PM addresses programme at Tulsi Peeth in Chitrakoot, Madhya Pradesh

Published By : Admin | October 27, 2023 | 15:53 IST
“Ashtadhyayi is a thousands-year-old text of India's linguistics, India's intellectuality and our research culture”
“Time refined Sanskrit but could never pollute it, it remained eternal”
“Whatever national dimension you look at in India, you will witness Sanskrit’s contribution”
“Sanskrit is not only the language of traditions, it is also the language of our progress and identity”
“Chitrakoot has spiritual enlightenment as well as natural beauty”

The Prime Minister, Shri Narendra Modi visited Tulsi Peeth in Chitrakoot today. He performed pooja and darshan at Kanch Mandir. He received the blessings of Jagadguru Rambhadracharya of the Tulsi Peeth and attended a public function, where he released three books - ‘Ashtadhyayi Bhashya’, ‘Rambhadracharya Charitam’ and ‘Bhagwan Shri Krishna ki Rashtraleela’.

Addressing the gathering, the Prime Minister expressed gratitude for performing puja and darshan of Shri Ram in multiple shrines and being blessed by saints, especially Jagadguru Rambhadracharya. He also mentioned releasing the three books namely ‘Ashtadhyayi Bhashya’, ‘Rambhadracharya Charitam’ and ‘Bhagwan Shri Krishna ki Rashtraleela’ and said that it will further strengthen the knowledge traditions of India. “I consider these books as a form of Jagadguru’s blessings”, he emphasized.

The Prime Minister said “Ashtadhyayi is a thousands-year-old text of India's linguistics, India's intellectuality and our research culture.” He highlighted the genius of Ashtadhyayi as it encapsulates grammar and science of language in pithy capsules. He said that many languages came and went but Sanskrit remains eternal. “Time refined Sanskrit but could never pollute it”, he said. mature grammar of Sanskrit lies in the base of this permanence, he said. Based on just 14 Maheshwara Sutras, this language has been the mother of Shastr and Sahstra (implements and scholarship). “Whatever national dimension you look at in India, you will witness Sanskrit’s contribution”, he said.

Throwing light on the efforts to uproot the culture and heritage of India during the thousand year old era of slavery, Shri Modi mentioned the alienation of Sanskrit language. He pointed out the slavery mentality which was carried forward by certain individuals resulting in a feeling of enmity towards Sanskrit. Prime Minister Modi lamented the mentality where knowing the mother tongue was praiseworthy for foreign countries but the same did not apply to India. “Sanskrit is not only the language of traditions, it is also the language of our progress and identity”, Shri Modi interjected as he highlighted the efforts to strengthen the language in the country. “Scriptures like Ashtadhyayi Bhashya will play a crucial role towards successful efforts in modern times”, he added.

Prime Minister Modi paid rich tributes to Jagadguru Rambhadracharya and mentioned his enormous wisdom and contributions. “This level of wisdom is never personal, this wisdom is national treasure”, the Prime Minister said. Swamiji received Padam Vibhushan in 2015. Referring to nationalistic and social aspects of Swami ji the Prime Minister remembered his active contribution in Swachh Bharat as one of the nine key ambassadors.

Shri Modi expressed happiness that national goals like cleanliness, health and clean Ganga are being realized now. He informed “Jagadguru Rambhadracharya ji has played a big role in fulfilling another dream of every countryman. The Ram temple for which you have contributed so much, in and outside the court, is also going to be ready”, the Prime Minister said as he mentioned the invitation received to participate in the Pran Pratishtha ceremony by Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust in Ayodhya.

In the Amrit Kaal, the Prime Minister underlined that the nation is taking development and heritage along. “Chitrakoot has spiritual enlightenment as well as natural beauty”, Shri Modi said as he mentioned the emphasis on the development of places of pilgrimage. He mentioned Ken-Betwa Link Project, Bundelkhand Expressway, and the Defence Corridor and said that it will create new opportunities in the region. Concluding the address, the Prime Minister expressed the belief that Chitrakoot will scale new heights of development and also bowed before Jagadguru Rambhadracharya.

Jagadguru Rambhadracharya of the Tulsi Peeth, Governor of Madhya Pradesh, Shri Mangubhai Patel, Chief Minister of Madhya Pradesh, Shri Shivraj Singh Chauhan were among those present on the occasion.

Background

Tulsi Peeth is an important religious and social service institution in Chitrakoot, Madhya Pradesh. It was established by Jagadguru Rambhadracharya in 1987. Tulsi Peeth is one of the leading publishers of Hindu religious literature.

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गायत्री परिवार के सभी उपासक, सभी समाजसेवी

उपस्थित साधक साथियों,

देवियों और सज्जनों,

गायत्री परिवार का कोई भी आयोजन इतनी पवित्रता से जुड़ा होता है, कि उसमें शामिल होना अपने आप में सौभाग्य की बात होती है। मुझे खुशी है कि मैं आज देव संस्कृति विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित अश्वमेध यज्ञ का हिस्सा बन रहा हूँ। जब मुझे गायत्री परिवार की तरफ से इस अश्वमेध यज्ञ में शामिल होने का निमंत्रण मिला था, तो समय अभाव के साथ ही मेरे सामने एक दुविधा भी थी। वीडियो के माध्यम से भी इस कार्यक्रम से जुड़ने पर एक समस्या ये थी कि सामान्य मानवी, अश्वमेध यज्ञ को सत्ता के विस्तार से जोड़कर देखता है। आजकल चुनाव के इन दिनों में स्वाभाविक है कि अश्वमेध यज्ञ के कुछ और भी मतलब निकाले जाते। लेकिन फिर मैंने देखा कि ये अश्वमेध यज्ञ, आचार्य श्रीराम शर्मा की भावनाओं को आगे बढ़ा रहा है, अश्वमेध यज्ञ के एक नए अर्थ को प्रतिस्थापित कर रहा है, तो मेरी सारी दुविधा दूर हो गई।

आज गायत्री परिवार का अश्वमेध यज्ञ, सामाजिक संकल्प का एक महा-अभियान बन चुका है। इस अभियान से जो लाखों युवा नशे और व्यसन की कैद से बचेंगे, उनकी वो असीम ऊर्जा राष्ट्र निर्माण के काम में आएगी। युवा ही हमारे राष्ट्र का भविष्य हैं। युवाओं का निर्माण ही राष्ट्र के भविष्य का निर्माण है। उनके कंधों पर ही इस अमृतकाल में भारत को विकसित बनाने की जिम्मेदारी है। मैं इस यज्ञ के लिए गायत्री परिवार को हृदय से शुभकामनाएँ देता हूँ। मैं तो स्वयं भी गायत्री परिवार के सैकड़ों सदस्यों को व्यक्तिगत रूप से जानता हूं। आप सभी भक्ति भाव से, समाज को सशक्त करने में जुटे हैं। श्रीराम शर्मा जी के तर्क, उनके तथ्य, बुराइयों के खिलाफ लड़ने का उनका साहस, व्यक्तिगत जीवन की शुचिता, सबको प्रेरित करने वाली रही है। आप जिस तरह आचार्य श्रीराम शर्मा जी और माता भगवती जी के संकल्पों को आगे बढ़ा रहे हैं, ये वास्तव में सराहनीय है।

साथियों,

नशा एक ऐसी लत होती है जिस पर काबू नहीं पाया गया तो वो उस व्यक्ति का पूरा जीवन तबाह कर देती है। इससे समाज का, देश का बहुत बड़ा नुकसान होता है।इसलिए ही हमारी सरकार ने 3-4 साल पहले एक राष्ट्रव्यापी नशा मुक्त भारत अभियान की शुरूआत की थी। मैं अपने मन की बात कार्यक्रम में भी इस विषय को उठाता रहा हूं। अब तक भारत सरकार के इस अभियान से 11 करोड़ से ज्यादा लोग जुड़ चुके हैं। लोगों को जागरूक करने के लिए बाइक रैलियां निकाली गई हैं, शपथ कार्यक्रम हुए हैं, नुक्कड़ नाटक हुए हैं। सरकार के साथ इस अभियान से सामाजिक संगठनों और धार्मिक संस्थाओं को भी जोड़ा गया है। गायत्री परिवार तो खुद इस अभियान में सरकार के साथ सहभागी है। कोशिश यही है कि नशे के खिलाफ संदेश देश के कोने-कोने में पहुंचे। हमने देखा है,अगर कहीं सूखी घास के ढेर में आग लगी हो तो कोई उस पर पानी फेंकता है, कई मिट्टी फेंकता है। ज्यादा समझदार व्यक्ति, सूखी घास के उस ढेर में, आग से बची घास को दूर हटाने का प्रयास करता है। आज के इस समय में गायत्री परिवार का ये अश्वमेध यज्ञ, इसी भावना को समर्पित है। हमें अपने युवाओं को नशे से बचाना भी है और जिन्हें नशे की लत लग चुकी है, उन्हें नशे की गिरफ्त से छुड़ाना भी है।

साथियों,

हम अपने देश के युवा को जितना ज्यादा बड़े लक्ष्यों से जोड़ेंगे, उतना ही वो छोटी-छोटी गलतियों से बचेंगे। आज देश विकसित भारत के लक्ष्य पर काम कर रहा है, आज देश आत्मनिर्भर होने के लक्ष्य पर काम कर रहा है। आपने देखा है, भारत की अध्यक्षता में G-20 समिट का आयोजन 'One Earth, One Family, One Future' की थीम पर हुआ है। आज दुनिया 'One sun, one world, one grid' जैसे साझा प्रोजेक्ट्स पर काम करने के लिए तैयार हुई है। 'One world, one health' जैसे मिशन आज हमारी साझी मानवीय संवेदनाओं और संकल्पों के गवाह बन रहे हैं। ऐसे राष्ट्रीय और वैश्विक अभियानों में हम जितना ज्यादा देश के युवाओं को जोड़ेंगे, उतना ही युवा किसी गलत रास्ते पर चलने से बचेंगे। आज सरकार स्पोर्ट्स को इतना बढ़ावा दे रही है..आज सरकार साइंस एंड रिसर्च को इतना बढ़ावा दे रही है... आपने देखा है कि चंद्रयान की सफलता ने कैसे युवाओं में टेक्नोलॉजी के लिए नया क्रेज पैदा कर दिया है...ऐसे हर प्रयास, ऐसे हर अभियान, देश के युवाओं को अपनी ऊर्जा सही दिशा में लगाने के लिए प्रेरित करते हैं। फिट इंडिया मूवमेंट हो....खेलो इंडिया प्रतियोगिता हो....ये प्रयास, ये अभियान, देश के युवा को मोटीवेट करते हैं। और एक मोटिवेटेड युवा, नशे की तरफ नहीं मुड़ सकता। देश की युवा शक्ति का पूरा लाभ उठाने के लिए सरकार ने भी मेरा युवा भारत नाम से बहुत बड़ा संगठन बनाया है। सिर्फ 3 महीने में ही इस संगठन से करीब-करीब डेढ़ करोड़ युवा जुड़ चुके हैं। इससे विकसित भारत का सपना साकार करने में युवा शक्ति का सही उपयोग हो पाएगा।

साथियों,

देश को नशे की इस समस्या से मुक्ति दिलाने में बहुत बड़ी भूमिका...परिवार की भी है, हमारे पारिवारिक मूल्यों की भी है। हम नशा मुक्ति को टुकड़ों में नहीं देख सकते। जब एक संस्था के तौर पर परिवार कमजोर पड़ता है, जब परिवार के मूल्यों में गिरावट आती है, तो इसका प्रभाव हर तरफ नजर आता है। जब परिवार की सामूहिक भावना में कमी आती है... जब परिवार के लोग कई-कई दिनों तक एक दूसरे के साथ मिलते नहीं हैं, साथ बैठते नहीं हैं...जब वो अपना सुख-दुख नहीं बांटते... तो इस तरह के खतरे और बढ़ जाते हैं। परिवार का हर सदस्य अपने-अपने मोबाइल में ही जुटा रहेगा तो फिर उसकी अपनी दुनिया बहुत छोटी होती चली जाएगी।इसलिए देश को नशामुक्त बनाने के लिए एक संस्था के तौर पर परिवार का मजबूत होना, उतना ही आवश्यक है।

साथियों,

राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह के समय मैंने कहा था कि अब भारत की एक हजार वर्षों की नई यात्रा शुरू हो रही है। आज आजादी के अमृतकाल में हम उस नए युग की आहट देख रहे हैं। मुझे विश्वास है कि, व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण के इस महाअभियान में हम जरूर सफल होंगे। इसी संकल्प के साथ, एक बार फिर गायत्री परिवार को बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद!