मंच पर विराजमान राज्यपाल श्रीमान एनएन वोहरा जी, यहां के मुख्यमंत्री श्रीमान उमर अब्दुल्ला जी, केंद्र में मंत्रिपरिषद के मेरे साथी ऊर्जा मंत्री श्रीमान पीयूष गोयल जी, जम्मू -कश्मीर सरकार के शहरी विकास मंत्री नवांग रिगज़ीन जोरा जी हमारे उर्जावान और समाज सेवा में सदा तत्पर नवनिर्वाचित सांसद श्रीमान थूपस्टन चेवांग जी, संसद में हमारे साथी श्री तरूण विजय जी, संसद के हमारे दूसरे साथी श्री अविनाश राय खन्ना जी, ऊर्जा सचिव श्रीमान पी.के. सिन्हा जी, पावर ग्रिड के सीएमडी, आर.एन. नायक जी और विशाल संख्या में पधारे हुए लद्दाख के मेरे प्यारे भाईयों और बहनों, शायद बहुत लंबे अरसे के बाद लेह लद्दाख की इन चोटियों ने इतना बड़ा भारी जनसागर देखा होगा। यह मेरा सौभाग्य रहा है कि मुझे कई वर्षों तक जम्मू कश्मीर क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी के संगठन के कार्यकर्ता के रूप में कार्य करने का अवसर मिला था और इसके कारण इस क्षेत्र में मुझे बार-बार आने का अवसर मिलता था। मैं यहां के जीवन से भलिभांति परिचित हूं, यहां की कठिनाईयों से भी परिचित हूं और सबसे बड़ी बात, मैं यहां की शक्ति से भी परिचित हूं। लेकिन मुझे यहां आने में, बीच में काफी समय बीत गया। गुजरात में मुख्यमंत्री का दायित्व मिलने के बाद मैं आ नहीं पाया था। पिछले लोकसभा के चुनाव में भी मेरा मन करता था मैं कैसे भी करके यहां पहुंचू, लेकिन नहीं आ पाया और मेरे लिए अशचर्य की बात है कि मैंने अपना एक लिखित भाषण भेज दिया था और लद्दाख और लेह के इस इलाके के लोगों ने मुझ पर इतना प्यार बरसाया, इतना प्यार बरसाया कि मेरे भाषण को सुनने के लिए भी बहुत बड़ी तादाद में आप लोग आए हैं। मैं आपके इस प्यार को कभी भूल नहीं सकता। और आपने मुझे जितना प्यार दिया है, जितना सम्मान दिया है, यह कर्ज जो मैं चुकाऊंगा, ब्याज समेत चुकाऊंगा, आज इस समय चुकाऊंगा और इस क्षेत्र के विकास के लिए जो भी कर सकता हूं करके, आपकी शक्ति को पहचानकर, यह शक्ति राष्ट्र की शक्ति कैसे बने, यह ऊर्जावान प्रदेश राष्ट्र का ऊर्जावान प्रदेश कैसे बने। इसके लिए दिल्लीं में बैठी हुई भारत सरकार प्रतिबद्ध है और जम्मू कश्मीर के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने के लिए संकल्प बद्ध है।

एक समय था दो-दो, पांच-पांच, दस-दस साल तक कभी प्रधानमंत्री जम्मू -कश्मीर के धरती पर नहीं आते थे, पर ये एक वक्त है, महीने में दो बार एक प्रधानमंत्री आ रहा है। आपका प्यार मुझे खींचकर ले आता है और मैं हमेशा मानता हूं कि ये क्षेत्र ऐसा है खासकर लेह-लद्दाख का जहां पर से प्रकाश, पर्यावरण और पर्यटन ये तीन पी, प्रकाश, पर्यावरण और पर्यटन ये ऐसी ताकतें हैं जो सिर्फ लेह-लद्दाख नहीं, सिर्फ जम्मू कश्मीर नहीं, भारत की भलाई के लिए भी इन ताकतों का अगर भली-भांति संयोजन हो, समागम हो, और उसका विकास हो, तो भारत की भलाई के लिए भी काम आ सकेगा। यहां का प्रकाश अंधेरों को भगाने के लिए पर्यावरण की रक्षा के लिए और पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए एक बहुत बड़ी मिसाल है।

मुख्यमंत्री जी ने कहा गुजरात के और लेह-लद्दाख के सोलर रेडिएशन समान हैं। गुजरात के रेगिस्तान में जितनी सोलर रेडिएशन की संभावना है उतनी ही सोलर रेडिएशन की संभावना लेह-लद्दाख में है। गुजरात का कच्छ का जिला बहुत बड़ा सीमा क्षेत्र है। लेह–लद्दाख का जिला क्षेत्र भी बहुत बड़ा सीमा क्षेत्र है। सोलर रेडिएशन के लिए, भारत सरकार ने वर्तमान बजट में लेह-लद्दाख को भी अपने योजना के केंद्र में रखा। बहुत बड़ा सोलर आधार जिसकी संभावनाएं यहां पर है। आज यहां दो महत्वतपूर्ण प्रोजेक्टर, और इसके बाद कारगिल में एक महत्वदपूर्ण प्रोजेक्ट के लिए मुझे जाना है। अब आप उधारी रोशनी पर नहीं जीएँगे, आप अपनी खुद की रोशनी पर जीने वाले हों, अब आपका यह इलाका स्वयं प्रकाशित हो रहा है। वो डीजल की आवाज, वो धूयें, वो पर्यावरण का संकट इन सबसे मुक्ति का एक पर्व है, ये पावर प्रोजेक्टी जो आज देश को लोकापर्ण हो रहा है।

राष्ट्र के हर कोने को हर प्रकार से हमें जोड़ना है। चाहे रेल क्नेटक्टिविटी हो, एयर क्नेक्टिविटि हो, रोड क्नेटक्टिविटी हो, टेलीकॉम क्नेटक्टिविटी हो या बिजली ग्रिड की क्नेटक्टिविटी हो, हिदुस्तान के हर कोने को जोड़ना है और आज मुझे खुशी है कि हिंदुस्तान के दूर-सुदूर सीमावर्ती क्षेत्रों को भी बिजली ग्रिड से जोड़ने के एक अभियान का शिलान्यास हो रहा है। जो सपना अटल वाजपेयी जी ने देखा था उसको पूरा करने का आज हम प्रारंभ कर रहे हैं। करीब 18 सौ करोड़ रूपये की लागत से और टेक्नॉलोजीकली बहुत ही उत्तकम प्रकार की योजना से, यह बिजली की ग्रिड, यहाँ से बिजली ले जाने के लिए भी और यहां से बिजली लाने के लिए भी, दूर सुदूर बिजली पहुंचाने के लिए काम आने वाली है। आप कल्पना कर सकते है जब यह काम पूरा होगा तब इस पूरे क्षेत्र का, लद्धाख से श्रीनगर तक के रास्ते के जीवन में कितना बड़ा बदलाव आ जाएगा।

आख़िरकार विकास वह होना चाहिए जो सामान्य मानव के जीवन में बदलाव लाए हम उन योजनाओं पर बल दे रहे हैं, जो सामान्य मानव के जीवन में बदलाव लाने के लिए काम आये, और उसमें ऊर्जा का बहुत बड़ा महत्व होता है। यह क्षेत्र, सारे विश्व के लिए आकर्षण का क्षेत्र कैसे बने। एक विशिष्ट प्रकार की यहां प्राकृतिक व्यवस्था है। मैं हमेशा देखता हूं कि यहां के लोगों की चेहरे की मुस्कान जब यहां के चट्टान की चोटी पर थोड़ा सा जो बर्फ होता हैं और जब चोटियां मुस्कराती हैं वैसे ही यहां का हर व्यक्ति, उसके चेहरे पर मुस्का‍न नजर आती है। यहां की राष्ट्रभक्ति भारत की रक्षा की एक मिसाल है। मैं आपके भीतर की उस राष्ट्रभक्ति आपके उस त्याग और तपस्‍या को विशेष रूप से आज नमन करना चाहता हूं, अभिनंदन करना चाहता हूं और यही एक बहुत बड़ी ताकत है जो आप देश को दे रहे है और इसलिए आपके इस सामर्थ का भी मैं गौरव करता हूं।

मैं जब दिल्ली़ से बार-बार इस क्षेत्र में दौरा करने आता था, जिन लोगों से मेरा परिचय था, दिल्लीे में, उन परिवारों की मांग रहती थी, मोदी जी लद्दाख कब जा रहे हो, तो मैं पूछता था क्यों ? क्या काम है? बोलते इस बार जब जाओगे तो गोभी और आलू ले आना। मुझे इतनी मांग रहती थी कि मेरा अपना लगेज तो बहुत कम रहता था, लेकिन जब मैं यहां से वापस जाता था तो यहाँ से ढेर सारा गोभी-आलू यहां से ले कर जाता था, और उन परिवारों को बड़ा आनंद आता था की आज तो हम लद्दाख से आई हुई गोभी की सब्जी बनाने वाले हैं। ये यहां की ताकत, जो सारे हिन्दुस्तान के और कोनों को परिचित नहीं है।

जब टूरिस्ट एक बार यहाँ आता है, तो जल्दी उसको जाने का मन नहीं करता, कुछ ज़्यादा समय बिताना पसंद करता है, ऐसा ये क्षेत्र है। और इसलिए सरकार टूरिज़्म के विकास के लिए भी प्रतिबद्ध है और साथ-साथ मैं जनता हूँ, की जब मैं यहाँ आया हूँ तो ,कुछ बातें बता दूं की इस बार बजट में,सरकार ने घोषणायें की हैं, जिस से जम्मू कश्मीर के जीवन में कितना बड़ा बदलाव आने वाला है।एक तो जो हिमालयन स्टेट्स हैं, उसके विकास के लिए नये सिरे से सोचा जाएगा, क्योंकि उनकी कठिनाइयों को ध्यान में रख कर सोचा जाए, इस कॉन्सेप्ट को लेकर हम आगे बढ़ रहे हैं। हिमालयन स्टेट्स में ऑर्गेनिक खेती पर बल कैसे दिया जाए और हिमालयन स्टेट्स की ऑर्गेनिक खेती ग्लोबल मार्केट कैसे प्राप्त करे, ताकि यहाँ का किसान ज़्यादा कमाई कर सके। उसी प्रकार से, सरकार ने एक ऐसा इन्स्टिीच्यूट बनाने का तय किया है, जिसके कारण इस हिमालयन प्राकृतिक संपदा का अध्यन हो, उसकी विशेषताओं का, उसके सामर्थ का, राष्ट्र कल्याण में कैसे काम आए, उस दिशा में कम करना चाहते हैं। भारत सरकार का स्पाइसिस के लिए एक बोर्ड चलता है, जो देश भर में, किसान जो स्पाइसिस उत्पादन करते हैं, उनको मदद करने का काम करता है। हमने निर्णय किया है की हमारे जम्मू कश्मीर में सैफरोन रेवोल्यूशन लाना है। मैं जम्मू कश्मीर में जब सैफरोन रेवोल्यूशन की बात करता हूँ, मतलब, यहाँ का जो केसर है, यहाँ का किसान जो केसर की खेती करता है, मैने स्पाइसिस बोर्ड को कहा है, की केसर के विकास के लिए, केसर के मार्केट के लिए, आधुनिक खेती के लिए, स्पा इसिज़ बोर्ड के माध्यम से एक स्पेशल व्यवस्था खड़ी की जाए, उस बोर्ड के अंदर एक अलग इकाई खड़ी की जाए, जो स्पेशली जम्मू् कश्मीर के किसानों की चिंता करें उनकी इस केसर की खेती में मदद करें और ये सेफरोन की दृष्टि से, केसर की दृष्टि से पूरी दुनिया में आगे बढ़े।

हमारा पशमिना ये घर-घर की पहचान है, ये गौरव है, लेकिन आज उसकी हालत क्याे है? भारत सरकार ने एक पी-3 प्रोजेक्ट इस बजट में घोषित किया है और उसका मूल काम है, पशमिना के प्रोडक्शवन पर, उसकी डिजाइनिंग के लिए, उसकी टेक्नोकलॉजी के लिए, कैसे उसको आधुनिक बनाया जाए उस पर हमने योजना करने का तय किया है, जो आने वाले दिनों में, जो पशेमिना के काम में लगे हुए हमारे कारीगर हैं, उनके जीवन में बहुत बड़ा काम करेंगे।

जैसे मैंने पहले ही कहा कि हम सोलर प्रोजेक्ट पर बल देने वाले है। कई वर्षों से दिल्ली सरकार का और जम्मू‍ कश्मीर का एक मुद्दे पर झगड़ा चल रहा था और वो झगड़ा ये था कि फूड कोर्पोरेशन ऑफ इंडिया जो खाद्यान देता है, जम्मूू कश्मीर को उसमें कुछ ब्या्ज की रकम को लेकर झगड़ा चल रहा था। भारत सरकार 60 करोड़ रूपये मांगती थी और जम्मू कश्मीर सरकार कहती थी कि अब बहुत हो गया हम नहीं दे पाएंगे, अब छोड़ दीजिए, लंबे अर्से से हमारे उमर जी भी इसके लिए लड़ाई लड़ रहे थे। भाईयो और बहनो आज जब मैं यहां आया हूं, मैं घोषित करता हूं कि पुराना जो मामला विलंबित पड़ा है, भारत सरकार ने तय किया है कि इसको अब लंबा खींचना नहीं है, ये 60 करोड़ रूपये भारत सरकार माफ कर देती है। इस प्रकार से बड़ी मदद जम्मूर कश्मीभर को सीधे-सीधे हो रही है। उसी प्रकार से एक दूसरा बड़ा मसला, अटल जी की सरकार ने काम सोचा था, लेकिन बाद में रोड़ बनाने के उस काम में लागत बढ़ती गई, कब ऊंचे दाम आए टैंडर में भारत सरकार उसको करने के लिए तैयार नहीं, जम्मू सरकार के लिए करना मुश्किल है, और हमेशा रहा कि अतिरिक्त पैसा कौन दे रोड बन नहीं रहा हैं। करीब-करीब 8 हजार करोड़ रूपयों की जरूरत, अतिरिक्त, प्रोजेक्ट के सिवाय, अब 8 हजार करोड़ रूपया ज्या‍दा नहीं देते है तो रोड़ बनता नहीं, रोड़ बनता नहीं है तो कनेक्टिविटी बढ़ती नहीं है, हमारे जम्मू कश्मीर के इलाके अलग-थलग रहा जाते है।लंबे अर्से से विलंबित मामला था, हमने निर्णय किया है और बहुत ही कम समय में उसको मैं कैबिनेट में पारित करवा दूगा और उसके कारण भारत सरकार को 8 हजार करोड़ रूपये का अतिरिक्त खर्च होगा, ये 8 हजार करोड़ रूपये का अतिरिक्त खर्च करके भी, जम्मू कश्मीर को 4 बड़े महत्वपूर्ण रोड की कनेक्टिविटी बने, उसके लिए हम जरूर काम करेगें और ये हमारा संकल्प है और संकल्प, को हम पूरा करेंगे।

जम्मू कश्मीर के मेरे भाईयो-बहनो हम ये बिजली के कारखाने लगाकर ही यहां का अधेरा दूर करना चाहते है ऐसा नहीं है, हम यहां के हर व्यक्ति के जीवन में रोशनी लाना चाहते है हम यहां के नौजवानों के लिए रोजगार के अवसर उपलब्धं कराना चाहते हैं, हम स्किल डिवेलपमेंट करना चाहते है, हम एजुकेशन इंस्टीटुयूशन का नेटवर्क खड़ा करना चाहते हैं और मैं आपको विश्वाास दिलाता हूं, इस धरती के प्रति मेरा लगाव है, यहां के लोगों ने कठिन से कठिन दिनों में भी मुझे बहुत प्यार दिया है। यहां आकर के रहता था कभी कारगिल जाकर रहता था कभी श्रीनगर रहता था, इतना प्यार मैने पाया है हल पल मेरा मन करता है कि जो नया दायित्व मेरे पास है, वहां से बैठके जितना यहां कर सकूं उतना यहां करना चाहता हूं । मैं जो प्रकाश की बात करता हूं अंधेरा दूर करने की बात करता हूं मैं जानता हूं, कई वर्षों से हमारा देश भ्रष्टाचार के कारण परेशान है देश को रूपयों की कमी नहीं है, चाहे दिल्ली में बैठी हुई सरकार हो चाहे राज्यों में देश की जनता भ्रष्टाचार के खिलाफ गुस्सें में है और मैं देशवासियों को हिन्दु्स्तान के एक कोने में लद्दाख की चोटियों से आज विश्वास दिलाता हूं कि हम भ्रष्टा्चार के खिलाफ पूरी ताकत से लड़ेगें । भ्रष्टा्चार विरोधी समाज में जो भी शक्तियों है, उन शक्तियों को साथ लेंगे, जिन-जिन राजनीतिक दलों में भी भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने मादा है, उनके जो नेता भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ते रहे है, उनका भी हम साथ लेंगे, शासन व्य‍वस्था में बैठे हुए ईमानदार अफसर भी है, ईमानदार अफसरों का भी साथ हमें मिले। लेकिन देश में भ्रष्टाचार ने देश को तबाह करके रखा है, बर्बाद करके रखा हुआ है रूपयों की कमी नहीं है, दर्शन की कमी नहीं है, सामर्थ की कमी नहीं है, इस देश के पास सब कुछ होने के बाद भी देश में गरीबी बढ़ती चली जा रही है, गरीब बढ़ते जा रहे है अगर हम भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में विजयी होगें ये सारा धन गरीबों को काम आएगा, ये योजनाएं तेजी से परिपूर्ण होगी और विकास के कारण व्यक्ती के परिवार के जीवन में विकास के नए अवसर पैदा होंगे। उसकी पूर्ति के लिए, दिल्ली में बैठी हुई, आपके द्वारा चुनी हुई, नई सरकार संकल्प,सबंद्ध है।

हम टूरिज्म को बहुत बढ़ावा देने चाहते है क्यों कि टूरिज्म गरीब से गरीब को रोजगार देता है। मूंगफली बेचने वाला, चना बेचने वाला, चाय बेचने वाला हर कोई टूरिज्म से कमाता है। ऑटो रिक्शा वाला कमाएगा, गेस्ट हाऊस वाला कमाएगा, घोड़े वाला कमाएगा, तांगे वाला कमाएगा, गरीब से गरीब आदमी कमाता है और इसलिए हम टूरिज्म को बढ़ावा देना चाहते हैं और जब टूरिज्म बढ़ता है तो उसका सर्वाधिक लाभ जम्मू -कश्मीैर और लेह और लद्दाख को मिलने की संभावना है। यहाँ के नौजवानों को यहीं पर रोज़गार मिले, ये हमारा प्रयास है।आज आपके बीच आने का मुझे अवसर मिला,यहाँ की परंपरा के अनुसार, मेरा स्वागत-सम्मान हुया, आपने मुझे अपना तो बना लिया है। लेकिन आज मेरी भेष भूषा भी आप ने अपनी बना ली है । ये आपके प्यार को अपने भीतर मैं संजोए रखूंगा और हमेशा-हमेशा दिल्ली में बैठी हुई सरकार, भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने के लिए भी, अंधेरा दूर करने के लिए, विकास की यात्रा को आगे बढ़ाने के लिए, आपके साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करेगी, इसी विश्वास के साथ, ‘भारत माता की जय’ का प्रण ले करके, ‘वंदे मातरम’ का नाद गूंजते हुए, पूरे जम्मू कश्मीर की काया का विकास हो, कल्याण हो, उसी संकल्प को लेकर आगे बढ़ेंगे, इसी अपेक्षा के साथ आप सब को बहुत बहुत शुभ कामनायें।

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India-New Zealand relationship built on enduring friendship, shared values, common commitment: PM Modi in Auckland
July 11, 2026

नमस्ते !
की ओरा New Zealand!

हम भारत के लोग सुनते आए थे, 20 साल के बाद। लेकिन आज चालीस साल बाद कोई भारतीय पीएम न्यूज़ीलैंड की धरती पर आया है। ये मेरा सौभाग्य है। मैं न्यूजीलैंड के सभी निवासियों के लिए, आप सभी लोगों के लिए, 140 करोड़ भारतीयों की शुभकामनाएं लेकर आया हूं।

साथियों,

ये प्रधानमंत्री के रूप में भले ही मेरा पहला न्यूज़ीलैंड दौरा है। लेकिन 25-30 साल पहले, जब मैं किसी सरकार में भी हिस्सा नहीं था, सार्वजनिक जीवन में मुझे कोई जानता नहीं था, तब भी मुझे यहां न्यूजीलैंड आने का अवसर मिला था। और उस समय, मुझे किसी ने गिफ्ट में तीन चीजें दी थीं जो मैं वापस इंडिया लेकर के गया था। एक, यह मफ़लर। एक कैप, और एक दस्ताना। क्योंकि ठंड का मौसम था।

और उसमें से एक चीज़ मैं अभी यहां इस कार्यक्रम में भी लेकर आया हूं। यह मफ़लर जो आप देख रहे हैं, यह 25-30 साल पहले मुझे न्यूजीलैंड के एक साथी ने दिया था। इतने साल में मैंने कई बार इसका उपयोग किया, और आज भी इसे बहुत संभाल कर के रखा है। जैसे आपके प्यार को संभाल के रखता हूं।

इस बार जब मेरा यहां आने का कार्यक्रम बना, तो मैं विशेष तौर पर इसे अपने साथ लेकर के आया क्योंकि खबर थी कि ठंड ज्यादा है।

साथियों,

भारत और न्यूज़ीलैंड के रिश्ते में यादें भी हैं, दोस्ती भी है, वैल्यूज़ भी हैं और एक कमिटमेंट भी है। इस रिश्ते को न्यूज़ीलैंड की एक सुंदर परंपरा अच्छे से डिफाइन करती है। यहाँ सदियों से एक शब्द लोगों को जोड़ता आया है - वाका। वाका सिर्फ़ एक नाव का नाम नहीं है, वाका हमारी शेयर्ड जर्नी की प्रतीक है। और आज भारत-न्यूजीलैंड की यही वाका एक नई यात्रा पर निकलने के लिए तैयार है।

हमारे सामने अवसरों से भरा खुला समुद्र है, हवाएँ हमारे साथ हैं, समंदर की विशाल लहरें हमारे साथ हैं, इच्छाशक्ति का नीला आसमान हमारे साथ है, पाने को काफी कुछ है, और मैं जानता हूं, हम सफल होंगे।

साथियों,

मुझे इस यात्रा की सफलता पर पूरा भरोसा है, जानते हैं क्यों? मोदी नहीं, क्योंकि इसके असली नाविक आप सभी हैं। ऑकलैंड से वेलिंगटन तक, क्राइस्टचर्च से क्वीन्सटाउन तक, न्यूज़ीलैंड के कोने-कोने में फैला भारतीय समुदाय इस शेयर्ड जर्नी का एक नाविक है।

साथियों,

आगे बढ़ने से पहले, मैं अपने मित्र, प्राइम मिनिस्टर क्रिस्टोफर लक्सन, न्यूज़ीलैंड सरकार के सभी साथियों और यहां लेबर पार्टी के मंबर्स का अभिनंदन करूंगा।

ये दिखाता है कि भारत-न्यूज़ीलैंड रिश्ते को कितना बड़ा बाइ-पार्टिसन सपोर्ट है। इससे ये भी पता चलता है कीवी इंडियन कम्यूनिटी की अचीवमेंट्स आपका कंट्रीब्यूशन कितना बड़ा है। आप यहां आए किवी इंडियन कम्यूनिटी के इस उत्सव का हिस्सा बने इससे ये सेलिब्रेशन और वाइब्रेंट हो गया है।

आपने जिस गर्मजोशी से जिस स्नेह और उत्साह से, आप ने हम सभी का स्वागत किया है मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूं।

वैसे एक्सीलेंसी, किवी इंडियन कम्यूनिटी में भी सुपरहिट हैं। भारत के इंडिपेंडेंस डे पर आपने क्रिस हिपकिंस के साथ मिलकर दमादम मस्त कलंदर गाने पर जो डांस किया वो काफी वायरल हुआ। आपके वो मूव, Kiwi Indians के दिलों में छप गए हैं।

साथियों,

न्यूज़ीलैंड वाकई एक अद्भुत देश है। यहां पीस है, प्रॉसपैरिटी है, नेचर है, कल्चर है, और न्यूज़ीलैंड की असली ताकत, यहां के स्थानीय लोग हैं। न्यूज़ीलैंड के लोगों ने दिखाया है कि कोई देश जब एक जूनून, एक जज्बे के साथ आगे बढ़ता है, तो वो दुनिया को इंस्पायर करता है।

यहां जो किवी इंडियन कम्यूनिटी है, आप सभी को भी न्यूज़ीलैंड के दिलदार लोगों ने बहुत प्रेम से अपनाया है, अपनी टीम का हिस्सा बनाया है। उन्होंने आपके टैलेंट, आपके विजन पर ट्रस्ट किया है। और आज देखिए, न्यूज़ीलैंड की इकॉनॉमी हो, यहां की सोसायटी हो, किवी इंडियन्स नए-नए रंग भर रहे हैं।

न्यूजीलैंड वो जगह है जहां निखिल रविशंकर Air New Zealand के CEO बन सकते हैं। जहां आनंद सत्यानंद गवर्नर जनरल बन सकते हैं जहां क्रिकेट टीम में रचिन रविंद्र, ईश सोढी और एजाज़ पटेल जैसे टैलेंट को अवसर मिल सकता है।

न्यूजीलैंड वो जगह है जहां की सड़कों में भी भारतीय शहरों को सम्मान दिया गया है। कहीं खंडाला है। कहीं बॉम्बे हिल्स हैं। कहीं कोरोमंडल है।

कलकत्ता स्ट्रीट, दिल्ली क्रिसेंट, अमृतसर स्ट्रीट, ऐसे कितने ही नाम हैं। यहां रहते-रहते आप भी पूरे के पूरे Kiwi हो गए हैं। जैसे मुझे बताया गया है कि किसी भी विषय पर बात शुरू कीजिए थोड़ी ही देर में बात मौसम पर पहुँच जाती है!

साथियों,

मैं न्यूज़ीलैंड की लीडरशिप से जब भी मिला हूं, वो आप सभी की बहुत प्रशंसा करते हैं। प्रशंसा आपकी होती है, और माथा मेरा ऊंचा होता है।

साथियों,

आप सभी जानते हैं, कि भारत, हज़ारों वर्षों पुरानी सभ्यता है जो आज अपनी प्राचीनता को सहेजते हुए आधुनिकता को स्वीकार कर रहा है। हर युग में हर दौर में भारत ने खुद को ट्रांसफॉर्म किया है और इसका कारण है, हमारी सीखने की ललक।

भारत सबसे सीखता है हमारे लिए सामने वाले देश की जनसंख्या नहीं जनकल्याण की भावना मायने रखती है और इसलिए हमने न्यूज़ीलैंड से भी बहुत कुछ सीखा है और अब भी सीख रहे हैं।

न्यूज़ीलैंड, दुनिया का वो देश है जिसने सबसे पहले महिलाओं को वोटिंग का राइट दिया था। आज हम देखते हैं कि न्यूज़ीलैंड की सोसायटी में वीमेन, बहुत बड़े पैमाने में कंट्रीब्यूट कर रही हैं। भारत भी आज Women Led Development के मंत्र के साथ महिलाओं के लिए संभावनाओं के नए द्वार खोल रहा है।

साथियों,

रूरल इकॉनॉमी, कैसे किसी देश की तकदीर बदल सकती है ये न्यूज़ीलैंड ने करके दिखाया है। न्यूज़ीलैंड की ताकत, एग्रीकल्चर के इर्द-गिर्द बनाया गया एक एफिशियंट इकोसिस्टम है। ट्रेसेबिलिटी हो, फूड सेफ्टी हो, कंप्लायंस सिस्टम हो ये बहुत बड़ी प्रेरणा है। ये भारत जैसे, छोटे किसानों वाले बड़े एग्रीकल्चर नेशन के लिए बहुत बड़ी सीख है।

न्यूज़ीलैंड ने ज़ेस्प्री मॉडल से दिखाया है कि छोटे किसान भी बाज़ार के एक बड़े ब्रैंड बन सकते हैं। न्यूज़ीलैंड की क्लाइमेट-स्मार्ट प्रिसिजन फार्मिंग टेक्नॉलॉजी में भी हमारे लिए सीखने को बहुत कुछ है।

साथियों,

यहां के मानुका हनी को लिक्विड गोल्ड कहा जाता है। जैसे यहां हनी ट्रेडिशन और टेस्ट के अलावा हेल्थ एंड वेलनेस से जुड़ा है वैसे ही भारत के आयुर्वेद में भी हनी का बहुत बड़ा महत्व है। आपको ये जानकर अच्छा लगेगा कि भारत में भी हम बी-कीपिंग को लेकर एक मिशन चला रहे हैं। इससे भारत में हनी प्रोडक्शन में काफी बढ़ोतरी हुई है।

और आजकल तो हिमालय की ऊंचाइयों से जो हनी आता है, वो गोल्ड क्या, डायमंड बनता जा रहा है। मैं समझता हूं, न्यूजीलैंड से हम हनी प्रोडक्शन और बढ़ाने के बारे में भी बहुत कुछ सीख सकते हैं।

साथियों,

इस साल इंडिया–न्यूजीलैंड स्पोर्टिंग रिलेशन्स के सौ साल पूरे हो रहे हैं। सौ साल पहले हमारी हॉकी टीम न्यूजीलैंड खेलने आई थी। उस टूर में मेजर ध्यानचंद के शानदार परफॉर्मेंस की हर तरफ चर्चा हुई थी। उनकी हॉकी ने न्यूजीलैंड के लोगों का भी दिल जीत लिया था।

साथियों,

कंटेंट क्रिएटर्स की भाषा में कहूं, तो ये कोलैब का जमाना है। न्यूज़ीलैंड और भारत स्पोर्ट्स में भी बहुत ही शानदार कोलैब कर सकते हैं। जैसे एक उदाहरण रग्बी का है। मुझे अभी-अभी बताया गया है कि कुछ देर पहले ही ऑल ब्लैक ने रग्बी के मैच में शानदार जीत दर्ज की है। भारत रग्बी में न्यूजीलैंड से सीखना चाहता है। भारत भी रग्बी में आगे आए, इसके लिए हमें हमें कोच चाहिए, एक्सपर्ट्स चाहिए, इसमें न्यूज़ीलैंड इसमें हमारी बहुत help कर सकता है। हाल ही में भुवनेश्वर में “न्यूज़ीलैंड रग्बी” और “रग्बी इंडिया” के coaching program को मैं एक अच्छी शुरुआत मानता हूं।

साथियों,

आज यहां आने से पहले, मैं यहाँ न्यूज़ीलैंड के एक स्पोर्ट्स स्टार्टअप event में गया था। स्पोर्ट्स टेक में हो रहे इनोवेशन्स ने नए ideas ने वाकई मुझे प्रभावित किया। मुझे विश्वास है कि हम स्पोर्ट्स टेक में साथ मिलकर काफी कुछ कर सकते हैं।

भारत और न्यूज़ीलैंड का फ्यूचर, आपस में जुड़ा हुआ है। इसका एक उदाहरण, स्पेस सेक्टर भी है। भारत का चंद्रयान जब मून के साउथ पोल पर लैंड किया, पूरा न्यूजीलैंड नाच रहा था उस दिन। और उस दिन हम सबको गर्व हुआ।

अब आपको मैं गर्व की एक और बात बताता हूं। आपको गर्व दिलाने में इस सक्सेस में न्यूजीलैंड की टेक्नॉलजी का भी योगदान रहा है। न्यूजीलैंड की स्पेस कंपनी ने कई अवसरों पर हमारे साथ मिलकर काम किया है। हम इस सहयोग को और आगे ले जाने के लिए काम कर रहे हैं।

साथियों,

स्पेस सेक्टर ये बताने के लिए काफी है कि भारत और न्यूज़ीलैंड की इकॉनॉमी, एक-दूसरे को कितना कुछ दे सकती हैं। यही हमारे ट्रेड अग्रीमेंट की भी स्पिरिट है। ये ट्रेड अग्रीमेंट विकसित भारत की तरफ हमारी यात्रा को गति देगा। और भारत और न्यूज़ीलैंड दोनों के बिजनेस को नए अवसर देगा।

साथियों,

भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच एक और बहुत बड़ी सम्मानता है। ये समानता, हमारे इंडिजनेस कल्चर की है, इंडिजनेस कल्चर को सेलिब्रेट करने, उसको संरक्षण देने की है। और आज मैं माओरी समाज को विशेष रूप से याद करना चाहता हूं।

मैंने हाका को केवल एक performance के रूप में ही नहीं देखा। मैंने हाका में, एक समाज की आत्मा देखी है। उसमें साहस है, आत्मसम्मान है, अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा है, और पूरे समुदाय की सामूहिक शक्ति का एहसास है।

साथियों,

माओरी संस्कृति में एक बहुत सुंदर शब्द है- मना-कितांगा। इसका मतलब है, सम्मान देना, अपनापन देना, और पूरे मन से उसकी देखभाल करना। भारत में भी हम कहते हैं 'अतिथि देवो भवः।'

शब्द अलग हैं, परिवेश अलग हैं, पहनावा अलग हैं, भाषाएं अलग हैं, लेकिन भावना बिल्कुल एक ही है।

ऐसे ही माओरी संस्कृति में परिवार के लिए एक सुंदर शब्द है—फानो यानि परिवार। इसमें कई पीढ़ियाँ होती हैं। रिश्ते होते हैं। पूरा समुदाय होता है। भारत भी, परिवार को केवल एक सामाजिक व्यवस्था नहीं मानता, हमारे लिए फैमिली, एक इंस्टीट्यूशन है।

साथियों,

माओरी परंपरा का एक और सुंदर विचार है— काईत्या कितांगा। ये हमें सिखाती है कि हम प्रकृति के मालिक नहीं हैं। हम उसके संरक्षक हैं। भारत में भी कहा गया है— 'माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः।' पृथ्वी हमारी माता है। इसी सोच को आधार बनाते हुए हम भारत में धरती मां के संरक्षण के लिए, एक पेड़ मां के नाम, प्राकृतिक खेती मिशन, जैसे अनेकों अभियान चला रहे हैं।

साथियों,

मैं जानता हूं, हजारों किलोमीटर दूर रहते हुए भी आपके दिल के किसी न किसी कोने में, दिनभर की प्रक्रिया में कहीं न कहीं हिंदुस्तान झलकता ही रहता है, हिंदुस्तान बसता ही है। सही है कि नहीं है? शरीर यहां होगा, मन? और इसीलिए, आप भारत की हर उपलब्धि पर भी नज़र रखते हैं।

और जब क्रिकेट स्टेडियम में बैठकर के देखते हैं, तो बहुत सी चीज़ें देखने की छूट जाती हैं। लेकिन घर में टी.वी. पर बैठकर के जब देखते हैं, तो हर बारीकी का पता चलता है। वैसा ही, आपको भी भारत की हर बारीकी का पता चलता है। और यही बात हमें सबसे खास बनाती है।

भारतीय देश से बाहर जिस देश में रहते हैं, वहां उस देश की प्रगति में मदद करते हैं, और अपने देश के विकास की भी जानकारी रखते हैं।

साथियों,

हम जितना प्यार जन्मभूमि को करते हैं, उतना ही समर्पण कर्मभूमि को भी करते हैं।

साथियों,

वैश्विक चुनौतियों के बीच, आज भारत जिस तेजी से विकास कर रहा है वो अभूतपूर्व है। मैं आपके सामने देश की उपलब्धियों का भारत के सामर्थ्य का एक गुलदस्ता प्रस्तुत करुंगा। यह गुलदस्ता मैं आपके लिए लेकर के आया हूँ। और मैं पक्का मानता हूँ इस गुलदस्ते में आपकी पसंद का कोई न कोई फूल ज़रूर होगा, जो आपको सुंदर भी लगेगा और गर्व से भर भी देगा।

तो आप तैयार हैं? गुलदस्ता पेश करूँ? अब आपको ढूँढना है आपका फूल कहाँ है उसमें, या तो सारे के सारे फूल आपके हैं।

साथियों,

भारत आज दुनिया की fastest growing major economy है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा Vaccine Producer है। भारत Mobile Data Consumption में दुनिया के अग्रणी देशों में है। आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा Mobile Manufacturer है। आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा Telecom Market है। आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा Wheat Producer है। आज भारत दुनिया का सबसे बड़ा Milk Producer है। आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा Fish Producer है।

साथियों,

इतना ही नहीं, आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा Automobile Market है। आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा Startup Ecosystem बन चुका है। भारत बहुत जल्द दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा Renewable Energy Producer बनने जा रहा है। Solar Energy Capacity में भी भारत दुनिया के बड़े देशों में शामिल हो चुका है।

साथियों,

आज का भारत, दुनिया को विकास के नए मॉडल भी दे रहा है। आज भारत दुनिया के सबसे बड़े Digital Identity Platform का सफल संचालन कर रहा है। आज भारत में UPI के माध्यम से हर महीने अरबों Digital Transactions हो रहे हैं। भारत के Digital Public Infrastructure में आज दुनिया के दर्जनों देश दिलचस्पी दिखा रहे हैं। Drone Technology और Space Economy में भारत नई ऊंचाइयों को छू रहा है।

साथियों,

ये उस नए भारत की तस्वीर हैं, जो दिखाती हैं कि कैसे भारत न्यूजीलैंड की तरह की इकॉलॉजी और इकॉनॉमी दोनों में बैलेंस बनाकर चल रहा है।

साथियों,

भारत की इस ग्रोथ का एक और पहलू भी है, ये पहलू हमारी विरासत है, हमारी हैरिटेज है। भारत, जितना महत्व अपनी इकॉनॉमी और इकॉलॉजी को देता है, उतना ही फोकस, अपनी हैरिटेज पर भी करता है।

साथियों,

भारत कैसे काम करता है, इसका उदाहरण श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पवित्र स्वरूप हैं। जब अफगानिस्तान में संकट आया, तो हम गुरू ग्रंथ साहिब के पवित्र स्वरूपों को पूरे मान के साथ भारत लेकर आए।

साथियों,

हमारे महान सिख गुरुओं ने पूरी मानवता को सेवा, साहस, समानता और करुणा का संदेश दिया है। दुनिया के हर हिस्से में गुरुद्वारे, सेवा के सेंटर हैं। कोई भूखा आए, उसे भोजन मिलता है। कोई संकट में हो, उसे सहारा मिलता है।

इसी माहौल में सिख कम्युनिटी के कुछ भाइयों और बहनों ने हमें बताया था कि श्री हरमंदिर साहिब में सेवा के लिए FCRA से जुड़ी कुछ परेशानियां आ रही हैं। हमने उस समस्या का तुरंत समाधान किया।

साथियों,

आप सभी श्री हेमकुंड साहिब जी के बारे में भी जानते हैं। हैं। हिमालय की ऊंचाइयों पर है। साल का लंबा समय बर्फ की चोटियों से घिरा रहता है। वहाँ अगर कोई दर्शन करने के लिए जाना चाहे तो बड़ा कठिन मार्ग है, बहुत कम लोग जा पाते हैं। खास करके हमारे सिख भाई-बहन वहाँ यात्रा के लिए जाते हैं।

वहाँ दर्शन के लिए जाने में, खास करके हमारे बुज़ुर्गों को, हमारे सिख भाई-बहनों को सहूलियत हो, इसलिए सरकार हेमकुंड साहिब तक रोपवे भी बनवा रही है।

साथियों,

हमारी ही सरकार ने साहिबजादों के शौर्य और बलिदान की अमर स्मृति में प्रति वर्ष 26 दिसंबर को ‘वीर बाल दिवस’ मनाना प्रारंभ किया है। आज यह दिवस पूरे देश के लिए, प्रेरणा का पर्व बन चुका है। आज केरलम से लेकर असम तक का बच्चा भी चारो साहिबजादों और माता गुजरी के बलिदान के बारे में जानने लगा है।

‘वीर बाल दिवस’ ने भारत के अनगिनत बच्चों के मन में युवाओं के हृदय में अटूट साहस का संचार किया है।

साथियों,

मैं आपसे पवित्र जोड़े साहब की भी बात करूंगा। मेरी सरकार में मेरे एक साथी हैं, श्रीमान हरदीप पुरी जी। पुरी परिवार के पूर्वज श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के सेवादार थे। हरदीप पुरी जी ने मुझे यह बताया था की उनके परिवार ने श्री गुरु गोबिंद सिंह जी और माता साहिब कौर जी के “जोड़े साहब” 300 साल से संजो के रखे हैं।

बंटवारे के समय पुरी साहब के पूर्वज इन्हें सुरक्षित दिल्ली ले आए थे। पवित्र “जोड़े साहब” को उनका परिवार सिख संगत को सौंपना चाहता था जिससे की ज़्यादा से ज़्यादा लोग इनके दर्शन कर सकें।

फिर हमने एक समिति बनाई, जो सिख परंपराओं को जानते हैं, जानकारों की हमने advice ली और हमने निर्णय लिया कि इन पवित्र जोड़े साहब को वहां ले जाया जाए जहां श्री गुरु गोविंद सिंह जी के चरण पहली बार पावन भूमि पर आए, जहां उनका जन्म हुआ, यानी हमारे श्री पटना साहिब।

मुझे बहुत खुशी है कि अब यह पवित्र जोड़े साहब पटना साहिब की पावन भूमि पर है और यह मेरा सौभाग्य है कि उस पवित्र अवसर का मुझे साक्षी बनने का, वहां मौजूद रहने का सौभाग्य मिला था। मैं आपसे भी आग्रह करूंगा कि जब भी भारत जाएं, पटना साहिब में उनके दर्शन जरूर करें।

साथियों,

आज मैं यहां से बहुत सारा विश्वास, बहुत सारा प्यार, और बहुत सारी स्मृतियां लेकर जा रहा हूं। और मैं आपसे ये भी कहूंगा, इस बार भारतीय पीएम को न्यूज़ीलैंड आने में 40 साल लगे हैं, लेकिन अब इतना लंबा इंतज़ार आपको नहीं करना पड़ेगा। अब 40 साल नहीं लगेंगे, ये मोदी की गारंटी है।

और मोदी की गारंटी मतलब, गारंटी पूरा होने की गारंटी।

साथियों,

मैं आपसे एक आग्रह भी करना चाहता हूं। हमने कुछ समय पहले, हमारी इंडियन डायस्पोरा के बच्चों के लिए एक नया प्रयोग किया है। हमारे बच्चे भारत को समझें और भारत की विविधता की बात दुनिया तक पहुँचे, इसके लिए हमने भारत को जानो क्विज की शुरुआत की है। अभी इसका कर्टेन रेजर ही हुआ है, और हमारे साथियों ने इसमें ही जिस एनर्जी से पार्टिसिपेट किया है, मैं वही देखकर बहुत प्रभावित हूं।

अब हम इस इवेंट के सिक्स्थ एडिशन को और हाईटेक बना रहे हैं। बहुत सारे इवेंट्स इस बार ऐप के माध्यम से होने वाले हैं। मेरा आग्रह है कि यहाँ जितने भी युवा साथी हैं, वो इस कार्यक्रम का हिस्सा बनें। भारत को जाने और भारत की विरासत को न्यूजीलैंड के लोगों से जोड़ें।

साथियों,

मैं एक शानदार फ्यूचर सामने देख रहा हूं, जिसमें विकसित भारत की रोशनी भी है, और न्यूज़ीलैंड की प्रॉसपैरिटी भी है। इसी विश्वास के साथ, आप सभी का फिर से बहुत-बहुत धन्यवाद।

प्राइम मिनिस्टर लक्सन और उनकी टीम का आभार! न्यूज़ीलैंड की जनता का धन्यवाद!

एक बार फिर मेरे साथ बोलिए, भारत माता की जय! वंदे मातरम्!

थैंक यू !
की ओरा !