"खिलाड़ियों की शानदार मेहनत के कारण, देश एक प्रेरक उपलब्धि के साथ आजादी के अमृत काल में प्रवेश कर रहा है"
"एथलीट देश के युवाओं को न केवल खेल में बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करते हैं"
"आपने देश को विचार और लक्ष्य की एकता के सूत्र में पिरोया है जो हमारे स्वतंत्रता संग्राम की एक बड़ी शक्ति भी रही है"
"तिरंगे की ताकत यूक्रेन में देखी गई जहां यह न केवल भारतीयों के लिए बल्कि युद्ध क्षेत्र से बाहर निकलने में अन्य देशों के नागरिकों के लिए भी यह सुरक्षा कवच बन गया था"
“हमारे पास एक खेल इकोसिस्‍टम बनाने की जिम्मेदारी है जो वैश्विक स्तर पर उत्कृष्ट, समावेशी, विविध और गतिशील है, कोई प्रतिभा छूटनी नहीं चाहिए'

चलिए, वैसे तो सब से बात करना मेरे लिए बहुत ही प्रेरक रहता है, लेकिन सबसे शायद बात करना संभव नहीं होता है। लेकिन अलग-अलग समय में आप में कइयों से किसी न किसी रूप में मुझे संपर्क में रहने का अवसर मिला है, बातचीत करने का अवसर मिला है, लेकिन मेरे लिए खुशी है कि आप समय निकाल कर मेरे निवास स्थान पर आए और परिवार के एक सदस्य के रूप में आए हैं। तो आपकी सिद्धि का यश आप के साथ जुड़कर के जैसे हर हिंदुस्तानी गर्व करता है, मैं भी गर्व कर रहा हूँ। आप सबका मेरे यहां बहुत-बहुत स्वागत है।

देखिए दो दिन बाद देश आज़ादी के 75 वर्ष पूरा करने वाला है। ये गर्व की बात है कि देश आप सभी की मेहनत से एक प्रेरणादायक उपलब्धि के साथ आज़ादी के अमृतकाल में प्रवेश कर रहा है।

साथियों,

बीते कुछ हफ्तों में देश ने खेल के मैदान में 2 बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स में ऐतिहासिक प्रदर्शन के साथ-साथ देश ने पहली बार Chess Olympiad का आयोजन किया है। ना सिर्फ सफल आयोजन किया है, बल्कि Chess में अपनी समृद्ध परंपरा को जारी रखते हुए, श्रेष्ठ प्रदर्शन भी किया है। मैं Chess Olympiad में हिस्सा लेने वाले सभी खिलाड़ियों को और सभी मेडल विजेताओं को भी आज इस अवसर पर बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

कॉमनवेल्थ गेम्स शुरु होने से पहले मैंने आप सभी से कहा था, एक प्रकार से वादा किया था कि जब आप लौटेंगे तो हम मिलकर विजयोत्सव मनाएंगे। मेरा ये कॉन्फिडेंस था कि आप विजयी होकर के आने वाले हैं और मेरा ये मैनेजमेंट भी था कि मैं जरूर कितनी ही व्‍यस्‍तता होगी, आप लोगों के बीच समय निकालूंगा और विजयोत्सव मनाऊंगा। आज ये विजय के उत्सव का ही अवसर है। अभी जब आपसे मैं बात कर रहा था तो मैं वह आत्मविश्वास, वो हौसला देख रहा था और वही आपकी पहचान है, वही आपकी पहचान से जुड़ चुका है। जिसने मेडल जीता वो भी और जो आगे मेडल जीतने वाले हैं, वह भी आज प्रशंसा के पात्र हैं।

साथियों,

वैसे मैं आपको एक बात और बताना चाहता हूं। आप सभी तो वहां मुकाबला कर रहे थे, लेकिन हिन्‍दुस्‍तान में क्योंकि time difference रहता है, यहां करोड़ों भारतीय रतजगा कर रहे थे। देर रात तक आपके हर एक्शन, हर मूव पर देशवासियों की नज़र थी। बहुत से लोग अलार्म लगाकर सोते थे कि आपके प्रदर्शन का अपडेट लेंगे। कितने ही लोग बार-बार जाकर चेक करते थे कि स्कोर क्या हुआ है, कितने गोल, कितने प्वाइंट हुए हैं। खेलों के प्रति इस दिलचस्पी को बढ़ाने में, ये आकर्षण बढ़ाने में आप सबकी बहुत बड़ी भूमिका है और इसके लिए आप सभी बधाई के पात्र हैं।

साथियों,

इस बार का जो हमारा प्रदर्शन रहा है, उसका ईमानदार आकलन सिर्फ मेडल की संख्या से संभव नहीं है। हमारे कितने खिलाड़ी इस बार neck to neck कंपीट करते नज़र आए हैं। ये भी अपने आप में किसी मेडल से कम नहीं है। ठीक है कि प्वाइंट वन सेकेंड, प्वाइंट वन सेंटीमीटर का फासला रह गया होगा, लेकिन उसे भी हम कवर कर लेंगे। ये मेरा आपके प्रति पूरा विश्वास है। मैं इसलिए भी उत्साहित हूं कि जो खेल हमारी ताकत रहे हैं, उनको तो हम मज़बूत कर ही रहे हैं, हम नए खेलों में भी अपनी छाप छोड़ रहे हैं। हॉकी में जिस प्रकार हम अपनी लैगेसी को फिर हासिल कर रहे हैं, उसके लिए मैं दोनों टीमों के प्रयास, उनकी मेहनत, उनके मिजाज, उसकी बहुत-बहुत सराहना करता हूँ, पूरी-पूरी प्रशंसा करता हूँ। पिछली बार की तुलना में इस बार हमने 4 नए खेलों में जीत का नया रास्ता बनाया है। लॉन बाउल्स से लेकर एथलेटिक्स तक, अभूतपूर्व प्रदर्शन रहा है। इस प्रदर्शन से देश में नए खेलों के प्रति युवाओं का रुझान बहुत बढ़ने वाला है।

नए खेलों में हमें इसी तरह अपना प्रदर्शन और सुधारते चलना है। मैं देख रहा हूँ, पुराने सारे चेहरे मेरे सामने हैं, शरत हों, किदांबी हों, सिंधु हों, सौरभ हों, मीराबाई हों, बजरंग हों, विनेश, साक्षी, आप सभी सीनियर एथलीट्स ने उम्मीद के मुताबिक लीड किया है। हर एक का हौसला बुलंद किया है। और वहीं हमारे युवा एथलीट्स ने तो कमाल ही कर दिया है। गेम्स की शुरुआत से पहले मेरी जिन युवा साथियों से बात हुई थी, उन्होंने अपना वादा पूरा निभाया है। जिन्होंने डैब्यू किया है, उनमें से 31 साथियों ने मेडल जीते हैं। ये दिखाता है कि आज हमारे युवाओं का कॉन्फिडेंस कितना बढ़ रहा है। जब अनुभवी शरत dominate करते हैं और अविनाश, प्रियंका और संदीप, पहली बार दुनिया के श्रेष्ठ एथलीट्स को टक्कर देते हैं, तो नए भारत की स्पिरिट दिखती है। स्पिरिट ये कि- हम हर रेस में, हर कंपीटिशन में, अड़े हैं, तैयार खड़े हैं। एथलेटिक्स के पोडियम पर एक साथ, दो-दो स्थान पर तिरंगे को सलामी देते भारतीय खिलाड़ियों को हमने कितनी बार देखा है। और साथियों, अपनी बेटियों के प्रदर्शन से तो पूरा देश ही गदगद है। अभी जब मैं पूजा से बात कर रहा था तो मैंने उल्लेख भी किया, पूजा का वो भावुक वीडियो देख सोशल मीडिया के माध्यम से कहा भी था कि आपको माफी मांगने की जरूरत नहीं है। आप देश के लिए विजेता हैं, बस अपनी ईमानदारी और परिश्रम में कभी कमी नहीं छोड़नी है। ओलंपिक्स के बाद विनेश से भी मैंने यही कहा था और मुझे खुशी है कि उन्होंने निराशा को पीछे छोड़ते हुए श्रेष्ठ प्रदर्शन किया। बॉक्सिंग हो, जूडो हो, कुश्ती हो, जिस प्रकार बेटियों ने डॉमिनेट किया, वो अद्भुत है। नीतू ने तो प्रतिद्वंदियों को मैदान छोड़ने पर ही मजबूर कर दिया। हरमनप्रीत के नेतृत्व में पहली बार में ही क्रिकेट में बेहतरीन प्रदर्शन किया है। सभी खिलाड़ियों का प्रदर्शन बेहतरीन रहा है, लेकिन रेणुका की स्विंग का तोड़ किसी के पास अभी भी नहीं है। दिग्गजों के बीच टॉप विकेट टेकर रहना, कोई कम उपलब्धि नहीं है। इनके चेहरे पर भले ही शिमला की शांति रहती हो, पहाड़ों की मासूम मुस्कान रहती हो, लेकिन उनका अग्रेशन बड़े-बड़े बैटर्स के हौसले पस्त कर देता है। ये प्रदर्शन निश्चित रूप से दूर-सुदूर के क्षेत्रों में भी बेटियों को प्रेरित करेगा, प्रोत्साहित करेगा।

 

साथियों,

आप सभी देश को सिर्फ एक मेडल नहीं, सिर्फ सेलिब्रेट करने का, गर्व करने का अवसर ही देते हैं, ऐसा नहीं है। बल्कि एक भारत श्रेष्ठ भारत की भावना को आप और सशक्त करते हैं। आप खेल में ही नहीं, बाकी सेक्टर में भी देश के युवाओं को बेहतर करने के लिए प्रेरित करते हैं। आप सभी देश को एक संकल्प, एक लक्ष्य के साथ जोड़ते हैं, जो हमारी आज़ादी की लड़ाई की भी बहुत बड़ी ताकत थी। महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चन्द्र बोस, मंगल पांडे, तात्या टोपे, लोकमान्य तिलक, सरदार भगत सिंह, चन्द्रशेखर आजाद, अशफाक़ उल्ला खाँ और रामप्रसाद बिस्मिल,, अनगिनत सेनानी, अनगिनत क्रांतिवीर जिनकी धारा अलग थी, लेकिन लक्ष्य एक था। रानी लक्ष्मीबाई, झलकारी बाई, दुर्गा भाभी, रानी चेनम्मा, रानी गाइदिनल्यू और वेलु नचियार जैसी अनगिनत वीरांगनाओं ने हर रूढ़ी को तोड़ते हुए आज़ादी की लड़ाई लड़ी। बिरसा मुंडा हो और अल्लूरी सीताराम राजू हो, गोविंद गुरु हो, जैसे अनेक महान आदिवासी सेनानियों ने सिर्फ और सिर्फ अपने हौसले, अपने जज्बे से इतनी ताकतवर सेना से टक्कर ली। डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद, पंडित नेहरू, सरदार पटेल, बाबा साहब आंबेडकर, आचार्य विनोबा भावे, नाना जी देशमुख, लालबहादुर शास्त्री, श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसी अनेक विभूतियों ने आज़ाद भारत के सपनों को पूरा करने के लिए जीवन खपा दिया। आज़ादी की लड़ाई से लेकर आज़ाद भारत के नवनिर्माण में जिस तरह से पूरे भारत ने एकजुट होकर प्रयास किया, उसी भावना से आप भी मैदान में उतरते हैं। आप सभी का राज्य, जिला, गांव, भाषा भले ही कोई भी हो, लेकिन आप भारत के मान, अभिमान के लिए, देश की प्रतिष्ठा के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हैं। आपकी भी प्रेरणाशक्ति तिरंगा है और तिरंगे की ताकत क्या होती है, ये हमने कुछ समय पहले ही यूक्रेन में देखा है। तिरंगा युद्धक्षेत्र से बाहर निकलने में भारतीयों का ही नहीं, बल्कि दूसरे देशों के लोगों के लिए भी सुरक्षा कवच बन गया था।

साथियों,

बीते समय में हमने दूसरे टूर्नामेंट्स में भी बेहतरीन प्रदर्शन किया है। वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में हमारा अब तक का सबसे सफलतम प्रदर्शन रहा है। वर्ल्ड अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी बहुत प्रशंसनीय प्रदर्शन रहा है। इसी प्रकार वर्ल्ड कैडेट रेसलिंग चैंपियनशिप और पैरा बैडमिंटन इंटरनेशनल टूर्नामेंट्स इसमें भी कई नए रिकॉर्ड बनाए गए हैं। ये भारतीय खेल के लिए निश्चित रुप से उत्साह और उमंग का समय है। यहां अनेक कोच भी हैं, कोचिंग स्टाफ के मेंबर्स भी हैं और देश में खेल प्रशासन से जुड़े साथी भी हैं। इन सफलताओं में आपकी भूमिका भी बेहतरीन रही है। आपकी भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है। लेकिन ये भी तो मेरेे हिसाब से शुरुआत है, हम संतोष मानकर के चुप बैठने वाले नहीं हैं। भारत के खेलों का स्वर्णिम काल दस्तक दे रहा है दोस्‍तों। मुझे खुशी है कि खेलो इंडिया के मंच से निकले अनेक खिलाड़ियों ने इस बार बेहतरीन प्रदर्शन किया है। TOPS का भी पॉजिटिव प्रभाव देखने को मिल रहा है। नए टैलेंट की खोज और उनको पोडियम तक पहुंचाने के हमारे प्रयासों को हमें और तेज़ करना है। हमारे ऊपर एक ऐसे स्पोर्टिंग इकोसिस्टम के निर्माण की ज़िम्मेदारी है जो विश्व में श्रेष्ठ हो, इंक्लूसिव हो, डायवर्स हो़, डायनामिक हो। कोई भी टैलेंट छूटना नहीं चाहिए, क्योंकि वो देश की संपदा है, देश की अमानत है। मैं सभी एथलीट्स से आग्रहपूर्वक कहूंगा कि आपके सामने अब एशियन गेम्स हैं, ओलंपिक्स हैं। आप जमकर तैयारी कीजिए। आजादी के 75 वर्ष पर मेरा आपसे एक और आग्रह है। पिछली बार मैंने आपसे देश के 75 स्कूलों, शिक्षण संस्थानों में जाकर बच्चों को प्रोत्साहित करने का आग्रह किया था। मीट द चैंपियन अभियान के तहत अनेक साथियों ने व्यस्तताओं के बीच ये काम किया भी है। इस अभियान को जारी रखें। जो साथी अभी नहीं जा पाए हैं, उनसे भी मेरा आग्रह है कि आप ज़रूर जाएं, आपको देश का युवा अब रोल मॉडल के रूप में देखता है और इसलिए आपकी बातों को वो ध्यान से सुनता है। आपकी सलाह को वो जीवन में उतारने के लिए वो उतावला है। और इसलिए आपके पास ये जो सामर्थ्‍य पैदा हुआ है, जो स्वीकृति बनी है, जो सम्मान बढ़ा है वो देश की युवा पीढ़ी के लिए भी काम आना चाहिए। मैं फिर एक बार आप सबकी इस विजय यात्रा को अनेक-अनेक शुभकामनाएं देता हूँ ! बहुत-बहुत बधाई देता हूं ! धन्यवाद !

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नमस्कार!

पिछले कुछ समय में मुझे एक-दो बार टीवी9 भारतवर्ष देखने का मौका मिला है। नॉर्मली भी युद्धों और मिसाइलों पर आपका बहुत फोकस होता है और आजकल तो आपको कंटेंट की ओवरफीडिंग हो रही है। बड़े-बड़े देश टीवी9 को इतना सारा कंटेंट देने पर तुले हुए हैं, लेकिन On a Serious Note, आज विश्व जिन गंभीर परिस्थितियों से गुजर रहा है, वो अभूतपूर्व है और बेहद गंभीर है। और इन स्थितियों के बीच, आज टीवी-9 नेटवर्क ने विचारों का एक बेहद महत्वपूर्ण मंच बनाया है। आज इस समिट में आप सभी India and the world, इस विषय पर चर्चा कर रहे हैं। मैं आप सबको बधाई देता हूं। इस समिट के लिए अपनी शुभकामनाएं देता हूं। सभी अतिथियों का अभिनंदन करता हूं।

साथियों,

आज जब दुनिया, conflicts के कारण उलझी हुई है, जब इन conflicts के दुष्प्रभाव पूरी दुनिया पर दिख रहे हैं, तब India and the world की बात करना बहुत ही प्रासंगिक है। भारत आज वो देश है, जिसकी अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है। 2014 के पहले की स्थितियों को पीछे छोड़कर के आज भारत एक नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। अब भारत चुनौतियों को टालता नहीं है बल्कि चुनौतियों से टकराता है। आप बीते 5-6 साल में देखिए, कोरोना की महामारी के बाद चुनौतियां एक के बाद एक बढ़ती ही गई हैं। ऐसा कोई साल नहीं है, जिसने भारत की, भारतीयों की परीक्षा न ली हो। लेकिन 140 करोड़ देशवासियों के एकजुट प्रयास से भारत हर आपदा का सामना करते हुए आगे बढ़ रहा है। इस समय युद्ध की परिस्थितियों में भी भारत की नीति और रणनीति देखकर, भारत का सामर्थ्य देखकर दुनिया के अनेकों देश हैरान हैं। हमारे यहां कहावत है, सांच को आंच नहीं। 28 फरवरी से दुनिया में जो उथल-पुथल मची है, इन कठोर विपरीत परिस्थितियों में भी भारत प्रगति के, विकास के, विश्वास के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। इन 23 दिनों में भारत ने अपनी Relationship Building Capacity दिखाई है, Decision Making Capacity दिखाई है और Crisis Management Capacity दिखाई है।

साथियों,

आज जब दुनिया इतने सारे खेमों में बंटी हुई है, भारत ने अभूतपूर्व और अकल्पनीय bridges बनाए हैं। Gulf से लेकर Global West तक, Global South से लेकर पड़ोसी देशों तक भारत सभी का trusted partner है। कुछ लोग पूछते हैं, हम किसके साथ हैं? तो उनको मेरा जवाब यही है कि हम भारत के साथ हैं, हम भारत के हितों के साथ हैं, शांति के साथ हैं, संवाद के साथ हैं।

साथियों,

संकट के इसी समय में जब global supply chains डगमगा रही हैं, भारत ने diversification और resilience का मॉडल पेश किया है। Energy हो, fertilizers हों या essential goods अपने नागरिकों को कम से कम परेशानी हो, इसके लिए भारत ने निरंतर प्रयास किया है और आज भी कर रहे है।

साथियों,

जब राष्ट्रनीति ही राजनीति का मुख्य आधार हो, तब देश का भविष्य सर्वोपरि होता है। लेकिन जब राजनीति में व्यक्तिगत स्वार्थ हावी हो जाता है, तब लोग देश के फ्यूचर के बजाय अपने फ्यूचर के बारे में सोचते हैं। आप ज़रा याद कीजिए 2004 से 2010 के बीच क्या हुआ था? तब कांग्रेस सरकार के समय पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतों का संकट आया था और तब कांग्रेस ने देश की नहीं बल्कि अपनी सत्ता की चिंता की। उस वक्त कांग्रेस ने एक लाख अड़तालीस हज़ार करोड़ रुपए के ऑयल बॉन्ड जारी किए थे और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी ने खुद कहा था कि वो आने वाली पीढ़ी पर कर्ज का बोझ डाल रहे हैं। यह जानते हुए भी कि ऑयल बॉन्ड का फैसला गलत है, जो रिमोट कंट्रोल से सरकार चला रहे थे, उन लोगों ने अपनी सत्ता बचाने के लिए यह गलत निर्णय किया क्योंकि जवाबदेही उस समय नहीं होनी थी, उस बॉन्ड पर री-पेमेंट 2020 के बाद होनी थी।

साथियों,

बीते 5-6 वर्षों में हमारी सरकार ने कांग्रेस सरकार के उस पाप को धोने का काम किया है, और इस धुलाई का खर्चा कम नहीं आया है, ऐसी लाँड्री आपने देखी नहीं होगी। 1 लाख 48 हज़ार करोड़ रुपए की जगह, देश को 3 लाख करोड़ रुपए से अधिक की पेमेंट करनी पड़ी क्योंकि इसमें ब्याज भी जुड़ गया था। यानी हमने करीब-करीब दोगुनी राशि चुकाने के लिए मजबूर हुए। आजकल कांग्रेस के जो नेता बयानों की मिसाइलें दाग रहे हैं, मिसाइल आई तो टीवी9 को मजा आएगा, उनकी इस विषय का जिक्र आते ही बोलती बंद हो जाती है।

साथियों,

पश्चिम एशिया में बनी परिस्थितियों पर मैंने आज लोकसभा में अपना वक्तव्य दिया है। दुनिया में जहां भी युद्ध हो रहे हैं, वो भारत की सीमा से दूर हैं। लेकिन आज की व्यवस्थाओं में कोई भी देश युद्धों से दुष्प्रभाव से दूर रहे, ऐसा संभव नहीं होता। अनेक देशों में तो स्थिति बहुत गंभीर हो चुकी है। और इन हालातों में हम देख रहे हैं कि राजनीतिक स्वार्थ से भरे कुछ लोग, कुछ दल, संकट के इस समय में भी अपने लिए राजनीतिक अवसर खोज रहे हैं। इसलिए मैं टीवी9 के मंच से फिर कहूंगा, यह समय संयम का है, संवेदनशीलता का है। हमने कोरोना महासंकट के दौरान भी देखा है, जब देशवासी एकजुट होकर संकट का सामना करते हैं, तो कितने सार्थक परिणाम आते हैं। इसी भाव के साथ हमें इस युद्ध से बनी परिस्थितियों का सामना करना है।

साथियों,

दुनिया की हर उथल-पुथल के बीच, भारत ने अपनी प्रगति की गति को भी बनाए रखा है। अगर मैं 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद, बीते 23 दिनों का ही ब्यौरा दूं, तो पूरब से पश्चिम तक, उत्तर से दक्षिण तक देश में हजारों करोड़ के डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स का काम हुआ है। दिल्ली मेट्रो रेल के महत्वपूर्ण कॉरिडोर्स का लोकार्पण, सिलचर का हाई स्पीड कॉरिडोर का शिलान्यास, कोटा में नए एयरपोर्ट का शिलान्यास, मदुरै एयरपोर्ट को इंटरनेशनल एयरपोर्ट का दर्जा देना, ऐसे अनेक काम बीते 23 दिनों में ही हुए हैं। बीते एक महीने के दौरान ही औद्योगिक विकास को गति देने के लिए भव्य स्कीम को मंजूरी दी गई है। इसके तहत देशभर में 100 plug-and-play industrial parks विकसित किए जाएंगे। देश में Small Hydro Power Development Scheme को भी हरी झंडी दी गई है। इससे आने वाले वर्षों में 1,500 मेगावाट नई hydro power capacity जोड़ी जाएगी। इसी दौरान जल जीवन मिशन को साल 2028 तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। किसानों के हित में भी अनेक बड़े निर्णय लिए गए हैं। बीते एक महीने में ही पीएम किसान सम्मान निधि के तहत 18 हजार करोड़ रुपए से अधिक सीधे किसानों के खातों में ट्रांसफर किए गए हैं। और जो हमारे MSMEs हैं, जो हमारे निर्यातक हैं, उनके लिए भी करीब 500 करोड़ रुपए के राहत पैकेज की भी घोषणा की गई है। यह सारे कदम इस बात का प्रमाण हैं कि विकसित भारत बनाने के लिए देश कितनी तेज गति से काम कर रहा है।

साथियों,

Management की दुनिया में एक सिद्धांत कहा जाता है - What gets measured, gets managed. लेकिन मैं इसमें एक बात और जोड़ना चाहता हूं, What gets measured, gets improved और ultimately, gets transformed. क्योंकि आकलन जागरूकता पैदा करता है। आकलन जवाबदेही तय करता है और सबसे महत्वपूर्ण आकलन संभावनाओं को जन्म देता है।

साथियों,

अगर आप 2014 से पहले के 10-11 साल और 2014 के बाद के 10-11 साल का आप आकलन करेंगे, तो यही पाएंगे कि कैसे इसी सिद्धांत पर चलते हुए, भारत ने हर सेक्टर को Transform किया है। जैसे पहले हाईवे बनते थे, करीब 11-12 किलोमीटर प्रति दिन की रफ्तार से, आज भारत करीब 30 किलोमीटर प्रतिदिन की स्पीड से हाईवे बना रहा है। पहले पोर्ट्स पर शिप का Turnaround Time, 5-6 दिन का होता था। आज वही काम, करीब-करीब 2 दिन से भी कम समय में पूरा हो रहा है। पहले Startup Culture के बारे में चर्चा ही नहीं होती थी। 2014 से पहले, हमारे देश में 400-500 स्टार्ट अप्स ही थे। आज भारत में 2 लाख से ज्यादा रजिस्ट्रर्ड स्टार्ट अप्स हैं। पहले मेडिकल education में सीटें भी सीमित थीं, करीब 50-55 हजार MBBS seats थीं, आज यह बढ़कर सवा लाख से ज्यादा हो चुकी हैं। पहले देश के Banking system से भी करोड़ों लोग बाहर थे। देश में सिर्फ 25 करोड़ के आसपास ही बैंक account थे। वहीं जनधन योजना के माध्यम से 55 करोड़ से ज्यादा बैंक अकाउंट खुले हैं। पहले हमारे देश में airports की संख्या भी 70 से कम थी। आज एयरपोर्ट्स की संख्या भी बढ़कर 160 से ज्यादा हो चुकी है।

साथियों,

पहले भी योजनाएं तो बनती थीं, लेकिन आज फर्क है, आज परिणाम दिखते हैं। पहले गति धीमी थी, आज भारत fastrack पर है। पहले संभावनाएं भी अंधकार में थीं, आज संकल्प सिद्धियों में बदल रहे हैं। इसलिए दुनिया को भी यह संदेश मिल रहा है कि यह नया भारत है। यह अपने विकास के लिए कोई कोर-कसर बाकी नहीं छोड़ रहा है।

साथियों,

आज हमारा प्रयास है कि अतीत में विकास का जो असंतुलन पैदा हो गया था, उसको अवसरों में बदला जाए। अब जैसे हमारा पूर्वी भारत है। हमारा पूर्वी भारत संसाधनों से समृद्ध है, दशकों तक वहां जिन्होंने सरकारें चलाई हैं, उनकी उपेक्षा ने पूर्वी भारत के विकास पर ब्रेक लगा दी थी। अब हालात बदल रहे हैं। जिस असम में कभी गोलियों की आवाज सुनाई देती थी, आज वहां सेमीकंडक्टर यूनिट बन रही है। ओडिशा में सेमीकंडक्टर से लेकर पेट्रोकेमिकल्स तक अनेक नए-नए सेक्टर का विकास हो रहा है। जिस बिहार में 6-7 दशक में गंगा जी पर एक बड़ा पुल बन पाया था एक, उस बिहार में पिछले एक दशक में 5 से ज्यादा नए पुल बनाए गए हैं। यूपी में कभी कट्टा मैन्युफैक्चरिंग की कहानियां कही जाती थीं, आज यूपी, मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग में दुनिया में अपनी पहचान बना रहा है।

साथियों,

पूर्वी भारत का एक और बड़ा राज्य पश्चिम बंगाल है। पश्चिम बंगाल, एक समय में भारत के कल्चर, एजुकेशन, इंडस्ट्री और ट्रेड का हब होता था। बीते 11 वर्षों में केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल के विकास के लिए बड़ी मात्रा में निवेश किया है। लेकिन दुर्भाग्य से, आज वहां एक ऐसी निर्मम सरकार है, जो विकास पर ब्रेक लगाकर बैठी है। TV9 बांग्ला के जो दर्शक हैं, वो जानते हैं कि बंगाल में आयुष्मान योजना पर निर्मम सरकार ने ब्रेक लगाया हुआ है। पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना पर ब्रेक लगाया हुआ है। पीएम आवास योजना पर ब्रेक लगाया हुआ है। चाय बागान श्रमिकों के लिए शुरू हुई योजना के लिए ब्रेक लगाया हुआ है। यानी विकास और जनकल्याण से ज्यादा प्राथमिकता निर्मम सरकार अपने राजनीतिक स्वार्थ को दे रही है।

साथियों,

देश में इस तरह की राजनीति की शुरुआत जिस दल ने की है, वो अपने गुनाहों से बच नहीं सकती और वो पार्टी है - कांग्रेस। कांग्रेस पार्टी की राजनीति का एक ही लक्ष्य रहा है, किसी भी तरह विकास का विरोध और कांग्रेस यह तब से कर रही है, जब मैं गुजरात में था। गुजरात में वर्षों तक जनता ने हमें आशीर्वाद दिया, तो कांग्रेस ने उस जनादेश को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने गुजरात की छवि पर सवाल उठाए, उसकी प्रगति को कटघरे में खड़ा किया और जब यही विश्वास पूरे देश में दिखाई दिया, तो कांग्रेस का विरोध भी रीजनल से नेशनल हो गया।

साथियों,

जब राजनीति में विरोध, विकास के विरोध में बदल जाए, जब आलोचना देश की उपलब्धियों पर सवाल उठाने लगे, तब यह सिर्फ सरकार का विरोध नहीं रह जाता, यह देश की प्रगति से असहज होने की मानसिकता बन जाती है। आज कांग्रेस इसी मानसिकता की गुलाम बन चुकी है। आज स्थिति यह है कि देश की हर सफलता पर प्रश्न उठाया जाता है, हर उपलब्धि में कमी खोजी जाती है और हर प्रयास के असफल होने की कामना की जाती है। कोविड के समय, देश ने अपनी वैक्सीन बनाई, तो कांग्रेस ने उस पर भी संदेह जताया। Make in India की बात हुई, तो कहा गया कि यह सफल नहीं होगा, बब्बर शेर कहकर इसका मजाक उड़ाया गया। जब देश में डिजिटल इंडिया अभियान शुरू हुआ, तो उसका मजाक उड़ाया गया। लेकिन हर बार यह कांग्रेस का दुर्भाग्य और देश का सौभाग्य रहा कि भारत ने हर चुनौती को सफलता में बदला। आज भारत दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीनेशन ड्राइव का उदाहरण है। भारत डिजिटल पेमेंट्स में दुनिया का अग्रणी देश है। भारत मैन्युफैक्चरिंग और स्टार्टअप्स में नई ऊंचाइयों को छू रहा है।

साथियों,

लोकतंत्र में विरोध जरूरी होता है। लेकिन विरोध और विद्वेष के बीच एक रेखा होती है। सरकार का विरोध करना लोकतांत्रिक अधिकार है। लेकिन देश को बदनाम करना, यह कांग्रेस की नीयत पर सवाल खड़ा करता है। जब विरोध इस स्तर तक पहुंच जाए कि देश की उपलब्धियां भी असहज करने लगें, तो यह राजनीति नहीं, यह दृष्टिकोण की समस्या है। अभी हमने ग्लोबल AI समिट में भी देखा है। जब पूरी दुनिया भारत में जुटी हुई थी, तो कांग्रेस के लोग कपड़े फाड़ने वहां पहुंच गए थे। इन लोगों को देश की इज्जत की कितनी परवाह है, यह इसी से पता चलता है। इसलिए आज आवश्यकता है कि देशहित को, दलहित से ऊपर रखा जाए क्योंकि अंत में राजनीति से ऊपर, राष्ट्र होता है, राष्ट्र का विकास होता है।

साथियों,

आज का यह दिन भी हमें यही प्रेरणा देता है। आज के ही दिन शहीद भगत सिंह, शहीद राजगुरु और शहीद सुखदेव ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया था। आज ही, समाजवादी आंदोलन के प्रखर आदर्श डॉ. राम मनोहर लोहिया जी की जयंती भी है। यह वो प्रेरणाएं हैं, जिन्होंने देश को हमेशा स्व से ऊपर रखा है। देशहित को सबसे ऊपर रखने की यही प्रेरणा, भारत को विकसित भारत बनाएगी। यही प्रेरणा भारत को आत्मनिर्भर बनाएगी। मुझे पूरा विश्वास है कि टीवी9 की यह समिट भी भारत के आत्मविश्वास और दुनिया के भरोसे पर, भारतीयों पर जो भरोसा है, उस भरोसे को और सशक्त करेगी। आप सभी को मेरी तरफ से बहुत-बहुत शुभकामनाएं हैं और आपके बीच आने का अवसर दिया, आप सबसे मिलने का मौका लिया, इसलिए बहुत-बहुत धन्यवाद!

नमस्‍कार!