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सहायक सचिव कार्यक्रम के समापन सत्र में आज नई दिल्ली में 2016 बैच के आईएएस अधिकारियों ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के समक्ष प्रेजेंटेशन दिया।

अधिकारियों द्वारा आठ चयनित प्रेजेंटेशन दिए गए। यह प्रेजेंटेशन कृषि आय बढ़ाने, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, शिकायत निवारण, नागरिक केंद्रित सेवाओं, विद्युत क्षेत्र में सुधार, पर्यटक सहायता, ई-नीलामी तथा स्मार्ट शहरी विकास विषयों पर दिए गए ।

प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि सहायक सचिवों का कार्यक्रम कनिष्ठ और वरिष्ठ अधिकारियों को एक-दूसरे के साथ बातचीत करने का अवसर प्रदान करता है। प्रधानमंत्री ने सहायक सचिवों को आने वाले समय में विभिन्न मंत्रालयों के साथ जुड़ने के दौरान अपने अनुभवों से निकली श्रेष्ठ बातों को ग्रहण करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने युवा अधिकारियों से कहा कि वे सरकार से लोगों की अपेक्षा को ध्यान में रखें। प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को आसपास के लोगों तथा अपने कर्तव्यों के दौरान मिलने वाले लोगों से संपर्क विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि कार्यों और उद्देश्यों में सफल होने के लिए लोगों के साथ नजदीकी संबंध विकसित करना महत्वपूर्ण है।

 

प्रधानमंत्री ने युवा अधिकारियों द्वारा दिए गए प्रेजेंटेशन की सराहना की।

इस अवसर पर कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन राज्य मंत्री डॉक्टर जितेन्द्र सिंह, मंत्रिमंडल सचिव श्री पी.के.सिन्हा, प्रधानमंत्री के अपर प्रधान सचिव डॉक्टर पी.के.मिश्रा, कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग के सचिव श्री सी.चन्द्रमौली तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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प्रधानमंत्री 28 सितंबर को विशेष गुणों वाली 35 फसलों की किस्में राष्ट्र को समर्पित करेंगे
September 27, 2021
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प्रधानमंत्री राष्ट्रीय जैविक तनाव प्रबंधन संस्थान रायपुर का नवनिर्मित परिसर राष्ट्र को समर्पित करेंगे

प्रधानमंत्री कृषि विश्वविद्यालयों को ग्रीन कैंपस अवॉर्ड भी वितरित करेंगे

जलवायु अनुकूल प्रौद्योगिकियां अपनाने को लेकर जन जागरूकता पैदा करने की कोशिश में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 28 सितंबर को सुबह 11 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए तमाम आईसीएआर संस्थानों, राज्य और केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालयों और कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) में आयोजित एक अखिल भारतीय कार्यक्रम में विशेष गुणों वाली 35 फसलों की किस्में राष्ट्र को समर्पित करेंगे। इस कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री राष्ट्रीय जैविक तनाव प्रबंधन संस्थान रायपुर का नवनिर्मित परिसर भी राष्ट्र को समर्पित करेंगे।

इस मौके पर प्रधानमंत्री कृषि विश्वविद्यालयों को ग्रीन कैंपस अवॉर्ड वितरित करेंगे। साथ ही उन किसानों के साथ बातचीत करेंगे जो नवीन तरीकों का उपयोग करते हैं और उपस्थित लोगों को संबोधित करेंगे।

इस मौके पर केंद्रीय कृषि मंत्री और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भी मौजूद रहेंगे।

विशेष गुणों वाली फसलों की किस्मों के बारे में

जलवायु परिवर्तन और कुपोषण की दोहरी चुनौतियों को हल करने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) द्वारा विशेष लक्षणों वाली फसल की किस्मों को विकसित किया गया है। जलवायु को लेकर लचीलापन और ऊंची पोषक तत्व सामग्री जैसे विशेष गुणों वाली 35 ऐसी फसलों की किस्मों को साल 2021 में विकसित किया गया है। इनमें सूखे को बर्दाश्त करने वाली चने की किस्म, विल्ट और स्टरिलिटी मौज़ेक प्रतिरोधी अरहर, सोयाबीन की जल्दी पकने वाली किस्म, चावल की रोग प्रतिरोधी किस्में और गेहूं, बाजरा, मक्का, चना, क्विनोआ, कुटु, विन्गड बीन और फाबा बीन की बायोफोर्डिफाइड किस्में शामिल हैं।

इन विशेष लक्षणों वाली फसल की किस्मों में वे भी शामिल हैं जो कुछ फसलों में पाए जाने वाले ऐसे पोषण-विरोधी कारकों को हल करती हैं जो मानव और पशु स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं। ऐसी किस्मों के उदाहरणों में पूसा डबल जीरो मस्टर्ड 33, पहला कैनोला क्वालिटी हाइब्रिड आरसीएच 1 जिसमें <2% इरुसिक एसिड और <30 पीपीएम ग्लूकोसाइनोलेट्स और एक सोयाबीन की किस्म शामिल है जो दो पोषण-विरोधी कारकों से मुक्त है जिन्हें कुनिट्ज़ ट्रिप्सिन इनहिबिटर और लिपोक्सीजनेस कहते हैं। सोयाबीन, ज्वार, और बेबी कॉर्न सहित अन्य में विशेष गुणों वाली किस्में विकसित की गई हैं

राष्ट्रीय जैविक तनाव प्रबंधन संस्थान के बारे में

रायपुर में राष्ट्रीय जैविक तनाव प्रबंधन संस्थान की स्थापना जैविक तनाव में बुनियादी और रणनीतिक अनुसंधान करने, मानव संसाधन विकसित करने और नीतिगत सहायता प्रदान करने के लिए की गई है। इस संस्थान ने शैक्षणिक सत्र 2020-21 से पीजी कोर्स शुरू कर दिए हैं।

ग्रीन कैंपस पुरस्कारों के बारे में

ग्रीन कैंपस पुरस्कारों की शुरुआत इसलिए की गई है ताकि राज्य और केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालयों को ऐसी आदतें विकसित करने या अपनाने के लिए प्रेरित किया जा सके जो उनके परिसरों को ज्यादा हरा-भरा और स्वच्छ बनाए, और छात्रों को 'स्वच्छ भारत मिशन', 'वेस्ट टू वेल्थ मिशन' में शामिल होने और राष्ट्रीय शिक्षा नीति -2020 के मुताबिक सामुदायिक जुड़ाव के लिए प्रेरित करे।