Text of PM's remarks at Community Reception in Paris

Published By : Admin | April 11, 2015 | 13:46 IST

प्यारे भाईयों और बहनों

आप सबका उत्साह और उमंग हिंदुस्तान में जो लोग टी.वी. देखते हैं, पूरे हिंदूस्तान को उमंग से भर देता है कि दूर फ्रांस में,पेरिस में,इस प्रकार से भारतीयों का उमंग और उत्साह से भरा हुआ माहौल भारत के सवा सौ करोड़ देशवासियों के लिए भी उमंग और आनंद का कारण बन जाता है। इसके लिए मैं आपका बहुत बहुत अभिनंदन करता हूं। आपका धन्यवाद करता हूं। मैं परसों रात यहां पहुंचा था। यह मेरा एक प्रकार से यहाँ आखिरी सार्वजनिक कार्यक्रम है और कल मैं यहां से जर्मनी जा रहा हूं। फ्रांस मैं पहले भी आया था,एक Tourist के रूप में। लेकिन आज आया हूं यहां से टूरिस्टों का India ले जाने के लिए। पहले आया था, एक जिज्ञासा ले करके, देखना चाहता था,फ्रांस कैसा है। आज आया हूं, एक सपना ले करके कि मेरा देश भी कभी इससे भी आगे कैसे बढ़ेगा।

आज मैं गया था,वीर भारतीयों ने जहां पर शहादत दी, उस युद्ध भूमि पर,उस युद्ध स्मारक को प्रणाम करने के लिए| मैं नहीं जानता हूं कि मेरे पहले भारत से और कौन-कौन वहां गया था। लेकिन, अगर मैं न गया होता, तो मेरे दिल में कसक रह जाती। एक दर्द रह जाता,एक पीड़ा रह जाती। दुनिया को पता नहीं है, हिंदुस्तान, यह त्याग और तपस्या की भूमि कही जाती है। वो त्याग और तपस्या जब इतिहास के रूप में सामने नज़र आती है, मैं उस भूमि पर गया, मेरे रोंगटे खड़े हो गए। पूरे शरीर में, मन में एक अलग-सा भाव जगने लगा और इतना गौरव महसूस होता था कि हमारे पूर्वज क्या महान परंपरा हमारे लिए छोड़ करके गए हैं। अपनों के लिए, खुद के लिए लड़ने वाले, मरने वाले, त्याग करने वाले बहुत हैं। लेकिन औरों के लिए भी कोई मर सकता है, ये तो सिर्फ प्रथम विश्व युद्ध की घटनाओं को याद करें तब पता चलता है। यह वर्ष प्रथम विश्व युद्ध की शताब्दी का वर्ष है। सौ साल पहले कैसा मानवसंहार हुआ था। उन यादों को फिर एक बार इतिहास के झरोखे से देखने की ज़रूरत है। युद्ध कितना भयानक होता है। मानवता के खिलाफ कितना हृदयद्रावक परिणाम होता है। इसलिए प्रथम विश्व युद्ध की शताब्दी हमारे भीतर युद्ध से मुक्त मानवता ,उसके संकल्प का ये वर्ष होना चाहिए। भारत में भी हमारे पूर्वजों के बलिदान की बातें बारीकी से नहीं बताई जातीं। कभी कभार तो इतिहास को भुला दिया जाता है। इतिहास, जो समाज भूल जाता है, वो इतिहास बनाने की ताकत भी खो देता है। इतिहास वो ही बना सकते हैं जो इतिहास को जानते हैं,समझते हैं।

दुनिया इस बात को समझे कि प्रथम विश्वयुद्ध में भारत के 14 लाख जवानों ने अपनी जिंदगी दांव पर लगाई थी। युद्ध के मैदान में उतरे थे। चार साल तक लड़ाई चली, लोग कैसे होंगे, मौसम कैसा होगा, प्रकृति कैसी होगी, पानी कैसा होगा, खान-पान कैसा होगा, कुछ पता नहीं था, लेकिन किसी के लिए वे लड़ रहे थे। अपने लिए नहीं, कोई भारत को अपने भू-भाग का विस्तार करना था, इसलिए नहीं, भारत कोई अपना विजय डंका बजाने के लिए निकला था, वो नहीं और वैसे भारत के पूरे इतिहास में ये नहीं है। हजारों साल का भारत का इतिहास, जिसमें आक्रमण का नामोनिशान नहीं है। फ्रांस के लोगों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ाई लड़े थे। उस समय की अगर तस्वीरें देखें,मैंने आज कुछ तस्वीरें ट्वीट की हैं, जिसमें जब हिंदुस्तान के सैनिक युद्ध के लिए यहां पहुंचे थे तो फ्रांस की कोई महिला उनको फूल दे करके उनका स्वागत कर रही थी, वह उस समय की एक तस्वीर मैंने आज ट्वीट की है। कोई कल्पना करे कि 14 लाख सेना के जवान किसी के लिए बलिदान देने के लिए निकल पड़े | प्रथम विश्व युद्ध में करीब-करीब 75 हजार हिंदुस्तान के सैनिकों ने शहादत दी थी। ये अंक छोटा नहीं है। 75 हजार लागों की शहादत! और 11 तो ऐसे वीर पुरूष थे जिन्होंने Victoria cross का सर्वोपरि सम्मान प्राप्त किया था, अपनी वीरता के लिए, बलिदान की उच्च परंपराओं के लिए। फ्रांस की धरती पर, उसमें से 9 हजार लोग शहीद हुए थे और उनकी स्मृति में ये स्मारक बना हुआ है और आज वहां मैं सर झुकाने गया था। उन वीरों का आशीर्वाद लेने गया था और मैं दुनिया को एक संदेश देना चाहता था कि विश्व भारत को समझे। दुनिया भारत को देखने का नज़रिया बदले। ये कैसा देश है! जो अपने लिए नहीं औरों के लिए भी बलिदान देता है और इतनी बड़ी मात्रा में बलिदान देता है। इतना ही नहीं, United Nations बनने के बाद Peace keeping force बने हैं। आज भी दुनिया में ये बात गौरव से कही जाती है कि Peace keeping forces में सबसे ज्यादा अगर कोई योगदान देता है, तो हिंदुस्तान के सैनिक देते हैं..और Peace keeping force में, जिनके Discipline की, जिनके शौर्य की, जिनकी बुद्धिमता की तारीफ होती है, वो सेना के नायक भारत के होते हैं। वह देश, जिसने कभी कहीं आक्रमण न किया हो, हजारों साल में, जो देश प्रथम विश्व युद्ध में और द्वितीय विश्व युद्ध में, औरों के लिए जिसके लोग शहादत देते हों। जो देश, यूएन बनने के बाद Peace keeping force में लगातार सबसे अधिक अपने सैनिक भेज करके दुनिया में शांति के लिए अपनी पूरी ताकत खपा देता है और दूसरी तरफ दुनिया हमें क्या देती है? शांति का झंडा उठाकर चलने वाला ये देश, शांति के लिए जीने मरने वाला ये देश, United Nations में, Security Council में Seat पाने के लिए तरस रहा है।

दुनिया से मैं आग्रह करूंगा कि आज जब विश्व प्रथम विश्व युद्ध की शताब्दी में गुजर रहा है तब ये अवसर है, शांतिदूतों के सम्मान का। ये अवसर है, गांधी और बुद्ध की भूमि को उसका हक देने का। वो दिन चले गए, जब हिंदुस्तान भीख मांगेगा। ये देश अपना हक मांगता है, और हक, विश्व में शांति का संदेश बुद्ध और गांधी की भूमि जिस प्रकार से दे सकती है, शायद ही और कोई इतनी Moral Authority है, जो दुनिया को ये ताकत दे सके, संदेश दे सके। मैं आशा करता हूं कि यूएन अपनी 70वीं शताब्दी जब मनाएगा तो इन विषयों पर पुर्नविचार करेगा। इसलिए मैं आज विशेष रूप से उन वीर शहीदों को प्रणाम करने गया था, ताकि शांति के लिए हम सर कटा सकते हैं, ये दुनिया को पता चलना चाहिए और ये संदेश हम दुनिया को दें।

मैं आज ये भाषण तो पेरिस में आपके सामने कर रहा हूं, लेकिन मुझे बताया गया कि सैंकड़ों मील दूर, अलग-अलग टापुओं पर, जहां फ्रांस के नागरिक बसते हैं और जिसमें हिंदुस्तानी लोग भी बसते हैं। Reunion में लोग इकठ्ठे हुए हैं, वादालूप में लोग इकठ्ठे हुए हैं, मार्तेनिक में लोग इकठ्ठे हुए हैं, सेमार्ता में लोग इकठ्ठे हुए हैं और वहां करीब करीब ढाई लाख से भी ज़्यादा हिंदुस्तानी लोग बसते हैं। मैं इतनी दूर बैठे हुए आप सबको भी यहां से प्रणाम करता हूं और मैं जानता हूं कि यहां बैठे हुए तो शायद हिंदी समझ लेते हैं, आप भारतीय होने का गर्व करते हैं, लेकिन फ्रैंच भाषा से अधिक किसी भाषा से परिचित नहीं हैं। Simultaneous फ्रैंच भाषा में Translation चल रहा है, वो जो दूर टापुओं पर बैठे हैं, उनको फ्रैंच भाषा में सुनने का अवसर मिला है, ऐसा मुझे बताया गया है। मैं उन सभी भारतवासियों को इस कार्यक्रम में शरीक होने के लिए, उनका अभिनंदन करता हूं और आपको मैं विश्वास दिलाता हूं कि आप अगर हिंदुस्तानी भाषा नहीं जानते हैं, बहुत साल पहले आप हिंदुस्तान से बाहर निकल चुके हैं, पासपोर्ट के रंग बदल गए होंगे, लेकिन मेरे और आपके खून का रंग नहीं बदल सकता। भारत आपकी चिंता पासपोर्ट के रंग के आधार पर नहीं करता, मेरे और आपके डीएनए के आधार पर करता है, मैं आपको यह विश्वास दिलाता हूं। इसको हमने बखूबी शुरू भी किया है। इस बार जो प्रवासी भारतीय दिवस मनाया गया क्योंकि ये वर्ष प्रवासी भारतीय दिवस का वो वर्ष है,जब महात्मा गांधी को साउथ अफ्रीका से हिन्दुस्तान लौटने का शताब्दी वर्ष है। 1915 में गांधी जी साउथ अफ्रीका से भारत वापस लौटे थे और ये 2015 है जो शताब्दी वर्ष है और उस शताब्दी में प्रवासी भारतीय दिवस, गांधी वापस आ करके, जहां उन्होंने आंदोलन की शुरूआत की थी, उस गुजरात के अंदर वो कार्यक्रम हुआ था। हर बार के प्रवासी भारतीय दिवस के अपेक्षा इस बार एक विशेषता थी और ये विशेषता थी, कि पहले भी कई प्रकार के कार्यक्रम होते थे, कई प्रकार की मीटिंग होती थी, लेकिन पहली बार फ्रेंच भाषा जानने वालों का अलग कार्यक्रम किया गया था। उनके साथ अलग विचार विमर्श किया गया था। उनकी समस्याओं को अलग से समझा गया था और उन समस्याओं के समाधान खोजने के प्रयास भी जारी कर दिए गए हैं।

मैं जानता हूं, फ्रांस में कुछ Professionals हैं जो अभी अभी आए हैं। जो हिंदुस्तान की कई भाषा जानते हैं, हिंदुस्तान को भली भांति जानते हैं, कुछ लोग इसके पहले आए, विशेषकरके पांडिचेरी से आए, उनका भी ज्यादा नाता यहां हो गया है, वहां थोड़े बहुत, कम अधिक मात्रा में रहा है। लेकिन कुछ उससे भी पहले आए हैं, जिनके पास कोई Document तक नहीं है। कब आए, कैसे आए, किस जहाज में आए, कहां ठहरे, कुछ पता नहीं है। लेकिन इतना उनको पता है कि वो मूल भारतीय हैं और हमारे लिए इतना रिश्ता काफी है। मैं चाहूंगा कि उन चीज़ों को हम फिर से कैसे अपने आप को जोड़ें। कभी कभार जब भाषा छूट जाती है, परंपराओं से अलग हो जाते हैं, नाम बदल जाते हैं तो सदियों के बाद आने वाली पीढि़यों के लिए परेशानी हो जाती है कि पता नहीं हम कौन थे, कोई हमें स्वीकार क्यों नहीं करता है। यहां वालों को लगता है कि तुम यहां के तो हो ही नहीं, बाहर वाले को हम बता नहीं पाते, हम कहां से हैं। एक बार मेरे साथ एक घटना घटी, गुजरात में वेस्ट इंडीज की क्रिकेट टीम खेलने के लिए आई थी, तो क्रिकेट का मैच था, तो उस जमाने में तो मोबाइल फोन वगैरह नहीं थे। एक सज्जन का मेरे यहां टेलीफोन आया। मैं आरएसएस हेडक्वार्टर पर रहता था और फोन आया कि वेस्टइंडीज क्रिकेट टीम के मैनेजर आपसे मिलना चाहते हैं। मेरे लिए बड़ा Surprise था। मैं एक बहुत सामान्य, छोटा सा व्यक्ति.. मैं कोई तीस साल पहले की बात कर रहा हूं। 30-35 साल हो गए होंगे। वेस्टइंडीज क्रिकेट टीम का मैनेजर, उस जमाने में तो क्रिकेटर से हाथ मिलाना, यानी ये भी एक जीवन का सौभाग्य माना जाता था। मैंने तुरंत उनसे संपर्क किया। उन्होंने कहा- मेरा नाम रिखि है, मैं वेस्टइंडीज से आया हूं और वेस्टइंडीज में फलाने फलाने आदमी ने आपका reference दिया है। मैंने कहा, ज़रूर मैं आपसे मिलने आता हूं। उन्होंने रिखि कहा तो मुझे समझ नहीं आया, वो है क्या चीज़, किस परंपरा से हैं, किस समाज से हैं। मैं गया तो वे तो बिल्कुल हिंदुस्तानी जैसे लगते थे और उनकी पत्नी भी साड़ी वगैरह पहन करके बैठी थी। मैंने कहा, ये रिखि ? उन्होंने कहा कि पता नहीं ये नाम हमारा कैसे बना है, लेकिन मेरी पत्नी का नाम बोले, सीता है और बोले हम डेढ़ सौ साल, दो सौ पहले हमारे पूर्वज गए थे, तो हो सकता है, मेरे नाम के साथ ऋषि शब्द होना चाहिए। अपभ्रंश होते होते रिखि हो गया है और बोले मैं वहां Government में Education विभाग में अफसर हूं और टीम मैनेजर के रूप में मैं यहां आया हूं। खैर मैंने दूसरे दिन उनका एक स्वागत समारोह रखा और बड़े वैदिक परंपरा से उनका सम्मान स्वागत किया। लेकिन तब मेरे मन में विचार आया कि अगर हम, हमारी जो मूल परंपरा है, उससे अगर नाता छूट जाता है, अब आप देखिए Mauritius जाएं तो हमें कभी भी वहां कठिनाई महसूस नहीं होती क्योंकि Mauritius जब लोग गए तो साथ में हनुमान चालीसा ले गए और तुलसीकृत रामायण ले गए तो डेढ़ सौ-दो सौ साल उसी के आधार पर वे भारत से जुड़े रहे। उसका गान करते रहे। भाषा को समझते रहे। लेकिन वेस्टइंडीज की तरफ जाओ आप, Guyana वगैरह में तो भाषा भूल चुके हैं, क्योंकि पहुंची नहीं भाषा, लेकिन अंग्रेज़ी के कारण थोड़ी बहुत Connectivity रहती है। आपके नसीब में तो वो भी नहीं है। इसलिए जो भी अपने आप को इस परंपरा की विरासत के साथ जोड़ता है, उसे कोई न कोई संपर्क रखना चाहिए।

मैं इस प्रकार से उत्सुक सभी परिवारों से कहता हूं कि अब तो इंटरनेट का जमाना है, सोशल मीडिया का जमाना है और मैं बहुत easily available हूं, अगर आप इन विषयों में भारत सरकार को अगर लिखेंगे, मेरी website पर अगर आप चिठ्ठी डाल देंगे, तो मेरी पूरी कोशिश रहेगी कि आपको भाषा की दृष्टि से, परंपराओं की दृष्टि से, भारत से या मूल किस राज्य से आपका संबंध होगा, वो अगर खोजना होगा तो हमारी तरफ से मदद करने का पूरा प्रयास रहेगा क्योंकि ये नाता हमारा बनना चाहिए। मैंने पूछा यहां पर तो बोले कि Movie तो हिंदुस्तान की देखते हैं, लेकिन जब तक नीचे फ्रैंच भाषा में Caption नहीं आता, समझ नहीं आती। एक बार मैं Caribbean countries में एक स्थान पर गया था। जिस दिन मैं वहां पहुंचा, वहां कहीं एक मूल भारतीय परिवार में किसी का स्वर्गवास हुआ था और जिसके यहां मैं रूकने वाला था, वे एयरपोर्ट लेने नहीं आए, कोई और आया, तो मैंने पूछा क्यों भई क्या हुआ? तो बोले कि हमारे परिचित थे, उनका स्वर्गवास हो गया तो वो वहां चले गए हैं, तो मैंने कहा कि ठीक है, मैं भी चलता हूं वहां। हम यहां आए हैं, आपके परिचित हैं तो हम भी चले जाते हैं। हम वहां गए तो, मैंने जो दृश्य देखा बड़ा हैरान था। वहां उनके अंतिम संस्कार की तैयारी चल रही थी, भारतीय परंपरा से Dead body को ले जाना था, लेकिन एक हिंदी फिल्म का गाना बज रहा था और परिवार के सारे लोग रो रहे थे। गाने के शब्दों को और उस घटना को पूरा 180 डिग्री Contrast था। शोक और मृत्यु से उसका कोई लेना देना नहीं था। लेकिन उस गाने में थोड़ा Sadness थी, गाने में तो उनको लग रहा था कि मृत्यु के बाद ये ठीक है, तो वो वही बजाते थे और वे रो रहे थे। तो मेरे मन में विचार आया कि कम से कम, अब उस जमाने में तो वीडियो था नहीं, लेकिन मुझे लगा कि हिंदी फिल्म Song हो तो उसको अपनी Language में Transliteration भेजना चाहिए, क्योंकि उनको समझ में आना चाहिए शब्द क्या हैं ।कोई मेल नहीं था, पर चूंकि वो भारतीय परंपरा से अग्नि संस्कार वगैरह करने वाले थे, लेकिन उनके लिए ये लिंक टूट जा रहा था। ये अपने आप में बड़ी कठिनाई थी। मैं समझता हूँ कि जो दिकक्त Caribbean countries में अनुभव करते हैं, शायद इस भू-भाग में भी वो समस्याएं हैं और मैं समझता हूँ कि उन समस्याओं का समाधान भारत और आपको मिलकर के प्रयास करना चाहिए और मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि आगे भी हमारा संबंध और भी गहरा बने, सरल बने और आने वाली पीढ़ियों तक कैसे सरल बने उसके लिए जो कुछ भी करना होगा, विशेषकर के इन टापुओं पर जो मुझे आज सुन रहें हैं उनकी सबसे ज्यादा कठिनाई है। बड़े स्थान पर रहने वालों को शायद इतनी कठनाई नही होती होगी लेकिन जो दूर छोटे-छोटे टापुओं पर बसे भारतीय लोग हैं उनके लिए मेरा यह प्रयास रहेगा कि आने वाले दिनों में उनकी किस रूप में मदद हो सकती है।

आप देख रहें हैं कि पिछले वर्ष भारत में चुनाव हुआ, चुनाव भारत में था लेकिन नतीजों के लिए आप ज्यादा इन्तेजार करते थे | पटाखे यहां फूट रहे थे। मिठाई यहां बांटी जा रही थी, यह जो आनंद था आपके मन में वो आनंद अपेक्षाओं के गर्व में से पैदा हुआ था| उसके साथ अपेक्षाएं जुड़ी है और मैं आपको विश्‍वास दिलाता हूं कि जन आशाओं, आकांक्षाओं के साथ हिंदुस्‍तान की जनता ने भारत में सरकार बनाई है पिछले दस महीने का मैं अनुभव से कह सकता हूं कि यह सारे सपने साकार होंगे। मैं अनुभव से कह सकता हूं.. अब मैं किताबी बात नहीं कर रहा हूं। किसी अखबार के Article के द्वारा प्राप्‍त की हुई जानकारी के आधार पर नहीं कह रहा हूं। मैं अनुभव से कह रहा हूं कि हिंदुस्‍तान को गरीब रहने का कोई कारण ही नहीं है।

स्‍वामी विवेकानंद ने कहा था कि मैं मेरी आंखों के सामने देख रहा हूं कि मेरी भारत माता एक बार जगत गुरू के स्‍थान पर विराजमान होगी और मेरी विवेकानंद में बहुत श्रद्धा है। विवेकानंद जी 1895 में फ्रांस आए थे और दोबारा 1900 में आए थे। दोनों बार आए, एक बात उन्‍होंने बड़े मजेदार कही थी, उन्‍होंने कहा था कि फ्रांस यह यूरोप की सभ्‍यता का नेतृत्‍व उसके हाथ में है और उन्‍होंने कहा कैसा, उन्‍होंने कहा जैसे गंगा की पहचान गौमुख से होती है, वैसे यूरोपीय सभ्‍यता की पहचान फ्रांस से होती है। यह वो भूमि है, जहां स्‍वयं महात्‍मा गांधी 31 में आए थे। यह भूमि है जहां मैडम कामा, श्‍याम जी कृष्‍ण वर्मा, जो आजादी के लड़ाई में नेतृत्‍व करना जो एक बहुत बड़ा तबका था वो इसी धरती पर रहता था लम्‍बे अरसे तक और पहला तिरंगा उसका निर्माण कार्य फ्रांस की धरती पर हुआ था और जर्मनी में फहराया गया था।

मैडम कामा, सरदार श्री राणा और श्‍याम जी कृष्‍ण वर्मा यह त्रिकुटी उस समय हिंदुस्‍तान की क्रांति का नेतृत्‍व करते थे। आज भी मुझे इस बात का गर्व है कि मैं मुख्‍यमंत्री बनने के बाद एक कार्य करने का मुझे सौभाग्‍य मिला। वैसे बहुत से अच्‍छे काम जो है वो मेरे लिए बाकी रहे है, वह मुझे ही पूरे करने है। श्‍याम जी कृष्‍ण वर्मा जिन्‍होंने हिंदुस्‍तान में आजादी की और उसमें भी क्रांतिकारी क्षेत्र में काम करने की दिशा में एक अलख जगाई थी। London में अंग्रेजों की नाक के नीचे उन्‍होंने India House बनाया था और वीर सावरकर, सभी क्रांतिकारियों को वो Scholarship देकर यहां बुलाते थे और उनको तैयार करते थे। बहुत बड़ा उनका काम था। 1930 में उनका स्‍वर्गवास हुआ। आजादी की लड़ाई में बड़ा नेतृत्‍व करने वाले व्‍यक्ति थे। उन्‍होंने एक चिट्ठी लिखी कि मेरे मरने के बाद मेरी अस्थि संभालकर रखी जायें। मैं तो जीते जी आजाद हिंदुस्‍तान देख नहीं पाया, लेकिन मेरे मरने के बाद जब भी हिंदुस्‍तान आजाद हो मेरी अस्थि हिंदुस्‍तान जरूर ले जाई जायें। देखिए देशभक्ति, देशभक्ति करने वालों का दिमाग किस प्रकार से काम करता है और वो सोचते थे। 1930 में उनका स्‍वर्गवास हुआ। 2003 में जब मैं गुजरात में मुख्‍यमंत्री था। 2001 में मुख्‍यमंत्री बना फिर मैंने लिखा-पट्टी शुरू की। स्विट्ज़रलैंड को लिखा, जिनेवा में कोशिश की, भारत सरकार को लिखा। 2003 में मुझे अनुमति मिली। उनकी मृत्‍यु के 70 साल के बाद मैं जिनेवा आया, उनकी अस्थि रखी थीं, देखिए विदेशी लोग भी भारत के एक व्‍यक्ति जिसकी अपेक्षा थी मेरी अस्थि संभालकर रखना, हिंदुस्‍तान को तो 15 अगस्‍त को आजाद होने के दूसरे दिन ही यहां आ जाना चाहिए था, लेकिन भूल गए, हो सकता है कि यह पवित्र काम मेरे हाथ में ही लिखा होगा, तो मैं यहां आया और उनकी अस्थि लेकर के गया और कच्‍छ मांडवी जहां उनका जन्‍म स्‍थान था वहां India House की replica बनाई है और एक बहुत बड़ा उनका शहीद स्‍मारक बनाया है। आपको भी कच्‍छ की धरती पर जाने का सौभाग्‍य मिले तो आप जरूर उस महापुरूष को नमन करके आना। कहने का तात्‍पर्य यह है कि हमारी फ्रांस की धरती पर भारत के लिए काम करने वाले, सोचने वाले आजादी के दीवाने भी इस धरती पर से अपना प्रयास करते रहते थे।

भारत का और फ्रांस का एक विशेष संबंध रहा है। इन दिनों मैं यह अनुभव करता हूं कि फ्रांस में कोई दुर्घटना घटे, अगर आतंकवादी घटना फ्रांस में होती है, तो पीड़ा पूरे हिंदुस्‍तान को होती है और हिंदुस्‍तान के साथ कोई अन्‍याय हो, तो फ्रांस से सबसे पहले आवाज उठती है। फ्रांस का और भारत का यह नाता है। कल से आज तक हमने कई बड़े महत्‍वपूर्ण फैसले किए हैं, बहुत सारे समझौते किए हैं, उसमें रक्षा के क्षेत्र में बहुत महत्‍वपूर्ण किए, विकास के लिए बहुत महत्‍वपूर्ण किए। और भारत में इन दिनों एक विषय लेकर के चल रहा हूं ‘मेक इन इंडिया’। मैं दो दिन में ज्‍यादा से ज्‍यादा दस बार ‘मेक इन इंडिया’ बोला हूं शायद। लेकिन फ्रांस का हर नेता 25-25 बार ‘मेक इन इंडिया’ बोला है। यहां के राष्‍ट्रपति हर तीसरा वाक्‍य मेक इन इंडिया कहते हैं। यानी कि हमारी बात सही जगह पर, सही शब्दों में पहुंच चुकी है| हर किसी को लग रहा है और इसलिए भारत ने बड़े महत्‍वपूर्ण initiative लिये हैं। Insurance में हमने FDI के लिए 49% open up कर दिया है, रेलवे में 100% कर दिया है। फ्रांस defense के क्षेत्र में बहुत बड़ी भूमिका अदा कर सकता है। भारत के पास आज मानव बल है। मैं आज एयरबस को देखने गया था उसके कारखाने पर, वहां भी मैं देख रहा था सारे Indian लोग काम कर रहे थे। तों मैंने कहा वहां तो बस में काम करते हो, यहां एयरबस में काम करते हो। भारत में बहुत अवसर है मित्रों और इसलिए विश्‍व में जो भी श्रेष्‍ठ है वो हिंदुस्‍तान की धरती पर होना चाहिए और उससे भी आगे जाना चाहिए। फ्रांस में इस बार जो समझौते हुए।

एक जमाना था जब हम रेलवे का वर्णन करते थे, तो यह कहते थे यह देश को जोड़ता है। लेकिन मैं मानता हूं कि रेलवे की ताकत है सिर्फ हिंदुस्‍तान को जोड़ने की नहीं, हिंदुस्‍तान को दौड़ाने की ताकत है। बशर्ते कि हम रेलवे को आधुनिक बनाएं। Technology upgrade करें, speed बढ़ाए, expansion करे, और फ्रांस के पास Technology expertise है। कल मैं यहां रेलवे के अधिकारियों से मिला था। मैंने कहा आइये यहां भारत में बहुत सुविधाएं हैं और मैंने कहा हमारे यहां तो शहर के बीच से रेल निकलती है। सबसे मूल्‍यवान जमीन उस पर से रेल की पटरी चल रही है। तो मैंने कहा नीचे रेल चलती रहे तुम ऊपर पूरा construction करो, सात मंजिला इमारतें खड़ी करो। वहां Mall हो, Hotel हो, क्‍या कुछ न हो। देखिए कितना बड़ा हो सकता है, भारत के रेलवे स्‍टेशनों पर एक-एक शहर बसाया जाए, इतने बड़े-बड़े 20-20 किलोमीटर लंबे स्‍टेशन हैं। और जब मैंने यहां कहा, मैंने कहा मेरे देश की रेलवे इतनी बड़ी है कि 20% फ्रांस एक ही समय रेल के डिब्‍बे में होता है।

दुनिया के लोगों को भारत की जो विशालता है, इसकी भी पहचान नहीं है। उसकी क्षमताओं की पहचान की बात तो बाद की बात है हमारी कोशिश है कि दुनिया हमें जाने, हमें माने और वो दिन दूर नही है दोस्तों विश्वास कीजिए कि विश्व भारत को जानेगा भी और विश्व भारत को मानेगा भी। इन दिनों जितने भी आर्थिक विकास के पैरामीटर की चर्चा आती है, उन सारे पैरामीटर्स में सारी दुनिया यह कह रही है कि भारत की economy विश्व की सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाली economy मानी गई है। आप World Bank का record देख लीजिए, आप IMF का record देख लीजिए। अभी-अभी Moody ने बताया, मोदी ने नहीं। हर पैरामीटर, हर जगह से एक ही आवाज उठ रही है कि हिंदुस्‍तान आज दुनिया की सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाली economy है। तो फिर मैं दुनिया को इतना ही कहता हूँ कि फिर इंतजार किस बात का? अवसर है और इस अवसर का फायदा उठाने के लिए दुनिया में स्‍पर्धा का माहौल बने वो हमारी कोशिश है। दुनिया के हर प्रकार के लोग आएं कि हां! देखिए हम यह करना चाहते हैं, आइये हम आपको अवसर देंगे। हम भी आगे बढ़ेंगे आप भी आगे बढि़ए। विकास के लिए अनेक संभावनाएं हैं। लेकिन यह विकास के मूल में यह इतने Foreign Direct Investment आएं, हिंदुस्‍तान में रेलवे को काम हो, हिंदुस्‍तान में युद्ध के जहाज बनें, हिंदुस्‍तान के अंदर युद्ध के लिए submarine बने, युद्ध के अंदर Health सेक्टर के लिए equipment manufacturing हो, यह सारा काम जो हम करना चाहते हैं, क्‍यों? इसका मूल कारण है मैं चाहता हूं कि हिंदुस्‍तान के नौजवान को हिंदुस्‍तान की धरती पर रोजगार मिले। उसकी क्षमता, उसकी योग्‍यता के अनुसार उसको काम का अवसर मिले। मैं नहीं चाहता हिंदुस्‍तान के नौजवान को अपने बूढ़े मां-बाप को अपने गांव छोड़कर के रोजी-रोटी के लिए कहीं बाहर जाना पड़े, मैं नहीं चाहता। हम देश ऐसा बनाने चाहते हैं और इसलिए विकास गरीब से गरीब व्‍यक्ति की भलाई के लिए हो। विकास नौजवान के रोजगार के लिए हो।

मैं यहां की कंपनी वालों को समझा रहा था। मैंने कहा देखिए दुनियाभर में आपको कारखाने लगाने के लिए बहुत सारे incentives मिलते होंगे, लेकिन 20 साल के बाद वहां काम करने के लिए आपको कोई इंसान मिलने वाला नहीं है। सारी दुनिया बूढ़ी होती चली जा रही है। एक अकेला हिंदुस्‍तान है जो आज दुनिया का सबसे नौजवान देश है। 65 प्रतिशत जनसंख्‍या Below 35 है। 20 साल के बाद दुनिया को जो work force की जरूरत है वो work force एक ही जगह से मिलने वाला है और उसका पता है हिंदुस्‍तान| तो दुनिया के बड़े-बड़े उद्योगकार विश्‍व के किसी भी कोने में कारखाना क्यों न लगाते हो लेकिन वो दिन दूर नहीं होगा तो उनकों कारखाना चलाने के लिए इंसान के लिए हिंदुस्‍तान को धरती पर आना पड़ेगा, तो मैं उनको समझा रहा हूं, मैं उनको समझा रहा हूं कि 20 साल के बाद खोजने के लिए आओगे उससे पहले अभी आ जाओ भाई। तो हमारे लोग आपके काम के लिए तैयार हो जाएंगे तो दुनिया के किसी भी देश में आपका कारखाना संभाल लेंगे। हमारे पास Demographic dividend है।ये हमारी बहुत बड़ी ताकत है।

भारत और फ्रांस का नाता लोकतांत्रिक मूल्‍यों के कारण भी है। बुद्ध और गांधी की धरती पर पैदा होने वाले हम लोग जन्‍म से एक मंत्र में जुड़े हुए हैं। ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ |पूरा विश्‍व एक परिवार है, यह हमारे संस्‍कारों में है... पूरा विश्‍व एक परिवार है। हर किसी को हम अपना मानते हैं| हम किसी को पराया नहीं मानते और यह फ्रांस की धरती है जहां इसका मंत्र आज भी गुनगुनाती है दुनिया, जहां पर स्‍वतंत्रता, समानता और बंधुता की चर्चा हुई है। दोनों मूल्‍यों में एक ही समानता है और इसलिए दोनों मिलकर बहुत कुछ कर सकते हैं। ये ताकत है इसके अंदर है। और हम आने वाले दिनों में इस ताकत के आधार पर आगे बढ़ेंगे।

इस बार एक महत्‍वपूर्ण निर्णय हुआ है कि जो हिंदुस्‍तान के नौजवान यहां पढ़ने के लिए आते हैं और पढ़ाई के बाद बोरिया बिस्तर लेकर जाओ वापस, वो दिन गए। अब आपका मन यहां लग गया है तो आप यहां रह सकते हैं। आपको पढ़ाई के बाद भी कुछ समय मिलेगा यहां पर काम करने के लिए। फ्रांस सरकार के साथ, फ्रांस ने इस बात को माना है, मैं समझता हूं भारतीय नागरिकों के लिए खासकर युवा पीढ़ी के लिए जो पढ़ने के लिए यहां आते हैं, उनके लिए यह बहुत बड़ा अवसर है। यहां पर आने के बाद, पढ़ने के बाद जो कुछ भी उन्‍होंने सीखा है, जाना है उसको Experience करने के लिए और अधिक Practice के लिए, रोजी-रोटी कमाने के लिए, पढ़ाई का खर्चा निकालने के लिए भी ताकि घर पर जाकर कर्ज न ले जाएं, सारी सुविधा बढ़ेगी| मैं समझता हूं इससे आने वाले दिनों में लाभ होने वाला है। तो विकास की नई ऊंचाईयों पर एक बार पहुंचना है | विश्‍व भर में हमारे फैले हुए भारत के भाई बहनों के बारे में उनकी ताकत को भी उपयोग करना है, उनको सुरक्षा भी देनी है। उनके सम्‍मान के लिए भी भारत की जो आज पहुंच है, उसका बारीकी से उपयोग करना है उस दिशा में हम प्रयास कर रहे हैं और इस प्रयास को विश्‍व, विश्‍व साहनु को प्रतिषाद दे रहा है।

पिछले दिनों में भारत में ऐसी घटनाएं घटीं हैं जो सामान्‍य तौर पर हमारे देश में सोचा ही नहीं जा सकता और सुने तो भरोसा नहीं हो पाता है। क्‍योंकि दूध का जला जो रहता है न वो छांछ भी फूंक-फूंक कर पीता है। हमने इतना बुरा सुना है, इतना बुरा देखा है कि कभी-कभी अच्‍छा पर भरोसा करने में थोड़ी देर लग जाती है। आपने अभी-अभी देखा होगा कोयले का कारोबार, समझ गए, सबको पता है क्‍या-क्‍या हुआ सब मालूम है। अभी क्‍या हुआ है ये मालूम नहीं होगा। देखिए अच्‍छी बात को पहुंचाने के लिए मुझे रु-ब-रू जाना पड़ता है। 204 कोयले की खदान वो ऐसी ही दे दी थी। ऐसे ही, अच्‍छा-अच्छा आज आप आये हैं ठीक है मेरी पेन लेते जाओ, अच्‍छा अच्‍छा आज आप आये हैं ठीक है मेरा यह Handkerchief ले जाओ। अच्‍छा अच्‍छा यह कागज चाहिए ठीक है कोई बात नहीं ले जाओ। आप शायद पेन भी अगर किसी को देंगे तो 50 बार सोचोगे या नहीं सोचोगे। ऐसे ही पैन देते हो क्‍या, 204 कोयले की खदाने ऐसे ही दे दी गई थी, दे दी गई थी। बस !! अरे भई जरा दे देना, कोई पूछने वाला नहीं था कोई। तूफान खड़ा हो गया, Court के मामले बन गए। प्रधानमंत्री तक के नाम की चर्चा होने लगी, पता नहीं क्‍या कुछ हुआ। मैं उस दिशा में जाना नहीं चाहता और न ही मैं यहां किसी की आलोचना करना चाहता हूं लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने डंडा चलाया। लेकिन हमारा नसीब ऐसा कि हमारे आने के बाद चलाया। सितंबर में सुप्रीम कोर्ट ने कह दिया कि इन 204 खदानों में से अब आप कोयला नहीं निकाल सकते हैं। अब कोयला नहीं निकलेगा तो बिजली का कारखाना कैसे चलेगा। बिजली का कारखाना नहीं चलेगा तो बिजली कहां से आएगी। बिजली नहीं आएगी तो और कारखानें कैसे चलेंगे| बिजली नहीं आएगी तो बच्‍चे पढ़ेंगे कैसे। सारा अंधेरा छाने की नौबत आ गई। सुप्रीम कोर्ट ने हमें मार्च तक का समय दिया कि ठीक है भले तुम नये आये हो हम कुछ सुनने को तैयार नहीं हैं 31 मार्च से पहले जो करना है करो, वरना 01 अप्रैल से 01 ग्राम भी कोयला नहीं निकाल सकते हो। हम नए थे, लेकिन जब चुनौतियां आती हैं तो भीतर से एक नई ऊर्जा भी पैदा होती है। जब मैं सोच रहा था कि 01 अप्रैल के बाद मेरे देश का क्‍या हाल हो सकता है, गाड़ियां रूक जाएंगी, बिजली नहीं होगी, कोयला नहीं होगा, कारखाने बंद हो जाएंगे, लोग बेरोजगार हो जाएंगे, अंधेरा छा जाएगा, बच्‍चे पढ़ाई नहीं कर पाएंगे। क्‍या देश को 01 अप्रैल तक इंतजार करते हुए बर्बाद होने देना है। मेहनत करना शुरू किया सितंबर में, रास्‍ते खोजने शुरू किए और 31 मार्च से पहले-पहले हमने प्राथमिक काम पूरा कर दिया। पहले तो मुफ्त में दे दी गई थी ठीक है, ठीक है ले जाओ, अच्‍छा –अच्‍छा आपको चाहिए रख लो , दे दिया ऐसे ही दे दिया था। हमने तय किया कि उसका Auction करेंगे और सीएजी का रिपोर्ट आया था सीएजी ने कहा था कि कोयले में One Lakh 76 Thousand Crore Rupees का घपला हुआ है। तो ये जब आंकड़े आते थे न अखबार में 176000 तो लोग मानने के लिए तैयार नहीं होते थे कि ऐसा भी कोई हो सकता है क्‍या कोई मानता नही था। हम बोलते तो थे लेकिन हमको भी भीतर से होता था कि नही यार पता नहीं लेकिन जब हमने Auction किया 204 कोयले की खदान में से अभी 20 का ही Auction हुआ है, 20 का ही है और 20 के Auction में दो लाख करोड़ रूपये मिले हैं। 204 के लिए एक लाख 76 हजार करोड़ रूपये का आरोप था अभी तो दस percent काम हुआ है और दो लाख करोड़ रूपया देश के खजाने में आया है। मेरे देशवासियों कोई सरकार अपने पूरे कार्यकाल में ये भी काम कर दे न तो भी 25 साल देश कहेगा कि अरे भाई तुम ही देश चलाओ। इतना बड़ा काम हुआ है और इसलिए जिनको कहा था न हां ले जाओ, ले जाओ , वो सब परेशान है। क्‍योंकि अब उनको जेब से पैसा देना पड़ रहा है सरकार के खजाने में जा रहा है और ये पैसा दिल्‍ली की सरकार की तिजोरी में डालने के लिए मैं नहीं सोचा, हमने सोचा यह पैसा राज्‍यों की तिजोरी में जाएगा और राज्‍यों से कहा कि गरीबी के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए infrastructure का विकास किया जाए। उद्योगों को लगाया जाए, शिक्षा में सुधार किया जाए, आरोग्‍य की सेवाओं में सुधार किया जाए और राज्‍यों पर दबाव डाला हुआ है कि इसको कीजिए और राज्य भी कौन से हैं। गुजरात में कोयले की खदान नहीं है। वरना मैं ये देता तो अखबार वाले लिखते मोदी कोयले के खदान के पैसे राज्‍यों इसलिए देता है क्‍योंकि कोयला गुजरात में था। गुजरात में एक ग्राम कोयला भी नहीं निकलता है। ये कोयले के पैसे जा रहे हैं बिहार को, ओडिशा को, झारखंड को, पश्चिम बंगाल को, उन राज्‍यों में जाएंगे जहां पर विकास की संभावनाएं हैं लेकिन अभी काफी पीछें हैं उनको मुझे आगे ले जाना हैं।

देश का पूरा पूर्वी हिस्‍सा आप हिन्‍दुस्‍तान का नक्‍शा देखिए पश्चिम के तौर पर कुछ न कुछ दिखता है गोवा हो, कर्नाटक हो, महाराष्‍ट्र हो, राजस्‍थान हो, गुजरात हो, हरियाणा हो कुछ न कुछ दिखता है लेकिन जैसे पूरब की ओर जाएं तो हमें दिखता है कि ये इलाका कब आगे बढ़ेगा जो पश्चिम में आगे बढ़ा है, सबसे पहले मेरा मन का सपना है पूरब के इस इलाके को पश्चिम के बराबर में तो ला दूं । फिर आप देखिए पूरब, पश्चिम से भी आगे निकल जाएगा ये इतनी ताकत है पूरब में। सारी प्राकृति सम्‍पदा के वहां भंडार वहां पड़े हुए हैं। एक बार विकास की दिशा में अगर चल पड़े तो फिर गाड़ी अटकने वाली नहीं है। कहने का तात्‍पर्य यह है साथियों कि देश विकास की नई ऊंचाईयों को पार करता हुआ आगे बढ़ता चला जा रहा है।

हमने प्रधानमंत्री जन धन योजना का कार्यक्रम शुरू किया। 15 अगस्‍त को मैंने घोषित किया और हमने कहा था कि 26 जनवरी तक मुझे पूरा करना है। हिन्‍दुस्‍तान में गरीब से गरीब व्‍यक्ति का बैंक का खाता होना चाहिए। बैंकिंग व्‍यवस्‍था आज के युग में Finance की गतिविधि की मुख्‍यधारा है उससे कोई अछूता नहीं रहना चाहिए और मैं बड़े गर्व के साथ कहता हूं डेढ़ सौ दिन के भीतर-भीतर इस देश में ये काम पूरा हो गया । करीब 14 करोड़ लोगों के नए खाते खुल गए। 14 करोड़ लोगों के, यानी फ्रांस की जनसंख्‍या से भी ज्‍यादा। अब आप देखिए कोई काम करना तय करे कि कैसे हो सकता है, उसके बाद हमने कहा कि हिन्‍दुस्‍तान में घर के अंदर जो गैस सिलेंडर जो होते हैं वो सब्सिडी से मिलते हैं। उसमें भी सरकार सब्सिडी देती है। हमने कहा यह सब्सिडी हम सीधी बैंक Account में जमा करेंगे। आप समझ गए ना कि बैंक Account में सीधी क्‍यों दी गई क्‍योंकि पहले कहीं और जाती थी और दुनिया में सबसे बड़ी घटना हैं, दुनिया में सबसे बड़ी घटना है, 13 करोड़ लोगों के बैंक खाते में सीधी गैस सब्सिडी Transfer हो गई उनके खातों में, खाते में जमा हो गई और उसके कारण बिचौलिए बाहर, leakages बंद, Corruption का नामोनिशान नहीं है और सामान्‍य मानविकी को लाभ हुआ या नहीं हुआ।

इसके बाद ये जमाना कैसा है कोई कुछ छोड़ने को तैयार होता है क्‍या, कोई छोड़ता है क्‍या, नहीं छोड़ता। लाल बहादुर शास्‍त्री ने एक बार देश को कहा था जब भारत-पाक की लड़ाई हुई थी तब लाल बहादुरी शास्‍त्री जी ने कहा था कि एक समय खाना छोड़ दीजिए, सप्‍ताह में एक दिन खाना छोड़ दीजिए, एक टाइम। हर सोमवार उन्‍होंने बताया सोमवार को एक समय ही खाना कीजिए, दो समय मत खाइये। और लाल बहादुर शास्‍त्री ने जब कहा था हिंदुस्‍तान की उस पीढ़ी को याद होगा, पूरा हिंदुस्‍तान सप्‍ताह में एक दिन एक समय खाना नहीं खाता था| क्‍यों? क्‍यों‍कि देश लड़ाई लड़ रहा था, अन्‍न बचाना था। और देश ने लाल बहादुर शास्त्री के शब्‍दों पर भरोसा करके खाना छोड़ दिया था। मेरे मन में विचार आया कि इस देश के लोगों में एक अद्भुत ताकत है। इस देश की जनता पर भरोसा करना चाहिए। हिंदुस्‍तान के नागरिकों पर विश्‍वास करना चाहिए। और हमने ऐसे ही बातों-बातों में एक बात कह दी। हमने कहा कि भई जो अभी सम्‍पन्‍न लोग हैं। उन्‍होंने यह गैस सिलेंडर की सब्सिडी लेनी चाहिए क्‍या । यह दो सौ, चार सौ रुपये में क्‍या रखा है। क्‍या छोड़ नहीं सकते क्‍या। ऐसी ही हल्‍की फुल्‍की मैंने बात बताई थी। और मैंने देखा कि करीब-करीब दो लाख लोगों ने स्‍वेच्‍छा से गैस सिलेंडर की सब्सिडी लेने से मना कर दिया, तो हौसला और बुलंद हो गया। मैंने कहा कि भई देखिए यह देश वैसा ही है, जैसा लाल बहादुर शास्‍त्री के जमाने में था। तो मैंने फिर सार्वजनिक रूप से लोगों को कहा कि अगर आप सम्‍पन्‍न है, आप afford कर सकते हैं तो आप गैस सिलेंडर पर जो सब्सिडी मिलती हैं छोड़ दीजिए और परसों तक मुझे पता चला करीब-करीब साढ़े तीन लाख लोगों ने छोड़ दी। अब उसके कारण पैसे बच गए, तो क्‍या करेंगे हमने तय किया इन पैसों को सरकार की तिजोरी में नहीं डालेंगे। लेकिन उन गरीब परिवारों को जिस गरीब परिवार में लकड़ी का चूल्‍हा जलता है, घर में धुंआ होता है, बच्‍चे रोते हैं धुएं में, मां बीमार हो जाती है। लकड़ी के चूल्‍हे से जहां रसोई पकती है। ऐसे परिवारों को यह सिलेंडर वहां Transfer कर दिया जाएगा, सब्सिडी वहां Transfer कर दी जाएगी।

यह जो दुनिया climate change की चिंता करती है न, climate change के उपाय इसमें है। Global Warming का जवाब इसमें है। जंगल कटना बंद तब होगा, जब चूल्‍हे जलाना बंद होगा। धुंआ निकलना तब बंद होगा, जबकि हम smoke free व्‍यवस्‍थाओं को विकसित करेंगे। समाज के सम्‍पन्‍न लोगों को मदद मांग कर के उसको Transfer करने का काम उठाया और देखते ही देखते अभी तो एक हफ्ता हुआ यह बात किए हुए, साढ़े तीन लाख लोग आगे आए और उन्‍होंने surrender कर दिया। मेरा कहने का तात्‍पर्य यह है कि चाहे हिंदुस्‍तान हो या हिंदुस्‍तान के बाहर हर हिंदुस्तानी के दिल में एक जज्‍बा दिखाई दे रहा है कि देश में कुछ करना है, देश के लिए कुछ करना है और करके कुछ दिखाना है। इस सपने को लेकर देश चल रहा है।

मैं फिर एक बार देशवासियों, मैं आपको विश्‍वास दिलाता हूं भारत एक पूरी शक्ति के साथ खड़ा हो चुका है। देश तेज गति से आगे बढ़ने के लिए संकल्‍प कर चुका है। देश ने अब पिछले दिनों में जितने निर्णय किए हैं उन निर्णयों को सफलतापूर्वक सिद्ध कर दिया है। इन बातों के भरोसे मैं कहता हूं आपकी अपनी आंखों के सामने आपने जैसा चाहा है वैसा हिंदुस्‍तान बनकर रहेगा, मेरी आप सबको बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

आपने इतना प्‍यार दिया, इतनी बड़ी संख्‍या में आए और उन टापुओं पर जो नागरिक बैठे हैं उनको भी मेरी तरफ से बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। आप सबको भी बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। पूरी ताकत से मेरे साथ बोलिए,दोनों हाथ ऊपर कर बोलिए – भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय।

बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

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উত্তর প্রদেশকি হরদোইদা গঙ্গা এক্সপ্রেশৱে শঙ্গাবা মতমদা প্রধান মন্ত্রীনা পিখিবা ৱারোল
April 29, 2026
This transformative infrastructure project will boost connectivity and drive progress across Uttar Pradesh: PM
Just as Maa Ganga has been the lifeline of UP and this country for thousands of years, similarly, in this era of modern progress, this expressway passing near her, will become the new lifeline of UP's development: PM
Recently, I had the opportunity to dedicate the Delhi-Dehradun Expressway to the nation.
I had then remarked that these emerging expressways are the lifelines shaping the destiny of a developing India, and these modern pathways are today heralding India's bright future: PM
Ganga Expressway will not only connect one end of UP to the other, it will also bring limitless possibilities of the NCR closer: PM

ভারত মাতা কি জয়।

গঙ্গা মৈয়া কি জয়।

গঙ্গা মৈয়া কি জয়।

উত্তর প্রদেশকি রাজ্যপাল, অনন্দিবেন পতেল, উত্তর প্রদেশকি মুখ্য মন্ত্রী শ্রী য়োগী আদিত্যনাথ, উপ মুখ্য মন্ত্রী কেসৱা প্রসাদ মৌর্য়, ব্রিজেস পাথক, কেন্দ্রগী মন্ত্রীমন্দলদা লৈবিরিবা ঐহাক্কি মরুপ জিতিন প্রসাদ অমদি পঙ্কজ চৌধরিজি, য়ু.পি. সরকারগী মন্ত্রীশিং, সাংসদ অমসুং লেজিস্লেতিব এসেম্বলীগী মীহুৎশিং, অতৈ মীয়ামগী মীহুৎশিং অমদি ঐহাক্কী নুংশিজরবা ইচিল-ইনাও অমসুং ইচে-ইচলশিং ময়াম অমা মফম অসিদা তিনবিরি।

 

খ্বাইদগী ইহান হান্না ঐহাক্না ভগবান নরসিংহগী শেংলবা লম অসিবু ইকায় খুম্নজরি। ইমা গঙ্গানা মফম অসিদগী কিলোমিতর খরখক্তদা মহাক্কি থৌজাল পিবিদুনা চৎলি। মরম অদুনা মফম পুম্নমক অসি তিরথ চৎপাগী মফম অমদগী হেনবা নত্তে। অদুগা ঐহাক্না থাজৈ মদুদি উত্তর প্রদেশকি এক্সপ্রেশৱেগী থৌজাল অসিসু ইমা গঙ্গাগী থৌজাল অমনি। হৌজিক্তি অদোম্না পূং খরখক্তদা শঙ্গমদা য়ৌবা ঙম্লে, অমসুং কাশিদা লৈবা বাবাদা চৎলবা মতুংদা হল্লকপা য়ারে।

মরুপশিং,

ইমা গঙ্গানা চহি লিশিং কয়াদগী উত্তর প্রদেশ অমসুং লৈবাক অসিগী পুন্সি মহিং ওইদুনা লাকলিবা অদুগুম্না মোদর্ন প্রোগ্রেশকি মতম অসিদা মহাক্কি মনাক্তা চৎলিবা এক্সপ্রেশৱে অসিনা উত্তর প্রদেশকি চাওখৎ-থৌরাংগী অনৌবা পুন্সি মহিং অমা ওইরগনি। মসিসু অঙকপা থৌদোক অমনি মদুদি হৌখিবা নুমীৎ মরি-মঙা অসিদা ঐহাক ইমা গঙ্গাগী কম্পেনিদা লৈরি। এপ্রিল ২৪দা ঐহাক বঙ্গালদা লৈবা মতমদা ইমা গঙ্গাদা চৎখি, মদুগী মতুংদা ঙরাং ঐহাক কাসিদা লৈখি। ঙসি অয়ুক ঐহাক্না অমুক হন্না বাবা বিশ্বনাথ, ইমা অন্নপুরনা, অমসুং ইমা গঙ্গা চৎপগী লাইবক ফবা অমা ফংজরে। অদুগা হৌজিক, ইমা গঙ্গাগী মমিং থোনবা এক্সপ্রেশৱে অসি শঙ্গাবগী খুদোংচাবা ফংজরে। উত্তর প্রদেশ সরকারনা এক্সপ্রেশৱে অসিগী মমিং ইমা গঙ্গাগী মমিং থোনবদা ঐ হরাওই। মসিনা ঐখোয়গী চাওখৎ-থৌরাংগী মীৎয়েং অদু উৎলি অমসুং ঐখোয়গী হেরিতেজসু উৎলি। উত্তর প্রদেশকি মীওই লাখ কয়াবু গঙ্গা এক্সপ্রেশৱেদা নুংঙাইবা ফোঙদোকচরি ।

মরুপশিং,

ঙসি অসি গনতন্ত্রগী থৌরমদসু মরুওইবা নুমীৎ অমনি। হৌজিক বঙ্গালদা ভোৎ থাদবগী অনিশুবা তাঙ্কক চত্থরি, অমসুং রিপোরতশিংনা ভোৎ থাদবগী চাং য়াম্না ৱাংনা উবা ফংলি। অহানবা ফেজগুম্না মীয়াম্না মশিং য়াম্না ভোৎ থাদনবা লাকলি, অমসুং সোসিয়েল মীদিয়াদা শাংলবা ক্যুগী ইমেজশিং শন্দোকলি। বঙ্গালদা ভোৎ থাদবা অসি অকিবা লৈতবা এতমোশ্ফিয়ার অমদা পাঙথোক্লি, হৌখিবা চহি তরাগী খুজিং ৬-৭ অসিদা খনবদা ৱাবা থৌদোক অমনি। মীয়ামনা অকিবা লৈতনা মখোয়গী ভোৎ থাদরি। মসি লৈবাক অসিগী সংবিধান অমসুং লৈবাক অসিগী মপাঙ্গল কনখৎলকলিবা গনতন্ত্রগী গুন লৈবা খুদম অমনি। ঐহাক্না বঙ্গালগী অথোইবা মীয়াম্বু মখোয়গী হকশিংগী মতাংদা অসুক য়াম্না চেকশিন্না অমসুং মশিং য়াম্না ভোৎ থাদবগীদমক থাগৎপা ফোঙদোকচরি। ভোৎ থাদবা লোয়দ্রিঙৈদা হৌজিকসু পূং কয়া লেপ্লি, অমসুং গনতন্ত্রগী কুম্মৈ অসিদা চপ মান্নবা থৌনাগা লোয়ননা বঙ্গালগী মীয়ামদা শরুক য়ানবা ঐনা তকশিল্লি।

 

মরুপশিং,

মতম খরগী মমাঙদা বিহারদা মীখল পাংথোকখিবা মতমদা বিজেপি-এন.দি.এ.না অচৌবা মায়পাকাপা অমা মায়পাকাখি, মসিনা পুৱারি অমা শেমখি। ঙরাং খক্তদা গুজরাৎতা ম্যুনিসিপাল কোরপোরেশনশিং, ম্যুনিসিপালিতিশিং, দিস্ত্রিক্তা পঞ্চায়ৎশিং, তাওন পঞ্চায়ৎশিং, অমসুং তেহসিল পঞ্চায়ৎকি মীখলগী ফলশিং লাওথোকখ্রে। অদুগা অদোম উত্তর প্রদেশকি ঐহাক্কি ইচিল-ইনাওশিং, ম্যুনিসিপালিতি অমসুং পঞ্চায়ৎকি চাদা ৮০দগী ৮৫ ফাওবা বি.জে.পি. অমসুং ঐহাক্না থাজবা থম্লি মদুদি বি.জে.পি.না রাজ্য মঙা অসিদাসু পুৱারি ওইরবা মায়পাকপগী হেৎরিক অমা ফংলগনি। মে ৪গী ফলশিং অসিনা চাওখৎলবা ভারত অমগী রিজোল্ব মপাঙ্গল কনখৎহল্লগনি অমসুং লৈবাক অসিগী চাওখৎপদা অনৌবা ইনর্জি ইনজেক্ত তৌরগনি।

মরুপশিং,

লৈবাক অসিগী খোঙজেল য়াংনা চাওখৎনবগীদমক, ঐখোয়না মোদর্ন ইনফ্রাস্ত্রকচরসু য়াম্না থুনা শেমগৎকদবনি। ২০২১গী দিসেম্বরদা ঐহাক শাহজাহানপুরদা গঙ্গা এক্সপ্রেশৱেগী য়ুমফমদা লাকখি। চহি মঙা শুদ্রি, অদুগা অদোম্না উবিরমগনি, লৈবাক অসিগী খ্বাইদগী চাওবা এক্সপ্রেশৱেশিংগী মনুংদা অমা ওইরিবা উত্তর প্রদেশকি খ্বাইদগী শাংবা গ্রীন কোরিদোর এক্সপ্রেশৱে অসি চহি মঙাগী মনুংদা লোয়শিনখ্রে। ঙসি, মসি হারদোইদসু শঙ্গাবা হৌরি। মসি খক্তা নত্তনা গঙ্গা এক্সপ্রেশৱে শাবগী থবক লোয়রবা মতুংদা মসিগী শাংদোকপগী থবকসু হৌখ্রে। অথুবা মতমদা গঙ্গা এক্সপ্রেশৱে অসি মীরুৎকি মপানদা হরিদ্বার ফাওবা শাংদোক্লগনি। মসিবু মখা তানা শিজিন্ননবগীদমক ফররুখাবাদা লিঙ্ক্ এক্সপ্রেশৱে শাগনি, মসিবু অতোপ্পা এক্সপ্রেশৱেশিংগা শম্নহনগনি। মসি দবল ইনজিন সরকারগী মীৎয়েংনি! মসি বি.জে.পি.গী সরকারগী থবক্কি খোঙজেলনি! মসি বি.জে.পি.গী সরকারগী থবক তৌবগী মওংনি!

 

ইচিল-ইনাও অমসুং ইচল-ইচেশিং,

নুমীৎ খরনিগী মমাঙদা ঐহাক্না দিল্লী-দেহরাদুন এক্সপ্রেশৱে শঙ্গাবগী খুদোংচাবা ফংজখি। ঐহাক্না মতম অদুদা হায়খি মদুদি নৌনা শাবা এক্সপ্রেশৱেশিং অসি চাওখৎলকলিবা ভারতকি পাম লায়নাশিংনাি, অমসুং মোদর্ন পাম লায়নাশিং অসিনা ঙসি ভারতকি মঙাল নাইরবা তুংলমচৎকি পাওজেল পিরি।

মরুপশিং,

লম্বি অমগীদমক চহি তরাগী খুজিং কয়া ঙাইদুনা লৈবা মতম অদু লোয়খ্রে! লাওথোকখ্রবা মতুংদা ফাইলশিং অসি চহি কয়া লেংদনা লৈগনি! মীখলগী য়ুম্ফম থোনগনি, মদুগী মতুংদা সরকারশিং লাক্কনি অমসুং চৎকনি, অদুবু থবক অদুগাি খুদম অমত্তাা লৈরমলোই। করিগুম্বা মতমদা মকোক থোঙবা ওফিসিএলশিং না অরিবা ফাইলশিং থিনবা চহি অনি থবক তৌবা তাখি। দবল ইনজিন সরকার অমদা য়ুমফম শ্তোনশিং থম্মি, অমসুং হৌদোকপগী থৌরমশিংসু মতম চা না পাংথোকই। মরম অসিনা, ঙসি য়ু.পি.গী এক্সপ্রেশৱেদগী হেন্না য়াংনা করিগুম্বা অমত্তাা লৈরবদি, মসি য়ু.পি.গী চাওখৎপগী খোঙজেলনি।

মরুপশিং,

মসিগী এক্সপ্রেশৱে অসি খোঙজেল য়াংনা চেনবা লম্বি খক্তামক নত্তে। মসি অনৌবা ওইথোকপা য়াবশিং, অনৌবা মংলানশিং, অমসুং অনৌবা খুদোংচাবশিংগী থোঙ অমনি। গঙ্গা এক্সপ্রেশৱে অসি চাওরাক্না কিলোমীতর ৬০০ শাংই। মসিনা ৱেস্তরন য়ু.পি.দা লৈবা মীরুৎ, বুলন্দশাহর, হাপুর, অমরোহা, শম্ভল, অমসুং বদাওন কোন্সিল্লি; সেন্ৎরেল য়ু.পি.দা লৈবা শাহজাহানপুর, হারদোই, উন্নাও, অমসুং রায় বরেলি; প্রতাপগর অমসুং প্রয়াগ্রাজগা লোয়ননা নোংপোক য়ু.পি.গী অতোপ্পা অকোয়বদা লৈবা জিলাশিংগা লোয়ননা য়ু.পি. গঙ্গা এক্সপ্রেশৱে অসিনা মফমশিং অসিদা লৈরিবা মীওই লাখ কয়াগী পুন্সিদা অহোঙবা পুরক্লগনি।

 

মরুপশিং,

হায়রিবা মফমশিং অসি গঙ্গা তুরেল অমসুং মসিগী মনাক নকপদা লৈবা লমহাংদা খোঙহামদবা লৈমায়না থৌজাল ফংলে। অদুবু মমাঙগী সরকারশিং না লৌমীশিংবু য়েংশিনবিদবনা মরম ওইদুনা মখোয় অৱাবা তারবা মতমদা থুংলখি! লৌমীশিংগী মহৈ-মরোংশিং অচৌবা কৈথেলশিংদা য়ৌবা ঙমখিদে। কোল্দা শ্তোরেজ ফেসিলিতি অমসুং লোজিশ্তিক্সকি অৱাৎপা লৈখি। লৌমীশিং না মখোয়গী কন্না হোৎনজমলগীদমক মতিক চাবা মমল পিখিদে। হৌজিক খুদোংচাদবশিং অসি য়াম্না থুনা কোকহনবা ঙম্লগনি। গঙ্গা এক্সপ্রেশৱে অসিনা অতেনবা মতমগী মনুংদা অচৌবা কৈথেলশিংদা য়ৌবা ঙম্লগনি। মফম অসিদা লৌউ-শিংউগীদমক্তা দরকার ওইবা ইনফ্রাস্ত্রকচর শেমগৎলগনি, মসিনা ঐখোয়গী লৌমীশিংগী শেন্থোক হেনগৎহনগনি।

মরুপশিং,

গঙ্গা এক্সপ্রেশৱে অসিনা উত্তর প্রদেশকি মতোন অমখক্কা অতোপ্পা ময়ায় অমগা শম্নহনবতা নত্তনা মসিনা এন.সি.আর.গী অচৌবা পোতেন্সিয়েলসু নক্না পুরক্লগনি। গঙ্গা এক্সপ্রেশৱেদা গাড়ীশিং চেনবা খক্তা নত্ত না মসিগী বেঙ্কতা অনৌবা ইন্দস্ত্রিগী খুদোংচাবশিংসু শেমগৎলগনি। মসিগীদমক্তা হরদোইগুম্বা অতোপ্পা জিলাশিংদা ইন্দস্ত্রিয়েল কোরিদোরশিং শেমগৎলি। মসিনা হরদোই, শাহজাহানপুর, অমসুং উন্নাও য়াওনা জিলা ১২ পুম্নমক্তা অনৌবা ইন্দস্ত্রিশিং পুরক্লগনি। ফার্মাসিয়ুতিকেল অমসুং তেক্সতাইলগুম্বা তোঙান তোঙানবা সেক্তরশিংদা ক্লস্তরশিং শেমগৎলগনি। নহারোলশিংগীদমক অনৌবা থবক ফংনবগী খুদোংচাবশিংসু শেমগৎলগনি।

মরুপশিং,

ঐখোয়গী নহারোলশিং মশামক্না মুদ্রা য়োজনা অমসুং ও.দি.ও.পি.গুম্বা স্কীমশিংগী শক্তিগা লোয়ননা অনৌবা রেকোরদশিং থম্লি। মফম অসিদা অপিকপা ইন্দস্ত্রিশিং অমসুং এম.এস.এম.ই. কনেক্তিবিতি ফগৎহনবনা মখোয়গীদমক্তসু অনৌবা লম্বি হাংদোক্লগনি। মীরুৎকি শান্ন-খোৎনবগী ইন্দস্ত্রি, শম্ভলগী খুৎ-শা হৈবা, বুলন্দশহরগী সেরামীক, হরদোইগী হেন্দলুম, উন্নাওগী লেদর, অমসুং প্রতাপগরগী অম্লাগী পোৎথোকশিং পুম্নমক অসি নেশ্নেল অমসুং ইনতরনেশ্নেল মারকেৎতা অচৌবা মওংদা য়ৌরগনি। মসিনা ইমুং লাখ কয়াগী শেন্থোক হেনগৎহনগনি। ঐঙোন্দা হায়বিয়ু, মমাঙগী এস.পি.গী সরকারনা হারদোই অমসুং উন্নাওগুম্বা জিলাশিংদা ইন্দস্ত্রিয়েল কোরিদোরশিং শাবগী ৱাখল ফাওবা খনবা ঙম্লমগদ্রা? ঐখোয়গী হারদোইদা চৎপাা এক্সপ্রেশৱে অমা কনাগুম্বা অমনা খনবিরমগনি? মসিগী থবক অসি বি.জে.পি.গী সরকারগী মখাদা খক্তদা ওইথোকপা য়াই।

 

মরুপশিং,

মতম অমদা উত্তর প্রদেশ অসি তুং কোয় না চৎপা অমসুং অনাবা লৈবা রাজ্য অমা ওই না লৌনরমমী। ঙসিদি চপ মান্নবা উত্তর প্রদেশ অসি দোল্লর ত্ৃলিয়ন ১গী ইকোনোমী অমা ওইনাবা মাংলোমদা চঙশিল্লি। মসি অচৌবা পান্দম অমনি। অদুবু মসিগী মতুংদা লৈরিবা শেম শাবা অসিদি চপ মান্ননা চাওই। মরমদি উত্তর প্রদেশতা অসিগুম্বা অচৌবা পোতেন্সিয়েল লৈরি। উত্তর প্রদেশতা লৈবাক অসিগী খ্বাইদগী চাওবা নহা ওইরিবা মীশিংগী পোতেন্সিয়েল লৈরি। মসিগী পাঙ্গল অসি ঐখোয়না উত্তর প্রদেশপু মেন্যুফেকচরিং হবা অমা ওইহন্নবা শিজিন্নরি। উত্তর প্রদেশতা অনৌবা ইন্দস্ত্রিশিং অমসুং ফেক্তারিশিং লিংখৎলগনি। মফম অসিদা অচৌবা ইনভেস্তমেন্তশিং লাকপা মতমদা খক্তদা ইকোনোমীক প্রোগ্রেশকি থোঙ হাংদোক্কনি, নহারোলশিংদা থবক ফংবগী খুদোংচাবা পিরগনি।

ইচিল-ইনাও অমসুং ইচল-ইচেশিং,

মসিগী মীৎয়েং অসি ৱাখলদা থমদুনা চহি কয়াদগী লেপ্ত না থবক পায়খত্তুনা লাকলি। মতম অমদা মায়গ্রেসনগীদমক্তা খঙনরম্বা উত্তর প্রদেশ অসি হৌজিক্তি ইনভেস্তর্স সমীৎ অমসুং ইন্দস্ত্রিয়েল কোরিদোরগীদমক খঙনরে হায়বা অদোম পুম্নমক্না মশামক্না উবা ফংলি। লৈবাক শিনবা থুংনা অমসুং মালেমগী কম্পেনিশিংনা উত্তর প্রদেশকি ইনভেস্তর শমীৎতা শরুক য়ারি। উত্তর প্রদেশতা লুপা কোতি লিশিং কয়া শেল থাদরি। করিগুম্বা ঙসি মালেমদা ভারত অসি অনিসুবা খ্বাইদগী চাওবা মোবাইল ফোন মেন্যুফেকচরর ওইরবদি, মসিদা উত্তর প্রদেশকি মশক থোকপা কন্ত্রীব্য়ুশন অমা লৈরি। ঙসিদি ভারতনা পুথোকপা মোবাইল ফোনশিংগী শরুক অহুম থোকপগী অমদি ঐখোয়গী রাজ্যদা শাবনি। নুমীৎ খরনিগী মমাঙদা ঐহাক্না নোইদাদা সেমিকন্দক্তর প্লান্ত অমগী য়ুম্ফম থোনখি।

মরুপশিং,

ময়াম পুম্নমক্না খঙবিরিবা অদুনি মদুদি এ.আই.গী মতম অসিদা সেমিকন্দক্তরশিং অসি অচৌবা লম অমা ওইরক্লি। মসিদাসু মাংজিল থানবা উত্তর প্রদেশনা মাংলোমদা চঙশিল্লি। তুংদা ঙমখৈ লৈতবা খুদোংচাবশিং লৈবা পাক চাওরবা লম অমা উত্তর প্রদেশকি মীয়ামগীদমক হাংদোক্লি।

 

মরুপশিং,

উত্তর প্রদেশকি ইন্দস্ত্রিগী চাওখৎ-থৌরাং অসিসু ভারতকি স্ত্রেতেজিক পাঙ্গল ওইরক্লি। ঙসি লৈবাক অসিগী দিফেন্স কোরিদোর অনিগী মনুংদা অমদি উত্তর প্রদেশতা লৈরে। অচৌবা দিফেন্স কম্পেনিশিং না মফম অসিদা ফেক্তারিশিং লিংখৎলি। মালেমগী ওইনা শকখঙলবা ব্রহমোশগুম্বা মীশাইলশিং উত্তর প্রদেশতা শারি। দিফেন্স ইক্বিপমেন্তশিং শাবদা মথৌ তাবা অপিকপা শরুকশিং শপ্লাই তৌনবা এম.এস.এম.ই. মসিনা উত্তর প্রদেশকি এম.এস.এম.ই. অপিকপা জিলাশিংদসু হৌজিক্তি নহারোলশিংনা অচৌবা ইন্দস্ত্রিশিংদা য়াওবগী মংলান মংফাওনহনবা ঙম্লে।

মরুপশিং,

ঙসি উত্তর প্রদেশ অসি অসুক য়াম্না য়াংনা চাওখৎলক্লি মরমদি উত্তর প্রদেশনা অরিবা রাজনিতিদা অহোঙবা পুরকপগা লোয়ননা অনৌবা মশক অমা শেমগৎলে । নিংশিংবিয়ু, মতম অমদা উত্তর প্রদেশ অসি পোৎচৈশিংগীদমক খঙনরম্মি। ঙসিদি চপ মান্নবা রাজ্য অদু লৈবাক অসিদা খ্বাইদগী য়াম্না এক্সপ্রেশৱে লৈবা রাজ্য ওইরে। হান্নদি য়ুমলোননরিবা জিলাশিং ফাওবা চৎপাদা অৱাবা ওইরম্মি। অদুবু ঙসিদি উত্তর প্রদেশতা ইনতরনেশ্নেল এয়রপোরৎ মঙা য়াওনা এয়রপোরৎ ২১ লৈরে । নোইদা ইনতরনেশনেল এয়ারপোরতসু হৌদোকখ্রে। নোইদা ইনতরনেশ্নেল এয়রপোরৎ অসি গঙ্গা এক্সপ্রেশৱেদগী পূং খরগী মনুংদা চৎলগা লৈ।

মরুপশিং,

ঐখোয়গী উত্তর প্রদেশ অসি ভগবান রাম অমসুং ভগবান কৃষ্ণগী লমনি। অদুবু মমাঙগী সরকারশিংগী থবকশিং না মরম ওইদুনা ক্রাইম অমসুং জঙ্গল রাজ অসি য়ু.পি. য়ু.পি.গী মাফিয়াশিংদা ফিল্মশিং শেমখি। অদুবু হৌজিক্তি লৈবাক শিনবা থুংনা য়ু.পি.গী লো অমসুং ওরদর অসি খুদম ওই না পনখ্রে।

 

মরুপশিং,

শক্তি মাংখ্রবা অমসুং রিসোর্স লৌথোকপগী থবক্তা য়াওরবা সমাজৱাদি পার্তিনা উত্তর প্রদেশকি প্রোগ্রেশ অসিবু নুংঙাইহনবা ঙমদ্রি। মখোয়না উত্তর প্রদেশপু অমুক হন্না হৌখিবা মতমদা পুশিল্লকপা পামলি। মখোয়না খুন্নাই অসিবু অমুক হন্না খায়দোকপা অমসুং খায়দোকপা পাম্মী।

মরুপশিং,

সমাজৱাদি পার্তি অসি চাওখৎ-থৌরাংগী মায়োক্তা অমসুং নুপীগী মায়োক্তা লৈবা অনিমক ওইরি। হন্দক্কী মতম অসিদা লৈবাক অসিনা সমাজৱাদি পার্তি অমসুং কংগ্রেশগুম্বা পার্তিশিংগী অশেংবা মওং মতৌ অদু অমুক হন্না উবা ফংলে। কেন্দ্রদা লৈবা এন.দি.এ.গী সরকারনা পার্লিয়ামেন্ততা নারি শক্তি বন্ধন এমেন্দমেন্ত হৌদোকখি। করিগুম্বা মসিগী এমেন্দমেন্ত অসি পাস তৌরম্লবদি, নুপীশিংনা ২০২৯গী মীখলদগী হৌনা লেজিস্লেতিবা এশেম্বালি অমসুং লোক শভাদা রিজরবেশন ফংলমগনি! ঐখোয়গী ইমা অমসুং ইচে মশিং য়াম্না এম.পি., এম.এল.এ. ওইরমগনি অমসুং দিল্লী অমসুং লখনৌদা য়ৌরম্লগনি। অমসুং মদুসু, অতোপ্পা ক্লাস অমত্তগী সিৎ হন্থহনদনা! অদুবু সমাজৱাদি পার্তিনা মসিগী এমেন্দমেন্ত বিল অসিগী মায়োক্তা ভোৎ থাদখি।

মরুপশিং,

মসিগী বিল অসিনা রাজ্য পুম্নমক্কি সিৎশিং হেঙ্গৎলম্লগনি। ঐখোয়না পার্লিয়ামেন্ততা ময়েক শেঙনা হায়খি মদুদি রাজ্য পুম্নমক্কি সিৎশিং অসি চপ মান্নবা চাংদা হেনগৎলগনি। অদুবু উত্তর প্রদেশপু লান্না লমজিংদুনা রাজনিতি তৌরিবা দি.এম.কে.গুম্বা পার্তিশিংনা উত্তর প্রদেশকি সিৎশিং হেনগৎলক্কনি হায়বগী ৱাফম অসি য়ানিংদবা ফোঙদোকখি। অদোম্না উবিরমগনি, সমাজৱাদি পার্তিনা পার্লিয়ামেন্ততা মখোয়গী খোঞ্জেল অদু ইকোক নোঞ্জরম্মি। এস.পি.গী মেম্বরশিং অসিনা অদোমগী ভোৎ লৌদুনা পার্লিয়ামেন্ততা চৎলু, মদুগী মতুংদা পার্লিয়ামেন্ততা উত্তর প্রদেশকি মীয়াম্বু লান্না লমজিংবিরিবা মীওইশিংগা লোয়ননা লেপ্লি। মরম অসিনা উত্তর প্রদেশকি মীয়ামনা সমাজৱাদি পার্তিনা কৈদৌঙৈদা অহোঙবা পুরকপা ঙম্লোই হায়না হায়রি। মখোয়না মতম পুম্নমক্তা এন্তি-ৱুমেন পোলিতিক্সতা য়াওগনি। মখোয়না মতম পুম্নমক্তা এপিজমেন্ত অমসুং ক্রিমিনেলশিংগা লোয়ননা লৈরনি। এস.পি.না কৈদৌঙৈদসু নেপোতিজম অমসুং কাশ্তিজমগী মথকতা ৱাংখৎপা ঙম্লোই। মখোয়না মতম পুম্নমক্তা এন্তি-দিবেলপমেন্ত পোলিতিক্সতা য়াওগনি। উত্তর প্রদেশনা এস.পি. অমসুং মসিগী মরুপশিংদগী চেকশিনগদবনি।

মরুপশিং,

ঙসি লৈবাক অসিনা ৱারেপ অমখক্তংগা লোয়ননা মাংলোমদা চঙশিল্লি- চাওখৎলবা ভারতকি ৱারেপ! মসিগী ৱারেপ অসি মপুঙ ফাহনবদা উত্তর প্রদেশকি মরুওইবা থৌদাং লৈরি। ঙসি মালেম পুম্বসি করমনা লৈবগে হায়বদু অদোম পুম্নমক্না উবিরমগনি—

লান, তংদু লৈতাবা অমসুং তংদু লৈতাদবদা থুংলখি। অচৌবা লৈবাকশিংগী ফীভম অসি য়াম্না শাথিনা শোকহল্লি। অদুম ওইনমক ভারতনা চাওখৎপগী লম্বিদা চপ মান্নবা খোঙজেলদা মাংলোমদা চঙশিল্লি। মপানগী য়েক্নবশিংনা মসি পামদে। মখোয়গী শক্তিগী লমহাংদা খোঙহামদবা ইনতরনেল ফোরশ খরনা ভারতপু শোকহন্নবা হোৎনরি। অদুম ওইনমক, ঐখোয়না শাফবখক্তা নত্তনা চাওখৎ-থৌরাংগী লমদা অনৌবা মায়লশ্তোনশিংসু ফংলি। ঐখোয়না আৎমনিরভর ভারত অভিয়ান অসি মাংলোমদা পুখৎলি। ঐখোয়না খ্বাইদগী মোদর্ন ইনফ্রাস্ত্রকচর শেমগৎলি। গঙ্গা এক্সপ্রেশৱে অসি মায়কৈ অসিদা অতোপ্পা অচেৎপা খোঙথাং অমনি। ঐহাক্না থাজবা থমলি মদুদি উত্তর প্রদেশকি মীয়ামনা মখোয়গী কন্না হোতনবা অমসুং তেলেন্তকি খুৎথাংদা গঙ্গা এক্সপ্রেশৱেনা ঐখোয়গী য়ুমথোঙদা পুরক্কদবা ওইথোকপা য়াবশিং অদু খঙলগনি। মসিগী ৱারেপ অসিগা লোয়ননা অদোম পুম্নমকপু থম্মোই শেঙনা নুংঙাইবা ফোঙদোকচরি। অদোম্বু য়াম্না থাগৎচরি!

ভারত মাতা কি জয়।

ভারত মাতা কি জয়।

বন্দে মাতরম।

বন্দে মাতরম।

বন্দে মাতরম।

বন্দে মাতরম।

বন্দে মাতরম।

অদোম্বু হন্না হন্না থাগৎচরি!