से तैयारी करे भारत अपना तो पेट भरे लेकिन भारत UAE का भी पेट भरे ये प्रस्‍ताव उन्‍होंने मेरे सामने रखा।

मेरे कि‍सान भाइयो-बहनों, दुनि‍या आज हमसे अपेक्षा कर रही है। सारी दुनि‍या को भारत काम आ सकता है। हम अगर कोशि‍श करे, हम हमारे उत्‍पादन को बढ़ाए, हम दुनि‍या के बाजार को कब्‍जा कर सकते हैं। उस सपने को लेकर के आगे चले, इसी एक अपेक्षा के साथ मैं आप सबका हृदय से अभि‍नंदन करता हूं और ‘जय जवान, जय कि‍सान’, जि‍स मंत्र ने हि‍न्‍दुस्‍तान के कि‍सानों के भारत के अन्‍न के भंडार भर दि‍ए थे, वो मेरा कि‍सान हि‍न्‍दुस्‍तान को आर्थि‍क ऊंचाइयों पर ले जाने का भी एक बहुत बड़ी ताकत बनकर उभरेगा। बहुत-बहुत धन्‍यवाद, बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

 

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आज समय की मांग है कि हम “वोकल फॉर लोकल” को एक जन आंदोलन बनाएं: वडोदरा में पीएम मोदी
May 11, 2026
बदलाव व्यापक हो, और परिणाम स्थायी हों, इसके लिए समाज और सरकार को मिलकर काम करना आवश्यक होता है: प्रधानमंत्री
आज शिक्षा के क्षेत्र में जमीनी हकीकतों के आधार पर काम हो रहा है, राष्ट्रीय शिक्षा नीति इसका बहुत बड़ा उदाहरण है: प्रधानमंत्री
छोटे शहरों से बड़े-बड़े स्टार्टअप्स सामने आ रहे हैं, स्टार्टअप्स में महिलाओं की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है, पहले जिन सेक्टर्स को रिस्की माना जाता था, वो अब युवाओं की पहली पसंद बन रहे हैं: प्रधानमंत्री
अगर कोरोना महामारी इस सदी का सबसे बड़ा संकट थी, तो पश्चिम एशिया में युद्ध से बनी परिस्थितियां इस दशक के बड़े संकटों में से एक है: प्रधानमंत्री
जिस तरह हमने मिलकर महामारी का सामना किया था, उसी तरह हम पश्चिम एशिया संकट पर भी निश्चित रूप से विजय प्राप्त करेंगे: पीएम मोदी
सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है कि पश्चिम एशिया युद्ध संकट का हमारे नागरिकों पर प्रभाव न्यूनतम रहे: प्रधानमंत्री
पहले, जब भी देश किसी बड़े संकट का सामना करता था, प्रत्येक नागरिक सरकार के आह्वान पर अपनी जिम्मेदारियों को निभाने के लिए आगे आता था: प्रधानमंत्री
आज एक बार फिर जरूरत है कि हम सब मिलकर अपना दायित्व निभाएं, देश के संसाधनों पर पड़ने वाले बोझ को कम करें: प्रधानमंत्री
हमें आयातित उत्पादों का उपयोग कम करना चाहिए और विदेशी मुद्रा खर्च को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों से बचना चाहिए: प्रधानमंत्री
आज समय की मांग है कि हम “वोकल फॉर लोकल” को एक जन आंदोलन बनाएं: प्रधानमंत्री
हमें स्थानीय उत्पादों को अपनाना चाहिए और अपने गांवों, शहरों और राष्ट्र के उद्यमियों को सशक्त बनाना चाहिए: प्रधानमंत्री

भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

गुजरात के लोकप्रिय मुख्यमंत्री श्रीमान भूपेंद्र भाई पटेल, उप मुख्यमंत्री हर्ष सांघवी जी, केंद्रीय मंत्री और संस्थापक ट्रस्टी मनसुख भाई मांडविया, सरदार धाम के अध्यक्ष गागजी भाई सुतारिया जी, दुष्यंत भाई पटेल, पंकज भाई पटेल, राज्य भाजपा अध्यक्ष भाई जगदीश विश्वकर्मा, मंच पर उपस्थित गजुरात सरकार के सभी मंत्री, सभी दाता श्री, ट्रस्टी श्री, अन्य महानुभाव और गुजरात के कोने-कोने से आए हुए मेरे प्यारे भाईयों और बहनों।

आज का ये दिन किसी पुण्य पर्व से कम नहीं है। यहां आने से पहले मैं सोमनाथ मंदिर में था। सोमनाथ मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के 75 वर्ष पूर्ण हुए हैं। सोमनाथ मंदिर की पुनर्स्थापना, ये सपना सरदार पटेल के संकल्प से ही पूरा हुआ था। इस अवसर पर, प्रभास पाटन में सोमनाथ अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है। और उसी दिन, यहाँ वडोदरा में सरदार धाम से जुड़े एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स का लोकार्पण और शिलान्यास भी हो रहा है। डॉ. दुष्यंत और दक्षा पटेल कॉम्पलेक्स का लोकार्पण, शिक्षण सहाय योजना का शुभारंभ, नई परियोजनाओं का भूमिपूजन, ये सभी कार्य, भविष्य में राष्ट्र निर्माण के प्रभावी प्रकल्प साबित होंगे। एक तरह से, ये संस्थान युवाओं के लिए भविष्य के करियर के launching pad का काम करेंगे। मैं आप सभी को, समाज के सभी लोगों को इस पुण्य कार्य के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूँ।

साथियों,

आज आपके बीच आया हूं, तो एक औऱ बात की खुशी है। बंगाल, असम और पुडुचेरी के नतीजों ने पूरे देश में ही उत्साह का माहौल बना दिया है। और उसके साथ-साथ आप सबने भी मिलकर एक इतिहास बनाया है, गुजरात निकाय और पंचायत चुनावों के परिणाम भी बहुत शानदार रहे, और इसकी भी चर्चा पूरे देश में हो रही है।

साथियों,

गुजरात के लोगों ने हमेशा राजनीतिक स्थिरता को महत्व दिया है। ये यहां के लोगों की राजनीतिक दूरदर्शिता है, वो जानते हैं कि राजनीतिक स्थिरता का माहात्म्य क्या होता है, और जहां राजनीतिक स्थिरता होती है, वहाँ अर्थव्यवस्था की गति और तेज हो जाती है। गुजरात ने ये बात बहुत पहले समझ ली थी। उसके परिणाम आज हमें गुजरात की ग्रोथ में भी दिख रहे हैं, और, एक के बाद एक चुनावी नतीजों में भी दिख रहे हैं।

साथियों,

आप सभी के बीच आना, आपके कार्यक्रमों का हिस्सा बनना, मेरे लिए हमेशा ही बहुत सुखद होता है और लगता है घर में आया हूं। क्योंकि आपके बीच आकर समाज की शक्ति का ऐहसास होता है। हम सभी जानते हैं कि जब भी कहीं पर वास्तविक बदलाव होता है, वो समाज की सामूहिक ताकत से ही होता है। खासकर, जिन-जिन समाजों ने शिक्षा को प्राथमिकता दी है, शिक्षा में समान भागीदारी को अपना लक्ष्य बनाया है, वो समाज हमेशा आगे बढ़े हैं, उन्होंने नई ऊंचाइयों को छुआ है।

इसीलिए भाइयों बहनों,

सरदारधाम के हर प्रयास में, जब भी मुझे मौका मिलता है, मैं हमेशा आपके साथ खड़े होने का प्रयास करता हूँ। अभी गगजी भाई बड़े विस्तार से बता रहे थे, साल 2021 में, मैं सरदारधाम अहमदाबाद के कार्यक्रम में आया था। तब गर्ल्स हॉस्टल का भूमिपूजन हुआ था। पिछले वर्ष उसका लोकार्पण भी हो गया। आज वहां हजारों बेटियां शिक्षा प्राप्त कर रही हैं, अपने सपनों को नई दिशा दे रही हैं। सूरत, राजकोट, भुज, मेहसाणा और दिल्ली, सरदारधाम के ऐसे कई संस्थान युवाओं का भविष्य गढ़ने में जुटे हैं। आज भी अमदाबाद के निकोल में 1 हजार बेटियों के लिए नए छात्रावास का भूमिपूजन हुआ है।

साथियों,

बदलाव व्यापक हो, और परिणाम स्थायी हों, इसके लिए समाज और सरकार को मिलकर काम करना आवश्यक होता है। इसीलिए, आज शिक्षा के क्षेत्र में जमीनी हकीकतों के आधार पर काम हो रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति इसका बहुत बड़ा उदाहरण है। आज युवाओं की राह से रोड़े हटाए जा रहे हैं। भाषा के आधार पर होने वाला भेदभाव खत्म हो रहा है। आज ज़ोर केवल किताबों और डिग्रीयों पर ही नहीं है। स्किल डवलपमेंट और इनोवेशन को पढ़ाई का हिस्सा बनाया गया है। रिसर्च में रुचि रखने वाले युवाओं को उसके लिए माहौल मिल रहा है। हमारे युवा डिग्री पूरी करके अनुभव न होने के कारण भटकें ना, इसके लिए अप्रेंटिसशिप के मौके उन्हें दिये जा रहे हैं। आप सोच सकते हैं, आने वाले समय में देश को इतना बड़ा skilled वर्कफोर्स मिलेगा। इसका सबसे बड़ा लाभ देश के manufacturing सेक्टर को होगा।

साथियों,

हमारे गुजरात के युवाओं में उद्यम की स्वाभाविक शक्ति होती है। आज Startup India मिशन इन युवाओं के सपने साकार कर रहा है। छोटे शहरों के युवा भी उद्यमी बन रहे हैं। छोटे शहरों से बड़े-बड़े स्टार्टअप्स सामने आ रहे हैं। स्टार्टअप्स में महिलाओं की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है। पहले जिन सेक्टर्स को रिस्की माना जाता था, वो अब युवाओं की पहली पसंद बन रहे हैं। पिछले 10-12 वर्षों में स्पोर्ट्स से लेकर स्पेस टेक्नालजी तक देश की कामयाबी इसका सबसे बड़ा सबूत है। और इसका बहुत बड़ा लाभ गुजरात के हमारे बेटे-बेटियों को भी हो रहा है।

साथियों,

समाज में प्रगति का सबसे बड़ा आधार होता है- उसकी आधी आबादी की भागीदारी! गुजरात ने इसे 2 दशक पहले ही समझ भी लिया था, और, इस दिशा में मजबूती से कदम भी उठाए थे।

साथियों,

आज गुजरात मॉडल की वही सफलता देश में दोहराई जा रही है। देश में करोड़ों महिलाओं के बैंक खाते खोले गए। शौचालय, नल से जल, गैस कनेक्शन की सुविधाएं दी गईं। आज मुद्रा योजना के जरिए महिलाएं आत्मनिर्भर भी बन रही हैं। परिवार में महिलाएं स्वस्थ रहें, इसके लिए आयुष्मान भारत और मातृ वंदना जैसी योजनाएं कवच बनकर काम कर रहीं हैं।

साथियों,

पहले कितने ही क्षेत्रों में बेटियों के लिए दरवाजे ही बंद होते थे। आज उन्हीं सेक्टर्स में बेटियां लीडरशिप रोल में सामने आ रही हैं। आज National Defence Academy में महिला कैडेट्स, training ले रही हैं। हमारी बेटियां फाइटर पायलट बन रही हैं। राजनीति में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास हो रहा है। नारीशक्ति वंदन संशोधन के जरिए हमने इसके लिए एक और प्रयास किया था। राजनीतिक कारणों से वो पास नहीं हो पाया, लेकिन मैं आपको आश्वस्त करूंगा, देशभर की महिलाओं को आश्वस्त करूंगा, हम इस दिशा में लगातार प्रयास करते रहेंगे।

साथियों,

महिलाओं के लिए सभी क्षेत्रों में संभावनाओं के द्वार खुलें, ये केवल सरकार ही नहीं, बल्कि समाज की भी ज़िम्मेदारी है। और मुझे खुशी है, सरदारधाम ये दायित्व पूरी निष्ठा से उठा रहा है। मैं इन प्रयासों के लिए विशेष रूप से आप सबका बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं, आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूँ।

साथियों,

गुजरात की एक बहुत बड़ी विशेषता रही है। यहां समाज हमेशा समय की दिशा को जल्दी पहचानता है। परिवर्तन को अवसर में बदलना, नई संभावनाओं को अपनाना, और भविष्य की तैयारी समय रहते शुरू करना, ये गुजरात की कार्य संस्कृति का हिस्सा रहा है। आज जब दुनिया future technologies की ओर बढ़ रही है, तब गुजरात भी नई गति के साथ आगे बढ़ रहा है। सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग, एयरोस्पेस, एडवांस्ड इंजीनियरिंग, ग्रीन एनर्जी, फाइनेंशियल सर्विसेज, हर क्षेत्र में गुजरात अपनी नई पहचान बना रहा है। साणंद में made-in-India सेमीकंडक्टर्स बन रहे हैं। केन्स सेमीकंडक्टर प्लांट में भी प्रोडक्शन शुरू हो चुका है। धोलेरा और सूरत में भी नए सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट आगे बढ़ रहे हैं।

साथियों,

हमारा भारत, हमारा गुजरात ग्लोबल सप्लाइ चेन का बड़ा केंद्र बने, हम इस दिशा में लगातार काम कर रहे हैं। आने वाले समय में वडोदरा की भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका होगी। आज यहां बने metro coaches दूसरे देशों तक एक्सपोर्ट हो रहे हैं। सावली में आधुनिक रेल सिस्टम का, कोचेस का निर्माण हो रहा है। Engineering, heavy machinery, Chemicals और Pharma, Power equipment और MSMEs, ऐसे कई सेक्टर्स में आज वडोदरा manufacturing का मजबूत केंद्र बन चुका है। यहां की गतिशक्ति यूनिवर्सिटी ट्रांसपोर्ट और logistics की फील्ड में professionals तैयार कर रही है। अब एयरोस्पेस सेक्टर में भी वडोदरा नई पहचान बनाने जा रहा है। यहां एयरक्राफ्ट manufacturing project तेजी से आगे बढ़ रहा है।

साथियों,

गुजरात और देश में विकास के प्रयासों के बीच, एक और विषय संवेदनशील होता जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में दुनिया लगातार अस्थिर परिस्थितियों से गुजर रही है। पहले कोरोना का संकट, फिर वैश्विक आर्थिक चुनौतियां, और अब पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव, इन सारी परिस्थितियों का असर लगातार पूरी दुनिया पर पड़ रहा है, और भारत भी इससे अछूता नहीं है। अगर कोरोना महामारी इस सदी का सबसे बड़ा संकट थी, तो पश्चिम एशिया में युद्ध से बनी परिस्थितियां, इस दशक के बड़े संकटों में से एक है। जब हमने मिलकर कोरोना का मुकाबला कर लिया तो इस संकट से भी अवश्य पार पा जाएंगे।

सरकार भी लगातार ये प्रयास कर रही है, कि देश के लोगों, देश के सामान्य नागरिक पर इन सारी विपरीत परिस्थितियों का कम से कम असर हो। लेकिन ऐसे समय में, देश को जनभागीदारी की शक्ति की बहुत बड़ी आवश्यकता है। हमें भारत के नागरिक के तौर पर अपने कर्तव्य को प्राथमिकता देनी होगी। इससे पहले के दशकों में भी जब-जब देश युद्ध या किसी और अन्य बड़े संकट से गुजरा है, सरकार की अपील और उस अपील पर हर नागरिक ने ऐसे ही अपना दायित्व निभाया है। आज भी जरूरत है कि, हम सब मिलकर अपना दायित्व निभाएं, देश के संसाधनों पर पड़ने वाले बोझ को कम करें। आप भी जानते हैं कि भारत कितने ही उत्पादों को मंगाने के लिए लाखों करोड़ रुपए की विदेशी मुद्रा खर्च करता है। इसी समय विदेश से आने वाले उत्पादों की कीमतें भी आसमान छू रही हैं और सप्लाई चेन भी पूरी तरह तहस नहस हो चुकी है। और इसलिए देश पर ये दोहरा संकट है। जैसे बूंद-बूंद से घड़ा भरता है, वैसे ही हमें हर छोटे-बड़े प्रयास से ऐसे उत्पादों का उपयोग कम करना है जो विदेश से आते हैं, और ऐसे व्यक्तिगत कामों से भी बचना है जिसमें विदेशी मुद्रा खर्च होती हो।

साथियों,

भारत के इंपोर्ट का बहुत बड़ा हिस्सा, क्रूड ऑयल है। और दुर्भाग्य से, जिस क्षेत्र से दुनिया के बड़े हिस्से को तेल मिलता है, आज वही क्षेत्र संघर्ष और युद्ध की स्थिति में उलझा हुआ है। और इसलिए, जब तक हालात सामान्य नहीं होते, हम सबको मिलकर छोटे-छोटे संकल्प लेने होंगे। मैंने कल कर्नाटका और तेलंगाना में भी इस बारे में चर्चा की है, मैं आज गुजरात में भी अपने आग्रहों पर फिर जोर दे रहा हूं। और आप पर तो मेरा ज्यादा हक है, इसलिए जरा हक से कहने वाला हूं, मेरी देश के हर नागरिक से अपील है, जहां संभव हो, पेट्रोल-डीजल का उपयोग कम करें। मेट्रो का उपयोग करें, इलेक्ट्रिक बस और पब्लिक ट्रांसपोर्ट का अधिक इस्तेमाल करें। कार-पूलिंग को बढ़ावा दें। जिनके पास कार है, वे एक गाड़ी में ज्यादा लोगों को साथ लेकर चलें। जिनके पास ईवी है, वे भी दूसरों की मदद के लिए आगे आएं।

साथियों,

डिजिटल टेक्नोलॉजी ने अब इतना कुछ आसान बना दिया है। टेक्नोलॉजी की मदद भी हमारे लिए बहुत फायदेमंद होगी। ये जरूरी है कि सरकारी और प्राइवेट, दोनों ही दफतरों में, वर्चुअल मीटिंग्स और वर्क फ्रॉम होम को प्राथमिकता दी जाए। मैं कुछ स्कूलों से भी आग्रह करूंगा, कि कुछ समय के लिए ऑनलाइन क्लासेज की व्यवस्था पर काम करें।

साथियों,

सिर्फ ईंधन ही नहीं, खाने के तेल पर भी देश की बड़ी विदेशी मुद्रा खर्च होती है। अगर हम थोड़ा संयम बरतें, तेल की खपत कम करें, खाने के तेल की, तो इससे देश और हमारी सेहत, दोनों को लाभ होगा। और सूरत वालों को मैं खास कहता हूं। इसी तरह मैं आज समाज के सभी भाई बहनों से, मैं आपके परिवार का सदस्य हूं, इसलिए आग्रह से कहता हूं, और इसमें तो आगे आकर आपको मेरी मदद करनी पड़ेगी। सोने के आयात पर भी देश का बहुत बड़ा पैसा विदेश जाता है। मैं आप सबसे, देशवासियों से आग्रह करूंगा, कि जब तक हालात सामान्य न हों, हम सोने की खरीद को टालें, गोल्ड की जरूरत नहीं है।

साथियों,

आज समय की मांग है, कि हम “वोकल फॉर लोकल” को एक जन आंदोलन बनाएं। विदेशी सामान की जगह, लोकल उत्पादों को अपनाएं। अपने गांव, अपने शहर, अपने देश के उद्यमियों को हम ताकत दें। यहां लोग बैठे हैं, बहुत अच्छी चीजें बनाते हैं, श्रेष्ठ चीजों का उत्पादन करते हैं।

साथियों,

हमारे में से ज्यादातर, खेती के कारोबार की दुनिया से पैदा होकर के यहां आए हैं। खेती में, स्वदेशी खाद को बढ़ावा मिले, नैचुरल फार्मिंग को बढ़ावा मिले। डीजल पंप की जगह सोलर पंप्स का उपयोग बढ़े, और हम तो किसान के बेठे हैं, किसान की बेटियां हैं, हमें अपना खेत सबसे पहले बचाना है, हमें अपनी धरती मां को बचाना है, हमें केमिकल फर्टिलाइजरों से अपनी धरती मां को मारना नहीं चाहिए। हमारे खेत को बचाना है, हमारी धरती मां को बचाना है। और इसलिए मैं आप सबसे आग्रह करूंगा, कि आप अपने गांव में हर किसान भाई-बहन को केमिकल फर्टिलाइजर से मुक्ति का रास्ता बताइये, नैचुरल फार्मिंग की तरफ ले जाइये।

साथियों,

एक और भी अहम विषय, और वो भी आप में से बहुतों को लागू होता है, बुरा मत मानना। फैशन हो गई है, जैसे ही वेकेशन हुआ, बच्चों के हाथ में विदेश की टिकट पकड़ा देते हैं। विदेश में जाकर वेकेशन करते है। गर्मी की छुट्टियां आ रही हैं, आजकल विदेश घूमने, वहां पर डेस्टिनेशन वेडिंग, ये मैं यहां से बहुत सारे लोग हैं, मुझे निमंत्रण नहीं भेजते हैं, पहले भेजते थे, क्योंकि विदेश में ही शादी करते थे, अब बंद कर रहे हैं। ये विदेश में वेडिंग इनका फैशन खूब बढ़ रहा है। लेकिन इस पर भी बहुत विदेशी मुद्रा खर्च होती है।

साथियों,

आप सोचिये, क्या भारत में ऐसी जगह नहीं है? जो हम अपनी वेकेशन वहां मनाए, हमारे बच्चों को हमारा इतिहास पढ़ाएं। हम अपने स्थानों पर गर्व करें। और जरूरी है कि भारत में ही अपनी वेकेशन मनाएं, और वेडिंग के लिए भी, मैं नहीं मानता हूं कि भारत से अधिक कोई अच्छी पवित्र जगह हो सकती है। जब यहां वेडिंग करते हैं ना, तो हमारे पूर्वजों की मिट्टी भी हमें आशीर्वाद देती है। और वेडिेंग के लिए भी, भारत के ही अनेक स्थान हैं, उसको हम चुनें। हमारे गुजरात में तो वैसे भी एक से बढ़कर एक स्थान हैं। और मैं तो आप सब पाटीदार भाईयों को तो कहूंगा, आपको तो अब शादी स्टैच्यू ऑफ यूनिटी वहीं पर जाकर करनी चाहिए। आपकी हर शादी में सरदार साहब खुद आाशीर्वाद देने के लिए मौजूद रहेंगे। और वहीं पर आपने जैसे हरिद्वार, ऋषिकेश में आप शांति के लिए जगह बना रहे हैं ना, वैसे ही आप स्टैच्यू ऑफ यूनिटी में शादी के लिए जगह बना दीजिए। मैं पंकज भाई को कहूंगा, उसके लिए भी कुछ करें। जैसे हाल के वर्षो में सरदार साहब की स्टैच्यू ऑफ यूनिटी, हमारा एकता नगर पर्यटन का इतना बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। क्या हम ये तय कर सकते हैं, हम ज्यादा से ज्यादा लोगों को स्टेचू ऑफ पर यूनिटी लेकर के जाएं। विदेशें में हमारे बहुत लोग रहते हैं, मैं उनको कहता हूं, कि आपका दायित्व है कम से कम विदेशी परिवारों को, भारत देखने के लिए लेकर के आइये आप। देश विदेश में हमारे संपर्क का कोई भी परिवार, जो स्टैच्यू ऑफ यूनिटी नहीं गया है ना, उसको वहां ले जाने के लिए प्रेरित करें। हम उसे कम से कम एक ट्रिप के लिए मोटिवेट करें। डेस्टिनेशन वेडिंग्स के लिए भी एकता नगर एक बहुत शानदार विकल्प हो सकता है। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी में इतनी शानदार व्यवस्थाएं हैं, और गर्व है, दुनिया का सबसे ऊंचा स्टैच्यू, वो भी सरदार वल्लभ भाई पटेल का। इस देश का कोई नागरिक ऐसा नहीं हो सकता है, कि जिसको इसके लिए गर्व न हो दोस्तों। और मैं आपसे आग्रह करता हूं, आप सभी इसका फायदा उठाइये, इसका लाभ उठाइए।

साथियों,

ये मैंने छोटे-छोटे प्रयास आपको, कोई मुश्किल काम नहीं बताए आपको। लेकिन आप मानकर चलिए, ये प्रयास छोटे भले लग सकते हों, लेकिन छोटे प्रयास भी, जब 140 करोड़ लोग, एक साथ संकल्प लेते हैं, 140 करोड़ लोग एक कदम आगे बढ़ते हैं इस दिशा में, 140 करोड़ कदम देश आगे बढ़ता है। तो वही छोटे प्रयास, राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत बन जाते हैं। और इसलिए फिर एक बार, हमें एकजुट होना होगा, ताकि ये संकट, किसी भी तरह हमारी प्रगति को, हमारे विकास को प्रभावित ना करे। मुझे विश्वास है, हम सब साथ मिलकर इन संकल्पों को पूरा करेंगे, और देश को मजबूती देंगे।

और दूसरी बात मुझे गजजी भाई से करनी है, आपने मुझे सरदार गौरव रत्न से सन्मानित किया। जिस पुरस्कार के साथ सरदार साहब का नाम जुड़ा हो न, तब जिम्मेदारी बहुत बढ़ जाती है। यानी एक प्रकार से गगजी भाई ने बहुत चतुराई से मुझे बाँध लिया है, कि आगे पीछे मत होना। और शायद मेरे नसीब में लिखा हुआ है, कि सरदार साहब के जो भी सपने थे, उन्होंने जो भी काम शुरु किए थे, वे सब पूरे करने का काम मेरे ही नसीब में आया है। और आज जब आपने यह सम्मान, यह पुरस्कार एवॉर्ड दिया है तो, मैं आपको विश्वास दिलाता हूं, कि सरदार साहब के सपने पूरे करने में आप सभी के आशीर्वाद से मुझे जो भी शक्ति मिली है, संस्कार मिले हैं, गुजरात की मिट्टी ने मुझे जो सिखाया है, उसके भरोसे पर मैं कहता हूं, कि वो सपने पूरे करने के लिए परिश्रम में मैं पीछे नहीं हटूंगा। और मेरे स्वभाव को गुजरात भलीभांति जानता है, कि पीछे हटना मुझे आता नहीं है। लेकिन आपने यह सम्मान किया है, यह मेरे लिए बहुत ही बड़ी बात है। एक बार मैंने एक किस्सा पढा था, कि जनरल करिअप्पा, उनके गाँव में उनके सम्मान का कार्यक्रम होने वाला था। वह अत्यंत आनंदित थे, तो लोगो ने पूछा तो उन्होंने कहाँ, कि मैं दुनियाभर में जाता हूं, पूरी दुनिया के सारे सैन्य के रीत-रिवाज के साथ मुझे सब सैल्यूट करते हैं, बहुत मान-सम्मान मिलता है। दुनिया में जो मिलता है वो मिले, पर जब घर में मिलता है न, तब उसका आनंद अलग होता है।

भारत के प्रधानमंत्री का दुनिया में सम्मान होता है, कारण भारत सामर्थ्यवान हो रहा है, और आज जब घर में, घर के बेटे को, घर के लोग जब आशीर्वाद देते हैं, तो काम करने की शक्ति बहुत बढ़ जाती है। मेरे लिए, मेरे परिवारजनो ने, आप सभी ने इस सरदार रत्न के रूप में जो आशीर्वाद दिये हैं, उसके बदले मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूं। और इस ऋण का स्वीकार करता हूं। फिर एक बार आप सभी को जो संकल्प लेकर आप चले हैं, जो सपने लेकर आप चले हैं, उसके लिए ईश्वर आपको बहुत शक्ति दे। सरदार साहब के आशीर्वाद निरंतर आपके उपर बने रहें, और पंकज भाई जैसे साथी आपको मिलते रहें। यहाँ हम तीन ऐसे लोग बैठे हैं कि जिनका विशेष नाता है, एक पंकज भाई, दूसरे नरहरि अमीन। हम सभी नवनिर्माण की औलादें है, तो मुझे खुशी हुई, कि आज पंकज भाई ने भी बडी जिम्मेदारी ली है। आप सभी का बहुत बहुत आभार।जय सरदार, जय सरदार, धन्यवाद। धन्यवाद।