Today women are excelling in every sphere: PM Modi
It is important to recognise the talent of women and provide them with the right opportunities: PM Modi
Self Help Groups have immensely benefitted people in rural areas, especially women: PM Modi
To strengthen the network of Self Help Groups across the country, Government is helping them economically as well as by providing training: PM

नमस्ते।

आप आज इतनी बड़ी तादाद में मुझे आशीर्वाद देने के लिये आए दूर दूर अपने गांव से आज करोड़ों माताएं बहनें मुझे आशीर्वाद दे रही हैं। कौन होगा जिसको एक सौभाग्य के कारण ऊर्जा न मिलती हो काम करने की हिम्मत न मिलती हो। ये आप ही लोग हैं जिसका आशीर्वाद जिसका प्यार मुझे देश के लिये कुछ न कुछ करने के लिये हमेशा नई ताक़त देता रहता है। आप सब अपने आप में संकल्प के धनी हैं। उद्यमशीलता के लिये समर्पित हैं। और आप टीम रूप में कैसे काम किया जाये,एक सामूहिक प्रयास कैसे किया जाए। मैं समझता हूं दुनिया की बड़ी – बड़ी यूनिवर्सिटीज़ को ये मेरे हिन्दुस्तान की गरीब माताएं – बहनें जिनको शायद बहुत कम लोगों को पढ़ने का सौभाग्य मिला है, लेकिन वे टीम Spirit क्या होता है, मिलजुलकर के काम कैसे करना होता है,काम का बंटवारा कैसे करना होता है शायद ही इसकी कोई कल्पना नहीं कर सकता।

महिला सशक्तिकरण की जब हम बात करते हैं, तो सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता होती है, महिलाओं को स्वयं की शक्तियों को, अपनी योग्यता को,अपने हुनर को पहचानने का अवसर उपलब्ध हो। महिलाओं को कुछ सिखाने की जरूरत नहीं पड़ती। उनके भीतर बहुत सी चीजें होती हैं। लेकिन उनको अवसर नहीं मिलता है। जिस दिन हमारी माताओं – बहनों को अवसर मिल जाता है,वो कमाल करके दिखा देती है सारी बाधाओं को पार कर देती है। और महिलाओं की ताकत देखिए क्या कुछ नहीं संभालती है वो सुबह से रात तक देखिए और कितना टाइम मैनेजमेंट परफेक्ट हो ता है उसका, अपने परिवार का गांव,समाज का जीवन बदलने के लिये उससे जो हो सकता है वो हमेशा करती है। हमारी देश की महिलाओं में सामर्थ्‍य है और सफलता के लिये कुछ कर गुजरने की ताकत भी रखती है,संघर्ष करने का हौसला भी है। जब भी महिलाओं का आर्थिक सामर्थ्‍य बढ़ा है। और मैं मानता हूं की महिलाओं के सशक्तिकरण में एक सबसे बड़ी बात होती है कि वो आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो। जिस दिन महिला आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होती है, तो वो assertive बनती हैं, परिवार में भी assertive बनती हैं, बच्‍चों को भी कहती हैं ये करो; ये मत करो,पति को भी कह सकती है ये करो; ये मत करो और इसलिये महिलाओं का आर्थिक रूप से स्वतंत्र होना हर निर्णय की भागीदारी बढ़ाने के लिये एक बहुत बड़ा कारण बनता है। और इसलिये हम लोगों का प्रयास रहना चाहिए। महिलाओं में जब आर्थिक सामर्थ्‍य बढ़ता है,उसके सामाजिक जीवन में जो कुरीतियां हैं उस पर भी प्रभाव पड़ता है। जब महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होती हैं,तो जो सामाजिक बुराइयां और जो कभी – कभी उसको सामाजिक बुराइयों से कॉम्‍प्रोमाइज़ करना पड़ता है, झुकना पड़ता है, न चाहते हुए भी बुराइयों को स्वीकार करना पड़ता है। अगर आर्थिक सामर्थ्‍य है,तो वो बुराइयों के खिलाफ जूझने के लिये तैयार हो जाती है। आज आप किसी भी सैक्टर को देखें,तो आपको वहां पर महिलाएं बहुत बड़ी संख्या में काम करती हुई दिखेंगी। कोई कल्पना कर सकता है कि हमारी माताओं – बहनों के बिना पशुपालन का काम हो सकता है,कोई कल्पना कर सकता है कि हमारी माताओं – बहनों के योगदान के बिनाहमारा कृषि क्षेत्र चल सकता है। बहुत कम लोगों को मालूम है,गांव में जाकर के देखे तो पता चलेगा कि खेती का कितना बड़ा काम हमारी माताएं बहनें करती हैं। पशुपालन तो एक प्रकार से शत-प्रतिशत आज देश में जो दूध उत्पादन होता है,मैं मानता हूं शत-प्रतिशत हमारी माताओं बहनों का योगदान है। पशुपालन में परिश्रम है उसी का परिणाम है और इसलिये हमारी हमारी माताएं-बहनें खासकर के गांव में, ग्रामीण क्षेत्र में,जो रहती हैं और उनके उद्यम से लेकर कई जरूरतों को पूरा करने के लिये गांव-गांव में सामूहिक उद्यमों के क्‍लस्‍टर को बढ़ावा मिला है और ज्यादा मिलता चले जा रहा है। इन प्रयासों को गति मिले, उसके दायरे का विस्तार हो,अधिक से अधिक लोगों को इसका लाभ मिले।

भारत सरकार दीनदयाल अंत्योदय योजना,

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन इसके तहत इसको सुनिश्चित करने के लिये काफी प्रयास कर रही है। हमारे देश के ग्रामीण इलाकों में छोटे उद्यमियों के लिये श्रमिकों के लिए सेल्फ हेल्प यूथ,स्वसहायता यूथ और मैंने देखा है बिल्कुल पढ़ी लिखी महिला नहीं होगी उसको सेल्फ हेल्प ग्रुप का मतलब क्या है उसको समझ आता है वो अंग्रेजी में बोल लेती है। ये शब्द इतना नीचे तक पहुंच गया है। कभी स्वसहायता ग्रुप कहें तो वो सोचती है कि मैं क्या बोल रहा हूं। इतना वो पोप्युलर हो गया है। ये हमारे सेल्फ हेल्प ग्रुप एक तरह से गरीबों खास कर के महिलाओं के आर्थिक उन्नति का आधार बनी है। ये ग्रुप महिलाओं को जागरूक कर रहे हैं। उन्हें आर्थिक और सामाजिक तौर पर मजबूत भी बना रहे हैं। दीनदयाल अंत्योदय योजना,राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत देश भर के ढाई लाख ग्राम पंचायतों में करोड़ों करोड़ों ग्रामीण गरीब परिवारों तक उन्होंने पहुंचने का प्रयास किया है, सफल प्रयास किया है। उन्हें स्थायी आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने लक्ष्य रखा गया है। इस योजना को सभी राज्यों में शुरू किया गया है। और मैं सभी राज्यों और वहां के अधिकारियों का भी अभिनन्दन करना चाहूंगा। जिन्होंने इस योजनाओं में लाखों करोड़ों महिलाओं तक पहुंचाकर उनके जीवन में सुधार लाने का काम किया है। और मैं तो जो District लेवल पर हमारे काम करने वाले अफसर हैं उनसे आग्रह करूंगा कि अपने District में ऐसे जो काम होते हैं। उनकी जो इमोशनल स्टोरी होती है। एकआध किताब लिखनी चाहिए। वो सरकारी जो डोक्युमेंट है वैसा नहीं आप देखि‍ए उन अधिकारियों को भी या उनके परिवारजनों को भी एक आनन्द आएगा कि कैसा अद्भुत काम हो रहा है। आपको जानकर के बहुत आश्चर्य होगा कि अब तक महिलाओं के करीब 45 लाख सेल्फ हैल्प ग्रुप बनाए गए और जिनसे तकरीबन पांच करोड़ महिलाएं सक्रिय रूप से जुड़ी हुई है। एक तरह से पांच करोड़ परिवारों के लिये एक और कमाने वाले व्यक्ति का इजाफा हुआ है। जिससे एक और इन्कम का सोर्स तैयार हुआ है। मैं आपको कुछ आंकड़े बताना चाहता हूं।

2011 से 2014 हमारी सरकार बनने के पहले अगर 2011 से 2014 तक जो कोई भी प्रगति हुई उसको अगर देखें तो पांच लाख सेल्फ हैल्प ग्रुप बने थे। और सिर्फ 50-52 लाख परिवारों को सेल्फ हैल्प ग्रुप से जोड़ा गया था। हमारी सरकार बनने के बाद 2014 से 2018 तक इस काम को प्राथमिकता दी गई इस काम का महत्व माना गया और गत चार वर्ष में 20 लाख से अधिक नए सेल्फ हैल्प ग्रुप बने हैं और सवा दो करोड़ से अधिक परिवारों को सेल्फ हैल्प ग्रुप से जोड़ा गया है। यानी पहले की तुलना में सेल्फ हैल्प ग्रुप चार गुना बढ़े हैं। और चार गुना अधिक परिवारों को इससे लाभ भी मिला है। यही दर्शाता है इस सरकार की काम करने की गति और जनकल्याण के लिये हमारी कितनी प्रतिबद्धता है,माताओं का सशक्तिकरण हमारी कितनी प्राथमिकता है। इस योजना के अंतर्गत गरीब महिलाओं के ग्रुप को ट्रैनिंग से लेकर के फंडिंग और मार्केटिंग से लेकरके स्किल डेवलपमेंट में हर प्रकार की मदद दी जाती है।

जैसा कि मैंने पहले बताया था कि देश भर के विभिन्न क्षेत्रों से सेल्फ हैल्प ग्रुप के एक सदस्य आज हमारे साथ हैं। मैं फिर एक बार देश के आर्थिक विकास में भागीदारी करने वाले,परिवार के आर्थिक जीवन में योगदान देने वाले और नए नए तौर तरीकों से कम से कम खर्च से काम करने वाले, टीम बनाकर के काम करने वाले, फॉर्मल एजुकेशन हुआ हो या न हुआ हो फिर भी इस प्रकार की सफलता पर कार्य वाली इन सभी माताओं – बहनों को सुनने के लिये मैं बहुत आतुर हूं।

देखिए कितना बदलाव आया है इन सभी के जीवन में,

सेल्फ हैल्प ग्रुप कितनी बड़ी भूमिका निभा रहा है। इसका जीता-जागता उदाहरण हमें यहां देखने को मिला है। सेल्फ हैल्प ग्रुप का ये नेटवर्क पूरे देश में फैला हुआ है। अलग-अलग क्षेत्रों और व्यवसाय से जुड़ा हुआ है। सरकार उन्हें आगे बढ़ाने के लिये आवश्यक ट्रैनिंग,आर्थिक मदद और अवसर भी उपलब्ध करती है।

सेल्फ हैल्प ग्रुप के माध्यम से एक प्रयोग महिला किसान और कृषि क्षेत्र में किया गया है। इसमें महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना पर की गई जिसके तहत 33 लाख से अधिक महिला किसानों को ट्रैनिंग दी गई। इसके साथ-साथ 25 हजार से अधिक Community Livelihood Resource Person भी चुने गए। जो ग्रामीण स्तर पर 24x7 सपोर्ट उपलब्ध करवा रहे हैं। आज कोई भी क्षेत्र हो खासकर कृषि से जुड़े क्षेत्रों में वैल्यु एडिशन,मूल्यवृद्धि ये काफी महत्वपूर्ण हो गया है। मुझे खुशी है कि आज देश के किसान मूल्यवृद्धि में वैल्यु एडिशन का महत्व समझने लगे हैं। इसे अपना रहे हैं और उन्हें इसका लाभ भी मिल रहा है। कई राज्यों में कुछ विशेष उत्पाद जैसे मक्का, आम, फूलों की खेती,डेरी आदि के लिये वैल्यु चेन approach को अपनाया गया है। इसके लिये सेल्फ हैल्प ग्रुप से दो लाख सदस्यों को सपोर्ट किया गया है। अभी हमने पाटलिपुत्र,बिहार से अमृता देवीजी को सुना और जाना कि कैसे सेल्फ हैल्प ग्रुप से जुड़ने के बाद वहां के गरीब महिलाओं के जीवन में परिवारों में कैसे बदलाव आया। मैं बिहार के ही कुछ और उदाहरण आपको बतलाता हूं। वहां सेल्फ हैल्प ग्रुप के ढाई लाख से अधिक सदस्य प्रशिक्षण प्राप्त कर धान की बेहतर तरीके से खेती कर रहे हैं। इसी तरह लगभग दो लाख सदस्य नये तरीकों से सब्जी की खेती कर रहे हैं। इसके अलावा बिहार में लाख की चूड़ियां बनाने के लिये Cluster भी स्थापित किये गए हैं और प्रोड्युसर ग्रुप बनाया गया है। यह गर्व की बात है कि वहां की चूड़ियां अपने डिजाइन के लिये हमारे देश में और देश के बाहर में भी प्रसिद्ध है। अभी जैसा कि छत्तीसगढ़ से मीना मांझी ने बताया कि कैसे ईंट निर्माण से उन्हें अपने जीवन को बेहतर बनाने में मदद मिली। वहां ईंट बनाने के लिये कई यूनिट स्थापित किये गए हैं। करीब 2000 सेल्फ हैल्प ग्रुप्स इससे जुड़े हुए हैं। हम सबको जानकर के सुखद आश्चर्य होता है कि इनका सालाना प्रोफिट करोड़ों रुपयों में पहुंचा है। इसी तरह छत्तीसगढ़ के 22 जिलों में 122 बिहान बाजार आउटलेट बनाए गए हैं,जहां सेल्फ हैल्प ग्रुप के 200 वैराइटी के प्रोडक्ट बेचे जाते हैं।

छत्तीसगढ़ से जुड़ा मैं अपना एक व्यक्तिगत अनुभव आप लोगों के साथ शेयर करना चाहता हूं। शायद आपलोगों ने टीवी पर देखा होगा कुछ दिन पहले मैं छत्तीसगढ़ गया था,जहां मुझे ई-रिक्शा में सवारी करने का अवसर मिला। वो ई-रिक्शा एक महिला चला रही थी। छत्तीसगढ़ का वो इलाका पहले नक्सलवाद,माओवाद की हिंसा से ग्रस्त था। वहां पर आने-जाने का कोई साधन नहीं था। लेकिन सरकार ने इस समस्या को दूर करने का प्रयास किये। और इसी का परिणाम है कि आज वहां कई ई-रिक्शा चल रहे हैं। देश में कई दुर्गम ग्रामीण इलाके ऐसे हैं,जहां पर आवाजाही के लिये वाहन उपलब्ध नहीं है। इस कार्यक्रम में ग्रामीण परिवारों को इन इलाकों में वाहन खरीदने के लिये धन उपलब्ध कराया गया। इससे आवागमन तो आसान हुआ बल्कि साथ-साथ ये ग्रामीण परिवारों के लिये आय का एक बहुत अच्छा स्रोत भी बन गया है।

देखिए हमने अभी रेवती से काफी बातें सुनीं और वंदना जी को सुना कि कैसे इस योजना के तहत कौशल विकास, स्किल ट्रेनिंग से उन्हें मदद मिली। ट्रेनिंग से क्या बदलाव आता है। ये उसके उदाहरण हैं। दीनदयाल अंत्योदय योजना के तहत ग्रामीण युवाओं के कौशल विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार दोनों के लिये ट्रेनिंग दी जा रही है, ताकि देश के युवा अपनी आशा,आकांक्षा के अनुरूप आगे बढ़ सकें। स्किल ट्रेनिंग से लोगों के लिये रोजगार के नये अवसर उपलब्ध हो रहे हैं। और लोगों के जीवन में इससे सकारात्मक बदलाव आ रहा है। देश के प्रत्येक ज़िले में ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान स्थापित किया गया है,ताकि युवाओं को ट्रेनिंग की सुविधा उन्हें अपने घर के पास ही मिल सके। यहां गांव के युवाओं को आर्थिक क्रियाकलापों को शुरू करने के लिये प्रशिक्षण दिया जाता है। इस साल मई तक करीब – करीब 600 ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान देश में काम कर रहे हैं। इसके तहत करीब-करीब 28 लाख युवाओं को ट्रेनिंग दी गयी है। और उसमें से 19-20 लाख युवाओं को रोजगार से जोड़ा जा चुका है। अभी हमनें मध्य प्रदेश से सुधा बघेल जी को भी सुना। जो सेनेट्री नेपकीन्स के पैकेजिंग का काम करती हैं। मध्यप्रदेश में सेनेट्री पैड मैन्युफैक्चरिंग यूनिट बनाए गए हैं,जो 35 जिलों में कार्यरत है। सेल्फ हैल्प ग्रुप के साढ़े पांच हजार से अधिक सदस्य इस काम को कर रहे हैं। मध्य प्रदेश से एक और उदाहरण मैं आपको बताऊं। वहां करीब 500 आजीविका फ्रेश स्टोर्स खोले गए हैं। जहां हर वर्ष एक टन से अधिक आजीविका मसालों की बिक्री होती है। एक तरह से वहां आजीविका एक ब्रांड बन गया है। अभी हमने रेखा जी से बात कि और जाना की कैसे सेल्फ हैल्प ग्रुप के माध्यम से एक प्रयोग बैंकिंग के क्षेत्र में किया गया है। गांव या दूर दराज के क्षेत्रों तक बैंकिंग या वित्तीय सेवाएं पहुंचाने के लिये सेल्फ हैल्प ग्रुप के सदस्य को बैंक मित्र के रूप में बैंक सखी के रूप में नियुक्‍त किया गया है। आज करीब 2000 सेल्फ हैल्प ग्रुप्स देश भर में बैंक मित्र या बैंक सखी बैंकिंग सहायक के रूप में काम कर रहा है। मुझे बताया गया कि इससे करीब साढ़े तीन सौ करोड़ का लेनदेन हुआ है।

देखिये कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन के रूप में कैसे काम होता है, आपको मालूम ही है कि कई महिलाएं ऐसी हैं,जो इस कार्य से बहुत समय से जुड़ी हुई हैं। वो इस कार्यक्रम को खुद तो चलाती हैं साथ ही कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन के रूप में नये गांवों में भी जाकर वहां की महिलाओं को इसके लिये प्रेरित करती हैं। अभी तक 2 लाख कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन द्वारा इस कार्यक्रम को पूरे देश में आगे बढ़ाया जा रहा है और ये संख्या दिन प्रतिदिन और बढ़ रही है। दीनदयाल उपाध्याय योजना के अंतर्गत सरकारी अनुदान के अलावा बैंकों द्वारा ऋण दिलाये जाने का भी प्रावधान है। बैंकों से मिलने वाले लोन से लोगों को व्यवसाय को बढ़ाने में काफी लाभ मिलता है। साथ में एक बात जो आप सभी को अच्छी लगेगी कि लोन का वापस भुगतान यानि रिपैमेंट में भी समय पर किया जा रहा है।

और मैंने देखा है कि कभी भी ये सेल्फ हैल्प ग्रुप के पैसे पहुंचने में कभी बैंक को देर नहीं आई। करीब करीब 99 पर्सेंट पैसे वापस आ गए। ये हमारे गरीब परिवार के संस्कार होते हैं। गरीबों की अमीरी है,जिसमें ये ताकत है। अभी हमने लक्ष्मी जी से सुना कि कैसे और उनके साथ तीस अन्य महिलाएं पापड़,अपना प्रोडक्ट बेच कर कैसे मुनाफा कमा रही हैं। यहां मैं आपको बताना चाहूंगा कि आज इस विशेष पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है कि सेल्फ हैल्प ग्रुप के उत्पाद सही दामों पर बिके। उनके लिये अच्छे बाजार उपलब्ध हों। इसके लिये भारत सरकार हर राज्य में प्रति वर्ष दो सरस मेलों के आयोजन के लिये अनुदान देती है। इसके अच्छे परिणाम देखने को मिल रहे हैं। हर वर्ष सेल्फ हैल्प ग्रुप के उत्पादों की मांग बढ़ रही है। जिससे उनके आय में भी वृद्धि हो रही है। इसके अलावा सेल्फ हैल्प ग्रुप्स को जेम (जी ई एम) यानी गवर्मेंट ई मार्केट से भी लाभ मिल रहा है। पारदर्शी व्यवस्था को बढ़ाना और उसको बढ़ावा देने के लिये सरकार डीजिटल तरीके से सामानों की खरीद बिक्री को बढ़ावा देगी। सरकार में अब इसी के जरिये टैंडर दिये जा रहे हैं और सरकारी सामान की खरीदी हो रही है। और इसके लिये मैं सभी सेल्फ हैल्प ग्रुप की बहनें जो आप कुछ न कुछ उत्पाद करती हैं कुछ न कुछ प्रोडक्ट करती हैं,आप ये सरकार को जो पोर्टल है जीईएम उसमें जाकर के अपने आपको रजिस्टर करवा दीजिए,ताकि आप भी अगर सरकार को किसी चीज की जरूरत हो उसकी जानकारी आ जाए तो आप भी कह सकती है कि आप भी प्रोवाइड कर सकती हो और सरकार खरीदती है इन चीजों को।

देखिए अगर वो भेंड़ पालते हैं और ऊन बेचते हैं, तो मैं एक सुझाव देता हूं आपको। मैं जब गुजरात में था, तो मैंने एक छोटा प्रयोग किया और उस प्रयोग का ये जो भेंड़, बकरी चराने वाले और छोटे-छोटे काम करने वाले लोग थे, तो आपने देखा होगा आजकल ये बड़े – बड़े सैलून होते हैं, वहां जो हजामत करने वाले लोग होते हैं,वो एक मशीन होती है ट्रिमर हमलोग जो दाढ़ी को ठीक करते हैं ट्रिमर उपयोग करते हैं, तो मैंने ऐसे ट्रिमर इन भेंड़ चराने वालों को दिया,और मैंने कहा कि आप कैंची से जो बाल काटते हैं भेंड़ के तो उसके ऊन के टुकड़े हो जाते हैं,तो आपको कमाई कम होगी। आप ये ट्रिमर से मशीन से काटिए तो लंबे तार वाला ऊन मिलेगा। आप हैरान हो जाएंगे उसके कारण मेहनत भी कम हो गई। उस भेंड़ को तकलीफ होती थी वो भी कम हो गई। और लंबे धागे के ऊन मिलने लगे उनको मार्केट में अच्छा मिलने लगा। आपके यहां जो बहनें हैं। उनको ये अगर ट्रेनिंग करवा लेती हैं, तो ये आपके यहां तो ऊनी चीजों गर्म कपड़ों का काफी काम है, अच्छे धागे बन सकते हैं, तो बहुत बड़ी कमाई हो सकती है,तो आप जरूर वहां इस दिशा में सोचिए कुपवाड़ा इलाके में जो पहले मैंने देखा है कि इस काम को काफी ताकत थी और दूध के क्षेत्र में भी आपके इलाके में भी काफी मदद मिलती थी।

आप लोगों की कहानियां आप लोगों के अनुभव मैं समझता हूं जो भी सुनेगा और अगर खुले मन से सुनेगा अच्छा सोचने की भूमिका से सुनेगा तो मैं जरूर मानता हूं। हमारे देश की माताओं बहनों की ताकत कितनी है थोड़ा सा भी सहारा मिल जाए तो कैसे अपनी दुनिया खड़ी कर सकती हैं। कैसे मिलजुलकर के काम कर सकते हैं। कैसे लीडरशिप दे सकते हैं। एक नए भारत की नींव रखने के लिये वो कैसा परीश्रम कर रहे हैं। मैं समझता हूं सुनने वाले हम सबके लिये इनकी एक –एक गाथा बहुत ही प्रेरक है। इससे देश को ताकत मिलती है। इससे हमारी हर महिला को कुछ नया करने का रास्ता मिलता है,उत्साह मिलता है। और निराशा फैलाने वालों की संख्या कम नहीं। बुराई फैलाने वालों की संख्या कम नहीं। लेकिन अच्छाई का रास्ता छोड़ना नहीं। परिश्रम करने वालों की पूजा करना छोड़ना नहीं। अपने बलबूते में देश को आगे बढ़ाना, अपने को आगे बढ़ाना, परिवार को आगे बढ़ाना, अपने बच्चों की पढ़ाई करना,कठिन जिंदगी से निकल कर जीना ये अपने आप में हर इंसान को निराशा से जूझने की ताकत देता है और देश की यही तो ताकत है। और इसलिये मुझे बहुत अच्छा लगा आप लोगों को सुनकर के उससे मुझे भी ऊर्जा मिली है। मुझे प्रेरणा मिली है और मुझे विश्वास है कि आज इस कार्यक्रम में आप लोगों ने जो बाते बताईं हैं। और मुझे विश्वास है कि आप में से बहुत लोग है जिनको कहना है। हर किसी की अपनी एक कथा है हर किसी का अपना अनुभव है। हर किसी ने मुसीबतों से रास्ता निकाला है और ये आपका काम है आपका परिश्रम है आपकी हिम्मत है। किसी को इसकी क्रेडिट नहीं जाती है सिर्फ आपको ही जाती है और इसलिये आप से बढ़कर के कोई प्रेरणा नहीं है। लेकिन जिन बातों को बहनों को बहुत कुछ कहना है वो कह नहीं पाए हैं, मैं चाहूंगा कि आप अपनी बात मुझ तक पहुंचाइए। मैं आपको सुनूंगा। और कभी जो मैं आप में से मेरी जो बात आपसे आई होगी मन की बात में भी कभी सुनाऊंगा। क्योंकि देश को इसी से प्रेरणा मिलती है। रोना धोना करने वाले करते रहते हैं। अच्छा करने वाले भी प्रेरणा देते हैं। अब उसको काम लेकर के आगे चलना है। तो मैं आपसे प्रार्थना करता हूं। आपके पास मोबाइल फोन का उपयोग करने की आदत लग गई होगी। अगर नहीं लगी है तो आपके यहां कॉमन सर्विस सेंटर होता है। आपने देखा होगा नरेन्द्र मोदी एप है। आप उस पर जाकर के आप अपने समूह की फोटो रखिए। आप अपने समूह की बहनों की इन्टरव्यु उसमें बोलकर के रखिए। क्या काम किया कैसे किया। कैसे मुसीबतों से आप निकले और क्या-क्या अच्छा काम किया है। ये सब आप उस पर डाल दीजिए। मैं इसको देखूंगा, पढ़ूंगा,सुनूंगा और आप उसमें डालोगे तो लोग भी देखेंगे और फिर मैं उसमें से दो चार बातें जब भी मुझे मन की बात में से समय निकलेगा मैं जरूर आपकी बातें दुनिया को बताऊंगा। आपने अपने लिये तो किया ही है, लेकिन आपने ऐसी करोड़ों करोड़ों बहनों को भी एक नई हिम्मत दी है,नया हौसला दिया है। अब तो कॉमन सर्विस सेंटर बहुत पॉपुलर हो चुके हैं। देश के तीन लाख गांव में कॉमन सर्विस सेंटर हैं। अब तो हमारी बेटियां ही कॉमन सर्विस सेंटर चला रही हैं। वहां जाकर के आप इस टैक्नॉलॉजी का उपयोग करके आपकी जो सफलता की गाथा है वो जरूर मुझे भेजिए सारा देश और दुनिया उसको देखेगी। कैसे-कैसे हमारे दूर-सुदूर गांव में रहने वाली बहनें भी कितना उत्तम काम कर रही हैं। कैसे-कैसे नए तरीके ढूंढ़ रही हैं। बहुत अच्छा लगा आज आप लोगों को मिलने का मौका मिला। आप इतनी बड़ी संख्या में आशीर्वाद देने के लिए आए। मेरी तरफ से आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं हैं और आपको बहुत-बहुत बधाई है।

बहुत–बहुत धन्यवाद!

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The world is seeing India as a bright spot of growth and hope: PM Modi at Economic Times World Leaders Forum 2026
August 21, 2026
The world sees India as a bright spot for growth and hope: PM
Today, India is implementing next-generation reforms at the policy level and undertaking reforms at governance level: PM
Increasing production was met with punishment earlier but today, our government is providing incentives for boosting production
India has political stability and continuity in its policies: PM
Earlier, the approach of regulations was, 'prohibited unless permitted’; We are changing this approach and taking it towards 'permitted unless prohibited’: PM
The relationship between the government and citizens should be based on trust, not suspicion: PM
Today, we are shaping policies that are pro-people, pro-growth and pro-development: PM

World Leaders Forum का ये प्रतिष्ठित मंच, Business और Industry की दुनिया के सभी जाने माने दिग्गज, पॉलिसी मेकर्स, अन्य महानुभाव, देवियों और सज्जनों।

आप सबके बीच आकर के खुश होना बहुत स्वाभाविक भी है। इस साल समिट का फोकस Shared Future पर है। पिछले कुछ वर्षों में दुनिया ने अनेक उतार-चढ़ाव देखे हैं। और इन अनुभवों ने एक बात बहुत स्पष्ट कर दी है, कोई चाहे या ना चाहे, हर देश का भविष्य, उसका फ्यूचर, एक-दूसरे से जुड़ा हुआ ही है, Isolation में कुछ संभव नहीं है। इसीलिए Shared Futures की ये theme, आज और भी अधिक प्रासंगिक हो गई है। और भारत तो हमेशा से इसी भावना को लेकर चला है। जी-20 की अध्यक्षता में इसलिए ही भारत का मंत्र रहा, One Earth, One Family, One Future. Shared Future की ये भावना और इसके साथ जुड़ा दायित्वबोध, 21वीं सदी के इस विश्व की अनेक समस्याओं का समाधान देता है।

साथियों,

आज दुनिया में growth को लेकर के कई तरह की चिंताएं हैं। दुनिया ने बड़ा भयंकर एक रूप देखा है इन दिनों। Resources का वेपनाइजेशन हो रहा है। अविश्वास का वातावरण विश्व के लिए अनेक नई चुनौतियां लेकर के आ रहा है। लेकिन ऐसे समय में भी, दुनिया भारत को growth और hope के bright spot के रूप में देख रही है। भारत ने पिछले 10-12 साल में अपनी 25 करोड़ आबादी को गरीबी से बाहर निकाला है। इतना ही नहीं, अगर आने वाले दिनों की चर्चा करें, तो IMF का forecast है कि भारत दुनिया की fastest growing major economy बना रहेगा। और भारत निरंतर वो कदम उठा रहा है, जो उसके विकास को गति दे रहे हैं।

Friends,

अभी पिछले हफ्ते ही, 15 अगस्त को मैंने लाल किले से सप्त-धारा की सप्त-शक्तियों की बात की है। मैन्यूफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन, फूड प्रोसेसिंग, ग्रीन और ब्लू इकोनॉमी समेत, मैंने ऐसे सात सेक्टर्स की बात की है, जिन पर भारत का आज बहुत ज्यादा फोकस है। और इसलिए भारत आज, Policy level पर, नेक्स्ट जनरेशन reforms कर रहा है, ताकि हमारा future सुरक्षित हो। Governance पर reforms कर रहा है, Ease of Living के लिए reforms कर रहा है। पिछली बार जब मैं इसी मंच के माध्यम से आपसे जुड़ा था, तब भी मैंने कहा था, ये Reforms हमारे लिए Compulsion नहीं है। ये हमारा commitment है, ये हमारा conviction है।

साथियों,

2014 में, जब हमारी सरकार बनी, तो उसके बाद से ही रिफॉर्म्स ने कैसे देश की दिशा और दशा बदली है, मैं इसका एक बहुत दिलचस्प उदाहरण आपको देना चाहता हूं। यहां मौजूद शायद ही किसी को PLP के बारे में पता होगा, कोई है, जिसको PLP के बारे में पता है? अपना हाथ उठाएं। यहां इतने मीडिया के दिग्गज बैठे हैं, PLP आपको पता है? और आप सुनकर के हैरान हो जाएंगे। PLP यानी प्रोडक्शन लिंक्ड पनिशमेंट, इसके बारे में किसी को पता नहीं है। और एक दूसरा टर्म आपने जरूर सुना है PLI, ये ज्यादातर लोगों को पता होगा। PLI- यानी प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव।

साथियों,

ये दोनों टर्म, भारत के दो अलग-अलग Time Period को डिफाइन करते हैं। आजकल Explainer का जमाना है, तो मैं आपको Explain करता हूं।

साथियों,

आज की युवा पीढ़ी को ये सुनकर हैरानी होगी, कि हमारे देश में एक समय ऐसा भी था, कि अगर कोई कंपनी तय लिमिट से ज्यादा प्रॉडक्शन कर दे, तो उसे पनिशमेंट दिया जाता था। ये पहले की लाइसेंस राज वाली सरकारों का, PLP यानी प्रोडक्शन लिंक्ड पनिशमेंट मॉडल था। ऐसे भी उदाहरण रहे हैं कि अगर किसी फैक्ट्री ने ज्यादा डिमांड देखते हुए ज्यादा प्रॉडक्शन कर दिया, तो उसे नोटिस भेज दिया जाता था। मजबूरी में वो कंपनी अपना प्रॉडक्ट मार्केट में बेचने के बजाय, उसे खुद ही नष्ट कर देती थी।

साथियों,

आज जो लोग Make In India और आत्मनिर्भर भारत अभियान का मजाक उड़ाते हैं, उनके पुरखों की सोच यही थी, PLP यानी प्रोडक्शन लिंक्ड पनिशमेंट। ऐसा करने के पीछे एक विशेष तरह की विकृत मानसिकता काम करती थी। ऐसी मानसिकता वाले लोग हमेशा चाहते थे कि जरूरी चीजों की किल्लत बनी रहे। देश के नागरिकों को अभाव में रखना उनकी पॉलिसी थी। वो चाहते थे कि जनता उनके सामने हाथ जोड़े, हाथ फैलाए, आप समझ गए मैं किन लोगों की बात कर रहा हूं। लोगों से हाथ जुड़वाने के बाद उपकार करना, उन सरकारों का तरीका था, इसलिए वो प्रोडक्शन लिंक्ड पनिशमेंट मॉडल पर चलते थे। आप कल्पना कर सकते हैं, ऐसे करके उन लोगों ने Employment Generation के बेसिक principal का गला घोंट दिया था। और हैरानी ये, इन लोगों के दरबारियों ने again I repeat, इन लोगों के दरबारियों ने, कभी इसके खिलाफ कोई आवाज नहीं उठाई।

साथियों,

हर reform की शुरुआत सबसे पहले, आपके सोचने के तरीके, आपके मानसिक, किस रेंज में आप काम कर रहे हैं, इस सोच के reform से ही होती है। जहां पहले production बढ़ाने पर पनिशमेंट मिलता था, वहीं आज हमारी सरकार production बढ़ाने पर incentive दे रही है। और आज PLI स्कीम की सक्सेस दुनिया देख रही है। सिर्फ इस एक योजना की वजह से, मैं सारी योजनाओं की बात नहीं करता हूं, एक की बात करता हूं, करीब ढाई लाख करोड़ रुपए का actual investment हुआ है। 22 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का production और sales हुई है। 15 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का exports हुआ है, और 14 लाख से ज्यादा direct और indirect jobs बनी हैं। और मैं फिर याद दिलाउंगा, ये आंकड़े सिर्फ एक स्कीम के हैं। आप सोचिए, पहले का लाइसेंस राज वाली सरकार का पनिशमेंट मॉडल जहां बेरोजगारी बढ़ाता था, वहीं आज का हमारा incentive मॉडल लाखों नई जॉब्स क्रिएट कर रहा है।

साथियों,

आज भारत में ये तेज विकास, ये तेज रिफॉर्म इसलिए हो रहे हैं, क्योंकि भारत में और जिसका अभी सत्य ने उल्लेख किया, political stability है, हमारी policy में continuity है। पहले देश में रिफॉर्म्स की बात करने वाले घोषणा तो कर देते थे, बाद में भूल जाते थे। लेकिन हमने रिफॉर्म्स को लेकर एक क्लियर रोडमैप बनाया। इस रोडमैप की प्रमुख दिशा रही है- गवर्नेंस लेवेल के रिफॉर्म्स हों! इसके लिए, आज 21वीं सदी के भारत में, हम सिर्फ regulations नहीं बदल रहे हैं, हम regulation की पूरी philosophy बदल रहे हैं। पहले regulations की अप्रोच थी- “Prohibited unless permitted.” यानी जब तक सरकार इजाजत ना दे, तब तक आप वो काम नहीं कर सकते। हम इस approach को बदलकर, “Permitted unless prohibited” की तरफ ले जा रहे हैं। यानी, जो काम कानून ने स्पष्ट रूप से मना नहीं किया है, उसके लिए हर कदम पर permission की कोई जरूरत नहीं होनी चाहिए। और इसके पीछे सोच बहुत सीधी है, सरकार और नागरिक के रिश्ते का आधार, Suspicion नहीं, trust होना चाहिए।

साथियों,

यही सोच आपको Jan Vishwas बिल में भी दिखाई देती है। मैं मानता हूं, हर procedural गलती को criminal offence मान लेना ठीक नहीं है। इसीलिए अनेक offences को decriminalise किया गया है। कई मामलों में जेल की जगह केवल आर्थिक penalty का प्रावधान किया गया है। Government और enterprise के रिश्ते में, हम इसी reform mindset को आगे बढ़ा रहे हैं। बीते वर्षों में 40 हजार से ज्यादा compliances हटाए गए हैं, 40 thousand. डेढ़ हजार से ज्यादा, 15 hundred, डेढ़ हजार से ज्यादा, पुराने और बेकार हो चुके कानून हमने खत्म किए, और जब इन सारे reforms को एक साथ देखते हैं, तो अंदाजा होता है, हमारी industries और businesses के कंधों से कितना बड़ा बोझ कम हुआ है।

साथियों,

गवर्नेंस रिफॉर्म्स की इस प्रक्रिया, उस पर हम निरंतर काम कर रहे है। अभी संसद के मॉनसून सत्र में हमने ‘बैंकर्स बुक एविडेंस बिल’ पारित किया है। और वो भी तब जब विपक्ष ने संसद में लगातार गतिरोध बनाया हुआ था। हमने देश की सेवा करने का काम रूकने नहीं दिया। अब इस कानून ने 19वीं सदी के अंग्रेजी कानून को रिप्लेस किया है। अब बैंकों के डिजिटल रिकॉर्ड्स की स्वीकार्यता को कानूनी मान्यता दी गई है। इससे कानूनी उलझनें कम होंगी, सिस्टम में पारदर्शिता होगी, Ease of Doing Business बढ़ेगा।

साथियों,

गवर्नेंस में रिफॉर्म का एक मतलब ये भी है कि सिस्टम ऐसे बनें, जिसमें एक-एक मानव जीवन और उसके समय के प्रति संवेदनशीलता हो। मैं रेलवे का उदाहरण देता हूं। हमारी रेलवेज में भी इसी अप्रोच के साथ काम हुआ है। आज साढ़े 6 हजार से ज्यादा रेलवे स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग की व्यवस्था है। 10 हजार से ज्यादा लेवल क्रॉसिंग गेट्स को भी इंटरलॉकिंग से जोड़ा जा चुका है। इससे ह्यूमन एरर से होने वाले हादसों की आशंका बहुत कम हुई है।

साथियों,

जब 2014 में हमारी सरकार आई, तो करीब 9 हजार फाटक ऐसे थे जो Un-Manned थे। इन्हें हटाना कोई रॉकेट साइंस नहीं था। Un-Manned क्रॉसिंग्स की वजह से हजारों लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी, लेकिन पहले की सरकारों को इससे बहुत फर्क नहीं पड़ता था। हमने मिशन मोड में, गत दस वर्ष में, इन Un-Manned क्रॉसिंग्स को समाप्त कर दिया। हमने रोड ओवर ब्रिज और रोड अंडर ब्रिज बनाने की गति भी कई गुना बढ़ा दी। और इसी का नतीजा है कि 2014 के पहले के मुकाबले ट्रेन दुर्घटनाओं की संख्या में Ninety Percent तक की कमी आई है, 90, Ninety Percent. 12 साल पहले जहां एक साल में करीब डेढ़ सौ रेल दुर्घटनाएं होती थीं, वहीं अब इनकी संख्या घटकर 15-20 रह गई है। और हम इसे और कम से कम करने का प्रयास लगातार कर रहे हैं।

साथियों,

Railways में स्वच्छता भी गवर्नेंस रिफॉर्म का एक बड़ा उदाहरण है। एक समय था, जब रेल पटरियों पर गंदगी और human waste एक बड़ी समस्या हुआ करती थी। आज स्थिति पूरी तरह बदल गई है। 2014 से पहले हमारी ट्रेनों में जहां लगभग 12 हजार बायो-टॉयलेट्स लगाए गए थे, वहीं 2014 के बाद ट्रेनों में 3 लाख 60 हजार से ज्यादा बायो-टॉयलेट्स लगाए गए हैं। यानी, 97 प्रतिशत से ज्यादा बायो-टॉयलेट्स पिछले 12 वर्षों में लगे हैं। ये बदलाव सिर्फ सफाई का नहीं, यात्रियों की गरिमा, स्वच्छता और आधुनिक भारत के निर्माण की दिशा में गवर्नेंस का एक नया मॉडल है। ये करोड़ों यात्रियों को बेहतर अनुभव देने का अभियान भी है।

साथियों,

गवर्नेंस की क्वालिटी का एक और पैमाना, और वो पैमाना है - समय। जो प्रोजेक्ट शुरू हो, वो समय पर पूरा हो। और जो सर्विस लोगों को मिले, वो भी समय की कसौटी पर खरी उतरे। दिल्ली-मेरठ नमो भारत रैपिड रेल सिस्टम इसका बहुत अच्छा उदाहरण है। इस कॉरिडोर पर 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेनें चल रही हैं। ये हमारे देश में पहले कभी सोचा नहीं जा सकता था। अब तक 4 करोड़ से ज्यादा यात्री इसमें ट्रैवल कर चुके हैं। और इसका एक और अहम फैक्टर है, जिसकी चर्चा नहीं होती है। दिल्ली मेरठ नमो भारत रैपिड रेल की पंक्चुअलिटी 99.9 परसेंट है। वरना हम तो हर चीज में कहते हैं, लेट हो तो कहते थे, ये तो इंडियन टाइम है। वक्त बदला है, ये मैं छोटी-छोटी चीजें इसलिए बताता हूं, कि हमें अंदाज आए कि कितने बड़े व्यापक स्तर पर काम हो रहा है। इसी तरह, Delhi Metro की पंक्चुअलिटी। Delhi Metro की पंक्चुअलिटी 99.9 परसेंट है। और ये punctuality, New York, Hong Kong और Paris जैसे शहरों की Metro से करीब-करीब बराबर हो चुकी है। ये सिर्फ समय पर चलती हुई Metro और नमो रेपिड रेल की कहानी नहीं है, ये समय के साथ बदलते हुए भारत की पहचान है। मैं जानता हूं कि अभी भी, और र्मैं कोई इतने से संतोष मानकर बैठने वाला व्यक्ति नहीं हूं, अभी भी इस दिशा में हमें बहुत कुछ करना है, बहुत कुछ बाकी है, लेकिन हम लगातार कर रहे हैं। लेकिन एक शुरूआत तो हुई है और ये शुरुआत सराहनीय है।

साथियों,

हमारे रिफॉर्म्स रोडमैप का एक और बड़ा आयाम है- पॉलिसी लेवल पर होने वाले रिफॉर्म्स! आज हम ऐसी policies बना रहे हैं, जो pro-people हों, Pro-growth हों, pro development हों! पॉलिसीज़ देश और देश के लोगों की जरूरत के हिसाब से होनी चाहिए न कि पॉलिसीज़ बनाकर देश को उनके हिसाब से चलने को मजबूर होना पड़े! मैं आपको एक और Interesting उदाहरण देना चाहता हूं। कुछ साल पहले तक हमारे यहाँ देश का नक्शा बनाना भी गैर-कानूनी था, मैप बनाए तो गैर कानूनी था, आप जेल चले जाएंगे। बिना परमिशन के आप देश में मैपिंग का काम भी नहीं कर सकते थे। आप सोचिए, विदेशी सैटेलाइट टेक्नोलॉजी के जरिए भारत के किसी भी कोने को मैप कर सकती थी, लेकिन भारत में भारतीयों पर भारत का मैप बनाने पर पाबंदी लगी हुई थी।

साथियों,

आज टेक्नोलॉजी के इस दौर में, इस एक पाबंदी से कितने स्टार्टअप्स की हत्या हो सकती थी! कितने ideas implement होने से वंचित रह सकते थे! हमने इस व्यवस्था को भी बदला। हमने Geospatial डेटा का Deregulation किया और आज Geospatial डेटा कितने ही स्टार्टअप्स का आधार बन रहा है।

साथियों,

आज आप लगातार ड्रोन्स की उपयोगिता बढ़ते हुए देख रहे हैं। एग्रीकल्चर में, डिफेंस में, डिलिवरी में, शूटिंग में, कंटेंट क्रिएशन में, ये सब संभव ही नहीं होता, अगर सरकार ने इससे जुड़े नियमों में Reform नहीं किए होते। पहले देश में ड्रोन फ्लाइंग पूरी तरह नियमों में, बंधनों में जकड़ी हुई थी। हमने उसे बंधनों से आजाद किया, और आज भारत की ड्रोन इंडस्ट्री, एक अभूतपूर्व उड़ान के साथ आगे बढ़ रही है।

साथियों,

पहले border areas को लेकर सरकारों की सोच थी कि बॉर्डर पर roads और infrastructure बढ़ेगा, तो उसका फायदा दुश्मन भी उठा सकता है। हमने इस सोच को बदला। हमने कहा, Border infrastructure कमजोरी नहीं, देश की ताकत है। और इसीलिए आज border areas में roads, bridges और tunnels का network तेजी से बढ़ रहा है। सिर्फ 2024 और 2025 में ही, BRO के 250 infrastructure projects देश को समर्पित किए गए हैं। सोच बदली, तो border infrastructure की तस्वीर भी बदल गई।

साथियों,

एक उदाहरण न्यूक्लियर रिफॉर्म्स का भी है। एक ऐसे समय में, जब विकास पूरी तरह से energy dependent है, बंदिशों और प्रतिबंधों के कारण, देश अपने न्यूक्लियर potential का इस्तेमाल नहीं कर पा रहा था। हमने शांति बिल के जरिए इसमें भी बड़ा रिफॉर्म किया है। आज भारत में न्यूक्लियर एनर्जी में प्राइवेट सेक्टर के लिए रास्ता खुल चुका है। इसी तरह, हमने एक बड़ा पॉलिसी रिफॉर्म डिफेंस सेक्टर में भी किया। 200 साल के पहले जो व्यवस्था चली आ रही थी, उसे बदलकर हमने 40 से ज्यादा ordnance फैक्ट्रीज़ को मर्ज करके 7 फैक्ट्रीज़ बना दी। और उसका परिणाम हमें देखने को मिल रहा है। आज भारत अपनी रक्षा जरूरतों के लिए भी आत्मनिर्भर बन रहा है, और 2014 की तुलना में, हमारा डिफेंस एक्सपोर्ट 55 गुना बढ़ा है। और इसलिए, कई बार रिफॉर्म्स हमारे जीवन में इस तरह घुल-मिल जाते हैं कि हमारा उनकी तरफ ध्यान ही नहीं जाता। आप सोचिए, आपका कोई सामान्य दिन आज कैसे बीतता है। आप सुबह उठते हैं, फोन पर घर का सामान ऑर्डर कर देते हैं, और जब तक ऑफिस के लिए रेडी होते हैं, वो सारा सामान आपके घर आकर के पहुंच जाता है। आपकी गली के स्ट्रीट वेंडर से लेकर, आपकी गाड़ी के शो रूम तक, आपकी सारी पेमेंट्स, सिर्फ एक क्यूआर कोड स्कैन करके हो जाती है। अगर आपकी बेटी, किसी दूसरे शहर में पढ़ती है, तो आप फोन से उसे पैसे भेज सकते हैं, और वो पैसा, कुछ सेकंड्स में उसके पास भी पहुंच जाता है। कई बार तो बिटिया क्यूआर ही शेयर कर देती है कि ‘पापा-मां मैंने ये ड्रेस ले ली है, इसकी पेमेंट कर दीजिए, और आप उसकी शॉपिंग अपने घर बैठे-बैठे करवा देते हैं। ये चीजें Remarkable हैं, लेकिन अब ये कोई भारत के लोगों को कम से कम हैरानी नहीं होती, बाहर के लोग आते हैं, उनको आश्चर्य होता है, अच्छा ऐसे होता है। भारत के लोगों का रूटीन हो गया है। ये भारत के सामान्य मानवी के जीवन का हिस्सा बन चुका है। आप सोचिए, 2014 से पहले ऐसी कितनी ही बातें क्या पॉसिबल थीं?

साथियों,

भारत ने बीते 10-12 सालों में Ease of Living से जुड़े जो रिफॉर्म्स किए हैं, उसकी वजह से लोगों का, खासतौर पर हमारे मिडिल क्लास का जो जीवन बदला है, वो दुनिया के कई विकसित देशों में आज भी एक सपना ही है।

साथियों,

आज दुनिया का सबसे सस्ता डेटा भारत में है, हम सस्ते और अच्छे स्मार्टफोन्स बना रहे हैं। अभी सत्या ने उसका वर्णन किया। भारत दुनिया के fastest 5G rollouts करने वाले देशों में से एक है। हमने आधार को बैंकिंग, मोबाइल कनेक्टिविटी और सर्विसेज से जोड़कर, ई-के.वाई.सी और Digital Authentication जैसी सर्विसेज को पॉसिबल किया है। आज आपको अगर बैंक अकाउंट खोलना है, तो उसके लिए बैंक जाने तक की जरूरत नहीं है। सरकार ने बैंक को ही, आपके पास पहुंचा दिया है। आज चाहे कोई बिल जमा करना हो, कोई टिकट करानी हो, किसी सरकारी दफ्तर में जाने की जरूरत नहीं पड़ती, ये सारा काम ऑनलाइन हो जाता है। इनकम टैक्स की फाइलिंग का काम आसान हुआ है। ऐसी व्यवस्था बनी है कि फॉर्म में मैक्सिमम जानकारियां पहले से भरी होती हैं। आप ये इन्फॉर्मेशन वेरिफाई करते हैं, कुछ जोड़ना है तो जोड़ देते हैं, और सबमिट करते हैं, आपका काम पूरा हो जाता है। पहले जो रिफंड आने में महीनों लगते थे, अब वो भी कुछ ही दिनों में आ जाता है।

साथियों,

आज ई-संजीवनी की मदद से, शायद इसकी चर्चा अभी बहुत कम होती है, ई-संजीवनी की मदद से, गांव के दूर दराज के लोग भी, कहीं से भी डॉक्टर्स के साथ सीधी अपनी चर्चा करके अपने उपचार का रास्ता लेते हैं। और इससे जिन लोगों को अस्पताल जाने के लिए कई किलोमीटर का सफर करना पड़ता था, आज डॉक्टर उनके घर पर, उनकी स्क्रीन पर उपलब्ध है। अब तक ये आंकड़ा भी आपको जरूर आश्चर्य करेगा। यानी भारत ने टेक्नोलॉजी को किस प्रकार से अडाप्ट किया है, सामान्य मानवीय के जीवन को कैसे सरल किया है। अब तक ईं-संजीवनी के तहत करीब-करीब 50 करोड़ टेली-कंसल्टेशंस हो चुकी हैं।

साथियों,

आज भारत में Travel Experience बदल रहा है, भारत के नागरिकों की यात्राएं पूरी तरह बदल गई हैं। यहां इस हॉल में ऐसा व्यक्ति खोजना मुश्किल होगा, जिसने एयरपोर्ट पर डिजी यात्रा का इस्तेमाल ना किया हो। ऐसे ही आजकल बहुत सारा काम Seamless तरीके से हो रहा है। हाइवे पर फास्ट टैग चल रहे हैं, ताकि आप बिना रुके टोल देकर आगे बढ़ सकें। Ease of Living का सही अर्थ यही है। समय की बचत हो रही है, जीवन आसान हो रहा है, और करोड़ों लोग अपनी प्रगति पर फोकस कर पा रहे हैं।

साथियों,

Politics में अक्सर वही फैसले headlines बनते हैं, जिनका असर आज दिखाई दे, यानी उसकी उमर 24 घंटे हो। पहले की सरकारों ने इलेक्शन सामने देख कर भी घोषणाएं करने का फॉर्मूला अपनाया। लेकिन ऐसी घोषणाओं से देश नहीं बदला। देश बदलने वाले फैसले वो होते हैं, जिनका प्रभाव जमीन पर दिखे, जो वर्तमान और भविष्य, दोनों को ध्यान में रखकर के लिए गए होने चाहिए।

साथियों,

पीएम कुसुम योजना और पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना इसका बहुत बड़ा यूनीक Example है। कुसुम योजना से किसानों को बिजली की चिंता से मुक्ति मिली है। और सूर्यघर योजना से मिडिल क्लास को बहुत फायदा हुआ है।

साथियों,

मैं ये जानता हूं कि अगर मैंने ये अनाउंस कर दिया होता कि आज से लाखों-लाख परिवारों के लिए बिजली मुफ्त है, तो सारा मीडिया, सारी स्क्रीन्स, सारे न्यूजपेपर्स, बड़ी-बड़ी हेडलाइन बनाकर के खबर दे देते कि मोदी जी ने आज अनाउंस कर दिया है। लेकिन हमने कुछ दूसरे अप्रोच से काम शुरू किया। हमने हर घर की छत पर एक सूरज उगाने की ठान ली, और आज देश के 50 लाख से ज्यादा परिवार, पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना से जुड़े हैं। सरकार ने 22 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा इन परिवारों को दिए हैं, ये सोलर सिस्टम लगाने के लिए, ताकि उनकी छत पर सोलर प्लांट लगाकर सोलर पावर पैदा की जा सके। अब ये परिवार, एक्स्ट्रा बिजली को, बिजली ग्रिड में बेचकर, पैसे भी कमा रहे हैं। खुद का बिल तो जीरो हुआ, कमाई भी होने लगी। इस योजना से लोगों के सपनों को भी विस्तार मिल रहा है। बिजली बिल कम हुआ है, तो अब घर में फ्रिज, कूलर, वाशिंग मशीन, टीवी जैसी चीजें लोग खरीदकर रखने लगे हैं। अब ये डर नहीं होता कि बिजली कटौती की वजह से दूध फट जाएगा, अब चिंता नहीं रहती है। अब स्कूल जाने वाले बच्चे रातभर चैन से सो पाते हैं। मैं फिर कहता हूं- इलेक्शन हो या ना हो, लेकिन ये सूर्यघर और उसकी रोशनी बनी रहेगी, इस प्लांट का फायदा, सालों तक देश के परिवारों को होता रहेगा।

साथियों,

आने वाले समय में Ease of Living और Ease of Doing Business का और विस्तार होगा। देश के Youth के लिए, नारीशक्ति के लिए, Farmers के लिए, गरीब और Middle Class के लिए, हमारी सरकार लगातार काम करती रहेगी, हमारी Reform Express और अधिक गति से आगे बढ़ने वाली है। विकसित भारत का लक्ष्य पूरा करने के लिए, हम पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम करते रहेंगे। और मैं, मेरे लिए भारत का future अगर सुनिश्चित हो गया ना, तो दुनिया के future में भी स्थिरता लाने का बहुत बड़ा काम इसी धरती से होने वाला है। इस आत्मविश्वास के साथ भारत जितना स्टेबल होगा, भारत का future जितना सुरक्षित होगा, विश्व को सुरक्षत्व का एहसास देने की ताकत यहीं से पैदा होने वाली है। इस सामर्थ्य के साथ, इसी संकल्प के साथ, मैं एक बार फिर, आज के इस कार्यक्रम में मुझे आमंत्रित करने के लिए, Economic Times की पूरी टीम का हृदय से बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं। वन्दे मातरम् !