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PM Narendra Modi launches three gold schemes
PM Narendra Modi launches first ever Indian gold coin
India has no reason to be described as a poor country; it has 20,000 tonnes of gold: PM Modi
Gold has been a source of women's empowerment in Indian society, says Prime Minister Modi
PM Narendra Modi highlights benefits of three gold schemes

उपस्थित सभी महानुभव।

हम बचपन से सुनते आए थे ‘सोने पे सुहागा’। लेकिन अब तक समझ नहीं था कि ‘सोने पर सुहागा’ होता क्‍या है। आज हमारे वित्‍त मंत्री जी ने हमें समझा दिया ‘सोने पर सुहागा’ क्‍या होता है। देश के लिए योजना सच्‍चे अर्थ में ‘सोने पे सुहागा’ इस भाव को चरित्रार्थ करती है। और हम ऐसे गरीब देश हैं जिसके पास 20 हजार टन सोना यूं ही पड़ा है। और शायद हमारी गरीबी का कारण भी यही है कि 20 हजार टन सोना पड़ा हुआ है। और इसलिए भारत को गरीब रहने का कोई कारण नहीं है, कोई कारण नहीं है। कोई logic नहीं समझा पा रहा कि हमें गरीब क्‍यों रहना चाहिए। अगर हम थोड़ी कोशिश करें, सही दिशा में कोशिश करें, तो हम.. हम पर जो Tag लगा है, उस Tag से मुक्ति पा सकते हैं। और उस रास्‍ते का एक महत्‍वपूर्ण, अहम कदम आज है कि ये Gold संबंधी भिन्‍न-भिन्न योजनाएं।

अब मैं बचपन से सुनता आया था लोगों से कि भई आधी रात को काम आता है। सोना रखो, आधी रात को काम आता है। कभी जरूरत पड़ जाए तो काम आ जाएगा; लेकिन मैंने सैकड़ों लोगों को पूछा कि भई कभी आपकी जिंदगी में ऐसी नौबत आई है क्‍या? मुझे अभी तक कोई मिला नहीं, जिसको आधी रात उसका उपयोग हुआ हो लेकिन मनोवैज्ञानिक रूप से उसके दिमाग में फिट है कि भई यह रखो कभी आधी रात काम आ जाएगा। और यह जो हमारे बने बनाए कुछ विचार ने घर कर लिया है, उसमें से समाज को बाहर लाना यह आसान काम नहीं है। आप समझा करके कितने ही पढ़े-लिखे व्‍यक्ति को कहोगे कि छोड़ों, आसान नहीं है। Even Reserve Bank के Governor को भी अपनी पत्‍नी कुछ मांगेगी तो Gold लाना ही पड़ेगा। जबकि उनका अर्थशास्‍त्र Gold के संबंध में अलग होगा, लेकिन गृहशास्‍त्र अलग होगा, तो यह जो अवस्‍था है उस अवस्‍था में कोई न कोई innovative, creative हमने व्‍यवस्‍थाएं विकसित करनी पड़ेगी। दूसरी एक सोच बनी हुई हैं हमारे देश में एक ऐसा Perception है दुनिया में कि भारत में महिलाओं के पास कुछ होता नहीं है। मकान है तो पति के नाम पर, पिता के नाम पर, गाड़ी है तो पति या बेटे के नाम पर, खेत है तो पिता के नाम महिलाओं के पास ? लेकिन बारीकी से देखेंगे तो सोना एक होता है जो महिला की ताकत का विषय होता है। यह ऐसे बनी हुई व्‍यवस्‍था नहीं है। कोई सिर्फ एक सामाजिक व्‍यवस्‍था का एक बहुत बड़ा ताकतवर हिस्‍सा रहा है, जो women empowerment बहुत बड़ा पहलू है। उसके नाम पर मकान नहीं होगा, लेकिन उसके पास यह संपत्ति उसके मालिक की होती है। और परिवार भी उसको question नहीं करता, बेटी भी question नहीं करती, यह तो मां का है। यह जो हमारा संस्‍कार का एक उत्‍तम पहलू भी है। जिसने women empowerment के लिए एक ऐसा सामाजिक जीवन में व्‍यवस्‍था विकसित की and with the help of gold यह हमारा structure विकसित हुआ है, तो उसको बरकरार भी रखना है। हमारी माताएं-बहनें उनके अंदर जो सुरक्षा का भाव है यह बरकरार रहना चाहिए। हम इस scheme में ये विश्‍वास अगर पहुंचाते हैं तो शायद इसकी सबसे ज्‍यादा सफलता का कारण महिलाएं बनेगी। दूसरा हमने देखा होगा हमारे यहां सम्‍पन्‍न परिवारों के family डॉक्‍टर होते हैं। even मध्‍यम वर्ग परिवार के भी family डॉक्‍टर होते हैं।लेकिन निम्‍म वर्ग, गरीब वर्ग परिवार के family डॉक्‍टर नहीं होते हैं। लेकिन हमारे देश में हर परिवार का family goldsmith होता है। कितना बड़ा विश्‍वास होता है। तीन-तीन, चार-चार पीढ़ी से वो सुनार, यानी वो अमेरिका में रहने गया होगा, लेकिन अपने गांव का सुनार है उसी को ढूंढेगा कि भई देखो जरा मैं यह भेजता हूं, कर देना। यह विश्‍वसनीयता एक बहुत बड़ी यानी सदियों की तपस्‍या से बनती है। उस ताकत को भी हमें पहचानना होगा। और इसलिए जब योजना के विषय में मेरे से चर्चा हो रही थी, तो श्रीमान दास को मैं कह रहा था कि जो गांव के छोटे-छोटे goldsmith हैं, वे हमारे एजेंड कैसे बन सकते हैं इस योजना के। एक समय ऐसा था 1968 goldsmith सरकार का सबसे बड़ा दुश्‍मन बना हुआ था। मैं गुजरात के पार्टन नामक शहर में बचपन में कुछ समय बिताया था। जिस गली में मैं रहता था वो सोने की गली थी। वहां एक सज्‍जन थे, उनका एक कार्यक्रम रहता था। सुबह अखबार आता था तो सिगरेट जलाते थे और अखबार में जहां भी मौराजी भाई का फोटो हो तो उसको जलाते थे। इतना गुस्‍सा, इतना गुस्‍सा वो करते थे, क्‍यों‍कि उनको लगता था कि भई हमारी तो सारी रोजी-रोटी चली गई। हम इस योजना के द्वारा ऐसी कैसे व्‍यवस्‍था विकसित करें ताकि उसको फिर एक एक बार empower करें। वो हमारा इस profession का एजेंट कैसे बने, क्‍योंकि उसका विश्‍वास है कि मैं किसी के लिए बुराई नहीं कर रहा हूं लेकिन बैंक से ज्‍यादा उसको अपने गांव के सुनार पर ज्‍यादा भरोसा है। वो बड़े से बड़े jewelry की showroom में जाएगा, लाने के बाद अपने सुनार के यहां जरा चैक कर ले भई। कितना ही बड़ा showroom होगा.. हमारे मेहुल भाई यहां बैठे हैं, लेकिन वो जाएगा। जाएगा अपने सुनार के पास जरा चैक तो करो, मैं ले तो आया हूं। ये एक हमारी इस व्‍यवस्‍था की एक बहुत बड़ी कड़ी बन सकती है। और यह स्‍ट्रक्‍चर already available है। हम उनको gold bond के लिए किस प्रकार से प्रेरित कर सकते है, उनको कैसे विश्‍वास दिला सकते हैं। हम एक decent line mechanism कैसे develop कर सकते हैं और मैं चाहूंगा कि Department के लोग इस पर सोचे, अगर यह हम कर पाएं तो शायद एकदम से यह बढ़ेगा। सरकार में कोई योजना बजट में आए और इतने कम समय में यह लागू हो जाए और Target तय किया है धनतेरस के पहले, क्‍योंकि भारत में शादी में सोने का जितना महत्‍व है, उससे ज्‍यादा धनतेरस को है। और सबसे ज्‍यादा import इन्‍हीं दिनों में हुआ होगा। क्‍योंकि लोगों को लगता होगा कि कोई बहुत बड़ा मार्केट खुलने वाला है तो हमको.. अब यह देखिए एक हजार टन सोना हर वर्ष हम import करते हैं और यह इतनी बड़ी शक्ति है हमारी अगर बिना उपयोग के पड़ी रहे किसी ने कोई बहुत बड़ा जलाशय बनाया हो dam बनाया हो, अरबों खरबों रुपये खर्च किये हो। लेकिन अगर canal network न हो और किसानों के पास पहुंचेगा नहीं तो क्‍या करना है उसको। यह हमारे 20 हजार टन सोने की यही हाल है जी। हमें इसको राष्‍ट्र की शक्ति में परिवर्तित करना है और सामाजिक सुरक्षा में अधिक बलवान बनाना है। इसके एक पहलू नहीं संभव है। यह सामाजिक सुरक्षा का जो पहलू है उसको हमें और Strengthen करना है। राष्‍ट्र की विकास यात्रा में वो एक बहुत बड़ा रोल प्‍ले कर सकते उस प्रकार का हमने विश्‍वास जताना है, mechanism बनाना है। आज एक चिंता तो लोगों को रहती है कि भई कहां रखें 15 दिन बाहर जाना है तो यह सब रखे कहां? रिश्‍तेदार के भी यहां रखें तो क्‍या रखें, कैसे उसको.. मन में चिंता रहती है। यह सुरक्षा का सबसे बड़ा Tension है वो इस योजना से मिट जाता है। उसको विश्‍वास बन जाता है कि यहां मेरा पैसा सुरक्षित है। कभी-कभार व्‍यक्ति Gold में इसलिए करता है कि रुपये के थैले कहां रखेंगे? इतनी छोटी जगह में Gold आ जाएगा तो इतने बड़े थैले वाला रुपये.. तो हम जानते है वो क्‍या होता है सब। लेकिन अगर आज वो उसके पास bond आ गया तो अपना चार कागज़ रख लें चोर भी आएगा तो वो हाथ नहीं लगाएगा। वो कहेगा यह कागज़ को क्‍या ले जाना, नहीं ले जाना भई, ये तो बेकार है। यानी सुरक्षा की guarantee है और यह वो बेच भी सकता है। सोना आधी रात को बिका हो, यह मुझे पता नहीं है। लेकिन मैं विश्‍वास से कहता हूं कि Gold Bond जरूरत पड़ने पर आधी रात को बेच सकते हैं, कहीं अस्‍पताल में जाना पड़ा ऑपरेशन करना पड़े, डॉक्‍टर कहता है पहले पैसे लाओ, Gold Bond दे दिया ऑपरेशन हो जाएगा। यह इतनी संभावनाएं तो सोने में नहीं है। यानी plus point है इसमें। हम इन चीजों को बड़ा articulate करके लोगों तक कैसे पहुंचाएं। उसी प्रकार से हमारा जो यह जमा जमाया ऐसे ही Gold पड़ा हुआ है। बैंक में आएगा और लम्‍बे समय के लिए आएगा तो वो jewellry के लिए चला जाएगा।

Jewellry के लिए चला जाएगा तो मैं मानता हूं jewellry क्षेत्र के लोगों को इस प्रकार से Gold सरलता से मिलेगा उनके सामने कोई question नहीं होंगे। एक jewellry के business वालों के लिए बैंक से direct requirement के अनुसार Gold मिल जाना locally ही मिल जाना यह अपने आप में हमारे jewellry के promotion के लिए बहुत सुविधा का कारण बनेगा और इसलिए जो jewellry की दुनिया से जुड़े हुए लोग हैं क्‍योंकि हम दुनिया के सबसे बड़े आज Gold consumer है। अभी मुझे कल कोई रिपोर्ट बता रहा था कि हमने चाइना को भी इसमें पीछे छोड़ दिया। शायद four-five hundred sixty two टन अब तक नौ महीने में शायद हमने Gold खरीदा है। और चाइना से five hundred forty eight पर खड़ा है। अगर इतना हम तेजी से कर रहे हैं, तो यह व्‍यवस्‍था हम बदलाव ला सकते हैं। monthly monitoring करके हम target तय कर सकते हैं कि इस month घरों का Gold बैंक में आएगा और उतनी मात्रा में बाहर से आना कम होगा। ये हम online monitoring व्‍यवस्‍था विकसित कर सकते थे, तो शायद हम इस सारी नई व्‍यवस्‍था को एक सचमुच में राष्‍ट्रहित में, राष्‍ट्र के‍ विकास के काम में इसको हम जोड़ सकते हैं। इसके साथ एक राष्‍ट्रीय स्‍वाभिमान का विषय भी है। क्‍या कारण है कि हम अभी भी विदेशी मार्के से सोना.. और आज भी पूछते हैं कि अच्‍छा वो मार्क का है। मुझे तो नाम याद नहीं, क्‍योंकि मेरा कोई ऐसे लेना-देना है नहीं, लेकिन सुनते आए हैं। अब वो विश्‍वास से कहेगा कि भई अशोक चक्र है क्‍या। मेरे देश को इस पर भरोसा है क्‍या। यह हमने brand popular करना चाहिए। अब हमने तय करना चाहिए कि हम अब विदेशी मार्क वाला बाजार में हम खुद ही नहीं देंगे। हम jewelry में होंगे, हम Gold बैचने वाले लोग होंगे, हम नहीं करेंगे। यह ठीक है कि अभी इस धनतेरस तो शायद सौ सवा सौ सेंटर पर ही मिलेगा शायद लेकिन वो धीरे-धीरे बढ़ेगा। तो जिन लोगों को धनतेरस पर सोना खरीदना है उनको कुछ जगह पर तो मिल ही जाएगा लेकिन आगे चल करके होगा, लेकिन एक राष्‍ट्रीय स्‍वाभिमान से जुड़ना चाहिए और हमें इसको बल देना चाहिए। और इतने कम समय में वित्‍त मंत्री और उनकी पूरी टीम ने पूरी scheme को workout किया, उसको launch किया। Technology भी इसमें है और manufacturing भी है। सारी व्‍यवस्‍थाएं नये सिरे से करनी पड़ी है। लेकिन सारी व्‍यवस्‍थाएं की और मैं जब इस coin को देखा शायद मैंने अपने रुपये वगैरह पर जो गांधी जी देखें हैं इसमें बहुत बढि़या उनका चित्र निकला है गांधी जी का, यानी जिसने भी इसका artwork किया है उसको मैं बधाई देता हूं। इतना यानी feeling आता है। आप देखेंगे तो ध्‍यान में आएगा। बहुत ही अच्‍छा artwork किया है यानी इसके लिए.. मेरा स्‍वभाव है, इन चीजों में मेरी रूचि होने के कारण मैं थोड़ा अलग प्रकार से देखता रहता हूं। लेकिन मैं बधाई देता हूं पूरी टीम को, अरूण जी को विशेष बधाई देता हूं। और देशवासियों को शुभकामनाएं देता हूं कि धनतेरस के इस पावन पर्व से और दिवाली के शुभकामनाओं के साथ भारत स्‍वर्णिम युग के लिए आगे बढ़े और आपका 20 हजार टन सोना भारत के स्‍वर्णिम युग की ओर जाने के लिए काफी है। ऐसा मेरा विश्‍वास है आइये भारत को स्‍वर्णिम युग बनाने के लिए जिनके पास सोना है, वो इस सुनहरे अवसर को न छोड़े और सोने पर सुहागा उसको फायदा वो भी उठाए। यही मेरी अपेक्षाएं और शुभकामनाएं हैं।

धन्‍यवाद।

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July 29, 2021
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ರಾಷ್ಟ್ರೀಯ ಅಭಿವೃದ್ಧಿಯ “ಮಹಾಯಜ್ಞ’ದಲ್ಲಿ ಎನ್.ಇ.ಪಿ. ದೊಡ್ಡ ಅಂಶವಾಗಿದೆ:ಪ್ರಧಾನಮಂತ್ರಿ
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नमस्कार! कार्यक्रम में मेरे साथ जुड़ रहे कैबिनेट के मेरे सभी सहयोगीगण, राज्यों के माननीय राज्यपाल, सभी सम्मानित मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, राज्य सरकारों के मंत्रीगण, उपस्थित शिक्षाविद, अध्यापकगण, सभी अभिभावक और मेरे प्रिय युवा साथियों!

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को एक साल पूरा होने पर सभी देशवासियों और विशेषकर सभी विद्यार्थियों को बहुत-बहुत शुभकामनाएं। बीते एक वर्ष में देश के आप सभी महानुभावों, शिक्षकों, प्रधानाचार्यों, नीतिकारों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति को धरातल पर उतारने में बहुत मेहनत की है। कोरोना के इस काल में भी लाखों नागरिकों से, शिक्षकों, राज्यों, ऑटोनॉमस बॉडीज से सुझाव लेकर, टास्क फोर्स बनाकर नई शिक्षा नीति को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। बीते एक वर्ष में राष्ट्रीय शिक्षा नीति को आधार बनाकर अनेक बड़े फैसले लिए गए हैं। आज इसी कड़ी में मुझे बहुत सारी नई योजनाओं, नए initiatives की शुरुआत करने का सौभाग्य मिला है।

साथियों, 
ये महत्वपूर्ण अवसर ऐसे समय में आया है जब देश आज़ादी के 75 साल का अमृत महोत्सव मना रहा है। आज से कुछ ही दिन बाद 15 अगस्त को हम आज़ादी के 75वें साल में प्रवेश भी करने जा रहे हैं। एक तरह से, नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति का implementation, आजादी के अमृत महोत्सव का प्रमुख हिस्सा बन गया है। इतने बड़े महापर्व के बीच 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति' के तहत आज शुरू हुई योजनाएं 'नए भारत के निर्माण' में बहुत बड़ी भूमिका निभाएंगी। भारत के जिस सुनहरे भविष्य के संकल्प के साथ आज हम आज़ादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं, उस भविष्य की ओर हमें आज की नई पीढ़ी ही ले जाएगी। भविष्य में हम कितना आगे जाएंगे, कितनी ऊंचाई प्राप्त करेंगे, ये इस बात पर निर्भर करेगा कि हम अपने युवाओं को वर्तमान में, यानि आज कैसी शिक्षा दे रहे हैं, कैसी दिशा दे रहे हैं। इसीलिए, मैं मानता हूं, भारत की नई 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति' राष्ट्र निर्माण के महायज्ञ में बड़े factors में से एक है। और इसीलिए, देश ने इस शिक्षा नीति को इतना आधुनिक बनाया है, इतना फ्यूचर रेडी रखा है। आज इस कार्यक्रम में जुड़े अधिकांश महानुभाव, नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति की बारीकियों से परिचित हैं, लेकिन ये कितना बड़ा मिशन है, इस ऐहसास को हमें बार-बार याद करना ही है।

साथियों, 
देश भर से हमारे कई युवा स्टूडेंट्स भी इस कार्यक्रम में हमारे साथ हैं। अगर इन साथियों से हम उनकी आकांक्षाओं के बारे में, सपनों के बारे में पूछें, तो आप देखेंगे कि हर एक युवा के मन में एक नयापन है, एक नई ऊर्जा है। हमारा युवा बदलाव के लिए पूरी तरह से तैयार है। वो इंतज़ार नहीं करना चाहता। हम सबने देखा है, कोरोनाकाल में कैसे हमारी शिक्षा व्यवस्था के सामने इतनी बड़ी चुनौती आई। स्टूडेंट्स की पढ़ाई का, जीवन का ढंग बदल गया। लेकिन देश के विद्यार्थियों ने तेजी से इस बदलाव को adopt किया। ऑनलाइन एजुकेशन अब एक सहज चलन बनती जा रही है। शिक्षा मंत्रालय ने भी इसके लिए अनेक प्रयास किए हैं। मंत्रालय ने दीक्षा प्लेटफॉर्म शुरु किया, स्वयं पोर्टल पर पाठ्यक्रम शुरू किए, और हमारे स्टूडेंट्स पूरे जोश से इनका हिस्सा बन गए। दीक्षा पोर्टल पर मुझे बताया गया कि पिछले एक साल में 23 सौ करोड़ से ज्यादा हिट होना बताता है कि ये कितना उपयोगी प्रयास रहा है। आज भी इसमें हर दिन करीब 5 करोड़ हिट हो रहे हैं। साथियों, 21वीं सदी का आज का युवा अपनी व्यवस्थाएं, अपनी दुनिया खुद अपने हिसाब से बनाना चाहता है। इसलिए, उसे exposure चाहिए, उसे पुराने बंधनों, पिंजरों से मुक्ति चाहिए। आप देखिए, आज छोटे छोटे गाँवों से, कस्बों से निकलने वाले युवा कैसे-कैसे कमाल कर रहे हैं। इन्हीं दूर-दराज इलाकों और सामान्य परिवारों से आने वाले युवा आज टोक्यो ओलंपिक्स में देश का झण्डा बुलंद कर रहे हैं, भारत को नई पहचान दे रहे हैं। ऐसे ही करोड़ों युवा आज अलग अलग क्षेत्रों में असाधारण काम कर रहे हैं, असाधारण लक्ष्यों की नींव रख रहे हैं। कोई कला और संस्कृति के क्षेत्र में पुरातन और आधुनिक के fusion से नई विधाओं को जन्म दे रहा है, कोई रोबोटिक्स के क्षेत्र में कभी साई-फ़ाई मानी जाने वाली कल्पनाओं को हकीकत में बदल रहा है। कोई artificial intelligence के क्षेत्र में मानवीय क्षमताओं को नई ऊंचाई दे रहा है, तो कोई मशीन लर्निंग में नए माइल स्टोन्स की तैयारी कर रहा है। यानि हर क्षेत्र में भारत के युवा अपना परचम लहराने के लिए आगे बढ़ रहे हैं। यही युवा भारत के स्टार्टअप eco-system को revolutionize कर रहे हैं, इंडस्ट्री 4.0 में भारत के नेतृत्व को तैयार कर रहे हैं, और डिजिटल इंडिया को नई गति दे रहे हैं। आप कल्पना करिए, इस युवा पीढ़ी को जब इनके सपनों के अनुरूप वातावरण मिलेगा तो इतनी शक्ति कितनी ज्यादा बढ़ जाएगी। और इसीलिए, नई 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति' युवाओं को ये विश्वास दिलाती है कि देश अब पूरी तरह से उनके साथ है, उनके हौसलों के साथ है। जिस आर्टिफिसियल इंटेलीजेंस के प्रोग्राम को अभी लॉंच किया गया है, वो भी हमारे युवाओं को future oriented बनाएगा, AI driven economy के रास्ते खोलेगा। शिक्षा में ये डिजिटल revolution, पूरे देश में एक साथ आए, गाँव-शहर सब समान रूप से डिजिटल लर्निंग से जुड़ें, इसका भी खास ख्याल रखा गया है। National Digital Education Architecture, यानी NDEAR और नेशनल एजुकेशन टेक्नोलॉजी फोरम -NETF इस दिशा में पूरे देश में डिजिटल और टेक्नोलॉजिकल फ्रेमवर्क उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाएंगे। युवा मन जिस दिशा में भी सोचना चाहे, खुले आकाश में जैसे उड़ना चाहे, देश की नई शिक्षा व्यवस्था उसे वैसे ही अवसर उपलब्ध कराएगी।


साथियों, 
बीते एक वर्ष में आपने भी ये महसूस किया होगा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति को किसी भी तरह के दबाव से मुक्त रखा गया है। जो openness पॉलिसी के लेवेल पर है, वही openness स्टूडेंट्स को मिल रहे विकल्पों में भी है। अब स्टूडेंट्स कितना पढ़ें, कितने समय तक पढ़ें, ये सिर्फ बोर्ड्स और universities नहीं तय करेंगी। इस फैसले में स्टूडेंट्स की भी सहभागिता होगी। Multiple entry and exit की जो व्यवस्था आज शुरू हुई है, इसने स्टूडेंट्स को एक ही क्लास और एक ही कोर्स में जकड़े रहने की मजबूरी से मुक्त कर दिया है। आधुनिक टेक्नालजी पर आधारित 'अकैडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट' इस सिस्टम से इस दिशा में स्टूडेंट्स के लिए revolutionary change आने वाला है। अब हर युवा अपनी रुचि से, अपनी सुविधा से कभी भी एक स्ट्रीम को choose कर सकता है, छोड़ सकता है। अब कोई कोर्स सलेक्ट करते समय ये डर भी नहीं रहेगा कि अगर हमारा डिसिज़न गलत हो गया तो क्या होगा? इसी तरह, 'Structured Assessment for Analyzing Learning levels' यानी 'सफल' के जरिए स्टूडेंट्स के आंकलन की भी वैज्ञानिक व्यवस्था शुरू हुई है। ये व्यवस्था आने वाले समय में स्टूडेंट्स को परीक्षा के डर से भी मुक्ति दिलाएगी। ये डर जब युवा मन से निकलेगा तो नए-नए स्किल लेने का साहस और नए नए innovations का नया दौर शुरू होगा, संभावनाएं असीम विस्तार होंगी। इसलिए, मैं फिर कहूंगा कि आज नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत जो ये नए कार्यक्रम शुरू हुए हैं, उनमें भारत का भाग्य बदलने का सामर्थ्य है।

साथियों,
हमने-आपने दशकों से ये माहौल देखा है जब समझा जाता था कि अच्छी पढ़ाई करने के लिए विदेश ही जाना होगा। लेकिन अच्छी पढ़ाई के लिए विदेशों से स्टूडेंट्स भारत आयें, बेस्ट institutions भारत आयें, ये अब हम देखने जा रहे हैं। ये जानकारी बहुत उत्साह बढ़ाने वाली है कि देश की डेढ़ सौ से ज्यादा यूनिवर्सिटीज में Office of International Affairs स्थापित किए जा चुके हैं। भारत के Higher Education Institutes, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रिसर्च और एकैडेमिक में और आगे बढ़ें, इसके लिए आज नई गाइडलाइंस भी जारी की गई हैं।

साथियों,
आज बन रही संभावनाओं को साकार करने के लिए हमारे युवाओं को दुनिया से एक कदम आगे होना पड़ेगा, एक कदम आगे का सोचना होगा। हेल्थ हो, डिफेंस हो, इनफ्रास्ट्रक्चर हो, टेक्नोलॉजी हो, देश को हर दिशा में समर्थ और आत्मनिर्भर होना होगा। 'आत्मनिर्भर भारत' का ये रास्ता स्किल डेव्लपमेंट और टेक्नालजी से होकर जाता है, जिस पर NEP में विशेष ध्यान दिया गया है। मुझे खुशी है कि बीते एक साल में 1200 से ज्यादा उच्च शिक्षा संस्थानों में स्किल डवलपमेंट से जुड़े सैकड़ों नए कोर्सेस को मंजूरी दी गई है।

साथियों,
शिक्षा के विषय में पूज्य बापू महात्मा गांधी कहा करते थे- "राष्ट्रीय शिक्षा को सच्चे अर्थों में राष्ट्रीय होने के लिए राष्ट्रीय परिस्थितियों को reflect करना चाहिए"। बापू के इसी दूरदर्शी विचार को पूरा करने के लिए स्थानीय भाषाओं में, mother language में शिक्षा का विचार NEP में रखा गया है। अब हायर एजुकेशन में 'मीडियम ऑफ इन्सट्रक्शन' के लिए स्थानीय भाषा भी एक विकल्प होगी। मुझे खुशी है कि 8 राज्यों के 14 इंजीनियरिंग कॉलेज, 5 भारतीय भाषाएं- हिंदी, तमिल, तेलुगू, मराठी और बांग्ला में इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू करने जा रहे हैं। इंजीनिरिंग के कोर्स का 11 भारतीय भाषाओं में ट्रांसलेशन के लिए एक टूल भी डवलप किया जा चुका है। क्षेत्रीय भाषा में अपनी पढ़ाई शुरू करने जा रहे छात्र-छात्राओं को मैं विशेष बधाई देना चाहता हूं। इसका सबसे बड़ा लाभ देश के गरीब वर्ग को, गाँव-कस्बों में रहने वाले मध्यम वर्ग के स्टूडेंट्स को, दलित-पिछड़े और आदिवासी भाई-बहनों को होगा। इन्हीं परिवारों से आने वाले बच्चों को सबसे ज्यादा language divide का सामना करना पड़ता था, सबसे ज्यादा नुकसान इन्हीं परिवार के होनहार बच्चों को उठाना पड़ता था। मातृभाषा में पढ़ाई से गरीब बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ेगा, उनके सामर्थ्य और प्रतिभा के साथ न्याय होगा।

साथियों,
प्रारम्भिक शिक्षा में भी मातृ भाषा को प्रोत्साहित करने का काम शुरू हो चुका है। जो 'विद्या प्रवेश' प्रोग्राम आज लाँच किया गया, उसकी भी इसमें बहुत बड़ी भूमिका है। प्ले स्कूल का जो कान्सेप्ट अभी तक बड़े शहरों तक ही सीमित है, 'विद्या प्रवेश' के जरिए वो अब दूर-दराज के स्कूलों तक जाएगा, गांव-गांव जाएगा। ये प्रोग्राम आने वाले समय में universal प्रोग्राम के तौर पर लागू होगा, और राज्य भी अपनी-अपनी जरूरत के हिसाब से इसे लागू करेंगे। यानी, देश के किसी भी हिस्से में, बच्चा अमीर का हो या गरीब का हो, उसकी पढ़ाई खेलते और हँसते हुए ही होगी, आसानी से होगी, इस दिशा का ये प्रयास होगा। और जब शुरुआत मुस्कान के साथ होगी, तो आगे सफलता का मार्ग भी आसानी से ही पूरा होगा।

साथियों, 
आज एक और काम हुआ है, जो मेरे हदय के बहुत करीब है, बहुत संवेदनशील है। आज देश में 3 लाख से ज्यादा बच्चे ऐसे हैं जिनको शिक्षा के लिए सांकेतिक भाषा की आवश्यकता पड़ती है। इसे समझते हुए भारतीय साइन लैंग्वेज को पहली बार एक भाषा विषय यानि एक Subject का दर्जा प्रदान किया गया है। अब छात्र इसे एक भाषा के तौर पर भी पढ़ पाएंगे। इससे भारतीय साइन लैंग्वेज को बहुत बढ़ावा मिलेगा, हमारे दिव्यांग साथियों को बहुत मदद मिलेगी। 

साथियों,
आप भी जानते हैं कि किसी भी स्टूडेंट की पूरी पढ़ाई में, उसके जीवन में बड़ी प्रेरणा उसके अध्यापक होते हैं। हमारे यहाँ तो कहा गया है- 

गुरौ न प्राप्यते यत् तत्, 
न अन्य अत्रापि लभ्यते। 

अर्थात्, जो गुरु से प्राप्त नहीं हो सकता वो कहीं प्राप्त नहीं हो सकता। यानी, ऐसा कुछ भी नहीं है जो एक अच्छा गुरु, अच्छा शिक्षक मिलने के बाद दुर्लभ हो। इसीलिए, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के formulation से लेकर implementation तक हर स्टेज पर हमारे शिक्षक सक्रिय रूप से इस अभियान का हिस्सा हैं। आज लाँच हुआ ‘निष्ठा' 2.0 ये प्रोग्राम भी इस दिशा में एक अहम भूमिका निभाएगा। इस प्रोग्राम के जरिए देश के शिक्षकों को आधुनिक जरूरतों के हिसाब से ट्रेनिंग भी मिलेगी, और वो अपने सुझाव भी विभाग को दे पाएंगे। मेरा आप सभी शिक्षकों से, academicians से अनुरोध है कि इन प्रयासों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लीजिये, अधिक से अधिक योगदान दीजिये। आप सभी शिक्षा के क्षेत्र में इतना अनुभव रखते हैं, व्यापक अनुभव के धारक हैं, इसलिए जब आप प्रयास करेंगे तो आपके प्रयास राष्ट्र को बहुत आगे लेकर जाएंगे। मैं मानता हूँ, कि इस कालखंड में हम जिस भी भूमिका में हैं, हम सौभाग्यशाली हैं कि हम इतने बड़े बदलावों के गवाह बन रहे हैं, इन बदलावों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। आपके जीवन में ये स्वर्णिम अवसर आया है कि आप देश के भविष्य का निर्माण करेंगे, भविष्य की रूपरेखा अपने हाथों से खींचेगे। मुझे पूरा विश्वास है, आने वाले समय में जैसे-जैसे नई 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति' के अलग-अलग Features, हकीकत में बदलेंगे, हमारा देश एक नए युग का साक्षात्कार करेगा। जैसे-जैसे हम अपनी युवा पीढ़ी को एक आधुनिक और राष्ट्रीय शिक्षा व्यवस्था से जोड़ते जाएंगे, देश आज़ादी के अमृत संकल्पों को हासिल करता जाएगा। इन्हीं शुभकामनाओं के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूँ। आप सब स्वस्थ रहें, और नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ते रहें। बहुत बहुत धन्यवाद।