आज, भारत ऊर्जा क्षेत्र में अपार अवसरों का देश है: प्रधानमंत्री
भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच समन्वय का उल्लेखनीय उदाहरण है: प्रधानमंत्री
भारत अब ऊर्जा सुरक्षा से आगे बढ़कर ऊर्जा स्वतंत्रता मिशन की ओर बढ़ रहा है: प्रधानमंत्री
हमारा एनर्जी सेक्टर हमारी उम्मीदों के केंद्र में है, जिसमें $500 बिलियन के निवेश के मौके हैं। इसलिए, भारत में बनाइए, भारत में इनोवेट कीजिए, भारत के साथ विस्तार कीजिए और भारत में निवेश कीजिए: पीएम

नमस्कार।

केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे सहयोगी, गोवा के मुख्यमंत्री, अन्य मंत्रीगण, एंबेसडर्स, CEO’s, सम्मानित अतिथिगण, अन्य सभी महानुभाव, देवियों और सज्जनों !

एनर्जी वीक के इस नए एडिशन में, गोवा में दुनिया के करीब सवा सौ देशों के प्रतिनिधि जुटे हैं। आप एक एनर्जी सिक्योर और सस्टेनेबल फ्यूचर पर चर्चा करने भारत आए हैं। मैं आप सभी का स्वागत करता हूं, अभिनंदन करता हूं।

साथियों,

इंडिया एनर्जी वीक बहुत ही कम समय में डायलॉग और एक्शन का एक ग्लोबल प्लेटफार्म बनकर उभरा है। आज एनर्जी सेक्टर के लिए भारत बहुत बड़े अवसरों की धरती है। भारत दुनिया की फास्टेस्ट ग्रोइंग मेजर इकोनॉमी है। यानी, हमारे यहां एनर्जी प्रोडक्ट्स की डिमांड लगातार बढ़ रही है। इसके अलावा भारत दुनिया की डिमांड पूरी करने के लिए भी बेहतरीन अवसर उपलब्ध कराता है। आज हम दुनिया में पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स के टॉप 5 एक्सपोर्टर्स में से एक हैं। दुनिया के 150 से ज्यादा देशों तक हमारी एक्सपोर्ट कवरेज है। और भारत की ये क्षमता आपके बहुत काम आने वाली है। इसलिए एनर्जी वीक का ये प्लेटफार्म हमारी पार्टनरशिप्स को एक्सप्लोर करने का बहुत ही उत्तम स्थान है। मैं आप सभी को बहुत सारी शुभकामनाएं देता हूं।

Friends,

अपनी बात आगे बढ़ाने से पहले मैं एक बड़े डेवलपमेंट की चर्चा करना चाहूंगा। कल ही भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच एक बहुत बड़ा एग्रीमेंट हुआ है। दुनिया में लोग इसकी चर्चा ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ के रूप में कर रहे हैं। ये समझौता भारत के 140 करोड़ लोगों और यूरोपीय देशों के करोड़ों लोगों के लिए बहुत बड़े अवसर लेकर आया है। ये दुनिया की दो बड़ी Economies के बीच तालमेल का एक शानदार उदाहरण बना है। ये समझौता ग्लोबल जीडीपी के करीब 25% और ग्लोबल ट्रेड के करीब वन थर्ड हिस्से को रिप्रेजेंट करता है। ये समझौता ट्रेड के साथ-साथ डेमोक्रेसी और रूल ऑफ लॉ के प्रति हमारे शेयर्ड कमिटमेंट को भी सशक्त करता है।

साथियों,

EU के साथ हुआ ये फ्री ट्रेड एग्रीमेंट ब्रिटेन और एपटा समझौतों को भी कॉम्प्लीमेंट करेगा। इससे ट्रेड और ग्लोबल सप्लाई चैन दोनों को मजबूती मिलेगी। मैं भारत के नौजवानों को, सभी देशवासियों को इसके लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं। मैं टेक्सटाइल, जेम्स एंड ज्वेलरी, लेदर एंड शूज, ऐसे हर सेक्टर से जुड़े साथियों को भी बधाई देता हूं। ये समझौता आपके लिए बहुत सहायक सिद्ध होगा।

साथियों,

इस ट्रेड डील से भारत में मैन्युफैक्चरिंग को तो बल मिलेगा ही, साथ ही सर्विसेज से जुड़े सेक्टर का भी और अधिक विस्तार होगा। ये फ्री ट्रेड एग्रीमेंट दुनिया के हर बिजनेस, हर इन्वेस्टर के लिए भारत पर कॉन्फिडेंस को और मजबूत करेगा।

साथियों,

भारत आज हर सेक्टर में ग्लोबल पार्टनरशिप पर बहुत अधिक काम कर रहा है। मैं अगर एनर्जी सेक्टर की ही चर्चा करूं, तो यहां एनर्जी वैल्यू चैन से जुड़े हुए अलग-अलग क्षेत्रों में निवेश की बहुत संभावनाएं हैं। आप एक्सप्लोरेशन का ही क्षेत्र ले लीजिए। भारत ने अपने एक्सप्लोरेशन सेक्टर को काफी ओपन कर दिया है। आपको हमारे डीप-सी एक्सप्लोरेशन से जुड़े समुद्र मंथन मिशन की भी जानकारी है। हम इस दशक के अंत तक अपने ऑयल एंड गैस सेक्टर में इन्वेस्टमेंट को 100 बिलियन डॉलर्स तक ले जाने का प्रयास कर रहे हैं। हमारा लक्ष्य एक्सप्लोरेशन के दायरे को भी वन मिलियन स्क्वायर किलोमीटर तक विस्तार करने का है। इसी सोच के साथ हमारे यहां 170 से अधिक ब्लॉक्स को अवार्ड किया जा चुका है। अंडमान निकोबार का बेसिन भी हमारी नेक्स्ट हाइड्रोकार्बन होप बन रहा है।

साथियों,

हमने एक्सप्लोरेशन सेक्टर में काफी रिफॉर्म्स भी किए हैं। नोगो एरिया बहुत कम कर दिया गया है। इंडिया एनर्जी वीक के पिछले एडिशंस में आपको भी, जो भी सुझाव थे, आपने जो कुछ भी कहा उनके अनुसार हमने अपने एक्ट्स और रूल्स में भी बदलाव किए हैं। यदि आप एक्सप्लोरेशन सेक्टर में इन्वेस्ट करते हैं, तो आपकी कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी बढ़ना तय है।

साथियों,

भारत की एक और विशेषता है, जो है एनर्जी सेक्टर में इन्वेस्टमेंट को बहुत फायदेमंद बनाता है। हमारे यहां बहुत बड़ी रिफाइनिंग कैपेसिटी मौजूद है। हम रिफाइनिंग कैपेसिटी के मामले में विश्व में दूसरे स्थान पर है। जल्द ही हम दुनिया में पहले नंबर पर होंगे। आज भारत की रिफाइनिंग कैपेसिटी करीब 260 M.M.TPA की है। इसे 300 M.M.TPA के ऊपर ले जाने के लिए निरंतर प्रयास हो रहा है। ये इन्वेस्टर्स के लिए बहुत बड़ा एडवांटेज है।

साथियों,

भारत में LNG की डिमांड भी निरंतर बढ़ रही है। हमने अपनी टोटल एनर्जी डिमांड का 15% LNG से पूरा करने का लक्ष्य रखा है। इसलिए हमें LNG के पूरे वैल्यू चेन पर काम करने की आवश्यकता है। आज भारत ट्रांसपोर्टेशन पर भी बहुत बड़े स्तर पर काम कर रहा है। LNG ट्रांसपोर्टेशन के लिए जिन वेसल्स की जरूरत है, हम उन्हें भारत में ही बनाने पर काम कर रहे हैं। हाल में ही भारत में शिप बिल्डिंग के लिए seventy thousand crore रूपये का प्रोग्राम शुरू किया गया है। साथ ही LNG के लिए देश के पोर्ट्स पर टर्मिनल के निर्माण में भी निवेश की अनेक संभावनाएं हैं। री-गैसीफिकेशन से जुड़े प्रोजेक्ट्स में भी आपके लिए इन्वेस्ट करने की बड़ी संभावनाएं बन रही है।

साथियों,

LNG के ट्रांसपोर्टेशन के लिए भारत में बहुत बड़ी पाइपलाइन की भी अब जरूरत है। बीते सालों में इस पर हमने बहुत निवेश किया है। लेकिन अभी भी बहुत बड़े पैमाने पर इन्वेस्टमेंट के लिए संभावनाएं हैं। आज भारत के कई शहरों में सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन का नेटवर्क पहुंच चुका है, और हम तेजी से अन्य शहरों में भी इससे जोड़ रहे हैं। सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन भी आपके निवेश के लिए बहुत ही आकर्षक क्षेत्र है।

साथियों,

भारत की इतनी बड़ी जनसंख्या है, हमारी इकोनॉमी लगातार बढ़ रही है। ऐसे भारत में पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स की डिमांड भी लगातार बढ़ने वाली है। इसलिए हमें बहुत बड़े एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता होगी, और इसमें भी आपका इन्वेस्टमेंट आपको बहुत ग्रोथ देगा। इन सबके अलावा भारत में डाउनस्ट्रीम एक्टिविटीज में भी आपके लिए इन्वेस्टमेंट के बहुत मौके हैं।

साथियों,

आज का भारत रिफॉर्म्स एक्सप्रेस पर सवार है, और हर सेक्टर में तेजी से रिफॉर्म्स कर रहा है। हम डोमेस्टिक हाइड्रोकार्बन को सशक्त करने के लिए रिफॉर्म्स कर रहे हैं, और ग्लोबल कोलैबोरेशन के लिए ट्रांसपेरेंट और इन्वेस्टर फ्रेंडली एनवायरमेंट बना रहे हैं। भारत अब एनर्जी सिक्योरिटी से आगे बढ़कर, एनर्जी इंडिपेंडेंस के मिशन पर काम कर रहा है। भारत एक ऐसा एनर्जी सेक्टर इकोसिस्टम डेवलप कर रहा है, जो भारत की लोकल डिमांड को पूरा कर सके और अफोर्डेबल रिफाइनिंग, और ट्रांसपोर्टेशन सॉल्यूशन से दुनिया के लिए एक्सपोर्ट भी बहुत ही कंपिटिटिव हो।

साथियों,

हमारा एनर्जी सेक्टर हमारी एस्पिरेशंस के केंद्र में है। इसमें 500 बिलियन डॉलर्स की इन्वेस्टमेंट Opportunities है। इसलिए मेरा आह्वान है- मेक इन इंडिया, इनोवेट इन इंडिया, स्केल विथ इंडिया, इन्वेस्ट इन इंडिया। इसी आग्रह के साथ मैं आप सभी को इंडिया एनर्जी वीक की अनेक शुभकामनाएं देता हूं।

बहुत-बहुत धन्यवाद।

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प्रधानमंत्री ने नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल बैठक की अध्यक्षता की
June 11, 2026
विकसित भारत की परिकल्पना प्रत्येक राज्य, जिले, प्रखंड और गांव का सामूहिक संकल्प बनना चाहिए: प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के 70 करोड़ युवाओं को देश की संपत्ति बताया और राज्यों से इस जनसांख्यिकीय लाभांश को विकास लाभांश में बदलने का आग्रह किया
प्रधानमंत्री ने राज्यों को युवाओं और एमएसएमई के लिए अवसर पैदा करने तथा उन देशों से सक्रिय रूप से निवेश आकर्षित करने के लिए प्रोत्साहित किया जिनके साथ भारत ने मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं
राज्यों को एक ज़िला एक उत्पाद को मजबूत करना चाहिए और रक्षा विनिर्माण में अवसरों का लाभ उठाना चाहिए: प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि एआई को एक अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए और लोगों को भविष्य के लिए तैयार कौशल से सुसज्जित किया जाना चाहिए
प्रधानमंत्री ने नशीली दवाओं के दुरुपयोग और साइबर धोखाधड़ी जैसी उभरती सामाजिक चुनौतियों का सामना करने के लिए समन्वित प्रयासों की आवश्यकता का उल्लेख किया
प्रधानमंत्री मोदी ने अल नीनो से उत्पन्न चिंताओं की ओर ध्यान आकर्षित किया और राज्यों से जल संरक्षण तथा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का आग्रह किया
मुख्यमंत्री/उप राज्यपाल/प्रशासकों ने प्रधानमंत्री मोदी को कार्यालय में 12 वर्ष पूरे करने पर बधाई दी
राज्यों ने वैश्विक भू-राजनीतिक संकट का सामना करने और भारत की क्षमता को मजबूत करने के लिए केंद्र के साथ एकजुटता व्यक्त की
सभी राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों ने बैठक में भाग लिया; पहली बार सभी 28 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इसमें भाग लिया
बैठक का विषय : विकसित भारत@2047 के लिए समावेशी मानव विकास

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में नीति आयोग की 11वीं शासी परिषद की बैठक की अध्यक्षता की। इस वर्ष बैठक का विषय विकसित भारत@2047 के लिए समावेशी मानव विकास था। इसमें 28 राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करने वाले मुख्यमंत्रियों, उपराज्यपालों और प्रशासकों ने भाग लिया। यह पहला अवसर था जब सभी 28 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने नीति आयोग की शासी परिषद की बैठक में भाग लिया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे समय में जब कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं अनिश्चितता और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही हैं, भारत की विकास गाथा दुनिया को प्रेरित करती रहती है। उन्होंने आत्मनिर्भरता के प्रति राष्ट्र के संकल्प को और मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में विशेष रूप से वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने और लागू करने के महत्व पर प्रकाश डाला।

प्रधानमंत्री ने सहकारी संघवाद के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए केंद्र और राज्यों को मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि विकसित भारत की परिकल्पना हर राज्य, जिले, प्रखंड और गांव का सामूहिक संकल्प बनना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने भारत की जनसांख्यिकीय शक्ति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देश के युवा इसकी सबसे बड़ी संपत्ति हैं, जिसमें लगभग 70 करोड़ भारतीय 25 वर्ष से कम आयु के हैं। इसे जनसांख्यिकीय लाभांश बताते हुए उन्होंने राज्यों से आग्रह किया कि वे इसे शिक्षा, कौशल विकास और क्षमता निर्माण की पहल के माध्यम से विकास लाभांश में बदलने पर ध्यान केंद्रित करें जो युवाओं को भविष्य के अवसरों और चुनौतियों के लिए तैयार करे।

प्रधानमंत्री ने हाल ही में कई देशों के साथ हुए भारत के मुक्त व्यापार समझौतों का जिक्र करते हुए राज्यों को युवाओं और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) के लिए अवसर पैदा करने और हितधारकों को इन समझौतों से होने वाले फायदों का प्रभावी ढंग से लाभ उठाने के लिए तैयार करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने राज्यों से सक्रिय रूप से सहयोगी देशों से निवेश आकर्षित करने का भी आग्रह किया।

प्रधानमंत्री ने महिला नेतृत्व वाले विकास पर बल देते हुए, राज्यों से लखपति दीदी की संख्या 3 करोड़ से बढ़ाकर 6 करोड़ करने की दिशा में काम करने का आह्वान किया और नारी शक्ति के लिए सुरक्षित तथा संरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने के महत्व पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री ने राज्यों से एक ज़िला एक उत्पाद (ओडीओपी) पहल पर ध्यान केंद्रित करने और इसके आसपास निर्यात के अनुकूल रणनीतियों को विकसित करने का आग्रह किया। उन्होंने रक्षा विनिर्माण का एक उभरते क्षेत्र के रूप में उल्लेख किया जहां भारत एक विशिष्ट पहचान स्थापित कर रहा है। श्री मोदी ने राज्यों को इसके विकास से उत्पन्न अवसरों का लाभ उठाने के लिए नीतियां तैयार करने के लिए प्रोत्साहित किया।

प्रधानमंत्री ने निवारक उपायों, जागरूकता अभियानों और प्रभावी शासन के माध्यम से नशीली दवाओं के दुरुपयोग और साइबर धोखाधड़ी जैसी उभरती सामाजिक चुनौतियों का समाधान करने के लिए समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

प्रधानमंत्री ने अल नीनो की स्थिति से उत्पन्न चिंताओं की ओर भी ध्यान आकर्षित किया और राज्यों से जल संरक्षण को बढ़ावा देने तथा प्राकृतिक और जैविक खेती की प्रथाओं को प्रोत्साहित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि चालू खरीफ सीजन के दौरान किसानों द्वारा 11 लाख टन जैविक खाद की खरीद टिकाऊ कृषि में बढ़ते विश्वास को दर्शाती है।

प्रधानमंत्री ने जिला स्तर पर प्रगति का मूल्यांकन करने की आवश्यकता पर जोर दिया। श्री मोदी ने विशेष रूप से आकांक्षी जिला मानकों के माध्यम से सुझाव दिया कि इसी तरह कृषि के क्षेत्र में 100 जिलों की पहचान की जानी चाहिए ताकि सकारात्मक परिणाम लाए जा सकें। उन्होंने राज्यों से इस प्रयास में आगे आने का आग्रह किया ताकि महत्वाकांक्षी दृष्टिकोण के माध्यम से एक अभूतपूर्व परिवर्तन हासिल किया जा सके।

प्रधानमंत्री ने विकसित भारत@2047 की परिकल्पना साकार करने के लिए एक निगरानी ढांचे और लक्षित 100-दिवसीय तथा पांच-वर्षीय लक्ष्यों की आवश्यकता पर बल दिया।

निवेश आकर्षित करने के लिए सुशासन, पारदर्शिता और बुनियादी ढांचे के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, उन्होंने राज्यों से ब्रांडिंग, कारोबार करने में आसानी और डेटा केंद्रों तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे क्षेत्रों में उभरते अवसरों पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एआई को एक अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए। श्री मोदी ने भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए आवश्यक कौशल से लोगों को सुसज्जित करने के लिए अधिक प्रयासों का आह्वान किया।

मुख्यमंत्रियों/उपराज्यपालों/प्रशासकों ने प्रधानमंत्री मोदी को उनके कार्यालय में 12 वर्ष का कार्यकाल पूरा करने पर बधाई दी। उन्होंने वैश्विक भू-राजनीतिक संकट का सामना करने और ऊर्जा आवश्यकताओं के संबंध में भारत की क्षमता को मजबूत करने और इसकी विकास गति को बनाए रखने के लिए केंद्र के साथ एकजुटता व्यक्त की।

प्रधानमंत्री ने कहा कि चर्चा रचनात्मक रही और यह राज्यों की आकांक्षाओं, आशाओं, अनुभवों, सर्वोत्तम प्रथाओं तथा चुनौतियों को दर्शाती है। प्रधानमंत्री ने बैठक में भाग लेने के लिए सभी मुख्यमंत्रियों, उपराज्यपालों और प्रशासकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए भरोसा जताया कि सहयोग, नवाचार और विकास के प्रति साझा प्रतिबद्धता के माध्यम से भारत वर्ष 2047 तक विकसित भारत की ओर अपनी यात्रा को गति दे सकता है।