साहिबजादों के अदम्‍य साहस के बारे में नागरिकों को जानकारी प्रदान करने और शिक्षित करने के लिए पूरे देश में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं
"वीर बाल दिवस भारतीयता की रक्षा के लिए कुछ भी कर गुजरने के संकल्प का प्रतीक है"
माता गुजरी, गुरु गोबिंद सिंह और चार साहिबजादों की बहादुरी एवं आदर्श आज भी हर भारतीय को ताकत देते हैं
"हम भारतीयों ने स्‍वाभिमान के साथ अत्याचारियों का सामना किया"
"आज जब हम अपनी विरासत पर गौरव कर रहे हैं, तो विश्‍व का दृष्टिकोण भी बदल गया है"
आज के भारत को अपने लोगों पर, अपनेसामर्थ्‍य और अपनी प्रेरणाओं पर भरोसा है"
"आज पूरी दुनिया भारतभूमि को अवसरों की भूमि मान रही है"
"आने वाले 25 साल भारत के सामर्थ्य की पराकाष्ठा का प्रचंड प्रदर्शन करेंगे"
हमें पंच प्रणों पर चलना होगा, अपने राष्ट्रीय चरित्र को और सशक्त करना होगा"
आने वाले 25 साल हमारी युवा शक्ति के लिए बहुत बड़ा अवसर लेकर आ रहे हैं"
" विकसित भारत के लिए बड़ी तस्वीर हमारे युवाओं को ही बनानी है और सरकार एक दोस्‍त के रूप में आपके साथ मजबूती से खड़ी है"
"सरकार के पास युवाओं के सपनों को पूरा करने के लिए एक स्पष्ट रूपरेखा और एक विज़न है"

केंद्रीय मंत्री गण के उपस्थित सभी महानुभाव, देवियों और सज्जनों।

आज देश वीर साहिबज़ादों के अमर बलिदान को याद कर रहा है, उनसे प्रेरणा ले रहा है। आजादी के अमृतकाल में वीर बाल दिवस के रूप में ये एक नया अध्याय प्रारंभ हुआ है। पिछले वर्ष, देश ने पहली बार 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस के तौर पर मनाया था। तब पूरे देश में सभी ने भाव-विभोर होकर साहिबज़ादों की वीर गाथाओं को सुना था। वीर बाल दिवस भारतीयता की रक्षा के लिए, कुछ भी, कुछ भी कर गुजरने के संकल्प का प्रतीक है। ये दिन हमें याद दिलाता है कि शौर्य की पराकाष्ठा के समय कम आयु मायने नहीं रखती। ये उस महान विरासत का पर्व है, जहां गुरु कहते थे- सूरा सो पहचानिए, जो लरै दीन के हेत, पुरजा-पुरजा कट मरै, कबहू ना छाडे खेत! माता गुजरी, गुरु गोबिंद सिंह जी और उनके चारों साहिबजादों की वीरता और आदर्श, आज भी हर भारतीय को ताकत देते हैं। इसलिए वीर बाल दिवस, उन सच्चे वीरों के अप्रतिम शौर्य और उनको जन्म देने वाली माता के प्रति, राष्ट्र की सच्ची श्रद्धांजलि है। आज मैं बाबा मोती राम मेहरा, उनके परिवार की शहादत औऱ दीवान टोडरमल की भक्ति को भी श्रद्धापूर्वक याद कर रहा हूं। हमारे गुरुओं के प्रति अगाध भक्ति, राष्ट्र भक्ति का जो जज्बा जगाती है, ये उसकी मिसाल थे।

मेरे परिवारजनों,

मुझे खुशी है कि वीर बाल दिवस अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मनाया जाने लगा है। इस वर्ष अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, UAE और ग्रीस में भी वीर बाल दिवस से जुड़े कार्यक्रम हो रहे हैं। भारत के वीर साहिबजादों को पूरी दुनिया औऱ ज्यादा जानेगी, उनके महान कृतत्व से सीखेगी। तीन सौ साल पहले चमकौर और सरहिंद की लड़ाई में जो कुछ हुआ वो अमिट इतिहास है। ये इतिहास बेमिसाल है। उस इतिहास को हम भुला नहीं सकते। उसे आने वाली पीढ़ियों को याद दिलाते रहना बहुत ज़रूरी है। जब अन्याय और अत्याचार का घोर अंधकार था, तब भी हमने निराशा को पलभर के लिए भी हावी नहीं होने दिया। हम भारतीयों ने स्वाभिमान के साथ अत्याचारियों का सामना किया। हर आयु के हमारे पूर्वजों ने तब सर्वोच्च बलिदान दिया था। उन्होंने अपने लिए जीने के बजाय, इस मिट्टी के लिए मरना पसंद किया था।

साथियों,

जब तक हमने अपनी विरासत का सम्मान नहीं किया, दुनिया ने भी हमारी विरासत को भाव नहीं दिया। आज जब हम अपनी विरासत पर गर्व कर रहे हैं, तब दुनिया का नज़रिया भी बदला है। मुझे खुशी है कि आज देश गुलामी की मानसिकता से बाहर निकल रहा है। आज के भारत को अपने लोगों पर, अपने सामर्थ्य पर, अपनी प्रेरणाओं पर पूरा-पूरा भरोसा है। आज के भारत के लिए साहिबज़ादों का बलिदान राष्ट्रीय प्रेरणा का विषय है। आज के भारत में भगवान बिरसा मुंडा का बलिदान, गोविंद गुरु का बलिदान पूरे राष्ट्र को प्रेरणा देता है। और जब कोई देश अपनी विरासत पर ऐसे गर्व करते हुए आगे बढ़ता है, तो दुनिया भी उसे सम्मान से देखती है, सम्मान देती है।

साथियों,

आज पूरी दुनिया भारतभूमि को अवसरों की भूमि उसमें सबसे प्रथम पंक्ति में रखता है। आज भारत उस स्टेज पर है, जहां बड़ी वैश्विक चुनौतियों के समाधान में भारत बड़ी भूमिका निभा रहा है। अर्थव्यवस्था हो, विज्ञान हो, अनुसंधान हो, खेल हो, नीति-रणनीति हो, आज हर पहलू में भारत नई बुलंदी की तरफ जा रहा है। औऱ इसलिए ही, मैंने लाल किले से कहा था- यही समय है, सही समय है। ये भारत का समय है। आने वाले 25 साल भारत के सामर्थ्य की पराकाष्ठा का प्रचंड प्रदर्शन करेंगे। और इसके लिए हमें पंच प्राणों पर चलना होगा, अपने राष्ट्रीय चरित्र को और सशक्त करना होगा। हमें एक पल भी गंवाना नहीं है, हमें एक पल भी ठहरना नहीं है। गुरुओं ने हमें यही सीख तब भी दी थी औऱ उनकी यही सीख आज भी है। हमें इस मिट्टी की आन-बान-शान के लिए जीना है। हमें देश को बेहतर बनाने के लिए जीना है। हमें इस महान राष्ट्र की संतान के रूप में, देश को विकसित बनाने के लिए जीना है, जुटना है, जूझना है और विजयी होकर के निकलना है।

मेरे परिवारजनों,

आज भारत उस कालखंड से गुजर रहा है, जो युगों-युगों में एक बार आता है। आज़ादी के इस अमृत काल में भारत के स्वर्णिम भविष्य को लिखने वाले अनेक फैक्टर एक साथ जुड़ गए हैं। आज भारत दुनिया के उन देशों में से है जो देश सबसे ज्यादा युवा देश है। इतना युवा तो भारत, अपनी आजादी की लड़ाई के समय भी नहीं था। जब उस युवाशक्ति ने देश को आजादी दिलाई, तो ये विशाल युवाशक्ति देश को जिस ऊंचाई पर ले जा सकती है, वो कल्पना से भी परे है।

भारत वो देश है जहां नचिकेता जैसा बालक, ज्ञान की खोज के लिए धरती-आसमान एक कर देता है। भारत वो देश है जहां इतनी कम आयु का अभिमन्यु, कठोर चक्रव्यूह को तोड़ने के लिए निकल पड़ता है। भारत वो देश है जहां बालक ध्रुव ऐसी कठोर तपस्या करता है कि आज भी किसी से उसकी तुलना नहीं की जा सकती। भारत वो देश है जहां बालक चंद्रगुप्त, कम आयु में ही एक साम्राज्य का नेतृत्व करने की ओर कदम बढ़ा देता है। भारत वो देश है जहां एकलव्य जैसा शिष्य, अपने गुरू को दक्षिणा देने के लिए अकल्पनीय कर्म करके दिखा देता है। भारत वो देश है जहां खुदीराम बोस, बटुकेश्वर दत्त, कनकलता बरुआ, रानी गाइडिनिल्यू, बाजी राउत जैसे अनेकों वीरों ने देश के लिए अपना सब कुछ न्योछावर करने में एक पल भी नहीं सोचा। जिस देश की प्रेरणा इतनी बड़ी होगी, उस देश के लिए किसी भी लक्ष्य को पाना असंभव नहीं है। इसलिए मेरा विश्वास आज के बच्चों, आज के नौजवानों पर है। भविष्य़ के भारत के कर्णधार यही बच्चे हैं। अभी यहां जिन बच्चों ने मार्शल आर्ट्स का प्रदर्शन किया है...उनका अद्भुत कौशल दिखाता है कि भारत के वीर बालक-बालिकाओं का सामर्थ्य कितना ज्यादा है।

मेरे परिवारजनों,

आने वाले 25 साल हमारी युवा शक्ति के लिए बहुत बड़ा अवसर लेकर आ रहे हैं। भारत का युवा किसी भी क्षेत्र में, किसी भी समाज में पैदा हुआ हो, उसके सपने असीम हैं। इन सपनों को पूरा करने के लिए सरकार के पास स्पष्ट रोडमैप है, स्पष्ट विजन है, स्पष्ट नीति है, नियत में कोई खोट नहीं है। आज भारत ने जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति बनाई है, वो 21वीं सदी के युवाओं में नया सामर्थ्य विकसित करेगी। आज 10 हजार अटल टिंकरिंग लैब्स, हमारे विद्यार्थियों में इनोवेशन की, रिसर्च की नई ललक पैदा कर रही हैं। आप स्टार्ट अप इंडिया अभियान को देखिए। 2014 में हमारे देश में स्टार्ट अप कल्चर के बारे में कम ही लोग जानते थे। आज भारत में सवा लाख नए स्टार्ट अप्स हैं। इन स्टार्ट अप्स में, युवाओं के सपने हैं, इनोवेशन हैं, कुछ कर गुजरने का प्रयास है। आज मुद्रा योजना से 8 करोड़ से ज्यादा नौजवानों ने पहली बार, अपना कोई बिजनेस, अपना कोई स्वतंत्र काम शुरु किया है। ये भी गांव-गरीब, दलित, पिछड़े, आदिवासी, वंचित वर्ग के युवा हैं। इन युवाओं के पास बैंक को गारंटी देने तक के लिए कोई सामान नहीं था। इनकी गारंटी भी मोदी ने ली, हमारी सरकार इनकी साथी बनी। हमने बैंकों से कहा कि आप भयमुक्त होकर युवाओं को मुद्रा लोन दीजिए। लाखों करोड़ रुपए का मुद्रा लोन इसे पाकर करोड़ों युवाओं ने आज अपना भाग्य बदल दिया है।

साथियों,

हमारे खिलाड़ी आज हर इंटरनेशनल इवेंट में नए रिकॉर्ड बना रहे हैं। इसमें से अधिकतर युवा गांवों से, कस्बों से, गरीब और निम्न मध्यम वर्गीय परिवारों से ही हैं। इनको खेलो इंडिया अभियान से घर के पास ही बेहतर खेल सुविधाएं मिल रही हैं। पारदर्शी चयन प्रक्रिया और आधुनिक ट्रेनिंग के लिए उचित व्यवस्था मिल रही है। इसलिए गांव-गरीब के बेटे-बेटी भी तिरंगे की शान बढ़ा रहे हैं। ये दिखाता है कि जब युवा हित को प्राथमिकता मिलती है, तो परिणाम कितने शानदार होते हैं।

साथियों,

आज जब मैं भारत को तीसरे नंबर की अर्थव्यवस्था बनाने की बात करता हूं, तो उसके सबसे बड़े लाभार्थी मेरे देश के युवा ही हैं। तीसरे नंबर की आर्थिक ताकत होने का मतलब है, बेहतर स्वास्थ्य, बेहतर शिक्षा। तीसरे नंबर की आर्थिक ताकत होने का मतलब है, अधिक अवसर, अधिक रोज़गार। तीसरे नंबर की आर्थिक ताकत होने का मतलब है, क्वालिटी ऑफ लाइफ, क्वालिटी ऑफ प्रॉडक्ट्स। साल 2047 का विकसित भारत कैसा होगा, उस बड़े कैनवस पर बड़ी तस्वीर हमारे युवाओं को ही बनानी है। सरकार, एक दोस्त के रूप में, एक साथी के रूप में आपके साथ मज़बूती से खड़ी हुई है। विकसित भारत के निर्माण के लिए युवाओं के सुझाव और उनके संकल्पों को जोड़ने के लिए एक राष्ट्रव्यापी अभियान चल रहा है। मैं सभी नौजवानों से MyGov पर विकसित भारत से जुड़े सुझाव साझा करने का फिर से आग्रह करुंगा। देश की युवा शक्ति को एक ही प्लेटफॉर्म पर लाने के लिए एक और बहुत बड़ा मंच, एक बहुत बड़ी संस्था सरकार ने बनाई है। ये संगठन है, ये मंच है- मेरा युवा भारत यानि MY Bharat. ये मंच, अब देश की युवा बेटियों और बेटों के लिए एक बहुत बड़ा संगठन बनता जा रहा है। आजकल जो विकसित भारत संकल्प यात्राएं चल रही हैं, उनके दौरान भी लाखों युवा इस MY Bharat प्लेटफॉर्म पर रजिस्टर कर रहे हैं। मैं देश के सभी युवाओं से फिर कहूंगा कि आप MY Bharat पर जाकर खुद को जरूर रजिस्टर करें।

मेरे परिजनों,

आज वीर बाल दिवस पर मैं देश के सभी नौजवानों से, सभी युवाओं से अपने स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आग्रह करूंगा। जब भारत का युवा फिट होगा, तो वो अपने जीवन में, अपने करियर में भी सुपरहिट होगा। भारत के युवाओं को अपने लिए कुछ नियम अवश्य बनाने चाहिए, उन्हें फॉलो करना चाहिए। जैसे आप दिन में या सप्ताह में कितनी फिजिकल एक्सरसाइज करते हैं? आप सुपरफूड मिलेट्स-श्रीअन्न के बारे में जानते हैं लेकिन क्या आपने इसे अपनी डाइट में शामिल कर रखा है? डिजिटल डीटॉक्स, डिजिटल डीटॉक्स करने पर आप कितना ध्यान देते हैं? आप अपनी मेंटल फिटनेस के लिए क्या करते हैं? क्या आप एक दिन में पर्याप्त नींद लेते हैं या फिर नींद पर उतना ध्यान ही नहीं देते?

ऐसे बहुत सारे सवाल हैं जो आज की आधुनिक युवा पीढ़ी के सामने चुनौती बनकर खड़े हैं। एक और बहुत बड़ी समस्या भी है, जिस पर एक राष्ट्र के रूप में, एक समाज के रूप में हमें ध्यान देने की ज़रूरत है। ये समस्या है, नशे और ड्रग्स की है। इस समस्या से हमें भारत की युवाशक्ति को बचाना है। इसके लिए सरकारों के साथ-साथ परिवार और समाज की शक्ति को भी अपनी भूमिका का विस्तार करना होगा। मैं आज वीर बाल दिवस पर, सभी धर्मगुरुओं और सभी सामाजिक संस्थानों से भी आग्रह करुंगा कि देश में ड्रग्स को लेकर एक बड़ा जनांदोलन हो। एक समर्थ और सशक्त युवाशक्ति के निर्माण के लिए सबका प्रयास आवश्यक है। सबका प्रयास की यही सीख हमें हमारे गुरुओं ने दी है। सबका प्रयास की इसी भावना से भारत विकसित बनेगा। एक बार फिर महान गुरू परंपरा को, शहादत को नया सम्मान, नई ऊंचाई पर पहुंचाने वाले वीर साहिबज़ादों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए मेरी वाणी को विराम देता हूं। आप सबको बहुत-बहुत शुभकामनाएं!

वाहे गुरु जी का खालसा, वाहे गुरु जी की फतेह !

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Prime Minister meets Trustees of Indira Gandhi National Centre for the Arts
March 19, 2026

Prime Minister Shri Narendra Modi met with the Trustees of the Indira Gandhi National Centre for the Arts (IGNCA) today to discuss various aspects relating to further popularising India’s diverse culture.

The Prime Minister met Trustees of the Indira Gandhi National Centre for the Arts and explored ways to bring more people into the journey of cultural promotion. During the interaction, the Prime Minister and the Trustees discussed strengthening outreach through digital and grassroots initiatives, and emphasized the importance of supporting artists and scholars in preserving and promoting India's rich heritage.

The Prime Minister wrote on X:

"Met Trustees of IGNCA and discussed various aspects relating to further popularising India’s diverse culture. We also explored ways to bring more people into this journey, strengthen outreach through digital and grassroots initiatives and support artists and scholars in preserving and promoting our rich heritage."