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मेरे प्याारे भाइयों और बहनों,

आज राष्ट्रम को ये आधुनिक Steel की इकाई समर्पित करते हुए, मैं गर्व महसूस कर रहा हूं। कोई इसको (IISCO) कहे, कोई उसको कहे, लेकिन आज का अवसर तो हम सबको गर्व देने वाला है। अभी मैं आदरणीय मुख्यSमंत्री जी को सुन रहा था। उन्होंगने बहुत ही अच्छीो बात बताई, और उन्होंरने कहा कि केंद्र और राज्यन हम मिल करके जितना काम करेंगे, देश उतना तेजी से आगे बढ़ेगा। भारत के संविधान में Federal structure तो दिया है लेकिन दुर्भाग्य से आजादी के बाद कई वर्षों तक केंद्र और राज्ये के संबंधों में हमेशा तनाव रहा है। केंद्र में बैठे हुए लोग मानते थे हम कुछ खास हैं और राज्योंऔ को वो कुछ गिनते ही नहीं थे। मैं भी बहुत लंबे अरसे तक राज्यम का मुख्य मंत्री रहा हूं। और इसलिए मुझे भली-भांति पता है कि केंद्र का राज्योंस के साथ यह व्यमवहार देश का भला नहीं करेगा। और इसलिए हमने आते ही एक बहुत बड़ा परिवर्तन लाया, Cooperative Federalism की बात कही। Cooperative competitive federalism की बात कही। नीति आयोग का निर्माण किया। और अब दिल्लीऔ अकेला देश नहीं चलाएगा, अब देश एक खंभे पर नहीं सभी राज्योंि का एक-एक खंभा मिला करके, 30 खंभों पर देश आगे बढ़ेगा। ये हमने सोचा है।

टीम इंडिया, मैं Day One से कह रहा हूं टीम इंडिया के बिना हिंदुस्ताचन प्रगति नहीं कर सकता। प्रधानमंत्री और मुख्यैमंत्री ये मिल करके एक टीम है। ये टीम हिंदुस्तांन को आगे बढ़ाएगी, दल कोई भी हो लेकिन दल से बड़ा देश होता है। आज टीम इंडिया के कारण प्रगति कैसे होती है, आज एक बीमार इकाई ताकत के साथ खड़ी हो गई, हजारों लोगों के लिए नौकरी के अवसर मिल गये। हिंदुस्ता न को Steel के क्षेत्र में आगे बढ़ाने में ये बर्नपुर की धरती, ये बंगाल की धरती काम आई। अगर यहां के मुख्यसमंत्री ने यहां की सरकार ने, रोड़े अटकाये होते तो ये काम संभव नहीं होता। मिल करके काम करते हैं तो परिणाम मिलता है। ये टीम इंडिया का सफलता का उदाहरण है कि आज हम देश को ये इकाई समर्पित कर रहे हैं।

दो दिन पहले आपने देखा होगा 41 साल से, Fourteen One Year से एक मामला लटका हुआ था। “बंग-बंधु” Mujibur Rahman के जमाने से यह काम लटका हुआ था। लेकिन अभी दो दिन पहले भारत और बांग्लाखदेश के बीच जो सीमा का विवाद रहता था, तनाव चलता रहता था, उसका समाधान हुआ। कैसे हुआ? टीम इंडिया के कारण हुआ। ममता जी ने, बंगाल की सरकार ने, असम ने, त्रिपुरा ने, मेघालय, मिजोरम ने, दिल्लीक सरकार के साथ कंधे से कंधा मिला करके फैसला किया। सभी राजनीतिक दलों ने फैसला लिया। और पहली बार यह देश गर्व कर सकता है कि राज्यीसभा हो या लोकसभा - दोनों सदनों में एक भी मत विरोध में नहीं पड़ा, सब के सब मत एक साथ पड़े और टीम इंडिया का यह दर्शन हम पूरी दुनिया को दिखा पाए। सारे विश्व के लिए भारत की संसद का यह निर्णय, टीम इंडिया का यह निर्णय, केंद्र और राज्यस के साथ मिलकर के चलने का प्रयास का परिणाम यह आज समस्या्एं दुनिया के किसी देश के साथ भी सुलझाई जा सकती है। अगर टीम इंडिया का भाव हो, अगर विदेशों से समस्या एं सुलझाई जा सकती है, तो घर में तो बहुत आसानी से सुलझाई जा सकती है। और इसलिए हमारी पूरी कोशिश है।

अब देखिए अभी 14th Finance Commission हमने शब्दइश: स्वीलकार किया और उसका परिणाम क्या आया? एक जमाना था जब दिल्लीn सरकार की तिजौरी में देश की 60-65% संपत्ति रहती थी। और 35-40% में सभी राज्योंस के खजाने में पैसे रहते थे। हमने आने के बाद जो फैसले किए उसका परिणाम यह आया है कि आज हिंदुस्ता न का Total जो खजाना है उस खजाने का 62% राज्योंक के खजानों में है और सिर्फ 38% दिल्ली के खजाने में है। यह बदलाव हम लाएं हैं, क्योंाकि विकास करना है तो राज्योंर की मदद के बिना हो नहीं सकता है। विकास करना है तो राज्योंप और दिल्लीो मिलकर के करेंगे तभी संभव होता है और इसका यह उदाहरण है। ऐसे बहुत उदाहरण बन सकते हैं, जिसको लेकर के हमारा चलने का प्रयास है।

और मैं मानता हूं... हिंदुस्तारन का जो नक्शाय देखें तो मैं पहले ही दिन से मानता हूं कि भारत के विकास में सामाजिक स्त.र पर असंतुलन है, आर्थिक स्त र पर असंतुलन है, शैक्षणिक स्तिर पर अंसतुलन है लेकिन साथ-साथ भौगोलिक स्तथर पर भी असंतुलन है। हिंदुस्तासन का पश्चिमी किनारा देखिए - केरल हो, कर्नाटक हो, गोवा हो, महाराष्ट्र हो, राजस्थाेन हो, दिल्ली हो, हरियाणा हो, पंजाब हो - आपको पश्चिमी छोर पर आर्थिक गतिविधि तेज नज़र आती है। लेकिन हिंदुस्ताकन का पूर्वी क्षेत्र उपेक्षित रहा है। हिंदुस्ता न के पूर्वी क्षेत्र चाहे पूर्वी उत्तलर प्रदेश हो, चाहे बिहार, चाहे बंगाल हो, चाहे ओडि़शा हो, चाहे असम हो, चाहे नॉर्थ ईस्टव हो - बहुत ही शक्तिशाली राज्ये है। यहां के लोग सामर्थ्यतवान हैं। प्राकृतिक संपदाओं के भंडार भरे पड़े हैं। लेकिन फिर भी विकास के दौर में पीछे रहे गए है। अगर भारत मां को हमें भव्यस रूप से देखना है तो भारत मां का एक अंग अगर बीमार होगा तो भारत माता कभी मजबूत नहीं हो सकती है। और इसलिए हमारा सपना है हिंदुस्ताान के पूर्वी हिस्सेब को सबसे अधिक ताकतवर बनाना, हिंदुस्तापन के पश्चिमी छोर की बराबरी में लाकर के खड़ा कर देना और अगर बंगाल मजबूत नहीं बनता, कोलकाता मजबूत नहीं बनता तो हिंदुस्ता न का पूर्वी हिस्साअ भी मजबूत नहीं हो सकता है और इसलिए मां भारती को मजबूत बनाने के लिए भारत के इस भू-भाग को भी ताकत देने की आवश्यलकता है।

Second Green Revolution हम सपना तो देख रहे हैं लेकिन Second Green Revolution कहां होगा। मैं साफ देख रहा हूं Second Green Revolution के लिए सबसे अधिक उर्वरा भूमि कहीं है सबसे अधिक ताकत कहीं है तो वो पूर्वी हिंदुस्ताuन में है। चाहे पूर्वी उत्त र-प्रदेश हो, चाहे बिहार हो, ओडि़शा हो, बंगाल हो, असम हो, नॉर्थ इर्स्ट‍ हो विपुल मात्रा में पानी है, जमीन भी बहुत मात्रा में है। अगर किसानों का कल्याओण करना है, देश का भला करना है, तो हिंदुस्ताबन की Second Green Revolution इसी धरती पर केंद्रित करके किया जा सकता है और आने वाले 5-10 साल में सारा गांव का आर्थिक जीवन बदला जा सकता है। और हम इस vision के साथ देश को नई ऊंचाईयों पर ले जाने का प्रयास कर रहे हैं।

आप जानते हैं, 2014 के यह दिवस चुनाव के दिवस थे। चारों तरफ राजनीतिक दल एक दूसरे पर हमला कर रहे थे। हम भी बंगाल में आए थे, हम भी हमला कर रहे थे। और लोग हम पर हमला कर रहे थे लेकिन विचार क्या आते थे? 2014 के फरवरी, मार्च, अप्रैल के अखबार देख लीजिए एक ही बात आती थी। कोयले का घोटाला एक लाख 76 हजार का घोटाला, spectrum का घोटाला, पनडुब्बी7 का घोटाला, पानी में घोटाला, जमीन में घोटाला, आसमान में घोटाला, घोटालों ही घोटालों की खबरें हम पूरी देर सुनते आते थे। भाईयों-बहनों आज एक साल हो गया दिल्लीc में नई सरकार को। अखबार में खबर आती है तो क्या आती है? कोयले के घोटाले की खबर नहीं आती है। खबर आती है तो कोयले की नीलामी की खबर आती है और एक लाख 74 हजार करोड़ के घोटाले को निगल करके आज तीन लाख करोड़ रुपया सरकारी खजाने में जमा होने का खबर नजर आता है।

भाईयों बहनों, अगर विश्वा स के साथ काम किया जाए। यह कोयले की खदानें कहां हैं? हिंदुस्ताान के पूर्वी इलाके में है। जिसके पास इतनी प्राकृतिक संपदा हो, यह राज्य गरीब नहीं रहना चाहिए। और इसलिए हमने नीतिगत परिवर्तन किए। हमने कहा कोयले की खदानों का Auction होगा। पहले क्यान होता था? किसी नेता के घर से चिट्ठी आती थी कि यह कोयले की खदान उसको दे दो, और किसी को पूछे बिना दे देते थे। सरकारी खजाने में एक नया पैसा नहीं आता था। यह सारा हमने बंद कर दिया, पुराना खत्मे कर दिया, Auction किया और यह भी तय किया कि Auction में जो पैसा आएगा, कोयले के Auction में जो पैसा आएगा वो पैसा दिल्लीक की तिजोरी में नहीं, उस राज्य के खजाने में जाएगा ताकि वो सरकार राज्यी का भला कर पाए। इसका लाभ पश्चिम बंगाल को भी मिल रहा है, झारखंड को मिल रहा है, छत्तीरसगढ़ को मिल रहा है। जहां-जहां पर कोयले की खदानें हैं उन राज्योंग को मिल रहा है। पहली बार गरीबों के लिए काम करने वाली सरकार ने एक बड़ा महत्वेपूर्ण निर्णय किया। हमारे देश में खनिज संपदा हो, कोयला हो, ज्यातदातर जहां आदिवासी लोग रहते हैं, उस इलाके में हैं, जंगलों में हैं। कोयला तो जाता था, खजिन संपदा जाती थी, लेकिन उन जिले गरीबों का, आदिवसियों का भला नहीं होता था। हमने तय किया है उन जिलों में एक foundation बनाया जाएगा। इस रॉयल्टी का कुछ हिस्साक उस foundation में डाला जाएगा और वो पैसे उस जिले की नागरिकों की भलाई के लिए होगा। चाहे उनको शिक्षा देनी होगी, अरोग्य देना होगा, घर देना होगा, पानी पहुंचाना होगा। यह पैसे उनके लिए खर्च आएंगे।

अभी मुझे छत्तीासगढ़ के मुख्यमंत्री मिले थे, उन्होंंने बड़ी मजेदार बात बताई। उन्होंनने कहा साहब यह खदानों की रॉयल्टीस से आने वाले पैसों से यह जो foundation बनेगा इसमें अरबों, खरबों रुपये आने वाले हैं और उसके कारण हमारे यह जो tribal district है, उसको अब हमें सरकारी तिजोरी से शायद पैसा ही नहीं देना पड़ेगा। और शायद और राज्यों की तुलना में वो तेजी गति से बढ़ने वाले राज्य बन जाएंगे। अगर नीतिगत परिवर्तन करते हैं, दीर्घ दृष्टि से नीतियों का निर्माण करते हैं तो राष्ट्र के विकास को कैसे बदला जा सकता है, इसका हमने उदाहरण देखा है।

भाईयों और बहनों, यह कैसा देश है कि हम iron ore विदेशों में export करते रहे है, विकास करते रहे, कच्चास माल देते रहे और steel विदेशों से मंगवाते रहे? भाईयों बहनों ऐसे तो देश नहीं चल सकता कि हम गेहूं बाहर भेजे और चपाती बाहर से अंदर लाए। ऐसा नहीं हो सकता। अगर iron ore हमारा है तो स्टी ल भी हम बनाएंगे, नौजवानों को रोजगार देंगे और यह देश यह सपना देखकर के चलता है कि 2020 में आज हम दुनिया में जिस जगह हैं उससे दो कदम आगे चल सकते हैं या नहीं चल सकते। उस दिशा में हम काम करना चाहते हैं। आज China से स्टीयल हमकों लाना पड़ रहा है। हम स्टीाल iron ore होने के बावजूद भी उत्पाददन नहीं करते। हमारी जो खनिज संपदा है आखिरकार जो लोग अर्थशास्त्रा के पंडित हैं वो भलिभांति जानते हैं पैसा आएगा कहां से? वो भली-भांति जानते हैं पैसा आएगा कहां से आएगा? देश को विकास करना है तो धन कहां से आएगा, धन कहां से पैदा होगा, तीन प्रमुख जगहें हैं, तीन प्रमुख जगह हैं जहां से पैसा ज्‍यादा से ज्यासदा आने की संभावना है:

• एक हमारी उर्वरा भूमि से, हम जितना ज्या्दा मूल्येवान उत्पाददन करें,
• दूसरा हमारी खनिज संपदा उसमें Value Addition करके मूल्यू वृद्धि करके, उसमें से हम नये product बनायें, हमारे खजाने में पैसा आता है और
• तीसरा सवा सौ करोड़ देशवासियों की ताकत, उनका हुनर, हमारे नौजवानों की Skill , हमारे नौजवानों की बुद्धि, हमारी ज्ञान शक्ति, हमारी कौशल्य शक्ति, वो रूपयों को पैदा कर सकती है

और इसलिए हमने इन तीन ही धाराओं को ले करके, एक तरफ देश के नौजवानों को हुनर सिखाना, दूसरी तरफ खनिज संपदा में मूल्यन वृद्धि करना, और तीसरी तरफ, soil health Card जैसे प्रयोगों द्वारा, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के द्वारा, किसानों को पानी पहुंचा करके जमीन की परख करके उतम से उत्पा दन कैसे हो, उसके रास्तेा दिखा करके कम जमीन में ज्या दा उत्पाेदन परिवार की आर्थिक स्थिति को सुधारे, ऐसा उत्पामदन उस दिशा में हम काम कर रहे हैं।

और मुझे विश्वा्स है एक साल के भीतर-भीतर हमने पाया है। आज सारी दुनिया कहने लगी है, आज हिंदुस्ताहन दुनिया में, मेरे प्या रे भाइयों और बहनों गर्व कीजिए, पूरा विश्वो कह रहा था एक साल पहले कि हिंदुस्ता न डूब जाएगा, हिंदुस्तापन कुछ नहीं कर सकता है, हिंदुस्ता न लुढ़क गया है, दुनिया की आर्थिक रचना में, अब हिंदुस्तानन अपनी जगह नहीं बना सकता, ये सारी दुनिया ने मान लिया था। एक साल के भीतर-भीतर पूरा विश्वह एक स्वर से कह रहा है। IMF हो, World Bank हो, Moody’s हो हर कोई दुनिया की जितनी rating agency है सारी rating agency ये कह रही हैं - भारत आज दुनिया का सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाला देश बन गया है। दुनिया का सबसे तेज गति से आर्थिक विकास करने वाला देश बन गया है।

भाईयों और बहनों, मजबूत नींव रखी गई है एक साल के भीतर-भीतर और मजबूत नींव को देख करके दुनिया कहने लगी है कि विश्वत की अर्थ रचना में भारत तेज गति से अपनी जगह बना रहा है। भाईयों और बहनों, खास करके नौजवानों को रोजगार देना है, गरीबी के खिलाफ लड़ाई लड़नी है, नौजवानों की ताकत से लड़नी है, सरकार और जनता साथ मिल करके चलें तो हम कैसा परिवर्तन ला सकते हैं, इसका ये उत्तंम उदाहरण है। .

मैं चाहता हूं, बंगाल भी विकास की नई ऊंचाईयों पर पहुंचे, और जो बंगाल का भव्यी इतिहास था, पूरे हिंदुस्ताकन की आर्थिक डोर बंगाल के हाथ में हुआ करता था। देश को आर्थिक देने का काम कभी बंगाल किया करता था। वो ताकत फिर से मिलेगी। बंगाल बहुत आगे बढ़ेगा, पूर्वी हिंदुस्ताथन को आगे बढ़ाएगा। इतना ही नहीं पूर्व के देशों के साथ हमारे संबंधों को मजबूत बनाने में बंगाल की आर्थिक ताकत बहुत काम आने वाली है। इसलिए राष्ट्रीय कारणों से, अंतर्राष्ट्रीय कारणों से, पूरी दुनिया की तरफ आगे बढ़ने के लिए जब हमारी Act East Policy है तब बंगाल की एक अहम भूनिका है। और मुझे विश्वास है कि टीम इंडिया की यह ताकत, केन्द्र और राज्य की मिलकर के आगे बढ़ने की यह ताकत हमारे सारे सपनों का पूरा करने में काम आएगी।

इसी एक विश्वास के साथ मैं फिर एक बार आप सभी का हृदय से धन्यवाद करता हूँ। और मैं सभी मेरे मजदूर भाईयों और बहनों को विश्सास दिलाता हूँ कि आपका पसीना बेकार नही जाएगा। आपका पसीना बेकार नही जाएगा। आपका पसीना ही है जो पूरे विश्वा में हिंदुस्ता न की आबो-हवा को बदलेगा। यह मेरा विश्वा स है।

मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएं, बहुत-बहुत धन्यैवाद।

ನಿಮ್ಮ ಸಲಹೆ ಸೂಚನೆಗಳನ್ನು ಪ್ರಧಾನ ಮಂತ್ರಿ ನರೇಂದ್ರ ಮೋದಿಯವರೊಂದಿಗೆ ಮನ್ ಕೀ ಬಾತ್ ಕಾರ್ಯಕ್ರಮದಲ್ಲಿ ಹಂಚಿಕೊಳ್ಳಿ.
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Text of PM’s address at launches of multiple development initiatives in Kushinagar, Uttar Pradesh
October 20, 2021
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Also inaugurates and lays foundation stones of various development projects in Kushinagar
“When basic facilities are available, then the courage to dream big and the spirit to fulfil those dreams are born”
“Uttar Pradesh Cannot be confined to 6-7 decades. This is a land whose history is timeless, whose contribution is timeless”
“The ‘double engine’ government is improving the situation with double strength”
“Swamitva scheme is going to open new doors of prosperity in the rural areas of Uttar Pradesh”
“More than Rs 37,000 crore has been deposited in the bank accounts of UP farmers from PM Kisan Samman Nidhi”

भारत माता की जय !

भारत माता की जय !

भगवान बुद्ध के परिनिर्वाण स्थली कुशीनगर पर रउरा सभन के परनाम का रहल बानी। आज हम एयरपोर्ट के उद्घाटन आ मेडिकल कालेज के शिलान्यास कइनी, जवने के रउरा सब बहुत दिन से आगोरत रहलीं। अब एइजा से जहाज उड़ी आ गंभीर बेमारी के इलाज भी होई। एही के साथे रउरा सभन के बहुत बड़ा सपना भी पूरा हो गइल ह। आप सभी के बहुत-बहुत बधाई !

उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमति आनंदीबेन पटेल जी, यूपी के लोकप्रिय और यशस्वी कर्मयोगी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी, यूपी भाजपा के ऊर्जावान अध्यक्ष श्री स्वतंत्र देव जी, यूपी सरकार के मंत्री श्री सूर्यप्रताप साही जी, श्री सुरेश कुमार खन्ना जी, श्री स्वामी प्रसाद मौर्या जी, डॉक्टर नीलकंठ तिवारी जी, संसद के मेरे साथी श्री विजय कुमार दुबे जी, डॉक्टर रमापति राम त्रिपाठी जी, अन्य जनप्रतिनिधिगण, और भारी संख्या में यहां पधारे मेरे प्यारे बहनों और भाइयों !! दीवाली और छठ पूजा बहुत दूर नहीं है। ये उत्सव और उत्साह का समय है। आज महर्षि वाल्मीकि जी की जयंती भी है। इस पावन अवसर पर कनेक्टिविटी के, स्वास्थ्य के और रोज़गार के सैकड़ों करोड़ के नए प्रोजेक्ट कुशीनगर को सौंपते हुए मुझे बहुत खुशी हो रही है।

भाइयों और बहनों,

महर्षि वाल्मीकि ने हमें रामायण के माध्यम से प्रभु श्रीराम और माता जानकी के दर्शन ही नहीं कराए बल्कि समाज की सामूहिक शक्ति, सामूहिक प्रयास से कैसे हर लक्ष्य प्राप्त किया जाता है, उसका ज्ञानबोध भी कराया। कुशीनगर इसी दर्शन का एक बहुत समृद्ध और पवित्र स्थान है।

भाइयों और बहनों,

नए इंटरनेशनल एयरपोर्ट से यहां गरीब से लेकर मिडिल क्लास तक, गांव से लेकर शहर तक, पूरे क्षेत्र की तस्वीर ही बदलने वाली है। महाराजगंज और कुशीनगर को जोड़ने वाले मार्ग के चौड़ीकरण के साथ इंटरनेशनल एयरपोर्ट को तो बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी ही, रामकोला और सिसवा चीनी मिलों तक पहुंचने में गन्ना किसानों को होने वाली परेशानी भी दूर होगी। कुशीनगर में राजकीय मेडिकल कॉलेज बनने से आपको अब इलाज के लिए एक नई सुविधा मिल गई है। बिहार के सीमावर्ती इलाकों को भी इसका लाभ मिलेगा। यहां से अनेक युवा डॉक्टर बनने का अपना सपना पूरा कर पाएंगे, और आप जानते हैं हमने राष्ट्रीय नई शिक्षा नीति जो लाएं हैं न, उसमें निर्णय किया है आजादी के 75 साल बाद यह निर्णय लिया है कि अब अपनी मातृभाषा में पढ़ने वाला बच्चा भी, गरीब माँ का बेटा भी डॉक्टर बन सकता है, इंजीनियर बन सकता है भाषा के कारण अब उसकी विकास यात्रा में कोई रुकावट नहीं पैदा होगी। ऐसे ही प्रयासों के कारण पूर्वांचल में दिमागी बुखार- एन्सेफलाइटिस जैसी जानलेवा बीमारी से हजारों मासूमों को बचाया जा सका है।

साथियों,

गंडक नदी के आसपास के सैकड़ों गांवों को बाढ़ से बचाने के लिए अनेक जगहों पर तटबंध का निर्माण हो, कुशीनगर राजकीय महाविद्यालय का निर्माण हो, दिव्यांग बच्चों के लिए महाविद्यालय हो, ये क्षेत्र को अभाव से निकालकर आकांक्षाओं की तरफ ले जाएंगे। बीते 6-7 सालों में गांव, गरीब, दलित, वंचित, पिछड़ा, आदिवासी, ऐसे हर वर्ग को मूल सुविधाओं से जोड़ने का जो अभियान देश में चल रहा है, ये उसी की एक अहम कड़ी है।

साथियों,

जब मूल सुविधाएं मिलती हैं, तो बड़े सपने देखने का हौसला और सपनों को पूरा करने का जज्बा पैदा होता है। जो बेघर है, झुग्गी में है, जब उसको पक्का घर मिले, जब घर में शौचालय हो, बिजली का कनेक्शन हो, गैस का कनेक्शन हो, नल से जल आए, तो गरीब का आत्मविश्वास अनेक गुना बढ़ जाता है। अब ये सुविधाएं तेज़ी से गरीब से गरीब तक पहुंच रही हैं, तो गरीब को भी पहली बार ऐहसास हो रहा है कि आज जो सरकार है, वो उसका दर्द समझती है, उसकी परेशानी भी समझती है। आज बहुत ईमानदारी के साथ केंद्र और राज्य सरकार, यूपी के विकास में, इस क्षेत्र के विकास में जुटी हैं। डबल इंजन की सरकार, डबल ताकत से स्थितियों को सुधार रही है। वर्ना 2017 से पहले, योगी जी के आने से पहले जो सरकार यहां थी, उसे आपकी दिक्कतों से, गरीब की परेशानी से कोई सरोकार नहीं था। वो चाहती नहीं थी कि केंद्र की योजनाओं का लाभ उत्तर प्रदेश के गरीब के घर तक पहुंचे । इसलिए पहले की सरकार के समय, गरीबों से जुड़े, इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े हर प्रोजेक्ट में यूपी में देर होती ही गई, होती ही गई, होती ही गई। राममनोहर लोहिया जी कहा करते थे कि

-कर्म को करूणा से जोड़ो, भरपूर करुणा से जोड़ो।

लेकिन जो पहले सरकार चला रहे थे, उन्होंने गरीब के दर्द की परवाह नहीं की, पहले की सरकार ने अपने कर्म को, घोटालों से जोड़ा, अपराधों से जोड़ा। यूपी के लोग अच्छी तरह जानते हैं, कि इन लोगों की पहचान समाजवादियों की नहीं परिवारवादी की बन गई है। इन लोगों ने सिर्फ अपने परिवार का भला किया, समाज का और उत्तर प्रदेश का हित भूल गए।

साथियों,

देश का इतना बड़ा राज्य, इतनी ज्यादा आबादी वाला राज्य होने के कारण, एक समय में उत्तर प्रदेश, देश के हर बड़े अभियान के लिए चुनौती मान लिया जाता था। लेकिन आज उत्तर प्रदेश देश के हर बड़े मिशन की सफलता में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। बीते वर्षों में स्वच्छ भारत अभियान से लेकर कोरोना के विरुद्ध अभियान में ये देश ने लगातार अनुभव किया है। देश में प्रतिदिन औसतन सबसे ज्यादा वैक्सीन लगाने वाला अगर कोई राज्य है तो उस राज्य का नाम उत्तर प्रदेश है। टीबी के विरुद्ध देश की लड़ाई में भी यूपी बेहतर करने का प्रयास कर रहा है। आज जब हम कुपोषण के विरुद्ध अपनी लड़ाई को भी अगले चरण में ले जा रहे हैं, तो इसमें भी उत्तर प्रदेश की भूमिका बहुत अहम है।

साथियों,

यूपी में कर्मयोगियों की सरकार बनने का सबसे बड़ा लाभ यहां की माताओं-बहनों को हुआ है। जो नए घर बने, उनमें से अधिकांश की रजिस्ट्री बहनों के नाम हुई, शौचालय बने, इज्ज़त घर बने, सुविधा के साथ उनकी गरिमा की भी रक्षा हुई, उज्जवला का गैस कनेक्शन मिला तो उन्हें धुएं से मुक्ति मिली, और अब बहनों को पानी के लिए भटकना ना पड़े, परेशान ना होना पड़े इसके लिए घर तक पाइप से पानी पहुंचाने का अभियान चल रहा है। सिर्फ 2 साल के भीतर ही उत्तर प्रदेश के 27 लाख परिवारों को शुद्ध पेयजल कनेक्शन मिला है।

साथियों,

केंद्र सरकार ने एक और योजना शुरू की है जो भविष्य में उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में समृद्धि का नया द्वार खोलने वाली है। इस योजना का नाम है - पीएम स्वामित्व योजना। इसके तहत गांव के घरों की घरौनी यानि घरों का मालिकाना दस्तावेज़, यह देने का काम शुरु किया है। गांव-गांव की जमीनों की, प्रॉपर्टी की, ड्रोन की मदद से नपाई की जा रही है। अपनी प्रॉपर्टी के कानूनी कागज़ मिलने से अवैध कब्ज़े का डर तो समाप्त होगा ही, बैंकों से मदद मिलने में भी बहुत आसानी हो जाएगी। यूपी के जो युवा, गांव के अपने घरों को, अपनी जमीन को आधार बनाकर अपना काम शुरू करना चाहते हैं, अब उन्हें स्वामित्व योजना से बहुत बड़ी मदद मिलने वाली है।

भाइयों और बहनों,

बीते साढ़े 4 साल में यूपी में कानून के राज को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। 2017 से पहले जो सरकार यहां पर थी, उसकी नीति थी - माफिया को खुली छूट, खुली लूट। आज योगी जी के नेतृत्व में यहां माफिया माफी मांगता फिर रहा है और सबसे ज्यादा डर भी, इसका दर्द किसको हो रहा है सबसे ज्यादा योगी जी के कदमों का दुख भी माफियावादियों को हो रहा है। योगी जी और उनकी टीम उस भूमाफिया को ध्वस्त कर रही है, जो गरीबों, दलितों, वंचितों, पिछड़ों की जमीन पर बुरी नजर रखता था, अवैध कब्जा करता था।

साथियों,

जब कानून का राज होता है, अपराधियों में डर होता है, तो विकास की योजनाओं का लाभ भी तेजी से गरीब-दलित-शोषितों-वंचितों तक पहुंचता है। नई सड़कों, नए रेलमार्गों, नए मेडिकल कॉलेजों, बिजली और पानी से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर का भी तेज़ गति से विकास हो पाता है। यही आज योगी जी के नेतृत्व में उनकी पूरी टीम उत्तर प्रदेश में जमीन पर उतार करके दिखा रहे हैं। अब यूपी में औद्योगिक विकास सिर्फ एक दो शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूर्वांचल के जिलों तक भी पहुंच रहा है।

साथियों,

उत्तर प्रदेश के बारे में एक बात हमेशा कही जाती है कि ये एक ऐसा प्रदेश है जिसने देश को सबसे ज्यादा प्रधानमंत्री दिये। ये यूपी की खूबी है, लेकिन यूपी की पहचान इस पहचान को लेकर केवल इस दायरे में ही नहीं देखा जा सकता। यूपी को 6-7 दशकों तक ही सीमित नहीं रखा जा सकता! ये ऐसी धरती है जिसका इतिहास कालातीत है, जिसका योगदान कालातीत है। इस भूमि पर मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम ने अवतार लिया, भगवान श्रीकृष्ण ने अवतार लिया। जैन धर्म के 24 में 18 तीर्थंकर, उत्तर प्रदेश में ही अवतरित हुए थे। आप मध्यकाल को देखें तो तुलसीदास और कबीरदास जैसे युगनायकों ने भी इसी मिट्टी में जन्म लिया था। संत रविदास जैसे समाज-सुधारक को जन्म देने का सौभाग्य भी इसी प्रदेश की मिट्टी को मिला है। आप जिस किसी भी क्षेत्र में जाएंगे, उत्तर प्रदेश के योगदान के बिना उसका अतीत, वर्तमान और भविष्य अधूरा ही दिखेगा। उत्तर प्रदेश एक ऐसा प्रदेश है जहां पग-पग पर तीर्थ हैं, और कण-कण में ऊर्जा है। वेदों और पुराणों को कलमबद्ध करने का काम यहाँ के नैमिषारण्य में हुआ था। अवध क्षेत्र में ही, यहाँ अयोध्या जैसा तीर्थ है। पूर्वांचल में शिवभक्तों की पवित्र काशी है, बाबा गोरखनाथ की तपोभूमि गोरखपुर है, महर्षि भृगु की स्थली बलिया है। बुंदेलखंड में चित्रकूट जैसी अनंत महिमा वाला तीर्थ है। और तो और तीर्थराज प्रयाग भी हमारे यूपी में ही है। ये सिलसिला यहीं नहीं रुकता है। आप काशी आएंगे तो आपकी यात्रा सारनाथ के बिना पूरी नहीं होगी जहां भगवान बुद्ध ने अपना पहला उपदेश दिया था। कुशीनगर में तो हम अभी उपस्थित ही हैं। पूरी दुनिया से बौद्ध श्रद्धालु यहाँ आते हैं। आज तो पहली इंटरनेशनल फ्लाइट से लोग यहाँ पहुंचे भी हैं। अलग अलग देशों से लोग जब कुशीनगर आएंगे, तो श्रावस्ती, कौशांबी और संकिसा जैसे तीर्थ भी जाएंगे। इसका श्रेय भी यूपी के ही हिस्से आता है। श्रावस्ती में ही जैन तीर्थंकर संभवनाथ जी का जन्मस्थान भी है। इसी तरह, अयोध्या में भगवान ऋषभदेव और काशी में तीर्थांकर पार्श्वनाथ और सुपार्श्वनाथ जी की भी जन्मस्थली है। यानी, यहाँ एक-एक स्थान की इतनी महिमा है कि कई कई अवतार एक स्थान पर हुए हैं। यही नहीं, हमारी गौरवशाली महान सिख गुरु परंपरा का भी उत्तर प्रदेश से गहरा जुड़ाव रहा है। आगरा में ‘गुरु का ताल’ गुरुद्वारा आज भी गुरु तेगबहादुर जी की महिमा का, उनके शौर्य का गवाह है जहां पर उन्होंने औरंगजेब को चुनौती दी थी। आगरा का ही गुरुद्वारा गुरुनानक देव और पीलीभीत का छठवी पादशाही गुरुद्वारा भी गुरुनानक देव के ज्ञान और उपदेशों की विरासत सँजोये हुए हैं। इतना सब कुछ देश और दुनिया को देने वाले यूपी की महिमा बहुत बड़ी है, यूपी के लोगों का सामर्थ्य बहुत बड़ा है। इस सामर्थ्य के हिसाब से ही यूपी को पहचान मिले, उसे अपनी इस विरासत को आगे बढ़ाने के लिए अवसर मिले, इस दिशा में हम काम कर रहे हैं।

साथियों,

मैं जानता हूं कि जब मैं उत्तर प्रदेश के सामर्थ्य की, उत्तर प्रदेश की देश-दुनिया में बन रही नई पहचान की प्रशंसा करता हूं, तो कुछ लोगों को बहुत परेशानी होती है। लेकिन सच कहने से अगर परेशानी होती है तो उनके लिए गोस्वामी तुलसीदास जी कह गए हैं- गोस्वामी जी ने कहा है

जहां सुमति तहं संपति नाना।

जहां कुमति तहं बिपति निदाना ।।

जहां सदबुद्धि होती है, तो वहां हमेशा सुख की स्थिति बनी रहती है, और जहां कुबुद्धि होती है, वहां हमेशा संकट का साया बना रहता है। हम तो गरीब की सेवा का संकल्प लेकर आगे बढ़ रहे हैं। कोरोना काल में देश ने दुनिया का सबसे बड़ा मुफ्त राशन का कार्यक्रम चलाया है। उत्तर प्रदेश के भी लगभग 15 करोड़ लाभार्थियों को इसका लाभ मिल रहा है। आज दुनिया का सबसे बड़ा, सबसे तेज़ टीकाकरण अभियान - सबको वैक्सीन, मुफ्त वैक्सीन- 100 करोड़ टीकों के पास तेज गति से पहुंचने की तैयारी कर रहा है। उत्तर प्रदेश में भी अभी तक 12 करोड़ से ज्यादा टीके लगाए जा चुके हैं।

भाइयों और बहनों,

डबल इंजन की सरकार यहां किसानों से खरीद के नए रिकॉर्ड स्थापित कर रही है। यूपी के किसानों के ही बैंक अकाउंट में अभी तक लगभग 80 हजार करोड़ रुपए उपज की खरीद के रुपये पहुंच गए है। 80 हजार करोड़ किसान के खाते में पहुंच गए हैं इतना ही नहीं पीएम किसान सम्मान निधि से यूपी के किसानों के बैंक खाते में 37 हज़ार करोड़ रुपए से अधिक राशि जमा की जा चुकी है। और यह छोटे किसानों की भलाई के लिए हो रहा है। छोटे- छोटे किसानों को ताकत देने के लिए हो रहा है।

भारत, इथोनॉल को लेकर आज जिस नीति पर चल रहा है, उसका भी बड़ा लाभ यूपी के किसानों को होने वाला है। गन्ने और दूसरे खाद्यान्न से पैदा होने वाला बायोफ्यूल, विदेश से आयात होने वाले कच्चे तेल का एक अहम विकल्प बन रहा है। गन्ना किसानों के लिए तो बीते सालों में योगी जी और उनकी सरकार ने सराहनीय काम किया है। आज जो प्रदेश अपने गन्ना किसानों को उपज का सबसे ज्यादा मूल्य देता है- तो उस प्रदेश का नाम है उत्तर प्रदेश। पहले जो सरकार थी, उसके कार्यकाल में, योगी जी के आने से पहले उसके कार्यकाल में पांच साल में गन्ना किसानों को एक लाख करोड़ रुपए से भी कम का भुगतान किया गया था, 1 लाख करोड़ से भी कम वहीं, योगी जी की सरकार को तो अभी पांच साल भी नहीं हुए हैं और उनकी सरकार में गन्ना किसानों को लगभग डेढ़ लाख करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है। अब बायोफ्यूल बनाने के लिए, इथेनॉल के लिए उत्तर प्रदेश में जो फैक्ट्रियां लगाई जा रही हैं, उससे गन्ना किसानों को और भी मदद मिलेगी।

भाइयों और बहनों,

आने वाला समय यूपी की आकांक्षाओं की पूर्ति का समय है। आजादी के इस अमृतकाल में, ये हम सभी के लिए जुट जाने का समय है। यहां से यूपी के लिए 5 महीनों की योजनाएं नहीं बनानी हैं, बल्कि आने वाले 25 वर्षों की बुनियाद रख करके यूपी को आगे ले जाना है। कुशीनगर के आशीर्वाद से, पूर्वांचल के आशीर्वाद से, उत्तर प्रदेश के आशीर्वाद से और आप सबके प्रयास से ये सब संभव है, उत्तर प्रदेश के आशीर्वाद से यह पक्का संभव होने वाला है। एक बार फिर आप सभी को अनेक अनेक नई सुविधाओं के लिए मैं बहुत-बहुत बधाई देता हूँ। दीवाली और छठ पूजा की अग्रिम शुभकामनाएं देता हूँ। हां, एक आग्रह मैं आपसे फिर करुंगा। लोकल के लिए वोकल होना भूलना नहीं है। लोकल खरीदने का आग्रह रखना है, दीवाली हमारे ही पास पड़ोस के भाई बहनों के पसीने से जो चीजें बनी है अगर उसी से ही करेंगे तो दीवाली में अनेक रंग भर जाएंगें, एक नया प्रकाश पैदा होगा, एक नई ऊर्जा प्रकट होगी। यानि त्योहारों में अपने लोकल प्रोडक्ट्स को हमें ज्यादा से ज्यादा खरीदना है। इसी आग्रह के साथ आप सभी का बहुत-बहुत आभार।

धन्यवाद !

भारत माता की जय !

भारत माता की जय !

भारत माता की जय !