माननीय प्रधानमंत्री श्री अनिरुद्ध जगन्‍नाथ, गणमान्‍य अतिथियों, 

भारतीय नौसेना के हमारे जवान, समुद्र के हमारे रक्षक, जो आज यहां मौजूद हैं- मैं आपका विशेष तौर पर अभिनंदन करता हूं।

19 PM MODI unveiling of plaque for Commissioning of Offshore Patrol Vessel Barrac (5) बाराकुडा को नेशनल कोस्‍ट गार्ड ऑफ मॉरिशस की सेवा में प्रदान करना हमारे लिए बहुत गौरव की बात है। 

मुझे यह विशेषाधिकार देने के लिए धन्‍यवाद। भारत को अपना भागीदार बनाने के लिए धन्‍यवाद।

यह पोत कोलकाता से हिंद महासागर का चक्‍कर लगाते हुए इस खूबसूरत किनारे पर पहुंचा है। 

पीढि़यों पहले, भारत के लोग नयी दिशा और नये जीवन की ओर चले थे।

आज, बाराकुडा अपने साथ भारत की जनता की सद्भावना और शुभकामनाएं लाया है। वह हमारे अनूठे विश्‍वास और भरोसे का प्रतिनिधित्व करता है। 

वह हिंद महासागर क्षेत्र- हमारे समान सामुद्रिक आशियाने, की शांति और सुरक्षा के लिए हमारी साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक है। बाराकुडा एक खूबसूरत पोत है। वह बहुत सक्षम भी है और उसे मॉरिशस की विशिष्‍टताओं के मुताबिक बनाया गया है। 

अब वह मॉरिशस के ध्‍वज के साथ गर्व से तैर रहा है। यह आपके टापुओं और जलक्षेत्र की हिफाजत करेगा। आपदा और आपात परिस्थितियों में आपकी मदद के लिए मुस्‍तैद रहेगा। 

लेकिन, यह उससे बढ़कर काम करेगा। यह हमारे हिंद महासागर को ज्‍यादा सुरक्षित और महफूज बनाएगा। 

ऐसा करते हुए मॉरिशस एक महत्‍वपूर्ण अंतर्राष्‍ट्रीय उत्‍तरदायित्‍व को पूर्ण करेगा, क्‍येांकि हिंद महासागर विश्‍व के भविष्‍य के लिए महत्‍वपूर्ण है। यह महासागर विश्‍व की दो-तिहाई तेल लदान, इसका एक-तिहाई कार्गो, और इसके कंटेनर ट्रैफिक के आधे हिस्‍से का बोझ वहन करता है। इसके ट्रैफिक का तीन-चौथाई से ज्‍यादा हिस्‍सा विश्‍व के अन्‍य क्षेत्रों में जाता है। 

विशाल हिंद महासागर क्षेत्र 40 से ज्‍यादा देशों और दुनिया की करीब 40 प्रतिशत आबादी की मेजबानी करता है। यह ऑस्‍ट्रेलिया, दक्षिण-पूर्व एशिया, दक्षिण एशिया, पश्चिम एशिया और अफ्रीका के पूर्वी समुद्र तट को छूता है। यह द्वीपीय देशों के रत्‍नों से दमकता है। 

सम्‍भयता के संबंधों पर गौर करें, तो इस विशाल क्षेत्र में बहुत विविधता है! सोचिए इसमें कितने अपार अवसर होंगे! 

आज, विश्‍व का मानना है कि 21वीं सदी एशिया और प्रशांत की गतिशीलता और ऊर्जा से संचालित हो रहा है, लेकिन इसका रुख हिंद महासागर की लहरे निर्धारित करेंगी। इसीलिए हिंद महासागर आज पहले से कहीं ज्‍यादा दुनिया के आकर्षण का केंद्र बन चुका है। 

हम महासागर में बढ़ते वैश्विक हितों और उपस्थिति को भी देख रहे हैं। इस बदलती दुनिया में भी, सौभाग्‍य की कुंजी इसी महासागर के पास है और हम तभी खुशहाल होंगे, जब सागर सबके लिए सुरक्षित, महफूज और मुक्‍त होंगे। 

यह सुनिश्चित करना हम सभी की विशालतम सामूहिक जिम्‍मेदारी होगी। लेकिन हमें अन्‍य चुनौतियों का भी सामना करना होगा, जो हमारे क्षेत्र में असामान्‍य नहीं हैं।

19 PM MODI unveiling of plaque for Commissioning of Offshore Patrol Vessel Barrac (6)

हम सुनामी और चक्रवातों की त्रासदी देख चुके हैं। 

आतंकवाद हम तक समुद्र के रास्‍ते पहुंचा। समुद्री डकैती की वजह से इस हद तक लोगों को जान गंवानी पड़ी है और कारोबार पर असर पड़ा है, जो आधुनिक युग में विश्‍वास से परे है।

गैर कानूनी रूप से मछलियां पकड़ने और तेल रिसाव से हमारी अर्थव्‍यवस्‍थाओं को नुकसान पहुंचा है। हम अपने तटों और द्वीपों पर जलवायु परिवर्तन का बढ़ता प्रभाव महसूस कर रहे हैं। 

हमने यह भी देखा है कि तटीय और द्वीपीय देशों में अस्थिरता और गड़बड़ी का सागरों की सुरक्षा पर गहरा असर पड़ सकता है। 

भारत हिंद महासागर के दोराहे पर है। 

गुजरात के लोथल के दुनिया के प्रारम्भिक बंदरगाहों में से होने की वजह से भारत की सामुद्रिक परम्‍परा बहुत लम्‍बी है। 

हमारे सांस्‍कृतिक पदचिन्‍ह एशिया और अफ्रीका में फैले हैं। हम महासागरों के पार भारतवंशियों की सशक्‍त मौजूदगी में हम यह बात देख सकते है।

समुद्रों ने कई सहस्‍त्राब्दियों से हमारे पड़ोसियों के साथ हमारे वाणिज्यिक, सांस्‍कृतिक और धार्मिक संबंध जोड़े हैं। 

हमारे हाल के इतिहास ने हमारा ध्‍यान हमारे महाद्वीपीय पड़ोसियों पर केंद्रित कर दिया है। लेकिन भारत ने अपने आसपास फैले सागरों से कई तरह से आकार लिया है। 

आज, हमारा 90 प्रतिशत व्‍यापार और 90 प्रतिशत तेल आयात समुद्र के रास्‍ते होता है। हमारी तटरेखा 7500 किलोमीटर, 1200 द्वीप और 2.4 मिलियन वर्ग किलोमीटर का विशिष्‍ट आर्थिक क्षेत्र है। 

भारत वैश्विक रूप से ज्‍यादा जुड़ता जा रहा है। हम महासागर और आसपास के क्षेत्रों पर पहले से ज्‍यादा निर्भर होंगे। हमें इसके भविष्‍य को आकार देने का हमारा उत्‍तरदायित्‍व भी समझना होगा। 

इसलिए, हिंद महासागर क्षेत्र हमारी नीतिगत प्राथमिकताओं में शीर्ष पर है। 

हिंद महासागर क्षेत्र के लिए हमारा विजन हमारे क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने, अपनी क्षमताओं का इस्‍तेमाल हमारे समान सामुद्रिक आशियाने में सभी के लिए करने पर आधारित है। इसका अभिप्राय बहुत सी बाते हैं: 

पहली, हम अपने मुख्‍य भूभाग और महाद्वीपों की सुरक्षा के लिए कुछ भी करेंगे और हमारे हितों की रक्षा करेंगे। 

इसी तरह हम सुरक्षित, महफूज और स्थिर हिंद महासागर क्षेत्र सुनिश्चित करने की दिशा में काम करेंगे, जो हमें हर तरह की समृद्धि प्रदान करता है और हम महासागर की प्रचंडता अथवा संकट से घिरे लोगों को अपनी क्षमताओं से बचाएंगे।

दूसरी, हम क्षेत्र के अपने मित्रों, खास तौर पर सामुद्रिक पड़ोसी देशों और द्वीपीय देशों के साथ आर्थिक एवं सुरक्षा सहयोग बढ़ाएंगे। हम उनकी सामुद्रिक सुरक्षा क्षमताओं और उनकी आर्थिक ताकत का भी निर्माण जारी रखेंगे। 

तीसरी, सामूहिक कार्रवाई और सहयोग हमारे सामुद्रिक क्षेत्र में उत्‍कृष्‍ट शांति एवं सुरक्षा लाएगा। यह हमें आपात स्थितियों से बेहतर ढंग से निपटने के लिए भी तैयार करेगा। 

इसीलिए, 2008 में, भारत ने हिंद महासागर नौ‍सैनिक संगोष्ठि को प्रोत्‍साहन दिया था। आज, इसके माध्‍यम से क्षेत्र की 35 नौसेनाओं एक साथ आयी हैं। हमारा लक्ष्‍य सामुद्रिक चुनौतियों पर आपसी समझ बढ़ाना और उनसे निपटने की सामूहिक योग्‍यता को सशक्‍त बनाना है। 

हम सामुद्रिक सहयोग के लिए समुद्री डकैती आतंकवाद और अन्‍य अपराध से निपटने से लेकर सामुद्रिक सुरक्षा और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने तक के हमारे क्षेत्रीय तंत्रों- को सशक्‍त बनाने के प्रयासों का भी समर्थन करते हैं। 

भारत ने मालदीव और श्रीलंका के साथ सामुद्रिक सुरक्षा सहयोग शुरू किया है और हमें आशा है कि मॉरिशस, सेशेल्‍स और क्षेत्र के अन्‍य देश भी इस पहल से जुड़ेंगे। चौथी, हम क्षेत्र में ज्‍यादा एकीकृत और सहयोगपूर्ण भविष्‍य चाहते हैं जो सभी के लिए निरंतर विकास की सम्‍भावनाओं में वृद्धि करे। 

हमें व्‍यापार, पर्यटन और निवेश, बुनियादी ढांचे के विकास, सामुद्रिक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, निरंतर मछली पालन, सामुद्रिक पर्यावरण की सुरक्षा तथा महासागर अथवा ब्‍लू इकॉनोमी में सहयोग को अवश्‍य बढ़ावा देना चाहिए।

मेरे लिए भारत के राष्‍ट्रीय ध्‍वज में नीला चक्र नीली क्रांति अथवा महासागरीय अर्थव्‍यवस्‍था की सम्‍भावनाओं का प्रतिनिधित्‍व करता है। इस प्रकार महासागरीय अर्थव्‍यवस्‍था हमारे लिए इतनी महत्‍वपूर्ण है।

जो लोग महासागरों के समीप रहते हैं, उनके लिए जलवायु परिवर्तन बहस का विषय नहीं है, बल्कि उनके वजूद के लिए गम्‍भीर खतरा हैं। हमें अपने क्षेत्र में नेतृत्‍व संभालना चाहिए और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए तटस्‍थ वैश्विक कार्रवाई का आह्वान करना चाहिए। 

19 PM MODI unveiling of plaque for Commissioning of Offshore Patrol Vessel Barracud (2)

हमारी इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन क्षेत्र में निरंतर एवं समृद्ध भविष्‍य के हमारे विजन का महत्‍वपूर्ण माध्‍यम साबित हो सकती है।

हम अक्‍सर जमीन के क्षेत्र के आसपास क्षेत्रीय समूहों को परिभाषित करते हैं। अब वक्‍त आ गया है कि हम हिंद महासागर के गिर्द सशक्‍त समूह बनाने के लिए आगे आएं। हम आने वाले वर्षों में इसे नए जोश के साथ आगे बढ़ाएंगे। 

आईओआरए के सचिवालय के लिए मॉरिशस से बेहतर कोई और जगह हो ही नहीं सकती थी। मुझे खुशी है कि महासचिव भारत से हैं। 

पांचवीं, हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, स्‍थायित्‍व और खुशहाली इस क्षेत्र में रहने वालों की प्राथमिक जिम्‍मदारी है। 

लेकिन हम जानते हैं कि दुनिया में कई ऐसे देश हैं जिनके इस क्षेत्र में जबरदस्‍त हित और दांव हैं। 

भारत उनसे गहन संपर्क बनाए हुए है। हम ऐसा वार्ता,यात्रा,अभ्‍यासों, क्षमता निर्माण और आर्थिक भागीदारी के जरिये कर रहे हैं।

हमारा लक्ष्‍य विश्‍वास और पारदर्शिता का वातावरण बनाना, सभी देशों द्वारा अंतर्राष्ट्रीय सामुद्रिक नियमों और कानूनों के प्रति सम्‍मान, प्राप्‍त करना, एक-दूसरे के हितों के प्रति संवेदनशीलता, सामुद्रिक मसलों का शांतिपूर्ण हल और सामुद्रिक सहयोग बढ़ाना है। 

हम हिंद महासागर के लिए ऐसा भविष्‍य चाहते हैं जो एसएजीएआर- यानी सिक्‍योरिटी एंड ग्रोथ फॉर ऑल इन द रीजन (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और प्रगति) के नाम पर खरा उतरे। 

हमें मॉनसून से प्रेरणा लेनी चाहिए, जो क्षेत्र में हम सभी को पोषित करता है और आपस में जोड़ता है। 

हम भागीदारी के जरिये अपने क्षेत्र को उसी तरह एकजुट करेंगे, जैसे कभी भागौलिक रूप से रहे हैं। 

एक महासागर जो हमारी दुनिया को जोड़ता है उसे सभी के लिए शांति और समृद्धि का मार्ग बनना चाहिए।

यह कोई इत्‍तेफाक नहीं है कि हिन्‍द महासागर क्षेत्र के लिए अपनी आशाएं मैं मॉरिशस में व्‍यक्‍त कर रहा हूं। 

मॉरिशस के साथ हमारी भागीदारी दुनिया में हमारे सशक्‍त सामुद्रिक संबंधों में से है। 

19 PM MODI unveiling of plaque for Commissioning of Offshore Patrol Vessel Barrac (8)

हमारी भागीदारी बढ़ेगी। हम मिलकर अपनी क्षमताओं का निर्माण करेंगे। हम मिलकर प्रशिक्षण लेंगे और मिलकर समुद्र में गश्‍त करेंगे।

लेकिन इस भागीदारी की बुनियाद बहुत बड़ी है। यह हमारे साझा मूल्‍य और समान विजन है। 

हम अपने अधिकार क्षेत्र से परे जाकर क्षेत्र के लिए अपने उत्‍तरदायित्‍व का वहन करना चाहते हैं। 

मॉरिशस हिंद महासागर के सुरक्षित और सतत भविष्‍य के लिए प्रमुख लीडर है। हमें, भारत को आपका भागीदार होने पर गर्व है। 

बहुत बहुत धन्यवाद और आप सभी को मेरी शुभकामनाएं।

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पहले प्रोडक्ट, फिर कंपोनेंट्स और अब सेमीकंडक्टर, यही मेक इन इंडिया का अगला चरण: गुजरात के साणंद में पीएम मोदी
July 04, 2026
भारत की सेमीकंडक्टर यात्रा के लिए एक ऐतिहासिक दिन; साणंद स्थित सीजी सेमी ओएसएटी सुविधा चिप विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करेगी, प्रौद्योगिकीय आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देगी तथा वैश्विक सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला में भारत की स्थिति को और मजबूत करेगी : प्रधानमंत्री
सेमिकॉन इंडिया कार्यक्रम तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है; कदम-दर-कदम, ईंट-दर-ईंट, चिप-दर-चिप : प्रधानमंत्री
भारत में सेमीकंडक्टर उद्योग का विस्तार रातोंरात नहीं हुआ; यह पिछले एक दशक में भारत में हुई इलेक्ट्रॉनिक्स क्रांति का अगला चरण है : प्रधानमंत्री
पहले प्रोडक्ट्स, फिर कम्पोनेंट्स और अब सेमीकंडक्टर; भारत संपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक्स मूल्य श्रृंखला का निर्माण कर रहा है, यही विकसित भारत का मार्ग है, यही मेक इन इंडिया का अगला चरण है : प्रधानमंत्री
हमारा लक्ष्य चिप डिजाइन से लेकर फैब्रिकेशन और पैकेजिंग तक भारत में संपूर्ण सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है : प्रधानमंत्री
भारत का युवा मेड इन इंडिया चिप्स के साथ एआई, रोबोटिक्स तथा अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकियों की क्रांति का नेतृत्व करेगा : प्रधानमंत्री

कैसे हो सब मजे में। गुजरात के लोकप्रिय मुख्यमंत्री भूपेंद्र भाई पटेल, केंद्रीय मंत्रिमंडल में मेरे सहयोगी अश्विनी वैष्णव, ऊर्जावान उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी, गुजरात सरकार के मंत्रीगण, सांसद और विधायकगण, CG पावर के चेयरमैन वेल्लायन सुबैया जी, रेनेसास इलेक्ट्रॉनिक्स की प्रेसिडेंट मालिनी जी, सीजी सेमी के चेयरमैन गिरीश जी, यहां मौजूद अन्य सभी इंडस्ट्री लीडर्स, देवियों और सज्जनों!

आज का ये कार्यक्रम इस बात का प्रमाण है कि भारत जो ठान लेता है, वो करके दिखाता है। 5 साल पहले भारत ने संकल्प लिया था कि देश को सेमीकंडक्टर हब बनाएंगे। हम Design in India, Make in India के मंत्र को लेकर आगे बढ़ें। और आज देश के तीसरे सेमीकंडक्टर प्लांट में भी चीफ पैकेजिंग का कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू हो रहा है।

साथियों,

2024 में इस प्लांट का शिलान्यास करने का अवसर मुझे मिला था। 2025 के अगस्त महीने में यहां टेस्टिंग चिप्स का काम शुरू हुआ, और आज, इस प्लांट का उद्घाटन हो गया है। शिलान्यास से प्रोडक्शन तक का ये सफर, निश्चित रूप से अनेक साथियों के परिश्रम का परिणाम है। सुबैया जी जैसे लोगों के नेतृत्व का परिणाम है। अभी मंच पर आने से पहले, मुझे इस प्रोजेक्ट से जुड़े अनेक साथियों से बातचीत करने का भी मौका मिला। एक प्रकार से लगता है कि इस परिसर में एक मिनी इंडिया बसता है। हर भाषा के, हर पहनावे के, हर खान-पान के लोग यहां हैं। यानी एक अलग सा माहौल मैंने अनुभव किया। Exhibition Visit के दौरान भी, मैंने कई बेटे–बेटियों से बातचीत की। और एक बात जिसको मैं बड़े गर्व से उल्लेख करना चाहूंगा, इन बच्चों का कॉन्फिडेंस लेवल। जिस आत्मविश्वास से वो बातें रहे थे, टेक्नॉलोजी के संदर्भ में जो उनका विश्वास था कहने का, कम से कम मैं तो इंप्रेस हो गया।

साथियों,

सीजी सेमी का ये प्लांट, भारत, जापान और थाईलैंड के हमारे इंडस्ट्री पार्टनर्स के साझा प्रयासों का भी प्रतीक है। ये केवल एक बिजनेस वेंचर नहीं है, ये टेक्नोलॉजी, भरोसे और साझेदारी का ऐसा मॉडल है, जो भारत की सेमीकंडक्टर जर्नी को नई गति देने वाला है। बीते सवा दो सालों में, आप सभी ने स्क्रैच से स्केल तक, इस पूरी फैसिलिटी को आकार दिया है। आज हम इसके कॉमर्शियल प्रोडक्शन की शुरुआत कर रहे हैं। मुझे बताया गया है कि अभी यहां से हर साल 20 करोड़ चिप्स निकलेंगी। 20 करोड़, आपको लगता होगा कि मोदी जी ने गलती कर दी, 20 लाख को 20 करोड़ बोल दिया, इसलिए ताली बजाने में देर हो गई, 20 करोड़। और मुझे बताया गया आप सभी यहीं नहीं रुकने वाले हैं। आपने हर साल 500 करोड़ चिप्स का लक्ष्य रखा है। यानी हर दिन डेढ़ करोड़ से ज्यादा। मेरा पक्का विश्वास है कि आप उसे बहुत जल्द हासिल करके रहेंगे। ये भरोसा इस बात का भी है कि सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम तेज गति पकड़ रहा है, Step by step, brick by brick और अब chip by chip. मैं, सीजी सेमी की पूरी टीम को, राज्य सरकार और पूरे देश को बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

मुझे जरा इस बात का थोड़ा आनंद ज्यादा है, आपको लगता होगा कि ऐसा क्या हो गया कि मोदी जी को जरा आनंद ज्यादा है, इसका कारण ये है कि 20 साल पहले, शायद उससे भी पहले मैंने गुजरात में सेमी कंडक्टर प्लांट लगाने के लिए सारी योजना बनाई, गांधीनगर और प्रांतिज के पास साढ़े तीन सौ, चार सौ एकड़ जमीन तय कर ली, कुछ कंपनियों से बातचीत भी की, भारत सरकार भी उस समय बड़े बड़े बयान दे रही थी, तो कुछ कंपनियां बातचीत करने के लिए आती भी थीं, लेकिन पता नहीं भारत सरकार को उस समय क्या हो गया, कि उनके पैरों में बेडि़यां लग गई, और बात आगे नहीं चली। आज जब मैं इसे देखता हूं तो मेरा 20-22 साल पुराना जो सपना, और उस समय देश में इन विषयों की चर्चा कोई करता नहीं था, और मैं जब करता था तो मीडिया वाले मेरी मजाक उड़ाते थे। उस समय नहीं हो पाया, लेकिन आज जब हो रहा है तो सर्वाधिक खुशी मैं अपने भीतर से अनुभव कर रहा हूं। आप देखिए, अभी कुछ हफ्ते पहले खबर आई। मुझे हैरानी है कि मीडिया ने जितना उस पर ध्यान जाना चाहिए उतना गया नहीं। भारत में बना हुआ C295 विमान बड़ौदा में बना और हवा में उड़ान भी भरी। एक जमाना था साईकिल बनाने वाला भी कोई आ जाए ना तो हम मिठाई बाँटते थे दोस्तों, आज हवाई जहाज बनाने वाले आ रहे हैं।

साथियों,

आप सभी जानकार लोग यहां बैठे हैं, मैं देख रहा हूं, बहुत सारे युवा साथी भी यहां मौजूद हैं, हम अगर दुनिया के औद्योगिक इतिहास को देखेंगे, तो एक बात स्पष्ट होती है। दुनिया की कोई भी ग्लोबल इंडस्ट्रियल पावर, किसी एक अकेली फैक्ट्री से नहीं बनी। इंडस्ट्रियल पावर की नींव क्लस्टर्स होते हैं। अमेरिका की सिलिकॉन वैली, ताइवान का शिन-चु साइंस पार्क, जापान का सिलिकॉन आइलैंड, सुकुबा साइंस सिटी, ये सब क्लस्टर के महत्व को दर्शाते हैं। आज साणंद भी उसी दिशा में अपने कदम बढ़ा रहा है।

साथियों,

कुछ ही महीनों में यहां माइक्रोन, केयान्स और सीजी सेमी ने प्रोडक्शन शुरु कर दिया। यानी देश में एक Semiconductor Cluster जन्म ले रहा है। और आज यहां चिप्स की पैकेजिंग हो रही है। कल यहां विशेष कंपनियां आएंगी, केमिकल्स का उत्पादन होगा, नई टेस्टिंग लैब्स बनेंगी, मशीनों की सर्विस करने वाले उद्योग आएंगे, डिजाइन सेंटर्स खुलेंगे, और फिर यहां से नए स्टार्टअप्स भी निकलेंगे। यही क्लस्टर की ताकत होती है। एक उद्योग, सैकड़ों उद्योगों को जन्म देता है। सैकड़ों उद्योग, लाखों रोजगार पैदा करते हैं। और ये लाखों रोजगार, पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था बदल देते हैं। और ये सिर्फ साणंद में ही नहीं हो रहा, देश के अनेक राज्यों में भी सेमीकंडक्टर के क्लस्टर बन रहे हैं।

साथियों,

आज भारत में सेमीकंडक्टर सेक्टर के इस उभार से सभी उत्साहित है। देश-दुनिया में इसकी चर्चा हो रही है। अक्सर लोग इसको आइसोलेशन में देखते हैं। लेकिन ऐसा नहीं है। भारत में सेमीकंडक्टर उद्योग का विस्तार अचानक नहीं हुआ है। ये पिछले एक दशक में, भारत में आई इलेक्ट्रॉनिक्स क्रांति का next step है।

साथियों,

हमने शुरुआत मोबाइल फोन मैन्युफेक्चरिंग से की। एक समय था जब भारत अपनी ज़रूरत से भी अधिकांश स्मार्ट फोन, ज्यादातर स्मार्ट फोन, हम विदेश से ही मंगाता था। और आज भारत में मोबाइल फोन प्रोडक्शन पहले के मुकाबले 33 गुना ज्यादा हुआ है। आज भारत यानी जो 2014 के पहले मोबाइल फोन बाहर से लाता था, आपने मुझे जब गुजरात से दिल्ली भेजा, तो भारत मोबाइल दुनिया में भेज रहा है। आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल मैन्युफेक्चरर है, और दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल exporter भी है।

साथियों,

बीते वर्षों में हमने पूरे इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को मजबूत किया है। आज भारत का टोटल इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्शन 2014 के मुकाबले, लगभग सात गुना बढ़ चुका है। इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट लगभग ग्यारह गुना बढ़ चुका है।

साथियों,

हमारा प्रयास, सिर्फ फाइनल प्रोडक्ट में आत्मनिर्भरता तक सीमित नहीं है। हमारा प्रयास, कंपोनेंट्स में भी आत्मनिर्भरता की तरफ है। और इसीलिए अब भारत का अगला कदम उठ रहा है। हम केवल मोबाइल नहीं बनाएंगे, हम केवल इलेक्ट्रॉनिक्स नहीं बनाएंगे, हम उन चिप्स का निर्माण भी करेंगे, जिनसे इलेक्ट्रॉनिक्स की पूरी दुनिया चलती है। और यही हमारी रणनीति है। पहले Product, फिर कंपोनेंट्स और अब Semiconductor, यानी इलेक्ट्रॉनिक्स की पूरी Value Chain भारत में होगी। यही विकसित भारत का रोडमैप है, यही Make in India का अगला चरण है।

साथियों,

सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का Next step है, क्रिटिकल मिनरल्स और हाई-टेक मटीरियल्स में आत्मनिर्भरता, और अभी सुबैया जी बीच-बीच में गुजराती भी बोलते थे, उन्होंने गुजराती कहावत सुनाई, निशान चूक माफ, लेकिन नहीं माफ नीचा निशान, और इसलिए मेरा भी वही स्वभाव है, मैं लक्ष्य छोटे नहीं रखता, मैं सोच छोटी नहीं रखता, अगर स्टैच्यू भी बनाता हूं तो दुनिया में सबसे बड़ा बनाकर रख देता हूं। और जैसा सुबैया जी ने कहा, सुनते हो ना विनोद काम बोलता है। ये जो प्रोग्रेस दिख रही है, ये जो अचीवमेंट दिख रहे हैं, इससे जुड़ी सप्लाई चेन को मजबूत करना, ये भी हमारा लक्ष्य है। आज भारत इसी दिशा में व्यापक प्रयास कर रहा है। हमारा लक्ष्य है कि चिप डिजाइन से लेकर फैब्रिकेशन और पैकेजिंग तक का पूरा इकोसिस्टम भारत में ही विकसित हो। और भारत चिप तो बनाएगा ही, भारत का युवा मेड इन इंडिया चिप्स पर, AI, रोबोटिक्स और नेक्स्ट जेन टेक क्रांति को भी गति देगा। मुझे भारत की युवाशक्ति पर, भारत की युवा टैलेंट पर अटूट विश्वास है। मेरे देश की युवा शक्ति और उनके सामर्थ्य पर मेरा पूरा भरोसा है।

साथियों,

मैं इस अवसर पर देश की युवाशक्ति से एक बात जरूर कहना चाहता हूं। जब भी दुनिया में कोई नई औद्योगिक क्रांति आती है, तो सबसे अधिक अवसर युवाओं के लिए पैदा होते हैं। एक समय आईटी क्रांति आई, तो उसमें लाखों भारतीय युवाओं को अपना सामर्थ्य दिखाने का मौका मिला। फिर स्मार्ट फोन और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का दौर आया। उससे भी लाखों युवाओं को नए अवसर मिले। ये जो Semiconductor रेवोल्यूशन और AI रेवोल्यूशन का दौर है, ये भी अनगिनत नए अवसर लेकर के आ रहा है। रिसर्च और डिजायन से लेकर, Startup Innovation और सप्लाई चेन मैनेजमेंट तक, अनेक अवसर हैं।

साथियों,

ज़रूरत नई स्किल्स की है, नए Ideas की है। अब मायने ये रखता है कि आपके पास नया Idea है या नहीं? आपके पास कुछ नया सीखने, नया करने का जज्बा है या नहीं? मैं आज इन बेटियों से मिला, झारखंड, बालागढ़, मध्यप्रदेश, कोई केरल से, कोई छत्तीसगढ़ से और जय जोहार से ही हमारी बात शुरू हुई। क्योंकि मैं उस क्षेत्र में रहा हूं तो मुझे पता है। उन बेटियों ने जिस तेजी से चीजों को सीखा है, और जिस तरीके से वो चीजों को वहां कंडक्ट कर रही थी, गर्व होता है मेरे देश की युवा शक्ति पर।

साथियों,

आने वाले समय में AI आपके सामने नई स्किल्स, नई एक्सपर्टाइज का पूरा संसार खोल देने वाली है। इसलिए, भारत के युवाओं को अब ये अवसर गंवाना नहीं है। और मैं नौजवानों आपको कहता हूं- आईडिया आपका, साथ मेरा।

साथियों,

ये फैसिलिटी, ये प्रोजेक्ट भी इस बात का प्रमाण है, कि भारत के युवा कैसे नई संभावनाओं से जुड़ रहे हैं। यहां काम करने वाली बहनें-बेटियां, जैसे मैंने कहा झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, सारा ट्राइबल बेल्ट से आई हुई बेटियां हैं। उन बेटियों ने जब मुझे फैक्ट्री दिखाई, और बड़े जोश और उत्साह के साथ, एक-एक चीज के बारे में विस्तार से मुझे बता रही थी। साधारण परिवार, साधारण स्कूल, ITI की पढ़ाई, हमारे यहां तो आईटीआई में कोई दाखिल होता है तो मां बाप किसी को बताते नहीं हैं, कि आईटीआई पढ़ता है, शर्म आती है। अब वक्त बदल चुका है, आईटीआई वालों का जमाना है। पढ़ाई भले आईटीआई में हुई हो, इनके सपने असाधारण हैं। इनमें से कई बेटियों के परिवार में कभी किसी ने पासपोर्ट तक नहीं बनवाया था, देखा तक नहीं था। इनमें से कई बेटियों ने तो दिल्ली-मुंबई तक नहीं देखा था, विदेश जाने की तो बात ही छोड़ दीजिए। लेकिन वही बेटियां ट्रेनिंग के लिए मलेशिया गईं, दुनिया की सबसे आधुनिक सेमीकंडक्टर तकनीक सीखी, और आज ये सभी मेड इन इंडिया चिप निर्माण प्रक्रिया का हिस्सा हैं। मुझे याद है, जब सुबैया जी ने मुझे एक बार दिल्ली में एक वीडियो दिखाया था, तीन मिनट का वीडियो था, इन बेटियों के जीवन पर था वो जंगलों में कैसे रहती थीं, खटिया पर बैठकर कैसे पढ़ती थीं और फिर एयरपोर्ट पर अपना चैकअप के लिए खड़ी हुई हैं और जा रही है वो क्लियरेंस करके मलेशिया के लिए। तो मैंने तुरंत उनको कहा था, कि मैं हो सके उतना जल्दी जब भी गुजरात आऊंगा, तो गर्वनर हाउस में इन बेटियों को बुलाकर इनसे बातचीत करूंगा, वो तो मैं नहीं कर पाया, लेकिन आज मुझे वो अवसर मिल गया, Thank You सुबैया जी। मैं इन सभी बेटियों को, उनके परिवार को बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

आज का ये अवसर, इस बात का भी प्रमाण है कि भारत को विकसित बनाने के लिए हम कितने अधीर हैं। इस वर्ष की शुरुआत में, मैंने कहा था कि वर्ष 2026 में चार सेमीकंडक्टर फैसिलिटीज शुरु हो जाएंगी। और आज मेरे मंत्री ने कह दिया नहीं 4 नहीं 5 हो जाएंगी। और मुझे खुशी है कि 6 महीने में तीन प्रोजक्ट्स में प्रोडक्शन शुरु हो चुका है। यानी आज का भारत बड़े लक्ष्य भी रखता है और उन्हें समय पर पूरा भी करता है। भारत, यही भरोसा पूरी दुनिया को, हर इंवेस्टर को भी देता है। हमारी नीतियों में स्थिरता है, हमारे निर्णयों में स्पष्टता है, और हमारे एग्जीक्यूशन में गति है। मैं सीजी सेमी के मैनेजमेंट को, अन्य इन्वसेटर्स को भी आश्वस्त करता हूं, रिफॉर्म्स का जो रास्ता भारत ने चुना है, जिस रिफार्म एक्सप्रेस पर हम चल पड़े हैं, वो और गति पकड़ेगा। आज का भारत ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस के लिए पूरी तरह से कमिटेड है। इसी कमिटमेंट से ही 140 करोड़ भारतवासी, 2047 तक भारत को विकसित बनाकर रहेंगे। और आज 18-20 साल के नौजवान हैं ना, ये मोदी इसलिए मेहनत करता है कि जब आप 40-45 साल के हो, जब आपके घर मे बच्चे बड़े हो रहे हों, तब आप अपने बच्चों को विकसित भारत में बड़े करते देख सकें, इसलिए मैं मेरी जिंदगी खपा रहा हूं आपके बच्चों के भविष्य के लिए।

साथियों,

हम विकास की राह पर चल पड़े हैं, हम प्रगति की नई-नई ऊचाईयों को छू रहे हैं और इसमें सेमीकंडक्टर का ये क्षेत्र एक बहुत बड़ी शक्ति बनकर के नया विश्वास पैदा कर रहा है। मैं आप सबको अनेक-अनेक शुभकामनाएं देता हूं। आप भी ऊंचे लक्ष्य लेकर के चलें, निशान चूक होगा तो देखा जाएगा, लेकिन हम चल पड़ें, आप सबको मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएं, बहुत-बहुत धन्यवाद।