लगभग 550 जिलों के 63,000 आदिवासी गांवों को लाभ पहुंचाने के लिए धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान का शुभारंभ किया
40 एकलव्य विद्यालयों का उद्घाटन किया और 25 एकलव्य विद्यालयों की आधारशिला भी रखी
पीएम-जनमन के तहत कई परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया
“आज की परियोजनाएं आदिवासी समाज के प्रति सरकार की प्राथमिकता का प्रमाण हैं”

जोहार!

झारखंड के राज्यपाल श्रीमान संतोष गंगवार जी, केंद्रीय कैबिनेट के मेरे सहयोगी श्री जुयल ओराम जी, इसी धरती की संतान मंत्री परिषद में मेरी साथी बहन अन्नपूर्णा देवी जी, संजय सेठ जी, श्री दुर्गादास उइके जी, यही के हमारे सांसद श्री मनीष जायसवाल जी, समस्त जन-प्रतिनिधिगण, और उपस्थित भाइयों एवं बहनों!

आज मुझे एक बार फिर झारखंड की विकासयात्रा में सहभागी बनने का सौभाग्य मिल रहा है। कुछ ही दिन पहले मैं जमशेदपुर आया था। जमशेदपुर से मैंने झारखंड के लिए सैकड़ों करोड़ की विकास परियोजनाओं का शुभारंभ किया था। झारखंड के हजारों गरीबों को पीएम-आवास योजना के तहत अपना पक्का घर मिला था। और अब कुछ ही दिनों के भीतर.... आज फिर एक बार झारखंड आकर के, आज झारखंड से 80 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण हुआ है। ये योजनाएँ आदिवासी समाज के कल्याण और आदिवासी समाज के उत्थान से जुड़ी हैं। ये भारत सरकार द्वारा देश के आदिवासी समाज को मिल रही प्राथमिकता का प्रमाण है। मैं सभी झारखंड वासियों को, सभी देशवासियों को इन विकास कार्यों के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूँ।

साथियों,

आज महात्मा गांधी पूज्य बापू की जन्म जयंती है। आदिवासी विकास के लिए उनका विजन, उनके विचार हमारी पूंजी हैं। गांधी जी का मानना था कि भारत का विकास तभी हो सकता है, जब जनजातीय समाज का तेज विकास हो। मुझे संतोष है कि आज हमारी सरकार आदिवासी उत्थान पर सबसे ज्यादा ध्यान दे रही है। अभी मैंने यहाँ धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान, एक बहुत बड़े कार्यक्रम का शुभारंभ किया है। इस योजना पर करीब 80 हजार करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत करीब साढ़े 5 सौ जिलों में 63 हजार आदिवासी बहुल गाँवों का विकास करने का अभियान चलाया जाएगा। इन आदिवासी बहुल गाँवों में सामाजिक-आर्थिक वहां के जीवन को बेहतर बनाने के लिए काम होगा। इसका लाभ देश के 5 करोड़ से ज्यादा मेरे आदिवासी भाई-बहनों को मिलेगा। झारखंड के आदिवासी समाज को भी इसका बहुत बड़ा फायदा होगा।

साथियों,

मुझे खुशी है कि धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान, की शुरुआत भगवान बिरसा मुंडा की धरती से हो रही है। भगवान बिरसा मुंडा की जन्मजयंती के दिन...यहां झारखंड से ही पीएम-जनमन योजना भी लॉंच हुई थी। अगले महीने 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस पर हम पीएम-जनमन योजना की पहली वर्षगांठ मनाएंगे। पीएम-जनमन योजना के जरिए आज देश के उन आदिवासी इलाकों में भी विकास पहुँच रहा है, जो सबसे पीछे छूट गए थे, कोई पूछने वाला नहीं था। आज यहाँ पीएम-जनमन योजना के अंतर्गत भी करीब साढ़े 13 सौ करोड़ रुपए के विकास कार्यों का शिलान्यास हुआ है। इसके तहत अति-पिछड़े आदिवासी इलाकों में बेहतर जीवन के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़क जैसी सुविधाओं का निर्माण किया जाएगा।

भाइयों और बहनों,

इस एक साल में ही पीएम-जनमन ने झारखंड में कई उपलब्धियां हासिल की हैं। अति पिछड़े साढ़े नौ सौ से ज्यादा गाँवों में हर घर जल पहुंचाने का काम भी पूरा कर लिया गया है। राज्य में 35 वनधन विकास केन्द्रों को भी स्वीकृति दी गई है। साथ ही, सुदूर आदिवासी इलाकों को मोबाइल कनेक्टिविटी से भी जोड़ने के लिए काम हो रहा है। ये विकास, ये बदलाव हमारे आदिवासी समाज को प्रगति के समान अवसर देगा।

साथियों,

हमारा आदिवासी समाज तब आगे बढ़ेगा, जब आदिवासी युवाओं को अच्छी शिक्षा के अवसर मिलेंगे। इसके लिए हमारी सरकार आदिवासी क्षेत्रों में एकलव्य आवासीय विद्यालय बनाने के अभियान में बहुत मेहनत कर रही है। आज यहाँ से 40 एकलव्य आवासीय विद्यालयों का लोकार्पण हुआ है। 25 नए एकलव्य स्कूलों की नींव भी रखी गई है। एकलव्य स्कूल सभी आधुनिक सुविधाओं से लैस हों....वहाँ हाइ स्टैंडर्ड की शिक्षा मिले...इसके लिए हमने हर स्कूल के बजट को भी करीब दोगुना कर दिया है।

भाइयों और बहनों,

जब सही प्रयास किए जाते हैं, तो सही परिणाम मिलता ही है। मुझे विश्वास है, हमारे आदिवासी युवा आगे बढ़ेंगे, और उनके सामर्थ्य का लाभ देश को मिलेगा।

साथियों,

मैं यहां लंबा प्रवचन नहीं करने वाला हूं, क्योंकि इसके बाद यहां 3-4 किलोमीटर की दूरी पर बहुत बड़ा आदिवास समाज का बहुत बड़ा मेला लगा हुआ है। मैं वहां जा रहा हूं, और वहां मैं जी-भरकर के बोलने वाला हूं, जमकर के बोलने वाला हूं। और इसलिए सरकार के इस कार्यक्रम की मर्यादाओं को समझते हुए, मैं यहां मैं अपना भाषण लंबा नहीं कर रहा हूं। लेकिन इसके बावजूद भी शायद एक कार्यक्रम में इतने लोग आ जाए ना तो भी लोग कहेंगे ओ...हो...हो कार्यक्रम बहुत बड़ा था। लेकिन ये तो सरकारी कार्यक्रम के लिए छोटी सी व्यवस्था में करना था, बड़ा कार्यक्रम तो अभी होने वाला है। लेकिन ये कार्यक्रम अगर इतना बड़ा है तो वो कार्यक्रम शायद इससे कितना बड़ा होगा। तो आज मेरे झारखंड के भाई-बहनों ने, मैं उतरते ही देख रहा हूं क्या कमाल कर दिया है। ये आपका प्यार, ये आपका आशीर्वाद मुझे आदिवासी समाज की और अधिक सेवा करने की ताकत देगा। इसी भाव के साथ, मैं एक बार फिर आप सभी को इन विकास कार्यों की बहुत-बहुत बधाई देता हूँ, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं। और आशा करता हूं आप सब भी जरूर वहां आइए, वहां बहुत सी बातें करने का मुझे अवसर मिलेगा।

जय जोहार।

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प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया में वर्तमान संघर्ष के संदर्भ में स्थिति और राहत उपायों की समीक्षा के लिए CCS बैठक की अध्यक्षता की
March 22, 2026
आवश्यक वस्तुओं की लगातार उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अल्पकालिक, मध्यकालिक और दीर्घकालिक उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई
किसानों के लिए उर्वरकों के वैकल्पिक स्रोतों पर भी चर्चा की गई ताकि भविष्य में इनकी लगातार उपलब्धता सुनिश्चित हो सके
रसायन, फार्मास्यूटिकल्स, पेट्रोकेमिकल्स और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों के लिए आवश्यक आयात के स्रोतों में विविधता लाने के लिए कई उपायों पर चर्चा की गई
भारतीय सामानों को बढ़ावा देने के लिए निकट भविष्य में नए निर्यात स्थलों को विकसित किया जाएगा
प्रधानमंत्री ने निर्देश दिया कि सरकार के सभी अंग मिलकर काम करें ताकि नागरिकों को कम से कम असुविधा हो
मंत्रियों और सचिवों का समूह बनाया जाए जो 'संपूर्ण सरकार' दृष्टिकोण के साथ पूरी लगन से काम करे: प्रधानमंत्री का निर्देश
क्षेत्रीय समूह सभी हितधारकों के परामर्श से काम करें: प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री ने राज्य सरकारों के साथ उचित समन्वय सुनिश्चित करने को कहा ताकि ज़रूरी वस्तुओं की कालाबाज़ारी और जमाखोरी न हो

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने पश्चिम एशिया में वर्तमान संघर्ष के संदर्भ में स्थिति और चल रहे तथा प्रस्तावित राहत उपायों की समीक्षा के लिए मंत्रिमंडल की सुरक्षा मामलों कीसमिति (सीसीएस) की बैठक की अध्यक्षता की।

कैबिनेट सचिव ने वैश्विक स्थिति और भारत सरकार के सभी संबंधित मंत्रालयों/विभागों द्वारा अब तक उठाए गए तथा नियोजित राहत उपायों पर विस्तृत प्रस्तुति दी। कृषि, उर्वरक, खाद्य सुरक्षा, पेट्रोलियम, बिजली, एमएसएमई, निर्यातक, शिपिंग, व्यापार, वित्त, आपूर्ति श्रृंखला और अन्य सभी प्रभावित क्षेत्रों में अपेक्षित प्रभाव और उससे निपटने के लिए उठाए गए उपायों पर चर्चा की गई। देश में समग्र वृहद-आर्थिक परिदृश्य और आगे किए जाने वाले उपायों पर भी चर्चा की गई।

पश्चिम एशिया में वर्तमान संघर्ष का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर महत्वपूर्ण अल्पकालिक, मध्यकालिक और दीर्घकालिक प्रभाव पड़ेगा। बैठक में भारत पर इसके प्रभाव का आकलन किया गया और तत्काल तथा दीर्घकालिक, दोनों तरह के जवाबी उपायों पर चर्चा की गई।

भोजन, ऊर्जा और ईंधन सुरक्षा सहित आम आदमी के लिए आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता का विस्तृत आकलन किया गया। आवश्यक वस्तुओं की लगातार उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अल्पकालिक, मध्यमकालिक और दीर्घकालिक उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई। किसानों पर पड़ने वाले असर और खरीफ मौसम के लिए उनकी खाद की ज़रूरतों का आकलन किया गया। पिछले कुछ वर्षों में खाद का पर्याप्त भंडार बनाए रखने के लिए जो कदम उठाए गए हैं, उनसे समय पर खाद की उपलब्धता और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होगी। भविष्य में खाद की लगातार उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए खाद के वैकल्पिक स्रोतों पर भी चर्चा की गई।

यह भी तय किया गया कि सभी बिजली संयंत्रों में कोयले का पर्याप्त भंडार होने से भारत में बिजली की कोई कमी नहीं होगी।

केमिकल्स, फार्मास्यूटिकल्स, पेट्रोकेमिकल्स और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों के लिए ज़रूरी आयात के स्रोतों में विविधता लाने के लिए कई उपायों पर चर्चा की गई। इसी तरह, भारतीय सामानों को बढ़ावा देने के लिए निकट भविष्य में निर्यात के नए गंतव्य विकसित किए जाएंगे।

विभिन्न मंत्रालयों द्वारा प्रस्तावित कई उपायों को सभी हितधारकों से परामर्श के बाद आने वाले दिनों में तैयार और लागू किया जाएगा।

प्रधानमंत्री ने निर्देश दिया कि मंत्रियों और सचिवों का समूह बनाया जाए, जो 'संपूर्ण सरकार' दृष्टिकोण के तहत पूरी लगन से काम करे। प्रधानमंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि क्षेत्रीय समूह सभी हितधारकों के साथ परामर्श से काम करें।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह संघर्ष लगातार बदलती हुई स्थिति है और इससे पूरी दुनिया किसी न किसी रूप में प्रभावित है। ऐसी स्थिति में, नागरिकों को इस संघर्ष के प्रभाव से बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाने चाहिए। प्रधानमंत्री ने निर्देश दिया कि सरकार के सभी अंग मिलकर काम करें, ताकि नागरिकों को कम से कम असुविधा हो। प्रधानमंत्री ने राज्य सरकारों के साथ उचित समन्वय सुनिश्चित करने के लिए भी कहा, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि आवश्यक वस्तुओं की कालाबाज़ारी और जमाखोरी न हो।