Shri Modi addresses BJP Karyakarta Sammelan in Kolkata

Published By : Admin | April 9, 2013 | 16:44 IST

मंच पर विराजमान भारतीय जनता पार्टी के सभी वरिष्ठ नेतागण और जुस्से से भरे हुए कार्यकर्ता भाइयों और बहनों..! ये मेरा सौभाग्य है कि मुझे उस एतिहासिक भवन में आकर के आपके बीच बातचीत करने का अवसर मिला है, जिस भवन की स्मृतियाँ गुरूदेव के साथ, सुभाष बाबू के साथ जुड़ी हुई हैं और उसके कारण एक अलग प्रकार के वाइब्रेशन की अनुभूति होती है, जब इन महापुरूषों का स्मरण करते हैं। ऐसे अनेक महापुरूष जिन्होंने देश के लिए जीवन खपा दिया और बंगाल ने त्याग और तपस्या के क्षेत्र में एक बहुत ऊंची मिसाल कायम की है। रामकृष्ण परमहंस की धरती, श्यामा प्रसाद मुखर्जी की धरती, स्वामी विवेकानंद जी की धरती, अनेक तपस्वी, तेजस्वी महापुरूषों की धरती... इस धरती को मैं नमन करता हूँ..! 15 अप्रैल को आप नववर्ष मनाने जा रहे हैं। आपके नववर्ष के लिए मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएं..! और इस नववर्ष से आने वाले नववर्ष तक आपको इतनी ताकत मिले, आपको इतना जन समर्थन मिले, आपके शब्दों का इतना सामर्थ्य बढ़े, आपके परिश्रम की इतनी पराकाष्ठा हो कि शासक कोई भी क्यों ना हो, आपकी बात सुनने के लिए मजबूर हो। ये सामर्थ्य आपको प्राप्त हो, ऐसी मैं आप सबको शुभकामना देता हूँ..!

भाइयों-बहनों, आप जानते हैं कि मैं वर्षों तक संगठन के कार्य से जुड़ा था। संगठन के कार्य हेतु अनेक बार पश्चिम बंगाल का भी प्रवास किया था। कार्यकर्ताओं के साथ घंटों तक बातें करने का मुझे अवसर मिलता था। देश भर में संगठन के कार्य के लिए भ्रमण करने का सौभाग्य मिला था। अब दायित्व बदल गया और उसके कारण मैं गुजरात में अपनी शक्ति और समय लगा रहा हूँ। लेकिन जब भी मैं गुजरात के कार्यकर्ताओं से बात करता हूँ, तो मैं हमेशा उन प्रदेशों के कार्यकर्ताओं का जिक्र करता हूँ जिन प्रदेशों में भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं को इतने कष्ट झेलने पड़ते हैं। राजनैतिक प्रतिस्पर्धी दुश्मन की तरह उनके साथ व्यवहार करते हैं। लोकतंत्र के नियमों का कोई पालन ना करते हुए, विपक्ष को खत्म कैसे करना है उसी का षडयंत्र करते रहते हैं। और उसके बावजूद भी सीने पर अनेक वार झेलते हुए, भारत माता का जयकार करते हुए, सालों से कार्यकर्ताओं ने अपने जीवन खपा दिए। उनके अपने परिवारों को खपा दिया है। और उन कार्यकर्ताओं की श्रेणी में चाहे केरल हो, चाहे नार्थ ईस्ट के प्रदेश हों, चाहे कश्मीर की धरती हो, या फिर चाहे वो मेरा बंगाल हो... ये सब कार्यकर्ता देशभर के कार्यकर्ताओं की प्रेरणा होते हैं..! आपको लगता होगा कि गुजरात में तीन बार विजयी हो गए तो नरेन्द्र मोदी कुछ बन गए। मित्रों, हम गुजरात के कार्यकर्ता आज भी आपके तप और तपस्या का स्मरण करके दौड़ने की ताकत पाते हैं। आपसे हमें प्रेरणा मिलती है क्योंकि आपके सामने कई वर्षों तक दूर-दूर तक सत्ता नजर नहीं आई है। जमानत बच जाए तो भी बहुत है, ये पता होने के बाद भी एक विचार के लिए, एक आदर्श के लिए, माँ भारती के कल्याण के इस यज्ञ में कुछ आहूति देने के लिए दो-दो चार-चार पीढ़ी खप गई..! आपका ये त्याग और तपश्चर्या, मेरे बंगाल के कार्यकर्ताओं का ये पसीना कभी ना कभी तो रंग लाएगा..! मुझे विश्वास है मित्रों, एक ऐसा समय आएगा, जब चारों तरफ से निराश हुआ बंगाल का नागरिक आपको सीने से लगाएगा, आपको सिर-आंखों पर बैठाएगा। ये बंगाल की भूमि है, जो बराबर तराशती है और एक बार तराशने का मार्ग स्वीकार किया तो लंबे अर्से तक आपको अवसर भी देती है। इस भूमि की ये विशेषता है।

भाइयों-बहनों, राजनीति का रूप बदल चुका है। आज से दस साल पहले राजनीति जिस ढंग से चल रही थी, अब उस ढंग से राजनीति करना किसी के बस का रोग नहीं है। आज हिन्दुस्तान में कोई भी नेता हो, कोई भी दल हो, कोई भी विचार हो, किसी भी प्रकार के आचार हो लेकिन सबको, चाहते हुए या ना चाहते हुए, विकास की बात करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। जनता जर्नादन के सामने जा कर के विकास के मुद्दों पर विश्वास पैदा करने की कोशिश करनी पड़ती है। और भाइयों-बहनों, मैं आज भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता के रूप में एक बड़े संतोष के साथ अपने साथियों के सामने सिर झुकाकर कहना चाहता हूँ कि हिन्दूस्तान की राजनीति में ये मूलभूत परिवर्तन लाने का यश अगर किसी को जाता है, तो वो गुजरात की धरती को जाता है। विकास के मुद्दे पर राजनीति हो सकती है। सामान्य मानवी शासन क्यों बनाता है, सरकार किसके लिए होती है..? कोई अमीर बीमार हो जाए तो उसको सरकारी अस्पताल की जरूरत होती है क्या? उसके घर तो दुनिया भर के डॉक्टर आकर के कतार में खड़े हो जाते हैं। अस्पताल की जरूरत होती है गरीब आदमी को। किसी अमीर के बेटे को पढ़ना है तो सैकड़ों शिक्षक आकर के घर के दरवाजे पर खड़े हो जाएंगे। सरकार का काम होता है गरीब बच्चों को शिक्षा देना। जो रूपयों से खेलते हैं उनको कठिनाइयों का पता नहीं होता है, लेकिन जो नौजवान अपनी विधवा माँ के सपनों को पूरा करने के लिए रात-रात भर फुटपाथ की लाइट के नीचे बैठ कर के पढ़ाई करता है, उस बच्चे को अपनी माँ के सपनों को पूरा करने के लिए रोजगार चाहिए, और ये रोजगार की चिंता करना सरकार का काम है। इन मूलभूत विषयों पर देश के शासकों को आने के लिए हमने मजबूर किया है और इसके कारण भारत सरकार को हर पल अपने किये हुए कामों का हिसाब देना पड़ता है। मित्रों, क्या कारण है कि इतने कम समय में दिल्ली में बैठी हुई सरकार के प्रति इतनी नफरत पैदा हो गई..! मीडिया के मित्रों ने दिल्ली की सरकार को कोई कम मदद नहीं की है। जितना बचा सकते हैं बचाया, जितनी मदद कर सकते हैं कर रहे हैं..! इस देश के अंदर हमेशा शासन के साथ जुड़ जाने वाला एक वेस्टेड इन्ट्रेस्ट ग्रुप है। उन्होंने क्या कुछ नहीं किया इस सरकार की इज्जत बचाने के लिए। ढेर सारी कोशिशें की, लेकिन उसके बावजूद भी हिन्दुस्तान के चप्पे-चप्पे में, हिन्दुस्तान के जन-जन के मन में ये दिल्ली में बैठी हुई सरकार के प्रति नफरत क्यों हैं, इतना आक्रोश क्यों है..? मित्रों, मैं राजनीति में तो बड़ी देर से आया, लेकिन सालों तक जिंदगी सांस्कृतिक और सामाजिक कामों में लगाई थी। राजनीति में नहीं था, लेकिन अभ्यास करने का स्वभाव था, देखता था। मित्रों, मैं अनुभव के आधार पर कहता हूँ और एक राजनीति शास्त्र के विद्यार्थी के रूप में कहता हूँ कि इस दिल्ली के तख्त पर आजादी के बाद शायद ये पहली सरकार ऐसी है जिसके प्रति इतनी भयंकर घृणा और नफरत का माहौल है। मित्रों, कभी शासन के प्रति राजी-नाराजी होना एक बात है। कभी किसी एक छोटी सी घटना पर गुस्सा होना स्वाभाविक है। लेकिन नफरत, घृणा, अविश्वास की स्थिति इस देश में पहले कभी नहीं आई थी, जो आज आई है। और इसके लिए संपूर्ण रूप से कांग्रेस पार्टी जिम्मेदार है। कांग्रेस पार्टी इस हद तक अपने स्वार्थ को लेकर के आगे बढ़ रही है कि कुछ भी बुरा हो जाए, और मान लीजिए वो बुरा नॉन यू.पी.ए. स्टेट में होता है तो उछल-उछल कर के उस राज्य को बदनाम करने में पूरी शक्ति लगा देते हैं और अगर यू.पी.ए. स्टेट में कहीं होता है या सेंट्रल गवर्नमेंट में होता है तो बेशर्मी के साथ सारे पाप अपने साथी पक्षों के सिर पर डाल देते हैं। बड़ी चतुराई है उनकी, जैसे उनका तो कोई गुनाह ही नहीं है, उनकी तो कोई जिम्मेवारी ही नहीं है, उनका तो कोई दायित्व ही नहीं है..! भाइयों-बहनों, क्या हम लोगों के रहते हुए ऐसी कांग्रेस पार्टी इस देश में रहनी चाहिए..? सत्ता के गलियारों में उसको प्रवेश मिलना चाहिए..? देश का शासन करने का अवसर मिलना चाहिए..? क्या उसको धरती पर से उखाड़ फैंकना हमारा कर्तव्य नहीं है..? भाइयों-बहनों, पूरे देश के अंदर कौन सत्ता में आए कौन ना आए इसके लिए नहीं, लेकिन देश को बर्बादी से बचाने के लिए कांग्रेस मुक्त हिन्दुस्तान बनाने का हमारा सपना होना चाहिए..!

भाइयों-बहनों, क्या कारण है कि जब भी विकास की चर्चा होती है, तो गुजरात का जिक्र होता है..! क्या कारण है? जो लोग गुजरात को प्रेम करते हैं, जिनके दिल में गुजरात के प्रति नाराजगी नहीं है, वे क्या कहते हैं? देखो, गुजरात में ऐसा हुआ..! देखो, गुजरात ने क्या किया..! और जिनको गुजरात पंसद नहीं है, वे क्या कहते हैं..? वे कहतें हैं कि देखिए, इसमें हम गुजरात से भी आगे हैं..! यानि पंसद हो तो भी और पसंद ना हो तो भी, पैरामीटर गुजरात है। अच्छा किया तो कहना पड़ता है गुजरात से अच्छा किया, बुरा किया तो हिसाब लगता है कि भाई, गुजरात तक हम क्यों पहुंच नहीं पाए हैं..! ये स्थिति क्यों पैदा हुई..? मैं देश के पॉलिटिकल पंडितों को निमंत्रण देता हूँ। बंगाल की धरती तो विद्घान लोगों की धरती है, सच्चाई और ईमानदारी के साथ रहने का साहस रखने वाले लोग आज भी बंगाल की धरती पर हैं। क्या समय की मांग नहीं है, स्थितियों का तकाजा नहीं है कि हम इस देश की राजनैतिक गतिविधियों के मॉडल का अध्ययन करें? अब कोई चीज छिपी हुई नहीं है। इस देश ने करीब-करीब 50 साल तक कांग्रेस पार्टी का शासन देख लिया है। इस देश ने केरल, बंगाल और त्रिपुरा में कम्युनिस्टों का शासन देख लिया है। इस देश ने परिवारवाद वाली पार्टीओं का शासन देख लिया है। इस देश ने प्रादेशिक पक्षों के द्वारा चल रही सरकारें देख लीं है। इस देश ने भारतीय जनता पार्टी की सरकारें भी देख लीं है। एक प्रकार से पिछले साठ वर्षों में पाँच अलग-अलग प्रकार की सरकारों के मॉडल इस देश में कार्यरत रहे हैं। उन सभी सरकारों का उत्तम से उत्तम समय उठा लिया जाए, पचास-सौ पैरामीटर तय किये जाएं और किस सरकार ने अपने पाँच साल के कार्यकाल में क्या काम किया, जनता की भलाई के लिए क्या काम किया, विकास के लिए क्या काम किया, शुचिता की दृष्टि से क्या काम किया, समाज का विश्वास पाने की दिशा में क्या काम किया..! अलग-अलग मापदंड लेकर के इसको तय किया जाए और फिर लेखा-जोखा लिया जाए, तो सच्चे अर्थ में देश की भलाई के लिए काम करने वाली कौन सी सरकारें हैं, सामान्य मानवी की भलाई के लिए काम करने वाली कौन सी सरकारें हैं इसका लेखा-जोखा हो जाएगा..! और मित्रों, मैं बिल्कुल विश्वास से कहता हूँ कि जिस दिन इन पाँच प्रकार की सरकारों के मॉडल का इवेल्यूशन होगा, भारतीय जनता पार्टी उत्तम से उत्तम पर्फॉर्मर के रूप में देश के सामने आएगी..!

आप मुझे बताईए मित्रों, इतने सालों तक कांग्रेस पार्टी ने दिल्ली में राज किया। पंचायत से पार्लियामेंट तक एक ही दल का शासन था। विरोध पक्ष तो था ही नहीं। पाँच-पन्द्रह लोग आपस में मिलकर मुश्किल से जीतकर आते थे। वो दिन थे जब मीडिया इतना वाइब्रेंट नहीं था, वो दिन थे जब ज्यूडिशियल एक्टिविज्म नहीं था, वो दिन थे जब एन.जी.ओ. की भरमार नहीं थी, वो दिन थे जब कोर्ट में पी.आई.एल. करके तुफान खड़ा करने की परंपरा नहीं थी। तीन दशक पूरी तरह ऐसे गए हैं कि जिसमें कांग्रेस को कोई पूछने वाला नहीं था। वो जो करें वो आखिरी, ऐसा माहौल था। इतना अच्छा अवसर मिलने के बाद भी, इतनी सुविधा रहने के बाद भी, रूकावटों का नामोंनिशान ना होने के बादजूद भी, क्या कारण था कि कांग्रेस पार्टी इस देश को कुछ नहीं दे पाई..! आज हम लोग अगर सत्ता में हैं तो कभी सी.बी.आई. आकर के धमकती है, कोई हफ्ता ऐसा नहीं गया कि कोई पी.आई.एल. सुप्रीम कोर्ट में ना की गई हो, मीडिया के मित्रों के माध्यम से कोई हमला ना हुआ हो, एन.जी.ओं. ने कोई तूफान ना खड़ा किया हो, विपक्ष काम को रोकने के लिए पूरी ताकत से लगा हुआ हो... इतने विरोध-अवरोध के बीच चाहे डॉ. रमन सिंह जी की छत्तीसगढ़ की सरकार हो, चाहे शिवराज सिंह जी की मध्य प्रदेश की सरकार हो, चाहे हिमाचल में प्रेम कुमार धूमल जी की सरकार हो, चाहे राजस्थान में वसुंधरा राजे जी की सरकार हो, चाहे कर्नाटक में शेट्टर की सरकार हो, चाहे गोवा में मनोहर पारिकर जी की सरकार हो... जहाँ-जहाँ भारतीय जनता पार्टी को सरकारें चलाने का अवसर मिला है, एक भी सरकार पर भ्रष्टाचार के कोई गंभीर आरोप नहीं लगे हैं। उन सरकारों के कार्यकाल को देखा जाए। जनता की भलाई के उत्तम से उत्तम निर्णय किये हैं और उत्तम से उत्तम प्रकार से उन्होंने डिलीवरी देकर के दिखाया है।

कम्युनिस्टों ने बंगाल में सरकार चलाई, बताने की जरूरत नहीं है, क्या हालत कर दी है..? तबाह कर दिया इस प्रदेश को, बर्बाद कर दिया..! केरल को क्या दिया उन्होंने..? चुनाव जीतने के नए-नए तौर तरीके खोजने में ही वो पाँच साल लगे रहते हैं। पूरी शक्ति, सरकारी अधिकारियों की अपॉइंटमेंट तक, चुनाव जीतने के लिए काम कौन आएगा, उसी को लेकर के चलते रहे हैं। अपने विरोधियों को प्रताड़ित करना, उनको परेशान करना, उनको जिंदगी से हाथ धोने पड़े, सार्वजनिक जीवन छोड़ना पड़े... यहाँ तक उन पर जुल्म करना, यही काम इन लोगों ने किए हैं..! और उसके बावजूद भी जनता की आशा-आकांक्षा को पूर्ण करने वाले कोई परिणाम नजर नहीं आते हैं। मित्रों, मजदूरों की भलाई का नाम लेकर सरकार चलाने वाले ये लोग हैं, मैं उनको पूछना चाहता हूँ। अभी-अभी भारत सरकार का एक रिपोर्ट आया है। वो रिपोर्ट ये कह रहा है कि पूरे हिन्दुस्तान में कम से कम नौजवान बेरोजगार कहीं हैं, तो वो राज्य का नाम गुजरात है। और जहाँ ये यू.पी.ए. वाली सरकारें हैं, जहाँ ये कम्यूनिस्टों की सरकारें हैं वहाँ सबसे अधिक नौजवान बेरोजगार हैं। क्या दिया आपने..? और इसलिए भाइयो-बहनों, अध्ययन करके, बारिकियों की जानकारियों के साथ, देश की युवा पीढ़ी को, देश के नागरिकों को प्रशिक्षित करना हमारा दायित्व है कि भले ही हम छोटे होंगे, भले आज कगार में हमारी उपस्थिति कम होगी, लेकिन हमने जो रास्ता चुना है उस रास्ते ने कई राज्यों का भला किया है और बंगाल का भी भला हम कर सकते हैं, जनता में इस बात का विश्वास हम पैदा कर सकते हैं।

मित्रों, कांग्रेस पार्टी में एक विवाद चल रहा है कि एक ‘पावर सेंटर’ हो कि दो ‘पावर सेंटर’ हो..! मुझे समझ नहीं आता है कि इस विवाद से हम क्या समझें..! आप मुझे बताइए मित्रों, कि ये पावर सेंटर बाद की बात है, कहीं पावर नजर आ रहा है..? पावर हो तो फिर कितने पावर सेंटर हो ये बाद में चर्चा करें, अभी तो पावर ही नजर नहीं आ रहा है..! और सिर्फ बैटरी बदलने से गाड़ी चलने वाली नहीं है। मित्रों, आप यहीं बंगाल में कांग्रेस के सौ कार्यकर्ताओं को मिलिए। मैं ये पत्रकार मित्रों से एक छोटी सी प्रार्थना करके जाना चाहता हूँ। और मुझे विश्वास है कि बंगाल के पत्रकार मेरे प्रति बहुत ही प्रेम रखते हैं, वो जरूर ये मेरा काम करेंगे..! आप कांग्रेस के सौ कार्यकर्ताओं का सहज रूप में एक इंटरव्यू लीजिए। छोटा-मोटा कोई भी हो, एक सवाल पूछिए। उसको पूछिए, देश का नेता कौन है..? मैं कांग्रेस के लोगों का इन्टरव्यू करने के लिए कह रहा हूँ। मित्रों, आप देखना सौ में से एक भी व्यक्ति डॉ. मनमोहन सिंह जी का नाम नहीं बोलेगा..! जो पार्टी अपने प्रधानमंत्री को नेता मानने को तैयार ना हो, जो पार्टी अपने प्रधानमंत्री को देश का नेता मानने को तैयार ना हो, पार्टी का नेता मानने को तैयार ना हो, वो प्रधानमंत्री देश का नेतृत्व कैसे कर सकते हैं..? उनकी अपनी पार्टी उनको स्वीकार नहीं कर रही है..! आप पूछ लीजिए, मुझे बंगाल के पत्रकारों की ईमानदारी पर विश्वास है कि वो जरूर जाएंगे, पूछ कर के आएंगे और कल अखबार में छापेंगे भी..! क्या हालत करके रखी है, दोस्तों..! कोई भी ऐसा क्षेत्र है, जहाँ पर कांग्रेस के मित्र विश्वास से कह सके कि हमने ये काम किया..? एक नेता तो जहाँ भी जाते हैं तो ये कहते हैं कि हमने मोबाइल दिया..! आपमें से सबके पास मोबाइल है ना... आपको किसी ने गिफ्ट में दिया है..? सीधा बैंक में ट्रान्सफर हो करके आया था..? अपनी जेब के पैसों से लाए हो ना..? फिर भी बताइए, ये कितना बड़ा झूठ बोलते हैं कि मोबाइल फोन हमने दिया..! आप इनकी हिम्मत देखिए और ये देश देखिए कि उनको सवाल नहीं पूछ रहा है कि भाई, तुम ये कैसे कह रहे हो कि ये मोबाइल फोन हमने दिया है..? एक बार मेरे यहाँ चुनाव में उनके एक नेता आए थे और उन्होंने एक भाषण दिया कि देखिए, आपकी जेब में जो मोबाइल फोन है वो हमने दिया है..! तो उसके बाद मेरा भी एक जगह पर भाषण था। मैंने कहा, मोबाइल दिया या ना दिया ये तो भगवान जाने, लेकिन चार्जर का क्या? बिजली तो है नहीं, वो चार्ज कहाँ करवाएगा? पहले बिजली तो दो..!

मित्रों, ये कैसे देश चला रहे हैं..? उनको लगता है कि तिजोरी लुटा देने का मतलब है आर्थिक प्रगति की ओर जाना..! यहाँ बैठा हुआ कोई भी व्यक्ति, आपके पास अगर पाँच हजार रूपया है तो पाँच हजार रूपये में तीन दिन में बढ़िया -बढ़िया मिष्टी दही ले आए, रसगुल्ले ले आए, संदेश ले आए, और पाँच हजार रूपया उड़ा दिया..! आप मुझे बताइए कि आपके पाँच हजार रूपये का ये सही मैनेजमेंट है क्या..? पेट भरा, मीठा लगा, अच्छा भी लगा लेकिन ये सही मैनेजमेंट है क्या? लेकिन कोई और व्यक्ति अगर पाँच हजार में से सात हजार कैसे हो, दस हजार कैसे हो, फिर दस हजार में से दो हजार किसी अच्छे काम में खर्च करें, फिर पाँच हजार के आठ हजार हो, फिर उसमें से तीन हजार खर्च करें... इसको आयोजन कहते हैं की नहीं कहते? मित्रों, दिल्ली की सरकार उड़ाने में लगी हुई है और रूपये आपके जा रहे हैं..! ये लोग जनता जर्नादन के पैसे को उड़ा रहे हैं और जनता कब तक चुप रहेगी..? अपने राजनैतिक स्वार्थ की पूर्ति के लिए हिन्दुस्तान की जनता ने दिन-रात मेहनत करके जो टैक्स चुकाए हैं, उन टैक्स के पैसों को राष्ट्र के विकास में उपयोग करने के बजाए अपने वोट बैंक को मजबूत करने के लिए खर्च किया जा रहा है, और ये देश के साथ सबसे बड़ा धोखा है। कभी-कभी क्या कहते हैं कि हमने आर.टी.आई. का कानून दिया। अभी चार दिन पहले मैंने पढ़ा कि भारत के प्रधानमंत्री के कार्यालय में किसी नागरिक ने चिट्ठी लिख कर कुछ जानकारी माँगी और देश के प्रधानमंत्री के कार्यालय से उस जानकारी देने से मना कर दिया गया..! अगर आप मना करते हो तो आर.टी.आई. के नाम पर गीत गाने का अधिकार आपको किसने दिया..? आप जानकारी तो देते नहीं हैं और अगर आप जानकारी देते नहीं हो तो जानकारी देने के कानून के नाम पर आप रोजी-रोटी कमाने निकले हो..? भाइयों-बहनों, आज देश की हालत ऐसी है, मैं कल दिल्ली में एक सेमिनार में था, ‘मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस’। तो मैंने काफी देर तक अपना भाषण सुनाया और बोलते-बोलते मुझे विचार आया कि दिल्ली में ये सब बोलने से क्या मतलब है..? मैंने कहा भाई, विषय तो है ‘मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस’, लेकिन आज तो देश में ‘नो गवर्नमेंट, नो गवर्नेंस’, तो उसका क्या करें..? सरकार की अनुभूति ही नहीं हो रही है, मित्रों। ना कोई अच्छी खबर आती है, ना कोई सुनवाई की व्यवस्था है। मैं कभी-कभी कांग्रेस के मित्रों को पूछता हूँ कि हटाओ यार, बाकी सब छोड़ो, पिछले एक साल में देश के लिए दस अच्छे काम किये हों तो जरा बता दो मुझे..! अच्छे से कांग्रेसी मित्र बता नहीं पाते हैं..! ज्यादा से ज्यादा तिजोरी हमने कैसे लुटाई इसकी गिनती करते हैं..! भाइयों-बहनों, अगर ये ही स्थिति रही तो क्या होगा..!

मित्रों, आप देखिए, कॉमनवैल्थ गेम्स का कौभांड हुआ। दुनिया की सबसे ताकतवर सरकार कोई थी तो दिल्ली में थी। सबसे बड़ी सरकार थी तो दिल्ली में थी। ऊपर-नीचे जितनी सरकारों के लेयर हैं, सारी की सारी उनकी सरकारें थी। सब कुछ उनका होने के बाद भी सारी दुनिया में हमारी नाक कट गई और कॉमनवेल्थ गेम्स के अंदर अरबों-खरबों रूपये का भ्रष्टाचार हो गया। और उसके बावजूद भी उनका तो कोई दायित्व ही नहीं..! जैसे रेनकोट पहन कर के बाथरूम में नहा रहे हो..! मैं हैरान हूँ, मित्रों..! और देश से पहली दफा मैं पूछ रहा हूँ कि इनको कैसे माफ किया जा सकता है..! कैसे इनके पापों को स्वीकार किया जा सकता है..!

मित्रों, इस देश के अंदर इन दिनों एक चर्चा चल रही है कि ग्रोथ रेट डाउन हो गया है, ग्रोथ रेट डाउन हो गया है..! क्यों हो गया, भाई..? आपको यदि विकास दर चाहिए तो आपको आर्थिक गतिविधि चाहिए। कृषि में काम होना चाहिएम, मैन्यूफैक्चरिंग में काम होना चाहिए, सर्विस सेक्टर में काम होना चाहिए..! लेकिन कारखाने कैसे चलेंगे यहाँ..? अगर बिजली नहीं है तो कारखाने कैसे चलेंगे? कारखाने नहीं चलेंगे तो नौजवानों को रोजगार कहाँ से मिलेगा..? कारखाने नहीं चलेंगे तो इकोनॉमी कैसे मोबालाइज होगी..? मोमेंटम कहाँ से आएगा..? और कारखाने चल क्यों नहीं रहे हैं, तो कहेंगे कि बिजली नहीं है। बिजली क्यों नहीं है..? क्या बिजली के कारखाने नहीं है..? बिजली के कारखाने हैं, अरबों-खरबों रूपए लग चुके हैं। कारखाने खड़े पड़े हैं, लेकिन बिजली पैदा नहीं करते। बिजली पैदा क्यों नहीं करते..? क्योंकि कोयल नहीं है..! कोयला क्यों नहीं है, क्योंकि कोयला खदान में है। कोयला खदान में क्यों है..? क्योंकि अभी हमने पॉलिसी तैयार नहीं की है..! कितने साल हो गए? तीन साल हो गए..! कब करोगे, 2014 तक तो रहने वाले नहीं हो..! आप मुझे ये बताईए मित्रों, ये सारी जिम्मेवारियाँ उनकी है कि नहीं..? आज देश में एक तरफ अंधेरा है, लोगों को बिजली नहीं मिल रही, बिजली नहीं मिलने के कारण कारखाने बंद हो रहे हैं और दूसरी तरफ 30,000 मेगावॉट बिजली पैदा करने की क्षमता वाले कारखाने फ्यूल के अभाव में बंद पड़े हुए हैं। कौन जिम्मेदार..? जितना पैसा लगना था लग गए, कारखाने खड़े हो गए... कोयला नहीं है। ये कोयला नहीं होने के कारण ये हालत हो गई है। और मित्रों, हिन्दुस्तान की सरकार की हालत देखिए..! हमारे अड़ौस-पड़ौस के छोटे-छोटे देश जहाँ पर कोयले की खदान है, जब हिन्दुस्तान में कोयला आना बंद हो गया और कोयले की कोई परमिशन नहीं मिल रही है, तो व्यापारियों ने तय किया कि भाई, चलो इंडोनेशिया से या ऑस्ट्रेलिया से, अलग छोटे-मोटे देशों से कोयला लाएंगे, अफ्रिकन कंट्री से कोयला लाएंगे..! भारत सरकार की इस पॉलिसी पैरालिसिस के कारण उन देशों को पता चल गया कि हिन्दुस्तान में बिजली के कारखाने बंद पड़े हैं, उन्हें कोयले की जरूरत है और हिन्दुस्तान की सरकार कोयला दे नहीं पाएगी, तो रातोंरात उन्होंने दाम बढ़ा दिए। और ये दिल्ली में बैठी हुई सरकार छोटे-छोटे देशों पर भी दबाव नहीं पैदा कर सकती कि आपने जो दाम पर सौदा किया था उस दाम से आपको कोयला देना पड़ेगा और हिन्दुस्तान को कोयला देने से आप मुकर नहीं सकते, इतना कहने की ताकत ये दिल्ली की सरकार में नहीं है। हर छोटा मोटा देश दबा देता है, मैं हैरान हूँ..! और ऐसा होता क्यों है..? क्या उनके जो साथी दल है उनके कारण हो रहा है..? कांग्रेस जिम्मेवारी लेने को तैयार नहीं है। ये इसलिए हो रहा है, दुनिया आपको इसलिए सुनती नहीं है क्योंकि खुद कांग्रेस का विदेश मंत्री यू.एन.ओ. के अंदर जब भाषण करने के लिए खड़ा होता है और किसी दूसरे देश का कागज पढ़ने लग जाता है, तो पूरे विश्व को लगता है कि यार, सच में ये तो गए बीते लोग हैं, ये सब गॉन केस है, फ़ाइल कर दो..! मित्रों, विश्व के नक्शे पर हिन्दुस्तान की ऐसी बेइज्जती कभी नहीं हुई, जितनी बेइज्जती इस सरकार के कारण हुई है..! सारी दुनिया में अपना नाम खराब होता चला जा रहा है। विश्व में कोई हम पर विश्वास नहीं करता। आपका अच्छा व्यापार हो, अच्छी प्रोडक्ट हो तो भी विदेशों के बायर आपके साथ व्यापार करने से डर रहे हैं। आप स्वतंत्र होने के बावजूद डर रहे हैं, क्यों..? क्योंकि उनको भरोसा नहीं है कि भारत सरकार की नीति कब बदल जाएगी और बायर ने जो सौदा किया है वो फुलफिल नहीं होगा, तो हमारे पैसे डूब जाएंगे..! भाइयो-बहनों, ये स्थिति है..!

मित्रों, बिच में हमने देखा, गरीबों को अन्न नहीं मिल रहा है। राशन कार्ड है, गेहूँ नहीं मिल रहे हैं, चावल नहीं मिल रहे हैं, केरोसीन नहीं मिल रहा है और दूसरी तरफ अखबारों में और टी.वी. पर खबरें आ रही हैं कि बोरियाँ की बोरियाँ पानी में भीग रही हैं, सड़ रही हैं..! देश के किसान ने परिश्रम से पैदा किया हुआ अन्न सड़ रहा है। किसी ने पी.आई.एल. कर दी, तो सुप्रीम कोर्ट ने डंडा चलाया कि सारे अनाज के जो भंडार भरे पड़े हैं, अगर उसको संभाल नहीं सकते हो तो गरीबों को बाँट दो। ये दिल्ली की सरकार ने गरीबों को नहीं बाँटा। दिन-रात कहते हैं कि हम सुप्रीम कोर्ट जो कहती है वो करते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पचासों बार कहा लेकिन उन्होंने नहीं किया। और किया तो क्या किया..? भाइयों-बहनों, सुप्रीम कोर्ट संवेदना के साथ ये कहती है कि ये अन्न गरीबों को बाँटो, मगर दिल्ली में बैठी ये सरकार कहती है कि हम गरीबों में नहीं बाँटेंगे..! और किया तो क्या किया..? शराब बनाने वाले जो ठेकेदार थे, उन शराब के ठेकेदारों को 65 पैसे के दाम से ये अन्न दे दिया गया..! आप कहो, क्या इन पर भरोसा कर सकते हैं..? और इसलिए भाइयो-बहनों, समय का तकाजा है, समय की माँग है कि हम सभी भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता देश के सामान्य मानवी के आशा-आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए, आजादी के लिए शहीद होने वाले महापुरूषों ने जो सपने संजोए थे उन सपनों को पूरा करने के लिए, स्वामी विवेकानंद जी की 150 वीं जयंती जब देश मना रहा है तब विवेकानंद जी के उन सपनों को पूरा करने के लिए, भारतीय जनता पार्टी के एक-एक कार्यकर्ता को इस देश में से कांग्रेस पार्टी का उखाड़ फैंकने का संकल्प करके आगे बढ़ना चाहिए..! इस देश को तोड़ने वाली, इस देश को कठिनाइयों में डालने वाली सारी शक्तियों को परास्त करने का संकल्प करना होगा। और मित्रों, मैं विश्वास से कहता हूँ, वक्त बहुत तेजी से बदल रहा है। कांग्रेस पार्टी के मित्रों को पता तक नहीं है, हमेशा कांग्रेस पार्टी का झंडा ले कर घूमने वालों को पता नहीं है, वेस्टेड इंटरेस्ट ग्रुप को पता नहीं है कि कितनी तेजी से कांग्रेस पार्टी का डिटीरीओरेशन हो रहा है..! राजी-नाराजी के तराजू से हिन्दुस्तान की राजनीति का विश्लेषण करने का वक्त चला गया है। अब तक हिन्दुस्तान में जो पॉलिटिकल एनालिसिस हुए हैं वो सरकार या पक्ष या नेता के सामने राजी-नाराजी का माहौल कैसा है उसके आधार पर हुए हैं, पहली बार हिन्दुस्तान की राजनीति में नफरत और घृणा के मापदंड पर ये कांग्रेस पार्टी को तोला जाएगा..! ऐसी नफरत, ऐसी घृणा, ऐसा गुस्सा आज देश के कोने-कोने में है। कोई समस्या ऐसी नहीं है जिसको सुलझाने कि दिशा में उन्होंने कोई प्रमाणिक प्रयास किया हो, दो कदम भी चले हो..!

और इसलिए भाइयो-बहनों, माँ भारती की सेवा करने में लगे हुए भारतीय जनता पार्टी के लक्षावधी कार्यकर्ता अपने सामर्थ्य से, अपनी शक्ति से आने वाली हर चुनौती का सामना करते हुए, विजय का विश्वास लेकर के, गाँव-गाँव, गली-गली कमल खिलाने का सपना ले कर के, जिस धरती पर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्म हुआ, जिन्होंने सपने संजोए हैं ऐसे श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपनों को पूरा करने के लिए आओ, हम अपनी पूरी ताकत से काम करें, हम कोई कमी ना रखें..! और जो लोग अपने आपको बड़े शहंशाह मानते हैं, उन सभी से मेरा आग्रह पूर्वक निवेदन है, ये मान कर चलिए कि ‘यावत चंद्र दिवाकरो’ आपका राज चलने वाला नहीं है..! जो बंगाल में मेरे भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं को परेशान कर रहे हैं उस सरकार के मुलाजिमों से भी मैं कहना चाहता हूँ कि लोकतंत्र में हर एक नागरिक का अधिकार होता है, उसको दबाने की कोशिश करने से कभी कोई सफलता किसीको दिला नहीं सकते..! भारतीय जनता पार्टी, बंगाल का कार्यकर्ता खूंखार से खूंखार ताकतों के खिलाफ लड़ कर के आज भी आगे बढ़ सकता है। रुकना, थकना, झुकना ये हमारा चरित्र नहीं है, ये हमारे संस्कार नहीं हैं। हम भाजपा के कार्यकर्ता मौत को मुट्ठी में लेकर निकले हुए लोग हैं। माँ भारती के कल्याण के लिए निकले हुए लोग हैं। हमें कोई चुनौती ना दें..! और अगर ये कोशिशें होती रहेंगी तो भारतीय जनता पार्टी और अधिक ताकत से आगे बढ़ेगी..!

आज कल मैं देख रहा हूँ कि मेरा कहीं पर भी कोई भाषण होता है, तो यहाँ मेरा भाषण पूरा हो जाए उससे पहले प्रधानमंत्री कार्यालय से ट्वीट करके उसके जवाब दिए जाते हैं..! ये प्रधानमंत्री कार्यालय से होता है और तुरंत, यानि अभी तो मेरा भाषण पूरा हुआ नहीं और मैं मंच से वहाँ बैठने जाऊँगा तब तक तो दो-तीन चीजें छोड़ देते हैं वहाँ..! और सरासर झूठ, सरासर झूठ... कौन पूछने वाला है? ये ही चल रहा है..! मेरे कांग्रेस के मित्रों, देश की जनता की समझदारी पर शक मत किया करो। ये देश की जनता को पूरी समझ है कि सच क्या है..? दूध का दूध और पानी का पानी कैसे होता है, ये देश की जनता भली-भांति जानती है। कांग्रेस की कोशिशों से कुछ निकलने वाला नहीं है और सत्य सीना तान कर के प्रकट हो कर के रहेगा इसी विश्वास के साथ हम आगे बढ़ें..! मित्रों, आपने मेरा सम्मान किया, प्यार दिया, इसके लिए मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूँ..!

धन्यवाद..!

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June 05, 2026
The launch of projects across healthcare, aviation, tourism and infrastructure marks a new development push for Daman that will transform lives across the UT: PM
The data released today reflects the strength of India's economy, with growth of 7.7% in FY 2025–26 and 7.8% in the quarter ending March 31: PM
Even amid severe global challenges, the collective efforts of 1.4 billion Indians have ensured that India is not only sustaining itself but also staying ahead of the curve: PM
The National Family Health Survey clearly reflects the government's focus on healthcare. While most deliveries in India earlier took place outside hospitals, today over 90% of all deliveries occur in hospitals: PM
Thanks to Mission Indradhanush, child immunization coverage in India has risen from 60% before 2014 to nearly 90% today: PM

ಭಾರತ್ ಮಾತಾ ಕಿ ಜೈ!

ಭಾರತ್ ಮಾತಾ ಕಿ ಜೈ!

ದಾದ್ರಾ ಮತ್ತು ನಗರ ಹವೇಲಿ, ದಮನ್ ಮತ್ತು ಡಿಯು ಆಡಳಿತಾಧಿಕಾರಿ ಪ್ರಫುಲ್ ಭಾಯಿ ಪಟೇಲ್, ಸಂಸತ್ತಿನಲ್ಲಿ ನನ್ನ ಸಹೋದ್ಯೋಗಿ ಕಲಾಬೆನ್ ದೇಲ್ಕರ್, ದಮನ್ ಪುರಸಭೆಯ ಅಧ್ಯಕ್ಷೆ ದೀಪಿಕಾ ತಂಡೇಲ್ ಜೀ, ದಮನ್ ಜಿಲ್ಲಾ ಪಂಚಾಯತ್ ಅಧ್ಯಕ್ಷರಾದ ಧರ್ಮ ಬಾಬು ಪಟೇಲ್, ಸಿಲ್ವಾಸ್ಸಾ ಪುರಸಭೆಯ ಅಧ್ಯಕ್ಷ ಸೋಮನಾಥ್ ದೇವ್ರೆ ಜೀ, ದಾದ್ರಾ ನಗರ ಹವೇಲಿ ಜಿಲ್ಲಾ ಪಂಚಾಯತ್ ಅಧ್ಯಕ್ಷೆ ನಿಶಾ ಭಾವ್ಸರ್ ಜೀ, ದಿಯು ಪುರಸಭೆಯ ಅಧ್ಯಕ್ಷ ಹರೀಶ್ ಕಪಾಡಿಯಾ ಜೀ, ದಿಯು ಜಿಲ್ಲಾ ಪಂಚಾಯತ್ ಅಧ್ಯಕ್ಷೆ ಕೋಟಿಯಾ ರಂಜಿತಾಬೆನ್ ಮತ್ತು ಇಲ್ಲಿ ಇಷ್ಟೊಂದು ಬೃಹತ್ ಸಂಖ್ಯೆಯಲ್ಲಿ ನೆರೆದಿರುವ ನನ್ನ ಪ್ರೀತಿಯ ಸಹೋದರರೇ ಮತ್ತು  ಸಹೋದರಿಯರೇ,

ನೀವು ಇಲ್ಲಿ ನೆರೆದಿರುವಂತೆಯೇ, ಲಕ್ಷದ್ವೀಪದಲ್ಲಿಯೂ ಸಹ ಹೆಚ್ಚಿನ ಸಂಖ್ಯೆಯ ಜನರು ವೀಡಿಯೊ ಮೂಲಕ ನಮ್ಮೊಂದಿಗೆ ಸಂಪರ್ಕ ಹೊಂದಿದ್ದಾರೆ, ಏಕೆಂದರೆ ಇಂದು ಲಕ್ಷದ್ವೀಪದಲ್ಲಿ ಅಭಿವೃದ್ಧಿಯ ಹೊಸ ಆರಂಭ, ಲಕ್ಷದ್ವೀಪದ ಜನರ ಜೀವನದಲ್ಲಿ ಕ್ರಾಂತಿಕಾರಿ ಬದಲಾವಣೆಯನ್ನು ತರುವ ಹೊಸ ಯೋಜನೆ, ಉದ್ಘಾಟನೆಗೊಂಡಿದೆ ಮತ್ತು ಕೆಲವು ಯೋಜನೆಗಳಿಗೆ ಅಡಿಪಾಯ ಹಾಕಲಾಗಿದೆ.

 

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ಕೆಲವು ವರ್ಷಗಳ ಹಿಂದೆ, ನಾನು ನಿಮ್ಮ ಬಳಿಗೆ ಬಂದಾಗ, ನಮ್ಮ ದಮನ್ ವೇಗವಾಗಿ ಮಿನಿ ಇಂಡಿಯಾ ಆಗುತ್ತಿದೆ ಎಂದು ಹೇಳಿದ್ದೆ, ಮತ್ತು ಇಂದು ನಾನು ನೋಡುತ್ತಿದ್ದೇನೆ, ಎಡಭಾಗದಲ್ಲಿ ಇಡೀ ಬಂಗಾಳ ಮತ್ತು ಬಲಭಾಗದಲ್ಲಿ ಇಡೀ ಅಸ್ಸಾಂ ಇದೆ. ದಮನ್ ಮಿನಿ ಭಾರತದ ಜೀವಂತ ಉದಾಹರಣೆಯಾಗಿದೆ. ಇಲ್ಲಿ ವಾಸಿಸುವ ವಿವಿಧ ಪ್ರದೇಶಗಳ ಜನರು, ನಿಮ್ಮಲ್ಲಿರುವ ವೈವಿಧ್ಯತೆಯು ಇಡೀ ಭಾರತದ ಸುಂದರ ನೋಟವನ್ನು ನೀಡುತ್ತದೆ. ನೀವೆಲ್ಲರೂ ನಮ್ಮನ್ನು ಆಶೀರ್ವದಿಸಲು ಇಷ್ಟು ದೊಡ್ಡ ಸಂಖ್ಯೆಯಲ್ಲಿ ಬಂದಿದ್ದೀರಿ, ಇದಕ್ಕಾಗಿ ನಾನು ನಿಮ್ಮೆಲ್ಲರಿಗೂ ತುಂಬಾ ಆಭಾರಿ.

ಸಹೋದರರೇ ಮತ್ತು  ಸಹೋದರಿಯರೇ,

ದಮನ್ ಮತ್ತು ದಿಯುಗೆ ಹಲವು ಬಾರಿ ಬರುವ ಅವಕಾಶ ನನಗೆ ಸಿಕ್ಕಿದೆ. ನಾನು ದಾದ್ರಾ ಮತ್ತು ನಗರ ಹವೇಲಿಗೆ ಕೂಡಾ ಭೇಟಿ ನೀಡುತ್ತಲೇ ಇರುತ್ತೇನೆ, ಮತ್ತು ನಾನು ಮುಖ್ಯಮಂತ್ರಿ ಅಥವಾ ಪ್ರಧಾನಿಯಾಗಿಲ್ಲದಿದ್ದಾಗ, ನಾನು ಇಲ್ಲಿಗೆ ಹಲವು ಬಾರಿ ಬರುತ್ತಿದ್ದೆ. ಆದರೆ ಈಗ ನಾನು ಇಲ್ಲಿಗೆ ಬಂದು ಉತ್ತಮ ಆಡಳಿತ, ಆಡಳಿತ ಮಾದರಿಯನ್ನು ನೋಡಿದಾಗ, ಅದು ತುಂಬಾ ಚೆನ್ನಾಗಿದೆ ಎಂಬ ಭಾವನೆ ತರುತ್ತದೆ. ಕಳೆದ ಬಾರಿಗೆ ಹೋಲಿಸಿದಾಗ  ಈ ಬಾರಿ ಈ ಪ್ರದೇಶವು ಅಭಿವೃದ್ಧಿಯ ಹಾದಿಯಲ್ಲಿ ಮೈಲುಗಳಷ್ಟು ಮುಂದೆ ಸಾಗಿದೆ ಎಂದು ನನಗೆ ಅನಿಸುತ್ತದೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ದಾದ್ರಾ ಮತ್ತು ನಗರ ಹವೇಲಿ, ದಮನ್ ಮತ್ತು ಡಿಯು ದಶಕಗಳಿಂದ ಅಭಿವೃದ್ಧಿಯ ಕನಸು ಕಂಡಿದ್ದವು. ಹಿಂದೆ ಕನಸು ಕಂಡಿದ್ದ ತಲೆಮಾರುಗಳ ಜನರು ನಿಧನರಾದರು. ಆದರೆ ಇಂದು ಇಂದಿನ ಪೀಳಿಗೆ ತಮ್ಮ ಹೆತ್ತವರು ಮತ್ತು ಅಜ್ಜಿಯರು ಕಂಡ ಕನಸುಗಳು ಈಗ ತಮ್ಮ ಕಣ್ಣ ಮುಂದೆಯೇ ನನಸಾಗುತ್ತಿರುವುದನ್ನು ನೋಡುತ್ತಿದ್ದಾರೆ. ಇಂದು, ಸಂಪರ್ಕ, ಆರೋಗ್ಯ, ಶಿಕ್ಷಣ, ಪ್ರವಾಸೋದ್ಯಮ ಮತ್ತು ನಗರ ಮೂಲಸೌಕರ್ಯಕ್ಕೆ ಸಂಬಂಧಿಸಿದ ಅನೇಕ ಯೋಜನೆಗಳನ್ನು ಇಲ್ಲಿ ಉದ್ಘಾಟಿಸಲಾಗಿದೆ ಮತ್ತು ಅಡಿಪಾಯ ಹಾಕಲಾಗಿದೆ. ಈ ಅಭಿವೃದ್ಧಿ ಕಾರ್ಯಗಳು ದಮನ್ ಮತ್ತು ಇಡೀ ಕೇಂದ್ರಾಡಳಿತ ಪ್ರದೇಶದ ಜನರಿಗೆ ಜೀವನವನ್ನು ಸುಲಭಗೊಳಿಸುತ್ತದೆ. ಅವು ಯುವಜನರಿಗೆ ಹೊಸ ಅವಕಾಶಗಳನ್ನು ಸೃಷ್ಟಿಸುತ್ತವೆ. ಈ ಕೆಲಸಗಳ ಹಿಂದೆ, ಪ್ರಫುಲ್ ಭಾಯಿ ಪಟೇಲ್ ಅವರ ಮತ್ತು ಅವರ ತಂಡದ ಕಠಿಣ ಪರಿಶ್ರಮದ ದೃಷ್ಟಿಕೋನವು ಸ್ಪಷ್ಟವಾಗಿ ಗೋಚರಿಸುತ್ತದೆ. ಇದಕ್ಕಾಗಿ, ನಾನು ಪ್ರಫುಲ್ ಭಾಯಿ ಮತ್ತು ಅವರ ಇಡೀ ತಂಡವನ್ನು ಸಹ ಶ್ಲಾಘಿಸುತ್ತೇನೆ. ಲಕ್ಷದ್ವೀಪ ಮತ್ತು ದಾದ್ರಾ-ನಗರ ಹವೇಲಿಯ ಜನರಿಗೆ ನಾನು ಅನೇಕ ಅಭಿನಂದನೆಗಳು ಮತ್ತು ಶುಭಾಶಯಗಳನ್ನು ಸಲ್ಲಿಸುತ್ತೇನೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ಇಂದು ನಾನು ನಿಮ್ಮ ನಡುವೆ ಬಂದಿರುವಂತೆಯೇ, ಒಂದು ಒಳ್ಳೆಯ ಸುದ್ದಿ ಬಂದಿದೆ. ನಾನು ಇಂದು ಬೆಳಿಗ್ಗೆ ದೆಹಲಿಯಿಂದ ಹೊರಟಿದ್ದೆ, ಆದರೆ ಇದೀಗ ಬಂದಿರುವ ಅಂಕಿಅಂಶಗಳು, ಬಂದಿರುವ ಸುದ್ದಿಗಳು ನಿಜಕ್ಕೂ ಸಂತೋಷಕರವಾಗಿವೆ ಮತ್ತು ನಾನು ಈ ಸಂತೋಷವನ್ನು ನಿಮ್ಮೊಂದಿಗೆ ಹಂಚಿಕೊಳ್ಳಲು ಬಯಸುತ್ತೇನೆ. ಇಂದು ಬಂದಿರುವ ಅಂಕಿಅಂಶಗಳು ಭಾರತದ ಆರ್ಥಿಕತೆಯ ಅಡಿಪಾಯ ಎಷ್ಟು ಪ್ರಬಲವಾಗಿದೆ ಎಂಬುದನ್ನು ಸ್ಪಷ್ಟವಾಗಿ ತೋರಿಸುತ್ತವೆ. 2025-26ನೇ ವರ್ಷದಲ್ಲಿ, ಅಂದರೆ, ಇದೀಗ ಕೊನೆಗೊಂಡಿರುವ ಹಣಕಾಸು ವರ್ಷದಲ್ಲಿ, ಭಾರತವು ಶೇಕಡಾ 7.7, 7.7 ರ ಬೆಳವಣಿಗೆಯ ದರವನ್ನು ಸಾಧಿಸಿದೆ ಮತ್ತು ಮಾರ್ಚ್ 31 ರಂದು ಕೊನೆಗೊಂಡ ಕೊನೆಯ ತ್ರೈಮಾಸಿಕವು ಭಾರತದ ಬೆಳವಣಿಗೆಯನ್ನು ಶೇಕಡಾ 7.8, 7.8 ರಷ್ಟು ಎಂದು ದಾಖಲಿಸಿದೆ. ಮತ್ತು ಇದು ವಿಶ್ವದಲ್ಲೇ ವೇಗವಾಗಿ ಬೆಳೆಯುತ್ತಿರುವ ದೊಡ್ಡ ಆರ್ಥಿಕತೆಯಾಗಿದೆ. ಪ್ರತಿಯೊಬ್ಬ ಭಾರತೀಯನೂ ಹೆಮ್ಮೆಪಡಬೇಕು, ಇದು ಅದರ ವೇಗ. ಇಂದು ದೇಶವು ಸುಧಾರಣಾ ಎಕ್ಸ್‌ಪ್ರೆಸ್‌ನಲ್ಲಿ ಓಡುತ್ತಿದೆ, ಇಂದು ದೇಶವು ಅಂತಹ ಬೃಹತ್ ಮೂಲಸೌಕರ್ಯ ಅಭಿವೃದ್ಧಿಯನ್ನು ವೀಕ್ಷಿಸುತ್ತಿದೆ, ಬಡವರ ಕಲ್ಯಾಣಕ್ಕಾಗಿ ಅಂತಹ ದೊಡ್ಡ ಪ್ರಮಾಣದ ಕೆಲಸವನ್ನು ಮಾಡಲಾಗುತ್ತಿದೆ ಮತ್ತು ಈ ಎಲ್ಲಾ ಪ್ರಯತ್ನಗಳ ಫಲಿತಾಂಶವೆಂದರೆ ಇಂದು ದೇಶವು ವೇಗವಾಗಿ ಬೆಳೆಯುತ್ತಿರುವ ದೊಡ್ಡ ಆರ್ಥಿಕತೆಯಾಗಿ ಮುಂದುವರಿಯುತ್ತಿದೆ. ಮತ್ತು ನಮಗೆಲ್ಲರಿಗೂ ತಿಳಿದಿದೆ, ಜಗತ್ತು ಬಿಕ್ಕಟ್ಟುಗಳಲ್ಲಿ ಮುಳುಗಿದೆ, ಇಡೀ ಪ್ರಪಂಚದ ಆರ್ಥಿಕತೆಗಳು ಪ್ರಶ್ನಾರ್ಥಕ ಚಿಹ್ನೆಗಳ ಅಡಿಯಲ್ಲಿ ಹೂತುಹೋಗಿವೆ, ಆದರೆ ಜಾಗತಿಕ ಬಿಕ್ಕಟ್ಟಿನ ಈ ಕೆಟ್ಟ ಸಮಯದಲ್ಲಿಯೂ ಸಹ, 1.4 ಶತಕೋಟಿ ದೇಶವಾಸಿಗಳ ಸಾಮೂಹಿಕ ಪ್ರಯತ್ನಗಳಿಂದ, ಭಾರತವು ತನ್ನನ್ನು ತಾನು ಉಳಿಸಿಕೊಳ್ಳಲು ಮಾತ್ರವಲ್ಲದೆ ಮುಂದೆ ಬರುವಲ್ಲಿಯೂ ಯಶಸ್ವಿಯಾಗಿದೆ. ಆರ್ಥಿಕ ಕ್ಷೇತ್ರದಲ್ಲಿ ಈ ಹೊಸ ಎತ್ತರವನ್ನು ಸಾಧಿಸಿದ್ದಕ್ಕಾಗಿ ನಾನು ದೇಶವಾಸಿಗಳಿಗೆ ಅನೇಕ ಅಭಿನಂದನೆಗಳನ್ನು ಸಲ್ಲಿಸುತ್ತೇನೆ ಮತ್ತು ಪ್ರಪಂಚದಾದ್ಯಂತ ಚಾಲ್ತಿಯಲ್ಲಿರುವ ಈ ಬಿಕ್ಕಟ್ಟುಗಳನ್ನು ಎದುರಿಸುವಾಗ, ದೇಶವು ದೃಢ ಸಂಕಲ್ಪದೊಂದಿಗೆ, ಸುಧಾರಣೆ, ಕಾರ್ಯಕ್ಷಮತೆ ಮತ್ತು ಪರಿವರ್ತನೆಯ ಹಾದಿಯಲ್ಲಿ ವೇಗವಾಗಿ ಮುಂದುವರಿಯುತ್ತದೆ ಎಂದು ನಾನು ಮತ್ತೊಮ್ಮೆ ರಾಷ್ಟ್ರಕ್ಕೆ ಭರವಸೆ ನೀಡುತ್ತೇನೆ. ಇದು ದೇಶವಾಸಿಗಳಿಗೆ ನನ್ನ ಭರವಸೆ.

 

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ಇಂದು ಅಭಿವೃದ್ಧಿಯು ಬಹಳ ಮುಖ್ಯ ಮತ್ತು  ನಮ್ಮ ಅಭಿವೃದ್ಧಿ ಮಾದರಿ ಸುಸ್ಥಿರವಾಗಿರುವುದನ್ನು ಖಚಿತಪಡಿಸಿಕೊಳ್ಳುವುದೂ ಅಷ್ಟೇ ಮುಖ್ಯವಾಗಿದೆ. ಇಂದು, ವಿಶ್ವ ಪರಿಸರ ದಿನದಂದು, ನಮ್ಮ ಕೇಂದ್ರಾಡಳಿತ ಪ್ರದೇಶವು ಈ ನಿರ್ಣಯವನ್ನು ಸಾಕಾರಗೊಳಿಸುತ್ತಿದೆ. ಇಂದು, ಒಂದೆಡೆ, ಸಾವಿರಾರು ಕೋಟಿ ಮೌಲ್ಯದ ಅಭಿವೃದ್ಧಿ ಯೋಜನೆಗಳನ್ನು ಇಲ್ಲಿ ಉದ್ಘಾಟಿಸಲಾಗಿದೆ ಮತ್ತು ಶಂಕುಸ್ಥಾಪನೆ ಮಾಡಲಾಗಿದೆ. ಅದೇ ಸಮಯದಲ್ಲಿ, ತಾಯಿಯ ಹೆಸರಿನಲ್ಲಿ ಸುಮಾರು ಒಂದು ಲಕ್ಷ ಒಂದು ಗಿಡಗಳು, ಒಂದು ಲಕ್ಷ ಸಸಿಗಳನ್ನು ಸಹ ಇಲ್ಲಿ ನೆಡಲಾಗುತ್ತಿದೆ. ಸರಕಾರಿ ಕಟ್ಟಡಗಳಲ್ಲಿ ಸೌರಶಕ್ತಿಯ 100 ಪ್ರತಿಶತ ಬಳಕೆಯ ಸಾಧನೆಯನ್ನು ಸಾಧಿಸಿರುವ ಕೇಂದ್ರಾಡಳಿತ ಪ್ರದೇಶ ಇದಾಗಿದೆ ಎಂದು ನನಗೆ ಹೆಮ್ಮೆ ಇದೆ. ಇಂದು, ದಿಯುನಲ್ಲಿ, ಸಂಪೂರ್ಣ ಹಗಲಿನ ವಿದ್ಯುತ್ ಬೇಡಿಕೆಯನ್ನು ಸೌರಶಕ್ತಿಯಿಂದಲೇ ಪೂರೈಸಲಾಗುತ್ತಿದೆ ಮತ್ತು ನಾವು ಇದನ್ನು ಮತ್ತಷ್ಟು ಮುಂದುವರಿಸಬೇಕಾಗಿದೆ. ಸೌರಶಕ್ತಿಯ ಮೂಲಕ ಮನೆಗಳಲ್ಲಿಯೂ ವಿದ್ಯುತ್ ಲಭ್ಯವಿರಬೇಕು ಮತ್ತು ಅಷ್ಟೇ ಅಲ್ಲ, ಕುಟುಂಬಗಳು ಹೆಚ್ಚುವರಿ ವಿದ್ಯುತ್‌ನಿಂದ ಆದಾಯವನ್ನು ಗಳಿಸಬೇಕು. ಇದಕ್ಕಾಗಿ, ಮೇಲ್ಛಾವಣಿಯ ಸೌರ ಸ್ಥಾವರಗಳನ್ನು ಸ್ಥಾಪಿಸುವ ಉಪಕ್ರಮವು ಪ್ರಾರಂಭವಾಗಿದೆ. ಈ ಸಾಧನೆಗಳಿಗಾಗಿ ನಾನು ನಿಮ್ಮೆಲ್ಲರನ್ನು ಅಭಿನಂದಿಸುತ್ತೇನೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ಇದರೊಂದಿಗೆ, ದಮನ್‌ನ ಜನರು ಇತ್ತೀಚಿನ ದಿನಗಳಲ್ಲಿ ಸ್ವಚ್ಛತಾ ಅಭಿಯಾನವನ್ನು ನಡೆಸುತ್ತಿದ್ದಾರೆ ಎಂದು ನನಗೆ ತಿಳಿಸಲಾಗಿದೆ. ಇದು ಸ್ವಚ್ಛತೆ ಹೇಗೆ ದಮನ್‌ನ ಸಾರ್ವಜನಿಕ ಜೀವನದ ಸಂಸ್ಕೃತಿಯ ಭಾಗವಾಗಿ ಮಾರ್ಪಟ್ಟಿದೆ ಎಂಬುದನ್ನು ತೋರಿಸುತ್ತದೆ ಮತ್ತು ಈ ಸಂಸ್ಕೃತಿಯು ಸ್ವಚ್ಛತಾ ಪ್ರಯತ್ನಗಳಲ್ಲಿ ಗೋಚರಿಸುತ್ತದೆ. ಈ ಭಾಗವಹಿಸುವ ಪ್ರಯತ್ನಗಳಿಗಾಗಿ ನಾನು ದಮನ್ ಜನರನ್ನು ಅಭಿನಂದಿಸುತ್ತೇನೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ದಾದ್ರಾ ನಗರ ಹವೇಲಿ, ದಮನ್ ಮತ್ತು ಡಿಯು ಕೇಂದ್ರಾಡಳಿತ ಪ್ರದೇಶವಾಗಿರುವುದರಿಂದ ಭಾರತದ ಗುರುತು ಮತ್ತು ಪರಂಪರೆಯೂ ಆಗಿದೆ. ಆದ್ದರಿಂದ, ಅದರ ಅಭಿವೃದ್ಧಿಗಾಗಿ ನಮ್ಮ ಗುರಿಗಳು ಸಾಮಾನ್ಯವಲ್ಲ. ಕಳೆದ ವರ್ಷ ನಾನು ಸಿಲ್ವಾಸ್ಸಾಗೆ ಬಂದಾಗ, ನಾನು ನಿಮಗೆ ಸಿಂಗಾಪುರದ ಉದಾಹರಣೆಯನ್ನು ನೀಡಿದ್ದೇನೆ ಎಂದು ನನಗೆ ನೆನಪಿದೆ. ಒಂದು ಕಾಲದಲ್ಲಿ ಸಿಂಗಾಪುರವು ಒಂದು ಸಣ್ಣ ಮೀನುಗಾರಿಕಾ ಹಳ್ಳಿಯಾಗಿತ್ತು ಎಂದು ನಾನು ಹೇಳಿದ್ದೆ. ಆದರೆ ಸಿಂಗಾಪುರದ ಜನರು ಕನಸು ಕಂಡರು, ಅವರು ದೊಡ್ಡ ಗುರಿಗಳನ್ನು ಹೊಂದಿದ್ದರು ಮತ್ತು ಇಂದು ಅದೇ ಸಿಂಗಾಪುರವು ವಿಶ್ವದ ಅತಿದೊಡ್ಡ ವ್ಯಾಪಾರ ಕೇಂದ್ರವಾಗಿದೆ. ಇಂದು ದಾದ್ರಾ ಮತ್ತು ನಗರ ಹವೇಲಿ, ದಮನ್ ಮತ್ತು ಡಿಯು ಕೂಡ ಅದೇ ಕನಸನ್ನು ಕಾಣುತ್ತಿವೆ. ನಮೋ ವಿಮಾನ ನಿಲ್ದಾಣ, ದಮನಗಂಗಾ ನದಿಗೆ ಕಟ್ಟಲಿರುವ ಐಕಾನಿಕ್ ಸೇತುವೆ, 'ಬೀಚ್ ಫ್ರಂಟ್' ನಲ್ಲಿ ಕಟ್ಟಲಾಗುವ ಸಮಾವೇಶ ಕೇಂದ್ರದಂತಹ ಯೋಜನೆಗಳು, ಇಂತಹ ಮೂಲಸೌಕರ್ಯಗಳ ಮೂಲಕ ನಾವು ಭವಿಷ್ಯಕ್ಕಾಗಿ ದೊಡ್ಡ ನಿರ್ಣಯಗಳಿಗೆ ಅಡಿಪಾಯ ಹಾಕುತ್ತಿದ್ದೇವೆ. ಈ ಯೋಜನೆಗಳ ಮೂಲಕ, ನಿಮ್ಮ ಚಲನೆ ಸುಲಭವಾಗುತ್ತದೆ. ಇಲ್ಲಿ ವ್ಯವಹಾರಕ್ಕೆ ಹೊಸ ಸಾಧ್ಯತೆಗಳು ಸೃಷ್ಟಿಯಾಗುತ್ತವೆ. ದಮನ್ ನ ಎರಡೂ ಬದಿಗಳಲ್ಲಿ ಅಭಿವೃದ್ಧಿಯ ವೇಗವು ಹೆಚ್ಚುತ್ತದೆ.

 

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ಇಲ್ಲಿ ಆತಿಥ್ಯ ಆರ್ಥಿಕತೆಗೆ ಸಂಬಂಧಿಸಿದ ಅವಕಾಶಗಳು ಹೆಚ್ಚಾಗುತ್ತವೆ ಮತ್ತು ಅದರೊಂದಿಗೆ, ಸಾರಿಗೆ ನಗರದಂತಹ ಸೌಲಭ್ಯಗಳು ವ್ಯಾಪಾರ ಮತ್ತು ಲಾಜಿಸ್ಟಿಕ್ಸ್‌ಗೆ ಹೊಸ ವೇಗವನ್ನು ನೀಡುತ್ತವೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ಈ ಪ್ರದೇಶದಲ್ಲಿ ನೀಲಿ ಆರ್ಥಿಕತೆಗಾಗಿ ನಾವು ಸಿದ್ಧಪಡಿಸಿರುವ ದೃಷ್ಟಿಕೋನವು ಹೈಟೆಕ್ ಮೂಲಸೌಕರ್ಯದ ಬಲದ ಮೂಲಕ ಮಾತ್ರ ಸಾಕಾರಗೊಳ್ಳುತ್ತದೆ. ಅದಕ್ಕಾಗಿಯೇ ಇಂದು ಲಕ್ಷದ್ವೀಪದ ಕಲ್ಪೇನಿ ಮತ್ತು ಕಡ್ಮತ್ ದ್ವೀಪಗಳಲ್ಲಿ ಆಧುನಿಕ ಬಂದರುಗಳ ಅಡಿಪಾಯ ಹಾಕಲಾಗುತ್ತಿದೆ. ಈ ಎಲ್ಲಾ ಪ್ರಯತ್ನಗಳು ನೀಲಿ ಆರ್ಥಿಕತೆಯಲ್ಲಿ ದೇಶದ ಬಲವನ್ನು ಹೆಚ್ಚಿಸುತ್ತವೆ ಮತ್ತು ನಾನು ಹೇಳಿದಂತೆ, ಇವು ಲಕ್ಷದ್ವೀಪದ ಭವಿಷ್ಯವನ್ನು ಬದಲಾಯಿಸುವ ಉಪಕ್ರಮಗಳಾಗಿವೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ಬಿಜೆಪಿ ಸರ್ಕಾರದಲ್ಲಿ, ನಮ್ಮ ಎನ್‌ಡಿಎ ಸರ್ಕಾರದಲ್ಲಿ, ನಮಗೆ ಅಭಿವೃದ್ಧಿಯ ಮೊದಲ ಮಾನದಂಡವೆಂದರೆ - ಬಡವರು, ವಂಚಿತರು, ಬುಡಕಟ್ಟು ಜನಾಂಗದವರು ಮತ್ತು ಮಧ್ಯಮ ವರ್ಗದವರ ಜೀವನದಲ್ಲಿ ಬದಲಾವಣೆ! ಇದಕ್ಕಾಗಿ, ಆರೋಗ್ಯ ಕ್ಷೇತ್ರವು ನಮ್ಮ ದೊಡ್ಡ ಆದ್ಯತೆಯಾಗಿದೆ. ಕಳೆದ ವರ್ಷಗಳಲ್ಲಿ, ದೇಶವು ಆರೋಗ್ಯ ರಕ್ಷಣೆಗಾಗಿ ಸಮಗ್ರ ದೃಷ್ಟಿಕೋನದೊಂದಿಗೆ ಮುಂದುವರೆದಿದೆ. ಚಿಕಿತ್ಸೆಗೆ ಸಂಬಂಧಿಸಿದ ಪ್ರತಿಯೊಂದು ಕಳವಳವನ್ನು ನಾವು ಪರಿಹರಿಸಿದ್ದೇವೆ. ಇಂದು ಬಡವರಿಗೂ ಸಹ ಆಯುಷ್ಮಾನ್ ಕಾರ್ಡ್ ಸೌಲಭ್ಯವಿದೆ. ಅವರಿಗೆ 5 ಲಕ್ಷ ರೂಪಾಯಿಗಳವರೆಗೆ ಉಚಿತ ಚಿಕಿತ್ಸೆಯ ಭರವಸೆ ಇದೆ. ರೋಗಗಳ ಸಕಾಲಿಕ ರೋಗನಿರ್ಣಯವನ್ನು ಖಚಿತಪಡಿಸಿಕೊಳ್ಳಲು, ಪ್ರಧಾನ ಮಂತ್ರಿ ಆಯುಷ್ಮಾನ್ ಆರೋಗ್ಯ ಮಂದಿರಗಳ ವ್ಯವಸ್ಥೆ ಇದೆ. ಜನೌಷಧಿ ಕೇಂದ್ರಗಳ ಮೂಲಕವೂ ಕೈಗೆಟುಕುವ ಔಷಧಿಗಳು ಲಭ್ಯವಿವೆ. ಈ ಸೌಲಭ್ಯಗಳನ್ನು ಇನ್ನಷ್ಟು ಉತ್ತಮ ಮತ್ತು ಆಧುನಿಕವಾಗಿಸಲು, ಇಂದು ಆರೋಗ್ಯ ಸೇವೆಗಳನ್ನು ಆಯುಷ್ಮಾನ್ ಭಾರತ್ ಡಿಜಿಟಲ್ ಮಿಷನ್ ಮೂಲಕ ತಂತ್ರಜ್ಞಾನದೊಂದಿಗೆ ಸಂಪರ್ಕಿಸಲಾಗುತ್ತಿದೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ಆಯುಷ್ಮಾನ್ ಕಾರ್ಡ್‌ಗಳು ಮತ್ತು ಜನೌಷಧಿ ಕೇಂದ್ರಗಳಿಂದಾಗಿ, ಬಡವರು ಮತ್ತು ಮಧ್ಯಮ ವರ್ಗದವರು ಸುಮಾರು 2.25 ಲಕ್ಷ ಕೋಟಿ ರೂಪಾಯಿಗಳನ್ನು ಖರ್ಚು ಮಾಡದಂತೆ ಉಳಿಸಿದ್ದಾರೆ.

 

ಸಹೋದರರೇ ಮತ್ತು  ಸಹೋದರಿಯರೇ,

ಕೇಂದ್ರ ಸರ್ಕಾರದ ನೀತಿಗಳು ಈ ಪ್ರದೇಶದ ಜನರಿಗೆ ಸಹ ಹೆಚ್ಚಿನ ಪ್ರಯೋಜನವನ್ನು ನೀಡಿವೆ. ಒಂದು ಕಾಲದಲ್ಲಿ, ಇಲ್ಲಿ ಉತ್ತಮ ಚಿಕಿತ್ಸಾ ಸೌಲಭ್ಯಗಳ ಕೊರತೆ ಇತ್ತು. ಇಲ್ಲಿ ವೈದ್ಯಕೀಯ ಕಾಲೇಜು ಕೂಡ ಇರಲಿಲ್ಲ. ಆದರೆ ಈಗ ವೈದ್ಯಕೀಯ ಕಾಲೇಜು ಇದೆ, ಮತ್ತು ಸ್ನಾತಕೋತ್ತರ ಅಧ್ಯಯನಗಳು ಸಹ ಪ್ರಾರಂಭವಾಗಿವೆ. ಸಿಲ್ವಾಸಾದ ನಮೋ ಆಸ್ಪತ್ರೆ ಕಳೆದ ವರ್ಷದಿಂದ ಸಾವಿರಾರು ಜನರಿಗೆ ಸೇವೆ ಸಲ್ಲಿಸುತ್ತಿದೆ. ಇಂದು, ದಮನ್‌ನಲ್ಲಿ ನಮೋ ಆಸ್ಪತ್ರೆಯನ್ನು ಸಹ ಉದ್ಘಾಟಿಸಲಾಗಿದೆ. ಈ ಪ್ರದೇಶದ ಜನರು ಈಗ ಇನ್ನೂ ಉತ್ತಮ ಆರೋಗ್ಯ ಸೇವೆಯ ಪ್ರಯೋಜನವನ್ನು ಪಡೆಯಲಿದ್ದಾರೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ನಮ್ಮ ಸರ್ಕಾರ ಆರೋಗ್ಯಕ್ಕೆ ಹೇಗೆ ಆದ್ಯತೆ ನೀಡುತ್ತಿದೆ ಎಂಬುದು ರಾಷ್ಟ್ರೀಯ ಕುಟುಂಬ ಆರೋಗ್ಯ ಸಮೀಕ್ಷೆಯ ಫಲಿತಾಂಶಗಳಲ್ಲಿಯೂ ಸ್ಪಷ್ಟವಾಗಿದೆ. ಒಂದು ಕಾಲದಲ್ಲಿ, ಭಾರತದಲ್ಲಿ ಹೆಚ್ಚಿನ ಹೆರಿಗೆಗಳು ಆಸ್ಪತ್ರೆಗಳಲ್ಲಿ ನಡೆಯುತ್ತಿರಲಿಲ್ಲ. ಇಂದು, ದೇಶದಲ್ಲಿ ಶೇ. 90 ಕ್ಕಿಂತ ಹೆಚ್ಚು ಹೆರಿಗೆಗಳು ಆಸ್ಪತ್ರೆಗಳಲ್ಲಿ ನಡೆಯುತ್ತಿವೆ, ಇದು ತಾಯಂದಿರ ಮರಣ ಮತ್ತು ಶಿಶು ಮರಣವನ್ನು ಬಹಳ ಕಡಿಮೆ ಮಾಡಿದೆ. ಮಿಷನ್ ಇಂದ್ರಧನುಷ್ ಕಾರಣದಿಂದಾಗಿ, ಭಾರತವು ಮಕ್ಕಳ ಲಸಿಕೆ ಕ್ಷೇತ್ರದಲ್ಲಿಯೂ ಉತ್ತಮ ಪ್ರಗತಿಯನ್ನು ಸಾಧಿಸಿದೆ. 2014 ಕ್ಕಿಂತ ಮೊದಲು, ಕೇವಲ ಶೇ. 60 ರಷ್ಟು ಮಕ್ಕಳಿಗೆ ಮಾತ್ರ ಸಂಪೂರ್ಣವಾಗಿ ಲಸಿಕೆ ನೀಡಲಾಗುತ್ತಿತ್ತು. ಇಂದು ಈ ಅಂಕಿ ಅಂಶವು ಸುಮಾರು ಶೇ. 90 ಕ್ಕೆ ಏರಿದೆ. ಆರೋಗ್ಯ ಭದ್ರತಾ ಕ್ಷೇತ್ರದಲ್ಲಿಯೂ ದೊಡ್ಡ ಬದಲಾವಣೆಯಾಗಿದೆ. 2014 ಕ್ಕಿಂತ ಮೊದಲು, ಶೇ. 30 ಕ್ಕಿಂತ ಕಡಿಮೆ ಕುಟುಂಬಗಳು ಆರೋಗ್ಯ ವಿಮಾ ಯೋಜನೆಗಳೊಂದಿಗೆ ಸಂಪರ್ಕ ಹೊಂದಿದ್ದವು. ಇಂದು ಆಯುಷ್ಮಾನ್ ಭಾರತ್ ಆ ಅಂಕಿಅಂಶಗಳನ್ನು ಸಹ ಬದಲಾಯಿಸಿದೆ. ಈಗ ಶೇ. 60 ಕ್ಕೂ ಹೆಚ್ಚು ಕುಟುಂಬಗಳು ಈ ರಕ್ಷಣೆಯನ್ನು ಪಡೆಯುತ್ತಿವೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ಆರೋಗ್ಯ ಕ್ಷೇತ್ರದಲ್ಲಿ ಸರ್ಕಾರದ ಈ ಪ್ರಯತ್ನಗಳಿಂದ ಯಾರಾದರೂ ಹೆಚ್ಚು ಪ್ರಯೋಜನ ಪಡೆದಿದ್ದರೆ, ಅದು ನನ್ನ ದೇಶದ ಮಹಿಳಾ ಶಕ್ತಿ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ಹಿಂದೆ ಈ ಪ್ರದೇಶದ ಯುವಜನರು ಉನ್ನತ ಶಿಕ್ಷಣಕ್ಕಾಗಿ ಹೊರಗೆ ಹೋಗಬೇಕಾಗಿತ್ತು. ಆದರೆ ಇಂದು, ಒಂದಲ್ಲ, ಹಲವು ರಾಷ್ಟ್ರೀಯ ಮಟ್ಟದ ಸಂಸ್ಥೆಗಳು ಇಲ್ಲಿ ಸ್ಥಾಪನೆಯಾಗಿವೆ. ಇತ್ತೀಚಿನ ವರ್ಷಗಳಲ್ಲಿ, ಇಲ್ಲಿ ಹೊಸ ಶಾಲಾ ಕಟ್ಟಡಗಳನ್ನು ನಿರ್ಮಿಸಲಾಗಿದೆ, ಶಾಲೆಗಳಲ್ಲಿ ಸ್ಮಾರ್ಟ್ ತರಗತಿ ಕೊಠಡಿಗಳನ್ನು ಸಹ ನಿರ್ಮಿಸಲಾಗಿದೆ. 40 ಸಾವಿರಕ್ಕೂ ಹೆಚ್ಚು ವಿದ್ಯಾರ್ಥಿಗಳು ಅವುಗಳ ಪ್ರಯೋಜನ ಪಡೆಯುತ್ತಿದ್ದಾರೆ. ಕೇಂದ್ರಾಡಳಿತ ಪ್ರದೇಶವು ಶಿಕ್ಷಣ ಕ್ಷೇತ್ರದಲ್ಲಿ ಕ್ರಮೇಣ ಮುಂದುವರಿಯುತ್ತಿದೆ ಎಂದು ನನಗೆ ಸಂತೋಷವಾಗಿದೆ. ಸ್ವಾಮಿ ವಿವೇಕಾನಂದ ಶಿಕ್ಷಣ ಕೇಂದ್ರದಂತಹ ಅನೇಕ ನಿರ್ಮಾಣಗಳು ಇಲ್ಲಿ ನಡೆಯುತ್ತಿವೆ.

 

 

ಸಹೋದರರೇ ಮತ್ತು  ಸಹೋದರಿಯರೇ,

ಈ ಶಿಕ್ಷಣ ಕ್ರಾಂತಿಯಲ್ಲಿ ನಮ್ಮ ಹೆಣ್ಣುಮಕ್ಕಳು ಹಿಂದುಳಿಯಬಾರದು ಎಂಬುದು ನಮ್ಮ ಸಂಕಲ್ಪ. ಇದಕ್ಕಾಗಿ ಅನೇಕ ದೊಡ್ಡ ಪ್ರಯತ್ನಗಳನ್ನು ಮಾಡಲಾಗುತ್ತಿದೆ. ಸರಸ್ವತಿ ಸೈಕಲ್ ಯೋಜನೆ ಮತ್ತು ಸರಸ್ವತಿ ವಿದ್ಯಾ ಯೋಜನೆಯಂತಹ ಯೋಜನೆಗಳು ಇಲ್ಲಿನ ಹೆಣ್ಣುಮಕ್ಕಳಿಗೆ ಸಾಕಷ್ಟು ಸಹಾಯ ಮಾಡುತ್ತಿವೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ಇಂದು ಭಾರತವು ದೇಶದ ಯುವಜನರು ಪದವಿಯ ಜೊತೆಗೆ ಸರಿಯಾದ ಸ್ಥಾನಮಾನಗಳನ್ನು ಪಡೆಯಬೇಕೆಂದು ಪ್ರಯತ್ನಿಸುತ್ತಿದೆ. ಸ್ಥಳೀಯ ಪ್ರತಿಭೆಗಳನ್ನು ಜಾಗತಿಕ ಅವಕಾಶಗಳೊಂದಿಗೆ ಸಂಪರ್ಕಿಸುವಂತಹ ಮಾನ್ಯತೆಯನ್ನು ಅವರು ಪಡೆಯಬೇಕು. ವಿನ್ಯಾಸ, ಕಾನೂನು, ಎಂಜಿನಿಯರಿಂಗ್, ವೈದ್ಯಕೀಯ ಶಿಕ್ಷಣ, ಐಟಿ, ಡ್ರೋನ್ ಮತ್ತು ನವೀಕರಿಸಬಹುದಾದ ಇಂಧನದಂತಹ ಕ್ಷೇತ್ರಗಳಲ್ಲಿ, ನಮ್ಮ ಪ್ರಸ್ತುತ ಸಿದ್ಧತೆಯು ಭಾರತದ ಕಾರ್ಯಪಡೆಯನ್ನು ಬಲಪಡಿಸುತ್ತದೆ. ಆದ್ದರಿಂದ, ವೃತ್ತಿಪರ ಸಂಸ್ಥೆಗಳ ವಿಸ್ತರಣೆ ಬಹಳ ಮುಖ್ಯವಾಗಿದೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ಇಂದು ಎನ್.ಐ.ಎಫ್.ಟಿ. (NIFT)  ಯ ಹದಿನೆಂಟನೇ ಕ್ಯಾಂಪಸ್‌ಗೆ ಅಡಿಪಾಯ ಹಾಕಲಾಗಿದೆ. ಈ ಸಂಸ್ಥೆಯು ಇಲ್ಲಿನ ಯುವಜನರನ್ನು ಜಾಗತಿಕ ಮಾನ್ಯತೆಯೊಂದಿಗೆ ಜೋಡಿಸುತ್ತದೆ. ಐಟಿಐ ದಮನ್‌ನಲ್ಲಿ ಡ್ರೋನ್ ತಂತ್ರಜ್ಞರಂತಹ ಹೊಸ ಕೋರ್ಸ್‌ಗಳು ಸಹ ಪ್ರಾರಂಭವಾಗಿವೆ. ಪಿಎಂ ವಿಶ್ವಕರ್ಮ ಮತ್ತು ಪಿಎಂ ಸೂರ್ಯ ಘರ್ ಉಚಿತ ವಿದ್ಯುತ್ ಯೋಜನೆಗೆ ಸಂಬಂಧಿಸಿದ ತರಬೇತಿ ಕಾರ್ಯಕ್ರಮಗಳು ಸಹ ಯುವಜನರಿಗೆ ಪ್ರಯೋಜನವನ್ನು ನೀಡುತ್ತಿವೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ದೇಶದಲ್ಲಿ ಕ್ರೀಡೆಗಳು ಹೊಸ ಚಿಂತನೆಯೊಂದಿಗೆ ಮುಂದುವರೆದಿವೆ. ನಮ್ಮ ಕ್ರೀಡೆಗಳು ಇನ್ನು ಮುಂದೆ ದೊಡ್ಡ ನಗರಗಳು ಅಥವಾ ದೊಡ್ಡ ಕ್ರೀಡಾಂಗಣಗಳಿಗೆ ಸೀಮಿತವಾಗಿರಲಾರವು. ಖೇಲೋ ಇಂಡಿಯಾದಂತಹ ಪ್ರಯತ್ನಗಳು ಯುವಜನರಿಗೆ ತಮ್ಮ ಪ್ರತಿಭೆಯನ್ನು ಪ್ರದರ್ಶಿಸಲು ಹೊಸ ವೇದಿಕೆಯನ್ನು ನೀಡಿವೆ. ಈ ಕಾರಣದಿಂದಾಗಿ ಕ್ರೀಡಾ ಕ್ಷೇತ್ರದಲ್ಲಿ, ಸಣ್ಣ ಪ್ರದೇಶಗಳ ಮಕ್ಕಳು ರಾಷ್ಟ್ರೀಯ ಮಟ್ಟದಲ್ಲಿ ಮುಂದೆ ಬರುತ್ತಿದ್ದಾರೆ ಮತ್ತು ಈ ಪ್ರದೇಶವು ಸಹ ಅದರಿಂದ ಪ್ರಯೋಜನ ಪಡೆದಿದೆ. ಡಿಯು ಇಂದು ಬೀಚ್ ಕ್ರೀಡೆಗಳ ದೊಡ್ಡ ಕೇಂದ್ರವಾಗಿ ಹೊರಹೊಮ್ಮಿದೆ. ಘೋಘ್ಲಾ ಬೀಚ್‌ನಲ್ಲಿ ನಡೆದ ಬೀಚ್ ಕ್ರೀಡಾಕೂಟವು ಈ ಪ್ರದೇಶದತ್ತ ದೇಶದ ಗಮನವನ್ನು ಸೆಳೆದಿದೆ. ಇಂದು ಇಲ್ಲಿ ಆಧುನಿಕ ಕ್ರೀಡಾ ಮೂಲಸೌಕರ್ಯವನ್ನು ನಿರಂತರವಾಗಿ ಅಭಿವೃದ್ಧಿಪಡಿಸಲಾಗುತ್ತಿದೆ. ಖಾನ್ವೆಲ್‌ನಲ್ಲಿರುವ ಫುಟ್‌ಬಾಲ್ ಕೇಂದ್ರ ಮತ್ತು ದಮನ್‌ನಲ್ಲಿರುವ ವಾಲಿಬಾಲ್ ತರಬೇತಿ ಕೇಂದ್ರವು ಇಲ್ಲಿನ ಕ್ರೀಡಾ ಸಂಸ್ಕೃತಿಯನ್ನು ಬಲಪಡಿಸುತ್ತಿವೆ.

 

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ಇಂದು ದೇಶದ ಆದ್ಯ ಗಮನ ಪ್ರವಾಸೋದ್ಯಮದ ಮೇಲೂ ಇದೆ. ಪ್ರವಾಸೋದ್ಯಮವು ಸ್ಥಳೀಯ ಕಲೆ ಮತ್ತು ಸಂಸ್ಕೃತಿಯನ್ನು ಉತ್ತೇಜಿಸಬೇಕು ಎಂಬುದು ನಮ್ಮ ಪ್ರಯತ್ನ. ಸಣ್ಣ ಸ್ಥಳಗಳನ್ನು ಸಹ ದೊಡ್ಡ ಅವಕಾಶಗಳೊಂದಿಗೆ ಸಂಪರ್ಕಿಸಬೇಕು. 'ದೇಖೋ ಅಪ್ನಾ ದೇಶ್' ನಂತಹ ಪ್ರಯತ್ನಗಳು ದೇಶದ ವೈವಿಧ್ಯತೆಯ ಬಗ್ಗೆ ತಿಳಿದುಕೊಳ್ಳಲು ಜನರನ್ನು ಪ್ರೇರೇಪಿಸಿವೆ. ಇಂದು ಭಾರತದಲ್ಲಿ ಪರಂಪರೆ ಪ್ರವಾಸೋದ್ಯಮ, ಬೀಚ್ ಪ್ರವಾಸೋದ್ಯಮ, ಪರಿಸರ ಪ್ರವಾಸೋದ್ಯಮ, ಸಾಹಸ ಪ್ರವಾಸೋದ್ಯಮಗಳು ಹೊಸ ಶಕ್ತಿಯನ್ನು ಪಡೆಯುತ್ತಿವೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ದಾದ್ರಾ ಮತ್ತು ನಗರ ಹವೇಲಿ, ದಮನ್ ಮತ್ತು ಡಿಯುಗಳಲ್ಲಿ, ಪ್ರವಾಸೋದ್ಯಮವು ಅಪಾರ ಸಾಧ್ಯತೆಗಳನ್ನು ಹೊಂದಿರುವ ವಲಯವಾಗಿದೆ. ಈ ಪ್ರದೇಶವು ನೈಸರ್ಗಿಕ ಸೌಂದರ್ಯದಿಂದ ಆಶೀರ್ವದಿಸಲ್ಪಟ್ಟಿದೆ. ಅದಕ್ಕಾಗಿಯೇ ಪ್ರವಾಸೋದ್ಯಮಕ್ಕೆ ಸಂಬಂಧಿಸಿದಂತೆ ದೇಶವು ಕೆಲಸ ಮಾಡಿದ ನೀತಿಗಳು ದಾದ್ರಾ ಮತ್ತು ನಗರ ಹವೇಲಿ, ದಮನ್ ಮತ್ತು ಡಿಯುಗೆ ಹೆಚ್ಚಿನ ಪ್ರಯೋಜನವನ್ನು ನೀಡಿವೆ. 2021 ರಲ್ಲಿ, ಸುಮಾರು 6 ಲಕ್ಷ ಪ್ರವಾಸಿಗರು ಇಲ್ಲಿಗೆ ಬಂದರು. 2025 ರಲ್ಲಿ, ಈ ಸಂಖ್ಯೆ ಸುಮಾರು 50 ಲಕ್ಷಕ್ಕೆ ಏರಿತು. ಅಂದರೆ ಕೆಲವೇ ವರ್ಷಗಳಲ್ಲಿ, ಪ್ರವಾಸಿಗಳ  ಸಂಖ್ಯೆ ಸುಮಾರು ಹತ್ತು ಪಟ್ಟು ಹೆಚ್ಚಾಗಿದೆ. ಉತ್ತಮ ಮೂಲಸೌಕರ್ಯ, ಉತ್ತಮ ಸೌಲಭ್ಯಗಳು ಮತ್ತು ಸ್ವಚ್ಛ ಕಡಲತೀರಗಳಿಂದಾಗಿ ಇದು ಸಾಧ್ಯವಾಗಿದೆ. ದಮನ್ ರಾತ್ರಿ ಮಾರುಕಟ್ಟೆ, ರಾಮಸೇತು ಸಮುದ್ರ ಮುಂಭಾಗ, ನಮೋಪಥ ಸಮುದ್ರ ಮುಂಭಾಗ, ನಾನಿ ದಮನ್ ಕೋಟೆ, ಗಂಗೇಶ್ವರ ದೇವಾಲಯ ಸಂಕೀರ್ಣ, ಇಂತಹ ಹಲವಾರು ಸ್ಥಳಗಳು ಇಂದು ಈ ಇಡೀ ಪ್ರದೇಶದ ಹೊಸ ಗುರುತಾಗುತ್ತಿವೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ದಾದ್ರಾ ಮತ್ತು ನಗರ ಹವೇಲಿ, ದಮನ್ ಮತ್ತು ಡಿಯುಗಳ ಕನಸುಗಳನ್ನು ನನಸಾಗಿಸಲು, ನಾವು ಇಲ್ಲಿ ಕೈಗಾರಿಕಾ ಬಲವನ್ನು ಹೆಚ್ಚಿಸಬೇಕಾಗಿದೆ. ಈ ಕೇಂದ್ರಾಡಳಿತ ಪ್ರದೇಶವು ಮಾನವ ನಿರ್ಮಿತ ಫೈಬರ್ ಕ್ಷೇತ್ರದಲ್ಲಿ ತನ್ನ ವಿಶಿಷ್ಟ ಗುರುತನ್ನು ಸಾಧಿಸಿದೆ ಎಂಬುದು ಹೆಮ್ಮೆಯ ವಿಷಯ. ದಾದ್ರಾ ಮತ್ತು ನಗರ ಹವೇಲಿಯನ್ನು ರಾಷ್ಟ್ರೀಯ ಮಾನವ ನಿರ್ಮಿತ ಫೈಬರ್ ರಾಜಧಾನಿ ಎಂದು ಗುರುತಿಸಲಾಗಿದೆ. ಈ ಪ್ರದೇಶವು ಪ್ಲಾಸ್ಟಿಕ್ ರಫ್ತಿನಲ್ಲಿ ನಿರಂತರವಾಗಿ ಪ್ರಗತಿ ಸಾಧಿಸುತ್ತಿದೆ. ಇಲ್ಲಿನ ಕೈಗಾರಿಕೆಗಳು ಮತ್ತು ಎಂ.ಎಸ್.ಎಂ.ಇ. ( MSME)  ಗಳನ್ನು ಬೆಂಬಲಿಸಲು ಸರ್ಕಾರ ನಿರಂತರ ಪ್ರಯತ್ನಗಳನ್ನು ಮಾಡಿದೆ. ಇಲ್ಲಿನ ಎಂ.ಎಸ್.ಎಂ.ಇ. ಗಳು ಮತ್ತು ಇತರ ಕೈಗಾರಿಕೆಗಳಿಗೆ ಕೋಟ್ಯಂತರ ರೂಪಾಯಿಗಳಿಗಿಂತ ಹೆಚ್ಚಿನ ಆರ್ಥಿಕ ನೆರವು ನೀಡಲಾಗಿದೆ. ಕೇಂದ್ರಾಡಳಿತ ಪ್ರದೇಶದ ಸಣ್ಣ ಮತ್ತು ಗುಡಿ ಕೈಗಾರಿಕೆಗಳಿಗೆ ಹೊಸ ಅವಕಾಶಗಳು ತೆರೆದುಕೊಳ್ಳುತ್ತಿವೆ. ಮುಂಬರುವ ದಿನಗಳಲ್ಲಿ ಈ ಪ್ರದೇಶವು ಉತ್ಪಾದನಾ ಕೇಂದ್ರವಾಗಲಿದೆ ಎಂದು ನನಗೆ ವಿಶ್ವಾಸವಿದೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ಸೂಕ್ಷ್ಮ ಆಡಳಿತವು ಅಭಿವೃದ್ಧಿಯ ದೃಷ್ಟಿಕೋನದೊಂದಿಗೆ ಸಂಯೋಜಿಸಲ್ಪಟ್ಟಾಗ, ರೂಪಾಂತರವು ವೇಗವಾಗಿ ವಾಸ್ತವವಾಗಿ ರೂಪುಗೊಳ್ಳುತ್ತದೆ. ದಾದ್ರಾ ಮತ್ತು ನಗರ ಹವೇಲಿ, ದಮನ್ ಮತ್ತು ಡಿಯುಗಳಲ್ಲಿ ನಮ್ಮ ಪ್ರಯತ್ನಗಳ ಪರಿಣಾಮವನ್ನು ನೋಡಿದಾಗ ತೃಪ್ತಿ ಸಿಗುತ್ತದೆ. ಈ ನೆಲದ ಜನರ ಮೇಲೆ ನನಗೆ ಸಂಪೂರ್ಣ ನಂಬಿಕೆ ಇದೆ. ಇಲ್ಲಿನ ಯುವಜನರು, ಇಲ್ಲಿನ ತಾಯಂದಿರು ಮತ್ತು ಸಹೋದರಿಯರು, ರೈತರು, ಕುಶಲಕರ್ಮಿಗಳು, ಕಾರ್ಮಿಕರು ಮತ್ತು ಉದ್ಯಮಿಗಳು ಮುಂಬರುವ ವರ್ಷಗಳಲ್ಲಿ ಈ ಅಭಿವೃದ್ಧಿ ಪ್ರಯಾಣವನ್ನು ಮತ್ತಷ್ಟು ಮುಂದೆ ಕೊಂಡೊಯ್ಯುತ್ತಾರೆ. ನಿಮ್ಮ ಕನಸುಗಳನ್ನು ನನಸಾಗಿಸಲು ಕೇಂದ್ರ ಸರ್ಕಾರವು ನಿಮ್ಮೊಂದಿಗೆ ಹೆಗಲಿಗೆ ಹೆಗಲು ಕೊಟ್ಟು ನಿಲ್ಲುತ್ತದೆ ಎಂದು ನಾನು ನಿಮಗೆ ಭರವಸೆ ನೀಡುತ್ತೇನೆ. ಈ ನಂಬಿಕೆಯೊಂದಿಗೆ, ಅಭಿವೃದ್ಧಿ ಯೋಜನೆಗಳಿಗಾಗಿ ನಾನು ಮತ್ತೊಮ್ಮೆ ನಿಮಗೆ ಅನೇಕ ಅಭಿನಂದನೆಗಳನ್ನು ಸಲ್ಲಿಸುತ್ತೇನೆ. ನನ್ನೊಂದಿಗೆ ಹೇಳಿ, ಭಾರತ್ ಮಾತಾ ಕಿ ಜೈ! ಭಾರತ್ ಮಾತಾ ಕಿ ಜೈ! ಭಾರತ್ ಮಾತಾ ಕಿ ಜೈ!

ತುಂಬಾ ಧನ್ಯವಾದಗಳು.