Close relations between India and Finland based on shared values of democracy, rule of law, equality, freedom of speech, and respect for human rights: PM
PM Modi invites Finland to join the International Solar Alliance (ISA) and the Coalition for Disaster Resilient Infrastructure (CDRI)

ಪ್ರಧಾನಮಂತ್ರಿ ಶ್ರೀ ನರೇಂದ್ರ ಮೋದಿ ಮತ್ತು ಫಿನ್ ಲೆಂಡ್ ಗಣರಾಜ್ಯದ ಘನತೆವೆತ್ತ ಪ್ರಧಾನಿ ಸನ್ನಾ ಮರೀನ್ ವರ್ಚುವಲ್ ಶೃಂಗ ಸಭೆ ಮೂಲಕ ಸಮಾಲೋಚನೆ ನಡೆಸಿದರು. ಈ ಸಂದರ್ಭದಲ್ಲಿ ಸಮಗ್ರ ದ್ವಿಪಕ್ಷೀಯ ವಿಷಯಗಳು, ಪರಸ್ಪರ ಆಸಕ್ತಿಯ ಪ್ರಾದೇಶಿಕ ಮತ್ತು ಬಹುಪಕ್ಷೀಯ ಸಮಸ್ಯೆಗಳ ಕುರಿತು ಚರ್ಚೆ ನಡೆಸಿದರು.

 

 

ಭಾರತ – ಫಿನ್ ಲೆಂಡ್ ನಡುವಿನ ನಿಕಟ ಬಾಂಧವ್ಯ, ಪ್ರಜಾತಂತ್ರದ ಮೌಲ್ಯಗಳು, ಕಾನೂನಿನ ನಿಯಮಗಳು, ಸಮಾನತೆ, ವಾಕ್ ಸ್ವಾತಂತ್ರ್ಯ ಮತ್ತು ಮಾನವ ಹಕ್ಕುಗಳಿಗೆ ಗೌರವ ನೀಡುವ ಕುರಿತಾದ ವಿಚಾರಗಳ ಬಗ್ಗೆಯೂ ಉಭಯ ನಾಯಕರು ಚರ್ಚಿಸಿದರು.

ಬಹುಪಕ್ಷೀಯತೆ ಕುರಿತಂತೆ ತಮ್ಮ ಬಲಿಷ್ಠ ಬದ್ಧತೆಯನ್ನು ಈ ನಾಯಕರು ಪುನರುಚ್ಚರಿಸಿದ್ದು, ನಿಯಮ ಆಧರಿತ ಅಂತಾರಾಷ್ಟ್ರೀಯ ಆದೇಶ, ಸುಸ್ಥಿರ ಅಭಿವೃದ್ಧಿ ಮತ್ತು ಹವಾಮಾನ ಬದಲಾವಣೆ ವಿರುದ್ಧದ ಹೋರಾಟ ಕುರಿತು ಸಮಾಲೋಚನೆ ನಡೆಸಿದರು.

ದ್ವಿಪಕ್ಷೀಯ ಕಾರ್ಯಕ್ರಮಗಳ ಕುರಿತು ಇಬ್ಬರೂ ನಾಯಕರು ಪ್ರಗತಿ ಪರಿಶೀಲನೆ ನಡೆಸಿದ್ದು, ವ್ಯಾಪಾರ, ಹೂಡಿಕೆ, ನಾವೀನ್ಯತೆ, ಶಿಕ್ಷಣ, ಕೃತಕ ಬುದ್ದಿಮತ್ತೆ ಸೇರಿ ಬೆಳವಣಿಗೆಯಾಗುತ್ತಿರುವ ತಂತ್ರಜ್ಞಾನ, 5ಜಿ/6ಜಿ, ಅತ್ಯಾಧುನಿಕ ಕ್ವಾಂಟಮ್ ಆಫ್ ಕಂಪ್ಯೂಟಿಂಗ್ ಸೇರಿದಂತೆ ಪರಸ್ಪರ ಬಾಂಧವ್ಯ ವೃದ್ಧಿ ಕುರಿತು ಚರ್ಚಿಸಿದರು.

ಶುದ್ಧ ಮತ್ತು ಹಸಿರು ತಂತ್ರಜ್ಞಾನ ವಲಯದಲ್ಲಿ ಫಿನ್ ಲೆಂಡ್ ಸಾರಥ್ಯಕ್ಕೆ ಮೆಚ್ಚುಗೆ ವ್ಯಕ್ತಪಡಿಸಿದ ಪ್ರಧಾನಮಂತ್ರಿ ಶ್ರೀ ನರೇಂದ್ರ ಮೋದಿ, ಸುಸ್ಥಿರ ಅಭಿವೃದ್ಧಿಯಲ್ಲಿ ಭಾರತದ ನೇತೃತ್ವಕ್ಕೆ ಫಿನ್ ಲೆಂಡ್ ಕಂಪೆನಿಗಳು ಪಾಲುದಾರಾಗುವ ಸಾಮರ್ಥ್ಯದ ಬಗ್ಗೆ ಗಮನಹರಿಸಿದರು. ನವೀಕೃತ ಮತ್ತು ಜೈವಿಕ ಇಂಧನ, ಸುಸ್ಥಿರತೆ, ಶಿಕ್ಷಣದಲ್ಲಿನ ತಂತ್ರಜ್ಞಾನ, ಔ಼ಷಧ ಮತ್ತು ಡಿಜಿಟಲೀಕರಣ ವಲಯದಲ್ಲಿ ಸಹಕಾರ ಹೆಚ್ಚಿಸುವಂತೆ ಸಲಹೆ ಮಾಡಿದರು.

ಭಾರತ – ಐರೋಪ್ಯ ಒಕ್ಕೂಟ, ಹಿಮ ವಲಯದಲ್ಲಿ ಸಹಕಾರ, ವಿಶ್ವ ವಾಣಿಜ್ಯ ಸಂಘಟನೆ - ಡಬ್ಲ್ಯೂಟಿಓ ಮತ್ತು ವಿಶ್ವ ಸಂಸ್ಥೆಯ ಸುಧಾರಣೆಗಳು ಸೇರಿದಂತೆ ಜಾಗತಿಕ ಮತ್ತು ಪ್ರಾದೇಶಿಕ ವಿಚಾರಗಳ ಕುರಿತು ತಮ್ಮ ಅಭಿಪ್ರಾಯಗಳನ್ನು ವಿನಿಮಯಮಾಡಿಕೊಂಡರು. ಆಫ್ರಿಕಾದಲ್ಲಿ ಅಭಿವೃದ್ಧಿ ಚಟುವಟಿಕೆಗಳನ್ನು ಕೈಗೊಳ್ಳಲು ಭಾರತ ಮತ್ತು ಫಿನ್ ಲೆಂಡ್ ನಡುವೆ ಪರಸ್ಪರ ಸಹಕಾರ ಸಾಮರ್ಥ್ಯ ವೃದ್ಧಿಸುವ ಕುರಿತಂತೆಯೂ ಎರಡೂ ಬದಿಯಿಂದ ಚರ್ಚಿಸಲಾಯಿತು.

ಅಂತಾರಾಷ್ಟ್ರೀಯ ಸೌರ ಒಕ್ಕೂಟ [ಐಎಸ್ಎ] ಮತ್ತು ವಿಪತ್ತು ಎದುರಿಸುವ ಮೂಲ ಸೌಕರ್ಯ ಅಭಿವೃದ್ಧಿ ಒಕ್ಕೂಟ [ಸಿ.ಡಿ.ಆರ್.ಐ]ಕ್ಕೆ ಸೇರುವಂತೆ ಪ್ರಧಾನಮಂತ್ರಿ ಶ್ರೀ ನರೇಂದ್ರ ಮೋದಿ ಅವರು ಫಿನ್ ಲೆಂಡ್ ಗೆ ಆಹ್ವಾನ ನೀಡಿದರು.

ಕೋವಿಡ್ 19 ಪರಿಸ್ಥಿತಿ, ಲಸಿಕೆ ಅಭಿಯಾನ ಕುರಿತು ತಮ್ಮ ರಾಷ್ಟ್ರಗಳಲ್ಲಿನ ಪರಿಸ್ಥಿತಿ ಬಗ್ಗೆ ಇಬ್ಬರೂ ನಾಯಕರು ಚರ್ಚಿಸಿದರು. ಎಲ್ಲಾ ರಾಷ್ಟ್ರಗಳಿಗೆ ತುರ್ತಾಗಿ ಮತ್ತು ಕೈಗೆಟುಕುವ ರೀತಿಯಲ್ಲಿ ಲಸಿಕೆ ದೊರಕಿಸಿಕೊಡುವ ಜಾಗತಿಕ ಪ್ರಯತ್ನಗಳ ಮಹತ್ವದ ಕುರಿತಾಗಿ ಚರ್ಚಿಸಿದರು.

ಪೋರ್ಟೋದಲ್ಲಿ ನಡೆಯಲಿರುವ ಭಾರತ – ಐರೋಪ್ಯ ಒಕ್ಕೂಟ ನಾಯಕರ ಸಭೆ, ನಾರ್ಡಿಕ್ ಶೃಂಗ ಸಭೆಗಳನ್ನು ಎದುರು ನೋಡುತ್ತಿರುವುದಾಗಿ ಉಭಯ ನಾಯಕರು ಹೇಳಿದ್ದಾರೆ.

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Text of PM’s remarks during inauguration of Swaminarayan Hindu Temple in Paris
September 06, 2026

पूज्य महंत स्वामी, फ्रांस सरकार के सम्मानित प्रतिनिधिगण, उपस्थित अतिथिगण, इंडियन कम्युनिटी के मेरे साथी, देश दुनिया से जुड़े सभी हरि भक्त, देवियों और सज्जनों, जय स्वामीनारायण!

आज फ्रांस की राजधानी पेरिस में भव्य स्वामीनारायण मंदिर का लोकार्पण हो रहा है। यह लोकार्पण भारत और फ्रांस के सांस्कृतिक संबंधों का नया युग स्तंभ है। पूज्य संत जनों और सनातन परंपरा के श्रेष्ठ जनों के आशीर्वाद के साथ आज इस लोकार्पण का मंच ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ के भाव का मंच बन गया है। भगवान स्वामीनारायण की कृपा और हमारे संतों का स्नेह, संतों का आशीर्वाद, मेरा सौभाग्य है कि मुझे ऐसे पुण्य अवसरों से जुड़ने का अवसर हमेशा मिलता रहता है। आज भी मैं भले ही पेरिस में आप सबके बीच उपस्थित नहीं हूं, लेकिन मन से और हृदय से, मैं स्वयं को आपके बीच ही अनुभव कर रहा हूं।

साथियों,

आज इस अवसर पर मैं परम पूज्य प्रमुख स्वामी जी महाराज का भी श्रद्धापूर्वक स्मरण करता हूं। प्राचीन काल में भारत का जो सांस्कृतिक आध्यात्मिक वैभव था, उन्होंने उसके पुनर्जागरण का एक अभियान शुरू किया था। आज उसका प्रकाश यूरोप समेत पूरी दुनिया में फैल रहा है। 2024 में अबू धाबी में भव्य मंदिर का लोकार्पण हुआ था। आज वहां हजारों लोग दर्शन करने जाते हैं और अब यहां पेरिस में स्वामीनारायण मंदिर का निर्माण सृजन की यह निरंतरता, यह संतों की संकल्प शक्ति का ही प्रमाण है। मैं पुनीत कार्य के लिए पूज्य महंत स्वामी का आभार प्रकट करता हूं, मैं उनके चरणों में प्रणाम करता हूं। मैं BAPS स्वामीनारायण संस्था को और करोड़ों हरि भक्तों को इस अवसर पर हृदय की गहराई से बधाई देता हूं।

साथियों,

BAPS के माध्यम से जब अलग-अलग देश में मंदिरों की प्राण प्रतिष्ठा होती है, तो वहां भारत के प्राचीन विचार और मानवीय मूल्य भी साथ-साथ ही जाते हैं और भारत का विचार कहता है ‘समानं मनः सह चित्तमेषाम्’ अर्थात हमारे मन समान हो, हमारे हृदय साथ जुड़े। इसलिए आज जब फ्रांस में इतना भव्य मंदिर बनकर तैयार हुआ है, यह फ्रांस की विविधता को तो समृद्ध करेगा ही, इससे भारत और फ्रांस के सांस्कृतिक संबंधों को भी ऊर्जा मिलेगी।

साथियों,

बीते वर्षों में भारत और फ्रांस के संबंध नई ऊंचाइयों तक पहुंचे हैं। मेरे मित्र, प्रेसिडेंट मैक्रों के साथ मिलकर दोनों देश एक Special Global Strategic Partnership बना रहे हैं। Technology, AI और Defence से लेकर Space और Climate Action तक हम एक नई गति और नई ऊर्जा के साथ मिलकर के आगे बढ़ रहे हैं। हम 2026 को India-France Year of Innovation के रूप में भी सेलिब्रेट कर रहे हैं। भारत-फ्रांस की ये Strategic Partnership इसलिए भी खास है, क्योंकि ये हमारे पुराने सांस्कृतिक-राजनैतिक सम्बन्धों की मजबूत बुनियाद पर टिकी है। इतिहास गवाह है, फ्रांस में भारतीय सैनिकों के बलिदान का इतिहास आज भी मन-मंदिर में जीवित है। भाषा से जुड़े विषयों में रुचि रखने वाले लोग यह भी जानते हैं कि फ्रेंच स्कॉलर्स ने संस्कृत को लोकप्रिय बनाने में कितनी अहम भूमिका निभाई है। रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद पर रोमाँ रोलाँ की की लेखनी हमारी सोसाइटीज़ को और करीब लाई है। पेरिस से पुडुचेरी के अरबिंदो आश्रम तक 'The mother' की spiritual journey, उसने कितने ही भारतीय और फ्रेंच साधकों को inspire किया है।

साथियों,

दशकों पहले श्रील प्रभुपाद स्वामी भी फ्रांस आए थे। इस्कॉन के जरिए भारत फ्रांस के बीच आध्यात्मिक सम्बन्धों का नया अध्याय उन्होंने शुरू किया था। आज योग भी भारत-फ्रांस के people to people कनेक्ट का एक माध्यम बन चुका है। 'इंटरनेशनल योगा डे' पर एफिल टॉवर के सामने से आने वाली तस्वीरें फ्रांस में योग की लोकप्रियता का उदाहरण बनती हैं और अब BAPS के इस भव्य मंदिर के जरिए, हमारे उन सांस्कृतिक सम्बन्धों में एक नया अध्याय जुड़ रहा है।

साथियों,

इन दिनों, भारत फ्रांस Joint Ventures की संभावनाओं पर बातें होती हैं। स्वामीनारायण मंदिर ने इस संभावना में भी एक नया आयाम जोड़ा है। यह मंदिर 'मेड इन इंडिया' है और 'बिल्ट इन फ्रांस' है। इसके काफी पत्थरों को भारत में तराशा गया है। भारत की प्राचीन प्रतिभा यहाँ फ्रांस में आधुनिक इंजीनियरिंग से आकर जुड़ चुकी है। पेरिस में इस भव्य मंदिर ने आकार लिया है। इसलिए, मैं आशा करता हूँ, यह मंदिर सदियों तक भारत और फ्रांस के बीच सहयोग और संभावनाओं का भी प्रतीक बनकर उभरेगा।

साथियों,

स्वामीनारायण मंदिर हमेशा से भक्ति के साथ-साथ सेवा का माध्यम भी रहे हैं। मुझे बताया गया है, यह मंदिर भी सेवा प्रकल्पों का वैसा ही केंद्र बनेगा। मुझे विश्वास है कि यहाँ से भारतीय संस्कृति के जो स्वर निकलेंगे, उनका लाभ पूरे यूरोप में लोगों को मिलेगा। भविष्य में मुझे जब भी समय मिलेगा, मैं इस मंदिर में दर्शन करने का प्रयास अवश्य करूंगा। इन्हीं शब्दों के साथ, एक बार फिर आज के इस लोकार्पण समारोह में सम्मिलित सभी अतिथिगणों को, सभी परिवारों को, सभी हरि भक्तों को और पूरी Indian Diaspora को मेरी ओर से इस शुभारंभ पर्व की ढेरों शुभकामनाएं!

बहुत-बहुत धन्यवाद!

मर्सी बोकू!

जय स्वामीनारायण!