Golden Jubilee of Panchayati Raj- Shri Modi addresses Sarpanch Mahasammelan

Published By : Admin | September 18, 2012 | 11:28 IST

मेरा भाषण तो बाद में होने वाला है, लेकिन उसके पहले एक घोषणा करने के लिए खड़ा हुआ हूँ। प्रधानमंत्री ने थोड़े दिन पहले कुपोषण के संबंध में चिंता जताई थी। और उन्होंने कहा था कि ये दु:ख सबसे बड़ी चुनौती है, और इस चुनौती के लिए देश भर में कुछ ना कुछ प्रयास होने चाहिए। मैं प्रधानमंत्री की भावना की कद्र करता हूँ और गुजरात ने इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। हम एक ‘मिशन बलम् सुखम्’ योजना का आज प्रारंभ कर रहे हैं। कुपोषण के खिलाफ एक सर्वांगीण तरीके से जंग कैसे लड़े और कुपोषण से मुक्ति कैसे मिले इसके लिए वैज्ञानिक अभिगम के साथ, जनभागीदारी के साथ, लोकशिक्षण के साथ, निरंतर परीक्षण के साथ एक मिशन के रूप में गुजरात योगदान करना चाहता है। देश की समस्या है, गुजरात का बोझ कम हो यह इस ‘बलम् सुखम् मिशन’ के जरिए हम कोशिश करेंगे। आज यहाँ गाँवों में जो कुपोषित बच्चे हैं उनकी संख्या को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक बच्चे को मदद करने की योजना के अंश के रूप में प्रत्येक जिले में से हर एक प्रतिनिधि को लगभग 2 लाख रुपये का चैक आज दिया जाएगा और ये रकम इसी प्रकार से हर एक गाँव के कुपोषित बच्चों की संख्या के आधार पर 14,000 पंचायतों और 18,000 गाँव, वहाँ के सभी लोगों को ये रकम मिलने वाली है। तो इसका आज शुभारंभ कर रहे हैं। एक छोटी सी सी.डी. के द्वारा सारी जानकारी आपको पता चलेगी और आखिर में मेरे भाषण में सारी विशेष बातें मैं आपके सामने रखूंगा।

मंच पर बिराजमान सभी महानुभावों और गुजरात के गाँव गाँव से पधारे हुए सभी सरपंचश्रीओं, आप सभी का अंत:करण से स्वागत करता हूँ और आपके नेतृत्व में आपके गाँव का चौतरफा विकास हो रहा है इसके लिए मैं आपका बहुत बहुत अभिनंदन करता हूँ। पंचायती राज व्यवस्था आजाद भारत का एक महत्वपूर्ण कदम रहा है। आज से पचास साल पूर्व उस समय के नेताओं ने दूरदर्शिता के साथ सत्ता के विकेन्द्रीकरण के लिए इस पंचायती राज व्यवस्था के मॉडल को विकसित किया था। इस प्रकार सदियों से भारत में ग्राम राज्य की कल्पना हमारी जनमघूँटी में थी। हमारे यहाँ गाँव आर्थिक-सामाजिक रूप से आत्मनिर्भर हो ऐसा सदियों से आयोजन रहा है। हमारी परंपरागत प्रकृति के अनुरूप, अनुकूल ऐसी इस पंचायती राज व्यवस्था ने लोकशाही को मजबूत बनाने में, सत्ता के विकेन्द्रीकरण में और व्यापक रूप से जनभागीदारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और इसीलिए गुजरात सरकार ने पंचायती राज की स्वर्ण जयंती मनाना निर्धारित किया। पचास साल पहले इसकी शुरूआत हुई, कई उतार-चढ़ाव आए, नई व्यवस्था थी, विकसित होना था, सीखते भी गए, सुधारते भी गए और आज समग्र देश में सत्ता के विकेन्द्रीकरण की अपनी इस बात को स्वीकृति मिली है।

भी हमने एक कार्यक्रम किया, तालुका पंचायत की प्रत्येक सीट में ‘अविरत विकास यात्रा’ का कार्यक्रम किया और इस कार्यक्रम में हमारे कोई ना कोई मंत्री आए, लगभग 4100 से ज्यादा कार्यक्रम किए। इस राज्य में पिछले पचास सालों में पंचायती राज व्यवस्था में जिन्होंने भी कोई ना कोई पद प्राप्त किया था, कोई तालुका पंचायत के प्रमुख रहे होंगे, कोई जिला पंचायत के प्रमुख रहे होंगे, कोई गाँव के सरपंच रहे होंगे, बीते पचास सालों में जिन जिन लोगों ने कोई ना कोई जिम्मेदारी निभाई थी, ऐसे सभी भूतपूर्व पदाधिकारियों का सम्मान करने का राज्य सरकार ने एतिहासिक फैसला लिया। भारतीय जनता पार्टी या जनसंघ की राजनीति की यदि बात करें तो पंचायती राज व्यवस्था में भूतकाल में भाजपा का नामोनिशान नहीं था, कोई पहचान तक नहीं थी, जनसंघ तो था ही नहीं। पूरा कार्यकाल, तकरीबन 40 साल एकमात्र कांग्रेस पार्टी की विचारधारा से प्रेरित महानुभावों के हाथ में था। पर हमारे मन पंचायत राज का महत्व था, पंचायत राज मजबूत बने इसका महत्व था। और हमारी भूमिका हमेशा से यही रही है कि इस राज्य का विकास किसी एक व्यक्ति के कारण नहीं है, इस राज्य के विकास में पिछले 50 सालों में हर एक का कोई ना कोई योगदान रहा है, इसके कारण है। इस राज्य का विकास सभी के योगदान की वजह से है। इस मूल मँत्र को लेकर हमने इन 50 सालों के दौरान जो भी पदाधिकारी हो गए उनका गौरवपूर्ण सम्मान किया और मुझे यह कहते हुए आनंद हो रहा है कि बहुत ज्यादा बीमार हो उसे छोड़ कर एक भी व्यक्ति कार्यक्रम में अनुपस्थित नहीं था। तकरीबन 89,000 पदाधिकारियों का गौरव करने का, सम्मान करने का सौभाग्य इस सरकार को प्राप्त हुआ। और उन्हें भी, किसी को 30 साल के बाद याद किया होगा, किसी को 25 साल के बाद याद किया होगा, तो उनके लिए भी वह गौरव का पल था, एक आनंद का पल था।

भाइयों और बहनों, आज ये पंचायती राज व्यवस्था के 50 साल के अवसर पर फिर से एक बार आपके साथ मिलने का कार्यक्रम किया है। आपने देखा होगा कि पिछले पांच साल में कोई साल ऐसा नहीं गया है कि कम से कम दो बार सरपंचों को याद नहीं किया हो। जिस भवन में आप बैठे हो, उस भवन के निर्माण में भी हर एक गाँव का योगदान है, सरपंचों के नेतृत्व में इन गाँवों ने योगदान दिया है। ये संपत्ति आपकी है, इसके मालिक आप हो, और इसीलिए सरपंचों के लिए इस महात्मा मंदिर में आना अपने ही घर आने जैसा, पंचायत के ही किसी काम के लिए आने जैसा सहज लगने लगा है, यह कोई छोटी-मोटी सिद्धि नहीं है। नहीं तो कई बार राज्य, राज्य की जगह चलता है और गाँव, गाँव की जगह चलता है। यह राज्य गाँव को चलाता है और राज्य और गाँव दोनों मिल कर गाँव की भलाई के बारे में सोचते हैं, ऐसा अन्योन्य भक्तिभाव वाला एक नया वातावरण पैदा करने में हम सफल हुए हैं। यहाँ पर तीन सरपंचों को सुनने का मौका मिला, जिसमें पुंसरी गाँव के बारे में तो हिन्दुस्तान के अंग्रेजी अखबारों ने ढेर सारा लिखा है और भारत में एक उत्तम गाँव के रूप में, आधुनिक गाँव के रूप में लगभग इस देश के सभी अंग्रेजी अखबारों ने अपनी मुहर लगाई है। लेकिन ये तीन गाँव ही नहीं है। आनंदपुरा गाँव के भगवतीबहन को मैं सुन रहा था, कितने सारे पैरामीटर में सौ में से सौ प्रतिशत... मैं सरपंचों से विनती करना चाहता हूँ कि हमारे मंत्रियों की एक भी बात आपको माननी हो तो मानना और नहीं मानना हो तो नहीं मानना, इस मुख्यमंत्री की एक भी बात माननी हो तो मानना और नहीं माननी हो तो नहीं मानना, लेकिन कम से कम इन तीन सरपंचों ने जो कर दिखाया है, उनकी बात को मान कर अपने गाँव में हम करके दिखाएं। ये तीन सरपंचो के भाषण के बाद मुझे कुछ कहने को रहता नहीं है, अपने इतने उत्तम अनुभवों का हमारे सामने वर्णन किया है, उत्तम प्रदर्शन करके दिखाया है।

भाइयों और बहनों, समरस गाँव का लाभ अब पूरा गुजरात देख रहा है। सभी को लगता है कि गाँव का सौहार्दपूर्ण वातावरण, प्रेमपूर्ण वतावरण और सभी मिलजुल कर गाँव के विकास की बात करें, यह वातावरण खुद में एक प्रेरणा बन गया है ‘तीर्थ ग्राम’ - पांच वर्ष तक कोई कोर्ट=कचहरी नहीं हुई हो गाँव में, ऐसे गाँव को ‘तीर्थ ग्राम’..! कुछ सरपंचों ने मेरे पास आकर दर्खास्त की है कि साहब, हमारा गाँव तो इतने प्रेम के साथ जीता है, पर हमारा ‘तीर्थ ग्राम’ में नंबर नहीं आता। मैंने कहा इसका कारण क्या..? तो कहते हैं कि हमारे गाँव के पास से हाईवे जाता है और हाइवे पर कोई एक्सीडेंट होता है तो एफ.आई.आर. हमारे गाँव के पुलिस स्टेशन में लिखी जाती है और इसके कारण केस बना हो ऐसा होता है और परिणामस्वरूप हमें ‘तीर्थ ग्राम’ से बाहर रखा जाता है। सरपंचश्रीओं का यह आवेदन मैं स्वीकार करता हूँ और ऐसे किसी कारण से कोई गाँव ‘तीर्थ ग्राम’ की कैटेगरी में आने से नहीं रहेगा, क्योंकि पाँच साल तक गाँव में कोई टंटा-फसाद नहीं हुआ हो, कोई झगड़ा नहीं हुआ हो, गाँव मिल-जुल कर रहे, इस कारण से कोई कोर्ट-कचहरी नहीं हुई हो, तो ये गाँव की सबसे बड़ी घटना है और ऐसे गाँवों का ‘तीर्थ ग्राम’ के रूप में हम स्वागत करेंगे, अपना लिया जाएगा। रोड एक्सीडेंट के कारण एफ.आई.आर. हुई हो, तो उसका नुकसान उस गाँव को ना हो इसकी सूचना मैं डिपार्टमेंट को भी देता हूँ और भूतकाल में भी ऐसी भूलों के कारण रह गए हों तो इनको पश्चाद्दर्शी असर से लाभ देना चाहिए, ऐसा मेरा मत है। क्योंकि इनके गाँव के पास से रोड गुजरती है तो इसमें उनका कोई कसूर नहीं है, भाई और रोड पर कोई एक्सीडेंट हो जाए, और इसके लिए कोई केस बनता है तो इसके कारण वह गाँव ‘तीर्थ ग्राम’ बनने से रह जाता हो तो अपने नियम को हम सुधारेंगे और ऐसे गाँवों को भी ‘तीर्थ ग्राम’ के दर्जे में लिए जाएंगे और ‘तीर्थ ग्राम’ के रूप में इनको जो कोई भी मिलने वाली रकम होगी, उस ईनाम की रकम पश्चाद्दर्शी असर से प्रदान की जाएगी ऐसी सरपंचों की इस मांग को मैं स्वीकार करता हूँ।

भाईयों और बहनों, ज्योतिग्राम योजना जब आई तो लोगों को लगता था कि वाह, ये शाम को खाने के वक्त बिजली नहीं मिलती थी,  ये मोदी साहब ने अच्छा काम किया, कम से कम शाम को खाना खाते समय बिजली तो मिलने लगी..! शुरूआत में लोगों के भाव इतने ही थे। पर आज मुझे कहते हुए गर्व महसूस होता है कि गाँव में 24 घंटे बिजली आने के कारण समग्र गाँव के जीवन में, क्वालिटी ऑफ लाइफ में एक बड़ा बदलाव आया है। इतना ही नहीं, गाँव के अंदर छोटा-मोटा मूल्यवृद्धि वाला प्रोसेसिंग करना हो तो लोग अब गाँव में ही करने लगे हैं। यहाँ हमारे गांधीनगर जिले का ईसनपुर के पास का एक गाँव हरी मिर्च की खेती करता है। मिर्च ज्यादा पकती है तो मिर्ची का भाव घट जाता है, मिर्ची कम पकती है तो किसानों को पूरे पैसे नहीं मिलते, इसलिए दोनों तरफ से किसानों को ही मार पड़ती है। एक बार बहुत ज्यादा मिर्ची हुई और पूरे गाँव की सभी मिर्च बेचो तो गाँव की आय तीन लाख रुपये जितनी होती थी। अब तीन लाख रुपये में पूरा गाँव एक साल तक गुजरा कैसे करे? उस गाँव के दो-तीन अग्रणियों ने विचार किया कि भाई अब तो ज्योतिग्राम आया है, हम कुछ सोच सकते हैं। ऐसा करो, हरी मिर्च को बेचना नहीं है, इनको लाल करते हैं। लाल करके उनका पाउडर बनाएं, चक्की लाएं, ज्योतिग्राम आया है तो चक्की लाकर मिर्ची पीसेंगे और पैकेट में पैक करके मिर्ची बेचनी चालू करते हैं। और लाल मिर्च बेचने के कारण जिस हरी मिर्च का तीन लाख मिलता था, उस गाँव ने उतनी ही लाल मिर्च को बेचा, 18 लाख रूपये की आमदनी हुई..! तब गाँव को समझ आया कि ज्योतिग्राम योजना के आने से हमारे गाँव के विकास की छोटी-छोटी ऐसी कई प्रक्रियाओं... अब कितने सारे लोग सूरत में झोपड़पट्टी में जीते थे और हीरे घिसते थे। अब हीरे की मशीन ही गाँव में ले गए। तो बहन भी जब टाइम मिलता है तो हीरा घिसती है, भाई भी हीरा घिसता है, मां भी हीरा घिसती है और हर हफ्ते इनकी छोटी-छोटी पुडिय़ा बना कर के सूरत जाकर दे आते हैं और 25-50 हजार रुपये मजदूरी के ले आते हैं। ज्योतिग्राम आने के कारण एक प्रकार से उद्योगों का भी विकेन्द्रीकरण हुआ। विभिन्न आद्यौगिक प्रवृतियों का गाँव में विकास हुआ। आज हिन्दुस्तान में, आपको आश्चर्य होगा, अभी जब 19 राज्यों में अंधेरा हो गया था, 60 करोड लोग अंधेरे में 48 घंटे तक अटक गए थे, तब पूरी दुनिया में गुजरात की ज्योतिग्राम योजना के चर्चे हो रहे थे। एक मात्र गुजरात था जो जगमगा रहा था। ऐसे हम पिछले पाँच साल से गला फाड़-फाड़ कर ज्योतिग्राम-ज्योतिग्राम कह रहे थे, गुजरात में 24 घंटा बिजली है ये बात कर रहे थे, तो किसी के गले नहीं उतरती थी, लेकिन जब पूरे देश में अंधकार हुआ तब अपना उजाला दिखा..! पूरे देश को पता चला, पूरी दुनिया को पता चला।

भाईयों और बहनों, इसका दूसरा बड़ा लाभ मिला है वह शिक्षा में मिला है। मुझे याद है, एक बार हमारी हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजों के साथ मीटिंग थी। एक राज्य का जो रिपोर्टिंग था उसमें केसों की पेन्डेंसी के कारणों में एक कारण ऐसा दिया गया कि भाई, हमारे यहाँ कोर्ट के मकान ऐसे हैं कि अंदर सूरज की रोशनी नहीं होती है और हफ्ते में चार-छह घंटे के लिए बिजली उपलब्ध होती है। इतने समय में जितने केस चल सकते हैं, चलाते हैं। बाकी समय में अंधेरे के कारण केस चल नहीं सकते और ये हमारी मजबूरी है। एक राज्य ने इस इक्कीसवीं सदी के पहले दशक में सुप्रीम कोर्ट के जज की हाजिरी में हमारी मीटिंग में की हुई यह बात है। अपने यहाँ गुजरात में 24 घंटे बिजली होने के कारण स्कूलों में कम्प्यूटर चलने लगे, ब्राडबैंड कनेक्टिविटी के कारण इंटरनेट चालू हो गया, हम लांग डिस्टेन्स एज्यूकेशन देने लगे, जो अच्छी से अच्छी शिक्षा शहर के बच्चों को मिलती है वही लांग डिस्टेन्स एज्यूकेशन सैटेलाइट के जरिए हम गाँवों में भी देने लगे हैं। एक प्रकार से जीवन में बदलाव आया, परिवर्तन आया और इस परिवर्तन के मूल में ये छोटी-मोटी विकास की व्यवस्थाएं हैं।

मने निर्मल गाँव किया। आज भी दो बातें मुझे पूरी करनी है भाइयों, और सभी सरपंचों के पास से मुझे इसका आश्वासन चाहिए, आश्वासन दोगे, भाईयों..? जरा जोर से बोलो, दूसरे हॉल में बैठे हैं वे भी बोलें, क्योंकि आज इस महात्मा मंदिर के तीन ऐसे बड़े हॉल और एक छोटा आधा, ऐसे साढ़े-तीन हॉल में इतनी भीड़ है। मैं सभी में जाकर राम-राम करता हुआ मंच पर आया हूँ। सभी हॉल में जाकर आया हूँ, सभी सरपंचों को मिलकर आया हूँ। अब हमें तय करना है, हमारे गाँव में कोई घर ऐसा नहीं हो जिसमें शौचालय ना हो, अब ऐसा नहीं चल सकता। हमारी बहन-बेटीयों को खुले में प्राकृतिक हाजत के लिए जाना पड़े, ये हमारे गुजरात को शोभा नहीं देता। इस काम के लिए सरकार पैसा देती है, पर गाँव में थोड़ा करवा लेना पड़े। सरपंच तय करे, क्योंकि निर्मल गाँव की पहली शर्त ही यह है कि हमारे गाँव में हर एक घर में शौचालय होना चाहिए। मुझे यह सपना पूरा करना है और आने वाले दिनों में इस काम को सम्पन्न करना है। ये काम मैं तभी सफलतापूर्वक पूरा कर सकता हूँ यदि मुझे मेरे 18,000 गाँवों का सहयोग हो, मेरे 14,000 सरपंचों का मुझे समर्थन हो तो ही संभव हो सकता है और इसके लिए आपको मुझे आज वचन देना है कि आपके गाँव में अब किसी बहन-बेटी को कुदरती हाजत के लिए खुले में जाना नहीं पड़ेगा, घरों में शौचालय का काम हम पूरा करेंगे। और सरपंचों मेरे शब्द लिख कर रखो, मैं एडवांस में पैसा देने को तैयार हूँ।

दूसरा एक काम मुझे करना है। अभी हमने बहुत बड़े पैमाने पर घर देने का काम किया। 40 साल में 10 लाख घर बने थे। उसमें भी खेत मजदूरों के घर तो ऐसे बने थे कि बकरी बंधी हो तो बकरी दीवार के साथ घर तोड़ कर बाहर निकल जाती है, बकरी दीवार तोड़ दे, ऐसे पराक्रम किए है़ं..! इसलिए इस समय मैंने तय किया कि खेत मजदूरों के मौजूदा घरों को भी नए सिरे से पक्के बनाए जाएंगे। हजारों खेत मजदूरों के मकान हम नए सिरे से बनाने वाले हैं। पर भाइयों-बहनों, 10 लाख मकान 40 साल में बने थे, हमने बीते 10 सालों में 16 लाख मकान बनाए और ये एक महिने में 6 लाख मकान बनाने के खातिर पहले किश्त के 21,000 रूपये का चेक इनके खाते में जमा करवा दिए हैं, यानि कुल 22 लाख मकान। 40 साल में 10 लाख और 10 साल में 22 लाख मकान..! हमारी काम करने की गति कितनी तेज है इसका अंदाजा लगा लो। हालांकि अभी भी गाँव में दो-पाँच, दो-पाँच घर ऐसे हैं, जो घर होने के कारण सरकार की व्याख्या में नहीं आते हैं। क्योंकि वे बेघर नहीं हैं, बेघर होते तो सरकार इनकी मदद करे, सरकार के पैसे से इनका घर बन जाए। पर जिनका कच्चा, टूटा-फूटा, कंगाल घर हो तो दफ्तर में इसका रिकार्ड ही नहीं होता, इसका क्या..? भाईयों-बहनों, सरपंचश्रीओं, मेरी एक विनती स्वीकार करो। आप आपके गाँव में ऐसे कच्चे घर हों, इनका फोटो निकाल लो और जिनका घर हो, जो उस घर में रहता हो, उसका भी फोटो खींच लो और तलाटी या ग्राम-सेवक के साथ मिलकर इसकी लिस्ट बना लो कि गाँव में पाँच घर कच्चे हैं या तीन घर कच्चे हैं, अभी इस घर में कौन रह रहा है, कितने सालों से रह रहा है, ये सब आप तैयार कर दो। लाखों घर हो तो लाखों, पर मुझे इन सभी को पक्के मकान करके देने हैं। और ये संभव है, हो सकता है, सरपंच थोड़ा इनिशिएटिव लें। अब हमारे गाँव में कच्चे घर क्यों हो, भाई? जिसके पास कुछ नहीं था उसे घर मिल गया, तो कच्चा घर गाँव में नहीं होना चाहिए, पक्का घर उसे मिलना चाहिए। 25 लाख से ज्यादा घर... और 2011 का सेन्सस और दूसरा 2012 का सोश्यो-इकॉनोमिक सेन्सस जो हुआ है, इसके आधार पर आंकड़ों को लेकर मैं इस काम को परिपूर्ण करना चाहता हूँ, लेकिन ये काम सच्चा और अच्छा करने के लिए मुझे सरपंचश्रीओं की मदद चाहिए।

दूसरा एक ‘मिशन बलम् सुखम्’, यह ‘मिशन बलम् सुखम्’ जो है इसकी आज शुरूआत की है। हमारे गाँव में पाँच या दस बच्चे कुपोषण से पीडि़त हों, ज्यादा बच्चे कुपोषण से पीडि़त हों, तो उसके लिए आंगनवाड़ी बहनों को ट्रेनिंग दी है, आशा वर्करों को ट्रेनिंग दी है, और इस प्रकार की और अच्छी फिल्में बना कर के गाँव-गाँव में लोकशिक्षा का अभियान चलाने वाले हैं, छात्राओं को कुपोषण के खिलाफ लड़ाई में सहयोगी बनाने वाले है, बारहवीं कक्षा से ज्यादा पढ़ी लड़कियों को इससे जोड़ने वाले हैं। दूसरा, दादीमाँओं को जोड़ने वाले हैं, क्योंकि घर के अंदर ज्यादातर दादीमाँ का रोल बहुत बड़ा होता है। दादीमाँ कई बार ऐसा मानती हैं कि बच्चा छोटा है इसे ये खिला दो, वो खिला दो और आखिरकार उसके स्वास्थ्य की जो चिंता करनी चाहिए वो नहीं होती है, इसलिए ऐसा भी तय किया है कि दादीमाँओं के भी क्लास लें। और ये जो नई ब्याहता बहुएं हैं, जिन्हें बच्चों को पालने का बहुत ज्यादा ज्ञान नहीं होता है, यदि दादीमाँ घर में हो तो मदद कर सकती है और उसे समझा सकती है।  तो एक तरह से सामाजिक क्रांति के लिए एक बड़ा प्रयास शुरू करने का तय किया है और ‘बलम् सुखम्’ के द्वारा आर्थिक मदद करके भी प्रति बालक 40 रूपया जितनी रकम खर्च कर के उन छोटे-छोटे बच्चों को कुपोषण के सामने टिकने के लिए, लड़ने के लिए, कुपोषण से मुक्त होने के लिए जो जो आवश्यकता हो उसकी पूर्ति हो सके और तकरीबन तीन एक हजार की बस्ती का गाँव हो, और कुपोषण वाले बच्चों की संख्या यदि ज्यादा हो तो लगभग एक-एक, दो-दो लाख रुपया प्रत्येक गाँव को इस ‘मिशन बलम् सुखम्’ के अंतर्गत मिल सकता है और चार प्रकार के स्तर बनाएं हैं। एक तो ऐसी व्यवस्था की है कि कोई बच्चा अति कुपोषित हो तो उसे सरकारी व्यवस्था में ले जाना, पन्द्रह दिन पूरी तरह से जिस तरह हॉस्पिटल में रखते हैं उस तरह से इस बालक में फिर चेतना लाने के लिए जो कोई प्रयास करना पड़े, इसके लिए स्पेशल ट्रैन्ड लोग रखे जाएंगे, पर गुजरात में से कुपोषण से मुक्ति के लिए आने वाले दिनों में मुझे एक अभियान चलाना है। और इसके लिए जागृति बड़ी बात है, इसमें रुपया बड़ी बात नहीं है, जागृति ही बड़ा काम है। क्योंकि कई बार बिना हाथ धोए खाना खाने के कारण भी कई बार यह महामारी आ सकती है। अगर बच्चे को तीन दिनों तक दस्त हो जाए तो आपने छह महीने लगाएं हों उसका वजन बढ़ाने में, और ऐसे हँसता खेलता किया हो, लेकिन तीन दिनों में बिल्कुल ढीला-ढाला हो जाता है। छोटी-छोटी बातें हैं, इन छोटी-छोटी बातों पर भी ध्यान देने के बारे में हमने सोचा है और इसमें आप लोगों का सहयोग चाहिए।

दूसरी एक बात, सरपंचश्रीओं का काम अब बढ़ता जा रहा है। पहले तो सरपंच मतलब गाँव का एक प्रतिष्ठित व्यक्ति, पाँच वर्ष में कभी एकाध लाख रूपया आए तो आए, गाँव जैसा हो वैसा..! आज तो सरकारी अधिकारियों का काफिला आता रहता है, गाँवों में आपने देखा, बैंक के अंदर 50-50, 60-60 लाख रूपये पड़े होते हैं, ये सरपंच बता रहे थे..! अभी मुझे एक सरपंच मिले, मुझे कहा कि हमें इनाम के तौर पर जितने पैसे मिले हैं, वे सभी हमने बैंक में फिक्स डिपोजिट कर दिए हैं, और उसके ब्याज में से सफाई का कान्ट्रेक्ट दे दिया है। पूरे गाँव की सफाई, जैसे राष्ट्रपति भवन की सफाई बाहर से करवाते हैं, ऐेसे ही ये लोग गाँव की पूरी सफाई बाहर से करवाते हैं..! आप सोचिए कि यदि उत्साह और उमंग हो तो किस तरह से काम हो सकता है इसका ये जीता जागता उदाहरण है। और इस स्थिति को देखते हुए सरपंचश्रीओं के तहत भी कुछ खर्च का प्रावधान करने की जरूरत लगती है। सरपंचों को भी कई बार खुद की जेब से खर्च करने पड़ते हैं, मेहमान आते हैं तो प्रबंध करना पड़ता है, उनके पास कोइ व्यवस्था नहीं होती है और इसलिए सरकार ने वार्षिक 10,000 रूपए सरपंचों के हाथों में देने का निर्णय लिया है। ये राशि सरपंच अपने स्वविवेक से खर्च कर सकते हैं और गाँव के विकास में सरपंच को कोई मुश्किल ना हो इस पर ध्यान देने का हमारा पूरा प्रयास रहेगा। आप आज इस सरपंच सम्मेलन में आए, एक नए विश्वास के साथ ग्रामीण विकास के सपने को लेकर हम आगे बढ़ें।

भाइयों और बहनों, बदकिस्मती ऐसी है कि अभी कोई भी कार्यक्रम करो, कुछ लोग इसमें चुनाव को ही देखते हैं। यह बारह महीने में मैं तीसरी बार सरपंचों से मिल रहा हूँ, भाई। और यदि चुनाव ही ध्यान में होता तो मुझे इन छोटे-छोटे बच्चों के लिए ‘बलम् सुखम्’ कार्यक्रम करने की जल्दी नहीं होती, ये कोई वोट देने जाने वाले नहीं हैं। इन छोटे-छोटे बच्चों के आरोग्य की चिंता इसलिए कर रहा हूँ क्योंकि मुझे गुजरात के आने वाले कल कि चिंता है। भाईयो-बहनों, हमारी हर बात को चुनावी तराजू में तोलने की आदत समाज को बहुत नुकसान करती है। अरे, चुनाव तो एक बायप्रोडक्ट है। अच्छा काम जिसने किया है उसे जनता अब अच्छी तरह पहचानती है। प्रजा समझती है कि क्या सही है और क्या गलत, और उसीके आधार पर जनता अपना निर्णय लेती है। और इसलिए आने वाले दिनों में कैसे भी उत्तेजना हो, हमें अपना काम शांत चित्त से, सामंजस्यपूर्ण वातावरण में, एकता के वातावरण में, कहीं भी कोई तनाव पैदा ना हो इस तरीके से जैसे बीते दस सालों में विकास की यात्रा को आगे बढ़ाई है, ऐसे ही बढ़ाते रहें।

भाइयों और बहनों, यहाँ पर मुझे इस बात के लिए अभिनंदन दिए गए कि 4000 दिनों तक अखंड रूप में, अनवरत रूप से मुख्यमंत्री पद पर कार्य करने का मुझे मौका मिला। गुजरात में पहले कभी भी इतने लंबे समय तक राजनैतिक स्थिरता नहीं रही है। दो साल, ढाई साल होते ही सब कुछ हिलने लगे..! लेकिन राजकीय स्थिरता के कारण नीतियों के अंदर लगातार हिम्मत भरे निर्णय करने की एक ताकत आई, सरकारी तंत्र को पूरी तरह से लोग उन्मुख शासन बनाने में सफलता प्राप्त हुई और इसके परिणामस्वरूप... जिनको देखना ही नहीं है उनके लिए हमें समय बर्बाद करने की जरूरत नहीं है, जिनको सुनना ही नहीं है उनके कान में ड्रिलिंग करके कुछ सुनाने के लिए हमें मेहनत करने की जरूरत नहीं है, जिनको देखना है उनको आसानी से विकास दिखता है। ‘गुजरात मतलब विकास, विकास मतलब गुजरात’, ये पूरे विश्व में एक स्वीकृत बात बन गई है। पर इसका यश किसी नरेन्द्र मोदी को नहीं जाता है। ये 4000 दिनों में गुजरात ने जो विकास की ऊचांइयों को प्राप्त किया है इसका श्रेय गुजरात के मेरे छह करोड भाईयो-बहनों को जाता है, मेरी सरकार में बैठे मेरे साथी, छह लाख कर्मयोगी भाइयों-बहनों, इनकी प्रजालक्षी प्रवृत्ति, प्रजालक्षी काम, इनको श्रेय जाता है और कुदरत की भी अपने ऊपर कृपा रही है, कुदरत का भी जितना आभार माने उतना कम है। इस पूरी प्रगति की यात्रा को हमें और आगे बढ़ाना है। मैं सभी सरपंचों को कहना चाहता हूँ कि भले ही गुजरात की इतनी वाह-वाही हो रही हो, आपको भी संतोष होता होगा कि गाँव में कभी सी.सी. रोड कहाँ थे, गाँव में कभी गटर का विचार कहाँ था, गाँव में कभी बिजली कहाँ देखी थी, गाँव में कभी कम्प्यूटर कहाँ से हो सकते हैं, गाँव में कभी ‘108’ दौड़ी आए ऐसा कैसे हो...? मोदी साहब ने बहुत अच्छा किया, ऐसा आपको लगता होगा। लेकिन आपको भले ही संतोष हो, पर मुझे अभी संतोष नहीं है। ये जो कुछ भी हुआ है ये सब तो पहले हो जाना चाहिए था, पर हुआ नहीं और जो ये गड्ढे रह गए थे, उन गड्ढों को भरने का काम किया है। ये तो मैंने पुराने गड्ढे भरे हैं, गुजरात की दिव्य और भव्य इमारत बनाने की शुरूआत तो अभी इस जनवरी से करने वाला हूँ। इस जनवरी में आपके आदेश से एक भव्य और दिव्य गुजरात का निर्माण करना है और इसके लिए मुझे आपका आशीर्वाद चाहिए। इस दस वर्ष के गड्ढे भरने में इतना संतोष हुआ, तो भव्य ईमारत कैसा संतोष देगी इसका अंदाजा हम कर सकते हैं।

भाइयों और बहनों, बाकी सभी वाद-विवाद हो गए दुनिया में, ये वाद आ गया, वो वाद आ गया, ढींकणा वाद आ गया, फलाना वाद आ गया..! अनुभव ये कहता है कि भारत का भला करना हो तो एक ही वाद काम में आने वाला है और इस वाद का नाम है ‘विकास वाद’। अंत्योदय की सेवा, वंचितों का कल्याण, विकास की यात्रा में सभी को भागीदार बनाना, ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय, सर्वे अपि संतुषिजन, सर्वे अपि सुखिन: संतु, सर्वे संतु निरामया...’, इस कल्पना को साकार करने का प्रयास। सभी का भला हो, सभी सुखी हो, सभी को आरोग्य मिले, यह ‘सबका साथ, सबका विकास’ इस मंत्र ही अपने काम आया है, इस मंत्र को हमें आगे बढ़ाना है और हमारे गुजरात को और नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए हम सब साथ मिल कर काम करें, इसी प्रार्थना के साथ, आप आए, 4000 दिनों के संयोग से आज आपका आशीर्वाद मिला और गुजरात की पंचायती राज व्यवस्था... और आपको मेरी बिनती है कि आप भी आपके गाँव में पंचायती राज व्यवस्था की 50 वर्ष की, आपकी कल्पना के अनुसार कोई ना कोई उत्सव मनाओ। लोकशिक्षण का काम करना चाहिए, बच्चों को बुला कर उनको पंचायती राज के बारे में समझाना चाहिए। ये पूरी लोकतांत्रिक प्रक्रिया है, ये प्रजातांत्रिक प्रक्रिया निरंतर चलती रहनी चाहिए। और पंचायती राज व्यवस्था के 50 वर्ष मनाने के चार-छह महीने अभी भी हमारे पास हैं, इसका अधिकतम लाभ लेकर पंचायती राज व्यवस्था में ट्रांसपेरेंसी कैसे आए, जन भागीदारी कैसे बढ़े, जन शिक्षा को बल कैसे मिले, इसके ऊपर आप ध्यान केन्द्रित करोगे ऐसी अपेक्षा के साथ आप सभी को बहुत बहुत शुभकामनाएं देता हूँ।

य जय गरवी गुजरात...!!

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SP-Congress will distribute benefits to those who are waging vote jihad for them: PM Modi in Hamirpur
May 17, 2024
SP-Congress will distribute benefits to those who are waging vote jihad for them: PM Modi in Hamirpur

भारत माता की..

भारत माता की..

भारत माता की..

पूरे गावन-गावन से जित्ती जनता आई है, सब जने का हमार राम-राम। मैं माता बड़ी चंद्रिका और जमुना माता की धरती को श्रद्धापूर्वक प्रणाम करता हूं। मैं रानी लक्ष्मीबाई की कर्मभूमि बुंदेलखंड को नमन करता हूं। बुंदेलखंड के लोग राष्ट्रहित के लिए सबसे आगे खड़े होने वाले लोग हैं। जिसको 4 जून का नतीजा जानना हो, वो बुंदेलखंड में ये दृश्य देख लें, बुंदेलखंड कह रहा है- फिर एक बार.. फिर एक बार.. फिर एक बार।

साथियों,

यहां आप सबके बीच आने से पहले मैंने स्वामी ब्रह्मानन्द जी को भी प्रणाम किया। स्वामी ब्रह्मानन्द जी जैसे महान सेनानी, महान राष्ट्रसंत अमृत महोत्सव के दौरान हम सबने उनका पुण्यस्मरण किया था। हमारी सरकार ने उनके योगदान को इतिहास में दर्ज किया। लेकिन, पिछली सरकारों ने उन्हें कभी सम्मान नहीं दिया। वो सारा श्रेय केवल एक शाही परिवार को देना चाहते थे। दलितों, पिछड़ों को सम्मान मिले ये उन्हें स्वीकार नहीं था।

साथियों,

आज मैं आपको सपा और कांग्रेस से सावधान करने के लिए आया हूं। सपा- कांग्रेस केवल आपका वोट तो ले लेते हैं लेकिन, ये लोग सरकार में आते हैं तो सौगात किसको बांटते हैं? वे सौगात उनको बांटते हैं जो उनके लिए वोट जिहाद करता है। (ये फोटो- फोटो वाले सब फोटो नीचे रख दो और अपने हाथ नीचे करके आराम से बैठो, पीछे लोग डिस्टर्ब हो रहे हैं। ये सब मातायें- बहनें भी अपनी जगह पर बैठें जरा, ये आप लोग जगह कब्जा करते हैं पीछे वाले परेशान होते हैं भाई। भारत माता की.. भारत माता की)

भाइयों- बहनों,

इस बार तो सपा-कांग्रेस ने चुनाव से पहले ही इरादे साफ कर दिये हैं। कांग्रेस कह रही है कि वो सबकी संपत्ति की जांच करायेगी। फिर आपकी संपत्ति में से एक हिस्सा अपने जो वोट जिहाद करने वाली वोट बैंक है उन लोगों को दे देंगे। आप मुझे बताइये भाइयों, आपकी संपत्ति किसी भी सरकार को आप छीनने देंगे क्या? अगर मेरी बात पहुंची है तो सब लोग जवाब देना, क्या किसी भी सरकार को आप अपनी संपत्ति छीनने देंगे क्या? किसी को लूटने देंगे क्या? आपके माता-पिता ने जो मेहनत करके कमाया है उसपर आपका अधिकार है कि नहीं है? वो आपको मिलना चाहिए कि नहीं मिलना चाहिए? लेकिन ये सपा- कांग्रेस वाले अपने चुनावी मेनिफेस्टो में कह रहे हैं कि वो एक्सरे निकालेंगे। आपके पास कितनी जमीन है? आपका घर कितना बड़ा है? आपके पास कोई गहने हैं क्या? आपका मंगलसूत्र कहां पड़ा है? और फिर आपकी जरूरत से ज्यादा जो भी है, जिसके पास नहीं है वो वोट जिहाद वालों को बांट देंगे। क्या आप अपने माता-पिता की संपत्ति को बांटने देंगे क्या? (आप फोटो निकालने में मशगूल हैं कि सुनते भी हैं, लग नहीं रहा है आप सुनते हैं। आपको फोटो में ज्यादा इंटरेस्ट है। देखिए, जगह कम है कृपा करके आगे आने की कोशिश मत कीजिए, जहां हैं वहां खड़े रहिये ना। अगर आप इजाजत दें तो मैं बोलना शुरू करूं, आप इजाजत दें तो मैं बोलना शुरू करूं)

साथियों,

बाबा साहेब अंबेडकर ने धर्म के आधार पर आरक्षण का घोर विरोध किया था और हमारी संविधान सभा ने भी तय किया था कि हमारे देश में कभी भी धर्म के आधार पर आरक्षण नहीं होगा लेकिन, जहां कांग्रेस सरकार है वहां ये लोग दलितों- पिछड़ों उनका आरक्षण कम करके उसे भी मुसलमानों को देना उन्होंने शुरू कर दिया है। आपको जानकर के आश्चर्य होगा ये संविधान की कैसी अवहेलना करते हैं? बाबा साहेब अंबेडकर के सपनों को कैसे चूर- चूर करते हैं? उन्होंने कर्नाटक में क्या किया, कर्नाटक में जितने भी मुसलमान है उन सबको रातों- रात उन्होंने ओबीसी बना दिया एक ठप्पा मार के कागज निकाल दिया, इसका परिणाम ये हुआ कि जो पिछड़ों का आरक्षण था उसमें वो आ गयें तो सारा डाका डालकर के ले गये और सारे पिछड़े रह गये और अब यही मॉडल ये पूरे देश में लागू करना चाहते हैं। आप क्या हमारे एससी, एसटी, ओबीसी का हक लूटने देंगे क्या? छीनने देंगे क्या? सपा- कांग्रेस को ये पाप करने देंगे क्या? साथियों, इतना ही नहीं अब ये संविधान बदलकर एससी, एसटी, ओबीसी का पूरा का पूरा आरक्षण मुस्लिमों को देना चाहते हैं। मैंने समाजवादी पार्टी से कहा था अरे आप तो दिन- रात पिछड़ों की बातें करते हो, पिछड़ों की राजनीति करते हो, आप तो हिम्मत करके ये पिछड़ों के साथ जो अन्याय करने का षड्यंत्र चल रहा है, पिछले दरवाजे से पिछड़ों का आरक्षण लूटने का जो जाल बिछाया जा रहा है जरा उसका विरोध तो कीजिए, लेकिन ये सपा वाले मुंह पर ऐसा ताला लगा के बैठ गये, ऐसा ताला लगाकर के बैठ गये कि वो बोलने को तैयार नहीं है, क्या ये सपा वालों को भी माफ कर सकते हैं क्या? साथियों, कांग्रेस आपका आरक्षण खत्म कर रही है और सपा उसका समर्थन दे रही है और किसकी खातिर? सिर्फ और सिर्फ जो वोट जिहाद करते हैं वो वोट बैंक के खातिर करना चाहते हैं।

साथियों,

सपा वाले तुष्टीकरण के लिए किसी भी सीमा तक जा सकते हैं। हमारे कल्याण सिंह जी देश के इतने महान नेता थे। उन्होंने पिछड़ों का इतना सम्मान बढ़ाया। उनका निधन हुआ, तो सपा के मुखिया उन्हें श्रद्धांजलि देने तक नहीं गये और कारण क्या है? कारण ये ही है कि हमारे कल्याण सिंह जी बाबू जी राम भक्त थे इसलिए मृत्यु के बाद भी कल्याण सिंह जी ने राम मंदिर के लिए अपनी सरकार बलिदान कर दी थी अगर ये बाबूजी को श्रद्धांजली देने जाते तो इनका वोट बैंक नाराज हो जाता और वोट बैंक को खुश करने के लिए लोग क्या करते हैं, जब यूपी में एक माफिया की मौत होती है तो ये उसकी कब्र पर फातिहा पढ़ने पहुंच जाते हैं।

साथियों,

सपा-कांग्रेस के कुशासन में बुंदेलखंड ने कितनी पीड़ा झेली है? कितनी बदहाली यहां हुई थी? ये लोग भूले नहीं हैं। एक जमाना था, जब सूखा, बुंदेलखंड की पहचान बन गया था। बूंद-बूंद पानी के लिये हमारा बुंदेलखंड तरसता था और सपा- कांग्रेस की सरकारें क्या करती थीं? योजनाएं निकालती थी, फीते काटती थी, दिये जलाती थी, अखबारों में एडवरटाइजमेंट देती थी और फिर पैसा खा जाती थी। गर्मी में पानी की ट्रेनें चलाने की नौबत आ जाती थी। इतना ही नहीं दुर्भाग्य तो वो था कि लोग स्टेशन पर जब ट्रेनें चलती थीं वहां पहुंचकर के शौचालय में जो पानी आता है ट्रेन में उसमें से भी पानी भरकर के घर लाने ले जाने के लिए एक- दूसरे के साथ धक्का- मुक्की करने की नौबत आती थी। आज जो नई पीढ़ी के लोग है, जो फर्स्ट टाइम वोटर हैं, शायद ना उन्होंने ये देखा होगा ना सुना होगा। मैंने बहुत सालों तक यहां संगठन का काम किया है। मैं आपके दर्द को जानता था और मेरे गुजरात में इस क्षेत्र के बहुत लोग रहते हैं, उनसे मेरा बड़ा निकट नाता है वे जब यहां का वर्णन करते थे आंख में से आंसू आ जाते थे लेकिन सपा- कांग्रेस ने यही हाल बना रखा था बुंदेलखंड का। साथियों, इन लोगों ने सूखे को ये तो बुंदेलखंड की किस्मत है हम क्या करें, हाथ ऊपर कर दिए थे। लेकिन साथियों, चुनौती को चुनौती देना उसका दूसरा नाम है मोदी और जो चुनौती से जो टकराता है वो ही तो मोदी कहलाता है। लेकिन, आपने अपने इस सेवक मोदी पर भरोसा किया। मोदी ने इस संकट से लड़ने के लिए खुद को खपा दिया। हमने जलजीवन मिशन शुरू किया। सिर्फ 5 साल में हमने 12 करोड़ से ज्यादा घरों तक नल से जल पहुंचाया है। हमने इस क्षेत्र में सैकड़ों की संख्या में पानी की टंकियां बनवायी हैं। आज इस क्षेत्र में 400 से ज्यादा गांवों में पानी पहुंच चुका है। करीब पौने दो लाख घरों में शुद्ध पानी के कनेक्शन दिये जा चुके हैं। मैं बुंदेलखंड में काम की रिपोर्ट लगातार लेता रहता रहता हूं। जो समस्याएं बची हैं, उन पर भी काम चल रहा है। हमारी सरकार ने केन-बेतवा लिंक परियोजना पर भी काम शुरू कर दिया है और केन-बेतवा लिंक परियोजना के लिये हमारी सरकार आपको पानी मिले, आपकी पानी की समस्या दूर हों इसलिए मोदी, ये सरकार 40 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च कर रही है। जब ये योजना पूरी होगी तो बुंदेलखंड के इतिहास में एक नया अध्याय शुरू होगा। विकास को नए पंख लग जायेंगे और याद रखियेगा ये योजना सिर्फ और सिर्फ भाजपा ही पूरा कर सकती है और इसलिए बुंदेलखंड के तेज विकास के लिए मैं आपके पास, भाजपा को आशीर्वाद देने के लिए मांग करने के लिये आया हूं।

साथियों,

पिछली सरकारों ने बुंदेलखंड के किसानों को आत्महत्या के लिए मजबूर किया था। आज मोदी ने हमीरपुर, झांसी और जालौन में किसान सम्मान निधि के 1800 करोड़ रुपये किसानों के खातों में जमा किये हैं। हमने जालौन और हमीरपुर में स्टोरेज फैसिलिटी बनाई है। यूरिया की जो बोरी दूसरे देशों में 3 हजार की है वो भाजपा सरकार आपको 300 रुपये से भी कम कीमत पर दे रही है। हम गरीबों को मुफ्त राशन, मुफ्त इलाज और पक्के मकान दे रहे हैं और मोदी सिर्फ इतने पर ही नहीं रुका है, अगले 5 वर्षों में ये सुविधाएं हर गरीब तक पहुंचेगी। आप लोग मेरा एक काम करेंगे अगर आप सबके सब हाथ ऊपर करके बताते हैं तो फिर मैं बोलूंगा। क्या आप मेरा एक काम करेंगे? आप मेरा एक काम करेंगे? आप मेरा एक काम करेंगे? आप गांव- गांव जाते होंगे, अलग-अलग बस्तियों में जाते होंगे, अगर कहीं पर भी आपको इक्का- दुक्का ऐसे परिवार मिल जायें, जिनके पास पक्का घर नहीं है वो झोपड़ी में रहते हैं, कच्चे घर में रहते हैं, कोई ऐसे परिवार जिनको गैस का कनेक्शन नहीं मिला है तो मेरी तरफ से मैं आपको कहता हूं आप उनका नाम- पता लिखकर के मुझे भेज दीजिए और उनको कहना, उनको कहना कि मोदी जी हमीरपुर आए थे और मोदी जी ने गारंटी दी है कि 4 जून के बाद जब नई सरकार बनेगी तो आपका मकान भी बनेगा। आप मेरी तरफ से उनको गारंटी दे देंगे? गारंटी दे देंगे? मेरे लिए तो आप ही मोदी है और इस काम के लिए हम तीन करोड़ नए पीएम आवास बनायेंगे, ये मैं आपको गारंटी देता हूं।

साथियों,

हर परिवार में आजकल बुजुर्ग होते हैं, माता- पिता, दादा- दादी, चाचा- चाची, नाना- नानी और जो बेटे- बेटी कमाते हैं उनके पास दो जिम्मेवारी होती है, एक तो अपने बुजुर्गों की सेवा करना, उनकी चिंता करना, खुद का ख्याल रखना और अपने बच्चों की परवरिश करना और 70 साल की आयु के बाद कोई ना कोई छोटी- मोटी बीमारी तो आ ही जाती है तो स्वाभाविक जो बेटा- बेटी कमाते हैं उन पर एक नया खर्च आ जाता है हजार- दो हजार रुपया, कभी बड़ी बीमारी आ जाये तो सब कुछ गिरवी रख देना पड़ता है और इसलिए जो बेटे- बेटी कमाते हैं उनपर आर्थिक बोझ ना पड़े इसलिए मोदी ने तय किया है कि आपके परिवार में कोई भी व्यक्ति हो, आपके परिवार के 70 साल से ऊपर के जो भी लोग होंगे अगर उनको बीमारी हुई, इलाज की जरूरत हुई तो खर्चा आपका बेटा मोदी करेगा। अब वो इलाज का खर्चा आपको नहीं करना पड़ेगा।

भाइयों- बहनों,

मेरा एक और संकल्प है जो हमारी बहनें जिनके अंदर महारत है उनको मैं ऐसी नई- नई चीजें सिखाना चाहता हूं, काम के अवसर देना चाहता हूं और मैंने तय किया है कि मैं तीन करोड़, तीन करोड़ लखपति दीदी बनाना है मुझे, ये तीन करोड़ लखपति दीदी ये बहुत बड़ा काम है लेकिन मोदी को बड़े काम करने की आदत है और ये मोदी की गारंटी है और इसके लिए मुझे आपका आशीर्वाद चाहिए।

साथियों,

पिछली सरकारें कहती थीं बुंदेलखंड तो बीहड़ है, बीहड़। वहां कौन जाएगा? मैं कहता हूं, बुंदेलखंड वीरता और विकास की धरती है। वो कहते थे कौन जायेगा, मैं कहता हूं कौन नहीं आयेगा? आज बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे यहां विकास को रफ्तार दे रहा है। एक्सप्रेस-वे के किनारे उद्योग-धंधे लग रहे हैं। हमीरपुर में बड़ी- बड़ी कंपनियां आ रही हैं। सुमेरपुर में सीमेंट फैक्ट्री भी लगी है। भाजपा सरकार, देश में दो डिफेंस कॉरिडोर बना रही है। मोदी ने तय किया, एक डिफेंस कॉरिडोर वीरों की धरती बुंदेलखंड में बनेगा। हमारा प्रयास है कि युवाओं को बुंदेलखंड छोड़कर के जाना ना पड़े, हमारा संकल्प है- बुंदेलखंड उद्योग और रोजगार का केंद्र बने।

साथियों,

आज आल्हा-ऊदल की धरती से मैं एक और प्रश्न पूछना चाहता हूं। आप मुझे बताइये, राष्ट्र का स्वाभिमान, इस मिट्टी का सम्मान, कुछ इससे भी ऊपर हो सकता है क्या? हो सकता है क्या? मोदी ने कश्मीर से 370 हटाई, मोदी ने पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया। देश के स्वाभिमान के लिए मोदी दुनिया की बड़ी-बड़ी ताकतों से भिड़ा, क्या ये सब इसलिए था कि कांग्रेस इस पर पानी फेरने की बात करे? आप देख रहे होंगे कांग्रेस पार्टी कह रही है कि वो कश्मीर में फिर से आर्टिकल-370 वापिस लायेंगे और लगा देंगे। कांग्रेस आजकल हमें धमकी दे रही है कि पाकिस्तान से डरो, पाकिस्तान के पास एटम बम हैं। मैं तो कहता हूं कांग्रेस के लोगों को बुंदेलखंड की इस धरती पर आकर समझना चाहिए कि वीरता क्या होती है? आप मुझे बताइये, हम पाकिस्तान को घर में घुसकर मारकर आये थे या नहीं आये थे? पाकिस्तान ने फिर कभी मुंह उठाने की हिम्मत की क्या? पाकिस्तान के पास परमाणु बम है इसकी धमकी देने वालों को पता नहीं है, उनको उसके रख- रखाव का खर्चा नहीं है उनके पास, संभालने का खर्चा नहीं है उनके पास। साथियों, वो कहते हैं मिसाइलें हैं, हम बुंदेलखंड में जो डिफेंस कॉरिडोर बना रहे हैं ना वो पटाखे बनाने के लिए नहीं है, मिसाइल बनाने के लिए है। पाकिस्तान का डर दिखाकर वोट मांगने वालों को आप वोट देंगे क्या? जो पाकिस्तान का डर दिखाते हैं वो वोट देने लायक हैं क्या? हैं क्या?

साथियों,

20 मई को आपका वोट सशक्त भारत, विकसित भारत इसकी गारंटी होगा। हमीरपुर में कुंवर पुष्पेंद्र सिंह चंदेल जी, जालौन में भानु प्रताप सिंह वर्मा जी और झांसी से श्री अनुराग शर्मा जी आप इनके पक्ष में ज्यादा से ज्यादा मतदान करवाइये, कमल पर बटन दबायेंगे और जब आप कमल पर बटन दबायेंगे ना, तो वोट सीधा-सीधा मोदी के खाते में जायेगा, तो ज्यादा से ज्यादा मतदान करवायेंगे, पोलिंग बूथ जीतेंगे। 10 बजे से पहले मतदान हो जाये ऐसा करेंगे, पहले मतदान- फिर जलपान मेरी बात मानेंगे। अच्छा मेरा एक और काम करेंगे, कमाल है यार मैंने मेरा काम कहा तो ठंडे पड़ गए, मेरा एक काम करेंगे, सबके सब जरा हाथ ऊपर करके बताओ तो मैं बताऊं, करने वाले हैं तो वो ही हाथ ऊंचे करें, फालतू में हाथ ऊपर मत कीजिए, करेंगे अच्छा एक काम करना इन दिनों ज्यादा से ज्यादा लोगों को मिलना, ज्यादा से ज्यादा घरों में जाना, ज्यादा से ज्यादा परिवारों में जाना और परिवार में बैठकर के कहना सभी उस परिवार के मुखिया को कि बोले मोदी जी हमीरपुर आये थे और हमीरपुर में आये थे तो मोदी जी ने खास आपको जय श्रीराम कहा है। मेरा जय श्री राम पहुंचा देंगे, पक्का पहुंचा देंगे।

बोलिए, भारत माता की..

भारत माता की..

बहुत-बहुत धन्यवाद।