યોર એક્સેલન્સી પ્રેસિડેન્ટ ઓફ સાયપ્રસ, બંને દેશોના પ્રતિનિધિઓ, મીડિયાના સાથીઓ,

નમસ્કાર!

કાલીમેરા

સાયપ્રસના રાષ્ટ્રપતિજી અને તેમના પ્રતિનિધિમંડળનું ભારતમાં સ્વાગત કરતા મને ખૂબ જ આનંદ થઈ રહ્યો છે. રાષ્ટ્રપતિજી, ગયા વર્ષે, તમે સાયપ્રસમાં અમારું અત્યંત ઉષ્માભર્યું સ્વાગત કર્યું હતું. ભારત પ્રત્યે વિશેષ સન્માન દર્શાવતા, તમે મને સાયપ્રસના સર્વોચ્ચ સન્માનથી સન્માનિત કર્યો હતો.

સમગ્ર મુલાકાત દરમિયાન, તમારી આત્મીયતા, તમારો સ્નેહ અને ભારત પ્રત્યેનો તમારો વિશેષ લગાવ અમે ખૂબ જ ઊંડાણપૂર્વક અનુભવ્યો હતો. અને આજે તમારી ભારત મુલાકાત, આપણી સહિયારી યાત્રા (shared journey) નો આગામી મહત્વપૂર્ણ પડાવ છે.

મિત્રો,

ભારત અને સાયપ્રસની મિત્રતા મજબૂત પણ છે અને ભવિષ્યવાદી (ફ્યુચરિસ્ટિક) પણ છે. લોકશાહી અને કાયદાના શાસન જેવા મૂલ્યોમાં સહિયારો વિશ્વાસ, આપણી ભાગીદારીનો આધાર છે. આપણે તમામ દેશોની સાર્વભૌમત્વ અને પ્રાદેશિક અખંડિતતાનું સન્માન કરીએ છીએ. ભારત આ સિદ્ધાંતો પ્રત્યે સંપૂર્ણપણે પ્રતિબદ્ધ છે અને આગળ પણ રહેશે.

 

અને આજે જ્યારે ભારત અને યુરોપ પોતાના સંબંધોમાં એક નવા સુવર્ણ યુગમાં પ્રવેશ કરી રહ્યા છે; ત્યારે સાયપ્રસ આ સમયે ન માત્ર યુરોપિયન યુનિયન કાઉન્સિલની અધ્યક્ષતા કરી રહ્યું છે, પરંતુ ભારત અને સમગ્ર યુરોપ વચ્ચે એક મહત્વપૂર્ણ ઇન્વેસ્ટમેન્ટ ગેટવે (રોકાણના પ્રવેશદ્વાર) તરીકે ઉભરી રહ્યું છે.

મિત્રો,

સાયપ્રસ ભારતના ટોચના 10 રોકાણકારોમાંનું એક છે; છેલ્લા એક દાયકામાં, સાયપ્રસથી ભારતમાં રોકાણ લગભગ બમણું થયું છે. બંને દેશો વચ્ચે વિશ્વાસ વધ્યો છે. ભારત-યુરોપિયન યુનિયન ફ્રી ટ્રેડ એગ્રીમેન્ટથી તમામ નવી સંભાવનાઓ ઊભી થઈ છે. તેનો લાભ ઉઠાવીને આપણે આગામી પાંચ વર્ષમાં આ રોકાણને ફરીથી બમણું કરવાનું લક્ષ્ય રાખીએ છીએ. અને આ સંકલ્પને સાકાર કરવા માટે, આજે આપણે આપણા વિશ્વસનીય સંબંધોને એક વ્યૂહાત્મક ભાગીદારીના રૂપમાં ઉચ્ચ સ્તરે લઈ જઈ રહ્યા છીએ.

 

મિત્રો,

ભારત અને સાયપ્રસ વચ્ચેની આ વ્યૂહાત્મક ભાગીદારી, બંને દેશોના નાણાકીય અને સેવાઓના હબને જોડીને, વાણિજ્ય (કોમર્સ) માટે મૂડીને મુક્ત કરશે. તે સાયપ્રસના ઈન્ફ્રાસ્ટ્રક્ચર, ઊર્જા અને કૃષિ ક્ષેત્રમાં ભારતીય કંપનીઓ માટે નવી તકો પૂરી પાડશે. અને ભારતના ઝડપથી વધી રહેલા શિપિંગ અને મેરિટાઇમ (સમુદ્રી) ક્ષેત્રોમાં નવું રોકાણ લાવશે.

આપણે સાયપ્રસની સાથે મળીને, ગિફ્ટ સિટીને વૈશ્વિક નાણાકીય અને સેવાઓનું હબ બનાવવાના વિઝનને ગતિ આપીશું. અને બંને દેશોની ઇનોવેશન અને સ્ટાર્ટ-અપ ઇકોસિસ્ટમ વચ્ચે જોડાણ વધારીશું.

મિત્રો,

સંરક્ષણ અને સુરક્ષા સહયોગ પણ આપણા સંબંધોનો એક મહત્વપૂર્ણ સ્તંભ છે. આપણને ખૂબ જ આનંદ છે કે છેલ્લા કેટલાક વર્ષોમાં બંને દેશો વચ્ચે મિલિટરી એક્સચેન્જ (લશ્કરી આદાનપ્રદાન) અને તાલીમ સહયોગ વધ્યા છે. આજે આપણે સાયબર સિક્યોરિટી, મેરિટાઇમ સિક્યોરિટી અને કાઉન્ટર-ટેરરિઝમ (આતંકવાદ વિરોધી) સહયોગને પણ વધુ મજબૂત કરવાનો નિર્ણય લીધો છે.

એટલું જ નહીં, આપણે ઇન્ડો-પેસિફિક ઓશન્સ ઇનિશિયેટિવ, અને ઇન્ડિયા-મિડલ ઇસ્ટ યુરોપ ઇકોનોમિક કોરિડોર જેવી મહત્વપૂર્ણ પહેલો દ્વારા; કનેક્ટિવિટી સુનિશ્ચિત કરવા માટે પણ સાથે મળીને કામ કરીશું.

 

મિત્રો,

સાયપ્રસમાં વસેલા ભારતીય વ્યાવસાયિકો (professionals) અને વિદ્યાર્થીઓ (students), આપણા લોકો વચ્ચેના સંબંધોને વધુ સશક્ત બનાવી રહ્યા છે. આ સંબંધો (ties)ને વધુ સુદ્રઢ કરવા માટે આપણે ટૂંક સમયમાં જ એક વ્યાપક માઇગ્રેશન એન્ડ મોબિલિટી પાર્ટનરશિપ; અને સાથે-સાથે સોશિયલ સિક્યોરિટી એગ્રીમેન્ટ કરવા પર સહમતિ સાધી છે.

આજે આપણે સંસ્કૃતિ અને ઉચ્ચ શિક્ષણ પર પણ કરારો કરી રહ્યા છીએ; જેનાથી બંને દેશો વચ્ચે સાંસ્કૃતિક આદાનપ્રદાન અને સંશોધન સહયોગ પ્રગાઢ બનશે.

મિત્રો,

આજે આપણે સાથે મળીને વૈશ્વિક મુદ્દાઓ પર પણ વાત કરી. યુક્રેન હોય કે પશ્ચિમ એશિયા, આપણે સંઘર્ષના વહેલા અંત અને શાંતિના પ્રયાસોનું સમર્થન કરતા રહીશું. આપણે આ વાત પર પણ સહમત છીએ, કે વધતા જતા વૈશ્વિક પડકારોના ઉકેલ માટે વૈશ્વિક સંસ્થાઓનું સુધારણા (રિફોર્મ) અત્યંત તાકીદનું અને મહત્વપૂર્ણ છે.

 

યોર એક્સેલન્સી,

ભારત અને સાયપ્રસનો નાતો, સમયની કસોટી પર વારંવાર ખરો ઉતર્યો છે. આજે, ભારત-સાયપ્રસ વ્યૂહાત્મક ભાગીદારીની રચનાથી, આપણે આપણા સંબંધોને નવી મહત્વાકાંક્ષા અને નવી ગતિ આપવા જઈ રહ્યા છીએ.

 

યોર એક્સેલન્સી,

ભારત અને સાયપ્રસનો નાતો, સમયની કસોટી પર વારંવાર ખરો ઉતર્યો છે. આજે, ભારત-સાયપ્રસ વ્યૂહાત્મક ભાગીદારીની રચનાથી, આપણે આપણા સંબંધોને નવી મહત્વાકાંક્ષા અને નવી ગતિ આપવા જઈ રહ્યા છીએ.

આવો, આપણે સાથે મળીને આપણા સંબંધોને સહયોગથી સહ-નિર્માણ સુધી, અને ભાગીદારીથી સહિયારી સમૃદ્ધિ સુધી લઈ જઈએ.

ભારત અને સાયપ્રસ — સાથે મળીને, એક સુરક્ષિત, સમૃદ્ધ અને બહેતર ભવિષ્યનું નિર્માણ કરશે.

ખૂબ-ખૂબ ધન્યવાદ.

 

 

 

 

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Text of PM's remarks on the 125th Janma Jayanti of Dr. Syama Prasad Mookerjee
July 06, 2026
We pay homage to a great son of India whose unwavering commitment to national unity continues to inspire generations: PM
When there is a government with the resolution of Nation First, then national heroes also get due respect: PM
Dr. Mookerjee fiercely opposed the talk of two constitutions, two prime ministers, and two flags in the country: PM
He understood very well that the essence of nation-building is in the building of institutions : PM
Dr. Mookerjee laid the foundation for such national institutions which became India's economic strength for decades to come: PM

केंद्रीय मंत्रिमंडल में मेरे सहयोगी अमित भाई शाह, गजेंद्र सिंह शेखावत, पश्चिम बंगाल के ऊर्जावान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी, भाजपा के वरिष्ठ सदस्य, हम जैसे लाखों कार्यकर्ताओं की प्रेरणा, श्रीमान माखनलाल जी, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष, श्री शॉमिक भट्टाचार्य, उपस्थित जनप्रतिनिधिगण, अन्य महानुभाव, देवियों और सज्जनों!

आप सबको मेरा नमस्कार!

मैं अपने पूर्व नियोजित कार्यक्रम के कारण, इस समय प्रवास पर हूं। लेकिन टेक्नोलॉजी की मदद से इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में आपसे जुड़ रहा हूं।

साथियों,

आज देश की धरती, पश्चिम बंगाल की धरती, अपने एक महान सपूत, एक महान देशभक्त, भारत की अखंडता के लिए समर्पित एक युगदृष्टा को श्रद्धापूर्वक स्मरण कर रही है। आज हम उस विचार बीज का गुणगान कर रहे हैं, जो वर्तमान समय में चारों तरफ फल-फूल रहा है। जो, आधुनिक भारत को दिशा देने में बड़ी भूमिका निभा रहा है।

साथियों,

जहाँ जमीन से जुड़ी हुई वैचारिक शक्ति हो, साथ-साथ इरादे मजबूत हो और नीयत साफ़ हो और जब नए संकल्प के साथ संपूर्ण समर्पण हो और ये सारी कड़ियां जब आपस में जुड़ जाती हैं, तो संकल्प की सिद्धि होती ही होती है। और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने ऐसा ही जीवन जी करके दिखाया है। मैं डॉक्टर मुखर्जी की 125वीं जन्मजयंती के अवसर पर उन्हें नमन करता हूं, अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।

साथियों,

आज का यह कार्यक्रम इस बात का भी साक्षी है कि जब राष्ट्र प्रथम के संकल्प वाली सरकार होती है, तो राष्ट्र नायकों को सम्मान भी मिलता है और उनके विजन पर चलने का भी प्रयास होता है। डॉक्टर मुखर्जी की 125वीं जन्मजयंती को, हमारी सरकार दो वर्षों के राष्ट्रीय उत्सव के रूप में मना रही है। यह पिछले वर्ष 6 जुलाई को शुरू हुए थे और अगले साल 6 जुलाई तक चलेंगे। और अब तो बंगाल में भाजपा सरकार बनने के बाद इस राष्ट्रीय सम्मान को, एक प्रेरणा पुरुष को याद करने में बंगाल ने अपने आप में रौनक बढ़ा दी है। कुछ दिन पहले ही 20 जून को भव्य तरीके से पश्चिम बंग दिवस का आयोजन किया गया था। यह बंगाल की धरती, बंगाल की विरासत को प्रणाम था। आज का यह कार्यक्रम अपनी विरासत के प्रति उसी सम्मान का हिस्सा है। मैं पश्चिम बंगाल सरकार को इतने भव्य कार्यक्रम के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

डॉक्टर मुखर्जी का जीवन, एक विचार से जन-आंदोलन तक की परिणति का प्रेरक है। उन्होंने भारत में एक वैचारिक आंदोलन को जन्म दिया। आप देखिए, जिस समय जनसंघ की स्थापना हुई थी, तब हर तरफ कांग्रेस का ही बोलबाला था, कांग्रेस का ही वर्चस्व दिखाई देता था। एक ऐसे दौर में, जब अलग विचार के लिए कोई जगह ही नहीं थी, बड़ी मुश्किल था पैर रखने के लिए भी जगह मिल जाए, तब डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने उन सारी परिस्थितियों को चुनौती देते हुए एक नए विचार का साहस किया। यह केवल एक संगठन बनाने का निर्णय नहीं था, एक राजनीतिक दल को जन्म देने का काम नहीं था। यह लोकतंत्र में वैचारिक विविधता, राष्ट्रीय चिंतन और जनभागीदारी पर उनके अटूट विश्वास की अभिव्यक्ति थी। इसी विश्वास से भारतीय जनसंघ का जन्म हुआ। और साथियों, कोई भी विचार केवल स्थापना से अमर नहीं होता। विचार तब अमर होता है, जब पीढ़ियाँ उसे अपने जीवन से सींचती हैं। भारतीय जनसंघ के उस छोटे से दीये को जलाए रखने के लिए लक्षावधि कार्यकर्ताओं ने अपना जीवन खपा दिया। पल-पल, तिल-तिल, लाखों कार्यकर्ताओं के तप, त्याग और समर्पण ने, उस दीये की लौ को कभी बुझने नहीं दिया। आज वह दीया अपने मूल स्वरूप में भले न दिखाई देता हो, भारतीय जनसंघ आज उसी रूप में भले न हो, लेकिन उस दीये का जो प्रकाश-पुंज था, वो आज करोड़ों देशवासियों के विश्वास का प्रकाश बनकर फैल रहा है। उसी प्रकाश का विस्तार आज पूरे देश में खिले हुए करोड़ों कमल के रूप में दिखाई देता है। कभी जो भारतीय जनसंघ था, वही आज भारतीय जनता पार्टी के रूप में विश्व की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक शक्ति बनकर जनसेवा कर रहा है।

साथियों,

अक्सर हम देखते हैं कि समय के साथ कुछ विचारों का आकर्षण फीका पड़ता जाता है। लेकिन आप सोचिए, यह कितना सशक्त विचार-बीज डॉक्टर मुखर्जी ने रोपा है कि आज इतने साल बाद भी उसका इतनी तेजी से विस्तार हो रहा है। मुझे पूरा विश्वास है, जब आने वाली पीढ़ियाँ भारतीय जनता पार्टी की इस यात्रा का इतिहास लिखेंगी, इसका अध्ययन करेंगी, तब वह निश्चित रूप से डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के विचारों, उनके साहस और उनकी दूरदृष्टि का उल्लेख करेंगी। और मैं फिर कहूंगा, बंगाल के लिए तो यह डबल खुशी की बात है। एक तो डॉक्टर मुखर्जी की 125वीं जन्मजयंती और दूसरा, बंगाल में यह आयोजन, उनके विचार पुंज से निकली भाजपा सरकार में ये भव्य उत्सव हो रहा है। पश्चिम बंगाल की जनता की तरफ से अपने महान सपूत को ये बहुत ही आत्मीय श्रद्धांजलि है।

साथियों,

संसद में अपने एक भाषण में डॉक्टर मुखर्जी ने कहा था और यह डॉक्टर मुखर्जी का यह वाक्य आज भी हमें प्रेरणा देता है। डॉक्टर मुखर्जी ने पार्लियामेंट में कहा था- राष्ट्रीय एकता के धरातल पर ही सुनहरे भविष्य की नींव रखी जा सकती है। और देखिए, आज देश गर्व से कह सकता है कि डॉक्टर मुखर्जी अंतिम सांस तक इसी विश्वास को वो जीते थे, उन्होंने इसे जीया था। 1947 में जब देश का विभाजन हुआ, लगभग तय हो चुका था, तब एक और संकट सामने था। पूरे के पूरे बंगाल को ही भारत से अलग करने की साजिशें रची जा रही थीं। तब डॉक्टर मुखर्जी इन साजिशों के सामने चट्टान बनकर खड़े हो गए। उन्होंने जनमत तैयार किया, राजनीतिक संघर्ष किया और यह सुनिश्चित किया कि पश्चिम बंगाल भारत का अभिन्न हिस्सा बना रहे और तब डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने हुंकार भरी थी। उनके शब्द थे- कांग्रेस देश भाग कोरेछे, आमी पाकिस्तान के भाग कोरेछी। यानि कांग्रेस ने देश का बंटवारा किया, और मैंने पाकिस्तान का ही बंटवारा कर दिया।

साथियों,

यह जो हुंकार है, इसकी जो ताकत है, इसमें जिस बड़ी राजनीतिक इच्छाशक्ति के दर्शन होते हैं, उसका एहसास हमें तब भी होता है, जब हम आज की परिस्थितियों को देखते हैं।

साथियों,

डॉक्टर मुखर्जी, एक भारत श्रेष्ठ भारत के लिए पूरी तरह से समर्पित थे। और इसलिए, जब देश में दो विधान, दो प्रधान, दो निशान की बात हुई, तो डॉक्टर मुखर्जी ने इसका भी जमकर विरोध किया। उन्होंने देश को मंत्र दिया- एक देशे दुई बिधान, दुई प्रोधान एबॉन्ग दुई निशान, आमरा कोखोनो मेने नेबो ना यानि "एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान— नहीं चलेंगे, नहीं चलेंगे।" यह केवल एक नारा नहीं था। यह समान अधिकार, समान संविधान और समान राष्ट्रीय चेतना का आह्वान था। उन्होंने अपने सिद्धांतों के लिए संघर्ष किया, जेल गए और अंततः कश्मीर के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। आज हमारी सरकार को इस बात का गर्व है कि आर्टिकल 370 की दीवार गिराकर हमने डॉक्टर मुखर्जी का सपना पूरा किया है।

साथियों,

आज जब हम एक भारत, श्रेष्ठ भारत की बात करते हैं, तो यह उसी राष्ट्रीय दृष्टि का विस्तार है, जिसे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने अपने जीवन से परिभाषित किया। एक ऐसा भारत-जहाँ उत्तर और दक्षिण के बीच कोई दूरी न हो, जहाँ पूर्व और पश्चिम, समान अवसरों के सहभागी हों, जहाँ हर राज्य अपनी विशिष्ट पहचान के साथ भारत की सामूहिक शक्ति बने। जहाँ हर नागरिक एक ही संविधान, एक ही राष्ट्रीय भावना और एक ही भविष्य के संकल्प से जुड़ा हो। मुझे खुशी है कि डॉक्टर मुखर्जी की प्रेरणा से आज भारत का संविधान पूरे देश में आन-बान-शान के साथ लागू है और कोटि-कोटि देशवासियों को प्रेरणा दे रहा है।

साथियों,

डॉक्टर मुखर्जी, इस बात को अच्छे से समझते थे कि संस्थाओं के निर्माण में ही राष्ट्र निर्माण का तत्व छुपा है। मात्र 33 वर्ष की आयु में डॉ. मुखर्जी, कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति बने। लेकिन उन्होंने उस पद को केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं माना। उन्होंने विश्वविद्यालय को भारत के भविष्य का निर्माण करने वाली संस्था के रूप में देखा। उन्होंने शिक्षा को गुलामी की सोच के दायरे के बाहर निकालने का प्रयास किया। उन्होंने कहा- बोंगो-जातिर आत्तोशोम्मान पुनोर-उद्धार, एबॉन्ग मातृ-भाषार माध्योमे शिख्खार प्रोशार एई आमादेर प्रोधान लोक्खो होवा उचित! यानि बंगाल के लोगों का आत्मसम्मान लौटाना और मातृभाषा में पढ़ाई, यह हमारा प्रथम उद्देश्य है। उनका विश्वास था कि यदि भारत को आत्मविश्वासी राष्ट्र बनना है, तो उसकी शिक्षा भी भारतीय आत्मा से जुड़ी होनी चाहिए। इसी सोच के साथ उन्होंने भारतीय भाषाओं को सम्मान दिया। आज हमें इस बात का भी गर्व है कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत स्थानीय भाषा में पढ़ाई पर बल दिया जा रहा है। जो सपना डॉक्टर मुखर्जी ने देखा था, वो हमारी सरकार ने पूरा किया है।

साथियों,

स्वतंत्र भारत के प्रथम उद्योग मंत्री के रूप में उन्होंने औद्योगिक विकास का वृहद विजन रखा था। उन्होंने ऐसे राष्ट्रीय संस्थानों की नींव रखी, जो आने वाले दशकों तक भारत की आर्थिक शक्ति बनें। चित्तरंजन लोकोमोटिव वर्क्स ने भारत की रेल व्यवस्था को नई गति दी। सिंदरी फर्टिलाइजर प्लांट ने कृषि आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया। दामोदर वैली कॉरपोरेशन ने ऊर्जा और सिंचाई का नया अध्याय लिखा। इंडस्ट्रियल फाइनेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (IFCI) ने भारतीय उद्योगों को वित्तीय आधार दिया।

साथियों,

उनके लिए उद्योग, फैक्ट्रियां, यह केवल कुछ कल कारखाने नहीं थे। विश्वविद्यालय, केवल डिग्री देने वाले संस्थान नहीं थे। रिसर्च इंस्टीट्यूशंस, केवल वैज्ञानिक प्रयोगों की जगह नहीं थे। उनके लिए ये सभी, राष्ट्र निर्माण के साधना केंद्र थे। डॉक्टर मुखर्जी, ऐसी संस्थाओं के पक्षधर थे, जो टैलेंट को अवसर दें। ऐसी शिक्षा, जो इनोवेशन को प्रोत्साहन दे। ऐसे उद्योग, जो आत्मनिर्भरता का आधार बने। और ऐसी व्यवस्था, जो आने वाली पीढ़ियों को और अधिक सशक्त भारत सौंप सके। और यही स्पिरिट, आज विकसित भारत की भी प्रेरणा है।

साथियों,

आज के इस अवसर पर मैं, बंगाल के, पूरे देश के मेरे युवा साथियों से कहूंगा, डॉक्टर मुखर्जी ने एक भारत के लिए अपना जीवन समर्पित किया। हम सबको श्रेष्ठ भारत के लिए जीना है, हमें मिलकर विकसित भारत का संकल्प सिद्ध करना है। हमें देश को आत्मनिर्भर बनाना है। इसी आह्वान के साथ, एक बार फिर से मैं डॉक्टर मुखर्जी को नमन करता हूं। मैं उनके ही शब्दों में अपनी बात समाप्त करूंगा। यह डॉक्टर मुखर्जी के शब्द हैं, यह उनकी भाव भंगिमा है- जे काज एई हाते नाओ ना केनो, ता अत्योंतों गुरुत्तो शहोकारे कोरते होबे जो भी काम आरंभ करो, उसे पूरी गंभीरता से करो, तन्मयता से करो, पूरी निष्ठा से करो, कोई भी काम अधूरा ना छोड़ो, उसे जरूर पूरा करो। डॉक्टर मुखर्जी के शब्दों में यह प्रवाहित भावना के साथ, इनके ही इन शब्दों के साथ आप सभी को भी बहुत-बहुत शुभकामनाएं!

बहुत-बहुत धन्यवाद!