PM Modi emphasizes the need for stability and development in the upcoming elections
PM Modi commends the unwavering spirit of Maharashtra's residents and their contribution to the grand Ram temple in Ayodhya
PM Modi highlights the transformative initiatives for Maharashtra's development, reinstating stalled projects for rapid progress
The INDI Alliance has always pushed the country into instability: PM Modi in Chandrapur
Congress party itself is the creator of problems: PM Modi in Chandrapur

माता महाकालीच्‍या पावन भूमीत शक्तिला नमन करतो.
भारतरत्‍न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर यांना वंदन करतो.
चंद्रपूरकरांना माझा नमस्‍कार!
देश में गर्मी का पारा बढ़ रहा है और सियासी पारा भी चढ़ रहा है.. लेकिन मैं देख रहा हूँ, आपके उत्साह में, आपके जोश में और आपके जज्बे में कोई कमी नहीं है। इस बार चंद्रपुर ने भी मन बना लिया है- फिर एक बार, मोदी सरकार। फिर एक बार... फिर एक बार... औऱ चंद्रपुर से स्नेह मिलना मेरे लिए और भी विशेष है। ये चंद्रपुर ही है जिसने अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण के लिए ‘लकड़ी’ भेजी। नए भारत के प्रतीक, संसद की नई इमारत में भी चंद्रपुर की ही ‘लकड़ी’ लगी हुई है। चंद्रपुर की ख्याति पूरे देश में पहुंची है। मैं चंद्रपुर के लोगों को बहुत-बहुत बधाई देता हूं। कल से नववर्ष और नवरात्रि का पावन पर्व भी शुरू हो रहा है। सभी देशवासियों को इन पर्वों की हार्दिक शुभकामनाएं। समस्त मराठी बंधू- भगिनींना गुढी पाडव्याच्या आणि नूतन वर्षाच्या हार्दिक शुभेच्छा।

साथियों,
2024 का लोकसभा चुनाव ‘स्थिरता बनाम अस्थिरता’ के बीच का चुनाव है। एक ओर भाजपा-NDA है, जिसका ध्येय है- देश के लिए कड़े फैसले लो, बड़े फैसले लो। दूसरी ओर काँग्रेस और इंडी गठबंधन है, जिसका मंत्र है- जहां भी सत्ता पाओ, खूब मलाई खाओ। इंडी गठबंधन ने हमेशा देश को अस्थिरता में झोंका है। एक स्थिर सरकार क्यों और कितनी जरूरी होती है, ये महाराष्ट्र से बेहतर और कौन जानेगा? इंडी अलायंस की केंद्र में जब तक सरकार रही, महाराष्ट्र की लगातार उपेक्षा होती रही। जब ये इंडी अलायंस वाले ढेर सारी साजिशें करके, जनादेश लूटकर राज्य की सत्ता में पहुंचे, तो भी इन्होंने सिर्फ अपना ही विकास किया। महाराष्ट्र के विकास से जुड़ा कोई भी प्रोजेक्ट देखते ही ये कहते थे- कमीशन लाओ या काम पर ब्रेक लगाओ। जब यहां पर नए एयरपोर्ट की बात आई, इंडी अलांयस वालों ने कहा- कमीशन लाओ या काम पर ब्रेक लगाओ। इन लोगों ने जलयुक्त शिवार योजना बंद कर दी। बलीराजा जलसंजीवनी योजना, जो विदर्भ और मराठवाडा में सिंचाई के लिए थी, उसे भी इंडी गठबंधन वालों ने ठप्प कर दिया था। विदर्भ के विकास के लिए मैंने जिस समृद्धि महामार्ग का लोकार्पण किया, उसका भी इन लोगों ने विरोध किया था। इन लोगों ने मराठवाडा की वॉटर ग्रिड योजना बंद कर दी, कोंकण में रिफायनरी प्रोजेक्ट रोक दिया, मुंबई मेट्रो का काम रोक दिया था। यहाँ तक कि, पीएम-आवास के लिए केंद्र से पैसा आने के बावजूद इन्होंने गरीबों को घर देना बंद कर दिया था। इनका लक्ष्य एक ही था- कमीशन लाओ या काम पर ब्रेक लगाओ।

भाइयों बहनों,
हमारी सरकार ने महाराष्ट्र और विदर्भ के विकास के लिए इन सभी योजनाओं को फिर से शुरू किया है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे जी, उपमुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस जी, और अजित पवार जी के साथ पूरी सरकार दिन रात काम कर रही है। विकास के बड़े काम तेजी पूरे हो रहे हैं। और जब नीयत सही होती है, तो नतीजे भी सही होते हैं।

साथियों,
आज देश का दलित, पिछड़ा, आदिवासी और गरीब मोदी सरकार को अपनी सरकार मानता है। मोदी किसी शाही परिवार में पैदा होकर प्रधानमंत्री नहीं बना। मोदी एक गरीब परिवार में जन्म लेकर, आपके बीच रहकर, यहां तक आपने पहुंचाया है। इसलिए, मुझे पता है- जिन करोड़ों देशवासियों के पास अपना घर नहीं था, उनमें ज़्यादातर दलित, पिछड़ा आदिवासी ही थे। ये दलित, वंचित, आदिवासी ही थे, जिनकी बस्तियों में पीने को पानी नहीं था, बिजली नहीं, सड़कें नहीं। इसी समाज के बच्चों को शिक्षा के अभाव से सबसे ज्यादा जूझना पड़ता था।

साथियों,
इसलिए, मोदी ने गारंटी दी थी कि हमारी सरकार दलित, आदिवासी और पिछड़ा परिवारों का जीवन बदलने के लिए काम करेगी। मोदी ने वंचित वर्ग के हालातों को बदलने के लिए निरंतर मेहनत की है। देश में जिन 4 करोड़ गरीबों को पीएम आवास मिले हैं, उनमें सबसे ज्यादा इसी वर्ग के लोग हैं। हमने जिन 10 करोड़ से ज्यादा परिवारों को मुफ्त उज्ज्वला सिलिंडर दिया, वो कौन हैं? वो अधिकांश इसी वर्ग के लोग हैं। हमने वंचित वर्ग के हर परिवार के घर में शौचालय बनवाया है। आज हम 80 करोड़ से ज्यादा जरूरतमंदों को मुफ्त राशन दे रहे हैं। इसमें हमारे दलित, आदिवासी और पिछड़ा ही सबसे ज्यादा है।
(आपको पीछे मुड़कर देखने की जरूरत नहीं है...आप खुदका लगाओगे तो भी दिखाई नहीं देगा, आखिर तक लोग खड़े हैं। यहां कुछ लोगों को मन करता है कि जरा देखें कि कितने लोग हैं। जहां मेरी नजर पहुंचती है, मुझे लोग ही लोग नजर आते हैं और इसलिए आपलोग पीछे मुड़कर नहीं देखोगे तो चलेगा।)
आज 50 करोड़ से ज्यादा गरीबों को 5 लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज मिल रहा है। आज जिन 11 करोड़ किसानों के खातों में किसान सम्मान निधि का पैसा जा रहा है, वो छोटे और कमजोर किसान ही हैं। आज हमारे दलित, वंचित, पिछड़ा और आदिवासी समाज के लोग सिर उठाकर जिंदगी जी रहे हैं। ये सब कुछ हो रहा है, तो इसका श्रेय किसको जाता है? इसका श्रेय किसको जाता है? देश में इतनी प्रगति हो रही है श्रेय किसको जाता है? देश गरीब से गरीब व्यक्ति का भला कर रहा है इसका श्रेय किसको जाता है? आपका जवाब गलत है। ये मोदी के कारण नहीं, ये सब आपके एक वोट की ताकत ने किया है, आपने मोदी को आशीर्वाद दिया है और इसलिए ये जो पुण्य कार्य है उसके आप भी उतने ही हकदार हैं।

साथियों,
राजनैतिक पार्टियों का ये दायित्व होता है कि वो जनता की समस्याओं का समाधान करें। लेकिन, काँग्रेस पार्टी खुद ही समस्याओं की जननी है। आप आज़ादी के बाद से गिनना शुरू करिए। देश का विभाजन हुआ। मजहब के नाम पर ये विभाजन किसने करवाया? किसने करवाया? देश आज़ाद होते ही कश्मीर में समस्या खड़ी कर दी गई। कश्मीर में समस्याएं किसने पैदा कीं? जरा पूरी ताकत से बताइए, दिल्ली तक आवाज जानी चाहिए। ये कश्मीर को किसने मूसीबत में डाला? हमारे आस-पास ही दुनिया के कई देश आज़ाद हुये। वो हमसे कहीं आगे बढ़ गए, लेकिन हमारा भारत पिछड़ता गया। तब ज्यादातर समय देश में किसकी सरकार थी? देश दशकों तक आतंकवाद का शिकार रहा। आए दिन कहीं भी बम ब्लास्ट हो जाते थे। तुष्टीकरण के लिए आतंकवादियों को संरक्षण कौन देता था?
काँग्रेस पार्टी और उसके साथी... आतंकवादियों को संरक्षण कौन देता था? देश में नक्सलवाद जैसी समस्या इतनी विकराल हो गई। ये लाल आतंक किसकी देन था? किसकी देन था?

साथियों,
आज़ादी के 7 दशक बाद तक राम मंदिर का 500 साल पुराना विवाद बना हुआ था। अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण पर अड़ंगा कौन लगाता था? अड़ंगा कौन लगाता था? कांग्रेस पार्टी के लोग भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाते थे? कौन सी पार्टी के वकील सुप्रीम कोर्ट में जाकर कहते थे कि राममंदिर पर फैसला न सुनाएं?
किस पार्टी ने राममंदिर प्राण प्रतिष्ठा आयोजन का बहिष्कार किया?
किस पार्टी ने दशकों तक बाबा साहेब आंबेडकर को भारत रत्न नहीं मिलने दिया? इतने दशकों से हमारे लोग पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने की मांग कर रहे थे। किसने पिछड़ा वर्ग के साथ धोखा किया? हर बात का जवाब एक ही है। एक ही है कि नहीं है? एक ही है कि नहीं है?

साथियों,
पिछले 10 वर्षों से काँग्रेस सत्ता से बाहर है। आपने एनडीए को पूर्ण बहुमत दिया। हमने देश की बड़ी-बड़ी समस्याओं का स्थायी इलाज किया है। आज महाराष्ट्र ही नहीं बल्कि पूरे देश में नक्सलवाद कमजोर पड़ गया है। जो गढ़चिरौली नक्सली हिंसा के लिए जाना जाता था, अब उसकी चर्चा विकास और स्टील कंपनी के लिए हो रही है।हमारा गढ़चिरौली अब फौलाद सिटी बनने जा रहा है।

भाइयों बहनों,
हमारे मराठी में एक कहावत होती है-
‘कडू कारले, तुपात तलले, साखरेत घोलले, तरी कडू ते कडूच’ यानि,
कड़वे करेले को घी में तलें या शक्कर में घोलें, वो फिर भी कड़वा का कड़वा ही रहता है।ये कहावत कांग्रेस पर सटीक लागू होती है। होती है कि नहीं होती है? वो सुधर ही नही सकते, वो कभी नहीं बदल सकती। अपनी करतूतों के कारण आज कांग्रेस पार्टी देश के भीतर जनसमर्थन खो चुकी है। इसलिए अब कांग्रेस खुलकर बांटो और राज करो के खेल पर उतर आई है। कांग्रेस ने अपना जो घोषणापत्र निकाला है, उसमें भी मुस्लिम लीग की भाषा लिखी गई है। क्या आपको ये मंजूर है? इसे ये देश स्वीकार करेगा? इनके सांसद भारत के एक और विभाजन की बात कर रहे हैं। इंडी अलायंस के लोग दक्षिण भारत को अलग करने की धमकी दे रहे हैं। इंडी अलायंस में शामिल डीएमके पार्टी, सनातन को डेंगू, मलेरिया कहकर उसके खात्मे की बात करती है। औऱ कांग्रेस -नकली शिवसेना वाले उन्हीं लोगों को महाराष्ट्र में लाकर उनसे रैली करवाते हैं। अभी दो-तीन दिन पहले ही कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने एक और बयान दिया है। उन्होंने कहा है मोदी देश में जहां जाता है दूसरे राज्यों में जाकर कश्मीर और आर्टिकल 370 की बात क्यों करता है। आप मुझे बताइये, क्या ये कांग्रेस की विभाजनकारी सोच है कि नहीं है? कश्मीर हमारा है कि नहीं है? पूरे हिंदुस्तान का है कि नहीं है? हमारा सिरताज है कि नहीं है? क्या कश्मीर के लिए ये भाषा हमें मंजूर है? जब छत्रपति शिवाजी महाराज ने दिल्ली सल्तनत से मोर्चा लिया था, तब उन्होंने क्या ये कहा था क्या कि दिल्ली में जो हो, उससे मेरा क्या वास्ता? क्या कभी छत्रपति शिवाजी महाराज ने कहा था। क्या लोकमान्य तिलक कभी सोच सकते थे कि पंजाब में जलियावाला बाग हत्याकांड हो तो उससे महाराष्ट्र का क्या वास्ता? कभी नहीं सोच सकते। जब कश्मीर आतंक की आग में झुलस रहा था, कश्मीरी पंडितों के घर जलाए जा रहे थे, तब स्वर्गीय बालासाहब ठाकरे खुलकर कांग्रेस के खिलाफ आए थे। तब बालासाहब ठाकरे जी ने ये नहीं सोचा कि कश्मीर में आग लगी है तो उससे महाराष्ट्र वालों का क्या वास्ता? मुझे खुशी है कि हमारे एकनाथ शिंदे जी और उनकी पार्टी, बाला साहेब के विचारों को पूरी मजबूती से आगे बढ़ी रही है।

साथियों,
भाजपा-एनडीए ने गढ़चिरौली-चिमूर से अशोक नेते जी को और चंद्रपुर से मेरे पुराने साथी भाई सुधीर जी को, अपना उम्मीदवार बनाया है।
सुधीर जी ने मंत्री रहते हुए इस क्षेत्र के लिए लगातार काम किया है।
इन उम्मीदवारों को आपका समर्थन मोदी को मजबूत करेगा। मेरा आप सबसे अनुरोध है, 19 अप्रैल और 26 अप्रैल को भारी संख्या में मतदान करें। और मेरा आपसे आग्रह है, हर पोलिंग बूथ अपने सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दे, तोड़ेंग? इस चुवाव में हमें सबसे पहले पोलिंग बूथ जीतना है। जीतेंगं? पोलिंग बूथ में घर-घर जाएंगें? लोगों से मतदान के लिए आग्रह करेंगे? गर्मी कितनी ही क्यों ना हो मतदान भारी होगा? सुबह-सुबह मतदान कराओगे? अच्छा मेरा एक और काम करोगे? ये सुधीर जी का काम नहीं है मोदी का है करोगे? ये अशोक जी का काम नहीं हे मेरा काम है करोगे? पक्का करोगे? सबके सब हाथ ऊपर करके बताइये कि करेंगे? मेरा एक काम करना, कि इस चुनाव तक घर-घर जाना और जाकर के कहना है कि अपने मोदी जी चंद्रपुर आए थे और मोदी जी ने आपको प्रणाम भेजा है। पहुंचाएंगे मेरा प्रणाम, घर-घर मेरा प्रणाम पहुंचाएंगे? एक बार फिर आप सभी का बहुत-बहुत आभार।
भारत माता की... भारत माता की... भारत माता की...

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This is the New India that leaves no stone unturned for development: PM Modi
March 23, 2026
Today, India is moving forward with a new confidence; Now India faces challenges head-on: PM
From the Gulf to the Global West and from the Global South to neighbouring countries, India is a trusted partner for all: PM
What gets measured gets improved and ultimately gets transformed: PM
This is the new India, It is leaving no stone unturned for development: PM

नमस्कार!

पिछले कुछ समय में मुझे एक-दो बार टीवी9 भारतवर्ष देखने का मौका मिला है। नॉर्मली भी युद्धों और मिसाइलों पर आपका बहुत फोकस होता है और आजकल तो आपको कंटेंट की ओवरफीडिंग हो रही है। बड़े-बड़े देश टीवी9 को इतना सारा कंटेंट देने पर तुले हुए हैं, लेकिन On a Serious Note, आज विश्व जिन गंभीर परिस्थितियों से गुजर रहा है, वो अभूतपूर्व है और बेहद गंभीर है। और इन स्थितियों के बीच, आज टीवी-9 नेटवर्क ने विचारों का एक बेहद महत्वपूर्ण मंच बनाया है। आज इस समिट में आप सभी India and the world, इस विषय पर चर्चा कर रहे हैं। मैं आप सबको बधाई देता हूं। इस समिट के लिए अपनी शुभकामनाएं देता हूं। सभी अतिथियों का अभिनंदन करता हूं।

साथियों,

आज जब दुनिया, conflicts के कारण उलझी हुई है, जब इन conflicts के दुष्प्रभाव पूरी दुनिया पर दिख रहे हैं, तब India and the world की बात करना बहुत ही प्रासंगिक है। भारत आज वो देश है, जिसकी अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है। 2014 के पहले की स्थितियों को पीछे छोड़कर के आज भारत एक नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। अब भारत चुनौतियों को टालता नहीं है बल्कि चुनौतियों से टकराता है। आप बीते 5-6 साल में देखिए, कोरोना की महामारी के बाद चुनौतियां एक के बाद एक बढ़ती ही गई हैं। ऐसा कोई साल नहीं है, जिसने भारत की, भारतीयों की परीक्षा न ली हो। लेकिन 140 करोड़ देशवासियों के एकजुट प्रयास से भारत हर आपदा का सामना करते हुए आगे बढ़ रहा है। इस समय युद्ध की परिस्थितियों में भी भारत की नीति और रणनीति देखकर, भारत का सामर्थ्य देखकर दुनिया के अनेकों देश हैरान हैं। हमारे यहां कहावत है, सांच को आंच नहीं। 28 फरवरी से दुनिया में जो उथल-पुथल मची है, इन कठोर विपरीत परिस्थितियों में भी भारत प्रगति के, विकास के, विश्वास के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। इन 23 दिनों में भारत ने अपनी Relationship Building Capacity दिखाई है, Decision Making Capacity दिखाई है और Crisis Management Capacity दिखाई है।

साथियों,

आज जब दुनिया इतने सारे खेमों में बंटी हुई है, भारत ने अभूतपूर्व और अकल्पनीय bridges बनाए हैं। Gulf से लेकर Global West तक, Global South से लेकर पड़ोसी देशों तक भारत सभी का trusted partner है। कुछ लोग पूछते हैं, हम किसके साथ हैं? तो उनको मेरा जवाब यही है कि हम भारत के साथ हैं, हम भारत के हितों के साथ हैं, शांति के साथ हैं, संवाद के साथ हैं।

साथियों,

संकट के इसी समय में जब global supply chains डगमगा रही हैं, भारत ने diversification और resilience का मॉडल पेश किया है। Energy हो, fertilizers हों या essential goods अपने नागरिकों को कम से कम परेशानी हो, इसके लिए भारत ने निरंतर प्रयास किया है और आज भी कर रहे है।

साथियों,

जब राष्ट्रनीति ही राजनीति का मुख्य आधार हो, तब देश का भविष्य सर्वोपरि होता है। लेकिन जब राजनीति में व्यक्तिगत स्वार्थ हावी हो जाता है, तब लोग देश के फ्यूचर के बजाय अपने फ्यूचर के बारे में सोचते हैं। आप ज़रा याद कीजिए 2004 से 2010 के बीच क्या हुआ था? तब कांग्रेस सरकार के समय पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतों का संकट आया था और तब कांग्रेस ने देश की नहीं बल्कि अपनी सत्ता की चिंता की। उस वक्त कांग्रेस ने एक लाख अड़तालीस हज़ार करोड़ रुपए के ऑयल बॉन्ड जारी किए थे और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी ने खुद कहा था कि वो आने वाली पीढ़ी पर कर्ज का बोझ डाल रहे हैं। यह जानते हुए भी कि ऑयल बॉन्ड का फैसला गलत है, जो रिमोट कंट्रोल से सरकार चला रहे थे, उन लोगों ने अपनी सत्ता बचाने के लिए यह गलत निर्णय किया क्योंकि जवाबदेही उस समय नहीं होनी थी, उस बॉन्ड पर री-पेमेंट 2020 के बाद होनी थी।

साथियों,

बीते 5-6 वर्षों में हमारी सरकार ने कांग्रेस सरकार के उस पाप को धोने का काम किया है, और इस धुलाई का खर्चा कम नहीं आया है, ऐसी लाँड्री आपने देखी नहीं होगी। 1 लाख 48 हज़ार करोड़ रुपए की जगह, देश को 3 लाख करोड़ रुपए से अधिक की पेमेंट करनी पड़ी क्योंकि इसमें ब्याज भी जुड़ गया था। यानी हमने करीब-करीब दोगुनी राशि चुकाने के लिए मजबूर हुए। आजकल कांग्रेस के जो नेता बयानों की मिसाइलें दाग रहे हैं, मिसाइल आई तो टीवी9 को मजा आएगा, उनकी इस विषय का जिक्र आते ही बोलती बंद हो जाती है।

साथियों,

पश्चिम एशिया में बनी परिस्थितियों पर मैंने आज लोकसभा में अपना वक्तव्य दिया है। दुनिया में जहां भी युद्ध हो रहे हैं, वो भारत की सीमा से दूर हैं। लेकिन आज की व्यवस्थाओं में कोई भी देश युद्धों से दुष्प्रभाव से दूर रहे, ऐसा संभव नहीं होता। अनेक देशों में तो स्थिति बहुत गंभीर हो चुकी है। और इन हालातों में हम देख रहे हैं कि राजनीतिक स्वार्थ से भरे कुछ लोग, कुछ दल, संकट के इस समय में भी अपने लिए राजनीतिक अवसर खोज रहे हैं। इसलिए मैं टीवी9 के मंच से फिर कहूंगा, यह समय संयम का है, संवेदनशीलता का है। हमने कोरोना महासंकट के दौरान भी देखा है, जब देशवासी एकजुट होकर संकट का सामना करते हैं, तो कितने सार्थक परिणाम आते हैं। इसी भाव के साथ हमें इस युद्ध से बनी परिस्थितियों का सामना करना है।

साथियों,

दुनिया की हर उथल-पुथल के बीच, भारत ने अपनी प्रगति की गति को भी बनाए रखा है। अगर मैं 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद, बीते 23 दिनों का ही ब्यौरा दूं, तो पूरब से पश्चिम तक, उत्तर से दक्षिण तक देश में हजारों करोड़ के डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स का काम हुआ है। दिल्ली मेट्रो रेल के महत्वपूर्ण कॉरिडोर्स का लोकार्पण, सिलचर का हाई स्पीड कॉरिडोर का शिलान्यास, कोटा में नए एयरपोर्ट का शिलान्यास, मदुरै एयरपोर्ट को इंटरनेशनल एयरपोर्ट का दर्जा देना, ऐसे अनेक काम बीते 23 दिनों में ही हुए हैं। बीते एक महीने के दौरान ही औद्योगिक विकास को गति देने के लिए भव्य स्कीम को मंजूरी दी गई है। इसके तहत देशभर में 100 plug-and-play industrial parks विकसित किए जाएंगे। देश में Small Hydro Power Development Scheme को भी हरी झंडी दी गई है। इससे आने वाले वर्षों में 1,500 मेगावाट नई hydro power capacity जोड़ी जाएगी। इसी दौरान जल जीवन मिशन को साल 2028 तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। किसानों के हित में भी अनेक बड़े निर्णय लिए गए हैं। बीते एक महीने में ही पीएम किसान सम्मान निधि के तहत 18 हजार करोड़ रुपए से अधिक सीधे किसानों के खातों में ट्रांसफर किए गए हैं। और जो हमारे MSMEs हैं, जो हमारे निर्यातक हैं, उनके लिए भी करीब 500 करोड़ रुपए के राहत पैकेज की भी घोषणा की गई है। यह सारे कदम इस बात का प्रमाण हैं कि विकसित भारत बनाने के लिए देश कितनी तेज गति से काम कर रहा है।

साथियों,

Management की दुनिया में एक सिद्धांत कहा जाता है - What gets measured, gets managed. लेकिन मैं इसमें एक बात और जोड़ना चाहता हूं, What gets measured, gets improved और ultimately, gets transformed. क्योंकि आकलन जागरूकता पैदा करता है। आकलन जवाबदेही तय करता है और सबसे महत्वपूर्ण आकलन संभावनाओं को जन्म देता है।

साथियों,

अगर आप 2014 से पहले के 10-11 साल और 2014 के बाद के 10-11 साल का आप आकलन करेंगे, तो यही पाएंगे कि कैसे इसी सिद्धांत पर चलते हुए, भारत ने हर सेक्टर को Transform किया है। जैसे पहले हाईवे बनते थे, करीब 11-12 किलोमीटर प्रति दिन की रफ्तार से, आज भारत करीब 30 किलोमीटर प्रतिदिन की स्पीड से हाईवे बना रहा है। पहले पोर्ट्स पर शिप का Turnaround Time, 5-6 दिन का होता था। आज वही काम, करीब-करीब 2 दिन से भी कम समय में पूरा हो रहा है। पहले Startup Culture के बारे में चर्चा ही नहीं होती थी। 2014 से पहले, हमारे देश में 400-500 स्टार्ट अप्स ही थे। आज भारत में 2 लाख से ज्यादा रजिस्ट्रर्ड स्टार्ट अप्स हैं। पहले मेडिकल education में सीटें भी सीमित थीं, करीब 50-55 हजार MBBS seats थीं, आज यह बढ़कर सवा लाख से ज्यादा हो चुकी हैं। पहले देश के Banking system से भी करोड़ों लोग बाहर थे। देश में सिर्फ 25 करोड़ के आसपास ही बैंक account थे। वहीं जनधन योजना के माध्यम से 55 करोड़ से ज्यादा बैंक अकाउंट खुले हैं। पहले हमारे देश में airports की संख्या भी 70 से कम थी। आज एयरपोर्ट्स की संख्या भी बढ़कर 160 से ज्यादा हो चुकी है।

साथियों,

पहले भी योजनाएं तो बनती थीं, लेकिन आज फर्क है, आज परिणाम दिखते हैं। पहले गति धीमी थी, आज भारत fastrack पर है। पहले संभावनाएं भी अंधकार में थीं, आज संकल्प सिद्धियों में बदल रहे हैं। इसलिए दुनिया को भी यह संदेश मिल रहा है कि यह नया भारत है। यह अपने विकास के लिए कोई कोर-कसर बाकी नहीं छोड़ रहा है।

साथियों,

आज हमारा प्रयास है कि अतीत में विकास का जो असंतुलन पैदा हो गया था, उसको अवसरों में बदला जाए। अब जैसे हमारा पूर्वी भारत है। हमारा पूर्वी भारत संसाधनों से समृद्ध है, दशकों तक वहां जिन्होंने सरकारें चलाई हैं, उनकी उपेक्षा ने पूर्वी भारत के विकास पर ब्रेक लगा दी थी। अब हालात बदल रहे हैं। जिस असम में कभी गोलियों की आवाज सुनाई देती थी, आज वहां सेमीकंडक्टर यूनिट बन रही है। ओडिशा में सेमीकंडक्टर से लेकर पेट्रोकेमिकल्स तक अनेक नए-नए सेक्टर का विकास हो रहा है। जिस बिहार में 6-7 दशक में गंगा जी पर एक बड़ा पुल बन पाया था एक, उस बिहार में पिछले एक दशक में 5 से ज्यादा नए पुल बनाए गए हैं। यूपी में कभी कट्टा मैन्युफैक्चरिंग की कहानियां कही जाती थीं, आज यूपी, मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग में दुनिया में अपनी पहचान बना रहा है।

साथियों,

पूर्वी भारत का एक और बड़ा राज्य पश्चिम बंगाल है। पश्चिम बंगाल, एक समय में भारत के कल्चर, एजुकेशन, इंडस्ट्री और ट्रेड का हब होता था। बीते 11 वर्षों में केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल के विकास के लिए बड़ी मात्रा में निवेश किया है। लेकिन दुर्भाग्य से, आज वहां एक ऐसी निर्मम सरकार है, जो विकास पर ब्रेक लगाकर बैठी है। TV9 बांग्ला के जो दर्शक हैं, वो जानते हैं कि बंगाल में आयुष्मान योजना पर निर्मम सरकार ने ब्रेक लगाया हुआ है। पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना पर ब्रेक लगाया हुआ है। पीएम आवास योजना पर ब्रेक लगाया हुआ है। चाय बागान श्रमिकों के लिए शुरू हुई योजना के लिए ब्रेक लगाया हुआ है। यानी विकास और जनकल्याण से ज्यादा प्राथमिकता निर्मम सरकार अपने राजनीतिक स्वार्थ को दे रही है।

साथियों,

देश में इस तरह की राजनीति की शुरुआत जिस दल ने की है, वो अपने गुनाहों से बच नहीं सकती और वो पार्टी है - कांग्रेस। कांग्रेस पार्टी की राजनीति का एक ही लक्ष्य रहा है, किसी भी तरह विकास का विरोध और कांग्रेस यह तब से कर रही है, जब मैं गुजरात में था। गुजरात में वर्षों तक जनता ने हमें आशीर्वाद दिया, तो कांग्रेस ने उस जनादेश को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने गुजरात की छवि पर सवाल उठाए, उसकी प्रगति को कटघरे में खड़ा किया और जब यही विश्वास पूरे देश में दिखाई दिया, तो कांग्रेस का विरोध भी रीजनल से नेशनल हो गया।

साथियों,

जब राजनीति में विरोध, विकास के विरोध में बदल जाए, जब आलोचना देश की उपलब्धियों पर सवाल उठाने लगे, तब यह सिर्फ सरकार का विरोध नहीं रह जाता, यह देश की प्रगति से असहज होने की मानसिकता बन जाती है। आज कांग्रेस इसी मानसिकता की गुलाम बन चुकी है। आज स्थिति यह है कि देश की हर सफलता पर प्रश्न उठाया जाता है, हर उपलब्धि में कमी खोजी जाती है और हर प्रयास के असफल होने की कामना की जाती है। कोविड के समय, देश ने अपनी वैक्सीन बनाई, तो कांग्रेस ने उस पर भी संदेह जताया। Make in India की बात हुई, तो कहा गया कि यह सफल नहीं होगा, बब्बर शेर कहकर इसका मजाक उड़ाया गया। जब देश में डिजिटल इंडिया अभियान शुरू हुआ, तो उसका मजाक उड़ाया गया। लेकिन हर बार यह कांग्रेस का दुर्भाग्य और देश का सौभाग्य रहा कि भारत ने हर चुनौती को सफलता में बदला। आज भारत दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीनेशन ड्राइव का उदाहरण है। भारत डिजिटल पेमेंट्स में दुनिया का अग्रणी देश है। भारत मैन्युफैक्चरिंग और स्टार्टअप्स में नई ऊंचाइयों को छू रहा है।

साथियों,

लोकतंत्र में विरोध जरूरी होता है। लेकिन विरोध और विद्वेष के बीच एक रेखा होती है। सरकार का विरोध करना लोकतांत्रिक अधिकार है। लेकिन देश को बदनाम करना, यह कांग्रेस की नीयत पर सवाल खड़ा करता है। जब विरोध इस स्तर तक पहुंच जाए कि देश की उपलब्धियां भी असहज करने लगें, तो यह राजनीति नहीं, यह दृष्टिकोण की समस्या है। अभी हमने ग्लोबल AI समिट में भी देखा है। जब पूरी दुनिया भारत में जुटी हुई थी, तो कांग्रेस के लोग कपड़े फाड़ने वहां पहुंच गए थे। इन लोगों को देश की इज्जत की कितनी परवाह है, यह इसी से पता चलता है। इसलिए आज आवश्यकता है कि देशहित को, दलहित से ऊपर रखा जाए क्योंकि अंत में राजनीति से ऊपर, राष्ट्र होता है, राष्ट्र का विकास होता है।

साथियों,

आज का यह दिन भी हमें यही प्रेरणा देता है। आज के ही दिन शहीद भगत सिंह, शहीद राजगुरु और शहीद सुखदेव ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया था। आज ही, समाजवादी आंदोलन के प्रखर आदर्श डॉ. राम मनोहर लोहिया जी की जयंती भी है। यह वो प्रेरणाएं हैं, जिन्होंने देश को हमेशा स्व से ऊपर रखा है। देशहित को सबसे ऊपर रखने की यही प्रेरणा, भारत को विकसित भारत बनाएगी। यही प्रेरणा भारत को आत्मनिर्भर बनाएगी। मुझे पूरा विश्वास है कि टीवी9 की यह समिट भी भारत के आत्मविश्वास और दुनिया के भरोसे पर, भारतीयों पर जो भरोसा है, उस भरोसे को और सशक्त करेगी। आप सभी को मेरी तरफ से बहुत-बहुत शुभकामनाएं हैं और आपके बीच आने का अवसर दिया, आप सबसे मिलने का मौका लिया, इसलिए बहुत-बहुत धन्यवाद!

नमस्‍कार!