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मंच पर विराजमान राज्यपाल श्रीमान एनएन वोहरा जी, यहां के मुख्यमंत्री श्रीमान उमर अब्दुल्ला जी, केंद्र में मंत्रिपरिषद के मेरे साथी ऊर्जा मंत्री श्रीमान पीयूष गोयल जी, जम्मू -कश्मीर सरकार के शहरी विकास मंत्री नवांग रिगज़ीन जोरा जी हमारे उर्जावान और समाज सेवा में सदा तत्पर नवनिर्वाचित सांसद श्रीमान थूपस्टन चेवांग जी, संसद में हमारे साथी श्री तरूण विजय जी, संसद के हमारे दूसरे साथी श्री अविनाश राय खन्ना जी, ऊर्जा सचिव श्रीमान पी.के. सिन्हा जी, पावर ग्रिड के सीएमडी, आर.एन. नायक जी और विशाल संख्या में पधारे हुए लद्दाख के मेरे प्यारे भाईयों और बहनों, शायद बहुत लंबे अरसे के बाद लेह लद्दाख की इन चोटियों ने इतना बड़ा भारी जनसागर देखा होगा। यह मेरा सौभाग्य रहा है कि मुझे कई वर्षों तक जम्मू कश्मीर क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी के संगठन के कार्यकर्ता के रूप में कार्य करने का अवसर मिला था और इसके कारण इस क्षेत्र में मुझे बार-बार आने का अवसर मिलता था। मैं यहां के जीवन से भलिभांति परिचित हूं, यहां की कठिनाईयों से भी परिचित हूं और सबसे बड़ी बात, मैं यहां की शक्ति से भी परिचित हूं। लेकिन मुझे यहां आने में, बीच में काफी समय बीत गया। गुजरात में मुख्यमंत्री का दायित्व मिलने के बाद मैं आ नहीं पाया था। पिछले लोकसभा के चुनाव में भी मेरा मन करता था मैं कैसे भी करके यहां पहुंचू, लेकिन नहीं आ पाया और मेरे लिए अशचर्य की बात है कि मैंने अपना एक लिखित भाषण भेज दिया था और लद्दाख और लेह के इस इलाके के लोगों ने मुझ पर इतना प्यार बरसाया, इतना प्यार बरसाया कि मेरे भाषण को सुनने के लिए भी बहुत बड़ी तादाद में आप लोग आए हैं। मैं आपके इस प्यार को कभी भूल नहीं सकता। और आपने मुझे जितना प्यार दिया है, जितना सम्मान दिया है, यह कर्ज जो मैं चुकाऊंगा, ब्याज समेत चुकाऊंगा, आज इस समय चुकाऊंगा और इस क्षेत्र के विकास के लिए जो भी कर सकता हूं करके, आपकी शक्ति को पहचानकर, यह शक्ति राष्ट्र की शक्ति कैसे बने, यह ऊर्जावान प्रदेश राष्ट्र का ऊर्जावान प्रदेश कैसे बने। इसके लिए दिल्लीं में बैठी हुई भारत सरकार प्रतिबद्ध है और जम्मू कश्मीर के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने के लिए संकल्प बद्ध है।

एक समय था दो-दो, पांच-पांच, दस-दस साल तक कभी प्रधानमंत्री जम्मू -कश्मीर के धरती पर नहीं आते थे, पर ये एक वक्त है, महीने में दो बार एक प्रधानमंत्री आ रहा है। आपका प्यार मुझे खींचकर ले आता है और मैं हमेशा मानता हूं कि ये क्षेत्र ऐसा है खासकर लेह-लद्दाख का जहां पर से प्रकाश, पर्यावरण और पर्यटन ये तीन पी, प्रकाश, पर्यावरण और पर्यटन ये ऐसी ताकतें हैं जो सिर्फ लेह-लद्दाख नहीं, सिर्फ जम्मू कश्मीर नहीं, भारत की भलाई के लिए भी इन ताकतों का अगर भली-भांति संयोजन हो, समागम हो, और उसका विकास हो, तो भारत की भलाई के लिए भी काम आ सकेगा। यहां का प्रकाश अंधेरों को भगाने के लिए पर्यावरण की रक्षा के लिए और पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए एक बहुत बड़ी मिसाल है।

मुख्यमंत्री जी ने कहा गुजरात के और लेह-लद्दाख के सोलर रेडिएशन समान हैं। गुजरात के रेगिस्तान में जितनी सोलर रेडिएशन की संभावना है उतनी ही सोलर रेडिएशन की संभावना लेह-लद्दाख में है। गुजरात का कच्छ का जिला बहुत बड़ा सीमा क्षेत्र है। लेह–लद्दाख का जिला क्षेत्र भी बहुत बड़ा सीमा क्षेत्र है। सोलर रेडिएशन के लिए, भारत सरकार ने वर्तमान बजट में लेह-लद्दाख को भी अपने योजना के केंद्र में रखा। बहुत बड़ा सोलर आधार जिसकी संभावनाएं यहां पर है। आज यहां दो महत्वतपूर्ण प्रोजेक्टर, और इसके बाद कारगिल में एक महत्वदपूर्ण प्रोजेक्ट के लिए मुझे जाना है। अब आप उधारी रोशनी पर नहीं जीएँगे, आप अपनी खुद की रोशनी पर जीने वाले हों, अब आपका यह इलाका स्वयं प्रकाशित हो रहा है। वो डीजल की आवाज, वो धूयें, वो पर्यावरण का संकट इन सबसे मुक्ति का एक पर्व है, ये पावर प्रोजेक्टी जो आज देश को लोकापर्ण हो रहा है।

राष्ट्र के हर कोने को हर प्रकार से हमें जोड़ना है। चाहे रेल क्नेटक्टिविटी हो, एयर क्नेक्टिविटि हो, रोड क्नेटक्टिविटी हो, टेलीकॉम क्नेटक्टिविटी हो या बिजली ग्रिड की क्नेटक्टिविटी हो, हिदुस्तान के हर कोने को जोड़ना है और आज मुझे खुशी है कि हिंदुस्तान के दूर-सुदूर सीमावर्ती क्षेत्रों को भी बिजली ग्रिड से जोड़ने के एक अभियान का शिलान्यास हो रहा है। जो सपना अटल वाजपेयी जी ने देखा था उसको पूरा करने का आज हम प्रारंभ कर रहे हैं। करीब 18 सौ करोड़ रूपये की लागत से और टेक्नॉलोजीकली बहुत ही उत्तकम प्रकार की योजना से, यह बिजली की ग्रिड, यहाँ से बिजली ले जाने के लिए भी और यहां से बिजली लाने के लिए भी, दूर सुदूर बिजली पहुंचाने के लिए काम आने वाली है। आप कल्पना कर सकते है जब यह काम पूरा होगा तब इस पूरे क्षेत्र का, लद्धाख से श्रीनगर तक के रास्ते के जीवन में कितना बड़ा बदलाव आ जाएगा।

आख़िरकार विकास वह होना चाहिए जो सामान्य मानव के जीवन में बदलाव लाए हम उन योजनाओं पर बल दे रहे हैं, जो सामान्य मानव के जीवन में बदलाव लाने के लिए काम आये, और उसमें ऊर्जा का बहुत बड़ा महत्व होता है। यह क्षेत्र, सारे विश्व के लिए आकर्षण का क्षेत्र कैसे बने। एक विशिष्ट प्रकार की यहां प्राकृतिक व्यवस्था है। मैं हमेशा देखता हूं कि यहां के लोगों की चेहरे की मुस्कान जब यहां के चट्टान की चोटी पर थोड़ा सा जो बर्फ होता हैं और जब चोटियां मुस्कराती हैं वैसे ही यहां का हर व्यक्ति, उसके चेहरे पर मुस्का‍न नजर आती है। यहां की राष्ट्रभक्ति भारत की रक्षा की एक मिसाल है। मैं आपके भीतर की उस राष्ट्रभक्ति आपके उस त्याग और तपस्‍या को विशेष रूप से आज नमन करना चाहता हूं, अभिनंदन करना चाहता हूं और यही एक बहुत बड़ी ताकत है जो आप देश को दे रहे है और इसलिए आपके इस सामर्थ का भी मैं गौरव करता हूं।

मैं जब दिल्ली़ से बार-बार इस क्षेत्र में दौरा करने आता था, जिन लोगों से मेरा परिचय था, दिल्लीे में, उन परिवारों की मांग रहती थी, मोदी जी लद्दाख कब जा रहे हो, तो मैं पूछता था क्यों ? क्या काम है? बोलते इस बार जब जाओगे तो गोभी और आलू ले आना। मुझे इतनी मांग रहती थी कि मेरा अपना लगेज तो बहुत कम रहता था, लेकिन जब मैं यहां से वापस जाता था तो यहाँ से ढेर सारा गोभी-आलू यहां से ले कर जाता था, और उन परिवारों को बड़ा आनंद आता था की आज तो हम लद्दाख से आई हुई गोभी की सब्जी बनाने वाले हैं। ये यहां की ताकत, जो सारे हिन्दुस्तान के और कोनों को परिचित नहीं है।

जब टूरिस्ट एक बार यहाँ आता है, तो जल्दी उसको जाने का मन नहीं करता, कुछ ज़्यादा समय बिताना पसंद करता है, ऐसा ये क्षेत्र है। और इसलिए सरकार टूरिज़्म के विकास के लिए भी प्रतिबद्ध है और साथ-साथ मैं जनता हूँ, की जब मैं यहाँ आया हूँ तो ,कुछ बातें बता दूं की इस बार बजट में,सरकार ने घोषणायें की हैं, जिस से जम्मू कश्मीर के जीवन में कितना बड़ा बदलाव आने वाला है।एक तो जो हिमालयन स्टेट्स हैं, उसके विकास के लिए नये सिरे से सोचा जाएगा, क्योंकि उनकी कठिनाइयों को ध्यान में रख कर सोचा जाए, इस कॉन्सेप्ट को लेकर हम आगे बढ़ रहे हैं। हिमालयन स्टेट्स में ऑर्गेनिक खेती पर बल कैसे दिया जाए और हिमालयन स्टेट्स की ऑर्गेनिक खेती ग्लोबल मार्केट कैसे प्राप्त करे, ताकि यहाँ का किसान ज़्यादा कमाई कर सके। उसी प्रकार से, सरकार ने एक ऐसा इन्स्टिीच्यूट बनाने का तय किया है, जिसके कारण इस हिमालयन प्राकृतिक संपदा का अध्यन हो, उसकी विशेषताओं का, उसके सामर्थ का, राष्ट्र कल्याण में कैसे काम आए, उस दिशा में कम करना चाहते हैं। भारत सरकार का स्पाइसिस के लिए एक बोर्ड चलता है, जो देश भर में, किसान जो स्पाइसिस उत्पादन करते हैं, उनको मदद करने का काम करता है। हमने निर्णय किया है की हमारे जम्मू कश्मीर में सैफरोन रेवोल्यूशन लाना है। मैं जम्मू कश्मीर में जब सैफरोन रेवोल्यूशन की बात करता हूँ, मतलब, यहाँ का जो केसर है, यहाँ का किसान जो केसर की खेती करता है, मैने स्पाइसिस बोर्ड को कहा है, की केसर के विकास के लिए, केसर के मार्केट के लिए, आधुनिक खेती के लिए, स्पा इसिज़ बोर्ड के माध्यम से एक स्पेशल व्यवस्था खड़ी की जाए, उस बोर्ड के अंदर एक अलग इकाई खड़ी की जाए, जो स्पेशली जम्मू् कश्मीर के किसानों की चिंता करें उनकी इस केसर की खेती में मदद करें और ये सेफरोन की दृष्टि से, केसर की दृष्टि से पूरी दुनिया में आगे बढ़े।

हमारा पशमिना ये घर-घर की पहचान है, ये गौरव है, लेकिन आज उसकी हालत क्याे है? भारत सरकार ने एक पी-3 प्रोजेक्ट इस बजट में घोषित किया है और उसका मूल काम है, पशमिना के प्रोडक्शवन पर, उसकी डिजाइनिंग के लिए, उसकी टेक्नोकलॉजी के लिए, कैसे उसको आधुनिक बनाया जाए उस पर हमने योजना करने का तय किया है, जो आने वाले दिनों में, जो पशेमिना के काम में लगे हुए हमारे कारीगर हैं, उनके जीवन में बहुत बड़ा काम करेंगे।

जैसे मैंने पहले ही कहा कि हम सोलर प्रोजेक्ट पर बल देने वाले है। कई वर्षों से दिल्ली सरकार का और जम्मू‍ कश्मीर का एक मुद्दे पर झगड़ा चल रहा था और वो झगड़ा ये था कि फूड कोर्पोरेशन ऑफ इंडिया जो खाद्यान देता है, जम्मूू कश्मीर को उसमें कुछ ब्या्ज की रकम को लेकर झगड़ा चल रहा था। भारत सरकार 60 करोड़ रूपये मांगती थी और जम्मू कश्मीर सरकार कहती थी कि अब बहुत हो गया हम नहीं दे पाएंगे, अब छोड़ दीजिए, लंबे अर्से से हमारे उमर जी भी इसके लिए लड़ाई लड़ रहे थे। भाईयो और बहनो आज जब मैं यहां आया हूं, मैं घोषित करता हूं कि पुराना जो मामला विलंबित पड़ा है, भारत सरकार ने तय किया है कि इसको अब लंबा खींचना नहीं है, ये 60 करोड़ रूपये भारत सरकार माफ कर देती है। इस प्रकार से बड़ी मदद जम्मूर कश्मीभर को सीधे-सीधे हो रही है। उसी प्रकार से एक दूसरा बड़ा मसला, अटल जी की सरकार ने काम सोचा था, लेकिन बाद में रोड़ बनाने के उस काम में लागत बढ़ती गई, कब ऊंचे दाम आए टैंडर में भारत सरकार उसको करने के लिए तैयार नहीं, जम्मू सरकार के लिए करना मुश्किल है, और हमेशा रहा कि अतिरिक्त पैसा कौन दे रोड बन नहीं रहा हैं। करीब-करीब 8 हजार करोड़ रूपयों की जरूरत, अतिरिक्त, प्रोजेक्ट के सिवाय, अब 8 हजार करोड़ रूपया ज्या‍दा नहीं देते है तो रोड़ बनता नहीं, रोड़ बनता नहीं है तो कनेक्टिविटी बढ़ती नहीं है, हमारे जम्मू कश्मीर के इलाके अलग-थलग रहा जाते है।लंबे अर्से से विलंबित मामला था, हमने निर्णय किया है और बहुत ही कम समय में उसको मैं कैबिनेट में पारित करवा दूगा और उसके कारण भारत सरकार को 8 हजार करोड़ रूपये का अतिरिक्त खर्च होगा, ये 8 हजार करोड़ रूपये का अतिरिक्त खर्च करके भी, जम्मू कश्मीर को 4 बड़े महत्वपूर्ण रोड की कनेक्टिविटी बने, उसके लिए हम जरूर काम करेगें और ये हमारा संकल्प है और संकल्प, को हम पूरा करेंगे।

जम्मू कश्मीर के मेरे भाईयो-बहनो हम ये बिजली के कारखाने लगाकर ही यहां का अधेरा दूर करना चाहते है ऐसा नहीं है, हम यहां के हर व्यक्ति के जीवन में रोशनी लाना चाहते है हम यहां के नौजवानों के लिए रोजगार के अवसर उपलब्धं कराना चाहते हैं, हम स्किल डिवेलपमेंट करना चाहते है, हम एजुकेशन इंस्टीटुयूशन का नेटवर्क खड़ा करना चाहते हैं और मैं आपको विश्वाास दिलाता हूं, इस धरती के प्रति मेरा लगाव है, यहां के लोगों ने कठिन से कठिन दिनों में भी मुझे बहुत प्यार दिया है। यहां आकर के रहता था कभी कारगिल जाकर रहता था कभी श्रीनगर रहता था, इतना प्यार मैने पाया है हल पल मेरा मन करता है कि जो नया दायित्व मेरे पास है, वहां से बैठके जितना यहां कर सकूं उतना यहां करना चाहता हूं । मैं जो प्रकाश की बात करता हूं अंधेरा दूर करने की बात करता हूं मैं जानता हूं, कई वर्षों से हमारा देश भ्रष्टाचार के कारण परेशान है देश को रूपयों की कमी नहीं है, चाहे दिल्ली में बैठी हुई सरकार हो चाहे राज्यों में देश की जनता भ्रष्टाचार के खिलाफ गुस्सें में है और मैं देशवासियों को हिन्दु्स्तान के एक कोने में लद्दाख की चोटियों से आज विश्वास दिलाता हूं कि हम भ्रष्टा्चार के खिलाफ पूरी ताकत से लड़ेगें । भ्रष्टा्चार विरोधी समाज में जो भी शक्तियों है, उन शक्तियों को साथ लेंगे, जिन-जिन राजनीतिक दलों में भी भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने मादा है, उनके जो नेता भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ते रहे है, उनका भी हम साथ लेंगे, शासन व्य‍वस्था में बैठे हुए ईमानदार अफसर भी है, ईमानदार अफसरों का भी साथ हमें मिले। लेकिन देश में भ्रष्टाचार ने देश को तबाह करके रखा है, बर्बाद करके रखा हुआ है रूपयों की कमी नहीं है, दर्शन की कमी नहीं है, सामर्थ की कमी नहीं है, इस देश के पास सब कुछ होने के बाद भी देश में गरीबी बढ़ती चली जा रही है, गरीब बढ़ते जा रहे है अगर हम भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में विजयी होगें ये सारा धन गरीबों को काम आएगा, ये योजनाएं तेजी से परिपूर्ण होगी और विकास के कारण व्यक्ती के परिवार के जीवन में विकास के नए अवसर पैदा होंगे। उसकी पूर्ति के लिए, दिल्ली में बैठी हुई, आपके द्वारा चुनी हुई, नई सरकार संकल्प,सबंद्ध है।

हम टूरिज्म को बहुत बढ़ावा देने चाहते है क्यों कि टूरिज्म गरीब से गरीब को रोजगार देता है। मूंगफली बेचने वाला, चना बेचने वाला, चाय बेचने वाला हर कोई टूरिज्म से कमाता है। ऑटो रिक्शा वाला कमाएगा, गेस्ट हाऊस वाला कमाएगा, घोड़े वाला कमाएगा, तांगे वाला कमाएगा, गरीब से गरीब आदमी कमाता है और इसलिए हम टूरिज्म को बढ़ावा देना चाहते हैं और जब टूरिज्म बढ़ता है तो उसका सर्वाधिक लाभ जम्मू -कश्मीैर और लेह और लद्दाख को मिलने की संभावना है। यहाँ के नौजवानों को यहीं पर रोज़गार मिले, ये हमारा प्रयास है।आज आपके बीच आने का मुझे अवसर मिला,यहाँ की परंपरा के अनुसार, मेरा स्वागत-सम्मान हुया, आपने मुझे अपना तो बना लिया है। लेकिन आज मेरी भेष भूषा भी आप ने अपनी बना ली है । ये आपके प्यार को अपने भीतर मैं संजोए रखूंगा और हमेशा-हमेशा दिल्ली में बैठी हुई सरकार, भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने के लिए भी, अंधेरा दूर करने के लिए, विकास की यात्रा को आगे बढ़ाने के लिए, आपके साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करेगी, इसी विश्वास के साथ, ‘भारत माता की जय’ का प्रण ले करके, ‘वंदे मातरम’ का नाद गूंजते हुए, पूरे जम्मू कश्मीर की काया का विकास हो, कल्याण हो, उसी संकल्प को लेकर आगे बढ़ेंगे, इसी अपेक्षा के साथ आप सब को बहुत बहुत शुभ कामनायें।

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Text of PM's remarks at Surat Tiranga Yatra
August 10, 2022
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“Our Tricolour is a reflection of the pride of our past, the commitment of our present, and also the dreams of the future”
“Our national flag itself has been a symbol of the country's textile industry, the country's khadi and our self-reliance.”
“Our Tricolor is a symbol of India's unity, India's integrity and India's diversity”
“These campaigns of public participation will strengthen the foundation of New India”

आप सभी को आज़ादी के अमृत महोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं।

अब से कुछ ही दिन बाद देश अपनी आज़ादी के 75 वर्ष पूरे कर रहा है, और हम सब इस ऐतिहासिक स्वतन्त्रता दिवस की पुरजोर तैयारी भी कर रहे हैं। हिंदुस्तान के हर कोने में तिरंगा ही तिरंगा छाया हुआ है। गुजरात का भी कोई कोना ऐसा नहीं है, जो उमंग से भरा हुआ ना हो। और सूरत ने तो इसमें चार चांद लगा दिए हैं। आज पूरे देश का ध्यान सूरत पर है। सूरत की तिरंगा यात्रा से एक तरह से लघु भारत के दर्शन हो रहे हैं या शायद ही हिन्‍दुस्‍तान का कोई कोना ऐसा नहीं होगा, जिसके लोग सूरत में न बसते हों और आज एक प्रकार से पूरा हिन्‍दुस्‍तान सूरत की धरती पर तिरंगा यात्रा के अंदर शामिल हुआ है। और ये भी खुशी की बात है समाज का हर वर्ग शामिल है। तिरंगे में जोड़ने की कितनी ताकत है, ये आज सूरत में हम देख रहे हैं। सूरत ने अपने व्यापार-कारोबार, अपने उद्योगों के कारण दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। आज सूरत में हो रही तिरंगा यात्रा, दुनिया भर में भी आकर्षण का केंद्र बनेगी।

साथियों,

आपने तिरंगा यात्रा में भारत माता की झांकी के साथ-साथ देश की संस्कृति और पहचान से जुड़ी झांकियों को भी शामिल किया है। विशेष रूप से, बेटियों द्वारा शौर्य प्रदर्शन और युवाओं की जो भागीदारी है, वो वाकई-वाकई अद्भुत है। सूरत के लोगों ने हमारे स्वतंत्रता संग्राम की भावना को तिरंगा यात्रा में जीवंत कर दिया है। कोई वस्त्र विक्रेता है, दुकानदार है, कोई लूम्स का कारीगर है, कोई सिलाई या एम्ब्रायडरी का कारीगर है, कोई ट्रांसपोर्टेशन से जुड़ा है, कोई हीरे-जवाहरात से जुड़ा हुआ है। सूरत की पूरी टेक्सटाइल इंडस्ट्री, सूरत के लोगों ने इस आयोजन को बहुत भव्य बना दिया है। हर घर तिरंगा अभियान की इस जनभागीदारी के लिए, और इस विशेष तिरंगा यात्रा के लिए मैं आप सबको बहुत-बहुत बधाई देता हूँ। मैं विशेष रूप से, सांवर प्रसाद बुधिया जी, और 'साकेत- सेवा ही लक्ष्य' ग्रुप से जुड़े सभी वॉलंटियर्स की सराहना करता हूँ, जिन्होंने ये पहल शुरू की। संसद में मेरे साथी सी आर पाटिल जी का सहयोग, इस पहल को और सशक्त बना रहा है।

साथियों,

हमारा राष्ट्रीय ध्वज अपने आपमें देश के वस्त्र उद्योग, देश की खादी और हमारी आत्मनिर्भरता का एक प्रतीक रहा है। इस क्षेत्र में सूरत ने हमेशा से आत्मनिर्भर भारत के लिए आधार तैयार किया है। सूरत के वस्त्र उद्योग ने भारत की उद्योग भावना का, भारत के स्किल और भारत की समृद्धि का प्रतिनिधित्व किया है। इसलिए, ये तिरंगा यात्रा अपने आप में उस गौरव और प्रेरणा को भी समेटे हुए है।

साथियों,

भारत के स्वाधीनता संग्राम के इतिहास में गुजरात ने गौरवशाली योगदान का अपना एक अलग ही स्वर्णिम अध्याय लिखा है। गुजरात ने बापू के रूप में आज़ादी की लड़ाई को नेतृत्व दिया। गुजरात ने लौह पुरुष सरदार पटेल जी जैसे नायक दिये, जिन्होंने आज़ादी के बाद एक भारत-श्रेष्ठ भारत की बुनियाद रची। बारडोली आंदोलन और दांडी यात्रा से निकले संदेश ने, पूरे देश को एकजुट कर दिया था। गुजरात के इसी गौरवशाली अतीत का एक अभिन्न हिस्सा हमारा सूरत है और इसकी विरासत है।

साथियों,

भारत का तिरंगा केवल तीन रंगों को ही स्वयं में नहीं समेटे है। हमारा तिरंगा, हमारे अतीत के गौरव को, हमारे वर्तमान की कर्तव्यनिष्ठा को, और भविष्य के सपनों का भी एक प्रतिबिंब है। हमारा तिरंगा भारत की एकता का, भारत की अखंडता का और भारत की विविधता का भी एक प्रतीक है। हमारे सेनानियों ने तिरंगे में देश के भविष्य को देखा, देश के सपनों को देखा, और इसे कभी झुकने नहीं दिया। आज आजादी के 75 वर्ष बाद जब हम नए भारत की यात्रा शुरू कर रहे हैं, तो तिरंगा एक बार फिर भारत की एकता और चेतना का प्रतिनिधित्व कर रहा है। मुझे खुशी है कि, देश भर में हो रही तिरंगा यात्राओं में, हर घर तिरंगा अभियान में देश की वो शक्ति और भक्ति एक साथ झलक रही है। 13 अगस्त से 15 अगस्त के बीच भारत के हर घर में होगा तिरंगा, भारत के हर घर में फहराएगा तिरंगा। समाज के हर वर्ग, हर जाति-मत-पंथ के लोग स्वतः स्फूर्त एक ऐसे भाव के साथ एकता की पहचान के साथ, नए सपने और संकल्‍पों के साथ पूरा देश जुड़ रहा है। ये पहचान है- भारत के कर्तव्यनिष्ठ नागरिक की। ये पहचान है- माँ भारती की संतान की। महिला-पुरुष, नौजवान, बुजुर्ग, जो जिस भूमिका में है, इस अभियान में अपना सहयोग दे रहा है, अपना कर्तव्य निभा रहा है। मुझे संतोष है कि हर घर तिरंगा अभियान की वजह से कितने ही गरीबों की, बुनकरों की, हैंडलूम में काम करने वालों की अतिरिक्त आय भी हो रही है। आजादी के अमृत महोत्सव में इस तरह के आयोजन हमारे संकल्पों को एक नई ऊर्जा देंगे। जनभागीदारी के ये अभियान नए भारत की बुनियाद को मजबूत करेंगे। इसी विश्वास के साथ, आप सभी को, गुजरात को, पूरे देश को और खास करके मेरे सूरत के लोगों को खूब-खूब शुभकामनाएँ, और सूरत एक बार जो ठान लेता है तो कभी पीछे नहीं हटता। यह सूरत की विशेषता है, सूरत जिस तरह आगे बढ़ रहा है, सूरत जिस तरह प्रगति की नई-नई उंचाई पार कर रहा है, उसके मूल में यह मेरे सूरत के लोग हैं, यह मेरे सूरत के भाई-बहन हैं, आज यह तिरंगा यात्रा का अद्भूत दृश्य देश के लिए भी प्रेरक बनेगा।

मेरी आप सभी को खूब-खूब शुभकामनाएँ।

धन्यवाद!