उपस्थित सभी देवियों और सज्‍जनों, 

समाज में कैसे-कैसे नर-रत्‍न पैदा हुए हैं, महापुरूष पैदा हुए हैं, जिसके कारण हम सबको उत्‍तम विरासत प्राप्‍त हुई है। अगर आज यह समारोह यहां नहीं हुआ होता तो शायद नार्थ में रहने वाले कई लोग होंगे, जिनको यह पता तक नहीं होता कि अयंकाली जी कौन थे और इस देश का दुर्भाग्‍य रहा है, इसने किसी कारणवश, समाज के लिए जीने-जूझने वाले लोगों को भुला दिया है। शायद हम सबका दायित्‍व बनता है कि हमारे सभी महान पूर्वजों और उनके जीवन से प्रेरणा ले के नई पीढ़ी को संस्‍कारित करने के लिए हमें प्रयास करना चाहिए। 

पूरे केरल में ओणम का पर्व मनाया जा रहा है। मैं आज, सभी मेरे केरल के भाइयों-बहनों को ओणम की शुभकामनाएं देता हूं। आज 8 सितंबर है, इसका महात्‍मय मुझे बड़ा महत्‍वपूर्ण लगता है, क्‍योंकि 8 सितंबर को महात्‍मा अयंकाली का जन्‍म हुआ, लेकिन उसी केरल की धरती पर दूसरे महान समाज सुधारक नारायण गुरू जी का भी जन्‍म हुआ। आज केरल के जीवन में दो संगठनों, केपीएमस और एसएनडीपी, उनकी मर्जी के बिना न कोई समाज नीति चल सकती है, न कोई राजनीति चल सकती है। लेकिन, वो उसका एक अलग पहलू है। आज हम जब आज केरल के महान समाज सुधारक, महान संत अयंकाली जी की 152वीं जयंति पर मिले हैं। मेरा यह सौभाग्‍य रहा कि मैं पिछले बार केरल में केपीएमएस के निमंत्रण पर एक कार्यक्रम में गया था और शायद हम जिस विचारधारा में पले हुए लोग हैं, उसमें शायद मैं पहला था, जिसको आपके यहां आने का सौभाग्‍य मिला था। 

उस समय “कायल सभा” की शताब्‍दी का समारोह प्रारंभ हो रहा था। एक प्रकार से अब वो कायल शताब्‍दी की पूर्णाहुति का ही कालखंड है। उसमें भी मुझे आने का सौभाग्‍य मिला है। आप कल्‍पना कर सकते हैं कि स्‍वामी विवेकानंद जी को केरल पर इतना गुस्‍सा क्‍यों आया था। क्‍या वो केरल को प्‍यार नहीं करते थे? क्‍या केरल की भूमि उनको अपनी नहीं लगती थी? लेकिन केरल की जो समाज व्‍यवस्‍था बन गयी थी और जिस प्रकार से वहां दलितों पर जुल्‍म होता था, दलितों के साथ अन्‍याय होता था, इसने स्‍वामी विवेकानंद जी को बेचैन कर दिया था। उन्‍हें लगा, ये क्‍या समाज है, ये क्‍या कर रहे हैं ये लोग। सर्वाधिक गुस्‍से में स्‍वामी विवेकानंद थे और उसी गुस्‍से में से उनके मन से ये उदगार निकले थे। 

हमारे देश का, आजादी का ये आंदोलन देखें तो उस सारे आजादी के आंदोलन में 19वीं शताब्‍दी की घटनाओं का बहुत महत्‍व है। 19वीं शताब्‍दी में हमारे देश में, हिन्‍दुस्‍तान के हर कोने में कोई न कोई समाज सुधारक पैदा हुआ। कोई न कोई सांस्‍कृतिक आंदोलन चला। एक प्रकार से 20वीं शताब्‍दी का आजादी के आंदोलन की पीठिका, 19वीं शताब्‍दी के समाज सुधारक आंदलोनों से हुई, सांस्‍कृतिक चेतना से हुई। 1200 साल की गुलामी के अंदर अपना सब कुछ भुला चुके समाज को फिर से एक बार प्राणवान बनाने का प्रयास उस समय महापुरूषों ने किया। 

उसी कालखंड में केरल में अयंकाली जी की समाज सुधार और संघर्ष की गतिविधि नारायण गुरू का शिक्षा आंदोलन और उसी समय डा. पलप्‍पु, मन्‍नायु पद्मनाभन, पंडित करप्‍पन, स्‍वामी वागपट्टानंदन, ऐसे एक से एक दिग्‍गज केरल की धरती पर सामाजिक चेतना को जगाने में लगे थे। 

लेकिन, 1913 में महात्‍मा गांधी हिन्‍दुस्‍तान लौटे, उससे पहले संत अयंकाली जी ने एक कायल सभा के द्वारा एक अद्भुत सत्‍याग्रह किया गया था। हम नार्थ के लोगों को मालूम नहीं है, लेकिन केरल के दलित समाज को जागृ‍त करने के लिए उनके अधिकारों के लिए, उस समय शासकों ने वहां के, अन्‍य लोगों ने, वहां के समाज के अगुवा लोगों ने, ये करने से मना कर दिया। ये कहा कि तुम्‍हें जमीन की इंच की जगह नही मिलेगी, सम्‍मेलन करने के लिए। उस जमाने में एक दलित मां का बेटा, सारा समाज सामने हो तो क्‍या करता, चुप हो जाता, बैठ जाता? 

अयंकाली जी चुप नहीं हुए। उन्‍होंने ठान ली कि मैं इस जुल्‍म के खिलाफ संघर्ष करूंगा। उन्‍होंने रास्‍ता खोजा। उन्‍होंने सब नावें इकट्ठी की, नौकाएं इकट्ठी की और समुद्र के अंदर एक नौकाओं के द्वारा एक विशाल जगह बना दी और नाव में सभा की उन्‍होंने। वह कायल सभा जो कही जाती है, 1913 के हर प्रतिबंध के बीच, समुंदर के अंदर। जमीन नहीं देते हो तो आप जानें, दुनिया जाने। परमात्‍मा ने मुझे जगह दी है समुन्दर को चीर कर के मैं वहां जायूँगा, लेकिन मैं हक़ों की लड़ाई लडूंगा, ये मिजाज अयंकाली जी ने बताया। समुन्दर में नाव इक्कठी कर कर के, नौकायें इक्कठी करके, वहीं उन्ही नौकायों में मंच बनाया, नाव में ही श्रोता आये और उन्होने सत्याग्रह किया था। 

महात्मा गाँधी 1915 में हिंदुस्तान आये थे और बाद में महात्मा गाँधी ने जब अयंकाली जी की इस शक्ति को देखा तो, महात्मा गाँधी जी ने स्वयं संत अयंकाली जी को मिलने गये थे। लेकिन, हम जब इतिहास के पन्नों को देखतें हैं तो ये चीजें हमे मिलती नहीं। पता नहीं, क्या कारण है? इसे क्यों ओझल कर दिया गया है! समाज सुधार के आंदोलन के रूप में, जो बातें हमने बाबा साहेब आम्बेडकर से सुनी हैं, जो हमे पढ़ने को मिलती है, अयंकाली जी की बातो में वो सारी बाते उस समय मिलती थी, 19वीं शताब्दी में। इतना ही नहीं, आज ह्यूमन राइट्स से सम्बंधित दुनिया में जितने भी डॉक्युमेंट्स हैं, यूएन से लेकर, कहीं पे भी, अगर उन डॉक्युमेंट्स को आप अयंकाली जी ने 19वीं शताबदी में जिन बातों को कहा था, उसको अगर हम जोड़ेंगे, तो बहुत सी बाते वो मिलेंगी, जो 19वीं शताबदी में अयंकाली जी ने कही थी जिन बातों को आज विश्व में ह्यूमन राइट्स की बातों के साथ जोड़ा गया। 

इतना ही नहीं, केरल में तो हम जानते हैं, दक्षिण में तो स्थिति ये थी की अगर किसी दलित को जाना है तो पीछे झाडू लगाना पड़ता था, उसके पद-चिन्ह ना रह पायें, ये पागलपन उस जमाने में था। कोई दलित बैलगाड़ी नहीं रख सकता था। बैलगाड़ी मे बैठ नहीं सकता था, वो दिन थे। तब अयंकाली जी ने सत्याग्रह किया था। उन्होने तय किया, जिस रास्ते पर प्रतिबंध है उस रास्ते पर मैं जाउंगा, बैलगाड़ी ले कर के जाउंगा और अयंकाली जी गये, बहुत बड़ा संघर्ष हुआ, मारपीट हुई, कुछ लोगों को चोटे पहुंची, लेकिन वो झुके नहीं। समाज को जगाने के लिये वो निरंतर प्रयास करते रहे। 

आज जितने भी मजदूर आंदोलन चल रहे हैं, उन सभी मजदूर आंदोलनो को भी अगर कोई सच्चाई सीखनी है तो, अयंकाली जी से सीखने को मिलेगी। 

उन्होंने कृषि मजदूरों को आज़ादी दिलाने का आंदोलन चलाया था। जो कृषि मजदूर थे, उनके लिये काम का समय तय हो, उनके लिये वेतन तय हो, उनके बच्चों को सरकारी स्कूल मे एडमिशन का अधिकार मिले, महिलायों के लिये मजदूरी का प्रकार अलग हो, इन सारे विषयों की लड़ाई लड़ कर के विजय प्राप्त की थी, अयंकाली जी ने। वे एक प्रकार से समाज सुधारक भी थे, लेकिन साथ-साथ समाज के हकों के लिये संघर्ष करना और उन्हें हक दिलाना, ये उस समय अयंकाली जी ने किया था और कृषि जीवन के अंदर अनेक अधिकार पाने में सुविधा मिली थी। आज केरल में जो शिक्षा की जो स्थिति है, अगर इसका गर्व हम करतें हैं, तो हमे इस बात का भी गर्व करना होगा की दो महापुरुष विशेष रूप से, जिन्‍होंने केरल में शिक्षा की जोत जलाई थी, एक संत अयंकाली जी और दूसरे नारायण गुरु जी। उस समय दलित, शोषित, पीड़ित, वंचित, पिछड़े, इनके लिये शिक्षा, ये उनका प्राथमिक विषय रहा था और उसके कारण केरल के समाज जीवन में इतना बड़ा बदलाव आया, इतना परिवर्तन आया। 

हम हिन्दुस्तान की आज़ादी के आंदोलन की जब चर्चा करतें हैं, तो 1930 की दांडी यात्रा को एक टर्निंग प्‍वाइंट के रूप में देखते हैं। मैं समझाता हूं, आज़ादी के आंदोलन में 1930 की दांडी यात्रा एक महत्वपूर्ण टर्निंग पॉइंट है, तो दलित उद्धार के आंदोलन में 1913 का कायल सम्‍मेलन, ये टर्निंग प्‍वाइंट है। बाबा साहब कहते थे- संगठित बनो, संघर्ष करो, शिक्षित बनो। संत अयंकाली जी ने भी इन्‍हीं तीन मंत्रों को ले कर के समाज को सशक्‍त बनाने का काम किया था। उस अर्थ में ऐसे महापुरूष, जिन्‍होंने समाज के हकों के लिए लड़ाई लड़ी, समाज के अंदर चेतना जगाई, लेकिन कभी समग्रतया समाज जीवन में दरार पैदा होने का प्रयास होने नहीं दिया। सामाजिक एकता को कभी आंच न आए, इसके लिए वह प्रयारत रहे। यह अपने आप में बहुत बड़ी बात है। बाबा साहब अंबेदकर का जीवन देखिए, दलित उद्धार के लिए लड़ाई लड़ी। लेकिन दलितों के अंदर नफरत की आग जलाने का प्रयास कभी बाबा साहब अंबेदकर ने नहीं किया। यही तो दिव्‍य दृष्टि होती है और वही अयंकाली जी का था कि उन्‍होंने अन्‍याय के खिलाफ लड़ना तय माना लेकिन, समाज के प्रति प्रेम, उसमें कभी कटुता को जन्‍म न आए, इसके लिए एक जागरूक प्रयास किया और उसका परिणाम है कि समाज के ताने-बाने बचे रहते हैं। 

समाज जीवन में, यह विविधताओं भरा देश है। विविधता में एकता, यह हमारे भारत की विशेषता है। ये भारत के सौंदर्य को बढ़ाने वाले, हमारी विरासत हैं। उन विविधता में एकता को बनाये रखते हुए, सामाजिक एकता के मूल मंत्र को कोई आंच न आए। लेकिन उसके साथ कोई वंचित न रह जाए। किसी से अन्‍याय न हो, ये व्‍यवस्‍थाओं के ऊपर बल देना, यह हर समय की मांग होती है। 

कभी-कभी मुझे लगता है, लोग चर्चा करते हैं, ये 5000 साल हो गए, इस संस्‍कृति को, परंपरा को। ये कैसे इतना चल रहा है। दुनिया में कई संस्‍कृतियां नष्‍ट हो गईं, क्‍या कारण है? अगर हम देखें तो इस समाज की एक विशेषता है। हर युग में हमारे देश में कोई न कोई समाज सुधारक पैदा हुए हैं। उन समाज सुधारकों ने अपने ही समाज की बुराइयों या कमियों के खिलाफ लड़ाई लड़ी है। 

महात्‍मा गांधी ने आजादी का आंदोलन लड़ा, लेकिन साथ-साथ ही हिंदू समाज में जो अस्‍पृष्‍यता थी, उसके खिलाफ भी उन्‍होंने जंग छेड़ा, लड़ाई लड़ी। राजाराम मोहन राय समाज जीवन के लिए अनेक काम किए, लेकिन समाज में महिलाओं के खिलाफ जो अन्‍याय हो रहा था, उसके खिलाफ लड़ाई लड़ी। हम भाग्‍यशाली हैं एक प्रकार से, सदियों से हम देखें, कोई युग ऐसा नहीं गया है, कि हमारे भीतर कोई बुराइयां आई है तो हमारे भीतर ही कोई महापुरूष पैदा हुआ है। उसने हमें उन बुराइयों से मुक्ति के लिए कभी डांटा है तो कभी झकझोरा है, कभी शिक्षित किया है और हमें सुधार करने के लिए रास्‍ता दिखाया है और हम टिके हैं, उसका कारण यह है कि हमारे यहां एक ऑटो पायलट व्‍यवस्‍था है। हमारे भीतर से ही ऐसे महापुरूष पैदा होते हैं, जो हमारी कमियों को दूर करके, हमें सशक्‍त करने का निरंतर प्रयास करते हैं। हम इसलिए भाग्‍यवान हैं, कि जो काल बाह्य चीजें हैं, जो किसी समय उपयोगी रही होगी लेकिन, समय रहते निकम्‍मी रह गई होगी। अगर हमें ऐसे संत नहीं मिले होते, ऐसे समाज सुधारक नहीं मिले होते, तो वहीं चीजें हमारे लिए बोझ बन जाती। हमारे यहां ऐसे महापुरूष पैदा हुए, जिन्‍होंने हमें उस काल बाह्य चीजों से मुक्ति दिलाई। आधुनिक बनने की दिशा दी। नवचेतना जगाने का प्रयास किया। 

एक समाज के रूप में हम स्‍थगितता को लेकर हम जीने वाले, पनपे हुए लोग नहीं हैं। हम नित्‍य नूतन प्रयास करने वाले लोग हैं और हर सदी में हुआ है। उस प्रयास करने वाले महापुरूषों में अनेक महापुरूषों का जैसे स्‍मरण होता है, संत अयंकाली जी का भी होता है। आजादी के आंदोलन में सारे हिन्‍दुस्‍तान की तरफ नजर करना, समाज सुधारक, भक्ति आंदोलन चेतना आंदोलन, हर कोने में महापुरूषों की भरमार थी। आजादी के लिए पहले समाज को साशक्‍त करने के लिए उन्‍होंने मेहनत की थी। उसी पीठिका का परिणाम था कि 20वीं शताब्‍दी में हम पूरी ताकत के साथ आजादी के लिए सफलता की ओर आगे बढे और उसकी पीठिका तैयार करने में अयंकाली जैसे अनेक महापुरूषों ने, नारायण गुरू स्‍वामी जैसे अनेक महापुरूषों ने प्रयास किया था जिस पर परिणाम लाभदायक रहा। 

समाज में आजादी के बाद दलित, पीडि़त, शोषितों से मु‍क्ति के लिए हम बाबा साहब अंबेडकर के जितने आभारी हों, उतने कम हैं। भारत के संविधान में एक ऐसी व्‍यवस्‍था दी है, जिसके कारण हमें अपना हक पाने का अवसर मिला है। ये भारत के संविधान निर्माता सब मिल कर के दलितों का, पीडि़तों का, शोषितों का कल्‍याण हो, उसकी चिंता की है। लेकिन हमें कभी एक समाज के नाते, इतने में ही संतुष्‍ट हो कर के चलेगा क्‍या? एक समाज के अग्र वर्ग का बेटा, उसको बैंक में नौकरी मिल जाए, एक दलित मां का बेटा, उसको नौकरी मिल जाए। दोनों को समानता मिलेगी। लेकिन इससे समाज की एकता हो जाती है क्‍या। नहीं होती है। इसलिए सिर्फ समानता के स्‍टेशन पर हमारी गाड़ी अटक गई तो हमें जहां जाना है, वहां हम कभी पहुंच नहीं पाएंगे। इसलिए सिर्फ समता से काम नहीं चलता है।सब समाजों के लिये समता हो, इन से काम नहीं चलता है, समता के आगे भी एक यात्रा है, और उस यात्रा के अंतिम मंजिल है समरसता। 

समता पर सब कुछ बन गए, दलित का बेटा भी डॉक्टर बन गया, ब्राह्मण का भी बेटा भी डॉक्टर बन गया, दोनों डॉक्टरी कर रहे हैं, लेकिन फिर भी अगर समरसता नहीं है तो कुछ न कुछ कमी महसूस होती है । ये समरसता कब आती है, संविधान की व्यवस्था से, कानून की व्यवस्था से, हकों की लड़ाई लड़ते-लड़ते समता तो मिल सकती, लेकिन समरसता पाने के लिये समाज मे एक सतत निरन्तर, जागरूक समाज का प्रयासकरना पड़ता है । और इसलिये दो मूल बातों को ले करके चलना पड़ता है, सम-भाव+मम-भाव=समरसता। समता प्‍लस ममता इज इक्‍वल टू समरसता। समता है, लेकिन अगर ममता नहीं है तो समाज एक रस नहीं बन सकता। सम-भाव है, लेकिन मम-भाव नहीं है, ये भी मेरा है, मेरा ही भाई है, उसकी और मेरी रगों में एक ही खून है, ये भाव जब तक पैदा नहीं होता, तब तक समरसता नहीं आती है । 

इसलिये, हमे सम-भाव की यात्रा को मम-भाव से जोडना है, हमें समता की यात्रा को ममता की यात्रा के साथ जोड़ना है। समता और ममता के भाव को जोड़ कर के ही हम समरसता की यात्रा को आगे बड़ा सकते हैं । तभी जा करके समाज में किसी के प्रति कटुता पैदा नहीं होगी, किसी के साथ अन्याय नहीं होगा, किसी को अपने हकों के लिये लड़ाई नहीं लड़नी पड़ेगी, सहज रूप से उसे प्राप्त होगा । मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि आने वाला युग समरसता की यात्रा का युग है । 

इसे परिपूर्ण करना, समाज का शासकों का, सुधारकों का, शिक्षकों का, संस्कृतिक नेतृत्‍व करने वालों का, सबका सामूहिक दायित्व है । 

भारत "बहुरत्न वसुंधरा" है । हर युग में ऐसे लोग मिले हैं जिन्होने साहित्यों को पैदा किया है, इन साहित्यों का लाभ हमें अवश्‍य मिलेगा। 

मैं फिर एक बार परम पूज्‍य अयंकाली जी, उनके उन महान कामों के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करता हूँ, उनके चरणों में नमन करता हूँ, और केपीएमएस के द्वारा ये जो निरन्तर प्रयास चले हैं, मैं उन सब को बहुत हृदय से अभिनन्दन देता हूँ । राजनीतिक दृष्टि से कभी हमारा और उनका मेल नहीं रहा, लेकिन जो प्यार् मुझे केपीएमएस से मिला है, हमेशा मिला है और बाबू तो हमारे लिये, मैंने देखा है, हमेशा, प्यार लिये रहते हैं। ये प्‍यार बना रहेगा। 

मुझे आज आप के बीच आने का अवसर मिला, दिल्ली के इस महत्‍वपूर्ण ओडिटोरियम में , कभी किसी ने सोचा होगा, 152 साल पहले पैदा हुये एक संत को, इस महत्‍वपूर्ण भवन में हम लोगों को श्रद्धांजलि देने का सौभाग्‍य प्राप्त होगा। यही तो बताता है कि ये समरसता की यात्रा का युग है, और इस समरसता की यात्रा को हम सब मिल कर आगे बढायेंगे। 

फिर एक बार आप सब को मेरी शुभकामनाएं। फिर एक बार ओणम की बहुत-बहुत शुभकामनाएं, धन्यवाद । 

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लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करना इस बजट का मूल उद्देश्य एवं इस सरकार का संकल्प है: पीएम मोदी
March 09, 2026
भारत आज निवारक और समग्र स्वास्थ्य के विजन से काम कर रहा हैः प्रधानमंत्री
हाल के वर्षों में देश का हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत हुआ है। सैकड़ों जिलों में नए मेडिकल कॉलेज खुले हैं और आयुष्मान भारत व आरोग्य मंदिरों के जरिए स्वास्थ्य सेवाएं हर गांव तक पहुंच रही हैं: पीएम
हमारा योग और आयुर्वेद पूरी दुनिया में लोकप्रिय हो रहे हैः प्रधानमंत्री
हमें अपनी शिक्षा व्यवस्था को वास्तविक अर्थव्यवस्था से तेजी से जोड़ना होगा और एआई, ऑटोमेशन, डिजिटल अर्थव्यवस्था तथा डिजाइन आधारित मैन्युफैक्चरिंग पर ज्यादा ध्यान देना होगा: पीएम
भारत नवोन्मेषण-आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा हैः प्रधानमंत्री
आज जब हम भविष्य की प्रौद्योगिकियों के लिए तैयारी कर रहे हैं, तो यह महत्वपूर्ण है कि अवसरों की कमी के कारण कोई भी बेटी वंचित न रह जाएः प्रधानमंत्री
हाल के वर्षों में खेल को राष्ट्रीय विकास के एक अहम स्तंभ के रूप में देखा जाने लगा है। खेलो इंडिया जैसी पहलों ने खेल जगत में नई ऊर्जा भरी है और देशभर में स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जा रहा है: पीएम

साथियों,

बजट के बाद वेबिनार की इस सिरीज़ में आज ये चौथा और अहम वेबिनार है। Fulfilling aspirations of people, यानी जन आकांक्षाओं की पूर्ति, ये केवल एक चर्चा का विषय नहीं है, ये इस बजट का मूल ध्येय है और इस सरकार का संकल्प भी है। इन जन आकांक्षाओं की पूर्ति का बहुत बड़ा माध्यम Education, Skill, Health, Tourism, Sports, Culture ऐसे मूलभूत सेक्टर्स हैं। इसलिए इस वेबिनार में हम इन महत्वपूर्ण आयामों पर चर्चा कर रहे हैं। बजट घोषणाओं की implementation के लिए इन विषयों से जुड़े सभी Experts, Policymakers और Scholars, Entrepreneurs और मेरे युवा साथी आप सभी के विचार और सुझाव बहुत अहम हैं। मैं आप सभी का, इस चौथे बजट वेबिनार के इस सत्र में स्वागत करता हूं, अभिनंदन करता हूं।

साथियों,

भारत आज Preventive और Holistic health के लिए एक विशाल विज़न पर काम कर रहा है। पिछले कुछ वर्षों में देश का हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत हुआ है, सैकड़ों जिलों में नए-नए मेडिकल कॉलेज खुल गए हैं। आयुष्मान भारत योजना, आरोग्य मंदिरों के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच गांव-गांव तक बढ़ाई गई है। हमारे योग और आयुर्वेद पूरी दुनिया में popular हो रहे हैं। आप सभी इसके विभिन्न पहलुओं पर आप संवाद अवश्य करेंगे, लेकिन एक अहम विषय, जिसका मैं जिक्र करना चाहूंगा, वो है केयर इकॉनमी। आने वाले दशक में देश में सीनियर सिटीजन्स की संख्या तेजी से बढ़ेगी। इसके अलावा, आज वर्तमान में, दुनिया के कई देशों में केयरगिवर्स की भारी मांग है। इसलिए, अब हेल्थ सेक्टर में लाखों युवाओं के लिए, नई स्किल आधारित रोजगार के नए अवसर तैयार हो रहे हैं। मैं इस वेबिनार में उपस्थित, हेल्थ सेक्टर के एक्सपर्ट्स से आग्रह करूंगा, वो नए Training models और Partnerships विकसित करने पर सुझाव दें, ताकि देश में ट्रेनिंग इकोसिस्टम और ज्यादा मजबूत हो सके।

साथियों,

इसी से जुड़ा दूसरा विषय टेली-मेडिसीन का है। आज बड़ी संख्या में दूर-दराज के क्षेत्र के लोग भी इसका लाभ उठा रहे हैं ओर विश्वास बढ़ता चला जा रहा है। लेकिन मैं समझता हूं, इसमें अब भी जागरूरकता और सहजता बढ़ाए जाने की बहुत जरूरत है।

साथियों,

पिछले एक दशक में देश के माइंडसेट में एक बड़ा परिवर्तन आया है। आज गाँव, कस्बा, शहर की सीमाओं से परे, भारत का हर युवा कुछ नया करना चाहता है, उसमें कुछ कर गुजरने का जज्बा है। नई पीढ़ी का ये नया माइंडसेट, देश की सबसे बड़ी ताकत है, उज्जवल भविष्य की सबसे बड़ी पूंजी है। इसे Capitalize करने के लिए हमें अपने एजुकेशन सिस्टम को निरंतर आधुनिक बनाए रखना है, अपग्रेड करते ही रहना है। नई एजुकेशन पॉलिसी ने इसके लिए जरूरी बेस तैयार कर दिया है। अब बहुत आवश्यक है कि हमारे करिकुलम मार्केट की जरूरतों के हिसाब से updated रहें! हमें हमारे एजुकेशन सिस्टम को Real World Economy से जोड़ने की प्रक्रिया और तेज करनी होगी, AI और Automation, Digital Economy और Design Driven Manufacturing, ऐसे विषयों पर हमें फोकस और बढ़ाना होगा।

साथियों,

देश में एजुकेशन को Employment और Enterprise से जोड़ने की दिशा में लगातार काम हो रहा है। University Townships जैसे नए मॉडल्स में हमारे इसी अप्रोच का प्रतिबिंब है। आज भारत A.V.G.C. sector, यानी Animation, Visual Effects, Gaming और Comics को बढ़ावा दे रहा है। भारत इनोवेशन driven economy की ओर बढ़ रहा है। आज इस वेबिनार में देश के अनेक शिक्षाविद और एकेडमिक इंस्टिट्यूशन्स जुड़े हैं। मैं आपसे आग्रह करूंगा, इस वेबिनार में, अपने कैंपस को इंडस्ट्री कोलैबोरेशन और रिसर्च ड्रिवन लर्निंग, उसको केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में जरूर मंथन हो। इससे स्टूडेंट्स को रियल वर्ल्ड एक्सपोजर मिलेगा और स्किल इकोसिस्टम मजबूत होगा।

साथियों,

एक बहुत अहम विषय है STEM, यानी Science, Technology, Engineering और Mathematics. इस क्षेत्र में, ये बहुत गर्व का विषय है, ये हमारे देश में STEM के विषयों पर रूचि रखने में बेटियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। आज जब हम Futuristic Technologies के लिए तैयार हो रहे हैं, तो बहुत जरूरी है कि कोई भी बेटी, अवसरों के अभाव में रुक न जाए। वेबिनार में आप इस दिशा में जरूर चर्चा करें, हमें महिलाओं के Participation को बढ़ाने पर और ज़ोर देना होगा। हमें ऐसा रिसर्च इकोसिस्टम तैयार करना होगा, जहां यंग रिसर्चर्स को एक्सपेरिमेंट करने और नए आइडियाज पर काम करने का पूरा अवसर मिले।

साथियों,

युवा शक्ति तभी राष्ट्रीय शक्ति बनती है, जब वह स्वस्थ भी हो, अनुशासित भी हो और आत्मविश्वास से भरी हो। इसीलिए पिछले कुछ वर्षों में खेलों को राष्ट्रीय विकास की एक महत्वपूर्ण धारा के रूप में देखा गया है। खेलो इंडिया जैसी पहलों ने देश में स्पोर्ट्स इकोसिस्टम को नई ऊर्जा दी है। देशभर में स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जा रहा है। इस वेबिनार में आप सभी कुछ सवालों पर जरूर मंथन करें। जैसे, छोटी – छोटी जगहों से भी प्रतिभाओं की पहचान को और सटीक कैसे किया जाए, हजारों खिलाड़ियों को Structured Financial Support में सुधार कैसे हों, और तीसरी अहम बात, हमारी स्पोर्ट्स बॉडीज को और ज्यादा प्रोफेशनल कैसे बनाया जाए? अगले कुछ वर्षों में देश में कॉमनवेल्थ गेम्स होने जा रहे हैं, देश ओलंपिक आयोजन के प्रयास में जुटा है, ऐसे में हमें आज कम आयु के खिलाड़ियों को पहचान कर उन्हें तराशना होगा, तभी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का परचम लहरा पाएगा।

साथियों,

टूरिज्म और कल्चर, रोजगार के नए अवसर बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। जब किसी स्थान पर टूरिज्म बढ़ता है तो उस स्थान या उस शहर की ब्रैंडिंग भी बढ़ जाती है। इससे उस शहर का ओवरऑल डवलपमेंट भी बहुत तेज होता है। भारत में ऐसे ऐतिहासिक स्थलों की कोई कमी नहीं है। लेकिन लंबे समय तक टूरिज्म कुछ चुनिंदा स्थानों तक ही सीमित रह गया। अब हमें देश के कोने-कोने में टूरिस्ट डेस्टिनेशंस को नए सिरे से डेवलप करने पर फोकस कर रहे हैं।

साथियों,

आप सभी, इस वेबिनार में, भारत के Tourism Ecosystem को मजबूत करने के लिए, होलिस्टिक अप्रोच पर जरूर चर्चा करें। Trained Guides, Hospitality skills, Digital connectivity, Community participation, स्वच्छता, टूरिज्म और इनसे जुड़े विषयों पर आपके सुझाव बहुत अहम होंगे।

साथियों,

जब Institutions, Industry, Academia मिलकर काम करते हैं, तो परिवर्तन की गति तेज हो जाती है। बजट के बाद वेबिनार की जो ये सिरीज हुई है, मुझे विश्वास है उससे आने वाले समय के लिए ठोस दिशा मिलेगी। ऐसे ही प्रयासों से विकसित भारत की नींव और मजबूत होगी, और साथियों से बड़ा सुखद अनुभव है कि वेबिनार की परंपरा के कारण पोस्ट बजट और खासकर के implementation कर, मुझे जो बताया गया है कि इस वर्ष लाखों की तादाद में लोग, जो इन इन विषयों से जुड़े हुए हैं, एक्सपर्ट भी हैं, उसके लाभार्थी भी हैं, उसकी व्यवस्था से जुड़े हुए हैं, यानी एक प्रकार से जो-जो लोग driving force हैं, वे सभी लोग बड़ी सक्रियता के साथ वेबिनार में जुड़े। हमारे अफसर मुझे बता रहे थे कि बहुत उत्तम सुझाव आ रहे हैं, बहुत प्रैक्टिकल सुझाव आ रहे हैं, यानी एक प्रकार से समस्याओं का समाधान ही नहीं, नई ऊर्जा, नई गति के साथ आगे बढ़ने का हौसला भी देखने को मिलता है। मैं कहता हूं कि ये वेबिनार का बहुत ही सुखद अनुभव है, इसमें हिस्सा लेने वाले सभी वेबिनार में जिन जिन लोगों ने हिस्सा लिया है, सब अभिनंदन के अधिकारी हैं, धन्यवाद के पात्र हैं। एक बार फिर आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं, बहुत-बहुत धन्यवाद।

नमस्कार।