ইয়োর এক্সেলেন্সী, সাইপ্রসকি রাস্ত্রপতি

লৈবাক অনিমক্কী মীহুৎশিং

মিদিয়াদগী ইচিল-ইনাওশিং,

খুরুমজরি !

কালিমেরা।

সাইপ্রসকি রাস্ত্রপতি অমসুং মহাক্কী মীহুৎ কাঙবুবু ভারত্তা তরাম্না ওকপা অসি য়াম্না নুংঙাইবা অমনি। শ্রীমান রাস্ত্রপতি, মমাঙ চহিদা অদোম্না ঐখোয়বু সাইপ্রসতা য়াম্না নুংঙাইনা তরাম্না ওকপিখি। ভারতকি মায়কৈদা মরুপ-মপাং ওইবগী অখন্নবা ইঙ্গিৎ অমা ওইনা নখোয়না ঐহাকপুসু সাইপ্রসকি খ্বাইদগী ৱাংবা ইকায় খুম্নবা উৎখি।

অদোমগী খোঙচৎ পুম্নমক্তা অদোমগী নুংশিবা, মরুপ-মপাং ওইবগী মরি অমসুং ভারতকা অচেৎপা মরি অসি ঐখোয়না তশেঙনা ফাওখি। ঙসি অদোমগী ভারতকি খোঙচৎ অসি ঐখোয়গী সেয়র তৌরবা খোঙচৎ অসিদা অতোপ্পা মরুওইবা মায় পাকপগী নিংশিং য়ুম্বী অমা ওইরি।

 

মরুপশিং,

ভারত অমসুং সাইপ্রসকি মরক্তা লৈরিবা মরুপ-মপাং ওইবগী মরি অসি অচেৎপা অমদি তুংগী ওইবা মরি অমা ওইরি। গনতন্ৎর অমসুং রুল ওফ লোগুবা ভেল্যুশিংদা সেয়র তৌরবা থাজবা অমনা ঐখোয়গী পার্ত্নরশিপকি য়ুমফম ওইরি। ঐখোয়না জাতি পুম্নমক্কী সোভরেন্তি অমসুং তেরিতোরিগী ইন্তিগ্রীতিবু ইকায়খুম্নবা উৎলি। ভারতনা হায়রিবা প্রিন্সীপলশিং অসিদা মপূঙ ফানা লেপ্লি অমসুং মখা তানা মখা তানা লেপ্লগনি।

ঙসি ভারত অমসুং য়ুরোপনা মরিগী অনৌবা সনাগী মতম অমদা চঙশিল্লকপগা লোয়ননা সাইপ্রসনা য়ুরোপিয়ন য়ুনিয়নগী কাওন্সিলগী প্রসিদেন্ত ওইনা থবক তৌবতা নত্তনা ভারতপু য়ুরোপ পুম্নমক্কা শম্নহল্লিবা মরুওইবা ইনভেস্তমেন্ত গেৎৱে অমা ওইনা থোরক্লি।

 

মরুপশিং,

সাইপ্রস অসি ভারতকি মকোক থোঙবা ইনভেস্তর ১০গী মনুংদা অমনি, অমসুং হৌখিবা চহি তরাগী খুজিং কয়াদগী সাইপ্রসতাগী ভারত্তা শেল থাদবা অসি চাওরাক্না শরুক অনি হেনগৎলে। ঐখোয়গী লৈবাক অনিগী মরক্তা লৈরিবা থাজবা অসি হেন্না চেৎশিলহল্লে। ইন্দিয়া–য়ুরোপিয়ন য়ুনিয়ন ফ্রী ত্রেদ এগ্রীমেন্তনা অনৌবা খুদোংচাবা কয়া অমসু পিরে। মসিগী খোঙজেল অসিগী মখা পোন্না ঐখোয়না মথংগী চহি মঙাদা শেল থাদবশিং অসি অমুক হন্না শরুক অনি হেনগৎহন্নবা পান্দম থম্লি। সেয়র তৌরবা মীৎয়েং অসি ফংনবা ঙসি ঐখোয়না ঐখোয়গী থাজবা য়াবা মরি অসি স্ত্রেতেজিক পার্ত্নরশিপ অমদা হেনগৎহল্লি।

মরুপশিং,

ভারত অমসুং সাইপ্রসকি মরক্তা লৈরিবা স্ত্রেতেজিক পার্ত্নরশিপ অসিনা লৈবাক অনিমক্কী ফাইনান্সিএল অমসুং সর্ভিস হবশিং শম্নহন্দুনা ত্রেদ অমসুং ইনভেস্তমেন্তকি অনৌবা খুদোংচাবশিং শেমগৎলগনি। মসিনা সাইপ্রসকি ইনফ্রাস্ত্রকচর, ইনর্জি, অমসুং লৌউ-শিংউগী সেক্তরশিংদা ভারতকি কম্পেনিশিংগীদমক্তা অনৌবা থোঙ হাংদোক্লগনি, মসিগা লোয়ননা ভারতকি খোঙজেল য়াংনা চাওখৎলক্লিবা শিপিং অমসুং মেরিতাইম ইন্দস্ত্রিশিংদা হেন্না শেল থাদবদা পুক্নিং থৌগৎকনি।

 

সাইপ্রসকা লোয়ননা ঐখোয়না জি.আই.এফ.তি.সি.তি.বু মালেমগী শেন্মিৎলোন অমসুং সর্ভিসশিংগী হব অমা ওইনা ওন্থোক্নবা মীৎয়েং অদু খোঙজেল য়াংশিনহনগনি, অমসুং লৈবাক অনিমক্কী ইনোবেসন অমসুং শ্তারৎ-অপ ইকোসিস্তেমগী মরক্তা কনেক্তিবিতি হেঙ্গৎহল্লগনি।

মরুপশিং,

দিফেন্শ অমসুং সেক্যুরিতি কোওপরেসন অসি ঐখোয়গী মরিগী মরুওইবা য়ুম্বী অমনি। হৌখিবা চহি খরসিদা ঐখোয়গী লৈবাক অনিগী মরক্তা মিলিতরি এক্সচেঞ্জ অমসুং ত্রেনিং কোওপরেসন হেনগৎলকপদা ঐখোয় নুংঙাইবা ফাওই। ঙসি ঐখোয়না সাইবর সেক্যুরিতি, মেরিতাইম সেক্যুরিতি, অমসুং তেরোরিজম থেংননবা ঐখোয়গী পার্ত্নরশিপ অসি হেন্না মপাঙ্গল কনখৎহন্নবা ৱারেপ লৌখ্রে। মসিদা নত্তনা ইন্দো-পেসিফিক ওশিন ইনিসিএতিব অমসুং ইন্দিয়া-মিদল ইস্ত-য়ুরোপ ইকোনোমিক কোরিদোরগুবা মরুওইবা ইনিসিএতিবশিংগী খুত্থাংদা কনেক্তিবিতি শোয়দনা লৈহন্নবগীদমক্তা ঐখোয়না পুন্না থবক তৌমিন্নগনি।

 

মরুপশিং,

সাইপ্রসতা লৈরিবা ভারতকি প্রোফেশ্নেলশিং অমসুং মহৈরোয়শিংনা ঐখোয়গী লৈবাক অনিগী মরক্তা মিচম মিয়ামগী মরি হেন্না চেৎশিলহল্লি। হায়রিবা কনেক্সনশিং অসি মখা তানা হেন্না চেৎশিলহন্নবা ঐখোয়না অথুবা মতমদা সোসিএল সেক্যুরিতি এগ্রীমেন্ত অমগা লোয়ননা অপুনবা মায়গ্রেসন অমসুং মোবিলিতি পার্ত্নরশিপ অমদা থবক তৌনবা য়ানরে ।

ঙসি ঐখোয়না কলচর অমসুং হায়র এজুকেসনগী মতাংদসু য়ানচেশিং খুৎয়েক পিনরি, মদুনা লৈবাক অনিগী মরক্তা কলচরেল এক্সচেঞ্জ অমসুং রিশরচ কোওপরেসন হেন্না চেৎশিলহল্লগনি।

মরুপশিং,

ঙসি ঐখোয়না মালেমগী মরুওইবা হিরমশিংদসু খন্ন-নৈনখি। য়ুক্রেন ওইগেরা নত্রগা ৱেস্ত এশিয়া ওইগেরা, ঐখোয়না ঙন্না শান্তি পুরক্নবা হোৎনরিবশিং অমসুং লানফমশিং থুনা লোয়শিনবদা মখা তানা মতেং পাংগনি। ঐখোয়না মসিমসু য়ানবা পুরক্লি মদুদি মালেমগী ইন্সতিত্যুসনশিং রিফোর্ম তৌবা অসি খুদক্কী ওইবা অমদি তঙাইফদবা অনিমক ওইবনা মালেম অসিনা মায়োক্নরিবা হেনগৎলক্লিবা খুদোংচাদবশিং অসি থেংননবা ।

 

ইয়োর এক্সেলেন্সী

ভারত অমসুং সাইপ্রসকি মরক্তা লৈনরিবা মরি অসি মতমগী চাংয়েংগী মনুংদা চেৎনা লৈরি। ঙসিদি ইন্দিয়া–সাইপ্রস স্ত্রেতেজিক পার্ত্নরশিপ লিংখৎপগা লোয়ননা অনৌবা ইনরজি, এমবিসন, অমসুং মোমেন্তমগা লোয়ননা ঐখোয়গী মরি অসি অনৌবা অৱাংবা থাক্তা পুখৎনবা শেম শারে।

ঐখোয়গী মরি অসি কোওপরেসনদগী কো-ক্রিএসন্দা, অমসুং পার্ত্নরশিপ্তগী সেয়র তৌরবা প্রোসপরিতিদা ওন্থোক্নবা পুন্না থবক তৌমিন্নশি।

ভারত অমসুং সাইপ্রস—পুন্না, শোয়দ-ঙামদবা, নুংঙাই-য়াইফবা অমসুং হেন্না ফবা তুংলমচৎ অমা শেমগৎকনি।

অদোম্বু য়াম্না থাগৎচরি।

 

 

 

 

Explore More
প্রধান মন্ত্রীনা শ্রী রাম জন্মভুমি মন্দির দ্বাজরোহন উৎসবতা পীখিবা ৱারোলগী মৈতৈলোন্দা হন্দোকপা

Popular Speeches

প্রধান মন্ত্রীনা শ্রী রাম জন্মভুমি মন্দির দ্বাজরোহন উৎসবতা পীখিবা ৱারোলগী মৈতৈলোন্দা হন্দোকপা
Pvt sector banks log robust growth in deposits and advances in Q1FY27

Media Coverage

Pvt sector banks log robust growth in deposits and advances in Q1FY27
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
Text of PM's remarks on the 125th Janma Jayanti of Dr. Syama Prasad Mookerjee
July 06, 2026
We pay homage to a great son of India whose unwavering commitment to national unity continues to inspire generations: PM
When there is a government with the resolution of Nation First, then national heroes also get due respect: PM
Dr. Mookerjee fiercely opposed the talk of two constitutions, two prime ministers, and two flags in the country: PM
He understood very well that the essence of nation-building is in the building of institutions : PM
Dr. Mookerjee laid the foundation for such national institutions which became India's economic strength for decades to come: PM

केंद्रीय मंत्रिमंडल में मेरे सहयोगी अमित भाई शाह, गजेंद्र सिंह शेखावत, पश्चिम बंगाल के ऊर्जावान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी, भाजपा के वरिष्ठ सदस्य, हम जैसे लाखों कार्यकर्ताओं की प्रेरणा, श्रीमान माखनलाल जी, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष, श्री शॉमिक भट्टाचार्य, उपस्थित जनप्रतिनिधिगण, अन्य महानुभाव, देवियों और सज्जनों!

आप सबको मेरा नमस्कार!

मैं अपने पूर्व नियोजित कार्यक्रम के कारण, इस समय प्रवास पर हूं। लेकिन टेक्नोलॉजी की मदद से इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में आपसे जुड़ रहा हूं।

साथियों,

आज देश की धरती, पश्चिम बंगाल की धरती, अपने एक महान सपूत, एक महान देशभक्त, भारत की अखंडता के लिए समर्पित एक युगदृष्टा को श्रद्धापूर्वक स्मरण कर रही है। आज हम उस विचार बीज का गुणगान कर रहे हैं, जो वर्तमान समय में चारों तरफ फल-फूल रहा है। जो, आधुनिक भारत को दिशा देने में बड़ी भूमिका निभा रहा है।

साथियों,

जहाँ जमीन से जुड़ी हुई वैचारिक शक्ति हो, साथ-साथ इरादे मजबूत हो और नीयत साफ़ हो और जब नए संकल्प के साथ संपूर्ण समर्पण हो और ये सारी कड़ियां जब आपस में जुड़ जाती हैं, तो संकल्प की सिद्धि होती ही होती है। और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने ऐसा ही जीवन जी करके दिखाया है। मैं डॉक्टर मुखर्जी की 125वीं जन्मजयंती के अवसर पर उन्हें नमन करता हूं, अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।

साथियों,

आज का यह कार्यक्रम इस बात का भी साक्षी है कि जब राष्ट्र प्रथम के संकल्प वाली सरकार होती है, तो राष्ट्र नायकों को सम्मान भी मिलता है और उनके विजन पर चलने का भी प्रयास होता है। डॉक्टर मुखर्जी की 125वीं जन्मजयंती को, हमारी सरकार दो वर्षों के राष्ट्रीय उत्सव के रूप में मना रही है। यह पिछले वर्ष 6 जुलाई को शुरू हुए थे और अगले साल 6 जुलाई तक चलेंगे। और अब तो बंगाल में भाजपा सरकार बनने के बाद इस राष्ट्रीय सम्मान को, एक प्रेरणा पुरुष को याद करने में बंगाल ने अपने आप में रौनक बढ़ा दी है। कुछ दिन पहले ही 20 जून को भव्य तरीके से पश्चिम बंग दिवस का आयोजन किया गया था। यह बंगाल की धरती, बंगाल की विरासत को प्रणाम था। आज का यह कार्यक्रम अपनी विरासत के प्रति उसी सम्मान का हिस्सा है। मैं पश्चिम बंगाल सरकार को इतने भव्य कार्यक्रम के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

डॉक्टर मुखर्जी का जीवन, एक विचार से जन-आंदोलन तक की परिणति का प्रेरक है। उन्होंने भारत में एक वैचारिक आंदोलन को जन्म दिया। आप देखिए, जिस समय जनसंघ की स्थापना हुई थी, तब हर तरफ कांग्रेस का ही बोलबाला था, कांग्रेस का ही वर्चस्व दिखाई देता था। एक ऐसे दौर में, जब अलग विचार के लिए कोई जगह ही नहीं थी, बड़ी मुश्किल था पैर रखने के लिए भी जगह मिल जाए, तब डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने उन सारी परिस्थितियों को चुनौती देते हुए एक नए विचार का साहस किया। यह केवल एक संगठन बनाने का निर्णय नहीं था, एक राजनीतिक दल को जन्म देने का काम नहीं था। यह लोकतंत्र में वैचारिक विविधता, राष्ट्रीय चिंतन और जनभागीदारी पर उनके अटूट विश्वास की अभिव्यक्ति थी। इसी विश्वास से भारतीय जनसंघ का जन्म हुआ। और साथियों, कोई भी विचार केवल स्थापना से अमर नहीं होता। विचार तब अमर होता है, जब पीढ़ियाँ उसे अपने जीवन से सींचती हैं। भारतीय जनसंघ के उस छोटे से दीये को जलाए रखने के लिए लक्षावधि कार्यकर्ताओं ने अपना जीवन खपा दिया। पल-पल, तिल-तिल, लाखों कार्यकर्ताओं के तप, त्याग और समर्पण ने, उस दीये की लौ को कभी बुझने नहीं दिया। आज वह दीया अपने मूल स्वरूप में भले न दिखाई देता हो, भारतीय जनसंघ आज उसी रूप में भले न हो, लेकिन उस दीये का जो प्रकाश-पुंज था, वो आज करोड़ों देशवासियों के विश्वास का प्रकाश बनकर फैल रहा है। उसी प्रकाश का विस्तार आज पूरे देश में खिले हुए करोड़ों कमल के रूप में दिखाई देता है। कभी जो भारतीय जनसंघ था, वही आज भारतीय जनता पार्टी के रूप में विश्व की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक शक्ति बनकर जनसेवा कर रहा है।

साथियों,

अक्सर हम देखते हैं कि समय के साथ कुछ विचारों का आकर्षण फीका पड़ता जाता है। लेकिन आप सोचिए, यह कितना सशक्त विचार-बीज डॉक्टर मुखर्जी ने रोपा है कि आज इतने साल बाद भी उसका इतनी तेजी से विस्तार हो रहा है। मुझे पूरा विश्वास है, जब आने वाली पीढ़ियाँ भारतीय जनता पार्टी की इस यात्रा का इतिहास लिखेंगी, इसका अध्ययन करेंगी, तब वह निश्चित रूप से डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के विचारों, उनके साहस और उनकी दूरदृष्टि का उल्लेख करेंगी। और मैं फिर कहूंगा, बंगाल के लिए तो यह डबल खुशी की बात है। एक तो डॉक्टर मुखर्जी की 125वीं जन्मजयंती और दूसरा, बंगाल में यह आयोजन, उनके विचार पुंज से निकली भाजपा सरकार में ये भव्य उत्सव हो रहा है। पश्चिम बंगाल की जनता की तरफ से अपने महान सपूत को ये बहुत ही आत्मीय श्रद्धांजलि है।

साथियों,

संसद में अपने एक भाषण में डॉक्टर मुखर्जी ने कहा था और यह डॉक्टर मुखर्जी का यह वाक्य आज भी हमें प्रेरणा देता है। डॉक्टर मुखर्जी ने पार्लियामेंट में कहा था- राष्ट्रीय एकता के धरातल पर ही सुनहरे भविष्य की नींव रखी जा सकती है। और देखिए, आज देश गर्व से कह सकता है कि डॉक्टर मुखर्जी अंतिम सांस तक इसी विश्वास को वो जीते थे, उन्होंने इसे जीया था। 1947 में जब देश का विभाजन हुआ, लगभग तय हो चुका था, तब एक और संकट सामने था। पूरे के पूरे बंगाल को ही भारत से अलग करने की साजिशें रची जा रही थीं। तब डॉक्टर मुखर्जी इन साजिशों के सामने चट्टान बनकर खड़े हो गए। उन्होंने जनमत तैयार किया, राजनीतिक संघर्ष किया और यह सुनिश्चित किया कि पश्चिम बंगाल भारत का अभिन्न हिस्सा बना रहे और तब डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने हुंकार भरी थी। उनके शब्द थे- कांग्रेस देश भाग कोरेछे, आमी पाकिस्तान के भाग कोरेछी। यानि कांग्रेस ने देश का बंटवारा किया, और मैंने पाकिस्तान का ही बंटवारा कर दिया।

साथियों,

यह जो हुंकार है, इसकी जो ताकत है, इसमें जिस बड़ी राजनीतिक इच्छाशक्ति के दर्शन होते हैं, उसका एहसास हमें तब भी होता है, जब हम आज की परिस्थितियों को देखते हैं।

साथियों,

डॉक्टर मुखर्जी, एक भारत श्रेष्ठ भारत के लिए पूरी तरह से समर्पित थे। और इसलिए, जब देश में दो विधान, दो प्रधान, दो निशान की बात हुई, तो डॉक्टर मुखर्जी ने इसका भी जमकर विरोध किया। उन्होंने देश को मंत्र दिया- एक देशे दुई बिधान, दुई प्रोधान एबॉन्ग दुई निशान, आमरा कोखोनो मेने नेबो ना यानि "एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान— नहीं चलेंगे, नहीं चलेंगे।" यह केवल एक नारा नहीं था। यह समान अधिकार, समान संविधान और समान राष्ट्रीय चेतना का आह्वान था। उन्होंने अपने सिद्धांतों के लिए संघर्ष किया, जेल गए और अंततः कश्मीर के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। आज हमारी सरकार को इस बात का गर्व है कि आर्टिकल 370 की दीवार गिराकर हमने डॉक्टर मुखर्जी का सपना पूरा किया है।

साथियों,

आज जब हम एक भारत, श्रेष्ठ भारत की बात करते हैं, तो यह उसी राष्ट्रीय दृष्टि का विस्तार है, जिसे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने अपने जीवन से परिभाषित किया। एक ऐसा भारत-जहाँ उत्तर और दक्षिण के बीच कोई दूरी न हो, जहाँ पूर्व और पश्चिम, समान अवसरों के सहभागी हों, जहाँ हर राज्य अपनी विशिष्ट पहचान के साथ भारत की सामूहिक शक्ति बने। जहाँ हर नागरिक एक ही संविधान, एक ही राष्ट्रीय भावना और एक ही भविष्य के संकल्प से जुड़ा हो। मुझे खुशी है कि डॉक्टर मुखर्जी की प्रेरणा से आज भारत का संविधान पूरे देश में आन-बान-शान के साथ लागू है और कोटि-कोटि देशवासियों को प्रेरणा दे रहा है।

साथियों,

डॉक्टर मुखर्जी, इस बात को अच्छे से समझते थे कि संस्थाओं के निर्माण में ही राष्ट्र निर्माण का तत्व छुपा है। मात्र 33 वर्ष की आयु में डॉ. मुखर्जी, कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति बने। लेकिन उन्होंने उस पद को केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं माना। उन्होंने विश्वविद्यालय को भारत के भविष्य का निर्माण करने वाली संस्था के रूप में देखा। उन्होंने शिक्षा को गुलामी की सोच के दायरे के बाहर निकालने का प्रयास किया। उन्होंने कहा- बोंगो-जातिर आत्तोशोम्मान पुनोर-उद्धार, एबॉन्ग मातृ-भाषार माध्योमे शिख्खार प्रोशार एई आमादेर प्रोधान लोक्खो होवा उचित! यानि बंगाल के लोगों का आत्मसम्मान लौटाना और मातृभाषा में पढ़ाई, यह हमारा प्रथम उद्देश्य है। उनका विश्वास था कि यदि भारत को आत्मविश्वासी राष्ट्र बनना है, तो उसकी शिक्षा भी भारतीय आत्मा से जुड़ी होनी चाहिए। इसी सोच के साथ उन्होंने भारतीय भाषाओं को सम्मान दिया। आज हमें इस बात का भी गर्व है कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत स्थानीय भाषा में पढ़ाई पर बल दिया जा रहा है। जो सपना डॉक्टर मुखर्जी ने देखा था, वो हमारी सरकार ने पूरा किया है।

साथियों,

स्वतंत्र भारत के प्रथम उद्योग मंत्री के रूप में उन्होंने औद्योगिक विकास का वृहद विजन रखा था। उन्होंने ऐसे राष्ट्रीय संस्थानों की नींव रखी, जो आने वाले दशकों तक भारत की आर्थिक शक्ति बनें। चित्तरंजन लोकोमोटिव वर्क्स ने भारत की रेल व्यवस्था को नई गति दी। सिंदरी फर्टिलाइजर प्लांट ने कृषि आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया। दामोदर वैली कॉरपोरेशन ने ऊर्जा और सिंचाई का नया अध्याय लिखा। इंडस्ट्रियल फाइनेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (IFCI) ने भारतीय उद्योगों को वित्तीय आधार दिया।

साथियों,

उनके लिए उद्योग, फैक्ट्रियां, यह केवल कुछ कल कारखाने नहीं थे। विश्वविद्यालय, केवल डिग्री देने वाले संस्थान नहीं थे। रिसर्च इंस्टीट्यूशंस, केवल वैज्ञानिक प्रयोगों की जगह नहीं थे। उनके लिए ये सभी, राष्ट्र निर्माण के साधना केंद्र थे। डॉक्टर मुखर्जी, ऐसी संस्थाओं के पक्षधर थे, जो टैलेंट को अवसर दें। ऐसी शिक्षा, जो इनोवेशन को प्रोत्साहन दे। ऐसे उद्योग, जो आत्मनिर्भरता का आधार बने। और ऐसी व्यवस्था, जो आने वाली पीढ़ियों को और अधिक सशक्त भारत सौंप सके। और यही स्पिरिट, आज विकसित भारत की भी प्रेरणा है।

साथियों,

आज के इस अवसर पर मैं, बंगाल के, पूरे देश के मेरे युवा साथियों से कहूंगा, डॉक्टर मुखर्जी ने एक भारत के लिए अपना जीवन समर्पित किया। हम सबको श्रेष्ठ भारत के लिए जीना है, हमें मिलकर विकसित भारत का संकल्प सिद्ध करना है। हमें देश को आत्मनिर्भर बनाना है। इसी आह्वान के साथ, एक बार फिर से मैं डॉक्टर मुखर्जी को नमन करता हूं। मैं उनके ही शब्दों में अपनी बात समाप्त करूंगा। यह डॉक्टर मुखर्जी के शब्द हैं, यह उनकी भाव भंगिमा है- जे काज एई हाते नाओ ना केनो, ता अत्योंतों गुरुत्तो शहोकारे कोरते होबे जो भी काम आरंभ करो, उसे पूरी गंभीरता से करो, तन्मयता से करो, पूरी निष्ठा से करो, कोई भी काम अधूरा ना छोड़ो, उसे जरूर पूरा करो। डॉक्टर मुखर्जी के शब्दों में यह प्रवाहित भावना के साथ, इनके ही इन शब्दों के साथ आप सभी को भी बहुत-बहुत शुभकामनाएं!

बहुत-बहुत धन्यवाद!